मंगल भवन निर्माण में बरती जा रही घोर लापरवाही को बयां करती तस्वीर।
छत डालने सरिया बिछा, भुगतान नहीं हुआ तो सरिया के नीचे से सेंटरिंग खोल ले गया ठेकेदार
मोहन्द्रा। रडार न्यूज ग्राम पंचायत मोहन्द्रा में सांसद निधि के चैदह लाख रुपये से मंगल भवन का निर्माण कार्य हो रहा है। मंगल भवन में दीवारें खड़ीं हो गई है। छत का लेंटर डालना, दीवालों की छपाई व फर्श का निर्माण कार्य शेष रह गया था। लेंटर डालने के लिये स्थानीय पंचायत ने करीब तीन माह पहले सरिया भी बिछवा दिया था। पर किन्हीं कारणों से छत का लेंटर अब तक नहीं डाला गया। छत की सेंटरिंग लगाने बाले ठेकेदार ने तीन माह से फंसी अपनी सेंटरिंग का किराया जब पंचायत के सरपंच पति व सचिव से मांगा तो उन्होनें छत न डालने व हवाला देकर बात से किनारा कर लिया। सेंटरिंग का किराया मांग मांग कर परेषान हो चुके ठेकेदार ने अपना मजदूर लगाकर चार दिन पहले अपनी सेंटरिग खोल कर घर ले गया। अब बगैर सेेंटरिग के सहारे छत डालने के लिये बिछा सरिया हवा में लटका झुकाव ले रहा है। सवाल उठता है बगैर सेंटरिंग के बिछे सरिया के ऊपर जब भी छत डाला जायेगा तो क्या छत उतना मजबूत रहेगा। क्या सरपंच सचिव नुकसान उठाकर नये सिरे से दोबारा सरिया बिछवायेगें। यदि भारी बारिष हुई तो नींव में अंदर व बाहर से पानी जायेगा ऐसें में दीवारें धंस भी सकती है क्षतिग्रस्त भी हो सकती है फिर इसकी जिम्मेदारी किसके मत्थे मढ़ी जायेगी।
मीना यादव के घर अज्ञात आरोपियों ने दिया वारदात को अंजाम
परिवार सहित जान से मारने की दी धमकी
प्रारंभिक जांच में हमले की वजह का नहीं लग सका पता
पन्ना। रडार न्यूज महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पन्ना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की पूर्व प्रत्याशी रहीं मीना सिंह यादव के पन्ना में बीटीआई तिराहा पर स्थित घर में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात अज्ञात लोगों ने जबरन घुसने का प्रयास किया और असफल होने पर हवाई फायर करते हुए घर पर पत्थर बरसाये गये। इस घटना के बाद से यादव परिवार दहशत में है। पीड़ित नेत्री ने घटना की शिकायत कोतवाली थाना पुलिस से की है। प्रारंभिक पुलिस जांच में इस सनसनीखेज घटना की वजह साफ नहीं हो सकी। अज्ञात आरोपी राजनैतिक या सामाजिक विवाद के चलते महिला नेत्री मीना यादव व उनके बच्चों पर हमला करने आये थे या फिर उनका इरादा लूटपाट करने का था। घटना को लेकर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे है।
कांग्रेस नेत्री मीना यादव।
मीडियाकर्मियों को वारदात के संबंध मेें कांग्रेस नेत्री मीना यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पति रणधीर सिंह यादव का देहांत हो चुका है और वे अपने एक बेटे व बेटी के साथ रहती हैं। बीती रात घर में पानी नहीं होने के कारण पास ही रहने वाले अपने भाई विक्रम के घर उन्होंने बेटे सृजन यादव को पानी लेने भेजा था। उसी समय तीन अज्ञात युवक मेन गेट से घर में दाखिल हुए और कमरे के अंदर घुसने का प्रयास करने लगे। मीना यादव ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो तीनों युवक उनके साथ अभद्रता करने लगे। गाली-गलौंच करते हुए जान से मारने की धमकी तक दी। इसी बीच मीना यादव के भाई विक्रम यादव और बेटा सृजन पानी लेकर वापस घर पहुंचे, जिन्हें देखकर तीनों युवक भागने लगे। इसी बीच बाहर खड़े उनके अन्य साथियों ने हवाई फायर किया। साथ ही घर में ईंट-पत्थर से हमला करते हुए भाग खड़े हुए। इस घटना से पूरा परिवार सहम गया। घटना की त्वरित सूचना मीना यादव ने 100 डायल व कोतवाली पुलिस को दी। कांग्रेस नेत्री का आरोप है कि पुलिस घटना के आधा घंटा बाद मौके पर पहुुंची। पुलिस ने उन्हें फिलहाल घर में ही रहने का सलाह दी और सुबह मामले की शिकायत कोतवाली थाना में करने को कहा। मंगलवार