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दिनदहाड़े दरिंदगी: जंगल में नाबालिग से गैंगरेप, पीड़िता के दोस्त से लूटपाट

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प्रतीकात्मक चित्र।

  थाना ले जाने की धमकी देकर जंगल में नाबालिग के साथ की गई दरिंदगी

*       हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों से दहल उठा शांति का टापू

*        पन्ना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर उठे गंभीर सवाल, जनमानस में आक्रोश

     बढ़ते अपराधों को रोकने में नाकाम पुलिस ने दहला देने वाली घटना को दबाने साधी चुप्पी

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध तथा यौन हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। सुरक्षा के दावे, तमाम अभियान और सख्ती के आश्वासन बार-बार सवालों के घेरे में आते रहे हैं। आए दिन सामने आने वाली जघन्य घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बेटियों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच पन्ना जिले से सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं, जहां एक नाबालिग किशोरी को कथित रूप से जंगल में ले जाकर तीन अज्ञात आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। सप्ताह भर के अंदर धार्मिक स्थल में चोरी, हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों के सामने आने से शांति का टापू कहा जाने वाला पन्ना जिला पूरी तरह से दहल उठा है। सभ्य समाज को झकझोर देने वाली इन संगीन वारदातों को लेकर आमजन में भय और पुलिस के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।

पहले पीटा फिर की दरिंदगी

देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण के अनुसार बुधवार 29 अप्रैल 2026 को नाबालिग किशोरी अपने एक परिचित युवक से मिलने क्षेत्र में पहुंची थी। युवक अपने एक अन्य साथी के साथ मोटरसाइकिल से वहां आया था। बताया गया है कि तीनों कुछ देर के लिए क्षेत्र के एक सुनसान स्थान पर रुके थे, तभी दो मोटरसाइकिलों से तीन अज्ञात व्यक्ति वहां पहुंचे और विवाद करने लगे। आरोप है कि अज्ञात लोगों ने किशोरी के परिचित युवक पर दबाव बनाया कि युवती को उनके साथ जाने दिया जाए। युवक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और छोड़ देने की गुहार लगाई। इस दौरान उसने अपने पास रखी नकदी, मोबाइल फोन तथा चांदी की चेन भी उन्हें दे दी, लेकिन आरोपी नहीं माने। इसके बाद आरोपियों ने किशोरी, उसके परिचित युवक और उसके साथी को यह कहकर जबरन अपने कब्जे में लिया कि उन्हें थाने ले जाया जा रहा है।
भय और दबाव बनाकर तीनों को वाहनों सहित जंगल के भीतर सुनसान इलाके में ले जाया गया। वहां किशोरी के परिचित युवक और उसके साथी को अलग बैठाकर मारपीट की गई। युवक को पत्थर मारने का भी आरोप है। उधर एक आरोपी किशोरी को खींचकर घनी झाड़ियों की ओर ले गया। वह रोती-गिड़गिड़ाती रही कि मुझे छोड़ दो, मुझे घर जाने दो लेकिन कामांध दरिंदे को उस पर जरा भी रहम नहीं आया। आरोपी ने उसके कपड़े उतार दिए और फिर जबरन अपनी हवश का शिकार बनाया। इस तरह तीनों हैवानों ने बारी-बारी से नाबालिग के साथ दरिंदगी की। विरोध करने पर थप्पड़ मारने, चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने की बात भी शिकायत में कही गई है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

आरोपियों की सरगर्मी से तलाश जारी

नाबालिग युवती ने अपने दोस्त के साथ देवन्द्रनगर थाना पहुंचकर पुलिस को आपबीती सुनाई। घटना पर पुलिस ने पुलिस ने धारा 115(2), 137(2), 70(2), 351(3) बीएनएस एवं 5(g) 6 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया है। गैंगरेप पीड़िता को मेडिकल जांच एवं उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां तबीयत बिगड़ने पर वह बा-बार बेहोश हो रही थी। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए भर्ती कराया गया। पीड़िता के शरीर पर आए जख्म-खरोंच के निशान उसके साथ हुई दरिंदगी की गवाही दे रहे हैं। पीड़िता की हालत वर्तमान में सुधार होने की जानकारी मिली है। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि पुलिस टीमें सामूहिक बलात्कार की वारदात में शामिल तीनों अज्ञात आरोपियों की तलाश में सरगर्मी से जुटी हैं। बता दें कि, घटना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि के लिए पुलिस अधीक्षक पन्ना निवेदिता नायडू एवं देवेंद्रनगर थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव से संपर्क किया गया लेकिन उनका कोई जबाव नहीं आया।

