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विश्वासघात : दोस्त की बहन से मोबाइल फोन पर बातें कर प्रेमजाल में फंसाया, सूरत ले जाकर कई दिनों तक किया यौन शोषण

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सांकेतिक फोटो।

* विवाह का झांसा देकर शादीशुदा युवक ने नाबालिग को हवश का शिकार बनाया

* दो माह बाद वापिस घर लौटी बलात्कार पीड़िता ने पुलिस थाना में दर्ज कराई रिपोर्ट

पन्ना। (www.radarnews.in) वर्तमान में बच्चियों और युवतियों को सबसे ज्यादा खतरा अपने परचितों से ही है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े तो यही कहते है। कई बार हम जिन पर भरोसा करते हैं वही लोग इसका गलत फायदा उठाते हुए विश्वासघात कर अपने घिनौने कृत्यों से न सिर्फ पवित्र रिश्तों को कलंकित करते हैं बल्कि सभ्य समाज को भी शर्मसार कर देते है। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां के बृजपुर थाना के ग्राम उमरी की एक नाबालिग युवती को उसके भाई के दोस्त ने मोबाईल फोन पर बातें कर पहले तो अपने प्रेमजाल में फंसाया और फिर शादी करने का झांसा देकर उसे घर से भागकर सूरत ले गया।
जहां उसने नाबालिग युवती को कई दिनों तक अपनी हवश का शिकार बनाया। पूर्व से शादीशुदा कामांध युवक नाबालिग के जिस्म और उसकी भावनाओं के साथ खेलता रहा। पर जब उसकी हकीकत का पता चला तो पीड़िता किसी तरह उसके चंगुल से भागकर वापिस अपने घर लौट आई। नाबालिग ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाते हुए यौन शोषण मामले की रिपोर्ट बृजपुर थाना में दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी सुजीत मिस्त्री पुत्र सुखलाल मिस्त्री 26 वर्ष निवासी ग्राम कुंजवन थाना पन्ना के खिलाफ आईपीसी की धारा 363, 366, 376 एवं पॉस्को एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया है।

इस तरह शुरू हुई बातें

सांकेतिक चित्र।
ग्राम उमरी निवासी हर्षिता 17 वर्ष (परिवर्तित नाम) का भाई सौरभ (परिवर्तित नाम) सूरत में काम करता था जहां उसकी मुलाक़ात पन्ना जिले के कुंजवन ग्राम निवासी सुजीत मिस्त्री पुत्र सुखलाल मिस्त्री 26 वर्ष से हुई। कुछ ही दिनों में दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। सौरभ ने अपने परिजनों का हाल-चाल जानने के लिए दोस्त सुजीत मिस्त्री के मोबाइल फोन से एक-दो बार अपने घर पर कॉल किया। जिसे उसकी छोटी बहन हर्षिता के द्वारा रिसीव किया गया। इस तरह सुजीत और हर्षिता के पास एक-दूसरे का मोबाईल नंबर आ गया और उनके बीच बातें होने लगीं।
सुजीत ने दोस्त सौरभ के साथ विश्वासघात करते हुए बड़ी ही चालाकी के साथ उसकी बहन हर्षिता को मोबाईल फोन पर ही अपने प्रेमजाल में फंसा लिया। पूर्व से शादीशुदा सुजीत एक बच्चे का पिता है। कुछ समय पूर्व उसकी पत्नी का देहांत हो चुका है। लेकिन कथित तौर वह इन बातों को छिपाकर हर्षिता (परिवर्तित नाम) को विवाह का झांसा देता रहा। सौरभ और उसके परिजन इससे पूरी तरह बेखबर रहे। इस बीच सुजीत 3 सितंबर 2019 को हर्षिता को अगवा कर अपने साथ सूरत ले गया। जहां उसने कई दिनों तक नाबालिग को अपनी हवश का शिकार बनाया।

आरोपी गिरफ्तारी में जुटी पुलिस

सांकेतिक फोटो।
इधर, जवान बेटी के अचानक गायब होने से परिजन काफी परेशान हो गए। रिश्तेदारी में खोजबीन करने के बाद भी जब हर्षिता का कोई सुराग नहीं लगा तो पुलिस को सूचना दी गई। आखिरकार कुछ समय बाद पीड़ित परिजनों को जब पता चला कि उनकी बेटी को किसने अगवा किया है तो वे आरोपी के बारे में जानकर हैरान रह गए। जल्द ही हर्षिता को सुजीत की हकीकत पता चल गई। शादी के नाम पर मिले धोखे और शारीरिक शोषण के चलते खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही नाबालिग मौका पाकर सुजीत के चंगुल से भागकर पन्ना आ गई। जिसे मंगलवार 3 दिसंबर को पन्ना के बस स्टैण्ड से बृजपुर थाना पुलिस द्वारा दस्तयाब किया गया। युवती के द्वारा बताई गई अपनी आपबीती के आधार पर अगले दिन बुधवार को उसका पन्ना जिला चिकित्सालय में मेडीकल परीक्षण कराया गया। इसके उपरांत उसे परिजनों को सौंपा गया। इस मामले में सुजीत के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर बृजपुर थाना पुलिस सरगर्मी से उसकी धरपकड़ के प्रयास में जुटी है।

अच्छी खबर : पन्ना के तालाबों को भरेगा किलकिला फीडर, प्राचीन नहर को पुनर्जीवित करने शुरू हुआ बहुप्रतीक्षित खुदाई कार्य

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किलकिला फीडर नहर की खुदाई के लिए स्थल पर चूने की लाईन डलवाने का कार्य करवाते अधिकारीगण।

