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बड़ा बदलाव: बाघों की मौजूदगी वाले सामान्य वन क्षेत्रों में भी अब एम-स्ट्राइप्स एप से होगी निगरानी

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एम-स्ट्राइप्स ऐप संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सामान्य वनमण्डल के वनकर्मी।

   1 जून से डिजिटल गश्त शुरू करने की तैयारी, वन अमले को दिया जा रहा प्रशिक्षण

*      वन्यजीव सुरक्षा मजबूत करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर फोकस

*      प्रदेश में बढ़ती बाघ आबादी के बीच वन विभाग का बड़ा फैसला

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में बाघ, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों की लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए वन विभाग ने उनकी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब तक प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) एप का विस्तार सामान्य वन क्षेत्रों तक किया जा रहा है। इसके तहत उन सभी वन मंडलों में, जहां बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई है, 1 जून 2026 से एम-स्ट्राइप्स आधारित गश्त शुरू की जाएगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखना ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना भी है। वन विभाग का मानना है कि वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की नियमित निगरानी से संभावित संघर्ष वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान की जा सकेगी और आवश्यक प्रबंधन उपाय किए जा सकेंगे। इसी क्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व लंबे समय से एम-स्ट्राइप्स तकनीक के माध्यम से बाघों की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अब इसी अनुभव का लाभ सामान्य वन मंडलों के मैदानी अमले को दिया जा रहा है, ताकि टाइगर रिजर्व के बाहर भी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक समान, आधुनिक और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली विकसित की जा सके। प्रशिक्षण के दौरान वन कर्मचारियों को एम-स्ट्राइप्स के नवीनतम सॉफ्टवेयर, डेटा एंट्री प्रणाली और फील्ड मॉनिटरिंग की तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार इस एप के माध्यम से मानव हस्तक्षेप, जल स्रोतों की उपलब्धता, शिकार की घटनाओं, शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों की उपस्थिति तथा अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य डिजिटल रूप से दर्ज किए जा सकते हैं।
वैज्ञानिक डेटा के आधार पर बनेगी संरक्षण रणनीति
एम-स्ट्राइप्स प्रणाली के जरिए एकत्र होने वाला डेटा वन विभाग को वन्यजीवों की गतिविधियों का वास्तविक आकलन करने में मदद करेगा। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, गश्त की प्रभावशीलता बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण संबंधी निर्णयों को अधिक सटीक बनाने में सहायता मिलेगी। पन्ना टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम ने प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों की तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया, जिससे उन्हें फील्ड में एप के प्रभावी उपयोग की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 26 मई को उत्तर पन्ना वन मंडल तथा 28 मई को दक्षिण पन्ना एवं छतरपुर वन मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। वन अधिकारियों के अनुसार टाइगर रिजर्व में सफल साबित हुई यह तकनीक अब सामान्य वन क्षेत्रों में भी वन्यजीव सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगी। इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर अधिक सटीक एवं रियल टाइम निगरानी संभव होगी, वहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और संरक्षण प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।

मौत का कुआं: मिट्टी धंसने से जिंदा दफन हुए 5 मजदूर, अब तक 2 शव निकाले; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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*     पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में कुएं की खुदाई के दौरान बड़ा हादसा

*     पंचायत द्वारा ठेके पर कराया जा रहा था निर्मल नीर का निर्माण

*    बिना सुरक्षा इंतजाम मजदूरों को उतारा गया था गहरे गड्ढे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बिहरपुरवा के ग्राम कड़रहा में मंगलवार सुबह मनरेगा (वीबीजीरामजी) के तहत चल रहे सार्वजनिक कुएं (निर्मल नीर) की खुदाई के दौरान ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। निर्माणाधीन कुएं की मिट्टी अचानक भरभराकर धंस गई और अंदर काम कर रहे पांच मजदूर देखते ही देखते मिट्टी के नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं, जबकि परिजन मजदूरों को जल्द बाहर निकालने की गुहार लगाते रहे।

पानी पीने बाहर आया मजदूर, बच गई जान

बताया जा रहा है कि हादसे से कुछ मिनट पहले एक मजदूर पानी पीने के लिए कुएं से बाहर निकला था। उसी दौरान अचानक कुएं की दीवार और मिट्टी धंस गई। भीतर काम कर रहे पांच मजदूर मिट्टी में समा गए। बाहर मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और पंचायत अमला मौके पर पहुंचा। जेसीबी मशीनों की मदद से बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अब तक दो मजदूरों के शव बाहर निकाले जा चुके है, जबकि तीन अन्य मजदूरों के अब भी मिट्टी में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

“आज मेरी जगह पिता काम पर गए थे” : राकेश यादव

घटना के बाद गांव के युवक राकेश यादव का बयान सामने आया है, जिसने हादसे को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। राकेश यादव ने आरोप लगाया कि कुएं का निर्माण कार्य ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा अघोषित रूप से ठेके पर कराया जा रहा था। राकेश ने बताया कि यह वही कुआं है जो पिछले साल भी धंस गया था, बावजूद इसके सुरक्षा इंतजाम किए बिना दोबारा काम शुरू करा दिया गया। उसने बताया कि मिट्टी के नीचे दबे सभी मजदूर एक ही परिवार के सदस्य हैं। राकेश ने भावुक होकर कहा कि आज उसकी जगह काम पर उसके पिता गए हुए थे और तभी यह भीषण हादसा हो गया। युवक के इस बयान के बाद ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

घटनास्थल बना मलबे का पहाड़

घटनास्थल पर चारों ओर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं। निर्माण स्थल बेहद गहरा और जोखिमपूर्ण बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक मजदूरों को बिना किसी तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के कुएं के अंदर उतारा गया था। बिना हेलमेट, पर्याप्त रस्सी, बिना सुरक्षा गियर्स कराया जा रहा था काम हादसे ने ग्राम पंचायत बिहरपुरवा और जनपद पंचायत अजयगढ़ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार मजदूरों को कई फीट गहरे निर्माणाधीन कुएं में उतारकर खुदाई कराई जा रही थी, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम मौजूद नहीं थे। न ही मिट्टी धंसने से बचाव के कोई तकनीकी उपाय किए गए थे। इतने जोखिमपूर्ण कार्य के बावजूद सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों ने मजदूरों की जान को जोखिम में डालकर यह कार्य क्यों कराया।

जिम्मेदार कौन?

