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उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला का कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने किया स्वागत

  •     पन्ना के त्रिफला उद्यान की जानकारी देकर भेंट किये वन उत्पाद
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला का आज पन्ना के नजदीक सकरिया स्थित वन विभाग के त्रिफला उद्यान में जिले कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ला बागेश्वर धाम से वापस रीवा जा रहे थे। रास्ते में पन्ना के समीप सकरिया ग्राम में स्थित त्रिफला उद्यान के सामने कर्मचारी नेताओं के द्वारा उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला का स्वागत पुष्पहार पहनाकर किया गया।
उप मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन भोपाल राजेन्द्र शुक्ला बागेश्वर का आज धाम से रीवा जाते समय कर्मचारी नेताओं ने फूलमाला पहनाकर स्वागत किया।
इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ला को त्रिफला उद्यान सकरिया में उद्यान में उत्पादित वन उत्पाद के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया केन्द्र में आंवला मुरब्बा, अचार, सुपारी,कैंडी एवं गुड़ और शक्कर के लड्डू उच्च गुणवत्ता के साथ तैयार किये जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री को त्रिफला उद्यान में उत्पादित उत्पाद भेंट किए गए। श्री शुक्ला का स्वागत करने वालों में मुख्य रूप से बीपी परौहा अध्यक्ष मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ जिला शाखा पन्ना, महीप रावत अध्यक्ष वन कर्मचारी संघ जिला पन्ना, ओपी शर्मा प्रांतीय सचिव वन कर्मचारी संघ, राजीव द्विवेदी सचिव वन कर्मचारी संघ, बृजेन्द्र पटेल जिला महामंत्री वन कर्मचारी संघ एवं अनिल तिवारी समाजसेवी सहित अन्य समिति सदस्य शामिल थे।

कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता को राज्य सरकार ने “एक्सीलेंट इंजीनियर अवार्ड” से किया सम्मानित

*     प्रेशर इरिगेशन से संबंधित कार्यों में 3 साल के प्रदर्शन के आधार पर उत्कृष्ट कार्य के लिए मिला पुरुष्कार

पन्ना।(www.radarnews.in) केन बेतवा लिंक परियोजना के नवगठित जल संसाधन संभाग पवई, जिला पन्ना की कर्मठ और तेज तर्रार कार्यपालन यंत्री श्रीमती उमा गुप्ता को राज्य सरकार ने उत्कृष्ठ अभियंता अवार्ड से सम्मानित किया है। जल संसाधनों के विकास एवं प्रेशर इरिगेशन में विगत 3 वर्षों में संपादित किये गए विशेष उल्लेखनीय कार्य के आधार पर कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता को उत्कृष्ठ अभियंता के पुरस्कार के रूप में पच्चीस हजार रुपए की नकद राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। गत दिनों राजधानी भोपाल में आयोजित भव्य गरिमामयी समारोह उन्हें यह पुरुष्कार जल संसाधन विभाग के मंत्री तुलसीराम सिलावट तथा मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ऐंदल सिंह कंसाना के द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे। केबीएलपी कार्यपालन यंत्री पवई श्रीमती गुप्ता को मध्य प्रदेश शासन के द्वारा सम्मानित किए जाने पर पन्ना जिले के प्रशासनिक अधिकारियों, जल संसाधन संभाग पन्ना तथा जिले के अन्य निर्माण विभागों के तकनीकी अधिकारियों-कर्मचारियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है।
बता दें कि, जल संसाधन विभाग द्वारा विगत वर्षों में जल संसाधनों के विकास एवं उच्च दक्ष दाब युक्त भूमिगत पाइप प्रणाली द्वारा सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए जल उपयोग दक्षता उन्नयन के क्षेत्र में विश्व स्तर पर मध्यप्रदेश की पहचान बनाई है। इस विशिष्ट कार्यों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश राज्य को गतवर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था। इस विकास यात्रा में महती भूमिका निभाने वाले कर्मठ अभियंताओं को मुख्यमंत्री एवं मंत्री जल संसाधन विभाग मध्यप्रदेश शासन, द्वारा विगत तीन वर्षों के कार्यों के आधार पर “जल संसाधन विभाग उत्कृष्ट कार्य पुरस्कार” से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में दिनांक 20 फरवरी 2024 को समन्वय भवन न्यू मार्केट भोपाल में मंत्री जल संसाधन विभाग तुलसीराम सिलावट, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना, अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा तथा प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग शिशिर कुशवाह की गरिमामयी उपस्थिति में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। उक्त कार्यक्रम में सागर संभाग से चयनित श्रीमती उमा गुप्ता कार्यपालन यंत्री, केन बेतवा परियोजना जल संसाधन संभाग पवई को उनके द्वारा विगत तीन वर्षों में कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पवई तथा कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग बुरहानपुर के रूप में संपादित किए गए उल्लेखनीय कार्य हेतु उत्कृष्ठ अभियंता के पुरुष्कार स्वरूप नगद राशि रू. पच्चीस हजार तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को दिलाई पुनरीक्षित स्वीकृति

श्रीमती उमा गुप्ता द्वारा कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पवई के कार्यकाल के दौरान रुन्ज तथा मझगांय मध्यम परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार कर शासन से स्वीकृति प्राप्त की गई तथा पवई मध्यम सिंचाई परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित किया गया। उक्त योजनाओं से 53330 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित की जा रही है। इसके अतिरिक्त 6 नवीन सिंचाई योजना की डीपीआर तैयार कर प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त कर निविदा आमंत्रित की गई जिनसे 1467 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। सात नवीन योजनाओं को चिन्हित कर उनकी साध्यता प्राप्त की गई जिनसे 2480 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने हेतु डीपीआर तैयार की जा रही है। साथ ही पुरानी निर्मित योजनाएं, जिनसे रूपांकित सिंचाई क्षमता के अनुरूप सिंचाई नहीं हो पा रही थी, के भी सुधार एवं उन्नयन हेतु कार्य योजना तैयार कर सिंचाई क्षमता अनुरूप विकसित करने का कार्य किया गया।

हाईकोर्ट ने पन्ना तहसीलदार के खिलाफ दर्ज किया आपराधिक अवमानना का प्रकरण

*    आदेश की अवज्ञा कर मनमाने तरीके से नियम विरुद्ध कार्य करने पर कोर्ट हुआ सख़्त

