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बाघ के हमले में तेंदूपत्ता श्रमिक की मौत

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प्रतीकात्मक फोटो

घायल अवस्था में लाते समय रास्ते में हुई मौत

तेंदुए के हमले में 16 ग्रामीण घायल

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बाघ और तेंदुए के हमलों से फैली दहशत

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश में गुरूवार 24 मई से वनकर्मियों और रेंजर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले ही दिन पन्ना जिले में बाघ और तेंदुए के हमले की सनसनीखेज खबरें आई है। जंगल में तेंदूपत्ता व लकड़ी लेने गये एक आदिवासी श्रमिक की बाघ के हमले में जहां दर्दनाक मौत हो गई वहीं पन्ना के ही रैपुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत एक तेंदुए ने आधा दर्जन गांवों में हमलाकर 16 ग्रामीणों को घायल कर दिया। बाघ के हमले की घटना जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 8 किलोमीटर दूर उत्तर वन मण्डल के अंतर्गत मनकी बीट की बताई जा रही है। उत्तर वन मण्डल के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने बताया कि बेटूलाल पिता धनकू गौंड 40 वर्ष निवासी ग्राम मनकी जंगल से लकड़ी लेेन गया था। जहां दोपहर करीब 2 बजे पीछे से आये एक बाघ ने बेटूलाल की गर्दन पर हमला कर उसे जमीन में पटक दिया। बेटूलाल के साथ रहे गोपाल आदिवासी व छोटेलाल आदिवासी के शोर मचाने पर हमलावर बाघ मौके से भाग खड़ा हुआ। अत्यंत गंभीर रूप से घायल बेटूलाल आदिवासी को लेकर उसके साथी जब वापिस गांव मनकी जाने लगे तभी रास्ते उसने दम तोड़ दिया। सूत्रों से पता चला है कि बेटूलाल जंगल से तेंदूपत्ता तोड़ने और लकड़ी लेने सुबह जंगल गया था। बाघ के हमले में आदिवासी श्रमिक की मौत की खबर मिलने के बाद पन्ना टाईगर रिजर्व सहित उत्तर वन मण्डल के अधिकारी मौके लिए रवाना हो चुके थे। समाचार लिखे जाने तक मृतक का शव मनकी गांव में ही रखा था। बाघ के हमले में बेटूलाल की मौत के बाद से उसके गांव में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में पन्ना टाईगर रिजर्व ने बाघ पुर्नस्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत बाघों के उजड़े हुए संसार को पुनः आबाद किये जाने के बाद बाघ के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने की यह पहली घटना है। पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की तादाद तेजी से बढ़ने के कारण वहां क्षेत्र कम पढ़ने लगा है। फलस्वरूप पार्क सीमा के बाहर बफर क्षेत्र से सटे सामान्य वन मण्डलों के जंगलों में बाघों का विचरण अब आम हो चुका है। कई वृद्ध व युवा बाघों ने तो पन्ना के सामान्य वन मण्डलों के जंगल में ही अपना इलाका बना रखा है।

तेंदुए के हमले में 16 ग्रामीण घायल

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गंभीर रूप से घायल 4 व्यक्ति कटनी के लिए रेफरल

पन्ना जिले के रैपुरा वन परिक्षेत्र में तेंदुए की दहशत

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दक्षिण वन मण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत गुरूवार तड़के एक तेंदुए ने हमला कर 16 लोगों को घायल कर दिया। घायलों में चार ग्रामीणों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद पड़ोसी जिला कटनी के लिए रेफरल किया गया है। तेंदुए के हमले की सुबह-सुबह खबर फैलने के बाद से ही क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। पवई के उप वन मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरूवार 24 मई 2018 को तड़के करीब 3ः30 बजे एक तेंदुआ जंगल से निकलकर ग्राम मुरता में घुस गया जहां गर्मी के चलते बाहर सो रहे 6 ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घायलों में वृद्ध, बच्चे और महिलायें शामिल है। घायलों की चींख-पुकार और ग्रामीणों के हल्लाबोल से तेंदुआ भागकर चन्हाई ग्राम पहुंचा जहां उसके द्वारा एक व्यक्ति को घायल किया गया। इसके पश्चात उक्त तेंदुआ लगातार आगे बढ़ते हुए आबादी क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों को घायल करता गया। रात्रि 3ः30 बजे से शुरू हुए तेंदुए के हमले सुबह करीब 6 बजे तक जारी रहे। जिसमें कुलुआखेरा अलौनी, झालाडुमरी, मुरता, बीरमपुरा व मक्केपाला में ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें लहुलुहान कर दिया।