* नगर के तीन तालाबों लोपकपाल सागर, धरम सागर और सिंह सागर की बुझेगी प्यास

* पेयजल समस्या का होगा समाधान, किसानों को सिंचाई के लिए मिलेगा पर्याप्त पानी

* किलकिला फीडर पुनर्जीवन के लिए भागीरथ बने पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) गर्मी के मौसम में हर साल पेयजल के संकट से जूझते पन्ना नगर के लोगों को इस समस्या से इस निजात दिलाने और आसपास के गांवों के किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में सार्थक प्रयास शुरू हो चुके हैं। इसके लिए किलकिला फीडर नहर को पुनर्जीवित करने की योजना तैयार की गई है। यह नहर पन्ना के तीन बड़े तालाबों को वर्षा जल से भरने का काम करेगी। प्रथम चरण में नहर का सर्वेक्षण एवं सीमांकन कार्य पूरा किया जा चुका है। गुरुवार 5 दिसम्बर से नहर की खुदाई का बहुप्रतीक्षित कार्य भी शुरू हो गया है।
किलकिला फीडर नहर की खुदाई एवं जंगल सफाई का निरिक्षण करते जल संसाधन विभाग के तकनीकी अधिकारी।
मालूम होकि अल्प वर्षा होने की स्थिति में शहर के तालाब अपनी पूर्ण क्षमता के अनुरूप भर नहीं पाते हैं जिससे गर्मियों के समय लोगों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ता है। वहीं इस संकट के मद्देनजर पेयजल के लिए तालाबों का पानी आरक्षित किए जाने का खामियाजा पन्ना के समीपी गांवों के किसानों को भुगतना पड़ता है। खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध न होने से इनकी फसलें प्रभावित होतीं है। लम्बे समय से इस समस्या से जूझ रहे किसानों में गहरा आक्रोश व असंतोष व्याप्त है। पेयजल और खेती के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कैसे हो ? पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने इसके लिए आमजन से सुझाव लिए थे। नगर में पेयजल की सप्लाई फिलहाल लोकपाल सागर, निरपत सागर और धरम सागर तालाब से होती है। पूर्व में लोकपाल सागर, धरम सागर व सिंह सागर तालाब को बारिश के मौसम में लबालब भरने के लिए किलकिला फीडर नहर का उपयोग होता रहा है।
विशाल झीलनुमा लोकपाल सागर तालाब अल्प जल भराव की स्थिति को दिखाता चित्र। फाइल फोटो
जल संसाधन विभाग के द्वारा वर्ष 1970 में बनाई गई इस नहर के माध्यम से बारिश का पानी इन तालाबों में पहुँचता था। फलस्वरूप अल्प वर्षा होने की स्थिति में भी तालाब आसानी से भर जाते थे। वर्ष 1984 तक यह व्यवस्था बेहतर तरीके से चलती रही। लेकिन बाद में नहर के दोनों किनारों पर तेजी से अतिक्रमण होने तथा पहाड़ किनारे स्थित होने के कारण नहर में बारिश के पानी के साथ पहाड़ों का मलबा बहकर आने से होने वाले पुराव के कारण इसका अस्तित्व ही मिटता चला गया। जल संसाधन विभाग और नगर पालिका परिषद के द्वारा बरती गई घोर उदासीनता का दुष्परिणाम यह हुआ कि किलकिला फीडर नहर के माध्यम से बारिश का पानी तालाबों तक पहुंचना पूरी तरह बंद हो गया। परिणामस्वरूप अल्प वर्षा होने की स्थिति में तीनों प्रमुख तालाब खाली रहते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ता है।
पन्ना के तालाबों को भरने वाली किलकिला फीडर नहर का कुछ जगह वजूद शेष है जिसकी बदहाली को बयां करती तस्वीर।
ऐसी स्थिति में लोकपाल सागर तालाब का पानी पेयजल के लिए सुरक्षित किए जाने से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। जिसका नुकसान उन्हें फसल बर्बाद होने अथवा उत्पादन प्रभावित होने के रूप में उठाना पड़ता है। क्षेत्रीय किसान इस समस्या के स्थाई समाधान की मांग को लेकर पूर्व में कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं। समस्या की गंभीरता को देखते हुए पन्ना कर्मवीर शर्मा ने नगरवासियों के सुझाव पर अमल करते हुए किलकिला फीडर को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर के निर्देशानुसार सम्बंधित विभाग के अधिकारियों ने इस पर कार्य करना शुरू कर दिया है। नगर के धरम सागर एवं लोकपाल सागर तालाब में बरसात का पानी संचयन करने के लिए किलकिला फीडर नहर का कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। प्रथम चरण में सीमांकन कार्य पूर्ण करने के उपरांत कार्य प्रारंभ करने के लिए कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना बी.एल. दादौरिया, तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी एवं नगरपालिका सीएमओ ओ. पी. दुबे के द्वारा खुदाई कार्य के लिए चूने की लाईन डलवाई गई। गुरुवार 5 दिसम्बर से नहर की खुदाई एवं साफ़-सफाई का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसकी शुरुआत पन्ना के काष्ठागार डिपो के समीप से की गई है।

बेहद चुनौतीपूर्ण है कार्य

किलकिला फीडर नहर का सर्वेक्षण कार्य करते हुए सर्वेयर जसवंत सिंह तोमर एवं उनकी टीम।
किलकिला फीडर को पुनर्जीवित कर पन्ना के तालाबोंको भरने की योजना का धरातल पर क्रियान्वयन आसान नहीं है। दरअसल इसकी राह में सबसे बड़ी बाधा नहर के दोनों किनारों पर और बीचों-बीच में जबरदश्त अतिक्रमण होना है। शहरी क्षेत्र में नहर के किनारे-किनारे आबाद हुई झुग्गी बस्ती इसे पूरी तरह निगल चुकी है। यहां के कच्चे-पक्के अतिक्रमण को हटाना जिला प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। यह कार्य कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कई स्थानों पर नहर के बीचों-बीच विद्युत पोल खड़े है साथ ही पानी की पाइप लाइन निकली है। इनकी शिफ्टिंग करना और अतिक्रमण हटाने के पश्चात आवागमन के लिए नहर के दोनों किनारों को जोड़ने वाले रास्तों का निर्माण करना आसान नहीं होगा।
पन्ना के धरम सागर तालाब का गर्मी के मौसम में लिया गया चित्र।
अभी तो शहरी क्षेत्र में अधिकांश जगह नहर का पुराव होने से इसके दोनों तरफ रहने वाले लोगों ने अपनी सुविधनुसार आवागमन के लिए कई रास्ते बना रखे है। बाद में इन्हें सीमित करना काफी उलझन भरा काम साबित हो सकता है। इसके अलावा झुग्गी बस्ती के गंदे पानी को नहर में जाने से रोकने के लिए भी मशक्क्त करनी पड़ेगी। मगर अच्छी बात यह है कि जिले के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर कर्मवीर शर्मा इस कार्य के लिए भागीरथ बनें है। उन्होंने किलकिला फीडर नहर को पुनर्जीवित कर इसके माध्यम से पन्ना के प्राचीन तालाबों को भरने का बीड़ा उठाया है। वर्षा जल के बेहतर उपयोग एवं जल संकट के समाधान से जुड़ी जिला प्रशासन की यह पहल सराहनीय है। पन्ना के नागरिकों का भी इसे पूर्ण समर्थन मिल रहा है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि आमजन सक्रिय सहयोग से इस पुनीत कार्य की राह में आने वाली समस्त बाधाएं दूर हो जाएँगी।

