* प्रभारी मंत्री ने जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला पहुंचकर की कृषकों से चर्चा
* विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गयी किसान उपयोगी प्रदर्शनी को सराहा
पन्ना रडार न्यूज प्रदेश के शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी बुधवार को कृषि उपज मण्डी प्रांगण पन्ना में आयोजित जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि किसान देश के विकास की नींव का पत्थर हैं, जब किसान मजबूत होगा तभी प्रदेश और देश मजबूत हो सकता है। इस बात के महत्व को समझते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने शपथ लेने के तत्काल बाद जय किसान फसल ऋण माफी योजना के रूप में किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के कृषकों को समृद्धशाली बनाने तथा पीड़ित कृषकों की पीड़ा को दूर करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। योजना के क्रियान्वयन में बैंक एवं जिला प्रशासन के सभी अधिकारी, कर्मचारी पूरी लगन एवं निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। जिले के हर पात्र कृषक को योजना का लाभ अनिवार्य रूप से मिले। इसके अतिरिक्त जिले में चल रही अन्य सभी जनहित की योजनाओं का भी लाभ समाज के हर वर्ग, हर तबके एवं दूरस्थ अचंलों में निवास कर रहे लोगों को भी मिले। यह अपेक्षा उन्होंने जिले के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों से की। मंत्री डॉ. चौधरी दो दिवसीय जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी कार्यक्रम के समापन दिवस पर जिलेभर से पहुंचेकृषकों को सम्बोधित कर रहे थे।
विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी का किया अवलोकन
जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी कार्यक्रम में पहुंचते ही शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश शासन एवं जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी द्वारा सबसे पहले कृषि संबंधी विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गयी किसान उपयोगी प्रदर्शनियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने प्रवेश द्वार पर ही किसानों के पंजीयन के लिए बनाए गए काउंटर एवं मॉडल रूप में बनाई गयी विभागीय प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी के माध्यम से किसान भाईयों को दी जा रही व्यवहारिक जानकारियों से निश्चित ही उन्हें लाभ पहुंचेगा। उल्लेखनीय है कि कृषि विज्ञान मेले में कृषि विभाग, मत्स्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश राज्य आजीविका मिशन अन्तर्गत विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी, उद्यानिकी विभाग अन्तर्गत मशरूम कल्चर, एजोला कल्चर पर आधारित एवं पशुपालन विभाग द्वारा उन्नत नस्ल एवं दुग्ध उत्पादन पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गयी थी।
राजू को सौंपी मोबाइल मार्केट वेन की चाबी
जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी कार्यक्रम में मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी द्वारा मत्स्य विभाग की नील क्रांति योजना के अन्तर्गत राजू रैकवार अध्यक्ष मत्स्य उद्योग सहकारी समिति पन्ना को मोबाइल मार्केट वेन की चाबी प्रदाय की गयी। रूपये 10 लाख की लागत की इस वेन के लिए योजना अन्तर्गत 4 लाख रूपये का अनुदान दिया गया है। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों डॉ. बी.एस. किरार एवं डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा टिकाउ खेती, बीज चयन, उन्नत खेती, कीटों की फसलों की सुरक्षा आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी एवं वैज्ञानिक सलाह दी गयी।
बुन्देलखण्डी गायिका श्रीमती शांति देवी द्वारा बुन्देली गीतों के माध्यम से कृषकों को उन्नत खेती की जानकारी मनोरंजक ढंग से दी गयी। इस अवसर पर विधायक गुनौर शिवदयाल बागरी, पूर्व मंत्री केप्टन जयपाल सिंह, कलेक्टर मनोज खत्री, पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, उप संचालक कृषि ए.पी. सुमन, पूर्व विधायक पन्ना श्रीकांत दुबे, श्रीमती दिव्यारानी सिंह, केशव प्रताप सिंह, शशिकांत दीक्षित, मनीष मिश्रा, शिवजीत सिंह, अनुराधा शेंडगे, मीना यादव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी, कर्मचारी, पत्रकारबन्धु तथा बड़ी संख्या में जिलेभर से आए हुए कृषक भाई -बहनें उपस्थित रहे।
