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केन-बेतवा लिंक परियोजना: प्रचार-प्रसार में अनियमित खर्च, ऑडिट रिपोर्ट ने खड़े किए गंभीर सवाल

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पन्ना जिले के पवई क़स्बा में स्थित केन-बेतवा लिंक परियोजना जल संसाधन संभाग क्र.-1 का कार्यालय।

*     बिना निविदा प्रचार कार्य, छोटे बिलों में भुगतान और अयोग्य एजेंसियों के चयन पर एजी की आपत्ति

   कार्यपालन यंत्री पवई के निर्णय और जल संसाधन विभाग के उच्चाधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) देश की महत्वाकांक्षी केन–बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, जिसे बुंदेलखंड के लिए जीवनरेखा बताया जा रहा है, वह निर्माण से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। परियोजना संभाग क्रमांक–1 पवई (जिला पन्ना) में प्रचार-प्रसार और दीवार लेखन के नाम पर लाखों रुपये के नियम विरुद्ध भुगतान का मामला महालेखाकार, ग्वालियर की ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 में उजागर हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार परियोजना के प्रचार कार्य के लिए न तो कोई निविदा आमंत्रित की गई, न ही शासन के निर्धारित नियमों का पालन किया गया। इसके बावजूद कार्यपालन यंत्री उमा गुप्ता द्वारा अपने स्तर पर निर्णय लेते हुए चहेते ठेकेदारों/एजेंसियों से कार्य कराया गया।

फ्लैक्स-बैनर पर 4,54,574 रुपए का अनियमित खर्च

एजी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, फ्लैक्स एवं बैनर प्रिंट से संबंधित यह प्रचार कार्य 109 टुकड़ों में विभाजित कर कराया गया। प्रत्येक बिल की राशि  जानबूझकर 5,000 से कम रखी गई, जिससे निविदा प्रक्रिया से बचा जा सके। रिपोर्ट में दर्ज है कि यह कार्य मेसर्स टीकम सिंह, अदिति स्टेशनरी एवं प्रिंटिंग तथा स्टूडियो चित्र मंदिर से कराया गया। ऑडिट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमानुसार ऐसे कार्यों के लिए कम से कम तीन सक्षम संविदाकारों को चिन्हित कर निविदा आमंत्रित की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा किए जाने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है। एजी ने यह भी दर्ज किया है कि कराया गया यह प्रचार कार्य केन–बेतवा लिंक परियोजना के स्वीकृत स्कोप से बाहर है, जिससे परियोजना लागत में अनावश्यक वृद्धि हुई और व्यय को अनियमित माना गया।

5,000 से कम के 117 बिल पर 5 लाख का भुगतान

ऑडिट में यह तथ्य सामने आया कि प्रचार-प्रसार का कार्य जानबूझकर 117 अलग-अलग बिलों में विभाजित किया गया। प्रत्येक बिल की राशि 5,000 से कम रखी गई ताकि निविदा प्रक्रिया से बचा जा सके। इन बिलों के माध्यम से मेसर्स टीकम सिंह एवं अमर कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर को कुल 5,36,552/- का भुगतान किया गया। एजी ने इस व्यय को “नियमविरुद्ध एवं गंभीर वित्तीय अनियमितता” की श्रेणी में दर्ज किया है। ऑडिट रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख है कि जिन एजेंसियों से दीवार लेखन और प्रचार कराया गया, उनका जीएसटी पंजीकरण निर्माण सामग्री- सीमेंट, लोहा, ईंट, माइलस्टोन आदि के लिए है। प्रचार-प्रसार, दीवार लेखन एवं बैनर प्रिंटिंग जैसे कार्य उनके पंजीकृत कार्यक्षेत्र में शामिल नहीं हैं। इसके बावजूद उनसे कार्य कराना नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रचार-प्रसार पर दर्शाए गए खर्च की तुलना में धरातल पर कार्य महज 20 या 30 प्रतिशत ही कराया गया। ठेकेदारों और अधिकारियों की सांठगांठ से फर्जीवाड़ा कर करीब 70 प्रतिशत राशि का गबन किए जाने की आशंका है।

जीएसटी कटौती न करने से शासन को नुकसान

ऑडिट रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रचार-प्रसार कार्य के लिए ठेकेदारों/एजेंसियों को 9.91 लाख रुपए के भुगतान के दौरान 2 प्रतिशत की दर से कुल 19,818/- GST की कटौती नहीं की गई, जिससे शासन को प्रत्यक्ष तौर पर वित्तीय क्षति हुई। यह लापरवाही सीधे तौर पर आहरण-संवितरण अधिकारी की जिम्मेदारी में आती है। लेखा परीक्षा के दौरान ऑडिटरों के द्वारा निविदा आमंत्रित करने की नस्ती तथा उक्त राशि व्यय हेतु सक्षम अधिकारी की स्वीकृति मांगे जाने पर न तो लेखा परीक्षा को उपलब्ध कराई गई और ना ही उत्तर के साथ संलग्न किया गया। जोकि यह दर्शाता है, कार्य सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बगैर कराया गया तथा कार्यपालन यंत्री ने 9 लाख 91 हजार रुपए का संदेहास्पद भुगतान किया है। उल्लेखनीय है कि यह प्रचार-प्रसार कार्य वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कराया गया था। जिसके चलते इस कवायद को परियोजना से भविष्य में होने वाले लाभों का चुनावी माहौल में प्रचार कर सत्ताधारी दल को राजनीतिक लाभ पहुंचाने वाले कदम के तौर पर देखा गया।

गंभीर ऑडिट आपत्ति के बाद भी संरक्षण?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रचार-प्रसार में नियम-पारदर्शी प्रक्रिया को दरकिनार करने के साथ कागजों में खर्च राशि और धरातल पर कराए में है बड़ा अंतर।
केन-बेतवा लिंक परियोजना (केबीएलपी) के प्रचार-प्रसार कार्य पर हुए लाखों रुपए के व्यय को लेकर एजी की स्पष्ट आपत्तियों के बावजूद न तो संबंधित कार्यपालन यंत्री और न ही अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई विभागीय कार्रवाई की गई है। जल संसाधन विभाग के उच्च स्तर पर इस गंभीर ऑडिट आपत्ति को नजरअंदाज किया जाना, पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। केन-बेतवा जैसी राष्ट्रीय परियोजना, जो लाखों लोगों की उम्मीदों से जुड़ी है, उसमें दीवारों पर लिखे नारे अब भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहे हैं। सवाल प्रचार का नहीं, बल्कि मनमाने निर्णय और जवाबदेही का है। जल संसाधन विभाग में वित्तीय अनियमितताओं तथा गुणवत्ता विहीन कार्यों से जुड़े मामलों को शीर्ष स्तर पर सालों-साल ठंडे बस्ते में रखकर रफा-दफा करने की अघोषित नीति से घपले-घोटाले करने वालों के हौसले बुलंद हैं।

