Home Blog Page 242

नाकाम हुआ इश्क तो प्रेमी युगल ने दी जान

0

पन्ना के धाम मोहल्ला में नाबालिग प्रेमी जोड़े खाया जहर

पन्ना। साथ जीना परिवार और समाज को जब मंजूर नहीं हुआ, तो हताश और निराश होकर प्रेमी युगल ने साथ मरने का फैसला कर अपनी जान दे दी। नाबालिग प्रेमी जोड़े की मौत की स्तब्ध कर देने वाली घटना पन्ना की है। यहां के धाम मोहल्ला में रहने वाले मनीष कुशवाहा पुत्र संजय कुशवाहा 17 वर्ष और पड़ोस में रहने वाली जानकी गुप्ता पुत्री राकेश गुप्ता 16 वर्ष की जहर खाने से मौत हो गई। दोनों को लेकर उनके परिजन शाम करीब 7 बजे जब जिला अस्पताल पहुंचे तो वहां तैनात ड्यूटी डाॅक्टर ने परीक्षण करने के उपरांत उन्हें मृत घोषित कर दिया। चंद मिनट बाद ही यह दुखद खबर शहर में आग की तरह फैल गई। दो नाबालिग पड़ोसियों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने को लेकर आम चर्चा है कि उनके बीच लम्बे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। कथित तौर पर दोनों के परिजनों को उनका मिलना-जुलना मंजूर नहीं था। साथ जीने के इनके हसीन सपने जब परिवार की बंदिशों के कारण बिखरने लगे, तो उसकी हताशा में अप्रत्याशित रूप से मौत को गले लगा लिया। घटना के बाद से पीड़ित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था, कि उनके बच्चे ही उन्हें कभी न भूलने वाला जख्म देकर इस तरह दुनिया को अलविदा कह जाएंगे। इन घटनाओं पर कोतवाली थाना पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम किया है। नगर निरीक्षक अरविंद कुजूर ने बताया कि संदिग्ध अवस्था में मृत दोनों नाबालिग पड़ोसी है। नाबालिग युवक कक्षा 12वीं और लड़की कक्षा 10वीं में अध्यरत थी। उनके बीच प्रेम प्रसंग होने की चर्चाएं हैं, लेकिन जब तक जांच में यह बात सामने नहीं आती, तब तक आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।

2

शिवराज के पुतले की मांग में भरा सिंदूर, पहनाई चूड़ियाँ

0

वन कर्मचारी-अधिकारी संघ ने किया प्रदर्शन

पांचवें दिन भी जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल

वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करने में अधिकारी हो रहे फेल

पन्ना। रडार न्यूज लंबित मांगों के निराकरण को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे वन कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा ने अपनी मांगे पूरी होने तक इस भीषण गर्मी में अपने संघर्ष को जारी रखने का ऐलान किया है। हड़ताल के पांचवे दिन पन्ना में वन कर्मचारियों ने यहां जगात चौकी चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुतले की मांग में सिंदूर भरा और फिर चूडि़यों का हार पहनाकर जमकर नारेबाजी की गई। वन कर्मचारियों-अधिकारियों के इस अनूठे प्रदर्शन को देखने के लिए उत्सुकतावश चौराहे पर कुछ समय के लिए राहगीरों की भीड़ जमा हो गई।

आग में जल रहे जंगल-

    उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में वन कर्मचारियों-अधिकारियों की संयुक्त हड़ताल का पहले ही दिन से व्यापक असर देखा जा रहा है। पिछले दिनों हड़ताल के दौरान तेंदुआ, बाघ और भालू के हमले में 21 लोगों के घायल होने तथा एक तेंदूपत्ता श्रमिक बेटूलाल आदिवासी की मौत से वन क्षेत्र से सटे ग्रामों में हाहाकार मचा है। वन्यजीवों के हमले की दहशत के चलते लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे है। वनकर्मियों की हड़ताल से तेंदूपत्ता संग्रहण का कार्य भी काफी प्रभावित है। प्रशिक्षित मैदानी वन कर्मचारियों और रेंजर्स के हड़ताल पर होने के कारण पन्ना टाईगर रिजर्व के जंगलों में लगी आग भी समय रहते बुझ नहीं पा रही है। स्थिति यह है कि वर्तमान में पार्क क्षेत्र का जंगल कई स्थानों पर आग से धधक रहा है। उधर हड़ताली कर्मचारी हर गुजरते दिन के साथ अपने आंदोलन को तेज कर रहे है।

अब मामा भी पछतायेगा-

सोमवार 28 मई को पन्ना के जगात चौकी चौराहे पर हड़ताली वन कर्मचारियों और अधिकारियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के प्रति अपना आक्रोश प्रकट करते हुए उनके पुतले का महिला की तरह श्रृंगार कर सिंदूर से मांग भरी और फिर प्रतीकात्मक चूडि़यों का हार पहना गया। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए जमकर नारेबाजी की। सर्वविदित है कि बेहद कठिन परिस्थितियों में जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा करने वाले वनकर्मी पुलिस एवं राजस्व विभाग के कर्मचारियों के समान वेतन तथा सुविधायें देने की मांग कर रहे है। मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने चेतावनी भरे अंदाज में इशारों-इशारों में कहा कि वन कर्मचारियों की उपेक्षा करने वाले मामा को भी इस बार पछताना पड़ेगा। समूचे प्रदेश के वन कर्मचारी-अधिकारी एवं अन्य विभागों के कर्मचारी और उनके परिजन समय आने पर अपनी ताकत का बखूबी एहसास करायेंगे।

