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पन्ना में युवती की गोली मारकर हत्या, आरोपी और उसके पिता की ग्रामीणों ने की पिटाई

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जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल युवती को पन्ना जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रीवा ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।

*     गोली मारने के बाद चाकू से भी किया जानलेवा हमला

*    शौच के लिए गई थी युवती, रीवा ले जाते समय रास्ते में मौत

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मीपुर गांव में बुधवार 13 मई की सुबह हुई सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। गांव की 25 वर्षीय युवती पर एक सिरफिरे युवक ने कथित तौर पर पहले गोली चलाई और फिर चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिला चिकित्सालय से मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर की गई युवती की रास्ते में मृत्यु हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव और शोक का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह युवती घर के पीछे शौच के लिए गई थी। इसी दौरान गांव के ही युवक विनोद यादव ने उस पर हमला कर दिया। परिजनों का आरोप है कि आरोपी अपने साथ देसी कट्टा और चाकू लेकर पहुंचा था। युवती के भाई आकाश यादव ने बताया कि आरोपी ने पहले युवती पर गोली चलाई और बाद में चाकू से कई वार किए। इसके बाद उसने बंदूक की बट से भी युवती के साथ मारपीट की। चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। इस दौरान जब युवती का भाई उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा, तब आरोपी ने उस पर भी गोली चलाने का प्रयास किया, लेकिन गोली फायर नहीं हो सकी। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हालत बिगड़ी

गंभीर रूप से घायल युवती को तत्काल जिला चिकित्सालय पन्ना ले जाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और हालत नाजुक होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार, रीवा ले जाते समय रास्ते में ही युवती ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी विनोद यादव और उसके पिता भीकम उर्फ बच्चा यादव को पकड़ लिया। ग्रामीणों ने दोनों के साथ मारपीट की और कुछ समय तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को भीड़ से छुड़ाकर हिरासत में लिया।

प्रकरण दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

कोतवाली थाना प्रभारी रोहित मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी सहित उसके पिता से पूछताछ की जा रही है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। कुछ लोग इस घटना को कथित रुप से दबी जुबान एकतरफा प्रेम प्रसंग से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने पर मंथन, पन्ना में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने विषय पर आयोजित कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा उपयोगी जानकारी दी गई।

*        जल संरक्षण की पारंपरिक तकनीकों, जल गुणवत्ता परीक्षण और तालाब पुनर्जीवन पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

*        अजयगढ़ में फील्ड विजिट कर अधिकारियों को समझाए कंटूर ट्रेंच और परकोलेशन टैंक निर्माण के तरीके

*        वन क्षेत्रों में भूजल संवर्धन और जल संरचनाओं के वैज्ञानिक प्रबंधन पर हुआ प्रशिक्षण

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग पन्ना द्वारा “भूजल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वनों की उत्पादकता बढ़ाने” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन 7 मई 2026 को किया गया। कार्यशाला का आयोजन पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता स्थित व्याख्यान केन्द्र एवं अजयगढ़ क्षेत्र में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वन क्षेत्रों एवं नदी तटों में भूजल संरक्षण कार्यों की आवश्यकता, जल संरचनाओं के वैज्ञानिक निर्माण, रखरखाव तथा जल संवर्धन संबंधी तकनीकी जानकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान करना रहा।
कार्यशाला के प्रथम दिवस में विषय विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव ने भूजल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जल संरक्षण विशेषज्ञ अनुपम मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” का उल्लेख करते हुए पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों की उपयोगिता बताई तथा जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास प्रभावी एवं दीर्घकालीन बनाए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में बी. आर. फूकन (रिसर्चर) द्वारा “वन क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं की जल गुणवत्ता का आकलन” विषय पर जानकारी दी गई। उन्होंने जल गुणवत्ता परीक्षण की विभिन्न विधियों जैसे सैंपल कलेक्शन, पीएच स्तर जांच आदि के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही वन क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं एवं जलाशयों के प्रभावी प्रबंधन हेतु नियमित मॉनिटरिंग, वेस्ट मैनेजमेंट एवं कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम संचालित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।
इसी क्रम में सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक रवीन्द्र सिंह ने भूजल संरक्षण हेतु निर्मित की जाने वाली विभिन्न संरचनाओं जैसे कंटूर ट्रेंच, बंड्स एवं परकोलेशन टैंक आदि के निर्माण एवं उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में वृद्धि की जा सकती है, जिससे वन क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

तालाब पुनर्जीवन के तरीके बताए

कार्यशाला के द्वितीय दिवस में सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र में फील्ड विजिट किया गया। इस दौरान मौके पर निर्मित पारंपरिक तालाबों के पुनर्जीवन (रिजुविनेशन) के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई तथा नए परकोलेशन टैंक एवं तालाब निर्माण संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए। फील्ड भ्रमण के दौरान कंटूर ट्रेंच निर्माण से जुड़े तकनीकी बिंदुओं जैसे भूमि की ढाल, जल प्रवाह की दिशा एवं स्थल चयन पर विशेष ध्यान देने के संबंध में भी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई।