*    तहसीलदार अखिलेश प्रजापति को नोटिस जारी कर तलब किया जवाब

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश की अवज्ञा कर मनमाने तरीके से नियम विरुद्ध कार्य करना पन्ना तहसीलदार को बहुत भारी पड़ सकता है। भूमि नामांतरण से संबंधित मामले में निर्धारित समयसीमा में कार्यवाही न कर प्रकरण को निरस्त करने पर कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए पन्ना तहसीलदार अखिलेश प्रजापति के विरुद्ध आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज किया है। हाईकोर्ट ने तहसीलदार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना के सीनियर एडवोकेट काजी सलाउद्दीन ने अपनी भूमि का नामांतरण कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अनुसार तहसील कार्यालय पन्ना में आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। तहसीलदार पन्ना के द्वारा आवेदन पत्र खारिज किए जाने पर मामले की अपील एसडीएम कोर्ट पन्ना के की गई। लेकिन एसडीएम ने तहसीलदार के आदेश को यथावत रखते हुए अपील को निरस्त कर दिया था। परेशान होकर आवेदक के द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में रिट याचिका क्रमांक 9755/2021 प्रस्तुत की गई थी।
प्रतीकात्मक चित्र।
उच्च न्यायालय ने दिनांक 7 जुलाई 2023 को रिट याचिका का निराकरण कर तहसीलदार पन्ना को एक माह के अंदर नामांतरण करने का आदेश पारित किया गया था। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद तहसीलदार पन्ना ने निर्धारित समयावधि में भूमि का नामांतरण न कर आवेदन पत्र को पुनः निरस्त कर दिया। तहसीलदार पन्ना अखिलेश प्रजापति की हठधर्मिता से परेशान होकर आवेदक के द्वारा पुनः उच्च न्यायालय जबलपुर में रिट याचिका क्रमांक एमपी 872/2024 प्रस्तुत की गई। जस्टिस संजय द्विवेदी ने प्रकरण को संज्ञान लेकर तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही न्यायालय के आदेश के उल्लंघन पर सख्त रूख अपनाते हुए तहसीलदार पन्ना अखिलेश प्रजापति के विरूद्ध आपराधिक अवमानना का प्रकरण पंजीबद्ध किया है। हाईकोर्ट में आवेदक की ओर से सीनियर अधिवक्ता मनोज शर्मा के द्वारा पैरवी की गई। कोर्ट की कार्रवाई जिले के प्रशासनिक हलकों खासकर राजस्व महकमे में चर्चा का विषय बनी है।

साप्ताहिक बाजार परिसर में दुकानों के निर्माण का विरोध क्यों कर रहे हैं छोटे व्यापारी !

*    नीलामी में दुकानें खरीदकर हाट-बाजार में पैर जमा लेंगे बड़े व्यापारी

*    स्थान के आभाव में फुटकर दुकानदारों को होना पड़ सकता है बेदखल

  नगर परिषद अजयगढ़ पर बड़े व्यापारियों के आर्थिक हितों के लिए पथ विक्रेताओं की आजीविका को संकट में डालने का आरोप

  छोटे दुकानदारों की मांग- परिसर का सीमांकन करवाकर अतिक्रमण हटाने के बाद हो दुकानों का निर्माण

शादिक खान, पन्ना/अजयगढ़। (www.radarnews.in) जिले के अजयगढ़ क़स्बा के साप्तहिक हाट-बाजार (सब्जी मंडी) परिसर में आधा सैंकड़ा से अधिक दुकानों के निर्माण का पुरजोर विरोध हो रहा है। इससे सीधे तौर प्रभावित होने की आशंका से घिरे स्थानीय पथ विक्रेताओं, छोटे व फुटकर व्यापारियों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। विगत दिवस आक्रोशित व्यापारियों के एक समूह ने सब्जी मंडी पहुंचकर भारी हंगामा करते हुए दुकानों का निर्माण कार्य बंद करवा दिया था। सब्जी विक्रेताओं की मांग है कि, सबसे पहले साप्ताहिक बाजार परिसर का सीमांकन करवाकर अतिक्रमण को हटाया जाए। उसके बाद दुकानों का निर्माण कराना उचित होगा। फुटकर व्यापारियों का मानना है, वे लोग साप्ताहिक सब्जी मंडी के अंदर कई दशकों से जमीन के जिस टुकड़े पर दुकानें लगाकर अपनी आजीविका चलाते रहे हैं, उस स्थान को उनसे छीनकर बड़े व्यापारियों को आवंटित करने के लिए दुकानों के निर्माण की योजना बनाई गई है।
छोटे दुकानदार नगर परिषद की दुकान निर्माण की योजना को सब्जी मंडी से अपनी सुनियोजित बेदखली के तौर पर देख रहे है। नगर परिषद अध्यक्ष सीता सरोज गुप्ता इस तरह की आशंकाओं को पूर्णतः निराधार बताते हुए सिरे से खारिज़ करती हैं, लेकिन वे अपनी बात नाराज दुकानदारों को नहीं समझा पा रही हैं। नगर परिषद के 13 पार्षदों ने भी फुटकर व्यापारियों की जायज़ मांग का समर्थन करते हुए दुकानों के निर्माण पर लिखित में अपनी आपत्ती दर्ज कराई है। इस गतिरोध के चलते दुकानों के निर्माण एवं मंडी के विकास की योजना खटाई में पड़ गई है।
अतिक्रमण की चपेट में है अजयगढ़ के साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) का बड़ा भू-भाग।
उल्लेखनीय है कि, वर्तमान में अजयगढ़ का साप्ताहिक हाट-बाजार (सब्जी मंडी) जिस स्थल पर लगती उसे दिनांक 26 मई 1970 को तत्कालीन ग्राम पंचायत अजयगढ़ ने अपने प्रस्ताव में भूमि खसरा नंबर- 33/1 और रकबा 2.80 एकड़ एवं आराजी खसरा नंबर- 36/1 रकबा 1.78 एकड़ को साप्तहिक बाजार की बैठकी व्यवस्था हेतु उपयुक्त बताया गया था। अजयगढ़ क़स्बा के बीचों-बीच स्थित इस बेशकीमती जमीन के बड़े भू-भाग पर बाद के सालों में बड़े व्यापरियों ने अतिक्रमण कर अपनी दुकानें बना लीं। मंडी की जमीन पर अतिक्रमण पैर पसारता रहा और नगर परिषद तथा राजस्व विभाग के तत्कालीन अफसर तमशबीन बने रहे। सब्जी मंडी में दुकानें लगाने वाले फुटकर व्यापारियों की शिकायत के बाद भी अतिक्रमणकरियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया।
करीब 4-5 वर्ष पूर्व नगर पंचायत ने साप्ताहिक बाजार की बैठकी को व्यवस्थित करने की मंशा से डेढ़ दर्जन गुमटियों का निर्माण कराया था। इन गुमटियों पर शुरू से ही बड़े व्यापारी नजरें गढ़ाए हुए थे। नगर परिषद की सांठगांठ से बड़े व्यापारियों ने पहले तो गुमटियों पर कब्ज़ा जमाया फिर उन्हें पक्की दुकानों में पक्की दुकानों में तब्दील कर लिया। इस तरह साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) के लिए आरक्षित कुल भूमि का 25 फीसदी हिस्सा कथित तौर पर अतिक्रमण (अवैध निर्माण) की चपेट में आ गया।