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मालूम हो कि तीन विधानसभा सीट वाले पन्ना जिले में शिवदयाल बागरी कांग्रेस के इकलौते विधायक है। इनके और पन्ना के जिला पंचायत सीईओ डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा (आईएएस) के बीच पिछले कुछ समय से किस बात को लेकर अनबन चल रही थी इसका स्पष्ट तौर पता तो नहीं चल सका। लेकिन, प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो विधायक श्री बागरी ने कुछ दिन पूर्व अपने निर्वाचन क्षेत्र गुनौर के दो पंचायत सचिवों के स्थानांतरण सहित अन्य कार्यों के संबंध पन्ना आकर जिला पंचायत सीईओ से उनके कार्यालय में भेंट की थी। मुलाकात के दौरान विधायक की सिफारिशों पर सीईओ ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए शीघ्र कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया। कथित तौर पर बाद में उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को बुलाकर विधायक से सिफारिश कराने के लिए उन्हें कड़ी फटकार लगा दी।
आईएएस अधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा पन्ना जिले में स्कूलों की शैक्षणिक व्यस्था को बेहतर बनाने के लिए पिछले कुछ माह से लगातार स्वयं स्कूलों का निरीक्षण कर रहे थे और इसके लिए उन्होंने टीमें भी बनाई थीं। जिसके चलते कई शिक्षकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। सीईओ की इस मुहिम से जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई। कतिपय लापरवाह और कामचोर शिक्षकों समेत कुछ शिक्षक संगठन इसे लेकर सीईओ से अंदर ही अंदर नाराज चल रहे थे। विनम्र स्वाभाव के ईमानदार अफसर की छवि वाले जिला पंचायत सीईओ गिरीश कुमार मिश्रा कम समय में अपने प्रयासों से शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं में तो कुछ हद तक सुधार करने में सफल रहे हैं, लेकिन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अराजकता पर प्रभावी अंकुश लगाने वे कामयाब नहीं हो सके। आधे-अधूरे तथा अत्यंत ही गुणवत्ता विहीन प्रधानमंत्री आवासों व शौंचालयों की लक्ष्यपूर्ति के लिए कागजों पर उन्हें पूर्ण बता दिया गया। कई पंचायतों में तो व्यक्तिगत शौंचालयों का निर्माण भी नहीं हुआ और राशि निकाल कर गबन कर लिया गया। पंच परमेश्वर योजनान्तर्गत पंचायतों में अधिकांशतः घटिया कार्य कराये गए।
अच्छी सोच के साथ सकारात्मक पहल


मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान जायका के मिशन दल ने बताया कि जापान द्वारा मध्यप्रदेश में समूह जल-प्रदाय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये वित्तीय सहायता देने की सहमति दी गयी है। जायका से वित्तीय सहायता के लिये 3000 करोड़ रुपये की परियोजना प्रस्तावित है। परियोजना में मंदसौर, नीमच एवं रतलाम जिले के 9 विकासखण्ड के 1735 गाँव में लगभग 20 लाख ग्रामीण आबादी को घरेलू नल कनेक्शन के जरिये पेयजल उपलब्ध होगा। जायका मिशन दल में सुश्री मिसातो तकाहासी कन्ट्री ऑफिसर, कजुनोरी नकाई इंजीनियर, केनीचीरो इवाहोरी प्रोग्राम स्पेशलिस्ट, सुब्रतो तलुकदार प्रिंसिपल डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट, जायका कन्सलटेंट फर्म निप्पॉन कोई कम्पनी लिमिटेड के मयासुकी फुजी, टीम लीडर रिसा किकुची, सब लीडर हीदेहीसा तमुरा, फेसिलिटी प्लानिंग और ऑपरेशन एण्ड मेटेंनेंस अकीरो नटोरी शामिल थे।

हैरत की बात है कि एक और जहाँ देश भर में गौवंश संरक्षण को लेकर हंगामा बरपा है वहीं पहाड़ीखेरा डेढ़ वर्ष से कैद बैलों की सुध लेने या उन्हें आजाद कराने कोई संगठन, समाजसेवी या जनप्रतिनिधि आगे नहीं आया। जबकि क्षेत्र में सभी को इसकी जानकारी थी। उधर, इन बदनसीब बेजुबानों से उनका मालिक तो पहले ही मुँह मोड़ चुका था। इन परिस्थितियों में वन विभाग के अमले ने भी बैलों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया। परिक्षेत्र सहायक पहाड़ीखेरा समेत अधीनस्थ कर्मचारी इन्हें स्वयं की गलती से निर्मित समस्या मानते हैं। इसलिए, बैलों की देखभाल को लेकर इन्हें कोई सरोकार नहीं है। इन मूक पशुओं की बदहाली का पता पिछले दिनों तब चला जब पन्ना के पत्रकारों की एक टीम पहाड़ीखेरा के भ्रमण पर पहुँची। वहाँ परिक्षेत्र सहायक पहाड़ीखेरा के कार्यालय परिसर में स्थित खण्डरनुमा कमरे को खुलवाकर जब देखा तो दोनों बैल आँगन के एक कोने में रखे प्याँर को खा रहे थे। इनके लिए भूसा-पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई। बैलों को इतने दिनों तक भोजन के नाम पर मुफ्त में मिला रुखा-सूखा प्याँर खिलाकर उनके साथ क्रूरता की जा रही है। उचित देखभाल तथा भोजन के आभाव में दोनों ही बैलों की काया जर्जर हो चुकी है। इनके शरीर की अधिकांश हड्डियाँ दिखने लगी है। युवावस्था में ही ये बैल बीमार-वृद्ध से नजर आ रहे हैं।