मनरेगा जैसे सरकारी कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित पंचायत, तकनीकी अमले और जनपद प्रशासन की जिम्मेदारी मानी जाती है। लेकिन कड़रहा हादसे ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सुरक्षा इंतजाम जाते और मजदूरों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण दिए गए होते तो शायद यह हादसा इतना भयावह नहीं होता। फिलहाल पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर लोगों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्राउण्ड रिपोर्ट: पीटीआर ने जल निगम को दी जंगल और बेजुबान वन्यजीवों के रहवास उजाड़ने की अनुमति!

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पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत पन्ना बफर रेंज के पर्यटन क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए ठेका कंपनी द्वारा मनमाने तरीके से पेड़ उखाड़कर शर्तों का उल्लंघन करने के साथ वन्यप्राणियों के रहवास को नष्ट किया गया। देखें तबाही की तस्वीरें-

   वन चौकी के सामने पाइपलाइन बिछाने आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ डाले, तमाशबीन बने रहे वनरक्षक

   पन्ना बफर रेंज के पर्यटन क्षेत्र अंतर्गत अस्थायी कैंप घुर्रहो और अमरचुआ का मामला

   डेढ़ माह बाद भी न वन अपराध दर्ज हुआ, न ठेकेदार की पोकलेन मशीनें जब्त हुईं

   वन संपदा विनाश से जुड़े गंभीर मामले को रफा-दफा करने में जुटे रेंजर, एडी और डीडी

   800 करोड़ की परियोजना में व्यापक पर्यावरणीय नुकसान, ‘लेटर-लेटर’ खेल से उठे संदेह

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में न तो बाघ सुरक्षित हैं और न ही बहुमूल्य वन संपदा। महीने भर के भीतर दो बाघों की संदेहास्पद मौत की घटनाओं को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि अब जनहित से जुड़े कार्यों की कथित अनुमति की आड़ में बेशकीमती वन संपदा के विनाश और निरीह वन्यजीवों के रहवास उजाड़ने का मामला उजागर हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना बफर रेंज अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन बिछाने के लिए जारी की गई अनुमति/अनापत्ति अब वन संपदा विनाश के लाइसेंस में तब्दील होती नजर आ रही है। वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कानूनों को ताक पर रखकर आरक्षित वन क्षेत्र में कराए जा रहे कार्यों को कथित तौर पर पार्क के जिम्मेदार अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।
लगभग 800 करोड़ रुपये लागत वाली सिंघौरा-2 समूह जल प्रदाय योजना में ठेका कंपनी की पोकलेन मशीनों ने दिनदहाड़े नियम-कानूनों और अनुमति की शर्तों की धज्जियां उड़ाते हुए आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ डाले। पाइपलाइन बिछाने के लिए अनियंत्रित तरीके से गहरी नालियां खोदकर बेजुबान वन्यजीवों का रहवास उजाड़ दिया गया। यह सब वन चौकी के सामने होता रहा, लेकिन मैदानी वन अमला पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा। हद तो तब हो गई जब मामला रेंजर से लेकर सहायक संचालक और उप संचालक के संज्ञान में आने के डेढ़ माह बाद भी संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार वन अपराध प्रकरण कायम नहीं किया गया और न ही ठेका कंपनी की पोकलेन मशीनें जब्त की गईं। संवेदनशील मामले में जिम्मेदार वन अधिकारियों की उदासीनता से उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 60 किलोमीटर दूर अजयगढ़ विकासखंड में पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के वन परिक्षेत्र पन्ना बफर अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत सिंघौरा-2 प्रोजेक्ट की पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। 800 करोड़ रुपये की इस पेयजल परियोजना का निर्माण कार्य कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) को सौंपा गया है। वर्तमान में पन्ना बफर के पर्यटन क्षेत्र कैंप घुर्रहो के समीप तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाली जा चुकी है। हालांकि इस कार्य के लिए जल निगम पन्ना ने पीटीआर से विधिवत अनुमति/अनापत्ति प्राप्त की है, लेकिन जिन कड़ी शर्तों के साथ जनहित से जुड़े इस विकास कार्य की अनुमति जारी की गई थी, उनका मौके पर पालन नहीं कराया जा रहा है।
टाइगर, तेंदुआ, भालू समेत अन्य वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र वाले घने जंगल में ठेका कंपनी केपीआईएल द्वारा गंभीर लापरवाही बरतते हुए आधा सैकड़ा पेड़ों को उखाड़ डाला गया। पाइपलाइन बिछाने के लिए दो पोकलेन मशीनों से गहरी नालियों की खुदाई कराई गई और रास्ते में आने वाले या आसपास खड़े वर्षों पुराने हरे-भरे वृक्षों को उखाड़कर फेंक दिया गया। इस अनियंत्रित कार्य का सबसे बड़ा खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ा। नालियों की खुदाई और मिट्टी की भराई के दौरान असंख्य वन्यजीवों के रहवास नष्ट हो गए। पन्ना बफर रेंज के बनहरी, घुर्रहो घाटी से लेकर छापर-दहलान चौकी तक के जंगलों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ उखाड़ने और वन्यजीवों के रहवास तबाह होने के साक्ष्य मौजूद हैं।
पन्ना बफर रेंज के अस्थाई कैंप धुर्रहो के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों को क्षति पहुंचाई गई। साथ ही पेड़ उखाड़ने पाइप लाइन बिछाने नाली की खुदाई और पुराव में बेजुबान वन्यजीवों के रहवास को अपूरणीय क्षति पहुंची।
परियोजना के लिए वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत स्पष्ट शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी कि कार्य के दौरान वन संपदा और वन्यजीवों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाएगी। इसके बावजूद न केवल पेड़ों का विनाश हुआ, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंचा। क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल और सांभर जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो वन्यजीवों का विस्थापन बढ़ेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के डेढ़ माह बाद भी न तो वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया और न ही मौके पर उपयोग की गई मशीनों को जब्त किया गया। जबकि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 और 33 के तहत अवैध वृक्ष कटाई पर तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 29 के अनुसार संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचाने पर अपराध दर्ज कर संबंधित उपकरण जब्त किए जाने चाहिए। इन स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद कार्रवाई का अभाव अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। सूत्रों की मानें तो समूह जल प्रदाय योजना से जुड़े तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदार पर दबाव बनाने की मंशा से पीटीआर प्रबंधन कई दिनों तक ‘लेटर-लेटर’ का खेल खेलता रहा। बाद में कथित तौर पर अंदरखाने मामला सेट होने के बाद अब इसे रफा-दफा करने की कागजी कार्रवाई की जा रही है।

