राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न
भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं की सोच, परिस्थिति और कार्यों में परिवर्तन और जागृति आई है। वह सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहती हैं। अब महिलाओं को आगे बढ़ने में पूरा सहायोग देना जरूरी है। महिलाओं के विकास और समृद्धि से ही देश का विकास संभव है। राज्यपाल आज यहाँ राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के 37वें स्थापना दिवस पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। सम्मेलन में विभिन्न जिलों से आईं 500 से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों एवं कृषि उत्पादन संगठनों के सदस्यों ने भी अपने अनुभव राज्यपाल को बताये। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि महिला शक्ति का भण्डार है। इस शक्ति का देश के हित में उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएँ पहले परिवार के बारे में सोचती हैं और सबके बाद अपना सोचती हैं। अब समय आ गया है कि महिलाएँ परिवार का भला सोचने के साथ-साथ अपने विकास और समृद्धि का भी ध्यान रखें। महिलाएँ अपने सम्मान और स्वाभिमान के लिए परिश्रम करें, प्रशिक्षण प्राप्त करें तथा केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा व्यवसाय के लिए उपलब्ध कराये जा रहे बैंक ऋण का भरपूर लाभ उठायें।

राज्यपाल ने कहा कि माँ-बाप की जागरूकता का ही परिणाम है कि आज बेटियाँ शिक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर र उच्च पद पर रहकर देश की सेवा कर रही हैं। उन्होंने समारोह में उपस्थित लोगों से बच्चों का बाल विवाह नहीं कराने के लिये संकल्पित होने का आग्रह किया।
सांसद आलोक संजर ने कहा कि गांधी जी ने गाँवों की तरक्की का जो सपना देखा था, वह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा हो रहा है। आज समाज में महिलाएँ पुरूषों के साथ कँधे से कँधा मिलाकर हर क्षेत्र में कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा कि नारी सम्मान, ममता और लज्जा की मूर्ति होती है। नारी सम्मान के लिए सरकार को सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही करना चाहिए। इस अवसर पर नाबार्ड के क्षेत्रीय मुख्य महा-प्रबंधक एस.के. बंसल ने नाबार्ड की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। राज्यपाल ने महिला स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार उत्पादों और सामग्री का अवलोकन भी किया।
समारोह में कृषि उत्पादन आयुक्त पी.सी. मीणा, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक पी.के. जेना, भारतीय स्टेट बैंक के उप-महाप्रबंधक एस.के. शुक्ला तथा बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूह योजना के लाभार्थी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।