इनकी रही उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक छतरपुर वृत्त नरेश सिंह यादव, डीएफओ दक्षिण पन्ना अनुपम शर्मा, डीएफओ उत्तर पन्ना धीरेंद्र प्रताप सिंह, आईएफएस, उपवनमंडलाधिकारी विश्रामगंज अंशुल तिवारी, उपवनमंडलाधिकारी पन्ना कृष्णा मरावी, एसीएफ प्रशिक्षु प्रभांशु कमल मिश्रा, वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना अजय बाजपेयी, वन परिक्षेत्राधिकारी अजयगढ़ पंकज दुबे, वनपरिक्षेत्राधिकारी धरमपुर वैभव सिंह चंदेल, वनपरिक्षेत्राधिकारी विश्रामगंज नितिन राजौरिया, वनपरिक्षेत्राधिकारी देवेन्द्रनगर शुभम तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

PTR में अब सुरक्षित नहीं बाघ: 4 शावकों वाली बाघिन हादसे में गंभीर रूप से घायल, घटना को दबाने के आरोपों से घिरा प्रबंधन

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पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)

*        अज्ञात बोलेरो वाहन चालक ने शिकार की नियत से बाघिन को मारी ठोकर या फिर सड़क दुर्घटना

*        सूचना मिलने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे रेंजर, शावकों के भविष्य पर भी मंडराया संकट

*        एक माह में दो बाघों की मौत और कोर एरिया में वृद्ध का शव मिलने के बाद अब घायल बाघिन का मामला चर्चा में

*        कभी दुनिया के लिए मिसाल बना पन्ना, अब लापरवाही और मॉनिटरिंग फेल होने के लिए बदनाम

*        बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता पर खतरे के संकेत, मैदानी निगरानी पर उठ रहे तीखे सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) कभी बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के लिए दुनिया भर में चर्चा में रहा पन्ना टाइगर रिजर्व इन दिनों लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। एक माह के भीतर दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कोर एरिया में कई दिन पुराना अज्ञात वृद्ध का शव मिलने और अब अज्ञात बोलेरो वाहन चालक द्वारा कथित रूप से शिकार की नियत से मारी गई जानलेवा ठोकर में गंभीर रूप से घायल हुई बाघिन की घटना को दबाने के आरोपों ने पीटीआर की सुरक्षा एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
ताजा मामला पन्ना कोर क्षेत्र के राजाबरिया-अमझिरिया मार्ग का बताया जा रहा है। आरोप हैं कि 28 अप्रैल की रात एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने सड़क किनारे एक बाघिन (Tigress) को कथित रूप से शिकार की मंशा से सीधी ठोकर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाघिन सड़क किनारे पत्थरों के बीच जा गिरी और काफी देर तक घायल अवस्था में पड़ी रही। घटना की सूचना वन अमले द्वारा तुरंत वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट दी गई। लेकिन उन्होंने तत्परता से घेराबंदी कर वाहन को पकड़ने तथा घायल बाघिन को तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की प्रभावी कार्रवाई करना तो दूर मौके पर पहुंचना तक उचित नहीं समझा। रेंजर के निर्देश पर स्टॉफ ने मौके पर पहुंचकर घायल बाघिन को देखा। लेकिन जाट साहब अपने दायित्वों को तिलांजलि देते हुए सुबह मौके पर आने की बात कहकर सोने के लिए चले गए।
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)
सूत्रों के मुताबिक अगले दिन घटनास्थल से वाहन के टूटे हिस्से, पत्थर की खखरी पर जख्मी बाघिन के बाल और आसपास अन्य साक्ष्य मिले थे, जिन्हें रेंजर के इशारे पर मौके से हटा दिया गया। प्रकरण को दबाने के लिए घटना की सूचना पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई। न ही बाघिन को ढूंढने और उसका उपचार कराने के प्रयास किया गया। घटना की किसी को भनक न लगे इसलिए वन अपराध दर्ज करने और वाहन को पकड़ने की कार्रवाई भी जानबूझकर नहीं की गई। जबकि घटना स्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर अमझिरिया टोल नाका स्थित है, जहां पर यदि वाहनों के निकलने का उस समय का रिकार्ड यदि चेक किया जाता तो अवश्य ही अज्ञात बोलेरो वाहन का रजिस्ट्रेशन एवं वाहन मालिक/चालक का पता लगाया जा सकता था। और वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत शिकार के प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए थी। लेकिन रेंजर ने पूरी घटना को अपने स्तर पर दबा दिया। बताया जा रहा है कि बाघिन बाद में लंगड़ाते हुए देखी गई। चिंता की बात यह भी है कि उक्त बाघिन के चार छोटे शावक बताए जा रहे हैं, जो पूरी तरह मां पर निर्भर हैं। यदि बाघिन को कुछ भी होता है तो उस पर आश्रित चार बाघ शावकों का जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। विदित हो कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दो वनरक्षकों समेत 4-5 सुरक्षा श्रमिकों को थी जिससे रेंजर साहब का कारनामा उजागर हो गया।