पेड़ कटाई की यह है प्रक्रिया

वन क्षेत्र में होने वाले विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए सर्वप्रथम क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अनुमति प्राप्त की जाती है। संबंधित वन मंडल आवेदन एवं सहपत्रों की जांच के बाद उन्हें वरिष्ठ कार्यालय को अग्रेषित करता है। संरक्षित अथवा आरक्षित वन क्षेत्र में कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा कड़ी शर्तों के साथ अनुमति जारी की जाती है। यदि किसी कार्य में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित हो तो संबंधित एजेंसी और वन अधिकारी संयुक्त रूप से स्थल पर पेड़ों को चिन्हित करते हैं। इसके बाद वन मंडल द्वारा विदोहन योजना तैयार की जाती है। प्रभावित वृक्षों की कटाई और परिवहन की राशि निर्माण एजेंसी से जमा कराने के बाद वन अमला अपनी उपस्थिति में वैज्ञानिक तरीके से वृक्षों की सावधानीपूर्वक कटाई कराता है, ताकि राजस्व की हानि न हो।
यहां यह उल्लेखनीय है कि समूह जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन बिछाने के दौरान वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की निर्धारित प्रक्रिया का मौके पर पालन नहीं कराया गया। ठेका फर्म कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) की पोकलेन मशीनों ने पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में मनमाने तरीके से आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ फेंके। इससे वृक्ष और उनकी शाखाएं कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गईं। जानकारों का मानना है कि पोकलेन से उखाड़े गए वृक्षों की काष्ठ नीलामी में वन विभाग को राजस्व की हानि भी उठानी पड़ सकती है।

न अपराध दर्ज, न मशीनों की जब्ती

जल निगम पन्ना के द्वारा सिंघौरा-2 प्रोजेक्ट अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजना की पाइप लाइन बिछाने का कार्य जारी है।
प्रकरण में पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल की भूमिका भी चर्चा में है। उन्होंने मीडिया के सामने ऑन कैमरा बयान देने से परहेज किया और अनौपचारिक बातचीत में विरोधाभासी जवाब दिए। एक ओर वे समूह जल प्रदाय योजना में लगभग 1505 पेड़ों की कटाई की अनुमति का हवाला देते हैं, वहीं दूसरी ओर जल निगम महाप्रबंधक पन्ना को नोटिस जारी करने की बात स्वीकारते हैं। यदि कार्य पूरी तरह नियमों के तहत हो रहा था तो नोटिस क्यों? और यदि उल्लंघन हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उनके जवाब इन सवालों को और उलझाते हैं। सूत्रों के अनुसार मामले को दबाने और संबंधित एजेंसी पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिशों की भी चर्चा है। 800 करोड़ रुपये की परियोजना में ‘लेटर-लेटर’ का खेल और कार्रवाई में देरी इन आशंकाओं को बल देती है।
अजयगढ़ के समीप स्थित जल शोधन संयत्र के निर्माणाधीन परिसर में स्थित ठेका कंपनी कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) का कार्यालय।
गौरतलब है कि हाल ही में पीटीआर क्षेत्र में दो बाघों की संदिग्ध मौतें भी सामने आई थीं। ऐसे में वन संपदा के इस खुले दोहन ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पन्ना टाइगर रिजर्व में जंगल और वन्यजीव वास्तव में सुरक्षित हैं या फिर संरक्षण के नाम पर विनाश की पटकथा लिखी जा रही है। पूरे मामले ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब जरूरत निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की है, ताकि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित न रह जाए। इस खबर के संबंध में जल निगम पन्ना के महाप्रबंधक शिवम सिन्हा से संपर्क किया गया, लेकिन कई बार रिंग जाने के बावजूद उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

इनका कहना है-

“पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा हमें नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब अभी नहीं दिया गया है। फिलहाल वन क्षेत्र में काम बंद है, लेकिन हमारी मशीनरी जब्त नहीं हुई। अनुमति लेकर कार्य कराया जा रहा है, जिसमें पेड़ों की कटाई शामिल है। आपकी यह बात सही है कि पेड़ों की कटाई वन विभाग कराता है, ठेका कंपनी नहीं।”

– पतिराम गुर्जर, प्रोजेक्ट हेड, केपीआईएल कैंप पन्ना।

“जल निगम की दो परियोजनाओं को भारत सरकार द्वारा सशर्त अनुमति जारी की गई है। एक परियोजना में 724 तथा दूसरी में 781 वृक्ष काटे जाने हैं। ठेका कंपनी द्वारा पेड़ों को उखाड़ने की सूचना मिलने पर जल निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विदोहन की कार्रवाई के उपरांत कार्य शुरू कराया जाएगा।”

– बीरेन्द्र कुमार पटेल, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

PWD का एक्शन: लापरवाह ठेकेदारों पर गिरी गाज, बैंक गारंटी जब्त से लेकर ब्लैकलिस्ट तक कार्रवाई