कई दशकों तक नहीं होगी किल्लत

लोकपाल सागर तालाब की सिंचाई क्षमता वैसे तो 520 हैक्टेयर है लेकिन पिछले कई सालों से तालाब में पूर्ण क्षमता तक जल भराव ना होने के कारण महज 220 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस तालाब की जल भराव क्षमता 6.20 मिलियन क्यूबिक मीटर है। लेकिन इस झीलनुमा विशाल तालाब को भरने वाली किलकिला फीडर नहर के वर्ष 1984 के बाद बंद होने के बाद यह तालाब अपनी पूर्ण क्षमता तक नहीं भर सका। शहर के नजदीक स्थित होने से लोकपाल सागर तालाब से पन्ना में पेयजल की आपूर्ति के लिए 01 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी आरक्षित रहता है। इसलिए अल्प वर्षा की स्थिति में तालाब में कम भराव होने से जहां पेयजल संकट से लोगों को जूझना पड़ता है वहीं किसानों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पाता है।
बी.एल. दादौरिया, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पन्ना।
इन विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग के दूरदर्शी तकनीकी अधिकारियों ने वर्ष 1970 में किलकिला फीडर नहर का निर्माण कराया था। ताकि अल्प बारिश में भी पन्ना के तीन तालाबों क्रमश: धरम सागर, सिंह सागर और लोकपाल सागर तालाब को लबालब भरा जा सके। लेकिन दुर्भाग्य से यह नहर महज डेढ़ दशक के अंदर ही बंद हो गई। इसके पश्चात तेजी से फैले अतिक्रमण के कारण इसका वजूद ही काफी हद तक मिट गया। जिसका दंश पन्ना के लोग और आसपास के गांवों के किसान जल संकट के रूप में झेल रहे हैं। बहरहाल कलेक्टर कर्मवीर शर्मा की विशेष पहल के फलस्वरूप किलकिला फीडर नहर को पुनर्जीवित करने का बहुप्रतीक्षित कार्य शुरू होने से लोगों में आगामी कई दशकों तक के लिए पानी की किल्लत का समाधान होने की आस जाग उठी है।
किलकिला फीडर नहर की खुदाई की खुदाई करती जेसीबी मशीन।

फैक्ट फाइल –

किलकिला फीडर का जलग्रहण क्षेत्र – 7.75 वर्ग किलोमीटर

किलकिला फीडर नहर की लम्बाई – 6 किलोमीटर

लोकपाल सागर तालाब का निर्माण वर्ष – 1902

जल संसाधन विभाग ने नहर का निर्माण कराया वर्ष – 1970

नहर से तालाबों में पानी पहुंचना बंद हुआ वर्ष – 1984 से

लोकपाल सागर तालाब की भराव क्षमता – 6.20 मिलियन क्यूबिक मीटर

लोकपाल सागर तालाब की सिंचाई क्षमता – 520 हैक्टेयर लगभग

वर्तमान में हो रही कुल सिंचाई – 220 हैक्टेयर लगभग

लोकपाल सागर से पेयजल के आरक्षित पानी – 01 मिलियन क्यूबिक मीटर

इनका कहना है –

“किलकिला फीडर नहर को पुनर्जीवित करने के लिए सर्वे एवं सीमांकन का कार्य पूरा हो चुका है। इसकी विस्तृत कार्य योजना तैयार कर शासन को स्वीकृति हेतु भेजी जा रही है। इस नहर का निर्माण होने से लोकपाल सागर तालब से होने वाली सिंचाई का रकबा बढ़ जाएगा साथ ही पन्ना शहर के लिए पर्याप्त मात्रा में पेयजल भी उपलब्ध होगा।”

– बी.एल. दादौरिया, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग पन्ना। 

शराबी पति की हरकतों से परेशान महिला ने बुलाए शूटर, जानिए आगे फिर क्या हुआ !

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पन्ना कोतवाली थाना पुलिस टीम की अभिरक्षा में कुख्यात बदमाश।

* पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर तीन हथियारबंद बदमाशों को किया गिरफ्तार

* पन्ना कोतवाली थाना के समीपी ग्राम पुरुषोत्तमपुर की घटना

पन्ना। (www.radarnews.in) शराबी पति की हरकतों और प्रताड़ना से एक नवविवाहिता इतनी तंग आ गई कि उसने अपने मायके वालों को सूचना देकर शूटर बुला लिए। हथियारबंद बदमाश किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे पाते कि उसके पहले ही पन्ना कोतवाली थाना पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए घेराबंदी कर तीनों शातिर बदमाशों को धरदबोंचा। यह घटना पन्ना की सीमा से सटे ग्राम पुरुषोत्तमपुर की है। रविवार को पुलिस ने जब वहां से मोटरसाइकिल सवार तीन हथियारबंद बदमाशों को पकड़ा तो आसपास के इलाके में सनसनी फ़ैल गई।
जन चर्चाओं के अनुसार पुरुषोत्तमपुर निवासी एक ठेकेदार का शराबी पुत्र अपनी पत्नी को विवाह के बाद से ही काफी परेशान कर रहा है। दामाद के कृत्यों से नवविवाहिता के परिजन भलीभाँति वाकिफ थे। इसलिए पति की प्रतड़ना से तंग आ चुकी युवती ने जब अपने मायके में सूचना दी तो उसका मामा कथित तौर पर दामाद को जान से मारने की नियत से अपने दो दोस्तों को लेकर पुरुषोत्तमपुर आ गया। मगर तभी कोतवाली थांना पन्ना के निरीक्षक हरी सिंह ठाकुर को मुखबिर के जरिए बदमाशों के संबंध पता चल गया। हथियारबंद बदमाश किसी गंभीर घटना को अंजाम दे पाते कि उसके पहले ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर तीनों अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान धीरेन्द्र सिंह परमार पिता जगत सिंह परमार 29 वर्ष एवं वीरू उर्फ दिग्विजय सिंह ठाकुर पिता मुलायम सिंह ठाकुर 25 वर्ष दोनों निवासी ग्राम पटनाकला थाना सिमरिया तथा राहुल यादव पिता लक्ष्मण यादव 25 वर्ष निवासी ग्राम गहरा थाना कोतवाली पन्ना के रूप में हुई है। तलाशी लेने पर तीनों बदमाशों के कब्जे से एक-एक देशी कट्टा और जिंदा कारतूस बरामद हुए है। पुलिस ने तीनों बदमाशों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया। यह घटनाक्रम समूचे पुरुषोत्तमपुर गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने अधिकारिक तौर पर इस कहानी की पुष्टि नहीं की है।