इनका कहना है-

“मुझे कुछ भी नहीं कहना है, आप जो भी चाहें लिखने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे आपको बता दूं, प्रचार-प्रसार कार्य प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम के समय हुआ था। जब आपसे कोई कार्य 10-12 दिन में करने को कहा जाएगा तो वह इसी तरह होगा। निविदा आमंत्रित करके कार्य कराने की प्रक्रिया में कम से कम एक से डेढ़ माह का समय लगता है। प्रचार-प्रसार कार्य तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर और नोटशीट पर उनसे स्वीकृति लेकर कराया गया। ऑडिट की आपत्तियों का शीर्ष स्तर से जवाब देकर निराकरण किया जा चुका है। ऑडिट क्लीयरेंस का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद केन्द्र सरकार राज्य को राशि आवंटित करती है।”

उमा गुप्ता, कार्यपालन यंत्री, केबीएलपी, जल संसाधन संभाग क्र.-1 पवई, जिला पन्ना।

लालची दोस्त बने कातिल! मेडिकल स्टोर संचालक का अपहरण कर पहले की लूटपाट, फिर बेरहमी से मार डाला

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मेडिकल स्टोर संचालक, तौहीद हसन (जीवित अवस्था का चित्र)

*     सोशल मीडिया पर खबर आने के बाद परिजनों को मिली जानकारी

*     हत्यारोपियों में सतना निवासी एमआर और पन्ना का टैक्सी चालक शामिल

*     पन्ना से सटे उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के जमवारा गांव में वारदात को दिया अंजाम

पन्ना। (www.radarnews.in) पड़ोसी जिला बांदा उत्तर प्रदेश के नरैनी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत जमवारा गांव में शनिवार 17 जनवरी की सुबह केन नदी किनारे झाड़ियों में मिले  के शव की शिनाख्त हो चुकी है। मृतक फार्मासिस्ट तौहीद हसन पन्ना के कटरा मोहल्ला का निवासी और पेशे से मेडिकल स्टोर संचालक था। मृतक की शिनाख्त उसके चाचा सीएमओ मेहमूद हसन ने की है। तौहीद को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले कोई और नहीं बल्कि वे हमउम्र लोग हैं, जिन्हें वह अपना दोस्त समझता था। सनसनीखेज अंधे क़त्ल की अब तक की जांच-पड़ताल में पता चला है कि शनिवार की सुबह फजिर की नमाज पढ़ने के बाद मस्जिद से बाहर निकले तौहीद को बादल शहीद बाबा की मजार के पास से उसका एमआर दोस्त आनंद गुप्ता, राशिद खान और अन्य साथी अगवा करके कार से ले गए थे। कथित तौर पर दोस्तों ने तौहीद को बांदा जिले के जमवारा गांव में सूनसान स्थान पर ले जाकर उसके पास मौजूद नकदी रुपए, मोबाइल जबरन छीन लिया। और फिर लूटपाट का विरोध करने पर आरोपियों ने धारदार हथियार से तौहीद के सिर एवं चेहरे में कई जानलेवा प्रहार कर उसे बड़ी ही बेरहमी से कत्ल कर दिया। जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। इधर, बेटे के रात 10 बजे तक घर न लौटने से चिंतित-परेशान परिजनों को जब सोशल मीडिया पर आई ख़बरों के माध्यम से घटना की जानकारी लगी तो हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी अनुसार तौहीद हसन पन्ना के कटरा मोहल्ला में कोतवाली चौराहा के समीप रहने वाले वरिष्ठ शिक्षक मक़सूद हसन का इकलौता पुत्र था। फार्मासिस्ट का कोर्स करने के बाद कुछ माह पूर्व ही उसने पन्ना के बस स्टैंड में मेडिकल स्टोर खोला था। विनम्र, शांत और धार्मिक स्वाभाव वाला तौहीद सब-ए-मिराज के मौके पर देर रात तक तिलावत करने के बाद शनिवार 17 जनवरी 2026 को अल सुबह फजिर की नमाज पढ़ने के बाद जब मस्जिद से बाहर निकला तो बादल शहीद बाबा की दरगाह के पास उसे सतना निवासी पेशे से एमआर दोस्त आनंद गुप्ता, राशिद खान व अन्य साथी मिल गए। कथित रूप से सभी युवक तौहीद को अगवा कर अपनी कार से पड़ोसी जिला बांदा उत्तर प्रदेश के नरैनी थाना अंतर्गत जमवारा गांव ले गए। जहां गांव के बाहर केन नदी किनारे स्थित झाड़ियों के पास सूनसान स्थान पर लालची दोस्तों ने उसके पास मौजूद नकदी रुपए, मोबाइल जबरन छुड़ा लिया। और फिर लूटपाट का विरोध करने से बौखलाए आरोपियों ने धारदार हथियार से तौहीद के सिर एवं चेहरे पर कई जानलेवा प्रहार कर उसे बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इधर, पन्ना में परिजन बेटे के घर न लौटने और उससे कोई संपर्क न होने से काफी चिंतित-परेशान थे। जमवारा गांव में खून से लथपथ अज्ञात युवक का शव मिलने की देर रात जब ख़बरें वायरल हुई तो परिजन स्तब्ध रह गए।
उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के जमवारा गांव में खून से लथपथ हालत में मिला था पन्ना के मेडिकल स्टोर संचालक का शव।
अनहोनी की आशंका के चलते आनन-फानन में मृतक के चाचा सीएमओ मेहमूद हसन और रिश्ते के भाई आरिफ खान ने जमवारा ग्राम पहुंचकर जानकारी जुटाई तो पता चला शव को पुलिस दोपहर में ही नरैनी थाना ले गई। नरैनी पहुंचकर थाना में सम्पर्क किया तो पुलिस आरक्षक उन्हें बांदा स्थित मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी ले गए, जहां शव को पोस्टमार्टम के लिए रखा गया था। खून से लथपथ भतीजे की लाश को सामने देख मेहमूद हसन की आंखें भर आईं और कलेजा बैठ गया। परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि, एमआर आनंद गुप्ता निवासी सतना व राशिद खान निवासी राजाबाबू कॉलोनी पन्ना व अन्य कार से तौहीद को जमवारा लेकर आए थे। अपुष्ट जानकारी अनुसार आरोपियों को नरैनी पुलिस द्वारा तत्परता से हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की जा रही है। जघन्य हत्याकांड में अन्य व्यक्तियों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।उल्लेखनीय है कि पुलिस ने अभी इस मामले का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि उनके बेटे की लूटपाट के इरादे से उसके ही दोस्तों के द्वारा निर्ममतापूर्वक हत्या की गई है। जवान बेटे के क़त्ल की वारदात का पता चलने के बाद से हसन परिवार मातम में डूबा है। वहीं नगर में भी शोक की लहर व्याप्त है।

