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रेत की तस्करी- करोडों के ई-पिटपास बिक्री का भण्डाफोड़

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प्रतीकात्‍मक फोटो

छतरपुर में स्वीकृत है डम्प, पन्ना में बेंचे गये पिटपास

प्रशासन की मिलीभगत से सालभर से चल रहा था फर्जीवाड़ा

पन्ना। रडार न्यूज खनिज सम्पदा के बेइंतहां दोहन के मामले में बुन्देलखण्ड का बेल्लारी बन चुके पन्ना जिले में पत्थर की अवैध खदानों से लेकर रेत की व्यापक तस्करी में करोड़ों के ई-पिटपास की अवैध बिक्री का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पन्ना की केन नदी में लम्बे समय से चल रही अवैध खदानों से निकलने वाली रेत के परिवहन के लिए पड़ोसी जिला छतरपुर के भैरा स्थित डम्प के पिटपास खुलेआम बेंचे जा रहे थे। करीब एक साल से चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा अब जाकर हुआ है। शनिवार को अजयगढ़ थाना के निरीक्षक वीरेन्द्र बहादुर सिंह की सूचना पर किशनपुर में स्थित अशोक पटेल के मकान में संचालित भैरा डम्प के आॅफिस में छापामार कार्यवाही करते हुए पिछले दो दिनों में जारी किये गये ई-पिटपास जब्त किये है। इस मामले में पुलिस ने आॅफिस में मौजूद अशीष पिता राकेश शुक्ला 25 वर्ष को गिरफतार किया है। पुलिस ने ई-पिटपास जारी करने में उपयोग होने वाले लेपटाॅप, प्रिंटर व एक रजिस्टर भी जब्त किया है। जिसमें माह फरवरी 2018 से लेकर अब तक जारी किये गये ई-पिटपास का विवरण दर्ज है।

एक आरोपी गिरफतार, मामला दर्ज-

पुलिस टीम के साथ आरोपी एवं जब्‍त सामग्री

गौरलबत है कि भैरा डम्प पड़ोसी जिला छतरपुर में स्वीकृत है। जबकि इसके भण्डारण ठेकेदार द्वारा गैर कानूनी तरीके से पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र से निकलने वाली अवैध रेत के परिवहनकर्ताओं को ई-पिटपास बेंचे जा रहे थे। इसके लिए अजयगढ़ में बकायदा आॅफिस संचालित किया जा रहा था। इस मामले में पुलिस ने आशीष शुक्ला सहित भैरा डम्प से संबंधित व्यक्तियों के विरूद्ध आईपीसी की धारा 420 के तहत् धोखधड़ी करने का मामला दर्ज किया है। अजयगढ़ टीआई वीरेन्द्र बहादुर सिंह ने एक सवाल के जवाब में रडार न्यूज को बताया कि भण्डारण ठेकेदार द्वारा जारी किये जाने वाले ई-पिटपास फर्जी या वैध है इसकी जांच हेतु खनिज विभाग छतरपुर से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जायेगी। पन्ना जिले में अब तक कितने पिटपास जारी किये गये है इसका पता जांच पूर्ण होेने पर ही चलेगा। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया दूसरे जिले में अवैध तरीके से पिटपास की बिक्री कर रेत की तस्करी को बढ़ावा देने पर कार्यवाही की गई है। ई-पिटपास के दुरूपयोग और बड़े पैमाने पर रेत की तस्करी का यह खेल सालभर से जिले के खनिज विभाग व अजयगढ़ के राजस्व-पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था।

6 से 8 हजार में जारी होता था पिटपास-

रेत के कारोबार से जुड़े सूत्रों की मानें तो भैरा डम्प द्वारा जारी किये पिटपासों पर केन नदी की हजारों ट्रक रेत का अब तक परिवहन हो चुका है। छापामार कार्यवाही में पकड़े गये आशीष शुक्ला पिता राकेश शुक्ला निवासी खडेहा थाना सरबई जिला छतरपुर ने पूंछतांछ में अजयगढ़ पुलिस को बताया कि प्रति घन मीटर 500 रूपये की दर से पिटपास जारी किया जाता था। एक ट्रक-डम्फर में करीब 12 से 16 घन मीटर तक रेत लोड की जाती है। अर्थात एक ट्रक-डम्फर को पिटपास 6 से 8 हजार रूपये में जारी किया जाता था। इनके द्वारा प्रतिदिन 50 से लेकर 100 ई-पिटपास बेंचे जाते थे।

खनिज विभाग भी करे जांच-

यह अलग बात है कि केन नदी का सीना छलनी कर अवैध रूप से निकाली जाने वाली रेत सस्ती मिलने और आसानी से पिटपास का जुगाड़ हो जाने के कारण पन्ना से रेत परिवहन करने वाले सभी भारी वाहनों में क्षमता से डेढ़ से दो गुना तक अधिक रेत का खुलेआम परिवहन किया जाता रहा है। भैरा डम्प के ई-पिटपास के दुरूपयोग से जुड़े मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस के साथ-साथ छतरपुर एवं पन्ना जिले के खनिज विभाग को भी अपनी ओर से जांच करनी चाहिए क्योंकि मामला भण्डारण की व्यापारिक अनुमति के दुरूपयोग से जुड़ा है।

नज़रिया: क्या अब मीडिया के ज़रिये साज़िशें भी कराई जा सकती हैं

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कोबरा पोस्ट का स्टिंग आॅपरेशन से मीडिया की विश्वसनीयता और उसकी साख के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट है।