सुबह मीना यादव ने लिखित शिकायत करते हुए पुलिस से इस मामले पर गंभीरता से कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस घटना से पूरा परिवार डरा हुआ है और उनकी व उनके परिवार की जान को खतरा है। मीना यादव ने पुलिस को बताया कि सभी युवक 20 से 25 साल के थे। जिन्हें वे खुद व उनका भाई और बेटा देखने पर पहचान सकते हैं। इस घटना को लेकर राजनैतिक हल्कों में भी आज दिन भर चर्चाएं रहीं। मीना यादव ने कहा कि पन्ना सहित प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध चिंताजनक तेजी से बढ़ रहे है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि महिलायें जब घर के अंदर ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर कहां सुरक्षित होंगी। उन्होंने पुलिस से अज्ञात हमलावराेें का सुराग लगाकर उन्हें तत्परता से गिरफतार करने की मांग की है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय पन्ना में अपने पिता के साथ खड़ी पीड़ित नवविवाहिता।
नवविवाहिता ने दहेज के लिए ससुराल पक्ष पर प्रताड़ित करने का लगाया आरोप
दहेज लोभियाेें के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने एसपी से की शिकायत
पन्ना। रडार न्यूज छतरपुर जिला के बिजावर थाना में पदस्थ पुलिस आरक्षक मयंक शुक्ला पर उसकी नवविवाहिता पत्नी ने दहेज के लिए शारीरिक और मानसिकतौर पर प्रताड़ित करते हुए घर से भगाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को अपने पिता के साथ पन्ना पहुंची पीड़िता वर्षा शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन पत्र देते हुए बताया कि विवाह के बाद से ही पति मयंक शुक्ला व सास-ससुर द्वारा दहेज के रूप में 10 लाख रूपये लाने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि 10 लाख रूपये लाने पर ही तुम्हें घर में रखेेेेगें। पिछले दो साल से अपने मायके ग्राम चौकी थाना सलेहा में रह रही वर्षा और उसके परिजनों ने मयंक और उनके माता-पिता को सामाजिक स्तर पर काफी समझाया लेकिन दहेज लोभी अपनी मांग पर अड़े है। वर्षा के पिता ने बताया कि 24 अप्रैल 2016 को उन्होंने अपनी बेटी का विवाह गुनौर स्थित मैरिज गार्डन से मयंक शुक्ला के साथ किया था। बेटी के विवाह में अपनी हैसियत के अनुसार 5 लाख रूपये नकद, बुलट मोटरसाईकिल और पूरा दान-दहेज दिया था। पहली विदा में वर्षा जब ससुराल पहुंची तो उसे कम दहेज लाने का ताना देते हुए प्रताड़ित किया गया। सास-ससुर का कहना है कि उनका बेटा पुलिस की नौकरी में है, अगर कहीं और विवाह करते तो मुंह मांगा दहेज मिलता। वर्षा का आरोप है कि पति और ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा 10 लाख रूपये लाने की मांग करते हुए उसे घर से भगा दिया था। लाख कोशिशें करने के बाद भी पति और ससुराल पक्ष के लोग उसे रखने के लिए तैयार नहीं है।
जबरन समाप्त करा दी शिकायत-
ससुराल पक्ष की दहेज की मांग पूरी करने में असमर्थ होने के कारण माह मई 2016 से अपने पिता के घर पर रहने को मजबूर वर्षा ने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने आवेदन पत्र में उल्लेख किया है कि पवई थाना टीआई द्वारा शिकायत वापस लेने का दबाव डाला गया और जबरन उसका मोबाईल छीन कर शिकायत को बगैर निराकरण के ही बंद करा दिया। इससे बौखलाये आरक्षक पति द्वारा उसे और परिजनों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पीड़िता ने पुलिस कप्तान से न्याय की गुहार लगाते हुए उसका जीवन बर्बाद करने वाले दहेज लोभियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की है।
रोक के बावजूद केन नदी में मशीनों से जारी है रेत का अवैध उत्खनन।
रेत के लिए मशीनों से 40 किलोमीटर तक खोद डाली नदी
रेत खदान ठेकेदार और एमपी-यूपी के माफिया दिनदहाड़े डाल रहे डकैती
