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केन-बेतवा लिंक परियोजना: आश्वासन पर आंदोलन 10 दिन के लिए स्थगित, लेकिन बड़ी मांगों पर बना संशय

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केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित हो रहे ग्रामीणों ने प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पर सामूहिक चर्चा के बाद अपने आंदोलन को 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया।

 12 दिन के सत्याग्रह के बाद विस्थापितों ने सर्वसम्मति से लिया निर्णय

  जल सत्याग्रह से चिता आंदोलन तक विरोध, अब प्रशासन के वादों का इम्तिहान

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित बुंदेलखंड अंचल की अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी-किसानों का 12 दिन से जारी सत्याग्रह आंदोलन प्रशासन के साथ लंबी चर्चा और आश्वासनों के बाद गुरुवार को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। हालांकि आंदोलन थमने के साथ ही यह सवाल भी प्रमुखता से उभरकर सामने आया है कि विस्थापितों द्वारा उठाई गई अहम मांगों पर वास्तव में अमल हो पाएगा या नहीं। पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी के तट पर ढोड़न बांध निर्माण स्थल पर चले इस आंदोलन में हजारों ग्रामीणों की भागीदारी और लगातार दबाव के चलते प्रशासन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा। आंदोलन के दौरान धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू रहने के बावजूद लोग डटे रहे और जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह, चिता आंदोलन, चूल्हा बंद और सांकेतिक फांसी जैसे तरीकों से प्रभावी विरोध दर्ज कराते हुए देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा।

इन मांगों पर बनी सहमति

बुंदेलखंड अंचल के पन्ना एवं छतरपुर जिले में निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी-किसानों की मांगों पर दोनों जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने विस्तृत चर्चा की।
सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी-किसानों एवं ग्रामीणों का आंदोलन जय किसान संगठन के बैनर तले चला। गुरुवार 16 अप्रैल की शाम संगठन के मीडिया सेल द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी गई कि, पन्ना एवं छतरपुर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लंबी चली बातचीत में कई बिंदुओं पर सहमति बनी है। जिनमें मुख्य रूप से
डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार स्तर के अधिकारियों द्वारा 7 दिन में पारदर्शी सर्वे पूरा करने का आश्वासन।
गांव के बदले गांव, विशेष पैकेज मुआवजा और कटऑफ डेट जैसे मुद्दों पर सहमति, जिन पर पर चर्चा होगी।
जिला प्रशासन ने पारदर्शी सर्वे सहित स्थानीय स्तर की अन्य मांगों पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है, जबकि नीतिगत और बड़े फैसलों से जुड़े मुद्दों पर राज्य और केंद्र सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों के साथ किसानों के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत कराई जाएगी।

प्रशासन को अंतिम अवसर

केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों ने ढोड़न बांध निर्माण स्थल पर 12 दिन के आंदोलन के दौरान सांकेतिक फांसी लगाकर विरोध-प्रदर्शन किया।
पूर्व में कई बार आश्वासन देकर प्रशासन के मुकरने के कारण आंदोलनकारियों में अविश्वास बना रहा, इसके बाद तय हुआ कि अगले दिन बैठकर प्रशासन के प्रस्ताव पर सभी से चर्चा की जाएगी। गुरुवार को आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित हो रहे परिवार एकत्र हुए और सामूहिक चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि मांगों के निराकरण पर कार्रवाई करने प्रशासन को अंतिम अवसर दिया जाए। इसलिए सर्वसम्मति से आंदोलन को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया। बता दें कि इस आंदोलन में केन-बेतवा लिंक परियोजना, नैगुवां परियोजना, मझगांय और रुन्ज मध्यम सिंचाई परियोजना प्रभावित परिवारों की सक्रिय भागीदारी रही।

वादे पूरे नहीं हुए तो फिर होगा आंदोलन

केन-बेतवा लिंक सहित अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों ने 12 दिन तक ढोड़न बांध निर्माण स्थल पर अपनी मांगों को लेकर किये गए आंदोलन के दौरान अपने शरीर पर मिट्टी मलकर मिट्टी सत्याग्रह किया।
सामूहिक चर्चा के बाद आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लेने के दौरान बताया गया यदि मांगों पर ठोस प्रगति नहीं हुई, तो आगे की रणनीति 10 दिन बाद तय की जाएगी। विस्थापितों के सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने चेतावनी भरे शब्दों में स्पष्ट किया है कि “आंदोलन रुका है, खत्म नहीं हुआ। अगर इस बार भी आश्वासन पर अमल नहीं हुआ, तो और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।” आंदोलन की समाप्ति पर उपस्थित लोगों ने केन नदी में उतरकर उसे साक्षी मानते हुए संकल्प लिया कि- वे जल, जंगल जमीन और आदिवासी अधिकारों पर किसी भी अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे। 10 दिनों तक प्रशासन का पूरा सहयोग करेंगे लेकिन यदि प्रशासन ने पुनः झूठे आश्वासन दिए तो इस बार आंदोलन और भी व्यापक और उग्र रूप से किया जाएगा। आंदोलन में पन्ना और छतरपुर जिले के हजारों आदिवासी, किसान और महिलाएं शामिल रहीं, जिन्होंने पूरे समय शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ता के साथ अपनी आवाज बुलंद की।

सवाल: क्या 10 दिन में हो पाएगा समाधान?

आंदोलन के दौरान जिन प्रमुख मांगों पर सहमति जताई गई है, वे सीधे तौर पर नीतिगत निर्णयों से जुड़ी हैं। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि भू-अर्जन, मुआवजा, पुर्नव्यवस्थापन और पुनर्वास पैकेज पहले से दिए जाने के बावजूद क्या वास्तव में विशेष पैकेज के रूप में मुआवजा बढ़ाया जाएगा। इसी तरह पन्ना और छतरपुर जिलों में अलग-अलग निर्धारित कटऑफ तिथियों को एक समान 1 अप्रैल 2026 करने का निर्णय लिया जाएगा या नहीं, और यदि लिया भी जाता है तो क्या यह सिर्फ केन-बेतवा लिंक परियोजना तक सीमित रहेगा या मझंगाय, रूंज और नैगुवां जैसी अन्य परियोजनाओं के विस्थापितों पर भी लागू होगा- यह स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं पुनर्वास पैकेज दिए जाने के बाद “गांव के बदले गांव” की मांग को स्वीकार किया जाएगा या नहीं, इस पर भी संशय बना हुआ है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या महज 10 दिनों की समयसीमा में इन व्यापक और जटिल मुद्दों पर कोई ठोस निर्णय संभव हो पाएगा, जबकि पूर्व में मिले आश्वासनों पर अमल न होने के कारण ही विस्थापितों को बार-बार आंदोलन का सहारा लेना पड़ा है। अब सबकी नजरें इस बात टिकी हैं कि 10 दिन बाद आंदोलनकारी क्या निर्णय लेते हैं।

एमपी बोर्ड रिजल्ट: प्रदेश के फलक पर चमका पन्ना, प्रतिभा सिंह बनीं स्टेट टॉपर; 14 छात्र मेरिट लिस्ट में शामिल