दिनदहाड़े वारदात ने उड़ाई सुरक्षा दावों की धज्जियां

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अपराधी खुलेआम युवती और दो युवकों को रोककर पहले लूटपाट करें, फिर थाना ले जाने का भय दिखाकर जंगल में ले जाएं और वहां जघन्य वारदात को अंजाम दें, तो क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था आखिर किस हाल में है? यह घटना पुलिस गश्त और अपराध नियंत्रण के दावों पर सीधा प्रहार है। जिले में हत्या, लूट, चोरी और महिला अपराधों की घटनाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अपराधियों में कानून का भय पूरी तरह कमजोर पड़ रहा है। यदि सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई होती, तो दिनदहाड़े ऐसी दुस्साहसिक घटना संभव नहीं थी। विदित हो कि सप्ताह भर के अंदर जिले में सामने आई सनसनीखेज जघन्य घटनाओं ने जनमानस को हिलाकर रख दिया है। शांति का टापू कहलाने वाले पन्ना में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस से लोग जहां अत्यंत ही भयभीत हैं वहीं उनमें पुलिस के प्रति गुस्सा साफ़ देखा जा सकता है।

छोटी उपलब्धियों पर प्रचार, बड़ी घटना पर चुप्पी क्यों?

सामूहिक बलात्कार की शर्मसार करने वाली घटना के बाद पुलिस के सूचना तंत्र पर भी सवाल उठे हैं। पत्रकारों द्वारा घटना की आधिकारिक जानकारी के लिए लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों से संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने या फिर फोन रिसीव न करने की बातें सामने आईं। निचले स्तर के पुलिस अधिकारी जानकारी देने के लिए अधिकृत न होने का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जब छोटी-छोटी कार्रवाई पर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रचार में तत्परता दिखाई जाती है, तब ऐसी गंभीर घटनाओं पन्ना पुलिस पर चुप्पी क्यों साध लेती है? बढ़ते अपराधों की प्रभावी रोकथाम में बुरी तरह नाकाम पुलिस अब क्या घटनाओं को मीडिया में आने से रोकने-दबाने पर अपनी ऊर्जा लगाएगी? मीडिया को जानकारी देना क्या गंभीर घटनाओं पर जवाबदेही से बचने की कोशिश है? यह सवाल जनता और मीडिया दोनों पूछ रहे हैं।

मध्यप्रदेश: दो सगे भाइयों की हत्या में पिता-पुत्र को ‘फांसी की सजा’

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जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना, मध्य प्रदेश। (फाइल फोटो)

*       प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना का ऐतिहासिक फैसला

*       भूमि विवाद और पारिवारिक रंजिश में हुई वारदात, कोर्ट ने माना जघन्य अपराध

पन्ना।(www.radarnews.in) अपने दो सगे छोटे भाइयों की गोली मारकर हत्या तथा मां को घायल करने के बहुचर्चित मामले में पन्ना न्यायालय ने पिता-पुत्र को फांसी की सजा सुनाई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री सुरेन्द्र मेश्राम की अदालत ने दोनों आरोपियों चरन सिंह राजपूत एवं उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को हत्या, हत्या के प्रयास एवं आयुध अधिनियम की धाराओं में दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही दोनों अभियुक्तों को अर्थदण्ड से भी दंडित किया है।
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता के अनुसार घटना 27 मई 2023 की रात देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गोल्ही मुड़िया में हुई थी। परिवार में जन्मदिन कार्यक्रम के बाद घर के बाहर बैठे नरेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, महेश सिंह एवं उनकी मां फूलाबाई पर आरोपी चरन सिंह राजपूत और उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत ने कथित रूप से पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से नरेन्द्र सिंह और महेन्द्र सिंह की मौके पर मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव करने आई फूलाबाई घायल हो गई थीं। मामले की रिपोर्ट पर देवेन्द्रनगर थाना में हत्या, हत्या के प्रयास तथा आयुध अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध किया। न्यायालय ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए दोनों दोषियों चरन सिंह राजपूत एवं उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत मृत्युदंड तथा 50-50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा धारा 307/34 में 10-10 वर्ष का कठोर कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 27 आयुध अधिनियम में 3-3 वर्ष का कठोर कारावास व 2000/- रूपए जुर्माना, धारा 25 आयुध अधिनियम में 1-1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा तथा 1000/- रूपए का जुर्माना से दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी वरिष्ठ सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीराम यादव ने की।

बाघ के गांव में घुसने से भड़का गुस्सा: पीटीआर के रेंजर और डिप्टी रेंजर को बंधक बनाने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

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तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)

*        आबादी क्षेत्र में दो मवेशियों का शिकार करने के बाद तारा गांव में डटा रहा बाघ

*        रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पकड़े गए बाघ को पीटीआर के कोर क्षेत्र में छोड़ा 