कई साल से फरार था कुख्यात बदमाश

पन्ना कोतवाली थाना पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तीनों बदमाशों की गिरफ्तारी के संबंध में जो जानकारी दी है उसके अनुसार पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी द्वारा जिले में अवैध शास्त्रों की धरपकड़ हेतु चलाये जा रहे विशेष अभियान के तहत कार्यवाही करने हेतु सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिये गये थे। इस दौरान रविवार 1 दिसम्बर को मुखबिर से सूचना मिली कि तीन व्यक्ति कट्टा-कारतूस लिए सफ़ेद रंग की अपाचे मोटरसाइकिल से किसी गंभीर घटना को अंजाम देने की फिराक में पहाड़ीखेरा रोड किनारे जनकपुर में निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन के पास खड़े है। निरीक्षक हरी सिंह ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमों ने इलाके की घेराबंदी कर तीनों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी शिनाख्त धीरेन्द्र सिंह परमार एवं वीरू उर्फ दिग्विजय सिंह ठाकुर दोनों निवासी ग्राम पटनाकला थाना सिमरिया तथा राहुल यादव निवासी ग्राम गहरा थाना कोतवाली पन्ना के रूप में हुई है। तलाशी लेने पर पुलिस ने इनके पास से एक-एक 315 बोर का कट्टा-कारतूस बरामद किया है। इसके अलावा अपाचे मोटर साइकिल भी जब्त की है।
उल्लेखनीय है कि आरोपी धीरेन्द्र सिंह परमार पिता जगत सिंह परमार 29 वर्ष निवासी पटना कलाथाना सिमरिया का पूर्व से ही आपाराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। इसके विरुद्ध जिले के पुलिस थाना सिमरिया मे कई प्रकरण दर्ज है। पुलिस थाना सिमरिया के प्रकरण क्रमांक 15/14 धारा 307, 325, 323, 294, 506, 34 ताहि में धीरेन्द्र काफी समय से फरार चल रहा था। एडीजे न्यायालय पवई द्वारा आरोपी के विरुद्ध गैरम्यादी स्थाई वारंट जारी किया गया था। वहीं पुलिस अधीक्षक पन्ना ने धीरेन्द्र की गिरफ्तारी हेतु नगद ईनाम घोषित किया था। इसका साथी राहुल यादव पिता लक्ष्मण यादव 25 वर्ष निवासी ग्राम गहरा थाना कोतवाली पन्ना का कुख्यात आरोपी है। राहुल के विरुद्ध थाना कोतवाली पन्ना मे पूर्व से विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध है।

पुरुष्कृत होगी पुलिस टीम

हरी सिंह ठाकुर, निरीक्षक, कोतवाली थाना पन्ना।
कुख्यात बदमाशों की धरपकड़ की कार्यवाही में पन्ना कोतवाली थाना निरीक्षक हरी सिंह ठाकुर, उप निरीक्षक रवि सिंह जादौन, एमएल यादव, सहायक उप निरीक्षक एसडी सिंह, प्रधान आरक्षक रामकृष्ण पाण्डेय, शिवेन्द्र सिंह, प्रेम लाल पाण्डेय, आरक्षक राजीव मिश्रा, ए. आर. ब्रह्मदत्त शुक्ला, लक्ष्मी यादव, राजेश सिंह, बीरेन्द्र अहिरवार, रामपाल, प्रदीप पाण्डेय, दीप प्रकाश, पुष्पेन्द्र मौर्य, चालक रवि खरे, सुनील मिश्रा एवं सैनिक मुन्नालाल की सराहनीय भूमिका रही। इनके विशेष योगदान को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी ने नकद ईनाम से पुलिस टीम को पुरुष्कृत करने की घोषणा की है।

शासन की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में जनसहयोग आवश्यक : कलेक्टर

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* खाद्य असुरक्षा एवं कुपोषण से मुक्ति जनयात्रा सम्पन्न

पन्ना। (www.radarnews.in) खाद्य असुरक्षा और कुपोषण से मुक्ति के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 02 अक्टूबर से प्रारंभ जनयात्रा का समापन पुराना पन्ना ग्राम पंचायत में किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में शासकीय अमले के साथ आम आदमी की जनभागीदारी होना आवश्यक है। कलेक्टर श्री शर्मा ने उपस्थितों को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को आजाद कराने के लिए एक जन आंदोलन चलाया था। इस जन आंदोलन से देश को आजादी मिली थी। इसी तरह शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में जनभागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कुपोषित बच्चों को मिला नवजीवन

श्री शर्मा ने कहा कि जिले से कुपोषण मिटाने के लिए संजीवनी कार्यक्रम का संचालन किया गया। इस कार्यक्रम में शासकीय अमले के साथ जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं जनसहयोग से इसे संचालित कर जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया गया। इस अभियान के तहत जिले के 2827 अतिकुपोषित बच्चों को गोद देने का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। इन बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार प्रारंभ हो गया है। जिले से कुपोषण को मिटाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर क्रियान्वयन प्रारंभ कर दिया गया है। जिससे इन बच्चों को नवजीवन प्रदान कर सर्वांगीण विकास का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी ट्रस्ट द्वारा जनयात्रा के दौरान जो अनुभव प्राप्त किए हैं और उनके द्वारा दिए गए सुझावों पर कार्यवाही की जाएगी।

संजीवनी अभिभावक बन संवारें बचपन

कलेक्टर ने अपील करते हुए कहा कि यह एक समाज कल्याण का पुनीत कार्य है। इस कार्य में सहभागी बनकर अपने-अपने क्षेत्र के आंगनबाडी केन्द्रों में अतिकुपोषित एवं कुपोषित बच्चों को संजीवनी अभियान के तहत संजीवनी अभिभावक के रूप में गोद लेकर कुपोषण से जिले को मुक्ति दिलाने का कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संजीवनी अभिभावक को बच्चों के परिवारजनों को बच्चे की देखरेख के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चे का स्वास्थ्य परीक्षण कराना, अतिरिक्त पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराना, परिवार को स्वच्छता एवं उचित खानपान की आदतों के लिए प्रोत्साहित करें। परिवार को आर्थिक रूप से सुदृढ बनाने के लिए उन्हें शासकीय योजनाओं को पात्रता अनुसार लाभ दिलाने के साथ-साथ अन्य आवश्यक सहयोग करना चाहिए। जिससे पन्ना जिले को कुपोषण से मुक्ति दिलाई जा सके। उन्होंने कहा कि जिले में पृथ्वी ट्रस्ट द्वारा इस पुनीत कार्य के लिए जो जनयात्रा प्रारंभ की गयी है उसके लिए पृथ्वी ट्रस्ट के पदाधिकारी साधूवाद के पात्र है। मैं उनसे अपेक्षा करता हूँ कि इस जनयात्रा को निरंतर जारी रखें। जिससे समाज में जागरूकता पैदा की जा सके।

पूरक पोषण आहार के पैकेट वितरित

इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अशोक चतुर्वेदी ने सम्बोधित करते हुए कलेक्टर श्री शर्मा द्वारा जिले में किए गए नवाचारों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जिला महिला एवं बाल विकास के कार्यक्रम अधिकारी उदल सिंह एवं ग्रामीण परियोजना अधिकारी अशोक कुमार द्वारा सम्बोधित किया गया। इस अवसर पर इसी तरह की जनयात्रा निकालने वाले रीवा से रामनरेश यादव, छतरपुर से विनोद भारती, सतना के आनन्द श्रीवास ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में पत्रकार मनीष मिश्रा एवं नईम खान द्वारा सम्बोधित करते हुए आयोजित जनयात्रा की सराहना की गयी। इस अवसर पर कुपोषित परिवार के अभिभावकों को पूरक पोषण आहार के पैकेट वितरित किए गए।