लगातार घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
इस घटनाक्रम ने इसलिए भी गंभीरता बढ़ा दी है क्योंकि हाल के दिनों में पीटीआर में कई चिंताजनक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 मई को अमानगंज बफर क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पहले तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर कोर क्षेत्र में छोड़ा गया था। उससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब दो सप्ताह पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला उजागर हुआ।
पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
इन्हीं घटनाओं के बीच रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन पन्ना कोर रेंज के राजाबरिया जंगल में एक वृद्ध का शव पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। शव कई दिन पुराना बताया गया और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। सवाल यह उठा कि कथित तौर पर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक पहुंच गया और उसका शव चार दिन तक जंगल में लटका रहा, लेकिन निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।

शून्य से शिखर तक पहुंचा पन्ना

पन्ना टाइगर रिजर्व का इतिहास देश की सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण उपलब्धियों में गिना जाता है। वर्ष 2009 में यहां बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने बाघ पुनर्स्थापना योजना लागू की। दूसरे अभयारण्यों से लाए गए बाघ-बाघिनों की कड़ी सुरक्षा, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और मैदानी अमले की मेहनत से पन्ना ने अभूतपूर्व वापसी की। कुछ वर्षों में यहां बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर सौ के पार पहुंच गई और पन्ना दुनिया में सफल बाघ पुनर्स्थापना मॉडल के रूप में स्थापित हुआ। लेकिन अब हालिया घटनाओं, मौजूदा पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली को देखते हुए वन एवं वन्यजीवों पर मंडराता संकट लगातार बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

अब फिर उठने लगे पुराने सवाल

फाइल फोटो।
हालिया घटनाओं ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि कहीं वही पुरानी लापरवाहियां दोबारा तो नहीं लौट रहीं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सड़क हादसे में घायल बाघिन की सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई होती, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। अब जबकि मामला चर्चा में आया है, तब अंदरखाने हाथियों की मदद से बाघिन की तलाश और वाहन की पहचान के प्रयास शुरू किए गए हैं। हालांकि सवाल अब भी कायम हैं- यदि सूचना समय पर मिल गई थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या इतनी बड़ी घटना को छिपाने के आरोपों से घिरे रेंजर के विरुद्ध नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी या फिर बाघ की मौत होने के मामले की तरह आरोप पत्र जारी कर जांच की आड़ में प्रकरण को रफा-दफा कर दिया जाएगा? लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वास्तविक मॉनिटरिंग व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव संरक्षण की जिस ऐतिहासिक सफलता पर कभी पूरा देश गर्व करता था लेकिन उसके भविष्य को लेकर अब नई चिंताएं सामने आने लगी हैं।

इनका कहना है-

“घटना की सूचना न देना अक्षम्य अपराध है, पन्ना कोर के रेंजर को आरोप पत्र जारी करके उनके विरुद्ध तत्परता से सख्त एक्शन लिया जाएगा। आपको जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। घायल बाघिन को ढूंढने एवं आरोपी वाहन और चालक को पकड़ने के संबंध अभी कुछ जानकारी नहीं दे पाऊंगा।”

बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

PTR की मॉनिटरिंग फेल: न बाघ सुरक्षित, न इंसान; कोर एरिया में पेड़ पर लटका मिला वृद्ध का शव

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पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज अंतर्गत फांसी के फंदे पर लटके मिले अज्ञात वृद्ध के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद कोतवाली थाना पुलिस द्वारा मामले पर मर्ग कायम किया गया।

   महीने भर के अंदर दो बाघों की संदिग्ध मौत के बीच सामने आई हैरान करने वाली घटना

   कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन कोर क्षेत्र में मिली लाश, प्रबंधन के दावे कटघरे में

