भोपाल। रडार न्यूज भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार 29 मार्च को लोकसभा चुनाव के लिए 11 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इसमें कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश की 3-3 सीटों और जम्मू-कश्मीर तथा महाराष्ट्र की एक-एक सीट पर उम्मीदवार घोषित किए गए है। मध्य प्रदेश में बीजेपी ने अपने दो सांसदों बालाघाट से बोध सिंह भगत और खरगोन सीट से सुभाष पटेल का टिकिट काटते हुए वहाँ नए चेहरों को चुनावी समर में उतारने का ऐलान किया है। पार्टी ने बालाघाट से ढाल सिंह बिसेन, खरगोन से गजेंद्र पटेल और राजगढ़ से रोडमल नगर को टिकिट दिया है। इसके पूर्व भी बीजेपी ने एमपी में अपने 5 सांसदों के टिकिट काटे थे। खरगोन और बालाघाट सीट से मौजूदा सांसदों के टिकिट काटने के निर्णय के पीछे पार्टी सूत्रों द्वारा उनका औसत प्रदर्शन, सर्वे रिपोर्ट में खराब स्थिति, स्थानीय स्तर पर विरोध अदि कारण बताए जा रहे है।
एमपी में बीजेपी के लोकसभा प्रत्याशी –
बालाघाट – ढाल सिंह बिसेन
खरगोन – गजेंद्र पटेल
राजगढ़ – रोडमल नागर
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केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल नेताओं के समक्ष दुविधा यह है कि वे मौजूदा हालात में क्षेत्रीय प्रत्याशी के मुकाबले में क्षेत्रीय व्यक्ति को उतारें, जातिगत समीकरणों को साधें या फिर टिकिट वितरण में बड़े नेताओं की सिफारिशों को तवज्जो दें। फैसला लेते समय उसे यह भी सुनिश्चित करना है कि खजुराहो के गढ़ में पार्टी के कब्जे को बरकरार रखने में सक्षम तथा जीत की प्रबल सम्भवना वाले दावेदार को ही चुनावी समर में उतारा जाए। इसलिए बीजेपी की प्रदेश इकाई द्वारा भेजे गए दावेदारों के पैनल में शामिल प्रत्त्येक नाम पर गहन विचार-मंथन कर संभावित चुनौतियों और कसौटी पर उन्हें परखा जा रहा है।
उधर, पैनल और सर्वे के अलावा भी कई नामों पर विचार होने की चर्चाएं है। जिन दावेदारों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे उनमें पूर्व विधायक विजय बहादुर सिंह बुंदेला, ध्रुव प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री ललिता यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष पन्ना रविराज सिंह यादव, बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, घासीराम पटेल, किसान नेता उमेश सोनी, विधायक संजय पाठक, जिला सहकारी बैंक पन्ना के पूर्व अध्यक्ष एवं फायर ब्रांड नेता संजय नगायच, समाजसेविका नंदिता पाठक, पूर्व विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पन्ना माधवेंद्र सिंह, एडवोकेट विनोद तिवारी, रामऔतार पाठक बब्लू, जयप्रकाश चतुर्वेदी शामिल हैं। इसके अलावा खजुराहो के पूर्व सांसद स्वर्गीय जीतेन्द्र सिंह बुंदेला की पत्नी, अभिनेता राजा बुंदेला, पूर्व रीवा रियासत के महाराज पुष्पराज सिंह के नाम भी विचार की प्रक्रिया में आए हैं। कुल मिलाकर इतने नामों के बीच सबसे मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार का चयन करना भारतीय जनता पार्टी के लिए आसान नहीं है।
विदित हो कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के खजुराहो संसदीय क्षेत्र का नया स्वरुप वर्ष 2004 में चुनाव के पूर्व हुए परिसीमन से अस्तित्व में आया है। वर्तमान में इसके अंतर्गत तीन जिले छतरपुर, पन्ना और कटनी के क्रमशः आठ विधानसभा क्षेत्र- चंदला, राजनगर, पन्ना, गुनौर, पवई, बहोरीबंद, मुड़वारा, विजराघगढ़ आते है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने जिस तरह कविता सिंह के नाम पर मुहर लगाकर क्षेत्रीय प्रत्याशी की मांग को पूरा करते जनभावनाओं को अपने पक्ष में करने का दाँव चला है, उसके मद्देनजर इसकी काट के तौर पन्ना या कटनी जिले के किसी सुयोग्य नेता को उम्मीदवार घोषित करने को लेकर बीजेपी को गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। प्रत्याशी चयन में खजुराहो संसदीय क्षेत्र के जातिगत समीकरणों साधने की रणनीति भी भाजपा का मजबूत पक्ष साबित हो सकती है।
क्षत्रिय समाज से आने वाली कविता सिंह के कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद खजुराहो लोकसभा सीट पर भाजपा के रणनीतिकारों द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग और ब्राह्मण दावेदारों के नामों पर नए सिरे से मंथन किया जा रहा है। दरअसल, इस सीट के जातिगत समीकरणों पर गौर करें तो ओबीसी मतदाताओं की तादाद सर्वाधिक है। करीब 50 फीसदी से अधिक होने के कारण ओबीसी वोटर यहाँ निर्णायक स्थिति में हैं। अनुसूचित जाति को छोड़ दें तो इसके बाद ब्राह्मण मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी अपने गढ़ को बचाने के लिए पूर्व राजपरिवार से आने वाली क्षत्रिय प्रत्याशी कविता सिंह के सामने क्या इसी समाज के किसी दावेदार को मुकाबले में उतारती है या फिर जातिगत तथा क्षेत्रीयता के फैक्टर को ध्यान में रखते हुए किसी स्वच्छ छवि के लोकप्रिय ओबीसी या ब्राह्मण चेहरे को कड़ी चुनौती के रूप में पेश करती है।







मालूम हो कि समूचे पन्ना जिले में पिछले कई सालों से ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र पूर्ण रूपेण कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्तिथि अत्यंत ही दयनीय है। प्रति वर्ष इनके लिए आने वाले बजट का जिले में बंदरबाँट हो रहा है। इन स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए आने वाली सामग्री भी स्टॉफ के द्वारा अपने घरों में उपयोग की जा रही है। जो सामग्री-उपकरण आदि स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध हैं उसकी हालत अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो यदि ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की सामग्री का भौतिक सत्यापन ईमानदारी से कराया जाए तो आधी से अधिक सामग्री गायब मिलेगी। बहरहाल नई सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की ओर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। ताकि लोगों को इलाज के लिए महँगे अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाने को विवश न होना पड़े।



सुशीला चूँकि नवविवाहिता थी इसलिए गुरुवार को पन्ना से नायब तहसीलदार सुश्री दिव्या जैन के मौके पर पहुँचने पर पंचनामा आदि कार्रवाई की गई। पति-पत्नी के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ था, प्रारंभिक पुलिस विवेचना में यह स्पष्ट नहीं हो सका। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए आज पन्ना भेजा गया। बृजपुर थाना प्रभारी श्री साहू ने बताया कि अर्जुन गौंड़ का शव जिस स्थान से बरामद हुआ है वह सतना जिले के बरौंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है। इसलिए बृजपुर थाना पुलिस द्वारा इस मामले में शून्य पर मर्ग कायम कर अग्रिम कार्रवाई के लिए केश डायरी बरौंधा थाना पुलिस को भेजी जाएगी।