बैलों की दुर्दशा को पत्रकारों के द्वारा पिछले दिनों अपने कैमरों में कैद करने के बाद उत्तर वन मंडल के अधिकारियों को यह एहसास हो गया था कि इनकी देखभाल में बरती गई लापरवाही के मुद्दे पर वह घिर सकते हैं, इसलिए डेढ़ साल बाद आनन-फानन में बैलों की नीलामी की तिथि घोषित कर दी गई। मालूम हो कि लम्बे समय से सीमित जगह में कैद रहने और खाने-पीने की कोई व्यवस्था न होने से दोनों बैल अब किसी उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। छोटे से स्थान में कैद रहने से इनका शरीर काफी हद तक जकड़ चुका है। इसलिए, नीलामी में कोई इन्हें खरीदेगा इस बात की उम्मीद न के बराबर है। वन विभाग के अमले का भी यही मानना है। लेकिन, इन बैलों से हरहाल में पीछा छुड़ाने का मन बना चुके विभागीय अधिकारी इस स्थिति में अपने लोगों के नाम पर न्यूनतम बोली लगाकर इन्हें स्वछंद विचरण के लिए छोड़ सकते है। अब देखना यह है कि डेढ़ वर्ष से कैद दोनों बैलों को खरीदने के लिए सोमवार को कोई वास्तविक खरीददार सामने आता है या फिर वन अमले की योजनानुसार नीलाम होने पर उन्हें आजादी के रूप में आवारा भटकने की सजा मिलेगी।
कमलनाथ ने कहा कि रोजगार के दौरान युवाओं को उनके पसंद के क्षेत्र में कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उनके हाथ में कौशल होगा, तो वे विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का पूरा-पूरा लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि योजना में 10 फरवरी से युवाओं का पंजीयन प्रारंभ होगा और फरवरी माह में ही रोजगार और कौशल देने का काम शुरू हो जायेगा। मुख्यमंत्री ने नागरिकों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने संविधान के निर्माण से जुड़ी सभी महान विभूतियों एवं स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों का स्मरण किया। उन्होने छिन्दवाडा में गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने काम शुरू करते ही पात्र किसानों का दो लाख रूपये तक का कर्ज माफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक नीति में बदलाव करते हुए शासन की सहायता लेने वाले उद्योगों में कम से कम 70 प्रतिशत रोजगार प्रदेश के ही लोगों को दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले तेन्दूपत्ता सीजन से तेन्दूपत्ता मजदूरी और बोनस का नकद भुगतान होगा। तेन्दूपत्ता की मजदूरी दर 2000 रूपये प्रति मानक बोरा को बढ़ाकर 2500 रूपये प्रति मानक बोरा की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवारा पशुओं के लिये गौशाला खोलने की योजना पर काम शुरू हो गया है। फरवरी माह में योजना को अंतिम रूप देकर क्रियान्वयन शुरू कर दिया जाएगा। जनजातीय कल्याण की चर्चा करते हुए कमलनाथ ने कहा कि जनजातीय भाइयों के पास जमीनों का सबसे बेहतर उपयोग करने के लिये जनजातीय कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में अनुसूचित जनजाति के सांसदों और विधायकों की एक समिति बनाई गई है। इस समिति की अनुशंसा पर सरकार काम करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन में नयी कार्य-संस्कृति लाना जरूरी है। नये नजरिये और दृष्टिकोण के साथ परिवर्तन आयेगा। उन्होंने सभी शासकीय और पुलिस कर्मचारियों तथा अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे जन सेवा का कार्य पूरी ईमानदारी के साथ करेंगे। सरकारी विभागों और सरकारी अमले के कामों का मूल्यांकन जनता करेगी। जनता का मूल्यांकन ही सही माना जायेगा। मध्यप्रदेश शासन-प्रशासन और आम लोगों के बीच समन्वय का उदाहरण पेश करेगा। सरकार हर वर्ग की चिंता करेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार से लोगों को नाउम्मीदी नहीं होगी। प्रचार कम, काम ज्यादा होगा। आने वाले पांच सालों में प्रदेश को पूरी तरह विकसित प्रदेश बनाने की राह पर तेजी से काम करने के लिये राज्य सरकार संकल्पित है।