15 किमी क्षेत्र के 6 गांवों में किया हमले-

श्री द्विवेदी ने बताया कि मुरता से लेकर बीरमपुरा तक लगभग 15 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित आधा दर्जन ग्रामों में तेंदुए द्वारा दहशत फैलाई गई। घायलों में रामसेवक पिता हल्कू आदिवासी निवासी अलौनी, वीरन पिता रतन सिंह निवासी मक्केपाला, बड़ी बहू पति सुखलाल आदिवासी निवासी चनहाई, फूलबाई पति विष्वनाथ आदिवासी, खेमवती आदिवासी, सुन्दर पति पहाड़ी आदिवासी, हल्के पिता गबडू आदिवासी, कुमारी रीना पिता जवाहर बसोर, कल्ला पिता उदूला बंजारा सभी निवासी ग्राम मुरता व किषोरी पिता लुलारे आदिवासी कुलुआखेरा आदि शामिल है।

तेंदुआ को पकड़ने चलाया जायेगा रेस्क्यू आॅपरेशन-

उप वन मण्डलाधिकारी पवई श्री द्विवेदी ने बताया कि वे सुबह करीब 7 बजे मौके पर पहुंच गये थे, सभी घायलों का प्राथमिक स्वास्थ्य रैपुरा में उपचार कराया गया। जहां चार घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए डाॅ. राजवीर लोहिया ने उन्हें कटनी के लिए रेफरल कर दिया। तेंदुए के हमले का षिकार बनी वृद्धा बड़ी बहु की हालत नाजुक बनी है। तेंदुए ने उसके चेहरे पर हमला करते हुए नाक और मुंह को बड़े हिस्से को बुरी तरह नोंच डाला है। पवई के उप वन मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने बताया कि हमलावर तेंदुए को पकड़ने के लिए पन्ना में रेस्क्यू टीम तैयार है लोकेषन मिलते ही उसे पकड़ा जायेगा।

कागजों पर बच्चों को बांट रहे मध्यान्ह भोजन

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बंद पड़ी जनवार के आंगनवाड़ी के बाहर बैठे बच्चे।

स्कूलों-आंगनवाड़ी केन्द्रों में लटक रहे ताले

ग्रीष्मकालीन अवकाश में ठप्प पड़ी मध्यान्ह भोजन व्यवस्था

पन्ना। रडार न्यूज  सरकारी स्कूलों में वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के बच्चों को ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी मध्यान्ह भोजन वितरित करने शासन के निर्देश है। लेकिन पन्ना जिले की शालाओं में इस पर ईमानदारी से अमल नहीं हो रहा है। जमीनी सच्चाई यह है कि 95 फीसदी शालाओं में ताले लटक रहे है। मध्यान्ह भोजन पकाने वाले समूह और शिक्षकों के बीच सांठगांठ के चलते दर्ज बच्चों को एमडीएम का वितरण कागजों पर किया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि मध्यान्ह भोजन वितरण की हर स्तर पर फर्जी रिपोर्टिंग की जा रही है ताकि बच्चों के निवालों की राशि को मिलकर डकारा जा सके। वहीं इस प्रचण्ड गर्मी के समय आंगनवाड़ी केन्द्रों में भी अघोषित अवकाश की स्थिति देखी जा रही है। कहीं केन्द्रों में ताले जड़े है तो कहीं पर बच्चे ही नदारत है। शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को लापरवाह और भ्रष्ट मैदानी अमला किस तरह पलीता लगा रहा है, गुरूवार को जिला मुख्यालय पन्ना के समीपी ग्राम जनवार में इसकी बानगी देखने को मिली।

आंगनवाड़ी केन्द्र जनवार –

रडार न्यूज की टीम समाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सुबह 8ः40 बजे जनवार की आदिवासी बस्ती पहुंची तो वहां आंगनवाड़ी केन्द्र में ताला लटक रहा था। केन्द्र के बाजू में स्थित हैण्डपम्प पर नहाने आये बच्चे वहां भीड़ होने के कारण अपना नम्बर आने के इंजतार में आंगनवाड़ी की सीढ़ियों में बैठे खेल रहे थे। पास में रहने वाली केशकली पत्नी बाना आदिवासी ने चर्चा के दौरान बताया कि आंगनवाड़ी में बच्चों को नाश्ता नहीं मिलता, दोपहर के समय सिर्फ भोजन मिलता है। केशकली की चार साल की बेटी का नाम इसी आंगनवाड़ी में दर्ज है। उसने बताया कि सहायिका सियाबाई आदिवासी सुबह करीब 10 बजे आंगनवाड़ी खोलती है। इस केन्द्र में पदस्थ कार्यकर्ता शोभा यादव पन्ना में रहती है और वे महीने में दो-चार दिन ही कुछ घंटों के लिए आती है।

