जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दी प्रधानमंत्री को बधाई
भोपाल।जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके कुशल नेतृत्व में कल्याणकारी केन्द्र सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर बधाई दी है। डॉ. मिश्र ने बधाई संदेश में कहा कि भारत की पूरे संसार में छवि निखारने वाले वैश्विक नेता, विकास में विश्वास रख जन-जन के चहेते बने प्रधानमंत्री के सशक्त नेतृत्व के चार साल बेमिसाल रहे।
मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि बुनियादी क्षेत्रों में निरंतर सुविधाएं बढ़ाने और अभूतपूर्व योजनाएं लाकर जनता को लाभान्वित करने वाले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने कार्यों और नेतृत्व से विश्व में देश की छवि को निखारा है। श्री मोदी ‘सबका साथ-सबका विकास’ के ध्येय से कार्य करते हुए प्रधानमंत्री पद की अलग छवि निर्मित करने में सफल हुए हैं। इसलिए वे विश्व के लोकप्रिय जन-नेताओं में न सिर्फ शामिल हुए हैं, बल्कि अग्रणी स्थान अर्जित किया है।
डॉ. मिश्र ने श्री मोदी के नेतृत्व में देश की निरंतर प्रगति की कामना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की जनहितैषी नीतियों को लागू करने में मध्यप्रदेश सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रतलाम में हुए जिला स्तरीय अन्त्योदय मेले में 664 करोड़ के 84 विकास कार्यो का शिलान्यास और लोकार्पण किया।
गरीबों की जिंदगी को सँवारेगी मुख्यमंत्री जन-कल्याण योजना
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रतलाम में हुआ तेंदूपत्ता संग्राहक एवं श्रमिक सम्मेलन
भोपाल । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार है। सरकार द्वारा प्रदेश में श्रमिकों, गरीबों और किसानों की भलाई के लिये संकल्पित होकर विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। श्री चौहान ने किसानों का आव्हान किया कि अराजकता फैलाने वालों और भड़काने वालों से सावधान रहें।
हर साल 10 लाख श्रमिकों को दिये जायेंगे मकान
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गरीबों की जिंदगी को सँवारने के लिये ही महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना का प्रदेश में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना में हर साल 10 लाख असंगठित श्रमिकों को मकान बनाकर दिये जायेंगे। अगले 4 साल में गरीबों को 37 लाख से अधिक मकान उपलब्ध करवाये जायेंगे। प्रदेश की धरती पर हर गरीब के पास अपना घर होगा। श्री चौहान ने ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एक लाख गरीब बेटा-बेटियों को स्किल डेव्हलपमेंट प्रशिक्षण और स्व-रोजगार स्थापित करने के लिये ऋण भी दिलवाया जायेगा।
हितग्राहियों को 5 करोड़ के हित-लाभ वितरित-
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रतलाम में हुए जिला स्तरीय अन्त्योदय मेले में बालिकाओं के पाँव पखारे।
तेंदूपत्ता संग्राहक एवं श्रमिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संग्राहकों को 20 लाख रुपये की बोनस राशि वितरित की। साढ़े 8 हजार से अधिक संग्राहकों को चरण-पादुकाएँ और पानी की कुप्पी प्रदान की। चार हजार महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों को साड़ियाँ भेंट की। मुख्यमंत्री ने 17 हजार से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं में 4 करोड़ 78 लाख रुपये के हित-लाभ वितरित किये।
664 करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्याय, लोकार्पण-
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सम्मेलन में रतलाम जिले में 663 करोड़ 64 लाख रुपये लागत के 84 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसमें 557 करोड़ के 53 विकास कार्यों का शिलान्यास और 106 करोड़ 64 लाख रुपये के 31 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सम्मेलन के बाद स्थानीय पुलिस लाइन में 2 करोड़ 32 लाख की लागत से बने कंट्रोल-रूम का लोकार्पण किया। सम्मेलन एवं कंट्रोल-रूम के लोकार्पण समारोह में सांसद सुधीर गुप्ता एवं मनोहर ऊँटवाल, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष चैतन्य कश्यप, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष हिम्मत कोठारी, विधायकगण, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
अपनी मांगों के समर्थन में धरना देते हड़ताली वनकर्मचारी-अधिकारी।