*    चार दिन तक जंगल में लटका रहा शव, किसी को भनक नहीं, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था क्या पूरी तरह चौपट हो चुकी है? रेडियो कॉलरधारी बाघ की संदिग्ध मौत के अगले ही दिन पार्क क्षेत्र में एक अप्रत्याशित घटना के सामने आने से यह सवाल उठ रहा है। बुधवार सुबह पन्ना कोर रेंज अंतर्गत राजाबरिया के जंगल में एक अज्ञात वृद्ध का शव पेड़ से फांसी के फंदे पर लटका मिला। हैरानी की बात यह है कि कथित कड़ी सुरक्षा वाले कोर एरिया में यह शव 3-4 दिन तक लटका रहा, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। हैरान करने वाली यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब महीने भर के अंदर पन्ना टाइगर रिजर्व में दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन के सुरक्षा और सतत मॉनिटरिंग के दावों की गंभीर पोल खोल दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार 6 मई की सुबह बीट गार्ड इंद्रजीत लोधी को राजाबरिया जंगल में एक पेड़ पर करीब 65 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में जबरदस्त हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची कोतवाली थाना पन्ना पुलिस टीम ने पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला मौजूद रहा।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
पुलिस के अनुसार शव की स्थिति बेहद खराब थी और उसमें कीड़े पड़ चुके थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वृद्ध की मौत 3 से 4 दिन पहले हो चुकी थी। आसपास के गांवों के ग्रामीणों और पंचायत सचिव जरधोवा को पहचान के लिए बुलाया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है।

लगातार घटनाओं से गहराए सवाल

तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही 5 मई को अमानगंज बफर रेंज के रमपुरा क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध हालात में मृत पाया गया था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पूर्व तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर के साथ कोर एरिया में छोड़ा गया था। इसके करीब पखवाड़े भर पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था, जिसकी जानकारी भी वन अमले को समय पर नहीं लग सकी थी।

सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न

फाइल फोटो।
ताजा घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा कर दिया है कि आखिर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक कैसे पहुंच गया और कई दिन तक वहां मौजूद रहा, फिर भी निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि पन्ना टाइगर रिजर्व में न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि अब इंसानी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कागजों में मजबूत दिखने वाली सुरक्षा व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है, यह हालिया घटनाओं ने उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इन गंभीर घटनाओं के बाद जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होती है या फिर मामले जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं।

इनका कहना है-

“पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अज्ञात वृद्ध व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर घटना स्थल का मुआयना किया। इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस द्वारा कार्यवाही की जा रही है। घटना की हम विभागीय जांच भी कराएंगे।”

बीरेन्द्र कुमार पटेल, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

पन्ना में एक और टाइगर की मौत: रेस्क्यू के सप्ताह भर बाद संदिग्ध हालात में मिला शव

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तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)

*        स्वस्थ घोषित कर कोर एरिया में छोड़ा गया था बाघ, अचानक मौत से पीटीआर प्रबंधन में हड़कंप

*       एक माह में दूसरी घटना, सुरक्षा और मॉनिटरिंग के दावों पर सवाल

*       पहले कंकाल, अब रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत- पीटीआर की निगरानी व्यवस्था कटघरे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। पखवाड़े भर पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से जबरदस्त हड़कंप मचा है। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा से रेस्क्यू किए गए दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

रेस्क्यू के बाद स्वस्थ बताया गया था

कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई थी। (फाइल फोटो)
तारा ग्राम में बाघ के प्रवेश और मवेशियों के शिकार से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था। हालात इतने बिगड़े कि वन अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने का प्रयास तक किया गया। इसके बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा जांच में उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और उसी दिन देर शाम उसे पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण हेतु छोड़ दिया गया था।

बाघ के गांव में घुसने से भड़का गुस्सा: पीटीआर के रेंजर और डिप्टी रेंजर को बंधक बनाने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

हफ्ते भर में मौत, उठे सवाल

रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है- क्या मॉनिटरिंग में चूक हुई, या बाघ की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया? फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

एक माह में दूसरी घटना

पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर बाघ की मौत की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मुख्य मार्ग से महज कुछ दूरी पर मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब 15 दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी जानकारी तक नहीं लग सकी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला सामने आया, जिसकी जांच एसटीएफ जबलपुर द्वारा की जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और सतत निगरानी के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ताजा मामले में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।

Breaking News: पन्ना टाइगर रिजर्व में मेल टाइगर की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद

इनका कहना है-

“तारा ग्राम से रेस्क्यू किए गए बाघ की आज सुबह मृत्यु होने की जानकारी मिली है, रेस्क्यू करने के बाद बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था और इसकी मदद से उसकी सतत मॉनिटरिंग की जा रही थी। बाघ की मृत्यु वन परिक्षेत्र अमानगंज बफर अंतर्गत हुई है। उसका शव पूर्णतः सुरक्षित है, आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई गई। विस्तृत जानकारी मैं मौके पर पहुंचकर घटनास्थल और शव का मुआयना करने के बाद दे पाऊंगा।”

बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

बाघ कंकाल मामला: बीटगार्ड निलंबित, वनपाल और रेंजर को आरोप पत्र जारी

वन विभाग में “जंगलराज”: ‘कोर्ट ने कहा- दंडित करो, विभाग ने दे दिया डबल प्रमोशन’

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फोटो-01 कैप्शन- कार्यालय वन संरक्षक वन वृत्त छतरपुर का भवन। (फाइल फोटो)