आंगनवाड़ी केन्द्र नवीन झालर-

झालर के आंगनवाड़ी केन्द्र में लटकता ताला।

जनवार के समीप स्थित विस्थापित ग्राम नवीन झालर की आंगनवाड़ी भी बंद मिली। सुबह 9ः27 बजे केन्द्र पर ताला लटक रहा था। सहायिका जमुना यादव को उसके घर से बुलाकर जब केन्द्र न खुलने का कारण पूंछा तो बताया गया कि गर्मी अधिक होने के कारण बच्चे नहीं आते। दोपहर के समय कुछ बच्चे सिर्फ खाना खाने के लिए ही केन्द्र में आते है। यहां पर भी बच्चों को नाश्ता का वितरण नहीं हो रहा है। सहायिका जमुना यादव ने बताया कि उनके केन्द्र पर 0 से लेकर 6 वर्ष तक के कुल 20 बच्चे दर्ज है। इस केन्द्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नयनतारा श्रीवास्तव पन्ना में रहती है, जोकि यदाकदा ही नवीन झालर आती है। आंगनवाड़ी का अपना कोई भवन न होने से यह एक कच्चे जर्जर मकान में संचालित हो रही है।

मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र जनवार-

समाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को जानकारी देती आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विमलेश यादव।

नवीन झालर ग्राम से वापिस लौटते हुए पुनः जनवार पहुंचने पर मुख्य मार्ग किनारे प्राथमिक शाला भवन में संचालित मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र में प्रातः 10ः47 बजे तक एक भी बच्चा उपस्थित नहीं था। जबकि इस केन्द्र में 60 बच्चे दर्ज है। जिसमें 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 26 बताई गई है। केन्द्र में रसोईया के साथ बैठी कार्यकर्ता विमलेश यादव अपनी दैनिक रिपोर्टिंग की कागजी खानापूर्ति कर रहीं थी। गौर करने वाली बात यह है कि इस केन्द्र में ही अकेले 11 कुपोषित बच्चे दर्ज है। जिनमें से कुछ मध्यम श्रेणी के कुपोषित है। बच्चों की अनुपस्थिति के सवाल पर कार्यकर्ता ने बिना किसी लाग-लपेट के बताया कि गर्मी अधिक होने के कारण बच्चों को उनके अभिभावक केन्द्र पर नहीं भेजते। दोपहर में भोजन पकने पर कुछ बच्चों को बुलाकर खाना खिला देते है। इस केन्द्र पर भी बच्चों को नाश्ता न मिलने की बात सामने आई है।

नहीं होती सतत् निगरानी-

             मालूम हो कि वर्तमान में आंगनवाड़ी केन्द्रों की दैनिक रिपोर्टिंग मोबाईल एप्प के जरिये आॅनलाईन हो रही है। जिसमें दैनिक उपस्थिति से लेकर बच्चों के वजन, गृह भेंट, पोषण आहार वितरण आदि की जानकारी प्रतिदिन दर्ज की जाती है। मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र जनवार की कार्यकर्ता विमलेश यादव ने दैनिक रिपोर्टिंग की हकीकत बयान करते हुए कहा कि जिस दिन 10-12 बच्चे भोजन करने आते है उस दिन का फोटो अपलोड करतीं है। जिस दिन बच्चे कम होते है उस दिन का फोटो पोस्ट नहीं करतीं ताकि कम उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े न हो। इससे साफ जाहिर है कि व्यवस्था बेहतर बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के नाम पर रिपोर्टिंग के तौर-तरीकों में समय के साथ भले ही तकनीकी बदलाव हो चुका है लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। आंगनवाड़ी केन्द्रों की इस बदहाली के ही कारण पन्ना जिले के माथे पर लगे गंभीर कुपोषण, शिशु मृत्यु दर की अधिकता और बाल मृत्यु दर के कलंक मिट नहीं पा रहे है। आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन में व्याप्त भर्रेशाही के मद्देनजर क्षेत्रीय सुपरवाईजर और एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है।

शालाओं के नहीं खुलते ताले-

ग्रीष्मकालीन अवकाश में ठप्प पड़ी शालाओं में मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था।

