जैव विविधता संरक्षण के लिए पेड़ लगाएँ जैविक खेती को अपनाएँ : डीएफओ श्री यादव

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अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर संगोष्ठी को सम्बोधित करते डीएफओ उत्तर वनमण्डल पन्ना नरेश सिंह यादव।

* अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर संगोष्ठी सम्पन्न

पन्ना। (www.radarnews.in) उत्तर वनमण्डल पन्ना में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के उपलक्ष्य पर गुरुवार 22 मई 2019 को टाईगर रिजर्व पन्ना के सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वनमण्डलाधिकारी उत्तर पन्ना नरेश सिंह यादव, सीनियर सांइटिस्ट कृषि विज्ञान केन्द्र बी.एस. किरार, उपवनमण्डलाधिकारी विश्रामगंज नरेन्द्र सिंह द्वारा किया गया। वनमण्डलाधिकारी उत्तर पन्ना नरेश सिंह यादव ने जैव विविधता के संबंध में बताया कि भारत विश्व के 12 मेगा विविधतापूर्ण देशों में से एक है, दुनिया में 2.5 प्रतिशत भू-क्षेत्रवाला भारत वैश्विक प्रजातियों में से 7.5 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। श्री यादव द्वारा जैव विविधता अधिनियम एवं नियम व जैव विविधता के कार्य में शामिल संस्था एवं कर्मचारियों-अधिकारियों को शासन द्वारा पुरस्कार के संबंध में भी बताया गया। उन्होंने बताया कि भारत एक ऐसा देश है जहां पर पूरे विश्व में पाए जाने वाले 25 बायोस्फीयर रिजर्व में से 4 केवल भारत में है। जैव विविधता का अस्तित्व बचाये रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पेड़ लगाने व जैविक कृषि को महत्व देने संबंधी अपने विचार व्यक्त किये।

रसायनों के उपयोग से हो रहा नुकसान

कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के सीनियर सांइटिस्ट बी.एस. किरार ने जैव विविधता के संबंध में बताया कि किसानों को कृषि जैव विविधता में कृषि की बहुत सी ऐसी प्रजातियां है जो लुप्त हो रहीं है उनको सुरक्षित रखकर उनका संवर्द्धन किया जाना चाहिए। लोगों को आयुर्वेद की तरफ प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। कृषि में रसायनों का प्रयोग कम करके जैव उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ाना चाहिए जिससे कि जैव विविधता पर विपरीत प्रभाव न पड़े। क्योंकि रसायनों के अत्याधिक बढ़ते उपयोग से कृषि से संबंधित पुरानी प्रजातियों में गिरावट आ रही व मृदा की उत्पादक क्षमता भी क्षींण हो रही है। जिससे जैव विवधता का विनाश हो रहा है व मानव शरीर में अनेक बीमारियों की उत्पत्ति का कारण भी बन रहा है। पर्यावरण में भी प्रदूषण का कारण बन रहा है। संगोष्ठी में सभागार में उपस्थित हुए किसानों को यह भी बताया कि जैव विविधता और कृषि में किस प्रकार सामंजस्य बनाया जाये व उन्होंने फसल कटाई के उपरांत खेत में स्थित नरवाई को जलाये जाने से मृदा में स्थित सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पेड़ों से फलों को परिपक्व होने से पूर्व न तोड़ा जाये जिससे जैव विविधता प्रभावित न हो ।

वनों को आग और कटाई से बचाएँ

उप वनमण्डलाधिकारी विश्रामगंज नरेन्द्र सिंह परिहार ने जैव विविधता के संबंध में बताया कि हर गांव में तालाब खुदवाए जाए और तालाबों में मछलीयों को लाया जाए जिससे कि तालाब के अंदर और मृदा में सूक्ष्मजीव विकसित हों। उनके द्वारा यह भी बताया गया कि जंगलों में लगने वाली आग पर रोकथाम लगाया जाए क्योंकि आग लगने से बहुत से सूक्ष्म जीव, कीड़े-मकोड़े मर जाते हैं जिससे जैव विविधता बाधित होती है। श्री सिंह ने यह भी बताया कि हर आदमी को वृक्षारोपण करना चाहिए और पेड़ों की कटाई पर रोकथाम लगाई जाये जिससे जैव विविधता प्रभावित न हो। कार्यक्रम में शासकीय अधिवक्ता श्री निगम ने भी जैव विविधता अधिनियम से संबंधित धाराओं के के बारे में अवगत कराया। संगोष्ठी कार्यक्रम में पन्ना उत्तर पन्ना परिक्षेत्राधिकारी, परिक्षेत्र सहायक, ग्राम वन समिति के सदस्य एवं कृषकों ने भी भाग लिया और जैव विविधता के संबंध में चर्चा की।