मध्यप्रदेश: आदिवासी की जमीन हड़पने के मामले में कांग्रेस नेता श्रीकांत दीक्षित गिरफ्तार, जेल भेजा

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पुलिस अभिरक्षा में कोतवाली थाना पन्ना से जिला अस्पताल के लिए रवाना होते कांग्रेस नेता श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित। (हुडी जैकेट पहने)

*    दो आदिवासी महिलाओं की शिकायत पर जांच के बाद दर्ज हुआ था आपराधिक प्रकरण

*     सीने में दर्द की शिकायत पर रात्रि में जेल से जिला अस्पताल लाकर कराया भर्ती

*     गिरफ्तारी की कार्रवाई शहर में बनी चर्चा का विषय, मामले में अन्य आरोपी फरार

पन्ना।(www.radarnews.in) बेबस और लाचार आदिवासी महिलाओं की बेशकीमती भूमि को हड़पने के मामले में पुलिस ने खनिज ठेकेदार एवं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महामंत्री श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हैरान करने वाला फर्जीवाड़ा कर दो आदिवासी महिलाओं की पैतृक भूमि को क्रय करके अपने नाम पर नामांतरण कराने के आरोप में पुलिस ने गुरुवार 15 जनवरी 2026 की सुबह पप्पू को उनके घर से गिरफ्तार कर शाम को न्यायालय में पेश किया। जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए। न्यायालय के आदेश पर अमल करते हुए पुलिस ने आरोपी को देर शाम जिला जेल में दाखिल करा दिया। जमीन हड़पने के इस बहुचर्चित मामले में कोतवाली थाना पन्ना में श्रीकांत उर्फ पप्पू दीक्षित समेत 3 आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 419, 409, 34 आईपीसी एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम 1989 की धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध है। मामले में शामिल अनुपम त्रिपाठी निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना सहित अन्य आरोपी फरार हैं, जबकि एक आरोपी राजाराम सौंर निवासी जैतूपुरा की वर्ष 2023 में मृत्यु हो चुकी है। कांग्रेस नेता पप्पू को गिरफ्तार करने
की कार्रवाई पन्ना एसडीओपी एसपी सिंह के बघेल के नेतृत्व वाली पुलिस टीम के द्वारा की गई।

यह है पूरा मामला

पन्ना जिला मुख्यालय से लगे मनौर ग्राम की दो आदिवासी महिलाओं ने कांग्रेस नेता श्रीकांत उर्फ़ पप्पू दीक्षित और अनुपम त्रिपाठी पर उनकी 2 हेक्टेयर पैतृक कृषि भूमि को फर्जीवाड़ा करते हुए अवैध तरीके से क्रय कर कब्जाने का आरोप लगाया था। फरियादिया संतोष रानी गौंड़ पुत्री स्वर्गीय जगोला आदिवासी 50 वर्ष निवासी ताखौरी थाना रैपुरा ने इस मामले की शिकायत दिनांक 25 सितंबर 2025 कोतवाली थाना पन्ना में दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसके पिता जगोला गौंड़ की मृत्यु हो चुकी है। मां मलन बाई नेत्रहीन है। परिवार में केवल दो बहनें हैं, कोई भाई नहीं है। इसके बावजूद एक व्यक्ति राजाराम सौंर निवासी जैतूपुरा थाना अमानगंज ने फर्जी तरीके से स्वयं को मेरे पिता का एकमात्र पुत्र बताकर मनौर ग्राम में स्थित हमारी पैतृक आराजी भूमि खसरा नंबर 148/4 रकवा 2.000 हेक्टेयर का फौती नामांतरण अपने नाम पर करा लिया है। पूर्व में इस प्रकरण की अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना द्वारा की गई जांच में कई बेहद चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए थे। जांच प्रतिवेदन में यह बात सामने आई कि श्रीकांत उर्फ पप्पू ने अपने मित्र अनुपम त्रिपाठी के साथ मिलकर कथित तौर पर राजराम सौंर निवासी जैतपुरा को उनके माता पिता एकमात्र पुत्र दर्शाया। इसके आधार पर राजाराम से मनौर ग्राम की 2 हेक्टेयर कृषि भूमि क्रय करके अपने नाम पर नामांतरण करा लिया। इसी आधार पर पुलिस के द्वारा पप्पू दीक्षित, अनुपम त्रिपाठी और राजाराम सौंर के विरुद्ध कोतवाली थाना में अपराध क्रमांक 824/2025 पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया था।

पिता के मिलते-जुलते नाम के आधार किया फर्जीवाड़ा

खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता पप्पू उर्फ़ श्रीकांत दीक्षित।
कुसुम रानी गौंड़ व संतोष रानी पुत्री स्वर्गीय जगोला गौंड़ द्वारा फर्जीवाड़े की पहली शिकायत कलेक्टर पन्नासे की गई थी। जिसमें बताया गया कि, ग्राम जैतूपुर तहसील अमानगंज निवासी एक फर्जी व्यक्ति द्वारा अपने एवं हमारे पिता के मिलते-जुलते नाम का फायदा उठाया गया है और हमारा भाई एवं माता-पिता का एक मात्र फर्जी पुत्र बनाकर फर्जी तरीके से हमारी जमीन अनुपम त्रिपाठी एवं श्रीकांत दीक्षित द्वारा क्रय की गई। पूर्व कलेक्टर सुरेश कुमार ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पन्ना से जांच प्रतिवेदन मंगाया था। जांच में खुलासा हुआ कि, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र और संलग्न दस्तावेज शपथ पत्र में उल्लेख है कि उनके पिता की ग्राम मनौर स्थित भूमि खसरा नंबर 148/4 रकवा 2.000 हेक्टेयर को अनुपम एवं श्रीकांत ने जैतुपुरा के एक फर्जी व्यक्ति राजाराम को आवेदिकाओं का भाई और उनके माता पिता का फर्जी पुत्र बनाकर जमीन अवैध तरीके से क्रय की गई, जबकि दोनों बहनों के संलग्न शपथ पत्र में लेख है कि हमारा कोई भाई नहीं है। आवेदिकाओं के निकट संबंधी एवं दो साक्षियों के प्रस्तुत शपथ पत्र में भी इस बात का उल्लेख है कि दिवंगत पिता की केवल दो पुत्रियां है एवं कोई भाई नहीं है। उक्त खसरा नंबर की भूमि को कुछ लोगों ने धोखाध़ड़ी करके ट्रांसफर करवा ली है। इनमें राजाराम सौंर सहित श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी शामिल हैं। शपथ पत्रों में यह भी लेख है कि श्रीकांत दीक्षित एवं रामलखन त्रिपाठी ने इस फर्जी कार्य के लिए राजाराम को 35 हजार रूपए दिए थे।