प्रदेशव्यापी हड़ताल से ध्वस्त हुई वन विभाग की व्यवस्थायें
श्रमिकों के भरोसे वन्यजीवों और जंगल की सुरक्षा
पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश में वन कर्मचारियों-अधिकारियों के संयुक्त रूप से कामबंद हड़ताल पर जाने से वन विभाग की व्यवस्थायें लगभग चैपट हो चुकी है। प्रशिक्षित व जिम्मेदार मैदानी अमले के न होने से वन विभाग के अधिकारी वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह असफल साबित हो रहे है। यहां तक कि प्रदेश में स्थित वन विभाग समस्त कार्यालयों में दैनिक कार्य भी प्रभावित है। पन्ना जिले की स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। संयुक्त हड़ताल के पहले ही दिन 24 मई से लेकर अब तक पन्ना में तेंदुए के हमले में 20 लोग घायल हो चुके है। इतना ही नहीं बाघ ने एक तेंदूपत्ता श्रमिक को अपना शिकार बना लिया है। वहीं शनिवार को भालू के हमले में एक आदिवासी महिला के गंभीर रूप से घायल हो गई। इन तमाम घटनाओं से जाहिर है कि पन्ना जिले में वन कर्मचारियों-अधिकारियों की बेमियादी हड़ताल से हालात तेजी से बिगड़ रहे है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु तत्परता से ठोस उपाय करने में वन विभाग के अधिकारियों के नाकाम रहने से यहां जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। इंसान तो वन्यजीवों का शिकार बन ही रहे है यदि हालात को संभालने के लिए समय रहते आवश्यक उपाय नहीं किये गये तो बेजुवान बाघ और तेंदुए भी मारे जा सकते है।
1013 कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर-
मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ भोपाल के आव्हान पर लंबित मांगों के निराकरण के लिए जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल की सफलता को लेकर पन्ना के वनकर्मचारी-अधिकारियों ने गजब की एकजुटता दिखाई है। हड़ताल के पहले ही दिन 24 मई से पन्ना के उत्तर वन मण्डल, दक्षिण वन मण्डल एवं पन्ना टाईगर रिजर्व के समस्त वन परिक्षेत्राधिकारी (रेंजर्स), उप वन क्षेत्रपाल, वनपाल, वनरक्षक और स्थाईकर्मी हड़ताल में शामिल है। शहर के जगात चौकी चौराहे पर हड़ताली वन कर्मचारियों-अधिकारियों का धरना-प्रदर्शन शनिवार 26 मई को तीसरे दिन भी लगातार जारी रहा। रेंजर्स एसोशियेशन पन्ना के अध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार एवं वन कर्मचारी संघ अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि हड़ताल में कुल 1013 वनकर्मचारी-अधिकारी शामिल है। जिसमें 16 रेंजर, 27 उप वन क्षेत्रपाल, 91 वनपाल, 410 वनरक्षक, 469 स्थाई वनकर्मी है।
पर्यटन गतिविधियां प्रभावित-
वन अमले की हड़ताल का व्यापक असर पन्ना जिले में देखा जा रहा है। वन्यजीवों-वनों की सुरक्षा, विभागीय कार्यों के अलावा पयर्टन गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित है। जिसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हड़ताल के पहले ही दिन से पन्ना टाईगर रिजर्व के हिनौता गेट से पयर्टकों को पार्क में इंट्री नहीं मिल पा रही है। प्राकृतिक रमणीक स्थल रनेह फाॅल व पाण्डव फाॅल में भी पयर्टक घूम नहीं पा रहे है। दरअसल जिम्मेदार कर्मचारियों के एक साथ हड़ताल पर जाने से उक्त स्थानों पर पयर्टकों को प्रवेश देने के लिए उनकी रसीदें काटने वाला अब कोई नहीं है। हड़ताल के चलते वन विभाग में पूरा दारोमदार अधिकारियों और श्रमिकों के ऊपर आ गया है। इन कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में वन विभाग के अफसर अब तक असफल ही साबित हुए है।
वनकर्मियों को घोषित करो शसस्त्र बल-
वन कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके संगठन के द्वारा लम्बे समय से वन कर्मचारियों को राजस्व एवं पुलिस के सामान वेतन-भत्ते और सुविधायें देने की मांग की जा रही है। वन कर्मचारी अपने घर-परिवार से दूर रहते हुए बेहद कठिन परिस्थतियों में जंगल व वन्यजीवों की 24 घंटे सुरक्षा करते है। बावजूद इसके वनकर्मियों के साथ भेदभाव करते हुए अल्प वेतन दिया जा रहा है। जिससे परिवार का उदर-पोषण और सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर पाना संभव नहीं है। वन कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा द्वारा यह मांग की जा रही है कि वन रक्षकों को नियुक्ति दिनांक से 10, 20, 30 वर्ष के बाद समयमान-वेतनमान प्रदान किया जाये, 2001 के बाद नियुक्त वन रक्षकों को 5680 का लाभ दिया जाये एवं जिन्हें लाभ प्राप्त हो गया है उनसे वसूली पर रोक लगाई जाये। वन कर्मचारियों को विशेष शसस्त्र बल घोषित करते हुए न्यायिक मजिस्टेªट के अधिकार प्रदान किये जाये, वन रक्षक से लेकर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक स्तर के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए वर्दी पहनना अनिवार्य किया जाये, स्थाई कर्मियों का चतुर्थ श्रेणी में समायोजन कर समस्त लाभ प्रदान किये जाये, वर्ष 2005 से पश्चात नियुक्त कर्मचारियों को पूर्व की तरह पेंशन योजना का लाभ दिया जाये। वन कर्मचारियों के लिए अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी तय करने सहित अन्य मांगे शामिल है।
