मनमानी : चहेतों को उपकृत करने के खेल में एससी-एसटी के साथ भेदभाव, वरिष्ठता को भी किया दरकिनार, वन विभाग के बड़े अफसरों का कारनामा
* पन्ना में जूनियरों डिप्टी रेंजरों को नियम विरुद्ध दिया गया रेंज का प्रभार
* उपेक्षित महसूस कर रहे सीनियर डिप्टी रेंजर, वन कर्मचारी संघ ने जताई आपत्ति
पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के संरक्षित और सामान्य वन मंडलों में पिछले कई महीनों से सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। यहाँ वन्यजीवों के शिकार की घटनाएँ चिंताजनक तेजी से बढ़ीं हैं, बड़े पैमाने पर वनों की अंधाधुंध कटाई जारी है, पत्थर व हीरा खनन के लिए माफिया जंगल को उजाड़ने और पहाड़ों को खोखला करने में जुटे हैं। वन संपदा के विनाश से जुड़ीं इन गंभीर चुनौतियों का सामना करने के मोर्चे पर जिम्मेदार विभागीय अधिकारी अक्षम और असफल साबित हो रहे हैं। उधर, इनके द्वारा मनमाने तरीके से लिए जा रहे भेदभावपूर्ण गलत निर्णयों के कारण विभागीय अमले में असंतोष पनप रहा है। डिप्टी रेंजरों को रेंज का प्रभार देने का मामला इसका इसका एक उदाहरण मात्र है।
पन्ना के उत्तर वन मंडल एवं पन्ना टाईगर रिजर्व अंतर्गत चहेतों को उपकृत करने के लिए सीनियर डिप्टी रेंजरों को दरकिनार कर जूनियर को रेंज का प्रभार दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निहित स्वार्थपूर्ति के लिए की गई इस मनमानी के चलते सीनियर डिप्टी रेंजर अपमानित महसूस कर रहे हैं। उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज के प्रभारी वन परिक्षेत्राधिकारी मनोज बघेल का मूल पद डिप्टी रेंजर है। वरिष्ठता के मामले में इनका नंबर अपने ही विभाग के डिप्टी रेंजर नंदा प्रसाद अहिरवार, घनश्याम सिंह चौहान, लीलाधर शाह के बाद आता है। लेकिन, पन्ना और छतरपुर में बैठे विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी के चलते पहलवान बने जूनियर डिप्टी रेंजर अपने सीनियरों पर भारी पड़ रहे हैं। रेंज का प्रभार देने के मामले में वरिष्ठता को नजरअंदाज करने का यह अनुचित और आपत्तिजनक निर्णय शिवराज सरकार के समय लिया गया था। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेताओं से नजदीकी के चलते इन्हें नियम विरुद्ध लाभ देकर उपकृत किया गया।
देवेंद्रनगर से रेंजर को हटाया

उल्लेखनीय है कि सभी राजनैतिक दल और सरकारें आरक्षित वर्गों के हितों के संरक्षण की बात तो करती हैं लेकिन इस पर ईमानदारी से अमल नहीं करतीं। सामान्य वर्ग से आने वाले जूनियर डिप्टी रेंजर मनोज बघेल को रेंज का प्रभार देने का खामियाजा आरक्षित वर्ग से ताल्लुक रखने सीनियर डिप्टी रेंजर नंदा प्रसाद अहिरवार, लीलाधर शाह को उठाना पड़ रहा है। उधर, कुछ समय पहले देवेन्द्रनगर रेन्ज के परिक्षेत्राधिकारी (रेंजर) सुरेन्द्र शेण्डे को हटाकर वहाँ भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी अखिल बंशल को पदस्थ किया गया। जबकि उत्तर वन मंडल में ही तैनात की गईं मध्यप्रदेश वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री हरमन गोपा को अब तक किसी रेंज का प्रभार नहीं मिला है।
इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि आईएफएस अधिकारी अखिल बंशल को रेंज में पदस्थ करने के लिए पन्ना तथा विश्रामगंज रेंज का प्रभार सम्भाल रहे डिप्टी रेंजरों को न हटाकर देवेन्द्रनगर से आरक्षित वर्ग के रेंजर को पृथक किया गया। जबकि उत्तर वन मण्डल रेंजरों की कमी से जूझ रहा है। क्या यह निर्णय उचित है, इस पर बहस हो सकती है। जूनियर डिप्टी रेंजर रेंजों के प्रभार सम्भालें और रेंजर व सीनियर डिप्टी रेंजर लूप लाइन में पड़े रहें यह कहाँ का न्याय है। इतना ही नहीं प्रशिक्षण पर आईं सुश्री गोपा को अब तक कोई रेन्ज सिर्फ इसलिए नहीं मिल पा रही है क्योंकि ऐसा करने पर चहेते डिप्टी रेंजरों में से किसी एक से रेंज का प्रभार छिन जाएगा। इससे वरिष्ठ अधिकारियों के हित भी प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से प्रभावित होंगे।