बढ़ रहीं दुकानें, सिकुड़ रही जमीन

दुकानों का निर्माण कार्य बंद करवाने पहुंचे आक्रोशित छोटे व्यापारियों को समझाते हुए तहसीलदार अजयगढ़ सुरेन्द्र अहिरवार।
फुटकर व्यापारी अरविंद कुशवाहा का कहना है, साप्तहिक हाट बाजार (सब्जी मंडी) परिसर अजयगढ़ में दुकानें लगाने वाले छोटे और फुटकर दुकानदारों की तादाद जहां साल दर साल लगातार बढ़ रही वहीं मंडी की जमीन अतिक्रमण के कारण तेजी से सिकुड़ रही है। वर्तमान में फुटकर सब्जी, बांस के बर्तन, मसालों, मनिहारी, फलों और जूते-चप्पल की करीब चार सौ दुकानें यहां लगती हैं। अब अगर मंडी परिसर में 53 दुकानों का निर्माण हुआ तो परिसर का रिक्त स्थान सिर्फ आधे से भी कम रह जाएगा। इस स्थिति में साप्ताहिक बाजार के दिन गुरूवार को मंडी परिसर में जमीन पर अपनी दुकानें लगाने वाले छोटे एवं फुटकर दुकानदारों की बैठकी के लिए शेष बचने वाली रिक्त भूमि कम पड़ जाएगी। गौर करने वाली बात यह भी है कि, 95 फीसदी फुटकर व्यापारियों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे 4-5 लाख रुपये खर्च करके मंडी में बनने वाली दुकानों को नीलामी में खरीद सकें। जिनकी दुकानों में सामान ही बमुश्किल कुछ हजार रुपए का रहता है, वे गरीब दुकानदार नगर परिषद की दुकानें खरीदने के लिए रुपए कहां से लाएंगे? इससे साफ़ जाहिर है कि, नगर परिषद की दुकानें खरीदकर बड़े व्यापारी मंडी परिसर की प्राइम लोकेशन में आबाद हो जायेंगे। जबकि स्थान के आभाव में बड़ी संख्या में फुटकर व्यापरियों को साप्ताहिक बाजार से बेदखल होना पड़ सकता है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि प्रभावित होने वाले दुकानदारों की आजीविका भी संकट में पड़ सकती है।

अतिक्रमण हटाने के बाद हो दुकानों का निर्माण

अजयगढ़ के साप्तहिक हाट बाजार में फुटकर व्यापारियों के लिए बनाई गईं गुमटियों पर बड़े व्यापारियों ने कब्ज़ा जमाकर उन्हें दुकानों में परिवर्तित कर दिया।
दुकानों के निर्माण के विरोध का नेतृत्व कर रहे सब्जी विक्रेता प्रेम रैकवार ने बताया कि वह लोग साप्तहिक मंडी परिसर में दुकानों के निर्माण के पूरी तरह खिलाफ नहीं है। लेकिन उनकी कुछ बाजिव मांगें हैं, जिनसे लिखित और मौखिक तौर पर नगर परिषद अध्यक्ष, सीएमओ सहित राजस्व अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। प्रेम रैकवार ने बताया, सभी फुटकर व्यापारी चाहते है कि दुकानों के निर्माण से पूर्व सर्वप्रथम मंडी परिसर का सीमांकन करवाकर अतिक्रमण को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। इस कार्रवाई से मंडी के मौजूदा खाली परिसर में 25 फीसदी क्षेत्रफल का इजाफा होगा। उसके बाद स्वीकृत 53 दुकानों, टीन शेड सहित अन्य निर्माण कार्य कराए जाएं। लेकिन शर्त यह है कि नगर परिषद सिर्फ 50 फीसदी दुकानों की नीलामी कर शेष 50 फीसदी दुकानों को किराए के आधार पर फुटकर दुकानदारों को आवंटित किया जाए। अगर ऐसा होता है तो मंडी से एक भी दुकानदार को बाहर नहीं होना पड़ेगा। साथ ही साप्ताहिक बाजार की बैठकी भी व्यवस्थित हो जाएगी।

गतिरोध को दूर करने संजीदा नहीं जिम्मेदार

विगत दिनों अजयगढ़ के प्रवास पर आए मध्य प्रदेश शासन के राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार को मंडी में दुकानों के निर्माण पर रोक लगाने के संबध में ज्ञापन सौंपते हुए स्थानीय सब्जी विक्रेता। (फाइल फोटो)
बता दें कि, अजयगढ़ नगर परिषद के 13 पार्षदों ने फुटकर व्यापारियों के प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया है। पार्षदों की मांग है, सब्जी मंडी का सीमांकन कराने के बाद वहां से सम्पूर्ण अतिक्रमण हटाया जाए, उसके बाद पथ विक्रेताओं, छोटे व फुटकर दुकानदारों को विश्वास में लेकर उनकी सहमति से ही दुकानों का निर्माण कार्य कराया जाए। सब्जी विक्रेता मोहम्मद लियाकत ने बताया कि इस मुद्दे पर नगर परिषद अध्यक्ष सीता सरोज गुप्ता, सीएमओ राजेन्द्र सिंह, प्रभारी तहसीलदार अजयगढ़ सुरेन्द्र अहिरवार से फुटकर विक्रेताओं से कई दौर की बातचीत हुई लेकिन ठोस आश्वासन न मिलने के कारण कोई नतीज़ा नहीं निकल सका। दरअसल, मंडी का सीमांकन करवाकर वहां से बड़े व्यापारियों, रसूखदारों के अतिक्रमण तत्काल प्रभाव से हटाने एवं 50 फीसदी दुकानें फुटकर व्यापारियों को देने के मुद्दे पर जिम्मेदारों के ढुलमुल और उदासीनतापूर्ण रवैये के कारण गतिरोध बरक़रार है। इस मसले का सर्वमान्य हल निकालने में हो रही देरी का खामियाजा दुकान निर्माण कार्य का ठेका लेने वाले निर्दोष संविदाकार (ठेकेदार) को भुगतना पड़ रहा है।

इनका कहना है-
“साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) परिसर से एक भी दुकानदार को बेदखल नहीं किया जाएगा, फुटकर व्यापारियों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए दुकानों के साथ-साथ 3 टीनशेड वाले चबूतरों का भी निर्माण कराया जाएगा। चबूतरों पर छोटे दुकानदार व्यवस्थित तरीके से अपनी दुकानें लगा सकेंगे। दुकानों के निर्माण संबंधी प्रस्ताव को सभी पार्षदों की सहमति से ही स्वीकृति प्रदान की गई थी। मंडी परिसर के सीमांकन हेतु राजस्व विभाग के अधिकारियों बात हो चुकी है। जल्द ही हमसब मिलकर इस मसले का समाधान निकाल लेंगे।”