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने दिया समर्थन-
वन कर्मचारियों-अधिकारियों की मांगों को जायज बताते हुए तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष बीपी परौहा ने उनकी हड़ताल का समर्थन किया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ पदाधिकारियों के साथ श्री परौहा हड़ताली वनकर्मियों के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वनकर्मचारी लम्बे समय से अपने हितों से जुड़ी मांगों के निराकरण को लेकर शासन का ध्यान आकृष्ट करा रहे थे। लेकिन आश्वासन देने के बावजूद मांगों को पूरा न करने से मजबूर होकर वनकर्मचारी-अधिकारियों को अपने हितों के संरक्षण के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। धरना-प्रदर्शन में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की ओर से अनिल जैन, संतोष प्रजापति, केजी बरसैंया, वीरेन्द्र वर्मा, राम सिंह शामिल हुए। वहीं इस अवसर पर हड़ताली कर्मचारी जियालाल चौधरी, रमाकांत गर्ग, देवेश कुमार गौतम, बीके खरे, नंदा प्रसाद अहिरवार, विनोद कुमार माझी, रमाकांत त्रिपाठी, राजकुमार अहिरवार, आरएस नर्गेश, केके विश्वकर्मा, आदित्य प्रताप सिंह, रामऔतार चौधरी, दुलारे चौधरी, रामकृपाल, रामदुनिया सेन, रम्मू अहिरवार, प्रेेम नारायण वर्मा व श्रीनिवास पाण्डेय ने धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।
घायल सुनीता के जख्म को टांके लगाकर सिलता स्वास्थ्यकर्मी
पन्ना में वन्य-प्राणियों के बढ़ते हमलों से बिगड़ने लगे हालात
जंगल में जल संकट गहराने से आबादी क्षेत्रों में आ रहे वन्यजीव
पन्ना। रडार न्यूज भीषण सूखे की त्रासदी झेल रहे बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना जिले में तेजी से गहराते जल संकट के कारण मानव और वन्यजीव संघर्ष की समस्या गंभीर होती जा रही है। वनकर्मियों और परिक्षेत्राधिकारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर होने से इस चुनौती से निपटने में वन विभाग के अफसर अब तक असफल ही साबित हुए है। इस बीच जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से जनमानस में भय और आक्रोश पनप रहा है। गुरूवार को तेंदुए के हमले में 20 लोगों के घायल होने व पन्ना के समीप मनकी-जरधोबा के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गये श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को बाघ द्वारा अपना शिकार बनाने की घटना का लोग अभी भूले भी नहीं थे कि शनिवार की सुबह भालू के हमले में एक महिला पशुपालक सुनीता आदिवासी के घायल होने की खबर आने के बाद से वन क्षेत्रों से सटे ग्रामों के रहवासी दहशत में आ गये है। समस्या की जटिलता का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि महज 53 घंटे के अंदर वन्यजीवों के तीन बड़े हमलों में एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी है जबकि 21 लोग घायल हुए है। जिनमें गंभीर रूप से घायल दो व्यक्ति अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे है।
झाड़ियों में छिपा था भालू-
जंगली जानवर के हमले की ताजा घटना शनिवार सुबह 8 बजे पन्ना विकासखण्ड की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर के ग्राम अमहाई के समीप उस वक्त हुई जब सुनीता आदिवासी बेबा श्यामलाल आदिवासी 40 वर्ष गांव के ही समीप बकरियां चरा रही थी। वहां झाड़ियों में छिपा भालू अचानक तेजी से उसकी ओर झपटा। झाड़ियों में हरकत होने पर भालू को आते देख बेबा सुनीता ने जान बचाने के लिए बदहवास हालत में दौड़ लगा दी। लेकिन चंद कदम बाद ही वह जमीन पर गिर पड़ी। उसे असहाय पाकर भालू ने हमला कर दिया। घायल सुनीता के चींखने-चिल्लाने और बकरियों की भगदड़ से भालू भागकर जंगल की तरफ चला गया। इस हमले में लहुलुहान सुनीता की दाहिनी आंख के नीचे और कूल्हे में भालू के नोंचने-काटने से गहरे जख्म उभर आये है। उपचार हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय में भर्ती आदिवासी महिला की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। लेकिन भालू के रूप में मौत का सामना करने वाली सुनीता काफी डरी-सहमी हुई है। पति की असमय मौत के बाद वह बकरी पालन और मजदूरी करके अपने चार बच्चों का किसी तरह भरण-पोषण करती है।