सीएफ को सौंपा ज्ञापन
कुछ इसी तरह की स्थिति पन्ना टाईगर रिजर्व में भी देखी जा रही है। यहाँ सीनियर डिप्टी रेंजर कृपाल सिंह के पास किसी रेंज का प्रभार नहीं है जबकि उनसे जूनियर लालबाबू तिवारी, अमर सिंह, और रामप्रसाद प्रजापति प्रभारी रेंजर बने बैठे हैं। डिप्टी रेन्जर कृपाल सिंह अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। इस तरह आरक्षित वर्गों से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ डिप्टी रेंजरों को रेंज कार्यालय का प्रभार न देकर उनके साथ खुलेआम भेदभाव किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के इस कारनामे से आरक्षित वर्गों के वनकर्मी उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि इन्हें आखिर किस अपराध की सजा दी जा रही है। वन विभाग के अंदर भी इसे लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ के द्वारा इस मनमानी के खिलाफ मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर को ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। वन कर्मचारी संघ ने यह चेतावनी भी दी है कि इस मनमानी को यदि तुरंत नहीं रोका गया तो उसे आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।
दागियों पर मेहरबान

मनमाने तरीके से जूनियर डिप्टी रेंजरों को रेंज का प्रभार देने के मामले में उनकी छवि और कारनामों की घोर अनदेखी की गई। मालूम हो कि उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज के प्रभारी रेंजर मनोज सिंह बघेल की पत्नी के नाम पर दर्ज ट्रेक्टर को वन भूमि में अवैध रूप से जुताई करते हुए श्री बघेल ने ही जब्त किया था। इनके ऊपर निजी भूमि में पौधरोपण कराने, विभागीय कार्यों में अनियमितता करने, वन अपराधों की रोकथाम में असफल रहने के आरोप हैं। पन्ना टाईगर रिजर्व की पन्ना रेंज के प्रभारी रेंजर लालबाबू तिवारी पर भी भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप हैं। संरक्षित वन क्षेत्र से रेत, पिपरमेंट का अवैध परिवहन कराने और 50 श्रमिकों को बँधुआ मजदूर बनाकर उनसे पौधरोपण कार्य कराने के मामले में इनके विरुद्ध विभागीय जाँच चल रही है। बाबजूद इसके सीनियर डिप्टी रेंजरों को नजरअंदाज कर दागी जूनियरों पर वन विभाग के अधिकारी मेहरबान हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से मिल रहे खुले संरक्षण के चलते वन विभाग में जमे दागी डिप्टी रेंजरों के हौसले बुलंद हैं। इस संबंध में जब मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर राघवेन्द्र श्रीवास्तव से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल बंद होने कारण संपर्क नहीं हो सका। वहीं उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ नरेश सिंह यादव के शासकीय कार्य के सिलसिले में प्रदेश से बाहर असम में होने के कारण उनसे भी बात नहीं हो सकी।
मध्यप्रदेश में पुजारियों के आएँगे अच्छे दिन, मानदेय में पांच गुना तक होगी वृद्धि

* धर्मस्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने संत पुजारी महासंघ के कार्यक्रम में की घोषणा
* मंदिरों के बेहतर रख-रखाव और संरक्षण के लिए अनुदान भी मिलेगा
भोपाल। रडार न्यूज मध्यप्रदेश में किसानों का दो लाख तक का कृषि ऋण माफ़ होने के बाद अब जल्दी ही पुजारियों के अच्छे दिन आने वाले हैं। प्रदेश की कमलनाथ सरकार पुजारियों के मानदेय में पांच गुना तक वृद्धि करने जा रही है। धार्मिक न्यास-धर्मस्व एवं जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने आज एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी है। मध्यप्रदेश संत पुजारी महासंघ के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्री शर्मा कहा कि सरकार शीघ्र ही पुजारियों के मानदेय में पांच गुना तक वृद्धि करने जा रही है। उन्होंने मंदिरों के रख-रखाव और संरक्षण के लिए अनुदान भी दिए जाने की बात कही।

मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि संत पुजारियों एवं धार्मिक स्थलों से संबंधित समस्याओं का निराकरण शीघ्र ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अध्यात्म विभाग का गठन किया है। सभी समस्याओं के निराकरण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में पुजारियों के द्वारा मांग पत्र धर्मस्व मंत्री को सौंपा गया। मांग पत्र में उल्लेखित मांगों पर विचार उपरांत उन्हें पूरा करने के हर संभव प्रयास किए जाने को श्री शर्मा ने आश्वस्त किया है। कार्यक्रम में पार्षद योगेन्द्र सिंह चौहान, संत पुजारी संघ के उपाध्यक्ष जगदीश शर्मा, नरेन्द्र दीक्षित, राकेश चतुर्वेदी, धु्व नारायण एवं अन्य पुजारी उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री आवास योजना में 700 करोड़ आवंटित करने की माँग, मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री पुरी से की भेंट

भोपाल। रडार न्यूज प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में शहरी विकास और आवास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भेंट कर प्रदेश में चल रही विभागीय योजनाओं के संबंध में चर्चा की। मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में कुल 712 करोड़ रुपये आवंटित करने की माँग की।
श्री सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में लगभग एक लाख आवासों के लिये 600 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त और द्वितीय किश्त के रूप में 112 करोड़ रुपये आवंटित करने का आग्रह किया। मंत्री श्री सिंह ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन में वित्तीय वर्ष 2018-19 की द्वितीय किश्त के 29 करोड़ 51 लाख रुपये जारी करने का अनुरोध किया।
मंत्री श्री सिंह ने स्वच्छ भारत मिशन में 25 हजार 160 सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा करने के लिये 14 करोड़ 32 लाख रुपये का अतिरिक्त आवंटन जारी करने का आग्रह किया है। श्री सिंह ने इस अतिरिक्त आवंटन की माँग के पीछे सार्वजनिक शौचालय की पुनरीक्षित लागत को बताया है। उन्होंने प्रदेश में शहरी विकास योजनाओं की अद्यतन स्थिति से भी अवगत कराया। इस दौरान प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास प्रमोद अग्रवाल भी उपस्थित थे।
मेला देखने मायके आई नव विवाहिता हुई लापता, पत्नी की तलाश में दर-दर भटक रहा युवक, पुलिस से लगाई गुहार “प्लीज, मेरी मदद करो”
* पन्ना जिले के पहाड़ीखेरा पुलिस चौकी क्षेत्र की घटना
पन्ना। रडार न्यूज मकर संक्रांति के पर्व पर मेला देखने के लिए ससुराल से अपने मायके आई 20 वर्षीय नव विवाहिता रहस्मय तरीके से लापता हो गई। विवाहिता के अचानक लापता होने उसका पति, माता-पिता सहित अन्य परिजन अत्यंत चिंतित और परेशान हैं। गुमशुदगी की यह घटना मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के पुलिस थाना बृजपुर अंतर्गत आने वाले पहाड़ीखेरा चौकी क्षेत्र की है। पत्नी की तलाश में पिछले कई दिनों से दर-दर भटक रहे रामदीन कोल की हालत विक्षिप्त जैसी हो गई है। नजदीकी रिश्तेदारी से लेकर सभी संभावित स्थानों पर खोजबीन कर थकहार चुके रामदीन ने पत्नी की तलाश के लिए पहाड़ीखेरा चौकी पुलिस से गुहार लगाई है।