सीता सरोज गुप्ता अध्यक्ष नगर परिषद अजयगढ़ जिला पन्ना (म.प्र.)।

“साप्ताहिक बाजार (सब्जी मंडी) परिसर का सीमांकन कराने के लिए तहसीलदार अजयगढ़ को सप्ताह भर पूर्व पत्र प्रेषित किया जा चुका है। दुकानों का निर्माण सिर्फ बड़े व्यापारियों के लिए कराया जा रहा है यह कहना उचित नहीं होगा, छोटे व्यापारी बैंक लोन लेकर दुकानें प्राप्त कर सकते हैं। फुटकर विक्रेताओं के लिए दुकानों के आरक्षण को लेकर नगर पालिका एक्ट में क्या प्रावधान यह देखना पड़ेगा। वैसे इस संबंध में परिषद को निर्णय लेना है। वर्तमान में दुकानों का निर्माण कार्य बंद है। मंडी की भूमि पर निर्माणाधीन मकान पर भी स्टे लगवा दिया है।”

राजेन्द्र सिंह, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर परिषद अजयगढ़।

“फुटकर सब्जी विक्रेताओं के विरोध के चलते पखवाड़े भर से निर्माण कार्य ठप्प पड़ा है। बीच में तीन बार कार्य शुरू कराने का प्रयास किया गया था लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल सकी। मेरी लेबर एक सप्ताह तक इंतजार करती रही, बिना किसी काम के उनको मजदूरी का भुगतना करना पड़ा है। नगर परिषद अध्यक्ष व सीएमओ इस मामले का समाधान निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। 53 दुकानों का निर्माण करीब 1 करोड़ की लागत से किया जाना है। टीन शेड तथा वॉशरूम निर्माण का ठेका अलग से है।”
राजेन्द्र भाटी, संविदाकार, बांदा, उत्तर प्रदेश।
“राजस्व रिकार्ड में सब्जी मंडी का परिसर नजूल भूमि के रूप में दर्ज है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी को इसकी जानकारी देकर उनसे हाट-बाजार के लिए भूमि को प्रक्रियानुसार आवंटित कराने का सुझाव दिया है। नजूल भूमि का रकबा काफी बड़ा है, इसलिए नगर परिषद अपनी आवश्यकतानुसार जितनी भूमि का आवंटन हाट-बाजार के लिए कराती है उसका सीमांकन कर दिया जाएगा।”

सुरेन्द्र अहिरवार, तहसीलदार अजयगढ़ जिला पन्ना।

सांभर का शिकार कर मना रहे थे पार्टी, पीटीआर की टीम ने 3 लोगों को किया गिरफ्तार; भेजे गए जेल

*    पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत दरेरा ग्राम की घटना

*    वन क्षेत्र से लगे खेत में करंट का तार बिछाकर किया था सांभर का शिकार

*    पन्ना जिले के संरक्षित और सामान्य वन क्षेत्रों में नहीं थम रहीं शिकार की घटनाएं

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना में सांभर हिरण का शिकार कर खेत में पार्टी करना तीन लोगों को भारी पड़ गया। पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की टीम ने छापामार कर तीनों शिकारियों को सांभर के अवशेषों के साथ धर दबोंचा। इनके विरुद्ध वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम में प्रकरण दर्ज किया गया है। पीटीआर (PTR) के अनुसार मुखबिर की सूचना पर गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत आने वाले दरेरा ग्राम के राजस्व क्षेत्र से शिकारियों की धरपकड़ की गई है।
दरेरा के जिस खेत में शिकारियों ने सांभर के मांस की पार्टी की थी वहां से पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम ने मृत सांभर की तीन पैर सहित अन्य अवशेष बरामद किए।
बुधवार 14 फरवरी की देर शाम मुखबिर ने सूचना दी थी कि कुछ लोगों ने जंगल से सटे अपने खेत में सांभर का शिकार किया है और वो लोग वहीं पर उसका मांस पकाकर पार्टी कर रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रतीक अग्रवाल ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन एवं मार्गदशन में तत्परता से कार्रवाई करने के लिए टीम गठन किया और रात्रि करीब 10 बजे दल-बल के साथ दबिश देकर मौके से राजेन्द्र सिंह, रामस्वरूप आदिवासी व दीपक आदिवासी सभी निवासी ग्राम दरेरा को धर दबोंचा। छापामार कार्रवाई में पीटीआर की टीम ने खेत से सांभर की खाल, तीन पैर, लीवर आदि अवशेष जब्त किए हैं। हालांकि तीनों शिकारी सांभर का मांस पकाकर खा चुके थे। खेत में ईंटों से निर्मित अस्थाई चूल्हा भी मिला है जिस पर शिकार का मांस पकाया गया था।
गंगऊ अभ्यारण के वन परिक्षेत्राधिकारी (रेंजर) प्रतीक अग्रवाल ने बताया, आरोपियों ने पूंछतांछ में अपना जुर्म स्वीकार किया है। उनके द्वारा खेत में करंट का तार बिछाकर सांभर का शिकार किया गया था। तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। सांभर के शिकारियों विगत दिवस न्यायालय में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल पन्ना भेजा गया है।

अन्य आरोपियों की भी हो सकती है धरपकड़

खेत में ईंटों से बनाए गए इस अस्थाई चूल्हे पर ही सांभर हिरण के मांस को पकाया गया था।
विदित हो कि, सांभर प्रजाति के हिरण आकार में काफी बड़े होते हैं। इसलिए उनमें मांस काफी मात्रा में निकलता है। सिर्फ तीन शिकारी सांभर के मांस को एकबार में ही पूरा चटकर जाएं व्यावहारिक तौर पर यह संभव नहीं है। इसलिए, अंदेशा जताया जा रहा है कि शिकारियों के द्वारा मांस का बड़ा हिस्सा या तो गुपचुप तरीके से अपने करीबियों को वितरित किया गया या फिर उसे अन्य किसी तरीके से ठिकाने लगाया है। इस पहलु पर विशेष गौर करते हुए पीटीआर की टीम पकड़े गए शिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य कुछ लोगों की सरगर्मी से तलाश में जुटी है। इसलिए आने वाले दिनों सांभर के मांस की पार्टी मानाने वाले कुछ और लोगों की धरपकड़ की संभावना जताई जा रही है।