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हाईस्कूल परीक्षा में मध्य प्रदेश की मेरिट सूची में पहला स्थान प्राप्त करने वाली पन्ना जिले की होनहार छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी का गुनौर विधायक राजेश वर्मा ने सम्मान किया।
पन्ना।(www.radarnews.in) माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा कक्षा 10वीं के घोषित परीक्षा परिणाम में इस बार पन्ना जिले ने शानदार प्रदर्शन कर पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। जिले की होनहार छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी ने 500 में से 499 अंक प्राप्त कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। उनकी इस अभूतपूर्व सफलता ने न केवल पन्ना बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। प्रतिभा सिंह की इस उपलब्धि के साथ ही पन्ना जिले के कुल 14 अन्य छात्रों ने भी स्टेट मेरिट लिस्ट में स्थान बनाकर जिले का नाम रोशन किया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में छात्रों का मेरिट में आना जिले के शिक्षा स्तर और विद्यार्थियों की मेहनत का प्रमाण माना जा रहा है। इस वर्ष जिले का हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा परिणाम 77.78 प्रतिशत एवं हायर सेकेण्डरी (कक्षा 12वीं) का रिजल्ट 77.94 दर्ज किया गया।

500 में 499 अंक हासिल कर रचा कीर्तिमान

प्रतिभा सिंह सोलंकी ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में लगभग पूर्णांक प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उनकी इस विशिष्ट उपलब्धि से जिले में हर्ष और गर्व का माहौल है। बुधवार को रिजल्ट घोषित होने के बाद से ही होनहार बेटी को बधाई देने वालों का तांता लगा है। प्रतिभा सिंह सोलंकी पुत्री भारतेंदु सिंह सोलंकी, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाईस्कूल की छात्रा हैं। उनकी इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा। परिवार और शिक्षकों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया है।

8 किमी दूर जाकर की पढ़ाई, मेहनत ने दिलाई सफलता

हाई स्कूल परीक्षा की स्टेट टॉपर बनीं पन्ना की होनहार छात्रा प्रतिभा सिंह सोलंकी।
प्रतिभा के लिए यह सफलता आसान नहीं थी। उनके गांव हिनौती से स्कूल की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। वह प्रतिदिन बस से गुनौर स्थित सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल पढ़ने जाती थीं। कड़ी मेहनत, लगन और निरंतर अध्ययन के बल पर प्रतिभा ने प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल कर अपनी क्षमता को साबित किया है। प्रतिभा के पिता भारतेंद्र सिंह ग्राम रोजगार सहायक हैं, जबकि उनकी मां सरकारी टीचर हैं। परिवार ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग दिया। प्रतिभा ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता एवं शिक्षकों को दिया है। उन्होंने आगे चलकर यूपीएससी की तैयारी कर प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बताया है। सरस्वती ज्ञान मंदिर गुन्नौर के प्राचार्य मनीष सिंह यादव के अनुसार प्रदेश मेरिट सूची में 14 विद्यार्थियों में से विद्यालय के 8 छात्रों ने मेरिट सूची में स्थान बनाया है, जो स्कूल के लिए गर्व की बात है। खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने इस उपलब्धि पर फोन के माध्यम से बधाई दी। वहीं गुनौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा प्रतिभा के घर पहुंचे जहां उन्होने होनहार बेटी प्रतिभा का सम्मान कर बधाई दी है।

14 छात्रों ने भी बढ़ाया पन्ना का मान

केवल एमपी टॉपर ही नहीं, बल्कि जिले के 14 कुल विद्यार्थियों ने मेरिट सूची में स्थान बनाकर यह साबित कर दिया कि हीरों की धरती पन्ना प्रतिभाओं से भरा हुआ है। इन विद्यार्थियों की सफलता ने यह संदेश दिया है कि छोटे जिलों के छात्र भी बड़े लक्ष्य हासिल करने में सक्षम हैं। इस शानदार परिणाम के बाद जिले में खुशी का माहौल है। प्रदेश की मेरिट सूची में प्रतिभा सिंह सोलंकी, पिता भारतेंदु सिंह सोलंकी, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल, गुनौर 499 प्रथम स्थान, अर्जुन सिंह राजपूत, पिता मंगल सिंह राजपूत सरस्वती जान मंदिर हाई स्कूल, गुनौर 497 तृतीय स्थान, प्रियंका यादव, पिता नन्द किशोर यादव, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अजयगढ़ 496 चतुर्थ स्थान, उदय मित्रा, पिता राजेश मिश्रा, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 496 चतुर्थ स्थान, हर्ष त्रिपाठी पिता रामफल त्रिपाठी सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 494 छठवां स्थान, विधान त्रिपाठी पिता रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 494 छठवां स्थान, आयुष तिवारी पिता रामराज तिवारी शा. हाई स्कूल गुखौर 493 सातवां स्थान, नमन मिश्रा पिता प्रमोद मिश्रा सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 492 आठवां स्थान आदित्य सोनी पिता राजेश सोनी शा. उमावि पहाड़ीखेरा 492 आठवां स्थान, नमन शुक्ला पिता देवेंद्र कुमार शुक्ला, शा. हाई स्कूल बड़ागांव 491 नौवां स्थान, नेहा प्रजापति पिता विधाधर प्रजापति सरस्वती ज्ञान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 491 नौवां स्थान, प्रिंस सिंह राजपूत पिता हरिचरण सिंह राजपूत सरस्वती जान मंदिर हाई स्कूल गुनौर 490, अमर सिंह लोधी पिता राम स्वरूप सिंह लोधी नेशनल पब्लिक स्कूल पन्ना 490 दसवां स्थान, अवध बिहारी चौहान पिता राम दयाल लुनिया शासकीय हाई स्कूल गुखौर ने 490 अंकों के साथ दसवां स्थान अर्जित किया है। इस शानदार उपलब्धि पर पूरे जिले में जश्न ख़ुशी माहौल है। अभिभावकों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

12वीं के दो विद्यार्थी प्रदेश की मेरिट में

हायर सेकेंडरी परिक्षा में कला संकाय की मेरिट लिस्ट में आठवां स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा काजल द्विवेदी को विद्यालय स्टॉफ से सम्मानित किया।
माध्यमिक शिक्षा मण्डल मध्य प्रदेश भोपाल द्वारा बुधवार 15 अप्रैल को हाईस्कूल के साथ हायर सेकेण्डरी परीक्षा के भी नतीजे घोषित किये गए। हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) परीक्षा परिणाम में पन्ना जिले का प्रदर्शन अच्छा रहा। इस वर्ष जिले का कुल परीक्षा परिणाम 77.94 प्रतिशत रहा। विशेष उपलब्धि यह रही कि जिले के दो मेधावी छात्रों ने प्रदेश की मेरिट सूची स्थान बनाकर पन्ना का नाम रोशन किया है। होनहार छात्रा काजल द्विवेदी पिता विजय कुमार द्विवेदी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हरदी ने कला संकाय में कुल 500 में से 482 अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट में आठवां स्थान प्राप्त किया। जबकि नंदकिशोर पटेल पिता बृजकिशोर पटेल सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुनौर ने विज्ञान और गणित संकाय में कुल 500 में से 483 अंक प्राप्त कर प्रदेश में दसवां स्थान हासिल किया है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना: ‘चिता आंदोलन’ के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला, 15 अप्रैल से 4 गांवों को खाली कराने की कार्रवाई