*        पखवाड़े भर से तारा के आसपास बाघ की मौजूदगी को लेकर आक्रोशित थे ग्रामीण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या सौ के पार पहुंचने के बाद पार्क का मौजूदा क्षेत्रफल अब उनके लिए कम पड़ने लगा है। अपनी नई टेरिटरी स्थापित करने और भोजन की तलाश में बाघ लगातार जंगल की सीमा लांघकर आसपास के गांवों तक पहुंच रहे हैं। इसके चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही है, जबकि वन सीमा से लगे गांवों में भय, असुरक्षा और आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है। इसी बढ़ते तनाव की झलक विगत दिवस ग्राम तारा में देखने को मिली। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा में रविवार को आबादी क्षेत्र में बाघ घुसने और दो पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। भय और गुस्से से भरे ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों को घेर लिया तथा उन्हें बंधक बनाने का प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।
बताया गया है कि तारा ग्राम और आसपास के इलाके में एक नर बाघ पिछले करीब पखवाड़े भर से विचरण कर रहा था। इससे क्षेत्र में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि पन्ना टाइगर रिजर्व से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे बाघों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में रविवार 26 अप्रैल की सुबह जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव में एक नर बाघ घुस आया है और उसने दो मवेशियों को मार डाला है, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और हाथियों की मदद से बाघ को वापस जंगल क्षेत्र की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन करीब दो वर्षीय बाघ आबादी क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। इस बीच ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने वनपाल सीलन कुमार प्रजापति को घेर लिया और कहा कि जब तक बाघ गांव से नहीं हटेगा, अधिकारी भी नहीं जा सकेंगे। बाद में मौके पर पहुंचे अमानगंज बफर रेंजर मयंक शर्मा को भी भीड़ ने घेर लिया तथा रस्सी से बांधकर रोकने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद लोगों की समझाइश पर स्थिति कुछ देर बाद रेंजर को छोड़ दिया।

बड़े स्तर पर चलाया रेस्क्यू अभियान

कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई।
घटना की सूचना पर पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव, उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के तीव्र आक्रोश और बिगड़ते हालात को देखते हुए नर बाघ को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) कर पकड़ने की अनुमति ली गई। इसके बाद अतिरिक्त वन अमला बुलाया गया और छह हाथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहनाया और पिंजरे में बंद कर पन्ना टाइगर रिजर्व ले जाया गया। देर शाम उसे कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ दिया गया।

पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण

घटना के अगले दिन अमानगंज रेंजर मयंक शर्मा की शिकायत पर थाना अमानगंज में शासकीय कार्य में बाधा, धमकी तथा शासकीय कर्मचारियों को बंधक बनाने के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। थाना प्रभारी अमानगंज रवि जादौन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों कुन्जीलाल कुशवाहा (55) और रामरूप कुशवाहा (40), निवासी ग्राम तारा, को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

पुराने हादसों से भी बढ़ा रोष

जरधोवा गांव के समीप घटनास्थल पर पड़े आदिवासी बालक के धड़ एवं सिर को देखते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण। (फाइल फोटो)
विदित हो कि इससे पहले भी पन्ना टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में वन्यजीव हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ माह पूर्व जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक बालक को शिकार बनाया था, जबकि हिनौता क्षेत्र में एक वृद्ध महिला पर बाघों ने हमला कर जान ले ली थी। इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में लंबे समय से असुरक्षा और नाराजगी बनी हुई है। आमचर्चा है, युवा बाघ के पखवाड़े भर तारा समेत आसपास के आबादी क्षेत्र में विचरण करने, पालतू मवेशियों को शिकार बनाने एवं लगातार बढ़ते भय-असुरक्षा के मद्देनजर पीटीआर प्रबंधन (Panna Tiger Reserve Management) द्वारा कथित तौर ठोस प्रबंध न करने से ग्रामीण भड़क उठे। और कानून को अपने हाथ में लेते हुए वन अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की गई।

पत्रकारों का उग्र प्रदर्शन: पुलिस-माफिया गठजोड़ की निकाली अर्थी, ‘एसपी हटाओ-छतरपुर बचाओ’ के नारों से गूंजा शहर

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*       पत्रकार पर जानलेवा हमला और फर्जी प्रकरण दर्ज करने से भड़का आक्रोश, खाकी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

शादिक खान, पन्ना/छतरपुर।(www.radarnews.in) छतरपुर जिले के बिजावर निवासी पत्रकार राकेश राय पर हुए जानलेवा हमले के बाद उन्हीं पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने और पूरे घटनाक्रम में पुलिस की संदिग्ध भूमिका के विरोध में सोमवार को छतरपुर की सड़कों पर पत्रकारों का अभूतपूर्व आक्रोश फूट पड़ा। जिले भर से जुटे पत्रकारों, संपादकों, वरिष्ठ मीडियाकर्मियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने इसे केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की सुनियोजित कोशिश बताया। सर्किट हाउस से शुरू हुआ यह उग्र विरोध मार्च जल्द ही जनआक्रोश में बदल गया। हाथों में तख्तियां, मुंह पर विरोध के बुलंद नारे और कंधों पर पुलिस-माफिया गठजोड़ की प्रतीकात्मक अर्थी लेकर पत्रकारों ने शहर में मार्च निकाला। “एसपी हटाओ, छतरपुर बचाओ”, “पुलिस अधीक्षक मुर्दाबाद”, “पत्रकारों पर हमला बंद करो” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
प्रदर्शनकारी पत्रकारों का आरोप था कि जिले में सच लिखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। दबंगों, माफिया तत्वों और रसूखदारों के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर हमले कराए जा रहे हैं, फिर उन्हीं पीड़ित पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए पत्रकारों ने कहा कि यदि कलम को डराकर चुप कराया गया, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा।