पढ़िये वरिष्ठ पत्रकार, का 

कोबरापोस्ट का ताज़ा स्टिंग ऑपरेशन मीडिया की ऐसी शर्मनाक पतन गाथा है, जो देश के लोकतंत्र के लिए वाक़ई बहुत बड़े ख़तरे की घंटी है। स्टिंग ऑपरेशन की जो सबसे ज़्यादा गंभीर, सबसे ज़्यादा चिन्ताजनक बात है, वो यह कि पैसे के लिए मीडिया कंपनियों को किसी गंदी से गंदी साज़िश में भी शरीक होने से हिचक नहीं है, चाहे यह साज़िश देश और लोकतंत्र के विरुद्ध ही क्यों न हो! स्टिंग करनेवाला रिपोर्टर खुल कर यह बात रखता है कि वह चुनावों के पहले देश में किस तरह का सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराना चाहता है, और किस तरह विपक्ष के बड़े नेताओं की छवि बिगाड़ना चाहता है।

ये बात वो मीडिया कंपनियों के मालिकों से, बड़े-बड़े ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से कहता है, और सब मज़े से सुनते हैं। इनमें से किसी को क्यों यह नहीं लगा कि ऐसा करना देश के विरुद्ध, लोकतंत्र के विरुद्ध और जनता के विरुद्ध षड्यंत्र है?हालांकि स्टिंग ऑपरेशन के अब तो जो वीडियो आए हैं उनसे ये साबित नहीं होता कि पैसों का लेनदेन हुआ या किसी लेनदेन की वजह से किसी मीडिया संस्थान ने कुछ ग़लत प्रसारित या प्रकाशित किया लेकिन इसके बावजूद ये सवाल तो उठता ही है कि इनमें से किसी को क्यों नहीं महसूस हुआ कि ऐसी साज़िशों का भंडाफोड़ करना और इससे देश को सचेत करना उनका पहला और बुनियादी कर्तव्य है।

गोदी मीडिया– नाक तक आ चुका है पानी

मूल सवाल यही है, अब तक हम बात गोदी मीडिया की करते थे। बात हम भोंपू मीडिया की करते थे। विचारधारा के मीडिया की बात करते थे। साम्प्रदायिक मामलों या जातीय संघर्षों या दलितों से जुड़े मामलों में या आरक्षण जैसे मुद्दों पर मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी कभी-कभार सवाल उठते रहते थे। कॉरपोरेट मीडिया, ‘प्राइवेट ट्रीटी’ और ‘पेड न्यूज़’ की बात होती थी. मीडिया इन सारी समस्याओं से गुज़र रहा था और है, इन पर बहस और चर्चाएँ भी जारी हैं।

लेकिन कोबरापोस्ट के ताज़ा स्टिंग ने साबित कर दिया है कि पानी अभी अगर सिर से ऊपर नहीं पहुँचा है, तो भी कम से कम नाक तक तो आ ही चुका है। अब नहीं चेते तो गटर में पूरी तरह डूब जाने में ज़्यादा देर नहीं लगेगी।

यह गटर नहीं तो और क्या है कि ‘पेड न्यूज़’ और ‘एडवरटोरियल’ के नाम पर पैसे लेते-लेते आप इस हद तक गिर जाएं कि चुनावों में किसी पार्टी को जिताने के लिए तमाम तरह के षड्यंत्र रचने की योजना लेकर कोई व्यक्ति आपके पास आए और पैसा देकर आपके अख़बार, टीवी चैनल और वेबसाइट का इस्तेमाल करना चाहे और आप इसमें साझीदार बनने को तैयार हो जायें।

1975 में आपातकाल के दौरान-

तो इससे एक तो यही बात साफ़ हो गयी कि मीडिया के एक बड़े हिस्से के बारे में अगर यह धारणा लगातार बनती जा रही है कि वह सरकार का भोंपू बना हुआ है, वह सरकार के कामकाज की पड़ताल के बजाय विपक्ष के चुनिंदा नेताओं की खिंचाई और धुनाई में लगा हुआ है, और वह सरकार की गोद में बैठ कर इठला रहा है, तो ऐसी धारणा बिलकुल बेबुनियाद नहीं है।

क्योंकि कोबरापोस्ट के स्टिंग में अगर एक अनजान आदमी मीडिया कंपनियों को इतनी आसानी से ‘डर्टी गेम’ के लिए तैयार कर ले, तो आप अनुमान लगा लीजिए कि कोई सरकार अगर चाहे, तो मीडिया को अपने मनमाफ़िक़ बना लेना आज उसके लिए कितना आसान है! सरकार के पास धन भी है और डंडा भी।

आज जिस गोदी मीडिया की बात हो रही है, उसका एक रूप हम क़रीब 43 साल पहले 1975 में आपातकाल के दौरान देख चुके हैं, जब देश की ज़्यादातर मीडिया कंपनियों और दिग्गज संपादकों तक ने इंदिरा सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

मीडिया की रिपोर्टों पर कैसे भरोसा होगा?