नामांतरण प्रक्रिया पर भी उठाए थे सवाल

पन्ना एसडीएम ने अपनी जांच में ग्राम मनौर की नामांतरण पंजी प्रविष्टि क्रमांक 10 पर तहसीलदार पन्ना द्वारा पारित आदेश की प्रति के संबंध में मूल नामांतरण पंजी से मिलान की कार्यवाही की गई। इस दौरान पाया गया कि यह प्रविष्टि हल्का पटवारी द्वारा खसरा नंबर के खातेदार की 15 वर्ष पूर्व मृत्यु और उनकी पत्नी 10 वर्ष पूर्व फौत होना लेखकर उनके फर्जी पुत्र के पक्ष में नामांतरण किए जाने के संबंध में दर्ज की गई थी। तहसीलदार पन्ना द्वारा मृतक के स्थान पर वारिश के नाम नामांतरण स्वीकृत किया गया। मूल नामांतरण पंजी के साथ उद्घोषणा पत्र चस्पा है, किंतु तामीली, मुनादी या प्रकाशन कराने संबंधी कोई रिपोर्ट इसमें अंकित नहीं है। दिनांक 9 नवम्बर 2020 की नकल अनुसार पंजीकृत विक्रय पत्र 05 सितंबर 2020 के आधार पर श्रीकांत दीक्षित एवं अनुपम त्रिपाठी के पक्ष में स्वीकृत किया गया है। इस मामले में दस्तावेजों के अवलोकन उपरांत पाया गया कि उक्त भूमि जगोला पिता बल्दुआ गौड़ निवासी मनौर के नाम दर्ज रही है, जबकि जैतुपुरा निवासी राजाराम आदिवासी गौड़ नहीं बल्कि सौंर जनजाति के हैं। कलेक्टर न्यायालय द्वारा प्रकरण में कुछ माह पूर्व निर्णय पारित करते हुए तहसीलदार पन्ना का 28 जुलाई 2018 का आदेश निरस्त कर उक्त आराजी मूल भूमि स्वामी जगोला गौड़ पिता बल्दुआ के वैध वारिसों के नाम पुनः दर्ज करने का आदेश दिया गया। साथ ही फर्जीवाड़ा करने वाले क्रेताओं के विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई हेतु लेख किया था। इसी आधार पर पुलिस ने संतोष रानी की शिकायत पर कांग्रेस नेता पप्पू दीक्षित, अनुपम त्रिपाठी और राजाराम सौंर के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया था।

जेल से अस्पताल लाकर कराया भर्ती

पप्पू दीक्षित को गिरफ्तार करने की खबर आने के बाद कोतवाली थाना में भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
आदिवासी महिलाओं की जमीन हड़पने के मामले में कई दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी खनिज ठेकेदार एवं कांग्रेस नेता श्रीकांत उर्फ़ पप्पू दीक्षित को पुलिस द्वारा गुरुवार को गिरफ्तार करने की खबर आने के बाद बड़ी संख्या में उनके परिचित, समर्थक, कांग्रेस-भाजपा नेता और विप्र समाज के लोगों का हुजूम कोतवाली थाना में उमड़ पड़ा। गिरफ़्तारी की दस्तावेजी कार्रवाई के चलते कोतवाली थाना में काफी देर लोगों और स्थानीय मीडिया का जमावड़ा लगा रहा। शाम को पुलिस वाहन से मेडिकल परीक्षण के लिए पप्पू को जब जिला अस्पताल लाया गया तो कोतवाली थाना में जमा भीड़ पीछे-पीछे वहां भी पहुंच गई। इस दौरान काफी गहमा-गहमी भरा माहौल रहा। देर शाम उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान न्यायालय परिसर में भी काफी भीड़-भाड़ देखी गई। न्यायालय के आदेश पर देर शाम पप्पू को जिला जेल भेज दिया गया। जहां लगभग डेढ़ घंटे बाद सीने में दर्द, घबराहट होने की शिकायत पर डॉ. आरके ठाकुर ने जेल पहुंचकर उसका परीक्षण किया। और फिर डॉक्टर की सलाह पर बेहतर उपचार के लिए रात्रि में करीब 9.30 बजे प्रहरियों द्वारा जेल से जिला अस्पताल ले जाकर लाकर भर्ती कराया गया। समाचार लिखे जाने तक पप्पू दीक्षित का जिला अस्पताल में उपचार जारी था।

9 करोड़ की सड़क, एक साल भी नहीं चली: गड्ढों में तब्दील 4 किमी. डायवर्सन रोड; भ्रष्टाचार की परतें उघाड़ती तस्वीरें

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पन्ना-अजयगढ़ मार्ग पर रुन्ज बांध क्षेत्र में निर्मित वैकल्पिक मार्ग की जर्जर स्थिति के फोटो दे रहे घटिया निर्माण कार्य की गवाही।