पानी पीने आया था भालू-
गौरतलब है कि गरीब आदिवासी बेबा सुनीता के ऊपर भालू ने जिस स्थान पर हमला किया वहां से तलैया चंद कदम की दूरी पर है। इस घटना की खबर आने के बाद से अम्हाई गांव सहित क्षेत्र लोग यह अंदेशा जता रहे है कि जंगल में जल स्त्रोत सूखने के कारण उक्त भालू पानी पीने के लिए संभवतः तलैया आया था। तभी सुनीता के उसके रास्ते में आ जाने से यह घटना घटित हुई है। दरअसल, वन्यजीवों के बढ़ते हमले का हालिया कारण चाहे जो भी हो पर इसके मूल में सिमटते जंगल, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप, वन्यजीवों के लिए कम होता भोजन और प्राकृतिक वास का आभाव तथा भीषण सूखा के चलते जंगल के सूख चुके जल स्त्रोत है। इन समग्र परिस्थितियों के मद्देनजर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष होना स्वभाविक है। वन विभाग ने यदि शीघ्र ही इसकी रोकथाम के लिए ईमानदार प्रयास नहीं किये तो गंभीर होते हालात का दुष्परिणाम वन्यजीवों को भी भुगतना पड़ सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि मानव और वन्यजीव संघर्ष के कारणों की पड़ताल कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाये।
तेंदुए के हमलों से रैपुरा-मोहन्द्रा क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल
वन कर्मचारियों-अधिकारियों की हड़ताल से बेपटरी हुई व्यवस्था
पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष का आगाज हो चुका है। पिछले 24 घंटे में यहां तेंदुए के हमले की दो अलग-अलग घटनाओं में 20 लोग घायल हुए है। जबकि जिला मुख्यालय पन्ना के समीप पन्ना टाईगर रिजर्व के बफर जोन के जंगल में बाघ ने एक श्रमिक को अपना शिकार बना लिया। वन्य प्राणियों के हमले की घटनाएं ऐसे समय सामने आ रही है जब प्रदेशव्यापी हड़ताल के तहत् पन्ना जिले के समस्त वनकर्मी और रेंजर्स अपनी मांगों के निराकरण को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। वन कर्मचारी एवं अधिकारी संघ की संयुक्त हड़ताल के पहले ही दिन गुरूवार 24 मई को तेंदुए और बाघ के हमलों की चिंताजनक खबरें आने से समूचे पन्ना जिले में लोगों का जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। यदि शीघ्र ही मानव-वन्यप्राणी संघर्ष को रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाये गये तो यह संकट बेदह गंभीर रूप ले सकता है। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्रांतर्गत एक तेंदुए ने गुरूवार तड़के 3ः30 बजे आधा दर्जन गांवों में घरों के बाहर सो रहे लोगों पर हमला किया था। जिसमें 16 ग्रामीण घायल हुए थे। चार घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु पड़ोसी जिला कटनी के लिए रेफरल किया गया। महज 18 घंटे के अंदर रैपुरा वन परिक्षेत्र के ही ग्राम मक्केपाला में पुनः गुरूवार रात्रि करीब 8 बजे तेंदुए ने हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया। घायलों में वृद्ध और बच्चे शामिल है।
इन्हें किया घायल-
तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल वृद्धा रूपरानी पत्नी बरई आदिवासी को प्राथमिक उपचार के बाद दमोह के लिए रेफरल किया गया है। अन्य तीन घायलों डरे आदिवासी पिता लच्छू आदिवासी, अखिलेश पिता प्रमोद आदिवासी, दान सिंह पिता मिलन आदिवासी को मामूली जख्म होने पर स्वास्थ्य केन्द्र रैपुरा में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। 24 घंटे के अंदर तेंदुए के लगातार दो बार हमले और इसी बीच पन्ना के समीप बाघ द्वारा एक तेंदुपत्ता श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को शिकार बनाने की चिंताजनक घटनायें सामने आने से वन परिक्षेत्र रैपुरा और मोहन्द्रा के ग्रामीणों में दहशत में है। वन क्षेत्र से सटे इस दूरस्थ इलाके में तेंदुए के आंतक का यह खौफ ही है कि लोग तेंदूपत्ता तोड़ने या लकड़ी लेने के लिए जंगल जाना तो दूर अपने घरों से भी बाहर निकलने में भी डर रहे है।
तेंदुए को पकड़ने जारी है प्रयास-