ये रहे शामिल-

आज के प्रदर्शन में मुख्य रूप से शिशुपाल अहिरवार, जियालाल चौधरी, रमाकांत गर्ग, देवेश कुमार गौतम, बीके खरे, नंदा प्रसाद अहिरवार, विनोद कुमार माझी, रमाकांत त्रिपाठी, राजकुमार अहिरवार, आरएस नर्गेश, ओमप्रकाष शर्मा, केके विश्वकर्मा, आदित्य प्रताप सिंह, रामऔतार चौधरी, दुलारे चौधरी, रामकृपाल, रामदुनिया सेन, रम्मू अहिरवार, प्रेेम नारायण वर्मा व श्रीनिवास पाण्डेय आदि शामिल रहे।

2

केन की कोख छलनी कर रहे रेत माफिया

0
रोक के बावजूद केन नदी में मशीनों से जारी है रेत का अवैध उत्खनन।

स्वीकृत क्षेत्र के बाहर चल रही खदानें

एनजीटी के निर्देशों को ताक पर रखकर मशीनों से निकाल रहे रेत

पन्ना।रडार न्यूज बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना, छतरपुर और बांदा जिले की जीवन रेखा कहलाने वाली केन नदी का अस्तित्व संकट में है। देश की चुनिंदा स्वच्छ जल राशि वाली नदियों में शुमार सदानीरा केन की रेत लूटने की होड़ में माफिया इसे बरसाती नदी में तब्दील करने में तुले है। पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में रेत की संगठित लूट चरम पर है। यहां केन नदी पर स्वीकृत खदानों के बाहर कई किलोमीटर में दैत्याकार मशीनों से पानी के अंदर की रेत निकाली जा रही है। कुछ खदानें तो ऐसी है कि जिनमें रेत कई माह पूर्व ही समाप्त हो चुकी है बावजूद इसके उन खदानों के ई-पिटपास जारी करने पर अब तक कोई रोक नहीं लगाई गई। फलस्वरूप केन नदी में अवैध उत्खनन कर निकाली जाने वाली रेत के परिवहन का गोरखधंधा इन्हीं खदानों के ई-पिटपास बड़े मजे से चल रहा है। विश्वस्त्र सूत्रों से हांसिल जानकारी के अनुसार अजयगढ़ क्षेत्रांतर्गत वर्तमान में केन नदी पर जिगनी, फरस्वाहा, सुनहरा, बाबा का पुरवा, चंदौरा, उदयपुर, मझगांय, बीरा क्रमांक-02, बीरा क्रमांक-01 चांदीपाठी, खरौनी, बरौली, रामनई, बरकोला एवं केन की सहायक नदियों रूंज तथा बागे नदी में हरदी, टिकुरिहा, मगरदहा, खोरा, परनियापुरवा, अमरछी, सहित अन्य स्थानों पर पूर्णतः अवैध तरीके से प्रतिदिन सैकड़ों घन मीटर रेत निकाली जाती है। क्षेत्रीय राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों तथा पन्ना में बैठे खनिज विभाग के अफसरों की सांठगांठ से माफिया नदियों के विनाश की इबारत लिख रहे है। बीच-बीच में होने वाली प्रशासन की कार्यवाही महज दिखावे तक ही सीमित है। जिसका नजीता यह है कि रेत के अवैध उत्खनन पर रोक लगने के बजाय नदी के सूखने के साथ ही यह दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रहा है। रेत की इस लूट में सबकी अपनी-अपनी हिस्सेदारी है। खदान क्षेत्रों में फैली चर्चाओं पर भरोसा करें तो उक्त सभी स्थानों पर होने वालों अवैध उत्खनन में स्थानीय दबंग, आपराधिक तत्व, माफिया, भाजपा-कांग्रेस के नेता व जनप्रतिनिधि एवं पत्रकार शामिल बताये जा रहे है।

इन खदानों में नहीं बची रेत-

अजयगढ़ क्षेत्र में केन नदी पर स्वीकृत रेत खदान बीरा क्रमांक-01, बीरा क्रंमाक-02, चंदौरा, बरकोला, मझगांय, सुनहरा, उदयपुर खदान के स्वीकृत रकबे में रेत कई माह पहले ही खत्म हो चुकी है। इसकी जानकारी खनिज विभाग समेत अजयगढ़ और पन्ना के प्रशासनिक अधिकारियों को भी है। लेकिन खदान ठेकेदारों से होने वाले ‘‘फीलगुड‘‘ के चक्कर में अब तक न तो इनके ई-पिटपास पर रोक लगाई गई और न ही जिम्मेदार अफसरों ने मौके पर जाकर यह देखना उचित समझा कि खदान में रेत खत्म होने के बावजूद प्रतिदिन इतनी बड़ी मात्रा में रेत कहां से निकाली जा रही है। वहीं धरमपुर क्षेत्र में रूंज और बागे नदी पर एक भी खदान स्वीकृत न होने के बावजूद सत्ताधारी दल भाजपा के नेता, उनके परिजन और स्थानीय दबंगों ने रेत निकालने के लिए कई किलोमीटर में नदियों में खुदाई कर उन्हें खोखला कर दिया है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि बड़े क्षेत्र में दोनों ही नदियां सूख चुकी है।