पन्ना। रडार न्यूज नदियों के संरक्षण को लेकर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दूसरे वादों की तरह ही खोखली और झूठी साबित हो रही है। विभिन्न कार्यक्रमों में जल संरक्षण-संवर्धन पर भाषण देकर तालियां बटोरने वाले सत्तासीन ही दुर्भाग्य से नदियों के विनाश पर मूकदर्शक बने बैठे है। जिम्मेदारों के चरित्र का यह दोहरापन पर्यावरण विनाश के साथ-साथ नदियों की बर्बादी का कारण बन रहा है।
नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान सपत्नीक पवित्र नर्मदा नदी की पूजा-अर्चना करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान का फाईल फोटो।
इसे बिडम्बना ही कहा जायेगा कि पिछले साल प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा परिक्रमा कर नदियों के सरंक्षण का संकल्प दोहराया था, लेकिन उन्हीं नाक के नीचे माफिया रेत के लिए दैत्याकार मशीनों से नदियों का सीना और कोख छलनी कर दिनदहाड़े बहुमूल्य खनिज सम्पदा पर डकैती डाल रहे है। शायद इसीलिए खनिज सम्पदा के अंधाधुंध दोहन के मामले में देश के टाॅप-3 राज्यों में मध्यप्रदेश का नाम शामिल है। यह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के माथे पर लगा एक कलंक है। देश का हृदय प्रदेश कहलाने वाला मध्यप्रदेश कोरे नारों से और विज्ञापनों में सपने दिखाकर विकास के मामले में नम्बर-1 राज्य तथा स्वर्णिम प्रदेश तो अब तक नहीं बना पर शिवराज सरकार में प्राकृतिक संसाधनों की लूट का अड्डा जरूर बन गया है। पिछले सात-आठ सालों से समूचे प्रदेश में शासन-प्रशासन के संरक्षण में रेत की लूट मची है। एमपी की प्रमुख नदियों चंबल, सोन, नर्मदा, केन, तवा, ब्यारमा, बेतवा, ताप्ती, कालीसिंध व इनकी सहायक नदियों को रेत के लिए रातदिन मशीनों से खोखला किया जा रहा है। अगर यकीन नहीं होता तो बुन्देलखण्ड का बेल्लारी बन चुके पन्ना आकर देख लें।
रात-दिन चल रहीं मशीनें-
केन नदी किनारे बरकोला में स्थित रेत का डम्प ।
पन्ना और छतरपुर जिले की प्राकृतिक सीमा रेखा बनी केन नदी को इन दोनों ही जिलों में सक्रिय रेत माफिया भयंकर नुकसान पहुंचा रहे है, जिसकी भरपाई हो पाना शायद संभव नहीं है। केन नदी का एक किनारा पन्ना में तो दूसरा छतरपुर जिले के आधिपत्य में आता है। इन दोनों ही जिलों में केन नदी पर तकरीबन दो दर्जन रेत खदानें स्वीकृत है। इनके अलावा दोनों जिलों में आधा सैकड़ा से अधिक अवैध खदानें हर समय खुलेआम चलती हैं। केन पट्टी क्षेत्र की चर्चाओं पर भरोसा करें तो स्वीकृत रेत खदानों व अवैध खदानों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों के परिजन, क्षेत्रीय विधायक, सभी दलों के नेता, स्थानीय दबंग और आपराधिक तत्व सीधे तौर पर लिप्त है। दोनों ही जिलों में रेत की वैध-अवैध खदानें, राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारियों की काली कमाई का बड़ा स्त्रोत बन चुकी है। केन नदी को किस बेदर्दी से लूटा जा रहा है, मोहना से लेकर रामनई तक करीब 40 किलोमीटर के दायरे में यहां हर तरफ तबाही-बर्बादी के अनगिनत निशान मौजूद है जिन्हें देखकर आंखे फटी रह जाती है। रेत निकालने के लिए वैध खदान ठेकेदारों द्वारा लगभग 40 किलोमीटर की लम्बाई में केन नदी को पोकलैण्ड मशीनों से रातदिन खोदा जा रहा है। प्रतिबंध के बावजूद दोनों ही जिलों के रेत ठेकेदार खदान की निर्धारित सीमा के बाहर खुलेआम कई किलोमीटर मशीनें चलवाकर पानी के अंदर से रेत निकाल रहे है। मानसून सीजन के पहले केन की ज्यादा से ज्यादा रेत लूटने की यहाँ हर तरफ होड़ मची है। पूर्णतः अवैध खदानें संचालित करने वाले माफिया भी रेत की डकैती में पीछे नहीं है।
खदानों में कई माह पूर्व समाप्त हो चुकी है रेत-
मझगायें खदान के समीप अवैध रेट से लोड होता हाइवा ।
