पन्ना में एक और टाइगर की मौत: रेस्क्यू के सप्ताह भर बाद संदिग्ध हालात में मिला शव

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तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)

*        स्वस्थ घोषित कर कोर एरिया में छोड़ा गया था बाघ, अचानक मौत से पीटीआर प्रबंधन में हड़कंप

*       एक माह में दूसरी घटना, सुरक्षा और मॉनिटरिंग के दावों पर सवाल

*       पहले कंकाल, अब रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत- पीटीआर की निगरानी व्यवस्था कटघरे में

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। पखवाड़े भर पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से जबरदस्त हड़कंप मचा है। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा से रेस्क्यू किए गए दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है।

रेस्क्यू के बाद स्वस्थ बताया गया था

कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई थी। (फाइल फोटो)
तारा ग्राम में बाघ के प्रवेश और मवेशियों के शिकार से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था। हालात इतने बिगड़े कि वन अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने का प्रयास तक किया गया। इसके बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा जांच में उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और उसी दिन देर शाम उसे पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण हेतु छोड़ दिया गया था।

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हफ्ते भर में मौत, उठे सवाल

रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है- क्या मॉनिटरिंग में चूक हुई, या बाघ की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया? फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।

एक माह में दूसरी घटना

पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर बाघ की मौत की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मुख्य मार्ग से महज कुछ दूरी पर मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब 15 दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी जानकारी तक नहीं लग सकी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला सामने आया, जिसकी जांच एसटीएफ जबलपुर द्वारा की जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और सतत निगरानी के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ताजा मामले में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।

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इनका कहना है-

“तारा ग्राम से रेस्क्यू किए गए बाघ की आज सुबह मृत्यु होने की जानकारी मिली है, रेस्क्यू करने के बाद बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था और इसकी मदद से उसकी सतत मॉनिटरिंग की जा रही थी। बाघ की मृत्यु वन परिक्षेत्र अमानगंज बफर अंतर्गत हुई है। उसका शव पूर्णतः सुरक्षित है, आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई गई। विस्तृत जानकारी मैं मौके पर पहुंचकर घटनास्थल और शव का मुआयना करने के बाद दे पाऊंगा।”

बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।

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