खुलेआम चल रहीं मशीनें-

स्वीकृत क्षेत्र के बाहर चल रहीं अधिकांश रेत खदानें।

मशीनों से रेत के उत्खनन पर एनजीटी की रोक के बावजूद प्रशासन, पुलिस और सत्ता का संरक्षण प्राप्त माफिया केन और उसकी सहायक नदियों की ज्यादा से ज्यादा रेत निकालने के लिए दैत्याकार मशीनों से इन नदियों का सीना ही नहीं बल्कि उनकी कोख भी छलनी कर रहे है। जमीनी हकीकत यह है कि केन नदी के जिगनी घाट में एक भी खदान स्वीकृत न होने के बावजूद वहां चंदौरा खदान ठेकेदार, स्थानीय दबंग, भाजपा संगठन से जुडे़ लोग रात-दिन जेसीबी-पोकलैण्ड मशीनें चलाकर रेत निकाल रहे है। चांदीपाठी खदान में भी दिनदहाड़े लिफ्टर और मशीनें चल रही है। जबकि अन्य खदानों बरकोला, रामनई, बरौली, खरौनी, उदयपुर, बाबा का पुरवा, फरस्वाहा, मझगांय, बीरा क्रमांक-02 और 01 में शाम ढलते ही नदी में मशीनें उतार दी जाती है।

कम हो रही जलधारण क्षमता-

एक ट्रक में बालू लोड करती जेसीबी मशीन।

शिवराज सरकार में मध्यप्रदेश में अवैध उत्खनन लगातार तेजी से बढ़ा है। विभिन्न सर्वेक्षणों के नतीजे इसका प्रमाण है। अब तो विपक्षी दलांे के नेता भी खुलकर शिवराज सरकार पर खेती के बजाय रेती को लाभ का धंधा बनाने का आरोप लगा रहे है। पन्ना जिले में हर तरफ मची खनिज सम्पदा की बेतहाशा लूट को देखते हुए यही प्रतीत हो रहा है कि शासन और प्रशासन ने माफियाओं को पूरी छूट दी रखी है। एक तरफ जहां खुलेआम अवैध पत्थर खदानें चल रही वहीं दूसरी ओर केन नदी से तकरीबन 20 स्थानों पर अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है। जिसका दुष्परिणाम यह है कि नदी की जलधारण क्षमता तेजी से कम हो रही है। केन नदी पर विस्तृत अध्ययन करने वाले सैनड्रप संस्था के भीम सिंह रावत व वेदितम संस्था के सिद्र्धाथ अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इन दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं की अध्यनरत रिपोर्ट बताती है कि मशीनों से पानी के अंदर की रेत निकाले जाने के कारण केन के जलीय जीव-जन्तु, वनस्पति तेजी से समाप्त हो रही है। इसका सीधा दुष्परिणाम नदी की जैविविधता पर पड़ रहा है। साथ ही केन नदी पर आश्रित मछुआरों और नदी किनारे खेती करने वाले किसानों की समस्यायें लगातार बढ़ रही है। इनका मानना है कि समय रहते केन को नहीं बचाया गया तो केन नदी भी अपनी सहायक नदियों की तरह बरसाती नदी बन सकती है।

न फोन उठाया न मैसेज का जबाब दिया-

केन नदी रेत के अवैध उत्खनन के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उनके फोन रिसीव नहीं हुए और मैसेज का कोई जवाब नहीं मिला। पन्ना के जिला खनिज अधिकारी संतोष सिंह, कलेक्टर मनोज खत्री व सागर संभाग के कमिश्नर मनोहर दुबे को काॅल करने पर उनका मोबाईल रिसीव नहीं हुआ। वहीं कलेक्टर श्री खत्री को वाट्सएप्प पर जब मैसेज भेजा गया तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। समझ नहीं आता कि जल संरक्षण और संवर्धन की बात करने वाले प्रशासनिक अधिकारी और सरकार के नुमाईंदे केन नदी साथ हो रहे अत्याचार पर खामोश क्यों है।

2

प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हुआ दतिया – डॉ. मिश्र

1
जनसम्पर्क एवं जल-संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दतिया में सिंधी समाज के अभिनंदन समारोह को संबोधित किया।

भोपाल। जनसम्पर्क एवं जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने कहा है कि दतिया अब प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। दतिया शांति का टापू बनकर उभरा है। दतिया में व्यापारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। मेडिकल कॉलेज, रेलवे ओवर ब्रिज, हवाई पट्टी से दतिया के चहुँमुखी विकास के द्वार खुले हैं। उन्होंने आज संतराम धाम, दतिया में आयोजित सिंधी समाज के सम्मेलन में यह बात कही।