मजेदार बात यह है कि पन्ना जिले की मझगांय, बरकोला, उदयपुर, बीरा क्रमांक-01, बीरा क्रमांक-02, सुनहरा, चंदौरा खदानों की रेत करीब तीन से चार माह पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसकी जानकारी सभी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को है। बावजूद इसके रेत के डम्प की आड़ में इन खदानों के ठेकेदार नदी के अंदर कई किलोमीटर में मशीनों से रेत निकाल रहे है। दैत्याकार पोकलैण्ड और जेसीबी मशीनों के नुकीले जबड़े जब नदी की तलछट को नोंचते हुए रेत निकालते है तो जलीय जीव और वनस्पति भी नष्ट हो जाती है। नदी के अंदर की जैवविविधता और पर्यावर्णीय विनाश में अपनी संलिप्तता को छिपाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी बड़ी ही चालाकी के साथ बीच-बीच में कार्यवाही के नाम पर दिखावा करते रहते है। परिणामस्वरूप्ा केन नदी के जिगनी घाट में चल रही राजनैतिक खदानों पर रोक लगाने में प्रशासन नाकाम रहा है। चंदौरा रेत खदान के नाम पर जिगनी घाट की रेत सरेआम निकाली जा रही है। आश्चर्य की बात है कि खदान ठेकेदारों के डम्प से रेत की लगातार लोडिंग के बावजूद भण्डारित रेत की मात्रा घटने की बजाय उल्टा हर दिन कई गुना बढ़ जाती है। यह चमत्कार ऐसे समय पर घटित हो रहा है जबकि स्वीकृत खदानों में रेत ही नहीं बची है। दरअसल ठेकेदार एक तरफ डम्प से रेत की बिक्री का धंधा चल रहे है तो वहीं दूसरी ओर नदी में जहां कहीं भी रेत मौजूद है मशीनों के जरिये उसे निकालकर ट्रेक्टर-ट्राली से डम्प तक परिवहन कराया जा रहा है। शाम ढलने पर कहीं-कहीं सीधे नदी से भी रेत की लोडिंग वाहनों में की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक छतरपुर और पन्ना जिले की वैध-अवैध खदानों से प्रतिदिन 500-700 ट्रक रेत निकाली जा रही है।
प्रशासन ने दी खुली छूट-
पन्ना में मची अराजकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कमीशन के चक्कर में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों ने रेत खदान ठेकेदारों और माफियाओं को मनमानी करने की खुली छूट दे रखी है। बरकोला खदान में नदी के अंदर रेत छानने के लिए क्रेशर की तरह विशाल मशीन दो साल से लगी है लेकिन खनिज और राजस्व अधिकारियों की इस पर आज तक नजर नहीं पड़ी। उधर चांदीपाठी से लेकर चंदौरा नहर तिराहे तक रेत के वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए करीब 3 किलोमीटर में नदी में मिलने वाले विशेष किस्म के चिकने पत्थर (बटइयां) ठेकेदारों ने बिछा रखी है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ठेकेदारों को रेत निकालने की लीज मिली है या फिर हर तरह से नदी का दोहन करने का पट्टा मिल गया है। इतनी बड़ी तादाद में बटैइया निकालकर नहर मार्ग पर बिछाने के बावजूद ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करना तो दूर जिम्मेदारों ने पूंछतांछ करना भी उचित नहीं समझा। केन नदी में मिलने वाले विशेष किस्म के चिकने पत्थर बटइयां की बाहर अच्छी खासी मांग को देखते हुए बरकोला खदान ठेकेदार भी इसकी बिक्री का धंधा लम्बे समय से कर रहे है। अराजकता के इस माहोल के मद्देनज़र यदि शीघ्र ही केन नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए ईमानदार पहल नहीं की गई तो मिढ़ासन की तरह यह भी बरसाती नदी बन सकती है। भावी पीढ़ी को यदि हम बेहतर कल देना चाहते है तो हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत रूपी नदियों और पर्यावरण को बचाने के लिए तुरंत ही कुछ करना होगा।
पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने हज-यात्रियों के लिए प्रशिक्षण गाइड का विमोचन किया।
राज्य मंत्री श्रीमती ललिता यादव ने दी विभागीय योजनाओं की जानकारी
भोपाल। हज कमेटी द्वारा हज यात्रियों को प्रशिक्षण देने के लिये प्रशिक्षिकों के विशेष प्रशिक्षण का कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने प्रशिक्षकों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हज यात्रियों को बेहतर प्रशिक्षण दें, जिससे उन्हें हज यात्रा के दौरान कोई कठिनाई नहीं हो।
पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती ललिता यादव ने हज-यात्रियों के प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित किया।
श्रीमती यादव ने बताया कि हज-2018 के लिये 4758 यात्रियों का चयन किया गया है। प्रशिक्षण में हज कमेटी के अध्यक्षों को भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षिकों को विशेष प्रशिक्षण गाइड तथा अन्य सामग्री उपलब्ध करवाई गई। हज यात्रियों को 26 जून से 25 जुलाई के बीच प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस वर्ष सउदी अरब में प्रदेश के हज यात्रियों की सहायता के लिये 23 खादिमुल हुज्जाजों को भेजा जा रहा है। हर 200 हज यात्रियों के बीच में एक खादिमुल हुज्जाज की व्यवस्था की गई है।सचिव एवं कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश राज्य हज कमेटी श्री दाऊद अहमद खान ने जानकारी दी है कि मुम्बई इम्बार्केशन पॉइंट से 29 से 31 जुलाई तथा एक से 12 अगस्त तक और भोपाल इम्बार्केशन पॉइंट से 6 एवं 7 अगस्त को विभिन्न फ्लाइटों से हज यात्रियों को हज यात्रा पर भेजा जाना प्रस्तावित है। इस मौके पर अन्य अधिकारी एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बुंदेली समारोह तथा अमृत महोत्सव के अवसर पर आज बुंदेली भाषा के कवि श्री कैलाश मड़बैया सहित अन्य कवियों और पत्रकारों का शाल-श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर अभिनन्दन किया।
बुंदेली समारोह तथा अमृत महोत्सव कलश स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न
भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज यहां बुंदेली समारोह एवं अमृत महोत्सव कलश स्थापना कार्यक्रम में कहा कि बुंदेलखण्ड में महान योद्धा, राजा, साहित्यकार और समाजसेवियों ने जन्म लिया है। बुंदेलखंड के वीरों के बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता।
राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि बुंदेलखण्ड की सांस्कृतिक और साहित्यिक परम्परायें महान और प्राचीन हैं। छत्रसाल ऐसे महान योद्धा थे, जो तलवार के साथ कलम से भी समाज और देश को कुरीतियों से बचाने की कोशिश करते रहे। छत्रसाल ने विस्तृत बुंदेलखंड राज्य की गरिमामय स्थापना ही नहीं की थी, वरन् साहित्य सृजन कर जीवंत काव्य भी रचे।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बुंदेली समारोह तथा अमृत महोत्सव के अवसर पर आज बुंदेली भाषा के कवि श्री कैलाश मड़बैया सहित अन्य कवियों और पत्रकारों का शाल-श्रीफल और सम्मान पत्र भेंट कर अभिनन्दन किया।
राज्यपाल श्रीमती पटेल ने प्रसिद्ध बुंदेली कवी कैशल मड़बैया को अमृत महोत्सव की बधाई दी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड को आज विकास की बहुत आवश्यकता है। हमारे प्रधानमंत्री ने ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा देकर देश में एकता, विकास, समरसता और सौहार्द्र का वातावरण निर्मित किया है।
राज्यपाल श्रीमती पटेल ने इस अवसर पर बुंदेली भाषा के कवि कैलाश मड़बैया सहित अन्य कवियों और पत्रकारों को शाल, श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने बुंदेली नृत्य दल द्वारा प्रस्तुत राई नृत्य भी देखा । कार्यक्रम में सांसद आलोक संजर, वरिष्ठ साहित्यकार गंगा प्रसाद बरसैया, तथा बुंदेली साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम में राज्यपाल ने साहित्कार कैलाश मड़बैया की पुस्तक मयूर पंख, सहित साहित्यकारों और कवियों की पुस्तकों और काव्य ग्रंथों का विमोचन भी किया।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों के बच्चों द्वारा आयोजित रामलीला देखते हुए।
राजभवन के अधिकारियों-कर्मचारियों के बच्चों द्वारा रामलीला का मंचन
