* भाजपा के मजबूत किले को भेदने की बनने लगी रणनीति
* ब्लॉक स्तर पर कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठकों का दौर जारी
शादिक खान, खजुराहो / पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ बने खजुराहो संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस इस बार जीत का परचम लहराने की तैयारी में जुट गई है वहीं दूसरी ओर बीजेपी के प्रत्याशी की घोषणा में देरी के कारण दावेदारों के बीच जारी खींचतान से पार्टी में कलह और गुटबाजी बढ़ रही है। टिकिट की दौड़ में शामिल भाजपा नेता खुद को आगे बनाए रखने के लिए प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से दूसरों पर कीचड़ उछालने में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर यह काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। अपने नेता खिलाफ दुष्प्रचार (डर्टी पॉलिटिक्स) होने से नाराज समर्थकों में सिर फुटौवल जारी है।
स्थिति यह है कि खजुराहो सीट पर कांग्रेस पार्टी ने जहाँ कई दिन पूर्व राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी एवं खजुराहो नगर परिषद की अध्यक्ष कविता सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, वहीं भाजपा अब तक अपने किले को अपराजेय बनाए रखने योग्य उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं कर पाई है। चुनावी कार्यक्रम की उल्टी गिनती शुरू होने के मद्देनजर उम्मीदवार घोषित होने में लगातार विलम्ब होने से भाजपा कार्यकर्ता निराश है। कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह ने इस स्थिति को भांपते हुए समय का पूरा सदुपयोग कर खजुराहो सीट पर इस बार इतिहास रचने की रणनीति बनाने में जुटी हैं। पूर्व छतरपुर राजघराने की बहू और पन्ना जिले के गुनौर विधानसभा क्षेत्र की बेटी कविता सिंह आत्म विश्वास से लबरेज है, उन्हें भरोसा है कि क्षेत्र से सीधा जुड़ाव होने का लाभ चुनाव में उन्हें चुनाव में अवश्य ही मिलेगा।
भाजपा सांसदों की नाकामी को बनाया मुद्दा

कांग्रेस प्रत्याशी का स्वागत करते भरत मिलन पाण्डेय।
पिछले दिनों गुनौर विधानसभा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पार्टी नेताओं और क्षेत्रीय लोगों को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी ने भावनात्मक अंदाज में बेटी के रिश्ते को उभारते हुए जोर देकर कहा कि- “बेटी कभी धोखा नहीं देती है, मैं भी जिले के लोगों को कभी धोखा नहीं दूँगी। आपकी हर उम्मीद पर खरी उतरूँगी।” कविता सिंह की यह बात लोगों के दिलों को छू गई। दरअसल, भाजपा के पूर्व एवं निवर्तमान सांसद द्वारा चुनाव के समय किये गए वादों को पूरा न करने से खुद को छला हुआ महसूस कर रहे जनमानस में व्याप्त निराशा और गुस्से को देखते हुए उन्होंने यह बात कही थी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पक्ष में जनमत निर्माण के लिए प्रत्याशी के साथ-साथ उनके विधायक पति विक्रम सिंह पसीना बहा रहे है।




“खजुराहो सीट पर उम्मीदवार के नाम के ऐलान में थोड़ी देर अवश्य हो रही है, पर भरोसा रखिये निर्णय दुरुस्त ही होगा। हमारे यहाँ व्यक्ति नहीं बल्कि पार्टी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पार्टी जिसे भी अपना प्रत्याशी घोषित करती है सब मिलकर उसे विजयी बनाने में जुट जाते है। प्रत्याशी चाहे जो भी हो खजुराहो सीट पर इस बार भी बीजेपी ही जीतेगी क्योंकि क्षेत्र का जनमानस हमारे साथ है। हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजे इसका प्रमाण है। लोग केन्द्र में मोदी जी के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार चाहते जो देश को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ विकास के पथ पर आगे ले जाने में सक्षम है। खजुराहो क्षेत्र को रेल लाइन की सौगात, चौड़ीं सड़कें मोदी जी के ही कार्यकाल में मिली है।