वह सरकारी डंडे और जेल जाने का भय था, लेकिन तब और अब में एक फ़र्क़ है. तब पैसे के लालच में कोई नहीं बिका, बल्कि डर से लोग रेंगे और जैसे ही वह डर ख़त्म हो गया, वैसे ही ‘निष्पक्ष’ और ‘निर्भीक’ प्रेस फिर वापस आ गया।लेकिन कोबरापोस्ट के स्टिंग में मीडिया कंपनियों ने साफ़ संकेत दे दिया कि केवल इस बार नहीं, केवल इस सरकार के राज में नहीं, बल्कि भविष्य में कोई सरकार, सत्ता में बैठी कोई पार्टी या उससे जुड़ा कोई संगठन मीडिया से जब चाहे, जैसा चाहे, वैसा प्रचार करा सकता है। यानी आप में और ‘पीआर’ कम्पनियों में क्या फ़र्क़ रह गया? अगर ऐसा है, तो मीडिया की रिपोर्टों पर किसी को कैसे भरोसा होगा? साफ़ है कि मीडिया की विश्वसनीयता और उसकी साख पर इतना बड़ा संकट आज से पहले कभी नहीं था।

न्यूट्रल दिखना चाहिए…

कोबरापोस्ट के स्टिंग ने कुछ और गम्भीर भंडाफोड़ किए हैं. मसलन आप किसी को यह कहते सुनते हैं कि हम तो सरकार के बहुत-बहुत ही समर्थक हैं! या फिर यह कि कम से कम हमें न्यूट्रल दिखना चाहिए। यानी असल में न्यूट्रल हों न हों, लेकिन दिखना चाहिए। इसी तरह कोई बहुत बड़ा हिन्दुत्ववादी होने का दावा करता है। क्या यह मीडिया की ऑब्जेक्टिविटी और उसकी नैतिकता पर बहुत बड़ा सवाल नहीं है। वैसे मीडिया का हिन्दुत्ववादी होना या मीडिया में हिन्दुत्ववादी रुझान बन जाना भी कोई नयी बात नहीं है. रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद जब अपने चरम की ओर बढ़ रहा था तो 1990 से 92 के दौर में मीडिया के एक बड़े तबक़े, ख़ास कर हिन्दी मीडिया ने बेहद सांप्रदायिक और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग की थी। इसकी पड़ताल के लिए कई जगह प्रेस काउंसिल को अपनी टीम भेजनी पड़ी। लेकिन बाबरी मसजिद ध्वंस के बाद जैसे-जैसे चीज़ें सतह पर ‘नॉर्मल’ होती गईं, वैसे-वैसे मीडिया में आया सांप्रदायिक उभार भी दब गया।

हिन्दुत्ववादी एजेंडे में साझीदार-

अब ऐसा उभार दुबारा दिख रहा है, लेकिन तब वह नियोजित नहीं था स्वत: स्फूर्त था। लेकिन अब ऐसा नियोजित तौर पर किए जाने की संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं। इसका कुछ नमूना हमने जेएनयू के मामले में हुई वीडियो मॉर्फ़िंग के रूप में देखा। कोबरापोस्ट के स्टिंग में जब आमतौर पर मीडिया कंपनियां हिन्दुत्ववादी एजेंडे में साझीदार बनने के लिए तैयार दिखती हैं, तो वह एक बेहद ख़तरनाक संभावनाओं के दर्शन करा रही हैं। क्या मीडिया एक नियोजित सांप्रदायिक कुप्रचार का माध्यम बनने जा रहा है? यह सवाल बेहद गम्भीर हैं। वैसे मीडिया के बाज़ारीकरण, उसमें संपादक की संस्था के लगातार ह्रास, मीडिया कंपनियों के तमाम दूसरे गोरखधन्धों को लेकर गाहे-बगाहे चिन्ताएं व्यक्त होती रही हैं, लेकिन इन पर कोई ठोस तो क्या, कभी पहला क़दम तक नहीं उठा। लेकिन अब इन सवालों से आँखें चुराते रहना हम सबके लिए बेहद ख़तरनाक होगा। बात सिर्फ़ मीडिया की नहीं है, बात अब लोकतंत्र के अस्तित्व की है।

ईमानदार मीडिया नहीं बचा…

अगर देश में स्वतंत्र और ईमानदार मीडिया नहीं बचा, तो लोकतंत्र के बचे रहने की कल्पना कोई मूर्ख ही कर सकता है. लोकतंत्र को बचाना हो तो पहले मीडिया को बचाइए। मीडिया कैसे बचे। कोई जादुई चिराग़ नहीं कि रातोंरात हालात सुधर जाएं. लेकिन शुरुआत कहीं से तो करनी ही पड़ेगी। तो मीडिया को बचाने का पहला रास्ता तो यही है कि संपादक नाम की संस्था को पुनर्जीवित किया जाय और मज़बूत किया जाए। मीडिया की आमदनी लानेवालों और ख़बरें लानेवालों के बीच बड़ी दीवार हो, मीडिया के अन्दरूनी कामकाज और उसकी स्वायत्तता की मॉनिटरिंग का कोई स्वतंत्र, तटस्थ, स्वस्थ और भरोसेमन्द मेकेनिज़्म हो। यह सब कैसे होगा? लंबा रास्ता है। लेकिन पहले हम और आप इस तरफ़ सोचना तो शुरू करें!