पवई के उप मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने बताया कि हमलावर तेंदुए की खोजबीन लगातार जारी है लेकिन उसकी कोई लोकेशन नहीं मिल रही है। मैदानी वन अमले और अधिकारियों के हड़ताल पर होने से काफी दिक्कत आ रही है। उप वन मण्डलाधिकारी श्री द्विवेदी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा आ चुका है उसमें कुत्ते या बकरे को रखकर तेंदुए को शिकार के लालच से पकड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा यदि दिन के समय तेंदुए का लोकेशन मिलता है तो उसे ट्रंकुलाइज (बेहोश) करके पकड़ने की पूरी तैयारी है। उन्होंने बताया कि हमारा पूरा जोर फिलहाल लोगों को सुरक्षित करने पर है इसके लिए मोहन्द्रा-रैपुरा के सीमावर्ती ग्रामों में मुनादी कराकर लोगों को हिदायत दी जा रही है कि अकेले घर से बाहर न निकलें। रात्रि में बाहर न सोयें और तेंदुए के खतरे को देखते हुए सतर्क रहें।
पहले भी किया था हमला-
दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत तेंदुओं के बढ़ते आंतक के बीच इनके हमले में बेकसूर ग्रामीणों के घायल होने की यह पहली घटना नहीं है। कुछ माह पूर्व रैपुरा व शाहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत एक तेंदुए ने कई गांवों में उत्पात मचाया था। वन विभाग के अमले द्वारा तेंदुए को समय रहते न पकड़ पाने के कारण कुएं में गिरने से उसकी असमय मौत हो गई थी। वहीं कुछ समय पूर्व दक्षिण वन मण्डल के ही वन परिक्षेत्र पवई के अंतर्गत क्लच वायर का फंदा लगाकर तेंदुए के शिकार करने की हैरान करने वाली घटना सामने आई थी। जंगली जानवर जंगल से बाहर निकलने के लिए क्यों विवश है? इसकी वजह क्या वन क्षेत्र के अंदर भीषण जल संकट होना है या फिर अन्य कोई कारण है। वजह चाहे जो भी हो पर इस विकट समस्या का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है ताकि गंभीर रूप लेते मानव वन्यप्राणी संघर्ष को रोका जा सके।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी तहसील के भड़कुल ग्राम में जन-संवाद कार्यक्रम में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये।
सीहोर जिले में विकास यात्रा एवं जनसंवाद में शामिल हुए मुख्यमंत्री
भोपाल। रडार न्यूज़ मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले में बुदनी विकासखण्ड के ग्राम माथनी, भड़कुल, बोरदी और बोरी में विकास यात्रा करते हुए जन-संवाद के जरिये ग्रामीणों से सीधी बातचीत कर उन्हें शासकीय योजनाओं-कार्यक्रमों की जानकारी दी। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर उनके जीवन को खुशहाल बनाना ही मेरे जीवन का लक्ष्य है। इसके लिये दिन-रात चिंतन करता हूँ। नित नई जन-कल्याणकारी योजनाएँ बनाकर उनका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करता हूँ। जन-संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अंचल में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हित-लाभ वितरित भी किये।मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बेटियाँ खुश रहेंगी, तो प्रदेश खुश रहेगा। महिला सशक्तिकरण के प्रयास निरन्तर जारी हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के उद्देश्य से कार्य किये जा रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि सम्पूर्ण बुधनी विधानसभा क्षेत्र में नर्मदा जल हर घर में पहुँचाया गया है। अब हर खेत को सिंचित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे सभी पात्र लोगों को रहने की जमीन का पट्टा देकर उनके लिये पक्का मकान बनाया जाएगा। इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री रामपाल सिंह, वन विकास निगम के अध्यक्ष गुरू प्रसाद शर्मा, वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राजपूत, अपेक्स बैंक के प्रशासक रमाकांत भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मरेठा, अन्य जन-प्रतिनिधि तथा बडी संख्या मे ग्रामीण उपस्थित रहे।
जनसम्पर्क,जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने गुरूवार को बालाघाट में वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया।
जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने बालाघाट में पत्रकारों को सम्मानित किया