   16 साल पुराने आदेश पर अमल नहीं, दोषी बताए गए कर्मचारियों को मिली मनचाही पोस्टिंग

*      न्यायालय की टिप्पणी के बाद भी कार्रवाई शून्य, मुख्य लिपिक की भूमिका पर उठे सवाल

*      राज्यपाल, लोकायुक्त और मुख्य सचिव से शिकायत, छतरपुर से भोपाल तक हलचल

शादिक खान, पन्ना /छतरपुर।(www.radarnews.in) वन विभाग छतरपुर एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभाग पर न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर दोषी बताए गए कर्मचारियों को दंडित करने के बजाय पदोन्नति देने, संरक्षण प्रदान करने और वर्षों तक प्रकरण ठंडे बस्ते में डालकर रखने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर राज्यपाल, लोकायुक्त और प्रमुख सचिव वन विभाग से लिखित शिकायत की गई है, जिससे विभागीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मामला वन परिक्षेत्र बिजावर, वन मंडल छतरपुर के वन अपराध प्रकरण क्रमांक 168/7 दिनांक 04/07/2007 से जुड़ा है। आरोप है कि 3-4 जुलाई 2007 की दरम्यानी रात 118 सागौन वृक्षों की कटाई के मामले में तीन ग्रामीणों को नामजद कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, छतरपुर में दर्ज आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1484/07, संस्थित दिनांक 03/08/2007 की सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट छतरपुर ने दिनांक 25/03/2010 को निर्णय पारित करते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इतने बड़े पैमाने पर सागौन कटाई स्थानीय वन कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं प्रतीत होती। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने हेतु आदेश की प्रति प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल को भेजने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद न तो दोषी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई की गई और न ही निर्णय के विरुद्ध विभाग ने अपील दायर की। उल्टा जिन कर्मचारियों पर सवाल उठे, उन्हें समय-समय पर पदोन्नति देकर कार्यवाहक डिप्टी रेंजर और कार्यवाहक रेंजर जैसे पदों पर बैठाया गया। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। मामले में वन वृत्त छतरपुर के मुख्य लिपिक राघवेंद्र प्रसाद द्विवेदी की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सेवा अभिलेख और पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी होने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर संबंधित कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया। शिकायतकर्ताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच कर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। आरोप यह भी है कि जिन कर्मचारियों पर न्यायालय ने कार्रवाई योग्य टिप्पणी की, उन्हें मनचाही पोस्टिंग देकर उपकृत किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अदालत के आदेशों पर भी अमल नहीं होगा, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे।
शिकायतकर्ता शिशुपाल अहिरवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने तथा दिनांक 25/03/2010 के न्यायालयीन आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला है। अब नजर इस बात पर है कि शासन स्तर पर इस शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है और वर्षों पुराने इस विवाद में जवाबदेही तय होती है या नहीं।

दिनदहाड़े दरिंदगी: जंगल में नाबालिग से गैंगरेप, पीड़िता के दोस्त से लूटपाट

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प्रतीकात्मक चित्र।

  थाना ले जाने की धमकी देकर जंगल में नाबालिग के साथ की गई दरिंदगी

*       हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों से दहल उठा शांति का टापू

*        पन्ना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर उठे गंभीर सवाल, जनमानस में आक्रोश

     बढ़ते अपराधों को रोकने में नाकाम पुलिस ने दहला देने वाली घटना को दबाने साधी चुप्पी

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध तथा यौन हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। सुरक्षा के दावे, तमाम अभियान और सख्ती के आश्वासन बार-बार सवालों के घेरे में आते रहे हैं। आए दिन सामने आने वाली जघन्य घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बेटियों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच पन्ना जिले से सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं, जहां एक नाबालिग किशोरी को कथित रूप से जंगल में ले जाकर तीन अज्ञात आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। सप्ताह भर के अंदर धार्मिक स्थल में चोरी, हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों के सामने आने से शांति का टापू कहा जाने वाला पन्ना जिला पूरी तरह से दहल उठा है। सभ्य समाज को झकझोर देने वाली इन संगीन वारदातों को लेकर आमजन में भय और पुलिस के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।