यात्रा ने बढ़ाई जन जागरूकता

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर पृथ्वी ट्रस्ट के प्रमुख यूसुफ बेग द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सतत विकास के लक्ष्य 2.2 एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के प्रावधानों पर लोगों को जागरूक करना है। यात्रा के दौरान जिले के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर बैठकें आयोजित कर 50 हजार लोगों से सम्पर्क स्थापित कर उनमें जागरूकता बढाने का कार्य किया गया। जिससे जिले में कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्युदर को समाप्त किया जा सके। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, पत्रकार, जिला अधिकारी, आंगनबाडी कार्यकर्ता एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। अंत में समाजसेवी ज्ञानेन्द्र तिवारी ने सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट कर कार्यक्रम का समापन किया।

“मेरा भारत-स्वर्णिम भारत” अखिल भारतीय प्रदर्शनी बस आध्यात्मिक मूल्यों व चरित्र निर्माण के प्रति करेगी प्रोत्साहित

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* पन्ना जिले के स्कूल-कॉलेजों में 2 एवं 3 दिसम्बर को पहुँचेगी प्रदर्शनी बस

* सोमवार 2 दिसम्बर को पन्ना के संकल्प गार्डन में होंगे आध्यात्मिक प्रवचन

पन्ना।(www.radarnews.in) मूल्य निष्ठ समाज की स्थापना कर भारत को सच्चे अर्थों में स्वर्णिम भारत बनाने के लिए कटिबद्ध प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के द्वारा ’’मेरा भारत-स्वर्णिम भारत’’ विषय को लेकर अखिल भारतीय प्रदर्शनी बस अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत यह प्रदर्शनी बस पन्ना जिले के दो दिवसीय भ्रमण पर आ रही है। सोमवार 2 दिसम्बर एवं मंगलवार 3 दिसम्बर को अखिल भारतीय प्रदर्शनी बस जिले के विभिन्न स्कूलों, काॅलेजों, भीड़-भाड़ वाले सार्वजानिक स्थानों में परिभ्रमण करेगी।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विद्यालय एवं राजयोग प्रशिक्षण केन्द्र पन्ना की प्रमुख बीके सीता बहिन जी ने इस अभियान के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि स्वर्णिम भारत की नवरचना हेतु युवाओं से आह्वान करने एक सुन्दर सजी-सजायी प्रदर्शनी बस यात्रा पन्ना नगर में पहुंच रही है। जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्य एवं चरित्र निर्माण के लिए जन-जन को प्रोत्साहित करना है। पन्ना में इस प्रदर्शनी बस के पहुँचने सोमवार 2 दिसम्बर को संकल्प गार्डन में प्रदर्शनी बस यात्रियों का भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके पश्चात सायंकाल 5 से 7 बजे तक ब्रम्हाकुमारी बहिनों के आध्यात्मिक प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन होगा। बीके सीता बहिन जी पन्ना नगर एवं जिले वासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस आध्यात्मिक कार्यक्रम का लाभ उठाने की अपील की है।

खाद्य असुरक्षा एवं कुपोषण से मुक्ति की जन यात्रा का समापन कल, यात्रा से निकले मुद्दों को समुदाय और प्रशासन के साथ करेंगे साझा

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खाद्य असुरक्षा एवं कुपोषण से मुक्ति की जन यात्रा का फाइल फोटो।

* कलेक्टर के मुख्य आतिथ्य में पुराना पन्ना में होगा कार्यक्रम का आयोजन

पन्ना। (www.radarnews.in) स्वयंसेवी संस्था पृथ्वी ट्रस्ट द्वारा जिला प्रशासन एवं विकास संवाद भोपाल के सहयोग से पन्ना जनपद की 14ग्राम पंचायतों के 30 गाँवों में गांधी जी की 150 वीं जयन्ती 2 अक्टूबर 2019 से 20 नवम्बर 2019 तक “खाद्य असुरक्षा एवं कुपोषण से मुक्ति की जन यात्रा” निकाली गई थी। जिसमें सतत विकास लक्ष्य के गोल क्रमांक 2.2 के भुखमरी एवं सभी प्रकार के कुपोषण को समाप्त करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा क़ानून 2013 में निहित चार हकदारी योजनाओं सार्वजनिक वितरण प्रणाली से खाद्यान, मध्यान भोजन, आईसीडीएस सेवाओं से आँगनवाडियों में पोषण आहार वितरण एवं प्रधानमंत्री मातृत्व योजनाओं के क्रियान्वयन तथा सामुदायिक प्रबंधन को मजबूत करने के लिए 50 दिन यात्रा के माध्यम से जन जागरूकता अभियान चलाया गया।
खाद्य असुरक्षा एवं कुपोषण से मुक्ति की जन यात्रा का फाइल फोटो।
पृथ्वी ट्रस्ट के प्रमुख समाजसेवी युसूफ बेग ने जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा का समापन पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के मुख्य आतिथ्य में रविवार 1 दिसम्बर को ग्राम पंचायत पुराना पन्ना के प्रांगण में दोपहर 11 बजे आयोजित किया जा गया है। कार्यक्रम में महिला बाल विकास विभाग,खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग, जिला शिक्षा केंद्र, स्वास्थय विभाग की सहभागिता होगी | कार्यक्रम में जन समुदाय, आंगनवाडी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, राशन विक्रेता,पीसीओ, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक की सहभागिता रहेगी। इस समापन कार्यक्रम में यात्रा से निकले मुद्दों को समुदाय एवं जिला प्रशासन के साथी साझा किया जाएगा। जिससे सामुदायिक प्रबंधन मजबूत हो सके और अंतिम छोर तक के व्यक्ति की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होकर कुपोषण को समाप्त किया जा सके।

शक्कर से तीस गुना मीठी सूखी स्टीविया की पत्ती को मार्केटिंग के लिए भेजा गया राजस्थान

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* उद्यानिकी विभाग के प्रोत्साहन से स्टीविया की खेती कर रहे जिले के किसान

* अन्य किसानों से भी खरीदी जाएगी स्टीविया की पत्ती

पन्ना।(www.radarnews.in) जिले के ग्राम गुठला प्रतापपुर विकास खण्ड अजयगढ के कृषक रामलगन पाल पिता चेहनूपाल को सहायक संचालक उद्यान जिला पन्ना द्वारा स्टीविया पौध रोपण लगाने हेतु प्रोत्साहित किया। कृषक रामलगन पाल द्वारा 0.25 हेक्टेयर में स्टीविया पौध रोपण किया गया। जिसमें लगभग 4.50 क्विंटल सूखी स्टीविया की पत्ती की मार्केटिंग अम्बिका प्रसाद पटेल शुभम औषधीय रोपणी जबलपुर द्वारा क्रय कर बिकी हेतु खजुराहो रेलवे स्टेशन से ट्रेन द्वारा उदयपुर (राजस्थान) भेजा गया। जिसमें कृषक को चेक के माध्यम से राशि 31 हजार रूपये प्राप्त हुई। अन्य किसानों की स्टीविया के पत्ती भी इनके द्वारा क्रय की जावेगी। कृषक द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा खेत तैयार कराकर मेड़ों में स्टीविया के पौधे 15 से.मी. पौध से पौध की दूरी एवं 45 से.मी. कतार से कतार की दूरी पर रोपित किये गये। जिले में स्टीविया की खेती किये जाने हेतु कृषक द्वारा कार्यालय/फील्ड स्तर पर लगातार जानकारी ली गई।