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केन बेतवा लिंक परियोजना प्रभावित ग्रामों के वांशिदों द्वारा संयुक्त रूप से ढोड़न बांध स्थल पर चलाए जा रहे चिता आंदोलन का दृश्य।

*     मुआवजा भुगतान पूरा होने का दावा, वन विभाग को सौंपी जाएगी जमीन

*     पन्ना जिले के कटहरी बिलहटा, कोनी, मझौली और डोड़ी से शुरू होगा विस्थापन का पहला चरण

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित होने वाले पन्ना एवं छतरपुर जिले के डेढ़ दर्जन गांवों के वाशिंदों द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे ‘चिता आंदोलन’ के बीच पन्ना जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए चार गांवों को खाली कराने की कार्रवाई 15 अप्रैल 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया है। ढोड़न बांध स्थल पर बीते 9 दिनों से मुआवजा विसंगतियों और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के बीच इस फैसले ने नई चिंता पैदा कर दी है। प्रशासन के अनुसार पहले चरण में ग्राम कटहरी बिलहटा, कोनी, मझौली और डोड़ी से ग्रामीणों को हटाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इन गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा भी वितरित किया जा चुका है। साथ ही, मानवीय आधार पर मकान और खेत खाली करने के लिए दी गई मोहलत भी अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब इन गांवों की भूमि और परिसंपत्तियों को खाली कराकर वन विभाग, पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) को सौंपा जाएगा।

पहले से दी गई थी चेतावनी

प्रशासन द्वारा जारी सूचना के मुताबिक 15 अप्रैल को सुबह 9 बजे से संबंधित गांवों में जमीन, मकान और अन्य परिसंपत्तियों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय पन्ना की ओर से सार्वजनिक सूचना जारी कर ग्रामीणों को पूर्व में ही अपने कब्जे हटाने के लिए निर्देशित किया गया था। पन्ना एसडीएम संजय कुमार नागवंशी ने स्पष्ट किया है कि अधिग्रहण के बाद संपत्ति खाली नहीं करने की स्थिति में प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी और किसी भी प्रकार की हानि के लिए संबंधित व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होंगे। इसके साथ ही ग्राम स्तर पर मुनादी कराकर और सार्वजनिक स्थानों पर सूचना चस्पा कर लोगों को अवगत कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस निर्णय के बीच एक ओर जहां प्रशासन मुआवजा प्रक्रिया पूरी होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीण पुनर्वास और मुआवजे में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील होने की संभावना बनी हुई है।

केन की लहरों पर ‘चिताएं’, 18 गांवों की जलसमाधि; विस्थापितों की मांग- हमें नया गांव दो या मार दो

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केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावित आदिवासी और ग्रामीणों का ढोड़न बांध स्थल पर केन नदी में अपनी चिता पर लेटकर आंदोलन-प्रदर्शन आठवें दिन भी जारी रहा।

*      केन-बेतवा लिंक परियोजना विस्थापितों के “चिता आंदोलन” 8वां दिन

*      भूख हड़ताल से तेज हुआ आंदोलन, हजारों घरों में नहीं जला चूल्हा

*      धारा 163 की सख्ती के बीच नदी में उतरे ग्रामीण, महिलाएं-बच्चे भी मोर्चे पर

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बुंदेलखंड अंचल की जीवनदायनी केन नदी इन दिनों एक ऐसे ऐतिहासिक सत्याग्रह की साक्षी बन गई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे पन्ना और छतरपुर जिले के 18 गांवों के हजारों आदिवासी और ग्रामीण नदी की लहरों के बीच लकड़ियों से बनी प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर जलसमाधि लेने के संकल्प के साथ आंदोलन कर रहे हैं। उनकी आवाज साफ है- “हमें न्याय दो या फिर मौत दो।” आंदोलन के आठवें दिन रविववार को यह संघर्ष अपने चरम पर पहुंच गया, जब हजारों परिवारों ने सामूहिक भूख हड़ताल करते हुए अपने घरों में चूल्हा तक नहीं जलाया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अन्न त्यागकर यह संदेश देने की कोशिश की कि वे सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि सम्मानजनक पुनर्वास के तहत गांव के बदले गांव चाहते हैं।
निर्माणाधीन ढोड़न बांध स्थल पर चल रहे विस्थापितों के आंदोलन के तेज होने के साथ ही इसे दबाने के लिए सरकारी मशीनरी सक्रिय हो चुकी है। छतरपुर जिला मजिस्ट्रेट की ओर से क्षेत्र में धारा 163 लागू कर सख्ती बढ़ा दी गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर के विरुद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व द्वारा वन अपराध दर्ज कर लिया गया है। आंदोलन स्थल पर भीड़ को पहुंचने से रोकने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के भुसौर गेट की नाकेबंदी कर बाहर से आने वालों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। आंदोलन स्थल तक राशन-पानी व चिकित्सा सुविधा पहुंचने में बाधाओं के आरोपों के बीच यह संघर्ष अब मानवीय संकट का रूप लेता जा रहा है।

दर्द और विरोध का चरम

केन नदी का यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भीतर तक विचलित कर देता है। नदी के बीचों-बीच सजी चिताओं पर लेटे ग्रामीण मानो अपने ही अस्तित्व के अंत की प्रतीक्षा कर रहे हों। महिलाएं अपने दुधमुंहे बच्चों को सीने से लगाए, झुलसा देने वाली धूप-गर्मी और भूख-प्यास के बीच डटी हैं। चारों ओर गूंजते नारे- “न्याय दो या मौत दो” इस आंदोलन को सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुकार बना देते हैं। यह दृश्य साफ कर देता है कि यह लड़ाई अब जमीन से आगे बढ़कर अस्मिता और अस्तित्व की हो चुकी है। उल्लेखनीय है कि देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना के तहत पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर केन नदी पर ढोड़न बांध का निर्माण किया जा रहा है। छतरपुर जिले की बिजावर तहसील के अंतर्गत आने वाले इस विशाल बांध में छतरपुर के 8 गांव डूब में आ रहे हैं। वहीं परियोजना के तहत डूब से प्रभावित वन भूमि के बदले पन्ना जिले के 10 ग्रामों में भू-अर्जन कर ग्रामीणों को विस्थापित किया जा रहा है।

“हक नहीं, सिर्फ कोरे आश्वासन मिले

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर प्रशासन पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पन्ना और छतरपुर जिले में भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया और ग्राम सभाओं के दस्तावेजों में भी पारदर्शिता नहीं है। केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना अंतर्गत बांध निर्माण के लिए और प्रभावित वन भूमि के बदले भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 सही तरीके से लागू नहीं किया गया। दोनों जिलों में 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले प्रभावित परिवारों के सदस्यों को साढे़ 12 लाख रूपए का पुनर्वास पैकेज प्रदान करने के लिए अलग-अलग समय-सीमा निर्धारित की गई। इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था के चलते विस्थापित हो रहे सैंकड़ों पात्र व्यक्ति व्यक्ति पुनर्वास पैकेज से वंचित हो जाएंगे। अमित का आरोप है प्रशासन विस्थापितों की समस्याओं और मांगों का निराकरण करने के बजाए कोरे आश्वासन दे रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें उचित पुनर्वास के बजाय सिर्फ अधूरा मुआवजा देकर हटाने की कोशिश की जा रही है। वे स्पष्ट रूप से गांव के बदले गांव की मांग पर अड़े हुए हैं, ताकि उनकी सामाजिक संरचना और जीवनशैली सुरक्षित रह सके। भूख हड़ताल को वे अपनी मजबूरी बताते हैं। उनका कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, यह संघर्ष और तेज होता जाएगा।