                ग्राम नवीन झालर की प्राथमिक शाला और जनवार स्थित प्राथमिक व माध्यमिक शाला में ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय बच्चों को मध्यान्ह भोजन का वितरण नहीं हो रहा है। पृथ्वी ट्रस्ट के अध्यक्ष यूसुफ बेग व रविकांत पाठक से चर्चा के दौरान पहचान उजागर न करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि जब से गर्मी की छुट्टियां पड़ी है तब से एक भी दिन शाला के बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं बांटा गया है। आंगनवाडी के दो-चार बच्चों को घरों से लाकर मध्यान्ह भोजन वितरण की औपचारिकता पूरी की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि झालर और जनवार की शालाओं के जब ताले ही नहीं खुलते तो वहां मध्यान्ह भोजन वितरण का सवाल ही नहीं उठता।

इनका कहना है-

      ‘‘यह बात सही है कि कई आंगनवाड़ी केन्द्र नियमित रूप से नहीं खुल रहे है। उनकी कार्यकर्ता और सुपरवाईजर अपने मुख्यालय में निवास नहीं कर रही है। इन सभी के विरूद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संबंधितों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया जायेगा।‘‘
– रेखा बाला सक्सेना, परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास पन्ना।

       ‘‘जनवार-झालर की शालाओं में मध्यान्ह भोजन वितरण न होने की मुझे जानकारी नहीं है। सीएसी से बात करके तुरंत व्यवस्था शुरू कराई जायेगी।‘‘
-विष्णु त्रिपाठी, जिला परियोजना समन्वयक सर्वशिक्षा अभियान पन्ना।

सहकारी बैंक महाप्रबंधक 50 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

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संविदा कर्मचारी से परमानेंट करने मांगी थी घूस 

छतरपुर। रडार न्यूज  जिले का जिला सहकारी बैंक गत चार माह से सुर्खियों में है। ऑडिटर राजेंद्र यादव एवं आरके शर्मा को लोकायुक्त में पकड़े जाने का अभी मामला शांत नहीं कि बुधवार को महाप्रबंधक जेएस ठाकुर को  50 हजार की घूस लेते हुए  दबोच लिया। पकड़े गए महाप्रबंधक ने  एक संविदा कर्मचारी को परमानेंट करने के एवज में बैंक के महाप्रबंधक ने एक लाख रुपए की रिश्वत की मांग की थी । जिसे बुधवार को लोकायुक्त ने रंगे हाथो पकड़ लिया ।  छतरपुर में जिला सहाकारी बैंक में महाप्रबंधक के पद पर पदस्थ जे एस ठाकुर ने संविदा कर्मचारी संतोष कुशवाहा को परमानेंट करने के एवज में एक लाख रुपए बतौर रिश्वत मांगे थे। संतोष ने इस बात की शिकायत लोकायुक्त पुलिस सागर से की थी। लोकायुक्त पुलिस सागर निरीक्षक बी एम द्विवेदी अपनी पुलिस टीम के साथ 23 मई को छतरपुर पहुंचे। सहाकारी बैंक में पदस्थ जे एस ठाकुर को ने जैसे ही शिकायतकर्ता संतोष कुशवाहा से रिश्वत की राशि 50 हजार रुपए ली, तत्काल लोकायुक्त पुलिस टीम ने घेराबंदी करके महाप्रबंधक को रंगे हाथो दबोच लिया। लोकायुक्त पुलिस द्वारा बैंक में महाप्रबंधक को रंगे हाथो पकड़ने से बैंक में मौजूद अधिकारियो और कर्मचारियो के होश उड़ गए। लोकायुक्त पुलिस महाप्रबंधक के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है और भ्रष्टाचार निवारण एक्ट के तहत कार्यवाही कर रही है।

रिश्वत लेते दो पटवारी रंगे हाथ पकड़ाये

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लोकायुक्त पुलिस संगठन ने की कार्रवाई

