
भूजल संरक्षण से वनों की उत्पादकता बढ़ाने पर मंथन, पन्ना में दो दिवसीय कार्यशाला संपन्न


कार्यशाला के प्रथम दिवस में विषय विशेषज्ञ एवं सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव ने भूजल संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जल संरक्षण विशेषज्ञ अनुपम मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” का उल्लेख करते हुए पारंपरिक जल संरक्षण पद्धतियों की उपयोगिता बताई तथा जनभागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता से ही जल संरक्षण के प्रयास प्रभावी एवं दीर्घकालीन बनाए जा सकते हैं।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस में सेवानिवृत्त पीसीसीएफ आर. के. श्रीवास्तव द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र में फील्ड विजिट किया गया। इस दौरान मौके पर निर्मित पारंपरिक तालाबों के पुनर्जीवन (रिजुविनेशन) के विभिन्न तरीकों की जानकारी दी गई तथा नए परकोलेशन टैंक एवं तालाब निर्माण संबंधी आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए। फील्ड भ्रमण के दौरान कंटूर ट्रेंच निर्माण से जुड़े तकनीकी बिंदुओं जैसे भूमि की ढाल, जल प्रवाह की दिशा एवं स्थल चयन पर विशेष ध्यान देने के संबंध में भी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक छतरपुर वृत्त नरेश सिंह यादव, डीएफओ दक्षिण पन्ना अनुपम शर्मा, डीएफओ उत्तर पन्ना धीरेंद्र प्रताप सिंह, आईएफएस, उपवनमंडलाधिकारी विश्रामगंज अंशुल तिवारी, उपवनमंडलाधिकारी पन्ना कृष्णा मरावी, एसीएफ प्रशिक्षु प्रभांशु कमल मिश्रा, वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना अजय बाजपेयी, वन परिक्षेत्राधिकारी अजयगढ़ पंकज दुबे, वनपरिक्षेत्राधिकारी धरमपुर वैभव सिंह चंदेल, वनपरिक्षेत्राधिकारी विश्रामगंज नितिन राजौरिया, वनपरिक्षेत्राधिकारी देवेन्द्रनगर शुभम तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।