*      स्टेट हाईवे-55 पर पन्ना–अजयगढ़ के बीच रुंज बांध क्षेत्र का मामला

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) स्टेट हाईवे-55 पर पन्ना–अजयगढ़ मार्ग के बीच रुंज बांध क्षेत्र में जल संसाधन विभाग पन्ना द्वारा निर्मित 4 किलोमीटर लंबी डायवर्सन रोड आज अपने निर्माण के महज एक साल के भीतर ही पूरी तरह उखड़ चुकी है। लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह सड़क अब कागजी गुणवत्ता और जमीनी हकीकत के बीच के भयानक अंतर को उजागर कर रही है। सड़क की मौजूदा हालत की तस्वीरें (फोटो) किसी बयान या सफाई की मोहताज नहीं हैं। जगह-जगह उखड़ी परतें, धंसी हुई सतह, बड़े-बड़े गड्ढे और बिखरा हुआ मटेरियल साफ संकेत देता है कि सड़क की यह जर्जर स्थिति सामान्य घिसावट का नहीं, बल्कि घटिया निर्माण और तकनीकी अनदेखी का परिणाम है। सड़क निर्माण से जुड़े जानकारों का मानना है कि नई बनी सड़क में समय के साथ सूक्ष्म पेंच या सतही दरारें आ सकती हैं, लेकिन यदि सड़क गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनी हो तो एक साल के भीतर उसका इस कदर जर्जर हो जाना असंभव है। यह स्थिति सीधे तौर पर इस ओर इशारा करती है कि या तो निर्माण के समय सब-स्टैंडर्ड मटेरियल का उपयोग हुआ, या फिर तकनीकी निगरानी केवल फाइलों तक ही सीमित रही।

गारंटी पीरियड में सड़क खस्ताहाल, जवाबदेह कौन?

सालभर पहले बनी 4 किलोमीटर लंबी सड़क गारंटी पीरियड में ही जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी।
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि यह सड़क अभी गारंटी पीरियड में है। नियमों के अनुसार इस अवधि में सड़क के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है। इसके बावजूद सड़क को उसकी बदहाली पर छोड़ दिया जाना यह दर्शाता है कि ठेकेदार को खुली छूट और विभागीय संरक्षण प्राप्त है। सड़क की हालत को देखकर यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या जल संसाधन विभाग किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद जांच और बयानबाजी का सिलसिला शुरू होगा? रुंज सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में पुरानी सड़क का कुछ हिस्सा आने के बाद यातायात को चालू रखने के उद्देश्य से यह वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था। लेकिन आज यही मार्ग दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए खतरे का पर्याय बन गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक आए दिन वाहन अनियंत्रित होकर पलटने का खतरा बढ़ गया है। वहीं दुपहिया चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं और छिटपुट दुर्घटनाएं अब आम हो चुकी हैं। यातयात को सुरक्षित बनाने के बजाए वाहन चालकों-यात्रियों को खस्ताहाल सड़क पर चलने के लिए मजबूर करके उनके जीवन को जानबूझकर खतरे में डाला जा रहा है। जिम्मेदारों की यह बेपरवाही गंभीर आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।

कार्यपालन यंत्री की भूमिका पर सवाल

सतीश शर्मा, प्रभारी कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पन्ना।
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करने वाला पहलू यह है कि सड़क का निर्माण सालभर पहले पूरा हो जाने के बावजूद जल संसाधन विभाग अब तक इसे मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) को हैंडओवर नहीं कर पाया है। एमपीआरडीसी द्वारा सड़क को अपने अधीन लेने के लिए जिन आवश्यक तकनीकी, गुणवत्ता और प्रशासनिक दस्तावेजों की मांग की गई, वे आज तक उपलब्ध नहीं कराए गए। यह स्थिति सीधे तौर पर जल संसाधन संभाग पन्ना के प्रभारी कार्यपालन यंत्री सतीश शर्मा की घोर लापरवाह और गैर-जिम्मेदार कार्यप्रणाली को उजागर करती है। एक ओर गारंटी पीरियड में ही जर्जर हो चुकी सड़क की मरम्मत कराने में आपराधिक स्तर की उदासीनता बरती जा रही है, वहीं दूसरी ओर सड़क को एमपीआरडीसी को हैंडओवर न कर पाना यह दर्शाता है कि विभाग में जवाबदेही की पूरी व्यवस्था ही ठप है। सड़क को हैंडओवर करने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन होने के रटे-रटाए जवाब देकर लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि सड़क आज भी जल संसाधन विभाग के अधीन है और उसकी हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। अब सवाल यह नहीं है कि सड़क कब सुधरेगी, बल्कि यह है कि क्या किसी बड़ी जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होगी, या फिर सार्वजनिक धन और आमजन की जान यूं ही दांव पर लगी रहेगी?

इनका कहना है

“कुछ समय पहले जल संसाधन विभाग ने सड़क को हैंडओवर करने के लिए पत्र भेजा था, जिसके जबाव में उनसे सड़क निर्माण की अनुमतियों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मंगाए थे लेकिन फिर उनका कोई जवाब नहीं आया। अभी उक्त सड़क जल संसाधन विभाग के ही पास है और गारंटी पीरियड में है।”

एमके पटेल, एजीएम, एमपीआरडीसी सागर

“वैकल्पिक सड़क का निर्माण कार्य 8 करोड़ 88 लाख रुपए की लागत से अग्रवाल कंस्ट्रक्शन टीकमगढ़ ने किया था। सड़क अभी गारंटी पीरियड में इसलिए सुधार की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। सड़क एमपीआरडीसी को हैंडओवर करने की कार्रवाई प्रचलन में है। सड़क की मरम्मत के लिए भी ठेकेदार को वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्राचार किया है। इस संबंध में जानकारी के लिए आपको कार्यपालन यंत्री से सम्पर्क करना पड़ेगा।”

देवेन्द्र अहिरवार, उपयंत्री, जल संसाधन संभाग, पन्ना

EOW का एक्शन: कार्यपालन यंत्री समेत फर्म के प्रोप्रराइटर पर कई संगीन धाराओं में अपराध पंजीबद्ध           

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सागर में स्थित आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ का कार्यालय भवन। (फाइल फोटो)

*     जालसाजी कर फर्म के नाम फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने का मामला

पन्ना। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) सागर में आवेदक सम्यक जैन एवं मनन अग्रवाल द्वारा अनावेदक तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग खण्ड दमोह के विरूद्ध मेसर्स अमन इन्टरप्राइजेज पन्ना को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में शिकायत की थी। शिकायत आवेदन पत्र की जांच में मेमर्स अमन इन्टरप्राइजेज को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करना पाए जाने से तत्कालीन कार्यपालन यंत्री व फर्म के प्रोपराइटर अमन ओमरे के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