सागर में रिश्वत लेते महिला पटवारी हुई गिरफ्तार

भोपाल। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के सागर जिले में लोकायुक्त पुलिस संगठन की टीम ने एक महिला पटवारी को 500 रूपये की रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। भूमि विक्रय का प्रतिवेदन और नक्शा बनाने के एवज में पटवारी रितु विरवैया ने ग्रामीण अशोक यादव से रिश्वत के रूप में 500 रूपये लिये थे। सागर संभाग के ही अंतर्गत आने वाले टीकमगढ़ जिले में लोकायुक्त पुलिस द्वारा की गई ट्रेप कार्यवाई में भी एक पटवारी के ही पकडे़ जाने की खबर मिली है। लोकायुक्त पुलिस सागर के निरीक्षक बीएम द्विवेदी ने बताया कि नामांतरण से संबंधित एक प्रकरण में ढिल्ला हल्का के पटवारी जानकी सूत्रकार को 2000 रूपये की घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। लोकायुक्त एसपी सुनील कुमार तिवारी ने घूसखोर महिला पटवारी की गिरफ्तारी के संबंध में बताया कि सेमाढाना निवासी अशोक यादव ने जमीनी बेंचने के लिए जैसी नगर तहसील के हल्का नम्बर 170 की पटवारी रितु विरवैया से भूमि का नक्शा बनवाने और प्रतिवेदन प्रदान करने के लिए आवेदन किया था। इसके एवज में महिला पटवारी द्वारा अशोक से 500 रूपये की रिश्वत की मांग की गई। इसकी शिकायत ग्रामीण ने लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय सागर में की। योजनाबद्ध तरीके से अशोक को 500 रूपये देकर पटवारी के घर भेजा गया। पूर्व चर्चानुसार अशोक ने जैसे ही 500 रूपये दिये तभी लोकायुक्त टीम ने दबिश देकर पटवारी रितु को रंगे हाथों गिरफतार कर लिया। रिश्वत के रूप में ली गई राशि जब्त करते हुए जब पटवारी के हाथ धुलवाये गये तो गुलाबी हो गये। इस मामले में लोकायुक्त पुलिस संगठन ने महिला पटवारी के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत् प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया है।

टीकमगढ़ में दो हजार की रिश्वत लेते पकड़ा पटवारी-

टीकमगढ़ जिले की पृथ्वीपुर तहसील के ग्राम मानपुरा, भेलसा के संतोष यादव से रजिस्ट्री का नामांतरण करने एवज में 2000 रूपये की रिश्वत लेते ढिल्ला हल्का के पटवारी जानकी सूत्रकार को लोकायुक्त पुलिस ने रंगे हाथ पकड़ा है। यह कार्रवाई तहसील के सामने स्थित पटवारी के किराये के मकान में की गई है। पूर्व चर्चानुसार संतोष यादव ने पटवारी के आवास में पहुंचकर जैसे ही उसे 2000 रूपये दिये तभी लोकायुक्त पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

प्रदेश के हित में रिसर्च को प्रोत्साहित करें- मंत्री श्री गुप्ता

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता ने मेपकास्ट की निजी विश्वविद्यालय के कुलपतियों की इंटरएक्शन बैठक को संबोधित किया।

 

भोपाल। रडार न्यूज मध्यप्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) और प्रदेश स्थित निजी विश्वविद्यालय प्रदेश के हित में रिसर्च को प्रोत्साहित करें। राजस्व विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने यहा बात मेपकास्ट और निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की इंटरएक्शन बैठक में कही। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति-प्रतिनिधि शामिल हुए। श्री गुप्ता ने कहा कि बैठक को सिर्फ चर्चा तक ही सीमित नहीं रखें। चर्चा के बाद निकलने वाले निष्कर्षों को कार्यरूप में परणित करने के भी प्रयास करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग करें। श्री गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए विषय निर्धारित किये जायें। बैठक में मेपकास्ट के महानिदेशक डॉ. नवीन चन्द्रा और विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश पाण्डेय ने भी विचार व्यक्त किये। विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने रिसर्च के लिए अनुदान और प्रोजेक्ट निर्माण आदि के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिये।

मानसून पूर्व पुनर्वास स्थलों पर सभी सुविधाएँ सुदृढ़ करें

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नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लाल सिंह आर्य ने नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की।

