दिनदहाड़े दरिंदगी: जंगल में नाबालिग से गैंगरेप, पीड़िता के दोस्त से लूटपाट

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प्रतीकात्मक चित्र।

  थाना ले जाने की धमकी देकर जंगल में नाबालिग के साथ की गई दरिंदगी

*       हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों से दहल उठा शांति का टापू

*        पन्ना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर उठे गंभीर सवाल, जनमानस में आक्रोश

     बढ़ते अपराधों को रोकने में नाकाम पुलिस ने दहला देने वाली घटना को दबाने साधी चुप्पी

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध तथा यौन हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। सुरक्षा के दावे, तमाम अभियान और सख्ती के आश्वासन बार-बार सवालों के घेरे में आते रहे हैं। आए दिन सामने आने वाली जघन्य घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बेटियों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच पन्ना जिले से सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं, जहां एक नाबालिग किशोरी को कथित रूप से जंगल में ले जाकर तीन अज्ञात आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। सप्ताह भर के अंदर धार्मिक स्थल में चोरी, हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों के सामने आने से शांति का टापू कहा जाने वाला पन्ना जिला पूरी तरह से दहल उठा है। सभ्य समाज को झकझोर देने वाली इन संगीन वारदातों को लेकर आमजन में भय और पुलिस के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।

पहले पीटा फिर की दरिंदगी

देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण के अनुसार बुधवार 29 अप्रैल 2026 को नाबालिग किशोरी अपने एक परिचित युवक से मिलने क्षेत्र में पहुंची थी। युवक अपने एक अन्य साथी के साथ मोटरसाइकिल से वहां आया था। बताया गया है कि तीनों कुछ देर के लिए क्षेत्र के एक सुनसान स्थान पर रुके थे, तभी दो मोटरसाइकिलों से तीन अज्ञात व्यक्ति वहां पहुंचे और विवाद करने लगे। आरोप है कि अज्ञात लोगों ने किशोरी के परिचित युवक पर दबाव बनाया कि युवती को उनके साथ जाने दिया जाए। युवक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और छोड़ देने की गुहार लगाई। इस दौरान उसने अपने पास रखी नकदी, मोबाइल फोन तथा चांदी की चेन भी उन्हें दे दी, लेकिन आरोपी नहीं माने। इसके बाद आरोपियों ने किशोरी, उसके परिचित युवक और उसके साथी को यह कहकर जबरन अपने कब्जे में लिया कि उन्हें थाने ले जाया जा रहा है।
भय और दबाव बनाकर तीनों को वाहनों सहित जंगल के भीतर सुनसान इलाके में ले जाया गया। वहां किशोरी के परिचित युवक और उसके साथी को अलग बैठाकर मारपीट की गई। युवक को पत्थर मारने का भी आरोप है। उधर एक आरोपी किशोरी को खींचकर घनी झाड़ियों की ओर ले गया। वह रोती-गिड़गिड़ाती रही कि मुझे छोड़ दो, मुझे घर जाने दो लेकिन कामांध दरिंदे को उस पर जरा भी रहम नहीं आया। आरोपी ने उसके कपड़े उतार दिए और फिर जबरन अपनी हवश का शिकार बनाया। इस तरह तीनों हैवानों ने बारी-बारी से नाबालिग के साथ दरिंदगी की। विरोध करने पर थप्पड़ मारने, चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने की बात भी शिकायत में कही गई है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

आरोपियों की सरगर्मी से तलाश जारी

नाबालिग युवती ने अपने दोस्त के साथ देवन्द्रनगर थाना पहुंचकर पुलिस को आपबीती सुनाई। घटना पर पुलिस ने पुलिस ने धारा 115(2), 137(2), 70(2), 351(3) बीएनएस एवं 5(g) 6 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया है। गैंगरेप पीड़िता को मेडिकल जांच एवं उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां तबीयत बिगड़ने पर वह बा-बार बेहोश हो रही थी। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए भर्ती कराया गया। पीड़िता के शरीर पर आए जख्म-खरोंच के निशान उसके साथ हुई दरिंदगी की गवाही दे रहे हैं। पीड़िता की हालत वर्तमान में सुधार होने की जानकारी मिली है। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि पुलिस टीमें सामूहिक बलात्कार की वारदात में शामिल तीनों अज्ञात आरोपियों की तलाश में सरगर्मी से जुटी हैं। बता दें कि, घटना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि के लिए पुलिस अधीक्षक पन्ना निवेदिता नायडू एवं देवेंद्रनगर थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव से संपर्क किया गया लेकिन उनका कोई जबाव नहीं आया।

दिनदहाड़े वारदात ने उड़ाई सुरक्षा दावों की धज्जियां

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अपराधी खुलेआम युवती और दो युवकों को रोककर पहले लूटपाट करें, फिर थाना ले जाने का भय दिखाकर जंगल में ले जाएं और वहां जघन्य वारदात को अंजाम दें, तो क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था आखिर किस हाल में है? यह घटना पुलिस गश्त और अपराध नियंत्रण के दावों पर सीधा प्रहार है। जिले में हत्या, लूट, चोरी और महिला अपराधों की घटनाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अपराधियों में कानून का भय पूरी तरह कमजोर पड़ रहा है। यदि सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई होती, तो दिनदहाड़े ऐसी दुस्साहसिक घटना संभव नहीं थी। विदित हो कि सप्ताह भर के अंदर जिले में सामने आई सनसनीखेज जघन्य घटनाओं ने जनमानस को हिलाकर रख दिया है। शांति का टापू कहलाने वाले पन्ना में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस से लोग जहां अत्यंत ही भयभीत हैं वहीं उनमें पुलिस के प्रति गुस्सा साफ़ देखा जा सकता है।

छोटी उपलब्धियों पर प्रचार, बड़ी घटना पर चुप्पी क्यों?

सामूहिक बलात्कार की शर्मसार करने वाली घटना के बाद पुलिस के सूचना तंत्र पर भी सवाल उठे हैं। पत्रकारों द्वारा घटना की आधिकारिक जानकारी के लिए लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों से संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने या फिर फोन रिसीव न करने की बातें सामने आईं। निचले स्तर के पुलिस अधिकारी जानकारी देने के लिए अधिकृत न होने का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जब छोटी-छोटी कार्रवाई पर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रचार में तत्परता दिखाई जाती है, तब ऐसी गंभीर घटनाओं पन्ना पुलिस पर चुप्पी क्यों साध लेती है? बढ़ते अपराधों की प्रभावी रोकथाम में बुरी तरह नाकाम पुलिस अब क्या घटनाओं को मीडिया में आने से रोकने-दबाने पर अपनी ऊर्जा लगाएगी? मीडिया को जानकारी देना क्या गंभीर घटनाओं पर जवाबदेही से बचने की कोशिश है? यह सवाल जनता और मीडिया दोनों पूछ रहे हैं।