जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना, मध्य प्रदेश। (फाइल फोटो)
* लोकायुक्त ट्रैप कार्रवाई के मामले में विशेष न्यायालय पन्ना ने सुनाया फैसला
* अवैध उत्खनन प्रकरण में जब्त ट्रैक्टर छोड़ने के एवज मांगी गई थी रिश्वत
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में घूसखोरी के एक चर्चित मामले में विशेष न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार एवं उसके सहयोगी को दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला गुनौर तहसील में ट्रैक्टर छोड़ने के एवज में रिश्वत मांगने और लेने से जुड़ा था। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) पन्ना श्री सुरेन्द्र मेश्राम की अदालत ने आरोपी तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला तथा चौकीदार देवीदयाल दहायत को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्ध पाते हुए 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
अभियोजन के अनुसार गुनौर तहसील क्षेत्र के ग्राम सिली निवासी ब्रजबिहारी प्रजापति ने जनवरी 2020 में लोकायुक्त पुलिस सागर से शिकायत की थी कि उनका ट्रैक्टर कथित अवैध उत्खनन के मामले में जब्त कर थाना गुनौर में खड़ा कराया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ट्रैक्टर छोड़ने के बदले तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला ने 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी, जो बाद में 35 हजार रुपये पर तय हुई। शिकायतकर्ता के अनुसार बातचीत के दौरान 10 हजार रुपये पहले ही ले लिए गए थे, जबकि शेष 25 हजार रुपये देने के लिए कहा गया था। लोकायुक्त द्वारा सत्यापन के बाद 25 जनवरी 2020 को जाल बिछाया गया। अभियोजन के मुताबिक आरोपी के शासकीय आवास पर शिकायतकर्ता द्वारा 25 हजार रुपये देने पर नायब तहसीलदार ने राशि अपने पास खड़े चौकीदार देवीदयाल दहायत को लेने के लिए कहा। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए राशि बरामद की थी। मामले की विवेचना पूर्ण होने के बाद अभियुक्तों के विरुद्ध विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी मानवेन्द्र सिंह ने पैरवी करते हुए साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर आरोपों को प्रमाणित किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष के तर्कों से संतुष्ट होकर तत्कालीन नायब तहसीलदार रविशंकर शुक्ला को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
प्रतीकात्मक चित्र।
वहीं सहआरोपी देवीदयाल दहायत को धारा 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) के तहत पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 12 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अभियोजन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। यह मामला लोकसेवकों द्वारा अवैध पारितोषिक की मांग एवं स्वीकार किए जाने से संबंधित था, जिसमें न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए दोषसिद्धि का निर्णय दिया।
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र से एक ऐसी स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। धरमपुर थाना क्षेत्र के भखुरी गांव में एक नवविवाहित जोड़े (पति-पत्नी) ने अज्ञात कारणों के चलते कथित तौर पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। अस्पताल ले जाते समय और इलाज के दौरान दोनों की ही मौत हो गई। इस दोहरे सुसाइड से हंसते-खेलते परिवार की खुशियां पल भर में मातम में बदल गईं।
प्राप्त जानकारी अनुसार शनिवार की रात करीब 8 बजे पूरे परिवार ने एक साथ बैठकर हंसी-खुशी खाना खाया था। इसके बाद 25 वर्षीय सागर यादव और उसकी 23 वर्षीय पत्नी श्याम कली अपने कमरे में सोने चले गए। लेकिन कुछ ही देर बाद कमरे से अचानक चीखने-चिल्लाने और उल्टियां करने की आवाजें आने लगीं। परिजन जब कमरे में पहुंचे तो दोनों की हालत बेहद खराब थी। आनन-फानन में दोनों को अजयगढ़ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से गंभीर हालत में उन्हें पन्ना जिला अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन बदकिस्मती से पत्नी श्याम कली ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, जबकि पति सागर की मौत जिला अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई।
मृतक सागर चार बहनों का इकलौता भाई था और उसकी शादी को महज 3 साल ही हुए थे। थाना प्रभारी अनिल राजपूत के मुताबिक, चूंकि मृतिका नवविवाहिता है, इसलिए मर्ग कायम कर पुलिस हर एंगल से मामले की बारीकी से तफ्तीश कर रही है। दोनों के शवों का रविवार को पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। समाचार लिखे जाने तक नवयुगल (पति-पत्नी) द्वारा आत्मघाती कदम उठाने के पीछे की असली वजह का पता नहीं चल सका। पुलिस का कहना है प्रकरण की विस्तृत जांच के बाद ही घटना के कारणों का आधिकारिक तौर पर खुलासा हो सकेगा।
* ज्ञापन सौंपकर बजट उपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग
* मानदेय भुगतान में देरी से बढ़ीं आर्थिक परेशानियां
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के अजयगढ़ विकासखंड के अतिथि शिक्षकों ने अप्रैल माह के मानदेय भुगतान में हो रही देरी को लेकर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया है। अतिथि शिक्षक संघ ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अजयगढ़ को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच तथा लंबित मानदेय के शीघ्र भुगतान की मांग की है। संघ द्वारा सौंपे गए आवेदन के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 9 अप्रैल 2026 को अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए बजट आवंटित किया गया था। आवेदन में दावा किया गया है कि जिले के अन्य विकासखंडों में अप्रैल माह का मानदेय जारी हो चुका है, जबकि अजयगढ़ विकासखंड के अतिथि शिक्षकों को अब तक भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।
बजट उपयोग को लेकर उठाए सवाल
अतिथि शिक्षक संघ का आरोप है कि अप्रैल माह के लिए उपलब्ध कराई गई राशि से पूर्ववर्ती महीनों का भुगतान किया गया, जिसके कारण अप्रैल माह का मानदेय लंबित रह गया। संघ ने फरवरी, मार्च और अप्रैल माह के बजट आवंटन तथा व्यय की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि समय पर मांग पत्र नहीं भेजा गया अथवा बजट प्रबंधन में किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई है तो इसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के अनुसार अधिकारियों से चर्चा के दौरान उन्हें बताया गया कि वर्तमान में उपलब्ध राशि पूरे विकासखंड के अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही उच्च स्तर पर अतिरिक्त बजट की मांग भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।
मामूली मानदेय पर निर्भर शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट
अतिथि शिक्षक (Guest Teacher) लंबे समय से नियमित और समयबद्ध मानदेय भुगतान की समस्या उठाते रहे हैं। सीमित मानदेय पर सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों के लिए भुगतान में देरी सीधे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। बढ़ती महंगाई के बीच अधिकांश अतिथि शिक्षक अपने परिवार का भरण-पोषण इसी आय के सहारे करते हैं। ऐसे में मानदेय में एक-दो माह की देरी का अर्थ अक्सर किराना, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उधार या कर्ज पर निर्भर होना होता है। शिक्षकों का कहना है कि समय पर भुगतान न होने से उन्हें बार-बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे व्यापक सवाल
यह मामला एक बार फिर प्रदेश में अतिथि शिक्षकों की स्थिति को लेकर बहस का विषय बन गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अतिथि शिक्षकों को समय पर मानदेय तक उपलब्ध नहीं हो पाता। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों और अतिथि शिक्षकों से जुड़ी समस्याएं वर्षों से बनी हुई हैं। वहीं सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और संसाधनों के विस्तार के दावे करती रही है। ऐसे में समय पर मानदेय भुगतान जैसे बुनियादी मुद्दे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करते हैं।
जांच और भुगतान की मांग
अतिथि शिक्षक संघ अजयगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष संजय कुमार रैकवार सहित अतुल्य जैन, अश्विनी कुमार रैकवार, दीपक कुमार पाण्डेय, दिलीप यादव, दिनेश पाल एवं सुनील पाल ने संयुक्त रूप से प्रशासन से मांग की है कि फरवरी, मार्च एवं अप्रैल माह के बजट आवंटन और व्यय की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही लंबित अप्रैल माह के मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकासखंड के अतिथि शिक्षकों को आर्थिक कठिनाइयों से राहत मिल सके। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जानी चाहिए।
* हत्या के कारणों पर बना रहस्य, पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच में जुटी
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के पवई कस्बा में स्थित वार्ड क्रमांक 14 में सोमवार को सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी ही भाभी, जो आशा कार्यकर्ता के रूप में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थीं, पर धारदार हथियार से हमला कर उनकी निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने भी जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पवई से लेकर सुनवानी क्षेत्र तक तरह-तरह की चर्चाओं का दौर जारी है, जबकि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
कमरे में बंद कर वारदात को दिया अंजाम
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनवानी क्षेत्र में पदस्थ 37 वर्षीय आशा कार्यकर्ता रजनी शुक्ला पवई में किराये के मकान में रहकर अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की देखरेख कर रही थीं। उनके पति अलग रहते बताए जाते हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आरोपी सुरेंद्र उर्फ सीताराम तिवारी ने वारदात से पहले मृतका की 17 वर्षीय बेटी को कमरे से बाहर कर दिया और इसके बाद कमरे का दरवाजा बंद कर रजनी शुक्ला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी ने उठाया आत्मघाती कदम
बताया जा रहा है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने भी जहरीला पदार्थ खा लिया। जब परिजनों और पुलिस को घटना की जानकारी मिली तथा दरवाजा खोला गया, तब कमरे के भीतर दोनों मृत अवस्था में पाए गए। पुलिस का मानना है कि आरोपी की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर हत्या की वजह क्या थी?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिनके चलते आरोपी ने अपनी ही भाभी की इतनी निर्ममता से हत्या कर दी? क्या इसके पीछे कोई पारिवारिक विवाद था, पुरानी रंजिश थी, मानसिक तनाव था या फिर कोई अन्य कारण? फिलहाल इन सवालों का कोई स्पष्ट और आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। घटना के बाद क्षेत्र में अनेक तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन पुलिस ने अभी तक किसी भी संभावित कारण की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पुलिस जुटी हर पहलू की पड़ताल में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही एसडीओपी भावना सिंह दांगी और थाना प्रभारी सुशील अहिरवार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। परिजनों और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है तथा घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। एक ही परिवार से जुड़े दो लोगों की मौत और वह भी इस तरह की परिस्थितियों में होने से क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है। लोगों के बीच सबसे अधिक चर्चा इसी बात को लेकर है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि मामला हत्या और फिर आरोपी की मौत तक पहुंच गया। समाचार लिखे जाने तक यह प्रश्न का अनुत्तरित था और पुलिस की जांच जारी थी।
* कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने किया निरीक्षण, देवेंद्रनगर पहुंची स्पेशल ट्रेन
* ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना ने पार किया एक और महत्वपूर्ण पड़ाव
* दशकों पुराने रेल सपने को नया विस्तार मिलने से जिले में ख़ुशी और उत्साह का माहौल
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले के लिए बुधवार का दिन रेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया। वर्षों से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे जिले के लोगों के सपनों को उस समय नई उड़ान मिली, जब ललितपुर-सिंगरौली नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत फुलवारी से देवेन्द्रनगर तक तैयार 6.90 किलोमीटर लंबे नए रेल खंड पर विशेष निरीक्षण ट्रेन का 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सफल ट्रायल रन किया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने इस रेल खंड का निरीक्षण कर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया।
समीक्षा बैठक, दस्तावेजों की भी हुई जांच
पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर मंडल के अनुसार मध्य वृत (मुंबई) के कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) गुरू प्रकाश ने निरीक्षण कार्यक्रम की शुरुआत फुलवारी स्टेशन से की। यहां निर्माण संगठन और जबलपुर मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित कर परियोजना से जुड़े अभिलेखों, सुरक्षा दस्तावेजों तथा विभिन्न तकनीकी तैयारियों की समीक्षा की गई। इसके बाद मोटर ट्रॉली के माध्यम से फुलवारी से देवेन्द्रनगर के बीच निर्मित नए रेल खंड का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पश्चिम मध्य रेलवे मुख्यालय से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) एम.एस. हाश्मी सहित निर्माण एवं संरक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जबलपुर रेल मंडल से मंडल रेल प्रबंधक कमल कुमार तलरेजा सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी निरीक्षण और ट्रायल रन के दौरान मौजूद रहे।
संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों को परखा
निरीक्षण के दौरान रेलवे संरक्षा आयुक्त ने रेल पथ, पुल-पुलियाओं, सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली, विद्युत अधोसंरचना तथा परिचालन व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया। इसके बाद देवेन्द्रनगर से फुलवारी तक 12 डिब्बों वाली विशेष निरीक्षण ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाकर ट्रैक की गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा मानकों का परीक्षण किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। देवेन्द्रनगर स्टेशन पर उपलब्ध यात्री सुविधाओं और परिचालन व्यवस्थाओं का भी विस्तृत अवलोकन किया गया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ समय पहले ही नागौद से फुलवारी रेल खंड पर सफल ट्रायल रन के साथ पहली बार ट्रेन पन्ना जिले की सीमा तक पहुंची थी। अब देवेन्द्रनगर तक रेल पहुंचने से परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है।
रेलवे कनेक्टिविटी से विकास को मिलेगी नई रफ्तार
पन्ना जिले में रेल लाने की मांग नई नहीं है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों, व्यापारिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों ने कई दशकों तक रेल संपर्क के लिए लगातार आवाज उठाई। लंबे संघर्ष, जनआंदोलनों और लगातार किए गए प्रयासों के बाद ललितपुर-सिंगरौली नई रेल लाइन परियोजना को गति मिली। बुधवार को जब निरीक्षण विशेष ट्रेन देवेन्द्रनगर स्टेशन पहुंची तो क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। लोगों ने इसे पन्ना के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि फुलवारी-देवेन्द्रनगर रेल खंड शुरू होने से क्षेत्रीय रेल संपर्क और मजबूत होगा। इससे पन्ना तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित, सुगम और बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से हीरा नगरी पन्ना और आसपास के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
अब पन्ना मुख्यालय तक ट्रेन पहुंचने की प्रतीक्षा
वर्तमान में देवेन्द्रनगर से पन्ना तक रेल लाइन बिछाने का कार्य तेजी से प्रगति पर है। परियोजना पूरी होने पर रेल लाइन पन्ना से अजयगढ़ होते हुए खजुराहो रेलवे स्टेशन से जुड़ेगी, जिससे बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को नई पहचान मिलेगी। जिले के लोगों का कहना है कि जिस रेल का सपना कई पीढ़ियों ने देखा था, वह अब धीरे-धीरे हकीकत बनता दिखाई दे रहा है। देवेन्द्रनगर तक ट्रेन पहुंचने के बाद अब सबसे बड़ी प्रतीक्षा उस दिन की है, जब पहली ट्रेन पन्ना जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन पर पहुंचेगी।
पन्ना जिले के पर्यटक ग्राम मड़ला निवासी अमर सिंह यादव और उनके परिजनों ने कब्जे की शासकीय भूमि से बेदखल करने की कार्यवाही पर रोक लगाने आवेदन सौंपा।
* प्रभावितों ने मुख्यमंत्री के नाम पन्ना कलेक्टर को सौंपा आवेदन
* पर्यटक ग्राम मड़ला में केन किनारे स्थित है बेशकीमती कृषि भूमि
* कई दशकों से खेती कर जीवनयापन कर रहा गरीब परिवार
* राजस्व कार्रवाई को लेकर आवेदन में लगाए गए राजनीतिक प्रभाव के आरोप
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना के नजदीकी ग्राम मनौर में स्थित आदिवासी महिलाओं की भूमि हड़पने को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब एक नया भूमि प्रकरण भी चर्चा में आ गया है। पन्ना तहसील के पर्यटक ग्राम मड़ला की शासकीय भूमि से जुड़े एक राजस्व मामले ने बेदखली की कार्रवाई के बीच नया मोड़ ले लिया है। मामले में पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक का नाम आवेदन पत्र में आने के बाद यह विवाद स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तहसीलदार न्यायालय पन्ना द्वारा शासकीय भूमि पर लंबे समय से चले आ रहे कब्जे को अतिक्रमण की श्रेणी में मानते हुए एक व्यक्ति को भूमि से बेदखल करने तथा 2 हजार रुपये का अर्थदंड लगाने के आदेश के बाद मामला अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय तक पहुंच गया है। इस बीच प्रभावित परिवार ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को आवेदन पत्र प्रस्तुत कर पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह तथा उनके भाई लोकेंद्र प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शासकीय भूमि से अनाधिकृत कब्जा हटाने तहसीलदार पन्ना द्वारा दल गठित करने का आदेश।
राजस्व अभिलेखों के अनुसार ग्राम मड़ला स्थित लगभग 1.600 हेक्टेयर शासकीय भूमि के संबंध में तहसीलदार न्यायालय पन्ना में प्रकरण दर्ज किया गया था। पटवारी प्रतिवेदन के आधार पर दर्ज मामले में गजराज यादव पिता भगवानदास यादव निवासी मड़ला के उक्त भूमि पर कब्जे का उल्लेख किया गया था। सुनवाई के दौरान गजराज यादव ने न्यायालय के समक्ष दावा किया कि उनके परिवार का उक्त भूमि पर लगभग 100 वर्षों से कब्जा रहा है तथा उनके पिता भगवानदास यादव के नाम पुराने राजस्व अभिलेखों में भी प्रविष्टियां दर्ज रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार लंबे समय से उक्त भूमि पर खेती कर अपने उदर-पोषण का साधन जुटाता रहा है और उनके कब्जे को अतिक्रमण नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार कब्जे से संबंधित अर्थदंड की पुरानी रसीदें भी उपलब्ध हैं। हालांकि उपलब्ध अभिलेखों और प्रस्तुत दस्तावेजों के परीक्षण के बाद तहसीलदार न्यायालय पन्ना ने 14 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश में संबंधित भूमि को शासकीय भूमि मानते हुए कब्जे को अतिक्रमण की श्रेणी में माना। न्यायालय ने गजराज यादव पर 2 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया तथा शासकीय भूमि से बेदखली का आदेश पारित किया।
अपील स्वीकार, लेकिन तत्काल राहत नहीं
तहसीलदार के आदेश के विरुद्ध गजराज यादव ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय पन्ना में अपील प्रस्तुत की। अपील को 22 दिसंबर 2025 को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने तहसीलदार न्यायालय से संबंधित अभिलेख तलब किए हैं। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार अपील लंबित रहने के दौरान बेदखली आदेश पर तत्काल स्थगन (स्टे) प्रदान नहीं किया गया। इसी बीच 20 मई 2026 को तहसीलदार पन्ना अखिलेश प्रजापति ने अपने पूर्व आदेश के पालन के लिए राजस्व कर्मचारियों की दस सदस्यीय टीम गठित कर 26 मई 2026 को मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। आदेश की प्रति थाना प्रभारी मड़ला को भी भेजी गई, जिसमें आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने लेख किया गया था। इस प्रकार संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक तैयारी कर ली गई थी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी गजराज यादव को शासकीय भूमि से अपना कथित अनाधिकृत कब्जा हटाने के संबंध में नोटिस जारी किए जा चुके थे।
राजनीतिक प्रभाव में कार्रवाई का आरोप
प्रभावित कृषक परिवार द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पन्ना कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन की कॉपी।
बेदखली की कार्रवाई की संभावना से चिंतित यादव परिवार गत माह पन्ना पहुंचा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम कलेक्टर ऊषा परमार को आवेदन सौंपा। 22 मई 2026 को दिए गए आवेदन में परिवार ने आरोप लगाया है कि राजस्व कार्रवाई पर प्रभावशाली व्यक्तियों का दबाव होने की आशंका है। आवेदन में विशेष रूप से पूर्व मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह तथा उनके भाई लोकेंद्र प्रताप सिंह का उल्लेख करते हुए कई आरोप लगाए गए हैं। आवेदनकर्ताओं का दावा है कि उनकी भूमि के आसपास विधायक और उनके भाई द्वारा भूमि क्रय की गई है तथा वहां पर्यटन गतिविधियों से जुड़ी परियोजना अथवा रिसोर्ट विकसित करने की योजना है। परिवार का आरोप है कि इसी कारण उन्हें उक्त भूमि से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
प्रभावित कृषक अमर सिंह यादव, हरी सिंह, गुमान सिंह, वंदना यादव, ममता यादव, सरोज, सुम्मेर सिंह सहित अन्य लोगों का कहना है कि उनके परिवार के उदर-पोषण का प्रमुख साधन यही कृषि भूमि है और उनके पास अन्य कोई भूमि नहीं है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि भूमि छोड़ने के लिए उन्हें आर्थिक प्रस्ताव दिए गए। परिवार का कहना है कि यदि उन्हें भूमि से बेदखल किया गया तो उनके समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
आवेदनकर्ताओं ने दीर्घकालिक कब्जे तथा पुराने राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए बेदखली की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने और राहत प्रदान करने की मांग की है। आवेदन के साथ वर्ष 1974-75 के खसरे की सत्यापित प्रति भी संलग्न किए जाने का उल्लेख किया गया है, जिसमें भगवानदास यादव के नाम अतिक्रमण दर्ज होने का दावा किया गया है।
पहुंच मार्ग निर्माण पर भी उठाए सवाल
कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधायक एवं उनके भाई द्वारा खरीदी गई भूमि तक पहुंच के लिए ग्राम पंचायत मड़ला द्वारा सड़क निर्माण कराया जा रहा है। आवेदनकर्ताओं का दावा है कि यदि मार्ग का निर्माण दूसरे विकल्प के अनुसार किया जाता तो सड़क की लंबाई, लागत और दूरी कम रहती तथा आसपास के ग्रामीणों को भी अधिक सुविधा मिलती। आवेदनकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पंचायत द्वारा तैयार किया जा रहा पहुंच मार्ग आम ग्रामीणों की सुविधा के बजाय कुछ विशेष भूमि स्वामियों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है। हालांकि इस संबंध में पंचायत अथवा संबंधित जनप्रतिनिधि का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।
इनका कहना है-
“शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की इस कार्यवाही का किसी तरह की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। अनावेदक ने स्वयं स्वीकार किया है शासकीय भूमि पर उसका कब्जा है, पूर्व में जारी नोटिस पर उसने फसल की कटाई करने तक का समय मांगते हुए अपना अतिक्रमण हटाने का पत्र दिया था। लेकिन कई माह गुजरने के बाद भी अनाधिकृत कब्जा नहीं हटाया इसलिए कार्यवाही हेतु दल गठित किया गया।”
अखिलेश प्रजापति, तहसीलदार, पन्ना।
“मड़ला ग्राम में मेरे द्वारा जमीन क्रय की गई है उससे मेरे बड़े भाई का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है, जहां तक मुझे जानकारी है मेरे द्वारा भूमि क्रय करने के पूर्व से ही शासकीय भूमि से बेदखली का प्रकरण चल रहा है। उक्त भूमि पर कौन व्यक्ति काबिज हैं न तो मैं जानता हूं ना ही आज तक उनसे मिला हूं। राजनितिक पृष्ठभूमि वाले कतिपय षड्यंत्रकारी तत्व आमलोगों को बरगलाकर दुर्भावनावश हमारे परिवार को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाने का काम कर रहे हैं।”
एम-स्ट्राइप्स ऐप संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सामान्य वनमण्डल के वनकर्मी।
* 1 जून से डिजिटल गश्त शुरू करने की तैयारी, वन अमले को दिया जा रहा प्रशिक्षण
* वन्यजीव सुरक्षा मजबूत करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने पर फोकस
* प्रदेश में बढ़ती बाघ आबादी के बीच वन विभाग का बड़ा फैसला
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में बाघ, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों की लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए वन विभाग ने उनकी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब तक प्रदेश के टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) एप का विस्तार सामान्य वन क्षेत्रों तक किया जा रहा है। इसके तहत उन सभी वन मंडलों में, जहां बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई है, 1 जून 2026 से एम-स्ट्राइप्स आधारित गश्त शुरू की जाएगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखना ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाना तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना भी है। वन विभाग का मानना है कि वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की नियमित निगरानी से संभावित संघर्ष वाले क्षेत्रों की समय रहते पहचान की जा सकेगी और आवश्यक प्रबंधन उपाय किए जा सकेंगे। इसी क्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
पन्ना टाइगर रिजर्व लंबे समय से एम-स्ट्राइप्स तकनीक के माध्यम से बाघों की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अब इसी अनुभव का लाभ सामान्य वन मंडलों के मैदानी अमले को दिया जा रहा है, ताकि टाइगर रिजर्व के बाहर भी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक समान, आधुनिक और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली विकसित की जा सके। प्रशिक्षण के दौरान वन कर्मचारियों को एम-स्ट्राइप्स के नवीनतम सॉफ्टवेयर, डेटा एंट्री प्रणाली और फील्ड मॉनिटरिंग की तकनीकों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार इस एप के माध्यम से मानव हस्तक्षेप, जल स्रोतों की उपलब्धता, शिकार की घटनाओं, शाकाहारी एवं मांसाहारी वन्यजीवों की उपस्थिति तथा अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य डिजिटल रूप से दर्ज किए जा सकते हैं।
वैज्ञानिक डेटा के आधार पर बनेगी संरक्षण रणनीति
एम-स्ट्राइप्स प्रणाली के जरिए एकत्र होने वाला डेटा वन विभाग को वन्यजीवों की गतिविधियों का वास्तविक आकलन करने में मदद करेगा। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, गश्त की प्रभावशीलता बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण संबंधी निर्णयों को अधिक सटीक बनाने में सहायता मिलेगी। पन्ना टाइगर रिजर्व की विशेषज्ञ टीम ने प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों की तकनीकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया, जिससे उन्हें फील्ड में एप के प्रभावी उपयोग की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 26 मई को उत्तर पन्ना वन मंडल तथा 28 मई को दक्षिण पन्ना एवं छतरपुर वन मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। वन अधिकारियों के अनुसार टाइगर रिजर्व में सफल साबित हुई यह तकनीक अब सामान्य वन क्षेत्रों में भी वन्यजीव सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगी। इससे बाघों और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर अधिक सटीक एवं रियल टाइम निगरानी संभव होगी, वहीं मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और संरक्षण प्रयासों को भी नई मजबूती मिलेगी।
* पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में कुएं की खुदाई के दौरान बड़ा हादसा
* पंचायत द्वारा ठेके पर कराया जा रहा था निर्मल नीर का निर्माण
* बिना सुरक्षा इंतजाम मजदूरों को उतारा गया था गहरे गड्ढे में
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बिहरपुरवा के ग्राम कड़रहा में मंगलवार सुबह मनरेगा (वीबीजीरामजी) के तहत चल रहे सार्वजनिक कुएं (निर्मल नीर) की खुदाई के दौरान ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। निर्माणाधीन कुएं की मिट्टी अचानक भरभराकर धंस गई और अंदर काम कर रहे पांच मजदूर देखते ही देखते मिट्टी के नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। महिलाएं रोती-बिलखती नजर आईं, जबकि परिजन मजदूरों को जल्द बाहर निकालने की गुहार लगाते रहे।
पानी पीने बाहर आया मजदूर, बच गई जान
बताया जा रहा है कि हादसे से कुछ मिनट पहले एक मजदूर पानी पीने के लिए कुएं से बाहर निकला था। उसी दौरान अचानक कुएं की दीवार और मिट्टी धंस गई। भीतर काम कर रहे पांच मजदूर मिट्टी में समा गए। बाहर मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और पंचायत अमला मौके पर पहुंचा। जेसीबी मशीनों की मदद से बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अब तक दो मजदूरों के शव बाहर निकाले जा चुके है, जबकि तीन अन्य मजदूरों के अब भी मिट्टी में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
“आज मेरी जगह पिता काम पर गए थे” : राकेश यादव
घटना के बाद गांव के युवक राकेश यादव का बयान सामने आया है, जिसने हादसे को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। राकेश यादव ने आरोप लगाया कि कुएं का निर्माण कार्य ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा अघोषित रूप से ठेके पर कराया जा रहा था। राकेश ने बताया कि यह वही कुआं है जो पिछले साल भी धंस गया था, बावजूद इसके सुरक्षा इंतजाम किए बिना दोबारा काम शुरू करा दिया गया। उसने बताया कि मिट्टी के नीचे दबे सभी मजदूर एक ही परिवार के सदस्य हैं। राकेश ने भावुक होकर कहा कि आज उसकी जगह काम पर उसके पिता गए हुए थे और तभी यह भीषण हादसा हो गया। युवक के इस बयान के बाद ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटनास्थल बना मलबे का पहाड़
घटनास्थल पर चारों ओर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं। निर्माण स्थल बेहद गहरा और जोखिमपूर्ण बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक मजदूरों को बिना किसी तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण के कुएं के अंदर उतारा गया था। बिना हेलमेट, पर्याप्त रस्सी, बिना सुरक्षा गियर्स कराया जा रहा था काम हादसे ने ग्राम पंचायत बिहरपुरवा और जनपद पंचायत अजयगढ़ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार मजदूरों को कई फीट गहरे निर्माणाधीन कुएं में उतारकर खुदाई कराई जा रही थी, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम मौजूद नहीं थे। न ही मिट्टी धंसने से बचाव के कोई तकनीकी उपाय किए गए थे। इतने जोखिमपूर्ण कार्य के बावजूद सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों ने मजदूरों की जान को जोखिम में डालकर यह कार्य क्यों कराया।
जिम्मेदार कौन?
मनरेगा जैसे सरकारी कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित पंचायत, तकनीकी अमले और जनपद प्रशासन की जिम्मेदारी मानी जाती है। लेकिन कड़रहा हादसे ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सुरक्षा इंतजाम जाते और मजदूरों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण दिए गए होते तो शायद यह हादसा इतना भयावह नहीं होता। फिलहाल पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर लोगों में गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत पन्ना बफर रेंज के पर्यटन क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए ठेका कंपनी द्वारा मनमाने तरीके से पेड़ उखाड़कर शर्तों का उल्लंघन करने के साथ वन्यप्राणियों के रहवास को नष्ट किया गया। देखें तबाही की तस्वीरें-
* वन चौकी के सामने पाइपलाइन बिछाने आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ डाले, तमाशबीन बने रहे वनरक्षक
* पन्ना बफर रेंज के पर्यटन क्षेत्र अंतर्गत अस्थायी कैंप घुर्रहो और अमरचुआ का मामला
* डेढ़ माह बाद भी न वन अपराध दर्ज हुआ, न ठेकेदार की पोकलेन मशीनें जब्त हुईं
* वन संपदा विनाश से जुड़े गंभीर मामले को रफा-दफा करने में जुटे रेंजर, एडी और डीडी
* 800 करोड़ की परियोजना में व्यापक पर्यावरणीय नुकसान, ‘लेटर-लेटर’ खेल से उठे संदेह
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में न तो बाघ सुरक्षित हैं और न ही बहुमूल्य वन संपदा। महीने भर के भीतर दो बाघों की संदेहास्पद मौत की घटनाओं को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि अब जनहित से जुड़े कार्यों की कथित अनुमति की आड़ में बेशकीमती वन संपदा के विनाश और निरीह वन्यजीवों के रहवास उजाड़ने का मामला उजागर हुआ है। पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना बफर रेंज अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन बिछाने के लिए जारी की गई अनुमति/अनापत्ति अब वन संपदा विनाश के लाइसेंस में तब्दील होती नजर आ रही है। वन एवं वन्यप्राणी संरक्षण कानूनों को ताक पर रखकर आरक्षित वन क्षेत्र में कराए जा रहे कार्यों को कथित तौर पर पार्क के जिम्मेदार अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।
लगभग 800 करोड़ रुपये लागत वाली सिंघौरा-2 समूह जल प्रदाय योजना में ठेका कंपनी की पोकलेन मशीनों ने दिनदहाड़े नियम-कानूनों और अनुमति की शर्तों की धज्जियां उड़ाते हुए आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ डाले। पाइपलाइन बिछाने के लिए अनियंत्रित तरीके से गहरी नालियां खोदकर बेजुबान वन्यजीवों का रहवास उजाड़ दिया गया। यह सब वन चौकी के सामने होता रहा, लेकिन मैदानी वन अमला पूरी तरह मूकदर्शक बना रहा। हद तो तब हो गई जब मामला रेंजर से लेकर सहायक संचालक और उप संचालक के संज्ञान में आने के डेढ़ माह बाद भी संबंधितों के विरुद्ध नियमानुसार वन अपराध प्रकरण कायम नहीं किया गया और न ही ठेका कंपनी की पोकलेन मशीनें जब्त की गईं। संवेदनशील मामले में जिम्मेदार वन अधिकारियों की उदासीनता से उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 60 किलोमीटर दूर अजयगढ़ विकासखंड में पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के वन परिक्षेत्र पन्ना बफर अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत सिंघौरा-2 प्रोजेक्ट की पाइपलाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। 800 करोड़ रुपये की इस पेयजल परियोजना का निर्माण कार्य कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) को सौंपा गया है। वर्तमान में पन्ना बफर के पर्यटन क्षेत्र कैंप घुर्रहो के समीप तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाली जा चुकी है। हालांकि इस कार्य के लिए जल निगम पन्ना ने पीटीआर से विधिवत अनुमति/अनापत्ति प्राप्त की है, लेकिन जिन कड़ी शर्तों के साथ जनहित से जुड़े इस विकास कार्य की अनुमति जारी की गई थी, उनका मौके पर पालन नहीं कराया जा रहा है।
टाइगर, तेंदुआ, भालू समेत अन्य वन्यजीवों के विचरण क्षेत्र वाले घने जंगल में ठेका कंपनी केपीआईएल द्वारा गंभीर लापरवाही बरतते हुए आधा सैकड़ा पेड़ों को उखाड़ डाला गया। पाइपलाइन बिछाने के लिए दो पोकलेन मशीनों से गहरी नालियों की खुदाई कराई गई और रास्ते में आने वाले या आसपास खड़े वर्षों पुराने हरे-भरे वृक्षों को उखाड़कर फेंक दिया गया। इस अनियंत्रित कार्य का सबसे बड़ा खामियाजा बेजुबान वन्यजीवों को भुगतना पड़ा। नालियों की खुदाई और मिट्टी की भराई के दौरान असंख्य वन्यजीवों के रहवास नष्ट हो गए। पन्ना बफर रेंज के बनहरी, घुर्रहो घाटी से लेकर छापर-दहलान चौकी तक के जंगलों में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ उखाड़ने और वन्यजीवों के रहवास तबाह होने के साक्ष्य मौजूद हैं।
पन्ना बफर रेंज के अस्थाई कैंप धुर्रहो के आसपास बड़े पैमाने पर पेड़ों को क्षति पहुंचाई गई। साथ ही पेड़ उखाड़ने पाइप लाइन बिछाने नाली की खुदाई और पुराव में बेजुबान वन्यजीवों के रहवास को अपूरणीय क्षति पहुंची।
परियोजना के लिए वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत स्पष्ट शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी कि कार्य के दौरान वन संपदा और वन्यजीवों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई जाएगी। इसके बावजूद न केवल पेड़ों का विनाश हुआ, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी नुकसान पहुंचा। क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल और सांभर जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो वन्यजीवों का विस्थापन बढ़ेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के डेढ़ माह बाद भी न तो वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया और न ही मौके पर उपयोग की गई मशीनों को जब्त किया गया। जबकि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 और 33 के तहत अवैध वृक्ष कटाई पर तत्काल कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 29 के अनुसार संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचाने पर अपराध दर्ज कर संबंधित उपकरण जब्त किए जाने चाहिए। इन स्पष्ट प्रावधानों के बावजूद कार्रवाई का अभाव अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। सूत्रों की मानें तो समूह जल प्रदाय योजना से जुड़े तकनीकी अधिकारियों और ठेकेदार पर दबाव बनाने की मंशा से पीटीआर प्रबंधन कई दिनों तक ‘लेटर-लेटर’ का खेल खेलता रहा। बाद में कथित तौर पर अंदरखाने मामला सेट होने के बाद अब इसे रफा-दफा करने की कागजी कार्रवाई की जा रही है।
पेड़ कटाई की यह है प्रक्रिया
वन क्षेत्र में होने वाले विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए सर्वप्रथम क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर अनुमति प्राप्त की जाती है। संबंधित वन मंडल आवेदन एवं सहपत्रों की जांच के बाद उन्हें वरिष्ठ कार्यालय को अग्रेषित करता है। संरक्षित अथवा आरक्षित वन क्षेत्र में कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा कड़ी शर्तों के साथ अनुमति जारी की जाती है। यदि किसी कार्य में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित हो तो संबंधित एजेंसी और वन अधिकारी संयुक्त रूप से स्थल पर पेड़ों को चिन्हित करते हैं। इसके बाद वन मंडल द्वारा विदोहन योजना तैयार की जाती है। प्रभावित वृक्षों की कटाई और परिवहन की राशि निर्माण एजेंसी से जमा कराने के बाद वन अमला अपनी उपस्थिति में वैज्ञानिक तरीके से वृक्षों की सावधानीपूर्वक कटाई कराता है, ताकि राजस्व की हानि न हो।
यहां यह उल्लेखनीय है कि समूह जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन बिछाने के दौरान वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की निर्धारित प्रक्रिया का मौके पर पालन नहीं कराया गया। ठेका फर्म कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) की पोकलेन मशीनों ने पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में मनमाने तरीके से आधा सैकड़ा पेड़ उखाड़ फेंके। इससे वृक्ष और उनकी शाखाएं कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गईं। जानकारों का मानना है कि पोकलेन से उखाड़े गए वृक्षों की काष्ठ नीलामी में वन विभाग को राजस्व की हानि भी उठानी पड़ सकती है।
न अपराध दर्ज, न मशीनों की जब्ती
जल निगम पन्ना के द्वारा सिंघौरा-2 प्रोजेक्ट अंतर्गत समूह जल प्रदाय योजना की पाइप लाइन बिछाने का कार्य जारी है।
प्रकरण में पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक बीरेंद्र कुमार पटेल की भूमिका भी चर्चा में है। उन्होंने मीडिया के सामने ऑन कैमरा बयान देने से परहेज किया और अनौपचारिक बातचीत में विरोधाभासी जवाब दिए। एक ओर वे समूह जल प्रदाय योजना में लगभग 1505 पेड़ों की कटाई की अनुमति का हवाला देते हैं, वहीं दूसरी ओर जल निगम महाप्रबंधक पन्ना को नोटिस जारी करने की बात स्वीकारते हैं। यदि कार्य पूरी तरह नियमों के तहत हो रहा था तो नोटिस क्यों? और यदि उल्लंघन हुआ तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उनके जवाब इन सवालों को और उलझाते हैं। सूत्रों के अनुसार मामले को दबाने और संबंधित एजेंसी पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिशों की भी चर्चा है। 800 करोड़ रुपये की परियोजना में ‘लेटर-लेटर’ का खेल और कार्रवाई में देरी इन आशंकाओं को बल देती है।
अजयगढ़ के समीप स्थित जल शोधन संयत्र के निर्माणाधीन परिसर में स्थित ठेका कंपनी कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड (KPIL) का कार्यालय।
गौरतलब है कि हाल ही में पीटीआर क्षेत्र में दो बाघों की संदिग्ध मौतें भी सामने आई थीं। ऐसे में वन संपदा के इस खुले दोहन ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पन्ना टाइगर रिजर्व में जंगल और वन्यजीव वास्तव में सुरक्षित हैं या फिर संरक्षण के नाम पर विनाश की पटकथा लिखी जा रही है। पूरे मामले ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब जरूरत निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की है, ताकि जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा केवल कागजों तक सीमित न रह जाए। इस खबर के संबंध में जल निगम पन्ना के महाप्रबंधक शिवम सिन्हा से संपर्क किया गया, लेकिन कई बार रिंग जाने के बावजूद उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
इनका कहना है-
“पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा हमें नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब अभी नहीं दिया गया है। फिलहाल वन क्षेत्र में काम बंद है, लेकिन हमारी मशीनरी जब्त नहीं हुई। अनुमति लेकर कार्य कराया जा रहा है, जिसमें पेड़ों की कटाई शामिल है। आपकी यह बात सही है कि पेड़ों की कटाई वन विभाग कराता है, ठेका कंपनी नहीं।”
“जल निगम की दो परियोजनाओं को भारत सरकार द्वारा सशर्त अनुमति जारी की गई है। एक परियोजना में 724 तथा दूसरी में 781 वृक्ष काटे जाने हैं। ठेका कंपनी द्वारा पेड़ों को उखाड़ने की सूचना मिलने पर जल निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विदोहन की कार्रवाई के उपरांत कार्य शुरू कराया जाएगा।”
– बीरेन्द्र कुमार पटेल, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
कार्यालय कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)
* समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित कराने कार्यपालन यंत्री ने की सख्ती
* कार्रवाई की जद में आए ठेकेदारों में जबरदस्त हड़कंप
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) लोक निर्माण विभाग संभाग पन्ना में सड़क निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों पर अब सख्ती का दौर शुरू हो गया है। तय समयसीमा में गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप कार्य पूर्ण कराने को लेकर कार्यपालन यंत्री जे.पी. सोनकर द्वारा लगातार की जा रही कठोर कार्रवाई से विभागीय ठेकेदारों में जबरदस्त हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण और गारंटी पीरियड वाली सड़कों के संधारण कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने वाले लगभग दो दर्जन संविदाकारों के विरुद्ध चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की गई है। इनमें बैंक गारंटी राजसात करना, अनुबंध समाप्त और ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई शामिल है।
बैंक गारंटी राजसात कर लाखों रुपये लोनिवि खाते में जमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यपालन यंत्री द्वारा 8 लापरवाह ठेकेदारों की बैंक गारंटी (सुरक्षा निधि) राजसात कर संबंधित बैंकों से जमा राशि पीडब्ल्यूडी खाते में अंतरित करा ली गई है। विभाग द्वारा जिन कार्यों में यह कार्रवाई की गई उनमें मोहन्द्रा-रैपुरा मार्ग के नवीनीकरण कार्य में मेसर्स श्री बिल्डअप प्राइवेट लिमिटेड छतरपुर की 11 लाख 11 हजार 847 रुपये, अमानगंज-गुनौर-सुवंशा मार्ग के नवीनीकरण कार्य में मेसर्स व्ही.एस. कंस्ट्रक्शन सतना की 15 लाख 31 हजार 686 रुपये, शाहनगर-हरदुआ-ठेपा बोरी मार्ग के मजबूतीकरण कार्य में मेसर्स पूजाबोर वेल्स की 12 लाख 91 हजार रुपये, मोहन्द्रा-गोल्ही-पलोही मार्ग की ठेका कंपनी मेसर्स आरएसव्ही इंफ़्रा तथा कृष्णा कल्याणपुर से दहलानचौकी वाया रानीपुर मार्ग के नवीनीकरण कार्य में मेसर्स जयमहाकाल कंस्ट्रक्शन की 8 लाख 96 हजार 168 रुपये की सुरक्षा निधि राजसात की गई है। इसके अलावा सुनहरा पहुंच मार्ग, गांधीग्राम पहुंच मार्ग तथा गांधीग्राम से रानीपुर पहुंच मार्ग के कार्यों में ठेकेदार संतोष कुमार गुप्ता की भी बैंक गारंटी राशि राजसात की गई है। इस तरह अब तक कुल 8 ठेकेदारों की 50 लाख 39 हजार 171 रुपए की बैंक गारंटी राशि राजसात की गई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक संबंधित ठेकेदारों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा में कार्य पूर्ण नहीं किए गए तो विभाग शेष कार्यों के लिए नई निविदाएं जारी करेगा तथा भुगतान संबंधित ठेकेदारों की सुरक्षा निधि से किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का सीधा असर संबंधित फर्मों की साख और भविष्य के अनुभव प्रमाण-पत्रों पर पड़ेगा। यही वजह है कि बैंक गारंटी राजसात होते ही कई ठेकेदार अधूरे पड़े कार्यों को पूरा कराने में जुट गए हैं।
8 संविदाकारों के अनुबंध समाप्त
इधर विगत माह पीडब्ल्यूडी (Public Works Department) द्वारा 8 संविदाकारों के अनुबंध भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए थे। इनमें किन्ना मेन रोड से महोड़कला एवं तिघरा करिया पटना मार्ग, नांदचांद नयाखेड़ा मार्ग, कल्दा-बछौन से गुवरदा एवं कल्दा-बछौन से मगरदा मार्ग, गुमानगंज से चंदला मार्ग, धरमपुर-परनियापुरवा एवं हरनामपुर रोड से गड़रियनपुरवा मार्ग, ग्राम करिया से महोड़खुर्द मार्ग, सारंग मंदिर से किटहा मार्ग तथा नयागांव से पंचमपुर मार्ग के निर्माण कार्य शामिल थे। इन कार्यों से जुड़े संविदाकारों में मेसर्स रवि कंस्ट्रक्शन कंपनी रीवा, मेसर्स साईं इंफ्रा पन्ना, मेसर्स सिंह कंस्ट्रक्शन मुरैना, मेसर्स आर.के. ट्रेडर्स प्रोप्राइटर ऋषिकांत नगायच पवई जिला पन्ना तथा मेसर्स मोदी इंफ्रास्ट्रक्चर जतारा जिला टीकमगढ़ जैसी फर्में शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई ने लापरवाह ठेकेदारों को हिलाकर रख दिया। बाद में अधीक्षण यंत्री कार्यालय नौगांव में गुहार लगाने और कार्यों को गति देने लिखित आश्वासन के बाद कुछ अनुबंध पुनर्जीवित कर दिए गए। अब संबंधित ठेकेदारों द्वारा अधूरे पड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। विभागीय हलकों में चर्चा है कि यदि समय रहते तकनीकी अधिकारियों के निर्देशों को गंभीरता से लिया जाता तो ठेकेदारों को इस तरह की अप्रिय स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
9 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने भेजे गए प्रस्ताव
इसके अलावा कार्यपालन यंत्री द्वारा 9 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। जिन कार्यों के संबंध में मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग परिक्षेत्र सागर को प्रस्ताव भेजे गए हैं उनमें अमानगंज-गुनौर मार्ग से तुन्ना-मेहंदवा मार्ग, ग्राम करिया से महोड़खुर्द मार्ग, मोहन्द्रा-गोल्ही-पलोही मार्ग, मोहन्द्रा-रैपुरा मार्ग, देवेंद्रनगर-सलेहा मार्ग, मकरंदगंज से बरबसपुर मार्ग, पवई-इटांय-मैहर मार्ग, खमरिया-अतरहाई से रीठी मार्ग तथा सिंहपुर-धरमपुर से मझपुरवा मार्ग शामिल हैं। इन कार्यों से जुड़े ठेकेदारों में मेसर्स रतन बिल्डर्स बांदा उत्तर प्रदेश, मेसर्स आर.के. ट्रेडर्स प्रोप्राइटर ऋषिकांत नगायच पवई जिला पन्ना, मेसर्स आरएसव्ही इंफ्रा कांट्रेक्टर, मेसर्स श्री बिल्डअप प्राइवेट लिमिटेड छतरपुर, कौशल प्रसाद पटेल रीवा, मेसर्स मारुति नंदन नागौद जिला सतना, मेसर्स दिग्विजय कंस्ट्रक्शन कंपनी शहडोल, मेसर्स राधा वल्लभ ट्रेडर्स शाहनगर जिला पन्ना तथा मेसर्स शारदा कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना के नाम शामिल हैं। जानकारों का कहना है कि यदि किसी ठेकेदार अथवा फर्म का पंजीयन काली सूची में दर्ज हो जाता है तो उसे भविष्य में सरकारी कार्यों के ठेके मिलना लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि कार्यपालन यंत्री जे.पी. सोनकर की इन सख्त कार्यवाहियों के बाद लापरवाह ठेकेदारों में भारी बेचैनी देखी जा रही है। विभागीय हलकों में यह भी चर्चा है कि लंबे समय बाद पीडब्ल्यूडी में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर इतनी सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। माना जा रहा है कि ठेकेदार अब कार्य अनुबंध शर्तों एवं विभागीय निर्देशों को हल्के में लेने की गलती नहीं करेंगे।