राज्य मंत्री श्री आर्य ने की नर्मदा घाटी पुनर्वास कार्यों की समीक्षा

भोपाल। रडार न्यूज  नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं से संबंधित पुनर्वास कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए नर्मदा घाटी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लाल सिंह आर्य ने निर्देश दिये हैं कि पुनर्वास स्थलों पर मानसून पूर्व सभी सुविधाएँ सुदृढ़ करें। श्री आर्य ने पुनर्वास कार्यों की जिलेवार जानकारी ली। बैठक में जानकारी दी गई कि सरदार सरोवर परियोजना के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार 60 लाख रूपये की पात्रता वाले 92 प्रतिशत परिवारों को धन राशि का भुगतान किया जा चुका है। प्रति परिवार 15 लाख रुपये की पात्रता वाले परिवारों में से 93 प्रतिशत परिवारों को भुगतान किया जा चुका है। राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य ने पुनर्वास स्थलों पर पुल-पुलिया पहुँच मार्गों के निर्माण की स्थिति की समीक्षा करते हुये कहा कि जो कार्य चल रहे हैं, उन्हे गति देकर मानसून पूर्व पूर्ण करना सुनिश्चित किया जाये। सरदार सरोवर परियोजना जलाशय क्षेत्र के मछुआरों को जलाशय से मत्स्याखेट करने के लिये आवश्यक प्रावधान किया जाये। श्री आर्य ने सरदार सरोवर परियोजना पुनर्वास स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था की समीक्षा भी की। इस दौरान उन्हें बताया गया कि परियोजना के 35 पुनर्वास स्थलों को सीधे नर्मदा से उद्वहन पेयजल योजनाओं द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाया जायेगा। इसके लिये एजेन्सी का निर्धारण हो गया है और कार्य आरम्भ हो चुका है। समीक्षा बैठक में क्षेत्रीय पुनर्वास आयुक्त सरदार सरोवर परियोजना प्रबल सिपाहा, संचालक पुनर्वास संजय गुप्ता, सदस्य अभियांत्रिकी आरपी मालवीय तथा विभिन्न जिलों से आये पुनर्वास अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में जैव विविधता को बढ़ावा देने की नई पहल

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राज्य जैव विविधता बोर्ड ने अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर राज्य मछली महाशीर संरक्षण के लिए खरगौन जिले के बड़वाह वन मंडल को पुरस्कृत किया।

पहली बार राज्य स्तरीय जैव विविधता पुरस्कार वितरित

भोपाल। रडार न्यूज अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर राज्य जैव विविधता बोर्ड ने जैव विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन देने की नई पहल की है। बोर्ड ने आज इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य कर रहे शासकीय-अशासकीय संस्थान, व्यक्ति और जैव विविधता वाले विभागों को राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार योजना-2018 के तहत पुरस्कृत किया। अपर मुख्य सचिव वन केके सिंह के मुख्य आतिथ्य में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख रवि श्रीवास्तव ने की। कार्यक्रम का संचालन बोर्ड के सदस्य सचिव आर श्रीनिवास मूर्ति ने किया।

एक छात्र एक पौधा लगायें अभियान के प्रमुख पुरस्कृत

अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर राज्य जैव विविधता बोर्ड ने एक छात्र एक पौधा लगाए अभियान के पं. उदित नारायण शर्मा को पुरस्कृत किया।

व्यक्तिगत श्रेणी में छिन्दवाड़ा के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवा निवृत्त शिक्षक पं. उदित नारायण शर्मा को प्रथम पुरस्कार के रूप में 3 लाख रूपये, प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी से पुरस्कृत किया गया। श्री शर्मा पिछले 38 सालों से एक छात्र एक पौधा लगाये अभियान का संचालन कर रहे हैं। स्कूली छात्र-छात्राओं में पर्यावरण जैव विविधता एवं जल संरक्षण जागरूकता के लिये वह अनवरत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने हरियाली गीत माला की भी रचना की है।

डॉ. कनोजिया ने भोपाल में विकसित किया वन

व्यक्तिगत श्रेणी में डॉ. डीपी कनोजिया को भोपाल की आवासीय कालोनी रचना नगर में साल, सागौन, शीशम, हर्रा, बहेड़ा, अचार, महुआ, गूलर, पाखर, पीपल, नीम आदि के 60 से अधिक पौधे रोपने के लिये 2 लाख रूपये के द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. कनोजिया पौधों से वृक्ष में तब्दील हो चुके पेड़ों की पिछले 20 सालों से नियमित सिंचाई और सुरक्षा कर रहे हैं। वहीं शासकीय संस्थागत श्रेणी में खरगौन जिले के वन मण्डल बड़वाह को मध्यप्रदेश की राज्य मछली महाशीर के संरक्षण एवं संवर्धन कर कृत्रिम प्रजनन द्वारा संख्या बढ़ाने के लिये द्वितीय पुरस्कार दिया गया।

मटकुली की जैवविविधता प्रबंधन समिति पुरस्कृत

जैव विविधता प्रबंधन समिति श्रेणी में एक लाख रूपये का पुरस्कार होशंगाबाद जिले की जैव विविधता प्रबंधन समिति मटकुली को दिया गया। समिति द्वारा जैव विविधता से आजीविका को जोड़ते हुए लेंटाना से फर्नीचर निर्माण, पॉलीथीन के स्थान पर नॉन वोवेन बेग बढ़ावा देने, पौधरोपण, गर्मियों में पक्षियों के लिये दाना-पानी इंतजाम और जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता के काम किये जा रहे है।