एसपी कार्यालय का घेराव, सड़क पर चक्काजाम

पत्रकारों का हुजूम पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी की। आरोप है कि काफी देर तक इंतजार के बाद भी पुलिस अधीक्षक बाहर नहीं आए, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच यह सूचना मिली कि मामले से जुड़ा शराब ठेकेदार एसपी कार्यालय के भीतर मौजूद है। इस खबर ने विरोध को और भड़का दिया।इसके बाद पत्रकारों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। शहर की प्रमुख सड़क पर यातायात थम गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में खाकी और माफिया के बीच खतरनाक सांठगांठ ने कानून व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अवैध कारोबार, दबंगई और पत्रकारों पर हमलों के मामलों में कार्रवाई के बजाय संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए गए। पत्रकारों ने कहा कि यदि सत्ता और सिस्टम का इस्तेमाल सच दबाने में होगा, तो जनता का भरोसा टूटेगा।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि- पत्रकार राकेश राय पर दर्ज फर्जी प्रकरण तत्काल वापस लिया जाए। पत्रकार पर हमला करने वालों पर हत्या के प्रयास, लूट और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो। संबंधित थाना प्रभारी सुरेन्द्र मरकाम एवं जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो। शराब माफिया और पुलिस संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए। पत्रकारों ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन जिला स्तर से निकलकर प्रदेशव्यापी रूप लेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष है।

दुस्साहस! महिला से चाकू की नोक पर चेन लूटी, बाइक सवार बदमाश फरार

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चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम देने के बाद बाइक से फरार होते बदमाशों के फुटेज निजी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए।

     जेल तिराहा के समीप शाम के समय वारदात को दिया अंजाम

*       बंद पड़े सरकारी सीसीटीव्ही कैमरे बने शोपीस

*       पन्ना में बढ़ते अपराधों के बीच सुरक्षा व्यवस्था बेनकाब

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) शहर में अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है और पुलिस व्यवस्था सवालों के घेरे में है। एक बार फिर महिला सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरुषोत्तमपुर जगन्नाथ कॉलोनी में एक महिला से चाकू की नोक पर सोने की चेन लूट लिए जाने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। लूटी गई चेन की कीमत 3 लाख रुपए बताई जा रही है। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे बंद पड़े शासकीय सीसीटीवी कैमरों की लापरवाही भी उजागर कर दी है।
जानकारी के अनुसार स्वाती तिवारी रोजाना की तरह शाम को टहलने के बाद रघुलीला गार्डन के पास स्थित पेट्रोल पंप से अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान पीछे से बाइक पर सवार दो अज्ञात बदमाश पहुंचे और महिला के गले पर चाकू अड़ाकर उसकी सोने की चेन छीन ली। वारदात को अंजाम देकर आरोपी अजयगढ़ चौराहे की ओर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़िता ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी, जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। कोतवाली थाना की सब-इंस्पेक्टर मनोरमा मौर्य ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास लगे निजी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन आरोपियों के चेहरे स्पष्ट नहीं दिख पाए।
चेन स्नेचिंग वारदात की पीड़िता स्वाती तिवारी ने सोमवार को अपने भाई के साथ पुलिस अधीक्षक से भेंट कर अज्ञात बदमाशों की शिनाख्त कर कार्रवाई की मांग की।
इस बीच सबसे बड़ा सवाल शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो गया है। पीड़िता के भाई अजय तिवारी ने आरोप लगाया कि नगर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की ओर से लगाए गए शासकीय सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं। यदि ये कैमरे चालू हालत में होते तो आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान हो सकती थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए कैमरे अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। जिन कैमरों का उद्देश्य अपराध रोकना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और घटनाओं की त्वरित जांच में मदद करना था, वे बंद पड़े होने से अपराधियों को खुला संरक्षण मिल रहा है।
शहर में लगातार चेन स्नेचिंग, लूट और महिलाओं से जुड़ी वारदातें बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा के दावे जमीन पर खोखले साबित हो रहे हैं। प्रमुख चौराहों पर कैमरे बंद होना जन सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है। यदि पुलिस निगरानी तंत्र सक्रिय रहता तो अपराधियों में इतना दुस्साहस नहीं होता कि वे महिला के गले पर चाकू रखकर बीच शहर में वारदात कर फरार हो जाएं। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है, लेकिन जनता पूछ रही है कि जब सुरक्षा के सबसे बड़े साधन ही बंद पड़े हों, तब अपराधियों पर लगाम कैसे लगेगी? यह घटना केवल लूट नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है।

बाघ कंकाल मामला: बीटगार्ड निलंबित, वनपाल और रेंजर को आरोप पत्र जारी

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पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)