विकास बनाम अस्तित्व की जंग

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उस बहस को जिंदा कर दिया है, जिसमें विकास और विस्थापन आमने-सामने खड़े नजर आते हैं। सरकार जहां केन-बेतवा लिंक परियोजना को बुंदेलखंड के जल संकट के समाधान के रूप में पेश कर रही है, वहीं स्थानीय आदिवासी-किसान इसे अपने जल, जंगल और जमीन पर हमला मान रहे हैं। छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल का दावा है कि अधिकांश प्रभावितों को मुआवजा दिया जा चुका है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। इसी के तहत धारा 163 लागू कर दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ या विरोध पर रोक लगाई गई है। लेकिन दूसरी ओर, आंदोलनकारी इसे दमनात्मक कार्रवाई मानते हुए आरोप लगा रहे हैं कि उनकी आवाज को दबाने के लिए सख्ती की जा रही है। केन नदी की लहरों पर लेटी ये प्रतीकात्मक ‘चिताएं’ आज सिर्फ एक आंदोलन का हिस्सा नहीं, बल्कि उस पीड़ा का प्रतीक बन चुकी हैं, जिसे हजारों लोग अपने भीतर लिए बैठे हैं। एक ओर विकास की बड़ी तस्वीर है, तो दूसरी ओर उजड़ते घरों की हकीकत। ऐसे में सवाल यही उठता है- ‘क्या इन लोगों को उनका हक और सम्मानजनक पुनर्वास मिलेगा, या केन की धार में उनकी यह पुकार यूं ही गूंजती रह जाएगी’?

बातचीत बेनतीजा, जारी रहेगा आंदोलन

पन्ना एसडीएम ने केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों से बातचीत कर मांगों के निराकरण का आश्वासन देते हुए आंदोलन समाप्त करने की अपील की।
जय किसान संगठन के बैनर तले चल रहे केन-बेतवा लिंक परियोजना प्रभावितों के आंदोलन ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सप्ताह भर से जारी ‘चिता आंदोलन’ के बीच आज हजारों परिवारों के घरों में चूल्हा न जलने की खबर के बाद दोपहर में पन्ना से एसडीएम संजय कुमार नागवंशी, अजयगढ़ एसडीएम आलोक मार्को और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल ढोड़न बांध पहुंचकर आंदोलनकारियों से चर्चा की। पन्ना एसडीएम ने चिताओं पर लेटी महिलाओं से आंदोलन खत्म करने और भूख हड़ताल तोड़ने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं को सुनने और निराकरण करने लिए तैयार है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अधिकारियों के सामने ग्रामीणों का पक्ष रखते हुए सीधा सवाल किया कि धारा 11, 15, 18 और 19 के तहत विस्थापन की जो वैधानिक प्रक्रिया होनी चाहिए थी, उसे दरकिनार क्यों किया गया? उन्होंने मांग की कि अगर कोई ग्राम सभा हुई है, तो उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। वहीं ग्रामीणों ने अधिकारियों से कहा कि वे पिछले कई वर्षों से केवल ‘झूठे आश्वासन’ सुन रहे हैं। जब तक जमीन पर ठोस कार्यवाही और पूर्ण न्याय नहीं दिखता, वे बांध स्थल पर ही अपनी जान दे देंगे लेकिन वहां से नहीं हटेंगे। देर शाम तक अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। गतिरोध बरकरार रहने से अधिकारी वापस लौट गए।

पौधारोपण में ‘पैसों की खेती’! गड्ढों से लेकर फेंसिंग तक हुआ करोड़ों का वारा-न्यारा

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वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट कुड़रा में पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई श्रमिकों के बजाए ट्रैक्टरों से कराई गई। पौधारोपण कार्यों में हुए फर्जीवाड़े का सबूत हैं गोलाकार गड्ढे।

   मशीनों से काम कराकर श्रमिकों के नाम फर्जी भुगतान

   पुराने वृक्षों के बीच पौधारोपण, स्थल चयन पर उठे सवाल

*      उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत कैम्पा और आरडीएफ वृक्षारोपण में भ्रष्टाचार

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में उत्तर वन मण्डल अंतर्गत विभागीय कार्यों के बजट बंदरबांट का अभियान काफी लंबे समय से लगातार चल रहा है। सरकारी धन की लूट-खसोट का सीधा असर विभाग द्वारा कराए जाने वाले निर्माण सहित पौधरोपण कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। पौधारोपण कार्य अब पर्यावरण संरक्षण के बजाए ‘पैसों की खेती’ का जरिया बनते नजर आ रहे हैं। अटल भूजल योजना अंतर्गत तालाबों के निर्माण में सामने आए भ्रष्टाचार का मुद्दा अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब कैम्पा और आरडीएफ मद से कराए गए पौधारोपण (वृक्षारोपण) तैयारी कार्यों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। तालाब और परकोलेशन पिट निर्माण की तर्ज पर पौधारोपण कार्यों में भी कुल स्वीकृत राशि का धरातल पर 50 फीसदी से भी कम खर्च करने के चक्कर में मजदूरों का काम ठेके पर मशीनों से कराया गया।
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट सिमरा में कैम्पा मद पौधारोपण कराने के लिए स्थल सफाई कराए बगैर ठेके पर ट्रैक्टरों से गोल गड्ढों की खुदाई करा दी।
उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आने वाली समस्त रेन्जों में आगामी मानसून सीजन में करीब आधा सैंकड़ा स्थानों पर लाखों पौधे रोपित करने के लिए ट्रेक्टरों से गोलाकार गड्ढों की खुदाई करा दी गई। जबकि गड्ढों की खुदाई वर्गाकार आकृति में की होनी थी। अपवाद स्वरूप कुछेक बीटों को छोड़ दें शेष सभी जगह नजर आ रहे पौधारोपण के गोल गड्ढे खुद ही भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। कार्य प्रभारी बीटगार्ड से लेकर डीएफओ की मिलीभगत के चलते गड्ढों की खुदाई खुलेआम ट्रैक्टरों से कराने के बाबजूद मजदूरों के नाम बनाए गए करोड़ों रुपए के फर्जी प्रमाणकों का भुगतान हो गया। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अंदरखाने मचे हड़कंप के चलते अब कुछ स्थानों पर गोल गड्ढों का गोलमाल छिपाने मजदूर लगाकार गड्ढों को निर्धारित आकृति (आकार) देने का कार्य ठेके पर कराया जा रहा है। पौधारोपण तैयारी कार्यों व्यापक पैमाने पर की गई धांधली सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं, यह स्थल चयन से शुरू होकर चेन लिंक फेंसिंग मटेरियल की गुणवत्ता तक जाती है।