रामदीन ने पुलिस को बताया कि- “उसकी पत्नी आरती बहुत अच्छी थी और उसे बहुत प्रेम करती थी। वह इस तरह अचानक उसे छोड़कर क्यों चली गई उसे खुद भी कुछ समझ नहीं आ रहा है।“इस घटनाक्रम पर चौकी पुलिस ने फ़िलहाल गुमइंसान का प्रकरण कायम किया है। मामला नवविवाहिता से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने इसे संवेदनशीलता लिया है। पड़ोसी जिलों के पुलिस थानों को लापता आरती कोल 20 वर्ष की अपने-अपने क्षेत्र में खोजबीन हेतु उसके हुलिया, कद-काठी की जानकारी के साथ उसका पासपोर्ट साईज का फोटो भी भेजा है। इधर, पहाड़ीखेरा और बृजपुर पुलिस ने भी अपने स्तर पर तलाश शुरू कर दी है।
डेढ़ वर्ष पूर्व हुआ था विवाह

पड़ोसी जिला सतना के ग्राम इटवां बमरहा निवासी रामदीन कोल पुत्र नत्थू कोल 27 वर्ष ने पुलिस को बताया कि डेढ़ वर्ष पूर्व ग्राम भसूड़ा निवासी निवासी आरती के साथ उसका विवाह हुआ था। पेशे से राजमिस्त्री रामदीन काम के सिलसिले में कुछ समय से चित्रकूट में रह रहा था जबकि पत्नी आरती कोल उसके माता-पिता के साथ गाँव में रहती थी। कुछ दिन पूर्व मकर संक्रांति पर्व पर पटपरनाथ का मेला देखने के लिए आरती ससुराल से अपने मायके ग्राम भसूड़ा आई थी। मेला देखने के बाद आरती अपने घर गई और फिर अगले दिन 15 जनवरी की सुबह वह अचानक रहस्मय तरीके से लापता हो गई। जब इस अप्रत्याशित घटना की सूचना रामदीन को दी गई तो वह इसे मजाक समझा। लेकिन, जब सास-ससुर से बात हुई तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। बिना किसी देरी के चित्रकूट से भागा-दौड़ा वह भसूड़ा पहुँचा और फिर पूरी जानकारी प्राप्त कर गाँव में अपने माता-पिता को इसकी सूचना दी।

अपने स्तर पर पत्नी की तलाश करके थकहार चुके रामदीन ने पहाड़ीखेरा चौकी पुलिस से मदद माँगी है। शनिवार 19 जनवरी को आरती की फोटो लेकर पहाड़ीखेरा पहुँचे रामदीन ने पुलिस को बताया कि मेरी पत्नी बहुत अच्छी है, मुझे प्रेम बहुत प्रेम करती थी, साथ ही मेरी और मेरे वृद्ध माता-पिता की सेवा भी करती थी। पत्नी के वियोग में व्यथित रामदीन का दर्द यह है कि दोनों के बीच जब सबकुछ अच्छा चल रहा था तो अचानक ऐसा क्या हुआ, जो उसकी पत्नी उसे बगैर कुछ बताए अचानक गायब हो गई। नव विवाहिता पत्नी के लापता होने के बाद से रामदीन को हर पल बस यही बात बेचैन और व्यथित कर रही है। उल्लेखनीय है कि डेढ़ वर्ष के वैवाहिक जीवन के बाद भी इनकी कोई संतान नहीं है। बहरहाल, नवविवाहिता के लापता होने के मामले की प्रारंभिक पुलिस जाँच में यह साफ़ नहीं हो पाया है कि आरती कोल अपनी मर्जी से कहीं गई है या फिर कोई उसे अगवा कर ले गया है।
सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रम में भी घोर लापरवाही ! मतदान केन्द्रों से बीएलओ नदारत, नाम जुड़वाने-सुधार कराने भटक रहे मतदाता, वोटर लिस्ट पुनरीक्षण कार्य की मॉनिटरिंग कागजों तक सिमटी

* मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम का रियलिटी चेक
* मोबाइल फोन पर चल रहा दावा-आपत्ति प्राप्त करने कार्य
* बीएलओ के घर और ऑफिस के चक्कर काटने को मजबूर हैं मतदाता
पन्ना। रडार न्यूज भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव-2019 की आवश्यक तैयारियाँ तेजी से शुरू कर दीं हैं, इसके तहत सबसे अहम कार्य मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण हेतु उनका विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम इन दिनों पोलिंग बूथ स्तर पर चलाया जा रहा है। आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार फोटो निर्वाचक नामावली(फोटो वाली वोटर लिस्ट) का 26 दिसंबर 2018 को प्रारूप का प्रकाशन किया गया, जिसके बाद से दावे-आपत्तियां प्राप्त करने की कार्यवाही बीएलओ द्वारा 25 जनवरी 2019 की जायेगी। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य में घोर लापरवाही बरती जा रही। सर्वोच्च प्राथमिकता वाले इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन का हाल यह है कि जिला मुख्यालय के ही अधिकांश पोलिंग बूथों से बीएलओ नदारत हैं। इस कारण लोगों को मतदाता सूची में अपना नाम देखने, 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके नव मतदाताओं को अपना नाम जुड़वाने, नाम कटवाने अथवा उसमें सुधार कराने आदि के लिए भटकना पड़ रहा।