साभार: बीबीसी हिन्दी

प्रदेश में लिखी जा रही है विकास की नई इबारत : मुख्यमंत्री श्री चौहान 

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज आगर-मालवा में हुए असंगठित श्रमिक सम्मेलन को संबोधित किया।

ग्राम-स्तर पर होगी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा

आगर-मालवा में सम्पन्न हुआ तेंदूपत्ता संग्राहक, श्रमिक और महिला सम्मेलन 

भोपाल  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, जिसे कोई नहीं बदल पायेगा। किसानों को सभी योजनाओं का भरपूर लाभ दिया जा रहा है। जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की ग्रामीण-स्तर पर समीक्षा की जायेगी। जिला कलेक्टर एवं स्थानीय जन-प्रतिनिधि द्वारा चयनित गाँव के ही 5 व्यक्तियों की टीम यह समीक्षा करेगी। मुख्यमंत्री आज आगर-मालवा में तेंदूपत्ता संग्राहक, श्रमिक एवं महिला सम्मेलन तथा स्वच्छता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। आगर-मालवा शहर में विभिन्न सामाजिक संगठनों और नगरवासियों ने फूलों की बौछार और पुष्पाहारों से मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया।

   मिलेगा पट्टा और आवास बनाने के लिए सहायता –

श्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री जन-कल्याण योजना गरीबों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिये बनाई गई है। इस योजना में गरीब, जरूरतमंद लोगों तथा श्रमिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जायेगा। हर गरीब व्यक्ति को आवासीय पट्टा दिया जायेगा और आवास बनाने के लिये आर्थिक सहायता भी दी जायेगी। योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि योजना में सभी हितग्राहियों को समान रूप से लाभान्वित किया जायेगा। श्री चौहान ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिये स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्रशिक्षण एवं ऋण दिलवाया जायेगा।

             मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिये सदैव सजग रहती है। किसानों के जीवन को चिंतामुक्त बनाने के साथ-साथ खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिये विभिन्न योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। समारोह में शाजापुर एवं आगर-मालवा जिले के 1617 तेंदूपत्ता संग्राहकों को चरण-पादुका, पानी की कुप्पी प्रदान की गई। साथ ही 777 महिला संग्राहकों को साड़ी भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने करीब 148 करोड़ लागत के 53 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री ने कालीबाई को पहनाई चरण-पादुका

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज आगर-मालवा में सम्मेलन में तेन्दूपत्ता संग्राहक कालीबाई को चरण-पादुका पहनाई।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सम्मेलन में तेंदूपत्ता संग्राहक कालीबाई को अपने हाथों से चरण-पादुका पहनाई और पानी की कुप्पी तथा साड़ी भेंट की। समारोह में जिला प्रभारी मंत्री सुरेन्द्र पटवा, सांसद मनोहर ऊँटवाल, विधायक सर्वश्री गोपाल परमार, मुरलीधर पाटीदार, अरुण भीमावत, जसवंत सिंह हाड़ा, इंदर सिंह परमार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कलाबाई गोहाटिया, अन्य जन-प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

मोदी सरकार के चार साल बेमिशाल रहे – मिश्र

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जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दी प्रधानमंत्री को बधाई

भोपाल जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को उनके कुशल नेतृत्व में कल्याणकारी केन्द्र सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर बधाई दी है। डॉ. मिश्र ने बधाई संदेश में कहा कि भारत की पूरे संसार में छवि निखारने वाले वैश्विक नेता, विकास में विश्वास रख जन-जन के चहेते बने प्रधानमंत्री के सशक्त नेतृत्व के चार साल बेमिसाल रहे। 
       मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि बुनियादी क्षेत्रों में निरंतर सुविधाएं बढ़ाने और अभूतपूर्व योजनाएं लाकर जनता को लाभान्वित करने वाले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने कार्यों और नेतृत्व से विश्व में देश की छवि को निखारा है। श्री मोदी ‘सबका साथ-सबका विकास’ के ध्येय से कार्य करते हुए प्रधानमंत्री पद की अलग छवि निर्मित करने में सफल हुए हैं। इसलिए वे विश्व के लोकप्रिय जन-नेताओं में न सिर्फ शामिल हुए हैं, बल्कि अग्रणी स्थान अर्जित किया है।

      डॉ. मिश्र ने श्री मोदी के नेतृत्व में देश की निरंतर प्रगति की कामना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की जनहितैषी नीतियों को लागू करने में मध्यप्रदेश सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

किसान अराजकता फैलाने वालों से सावधान रहें : शिवराज

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रतलाम में हुए जिला स्तरीय अन्त्योदय मेले में 664 करोड़ के 84 विकास कार्यो का शिलान्यास और लोकार्पण किया।

गरीबों की जिंदगी को सँवारेगी मुख्यमंत्री जन-कल्याण योजना

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रतलाम में हुआ तेंदूपत्ता संग्राहक एवं श्रमिक सम्मेलन 

भोपाल ।  मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसान हितैषी सरकार है। सरकार द्वारा प्रदेश में श्रमिकों, गरीबों और किसानों की भलाई के लिये संकल्पित होकर विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। श्री चौहान ने किसानों का आव्हान किया कि अराजकता फैलाने वालों और भड़काने वालों से सावधान रहें।

हर साल 10 लाख श्रमिकों को दिये जायेंगे मकान

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गरीबों की जिंदगी को सँवारने के लिये ही महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना का प्रदेश में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना में हर साल 10 लाख असंगठित श्रमिकों को मकान बनाकर दिये जायेंगे। अगले 4 साल में गरीबों को 37 लाख से अधिक मकान उपलब्ध करवाये जायेंगे। प्रदेश की धरती पर हर गरीब के पास अपना घर होगा। श्री चौहान ने ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एक लाख गरीब बेटा-बेटियों को स्किल डेव्हलपमेंट प्रशिक्षण और स्व-रोजगार स्थापित करने के लिये ऋण भी दिलवाया जायेगा।

हितग्राहियों को 5 करोड़ के हित-लाभ वितरित-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज रतलाम में हुए जिला स्तरीय अन्त्योदय मेले में बालिकाओं के पाँव पखारे।