          डॉ. मिश्र ने सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित सामाजिक समरसता कार्यक्रम में कहा कि आज सामाजिक समरसता पर विचार करने की जरूरत है। हमें निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर काम करना होगा। सभी को निजी जीवन में भी सद्भावना को प्राथमिकता देना होगा। कार्यक्रम में सामाजिक समरसता में विशेष योगदान के लिए प्रभुदयाल अहिरवार सहित विभिन्न समाज-सेवियों को शॉल-श्रीफल से सम्मानित किया गया।

2

माही नदी नर्मदा से लिंक होगी – शिवराज

0
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धार जिले मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने धार जिले के मांगोद में असंगठित श्रमिक एवं तेन्दूपत्ता संग्राहक सम्मेलन को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री द्वारा धार जिले में 290 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन

धार जिले के मांगोद में असंगठित श्रमिक और तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन सम्पन्न

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने रविवार को धार जिले के मांगोद में हुए असंगठित श्रमिक एवं तेंदूपत्ता संग्राहक सम्मेलन में कहा कि माही नदी को नर्मदा नदी से लिंक किया जायेगा। प्रदेश में किसानों को गेहूँ पर 265 रुपये प्रति क्विंटल, लहसुन पर 800 रुपये प्रति क्विंटल और प्याज पर 400 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि उनके बैंक खातों में पहुँचाई जायेगी।

हर साल बनेंगे 10 लाख मुख्यमंत्री आवास-

मुख्यमंत्री श्री चैहान ने कहा कि प्रत्येक गरीब व्यक्ति को पट्टा देकर रहवासी जमीन का मालिक बनाया जायेगा। प्रदेश में आगामी 4 वर्षों में 37 लाख 50 हजार गरीबों को मकान उपलब्ध करवाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास योजना में प्रदेश में हर वर्ष 10 लाख आवास बनाकर गरीबों को दिये जायेंगे। श्री चैहान ने मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना की जानकारी देते हुए कहा कि योजना में असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को लाभान्वित किया जायेगा। हितग्राही का सत्यापन स्वयं हितग्राही करेगा। उन्होंने गरीब वर्गों के बच्चों की शिक्षा व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस राज्य सरकार भरेगी। हर गरीब के बेटा-बेटी को उच्च शिक्षा ग्रहण करने का मौका मिलेगा। एक लाख बच्चों को स्व-रोजगार से जोड़ा जायेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में गरीब वर्ग के लोगों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। श्री चैहान ने लोगों से अपील की कि योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठायें और प्रदेश के विकास में भरपूर सहयोग प्रदान करें।

290 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात-

मुख्यमंत्री श्री चैहान ने धार जिले में 145 करोड़ की लागत के विकास और निर्माण कार्यों का लोकार्पण और करीब 145 करोड़ की लागत के कार्यों का भूमि-पूजन किया। श्री चैहान ने सम्मेलन में 13 हजार से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के हित-लाभ वितरित किये। आठ हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण-पादुका और पानी की कुप्पी प्रदान की। धार जिले के 4975 भूमिहीनों को भू-अधिकार पट्टे वितरित किये। सम्मेलन में जिला प्रभारी मंत्री अंतर सिंह आर्य, सांसद सुभाष पटेल, विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, श्रीमती रंजना बघेल, वेलसिंह भूरिया, भँवर सिंह शेखावत, कालू सिंह ठाकुर, धार जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मोहन पटेल और बड़वानी जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती लतादेवी रावत, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

2

पोस्‍टर देख कर रो पडे संजय दत्‍त

0

नई दिल्ली। रडार न्यूज़ फ़िल्मी परदे पर कई भूमिका अदा कर चुके संजय दत्त की बायोपिक संजू चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में रणबीर कपूर संजू बाबा के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म के कई पोस्टर और टीजर सामने आ चुके हैं। जिनमें रणबीर कपूर हूबहू संजू बाबा लग रहे हैं। इसी बीच फिल्म का एक और पोस्टर रिलीज किया गया है। इस पोस्टर में पहली बार रणबीर परेश रावल के साथ दिखे हैं। बता दें कि फिल्म में परेश रावल संजय दत्त के पिता सुनाल दत्त का किरदार निभा रहे हैं। बाप-बेटे का ये पोस्टर बेहद भावुक कर देने वाला है। क्योंकि इसमें संजय दत्त का किरदार निभा रहे रणबीर किसी बच्चे की तरह अपने पिता से लिपट कर रोते नजर आ रहे हैं। इस पोस्टर को देख कर संजय दत्त भी भावुक हो गए और उनकी ऑंखें भी नाम हो गई।