भोपाल। रडार न्यूज़ जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज बालाघाट में पत्रकार महाअधिवेशन में वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया। डॉ. मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में पत्रकार बंधुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय संस्कृति को जीवंत और सम्माननीय बनाए रखने में मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। आधुनिक समाज और संचार क्रांति के इस दौर में यह आवश्यक है कि देश की गरिमामय संस्कृति की रक्षा की जाए। इसके लिए सम्पूर्ण मीडिया जगत को सजग रहकर निरंतर कार्य करना होगा। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकारों के हित में अनेक कदम उठाए हैं। अधिमान्यता कार्ड की नवीनीकरण अवधि एक वर्ष के स्थान पर दो वर्ष कर दी गई है। स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना में अब दो लाख के स्थान पर चार लाख रुपये तक कैशलेस उपचार और आकस्मिक दुर्घटना की दशा में असमय मृत्यु हो जाने पर पाँच लाख के स्थान पर दस लाख रूपये की राशि का प्रावधान किया जा रहा है। कार्यक्रम के विशेष अतिथि किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने पत्रकारों को संबोधित किया।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बाघ और तेंदुए के हमलों से फैली दहशत
पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश में गुरूवार 24 मई से वनकर्मियों और रेंजर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले ही दिन पन्ना जिले में बाघ और तेंदुए के हमले की सनसनीखेज खबरें आई है। जंगल में तेंदूपत्ता व लकड़ी लेने गये एक आदिवासी श्रमिक की बाघ के हमले में जहां दर्दनाक मौत हो गई वहीं पन्ना के ही रैपुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत एक तेंदुए ने आधा दर्जन गांवों में हमलाकर 16 ग्रामीणों को घायल कर दिया। बाघ के हमले की घटना जिला मुख्यालय पन्ना से लगभग 8 किलोमीटर दूर उत्तर वन मण्डल के अंतर्गत मनकी बीट की बताई जा रही है। उत्तर वन मण्डल के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने बताया कि बेटूलाल पिता धनकू गौंड 40 वर्ष निवासी ग्राम मनकी जंगल से लकड़ी लेेन गया था। जहां दोपहर करीब 2 बजे पीछे से आये एक बाघ ने बेटूलाल की गर्दन पर हमला कर उसे जमीन में पटक दिया। बेटूलाल के साथ रहे गोपाल आदिवासी व छोटेलाल आदिवासी के शोर मचाने पर हमलावर बाघ मौके से भाग खड़ा हुआ। अत्यंत गंभीर रूप से घायल बेटूलाल आदिवासी को लेकर उसके साथी जब वापिस गांव मनकी जाने लगे तभी रास्ते उसने दम तोड़ दिया। सूत्रों से पता चला है कि बेटूलाल जंगल से तेंदूपत्ता तोड़ने और लकड़ी लेने सुबह जंगल गया था। बाघ के हमले में आदिवासी श्रमिक की मौत की खबर मिलने के बाद पन्ना टाईगर रिजर्व सहित उत्तर वन मण्डल के अधिकारी मौके लिए रवाना हो चुके थे। समाचार लिखे जाने तक मृतक का शव मनकी गांव में ही रखा था। बाघ के हमले में बेटूलाल की मौत के बाद से उसके गांव में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में पन्ना टाईगर रिजर्व ने बाघ पुर्नस्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत बाघों के उजड़े हुए संसार को पुनः आबाद किये जाने के बाद बाघ के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने की यह पहली घटना है। पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की तादाद तेजी से बढ़ने के कारण वहां क्षेत्र कम पढ़ने लगा है। फलस्वरूप पार्क सीमा के बाहर बफर क्षेत्र से सटे सामान्य वन मण्डलों के जंगलों में बाघों का विचरण अब आम हो चुका है। कई वृद्ध व युवा बाघों ने तो पन्ना के सामान्य वन मण्डलों के जंगल में ही अपना इलाका बना रखा है।
पन्ना जिले के रैपुरा वन परिक्षेत्र में तेंदुए की दहशत
पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में दक्षिण वन मण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत गुरूवार तड़के एक तेंदुए ने हमला कर 16 लोगों को घायल कर दिया। घायलों में चार ग्रामीणों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद पड़ोसी जिला कटनी के लिए रेफरल किया गया है। तेंदुए के हमले की सुबह-सुबह खबर फैलने के बाद से ही क्षेत्र में दहशत और आक्रोश का माहौल है। पवई के उप वन मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरूवार 24 मई 2018 को तड़के करीब 3ः30 बजे एक तेंदुआ जंगल से निकलकर ग्राम मुरता में घुस गया जहां गर्मी के चलते बाहर सो रहे 6 ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। घायलों में वृद्ध, बच्चे और महिलायें शामिल है। घायलों की चींख-पुकार और ग्रामीणों के हल्लाबोल से तेंदुआ भागकर चन्हाई ग्राम पहुंचा जहां उसके द्वारा एक व्यक्ति को घायल किया गया। इसके पश्चात उक्त तेंदुआ लगातार आगे बढ़ते हुए आबादी क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों को घायल करता गया। रात्रि 3ः30 बजे से शुरू हुए तेंदुए के हमले सुबह करीब 6 बजे तक जारी रहे। जिसमें कुलुआखेरा अलौनी, झालाडुमरी, मुरता, बीरमपुरा व मक्केपाला में ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें लहुलुहान कर दिया।