भोपाल। राज्यपाल श्रीमती अनंदीबेन ने आज राजभवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों द्वारा आयोजित रामलीला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रामलीला हमें धार्मिक घटनाओं और भगवान श्रीराम के मर्यादापुरूष होने का प्रमाण देती हैं। इससे हमारी धार्मिक आस्था और भावना सुदृढ़ होती है। रामलीला भारतीय प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और धार्मिक आस्था को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है। इससे बच्चों में अच्छे आदर्श और चरित्र का निर्माण करने में मदद मिलती है। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति,युवामंच और हिन्दी भवन के सहयोग से राजभवन सचिवालय द्वारा आयोजित किया गया था।
राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आयोजकों को साधुवाद देते हुए इस अनुकरणीय पहल की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि जब बच्चे रामलीला में स्वयं राम, सीता और अन्य पात्रों का अनुसरण करेंगे तो उनमें राम के आदर्श, सीता माँ की पवित्रता और भरत, लक्ष्मण जैसे भाईयों के चरित्र उनके अंदर निर्मित हो सकेंगे। माता-पिता और भाई-बहन के प्रति प्रेम, सम्मान और आदर की भावना जागृत हो सकेगी। घर,परिवार और समाज में एकता, सौहार्द्र और सदभाव का वातावरण मजबूत होगा। रामलीला के माध्यम से ही आज पूरे विश्व में भगवान श्रीराम के आदर्श, उपदेश और संदेश को पहुँचाया जा रहा है। देश और विदेश में लोग रामलीला देखकर ही अपने जीवन में बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रस्तुत रामलीला की प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों ने बहुत परिश्रम किया है। इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं राष्ट्रप्रचार भाषा समिति के ट्रस्टी रघुनंदन शर्मा, अध्यक्ष एस.पी. दुबे, हिन्दी भवन के सचिव कैलाश अग्रवाल, राज्यपाल के सचिव भरत महेशवरी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में रामलीला प्रेमी उपस्थित थे।
केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने शनिवार को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश को समग्र कृषि पैदावार में अच्छे प्रदर्शन के लिये सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में पुरस्कृत किया। यह पुरस्कार इण्डिया टुडे पत्रिका के एग्रो समिट अवार्ड-2018 में किसान कल्याण तथा कृषि संचालनालय के संचालक मोहनलाल ने प्राप्त किया।
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री सिंह ने नई दिल्ली में दिया पुरस्कार
भोपाल। मध्यप्रदेश को समग्र कृषि पैदावार में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिये शनिवार को नई दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ राज्य के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। केन्द्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने यह पुरस्कार इंडिया टुडे पत्रिका के एग्रो समिट एण्ड अवार्ड-2018 समारोह में प्रदान किया। किसान-कल्याण एवं कृषि विभाग के संचालक श्री मोहनलाल ने प्राप्त किया। समग्र कृषि पैदावार में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर, उड़ीसा दूसरे, तेलंगाना तीसरे, आंध्रप्रदेश चौथे और महाराष्ट्र पाँचवें स्थान पर रहा है।
इण्डिया टुडे एग्रो अवार्ड के लिये मध्यप्रदेश को कई कसौटियों पर कसा गया। देश के कृषि विशेषज्ञों ने विभिन्न राज्यों की कृषि सांख्यिकी का अध्ययन किया। इसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि मध्यप्रदेश ने वर्ष 2015-16 में गेहूँ की पैदावार बढ़ाने में खास उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में गेहूँ की उत्पादकता 176.80 लाख टन रही है। प्रति हेक्टेयर गेहूँ की उत्पादकता 2,993 किलोग्राम तक पहुँच गई है।