स्थल चयन की स्वीकृति पर सवाल

वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट नरदहा में पहले से लगे पेड़ों के बीच नए पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई कराई गई।
उत्तर वन मण्डल पन्ना के वन परिक्षेत्र धरमपुर में सर्किल नरदहा अंतर्गत ग्राम नरदहा से सटे वन क्षेत्र में पौधारोपण के लिए जिस स्थल का चयन किया गया है वहां पहले से 15 से 20 वर्ष पुराने पेड़ अच्छी-खासी तादाद में खड़े हैं। पहले से खड़े वृक्षों के आसपास या बीच में खाली जगह पर नए पौधे रोपित करने गड्ढों की खुदाई के पूर्व खरपतवार हटाने स्थल सफाई तक नहीं कराई गई। इतना ही ज्यादा से ज्यादा गड्ढे खोदने के चक्कर में उनके बीच निर्धारित दूरी का मापदंड यहां मजाक बन चुका है। गड्ढों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई भी एक समान नहीं है।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में पुराने सघन जंगल के बीच में रिक्त भूमि को नए पौधारोपण के लिए चुना गया।
नरदहा बीट में ही छनिहपुरवा गांव के सिंचाई जलाशय के बगल में भी जहां 20 से 50 वर्ष पुराने वृक्षों का घना जंगल खड़ा है वहां बीच-बीच में रिक्त स्थान पर गड्ढों की खुदाई करवाकर आगामी बारिश के सीजन पौधे रोपित कराने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के जानकार उक्त दोनों स्थानों पर पौधारोपण कार्यों को स्वीकृति मिलने पर ही सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि, स्थानीय अधिकारियों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण कार्य स्वीकृत करवाकर नोट छापने के लिए भोपाल में बैठे वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को गुमराह किया। दोनों ही जगह पौधों की सुरक्षा पुख्ता करने खड़े किए गए सीमेंट पोल और सुरक्षा जाली की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।

ट्रैक्टरों से कराई गड्ढों की खुदाई

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट बरकोला में 20 हेक्टेयर, बीट सिमरा 50 हेक्टेयर और वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट कुड़रा में 40 हेक्टेयर वन भूमि पर कैम्पा मद से वृक्षरोपण कराने के लिए पिछले माह ट्रैक्टर लगवाकर ठेके पर हजारों गड्ढे खुदवाए गए। सूत्रों ने बताया कि ट्रैक्टर से प्रत्येक गड्ढे की खुदाई का ठेका साइज के हिसाब से 3 से 4 रुपए में दिया गया। जबकि मजदूरों (श्रमिकों) के नाम पर बनाए गए फर्जी प्रमाणकों में प्रत्येक गड्ढे की खुदाई की मजदूरी न्यूनतम 12-13 रुपए से लेकर अधिकतम 25 रुपए तक दर्ज की गई। ठेके पर मशीनों से काम करवाने के बाद कार्य प्रभारी बीटगार्ड, संबंधित सर्किल प्रभारी और रेंजरों सुनियोजित तरीके से अपने विश्वासपात्र तथा करीबी लोगों के नाम बिल-बाउचर (प्रमाणक) में मजदूरी करने वाले श्रमिकों के रूप दर्ज कर दिए। ताकि उनके खातों में होने वाले मजदूरी भुगतान की राशि आसानी से उन तक पहुंच सके।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में सिंचाई जलाशय के समीप कराए जा रहे पौधारोपण की फेंसिंग सामग्री मानक स्तर की नहीं।
फील्ड में हुए कार्यों की सच्चाई जांनने के बाद भी डीएफओ साहब ने समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह पौधारोपण तैयारी कार्य के करोड़ों रुपए के प्रमाणकों का भुगतान कर दिया। जबकि इन बीटों में भी चेन लिंक फेंसिंग में लगाए गए सीमेंट पोल और लोहे की जाली आदि सामग्री की गुणवत्ता मानक स्तर की नहीं है। पौधारोपण स्थल पर तालाब और परकुलेशन पिट का निर्माण कार्य भी पूर्णतः मशीनों से ही कराया गया। बता दें कि इसके पूर्व रडार न्यूज़ ने वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट धवारी, टौरिया और देवरभापतपुर में स्वीकृत पौधारोपण हेतु ट्रैक्टरों से ठेके पर हजारों की तादाद में गोल गड्ढों की खुदाई के मामले को उजागर किया था।

जानकारी मांगने पर अफसरों से साधी चुप्पी

उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, जब इस मामले से संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया तो अजयगढ़-धरमपुर रेंजर से लेकर एसडीओ, डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य वन संरक्षक वृत छतरपुर नरेश यादव तक ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पौधरोपण तैयारी कार्यों में हुई अनियमितताओं को लेकर खबर प्रकाशित करने के लिए आवशयक बुनियादी जानकारी मसलन प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार उक्त कार्यों की लागत, रोपित किए जाने वाले पौधों की संख्या, क्षेत्रफल और अब तक व्यय हुई राशि आदि का डिटेल जानने जब उक्त अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी थी जैसे कि उन्हें ‘सांप सूंघ गया हो’। करीब 2 सप्ताह से जानकारी देने में आनाकानी और टालमटोल करते हुए रेंज अफसर अब अपने अधीनस्थों से कई तरह के संदेश पहुंचा रहे हैं। फोन कॉल, व्हाट्सएप्प पर और समक्ष में उपस्थित होकर जानकारी मांगे जाने के बाबजूद जानकारी नहीं दी गई। अधिकारियों की यह चुप्पी न सिर्फ पूरे मामले को संदिग्ध बनाती है बल्कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।

तेल का खेल! पार्ट-1: जल संसाधन संभाग पन्ना में 29 लाख का घोटाला

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कार्यालय कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)

*     कार्यपालन यंत्री पर नियमों की अनदेखी कर व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप

*      52 माह तक बिना बिल के डीजल का हुआ भुगतान, ईएनसी के निर्देशों की खुली अवहेलना

*     एक ही कार्यालय में वाहनों के लिए डीजल भुगतान में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रिया

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों एवं आर्थिक अनियमितता के लिए बदनाम कार्यालय जल संसाधन संभाग पन्ना में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा पर व्यक्ति विशेष को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए गंभीर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगे हैं। विभागीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने स्वयं के उपयोग के लिए लगाए गए वाहन के भुगतान में शासन के स्पष्ट नियमों और प्रमुख अभियंता के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी कर 29.55 लाख रुपए से अधिक राशि का भुगतान किया गया। जबकि कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों के डीजल भुगतान में अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। दस्तावेजों की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल देयकों (बिल) को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता। बिल प्रस्तुत कराए बिना ही वाहन का कुल भुगतान (मासिक किराया+डीजल) निर्धारित लिमिट के आधार पर लगातार वाहन मालिक के खाते में किया जाता रहा है। यह गड़बड़झाला पिछले 52 माह से चल रहा था।

