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पन्ना में भारी बारिश का कहर: उड़द-मूंग और तिल की फसलें तबाह, किसानों ने मुआवजे की मांग

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पन्ना जिले अतिवृष्टि और जलभराव से बर्बाद हुई फसलों की ग्रामवार जानकारी संकलित करते कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी।
  • करीब 73 हजार हेक्टेयर में दलहन-तिलहन की फसलें प्रभावित

  • कृषि विभाग ने क्षति की वास्तविक जानकारी जुटाने शुरू किया ग्रामवार प्रारंभिक सर्वे

  • लगातार 20 दिन से अधिक बारिश और जलभराव से खरीफ फसलों को भारी नुकसान

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में अगस्त माह के दूसरे सप्ताह से 4 सितंबर तक हुई लगातार भारी बारिश और जलभराव ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहने से खरीफ की दलहनी और तिलहनी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। खासकर उड़द, मूंग और तिल की खड़ी फसलें पानी में डूबने के बाद गलने और सड़ने लगी हैं। फसलों में फूल आने के समय हुई अतिवृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत और खेती में लगाई पूंजी को संकट में डाल दिया है। अब प्रभावित किसान फसल क्षति का शीघ्र एवं निष्पक्ष सर्वे कराकर नियमानुसार मुआवजा तथा फसल बीमा का अधिकतम लाभ दिलाने की मांग कर रहे हैं।
लगातार 20 दिन से अधिक समय तक हुई बारिश से जिले में नदी-नाले उफान पर रहे और कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात निर्मित हुए। 2 सितंबर तक जिले में औसत 868.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी, जबकि अजयगढ़ क्षेत्र में 1344.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद 3 और 4 सितंबर को भी कई क्षेत्रों में भारी बारिश का दौर जारी रहा। भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 4 सितंबर को जिले में औसत 71.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई। इसमें गुनौर तहसील में सर्वाधिक 140 मिलीमीटर, पवई में 118 मिलीमीटर और अमानगंज तहसील क्षेत्र में 98.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
लगातार बारिश से करीब 20 साल बाद वर्ष 2005 जैसे भीषण बाढ़ के हालात बनने की स्थिति सामने आई। गनीमत रही कि 4 सितंबर को बारिश थम गई और बाढ़ की स्थिति और अधिक विकराल नहीं हुई, लेकिन तब तक अतिवृष्टि खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचा चुकी थी। जिले में सैकड़ों गरीब परिवारों के कच्चे मकानों के जमींदोज होने की घटनाएं सामने आईं, वहीं पानी में बहने से दो नाबालिगों सहित तीन लोगों की जान भी चली गई।
73 हजार हेक्टेयर में दलहन-तिलहन की बोवनी
जिले में 20 से अधिक दिनों तक हुई भारी बारिश से खरीफ की दलहनी-तिलहनी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।
कृषि विभाग के प्राथमिक आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन 2026 में जिले में 2.08 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलों की बोवनी की गई है। इसमें करीब 1.40 लाख हेक्टेयर में धान, 33 हजार हेक्टेयर में तिल तथा लगभग 40 हजार हेक्टेयर में मूंग, उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें शामिल हैं। इस तरह जिले में करीब 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी-तिलहनी फसलों की बोवनी हुई थी। यह 73 हजार हेक्टेयर वास्तविक क्षतिग्रस्त क्षेत्रफल नहीं है, बल्कि जिले में दलहन-तिलहन की कुल बोवनी का रकबा है। वास्तविक रूप से कितने क्षेत्र में फसल क्षति हुई है, इसका आंकड़ा कृषि विभाग के स्थलीय सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
बारिश का सबसे अधिक असर निचले इलाकों के खेतों में दिखाई दे रहा है। पानी की निकासी नहीं होने के कारण कई खेत कई दिनों तक तालाब में तब्दील रहे। पानी में डूबी उड़द, मूंग और तिल की फसलें अब गलने और सड़ने लगी हैं। कई जगह खेतों में खड़ी फसल पीली पड़ गई है। किसानों का कहना है कि पिछले माह फसलों में फूल आने शुरू हुए थे और उन्हें अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन लगातार बारिश ने पूरा गणित बिगाड़ दिया।