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कार्यालय कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)

*       समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित कराने कार्यपालन यंत्री ने की सख्ती

*       कार्रवाई की जद में आए ठेकेदारों में जबरदस्त हड़कंप

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना में सड़क निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर अब सख्ती का दौर शुरू हो गया है। तय समयसीमा में गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप कार्य पूर्ण कराने को लेकर कार्यपालन यंत्री जे.पी. सोनकर द्वारा लगातार की जा रही कठोर कार्रवाई से विभागीय ठेकेदारों में जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण और गारंटी पीरियड वाली सड़कों के संधारण कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने वाले लगभग दो दर्जन संविदाकारों के विरुद्ध चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई है। इनमें बैंक गारंटी राजसात करना, अनुबंध समाप्त और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई शामिल है।

बैंक गारंटी राजसात कर लाखों रुपये लोनिवि खाते में जमा

प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यपालन यंत्री द्वारा 8 लापरवाह ठेकेदारों की बैंक गारंटी (सुरक्षा निधि) राजसात कर संबंधित बैंकों से जमा राशि पीडब्ल्यूडी खाते में अंतरित करा ली गई है। विभाग द्वारा जिन कार्यों में यह कार्रवाई की गई उनमें मोहन्द्रा-रैपुरा मार्ग के नवीनीकरण कार्य में मेसर्स श्री बिल्डअप प्राइवेट लिमिटेड छतरपुर की 11 लाख 11 हजार 847 रुपये, अमानगंज-गुनौर-सुवंशा मार्ग के नवीनीकरण कार्य में मेसर्स व्ही.एस. कंस्ट्रक्शन सतना की 15 लाख 31 हजार 686 रुपये, शाहनगर-हरदुआ-ठेपा बोरी मार्ग के मजबूतीकरण कार्य में मेसर्स पूजाबोर वेल्स की 12 लाख 91 हजार रुपये, मोहन्द्रा-गोल्ही-पलोही मार्ग की ठेका कंपनी मेसर्स आरएसव्ही इंफ़्रा तथा कृष्णा कल्याणपुर से दहलानचौकी वाया रानीपुर मार्ग के नवीनीकरण कार्य में मेसर्स जयमहाकाल कंस्ट्रक्शन की 8 लाख 96 हजार 168 रुपये की सुरक्षा निधि राजसात की गई है। इसके अलावा सुनहरा पहुंच मार्ग, गांधीग्राम पहुंच मार्ग तथा गांधीग्राम से रानीपुर पहुंच मार्ग के कार्यों में ठेकेदार संतोष कुमार गुप्ता की भी बैंक गारंटी राशि राजसात की गई है। इस तरह अब तक कुल 8 ठेकेदारों की 50 लाख 39 हजार 171 रुपए की बैंक गारंटी राशि राजसात की गई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा में कार्य पूर्ण नहीं किए गए तो विभाग शेष कार्यों के लिए नई निविदाएं जारी करेगा तथा भुगतान संबंधित ठेकेदारों की सुरक्षा निधि से किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का सीधा असर संबंधित फर्मों की साख और भविष्य के अनुभव प्रमाण-पत्रों पर पड़ेगा। यही वजह है कि बैंक गारंटी राजसात होते ही कई ठेकेदार अधूरे पड़े कार्यों को पूरा कराने में जुट गए हैं।

8 संविदाकारों के अनुबंध समाप्त

इधर विगत माह पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) द्वारा 8 संविदाकारों के अनुबंध भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए थे। इनमें किन्ना मेन रोड से महोड़कला एवं तिघरा करिया पटना मार्ग, नांदचांद नयाखेड़ा मार्ग, कल्दा-बछौन से गुवरदा एवं कल्दा-बछौन से मगरदा मार्ग, गुमानगंज से चंदला मार्ग, धरमपुर-परनियापुरवा एवं हरनामपुर रोड से गड़रियनपुरवा मार्ग, ग्राम करिया से महोड़खुर्द मार्ग, सारंग मंदिर से किटहा मार्ग तथा नयागांव से पंचमपुर मार्ग के निर्माण कार्य शामिल थे। इन कार्यों से जुड़े संविदाकारों में मेसर्स रवि कंस्ट्रक्शन कंपनी रीवा, मेसर्स साईं इंफ्रा पन्ना, मेसर्स सिंह कंस्ट्रक्शन मुरैना, मेसर्स आर.के. ट्रेडर्स प्रोप्राइटर ऋषिकांत नगायच पवई जिला पन्ना तथा मेसर्स मोदी इंफ्रास्ट्रक्चर जतारा जिला टीकमगढ़ जैसी फर्में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई ने लापरवाह ठेकेदारों को हिलाकर रख दिया। बाद में अधीक्षण यंत्री कार्यालय नौगांव में गुहार लगाने और कार्यों को गति देने लिखित आश्वासन के बाद कुछ अनुबंध पुनर्जीवित कर दिए गए। अब संबंधित ठेकेदारों द्वारा अधूरे पड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। विभागीय हलकों में चर्चा है कि यदि समय रहते तकनीकी अधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से लिया जाता तो ठेकेदारों को इस तरह की अप्रिय स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