ठेका उमापति का प्रमाण पत्र मेसर्स अमन को जारी

ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) सागर द्वारा की गई जांच में पाया गया कि जिला दमोह में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जारी टेंडर क्रमांक 31/21-22 उमापति ड्रिलर्स को प्राप्त हुआ। फर्म द्वारा कार्य पूर्ण करने पर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र मेसर्स उमापति ड्रिलर्स को जारी किया गया था। इसके विपरीत तत्कालीन कार्यपालन यंत्री एम. के. उमरिया द्वारा वर्ष 2022 में टेंडर प्राप्तकर्ता फर्म से भिन्न फर्म मेसर्स अमन इन्टरप्राईजेस को अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया गया। मेसर्स अमन इन्टरप्राईजेस द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) से कोई भी टेंडर प्राप्त नहीं किया गया था एवं न ही किसी प्रकार का अनुबंध किया गया। मेसर्स अमन इन्टरप्राईजेस द्वारा इस फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का उपयोग पन्ना जिले में टेंडर प्राप्त करने के लिए किया गया।

 … तो अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भी होगी कार्रवाई

इस प्रकार तत्कालीन कार्यपालन यंत्री द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए षडयंत्रपूर्वक मेसर्स अमन इंटरप्राइजेज के प्रोप्रराइटर अमन ओमरे के साथ मिलकर मेसर्स अमन इन्टरप्राईजेज को अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया गया, जबकि उक्त टेंडर उमापति ड्रिलर्स को प्राप्त हुआ था व कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र भी उमापति ड्रिलर्स को जारी किया गया था। जांच उपरांत आरोपियों एम.के. उमरिया तत्कालीन कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग खण्ड दमोह, अमन ओमरे प्रोप्रराइटर मेसर्स अमन इन्टरप्राईजेज पन्ना एवं मेसर्स अमन इन्टरप्राईजेस, अजयगढ़ चौराहा पन्ना के विरूद्ध अपराध अंतर्गत धारा 420, 120 बी भादवि. एवं धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के घटित करना पाए जाने से अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। विवेचना के दौरान अन्य व्यक्तियों की भूमिका आने पर भी वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

सामाजिक भेदभाव का प्रतीक मनुस्मृति को जलाकर संविधान बचाने लिया संकल्प

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पन्ना के अंबेडकर चौक पर मनुस्मृति की प्रतियों को आग के हवाले करते आजाद समाज पार्टी एवं भीम आर्मी भारत एकता मिशन के पदाधिकारी।

* आजाद समाज पार्टी के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष की अगुवाई में अंबेडकर चौक पर हुआ प्रदर्शन

पन्ना।(www.radarnews.in) आजाद समाज पार्टी एवं भीम आर्मी भारत एकता मिशन पन्ना के तत्वाधान में गुरुवार 25 दिसंबर 2025 को अंबेडकर चौक में मनुस्मृति दहन दिवस मनाया गया। शाम के समय आयोजित हुए इस सांकेतिक प्रदर्शन में बहुजन समाज के लोगों द्वारा मनुस्मृति (मनु विधान) की प्रतियां जलाई गईं।
इस आयोजन की पृष्ठभूमि बताते हुए आजाद समाज पार्टी पन्ना के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष शैलेष विश्वकर्मा ने कहा कि आज ही के दिन बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी द्वारा सन 1927 में काले कानून अर्थात मनुस्मृति का लाखों लोगों की उपस्थिति में सार्वजनिक रूप से दहन किया था और समाज में समरसता पैदा करने का संकल्प लिया था। इसी तारतम्य में प्रत्येक वर्ष 25 दिसंबर को मनुस्मृति दहन दिवस मनाया जाता है। श्री विश्वकर्मा ने बताया, मनुस्मृति को एक ऐसा ग्रंथ माना जाता है, जो सामाजिक भेदभाव और असमानता को बढ़ावा देता रहा है। इसी के विरोध और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष मनुस्मृति दहन दिवस मनाया जाता है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के मूल्यों की रक्षा का संकल्प लेना तथा बहुजन समाज को एकजुट कर उनके सामाजिक उत्थान की दिशा में विचार-विमर्श करना रहा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सार्वजनिक रूप से मनुस्मृति का दहन कर संविधान की रक्षा की प्रतिज्ञा ली। इसके उपरांत शाम 7 बजे धरमसागर तालाब के समीप स्थित निषादराज भवन में एक सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें बहुजन समाज के सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक उत्थान को लेकर रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी, ओबीसी महासभा एवं भीम आर्मी एकता मिशन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। जिसमें मुख्य रूप से आजाद समाज पार्टी से शैलेष विश्वकर्मा एडवोकेट, नंदकिशोर अहिरवार एडवोकेट, कमलेश वर्मा एडवोकेट, बृजेश रैकवार, सतीश यादव एवं सुनील टाइगर जिलाध्यक्ष भीम आर्मी भारत एकता मिशन पन्ना, नत्थू सिंह यादव (पूर्व सरपंच दरेरा), देवू सिंह गौड़, रामेश्वर कुशवाहा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

मांग : पिछड़ा वर्ग की सामजिक सुरक्षा के लिए ‘बैकवर्ड क्लास एट्रोसिटी प्रिवेंशन एक्ट’ किया जाए लागू

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 ओबीसी महासभा पन्ना ने राज्यपाल के नाम सात सूत्रीय मांगों का सौंपा ज्ञापन

 आईएस संतोष वर्मा की टिप्पणी की गलत व्याख्या के आधार पर न हो कार्रवाई

 ओबीसी आरक्षण से होल्ड समाप्त कर नौकरियों में बहाल किया जाए 27 फीसदी आरक्षण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) ओबीसी महासभा जिला इकाई पन्ना द्वारा प्रदेश के महत्वपूर्ण मसलों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार 13 दिसम्बर को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम सात सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन पन्ना एसडीएम संजय कुमार नागवंशी को सौंपा गया। पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट ऑफिस पहुंचे ओबीसी महासभा के कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों की द्वारा जमकर नारेबाजी की गई। ज्ञापन में अन्य पिछड़ा वर्ग को सामाजिक सुरक्षा एवं संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने के लिए एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर ‘बैकवर्ड क्लास एट्रोसिटी प्रिवेंशन एक्ट’ लागू करने, आईएस संतोष वर्मा के विरुद्ध किसी दबाव या आंशिक टिप्पणी की गलत व्याख्या के आधार पर कार्रवाई न करने, सरकारी नौकरियों में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण की तत्काल बहाली तथा पन्ना जिले के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती में अवैध वसूली की जांच कराए जाने सहित अन्य मुद्दे शामिल हैं। ओबीसी महासभा की मांगों का आदिवासी और दलित संगठनों ने न सिर्फ पूर्ण समर्थन किया है बल्कि एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए इनके प्रतिनिधि भी ज्ञापन में सम्मलित हुए।
राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में लेख है कि, देश में संविधान लागू हुए 75 वर्ष बीत जाने के बाद भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति, जनजाति को समान अधिकार, सामजिक सुरक्षा, न्याय तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने हेतु अनेक स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। समय-समय पर समाज विभाजनकारी शक्तियां सामाजिक सौहार्द एवं संवैधानिक मर्यादाओं को ठेस पहुंचाने का कार्य कर रही है। अतः ओबीसी महासभा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति आपसे ज्ञापन के बिंदुओं पर गम्भीरता पूर्वक विचार कर त्वरित कार्रवाई करने की मांग करती हैं।

