बड़ी क्षति | रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर जिस तेंदुए को कड़ी मशक्कत से पकड़ा 24 घण्टे बाद उसकी हुई संदिग्ध मौत

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तेंदुए को पिंजरे में कैद कर ले जाते पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम के सदस्य।

* वन विभाग की लापरवाही या फिर दवा के रिएक्शन ने ली जान

* मंगलवार को जरुआपुर ग्राम में एक घर से पकड़ा गया था तेंदुआ

* किसान पर हमला करने के बाद एक घर में घुस गया था तेंदुआ

शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज   उत्तर वन मंडल पन्ना के वन परिक्षेत्र पन्ना अंतर्गत आने वाली केरवन बीट के ग्राम जरुआपुर से मंगलवार को वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने 10 घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद जिस तेंदुए को पकड़ा था 24 घण्टे बाद उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी स्वयं उत्तर वन मंडल के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने दी है। बुधवार 27 मार्च की शाम करीब 6:30 बजे तेंदुए की मौत वन विभाग की अभिरक्षा में होने की संक्षिप्त सूचना उनके द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई। चंद लाइनों के इस विवरण में उन्होंने यह नहीं बताया है कि तेंदुए की मौत अचानक कैसे और किन परिस्थितियों में हुई है। जबकि जरुआपुर ग्राम से पकड़े जाने के बाद तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ्य और सामान्य नजर आ रहर था। ऐसे में महज 24 घण्टे बाद उसकी मौत की दुखद खबर आने के बाद हर कोई हैरान है। इस असमान्य घटना को लेकर कई तरह की आशंकायें जताई जा रही हैं।
पिंजरे में कैद तेंदुए का जीवित अवस्था का फोटो।
कुछ लोगों का मानना है कि घर में घुसे तेंदुए को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित पकड़ने के बाद उसकी प्राथमिक स्तर समुचित देखभाल नहीं की गई। इस लापरवाही के ही कारण तेंदुए की मौत हुई है। यह संदेह भी जताया जा रहा है कि दवा के रिएक्शन के कारण तेंदुआ अचानक काल-कवलित हुआ है। हालाँकि, इसके उलट उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ का दावा है कि उक्त तेंदुए की पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता द्वारा बेहतर देखभाल की गई। और तेंदुए को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। बहरहाल वजह चाहे जो भी लेकिन एक बात स्पष्ट है कि पूर्ण व्यस्क तेंदुए की मौत वन विभाग के लिए बड़ी क्षति है। श्री यादव ने जानकारी देते हुए बतया कि मृत तेंदुए की उम्र लगभग 8-9 वर्ष थी। उसका पोस्टमार्टम गुरुवार 28 मार्च की सुबह 9:30 बजे डॉ. संजीव गुप्ता और उनकी टीम के द्वारा किया जाएगा। जिसकी आवश्यक व्यवस्थायें उनके द्वारा की जा रही है।

ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा था तेंदुआ

तेंदुए के रेस्क्यू ऑपरेशन को देखते ग्रामीण।
पन्ना के समीपी ग्राम जरुआपुर में मंगलवार 26 मार्च की सुबह करीब 4 बजे जंगल की और से आये एक तेंदुए ने स्थानीय किसान पंचम सिंह यादव के ऊपर हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके बाद उसने बकरी के सात नग मेमनों को अपना शिकार बनाया और फिर शोरगुल होने पर समीप स्थित घर में घुसकर छिप गया। गाँव में खूँखार तेंदुए हमले और उसके घर में घुसे होने की खबर फैलते ही जरुआपुर में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। सुबह करीब 9 वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को शुरू किया गया। 10 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब 4 बजे तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित पकड़ कर बड़े से पिंजरे में कैद किया गया। बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर स्मृति वन ले जाया गया था।
नरेश सिंह यादव, डीएफओ उत्तर वन मंडल पन्ना।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले पिछले कुछ समय से वन्य जीवों के शिकार और इंसानों पर उनके हमले की घटनाओं में चिंताजनक तेजी से इजाफा हुआ है। उधर, जिले के संरक्षित और सामान्य वन क्षेत्र में तैनात अधिकारी-कर्मचारी जंगल के अंदर तथा बाहर वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान करने के मोर्चे पर लगातार असफल साबित हो रहे हैं। करीब दो वर्ष पूर्व पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत शाहनगर-रैपुरा वन परिक्षेत्र के कई गाँवों में स्थानीय लोगों पर हमला करने वाले एक तेंदुआ को समय रहते रेस्क्यू न किये जाने के कारण भागते हुए कुएँ में गिरने से उसकी मौत हो गई थी। जिले के हालात इतने अधिक ख़राब हो चुके हैं कि पन्ना की बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीव खनन माफियाओं, शिकारी गिरोहों तथा वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले अपराधियों के निशाने पर है। इसके बाद भी वन अमले की उदासीनता और अकर्मण्यता जारी है।