9 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने भेजे गए प्रस्ताव

इसके अलावा कार्यपालन यंत्री द्वारा 9 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। जिन कार्यों के संबंध में मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग परिक्षेत्र सागर को प्रस्ताव भेजे गए हैं उनमें अमानगंज-गुनौर मार्ग से तुन्ना-मेहंदवा मार्ग, ग्राम करिया से महोड़खुर्द मार्ग, मोहन्द्रा-गोल्ही-पलोही मार्ग, मोहन्द्रा-रैपुरा मार्ग, देवेंद्रनगर-सलेहा मार्ग, मकरंदगंज से बरबसपुर मार्ग, पवई-इटांय-मैहर मार्ग, खमरिया-अतरहाई से रीठी मार्ग तथा सिंहपुर-धरमपुर से मझपुरवा मार्ग शामिल हैं। इन कार्यों से जुड़े ठेकेदारों में मेसर्स रतन बिल्डर्स बांदा उत्तर प्रदेश, मेसर्स आर.के. ट्रेडर्स प्रोप्राइटर ऋषिकांत नगायच पवई जिला पन्ना, मेसर्स आरएसव्ही इंफ्रा कांट्रेक्टर, मेसर्स श्री बिल्डअप प्राइवेट लिमिटेड छतरपुर, कौशल प्रसाद पटेल रीवा, मेसर्स मारुति नंदन नागौद जिला सतना, मेसर्स दिग्विजय कंस्ट्रक्शन कंपनी शहडोल, मेसर्स राधा वल्लभ ट्रेडर्स शाहनगर जिला पन्ना तथा मेसर्स शारदा कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना के नाम शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि यदि किसी ठेकेदार अथवा फर्म का पंजीयन काली सूची में दर्ज हो जाता है तो उसे भविष्य में सरकारी कार्यों के ठेके मिलना लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि कार्यपालन यंत्री जे.पी. सोनकर की इन सख्त कार्यवाहियों के बाद लापरवाह ठेकेदारों में भारी बेचैनी देखी जा रही है। विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि लंबे समय बाद पीडब्ल्यूडी में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर इतनी सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। माना जा रहा है कि ठेकेदार अब कार्य अनुबंध शर्तों एवं विभागीय निर्देशों को हल्के में लेने की गलती नहीं करेंगे।

पन्ना में युवती की गोली मारकर हत्या, आरोपी और उसके पिता की ग्रामीणों ने की पिटाई

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जानलेवा हमले में गंभीर रूप से घायल युवती को पन्ना जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रीवा ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।

*     गोली मारने के बाद चाकू से भी किया जानलेवा हमला

*    शौच के लिए गई थी युवती, रीवा ले जाते समय रास्ते में मौत

पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत लक्ष्मीपुर गांव में बुधवार 13 मई की सुबह हुई सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। गांव की 25 वर्षीय युवती पर एक सिरफिरे युवक ने कथित तौर पर पहले गोली चलाई और फिर चाकू से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिला चिकित्सालय से मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर की गई युवती की रास्ते में मृत्यु हो गई। घटना के बाद गांव में तनाव और शोक का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह युवती घर के पीछे शौच के लिए गई थी। इसी दौरान गांव के ही युवक विनोद यादव ने उस पर हमला कर दिया। परिजनों का आरोप है कि आरोपी अपने साथ देसी कट्टा और चाकू लेकर पहुंचा था। युवती के भाई आकाश यादव ने बताया कि आरोपी ने पहले युवती पर गोली चलाई और बाद में चाकू से कई वार किए। इसके बाद उसने बंदूक की बट से भी युवती के साथ मारपीट की। चीख-पुकार सुनकर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। इस दौरान जब युवती का भाई उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा, तब आरोपी ने उस पर भी गोली चलाने का प्रयास किया, लेकिन गोली फायर नहीं हो सकी। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हालत बिगड़ी

गंभीर रूप से घायल युवती को तत्काल जिला चिकित्सालय पन्ना ले जाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और हालत नाजुक होने के कारण उसे मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार, रीवा ले जाते समय रास्ते में ही युवती ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने आरोपी विनोद यादव और उसके पिता भीकम उर्फ बच्चा यादव को पकड़ लिया। ग्रामीणों ने दोनों के साथ मारपीट की और कुछ समय तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को भीड़ से छुड़ाकर हिरासत में लिया।

प्रकरण दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस

कोतवाली थाना प्रभारी रोहित मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी सहित उसके पिता से पूछताछ की जा रही है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। कुछ लोग इस घटना को कथित रुप से दबी जुबान एकतरफा प्रेम प्रसंग से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने पर मंथन, पन्ना में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने विषय पर आयोजित कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा उपयोगी जानकारी दी गई।

*        जल संरक्षण की पारंपरिक तकनीकों, जल गुणवत्ता परीक्षण और तालाब पुनर्जीवन पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

*        अजयगढ़ में फील्ड विजिट कर अधिकारियों को समझाए कंटूर ट्रेंच और परकोलेशन टैंक निर्माण के तरीके

*        वन क्षेत्रों में भूजल संवर्धन और जल संरचनाओं के वैज्ञानिक प्रबंधन पर हुआ प्रशिक्षण

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग पन्ना द्वारा “भूजल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वनों की उत्पादकता बढ़ाने” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन 7 मई 2026 को किया गया। कार्यशाला का आयोजन पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता स्थित व्याख्यान केन्द्र एवं अजयगढ़ क्षेत्र में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वन क्षेत्रों एवं नदी तटों में भूजल संरक्षण कार्यों की आवश्यकता, जल संरचनाओं के वैज्ञानिक निर्माण, रखरखाव तथा जल संवर्धन संबंधी तकनीकी जानकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान करना रहा।
कार्यशाला के प्रथम दिवस में विषय विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव ने भूजल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जल संरक्षण विशेषज्ञ अनुपम मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” का उल्लेख करते हुए पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों की उपयोगिता बताई तथा जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास प्रभावी एवं दीर्घकालीन बनाए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में बी. आर. फूकन (रिसर्चर) द्वारा “वन क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं की जल गुणवत्ता का आकलन” विषय पर जानकारी दी गई। उन्होंने जल गुणवत्ता परीक्षण की विभिन्न विधियों जैसे सैंपल कलेक्शन, पीएच स्तर जांच आदि के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही वन क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं एवं जलाशयों के प्रभावी प्रबंधन हेतु नियमित मॉनिटरिंग, वेस्ट मैनेजमेंट एवं कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम संचालित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।
इसी क्रम में सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक रवीन्द्र सिंह ने भूजल संरक्षण हेतु निर्मित की जाने वाली विभिन्न संरचनाओं जैसे कंटूर ट्रेंच, बंड्स एवं परकोलेशन टैंक आदि के निर्माण एवं उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में वृद्धि की जा सकती है, जिससे वन क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

