* केबीएलपी अंतर्गत 8 ग्रामों के 313 नए परिवार विशेष विस्थापन पुनर्वास पैकेज में शामिल
* रूंज और मझगांय परियोजनाओं के प्रत्येक विस्थापित परिवार को मिलेगा 7.50 लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान
* लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच मंत्रि-परिषद का बड़ा फैसला
* पन्ना जिले के हजारों डूब प्रभावित परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
शादिक खान, पन्ना/भोपाल।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP), रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित हजारों डूब प्रभावित परिवारों के लंबे संघर्ष के बीच गत दिवस मध्यप्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में तीनों परियोजनाओं के पुनर्वास एवं विस्थापन के लिए 202 करोड़ 50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई। इस अतिरिक्त राशि में केन-बेतवा लिंक परियोजना के लिए 39 करोड़ 12.50 लाख रुपये, रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 54 करोड़ 75 लाख रुपये तथा मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 108 करोड़ 75 लाख रुपये के विशेष पुनर्वास पैकेज शामिल हैं। यह निर्णय ऐसे समय आया है, जब पन्ना और छतरपुर जिले के प्रभावित ग्रामीण उचित मुआवजा और समान पुनर्वास पैकेज की मांग को लेकर जय किसान संगठन के बैनर तले युवा समाजसेवी अमित भटनागर के नेतृत्व में चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। वर्तमान में भी आंदोलन जारी है। ऐसे में क्षेत्र में इस फैसले को डूब प्रभावितों के लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्रि-परिषद ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना जिले के आठ डूब प्रभावित गांवों के लिए पुनर्वास नीति में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए कट-ऑफ तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया है। पहले कृषि भूमि अधिग्रहण के लिए 21 जनवरी 2022 (भू-अर्जन अधिनियम की धारा-11 के प्रकाशन की तिथि) को कट-ऑफ मानकर 1,890 प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज में शामिल किया गया था। बाद में आबादी भूमि एवं निजी मकानों के लिए धारा-11 का प्रकाशन 15 मार्च 2024 को हुआ। प्रभावित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से यह मांग थी कि आबादी भूमि एवं मकानों के पुनर्वास के लिए 15 मार्च 2024 को ही आधार माना जाए। मंत्रि-परिषद ने इस मांग को स्वीकार करते हुए आबादी भूमि एवं मकानों के लिए 15 मार्च 2024 को नई कट-ऑफ तिथि मंजूर कर दी है। इसके परिणामस्वरूप 313 नए प्रभावित परिवार भी विशेष पुनर्वास पैकेज के दायरे में आ जाएंगे। इसके लिए 39 करोड़ 12.50 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई है। अब केन-बेतवा लिंक परियोजना के विशेष पुनर्वास पैकेज पर कुल स्वीकृत व्यय बढ़कर 439 करोड़ 3.25 लाख रुपये हो जाएगा।
मंत्रि-परिषद ने रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित 730 डूब क्षेत्र प्रभावित परिवारों को भी बड़ी राहत दी है। पहले इन परिवारों के लिए 5 लाख रुपये प्रति परिवार की एकमुश्त पुनर्वास सहायता स्वीकृत थी। डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत अब केन-बेतवा लिंक परियोजना के समान पुनर्वास पैकेज देने के उद्देश्य से प्रत्येक परिवार को 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त विशेष अनुदान देने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 54 करोड़ 75 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की गई है। यह राशि रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति राशि 269 करोड़ 79 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।
इसी प्रकार मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के 1,450 विस्थापित परिवारों को भी बड़ी राहत मिली है। पहले यहां भी प्रति परिवार 5 लाख रुपये की पुनर्वास सहायता निर्धारित थी। पहले यहां भी प्रति परिवार 5 लाख रुपये की पुनर्वास सहायता निर्धारित थी। डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत अब प्रत्येक पात्र परिवार को 7.50 लाख रुपये अतिरिक्त विशेष पुनर्वास सहायता दी जाएगी। इसके लिए 108 करोड़ 75 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। यह राशि मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए भूमि एवं परिसंपत्ति अधिग्रहण के लिए कुल स्वीकृत राशि 364 करोड़ 56 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।
उल्लेखनीय है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना और मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित पन्ना एवं छतरपुर जिले के हजारों ग्रामीण लंबे समय से समान पुनर्वास पैकेज, उचित मुआवजा और विस्थापन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। जय किसान संगठन के नेतृत्व में प्रभावित परिवार लगातार चरणबद्ध आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान प्रमुख मांगों में केन-बेतवा परियोजना की कट-ऑफ तिथि बढ़ाना तथा रूंज एवं मझगांय परियोजनाओं के प्रभावित परिवारों को भी केन-बेतवा परियोजना के समान 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार के पुनर्वास पैकेज का लाभ देना शामिल रहा है।