*       एसटीएफ और पीटीआर द्वारा की जा रही बाघ की मौत के कारणों की गहन जांच

*        15 दिन तक सड़ता रहा बाघ का शव, निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिलने के मामले ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को प्रथम दृष्टया मैदानी अमले की लापरवाही मानते हुए प्रबंधन ने सख्त कार्रवाई की है। बीटगार्ड कटरिया रामसफल बैगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि कार्यवाहक वनपाल एवं सर्किल प्रभारी बकचुर कमल किशोर मोची और परिक्षेत्राधिकारी गंगऊ अभ्यारण सागर शुक्ला को आरोप पत्र जारी कर जवाब तलब किया है। मामले में पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) प्रबंधन ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जबलपुर से विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम भी इस घटना के आपराधिक पहलुओं की गहन पड़ताल में जुटी हुई है।
मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को मझगवां-हिनौता मुख्य मार्ग से महज 150 फुट दूरी पर, गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत बीट कटरिया के वन कक्ष क्रमांक-278 में नर बाघ (Male Tiger) का क्षत-विक्षत शव मिला था। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बाघ की मौत 10 से 15 दिन पहले हो चुकी थी, जिससे शव पूरी तरह कंकाल में तब्दील हो गया था। इस घटना के सामने आने के बाद पीटीआर प्रबंधन को न सिर्फ कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उसकी सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चिंताजनक एवं विचारणीय पहलू यह है कि हिनौता स्थित पार्क के प्रवेश द्वार तक जाने वाले मार्ग किनारे जंगल में बाघ का शव कई दिनों तक सड़ता रहा, लेकिन वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि इसी मार्ग से पार्क के अधिकारी-कर्मचारी दिन में कई बार आवागमन करते हैं। इस लापरवाही ने निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
पार्क में लागू एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) ऐप आधारित गश्त और मॉनिटरिंग सिस्टम के बावजूद ऐसी घटना सामने आना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सूत्र बताते हैं, पीटीआर (Panna Tiger Reserve) के मौजूदा वरिष्ठ अधिकारियों का फोकस वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा न होकर अपने आर्थिक हित साधने पर है। नतीजतन प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी निगरानी व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। नर बाघ की संदिग्ध मौत समेत पूर्व में घटित अन्य घटनाएं इस बात प्रमाण है।

रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज?

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार बाघ की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक भोपाल समीता राजौरा ने एसटीएफ (STF) को जांच के निर्देश दिए थे। टीम ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। अब पूरे मामले में सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी।

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Breaking News: पन्ना टाइगर रिजर्व में मेल टाइगर की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद

Breaking News: पन्ना टाइगर रिजर्व में मेल टाइगर की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद

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फाइल फोटो।

*         बाघ की मौत ने पार्क की गश्त और निगरानी व्यवस्था की खोली पोल

*        मुख्य मार्ग से 100 मीटर दूर जंगल में 10 दिन तक सड़ता रहा शव, सोता रहा पार्क प्रबंधन

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में आज सुबह एक नर बाघ का शव मिला है। शव कंकाल की स्थिति में मिलने से बाघ की मौत लगभग 10 दिन पूर्व होने का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रथम दृष्ट्या बाघ की मौत संदिग्ध परिस्थतियों में होना प्रतीत होता है। घटना पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत आने वाली कटरिया बीट के वन कक्ष क्रमांक पी-278 की है। रेंजर गंगऊ अभ्यारण सागर शुक्ला सुबह से ही वन अमले के साथ मौके पर मौजूद हैं। क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव एवं उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल को घटना की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन सुबह 10 बजे तक दोनों ही वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे थे। एक स्थानीय व्यक्ति ने जानकारी देते हुए बताया कि, बाघ की मौत मनौर-मझगवां (हिनौता) मुख्य मार्ग से महज 100 मीटर की दूरी पर जंगल में हुई है। मृत बाघ पूर्ण वयस्क बताया जा रहा है, जिसकी आयु लगभग 5-6 वर्ष हो सकती है।
इस घटना का सबसे चिंताजनक और विचारणीय पहलू यह है, पन्ना पार्क क्षेत्र में वन एवं वन्यजीवों की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और सतत सघन निगरानी का दावा करने वाले पीटीआर प्रबंधन को मेल टाइगर (नर बाघ) की संदिग्ध मौत की कई दिनों तक भनक तक नहीं लगी। मुख्य मार्ग किनारे चंद कदम की दूरी पर स्थित जंगल में प्रचंड गर्मी में लगभग 10 दिन तक बाघ का शव सड़ता रहा लेकिन संबंधित बीट गार्ड, सर्किल प्रभारी और रेंजर से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को इसका पता नहीं चल सका। बाघ का शव कंकाल की हालत में मिलना पार्क प्रबंधन के निगरानी व्यवस्था से जुड़े दावों को खोखला साबित करता है। बता दें कि, पार्क के हिनौता स्थित प्रवेश द्वारा तक जाने वाले इस मार्ग से होकर पीटीआर के अधिकारी और मैदानी अमला प्रतिदिन कई बार गुजरता है लेकिन किसी को भी बाघ के सड़ते शव की दुर्गन्ध महसूस नहीं हुई।
फाइल फोटो।
सूत्र बताते हैं कि महुआ संग्रहण करने वाले एक ग्रामीण के द्वारा वन अमले को जंगल में टाइगर का शव मिलने की सूचना दी गई। कुछ देर बाद जैसे ही यह खबर फैली तो पन्ना टाइगर रिजर्व के घोर लापरवाह, नाकार और भ्रष्ट प्रबंधन में आंतरिक खलबली मच गई। समाचार लिखे जाने तक इस घटना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि, बाघ की पहचान और उसके शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों की जानकारी के संबंध उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल से संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन कई बार रिंग बजने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