पहले पीटा फिर की दरिंदगी

देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण के अनुसार बुधवार 29 अप्रैल 2026 को नाबालिग किशोरी अपने एक परिचित युवक से मिलने क्षेत्र में पहुंची थी। युवक अपने एक अन्य साथी के साथ मोटरसाइकिल से वहां आया था। बताया गया है कि तीनों कुछ देर के लिए क्षेत्र के एक सुनसान स्थान पर रुके थे, तभी दो मोटरसाइकिलों से तीन अज्ञात व्यक्ति वहां पहुंचे और विवाद करने लगे। आरोप है कि अज्ञात लोगों ने किशोरी के परिचित युवक पर दबाव बनाया कि युवती को उनके साथ जाने दिया जाए। युवक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और छोड़ देने की गुहार लगाई। इस दौरान उसने अपने पास रखी नकदी, मोबाइल फोन तथा चांदी की चेन भी उन्हें दे दी, लेकिन आरोपी नहीं माने। इसके बाद आरोपियों ने किशोरी, उसके परिचित युवक और उसके साथी को यह कहकर जबरन अपने कब्जे में लिया कि उन्हें थाने ले जाया जा रहा है।
भय और दबाव बनाकर तीनों को वाहनों सहित जंगल के भीतर सुनसान इलाके में ले जाया गया। वहां किशोरी के परिचित युवक और उसके साथी को अलग बैठाकर मारपीट की गई। युवक को पत्थर मारने का भी आरोप है। उधर एक आरोपी किशोरी को खींचकर घनी झाड़ियों की ओर ले गया। वह रोती-गिड़गिड़ाती रही कि मुझे छोड़ दो, मुझे घर जाने दो लेकिन कामांध दरिंदे को उस पर जरा भी रहम नहीं आया। आरोपी ने उसके कपड़े उतार दिए और फिर जबरन अपनी हवश का शिकार बनाया। इस तरह तीनों हैवानों ने बारी-बारी से नाबालिग के साथ दरिंदगी की। विरोध करने पर थप्पड़ मारने, चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने की बात भी शिकायत में कही गई है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

आरोपियों की सरगर्मी से तलाश जारी

नाबालिग युवती ने अपने दोस्त के साथ देवन्द्रनगर थाना पहुंचकर पुलिस को आपबीती सुनाई। घटना पर पुलिस ने पुलिस ने धारा 115(2), 137(2), 70(2), 351(3) बीएनएस एवं 5(g) 6 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया है। गैंगरेप पीड़िता को मेडिकल जांच एवं उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां तबीयत बिगड़ने पर वह बा-बार बेहोश हो रही थी। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए भर्ती कराया गया। पीड़िता के शरीर पर आए जख्म-खरोंच के निशान उसके साथ हुई दरिंदगी की गवाही दे रहे हैं। पीड़िता की हालत वर्तमान में सुधार होने की जानकारी मिली है। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि पुलिस टीमें सामूहिक बलात्कार की वारदात में शामिल तीनों अज्ञात आरोपियों की तलाश में सरगर्मी से जुटी हैं। बता दें कि, घटना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि के लिए पुलिस अधीक्षक पन्ना निवेदिता नायडू एवं देवेंद्रनगर थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव से संपर्क किया गया लेकिन उनका कोई जबाव नहीं आया।

दिनदहाड़े वारदात ने उड़ाई सुरक्षा दावों की धज्जियां

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अपराधी खुलेआम युवती और दो युवकों को रोककर पहले लूटपाट करें, फिर थाना ले जाने का भय दिखाकर जंगल में ले जाएं और वहां जघन्य वारदात को अंजाम दें, तो क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था आखिर किस हाल में है? यह घटना पुलिस गश्त और अपराध नियंत्रण के दावों पर सीधा प्रहार है। जिले में हत्या, लूट, चोरी और महिला अपराधों की घटनाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अपराधियों में कानून का भय पूरी तरह कमजोर पड़ रहा है। यदि सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई होती, तो दिनदहाड़े ऐसी दुस्साहसिक घटना संभव नहीं थी। विदित हो कि सप्ताह भर के अंदर जिले में सामने आई सनसनीखेज जघन्य घटनाओं ने जनमानस को हिलाकर रख दिया है। शांति का टापू कहलाने वाले पन्ना में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस से लोग जहां अत्यंत ही भयभीत हैं वहीं उनमें पुलिस के प्रति गुस्सा साफ़ देखा जा सकता है।

छोटी उपलब्धियों पर प्रचार, बड़ी घटना पर चुप्पी क्यों?

सामूहिक बलात्कार की शर्मसार करने वाली घटना के बाद पुलिस के सूचना तंत्र पर भी सवाल उठे हैं। पत्रकारों द्वारा घटना की आधिकारिक जानकारी के लिए लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों से संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने या फिर फोन रिसीव न करने की बातें सामने आईं। निचले स्तर के पुलिस अधिकारी जानकारी देने के लिए अधिकृत न होने का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जब छोटी-छोटी कार्रवाई पर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रचार में तत्परता दिखाई जाती है, तब ऐसी गंभीर घटनाओं पन्ना पुलिस पर चुप्पी क्यों साध लेती है? बढ़ते अपराधों की प्रभावी रोकथाम में बुरी तरह नाकाम पुलिस अब क्या घटनाओं को मीडिया में आने से रोकने-दबाने पर अपनी ऊर्जा लगाएगी? मीडिया को जानकारी देना क्या गंभीर घटनाओं पर जवाबदेही से बचने की कोशिश है? यह सवाल जनता और मीडिया दोनों पूछ रहे हैं।