अजयगढ़ से रैपुरा तक फसलों पर अतिवृष्टि की मार

लगातार कई दिनों तक हुई भारी बारिश के चलते खेत तालाब में तब्दील हो गए, खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबी रहीं।
फसल नुकसान की तस्वीरें जिले के कई क्षेत्रों से सामने आ रही हैं। बृजपुर-पहाड़ीखेड़ा, सुनवानी, अमानगंज, सलेहा, सिमरिया, गुनौर, रैपुरा, अजयगढ़ और देवेंद्रनगर क्षेत्रों में मूंग, उड़द और तिल की फसलों को खासा नुकसान होने की जानकारी सामने आई है। निचले क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है। लंबे समय तक जलभराव रहने के कारण फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। जहां खेतों में अभी फसल खड़ी दिखाई दे रही है, वहां भी लगातार नमी के कारण पौधे पीले पड़ने लगे हैं। कुछ स्थानों पर फसल जमीन पर गिर गई है, जबकि पानी में डूबी फसल सड़ने लगी है। इसके विपरीत धान की फसल को कई क्षेत्रों में अधिक बारिश से अपेक्षाकृत लाभ होने की बात कही जा रही है। हालांकि धान समेत सभी खरीफ फसलों की अंतिम स्थिति का आकलन कृषि विभाग के सर्वे के बाद ही स्पष्ट होगा।
खेतों में तबाही, किसानों के सामने आर्थिक संकट
अतिवृष्टि ने सबसे अधिक चिंता छोटे और सीमांत किसानों की बढ़ा दी है। किसानों ने खाद, बीज, दवा, मजदूरी, जुताई और बोवनी पर पहले ही पैसा खर्च कर दिया था। जब फसल तैयार होने की उम्मीद बनी तो लगातार बारिश ने उसे बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया। कई किसानों के लिए खरीफ की फसल पूरे साल की आय का प्रमुख आधार होती है। ऐसे में फसल खराब होने से खेती की लागत की भरपाई, परिवार का भरण-पोषण, कृषि ऋण की अदायगी और आगामी रबी सीजन की तैयारी को लेकर संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर राहत नहीं मिली तो आर्थिक परेशानी और बढ़ सकती है।
बारिश के दौरान कई ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते भी जलमग्न रहे। ऐसे में किसान चाहकर भी खेतों में जमा पानी की निकासी नहीं कर सके। अब बारिश थमने के बाद खेतों में पानी कम होने लगा है तो फसलों की वास्तविक बर्बादी सामने आने लगी है।
बाढ़ जैसे हालात में भी खेतों तक पहुंचा कृषि अमला
बारिश से प्रभावित फसलों की जानकारी जुटाने के कार्य की निगरानी और फील्ड की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने उप संचालक कृषि ओपी तिवारी एवं एसडीओ उत्तम बागरी ने संयुक्त रूप से खेतों में पहुंचकर क्षति का अवलोकन किया।
फसल क्षति की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए कृषि विभाग का मैदानी अमला लगातार प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर रहा है। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास ओपी तिवारी के निर्देशन में अनुविभागीय कृषि अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और कृषि विस्तार अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर फसल क्षति की जानकारी जुटा रहे हैं। विभाग के निर्देश के अनुसार अतिवृष्टि प्रभावित फसलों की ग्रामवार और फसलवार जानकारी, प्रभावित क्षेत्रफल तथा नुकसान की स्थिति दर्ज की जा रही है। एसडीओ कृषि उत्तम बागरी को इस कार्य के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थलीय निरीक्षण करने और किसानों से संपर्क के आधार पर वास्तविक स्थिति जुटाकर नोडल अधिकारी को रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
उप संचालक ओपी तिवारी और एसडीओ उत्तम बागरी ने संयुक्त रूप से रैपुरा, सुंदरा, देवेंद्रनगर, ककरहटी, पवई, कल्दा पठार और पहाड़ीखेड़ा सहित विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर फसलों की स्थिति का जायजा लिया है। बाढ़ जैसे हालात और कई स्थानों पर मार्ग अवरुद्ध होने के बावजूद मैदानी अमला खेतों तक पहुंचकर फसल क्षति की जानकारी जुटाने में लगा रहा।
जीपीएस लोकेशन वाले फोटो से हो रहा ग्राउंड ट्रूथिंग
कृषि विभाग द्वारा किसानों से प्राप्त जानकारी के साथ ग्राउंड ट्रूथिंग यानी स्थलीय सत्यापन के माध्यम से फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है। मैदानी अमला प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर फसलों के जीपीएस लोकेशन वाले फोटो अलग-अलग एंगल से ले रहा है। इन फोटो और आवश्यक विवरण को उन्नति ऐप पर अपलोड किया जा रहा है। प्रभावित ग्राम, फसल का नाम, प्रभावित क्षेत्रफल और नुकसान की स्थिति जैसी जानकारी संकलित कर स्थलीय निरीक्षण एवं किसानों से संपर्क के आधार पर उसका परीक्षण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य फसल नुकसान का वास्तविक और प्रमाणित रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि आगे किसानों को फसल बीमा और शासन स्तर से मिलने वाली राहत का लाभ दिलाने में आवश्यक दस्तावेजी आधार उपलब्ध हो सके।
उप संचालक कृषि ओपी तिवारी के अनुसार, यदि अगले कुछ दिनों में बारिश का नया दौर नहीं आता है तो प्रभावित फसलों के प्रारंभिक आकलन का कार्य सप्ताह के अंत तक पूरा किया जा सकता है। कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी किसानों को खेतों में जमा पानी की जल्द निकासी के लिए मेड़ काटकर पानी बाहर निकालने की सलाह भी दे रहे हैं, ताकि जो फसल बचने की स्थिति में है उसे आगे होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
बीमा कंपनी को दी गई सूचना, सर्वेयरों से क्षति आकलन की मांग
कृषि विभाग ने अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान की जानकारी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के क्षेत्रीय प्रतिनिधि पंकज कुशवाहा को पत्र के माध्यम से दी है। विभाग द्वारा मोबाइल पर भी चर्चा कर कंपनी से अपने सर्वेयरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में फसल हानि की वास्तविक स्थिति का शीघ्र आकलन कराने के लिए कहा गया है। उन्नति ऐप पर अपलोड किए जा रहे फसल क्षति से संबंधित जीपीएस लोकेशन वाले फोटो और अन्य जानकारी संबंधित अधिकारियों के साथ बीमा कंपनी तक भी पहुंचाई जा रही है। कृषि विभाग और बीमा कंपनी के बीच समन्वय के जरिए प्रभावित किसानों के फसल बीमा दावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है।
किसान संगठन बोले- ‘सर्वे में एक भी खेत न छूटे
अतिवृष्टि प्रभावित किसानों और किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें गांव-गांव पहुंचकर फसल क्षति का पारदर्शी और समयबद्ध सर्वे करें। किसी भी प्रभावित किसान या खेत को सर्वे से बाहर नहीं रखा जाए और वास्तविक नुकसान के आधार पर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सेवालाल पटेल ने कहा कि लगातार बारिश से किसानों की फसल उत्पादन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। किसानों ने खाद, बीज, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर पैसा खर्च किया था। फसल खराब होने से उनकी पूरी आर्थिक गणित बिगड़ गई है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत राशि के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिकतम संभव लाभ दिलाया जाए।
वहीं भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष शंकर पटेल ने कहा कि जिले के किसान पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं। हाल की भारी बारिश ने किसानों को आर्थिक रूप से तोड़ दिया है। उन्होंने खरीफ फसलों की क्षति का तत्परता और संवेदनशीलता के साथ सर्वे कराने तथा प्रभावित किसानों को फसल बीमा के साथ शासन स्तर से समुचित राहत उपलब्ध कराने की मांग की।
पन्ना जिले में 04 सितंबर 2026 तक हुई बारिश के तहसीलवार आंकड़े।
फिलहाल बारिश थम चुकी है, लेकिन खेतों में जमा पानी और सड़ती फसलें किसानों की परेशानी बयां कर रही हैं। अब अन्नदाता किसानों की निगाहें कृषि एवं राजस्व विभाग के सर्वे, फसल बीमा के आकलन और शासन से मिलने वाली राहत पर टिकी हैं। कृषि विभाग की ग्रामवार प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अतिवृष्टि से जिले में वास्तव में कितने क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई और किसानों को कितना नुकसान उठाना पड़ा। किसानों की मांग है कि सरकारी सर्वे खेतों में दिखाई दे रही वास्तविक तबाही के आधार पर हो और राहत की प्रक्रिया जल्द पूरी कर सहायता सीधे प्रभावित किसानों तक पहुंचाई जाए।
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पन्ना: उफनती नदी में पुल से छलांग लगाने वाले युवक का 23 घंटे बाद मिला शव, SDRF टीम ने चलाया सर्च ऑपरेशन

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मिढ़ासन नदी के तेज बहाव के बीच सुशील की तलाश में मोटर बोट से सर्च ऑपरेशन चलाती एसडीआरएफ टीम।
  • अमानगंज में सोने-चांदी की ज्वेलरी दुकान चलाता था सुशील सोनी

  • पुलिस की प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के कारणों का अब तक नहीं हो सका खुलासा

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अमानगंज में मिढ़ासन नदी के पुल से छलांग लगाने वाले 32 वर्षीय सुशील सोनी का शव करीब 23 घंटे बाद बुधवार सुबह चकदही घाट के पास नदी में तैरता मिला। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हुई घटना के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया। मंगलवार देर शाम तक तलाश के बाद अंधेरा होने पर अभियान रोकना पड़ा, जिसे बुधवार सुबह फिर शुरू किया गया। करीब 10 बजे चकदही घाट के पास शव दिखाई देने के बाद टीम ने उसे नदी से बाहर निकाला। सुशील की मौत की खबर से अमानगंज में शोक का माहौल है।

मिढ़ासन नदी के पुल से लगाई थी छलांग

जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 8 अमानगंज निवासी सुशील सोनी, पिता कैलास सोनी ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे मिढ़ासन नदी के पुल से नदी में छलांग लगा दी थी। घटना के बाद पुल पर उसका मोबाइल फोन मिला। सूचना मिलते ही अमानगंज थाना प्रभारी हेमंत नायक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश शुरू कराई गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पन्ना से एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। टीम ने पुलिस के सहयोग से नदी में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। चकदही घाट से मिढ़ासन नदी के पुल घाट तक नदी के अलग-अलग हिस्सों में युवक की तलाश की गई।

सुबह फिर शुरू हुई तलाश

करीब 23 घंटे बाद नदी मिढ़ासन नदी के चकदही घाट के समीप युवक का शव बरामद कर पानी से बाहर लाते हुए एसडीआरएफ टीम।
मंगलवार देर शाम तक एसडीआरएफ और पुलिस की टीम नदी में तलाश करती रही, लेकिन सुशील का कोई पता नहीं चल सका। नदी में पानी के बहाव और अंधेरा होने के कारण रात में सर्च ऑपरेशन रोक दिया गया। बुधवार सुबह टीम ने दोबारा तलाश शुरू की। करीब 10 बजे चकदही घाट के पास नदी में सुशील का शव तैरता दिखाई दिया। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को नदी से बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की।

एक साल पहले मां का निधन

सुशील के परिवार पर पिछले कुछ समय में लगातार दुखों का साया रहा है। उसके पिता कैलास सोनी अमानगंज तहसील कार्यालय में पदस्थ रहे और कुछ महीने पहले ही सेवानिवृत्त हुए हैं। करीब एक वर्ष पहले बीमारी के चलते सुशील की मां का भी निधन हो गया था। अब बेटे की मौत से परिवार पर एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सुशील की शादी करीब दो वर्ष पहले सतना में हुई थी। वह परिवार का बड़ा बेटा था। उसका छोटा भाई मनीष सोनी कन्या शाला के पास सोने-चांदी की दुकान संचालित करता है। सुशील भी बड़गूजा आटा चक्की के पास सोने-चांदी की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। इससे पहले वह सहारा बैंक में नौकरी कर चुका था।