पद की हनक में कानून ध्वस्त: आईएफएस अफसर ने वन क्षेत्र में जेसीबी चलवाकर बनाया ‘गुप्त मार्ग’

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फाइल फोटो।

*       बिना अनुमति पहाड़ी काटी, बांस-भिर्रा उखाड़े; बाद में पत्र लिखने की बात

*        सौंदर्यीकरण के नाम पर निर्माण, नियमों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल

*        वन संरक्षण अधिनियम 1980 की खुली अवहेलना, जिम्मेदार ही कटघरे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही अब कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही नियमों को दरकिनार करें तो संरक्षण की पूरी व्यवस्था कितनी कमजोर पड़ जाती है। पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के उप संचालक द्वारा अपने शासकीय बंगले से कार्यालय और मुख्य मार्ग तक आम लोगों की नजरों से बचकर आवागमन करने के लिए वन क्षेत्र में बिना अनुमति जेसीबी मशीन चलवाकर एक कच्चे “गुप्त मार्ग” का निर्माण कराया गया।
गुप्त मार्ग निर्माण के लिए जेसीबी मशीन से जड़ समेत उखड़वाए गए बांस-भिर्रा के झाड़।
इस दौरान वर्षों पुराने बांस-भिर्रा समेत कई वनस्पतियों को जड़ सहित उखाड़ दिया गया और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र की संरचना में व्यापक बदलाव कर दिया गया। मौके पर स्वयं उप संचालक अपने तीन रेंजरों के साथ मौजूद थे और जेसीबी चालक से अपनी देखरेख में कार्य करा रहे थे। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक का कार्यालय परिसर उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आता है। नियमानुसार कार्य कराने से पूर्व संबंधित वन मण्डल से अनुमति/अनापत्ति लेना अनिवार्य है। लेकिन पद की हनक में साहब ने उन नियम-कानूनों को ही जेसीबी तले रौंदते हुए निर्माण करा डाला कि जिनका पालन स्वयं करना तथा दूसरों से करवाना उनका पदीय दायित्व है। अपनी इस आपराधिक लापरवाही को उप संचालक पीटीआर वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने स्वयं स्वीकार किया है।

छुट्टी के दिन निर्माण, मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र संचालक कार्यालय भवन के पीछे परिसर में अवैध रूप से मार्ग का निर्माण कार्य करवाकर स्थल की संरचना में व्यापक बदलाव किया गया।
घटनाक्रम शनिवार 18 अप्रैल का बताया जा रहा है। अवकाश के दिन दोपहर करीब 3 बजे जगात चौकी इलाके में स्थित क्षेत्र संचालक कार्यालय परिसर के पीछे पहाड़ी की ओर जेसीबी मशीन से तेजी से खुदाई कर रास्ता बनाया जा रहा था। यह पूरा क्षेत्र उत्तर वन मण्डल पन्ना की पन्ना रेंज के वन कक्ष क्रमांक पी-410 के अंतर्गत आता है। इसी दौरान मीडिया कर्मियों के अचानक मौके पर पहुंचने से हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में जेसीबी मशीन को मौके से हटा दिया गया। इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह पूरा कार्य संबंधित वन मण्डल उत्तर पन्ना से आवश्यक अनुमति या अनापत्ति लिए बगैर मनमाने तरीके से कराया गया।
उप संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व वीरेन्द्र पटेल जेसीबी मशीन से मौके पर सड़क निर्माण कार्य कराने के दौरान अपने तीन रेंजरों के साथ उपस्थित रहे।
उप संचालक ने स्वयं स्वीकार किया कि कार्य कराने से पहले उनके द्वारा आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अब वे पत्र लिखकर उत्तर वन मण्डल पन्ना से आवश्यक अनुमति शीघ्रता से प्राप्त करने की बात कर रहे हैं। इस स्वीकारोक्ति के बाद साहब को जब मामला बिगड़ने का एहसास हुआ तो अपनी अक्षम्य लापरवाही पर पर्दा डालते हुए उन्होंने कराए गए कार्य को “कार्यालय परिसर की सामान्य साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण” योजना का हिस्सा बता दिया। लेकिन जिस पैमाने पर खुदाई और वनस्पतियों को उखाड़ा गया, वह इस दावे पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बता दें कि कार्यस्थल पर उप संचालक अपने सहयोगी परिक्षेत्र अधिकारी हिनौता राजेन्द्र अरजरिया, परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट एवं राहुल सिकरवार परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर के साथ मौजूद रहे।

सिर्फ साफ-सफाई या संरचना में बदलाव? 