” अति पिछड़े इस क्षेत्र के लोगों ने विकास की उम्मीद में लगातार कई बार भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को प्रचंड बहुमत से विजयी बनाकर दिल्ली भेजा है, लेकिन वे संसद में क्षेत्र की जनता की आवाज को बुलंद नहीं कर सके। चुनाव के समय जो वादे किये उन्हें भी पूरा नहीं किया। जनसमस्याओं के निराकरण और विकास से जुड़े मुद्दों पर भाजपा सांसदों ने घोर उदासीनता बरती है। इनके नाकारेपन का खामियाजा आज समूचे खजुराहो संसदीय क्षेत्र के लोग भुगत रहे हैं। भाजपा के झूठे वादों के कारण ही लोगों ने प्रदेश की शिवराज सरकार को उखाड़ फेंका है, अब बारी केन्द्र की मोदी सरकार की है। रहा सवाल खजुराहो सीट का तो कांग्रेस पार्टी ने यहाँ से योग्य एवं क्षेत्रीय प्रत्याशी के रूप में कविता सिंह को उतारा है, इस बार खजुराहो सीट पर कांग्रेस पार्टी जीत की इबारत लिखेगी।”
कलेक्टर मनोज खत्री ने सीमा से लगे विभिन्न मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हरदी में स्थापित मतदान केन्द्र क्रमाँक 121 एवं 122 का निरीक्षण कर बीएलओ से चर्चा करते हुए पूर्व के मतदान प्रतिशत की जानकारी एवं मतदान केन्द्र के मतदाताओं के संबंध में चर्चा की। इसी प्रकार माध्यमिक शाला एवं प्राथमिक शाला नरदहा, देबलपुर आदि के मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि भारत निर्वाचन आयोग की मंशानुसार मतदान केन्द्र पर मतदाताओं के लिए सुविधाएं होनी चाहिए। मतदान केन्द्र पर मतदाताओं के लिए छायावान, पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ महिला एवं पुरूष के लिए पृथक-पृथक शौचालय स्थापित होना चाहिए। उन्होंने मतदान का प्रतिशत बढाने के लिए चुनावी पाठशाला का संचालन कर मतदाता जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने रामनगर, हरनामपुर, रामनई, बरौली, तरौनी, मोकछ, छनेहा, अजयगढ़ की सीमा पर स्थित अन्तर्राज्यीय वन नाका पन्ना आदि का निरीक्षण किया। मौके पर स्थापित सीसीटीव्ही कैमरों के संचालन की व्यवस्था, कैमरों का बैकअप रखने की व्यवस्था, नाकों से गुजरने वाले वाहनों की पंजी का संधारण आदि अवलोकन किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सीसी टीवी कैमरे निरंतर चालू रखे जाएं। विद्युत अपरोध की स्थिति से निपटने के लिए सीसीटीव्ही कैमरों को बैट्ररी से जोड़कर चालू रखा जाए। प्रत्येक नाके पर सुरक्षा प्वाइंट बनाकर जवान को तैनात रखा जाए। नेटवर्क के संबंध में चर्चा करते हुए पुलिस अधीक्षक श्री अवस्थी ने कहा कि जहां नेटवर्क की परेशानी है वहां मोबाईल फोन के माध्यम से बैकअप लेकर सुरक्षित रखा जाए। राज्य की सीमा से आने वाली शराब अथवा अन्य सामग्री जो मतदान को प्रभावित करती हो उस पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
कलेक्टर मनोज खत्री ने निर्वाचन के लिए गठित दलों को निर्देश दिए कि हमें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र निर्वाचन को सम्पन्न कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। हमारे द्वारा जो भी निर्वाचन संबंधी कार्य किए जा रहे हैं उसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वाहनों का निरीक्षण पूरी मुस्तैदी के साथ करें। ऐसे व्यक्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जाए जो मतदान को प्रभावित कर सकते हैं। क्षेत्र में ऐसे वातावरण का निर्माण किया जाए जिसमें आम मतदाता बगैर किसी भय के स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का उपयोग कर सके। इस निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अजयगढ़ सुश्री आयुषी जैन, जनपद पंचायत अजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.के. मिश्रा के साथ राजस्व एवं पुलिस के क्षेत्रीय अधिकारी, कर्मचारी साथ रहे।





केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल नेताओं के समक्ष दुविधा यह है कि वे मौजूदा हालात में क्षेत्रीय प्रत्याशी के मुकाबले में क्षेत्रीय व्यक्ति को उतारें, जातिगत समीकरणों को साधें या फिर टिकिट वितरण में बड़े नेताओं की सिफारिशों को तवज्जो दें। फैसला लेते समय उसे यह भी सुनिश्चित करना है कि खजुराहो के गढ़ में पार्टी के कब्जे को बरकरार रखने में सक्षम तथा जीत की प्रबल सम्भवना वाले दावेदार को ही चुनावी समर में उतारा जाए। इसलिए बीजेपी की प्रदेश इकाई द्वारा भेजे गए दावेदारों के पैनल में शामिल प्रत्त्येक नाम पर गहन विचार-मंथन कर संभावित चुनौतियों और कसौटी पर उन्हें परखा जा रहा है।