खरगौन के आस्था ग्राम ट्रस्ट प्रथम पुरस्कार-

अपर मुख्य सचिव वन श्री के.के. सिंह ने अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अशासकीय संस्थागत श्रेणी में खरगौन के आस्था ग्राम ट्रस्ट को 3 लाख रूपये प्रशंसा पत्र और ट्रॉफी से पुरस्कृत किया गया। ट्रस्ट वर्ष 1999 से बारह एकड़ बंजर भूमि पर वृक्षारोपण, वॉटरशेड प्रबंधन, जैविक खेती, ड्रिप इरीगेशन और केचुआ खाद निर्माण कर जैव विविधता से भरपूर क्षेत्र का विकास कर रहा है। ट्रस्ट ने क्षेत्र में जैव संसाधनों के संवहनीय उपयोग के लिये विविध प्रयास किये हैं।

मुरैना की समाजसेवी संस्था को द्वितीय पुरस्कार-

अशासकीय संस्थागत क्षेणी में दो लाख रूपये का द्वितीय पुरस्कार मुरैना के सुजाग्रति समाज सेवी संस्था को दिया गया। संस्था पिछले 15 सालों से जैव विविधता संरक्षण, संवर्धन, वृक्षारोपण के साथ विशेष रूप से चम्बल क्षेत्र में संकटग्रस्त औषधीय प्रजाति गुग्गुल के संरक्षण और संवर्धन के कार्य कर रही हैं।

अदभुत चित्रकारी करने वाले विद्यार्थी पुरस्कृत-

अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर अपर मुख्य सचिव श्री के.के. सिंह ने राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा आयोजित चित्र कला प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया।

बोर्ड द्वारा जैव विविधता संरक्षण एवं संवंर्धन के प्रति स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं को जागरूक करने के लिये गत् 12 मई को श्जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता एवं मानव अस्तित्वश् विषय पर चार श्रेणी में चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। कक्षा 1 से 5 तक की श्रेणी में शीतल गुप्ता, निरंजन थापा और तनीषा डोंगरे को क्रमशरू प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिया गया। कक्षा 6 से 8 तक की श्रेणी में कार्तिक शर्मा को प्रथम, प्रियल जैन को द्वितीय, मीत चावला को तृतीय, कक्षा 9 से 12 तक श्रेणी में रिचा शाक्य को प्रथम अन्तरिक्ष सेठिया को द्वितीय और आयुष विश्वकर्मा को तृतीय पुरस्कार दिया गया। कक्षा 12 से ऊपर की श्रेणी में विजय गहरवार को पहला, साबिर हलीम को दूसरा और शुभम वर्मा को तीसरा पुरस्कार मिला।

जैव विविधता दिवस के 25 वर्ष हुए पूरे-

अन्तर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के 25 साल पूरे होने पर इस बार संयुक्त राष्ट्र के निर्णयानुसार 25 साल – जैविक विविधता सम्मेलन – पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में इस अवसर पर कार्यशाला, सेमिनार, बैठक और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधान मुख्य संरक्षक शाहबाज अहमद, राजेश श्रीवास्तव, एमके सप्रा, जेके मोहन्ती, सुधीर कुमार, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के निर्देशक डॉ. पंकज श्रीवास्तव सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और विद्यार्थी उपस्थित थे। आभार डॉ. बकुल लाड ने प्रकट किया।

भारतमाला योजना: भोपाल-इंदौर के बीच बनेगा 6 लेन एक्सप्रेस-वे

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प्रतीकात्मक फोटो

एमपी में 5,987 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग का होगा निर्माण

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एमपीआरडीसी के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न

भोपाल। रडार न्यूज  केन्द्र सरकार की भारतमाला योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 5 हजार 987 किलोमीटर लंबाई के राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इस योजना में भोपाल-इंदौर 6 लेन एक्सप्रेस-वे और भोपाल बायपास की स्वीकृति भी दी गई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की अध्यक्षता में आज यहाँ सम्पन्न मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह, मुख्य सचिव बीपी सिंह भी उपस्थित थे। बैठक में मुख्यमंत्री श्री चैहान ने निर्देश दिये कि सड़क निर्माण के कार्य गुणवत्तापूर्ण और समय-सीमा में पूरे किये जायें।