तालाब पुनर्जीवन के तरीके बताए

कार्यशाला के द्वितीय दिवस में सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र में फील्ड विजिट किया गया। इस दौरान मौके पर निर्मित पारंपरिक तालाबों के पुनर्जीवन (रिजुविनेशन) के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई तथा नए परकोलेशन टैंक एवं तालाब निर्माण संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए। फील्ड भ्रमण के दौरान कंटूर ट्रेंच निर्माण से जुड़े तकनीकी बिंदुओं जैसे भूमि की ढाल, जल प्रवाह की दिशा एवं स्थल चयन पर विशेष ध्यान देने के संबंध में भी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई।

इनकी रही उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक छतरपुर वृत्त नरेश सिंह यादव, डीएफओ दक्षिण पन्ना अनुपम शर्मा, डीएफओ उत्तर पन्ना धीरेंद्र प्रताप सिंह, आईएफएस, उपवनमंडलाधिकारी विश्रामगंज अंशुल तिवारी, उपवनमंडलाधिकारी पन्ना कृष्णा मरावी, एसीएफ प्रशिक्षु प्रभांशु कमल मिश्रा, वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना अजय बाजपेयी, वन परिक्षेत्राधिकारी अजयगढ़ पंकज दुबे, वनपरिक्षेत्राधिकारी धरमपुर वैभव सिंह चंदेल, वनपरिक्षेत्राधिकारी विश्रामगंज नितिन राजौरिया, वनपरिक्षेत्राधिकारी देवेन्द्रनगर शुभम तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

PTR में अब सुरक्षित नहीं बाघ: 4 शावकों वाली बाघिन हादसे में गंभीर रूप से घायल, घटना को दबाने के आरोपों से घिरा प्रबंधन

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पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)

*        अज्ञात बोलेरो वाहन चालक ने शिकार की नियत से बाघिन को मारी ठोकर या फिर सड़क दुर्घटना

*        सूचना मिलने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे रेंजर, शावकों के भविष्य पर भी मंडराया संकट

*        एक माह में दो बाघों की मौत और कोर एरिया में वृद्ध का शव मिलने के बाद अब घायल बाघिन का मामला चर्चा में

*        कभी दुनिया के लिए मिसाल बना पन्ना, अब लापरवाही और मॉनिटरिंग फेल होने के लिए बदनाम

*        बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता पर खतरे के संकेत, मैदानी निगरानी पर उठ रहे तीखे सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) कभी बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के लिए दुनिया भर में चर्चा में रहा पन्ना टाइगर रिजर्व इन दिनों लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। एक माह के भीतर दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कोर एरिया में कई दिन पुराना अज्ञात वृद्ध का शव मिलने और अब अज्ञात बोलेरो वाहन चालक द्वारा कथित रूप से शिकार की नियत से मारी गई जानलेवा ठोकर में गंभीर रूप से घायल हुई बाघिन की घटना को दबाने के आरोपों ने पीटीआर की सुरक्षा एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
ताजा मामला पन्ना कोर क्षेत्र के राजाबरिया-अमझिरिया मार्ग का बताया जा रहा है। आरोप हैं कि 28 अप्रैल की रात एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने सड़क किनारे एक बाघिन (Tigress) को कथित रूप से शिकार की मंशा से सीधी ठोकर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाघिन सड़क किनारे पत्थरों के बीच जा गिरी और काफी देर तक घायल अवस्था में पड़ी रही। घटना की सूचना वन अमले द्वारा तुरंत वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट दी गई। लेकिन उन्होंने तत्परता से घेराबंदी कर वाहन को पकड़ने तथा घायल बाघिन को तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की प्रभावी कार्रवाई करना तो दूर मौके पर पहुंचना तक उचित नहीं समझा। रेंजर के निर्देश पर स्टॉफ ने मौके पर पहुंचकर घायल बाघिन को देखा। लेकिन जाट साहब अपने दायित्वों को तिलांजलि देते हुए सुबह मौके पर आने की बात कहकर सोने के लिए चले गए।
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)
सूत्रों के मुताबिक अगले दिन घटनास्थल से वाहन के टूटे हिस्से, पत्थर की खखरी पर जख्मी बाघिन के बाल और आसपास अन्य साक्ष्य मिले थे, जिन्हें रेंजर के इशारे पर मौके से हटा दिया गया। प्रकरण को दबाने के लिए घटना की सूचना पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई। न ही बाघिन को ढूंढने और उसका उपचार कराने के प्रयास किया गया। घटना की किसी को भनक न लगे इसलिए वन अपराध दर्ज करने और वाहन को पकड़ने की कार्रवाई भी जानबूझकर नहीं की गई। जबकि घटना स्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर अमझिरिया टोल नाका स्थित है, जहां पर यदि वाहनों के निकलने का उस समय का रिकार्ड यदि चेक किया जाता तो अवश्य ही अज्ञात बोलेरो वाहन का रजिस्ट्रेशन एवं वाहन मालिक/चालक का पता लगाया जा सकता था। और वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत शिकार के प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए थी। लेकिन रेंजर ने पूरी घटना को अपने स्तर पर दबा दिया। बताया जा रहा है कि बाघिन बाद में लंगड़ाते हुए देखी गई। चिंता की बात यह भी है कि उक्त बाघिन के चार छोटे शावक बताए जा रहे हैं, जो पूरी तरह मां पर निर्भर हैं। यदि बाघिन को कुछ भी होता है तो उस पर आश्रित चार बाघ शावकों का जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। विदित हो कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दो वनरक्षकों समेत 4-5 सुरक्षा श्रमिकों को थी जिससे रेंजर साहब का कारनामा उजागर हो गया।