मधुमेह रोगी कर सकते है सेवन

सहायक संचालक उद्यान ने बताया है कि पन्ना जिले के लिये यह अलग से मीठी क्रांति के रूप विशेष उपलब्धि साबित होगी। स्टीविया की खेती से कृषकों का सालाना प्रति एकड़ 1.40 लाख की आय प्राप्त होगी। उल्लेखनीय है कि आज विश्व में मधुमेह के रोगियों की संख्या बढ़ रही है स्टीविया लो कैलोरी के कारण मधुमेह के रोगी आराम से खा सकते है। स्टीविया की पत्ती शक्कर से 30 गुना अधिक मीठी होती हैै तथा स्टीविया पत्ती से निर्मित पाउडर शक्कर से 300 गुना अधिक मीठा रहता है।

मध्य प्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने प्रतिबद्ध है कमलनाथ सरकार : मंत्री प्रभुराम

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* अमानगंज में नवीन तहसील भवन का प्रभारी मंत्री ने किया लोकार्पण

पन्ना।(www.radarnews.in) प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री डाॅ. प्रभुराम चौधरी ने पन्ना जिले के अपने दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन गुनौर जनपद विकासखंड अंतर्गत अमानगंज क़स्बा में 53.10 लाख रूपये लागत से निर्मित नवीन तहसील भवन का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थितों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हर वर्ग की समस्याओं का निदान कर रही है। प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार चाहती है कि हमारा प्रदेश प्रत्येक क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्य के रूप में जाना जा सके।

घटाया बिजली बिल

प्रभारी मंत्री डाॅ. प्रभुराम चौधरी ने अमानगंज में नवनिर्मित तहसील कार्यालय भवन का लोकार्पण वैदिक रीति से पूजन करने के उपरांत नामपट्टिका अनावरण एवं फीता काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थितों को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों की कर्ज माफी योजना के तहत अब तक लगभग 21 लाख किसानों को लाभान्वित किया जा चुका है। आगामी दिनों में 12 लाख अन्य नये किसानोें को कर्ज मुक्ति का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विद्युत की 100 यूनिट तक खपत होने पर 100 रूपये तथा किसानों की विद्युत खपत का आधा बिल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बेरोजगारों को प्रशिक्षित कर रोजगार स्थापित कराए जा रहे हैं। जिस तरह किसानों को खर्ज माफी योजना का लाभ दिया गया है। इसी तरह आदिवासी भाईयों को साहूकारों के कर्ज से मुक्ति दिलाई गयी है। मुख्यमंत्री कन्यादान/निकाह योजना की राशि को बढाकर 51 हजार रूपये कर दिया गया है।

इनकी रही उपस्थिति

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत राष्ट्रीय बचत पत्र, बच्चों को पठन-पाठन सामग्री उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए। दिव्यांगजन को ट्रायसाइकिल दी गयी। सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम में विधायक गुनौर शिवदयाल बागरी, जिला पंचायत के अध्यक्ष रविराज सिंह यादव, पूर्व विधायक पन्ना श्रीकांत दुबे, श्रीमती दिव्यारानी के साथ अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा उपस्थितों को सम्बोधित किया। इस अवसर पर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बालागुरू के., अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे, संबंधित अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में क्षेत्र के आमजन उपस्थित थे।

मोदी सरकार की गलत नीतियों से डूबी अर्थव्यवस्था, बेरोजगार हुए लाखों युवा : सुधांशु त्रिपाठी

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बैठक को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं सागर संभाग प्रभारी सुधांशु त्रिपाठी।

* भारत बचाओ रैली में शामिल होने पन्ना से दिल्ली जाएंगे कांग्रेस कार्यकर्ता

पन्ना। (www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की नीतियो के विरोध में 14 दिसम्बर को दिल्ली में होने वाली भारत बचाओ रैली में अधिक से अधिक संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे इसके लिये आज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं सागर संभाग प्रभारी सुधांशु त्रिपाठी ने पहुंच कर स्थानीय सर्किट हाउस में जिले के वरिष्ठ नेताओ व पदाधिकारियों की बैठक ली। इस बैठक में पूर्व संभागीय समवन्यक राजेन्द्र सिंह अवाना, जिला समन्वयक दिनेश सिंह भी मौजूद थे। सचिव श्री त्रिपाठी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित की जा रही भारत बचाओ रैली को लेकर विस्तार से जानकारी देते हुये बतलाया कि केन्द्र सरकार ने 3 लाख 80 हजार करोड़ रूपये भारतीय रिजर्व बैंक से निकाल लिये गये इस देश के गोल्ड को ओपन मार्केट में बेंच दिया गया, आज देश की हालत क्या है यह किसी से छिपी नहीं है। इनकी नीतियों के चलते लाखो युवा बेरोजगार स्थिति में घुम रहे है हमने 60 साल में जो भारत देश को खड़ा किया था उसको कमजोर करने के लिये यह लोग लगे हुये है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव श्री त्रिपाठी ने समस्त कांग्रेस जनो से यह आव्हान किया कि हम सब की यह जिम्मेदारी बनती है कि वर्तमान केन्द्र की भाजपा सरकार की जो गलत नीतिया है उसको हम आम जनमानस तक पहुंचाये उन्होने कहा कि सब अरमान धराशायी हो रहे है। नोटबंदी के कारण इस देश को फायदे की जगह नुकसान की प्राप्ति हुई है। उस समय जब नोट बंदी की गयी थी तो 14 लाख करोड़ रूपये मार्केट में था। उन्होने कहा कि पहले बड़ी-बड़ी बाते करते हुये जब मार्केट में 2 हजार रूपये का नोट लाया गया तो उसके बारे में कहा जा रहा था कि इसमें चिप लगी हुई है लेकिन यह सब झूठी बातें सबित हुई।
उन्होने कहा कि कांग्रेस एक विचारधारा जिसका काम लोगों को जोड़कर रखना है उन्होने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव इस देश के लिये अपने प्राणों की आहुति दी लेकिन आज केन्द्र सरकार उनकी सुरक्षा कम कर रही है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह परिवार इनकी गलत नीतियों के बारे में बोलना छोड़ दे। श्री त्रिपाठी ने कांग्रेसजनों से कहा कि यह जो भारत बचाओ रैली का आयोजन दिल्ली में किया जा रहा है। इस रैली के माध्यम से निरंकुश हो चुकी सरकार को जबाव देना है। बैठक में काफी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेसी एवं मौजूद पदाधिकारियो ने अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुंचने का संकल्प लिया।