तेंदूपत्ता संग्राहक एवं श्रमिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संग्राहकों को 20 लाख रुपये की बोनस राशि वितरित की। साढ़े 8 हजार से अधिक संग्राहकों को चरण-पादुकाएँ और पानी की कुप्पी प्रदान की। चार हजार महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों को साड़ियाँ भेंट की। मुख्यमंत्री ने 17 हजार से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं में 4 करोड़ 78 लाख रुपये के हित-लाभ वितरित किये।

664 करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्याय, लोकार्पण-

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सम्मेलन में रतलाम जिले में 663 करोड़ 64 लाख रुपये लागत के 84 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसमें 557 करोड़ के 53 विकास कार्यों का शिलान्यास और 106 करोड़ 64 लाख रुपये के 31 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सम्मेलन के बाद स्थानीय पुलिस लाइन में 2 करोड़ 32 लाख की लागत से बने कंट्रोल-रूम का लोकार्पण किया। सम्मेलन एवं कंट्रोल-रूम के लोकार्पण समारोह में सांसद  सुधीर गुप्ता एवं  मनोहर ऊँटवाल, राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष चैतन्य कश्यप, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष  हिम्मत कोठारी, विधायकगण, अन्य जन-प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

वनकर्मियों की हड़ताल:- बिगड़े हालात, मचने लगी हाहाकार

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अपनी मांगों के समर्थन में धरना देते हड़ताली वनकर्मचारी-अधिकारी।

प्रदेशव्यापी हड़ताल से ध्वस्त हुई वन विभाग की व्यवस्थायें

श्रमिकों के भरोसे वन्यजीवों और जंगल की सुरक्षा

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश में वन कर्मचारियों-अधिकारियों के संयुक्त रूप से कामबंद हड़ताल पर जाने से वन विभाग की व्यवस्थायें लगभग चैपट हो चुकी है। प्रशिक्षित व जिम्मेदार मैदानी अमले के न होने से वन विभाग के अधिकारी वन्यजीवों और जंगलों की सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह असफल साबित हो रहे है। यहां तक कि प्रदेश में स्थित वन विभाग समस्त कार्यालयों में दैनिक कार्य भी प्रभावित है। पन्ना जिले की स्थिति कहीं अधिक गंभीर है। संयुक्त हड़ताल के पहले ही दिन 24 मई से लेकर अब तक पन्ना में तेंदुए के हमले में 20 लोग घायल हो चुके है। इतना ही नहीं बाघ ने एक तेंदूपत्ता श्रमिक को अपना शिकार बना लिया है। वहीं शनिवार को भालू के हमले में एक आदिवासी महिला के गंभीर रूप से घायल हो गई। इन तमाम घटनाओं से जाहिर है कि पन्ना जिले में वन कर्मचारियों-अधिकारियों की बेमियादी हड़ताल से हालात तेजी से बिगड़ रहे है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु तत्परता से ठोस उपाय करने में वन विभाग के अधिकारियों के नाकाम रहने से यहां जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। इंसान तो वन्यजीवों का शिकार बन ही रहे है यदि हालात को संभालने के लिए समय रहते आवश्यक उपाय नहीं किये गये तो बेजुवान बाघ और तेंदुए भी मारे जा सकते है।

1013 कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर-

मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ भोपाल के आव्हान पर लंबित मांगों के निराकरण के लिए जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल की सफलता को लेकर पन्ना के वनकर्मचारी-अधिकारियों ने गजब की एकजुटता दिखाई है। हड़ताल के पहले ही दिन 24 मई से पन्ना के उत्तर वन मण्डल, दक्षिण वन मण्डल एवं पन्ना टाईगर रिजर्व के समस्त वन परिक्षेत्राधिकारी (रेंजर्स), उप वन क्षेत्रपाल, वनपाल, वनरक्षक और स्थाईकर्मी हड़ताल में शामिल है। शहर के जगात चौकी चौराहे पर हड़ताली वन कर्मचारियों-अधिकारियों का धरना-प्रदर्शन शनिवार 26 मई को तीसरे दिन भी लगातार जारी रहा। रेंजर्स एसोशियेशन पन्ना के अध्यक्ष शिशुपाल अहिरवार एवं वन कर्मचारी संघ अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि हड़ताल में कुल 1013 वनकर्मचारी-अधिकारी शामिल है। जिसमें 16 रेंजर, 27 उप वन क्षेत्रपाल, 91 वनपाल, 410 वनरक्षक, 469 स्थाई वनकर्मी है।

पर्यटन गतिविधियां प्रभावित-

वन अमले की हड़ताल का व्यापक असर पन्ना जिले में देखा जा रहा है। वन्यजीवों-वनों की सुरक्षा, विभागीय कार्यों के अलावा पयर्टन गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित है। जिसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हड़ताल के पहले ही दिन से पन्ना टाईगर रिजर्व के हिनौता गेट से पयर्टकों को पार्क में इंट्री नहीं मिल पा रही है। प्राकृतिक रमणीक स्थल रनेह फाॅल व पाण्डव फाॅल में भी पयर्टक घूम नहीं पा रहे है। दरअसल जिम्मेदार कर्मचारियों के एक साथ हड़ताल पर जाने से उक्त स्थानों पर पयर्टकों को प्रवेश देने के लिए उनकी रसीदें काटने वाला अब कोई नहीं है। हड़ताल के चलते वन विभाग में पूरा दारोमदार अधिकारियों और श्रमिकों के ऊपर आ गया है। इन कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने में वन विभाग के अफसर अब तक असफल ही साबित हुए है।