मिलनसार और धार्मिक प्रवृत्ति का था सुशील

मृतक सुशील सोनी।
स्थानीय लोगों के अनुसार सुशील मिलनसार, हंसमुख और धार्मिक प्रवृत्ति का युवक था। वह धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था और जरूरत के समय लोगों की मदद के लिए भी आगे रहता था। यही वजह है कि उसकी अचानक मौत की खबर से परिवार के साथ परिचितों और क्षेत्र के लोगों में भी गहरा शोक है।
मौत की वजह की पुलिस कर रही जांच
अमानगंज में मिढ़ासन नदी घाट पर खड़े स्थानीय लोग एसडीआरएफ टीम के रेस्क्यू ऑपरेशन को देखते हुए।
सुशील ने यह कदम क्यों उठाया, इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। क्षेत्र में अलग-अलग तरह की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन किसी विवाद या तनाव को लेकर सामने आ रही बातों की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। सुशील की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों ने अपना बेटा और भाई खोया है, वहीं परिचितों के बीच एक हंसमुख और मिलनसार युवक के असमय चले जाने से शोक का माहौल है।
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5 साल की गारंटी वाली मोहन्द्रा-कोटा सड़क गड्ढों में तब्दील, मरम्मत के इंतजार में राहगीर

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मोहन्द्रा-कोटा मार्ग पर जगह-जगह बने बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भरने से सड़क की बदहाल स्थिति।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक से वित्त पोषित एमडीआर मार्ग का 3 साल पहले हुआ था      अपग्रेडेशन-रिकंस्ट्रक्शन

  • गारंटी पीरियड में लंबे समय से मरम्मत का अभाव, ठेका कंपनी को नोटिस पर नोटिस, फिर भी सड़क बदहाल

पन्ना/मोहन्द्रा।(www.radarnews.in) पन्ना जिले की पवई विधानसभा के मोहन्द्रा-बनौली क्षेत्र को पड़ोसी जिला दमोह से जोड़ने वाला करीब 40 किलोमीटर लंबा मोहन्द्रा-बनौली-कोटा मार्ग इन दिनों जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों के कारण बदहाल हो गया है। हैरानी की बात यह है कि यह कोई सामान्य ग्रामीण सड़क नहीं, बल्कि पन्ना जिले का एमडीआर यानी मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड है। न्यू डेवलपमेंट बैंक से वित्त पोषित इस सड़क का अपग्रेडेशन एवं रिकंस्ट्रक्शन लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना की देखरेख में करीब तीन वर्ष पूर्व कराया गया था। सड़क की पांच साल की गारंटी है, लेकिन गारंटी पीरियड में ही लंबे समय से आवश्यक मरम्मत के अभाव में यह सड़क अब धीरे-धीरे गड्ढों की सड़क में तब्दील होती जा रही है।
सड़क की तस्वीरें इसकी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही हैं। जगह-जगह बड़े और गहरे गड्ढे हो गए हैं। बारिश का पानी इनमें भर जाने से गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती और वाहन चालकों को अंदाजे से सड़क पार करनी पड़ती है। कई स्थानों पर सड़क की सतह उखड़ चुकी है और कीचड़ के कारण वाहनों के फिसलने का खतरा भी बना हुआ है।

गड्ढों में समा जाते हैं वाहनों के पहिए

मोहन्द्रा-कोटा मार्ग पर कुछ गड्ढे इतने गहरे हैं कि उनमें वाहन के पहिए तक समा जाते हैं। दोपहिया और छोटे चार पहिया वाहन चालकों के लिए ऐसे स्थान सबसे अधिक जोखिम वाले हैं। ई-रिक्शा चालकों की परेशानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार वे गड्ढों वाले हिस्से से पहले सवारियों को उतारकर वाहन को धीरे-धीरे निकालते हैं। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है। गड्ढों में जमा पानी के ऊपर से जब भारी वाहन गुजरते हैं तो पानी की तेज बौछार आसपास की दीवारों और किनारे तक पहुंचती है। वहीं लोडर और भारी वाहनों के आवागमन के दौरान सड़क धंसने या वाहन के असंतुलित होने की आशंका बनी रहती है।

सिमरिया-हटा मार्ग खराब, इस सड़क पर बढ़ा दबाव

मोहन्द्रा-बनौली-कोटा मार्ग से संबंधित सड़क साइन बोर्ड, जिसकी पांच साल की गारंटी अवधि के बावजूद सड़क कई स्थानों पर जर्जर हो चुकी है।
सिमरिया-हटा मार्ग की खराब स्थिति के कारण वर्तमान में दमोह की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही के लिए मोहन्द्रा-कोटा मार्ग का उपयोग बढ़ा है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाल स्थिति वाहन चालकों की परेशानी को और बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पवई विधायक के घर के आसपास तक सड़क पर गहरे गड्ढे हो चुके हैं। जब जिले के महत्वपूर्ण एमडीआर मार्ग की स्थिति इतनी खराब हो जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का हाल कैसा होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। सड़क की वर्तमान हालत यह भी सवाल खड़ा करती है कि करीब तीन वर्ष पूर्व कराए गए अपग्रेडेशन और रिकंस्ट्रक्शन के बाद गारंटी अवधि में सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी कितनी प्रभावी ढंग से निभाई जा रही है।

पांच साल की गारंटी, फिर भी मरम्मत के लिए इंतजार

सबसे महत्वपूर्ण सवाल सड़क की पांच साल की गारंटी को लेकर है। सड़क अभी गारंटी पीरियड में है, लेकिन लंबे समय से आवश्यक मरम्मत और संधारण नहीं होने के कारण इसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। यानी जिस अवधि में सड़क को बेहतर स्थिति में बनाए रखने के लिए गारंटी की व्यवस्था की गई है, उसी अवधि में सड़क जगह-जगह बड़े गड्ढों में बदल रही है। लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेका कंपनी हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी को पिछले चार माह के दौरान दो बार सख्त कार्रवाई की चेतावनी वाले पत्र भेजे जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद ठेका कंपनी प्रबंधन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर गारंटी की शर्तों के तहत ठेका कंपनी से सड़क का आवश्यक रखरखाव और सुधार कार्य क्यों नहीं कराया जा सका।

भोपाल मुख्यालय से जारी हुई थी निविदा

जानकारी अनुसार इस सड़क की निविदा भोपाल स्थित लोक निर्माण विभाग के मुख्यालय द्वारा जारी की गई थी। ठेका अनुबंध कार्यवाही और सुरक्षा निधि भी राजधानी भोपाल में जमा है। यही वजह है कि पन्ना लोक निर्माण विभाग के तकनीकी अधिकारियों के स्तर पर ठेका कंपनी के विरुद्ध सीधे बड़ी कार्रवाई की स्थिति सीमित है। स्थानीय स्तर से ठेका कंपनी को भेजे गए पत्रों की प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है। ऐसे में अब सवाल सिर्फ सड़क की मरम्मत का नहीं, बल्कि गारंटी अनुबंध की शर्तों को प्रभावी रूप से लागू कराने का भी है। लंबे समय से सड़क की बदहाली और राहगीरों की परेशानी के बीच ठेका कंपनी से तत्काल सुधार कार्य कराने की जिम्मेदारी आखिर कौन सुनिश्चित करेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

विभाग ने अपने स्तर पर शुरू कराया मरम्मत कार्य

लोक निर्माण विभाग उप संभाग पवई के अनुविभागीय अधिकारी राजमणि बागरी ने बताया कि सड़क के अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने की जानकारी विभाग को है। लोनिवि द्वारा अपने स्तर पर आज से गड्ढों की मरम्मत और जल निकासी का कार्य प्रारंभ कराया गया है। सड़क वर्तमान में गारंटी पीरियड में है, इसलिए संबंधित ठेका कंपनी को पत्र भेजकर तत्काल आवश्यक सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए गए हैं। सुधार कार्य नहीं कराने पर ठेका कंपनी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री इन्द्रदेव पटेल ने बताया कि मोहन्द्रा-कोटा सड़क की समुचित मरम्मत कराने के लिए ठेका कंपनी हिलवेज कंस्ट्रक्शन कंपनी को पत्र भेजा गया है। ठेका कंपनी को सख्त चेतावनी दी गई है। यदि तत्परता से सड़क का सुधार कार्य नहीं कराया गया तो उसकी जमा सुरक्षा निधि राजसात करने तथा ठेका फर्म को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शीर्ष अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा जाएगा। फिलहाल आवागमन में हो रही असुविधा को देखते हुए विभाग द्वारा अपने स्तर पर सड़क की आवश्यक मरम्मत कराई जा रही है।