शिकार की घटनाओं पर नहीं लग पा रहा अंकुश

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के जंगलों में बेजुबान वन्यजीवों का कत्लेआम बड़ी तेज़ी से जारी है। जंगली जानवरों को मांस (बुशमीट) के लिए मारा जा रहा है। पन्ना टाइगर रिजर्व सहित जिले के उत्तर एवं दक्षिण वन मण्डल क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर शिकारी सक्रिय हैं। वन्य प्राणियों का अवैध शिकार शादी की दावत में आने वाले मेहमानों के खाने में मांस परोसने से लेकर मांस की बिक्री कर रुपए बनाने के लिए बेख़ौफ़ अंदाज में किया जा रहा है। चिंताजनक बात यह है कि, अधिकांश मामलों में शिकार होने के बाद ही वन विभाग को भनक लग पाती है। जबकि शिकार की कई घटनाओं का तो पता ही नहीं चल पाता है। दरअसल, मैदानी वन अमले में हमेशा ही इस बात का भय बना रहता है कि अवैध शिकार सहित अन्य वन अपराधों के सामने आने पर कार्यवाही की गाज उनके ही ऊपर गिरेगी। इन घटनाओं से विभाग की बदनामी होने पर उनको कर्तव्य में लापरवाही बरतने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसलिए मैदानी अमला कई बार जानबूझकर महत्वपूर्ण घटनाओं को जंगल के बियाबान में ही हमेशा-हमेशा के लिए दफन रहने देता है। इससे उसकी कारगुजारियों का भंडाफोड़ नहीं हो पाता है। उधर, लग्ज़री चैंबर में बैठकर बजट को ठिकाने लगाने में भिड़े रहने और यदा-कदा ही जंगल का भ्रमण करने वाले अफसरों को जमीनी हकीकत का पता ही नहीं चल पाता है।

बाघ और तेंदुओं पर मंडरा रहा है गंभीर खतरा

कार्यालय क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व। (फाइल फोटो)
बता दें कि, फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में पन्ना टाइगर रिजर्व की मड़ला रेन्ज अंतर्गत आने वाले ललार ग्राम में जंगली सूअर का शिकार होने की खबर आई थी। कड़ी सुरक्षा एवं सघन निगरानी वाले पार्क क्षेत्र (पीटीआर) में लगातार सामने आ रहीं शिकार की घटनाओं को लेकर सवाल उठने पर मड़ला रेंजर वैभव सिंह चंदेल ने जंगली सूअर के शिकार मामले में गहरी चुप्पी साध ली है। शाकाहरी वन्यजीवों के शिकार की घटनाओं का ग्राफ लगातार चिंताजनक तेजी से बढ़ने के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व सहित इससे सटे सामान्य वन क्षेत्र में विचरण करने वाले बाघ-तेंदुआ जैसे वन्यजीवों के लिए भी खतरा काफी बढ़ गया है। क्योंकि पन्ना जिले में शिकारियों के साथ-साथ वन्य जीवों के अंगों के तस्कर भी सक्रिय हैं। विगत वर्षों में टाइगर (बाघ), तेंदुओं के शिकार, संदिग्ध मृत्यु और उनके अंगों की तस्करी जुड़ी कई हैरान करने वाली घटनाएं सामने आई हैं। जिनके मद्देनजर जिम्मेदारों को विशेष सतर्कता बरतने और वन क्षेत्र में 24Х7 सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने की जरुरत है।

कोर्ट का फैसला : हत्या के मामले में दोषी को आजीवन कारावास और अर्थदण्ड की सजा

पन्ना। (www.radarnews.in) अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पन्ना महेन्द्र मंगोदिया ने फूल सिंह गौंड़ निवासी सूरजपुरा पुखरा की हत्या के मामले में अभियुक्त ग्यासी गौंड़ को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के आरोप में दोषसिद्ध पाये जाने पर आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विद्वान न्यायाधीश ने अभियुक्त को अर्थदंड से भी दंडित किया है। इस मामले में न्यायालय का फैसला सालभर के अंदर आने से पीड़ित पक्ष को त्वरित और सुलभ न्याय मिला है।
सहायक लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता ने अभियोजन के मामले की जानकारी देते हुए बताया कि फरियादी हरिराम गौंड़ निवासी सूरजपुरा पुखरा ने थाना बृजपुर पुलिस को रिपोर्ट लिखाई थी कि, वह तीन भाई हैं, सभी पौंड़िया हार खेत में अलग-अलग झोपड़ी बनाकर खेती करते है। गांव का ही ग्यासी गौंड़ भी उसके खेत में झोपड़ी (मड़ैया) बनाकर रहता है। ग्यासी उसके बड़े भाई फूल सिंह और उससे बुराई मानता है। कुछ दिन पूर्व उन लोगों का आपसी समझौता हो गया था। दिनांक 26 मार्च 2023 की शाम हरिराम गौंड़ अपने बड़े भाई फूल सिंह के घर के पास खड़ा था, तभी वहां ग्यासी गौंड़ आया और जरुरी काम का बहाना बनाकर फूल सिंह को अपने खेत की ओर ले गया। हरिराम ने पुलिस को बताया वह भी उनके पीछे-पीछे चला गया। रास्ते में ग्यासी गौंड़ ने उसके बड़े भाई फूलसिंह के सिर में पीछे से कुल्हाड़ी से कई बार जानलेवा प्रहार किया। जिससे उसका भाई जमीन पर गिर गया और चींखने-चिल्लाने पर उसकी भाभी सुहागरानी गौड़ एवं जीजा वहां आ गए थे। उन्हें आता हुआ देखकर हमलावर ग्यासी गौड़ कुल्हाड़ी लेकर जंगल की तरफ भाग गया था।
खून से लथपथ फूल सिंह को बेहोशी की हालत में परिजनों के द्वारा चारपाई से ग्राम सूरजपुरा पुखरा लाया गया। जिसके बाद डायल 100 वाहन से उपचार हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय ले गए थे। जहां ड्यूटी डॉक्टर ने फूल सिंह का परीक्षण करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया था। इस घटना पर बृजपुर थाना के अपराध क्रमांक 029/2023 पर प्रकरण की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। प्रकरण की सम्पूर्ण विवेचना उपरांत आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
फाइल फोटो।
प्रकरण का विचारण अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र मंगोदिया के न्यायालय मे हुआ। जिसमें जिला लोक अभियोजन अधिकारी संदीप कुमार पाण्डेय द्वारा शासन की ओर से पक्ष रखा गया। अभियोजन द्वारा साक्ष्य को क्रमबद्ध तरीके से लिपिबद्ध कराकर न्यायालय के समक्ष आरोपी के विरूद्ध अपराध को संदेह से परे प्रमाणित किया तथा आरोपी के कृत्य को गंभीरतम श्रेणी का मानते हुये कठोर से कठोरतम दंड से दंडित किये जाने का अनुरोध किया। अभिलेख पर आये साक्ष्य, अभियोजन के तर्को एवं न्यायिक दृष्टांतो से सहमत होते हुए न्यायालय द्वारा आरोपी ग्यासी गौंड़ को धारा 302 भादसं. के आरोप में आजीवन सश्रम कारावास एवं 1,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

MP : अरहर के खेत में जेसीबी से खुदाई करवाकर खोज निकाले 4 वन्यजीवों के शव

*     पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल अंतर्गत राजस्व क्षेत्र में सामने आई शिकार की हैरतअंगेज वारदात