आईएएस वर्मा के साथ हो न्याय

ज्ञापन लेख है कि, अन्य पिछड़ा वर्ग को सामाजिक सुरक्षा एवं संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने हेतु “पिछड़ा वर्ग अत्याचार निरोधक अधिनियम” को लागू किया जाए, जिससे इस वर्ग के सामाजिक, आर्थिक राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। आईएएस संतोष वर्मा जी ने अपने समूचे प्रशासनिक जीवन में सामाजिक न्याय, समान अवसर और पिछड़े वर्गों की आवाज़ को मजबूती से उठाने का कार्य किया है। वर्तमान विवाद में उनके वक्तव्य को वास्तविक संदर्भ से हटाकर देखा गया जिससे एक समर्पित अधिकारी की छवि प्रभावित हुई है। ओबीसी महासभा की मांग है कि उनके समग्र सेवा रिकॉर्ड, सामाजिक योगदान और सकारात्मक कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें निष्पक्ष सुनवाई व प्राकृतिक न्याय का पूर्ण अवसर प्रदान किया जाए। किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि दबाव या आंशिक व्याख्या के आधार पर। ज्ञापन में मांग की गई है कि श्री वर्मा जी को न्याय दिया जाए।

किसानों के साथ वादाखिलाफी बंद करो

ओबीसी महासभा ने मांग की है कि, मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण पर लगे होल्ड को समाप्त कर नौकरियों में 27 फीसदी आरक्षण पुनः लागू किया जाए। अटकी हुई नियुक्ति प्रक्रियाओं को तत्काल प्रारंभ किया जाए। ज्ञापन में सूबे की भाजपा सरकार को उसके चुनावी वादों की याद दिलाते हुए धान की खरीदी 3,100/- (इक्तीस सौ) रुपए और गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी 2,700/- (सत्ताइस सौ) रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने की मांग की है। ओबीसी महासभा ने अन्नदाता किसानों के साथ की जा रही वादाखिलाफी तथा अन्य चुनावी घोषणओं पर ईमानदारी से अमल के लिए राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। साथ ही मध्यप्रदेश में रिक्त पड़े बैकलॉग (एससी, एसटी, ओबीसी) के लगभग 70 लाख सरकारी पदों पर शीघ्र भर्ती सुनिश्चित करने तथा पन्ना के स्वास्थ्य विभाग आउटसोर्स की भर्तियों में अवैध वसूली, भाई-भतीजावाद की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

ये रहे शामिल

ओबीसी महासभा जिला अध्यक्ष पन्ना राम भगत कुशवाहा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से जयस जिला अध्यक्ष मुकेश गौंड़, एडवोकेट शैलेष विश्वकर्मा, सोनेलाल प्रजापति, राजकुमार कुशवाहा, नत्थू यादव, संगीता पटेल, सुनील टाइगर जिला अध्यक्ष भीम आर्मी, देवीदीन कुशवाहा परशुराम पटेल विधानसभा अध्यक्ष ओबीसी महासभा पन्ना नंदकिशोर अहिरवार, बृजेश रैकवार सहित अन्य लोग शामिल रहे।

पन्ना में जेके सीमेंट 1850 करोड़ के अतिरिक्त निवेश से करेगा यूनिट विस्तार, 800 लोगों को मिलेगा रोजगार

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  मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति की बैठक

पन्ना। राज्य में निवेश संवर्धन और रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खजुराहो में मंगलवार 9 दिसंबर को निवेश संवर्धन पर मंत्रि-परिषद समिति की अहम बैठक ली। बैठक में 5 औद्योगिक इकाइयों के निवेश प्रकरणों को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश के जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को दी जाने वाली वित्तीय सुविधाओं के संबंध में अहम निर्णय लिए गए। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, एमएसएमई मंत्री चैतन्य कश्यप, कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास और धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्रि-परिषद समिति की बैठक में जेके सीमेंट कंपनी के निवेश प्रकरण पर चर्चा हुई। कंपनी वर्तमान में पन्ना जिले में 2600 करोड़ रुपये के इंटीग्रेटेड क्लिंकर और सीमेंट प्रोडक्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और 6 हजार से अधिक लोगों को रोजगार भी दे रही है। जेके सीमेंट भविष्य में 1850 करोड़ रूपये से अधिक के अतिरिक्त निवेश से यूनिट का विस्तार कर रही है, जिससे 800 लोगों को रोजगार मिलेगा।

रेड लाइट एरिया के पास नाले में युवक की लाश मिलने से फैली सनसनी

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पन्ना के देवेंद्रनगर में घटनास्थल के समीप जमा भीड़ और मौके पर मौजूद थाना पुलिस।

*   मृतक के पन्ना निवासी होने की चर्चा, पुलिस ने पहचान को लेकर नहीं की आधिकारिक पुष्टि

पन्ना।(www.radadnews.in) जिले के देवेंद्रनगर क़स्बा के बाहरी इलाके में रेड लाइट एरिया के नजदीक राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक- 39 किनारे स्थित नाले में आज सुबह अज्ञात व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से सनसनी फ़ैल गई। देखते ही देखते घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंची स्थानीय थाना पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना कर लोगों से पूछताछ की और वरिष्ठ अधिकारियों को शव मिलने की जानकारी दी गई। मृतक की आयु लगभग 30-32 वर्ष बताई जा रही है। घटना पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अज्ञात मृतक की पहचान कथित तौर पर पन्ना निवासी सेन समाज के युवक रूप में होने की जनचर्चा है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक युवक की शिनाख्ती (पहचान) के संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी।
आज मंगलवार 9 दिसंबर की सुबह देवेन्द्रनगर की कंजर बस्ती में रहने वाले कुछ लोगों ने मुख्य सड़क किनारे स्थित नाले में जब एक युवक की लाश को पानी में तैरते हुए देखा तो जबरदस्त हड़कंप मच गया। तत्काल इसकी सूचना देवेंद्रनगर थाना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी रामहर्ष सोनकर ने हमराही बल के साथ मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का मुआयना किया। वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी देने के बाद पन्ना से पहुंची फॉरेंसिक टीम ने शव की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी कर स्थल की जांच की। तदुपरांत स्थानीय लोगों की मदद से शव को पानी से बाहर निकाला गया। आसपास के लोगों से पूछताछ कर पंचनामा कार्रवाई करने के बाद पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच-पड़ताल में युवक की न तो आधिकारिक तौर पर शिनाख्त हो सकी और ना ही उसकी मौत के कारणों का पता चल सका।