अब वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई पर नजर

फाइल फोटो।
करीब तीन वर्ष पहले अपग्रेडेशन और रिकंस्ट्रक्शन के बाद तैयार हुई 40 किलोमीटर लंबी एमडीआर सड़क का पांच साल की गारंटी अवधि में ही इस तरह गड्ढों में तब्दील होना सड़क के रखरखाव, विभागीय निगरानी और ठेका अनुबंध की शर्तों के पालन पर सवाल खड़े करता है। गारंटी की अवधि में सड़क की मरम्मत के लिए ठेका कंपनी को बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद स्थिति लंबे समय तक नहीं सुधरी। अब देखना यह है कि राहगीरों को लगातार हो रही परेशानी और अनुबंध की शर्तों के पालन के लिए लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ठेका कंपनी के विरुद्ध क्या ठोस कार्रवाई करते हैं और इस महत्वपूर्ण मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित एवं सुगम बनाने में कितना समय लगता है।
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पन्ना बोरवेल हादसा: ONGC देहरादून की टीम ने लिए पानी और गैस के सैंपल, 2-3 सप्ताह में आएगी रिपोर्ट

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नारायणपुरा में बोरवेल के बाजू में स्थित विद्युत मोटर वाले गहरे गड्ढे में उपकरण डालकर गैस के नमूने लेते ONGC टीम के सदस्य।
  • तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम करीब दो घंटे तक नारायणपुरा में रही; मोटर वाले गड्ढे में उपकरण डालकर लिए गैस के नमूने

  • ऑक्सीजन की कमी समेत संभावित कारणों की होगी जांच

  • बोरवेल की मोटर वाले गड्ढे में उतरने से किसान परिवार के मुखिया और दो बेटों की आठ दिन में अलग-अलग हादसों में मौत

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पवई तहसील के ग्राम नारायणपुरा में आठ दिन के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत के मामले में अब वैज्ञानिक जांच शुरू हो गई है। सोमवार को तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ONGC) देहरादून की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम नारायणपुरा पहुंची और करीब दो घंटे तक घटनास्थल पर रहकर बोरवेल तथा उसके बाजू में स्थित उस गहरे गड्ढे की जांच की, जिसमें उतरने के दौरान दो अलग-अलग हादसों में किसान परिवार के मुखिया और उनके दो बेटों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञ टीम ने बोरवेल के पानी के सैंपल लिए। इसके अलावा बोरवेल के पास स्थित उस गहरे गड्ढे में विशेष उपकरण डालकर वहां मौजूद गैस के नमूने भी एकत्र किए। सैंपल लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गड्ढे को पुनः ढक दिया गया। अब पानी और गैस के नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार लैब जांच और पूरी प्रक्रिया में करीब दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गड्ढे में वास्तव में किस प्रकार की गैस या अन्य घातक परिस्थितियां मौजूद थीं अथवा वहां ऑक्सीजन की कमी थी और क्या इनमें से कोई स्थिति दोनों हादसों का कारण बनी।

मोटर वाले गड्ढे से लिए गैस के नमूने

प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस बल एवं ग्रामीणों की मौजूदगी में करीब दो घंटे तक जांच करती ONGC टीम; बोरवेल के पानी और गड्ढे में मौजूद गैस के सैंपल लेते विशेषज्ञ।
ONGC टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर सबसे पहले पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। इसके बाद बोरवेल के पानी का नमूना लिया गया। टीम ने बोरवेल के ठीक बाजू में स्थित उस गहरे गड्ढे की भी जांच की, जिसमें विद्युत मोटर रखी गई थी और जिसे निकालने के दौरान हादसे हुए थे। विशेषज्ञों ने उपकरण की मदद से गड्ढे के भीतर से गैस के नमूने एकत्र किए। इस जांच का उद्देश्य गड्ढे में मौजूद वातावरण की वैज्ञानिक स्थिति का पता लगाना है। गैस की प्रकृति, उसकी मात्रा तथा गड्ढे में ऑक्सीजन की उपलब्धता जैसे पहलुओं की जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। सैंपल लेने के बाद गड्ढे को दोबारा ढक दिया गया। इससे यह भी सुनिश्चित किया गया कि जांच पूरी होने के बाद कोई व्यक्ति अनजाने में गड्ढे के भीतर न उतर सके।
20 अगस्त को पिता-पुत्र की हुई थी मौत
नारायणपुरा में पहला हादसा 20 अगस्त को हुआ था। किसान उजागर लाल वर्मन (55) अपने बेटे अटील वर्मन (30) के साथ बोरवेल के बाजू में स्थित गहरे गड्ढे में रखी विद्युत मोटर को निकालने के लिए उतरे थे। दोनों की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दोनों की मौत का कारण दम घुटना बताया गया था। घटना के बाद गड्ढे में जहरीली गैस होने अथवा ऑक्सीजन की कमी की आशंका को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि उस समय इन आशंकाओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई थी। पहली घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराने और गड्ढे को सुरक्षित कराने की मांग की थी।

आठ दिन बाद फिर हादसा, सतीश की गई जान

पिता और बड़े भाई की मृत्यु होने के 8वें दिन पुनः उसी गलती को दोहराते हुए बोरवेल की मोटर निकालने गड्ढे में उतरे सतीश वर्मन की भी दर्दनाक मौत हो गई।
पहली घटना के आठ दिन बाद 28 अगस्त को उसी परिवार के 32 वर्षीय सतीश वर्मन भी विद्युत मोटर निकालने के लिए गड्ढे में उतर गए। कुछ देर बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। एक ही परिवार के पिता और दो बेटों की आठ दिन के भीतर मौत से नारायणपुरा गांव में शोक के साथ दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि पहली घटना के बाद यदि गड्ढे को तत्काल सुरक्षित तरीके से बंद कर दिया जाता और विशेषज्ञों की जांच होने तक उसमें उतरने पर रोक लगा दी जाती तो संभवतः दूसरे हादसे को टाला जा सकता था।

प्रशासन की लापरवाही पर भारी जनाक्रोश

वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद विद्युत मोटर वाले गहरे गड्ढे को प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षित तरीके से ढंकवाकर ग्रामीणों से ऊपर पत्थर रखवाए।
सतीश वर्मन की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी सामने आई। लोगों का स्पष्ट आरोप था कि पहली घटना के बाद गड्ढे को तत्काल बंद या सुरक्षित नहीं कराया गया। ग्रामीणों के अनुसार जब पहली घटना में पिता-पुत्र की मौत हो चुकी थी और गड्ढे के वातावरण को लेकर गंभीर आशंका पैदा हो गई थी, तब पुलिस और प्रशासन को विशेषज्ञों की जांच तथा रिपोर्ट आने तक गड्ढे को बंद करवा देना चाहिए था।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की इस कथित लापरवाही के कारण ही दूसरे हादसे की पुनरावृत्ति हुई। लोगों का कहना था कि यदि पहले हादसे के बाद गड्ढे को बंद करा दिया गया होता तो सतीश वर्मन को उसमें उतरने का मौका ही नहीं मिलता और संभवतः उनकी जान बच सकती थी। दूसरे हादसे के बाद जनाक्रोश बढ़ने पर पवई तहसीलदार रत्नराशि पाण्डेय ने नारायणपुरा पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से गड्ढे में रखी विद्युत मोटर को बाहर निकलवाया। इसके बाद गड्ढे में पत्थर भरवाकर उसे ऊपर से बंद करवा दिया गया।
कांग्रेस ने किया था चक्काजाम
सतीश वर्मन की मौत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई थी। पवई कस्बे के सलेहा मोड़ तिराहे पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार नामदेव के नेतृत्व में चक्काजाम किया गया था। कांग्रेस ने पहली घटना के बाद गड्ढे को सुरक्षित नहीं कराए जाने को पुलिस और प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी। मृतकों के आश्रितों को 50 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा गड्ढे में संभावित गैस रिसाव की विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग को लेकर शाहनगर एसडीएम रामनिवास चौधरी को ज्ञापन भी सौंपा गया था। एसडीएम की समझाइश के बाद चक्काजाम समाप्त किया गया।
कुआं-बोरवेल में उतरने से पहले बरतें सावधानी 
नारायणपुरा में बोरवेल हादसे की जांच के लिए पहुंची ONGC देहरादून की टीम के साथ पवई एसडीएम समीक्षा जैन, तहसीलदार रत्नराशि पाण्डेय, पंचायत प्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी एवं स्थानीय ग्रामीण।
ONGC (Oil and Natural Gas Corporation) विशेषज्ञों ने जांच के दौरान ग्रामीणों को खुले कुएं और बोरवेल में उतरने को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में गहरे और बंद स्थानों में ऑक्सीजन की कमी अथवा हानिकारक गैसों की मौजूदगी का खतरा हो सकता है। ऐसे स्थानों में बिना जांच किए उतरना जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों ने प्राथमिक स्तर पर ऑक्सीजन की स्थिति का अंदाजा लगाने के लिए मोमबत्ती की लौ का उदाहरण भी बताया, लेकिन यह सुरक्षित गैस या ऑक्सीजन जांच का वैज्ञानिक विकल्प नहीं है। ऐसे स्थानों में प्रवेश से पहले प्रशिक्षित विशेषज्ञों और उपयुक्त उपकरणों से जांच कराना जरूरी है।
अब नारायणपुरा में ONGC देहरादून की टीम द्वारा लिए गए पानी और गैस के नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार है। करीब दो से तीन सप्ताह बाद आने वाली लैब रिपोर्ट से यह पता चल सकेगा कि गड्ढे में वास्तव में किस प्रकार की गैस या अन्य घातक परिस्थितियां मौजूद थीं अथवा ऑक्सीजन की कमी थी और क्या वही 20 अगस्त तथा 28 अगस्त को हुए दोनों हादसों का कारण बनीं। रिपोर्ट के बाद ही हादसे के वास्तविक वैज्ञानिक कारणों और आगे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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पन्ना: घर में चल रहे अवैध फर्नीचर निर्माण पर वन विभाग ने मारा छापा, 21 नग सागौन चिरान जब्त