सच बोलने की सजा : रेंजर को काष्ठागार के प्रभार से हटाकर नोटिस थमाया, वनरक्षक को निलंबित कर सौ किलोमीटर दूर स्थित मुख्यालय भेजा

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फाइल फोटो।

* काष्ठागार पन्ना से 33 वनकर्मियों के गायब होने का मामला

* मीडिया में ख़बरें आने से वन विभाग के अफसरों की मनमानी हुई उजागर

* नाराज डीएफओ ने दिखाई अफशरशाही की हनक, निर्दोष कर्मचारियों पर की कार्रवाई

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) सच बोलना किसी भी दौर में सहज नहीं रहा। इतिहास गवाह है, सच बोलने या फिर उसे वास्तविक रूप उजागर करने वाले को तलवार की धार पर चलना पड़ा है। अर्थात ऐसा करने वाले व्यक्ति को कई तरह के जोखिम और क्षति उठानी पड़ती है। कुछ ऐसा ही दक्षिण वन मंडल पन्ना के रेंजर राम सिंह पटेल और वनकर्मी राजेश सोनी के साथ भी हुआ है। इन दोनों के विरुद्ध दक्षिण वन मंडल पन्ना की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा के द्वारा की गई कार्रवाई सुर्ख़ियों में बनीं है। दरअसल, दक्षिण वन मंडल पन्ना के अंतर्गत आने वाले काष्ठागार डिपो के प्रभारी अधिकारी रहते हुए राम सिंह पटेल ने कुछ समय पूर्व डीएफओ को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि काष्ठागार डिपो में कागजों पर 42 कर्मचारी पदस्थ हैं लेकिन मौके पर सिर्फ 9 कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं। अन्य 33 कर्मचारी मनमाने तरीके से गायब रहते हुए हर महीने पगार ले रहे है। पत्र में काष्ठागार की वस्तुस्थिति को हवाला देते हुए गायब रहने वाले 33 कर्मचारियों को अनयंत्र पदस्थ करने की सिफारिश की गई थी।
वनरक्षक राजेश सोनी का निलंबन आदेश।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए काष्ठागार अधिकारी के इस पत्र से वन विभाग की न सिर्फ जमकर किरकिरी हो रही है बल्कि इस खुलासे के बाद विभाग के कथित जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न चिन्ह भी लगा है। हैरान करने वाले इस मामले के सामने आने के बाद कुछ मीडिया कर्मियों ने विस्तृत खबर कवर करते हुए काष्ठागार डिपो पन्ना के कार्यालय प्रभारी एवं वनरक्षक राजेश सोनी से सम्पर्क कर वहां नियमित रूप से काम करने वाले कर्मचारियों की जानकारी चाही गई। कार्यालय प्रभारी ने बगैर किसी औपचरिकता के वास्तविक जानकारी मीडिया को उपलब्ध करा दी। फिर क्या था वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर बड़ी तादाद में चहेते मैदानी वनकर्मियों की काष्ठागार डिपो में पदस्थापना के बहाने उनसे अपनी सुविधानुसार कार्यालयों और शासकीय आवासों में काम कराने से जुड़ीं ख़बरें मीडिया में आने लगीं।
अपनी कारगुजारियों के उजागर होने से नाराज डीएफओ ने अफसरशाही की सनक और हनक दिखाते हुए आनन-फानन में सलेहा रेंजर राम सिंह पटेल से काष्ठागार का अतिरिक्त प्रभार छीनते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया। वहीं काष्ठागार डिपो पन्ना के कार्यालय प्रभारी एवं वनरक्षक राजेश सोनी को मीडिया को जानकारी देने तथा विभागीय गोपनीयता भंग कर कर्तव्य के प्रति ईमानदार न रहने के आरोप लगाते हुए 26 नवंबर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। डीएफओ ने इस मामले में अपने मातहतों पर जिस तरह से कार्रवाई की है उससे साफ़ जाहिर है कि रेंजर और वनरक्षक दोनों को कोप का भाजन बनाया गया है। मजेदार बात तो यह है कि इनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर तो तत्परता दिखाई गई लेकिन वन विभाग के शीर्ष अफसरों के निर्देशों की अवहेलना कर अटैच किए गए 33 मैदानी वनकर्मियों को रिलीव कर अब तक जंगल नहीं भेजा गया। डीएफओ की इस कार्रवाई को सच को उजागर करने की सजा के तौर पर देखा जा रहा है। पन्ना जिले के वन विभाग में इसके खिलाफ व्यापक असंतोष और विरोध के स्वर बुलंद हो रहे है।

मुख्यालय रैपुरा निर्धारित किया

डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा द्वारा जारी वनरक्षक राजेश सोनी के निलंबन आदेश में, अप्राधिकृत रूप से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को जानकारी देने तथा काष्ठागार पन्ना के हाजिरी रजिस्टर की छायाप्रति प्रदाय कर विभागीय गोपनीयता भंग कर कर्तव्य के प्रति संनिष्ठ ना रहने उल्लेख किया गया है। इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 एवं 12 का उल्लंघन मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इतना ही नहीं राजेश को कथिततौर पर प्रताड़ित करने की मंशा से उसका मुख्यालय पन्ना जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर रैपुरा निर्धारित किया गया। इस सबसे जाहिर है कि पन्ना जिले के वन विभाग के बड़े अफसर किस मानसिकता के साथ निरंकुश होकर कार्य कर रहे है।

बड़े अफसरों पर नहीं होती कार्रवाई

फाइल फोटो।
इस प्रकरण में गौर करने वाली बात यह भी है कि सलेहा रेंजर राम सिंह पटेल के पास काष्ठागार का अतिरिक्त प्रभार था। उनकी अनुपस्थिति में वनरक्षक राजेश सोनी जोकि कार्यालय प्रभारी रहे यदि वे मीडियाकर्मियों के जानकारी मांगने पर उन्हें अपने कार्यालय में वास्तविक रूप से कार्यरत कर्मचारियों की संख्या बताते हैं तो क्या यह कृत्य इतना गंभीर है कि उन्हें निलंबित कर दिया जाए। उन्होंने किसी मीडियाकर्मियों को हाजिरी रजिस्टर की छायाप्रति भी नहीं दी यह अलग बात है कि कर्मचारियों के द्वारा रजिस्टर में हस्ताक्षर करते समय उसमें दर्ज कर्मचारियों के नाम और संख्या को कैमरों में कैद कर लिया। सवाल यह भी है कि कार्यालय का हाजिरी रजिस्टर क्या वाकई गोपनीय दस्तावेज है, जिसके फुटेज न्यूज़ चैनलों में आने पर एक कर्मचारी पर कार्यालय की गोपनीयता भंग कर कर्तव्य के प्रति संनिष्ट न रहने जैसा गंभीर आरोप लगाया गया। सवाल और भी हैं लेकिन जंगल विभाग में जिस तरह जंगल राज चल रहा है उसमें वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर जबाबदेही का घोर आभाव है। शायद यही वजह है कि पिछले दो वर्षों में दक्षिण वन मंडल पन्ना के अंतर्गत पाँच तेंदुओं और एक भालू का शिकार होने के मामलों में वनरक्षकों के अलावा किसी के भी खिलाफ कार्रवाई देखने को नहीं मिली।