2

वाट्सएप पर कैन्द्रिय मंत्री के बेटे को मिली धमकी

0
पंकज सिंह

नई दिल्ली। रडार न्‍यूज सोशल मीडिया के बढते दौर में अब अपराधी भी इसका उपयोग कर रहे हैं। ताजा मामला कैन्द्रिय मंत्री के बेटे को वाट्रसएप पर धमकी का है। अभी तक तो आम लोगों को फिरौती के लिए धमकी मिलती थी। लेकिन अब विधायक को ही धमकी मिलने लगी है। असल में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा से भारतीय जनता पार्टी विधायक पंकज सिंह को विदेशी वॉट्सऐप नंबर से 10 लाख रुपये देने की धमकी मिली है। पंकज सिंह ने एक वेबसाइट को जानकारी देते हुए बताया कि जिस तरह का मेसेज अन्य विधायकों को आया था वही मेसेज मुझे भी मिला। इस पूरी घटना की जानकारी मैंने अपनी विधानसभा क्षेत्र के डीएम को दे दी है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो पंकज सिंह को फिरौती के लिए मैसेज 22 मई को आया था। ऐसा नहीं है कि ये पहले नेता है, जिन्हें धमकी मिली हो। बल्कि इससे पहले कई बीजेपी विधायकों को वॉट्सएप पर इस तरह की धमकी दिए जाने की बात सामने आ चुकी है। पुलिस ने मैसेज की लिखावट से अंदाजा लगाया कि ये शख्स पूर्वांचल का है। उसने कई विधायकों को विदेश के नम्‍बर से मैसेज भेजा है और विडियो कॉलिंग कर धमकी भी दी है। पुलिस इसी नंबर के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पुलिस की मानें तो महोली के विधायक शशांक त्रिवेदी ने महानगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। लखनऊ उत्तरी से बीजेपी विधायक नीरज बोरा, मोहम्मदी के विधायक मृगेंद्र प्रताप सिंह, डिबाई की विधायक अनीता लोध और गोरखपुर के चिल्लूपार से पूर्व विधायक राजेश त्रिपाठी ने पुलिस अधिकारियों को शिकायत देकर इस बारे में जानकारी दी है।

2

रेत की तस्करी- करोडों के ई-पिटपास बिक्री का भण्डाफोड़

0
प्रतीकात्‍मक फोटो

छतरपुर में स्वीकृत है डम्प, पन्ना में बेंचे गये पिटपास

प्रशासन की मिलीभगत से सालभर से चल रहा था फर्जीवाड़ा

पन्ना। रडार न्यूज खनिज सम्पदा के बेइंतहां दोहन के मामले में बुन्देलखण्ड का बेल्लारी बन चुके पन्ना जिले में पत्थर की अवैध खदानों से लेकर रेत की व्यापक तस्करी में करोड़ों के ई-पिटपास की अवैध बिक्री का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पन्ना की केन नदी में लम्बे समय से चल रही अवैध खदानों से निकलने वाली रेत के परिवहन के लिए पड़ोसी जिला छतरपुर के भैरा स्थित डम्प के पिटपास खुलेआम बेंचे जा रहे थे। करीब एक साल से चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा अब जाकर हुआ है। शनिवार को अजयगढ़ थाना के निरीक्षक वीरेन्द्र बहादुर सिंह की सूचना पर किशनपुर में स्थित अशोक पटेल के मकान में संचालित भैरा डम्प के आॅफिस में छापामार कार्यवाही करते हुए पिछले दो दिनों में जारी किये गये ई-पिटपास जब्त किये है। इस मामले में पुलिस ने आॅफिस में मौजूद अशीष पिता राकेश शुक्ला 25 वर्ष को गिरफतार किया है। पुलिस ने ई-पिटपास जारी करने में उपयोग होने वाले लेपटाॅप, प्रिंटर व एक रजिस्टर भी जब्त किया है। जिसमें माह फरवरी 2018 से लेकर अब तक जारी किये गये ई-पिटपास का विवरण दर्ज है।

एक आरोपी गिरफतार, मामला दर्ज-

पुलिस टीम के साथ आरोपी एवं जब्‍त सामग्री

गौरलबत है कि भैरा डम्प पड़ोसी जिला छतरपुर में स्वीकृत है। जबकि इसके भण्डारण ठेकेदार द्वारा गैर कानूनी तरीके से पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र से निकलने वाली अवैध रेत के परिवहनकर्ताओं को ई-पिटपास बेंचे जा रहे थे। इसके लिए अजयगढ़ में बकायदा आॅफिस संचालित किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने आशीष शुक्ला सहित भैरा डम्प से संबंधित व्यक्तियों के विरूद्ध आईपीसी की धारा 420 के तहत् धोखधड़ी करने का मामला दर्ज किया है। अजयगढ़ टीआई वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने एक सवाल के जवाब में रडार न्यूज को बताया कि भण्डारण ठेकेदार द्वारा जारी किये जाने वाले ई-पिटपास फर्जी या वैध है इसकी जांच हेतु खनिज विभाग छतरपुर से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जायेगी। पन्ना जिले में अब तक कितने पिटपास जारी किये गये है इसका पता जांच पूर्ण होेने पर ही चलेगा। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया दूसरे जिले में अवैध तरीके से पिटपास की बिक्री कर रेत की तस्करी को बढ़ावा देने पर कार्यवाही की गई है। ई-पिटपास के दुरूपयोग और बड़े पैमाने पर रेत की तस्करी का यह खेल सालभर से जिले के खनिज विभाग व अजयगढ़ के राजस्व-पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था।

