बाघ कंकाल मामला: बीटगार्ड निलंबित, वनपाल और रेंजर को आरोप पत्र जारी

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पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था।

*       एसटीएफ और पीटीआर द्वारा की जा रही बाघ की मौत के कारणों की गहन जांच

*        15 दिन तक सड़ता रहा बाघ का शव, निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिलने के मामले ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को प्रथम दृष्टया मैदानी अमले की लापरवाही मानते हुए प्रबंधन ने सख्त कार्रवाई की है। बीटगार्ड कटरिया रामसफल बैगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि कार्यवाहक वनपाल एवं सर्किल प्रभारी बकचुर कमल किशोर मोची और परिक्षेत्राधिकारी गंगऊ अभ्यारण सागर शुक्ला को आरोप पत्र जारी कर जवाब तलब किया है। मामले में पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) प्रबंधन ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जबलपुर से विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम भी इस घटना के आपराधिक पहलुओं की गहन पड़ताल में जुटी हुई है।
मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को मझगवां-हिनौता मुख्य मार्ग से महज 150 फुट दूरी पर, गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत बीट कटरिया के वन कक्ष क्रमांक-278 में नर बाघ (Male Tiger) का क्षत-विक्षत शव मिला था। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बाघ की मौत 10 से 15 दिन पहले हो चुकी थी, जिससे शव पूरी तरह कंकाल में तब्दील हो गया था। इस घटना के सामने आने के बाद पीटीआर प्रबंधन को न सिर्फ कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उसकी सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चिंताजनक एवं विचारणीय पहलू यह है कि हिनौता स्थित पार्क के प्रवेश द्वार तक जाने वाले मार्ग किनारे जंगल में बाघ का शव कई दिनों तक सड़ता रहा, लेकिन वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि इसी मार्ग से पार्क के अधिकारी-कर्मचारी दिन में कई बार आवागमन करते हैं। इस लापरवाही ने निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
पार्क में लागू एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) ऐप आधारित गश्त और मॉनिटरिंग सिस्टम के बावजूद ऐसी घटना सामने आना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सूत्र बताते हैं, पीटीआर (Panna Tiger Reserve) के मौजूदा वरिष्ठ अधिकारियों का फोकस वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा न होकर अपने आर्थिक हित साधने पर है। नतीजतन प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी निगरानी व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। नर बाघ की संदिग्ध मौत समेत पूर्व में घटित अन्य घटनाएं इस बात प्रमाण है।

रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज?

पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार बाघ की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक भोपाल समीता राजौरा ने एसटीएफ (STF) को जांच के निर्देश दिए थे। टीम ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। अब पूरे मामले में सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी।

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Breaking News: पन्ना टाइगर रिजर्व में मेल टाइगर की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद