बाघ के गांव में घुसने से भड़का गुस्सा: पीटीआर के रेंजर और डिप्टी रेंजर को बंधक बनाने की कोशिश, दो आरोपी गिरफ्तार

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तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गया।

*        आबादी क्षेत्र में दो मवेशियों का शिकार करने के बाद तारा गांव में डटा रहा बाघ

*        रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पकड़े गए बाघ को पीटीआर के कोर क्षेत्र में छोड़ा 

*        पखवाड़े भर से तारा के आसपास बाघ की मौजूदगी को लेकर आक्रोशित थे ग्रामीण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या सौ के पार पहुंचने के बाद पार्क का मौजूदा क्षेत्रफल अब उनके लिए कम पड़ने लगा है। अपनी नई टेरिटरी स्थापित करने और भोजन की तलाश में बाघ लगातार जंगल की सीमा लांघकर आसपास के गांवों तक पहुंच रहे हैं। इसके चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही है, जबकि वन सीमा से लगे गांवों में भय, असुरक्षा और आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है। इसी बढ़ते तनाव की झलक विगत दिवस ग्राम तारा में देखने को मिली। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा में रविवार को आबादी क्षेत्र में बाघ घुसने और दो पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। भय और गुस्से से भरे ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों को घेर लिया तथा उन्हें बंधक बनाने का प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।
बताया गया है कि तारा ग्राम और आसपास के इलाके में एक नर बाघ पिछले करीब पखवाड़े भर से विचरण कर रहा था। इससे क्षेत्र में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि पन्ना टाइगर रिजर्व से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे बाघों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में रविवार 26 अप्रैल की सुबह जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव में एक नर बाघ घुस आया है और उसने दो मवेशियों को मार डाला है, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और हाथियों की मदद से बाघ को वापस जंगल क्षेत्र की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन करीब दो वर्षीय बाघ आबादी क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। इस बीच ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने वनपाल सीलन कुमार प्रजापति को घेर लिया और कहा कि जब तक बाघ गांव से नहीं हटेगा, अधिकारी भी नहीं जा सकेंगे। बाद में मौके पर पहुंचे अमानगंज बफर रेंजर मयंक शर्मा को भी भीड़ ने घेर लिया तथा रस्सी से बांधकर रोकने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद लोगों की समझाइश पर स्थिति कुछ देर बाद रेंजर को छोड़ दिया।

बड़े स्तर पर चलाया रेस्क्यू अभियान

कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई।
घटना की सूचना पर पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव, उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के तीव्र आक्रोश और बिगड़ते हालात को देखते हुए नर बाघ को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) कर पकड़ने की अनुमति ली गई। इसके बाद अतिरिक्त वन अमला बुलाया गया और छह हाथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहनाया और पिंजरे में बंद कर पन्ना टाइगर रिजर्व ले जाया गया। देर शाम उसे कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ दिया गया।

पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण

घटना के अगले दिन अमानगंज रेंजर मयंक शर्मा की शिकायत पर थाना अमानगंज में शासकीय कार्य में बाधा, धमकी तथा शासकीय कर्मचारियों को बंधक बनाने के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। थाना प्रभारी अमानगंज रवि जादौन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों कुन्जीलाल कुशवाहा (55) और रामरूप कुशवाहा (40), निवासी ग्राम तारा, को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।

पुराने हादसों से भी बढ़ा रोष

जरधोवा गांव के समीप घटनास्थल पर पड़े आदिवासी बालक के धड़ एवं सिर को देखते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण। (फाइल फोटो)
विदित हो कि इससे पहले भी पन्ना टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में वन्यजीव हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ माह पूर्व जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक बालक को शिकार बनाया था, जबकि हिनौता क्षेत्र में एक वृद्ध महिला पर बाघों ने हमला कर जान ले ली थी। इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में लंबे समय से असुरक्षा और नाराजगी बनी हुई है। आमचर्चा है, युवा बाघ के पखवाड़े भर तारा समेत आसपास के आबादी क्षेत्र में विचरण करने, पालतू मवेशियों को शिकार बनाने एवं लगातार बढ़ते भय-असुरक्षा के मद्देनजर पीटीआर प्रबंधन (Panna Tiger Reserve Management) द्वारा कथित तौर ठोस प्रबंध न करने से ग्रामीण भड़क उठे। और कानून को अपने हाथ में लेते हुए वन अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की गई।