6 से 8 हजार में जारी होता था पिटपास-

रेत के कारोबार से जुड़े सूत्रों की मानें तो भैरा डम्प द्वारा जारी किये पिटपासों पर केन नदी की हजारों ट्रक रेत का अब तक परिवहन हो चुका है। छापामार कार्यवाही में पकड़े गये आशीष शुक्ला पिता राकेश शुक्ला निवासी खडेहा थाना सरबई जिला छतरपुर ने पूंछतांछ में अजयगढ़ पुलिस को बताया कि प्रति घन मीटर 500 रूपये की दर से पिटपास जारी किया जाता था। एक ट्रक-डम्फर में करीब 12 से 16 घन मीटर तक रेत लोड की जाती है। अर्थात एक ट्रक-डम्फर को पिटपास 6 से 8 हजार रूपये में जारी किया जाता था। इनके द्वारा प्रतिदिन 50 से लेकर 100 ई-पिटपास बेंचे जाते थे।

खनिज विभाग भी करे जांच-

यह अलग बात है कि केन नदी का सीना छलनी कर अवैध रूप से निकाली जाने वाली रेत सस्ती मिलने और आसानी से पिटपास का जुगाड़ हो जाने के कारण पन्ना से रेत परिवहन करने वाले सभी भारी वाहनों में क्षमता से डेढ़ से दो गुना तक अधिक रेत का खुलेआम परिवहन किया जाता रहा है। भैरा डम्प के ई-पिटपास के दुरूपयोग से जुड़े मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस के साथ-साथ छतरपुर एवं पन्ना जिले के खनिज विभाग को भी अपनी ओर से जांच करनी चाहिए क्योंकि मामला भण्डारण की व्यापारिक अनुमति के दुरूपयोग से जुड़ा है।

2

नज़रिया: क्या अब मीडिया के ज़रिये साज़िशें भी कराई जा सकती हैं

0

कोबरा पोस्ट का स्टिंग आॅपरेशन से मीडिया की विश्वसनीयता और उसकी साख के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट है।

पढ़िये वरिष्ठ पत्रकार, का 

कोबरापोस्ट का ताज़ा स्टिंग ऑपरेशन मीडिया की ऐसी शर्मनाक पतन गाथा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए वाक़ई बहुत बड़े ख़तरे की घंटी है। स्टिंग ऑपरेशन की जो सबसे ज़्यादा गंभीर, सबसे ज़्यादा चिन्ताजनक बात है, वो यह कि पैसे के लिए मीडिया कंपनियों को किसी गंदी से गंदी साज़िश में भी शरीक होने से हिचक नहीं है, चाहे यह साज़िश देश और लोकतंत्र के विरुद्ध ही क्यों न हो! स्टिंग करनेवाला रिपोर्टर खुल कर यह बात रखता है कि वह चुनावों के पहले देश में किस तरह का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराना चाहता है, और किस तरह विपक्ष के बड़े नेताओं की छवि बिगाड़ना चाहता है।

ये बात वो मीडिया कंपनियों के मालिकों से, बड़े-बड़े ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से कहता है, और सब मज़े से सुनते हैं। इनमें से किसी को क्यों यह नहीं लगा कि ऐसा करना देश के विरुद्ध, लोकतंत्र के विरुद्ध और जनता के विरुद्ध षड्यंत्र है?हालांकि स्टिंग ऑपरेशन के अब तो जो वीडियो आए हैं उनसे ये साबित नहीं होता कि पैसों का लेनदेन हुआ या किसी लेनदेन की वजह से किसी मीडिया संस्थान ने कुछ ग़लत प्रसारित या प्रकाशित किया लेकिन इसके बावजूद ये सवाल तो उठता ही है कि इनमें से किसी को क्यों नहीं महसूस हुआ कि ऐसी साज़िशों का भंडाफोड़ करना और इससे देश को सचेत करना उनका पहला और बुनियादी कर्तव्य है।

गोदी मीडिया– नाक तक आ चुका है पानी

मूल सवाल यही है, अब तक हम बात गोदी मीडिया की करते थे। बात हम भोंपू मीडिया की करते थे। विचारधारा के मीडिया की बात करते थे। साम्प्रदायिक मामलों या जातीय संघर्षों या दलितों से जुड़े मामलों में या आरक्षण जैसे मुद्दों पर मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी कभी-कभार सवाल उठते रहते थे। कॉरपोरेट मीडिया, ‘प्राइवेट ट्रीटी’ और ‘पेड न्यूज़’ की बात होती थी. मीडिया इन सारी समस्याओं से गुज़र रहा था और है, इन पर बहस और चर्चाएँ भी जारी हैं।

लेकिन कोबरापोस्ट के ताज़ा स्टिंग ने साबित कर दिया है कि पानी अभी अगर सिर से ऊपर नहीं पहुँचा है, तो भी कम से कम नाक तक तो आ ही चुका है। अब नहीं चेते तो गटर में पूरी तरह डूब जाने में ज़्यादा देर नहीं लगेगी।