युवक को लेकर क्या है जनचर्चा

देवेंद्रनगर क़स्बा में शाम के समय अज्ञात मृतक को लेकर कई तरह की चर्चाएं रहीं। इनके अनुसार, मृतक पन्ना निवासी सेन जाति का युवक है। कथित तौर पर वह सोमवार की शाम देवेन्द्रनगर में किसी से व्यक्ति से रुपए लेने के लिए आया था। युवक की मौत को लेकर आशंका जताई जा रही है कि शायद उसने कंजर बस्ती में पहले अवैध शराब का सेवन किया और फिर वापस लौटते समय नशे की हालत में नाले गिरने से ठंडे पानी में डूबकर मर गया। युवक की मौत कैसे हुई इसका खुलासा आधिकारिक तौर पर मृतक की शिनाख्त तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होने की बात कही जा रही है।

 

हीरा खदान ने खोली किस्मत: 20 दिन की मेहनत में लखपति बने 2 दोस्त

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पन्ना जिले के पटी क्षेत्र की उथली खदान में दो दोस्तों को मिला 15.34 कैरेट वजन वाला जैम क्वॉलिटी का हीरा।

15 कैरेट वजन वाला उज्जवल किस्म का 70 लाख रुपए मूल्य का मिला हीरा

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) अक्सर ही यह कहा जाता है, पन्ना की रत्नगर्भा वसुंधरा किसी को कभी भी रंक से राजा बना सकती है! ऐसा ही चमत्कार आज पन्ना में एकबार फिर से हुआ है। यहां महज 20 दिन पूर्व उथली हीरा खदान लगाने वाले दो दोस्तों को 15.34 कैरेट का बेशक़ीमती हीरा मिला है। उज्जवल किस्म (जैम क्वॉलिटी) के इस हीरे का अनुमानित बाजार मूल्य 70 लाख रुपए बताया जा रहा है। दोनों युवकों ने अपने हीरे को जिला हीरा कार्यालय पन्ना में जमा कराया है जिसे आगामी हीरों की नीलामी में बिक्री के लिए रखा जाएगा।
बता दें कि सतीश खटीक पिता मुन्ना खटीक 24 वर्ष ने अपने दोस्त साजिद मोहम्मद पिता नफीस मोहम्मद 23 वर्ष निवासी रानीगंज मोहल्ला पन्ना के साथ मिलकर हीरा कार्यालय से उथली खदान का पट्टा बनवाकर करीब 20 दिन पूर्व कृष्णा कल्याणपुर क्षेत्र में खदान लगाई थी। दोनों नवयुवकों की किस्मत आज अचानक उस समय चमक उठी जब उन्हें खदान में चमचमाता हुआ बड़े साइज का हीरा मिला। हीरा पाने की तमन्ना पूरी होने से दोनों दोस्तों की ख़ुशी देखते ही बनती है। आज दोपहर में दोनों ने हीरा कार्यालय पहुंचकर पारखी अनुपम सिंह से जांच एवं वजन कराने के पश्चात अपने हीरे को विधिवत जमा करा दिया।

अब धूमधाम से हो सकेगी बहनों की शादी

सतीश खटीक ने बताया कि वह अपने पिता के साथ बकरे की मटन की दुकान चलाता है और उसकी दो बहनें हैं जो आप शादी के लायक हो गई हैं और उसके दोस्त साजिद मोहम्मद की भी दो बहने हैं और वह अपनी पिता के साथ फ्रूट की दुकान में काम करता है। उसने बताया कि बहनों की शादी के लिए उन्हें पैसों की सख्त जरूरत थी जिसके चलते उन्होंने हीरा कार्यालय से पट्टा बनवाकर अपनी किस्मत आजमाई। संयोग से आज उन्हें पटी हीरा खदान क्षेत्र में चमचमाता हुआ15.34 कैरेट का जैम क्वालिटी का हीरा मिला। हीरा मिलने का एहसास इनके लिए मन मांगी मुराद पूरी हो होने जैसा है। सतीश ने बताया कि नीलामी से मिलने वाले पैसों को वह दोनों दोस्त बराबर बराबर बाटेंगे और उनसे अपनी बहनों की धूमधाम से शादी करेंगे। इसके बाद जो रुपए बचेंगे उनसे पुनः खदान लगाएंगे साथ ही अपने काम-धंधे को बढ़ाने पर खर्च करेंगे।

दादा ने भी आजमाई किस्मत मगर पोते को मिली सफलता

पन्ना के हीरा कार्यालय में सतीश और साजिद ने पत्रकारों को अपना बेशकीमती हीरा दिखाया।
साजिद मोहम्मद बताते हैं कि उनके दादा मोहम्मद हबीब करीब 50 वर्षों तक अपनी किस्मत आजमाते रहे लेकिन उन्हें एक कैरेट का भी हीरा नहीं मिला। इसके बाद उनके पिता नफीस मोहम्मद ने भी करीब 20 साल तक उथली हीरा खदानें खोदी लेकिन हमेशा ही छोटे-मोटे हीरे ही मिले। दो पीढ़ियों की निराशा के बाद आज जब उसे 15.34 कैरेट का हीरा मिला तो परिवार में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। वहीं जिला हीरा कार्यालय पन्ना के हीरा पारखी अनुपम सिंह ने बताया कि उक्त हीरा जैम क्वालिटी का है, जिसकी मार्केट में अच्छी डिमांड है। उन्होंने बताया कि इस हीरे को आगामी नीलामी में बिक्री के लिए रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि हाल ही में पन्ना डायमंड को जियो टैग मिलने के बाद और इस साल जमा होने वाले हीरों में यह अब तक का सबसे बड़ा हीरा है।