रेंजर के पत्र से इसलिए मची थी खलबली

काष्ठागार अधिकारी पन्ना द्वारा डीएफओ को प्रेषित पत्र।
मालूम हो कि दक्षिण वन मंडल के वन परिक्षेत्र सलेहा के रेंजर राम सिंह पटेल के पास कुछ समय तक काष्ठगार डिपो पन्ना का अतिरिक्त प्रभार रहा है। इस दौरान उन्होंने डीएफओ को 15 नवंबर को लिखे गए अपने एक पत्र में बड़ी ही स्पष्टता के साथ काष्ठागार डिपो कार्यालय की हकीकत और तथ्यों को उजागर करते हुए बताया था कि काष्ठागार कार्यालय में कहने को तो 42 कर्मचारी/श्रमिक पदस्थ हैं जिनमें 2 वनपाल, 11 वनरक्षक, 24 स्थाई कर्मी, 1 ड्रायवर और 4 पार्ट टाइम श्रमिक हैं लेकिन यहां पर नियमित रूप से वहां सिर्फ 9 कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं। जिनमें राजेन्द्र पाल सिंह वनपाल, राजेश कुमार सोनी, विवेक कुमार चनपुरिया वनरक्षक, संतोष तिवारी स्थाई कर्मी और सुरक्षा श्रमिक हरि गौंड़, नत्थू गौंड़, सुरेश सोनी, छोटेलाल यादव शामिल है। महिला वनरक्षक सुनीता प्रजापति न्यायालय में बतौर मोहर्रर अपनी सेवाएं दे रहीं है।
रेंजर, राम सिंह पटेल।
शेष अनुपस्थित रहने वाले 33 कर्मचारी मनमाने ढंग से कार्य करने के आदी हो चुके हैं। उन्होंने पत्र में इस बात का विशेष तौर पर उल्लेख किया था कि पन्ना के काष्ठागार का आकार छोटा है और काष्ठ (लकड़ी) की आमद कम होने के साथ कार्यालय का कार्य भी अत्यंत ही सीमित है। ऐसे में काष्ठागार डिपो में 42 कर्मचारियों की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। कर्मचारियों की इतनी संख्या क्षेत्रीय रेन्ज (वन परिक्षेत्र) में पदस्थ कर्मचारियों से भी ज्यादा है। काष्ठागार अधिकारी ने अनुपस्थित रहने वाले सभी 33 अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता न होने का पत्र जिक्र करते हुए इन्हें अन्यंत्र पदस्थ करने की शिफारिश की थी।

वनों और वन्य जीवों की नहीं परवाह

करीब एक वर्ष पूर्व पवई रेंज अंतर्गत हुए तेंदुए के शिकार की घटना का जायजा लेतीं डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा। फाइल फोटो
दक्षिण वन मंडल अंतर्गत काष्ठागार डिपो में तैनाती की आड़ में मैदानी वनकर्मियों से बंगलों में चाकरी-अर्दली और ऑफिस में बाबूगिरी ऐसे समय पर कराई जा रही है जबकि वन्य जीवों के शिकार, पत्थर के अवैध खनन एवं कटाई की हैरान करने वाली घटनाएं तेजी से बढ़ रहीं है। और दक्षिण वन मंडल के सभी छः वन परिक्षेत्रों में कई बीटें तथा सर्किल कर्मचारियों की कमी के कारण खाली पड़े है। परिणामस्वरूप कई वनकर्मियों को एक से अधिक बीटों का प्रभार संभालना पड़ रहा है। मैदानी अमले की कमी के कारण कार्य की अधिकता के दबाब में वनों की सुरक्षा और निगरानी की व्यवस्था धरातल पर दम तोड़ चुकी है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि दक्षिण वन मंडल अंतर्गत पिछले दो वर्षों में पाँच तेंदुओं, एक भालू और एक मोर का शिकार हो चुका है। यहाँ के वन क्षेत्रों में कुछ समय से जहां शिकारी गिरोहों, वन्यजीवों के अंगों के तस्करों की सक्रियता तेजी से बढ़ी है वहीं पत्थर खनन माफिया और अतिक्रमणकारी भी बड़े पैमाने पर जंगल को लगातार क्षति पहुंचा रहे है।
इसके बाबजूद दक्षिण वन मंडल के बड़े अधिकारी जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा की घोर अनदेखी करते हुए मैदानी अमले को मुख्यालय में तैनात कर उनसे दीगर कार्य करा रहे है। लेकिन मैदानी वनकर्मियों को अटैच रखने की गलती की ओर ध्यान आकृष्ट कराने वाली काष्ठागार अधिकारी राम सिंह पटेल की चिट्ठी के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यवस्था में सुधार करने के बजाए डीएफओ ने रेंजर राम सिंह पटेल से काष्ठागार का अतिरिक्त प्रभार वापस लेते हुए कल्दा के रेंजर एम. बी. मानिकपुरी को सौंपा दिया है। इतना ही नहीं डीएफओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस थमाते हुए एक तरह से यह साफ़ कर दिया है कि इस मामले में उनकी चिंता किन बातों पर है।

इनका कहना है –

“काष्ठागार अधिकारी और वनरक्षक के खिलाफ मैंने जो भी कार्रवाई की है वह पूर्णतः उचित है, इसे लेकर गलत बातें प्रचारित की जा रहीं है जबकि यह मामला कार्यालयीन गोपनीयता से जुड़ा है। काष्ठागार में पदस्थ कर्मचारी गायब नहीं है वे हमारे कार्यालय एवं शासकीय आवासों में काम कर रहे है, रेंजर ने पत्र में जिस तरह की भाषा लिखी उससे इन कर्मचारियों का मनोबल गिरा है। वनरक्षक मीडिया में वक्तव्य देने के लिए प्राधिकृत नहीं है। निश्चित ही फील्ड में स्टॉफ की कमी है लेकिन किसी भी अटैच वनकर्मी को हटाया नहीं गया है क्योंकि इससे मुख्यालय का कार्य प्रभावित होगा।”

– मीना कुमारी मिश्रा, डीएफओ, दक्षिण वन मंडल पन्ना।