यह गटर नहीं तो और क्या है कि ‘पेड न्यूज़’ और ‘एडवरटोरियल’ के नाम पर पैसे लेते-लेते आप इस हद तक गिर जाएं कि चुनावों में किसी पार्टी को जिताने के लिए तमाम तरह के षड्यंत्र रचने की योजना लेकर कोई व्यक्ति आपके पास आए और पैसा देकर आपके अख़बार, टीवी चैनल और वेबसाइट का इस्तेमाल करना चाहे और आप इसमें साझीदार बनने को तैयार हो जायें।

1975 में आपातकाल के दौरान-

तो इससे एक तो यही बात साफ़ हो गयी कि मीडिया के एक बड़े हिस्से के बारे में अगर यह धारणा लगातार बनती जा रही है कि वह सरकार का भोंपू बना हुआ है, वह सरकार के कामकाज की पड़ताल के बजाय विपक्ष के चुनिंदा नेताओं की खिंचाई और धुनाई में लगा हुआ है, और वह सरकार की गोद में बैठ कर इठला रहा है, तो ऐसी धारणा बिलकुल बेबुनियाद नहीं है।

क्योंकि कोबरापोस्ट के स्टिंग में अगर एक अनजान आदमी मीडिया कंपनियों को इतनी आसानी से ‘डर्टी गेम’ के लिए तैयार कर ले, तो आप अनुमान लगा लीजिए कि कोई सरकार अगर चाहे, तो मीडिया को अपने मनमाफ़िक़ बना लेना आज उसके लिए कितना आसान है! सरकार के पास धन भी है और डंडा भी।

आज जिस गोदी मीडिया की बात हो रही है, उसका एक रूप हम क़रीब 43 साल पहले 1975 में आपातकाल के दौरान देख चुके हैं, जब देश की ज़्यादातर मीडिया कंपनियों और दिग्गज संपादकों तक ने इंदिरा सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

मीडिया की रिपोर्टों पर कैसे भरोसा होगा?

वह सरकारी डंडे और जेल जाने का भय था, लेकिन तब और अब में एक फ़र्क़ है. तब पैसे के लालच में कोई नहीं बिका, बल्कि डर से लोग रेंगे और जैसे ही वह डर ख़त्म हो गया, वैसे ही ‘निष्पक्ष’ और ‘निर्भीक’ प्रेस फिर वापस आ गया।लेकिन कोबरापोस्ट के स्टिंग में मीडिया कंपनियों ने साफ़ संकेत दे दिया कि केवल इस बार नहीं, केवल इस सरकार के राज में नहीं, बल्कि भविष्य में कोई सरकार, सत्ता में बैठी कोई पार्टी या उससे जुड़ा कोई संगठन मीडिया से जब चाहे, जैसा चाहे, वैसा प्रचार करा सकता है। यानी आप में और ‘पीआर’ कम्पनियों में क्या फ़र्क़ रह गया? अगर ऐसा है, तो मीडिया की रिपोर्टों पर किसी को कैसे भरोसा होगा? साफ़ है कि मीडिया की विश्वसनीयता और उसकी साख पर इतना बड़ा संकट आज से पहले कभी नहीं था।

न्यूट्रल दिखना चाहिए…

कोबरापोस्ट के स्टिंग ने कुछ और गम्भीर भंडाफोड़ किए हैं. मसलन आप किसी को यह कहते सुनते हैं कि हम तो सरकार के बहुत-बहुत ही समर्थक हैं! या फिर यह कि कम से कम हमें न्यूट्रल दिखना चाहिए। यानी असल में न्यूट्रल हों न हों, लेकिन दिखना चाहिए। इसी तरह कोई बहुत बड़ा हिन्दुत्ववादी होने का दावा करता है। क्या यह मीडिया की ऑब्जेक्टिविटी और उसकी नैतिकता पर बहुत बड़ा सवाल नहीं है। वैसे मीडिया का हिन्दुत्ववादी होना या मीडिया में हिन्दुत्ववादी रुझान बन जाना भी कोई नयी बात नहीं है. रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद जब अपने चरम की ओर बढ़ रहा था तो 1990 से 92 के दौर में मीडिया के एक बड़े तबक़े, ख़ास कर हिन्दी मीडिया ने बेहद सांप्रदायिक और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की थी। इसकी पड़ताल के लिए कई जगह प्रेस काउंसिल को अपनी टीम भेजनी पड़ी। लेकिन बाबरी मसजिद ध्वंस के बाद जैसे-जैसे चीज़ें सतह पर ‘नॉर्मल’ होती गईं, वैसे-वैसे मीडिया में आया सांप्रदायिक उभार भी दब गया।