15 किमी क्षेत्र के 6 गांवों में किया हमले-
श्री द्विवेदी ने बताया कि मुरता से लेकर बीरमपुरा तक लगभग 15 किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित आधा दर्जन ग्रामों में तेंदुए द्वारा दहशत फैलाई गई। घायलों में रामसेवक पिता हल्कू आदिवासी निवासी अलौनी, वीरन पिता रतन सिंह निवासी मक्केपाला, बड़ी बहू पति सुखलाल आदिवासी निवासी चनहाई, फूलबाई पति विष्वनाथ आदिवासी, खेमवती आदिवासी, सुन्दर पति पहाड़ी आदिवासी, हल्के पिता गबडू आदिवासी, कुमारी रीना पिता जवाहर बसोर, कल्ला पिता उदूला बंजारा सभी निवासी ग्राम मुरता व किषोरी पिता लुलारे आदिवासी कुलुआखेरा आदि शामिल है।
तेंदुआ को पकड़ने चलाया जायेगा रेस्क्यू आॅपरेशन-
उप वन मण्डलाधिकारी पवई श्री द्विवेदी ने बताया कि वे सुबह करीब 7 बजे मौके पर पहुंच गये थे, सभी घायलों का प्राथमिक स्वास्थ्य रैपुरा में उपचार कराया गया। जहां चार घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए डाॅ. राजवीर लोहिया ने उन्हें कटनी के लिए रेफरल कर दिया। तेंदुए के हमले का षिकार बनी वृद्धा बड़ी बहु की हालत नाजुक बनी है। तेंदुए ने उसके चेहरे पर हमला करते हुए नाक और मुंह को बड़े हिस्से को बुरी तरह नोंच डाला है। पवई के उप वन मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने बताया कि हमलावर तेंदुए को पकड़ने के लिए पन्ना में रेस्क्यू टीम तैयार है लोकेषन मिलते ही उसे पकड़ा जायेगा।
ग्रीष्मकालीन अवकाश में ठप्प पड़ी मध्यान्ह भोजन व्यवस्था
पन्ना। रडार न्यूज सरकारी स्कूलों में वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के बच्चों को ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी मध्यान्ह भोजन वितरित करने शासन के निर्देश है। लेकिन पन्ना जिले की शालाओं में इस पर ईमानदारी से अमल नहीं हो रहा है। जमीनी सच्चाई यह है कि 95 फीसदी शालाओं में ताले लटक रहे है। मध्यान्ह भोजन पकाने वाले समूह और शिक्षकों के बीच सांठगांठ के चलते दर्ज बच्चों को एमडीएम का वितरण कागजों पर किया जा रहा है। मजेदार बात यह है कि मध्यान्ह भोजन वितरण की हर स्तर पर फर्जी रिपोर्टिंग की जा रही है ताकि बच्चों के निवालों की राशि को मिलकर डकारा जा सके। वहीं इस प्रचण्ड गर्मी के समय आंगनवाड़ी केन्द्रों में भी अघोषित अवकाश की स्थिति देखी जा रही है। कहीं केन्द्रों में ताले जड़े है तो कहीं पर बच्चे ही नदारत है। शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को लापरवाह और भ्रष्ट मैदानी अमला किस तरह पलीता लगा रहा है, गुरूवार को जिला मुख्यालय पन्ना के समीपी ग्राम जनवार में इसकी बानगी देखने को मिली।
आंगनवाड़ी केन्द्र जनवार –
रडार न्यूज की टीम समाजिक कार्यकर्ताओं के साथ सुबह 8ः40 बजे जनवार की आदिवासी बस्ती पहुंची तो वहां आंगनवाड़ी केन्द्र में ताला लटक रहा था। केन्द्र के बाजू में स्थित हैण्डपम्प पर नहाने आये बच्चे वहां भीड़ होने के कारण अपना नम्बर आने के इंजतार में आंगनवाड़ी की सीढ़ियों में बैठे खेल रहे थे। पास में रहने वाली केशकली पत्नी बाना आदिवासी ने चर्चा के दौरान बताया कि आंगनवाड़ी में बच्चों को नाश्ता नहीं मिलता, दोपहर के समय सिर्फ भोजन मिलता है। केशकली की चार साल की बेटी का नाम इसी आंगनवाड़ी में दर्ज है। उसने बताया कि सहायिका सियाबाई आदिवासी सुबह करीब 10 बजे आंगनवाड़ी खोलती है। इस केन्द्र में पदस्थ कार्यकर्ता शोभा यादव पन्ना में रहती है और वे महीने में दो-चार दिन ही कुछ घंटों के लिए आती है।
आंगनवाड़ी केन्द्र नवीन झालर-
झालर के आंगनवाड़ी केन्द्र में लटकता ताला।
जनवार के समीप स्थित विस्थापित ग्राम नवीन झालर की आंगनवाड़ी भी बंद मिली। सुबह 9ः27 बजे केन्द्र पर ताला लटक रहा था। सहायिका जमुना यादव को उसके घर से बुलाकर जब केन्द्र न खुलने का कारण पूंछा तो बताया गया कि गर्मी अधिक होने के कारण बच्चे नहीं आते। दोपहर के समय कुछ बच्चे सिर्फ खाना खाने के लिए ही केन्द्र में आते है। यहां पर भी बच्चों को नाश्ता का वितरण नहीं हो रहा है। सहायिका जमुना यादव ने बताया कि उनके केन्द्र पर 0 से लेकर 6 वर्ष तक के कुल 20 बच्चे दर्ज है। इस केन्द्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नयनतारा श्रीवास्तव पन्ना में रहती है, जोकि यदाकदा ही नवीन झालर आती है। आंगनवाड़ी का अपना कोई भवन न होने से यह एक कच्चे जर्जर मकान में संचालित हो रही है।
मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र जनवार-
समाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को जानकारी देती आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विमलेश यादव।
नवीन झालर ग्राम से वापिस लौटते हुए पुनः जनवार पहुंचने पर मुख्य मार्ग किनारे प्राथमिक शाला भवन में संचालित मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र में प्रातः 10ः47 बजे तक एक भी बच्चा उपस्थित नहीं था। जबकि इस केन्द्र में 60 बच्चे दर्ज है। जिसमें 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 26 बताई गई है। केन्द्र में रसोईया के साथ बैठी कार्यकर्ता विमलेश यादव अपनी दैनिक रिपोर्टिंग की कागजी खानापूर्ति कर रहीं थी। गौर करने वाली बात यह है कि इस केन्द्र में ही अकेले 11 कुपोषित बच्चे दर्ज है। जिनमें से कुछ मध्यम श्रेणी के कुपोषित है। बच्चों की अनुपस्थिति के सवाल पर कार्यकर्ता ने बिना किसी लाग-लपेट के बताया कि गर्मी अधिक होने के कारण बच्चों को उनके अभिभावक केन्द्र पर नहीं भेजते। दोपहर में भोजन पकने पर कुछ बच्चों को बुलाकर खाना खिला देते है। इस केन्द्र पर भी बच्चों को नाश्ता न मिलने की बात सामने आई है।
नहीं होती सतत् निगरानी-
मालूम हो कि वर्तमान में आंगनवाड़ी केन्द्रों की दैनिक रिपोर्टिंग मोबाईल एप्प के जरिये आॅनलाईन हो रही है। जिसमें दैनिक उपस्थिति से लेकर बच्चों के वजन, गृह भेंट, पोषण आहार वितरण आदि की जानकारी प्रतिदिन दर्ज की जाती है। मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र जनवार की कार्यकर्ता विमलेश यादव ने दैनिक रिपोर्टिंग की हकीकत बयान करते हुए कहा कि जिस दिन 10-12 बच्चे भोजन करने आते है उस दिन का फोटो अपलोड करतीं है। जिस दिन बच्चे कम होते है उस दिन का फोटो पोस्ट नहीं करतीं ताकि कम उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े न हो। इससे साफ जाहिर है कि व्यवस्था बेहतर बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के नाम पर रिपोर्टिंग के तौर-तरीकों में समय के साथ भले ही तकनीकी बदलाव हो चुका है लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। आंगनवाड़ी केन्द्रों की इस बदहाली के ही कारण पन्ना जिले के माथे पर लगे गंभीर कुपोषण, शिशु मृत्यु दर की अधिकता और बाल मृत्यु दर के कलंक मिट नहीं पा रहे है। आंगनवाड़ी केन्द्रों के संचालन में व्याप्त भर्रेशाही के मद्देनजर क्षेत्रीय सुपरवाईजर और एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है।
शालाओं के नहीं खुलते ताले-
ग्रीष्मकालीन अवकाश में ठप्प पड़ी शालाओं में मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था।
ग्राम नवीन झालर की प्राथमिक शाला और जनवार स्थित प्राथमिक व माध्यमिक शाला में ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय बच्चों को मध्यान्ह भोजन का वितरण नहीं हो रहा है। पृथ्वी ट्रस्ट के अध्यक्ष यूसुफ बेग व रविकांत पाठक से चर्चा के दौरान पहचान उजागर न करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि जब से गर्मी की छुट्टियां पड़ी है तब से एक भी दिन शाला के बच्चों को मध्यान्ह भोजन नहीं बांटा गया है। आंगनवाडी के दो-चार बच्चों को घरों से लाकर मध्यान्ह भोजन वितरण की औपचारिकता पूरी की जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि झालर और जनवार की शालाओं के जब ताले ही नहीं खुलते तो वहां मध्यान्ह भोजन वितरण का सवाल ही नहीं उठता।
इनका कहना है-
‘‘यह बात सही है कि कई आंगनवाड़ी केन्द्र नियमित रूप से नहीं खुल रहे है। उनकी कार्यकर्ता और सुपरवाईजर अपने मुख्यालय में निवास नहीं कर रही है। इन सभी के विरूद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार संबंधितों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया जायेगा।‘‘ – रेखा बाला सक्सेना, परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास पन्ना।
‘‘जनवार-झालर की शालाओं में मध्यान्ह भोजन वितरण न होने की मुझे जानकारी नहीं है। सीएसी से बात करके तुरंत व्यवस्था शुरू कराई जायेगी।‘‘ -विष्णु त्रिपाठी, जिला परियोजना समन्वयक सर्वशिक्षा अभियान पन्ना।