भोपाल।(www.radarnews.in) पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने कहा कि मार्च 2023 तक प्रदेश के शत-प्रतिशत ग्रामों को डामरीकृत सड़क मार्ग से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी 3174 ग्रामों को डामरीकृत मार्ग से जोड़ने का कार्य प्रारम्भ हो गया है।
मंत्री श्री पटेल ने कहा प्रदेश में कुल एक लाख 27 हजार 869 किलोमीटर सड़क मार्ग है। इसमें से सर्वाधिक 61 प्रतिशत अर्थात 77,269 किलोमीटर सड़कें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में बनाई गई हैं। उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा 2023 तक ऐसे सभी ग्राम, मजरे-टोलों को डामरीकृत मार्ग से जोड़ा जाएगा, जहाँ न्यूनतम 50 परिवार निवासरत है।

कमलेश्वर पटेल ने कहा कि म.प्र. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क अभिकरण द्वारा लक्ष्य पूर्ति के लिये चरणबद्ध तरीके से प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मार्च 2020 तक सामान्य वर्ग की 500 और जनजाति वर्ग की 250 जनसंख्या वाले ग्रामों को डामरीकृत मार्ग से जोड़ने का लक्ष्य है। सामान्य वर्ग जनसंख्या वाले 350 ग्रामों को दिसम्बर 2020 तक, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में सामान्य वर्ग 500 तथा जनजाति वर्ग की 250 जनसंख्या वाले 622 ग्रामों को दिसम्बर 2020 तथा शेष 1870 ग्रामों को मार्च 2023 तक डामरीकृत मार्गों से जोड़ने का लक्ष्य है।
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शोकसभा तत्पश्चात पत्रकारों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। जिसमें पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और इस तरह की घटनाओं पर शासन-प्रशासन की सहजता के सम्बंध गहन विचार-विमर्श हुआ। शाहगढ़ की घटना पर सभी पत्रकारों ने एक स्वर में गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे भारत के पत्रकारिता इतिहास में दर्ज काला अध्याय बताया। और कहा कि जिस दिन पत्रकार नहीं बचेंगे उस दिन देश में लोकतंत्र नहीं बच पाएगा। इस अवसर वरिष्ठ पत्रकार बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को देखते हुए हमें कहीं अधिक सतर्कता, सजगता और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करने की जरूरत है। हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हम कोई ऐसा काम ना करें जिससे पत्रकार और पत्रकारिता बदनाम हो। हम अपनी हदों को जाने और उसके अंदर रहते हुए जन समस्याओं से लेकर शासन-प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार, अपराध आदि की खबरें प्रकाशित करें। खबर प्रकाशन से पूर्व तथ्यों की अच्छी तरह पड़ताल करना बेहद जरूरी है और उसमें सभी पक्षों की बात को समाहित करें। खबर प्रकाशित करने में जल्दबाजी न कर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबर देना हमारा दायित्व है। कई बार जल्दबाजी में खबरें देने के चक्कर में तथ्यों की आधी-अधूरी पड़ताल पत्रकार और पत्रकारिता दोनों के लिए घातक साबित होती है।









खबर मिल रही है कि इसी प्रकरण में बहुत जल्द सहायक संचालक मड़ला प्रतिभा शुक्ला पर भी कार्यवाही की गाज गिर सकती है। दरअसल पन्ना टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया ने पन्ना बफर रेन्ज की हरसा बीट के टपकनिया क्षेत्र में सागौन लकड़ी कटाई मामले की अपने स्तर पर जाँच कराकर जो रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल को भेजी है उसमें सहायक संचालक मड़ला प्रतिभा शुक्ला पर दायित्व के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। वैसे भी वन बल प्रमुख जे. के. मोहंती पहले ही रेंजर और सहायक संचालक के विरुद्ध कार्यवाही करने का बयान दे चुके हैं। उधर, प्रदेश के वन मंत्री उमंग सिंघार ने इसी प्रकरण में पन्ना टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक व उप संचालक के खिलाफ भी एक्शन लेने की बात कही है।







श्री शर्मा के अनुसार अभ्युदय कार्यक्रम के अंतर्गत जिले भर में त्रिस्तरीय निगरानी दल गठित किए जाएँगे। जिसमें ग्राम स्तरीय, जनपद स्तरीय एंव जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे। इन दलों को कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के तहत बिना किसी पूर्व जानकारी के दूसरे विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी हेतु भेजा जाएगा। निरीक्षण में किसी तरह की औपचारिकता न हो इसलिए संचार एंव सूचना तकनीक से इसे जोड़ते हुये निरीक्षण करते समय का लाइव फोटो और जियो टैगिंग के जरिए निरीक्षण दल की मौके पर उपस्थिति का सत्यापन किया जाएगा। इन दलों की निरीक्षण रिपोर्ट पूर्णतः पेपरलैस अथवा ऑनलाईल होगी। आपने बताया कि निरीक्षण सम्बंधी एक कॉमन प्रपत्र तैयार किया जा रहा है। निरीक्षण करने किस दल को कब और कहाँ जाना है इसकी सूचना संबधित दल के सदस्यों को महज कुछ घण्टे पहले जिला स्तरीय कण्ट्रोल रूम से एसएमएस के माध्यम से प्राप्त होगी। एक बार इस सिस्टम के बनने से प्रशासन का निगरानी तंत्र काफी मजबूत हो जाएगा। इस एडवांस सिस्टम से प्रशासन हर समय जहाँ अर्लट मोड में रहेगा वहीं आगे आने वाले अधिकारियों को भी इससे काफी सुविधा होगी।
पत्रकारों ने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से जिन मुद्दों पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया उनमें मुख्य रूप से- पन्ना की नैसर्गिक सम्पदा जैसे कि नदियों-पहाड़ों और जंगल को माफियाओं से सुरक्षित रखने, ईमानदारी से शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण करते हुए जिन शालाओं-विद्यालयों में अतिशेष शिक्षक हैं, उन्हें शिक्षक विहीन एंव एकल शिक्षकीय शालाओं में पदस्थ कर शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, ग्रामीण अंचल में लोगों को प्राथमिक स्तर की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने, जिला चिकित्सालय एंव आंचलिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रिक्त पड़े चिकित्सकों के पदों को भरने के लिये शासन स्तर पर आवश्यक पहल करने, उद्योग विहीन पन्ना जिले में ईको फ्रैंडली औद्योगिक गतिविधियों की स्थापना हेतु ठोस पहल कर रोजगार का सृजन करने, पन्ना के प्राचीन तालाबों का सीमांकन कराकर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराने, सार्वजनिक भूमियों से अतिक्रमण हटवाने, बंद पड़ी नल-जल योजनाओं को चालू कराने, रेत के अवैध उत्खनन-भण्डारण एंव ओवरलोडिंग पर प्रभावी नकेल कसने, पन्ना जिले को एजुकेशन हब बनाने की दिशा में काम किया जाए।