लगातार घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
इस घटनाक्रम ने इसलिए भी गंभीरता बढ़ा दी है क्योंकि हाल के दिनों में पीटीआर में कई चिंताजनक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 मई को अमानगंज बफर क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पहले तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर कोर क्षेत्र में छोड़ा गया था। उससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब दो सप्ताह पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला उजागर हुआ।
पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
इन्हीं घटनाओं के बीच रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन पन्ना कोर रेंज के राजाबरिया जंगल में एक वृद्ध का शव पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। शव कई दिन पुराना बताया गया और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। सवाल यह उठा कि कथित तौर पर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक पहुंच गया और उसका शव चार दिन तक जंगल में लटका रहा, लेकिन निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।

शून्य से शिखर तक पहुंचा पन्ना

पन्ना टाइगर रिजर्व का इतिहास देश की सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण उपलब्धियों में गिना जाता है। वर्ष 2009 में यहां बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने बाघ पुनर्स्थापना योजना लागू की। दूसरे अभयारण्यों से लाए गए बाघ-बाघिनों की कड़ी सुरक्षा, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और मैदानी अमले की मेहनत से पन्ना ने अभूतपूर्व वापसी की। कुछ वर्षों में यहां बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर सौ के पार पहुंच गई और पन्ना दुनिया में सफल बाघ पुनर्स्थापना मॉडल के रूप में स्थापित हुआ। लेकिन अब हालिया घटनाओं, मौजूदा पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली को देखते हुए वन एवं वन्यजीवों पर मंडराता संकट लगातार बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

अब फिर उठने लगे पुराने सवाल

फाइल फोटो।
हालिया घटनाओं ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि कहीं वही पुरानी लापरवाहियां दोबारा तो नहीं लौट रहीं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सड़क हादसे में घायल बाघिन की सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई होती, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। अब जबकि मामला चर्चा में आया है, तब अंदरखाने हाथियों की मदद से बाघिन की तलाश और वाहन की पहचान के प्रयास शुरू किए गए हैं। हालांकि सवाल अब भी कायम हैं- यदि सूचना समय पर मिल गई थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या इतनी बड़ी घटना को छिपाने के आरोपों से घिरे रेंजर के विरुद्ध नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी या फिर बाघ की मौत होने के मामले की तरह आरोप पत्र जारी कर जांच की आड़ में प्रकरण को रफा-दफा कर दिया जाएगा? लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वास्तविक मॉनिटरिंग व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव संरक्षण की जिस ऐतिहासिक सफलता पर कभी पूरा देश गर्व करता था लेकिन उसके भविष्य को लेकर अब नई चिंताएं सामने आने लगी हैं।

इनका कहना है-

“घटना की सूचना न देना अक्षम्य अपराध है, पन्ना कोर के रेंजर को आरोप पत्र जारी करके उनके विरुद्ध तत्परता से सख्त एक्शन लिया जाएगा। आपको जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। घायल बाघिन को ढूंढने एवं आरोपी वाहन और चालक को पकड़ने के संबंध अभी कुछ जानकारी नहीं दे पाऊंगा।”

बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

PTR की मॉनिटरिंग फेल: न बाघ सुरक्षित, न इंसान; कोर एरिया में पेड़ पर लटका मिला वृद्ध का शव

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पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज अंतर्गत फांसी के फंदे पर लटके मिले अज्ञात वृद्ध के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद कोतवाली थाना पुलिस द्वारा मामले पर मर्ग कायम किया गया।

   महीने भर के अंदर दो बाघों की संदिग्ध मौत के बीच सामने आई हैरान करने वाली घटना

   कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन कोर क्षेत्र में मिली लाश, प्रबंधन के दावे कटघरे में

*    चार दिन तक जंगल में लटका रहा शव, किसी को भनक नहीं, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था क्या पूरी तरह चौपट हो चुकी है? रेडियो कॉलरधारी बाघ की संदिग्ध मौत के अगले ही दिन पार्क क्षेत्र में एक अप्रत्याशित घटना के सामने आने से यह सवाल उठ रहा है। बुधवार सुबह पन्ना कोर रेंज अंतर्गत राजाबरिया के जंगल में एक अज्ञात वृद्ध का शव पेड़ से फांसी के फंदे पर लटका मिला। हैरानी की बात यह है कि कथित कड़ी सुरक्षा वाले कोर एरिया में यह शव 3-4 दिन तक लटका रहा, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। हैरान करने वाली यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब महीने भर के अंदर पन्ना टाइगर रिजर्व में दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन के सुरक्षा और सतत मॉनिटरिंग के दावों की गंभीर पोल खोल दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार 6 मई की सुबह बीट गार्ड इंद्रजीत लोधी को राजाबरिया जंगल में एक पेड़ पर करीब 65 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में जबरदस्त हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची कोतवाली थाना पन्ना पुलिस टीम ने पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला मौजूद रहा।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
पुलिस के अनुसार शव की स्थिति बेहद खराब थी और उसमें कीड़े पड़ चुके थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वृद्ध की मौत 3 से 4 दिन पहले हो चुकी थी। आसपास के गांवों के ग्रामीणों और पंचायत सचिव जरधोवा को पहचान के लिए बुलाया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है।

लगातार घटनाओं से गहराए सवाल

तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही 5 मई को अमानगंज बफर रेंज के रमपुरा क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध हालात में मृत पाया गया था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पूर्व तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर के साथ कोर एरिया में छोड़ा गया था। इसके करीब पखवाड़े भर पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था, जिसकी जानकारी भी वन अमले को समय पर नहीं लग सकी थी।

सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न

फाइल फोटो।
ताजा घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा कर दिया है कि आखिर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक कैसे पहुंच गया और कई दिन तक वहां मौजूद रहा, फिर भी निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि पन्ना टाइगर रिजर्व में न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि अब इंसानी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कागजों में मजबूत दिखने वाली सुरक्षा व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है, यह हालिया घटनाओं ने उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इन गंभीर घटनाओं के बाद जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होती है या फिर मामले जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं।