*     बेजुबान वन्यजीवों का शिकार करने के बाद अरहर के खेत में दफना दिए थे शव

शादिक खान/रुपेश जैन, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के जंगलों से पिछले कुछ महीनों से वन्य प्राणियों के अवैध शिकार एवं अन्य वन अपराधों से जुड़ी बेहद हैरान करने वाली ख़बरें लगातार बाहर आ रही हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व सहित जिले के उत्तर एवं दक्षिण सामान्य वन मंडल अंतर्गत वन्य जीवों के शिकार की घटनाएं अत्यंत ही चिंताजनक तेजी से बढ़ी हैं। जिले में सक्रिय शिकारी जिस तरह बेख़ौफ़ अंदाज में एक के बाद एक बेजुबान वन्यजीवों के शिकार की वारदातों को अंजाम देकर सनसनी फैला रहे उससे मैदानी वन अमले की कथित सक्रियता सवालों के घेरे में आ गई है। इस बीच उत्तर वन मंडल पन्ना की विश्रामगंज रेंज के राजस्व क्षेत्र में अवैध शिकार की एक हैरतअंगेज वारदात का खुलासा हुआ है। वन विभाग की टीम ने सिरस्वाहा ग्राम के नजदीक स्थित एक खेत में लगी अरहर की फसल के बीचोंबीच जेसीबी मशीन से जमीन की खुदाई करवाकर 4 वन्यजीवों के क्षत-विक्षत शवों को बहार निकाला गया। बेजुवान वन्य प्राणियों का शिकार करने के बाद उन्हें खेत में ही गड्ढे खोदकर दफना दिया था। इस मामले में फॉरेस्ट टीम के द्वारा खेत मालिक के भतीजे शीतल पाण्डेय पुत्र बाबूलाल पाण्डेय को हिरासत में लेकर सघन पूंछतांछ की जा रही है। समूचे इलाके में यह घटना चर्चा का विषय बनी है।
शिकार करने के बाद वन्य जीवों के शवों को खेत में क़ब्रनुमा गड्ढे में दफना दिया था।
मुखबिर के द्वारा उत्तर वन मंडल के अधिकारियों को इस आशय की सूचना दी गई थी कि, सिरस्वाहा ग्राम से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अरहर के एक खेत में वन्य जीवों को दफनाया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए 14 फरवरी की शाम वन परिक्षेत्राधिकारी विश्रामगंज नितिन राजौरिया ने दल-बल के साथ मौके पर पहुंचकर खेत का मुआयना किया और फिर संदेह के आधार पर फसल के बीचों-बीच खुदाई कराई गई। इस दौरान देर शाम गड्ढे की खुदाई में एक वन्यजीव का शव बरामद हुआ। लेकिन तब तक अंधेरा घिर आने की वजह से खुदाई कार्य को बीच में ही रोक दिया गया। अगले दिन गुरूवार 15 फरवरी को जेसीबी मशीन बुलाकर खेत में पुनः खुदाई कराई गई। इस बार तीन अलग-अलग वन्य जीवों के सड़े-गले (क्षत-विक्षत) शव मिले।
वन विभाग की टीम को अरहर के खेत में खुदाई के दौरान मिला नीलगाय का शव।
प्रथम दृष्ट्या यह माना जा रहा है कि वन्यजीवों की मौत 10-15 पूर्व हुई थी। इस मामले में फॉरेस्ट टीम के द्वारा खेत मालिक के भतीजे शीतल पाण्डेय पुत्र बाबूलाल पाण्डेय निवासी ग्राम सिरस्वाहा को हिरासत लिया है। दरअसल, शीतल पाण्डेय के द्वारा ही अपने चाचा के खेत में खेती कराई जा रही है। खेत से बरामद वन्य जीवों के शवों की संख्या आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल सकी। क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार 3 से 4 शव मिले हैं, जो कि नीलगाय, सांभर और जंगली सूअर के बताए जा रहे हैं।
बता दें कि, जंगली जानवरों से होने वाली फसल हानि को रोकने के लिए जिले में बड़ी संख्या में किसान अपने खेत की बारी में फंदे लगाने और करंट का तार बिछाने जैसे ग़ैरकानूनी उपाए करते हैं। इनमें फंसने या मरने वाले वन्य प्राणियों के मांस को अधिकांश किसान गुपचुप तरीके से मिल बांटकर खा लेते हैं। वहीं जो किसान मांसाहारी नहीं है वे अपने अपराध को छिपाने के लिए मृत वन्य प्राणियों को या तो अपने खेत से दूर ले जाकर फेंक देते हैं या फिर गड्ढा खोदकर गाड़ देते हैं। सूत्रों से पता चला है, शीतल के खेत में मिले वन्य जीवों के शवों का पोस्टमार्टम करवाने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता को मौके पर बुलाया गया था। लेकिन सभी शव इतने अधिक सड़-गल चुके थे कि उनका पोस्टमार्टम करना संभव नहीं था। इस स्थिति में वन्य जीवों के उपलब्ध अवशेषों के सैंपल लेने के बाद शवों का दहन कर दिया गया।

शिकार को लेकर सुर्ख़ियों में विश्रामगंज रेंज

पन्ना जिले के उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज वन्य प्राणियों के अवैध शिकार सहित अन्य वन अपराध मसलन, वन क्षेत्र में अवैध हीरा-पत्थर खनन, सागौन और जलाऊ लकड़ी की अवैध कटाई के लिहाज़ अत्यंत ही संवेदनशील है। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से सटे होने के कारण विश्रामगंज वन परिक्षेत्र के जंगलों में अक्सर ही बाघों और तेंदुओं का मूवमेंट (विचरण) बना रहता है। ऐसे में विश्रामगंज रेंज में महीने भर के अंदर शिकार की तीन सनसनीखेज घटनाओं के सामने आने से एक ओर जहां मैदानी वन अमले की सक्रियता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ बाघ एवं तेंदुआ जैसे संकटग्रस्त वन्य जीवों पर मंडराते गंभीर संकट को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। विदित हो कि, 27 जनवरी को वन परिक्षेत्र की गुड़हा बीट अंतर्गत वन्यजीवों का शिकार करने के लिए सड़क किनारे करंट का तार बिछाने वाला शिकारी फरसू गौंड़ 55 वर्ष इसकी चपेट में आने खुद ही शिकार बन गया था। घटनास्थल पर फरसू आदिवासी का हल्का जला हुआ शव और करंट लगने से मृत नीलगाय का शव मिला था। जबकि चार दिन पूर्व रक्सेहा ग्राम के नजदीक एक खेत की बारी में लगाए गए फंदे में तेंदुआ फंसा हुआ मिला था। पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करके उसकी जान बचाई थी।

मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन : पन्ना जिले में कुल 7 लाख 70 हजार से अधिक मतदाता

*       विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान जिले में बढ़े 5464 मतदाता