वनकर्मियों को घोषित करो शसस्त्र बल-

वन कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष महीप कुमार रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके संगठन के द्वारा लम्बे समय से वन कर्मचारियों को राजस्व एवं पुलिस के सामान वेतन-भत्ते और सुविधायें देने की मांग की जा रही है। वन कर्मचारी अपने घर-परिवार से दूर रहते हुए बेहद कठिन परिस्थतियों में जंगल व वन्यजीवों की 24 घंटे सुरक्षा करते है। बावजूद इसके वनकर्मियों के साथ भेदभाव करते हुए अल्प वेतन दिया जा रहा है। जिससे परिवार का उदर-पोषण और सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर पाना संभव नहीं है। वन कर्मचारी-अधिकारी संयुक्त मोर्चा द्वारा यह मांग की जा रही है कि वन रक्षकों को नियुक्ति दिनांक से 10, 20, 30 वर्ष के बाद समयमान-वेतनमान प्रदान किया जाये, 2001 के बाद नियुक्त वन रक्षकों को 5680 का लाभ दिया जाये एवं जिन्हें लाभ प्राप्त हो गया है उनसे वसूली पर रोक लगाई जाये। वन कर्मचारियों को विशेष शसस्त्र बल घोषित करते हुए न्यायिक मजिस्टेªट के अधिकार प्रदान किये जाये, वन रक्षक से लेकर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक स्तर के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए वर्दी पहनना अनिवार्य किया जाये, स्थाई कर्मियों का चतुर्थ श्रेणी में समायोजन कर समस्त लाभ प्रदान किये जाये, वर्ष 2005 से पश्चात नियुक्त कर्मचारियों को पूर्व की तरह पेंशन योजना का लाभ दिया जाये। वन कर्मचारियों के लिए अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी तय करने सहित अन्य मांगे शामिल है।

तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने दिया समर्थन-

वन कर्मचारियों-अधिकारियों की मांगों को जायज बताते हुए तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ पन्ना के अध्यक्ष बीपी परौहा ने उनकी हड़ताल का समर्थन किया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ पदाधिकारियों के साथ श्री परौहा हड़ताली वनकर्मियों के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वनकर्मचारी लम्बे समय से अपने हितों से जुड़ी मांगों के निराकरण को लेकर शासन का ध्यान आकृष्ट करा रहे थे। लेकिन आश्वासन देने के बावजूद मांगों को पूरा न करने से मजबूर होकर वनकर्मचारी-अधिकारियों को अपने हितों के संरक्षण के लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। धरना-प्रदर्शन में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की ओर से अनिल जैन, संतोष प्रजापति, केजी बरसैंया, वीरेन्द्र वर्मा, राम सिंह शामिल हुए। वहीं इस अवसर पर हड़ताली कर्मचारी जियालाल चौधरी, रमाकांत गर्ग, देवेश कुमार गौतम, बीके खरे, नंदा प्रसाद अहिरवार, विनोद कुमार माझी, रमाकांत त्रिपाठी, राजकुमार अहिरवार, आरएस नर्गेश, केके विश्वकर्मा, आदित्य प्रताप सिंह, रामऔतार चौधरी, दुलारे चौधरी, रामकृपाल, रामदुनिया सेन, रम्मू अहिरवार, प्रेेम नारायण वर्मा व श्रीनिवास पाण्डेय ने धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।

तेंदुए और बाघ के बाद भालू ने किया हमला

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घायल सुनीता के जख्म को टांके लगाकर सिलता स्वास्थ्यकर्मी

पन्ना में वन्य-प्राणियों के बढ़ते हमलों से बिगड़ने लगे हालात

जंगल में जल संकट गहराने से आबादी क्षेत्रों में आ रहे वन्यजीव

पन्ना। रडार न्यूज  भीषण सूखे की त्रासदी झेल रहे बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना जिले में तेजी से गहराते जल संकट के कारण मानव और वन्यजीव संघर्ष की समस्या गंभीर होती जा रही है। वनकर्मियों और परिक्षेत्राधिकारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर होने से इस चुनौती से निपटने में वन विभाग के अफसर अब तक असफल ही साबित हुए है। इस बीच जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से जनमानस में भय और आक्रोश पनप रहा है। गुरूवार को तेंदुए के हमले में 20 लोगों के घायल होने व पन्ना के समीप मनकी-जरधोबा के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गये श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को बाघ द्वारा अपना शिकार बनाने की घटना का लोग अभी भूले भी नहीं थे कि शनिवार की सुबह भालू के हमले में एक महिला पशुपालक सुनीता आदिवासी के घायल होने की खबर आने के बाद से वन क्षेत्रों से सटे ग्रामों के रहवासी दहशत में आ गये है। समस्या की जटिलता का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि महज 53 घंटे के अंदर वन्यजीवों के तीन बड़े हमलों में एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी है जबकि 21 लोग घायल हुए है। जिनमें गंभीर रूप से घायल दो व्यक्ति अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे है।