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ग्राम रैगढ़ में अवैध सागौन चिरान की सूचना पर कार्यवाही करते वन विभाग की टीम के सदस्य।

*    वन परिक्षेत्र देवेन्द्रनगर अंतर्गत रैगढ़ में मकान की तलाशी के दौरान 0.195 घन मीटर सागौन लकड़ी बरामद

*     मकान मालिक और फर्नीचर निर्माता के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण दर्ज

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) उत्तर वन मण्डल पन्ना के देवेन्द्रनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम रैगढ़ में वन विभाग ने अवैध सागौन लकड़ी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक मकान से 21 नग सागौन की चिरान/सिल्लियां जब्त की हैं। जब्त लकड़ी की कुल मात्रा 0.195 घन मीटर बताई गई है। वन विभाग की टीम ने मौके पर सागौन की लकड़ी से फर्नीचर निर्माण का कार्य भी पाया।
वन विभाग के अनुसार 26 अगस्त 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम रैगढ़ निवासी लाल बहादुर बागरी के रिहायशी मकान में अवैध रूप से सागौन की लकड़ी से फर्नीचर निर्माण कराया जा रहा है। सूचना की तस्दीक के बाद वन विभाग की टीम ने संबंधित मकान पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान मौके पर रघुवीर विश्वकर्मा निवासी इंटवा महंगू द्वारा फर्नीचर निर्माण का कार्य किया जाना पाया गया। मकान की तलाशी में 21 नग सागौन की चिरान/सिल्लियां मिलीं। वन विभाग ने लकड़ी को नियमानुसार जब्त कर पंचनामा तैयार किया।
वन विभाग के मुताबिक मामले में मकान मालिक लाल बहादुर बागरी और फर्नीचर निर्माता रघुवीर विश्वकर्मा के विरुद्ध मध्यप्रदेश वनोपज (व्यापार विनियमन) नियम, 1969 की धारा 5, 11, 15 एवं 16 के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।
वन विभाग की कार्रवाई में जब्त की गई सागौन चिरान/सिल्लियां।
यह कार्रवाई उत्तर वनमंडल पन्ना के वनमंडलाधिकारी धीरेंद्र प्रताप सिंह के निर्देशन तथा उपवनमंडलाधिकारी कृष्णा मरावी द्वारा जारी सर्च वारंट के अनुपालन में की गई। कार्रवाई में परिक्षेत्र सहायक रमाकांत गर्ग, बीट प्रभारी देवेन्द्रनगर एस.पी. राय, वनपाल प्रदीप गर्ग, कार्यवाहक वनपाल रावेन्द्र बागरी, वनरक्षक राकेश रजक, जीतेन्द्र कुमार लोध, विवेक चनपुरिया, मनीष शुक्ला सहित सुरक्षा श्रमिकों का योगदान रहा।
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पति ने सीढ़ियों से गिरने की गढ़ी कहानी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला नवविवाहिता की मौत का राज

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*   पुलिस ने मूक-बधिर पति, दादी सास और चाचा ससुर के खिलाफ दर्ज किया हत्या का मामला

*   गैरकानूनी हिरासत की रिपोर्ट्स को एसडीओपी ने बताया बेबुनियाद

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in)  मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में शाहनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गजंदा में 22 वर्षीय नवविवाहिता सावित्री बाई लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसके पति समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक तौर पर सीढ़ियों से गिरने से मौत की बात सामने आई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले पर लिगेचर सामग्री के दबाव से दम घुटने की संभावना सामने आने के बाद पुलिस की जांच की दिशा बदल गई।

मर्ग जांच के दौरान मिले कथित परिस्थितिजन्य एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पति जगदीश उर्फ बौरा, चाचा ससुर अम्मू लोधी और दादी सास रमिसिया बाई को आरोपी बनाया है। तीनों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया।

छत से गिरने की दी थी जानकारी

पुलिस के मुताबिक 7 जुलाई 2026 को सावित्री बाई की जिला अस्पताल कटनी में उपचार के दौरान मृत्यु की सूचना मिली थी। अस्पताल पुलिस चौकी कटनी में मर्ग कायम कर शव का पंचनामा और चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। मृतिका के नवविवाहिता होने के कारण पन्ना पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर मर्ग की अग्रिम जांच एसडीओपी पवई भावना दांगी को सौंपी गई।

जांच के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण, मौका नक्शा एवं फोटोग्राफ तैयार कराए गए। मायके और ससुराल पक्ष के सदस्यों के साथ-साथ घटना के समय आसपास मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। प्रारंभिक जानकारी में सावित्री की मौत छत की सीढ़ियों से गिरने के दौरान सिर में चोट लगने से होना बताया गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली जांच की दिशा

पुलिस के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक ने गले पर लिगेचर सामग्री से दबाव के कारण दम घुटना मृत्यु का संभावित कारण बताया। अन्य संभावनाओं की जांच के लिए विसरा सुरक्षित कर एफएसएल सागर भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संबंध में चिकित्सक से आवश्यक क्यूरी भी कराई गई।

जांच में सामने आए कथित साक्ष्यों और परिस्थितियों के समग्र परीक्षण के आधार पर पुलिस का कहना है कि 7 जुलाई की शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच सावित्री का अपने पति से विवाद हुआ था। पुलिस के अनुसार इसी दौरान पति ने उसके गले में फंदा डाल दिया, जिससे उसकी मौत हुई। इस दौरान गिरने से महिला के माथे पर चोट लगने की बात भी जांच में सामने आई है।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि मौके पर मौजूद अम्मू लोधी और रमिसिया बाई को घटना की वास्तविक स्थिति की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने मौत का कारण सीढ़ियों से गिरना बताया। इसी आधार पर दोनों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।

संकेतों की भाषा में हुई आरोपी पति से पूछताछ

इस मामले की विवेचना में पुलिस के सामने एक अलग चुनौती भी रही। आरोपी पति जगदीश उर्फ बौरा मूक-बधिर है। पुलिस के अनुसार, उससे पूछताछ और उसके बयान दर्ज करने के लिए संकेतों की भाषा का सहारा लेना पड़ा, जिसके चलते विवेचना में अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। जगदीश और सावित्री का विवाह वर्ष 2021 में हुआ था और दोनों की एक बेटी भी है।

पुलिस के मुताबिक घटना के समय जगदीश का पिता बालस्वरूप लोधी घर पर मौजूद नहीं था। वह ग्राम बोरी गया हुआ था। शाम करीब 7 बजे घर लौटने पर उसने सावित्री को अचेत हालत में देखा और वाहन की व्यवस्था कर उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल कटनी पहुंचाया था। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में बालस्वरूप के विरुद्ध ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर उसे आरोपी बनाया जा सके।