पन्ना।(www.radarnews.in) भारत निर्वाचन आयोग द्वारा फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम 2024 के तहत मतदाता सूची (Voter List) का अंतिम प्रकाशन किया जा चुका है। जिला जनसम्पर्क कार्यालय द्वारा जारी समाचार में बताया गया है कि, इस संबंध में राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों को अवगत कराने के उद्देश्य से गत गुरूवार 8 जनवरी को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय स्टैंडिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी हरजिंदर सिंह ने उपस्थित राजनैतिक दल के प्रतिनिधियों को आयोग के कार्यक्रम की गतिविधि अंतर्गत की गई कार्यवाहियों के बारे में अवगत कराया। साथ ही राजनैतिक दल के प्रतिनिधियों के प्रश्नों का समाधान भी किया।

पवई विधानसभा में सर्वाधिक मतदाता

मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के अनुसार जिले में कुल दर्ज मतदाताओं की संख्या अब 7 लाख 70 हजार 416 है, जबकि विगत 6 जनवरी को मतदाता सूची के प्रारूप प्रकाशन के दरम्यान कुल मतदाताओं की संख्या 7 लाख 64 हजार 952 थी। 8 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 4 लाख 7 हजार 461 पुरूष मतदाता, 3 लाख 62 हजार 951 महिला मतदाता और 4 अन्य मतदाता हैं। इसमें 18-19 आयु वर्ग के 19 हजार 304 मतदाता भी दर्ज हुए हैं। पवई विधानसभा में 2 लाख 84 हजार 22, गुनौर विधानसभा में 2 लाख 34 हजार 136 और पन्ना विधानसभा में 2 लाख 52 हजार 258 मतदाता हैं। पवई विधानसभा में महिला मतदाताओं की संख्या 1 लाख 34 हजार 348, गुनौर में 1 लाख 10 हजार 223 और पन्ना विधानसभा में 1 लाख 18 हजार 380 है। पन्ना विधानसभा में 4 अन्य मतदाता भी दर्ज हैं।

जिले में 901 मतदान केन्द्र

मतदान केन्द्रों की कुल संख्या 901 है। बैठक के अवसर पर गत 29 जनवरी से लोकसभा चुनाव 2024 के दृष्टिगत शुरू किए गए ईव्हीएम मशीनों की एफएलसी के बारे में भी अवगत कराया गया। बैठक में अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी नीलाम्बर मिश्र सहित संयुक्त कलेक्टर केएस गौतम एवं निर्वाचन पर्यवेक्षक उमाशंकर दुबे भी उपस्थित थे।

कछुआ चाल ! क्या 6 साल में बनकर तैयार होगा 6 करोड़ की लागत वाला खोरा तालाब ?

 

*    पूर्णता की समयावधि 18 माह, 13 महीने में हुआ सिर्फ 15 प्रतिशत निर्माण

*    जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता वाली स्कीम को लेकर जिम्मेदार उदासीन

*    वर्तमान में मौके पर दर्जन भर से कम मजदूरों से कराया जा रहा है काम

*    ठेकेदार को पूर्व में तीन नोटिस देने के बाद भी असंतोषजनक बनी है भौतिक प्रगति

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) झीलनुमा तालाबों के शहर पन्ना के वाशिंदों को हर साल गर्मी के मौसम में पेयजल समस्या से जूझना पड़ता है। अल्प वर्षा होने की स्थिति में जल संकट कहीं अधिक विकराल रूप ले लेता है। शहर में पानी को लेकर हाहकार चौतरफा हा-हाकार मचने लगता है। नगरीय क्षेत्र की सीमा के विस्तार तथा आबादी में कई गुना वृद्धि होने के परिणाम स्वरूप मौजूदा पेयजल संसाधन (व्यवस्था) शहर की प्यास बुझाने में नाकाफी साबित हो रहे है। साल-दर साल जटिल होते पेयजल संकट से उत्पन्न चुनौती का बेहतर तरीके सामना करने के लिए जिला मुख्यालय पन्ना के कुंजवन वार्ड के नजदीक खोरा नाला पर नवीन तालाब निर्माण कार्य की योजना तैयार की गई थी। करीब 2 वर्ष पूर्व खोरा तालाब योजना को स्वीकृति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह व जल संसाधन संभाग पन्ना के तकनीकी अधिकारी शायद इसके निर्माण कार्य को समयसीमा में पूर्ण कराने को लेकर गंभीर नहीं है! खोरा तालाब ठेकेदार के द्वारा बरती जा रही घोर लापरवाही तथा निर्माण कार्य की कछुआ चाल जिम्मेदारों की बेपरवाही की ओर इशारा करती है।
करीब छह करोड़ की लागत वाले खोरा तालाब के निर्माण को लेकर जल संसाधन विभाग एवं ठेकेदार के मध्य अनुबंध निष्पादित होने के बाद कार्यादेश दिनांक 01 जनवरी 2023 को जारी किया गया था। अनुबंध में कार्य पूर्णता हेतु 18 माह की समयावधि निर्धारित की गई है। गत दिनों रडार न्यूज़ ने खोरा तालाब निर्माण कार्य का जायजा लिया गया। मौके सिर्फ15 प्रतिशत कार्य होना पाया गया। फिलहाल तालाब के फ़िल्टर का कार्य चल रहा है। जिसमें दर्जन भर से कम मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। तालाब की पार कई माह से खुदी पड़ी है। सबकुछ इतना आराम से चल रहा है जैसे किसी को कोई चिंता ही नहीं है।
कार्यालय कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)
बता दें कि, अनुबंध की शर्त अनुसार 18 माह में कार्य पूर्णता के हिसाब से साल भर में करीब 60 फीसदी निर्माण कार्य हो जाना चाहिए था। लेकिन वर्तमान में भौतिक प्रगति महज 10 से 15 प्रतिशत पर ही अटकी है। जल संसाधन विभाग के द्वारा पूर्व में ठेकेदार को 3 नोटिस थमाने के बावजूद तालाब निर्माण की कछुआ चाल बदस्तूर जारी है। मौके पर मिले ठेकेदार के सुपरवाइजर से कार्य की पूर्णता को लेकर सवाल पूंछने पर उसने बताया, तालाब बनने में 3 से 4 साल का समय लगेगा। जानकारों की मानें तो, यह तभी सम्भव होगा जब कार्य मौजूदा गति में सुधार हो। अगर इसी रफ़्तार से निर्माण कार्य चलता रहा तो तालाब बनकर तैयार होने में छह साल का लंबा अरसा लग जाएगा।
यहां सवाल उठता है, जिला मुख्यालय से सटे प्राथमिकता वाले कार्य की प्रगति जब इतनी अधिक असंतोषजनक बनी है तो सुदूर क्षेत्रों में चल रहे जल संसाधन विभाग के अन्य कार्यों की हालत क्या होगी, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। सवाल यह भी है, जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारी तथा जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारी निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठकों में आखिर करते क्या हैं? खोरा तालाब निर्माण की कछुआ गति का मामला इनके संज्ञान में क्यों नहीं है ? इधर, सालभर से नोटिस पर नोटिस खेल रहे जल संसाधन संभाग पन्ना के तकनीकी अधिकारी लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ सख्त एक्शन कब लेंगें? या फिर अभी भी नोटिस थमाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेंगे। ऐसे अनेक बाजिव सवाल हैं जिनके जवाब जिम्मेदारों के पास नहीं है।

फ़िल्टर में दो तरह की गिट्टी का उपयोग

पुराव के लिए मिट्टी के इंतजार में कई माह से खुदी पड़ी खोरा तालाब की पार।
खोरा तालाब के फ़िल्टर में ठेकदार के द्वारा दो तरह की गिट्टी (लाइम स्टोन व ग्रेनाइट स्टोन) का उपयोग किया जा रहा है। इसी तरह फ़िल्टर में नदी की प्राकृतिक रेत के स्थान पर क्रेशर निर्मित रेत एम-सैंड डाली गई है। पन्ना में नदी की रेत सुगमता से उपलब्ध होने के बाबजूद एम-सैंड के उपयोग को लेकर जल संसाधन विभाग के तकनीकी अधिकारियों का दलील है कि रेत की तुलना में गुणवत्ता के लिहाज से एम-सैंड कहीं अधिक बेहतर है। उल्लेखनीय है कि तालाब निर्माण कार्य को शुरू हुए एक वर्ष से अधिक का समय गुजर चुका है लेकिन अब तक कार्य स्थल पर निर्माण कार्य की सामान्य जानकारी प्रदर्शित करने वाला बोर्ड भी नहीं लगाया गया। कई माह से खुदी पड़ी लंबी गहरी नालीनुमा तालाब की पार में मवेशियों को गिरने से रोकने के लिए किसी तरह के कोई सुरक्षात्मक प्रबंध नहीं किए गए।

मिट्टी के लिए अन्य विकल्पों पर हो विचार

पन्ना में कुंजवन वार्ड के बाहरी क्षेत्र में निर्माणाधीन खोरा तालाब की पार में गिरकर आए दिन जख्मी हो रहे मवेशी।
विदित हो कि, खोरा तालाब का निर्माण कार्य मनकी-कटरिया पहाड़ी की तलछट पर कराया जा रहा है। उक्त इलाका पथरीला होने से वहां मिलने वाली कंकड़ युक्त मिट्टी से तालाब निर्माण कार्य संभव नहीं है। तालाब की पार खुदी पड़ी है, जिसमें काली मिट्टी का भराव (पुराव) करने के बाद नजदीक स्थित निरपत सागर की मिट्टी डालने की योजना है। इसलिए निरपत सागर तालाब के सूखने का इंतज़ार किया जा रहा है। ताकि, तालाब की मिट्टी आसानी से निकाली जा सके। इस इतंजार में तालाब की पार करीब छह माह से भी अधिक समय से खुदी पड़ी है। जिसमें गिरकर आसपास के ग्रामीणों के पालतू पशु आए दिन जख्मी हो रहे हैं। ऐसे में ठेकेदार को चाहिए कि तालाब की पार निर्माण हेतु गुणवत्तापूर्ण मिट्टी के लिए लंबा इंतजार करने के बजाए अन्य वैकल्पिक स्रोतों से व्यवस्था बनाई जाए। खोरा तालाब के ही नजदीक जल संसाधन विभाग का एक अन्य तालाब दुबे ताल मौजूद है, जो कि वर्तमान में 70 फीसदी सूखा पड़ा है। इसकी मिट्टी अगर गुणवत्ता परीक्षण में खरी साबित होती है तो बिना किसी देरी के उसे उपयोग में लिया जाए। वहीं कुंजवन ग्राम के आसपास मिट्टी की ईंट बनाने (ईंट भट्टा) का कार्य भी बड़े पैमाने पर चलता है। यहां के लोग ईंट बनाने वालों को अपने खेत की मिट्टी बेंचते हैं इसलिए मिट्टी बेंचने वाले किसानों से भी सम्पर्क किया जा सकता है। इसके आलावा आसपास जहां कहीं भी रिक्त पड़ी राजस्व भूमि में उपयोग लायक मिट्टी मौजूद है उसके खनन की वैधानिक अनुमति लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

इनका कहना है-

“खोरा तालाब निर्माण कार्य की प्रगति वाकई काफी असंतोजनक है, मौके पर सिर्फ 15 प्रतिशत कार्य हुआ है। ठेकेदार का पुराना रिकार्ड विभाग में अच्छा है लेकिन फिलहाल वह थोड़ा परेशान है उसके अन्य स्थानों पर भी कार्य चल रहे हैं, जिनके भुगतान शायद लंबित हैं। पूर्व में ठेकेदार को तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं, उसे एक ओर नोटिस दिया जाएगा। खोरा तालाब निर्माण में निरपत सागर तालाब की मिट्टी का उपयोग किया जाना है इसलिए उसके सूखने की प्रतीक्षा की जा रही है।”

सतीश शर्मा, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, पन्ना जिला पन्ना (म.प्र.) ।

कलेक्टर ने सपत्नीक कल्दा पठार पहुंचकर मुर्गीपालन गतिविधियों का लिया जायजा

*     आदिवासी समाज की महिलाओं से किया संवाद

पन्ना। (www.radarnews.in) बुंदेलखंड अंचल का पचमढ़ी कहे जाने वाले पन्ना जिले के कल्दा पठार का कलेक्टर हरजिंदर सिंह ने बीती रविवार को अपनी धर्मपत्नी डॉ. शैली सिंह के साथ भ्रमण किया। कलेक्टर ने आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत कल्दा के ग्राम गुरजी पहुंचकर यहां मुर्गीपालन की नवीन आजीविका गतिविधियों से जुड़ी महिलाओं से संवाद किया और परंपरागत तरीके से जीवनयापन के स्थान पर मुर्गीपालन के जरिए रोजगार का अवसर प्राप्त करने पर शुभकामनाएं दीं। जिला कलेक्टर ने पत्नी डॉ. शैली सिंह के साथ नवनिर्मित मुर्गीपालन शेड भी देखा और यहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया।
कलेक्टर हरजिंदर सिंह अपनी धर्मपत्नी डॉ. शैली सिंह के साथ मुर्गी पालन शेड के अंदर चूजों को देखते हुए।
उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन की पहल पर पवई और शाहनगर जनपद पंचायत क्षेत्र के आदिवासी ग्रामों की पांच सौ महिलाओं को इस गतिविधि से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रथम चरण में सौ महिलाओं के साथ गतिविधि शुरू की गई है। मनरेगा योजना के तहत निर्मित एक मुर्गीपालन शेड की लागत 2 लाख 48 हजार रुपए है। आदिवासी परिवार की महिलाएं शेड में चूजों को दाना पानी देने एवं साफ सफाई का कार्य करेंगी और प्रतिमाह 7 से 8 हजार रूपए तक की आमदनी अर्जित कर सकेंगी। महिलाएं नवीन आजीविका गतिविधि से जुड़कर बहुत प्रसन्न हैं और जिला प्रशासन के अभिनव पहल की सराहना की है।