झाड़ियों में छिपा था भालू-

जंगली जानवर के हमले की ताजा घटना शनिवार सुबह 8 बजे पन्ना विकासखण्ड की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर के ग्राम अमहाई के समीप उस वक्त हुई जब सुनीता आदिवासी बेबा श्यामलाल आदिवासी 40 वर्ष गांव के ही समीप बकरियां चरा रही थी। वहां झाड़ियों में छिपा भालू अचानक तेजी से उसकी ओर झपटा। झाड़ियों में हरकत होने पर भालू को आते देख बेबा सुनीता ने जान बचाने के लिए बदहवास हालत में दौड़ लगा दी। लेकिन चंद कदम बाद ही वह जमीन पर गिर पड़ी। उसे असहाय पाकर भालू ने हमला कर दिया। घायल सुनीता के चींखने-चिल्लाने और बकरियों की भगदड़ से भालू भागकर जंगल की तरफ चला गया। इस हमले में लहुलुहान सुनीता की दाहिनी आंख के नीचे और कूल्हे में भालू के नोंचने-काटने से गहरे जख्म उभर आये है। उपचार हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय में भर्ती आदिवासी महिला की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। लेकिन भालू के रूप में मौत का सामना करने वाली सुनीता काफी डरी-सहमी हुई है। पति की असमय मौत के बाद वह बकरी पालन और मजदूरी करके अपने चार बच्चों का किसी तरह भरण-पोषण करती है।

पानी पीने आया था भालू-

गौरतलब है कि गरीब आदिवासी बेबा सुनीता के ऊपर भालू ने जिस स्थान पर हमला किया वहां से तलैया चंद कदम की दूरी पर है। इस घटना की खबर आने के बाद से अम्हाई गांव सहित क्षेत्र लोग यह अंदेशा जता रहे है कि जंगल में जल स्त्रोत सूखने के कारण उक्त भालू पानी पीने के लिए संभवतः तलैया आया था। तभी सुनीता के उसके रास्ते में आ जाने से यह घटना घटित हुई है। दरअसल, वन्यजीवों के बढ़ते हमले का हालिया कारण चाहे जो भी हो पर इसके मूल में सिमटते जंगल, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप, वन्यजीवों के लिए कम होता भोजन और प्राकृतिक वास का आभाव तथा भीषण सूखा के चलते जंगल के सूख चुके जल स्त्रोत है। इन समग्र परिस्थितियों के मद्देनजर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष होना स्वभाविक है। वन विभाग ने यदि शीघ्र ही इसकी रोकथाम के लिए ईमानदार प्रयास नहीं किये तो गंभीर होते हालात का दुष्परिणाम वन्यजीवों को भी भुगतना पड़ सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि मानव और वन्यजीव संघर्ष के कारणों की पड़ताल कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाये।

तेंदुए ने फिर किया हमला, चार ग्रामीण घायल

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तेंदुए का प्रतीकात्मक फोटो

मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर गंभीर नहीं वन विभाग

तेंदुए के हमलों से रैपुरा-मोहन्द्रा क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल

वन कर्मचारियों-अधिकारियों की हड़ताल से बेपटरी हुई व्यवस्था

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष का आगाज हो चुका है। पिछले 24 घंटे में यहां तेंदुए के हमले की दो अलग-अलग घटनाओं में 20 लोग घायल हुए है। जबकि जिला मुख्यालय पन्ना के समीप पन्ना टाईगर रिजर्व के बफर जोन के जंगल में बाघ ने एक श्रमिक को अपना शिकार बना लिया। वन्य प्राणियों के हमले की घटनाएं ऐसे समय सामने आ रही है जब प्रदेशव्यापी हड़ताल के तहत् पन्ना जिले के समस्त वनकर्मी और रेंजर्स अपनी मांगों के निराकरण को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। वन कर्मचारी एवं अधिकारी संघ की संयुक्त हड़ताल के पहले ही दिन गुरूवार 24 मई को तेंदुए और बाघ के हमलों की चिंताजनक खबरें आने से समूचे पन्ना जिले में लोगों का जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। यदि शीघ्र ही मानव-वन्यप्राणी संघर्ष को रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाये गये तो यह संकट बेदह गंभीर रूप ले सकता है। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्रांतर्गत एक तेंदुए ने गुरूवार तड़के 3ः30 बजे आधा दर्जन गांवों में घरों के बाहर सो रहे लोगों पर हमला किया था। जिसमें 16 ग्रामीण घायल हुए थे। चार घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु पड़ोसी जिला कटनी के लिए रेफरल किया गया। महज 18 घंटे के अंदर रैपुरा वन परिक्षेत्र के ही ग्राम मक्केपाला में पुनः गुरूवार रात्रि करीब 8 बजे तेंदुए ने हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया। घायलों में वृद्ध और बच्चे शामिल है।

इन्हें किया घायल-

तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल वृद्धा रूपरानी पत्नी बरई आदिवासी को प्राथमिक उपचार के बाद दमोह के लिए रेफरल किया गया है। अन्य तीन घायलों डरे आदिवासी पिता लच्छू आदिवासी, अखिलेश पिता प्रमोद आदिवासी, दान सिंह पिता मिलन आदिवासी को मामूली जख्म होने पर स्वास्थ्य केन्द्र रैपुरा में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। 24 घंटे के अंदर तेंदुए के लगातार दो बार हमले और इसी बीच पन्ना के समीप बाघ द्वारा एक तेंदुपत्ता श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को शिकार बनाने की चिंताजनक घटनायें सामने आने से वन परिक्षेत्र रैपुरा और मोहन्द्रा के ग्रामीणों में दहशत में है। वन क्षेत्र से सटे इस दूरस्थ इलाके में तेंदुए के आंतक का यह खौफ ही है कि लोग तेंदूपत्ता तोड़ने या लकड़ी लेने के लिए जंगल जाना तो दूर अपने घरों से भी बाहर निकलने में भी डर रहे है।

