भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने पर मंथन, पन्ना में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने विषय पर आयोजित कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा उपयोगी जानकारी दी गई।

*        जल संरक्षण की पारंपरिक तकनीकों, जल गुणवत्ता परीक्षण और तालाब पुनर्जीवन पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

*        अजयगढ़ में फील्ड विजिट कर अधिकारियों को समझाए कंटूर ट्रेंच और परकोलेशन टैंक निर्माण के तरीके

*        वन क्षेत्रों में भूजल संवर्धन और जल संरचनाओं के वैज्ञानिक प्रबंधन पर हुआ प्रशिक्षण

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश शासन के वन विभाग पन्ना द्वारा “भूजल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वनों की उत्पादकता बढ़ाने” विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन 7 मई 2026 को किया गया। कार्यशाला का आयोजन पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता स्थित व्याख्यान केन्द्र एवं अजयगढ़ क्षेत्र में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वन क्षेत्रों एवं नदी तटों में भूजल संरक्षण कार्यों की आवश्यकता, जल संरचनाओं के वैज्ञानिक निर्माण, रखरखाव तथा जल संवर्धन संबंधी तकनीकी जानकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान करना रहा।
कार्यशाला के प्रथम दिवस में विषय विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव ने भूजल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जल संरक्षण विशेषज्ञ अनुपम मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” का उल्लेख करते हुए पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों की उपयोगिता बताई तथा जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास प्रभावी एवं दीर्घकालीन बनाए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में बी. आर. फूकन (रिसर्चर) द्वारा “वन क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं की जल गुणवत्ता का आकलन” विषय पर जानकारी दी गई। उन्होंने जल गुणवत्ता परीक्षण की विभिन्न विधियों जैसे सैंपल कलेक्शन, पीएच स्तर जांच आदि के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही वन क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं एवं जलाशयों के प्रभावी प्रबंधन हेतु नियमित मॉनिटरिंग, वेस्ट मैनेजमेंट एवं कम्युनिटी अवेयरनेस प्रोग्राम संचालित करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।
इसी क्रम में सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक रवीन्द्र सिंह ने भूजल संरक्षण हेतु निर्मित की जाने वाली विभिन्न संरचनाओं जैसे कंटूर ट्रेंच, बंड्स एवं परकोलेशन टैंक आदि के निर्माण एवं उपयोगिता के संबंध में जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में वृद्धि की जा सकती है, जिससे वन क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

तालाब पुनर्जीवन के तरीके बताए

कार्यशाला के द्वितीय दिवस में सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र में फील्ड विजिट किया गया। इस दौरान मौके पर निर्मित पारंपरिक तालाबों के पुनर्जीवन (रिजुविनेशन) के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई तथा नए परकोलेशन टैंक एवं तालाब निर्माण संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए। फील्ड भ्रमण के दौरान कंटूर ट्रेंच निर्माण से जुड़े तकनीकी बिंदुओं जैसे भूमि की ढाल, जल प्रवाह की दिशा एवं स्थल चयन पर विशेष ध्यान देने के संबंध में भी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई।

इनकी रही उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक छतरपुर वृत्त नरेश सिंह यादव, डीएफओ दक्षिण पन्ना अनुपम शर्मा, डीएफओ उत्तर पन्ना धीरेंद्र प्रताप सिंह, आईएफएस, उपवनमंडलाधिकारी विश्रामगंज अंशुल तिवारी, उपवनमंडलाधिकारी पन्ना कृष्णा मरावी, एसीएफ प्रशिक्षु प्रभांशु कमल मिश्रा, वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना अजय बाजपेयी, वन परिक्षेत्राधिकारी अजयगढ़ पंकज दुबे, वनपरिक्षेत्राधिकारी धरमपुर वैभव सिंह चंदेल, वनपरिक्षेत्राधिकारी विश्रामगंज नितिन राजौरिया, वनपरिक्षेत्राधिकारी देवेन्द्रनगर शुभम तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।