ईएनसी ने दिशा-निर्देशों की अवहेलना

शासकीय कार्य हेतु टैक्सी/वाहन किराए पर लिए जाने के संबंध में कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल (म.प्र.) द्वारा पत्र क्र. 333/4/759/भू. अ./2011 भोपाल, दिनांक 09 सितंबर 2011 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र में बताया गया है शासकीय वाहन उपलब्ध न होने पर किराए पर वाहन अधीक्षण यंत्री की अनुमति से लगाए जा सकते हैं। जिसमें कार्यपालन यंत्री तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के लिए वाहन पर डीजल एवं किराया का कुल मासिक व्यय की अधिकतम लिमिट क्रमशः 630D/550D निर्धारित की गई है। 24 शर्तों वाले पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ‘D’ का अर्थ अधीक्षण यंत्री के मुख्यालय पर उपलब्ध न्यूनतम डीजल दर प्रति लीटर टैक्स सहित है। पत्र के बिंदु क्रमांक 2 में स्पष्ट उल्लेख है, प्रमुख अभियंता एवं शासन के आदेशों में कहीं विरोधाभास होने पर शासन के आदेश का पालन किया जाएगा। इसी तरह बिंदु क्रमांक 6 में कहा गया है ‘वाहन का मालिक विभाग के किसी भी प्रथम अथवा द्वितीय श्रेणी अधिकारी का निकट या दूर का रिश्तेदार नहीं होना चाहिए। यदि रिश्तेदार होना पाया जाता है, तो भुगतान किए गए किराए की दुगुनी राशि सिंचाई राजस्व में उस अधिकारी के वेतन से जमा कराई जाएगी साथ ही दंडित भी किया जाएगा।’

52 माह तक लगातार बिना बिल के 29 लाख का भुगतान

कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा ने जल संसाधन संभाग पन्ना में माह अगस्त 2021 को अपनी पदस्थापना के बाद से ही हद दर्जे की मनमानी करते हुए तेल का खेल शुरू कर दिया था। मुख्य अभियंता कार्यालय सागर के एक विश्वसनीय सूत्र से प्राप्त दस्तावेजों को देखने से पता चलता है शर्मा द्वारा अपने स्वयं के लिए लगाए गए वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल के बिलों को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता। डीजल के बिल प्रस्तुत कराए बगैर ही माह सितंबर 2021 से वाहन का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) 630D की लिमिट के आधार पर वाहन मालिक के खाते में माह दिसंबर 2025 तक लगातार किया जाता रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने लिए लगाए गए वाहन के मासिक भुगतान में प्रमुख अभियंता के निर्देशों की खुली अवहेलना की गई। डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बगैर ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) के खाते में किया गया। जबकि नियमानुसार वाहन के डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के बाद संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक को इसका भुगतान किया जाना चाहिए था। कार्यपालन यंत्री की इस मेहरबानी के मद्देनजर वाहन मालिक उनका नजदीकी या दूर का रिश्तेदार होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि, शर्मा साहब की ससुराल ग्वालियर क्षेत्र में है, पन्ना में उनकी पदस्थी के बाद से ही जिले के जल संसाधन विभाग में ग्वालियर-चंबल अंचल के ठेकेदारों का दखल लगातार बढ़ता जा रहा है।

भुगतान की अलग-अलग प्रक्रिया पर सवाल

जल संसाधन संभाग पन्ना में किराए पर लगाए गए वाहनों के भुगतान में नियम विरुद्ध अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कार्यपालन यंत्री द्वारा स्वयं को नियम-निर्देशों से ऊपर रखते हुए अपने लिए लगाए गए वाहन के डीजल बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बिना ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष के खाते में लगातार किया जाता रहा है। वहीं कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों का किराया रुपए 26,950/- प्रतिमाह तथा मासिक डीजल का भुगतान क्रमशः वाहन मालिक और डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के उपरांत संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक के खाते में किया जा रहा है। अर्थात एक ही कार्यालय में वाहनों के डीजल की भुगतान की अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने से नियम-निर्देशों का मजाक उड़ रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा वाहन मालिक को मासिक किराया के साथ वाहन के डीजल का नियम विरुद्ध भुगतान करके व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। उनका यह कृत्य अनियमित भुगतान के साथ शासकीय निधि के दुरूपयोग की श्रेणी में आता है।

भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर रहे शीर्ष अधिकारी

गंभीर वित्तीय अनियमितता के इस मामले की सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि, कार्यपालन यंत्री की कारगुजारी का कच्चा चिट्ठा सप्रमाण जनवरी 2026 में प्रमुख अभियंता भोपाल तथा मुख्य अभियंता सागर को भेजा गया था, लेकिन शीर्ष अधिकारियों ने लाखों रुपए के नियम विरुद्ध भुगतान पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया। शीर्ष अफसरों द्वारा जानबूझकर की जा रही इस अनदेखी से न सिर्फ उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि इससे जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि, डीजल के अनियमित भुगतान से जुड़े आरोपों पर जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने पर उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। श्री शर्मा ने 4 दिन पूर्व टेक्स्ट मैसेज भेजकर रडार न्यूज़ को बताया था कि शासकीय कार्य और न्यायालीन प्रकरण के सिलसिले में राजधानी भोपाल आया हूं। आपसे फ्री होकर बात करूंगा, लेकिन इसके बाद समाचार लिखे जाने तक न तो उनका फोन आया और ना ही कोई मैसेज आया है।

भविष्य से भेंट कार्यक्रम: कलेक्टर पहुंचीं स्कूल, बच्चों से सवांद कर जगाई पढ़ाई की अलख

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कलेक्टर ऊषा परमार ने स्कूली बच्चों से संवाद कर पढ़ाई के संबंध में जानकारी ली।

*    नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत कर उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं

*    शिक्षकों को सरल एवं रोचक तरीके से शिक्षा देने के निर्देश

पन्ना।(www.radarnews.in) शासन के निर्देशानुसार आयोजित चार दिवसीय प्रवेशोत्सव एवं स्कूल चलें हम अभियान के अंतर्गत शनिवार 4 अप्रैल को जिले के शासकीय विद्यालयों मेंभविष्य से भेंट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर ऊषा परमार ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी के साथ विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।साथ ही उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया। जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों को पढ़ाई का महत्व बताया और प्रेरणास्पद बातों का जिक्र भी किया।

मनकी एवं बिलखुरा की शाला का किया निरीक्षण

कलेक्टर ऊषा परमार एवं जिला पंचायत सीईओ ने स्कूली बच्चों संग बैठकर माध्यन्ह भोजन का स्वाद चखा।
अधिकारीद्वय द्वारा शासकीय माध्यमिक शाला मनकी एवं प्राथमिक शाला बिलखुरा पहुंचकर विद्यालय के शिक्षकों को छात्र-छात्राओं की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने एवं नियमित रूप से समय पर स्कूल खोलने व संचालन के निर्देश दिए गए। कलेक्टर एवं जिपं सीईओ ने बच्चों के साथ सामूहिक मध्यान्ह भोजन भी किया और बच्चों को बिस्किट वितरित किए। स्कूली विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ पढ़ाई से संबंधित जानकारी साझा की तथा गिनती, पहाड़ा, कहानी और कविताएं भी सुनाईं। इस दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। बच्चों से शिक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त कर एवं शासन द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्रदान कर सभी विद्यार्थियों से इसका लाभ उठाने के लिए कहा गया।

अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की अपील

कलेक्टर ऊषा परमार ने स्कूली बच्चों को बिस्किट के पैकेट वितरित किए।
भविष्य से भेंट कार्यक्रम में बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने पर जोर दिया गया तथा अभिभावकों से भी अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने एवं पढ़ाई में सहयोग करने की अपील की गई। स्कूल के शिक्षकों द्वारा भी शाला में नामांकन सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में अवगत कराया गया। शिक्षकों को निर्देशित किया गया कि सरल एवं रोचक तरीके से बच्चों को शिक्षा प्रदान करें, जिससे उनकी पढ़ाई में रूचि बढ़े। निरीक्षण के दौरान शाला में नामांकित विद्यार्थियों के जन्म एवं जाति प्रमाण पत्र सहित आधार व अपार आईडी विषयक एवं गत कक्षा के परीक्षा परिणाम व परिवार के सदस्यों संबंधी सामान्य जानकारी भी ली गई। जिला कलेक्टर ने ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण भी किया।

एकता और समरसता का संदेश लेकर सोमवार को पन्ना पहुंचेगी सरदार पटेल रथयात्रा

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सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता एवं समरसता रथ यात्रा। (फाइल फोटो)

*    लौह पुरुष की आदमकद प्रतिमा, सोने के स्तूप के साथ ऐतिहासिक धरोहरों के होंगे दर्शन

*    नगर में भव्य स्वागत की तैयारी, मोहन राज विलास में आयोजित होगा मंचीय कार्यक्रम

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता एवं समरसता रथयात्रा सोमवार 30 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे पन्ना नगर में पहुंचेगी। गुजरात से प्रारंभ हुई यह यात्रा मध्य प्रदेश में कई जिलों से होते हुए पन्ना आ रही है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, भाईचारा और अखंडता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। रथ में भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जो आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके साथ ही रथ में सरदार पटेल से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें जैसे उनके कारावास काल की टिफिन पेटी, राजाओं द्वारा दिए गए रियासतों के विलीनीकरण पत्र, चरण पादुका तथा तीन किलोग्राम सोने का स्तूप भी आम लोगों के दर्शनार्थ रखे गए हैं।
नगर के मुख्य मार्गों से निकलेगी रथयात्रा
कुर्मी क्षत्रिय समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राम भगत पटेल एवं पन्ना जिलाध्यक्ष रंजोर सिंह पटेल ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना में सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता-समरसता रथयात्रा के स्वागत की भव्य तैयारियां की गई हैं। नगर के प्रमुख चौराहों पर पुष्प वर्षा, फूल-मालाओं और आतिशबाजी से जोरदार स्वागत किया जाएगा। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं तथा फ्लैक्स और बैनर भी लगाए गए हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे रथ यात्रा के पन्ना नगर में प्रवेश करने पर सतना नाका तिराहा पर सत्यम पैलेस के सामने पुष्पवर्षा, आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों से भव्य स्वागत किया जाएगा। तदुपरांत रथ यात्रा डायमंड चौक, बीटीआई तिराहा, कोतवाली चौराहा, छत्रसाल पार्क, बलदेव मंदिर चौक, बड़ा बाजार, अजयगढ़ चौराहा, गांधी चौक और बाबा बादशाह साईं चौराहा से होते हुए होटल मोहन राज विलास पहुंचेगी, जहां विशाल मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में सर्व समाज के अध्यक्षों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। मंचीय कार्यक्रम में खेल, कला, साहित्य, विज्ञान और शौर्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
सर्व समाज से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील
कुर्मी क्षत्रिय समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राम भगत पटेल।
उल्लेखनीय है कि सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता एवं समरसता रथ यात्रा के महारथी गुजरात के सर्वश्री मनु भाई पटेल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुर्मी पाटीदार महासभा, अनिता बेन पटेल महिला उपाध्यक्ष, जीबी पटेल महामंत्री गुजरात, राम भाई पटेल सचिव गुजरात, ए.के.पटेल एवं आशीष पटेल के संयुक्त संयोजकत्व में संचालन किया जा रहा है। कुर्मी क्षत्रिय समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राम भगत पटेल, पन्ना जिलाध्यक्ष रंजोर सिंह पटेल सहित सभी आयोजकों ने पन्ना जिलेवासियों, युवाओं, मातृशक्ति एवं विद्यार्थियों से रथ यात्रा और मंचीय कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर सरदार पटेल के जीवन, विचारों और योगदान को जानने-समझने की अपील की है। आम जनमानस रथयात्रा में शामिल होकर नगर भ्रमण के दौरान भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन से जुड़ी हुई स्मृतियों का अवलोकन कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर सकते हैं। आयोजकों ने आमजन से आव्हान किया है कि वे इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में शामिल होकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और समरसता को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण-पत्र वितरित कर विद्यालय में प्रवेश के लिए किया प्रेरित

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पन्ना शहरी परियोजना के आंगनवाड़ी केन्द्र 36 व 57 का विद्यारंभ प्रमाण-पत्र वितरण और प्रवेशोत्सव का कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद एवं भाजपा नेत्री श्रीमती संगीता राय ने बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किए।

*      पन्ना शहरी परियोजना के आंगनवाड़ी केन्द्र 36 व 57 का संयुक्त कार्यक्रम आयोजित

पन्ना।(www.radarnews.in) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार मंगलवार को पहली बार पन्ना जिले के आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 5 से 6 वर्ष के सभी बच्चों को प्राथमिक शाला में सहज रूप से स्थानांतरण करने व आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से विद्यारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्टर ऊषा परमार के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी अवधेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में मंगलवार 24 मार्च को पन्ना शहरी परियोजना परियोजना अंतर्गत बल्देव वार्ड क्रमांक-15 के आंगनवाड़ी केन्द्र क्रमांक- 36 व 57 का विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण एवं प्रवेश उत्सव समारोह का संयुक्त रूप से आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद एवं भाजपा जिला मंत्री श्रीमती संगीता राय ने इस अवसर पर दोनों केन्द्रों के लगभग दर्जन भर से अधिक शाला प्रवेशी बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्रों का वितरण किया। साथ ही उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। ये सभी बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रों से प्राथमिक शालाओं में प्रवेश कर रहे हैं। आंगनवाड़ी में संयुक्त रूप से आयोजित विद्यारंभ एवं प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग शहरी परियोजना पन्ना की परियोजना अधिकारी श्रीमती किरण खरे, सेक्टर पर्यवेक्षक अंजली गुप्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शहनाज बेगम, सितारा बेगम आंगनबाड़ी सहायिका सुधा शिवहरे, जूही खातून सहित स्कूल शिक्षक एवं बच्चों के अभिभावकगण भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान आंगनवाडी केंद्र में बाल चौपाल का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शहनाज बेगम और सितारा बेगम ने बताया कि जिन बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरित किए उन्हें स्कूल शिक्षा में प्रवेश के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही अभिभावकों को शिक्षा का महत्व बताकर अपने नौनिहालों के भविष्य को संवारने में किसी तरह की लापरवाही न कर अनिवार्य रूप से विद्यालय में प्रवेश दिलाने के संबंध में जागरूक किया। बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाने में अभिभावकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन भी दिया गया।

अटल भूजल योजना में भ्रष्टाचार: गुणवत्ताहीन निर्माण की भेंट चढ़े लाखों के तालाब, जमीन पर सूखे गड्ढे!

