Home ताजा ख़बरें पत्रकारों का उग्र प्रदर्शन: पुलिस-माफिया गठजोड़ की निकाली अर्थी, ‘एसपी हटाओ-छतरपुर...
प्रदर्शनकारी पत्रकारों का आरोप था कि जिले में सच लिखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। दबंगों, माफिया तत्वों और रसूखदारों के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर हमले कराए जा रहे हैं, फिर उन्हीं पीड़ित पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए पत्रकारों ने कहा कि यदि कलम को डराकर चुप कराया गया, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा।
पत्रकारों का हुजूम पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी की। आरोप है कि काफी देर तक इंतजार के बाद भी पुलिस अधीक्षक बाहर नहीं आए, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच यह सूचना मिली कि मामले से जुड़ा शराब ठेकेदार एसपी कार्यालय के भीतर मौजूद है। इस खबर ने विरोध को और भड़का दिया।इसके बाद पत्रकारों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। शहर की प्रमुख सड़क पर यातायात थम गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में खाकी और माफिया के बीच खतरनाक सांठगांठ ने कानून व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अवैध कारोबार, दबंगई और पत्रकारों पर हमलों के मामलों में कार्रवाई के बजाय संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए गए। पत्रकारों ने कहा कि यदि सत्ता और सिस्टम का इस्तेमाल सच दबाने में होगा, तो जनता का भरोसा टूटेगा।
पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि- पत्रकार राकेश राय पर दर्ज फर्जी प्रकरण तत्काल वापस लिया जाए। पत्रकार पर हमला करने वालों पर हत्या के प्रयास, लूट और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो। संबंधित थाना प्रभारी सुरेन्द्र मरकाम एवं जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो। शराब माफिया और पुलिस संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए। पत्रकारों ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन जिला स्तर से निकलकर प्रदेशव्यापी रूप लेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष है।