मध्यप्रदेश: दो सगे भाइयों की हत्या में पिता-पुत्र को ‘फांसी की सजा’

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना, मध्य प्रदेश। (फाइल फोटो)

*       प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना का ऐतिहासिक फैसला

*       भूमि विवाद और पारिवारिक रंजिश में हुई वारदात, कोर्ट ने माना जघन्य अपराध

पन्ना।(www.radarnews.in) अपने दो सगे छोटे भाइयों की गोली मारकर हत्या तथा मां को घायल करने के बहुचर्चित मामले में पन्ना न्यायालय ने पिता-पुत्र को फांसी की सजा सुनाई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री सुरेन्द्र मेश्राम की अदालत ने दोनों आरोपियों चरन सिंह राजपूत एवं उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को हत्या, हत्या के प्रयास एवं आयुध अधिनियम की धाराओं में दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही दोनों अभियुक्तों को अर्थदण्ड से भी दंडित किया है।
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता के अनुसार घटना 27 मई 2023 की रात देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गोल्ही मुड़िया में हुई थी। परिवार में जन्मदिन कार्यक्रम के बाद घर के बाहर बैठे नरेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, महेश सिंह एवं उनकी मां फूलाबाई पर आरोपी चरन सिंह राजपूत और उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत ने कथित रूप से पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से नरेन्द्र सिंह और महेन्द्र सिंह की मौके पर मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव करने आई फूलाबाई घायल हो गई थीं। मामले की रिपोर्ट पर देवेन्द्रनगर थाना में हत्या, हत्या के प्रयास तथा आयुध अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध किया। न्यायालय ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए दोनों दोषियों चरन सिंह राजपूत एवं उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत मृत्युदंड तथा 50-50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा धारा 307/34 में 10-10 वर्ष का कठोर कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 27 आयुध अधिनियम में 3-3 वर्ष का कठोर कारावास व 2000/- रूपए जुर्माना, धारा 25 आयुध अधिनियम में 1-1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा तथा 1000/- रूपए का जुर्माना से दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी वरिष्ठ सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीराम यादव ने की।

बाघ के गांव में घुसने से भड़का गुस्सा: पीटीआर के रेंजर और डिप्टी रेंजर को बंधक बनाने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

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तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)

*        आबादी क्षेत्र में दो मवेशियों का शिकार करने के बाद तारा गांव में डटा रहा बाघ

*        रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पकड़े गए बाघ को पीटीआर के कोर क्षेत्र में छोड़ा 

*        पखवाड़े भर से तारा के आसपास बाघ की मौजूदगी को लेकर आक्रोशित थे ग्रामीण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या सौ के पार पहुंचने के बाद पार्क का मौजूदा क्षेत्रफल अब उनके लिए कम पड़ने लगा है। अपनी नई टेरिटरी स्थापित करने और भोजन की तलाश में बाघ लगातार जंगल की सीमा लांघकर आसपास के गांवों तक पहुंच रहे हैं। इसके चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही है, जबकि वन सीमा से लगे गांवों में भय, असुरक्षा और आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है। इसी बढ़ते तनाव की झलक विगत दिवस ग्राम तारा में देखने को मिली। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा में रविवार को आबादी क्षेत्र में बाघ घुसने और दो पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। भय और गुस्से से भरे ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों को घेर लिया तथा उन्हें बंधक बनाने का प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।
बताया गया है कि तारा ग्राम और आसपास के इलाके में एक नर बाघ पिछले करीब पखवाड़े भर से विचरण कर रहा था। इससे क्षेत्र में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि पन्ना टाइगर रिजर्व से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे बाघों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में रविवार 26 अप्रैल की सुबह जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव में एक नर बाघ घुस आया है और उसने दो मवेशियों को मार डाला है, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और हाथियों की मदद से बाघ को वापस जंगल क्षेत्र की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन करीब दो वर्षीय बाघ आबादी क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। इस बीच ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने वनपाल सीलन कुमार प्रजापति को घेर लिया और कहा कि जब तक बाघ गांव से नहीं हटेगा, अधिकारी भी नहीं जा सकेंगे। बाद में मौके पर पहुंचे अमानगंज बफर रेंजर मयंक शर्मा को भी भीड़ ने घेर लिया तथा रस्सी से बांधकर रोकने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद लोगों की समझाइश पर स्थिति कुछ देर बाद रेंजर को छोड़ दिया।

बड़े स्तर पर चलाया रेस्क्यू अभियान

कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई।
घटना की सूचना पर पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव, उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के तीव्र आक्रोश और बिगड़ते हालात को देखते हुए नर बाघ को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) कर पकड़ने की अनुमति ली गई। इसके बाद अतिरिक्त वन अमला बुलाया गया और छह हाथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहनाया और पिंजरे में बंद कर पन्ना टाइगर रिजर्व ले जाया गया। देर शाम उसे कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ दिया गया।

पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण

घटना के अगले दिन अमानगंज रेंजर मयंक शर्मा की शिकायत पर थाना अमानगंज में शासकीय कार्य में बाधा, धमकी तथा शासकीय कर्मचारियों को बंधक बनाने के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। थाना प्रभारी अमानगंज रवि जादौन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों कुन्जीलाल कुशवाहा (55) और रामरूप कुशवाहा (40), निवासी ग्राम तारा, को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

पुराने हादसों से भी बढ़ा रोष

जरधोवा गांव के समीप घटनास्थल पर पड़े आदिवासी बालक के धड़ एवं सिर को देखते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण। (फाइल फोटो)
विदित हो कि इससे पहले भी पन्ना टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में वन्यजीव हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ माह पूर्व जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक बालक को शिकार बनाया था, जबकि हिनौता क्षेत्र में एक वृद्ध महिला पर बाघों ने हमला कर जान ले ली थी। इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में लंबे समय से असुरक्षा और नाराजगी बनी हुई है। आमचर्चा है, युवा बाघ के पखवाड़े भर तारा समेत आसपास के आबादी क्षेत्र में विचरण करने, पालतू मवेशियों को शिकार बनाने एवं लगातार बढ़ते भय-असुरक्षा के मद्देनजर पीटीआर प्रबंधन (Panna Tiger Reserve Management) द्वारा कथित तौर ठोस प्रबंध न करने से ग्रामीण भड़क उठे। और कानून को अपने हाथ में लेते हुए वन अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की गई।

पत्रकारों का उग्र प्रदर्शन: पुलिस-माफिया गठजोड़ की निकाली अर्थी, ‘एसपी हटाओ-छतरपुर बचाओ’ के नारों से गूंजा शहर

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*       पत्रकार पर जानलेवा हमला और फर्जी प्रकरण दर्ज करने से भड़का आक्रोश, खाकी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

शादिक खान, पन्ना/छतरपुर।(www.radarnews.in) छतरपुर जिले के बिजावर निवासी पत्रकार राकेश राय पर हुए जानलेवा हमले के बाद उन्हीं पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने और पूरे घटनाक्रम में पुलिस की संदिग्ध भूमिका के विरोध में सोमवार को छतरपुर की सड़कों पर पत्रकारों का अभूतपूर्व आक्रोश फूट पड़ा। जिले भर से जुटे पत्रकारों, संपादकों, वरिष्ठ मीडियाकर्मियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने इसे केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की सुनियोजित कोशिश बताया। सर्किट हाउस से शुरू हुआ यह उग्र विरोध मार्च जल्द ही जनआक्रोश में बदल गया। हाथों में तख्तियां, मुंह पर विरोध के बुलंद नारे और कंधों पर पुलिस-माफिया गठजोड़ की प्रतीकात्मक अर्थी लेकर पत्रकारों ने शहर में मार्च निकाला। “एसपी हटाओ, छतरपुर बचाओ”, “पुलिस अधीक्षक मुर्दाबाद”, “पत्रकारों पर हमला बंद करो” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
प्रदर्शनकारी पत्रकारों का आरोप था कि जिले में सच लिखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। दबंगों, माफिया तत्वों और रसूखदारों के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर हमले कराए जा रहे हैं, फिर उन्हीं पीड़ित पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए पत्रकारों ने कहा कि यदि कलम को डराकर चुप कराया गया, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा।

एसपी कार्यालय का घेराव, सड़क पर चक्काजाम

पत्रकारों का हुजूम पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी की। आरोप है कि काफी देर तक इंतजार के बाद भी पुलिस अधीक्षक बाहर नहीं आए, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच यह सूचना मिली कि मामले से जुड़ा शराब ठेकेदार एसपी कार्यालय के भीतर मौजूद है। इस खबर ने विरोध को और भड़का दिया।इसके बाद पत्रकारों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। शहर की प्रमुख सड़क पर यातायात थम गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में खाकी और माफिया के बीच खतरनाक सांठगांठ ने कानून व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अवैध कारोबार, दबंगई और पत्रकारों पर हमलों के मामलों में कार्रवाई के बजाय संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए गए। पत्रकारों ने कहा कि यदि सत्ता और सिस्टम का इस्तेमाल सच दबाने में होगा, तो जनता का भरोसा टूटेगा।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि- पत्रकार राकेश राय पर दर्ज फर्जी प्रकरण तत्काल वापस लिया जाए। पत्रकार पर हमला करने वालों पर हत्या के प्रयास, लूट और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो। संबंधित थाना प्रभारी सुरेन्द्र मरकाम एवं जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो। शराब माफिया और पुलिस संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए। पत्रकारों ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन जिला स्तर से निकलकर प्रदेशव्यापी रूप लेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष है।