इसी आंदोलन के बीच मंत्रि-परिषद का यह फैसला सामने आया है। कट-ऑफ डेट में संशोधन के कारण केन-बेतवा परियोजना के 313 नए परिवारों को विशेष पुनर्वास पैकेज का लाभ मिलेगा, जबकि रूंज और मझगांय परियोजनाओं के हजारों विस्थापित परिवारों को भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। हालांकि आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी अन्य लंबित मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं क्षेत्र में इस निर्णय को डूब प्रभावित परिवारों के लंबे संघर्ष की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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जांच दल ने ग्राम कटन, तहसील गुनौर स्थित मेसर्स बागरी ड्रग एजेंसी का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि एजेंसी ने पिछले लगभग एक माह में करीब 45 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदी थीं, लेकिन उनकी बिक्री अथवा वितरण से संबंधित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए। निरीक्षण में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों के उल्लंघन भी पाए गए। इसके आधार पर एजेंसी को तत्काल प्रभाव से सीलबंद कर दिया गया।
इसी क्रम में देवेंद्रनगर स्थित मेसर्स देवनाथ फार्मा की जांच की गई। जांच में सामने आया कि एजेंसी अपने लाइसेंस में दर्ज स्थान के बजाय दूसरे स्थान से संचालित की जा रही थी। यहां पिछले दो माह में लगभग 89 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने का रिकॉर्ड मिला। जांच दल ने लगातार दो दिन तक अभिलेखों का परीक्षण और अन्य औषधियों की जब्ती संबंधी कार्रवाई की। तीसरे दिन जब टीम दोबारा पहुंची तो प्रतिष्ठान पर ताला लगा मिला तथा मकान मालिक एवं एजेंसी संचालक परिवार सहित गायब था। इसके बाद नियमानुसार परिसर को भी सीलबंद कर दिया गया।
विशेष जांच दल की कार्रवाई के बाद पन्ना सहित आसपास के जिलों के दवा कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति है। माना जा रहा है कि अब ऐसे अन्य थोक एवं फुटकर दवा प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा सकती है, जहां नियंत्रित औषधियों की असामान्य मात्रा में खरीद-बिक्री हुई है। यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। इस विशेष जांच दल में पन्ना की औषधि निरीक्षक महिमा जैन, छतरपुर के औषधि निरीक्षक अजीत जैन, सतना की औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, पन्ना का स्टाफ शामिल रहा।
















बरकोला बीट के प्रस्तावित नवीन पौधारोपण क्षेत्र के ठीक सामने मुख्य सड़क के दूसरी ओर तीन-चार वर्ष पुराने पौधारोपण क्षेत्र के भीतर दिनदहाड़े आधा दर्जन भैंसें चरती हुई मिलीं। वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी द्वारा उन्हें बाहर निकालने का प्रयास नहीं किया जा रहा था। यह दृश्य कई सवाल खड़े करता है। यदि वर्षों पुराने पौधारोपण क्षेत्र में भी मवेशियों की बेरोकटोक आवाजाही जारी है, तो आगामी दिनों में लगाए जाने वाले नए पौधों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो लाखों रुपये खर्च कर किए जाने वाले नए पौधारोपण का भी वही हश्र हो सकता है, जैसा पहले के कई रोपणों का हुआ। ऐसे में विभागीय दावों और जमीनी हकीकत के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

कुल मिलाकर अजयगढ़ और धरमपुर वन परिक्षेत्र की अधिकांश बीटों में एक जैसी तस्वीर सामने आई। कहीं सिंचाई की व्यवस्था कमजोर मिली, कहीं छाया का अभाव दिखाई दिया तो कहीं सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। कुछ स्थानों पर प्रयास जरूर नजर आए, लेकिन अधिकांश जगह पौधों की मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार पौधारोपण अभियान की सफलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।
उत्तर सामान्य वन मंडल पन्ना के डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने हाल ही में वन परिक्षेत्र अजयगढ़ का भ्रमण कर पौधारोपण क्षेत्र तैयारी से जुड़े कार्यों का सघन निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान दमचुआ बीट में एक स्थान पर बड़ी संख्या में सागौन के सूखे पौधे भंडारित पाए गए। इसके अलावा निर्धारित मानकों के विपरीत प्रतिबंधित करंज प्रजाति के पौधों का रोपण किया जाना भी सामने आया। निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कई स्थानों पर रोपण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया था। गड्ढों में नीम खली का उपयोग नहीं किया गया था तथा अन्य आवश्यक मानकों की भी अनदेखी की गई थी। इन कमियों को गंभीर लापरवाही मानते हुए डीएफओ ने मौके पर ही संबंधित बीटगार्ड रामनरेश राजपूत तथा रेंजर अभिषेक दुबे की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी व्यक्त की। विभागीय सूत्रों के अनुसार निरीक्षण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद बीटगार्ड रामनरेश राजपूत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हालांकि रेंजर की कार्यप्रणाली पर भी डीएफओ ने असंतोष जताया था, उनके विरुद्ध क्या विभागीय कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक नहीं हो सकी है। इसे लेकर विभागीय गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।