इनका कहना है-

“पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अज्ञात वृद्ध व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर घटना स्थल का मुआयना किया। इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस द्वारा कार्यवाही की जा रही है। घटना की हम विभागीय जांच भी कराएंगे।”

बीरेन्द्र कुमार पटेल, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

पन्ना में एक और टाइगर की मौत: रेस्क्यू के सप्ताह भर बाद संदिग्ध हालात में मिला शव

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तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)

*        स्वस्थ घोषित कर कोर एरिया में छोड़ा गया था बाघ, अचानक मौत से पीटीआर प्रबंधन में हड़कंप

*       एक माह में दूसरी घटना, सुरक्षा और मॉनिटरिंग के दावों पर सवाल

*       पहले कंकाल, अब रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत- पीटीआर की निगरानी व्यवस्था कटघरे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। पखवाड़े भर पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से जबरदस्त हड़कंप मचा है। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा से रेस्क्यू किए गए दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

रेस्क्यू के बाद स्वस्थ बताया गया था

कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई थी। (फाइल फोटो)
तारा ग्राम में बाघ के प्रवेश और मवेशियों के शिकार से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था। हालात इतने बिगड़े कि वन अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने का प्रयास तक किया गया। इसके बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा जांच में उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और उसी दिन देर शाम उसे पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण हेतु छोड़ दिया गया था।

बाघ के गांव में घुसने से भड़का गुस्सा: पीटीआर के रेंजर और डिप्टी रेंजर को बंधक बनाने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

हफ्ते भर में मौत, उठे सवाल

रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है- क्या मॉनिटरिंग में चूक हुई, या बाघ की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया? फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

एक माह में दूसरी घटना

पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर बाघ की मौत की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मुख्य मार्ग से महज कुछ दूरी पर मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब 15 दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी जानकारी तक नहीं लग सकी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला सामने आया, जिसकी जांच एसटीएफ जबलपुर द्वारा की जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और सतत निगरानी के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ताजा मामले में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।

Breaking News: पन्ना टाइगर रिजर्व में मेल टाइगर की संदिग्ध मौत, कंकाल की हालत में शव बरामद

इनका कहना है-

“तारा ग्राम से रेस्क्यू किए गए बाघ की आज सुबह मृत्यु होने की जानकारी मिली है, रेस्क्यू करने के बाद बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था और इसकी मदद से उसकी सतत मॉनिटरिंग की जा रही थी। बाघ की मृत्यु वन परिक्षेत्र अमानगंज बफर अंतर्गत हुई है। उसका शव पूर्णतः सुरक्षित है, आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई गई। विस्तृत जानकारी मैं मौके पर पहुंचकर घटनास्थल और शव का मुआयना करने के बाद दे पाऊंगा।”

बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

बाघ कंकाल मामला: बीटगार्ड निलंबित, वनपाल और रेंजर को आरोप पत्र जारी

वन विभाग में “जंगलराज”: ‘कोर्ट ने कहा- दंडित करो, विभाग ने दे दिया डबल प्रमोशन’

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फोटो-01 कैप्शन- कार्यालय वन संरक्षक वन वृत्त छतरपुर का भवन। (फाइल फोटो)

   16 साल पुराने आदेश पर अमल नहीं, दोषी बताए गए कर्मचारियों को मिली मनचाही पोस्टिंग

*      न्यायालय की टिप्पणी के बाद भी कार्रवाई शून्य, मुख्य लिपिक की भूमिका पर उठे सवाल

*      राज्यपाल, लोकायुक्त और मुख्य सचिव से शिकायत, छतरपुर से भोपाल तक हलचल

शादिक खान, पन्ना /छतरपुर।(www.radarnews.in) वन विभाग छतरपुर एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभाग पर न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर दोषी बताए गए कर्मचारियों को दंडित करने के बजाय पदोन्नति देने, संरक्षण प्रदान करने और वर्षों तक प्रकरण ठंडे बस्ते में डालकर रखने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर राज्यपाल, लोकायुक्त और प्रमुख सचिव वन विभाग से लिखित शिकायत की गई है, जिससे विभागीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मामला वन परिक्षेत्र बिजावर, वन मंडल छतरपुर के वन अपराध प्रकरण क्रमांक 168/7 दिनांक 04/07/2007 से जुड़ा है। आरोप है कि 3-4 जुलाई 2007 की दरम्यानी रात 118 सागौन वृक्षों की कटाई के मामले में तीन ग्रामीणों को नामजद कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, छतरपुर में दर्ज आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1484/07, संस्थित दिनांक 03/08/2007 की सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट छतरपुर ने दिनांक 25/03/2010 को निर्णय पारित करते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इतने बड़े पैमाने पर सागौन कटाई स्थानीय वन कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं प्रतीत होती। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने हेतु आदेश की प्रति प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल को भेजने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद न तो दोषी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई की गई और न ही निर्णय के विरुद्ध विभाग ने अपील दायर की। उल्टा जिन कर्मचारियों पर सवाल उठे, उन्हें समय-समय पर पदोन्नति देकर कार्यवाहक डिप्टी रेंजर और कार्यवाहक रेंजर जैसे पदों पर बैठाया गया। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। मामले में वन वृत्त छतरपुर के मुख्य लिपिक राघवेंद्र प्रसाद द्विवेदी की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सेवा अभिलेख और पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी होने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर संबंधित कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया। शिकायतकर्ताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच कर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। आरोप यह भी है कि जिन कर्मचारियों पर न्यायालय ने कार्रवाई योग्य टिप्पणी की, उन्हें मनचाही पोस्टिंग देकर उपकृत किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अदालत के आदेशों पर भी अमल नहीं होगा, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे।
शिकायतकर्ता शिशुपाल अहिरवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने तथा दिनांक 25/03/2010 के न्यायालयीन आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला है। अब नजर इस बात पर है कि शासन स्तर पर इस शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है और वर्षों पुराने इस विवाद में जवाबदेही तय होती है या नहीं।