कथित हिरासत की चर्चा पर पुलिस का खंडन

कुछ मीडिया रिपोर्ट में आरोपियों को चार दिन तक पुलिस हिरासत में रखे जाने और बाद में कथित रूप से एक अन्य व्यक्ति को आरोपी न बनाए जाने जैसी चर्चाएं सामने आई हैं। इन खबरों को लेकर एसडीओपी पवई भावना दांगी ने स्पष्ट किया कि आरोपियों को पूछताछ, बयान दर्ज करने और विवेचना के सिलसिले में अलग-अलग अवसरों पर पुलिस के समक्ष बुलाया गया था और पूछताछ के बाद उन्हें वापस जाने दिया गया। जिसके साक्ष्य मौजूद हैं।उन्होंने चार दिन तक गैरकानूनी हिरासत में रखे जाने संबंधी दावे को बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया।

एसडीओपी के अनुसार, पुलिस ने 6 अगस्त को विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर हत्या का अपराध दर्ज किया और 7 अगस्त को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनका कहना है कि आरोपियों को प्रकरण में उनकी कथित संलिप्तता से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर आरोपी बनाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के समय मृतिका का ससुर मौके पर मौजूद नहीं था और अब तक की जांच में उसके विरुद्ध कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है।

हत्या सहित धाराओं में मामला दर्ज

मर्ग जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने थाना शाहनगर में जगदीश उर्फ बौरा, अम्मू लोधी और रमिसिया बाई के विरुद्ध धारा 103(1), 238 एवं 3(5) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया है। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले की विवेचना जारी है और एफएसएल जांच सहित अन्य प्रक्रियाओं के परिणाम आगे की जांच में महत्वपूर्ण होंगे।

पुलिस कार्रवाई में एसडीओपी पवई भावना दांगी, थाना प्रभारी शाहनगर डीएसपी परशुराम डाबर, चौकी प्रभारी बोरी उपनिरीक्षक संतोष मशराम सहित पुलिसकर्मियों का योगदान बताया गया है।

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संघर्ष के बीच डूब प्रभावितों को बड़ी राहत: केन-बेतवा लिंक समेत 3 सिंचाई परियोजनाओं के पुनर्वास के लिए 202.50 करोड़ रुपये अतिरिक्त मंजूर

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पन्ना एवं छतरपुर जिले के केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना डूब प्रभावित परिवारों का जारी है आंदोलन।

*     केबीएलपी अंतर्गत 8 ग्रामों के 313 नए परिवार विशेष विस्थापन पुनर्वास पैकेज में शामिल

*     रूंज और मझगांय परियोजनाओं के प्रत्येक विस्थापित परिवार को मिलेगा 7.50 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान

*     लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच मंत्रि-परिषद का बड़ा फैसला

*     पन्ना जिले के हजारों डूब प्रभावित परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ

शादिक खान, पन्ना/भोपाल।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP), रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित हजारों डूब प्रभावित परिवारों के लंबे संघर्ष के बीच गत दिवस मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में तीनों परियोजनाओं के पुनर्वास एवं विस्थापन के लिए 202 करोड़ 50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई। इस अतिरिक्त राशि में केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 39 करोड़ 12.50 लाख रुपये, रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 54 करोड़ 75 लाख रुपये तथा मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 108 करोड़ 75 लाख रुपये के विशेष पुनर्वास पैकेज शामिल हैं। यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब पन्ना और छतरपुर जिले के प्रभावित ग्रामीण उचित मुआवजा और समान पुनर्वास पैकेज की मांग को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले युवा समाजसेवी अमित भटनागर के नेतृत्व में चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। वर्तमान में भी आंदोलन जारी है। ऐसे में क्षेत्र में इस फैसले को डूब प्रभावितों के लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रस्तुत प्रस्तावों को चर्चा को के बाद स्वीकृति प्रदान की गई।

मंत्रि-परिषद ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना जिले के आठ डूब प्रभावित गांवों के लिए पुनर्वास नीति में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए कट-ऑफ तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले कृषि भूमि अधिग्रहण के लिए 21 जनवरी 2022 (भू-अर्जन अधिनियम की धारा-11 के प्रकाशन की तिथि) को कट-ऑफ मानकर 1,890 प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज में शामिल किया गया था। बाद में आबादी भूमि एवं निजी मकानों के लिए धारा-11 का प्रकाशन 15 मार्च 2024 को हुआ। प्रभावित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से यह मांग थी कि आबादी भूमि एवं मकानों के पुनर्वास के लिए 15 मार्च 2024 को ही आधार माना जाए। मंत्रि-परिषद ने इस मांग को स्वीकार करते हुए आबादी भूमि एवं मकानों के लिए 15 मार्च 2024 को नई कट-ऑफ तिथि मंजूर कर दी है। इसके परिणामस्वरूप 313 नए प्रभावित परिवार भी विशेष पुनर्वास पैकेज के दायरे में आ जाएंगे। इसके लिए 39 करोड़ 12.50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। अब केन-बेतवा लिंक परियोजना के विशेष पुनर्वास पैकेज पर कुल स्वीकृत व्यय बढ़कर 439 करोड़ 3.25 लाख रुपये हो जाएगा।
मंत्रि-परिषद ने रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित 730 डूब क्षेत्र प्रभावित परिवारों को भी बड़ी राहत दी है। पहले इन परिवारों के लिए 5 लाख रुपये प्रति परिवार की एकमुश्त पुनर्वास सहायता स्वीकृत थी। डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत अब केन-बेतवा लिंक परियोजना के समान पुनर्वास पैकेज देने के उद्देश्य से प्रत्येक परिवार को 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त विशेष अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 54 करोड़ 75 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई है। यह राशि रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति राशि 269 करोड़ 79 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।
इसी प्रकार मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के 1,450 विस्थापित परिवारों को भी बड़ी राहत मिली है। पहले यहां भी प्रति परिवार 5 लाख रुपये की पुनर्वास सहायता निर्धारित थी। पहले यहां भी प्रति परिवार 5 लाख रुपये की पुनर्वास सहायता निर्धारित थी। डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत अब प्रत्येक पात्र परिवार को 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त विशेष पुनर्वास सहायता दी जाएगी। इसके लिए 108 करोड़ 75 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। यह राशि मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के ‍लिए भूमि एवं परिसंपत्ति अधिग्रहण के लिए कुल स्वीकृत राशि 364 करोड़ 56 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।
उल्लेखनीय है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित पन्ना एवं छतरपुर जिले के हजारों ग्रामीण लंबे समय से समान पुनर्वास पैकेज, उचित मुआवजा और विस्थापन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। जय किसान संगठन के नेतृत्व में प्रभावित परिवार लगातार चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान प्रमुख मांगों में केन-बेतवा परियोजना की कट-ऑफ तिथि बढ़ाना तथा रूंज एवं मझगांय परियोजनाओं के प्रभावित परिवारों को भी केन-बेतवा परियोजना के समान 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार के पुनर्वास पैकेज का लाभ देना शामिल रहा है।
इसी आंदोलन के बीच मंत्रि-परिषद का यह फैसला सामने आया है। कट-ऑफ डेट में संशोधन के कारण केन-बेतवा परियोजना के 313 नए परिवारों को विशेष पुनर्वास पैकेज का लाभ मिलेगा, जबकि रूंज और मझगांय परियोजनाओं के हजारों विस्थापित परिवारों को भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। हालांकि आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी अन्य लंबित मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं क्षेत्र में इस निर्णय को डूब प्रभावित परिवारों के लंबे संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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MP News: दवा एजेंसियों की आड़ में नशे का कारोबार? 1.34 लाख बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप का हिसाब नहीं, दो एजेंसियां सील

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खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने बागरी एजेंसी में कफ सीरप खरीदी एवं बिक्री की जांच उपरांत एजेंसी को सील कर दिया।

  पन्ना की दो एजेंसियों ने महज 2-3माह में रिकॉर्ड मात्रा में खरीदा कफ सिरप

  बिक्री के दस्तावेज और प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड नहीं मिले