तेंदुए को पकड़ने जारी है प्रयास-

पवई के उप मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने बताया कि हमलावर तेंदुए की खोजबीन लगातार जारी है लेकिन उसकी कोई लोकेशन नहीं मिल रही है। मैदानी वन अमले और अधिकारियों के हड़ताल पर होने से काफी दिक्कत आ रही है। उप वन मण्डलाधिकारी श्री द्विवेदी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा आ चुका है उसमें कुत्ते या बकरे को रखकर तेंदुए को शिकार के लालच से पकड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा यदि दिन के समय तेंदुए का लोकेशन मिलता है तो उसे ट्रंकुलाइज (बेहोश) करके पकड़ने की पूरी तैयारी है। उन्होंने बताया कि हमारा पूरा जोर फिलहाल लोगों को सुरक्षित करने पर है इसके लिए मोहन्द्रा-रैपुरा के सीमावर्ती ग्रामों में मुनादी कराकर लोगों को हिदायत दी जा रही है कि अकेले घर से बाहर न निकलें। रात्रि में बाहर न सोयें और तेंदुए के खतरे को देखते हुए सतर्क रहें।

पहले भी किया था हमला-

दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत तेंदुओं के बढ़ते आंतक के बीच इनके हमले में बेकसूर ग्रामीणों के घायल होने की यह पहली घटना नहीं है। कुछ माह पूर्व रैपुरा व शाहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत एक तेंदुए ने कई गांवों में उत्पात मचाया था। वन विभाग के अमले द्वारा तेंदुए को समय रहते न पकड़ पाने के कारण कुएं में गिरने से उसकी असमय मौत हो गई थी। वहीं कुछ समय पूर्व दक्षिण वन मण्डल के ही वन परिक्षेत्र पवई के अंतर्गत क्लच वायर का फंदा लगाकर तेंदुए के शिकार करने की हैरान करने वाली घटना सामने आई थी। जंगली जानवर जंगल से बाहर निकलने के लिए क्यों विवश है? इसकी वजह क्या वन क्षेत्र के अंदर भीषण जल संकट होना है या फिर अन्य कोई कारण है। वजह चाहे जो भी हो पर इस विकट समस्या का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है ताकि गंभीर रूप लेते मानव वन्यप्राणी संघर्ष को रोका जा सके।

प्रदेशवासियों की जिंदगी को खुशहाल बनाना ही जीवन का उद्देश्य : श्री चौहान

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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी तहसील के भड़कुल ग्राम में जन-संवाद कार्यक्रम में हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किये।

 सीहोर जिले में विकास यात्रा एवं जनसंवाद में शामिल हुए मुख्यमंत्री

भोपाल। रडार न्यूज़  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले में बुदनी विकासखण्ड के ग्राम माथनी, भड़कुल, बोरदी और बोरी में विकास यात्रा करते हुए जन-संवाद के जरिये ग्रामीणों से सीधी बातचीत कर उन्हें शासकीय योजनाओं-कार्यक्रमों की जानकारी दी। श्री चौहान ने कहा कि प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर उनके जीवन को खुशहाल बनाना ही मेरे जीवन का लक्ष्य है। इसके लिये दिन-रात चिंतन करता हूँ। नित नई जन-कल्याणकारी योजनाएँ बनाकर उनका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करता हूँ। जन-संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अंचल में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हित-लाभ वितरित भी किये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बेटियाँ खुश रहेंगी, तो प्रदेश खुश रहेगा। महिला सशक्तिकरण के प्रयास निरन्तर जारी हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय के उद्देश्य से कार्य किये जा रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि सम्पूर्ण बुधनी विधानसभा क्षेत्र में नर्मदा जल हर घर में पहुँचाया गया है। अब हर खेत को सिंचित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश मे सभी पात्र लोगों को रहने की जमीन का पट्टा देकर उनके लिये पक्का मकान बनाया जाएगा। इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री रामपाल सिंह, वन विकास निगम के अध्यक्ष गुरू प्रसाद शर्मा, वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राजपूत, अपेक्स बैंक के प्रशासक रमाकांत भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मरेठा, अन्य जन-प्रतिनिधि तथा बडी संख्या मे ग्रामीण उपस्थित रहे।

देश की गरिमामयी संस्कृति की रक्षा में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका

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जनसम्पर्क,जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने गुरूवार को बालाघाट में वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया।

जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने बालाघाट में पत्रकारों को सम्मानित किया 

भोपाल। रडार न्यूज़  जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज बालाघाट में पत्रकार महाअधिवेशन में वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान किया। डॉ. मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में पत्रकार बंधुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय संस्कृति को जीवंत और सम्माननीय बनाए रखने में मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। आधुनिक समाज और संचार क्रांति के इस दौर में यह आवश्यक है कि देश की गरिमामय संस्कृति की रक्षा की जाए। इसके लिए सम्पूर्ण मीडिया जगत को सजग रहकर निरंतर कार्य करना होगा। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकारों के हित में अनेक कदम उठाए हैं। अधिमान्यता कार्ड की नवीनीकरण अवधि एक वर्ष के स्थान पर दो वर्ष कर दी गई है। स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना में अब दो लाख के स्थान पर चार लाख रुपये तक कैशलेस उपचार और आकस्मिक दुर्घटना की दशा में असमय मृत्यु हो जाने पर पाँच लाख के स्थान पर दस लाख रूपये की राशि का प्रावधान किया जा रहा है। कार्यक्रम के विशेष अतिथि किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने पत्रकारों को संबोधित किया।