जिला मार्गों का होगा उन्नयन-

बैठक में बताया गया कि एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद से प्रदेश के 1487 किलोमीटर राज्य राजमार्गों तथा 2365 किलोमीटर मुख्य जिला मार्गों का उन्नयन किया जायेगा। इसमें 6 हजार करोड़ रूपये व्यय किये जायेंगे। प्रदेश में सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा 13 हजार 166 किलोमीटर लंबाई की सड़कें बनाई गई हैं तथा 5 हजार 51 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का कार्य चल रहा है। सीधी-सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण इसी वर्ष अक्टूबर माह तक पूरा हो जायेगा। देवास बायपास का निर्माण कार्य चल रहा है। दमोह-जबलपुर और सागर-दमोह मार्ग की क्षमता वृद्धि और 2 लेन के प्रस्ताव बनाये जायेंगे।

सीएसआर पर खर्च होगें एक करोड़-

निगम द्वारा गत वर्ष कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी गतिविधि के तहत करीब एक करोड़ रूपये के कार्य किये गये हैं। इस वर्ष भी निगम द्वारा इतनी ही राशि से कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी गतिविधि के तहत किये जायेंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन केके सिंह, प्रमुख सचिव लोक निर्माण मोहम्मद सुलेमान, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव खनिज नीरज मण्डलोई और सड़क विकास प्राधिकरण के प्रबंध संचालक डीपी आहूजा भी उपस्थित थे।

पन्ना के बाघों और जंगल की कौन करेगा सुरक्षा ?

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वन कर्मचारी संघ ने किया 24 से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

पन्ना। रडार न्यूज पुलिस कर्मचारियों-अधिकारियों की तरह वेतन-भत्तों की मांग कर रहे वन कर्मचारी संघ की सरकार से वार्ता बेनतीजा रहने पर मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ ने 24 मई 2018 से अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का निणर्य लिया है। इस प्रांतव्यापी आंदोलन के तहत पन्ना में भी वन कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने की तैयारी शुरू कर दी है। वन कर्मचारियों की हड़ताल इस बार ऐसे समय पर हो रही जब प्रदेश के कई जिलों में तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य चल रहा है, जिसमें पन्ना भी शामिल है।

महीप कुमार रावत, जिलाध्यक्ष, वन कर्मचारी संघ पन्ना

वन कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने बताया कि 20 मई को भोपाल में हुई बैठक में लंबित मांगों के निराकरण को लेकर हड़ताल पर जाने के सामुहिक निर्णय से सभी वन कर्मचारियों को तत्परता से अवगत कराते हुए उनसे यह कहा गया था कि वे तेंदूपत्ता संग्रहण परिदान को तत्काल क्रेता को सौंप दें, ताकि उनके ऊपर किसी तरह की कोई जबाबदारी न रहे। ऐसा इस लिए कहा गया क्योंकि हड़ताल पर जाने की स्थिति में परिदान में कमी या गड़बड़ी होने के आरोप लगाकर वनकर्मियों से बाद में रिकवरी की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि वनकर्मियों के हड़ताल पर जाने से पन्ना सहित समूचे प्रदेश में बाघों, दूसरे वन्यप्राणियों और जंगलों की सुरक्षा कौन करेगा, यह महत्वपूर्ण सवाल फिलहाल अनुत्तरित है। शासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए क्या प्रबंध किये गये इसकी कोई जानकारी नहीं है। वन कर्मचारी संघ अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने 24 मई से प्रस्तावित हड़ताल के प्रभाव के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इस बार की हड़ताल आर-पार के संघर्ष जैसी होगी। जिसका व्यापक असर आने वाले दिनों में देखा जायेगा। दरअसल वर्तमान में तेंदूपत्ता संग्रहण के साथ-साथ संग्राहकों को बोनस वितरण और चरण पादुका आदि सामग्री वितरण के कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं, हड़ताल शुरू होने पर उक्त सभी कार्य पूरी तरह ठप्प हो जाएगें। इसके अलावा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में वन्यजीवों को पानी की आपूर्ति भी बाधित होगी। श्री रावत ने बताया कि प्रदेश वन कर्मचारी संघ की बैठक में हड़ताल की रूपरेखा को लेकर यह निर्णय लिया गया है कि इस बार हड़ताल तभी समाप्त होगी, जब सरकार की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि हमारे मंच पर आकर लंबित मांगों का समयसीमा में निराकरण करने का आश्वासन देंगे। उन्होंने कहा कि हमारी जायज मांगे जब तक पूरी नहीं होती, तब तक हम एकजुटता के साथ संघर्ष करते रहेंगे।