अवार्ड कार्यक्रम में बताया गया कि मध्यप्रदेश देश का वह राज्य है, जिसने खेती में अपना जबरदस्त प्रदर्शन बरकरार रखा है। राज्य सरकार के कृषि पैदावार के आँकड़े बताते हैं कि खराब दौर में भी मध्यप्रदेश ने कृषि विकास में दोहरे अंकों की वृद्धि दर कायम रखी। समारोह में बताया गया कि केन्द्र सरकार के कृषि और किसान विकास मंत्रालय की ओर से कृषि विकास के लिये दिया जाने वाला कृषि कर्मण अवार्ड पिछले 5 साल से मध्यप्रदेश को मिल रहा है।
समारोह में बताया गया कि कृषि के समग्र विकास के लिये यह जरूरी है कि खेती से जुड़े तमाम पहलुओं पर एक साथ काम किया जाये। मध्यप्रदेश ने पिछले एक दशक में यही किया है। मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने की सतत कोशिश की गई है। प्रदेश में 700 छोटी सिंचाई परियोजनाओं को वर्ष 2018 के अंत तक पूरा करने का कार्यक्रम बनाया गया है। कृषि केबिनेट जैसी व्यवस्था ने भी मध्यप्रदेश को कृषि में अव्वल बनाये रखा है।
आयुक्त जनसम्पर्क श्री पी. नरहरि से आज संचालनालय में महाराष्ट्र राज्य के जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भेंट की और महाराष्ट्र के पब्लिकेशन्स का सैट भेंट किया।
भोपाल। जनसम्पर्क आयुक्त श्री पी. नरहरि से आज संचालनालय में महाराष्ट्र राज्य के जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। दल का नेतृत्व महाराष्ट्र के संचालक जनसम्पर्क श्री शिवाजी मानकर ने किया।
आयुक्त जनसम्पर्क श्री नरहरि ने प्रतिनिधि मंडल को बताया कि मध्यप्रदेश में हाल ही में लागू मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना विश्व की अनुकरणीय योजना साबित हुई है। इस योजना से राज्य सरकार, समाज के सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के जीवन स्तर में व्यापक स्तर पर बदलाव लाने में सफल हुई है। श्री नरहरि ने बताया कि इस योजना में करीब पौने दो करोड़ से अधिक लोगों ने अभी तक पंजीयन करवाया है। यह योजना पंजीबद्ध हितग्राहियों को जन्म से अंतिम समय तक मददगार साबित हो रही है।
सौजन्य भेंट के दौरान महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश में संचालित जनसम्पर्क विभाग संबंधी गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं के बारे में आपसी तौर पर विचार-विमर्श भी किया।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आज जबलपुर में वीरागंना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर आयोजित आदिवासी सम्मेलन में समाधि समारोह में शामिल हुए।
वर्ष 2006 तक वनभूमि पर काबिज वनवासियों को दिये जायेंगे वनाधिकार पट्टे
दिसम्बर 2018 तक प्रत्येक आदिवासी परिवार के घर पहुँचाई जायेगी बिजली
वीरांगना रानी दुर्गावती के 455वें बलिदान दिवस समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती के समाधि स्थल पर 455वें बलिदान दिवस पर आयोजित विशाल आदिवासी सम्मेलन में घोषणा की कि युवा पीढ़ी को बलिदान और स्वाभिमान की रक्षा के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से समाधि स्थल पर हर वर्ष रानी दुर्गावती के बलिदान-दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। वन भूमि पर वर्ष 2006 तक काबिज वनवासी आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे देकर काबिज वनभूमि का मालिक बनाया जायेगा। सौभाग्य योजना के अंतर्गत दिसम्बर 2018 तक प्रत्येक आदिवासी परिवार के घर-घर तक बिजली पहुँचाई जायेगी। इन परिवारों को 200 रूपये प्रतिमाह फ्लेट रेट पर ही बिजली बिल का भुगतान करना होगा। संबल योजना में गरीब आदिवासी परिवारों को शामिल कर योजना के सभी लाभ दिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी दुर्गावती के समाधि स्थल के समीप 10 एकड़ शासकीय भूमि पर वीरांगना