संवेदनशील पहाड़ी की तलछट पर खुदाई करके कच्चे मार्ग का निर्माण कार्य करती जेसीबी मशीन।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपने कक्ष में मीडिया से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में बताया, ऑफिस कैम्पस के सौंदर्यीकरण का कार्य मैं और समस्त विभागीय कर्मचारी मिलकर अपनी स्वेच्छा तथा स्वयं के खर्च से करा रहे हैं। इसके तहत पुराने बांस-भिर्रा, शो बबूल एवं झाड़ियों की साफ़-सफाई करवाकर छायादार-फलदार पौधे लगाए जाएंगे। रास्ते का निर्माण निरीक्षण पथ के तौर पर आवागमन के लिए किया जाएगा। लेकिन स्थल की वास्तविक स्थिति यह संकेत देती है कि यह सामान्य सफाई कार्य नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक संरचना में हस्तक्षेप का मामला है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गतिविधियां भू-क्षरण को जन्म दे सकती है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या सफाई के नाम पर जेसीबी से खुदाई और बड़े पैमाने पर वनस्पतियों को उखाड़ना नियमों के अनुरूप माना जा सकता है, और क्या बिना अनुमति वन क्षेत्र में इस तरह का बदलाव वैध है? श्री पटेल ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया कि उत्तर वन मण्डल से आवश्यक अनुमति/अनापत्ति लिए बगैर उक्त कार्य कराया जा रहा था, लेकिन अब पत्र लिखकर अनुमति प्राप्त करने की कही जा रही है।

‘गुप्त मार्ग’ की मंशा और विभागीय व्यवस्था पर सवाल

वन क्षेत्र में निर्माण कार्य कराने से पूर्व उत्तर वन मण्डल पन्ना से नियमानुसार आवश्यक अनुमति न लेकर वन संरक्षण कानून का गंभीर उल्लंघन किया गया। मार्ग निर्माण के लिए तोड़ी गई क्षेत्र संचालक कार्यालय पन्ना टाइगर रिजर्व की बाउंड्रीवॉल।
सूत्रों के मुताबिक यह मार्ग केवल निरीक्षण या सफाई के लिए नहीं, बल्कि उप संचालक के आवास से सीधे कार्यालय और आगे मुख्य सड़क तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा था। इसके लिए बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी गई। जबकि पहले से एक सुगम पक्का मार्ग मौजूद है, ऐसे में इस नए रास्ते की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत किसी भी वन भूमि के उपयोग में बदलाव, खुदाई या निर्माण के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है। यहां न केवल इस प्रावधान की अनदेखी की गई, बल्कि युवा आईएफएस अफसर द्वारा स्वयं अपनी मौजूदगी में यह कार्य कराया गया, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है। उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपनी इस कारगुजारी को उजागर होने से रोकने के लिए खबर को प्रकाशित न करने का कई बार आग्रह किया। साथ ही मीडिया के बाहर निकलते ही कार्य बंद करवाकर तुरंत जेसीबी मशीन को मौके से हटवा दिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है।
बिना पूर्व अनुमति के वन क्षेत्र में मार्ग निर्माण कराने के संबंधी मीडिया के सवालों का पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल ने जवाब दिया।
पन्ना टाइगर रिजर्व में हाल के महीनों में वनरक्षक द्वारा अवैध कटाई, फर्जी पर्यटक टिकट, कोर क्षेत्र में अवैध रिसोर्ट निर्माण और अन्य गंभीर गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह घटना उस धारणा को और मजबूत करती है कि कहीं न कहीं वन संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले कतिपय वन कर्मचारी-अधिकारी  नियमों-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। सवाल उठता है, जब वन संरक्षण की शपथ लेने वाले अधिकारी ही कानून का उल्लंघन करें, तो क्या जंगल सुरक्षित रह पाएंगे? क्या ऐसे मामलों में वास्तविक कार्रवाई होगी या सब कुछ कागजों तक सीमित रह जाएगा? यह प्रकरण अब केवल एक “गुप्त मार्ग” निर्माण का नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

इनका कहना है-

“स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाएगी। इसमें जो भी तथ्य निकलकर आएंगे उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डीएफओ, उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना।

“आपके द्वारा भेजे गए वीडियो-फोटोग्राफ्स देखकर संबंधितों से वस्तुस्थिति की जानकारी लूंगा, इसके बाद ही कुछ बता पाऊंगा। मैं अपने स्तर से मामले को देखता हूं, लेकिन आप इस प्रकरण से पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ को भी अवगत करा दें।”

शुभरंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, भोपाल।

“संबंधितों से इस प्रकरण पर बात करती हूं, भेजी गई सामग्री को देखूंगी। सच्चाई क्या है, जानकारी लेने के बाद ही कोई प्रतिक्रिया दे पाउंगी।”

समीता राजौरा, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, भोपाल।

आमने-सामने भिड़ंत में बोलेरो नियो और मिनी ट्रक क्षतिग्रस्त, दो गंभीर घायल

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  तेज रफ्तार और स्पीड ब्रेकर न होना बना हादसे की वजह