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वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट देवरा भापतपुर में अटल भूजल योजना से नवनिर्मित तालाब पूरी तरह सूख गया। (11 फरवरी 2026 का फोटो।

*      उत्तर वन मण्डल पन्ना के अजयगढ़ एवं धरमपुर परिक्षेत्र का मामला

  घटिया निर्माण छुपाने मरम्मत की लीपापोती, फंसने के डर में भुगतान से पहले अफसरों की चाल

  मशीनों से कराया निर्माण, मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान की तैयारी

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी अटल भूजल योजना मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। उत्तर वन मण्डल अंतर्गत अजयगढ़ और धरमपुर वन परिक्षेत्र में लाखों रुपए की लागत से बनाए गए लगभग दो दर्जन नवीन तालाब आज अपनी बदहाली से खुद ही “घटिया निर्माण” की कहानी बयां कर रहे हैं। हालात यह हैं कि जिन तालाबों का उद्देश्य जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारना था, वे गर्मी शुरू होते ही सूखे मैदान में तब्दील हो चुके हैं। वर्तमान में करीब 70 फीसदी तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। गर्मी के मौसम में जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब इनमें एक बूंद पानी तक नहीं होना करोड़ों की योजना की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और वन्यप्राणियों की प्यास बुझाने के लिए बनाए गए ये तालाब अब सिर्फ कागजी उपलब्धि बनकर रह गए हैं।

मशीनों से काम कराया, मजदूरों के नाम प्रमाणक बनाए

वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट धवारी में अटल भूजल योजना से नवनिर्मित तालाब लगभग सूख गया सिर्फ छोटे से गड्ढे में थोड़ा सा पानी बचा। (11 फरवरी 2026 का फोटो)
सूत्रों के मुताबिक, अटल भूजल तालाब निर्माण का लगभग शत-प्रतिशत कार्य ठेके पर मशीनों से कराया गया, लेकिन कागजों में मजदूरों के नाम पर फर्जी बिल-बाउचर तैयार किए गए। स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा निर्माण पर खर्च ही नहीं किया गया, जिससे तालाबों की गुणवत्ता बेहद खराब रही। वनरक्षक से लेकर तत्कालीन डीएफओ तक की मिलीभगत के आरोप चर्चा में हैं। इनकी गुणवत्ता का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 तालाब कुछ माह पूर्व पहली ही बारिश में फूट गए। उस समय तत्कालीन डीएफओ गर्वित गंगवार ने इन्हें “निर्माणाधीन” बताकर मामला दबाने की कोशिश की, जबकि हकीकत में काम पूरा हो चुका था और भुगतान के लिए प्रमाणक भेजे जा चुके थे। हर तालाब पर 14 लाख से 25 लाख रुपए तक खर्च दिखाया गया, लेकिन धरातल पर इनका निर्माण ठेके पर महज 5 से 8 लाख में कराया गया। अधिकांश जलाशय जनवरी महीने में ही सूख गए। गुणवत्ताहीन निर्माण, तकनीकी खामियां, गलत स्थल चयन और भारी लीकेज-सीपेज के कारण पानी ठहर ही नहीं पाया।

भुगतान से पहले मरम्मत की लीपापोती

वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट देवरा भापतपुर में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए मिट्टी की अवैध खुदाई से बने गड्ढे पर अटल भूजल योजना के तालाब का निर्माण कराया गया। (11 फरवरी 2026 का फोटो।)
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि तालाब इतने घटिया बने हैं कि उनका भुगतान करने से पहले ही विभाग को फंसने का डर सताने लगा है। इसी डर के चलते महीने भर से नव निर्मित तालाबों की मरम्मत के नाम पर लीपापोती कराई जा रही है, ताकि ऊपर से देखने पर काम ठीक-ठाक नजर आए और भुगतान में कोई बाधा न हो। उत्तर वन मण्डल कार्यालय में पिछले चार माह से करोड़ों रुपए के प्रमाणक लंबित हैं। अब चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने से पहले यानी अगले चार दिनों में इनका भुगतान करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

जांच टीम बनी, लेकिन मंशा पर सवाल

वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट देवरा भापतपुर में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए मिट्टी की अवैध खुदाई से बने गड्ढे पर निर्मित अटल भूजल तालाब की हाल ही में मरम्मत कराई गई। (10 मार्च 2026 का फोटो।)
अत्यंत ही घटिया निर्माण का मुद्दा गर्माने पर डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने संयुक्त जांच टीम गठित की है, जिसमें उप वनमण्डलाधिकारी विश्रामगंज अंशुल तिवारी (IFS) के साथ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम निरीक्षण भी कर चुकी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी या सिर्फ लाखों के भुगतान को “सुरक्षित” बनाने का जरिया है? सूत्र बताते हैं कि कुछ लोगों द्वारा आरटीआई के जरिए जानकारी निकाली गई और स्थानीय स्तर पर अटल भूजल तालाबों की शिकायतें भी हुईं। यही कारण है कि अधिकारियों ने बैचेनी और डर के चलते सीधे भुगतान करने के बजाय पहले कागजी सुरक्षा कवच तैयार किया, ताकि भविष्य में कार्रवाई से बचा जा सके।
वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट मैहावा में अटल भूजल योजना के तहत निर्मित तालाब के सूखने के कारण बेजुबान वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकने को हैं मजबूर। (21 फरवरी 2026 का फोटो)
जैसी कि संभावना है, भुगतान के बाद उच्च स्तरीय शिकायत हो सकती है। उस स्थित में अपनी गर्दन सुरक्षित रखने के लिए ही वन विभाग के अफसरों ने संयुक्त जांच टीम गठित करने की तरकीब निकाली है। ताकि सवाल उठने पर इसे ढाल के रूप में उपयोग कर बताया जा सके कि, तकनीकी विशेषज्ञों वाली टीम की रिपोर्ट के आधार पर तालाब निर्माण कार्यों के प्रमाणकों का भुगतान किया गया।

योजना का उद्देश्य ध्वस्त, जवाबदेही तय होना बाकी

उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
अटल भूजल योजना (अटल जल) का मकसद जहां भूजल स्तर में सुधार लाना, जल संरक्षण और जल सुरक्षा सुनिश्चित कर राहत देना था, वहीं पन्ना में यह योजना भ्रष्टाचार की मिसाल बनती दिख रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद जमीन पर परिणाम शून्य हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के नाम पर चल रही कवायद सच उजागर करती है या फिर संयुक्त जांच लंबित प्रमाणकों का भुगतान सुनिश्चित करने का माध्यम बनकर रह जाएगी। और यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

इनका कहना है-

अटल भूजल तालाबों की जांच के लिए गठित दल में एसडीओ (फॉरेस्ट) विश्रामगंज के अलावा दो विभागों के तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। जांच के दौरान तालाबों की मरम्मत कराए जाने का मुझे पता नहीं है। दरअसल, इनका बजट आ चुका है, इस बीच शिकवा-शिकायतों के चलते भुगतान से पूर्व जांच कराना उचित समझा। तालाबों के भुगतान की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डीएफओ, उत्तर सामान्य वन मण्डल, पन्ना।