के नाम से भव्य स्मारक बनवाया जायेगा। उन्होंने मण्डला जिले के रामनगर में आदिवासी संग्रहालय बनवाने की घोषणा करते हुए कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा दिया जायेगा और अगले चार वर्षों में उन्हें पट्टे की जमीन पर पक्के मकान बनवाकर दिये जायेंगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के विकास और समृद्धि के साथ-साथ उनके गौरवपूर्ण इतिहास, परम्परा, बलिदान और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखेगी। स्वाधीनता की लड़ाई में आदिवासी नायकों के अमूल्य योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती ने जहाँ एक ओर राज्य की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिये अपना बलिदान दिया, वहीं दूसरी ओर अपने 15 वर्ष के शासनकाल में प्रजा के लिये जनहितैषी कल्याणकारी कार्य करवाये, जिसके प्रमाण आज जबलपुर सहित अन्य स्थानों पर देखे जा सकते हैं। रानी दुर्गावती ने जल संरक्षण के लिये तालाबों का निर्माण करवाया और आम आदमी की सुविधा के लिये धर्मशालाएँ भी बनवाईं।
रानी दुर्गावती के नाम पर होगा डूमना विमानतल का नामकरण-
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने घोषणा की कि जबलपुर के डुमना विमानतल का नामकरण रानी दुर्गावती के नाम पर करने के लिये विधानसभा में राज्य शासन की ओर से प्रस्ताव पारित करवाकर केन्द्र शासन को भेजा जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूह से आदिवासी महिला को जोड़कर उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का पूरा प्रयास है कि आदिवासी के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आये इसलिए राज्य सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा आदिवासियों और गरीबों के कल्याण और विकास के लिये व्यय करने का निर्णय लिया गया है।
बेटा-बेटी को खूब पढ़ायें आदिवासी परिवार-
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज जबलपुर में वीरागंना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर आयोजित आदिवासी सम्मेलन मे आदिवासी को गले लगाकर स्वागत किया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आदिवासी समुदाय से अपील की कि बच्चों को आत्म-निर्भर और सशक्त बनाने के लिये खूब पढ़ाई-लिखाई करवायें। उनके बेटा-बेटी की पढ़ाई का खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी। श्री सिंह ने बताया कि केन्द्र और राज्य सरकार देश और प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये तेजी से प्रयास कर रही है। उन्होंने आदिवासी परिवारों से कहा कि अपने बेटा-बेटियों को खूब पढ़ायें-लिखायें और समाज में आगे बढ़ने का मौका दें। समारोह में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शंकरदयाल भारद्वाज द्वारा लिखित पुस्तक ‘रानी दुर्गावती-एक बलिदान गाथा’ का विमोचन किया। श्री चौहान ने लेखक भारद्वाज को शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित भी किया। सांसद राकेश सिंह एवं फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
मुख्यमंत्री का तलवार-ढाल भेंट कर किया सम्मान-
मध्यप्रदेश जनजाति संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को बड़ी फूल माला पहनाई और तलवार तथा ढाल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर सांसद श्रीमती संपतिया उईके, विधायक सुशील तिवारी, श्रीमती प्रतिभा सिंह एवं सुश्री नंदिनी मरावी, मनोनीत विधायक एल.बी. लोबो, महापौर डॉ. स्वाति सदानंद गोडबोले, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा पटेल, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वित्त तथा विकास निगम के उपाध्यक्ष एस.के. मुद्दीन, जबलपुर कृषि उपज मंडी अध्यक्ष राजाबाबू सोनकर, बड़ी संख्या में विशाल आदिवासी समुदाय मौजूद था।