  जांच के दौरान एक एजेंसी संचालक प्रतिष्ठान बंद कर परिवार सहित गायब

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में क्या थोक एवं फुटकर दवा एजेंसियों की आड़ में नशे के लिए ऑनरेक्स कफ सिरप की अवैध आपूर्ति का नेटवर्क संचालित हो रहा था? खाद्य एवं औषधि प्रशासन की विशेष जांच में सामने आए तथ्य इस आशंका को बल देते नजर आ रहे हैं। जिले की दो दवा एजेंसियों द्वारा महज दो से तीन माह के भीतर लगभग 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने के बावजूद उसकी बिक्री अथवा वितरण से संबंधित अनिवार्य अभिलेख और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। जांच के तीसरे दिन एक एजेंसी का संचालक प्रतिष्ठान बंद कर परिवार सहित गायब मिला, जिसके बाद दोनों एजेंसियों को नियमानुसार सीलबंद कर दिया गया। मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है।
नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश, भोपाल के निर्देश तथा पन्ना कलेक्टर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ कार्यालय भोपाल द्वारा गठित विशेष जांच दल ने 3 से 5 जुलाई 2026 तक जिले में व्यापक जांच अभियान चलाया। सूत्रों के अनुसार पन्ना जिले में कफ सिरप के नियमविरुद्ध वितरण और संभावित दुरुपयोग को लेकर पहली बार इतनी व्यापक कार्रवाई की गई है। इससे जिले सहित आसपास के क्षेत्रों के दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद पन्ना जिले में भी इसकी व्यापक चर्चा है। आम लोगों का कहना है कि यदि महज दो-तीन माह के भीतर इतनी बड़ी मात्रा में ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदा गया और उसका विधिवत बिक्री रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। लोगों ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

45 हजार बोतलों का रिकॉर्ड नहीं दे सकी बागरी एजेंसी

जांच दल ने ग्राम कटन, तहसील गुनौर स्थित मेसर्स बागरी ड्रग एजेंसी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि एजेंसी ने पिछले लगभग एक माह में करीब 45 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदी थीं, लेकिन उनकी बिक्री अथवा वितरण से संबंधित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए। निरीक्षण में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन भी पाए गए। इसके आधार पर एजेंसी को तत्काल प्रभाव से सीलबंद कर दिया गया।

89 हजार बोतलों की खरीद, संचालक गायब

इसी क्रम में देवेंद्रनगर स्थित मेसर्स देवनाथ फार्मा की जांच की गई। जांच में सामने आया कि एजेंसी अपने लाइसेंस में दर्ज स्थान के बजाय दूसरे स्थान से संचालित की जा रही थी। यहां पिछले दो माह में लगभग 89 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने का रिकॉर्ड मिला। जांच दल ने लगातार दो दिन तक अभिलेखों का परीक्षण और अन्य औषधियों की जब्ती संबंधी कार्रवाई की। तीसरे दिन जब टीम दोबारा पहुंची तो प्रतिष्ठान पर ताला लगा मिला तथा मकान मालिक एवं एजेंसी संचालक परिवार सहित गायब था। इसके बाद नियमानुसार परिसर को भी सीलबंद कर दिया गया।

आखिर 1.34 लाख बोतल गई कहां?

दोनों एजेंसियां थोक एवं फुटकर दवा विक्रेता के रूप में पंजीकृत हैं। नियमानुसार इस प्रकार की दवाओं की बिक्री और वितरण का पूरा रिकॉर्ड, संबंधित चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन तथा अन्य आवश्यक अभिलेख सुरक्षित रखना अनिवार्य होता है। लेकिन जांच के दौरान एजेंसियां इतनी बड़ी मात्रा में खरीदे गए ऑनरेक्स कफ सिरप की बिक्री अथवा वितरण का वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकीं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर करीब 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप किन लोगों को और किस आधार पर उपलब्ध कराया गया। यही अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

नशे के रूप में दुरुपयोग की आशंका 

कफ सिरप का चिकित्सकीय उपयोग पूरी तरह वैध और आवश्यक है, लेकिन लंबे समय से यह भी सामने आता रहा है कि कुछ लोग विशेष प्रकार के कफ सिरप का नशे के रूप में दुरुपयोग करते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की दो एजेंसियों द्वारा बेहद कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में ऑनरेक्स कफ सिरप की खरीद, उसके वितरण का रिकॉर्ड उपलब्ध न होना तथा जांच के दौरान एक संचालक का प्रतिष्ठान बंद कर गायब हो जाना पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। इसी कारण जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवा वास्तविक मरीजों तक पहुंची या उसका कहीं अवैध उपयोग अथवा दुरुपयोग हुआ।

जिलेभर के दवा कारोबारियों में मचा हड़कंप

विशेष जांच दल की कार्रवाई के बाद पन्ना सहित आसपास के जिलों के दवा कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है। माना जा रहा है कि अब ऐसे अन्य थोक एवं फुटकर दवा प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा सकती है, जहां नियंत्रित औषधियों की असामान्य मात्रा में खरीद-बिक्री हुई है। यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। इस विशेष जांच दल में पन्ना की औषधि निरीक्षक महिमा जैन, छतरपुर के औषधि निरीक्षक अजीत जैन, सतना की औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, पन्ना का स्टाफ शामिल रहा।
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पन्ना: वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन की जांच, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने किया निरीक्षण

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भोपाल से आए वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा अमित साहू प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में अवैध खनन संबंधी शिकायत की जांच की गई।

*      उत्तर सामान्य वन मण्डल के वन परिक्षेत्र धरमपुर का मामला

*     कांग्रेस नेता की विस्तृत शिकायत पर हरकत में आया वन विभाग

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के उत्तर सामान्य वन मंडल की धरमपुर रेंज में कथित अवैध खनन और विभागीय अनियमितताओं का मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के निर्देश पर वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता (स्टेट लेवल फ्लाइंग स्क्वॉड) ने बीते सप्ताह पन्ना पहुंचकर 2 और 3 जुलाई को लगातार दो दिन धरमपुर वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन से जुड़े स्थलों का सघन निरीक्षण किया। जांच दल ने वन सीमा चिन्हित कर मौके की स्थिति का परीक्षण किया और पंचनामा तैयार किए। कई माह से सुर्ख़ियों में बने वन परिक्षेत्र धरमपुर एवं अजयगढ़ की उच्च स्तरीय शिकायतों के बाद पन्ना से लेकर वन भवन भोपाल तक हलचल तेज हो गई है। जांच दल के अधिकारियों ने मीडिया में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि इसके लिए वे अधिकृत नहीं है। स्थानीय कांग्रेस नेता की शिकायत पर हुई इस जांच की रिपोर्ट संभवतः इसी सप्ताह पीसीसीएफ को सौंपी जाएगी।

9 बिंदुओं की विस्तृत शिकायत

जांच के दौरान तैयार पंचनमा पर हस्ताक्षर करते हुए शिकायतकर्ता भरत मिलन पांडेय।

जानकारी के अनुसार वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडेय ने 27 मई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) भोपाल से नौ बिंदुओं पर आधारित विस्तृत लिखित शिकायत की गई थी। शिकायत में धरमपुर वन परिक्षेत्र में अवैध खनन, वन भूमि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं तथा विभिन्न विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नीलम कंस्ट्रक्शन एवं भगवती कंस्ट्रक्शन द्वारा वन भूमि कथित रूप से से क्रेशर लगाकर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया और वन एवं पर्यावरण के साथ शासन के राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई गई। इसके अलावा शिकायत में पिष्टा क्षेत्र में भारा तालाब निर्माण की आड़ में बड़े पैमाने पर खनिज संपदा के अवैध उत्खनन का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि तालाब निर्माण की आड़ में निकाले गए खनिज का वैधानिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

पौधारोपण और सड़क निर्माण कार्य भी शामिल

कांग्रेस नेता की शिकायत केवल कथित अवैध खनन तक सीमित नहीं है। इसमें तेंदूपत्ता शाखा-कर्तन कार्यों में वन समिति अध्यक्षों के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान निकाले जाने, वन भूमि पर अतिक्रमण की अनदेखी, बिना वैधानिक स्वीकृति ग्रामीण पहुंच मार्गों का निर्माण कराने तथा पौधारोपण क्षेत्र तैयारी कार्यों में व्यापक आर्थिक अनियमितताओं और गुणवत्ताहीन कार्य कराए जाने के आरोप भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अटल भूजल योजना के तहत धरमपुर रेंज में निर्मित कई जल संरचनाएं गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरतीं और इनमें शासकीय राशि का दुरुपयोग हुआ है। हालांकि उड़नदस्ता दल ने स्पष्ट किया कि इन कार्यों की जांच उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती। शिकायतकर्ता को उक्त कार्यों की जांच हेतु विभागीय शिकायत एवं सतर्कता प्रकोष्ठ से संपर्क करने का सुझाव दिया गया।