देवीदीन कबीरदास, नरदहा।(www.radarnews.in) पन्ना जिले के दूरस्थ सीमावर्ती ग्राम नरदहा में कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर शुक्रवार दोपहर एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई, जिसमें बोलेरो नियो और एक मिनी ट्रक आमने-सामने टकरा गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, वहीं मिनी ट्रक को भी भारी नुकसान पहुंचा। हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना विंदा प्रसाद उर्फ छोटू के साइकिल रिपेयरिंग सेंटर के सामने शुक्रवार 17 अप्रैल को करीब 3:30 बजे हुई। बताया गया कि बोलेरो नियो कालिंजर की ओर से आ रही थी, जबकि मिनी ट्रक चित्रकूट की तरफ से तेज रफ्तार में आ रहा था। इसी दौरान दोनों वाहनों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई, जिससे तेज धमाका हुआ और आसपास अफरा-तफरी मच गई।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल डायल 102 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस चौकी के स्टाफ ने घायलों को एंबुलेंस की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजयगढ़ भेजा। दुर्घटना में एक व्यक्ति के सिर में गंभीर चोट आई है और वह बेहोश हो गया, जबकि दूसरे व्यक्ति का पैर टूटने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने बताया कि नरदहा के मुख्य मार्ग किनारे बस्ती आबाद होने के बावजूद स्पीड ब्रेकर नहीं हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। उन्होंने प्रशासन से यहां जल्द से जल्द स्पीड ब्रेकर बनाने और सड़क सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है। इधर चौकी नरदहा से प्राप्त जानकारी के आधार पर थाना धरमपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने पवई व अजयगढ़ में मीडिएशन सेंटर का ई-लोकार्पण किया

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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर भवन। (प्रतीकात्मक चित्र)

*          पवई में न्यायिक अधिकारियों के नवीन आवास भी हुए लोकार्पित

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले की पवई और अजयगढ़ तहसील में बने नए मीडिएशन सेंटर तथा पवई में न्यायिक अधिकारियों के आवासीय भवनों का ई-लोकार्पण शुक्रवार शाम मुख्य अतिथि चीफ जस्टिस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक संजीव सचदेवा के करकमलों से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर चीफ जस्टिस श्री सचदेवा ने अपने उद्बोधन में कहा कि मीडिएशन सेंटर से विवादों का जल्दी और आपसी सहमति से समाधान संभव होगा। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होने में मदद मिलेगी। न्यायिक अधिकारियों को बेहतर आवास मिलने से कार्यक्षमता बढ़ेगी एवं सेवाओं की गुणवत्ताओं में वृद्धि होगी।
तहसील विधिक सेवा समिति पवई और अजयगढ़ में तैयार मीडिएशन सेंटर तथा पवई में न्यायिक अधिकारियों के लिए बने आवासीय भवनों का ई-लोकार्पण 17 अप्रैल को शाम 5 बजे ऑनलाइन माध्यम से किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रशासनिक जज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष विवेक रूसिया ने की, जबकि पोर्टफोलियो जज पन्ना देवनारायण मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहे। तहसील पवई के मध्यस्थता केन्द्र के ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति पवई सोम पाण्डेय, न्यायिक मजिस्ट्रेट पुनीता चौहान, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजकुमार गौड़, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ तहसील पवई राजेश कुमार नगायच सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण, न्यायिक एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी एवं आईटी टीम भी उपस्थित थी।
तहसील अजयगढ़ के मध्यस्थता केन्द्र के ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान तृतीय जिला न्यायाधीश अरविन्द शर्मा, अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति उपमा भार्गव, जिला विधिक सहायता अधिकारी अतुल सेन सहित बड़ी संख्या में अधिवक्तागण, लोक निर्माण विभाग पीआईयू के अनुविभागीय अधिकारी यशवंत सिंह, न्यायिक एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारी भी उपस्थित रहे। तहसील पवई में न्यायिक अधिकारियों के लिये निर्मित आवासीय भवनों के ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शरतचन्द्र सक्सेना, विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुशवाहा, न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित शर्मा सहित पीडब्ल्यूडी, राजस्व, पुलिस विभाग के अधिकारीगण के साथ-साथ आईटी टीम एवं न्यायिक कर्मचारीगण भौतिक रूप से उपस्थित रहे।
चीफ जस्टिस, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर श्री सचदेवा ने ई-लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में नवनिर्मित मध्यस्थता केन्द्रों, जिला न्यायालय एवं तहसील न्यायालयों के भवनों एवं न्यायिक अधिकारियों के आवासीय भवनों के निर्माण में सहयोग प्रदान करने वाले समस्त संबंधितों को शुभकामनाएं प्रदान कीं। साथ ही कहा कि भवन का निर्माण करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे अधिक कहीं चुनौतीपूर्ण कार्य उसका सतत् संरक्षण एवं समुचित रखरखाव सुनिश्चित करना है। ज्ञात हो कि जहां मध्यस्थता केन्द्र विवादों के त्वरित, सुलभ एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के भार को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे, वहीं न्यायिक अधिकारियों हेतु बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध होने से कार्यकुशलता एवं सेवाओं की गुणवत्ताओं में वृद्धि होगी।