हिन्दुत्ववादी एजेंडे में साझीदार-

अब ऐसा उभार दुबारा दिख रहा है, लेकिन तब वह नियोजित नहीं था स्वत: स्फूर्त था। लेकिन अब ऐसा नियोजित तौर पर किए जाने की संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं। इसका कुछ नमूना हमने जेएनयू के मामले में हुई वीडियो मॉर्फ़िंग के रूप में देखा। कोबरापोस्ट के स्टिंग में जब आमतौर पर मीडिया कंपनियां हिन्दुत्ववादी एजेंडे में साझीदार बनने के लिए तैयार दिखती हैं, तो वह एक बेहद ख़तरनाक संभावनाओं के दर्शन करा रही हैं। क्या मीडिया एक नियोजित सांप्रदायिक कुप्रचार का माध्यम बनने जा रहा है? यह सवाल बेहद गम्भीर हैं। वैसे मीडिया के बाज़ारीकरण, उसमें संपादक की संस्था के लगातार ह्रास, मीडिया कंपनियों के तमाम दूसरे गोरखधन्धों को लेकर गाहे-बगाहे चिन्ताएं व्यक्त होती रही हैं, लेकिन इन पर कोई ठोस तो क्या, कभी पहला क़दम तक नहीं उठा। लेकिन अब इन सवालों से आँखें चुराते रहना हम सबके लिए बेहद ख़तरनाक होगा। बात सिर्फ़ मीडिया की नहीं है, बात अब लोकतंत्र के अस्तित्व की है।

ईमानदार मीडिया नहीं बचा…

अगर देश में स्वतंत्र और ईमानदार मीडिया नहीं बचा, तो लोकतंत्र के बचे रहने की कल्पना कोई मूर्ख ही कर सकता है. लोकतंत्र को बचाना हो तो पहले मीडिया को बचाइए। मीडिया कैसे बचे। कोई जादुई चिराग़ नहीं कि रातोंरात हालात सुधर जाएं. लेकिन शुरुआत कहीं से तो करनी ही पड़ेगी। तो मीडिया को बचाने का पहला रास्ता तो यही है कि संपादक नाम की संस्था को पुनर्जीवित किया जाय और मज़बूत किया जाए। मीडिया की आमदनी लानेवालों और ख़बरें लानेवालों के बीच बड़ी दीवार हो, मीडिया के अन्दरूनी कामकाज और उसकी स्वायत्तता की मॉनिटरिंग का कोई स्वतंत्र, तटस्थ, स्वस्थ और भरोसेमन्द मेकेनिज़्म हो। यह सब कैसे होगा? लंबा रास्ता है। लेकिन पहले हम और आप इस तरफ़ सोचना तो शुरू करें!

साभार: बीबीसी हिन्दी

2

प्रदेश में लिखी जा रही है विकास की नई इबारत : मुख्यमंत्री श्री चौहान 

0
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज आगर-मालवा में हुए असंगठित श्रमिक सम्मेलन को संबोधित किया।

ग्राम-स्तर पर होगी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा

आगर-मालवा में सम्पन्न हुआ तेंदूपत्ता संग्राहक, श्रमिक और महिला सम्मेलन 

भोपाल  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, जिसे कोई नहीं बदल पायेगा। किसानों को सभी योजनाओं का भरपूर लाभ दिया जा रहा है। जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ग्रामीण-स्तर पर समीक्षा की जायेगी। जिला कलेक्टर एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधि द्वारा चयनित गाँव के ही 5 व्यक्तियों की टीम यह समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री आज आगर-मालवा में तेंदूपत्ता संग्राहक, श्रमिक एवं महिला सम्मेलन तथा स्वच्छता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। आगर-मालवा शहर में विभिन्न सामाजिक संगठनों और नगरवासियों ने फूलों की बौछार और पुष्पाहारों से मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया।

   मिलेगा पट्टा और आवास बनाने के लिए सहायता –

श्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री जन-कल्याण योजना गरीबों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिये बनाई गई है। इस योजना में गरीब, जरूरतमंद लोगों तथा श्रमिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जायेगा। हर गरीब व्यक्ति को आवासीय पट्टा दिया जायेगा और आवास बनाने के लिये आर्थिक सहायता भी दी जायेगी। योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि योजना में सभी हितग्राहियों को समान रूप से लाभान्वित किया जायेगा। श्री चौहान ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिये स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्रशिक्षण एवं ऋण दिलवाया जायेगा।

             मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिये सदैव सजग रहती है। किसानों के जीवन को चिंतामुक्त बनाने के साथ-साथ खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिये विभिन्न योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। समारोह में शाजापुर एवं आगर-मालवा जिले के 1617 तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण-पादुका, पानी की कुप्पी प्रदान की गई। साथ ही 777 महिला संग्राहकों को साड़ी भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने करीब 148 करोड़ लागत के 53 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री ने कालीबाई को पहनाई चरण-पादुका

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज आगर-मालवा में सम्मेलन में तेन्दूपत्ता संग्राहक कालीबाई को चरण-पादुका पहनाई।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सम्मेलन में तेंदूपत्ता संग्राहक कालीबाई को अपने हाथों से चरण-पादुका पहनाई और पानी की कुप्पी तथा साड़ी भेंट की। समारोह में जिला प्रभारी मंत्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद मनोहर ऊँटवाल, विधायक सर्वश्री गोपाल परमार, मुरलीधर पाटीदार, अरुण भीमावत, जसवंत सिंह हाड़ा, इंदर सिंह परमार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कलाबाई गोहाटिया, अन्य जन-प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

2