तत्कालीन रेंजर के संरक्षण में हुई अनियमितताएं

प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल से की गई शिकायत का प्रथम पृष्ठ।

शिकायत में तत्कालीन धरमपुर रेंजर वैभव सिंह चंदेल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा मैदानी वन अमले की मिलीभगत से वन संपदा के दोहन की अघोषित छूट देकर और विभागीय कार्यों में फर्जीवाड़ा करके अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की गई। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए। इसी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद अमित साहू प्रभारी अधिकारी के नेतृत्व में उड़नदस्ता दल ने पन्ना पहुंचकर दो दिनों तक विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान उड़नदस्ता दल ने कथित अवैध खनन से जुड़े स्थलों का निरीक्षण कर वन सीमा का चिन्हांकन कराया तथा मौके की वास्तविक स्थिति के आधार पर पंचनामे तैयार किए। जांच के समय धरमपुर रेंज के प्रभारी रेंजर अजय बाजपेयी, संबंधित सर्किल प्रभारी, बीटगार्ड, शिकायतकर्ता भरत मिलन पांडेय तथा स्थानीय पत्रकार भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल अपनी जांच रिपोर्ट इसी सप्ताह अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) अमित दुबे को सौंपेगा। इसके बाद रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर उत्सुकता बनी हुई है कि जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और उनके आधार पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े विभागीय कार्य

राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल द्वारा वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की गई।

धरमपुर और अजयगढ़ रेंज पिछले काफी समय से विभागीय कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। विशेष रूप से पौधारोपण क्षेत्र तैयारी कार्य, अटल भूजल योजना के तहत निर्मित जल संरचनाएं, वन संरक्षण से जुड़े विकास कार्य तथा अन्य निर्माण गतिविधियों को लेकर समय-समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। इन मामलों से संबंधित शिकायतें लोकायुक्त संगठन से लेकर उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई और अंततः दोनों रेंजों के तत्कालीन रेंजरों का स्थानांतरण भी हो गया। हालांकि स्थानांतरण के बावजूद उनके कार्यकाल में कराए गए कार्यों को लेकर उठे सवाल अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। बीते कुछ महीनों में धरमपुर और अजयगढ़ रेंज में पौधारोपण क्षेत्र तैयारी कार्यों की गुणवत्ता, अटल भूजल योजना के अंतर्गत बनाए गए तालाबों की उपयोगिता तथा अन्य निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में हैं। इन मामलों में प्रकाशित समाचारों और उच्च स्तर पर हुई शिकायतों के बाद विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

शिकायत की टाइमिंग पर भी उठ रहे सवाल

वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने शिकायत में उल्लेखित कथित अवैध खनन वाले स्थलों का दो दिन तक सघन निरीक्षण किया।

धरमपुर वन परिक्षेत्र में कथित अवैध खनन और विभागीय अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत की टाइमिंग चर्चा का विषय बनी है। पूरे मामले कुछ माह पहले हुई वन अपराध संबंधी कार्रवाई की पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है। विदित हो कि लगभग तीन माह पूर्व धरमपुर वन परिक्षेत्र के मैदानी वन अमले ने कथित रूप से वन क्षेत्र से पत्थर का अवैध परिवहन करते हुए एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा था। वन विभाग का दावा था कि उक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडेय के भाई से संबंधित थी। कार्रवाई की जानकारी मिलने पर भरत मिलन पांडेय, उनके बड़े भाई और भतीजे मौके पर पहुंच गए थे। इस दौरान वन अमले और संबंधित लोगों के बीच विवाद हुआ। विभाग का आरोप था कि विवाद के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली को जबरन छुड़ाकर ले जाया गया। इसके बाद वन विभाग की ओर से अजयगढ़ थाना में लिखित शिकायत करने पर पुलिस ने कई संगीन धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया। इस प्रकरण में पुलिस ने भरत मिलन पांडेय को जबलपुर से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। बाद में उन्हें उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। इस मामले में उनके भतीजे की भी गिरफ्तारी हुई थी। जेल से रिहा होने के बाद भरत मिलन पांडेय ने तत्कालीन धरमपुर रेंजर और मैदानी वन अमले के विरुद्ध विस्तृत शिकायत दर्ज कराई। वन विभाग और राजनीतिक हलकों में शिकायत को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इस वन कर्मचारियों को सबक सिखाने अथवा बदले की भावना से जोड़कर देख रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता भरत मिलन पांडेय और उनके परिजनों पर भी पहले भी कई बार अवैध खनन कारोबार से जुड़े होने गंभीर आरोप लग चुके हैं।
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व्यापारी पुत्र के अपहरण और फिरौती कांड का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार

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पवई थाना पुलिस टीम की अभिरक्षा में व्यापारी पुत्र का अपहरण करने वाले आरोपीगण।

*     पहले युवक को सकुशल छुड़ाया अब तीनों अपहरणकर्ताओं को हथियार समेत दबोंचा

*     सोशल मीडिया पर अमीरी का प्रदर्शन बना अपहरण की वजह

*     युवक की रील्स देखकर आरोपियों ने बनाई थी अपहरण की योजना

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में पवई क़स्बा निवासी कपड़ा व्यापारी के 19 वर्षीय पुत्र अंशुल उर्फ कान्हा डेंगरे के अपहरण एवं फिरौती मांगने के सनसनीखेज मामले में पन्ना पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर प्रकरण का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक देशी पिस्टल, दो देशी कट्टे, एक जिंदा कारतूस तथा दो मोटरसाइकिल बरामद की गई हैं। साथ ही फिरौती के रूप में भेजी गई 1.48 लाख रुपये की राशि भी आरोपी के बैंक खाते में होल्ड करा दी गई है।
गौरतलब है कि गत दिनों पवई के कपड़ा व्यापारी राजेश कुमार डेंगरे के पुत्र अंशुल उर्फ कान्हा का अपहरण कर उसके परिजनों से 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। घटना सामने आते ही पवई क्षेत्र सहित पूरे जिले में भय और दहशत का माहौल बन गया था। मामले को लेकर लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी नाराजगी और चिंता देखने को मिली थी। घटना के प्रकाश में आने के बाद से ही पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लेते हुए एसडीओपी पवई श्रीमती भावना दांगी के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी पवई निरीक्षक सुशील कुमार अहिरवार के नेतृत्व में कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस टीम ने त्वरित प्रयास करते हुए अपहृत युवक को सकुशल दस्तयाब कर उसके परिजनों को सौंप दिया था, हालांकि उस समय आरोपी फरार होने में सफल रहे थे।
पुलिस के अनुसार इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया गया। चौतरफा घेराबंदी, तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर सूचना तथा सतत पतारसी के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अपहृत युवक सोशल मीडिया पर महंगे मोबाइल और अपनी समृद्ध जीवनशैली का प्रदर्शन करता था। इसी आधार पर उसे आर्थिक रूप से संपन्न मानते हुए अपहरण की योजना बनाई गई और उसके परिजनों से फिरौती मांगी गई।

अपहरणकर्ताओं के कब्जे से बरामद अवैध हथियारों को पुलिस ने जब्त किया।

पुलिस के मुताबिक घटना के दौरान भयवश परिजनों ने आरोपी राजकमल रजक के बैंक खाते में 1 लाख 48 हजार रुपये स्थानांतरित किए थे। साइबर सेल की सहायता से एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से उक्त राशि पर तत्काल होल्ड लगवा दिया गया, जिससे आरोपी रकम नहीं निकाल सके। पुलिस का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद यह राशि फरियादी को वापस कराई जाएगी।
जानकारी अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में सिमराकला निवासी 19 वर्षीय राजकमल रजक, 25 वर्षीय राजकुमार पाल तथा 18 वर्षीय शिवेंद्र सिंह शामिल हैं। तीनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में उप जेल पवई भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक देशी पिस्टल, दो देशी कट्टे, एक जिंदा कारतूस तथा घटना में प्रयुक्त दो मोटरसाइकिल जब्त करने का दावा किया है।
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