वहीं गोलीवारी की इस घटना के समय किराना दुकान में गुड़ खरीदने आया ग्रामसेवक यादव पिता रामविशाल यादव 40 वर्ष की हथेली में गोली लगने से उसकी दो उंगलिया उड़ गई। फायरिंग की घटना को अंजाम देने के बाद से बिहारी सिंह ठाकुर 60 वर्ष फरार है। उधर गोलीबारी में घायल लाड़ले यादव को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शाहनगर में प्राथमिक उपचार के बाद कटनी के लिए रेफरल किया गया है। पड़ोसी जिला कटनी के एमजीएम अस्पताल में भर्ती लाड़ले यादव की हालत गंभीर बताई जा रही है। शनिवार को इस घटना की सूचना मिलने पर ग्राम जुगरवारा पहुंचे शाहनगर थाना में पदस्थ उप निरीक्षक निरंकार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2015 में लाड़ले यादव के पिता रामभगत यादव की बिहारी सिंह ठाकुर के पुत्रों ने हत्या कर दी थी। इस मामले में बिहारी सिंह के पुत्र वीर सिंह ठाकुर, बलवीर सिंह ठाकुर, नाति सुमेर उर्फ भूरा सिंह, जगत सिंह, बृजेन्द्र सिंह सहित पांच व्यक्ति अजीवन कारावास की सजा भुगत रहे है। इसी बुराई के चलते बिहारी सिंह ठाकुर ने रामभगत यादव की तरह उसके पुत्र लाड़ले यादव की हत्या कर अपने बेटों की सजा का बदला लेने की मंशा से गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया है।
इस घटना पर थाना पुलिस ने आरोपी बिहारी सिंह ठाकुर के विरूद्ध अपराध क्रमांक 186/18 धारा 294, 307 आईपीसी के तहत् प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया है। शाहनगर थाना प्रभारी शंकर सिंह ठाकुर ने स्थानीय संवादाता संजय त्रिपाठी से अनौपचारिक चर्चा में गोलीकाण्ड के आरोपी को शीघ्र गिरफतार करने की बात कही है। उधर इस खूनी रंजिश के चलते ग्राम जुगरवारा में तनाव और दहशत का माहौल है।
वर्ष 2011 से सभी शिक्षक संगठनों द्वारा इस मांग को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि 10 अप्रैल 2017 से निरंतर विभिन्न मंचों से मुख्यमंत्री, प्रदेश के शिक्षा मंत्री और शिक्षा राज्यमंत्री द्वारा इस मांग को न्यायोचित ठहराते हुए इसे पूर्ण करने की घोषणा कर चुके है। श्री त्रिपाठी का कहना है कि मध्यप्रदेश में मौजूदा समय में अफसरशाही इस कदर हावी है कि शीर्ष अधिकारी तमाम अड़गें लगाकर मुख्यमंत्री की घोषणा को पूर्ण होने नहीं दे रहे है। भोपाल स्थित राज्य सचिवालय (मंत्रालय) में बैठे अफसरों द्वारा बेवजह पैदा की जा रही अड़चनों से शिक्षक अपना हक पाने से वंचित है। इसकी पीड़ा और कुण्ठा के चलते परेशान शिक्षक हर पल खुद को अपमानित महसूस कर रहे है। इसे बिडम्बना ही कहा जायेगा कि इस घोषणा को अमल में लाने पर प्रदेश सरकार पर एक रूपये पर बोझ नहीं पड़ना है बावजूद इसके शिक्षक हितैषी मांग झूठी घोषणाओं और वादों तक सिमट कर रह गई है। कर्मचारी नेता कमलेश त्रिपाठी ने जोर देते हुए कहा कि अब हम और बर्दास्त नहीं करेंगे। प्रति माह प्रदेशभर में 400-500 शिक्षक अपमान का घूट पीकर रिटायर्ड होने को मजबूर है। प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षक हताशा और निराशा के दौर से गुजर रहे है। तीन से चार दशक तक एक ही पद पर सेवा करते हुए रिटायर्ड होना हर किसी को बेचैन कर रहा है। आपने कहा कि पदोन्नति/पदनाम की मांग हमारे स्वाभिमान और हक जुड़ी है जिसे हरहाल में पूर्ण कराने के लिए विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी प्रतिबद्धता पर कायम रहते हुए जुलाई महीने से चरणबद्ध आंदोलन करने का ऐलान किया है।



ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश की पवई विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में कुल मिलाकर 22 हजार ऐसे मतदाताओं के नाम सूची में सम्मिलित है जो दो-दो और तीन-तीन ग्रामों के पोलिंग बूथों की सूची में दर्ज है। एक ही मतदाता दो-दो जगह अपना नाम दर्ज कराये हुये है। कुछ तो ऐसे मतदाताओं के नाम दर्ज है जो न तो उस पोलिंग बूथ में निवास करते है और न ही पवई विधानसभा के मतदाता है। ज्ञापन में आगे उल्लेख किया गया है कि लोकतंत्र में मतदान एक निष्पक्ष प्रक्रिया है दो-दो पोलिंग बूथों में नाम दर्ज होने से एक ही मतदाता दो स्थानों पर मतदान करेगा जो कि निर्वाचन प्रक्रिया में पूर्ण रूप से अवैधानिक है। ऐसे मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाया जाना अति आवश्यक है। ज्ञापन के माध्यम से तत्काल कार्यवाही कर मतदाता सूची में सम्मिलित फर्जी नाम एवं दो-दो पोलिंग बूथों में शामिल नाम को निरस्त कर एक ग्राम की पोलिंग बूथ में रखे जाने का आग्रह किया गया है। विधायक के खुलासे के बाद मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की कार्यवाही पर सवालों के घेरे में आगई है।