उधर, पैनल और सर्वे के अलावा भी कई नामों पर विचार होने की चर्चाएं है। जिन दावेदारों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे उनमें पूर्व विधायक विजय बहादुर सिंह बुंदेला, ध्रुव प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री ललिता यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष पन्ना रविराज सिंह यादव, बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, घासीराम पटेल, किसान नेता उमेश सोनी, विधायक संजय पाठक, जिला सहकारी बैंक पन्ना के पूर्व अध्यक्ष एवं फायर ब्रांड नेता संजय नगायच, समाजसेविका नंदिता पाठक, पूर्व विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पन्ना माधवेंद्र सिंह, एडवोकेट विनोद तिवारी, रामऔतार पाठक बब्लू, जयप्रकाश चतुर्वेदी शामिल हैं। इसके अलावा खजुराहो के पूर्व सांसद स्वर्गीय जीतेन्द्र सिंह बुंदेला की पत्नी, अभिनेता राजा बुंदेला, पूर्व रीवा रियासत के महाराज पुष्पराज सिंह के नाम भी विचार की प्रक्रिया में आए हैं। कुल मिलाकर इतने नामों के बीच सबसे मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार का चयन करना भारतीय जनता पार्टी के लिए आसान नहीं है।
विदित हो कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के खजुराहो संसदीय क्षेत्र का नया स्वरुप वर्ष 2004 में चुनाव के पूर्व हुए परिसीमन से अस्तित्व में आया है। वर्तमान में इसके अंतर्गत तीन जिले छतरपुर, पन्ना और कटनी के क्रमशः आठ विधानसभा क्षेत्र- चंदला, राजनगर, पन्ना, गुनौर, पवई, बहोरीबंद, मुड़वारा, विजराघगढ़ आते है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने जिस तरह कविता सिंह के नाम पर मुहर लगाकर क्षेत्रीय प्रत्याशी की मांग को पूरा करते जनभावनाओं को अपने पक्ष में करने का दाँव चला है, उसके मद्देनजर इसकी काट के तौर पन्ना या कटनी जिले के किसी सुयोग्य नेता को उम्मीदवार घोषित करने को लेकर बीजेपी को गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। प्रत्याशी चयन में खजुराहो संसदीय क्षेत्र के जातिगत समीकरणों साधने की रणनीति भी भाजपा का मजबूत पक्ष साबित हो सकती है।
क्षत्रिय समाज से आने वाली कविता सिंह के कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद खजुराहो लोकसभा सीट पर भाजपा के रणनीतिकारों द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग और ब्राह्मण दावेदारों के नामों पर नए सिरे से मंथन किया जा रहा है। दरअसल, इस सीट के जातिगत समीकरणों पर गौर करें तो ओबीसी मतदाताओं की तादाद सर्वाधिक है। करीब 50 फीसदी से अधिक होने के कारण ओबीसी वोटर यहाँ निर्णायक स्थिति में हैं। अनुसूचित जाति को छोड़ दें तो इसके बाद ब्राह्मण मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी अपने गढ़ को बचाने के लिए पूर्व राजपरिवार से आने वाली क्षत्रिय प्रत्याशी कविता सिंह के सामने क्या इसी समाज के किसी दावेदार को मुकाबले में उतारती है या फिर जातिगत तथा क्षेत्रीयता के फैक्टर को ध्यान में रखते हुए किसी स्वच्छ छवि के लोकप्रिय ओबीसी या ब्राह्मण चेहरे को कड़ी चुनौती के रूप में पेश करती है।







मालूम हो कि समूचे पन्ना जिले में पिछले कई सालों से ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र पूर्ण रूपेण कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्तिथि अत्यंत ही दयनीय है। प्रति वर्ष इनके लिए आने वाले बजट का जिले में बंदरबाँट हो रहा है। इन स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए आने वाली सामग्री भी स्टॉफ के द्वारा अपने घरों में उपयोग की जा रही है। जो सामग्री-उपकरण आदि स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध हैं उसकी हालत अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो यदि ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की सामग्री का भौतिक सत्यापन ईमानदारी से कराया जाए तो आधी से अधिक सामग्री गायब मिलेगी। बहरहाल नई सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की ओर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। ताकि लोगों को इलाज के लिए महँगे अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाने को विवश न होना पड़े।