पोलिंग बूथों में तैनात किए गए बीएलओ के गायब रहने का दुष्परिणाम यह है कि प्रतिदिन वहाँ पहुँचने वाले मतदाताओं में से अधिकांश निराश होकर लौट जाते है। जो लोग मोबाइल फोन पर बीएलओ संपर्क करते हैं, उनसे दावा-आपत्ति प्राप्त करने के लिए वहाँ पर बुलाते हैं जहाँ ये उपलब्ध रहते हैं। इस तरह अपने क्षेत्र के बीएलओ से मिलने के लिए लोगों को उनके घर और ऑफिस के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बीएलओ की इस मनमानी से पन्ना में फोटोयुक्त मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण को लेकर भारत निर्वाचन आयोग की मंशा पर पानी फिर रहा है। उधर, इस कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है उनकी भूमिका सिर्फ निर्देश देने और कागजी खानापूर्ति करने तक ही सीमित है। विडम्बना यह है कि शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रम का क्रियान्वयन जब जिला मुख्यालय में ही सही तरीके से नहीं हो पा रहा है तो ग्रामीण अंचल में स्थिति क्या होगी इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
कई मतदान केन्द्रों पर नहीं मिले बीएलओ
पन्ना के पत्रकारों के एक दल ने गुरुवार 17 जनवरी 2019 को पन्ना शहर के कई मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया तो इस दौरान अधिकांश बीएलओ अनुपस्थित मिले। जिनमें मतदान केन्द्र क्रमाँक- 192, 189, 187, 185, 186, 183, 180, 177, 176 के बीएलओ शामिल हैं। मजेदार बात यह है कि जिन शैक्षणिक संस्थाओं में मतदान केन्द्र स्थित हैं वहाँ पड़ताल करने पर पता चला कि कई बीएलओ तो सप्ताह भर से नहीं आए है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर शिक्षकों ने बताया कि बीएलओ से सम्बंधित कार्य के लिए आने वालों को उनके मोबाइल फोन पर सम्पर्क करना पड़ता है, वे जहाँ भी बुलाते हैं लोगों को वहाँ जाना पड़ता है। इसी तर्ज पर पन्ना में शहर फोटो निर्वाचक नामावली का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। मतदान केन्द्रों के निरीक्षण के दौरान शासकीय छत्रसाल महाविद्यालय पन्ना के कला खण्ड में केन्द्र क्रमाँक- 191 के बीएलओ संजय शुक्ला और डाइट के मतदान केन्द्र क्रमाँक-188 के बीएलओ शिवांश यादव उपस्थित मिले। क्योंकि, ये दोनों उन्हीं संस्थाओं में पदस्थ हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि शासकीय छत्रसाल महाविद्यालय पन्ना के कला खण्ड व डाइट परिसर में क्रमशः दो और तीन अन्य मतदान केन्द्र स्थित हैं जिनके बीएलओ गायब थे। अनुपस्तिथ बीएलओ दूसरे विभागों के कर्मचारी बताये जा रहे हैं, इसलिए ये अपने विभागीय कार्य का बहाना बनाकर मतदान केन्द्र से अधिकांश समय नदारत रहते हैं। बीएलओ संजय शुक्ला व शिवांश यादव बताया कि दूसरे केन्द्रों से संबंधित मतदाताओं के आने पर वे उनके दावा-आपत्ति ले लेते हैं ताकि कोई परेशान न हो। बाद में संबंधित बीएलओ को मोबाइल पर सूचना देकर दावा-आपत्ति उन्हें अग्रिम कार्यवाही के लिए सौंप देते हैं। इस काम चलाऊ व्यवस्था के बाबजूद उन मतदाताओं को तो फिर भी निराश होकर लौटना पड़ रहा जो सिर्फ वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक करने के लिए आते है। क्योंकि, सभी बीएलओ अपनी वोटर लिस्ट की कॉपी अपने पास ही रखते हैं। निरीक्षण में कुछ मतदान केन्द्र ऐसे भी मिले जहाँ एक भी बीएलओ उपस्थित नहीं थे। वैसे तो सभी बीएलओ को अपने-अपने मतदान केन्द्र पर उपस्थित रहना अनिवार्य है, भले ही एक ही संस्था या परिसर में एक से अधिक मतदान केन्द्र स्थित हों।
क्या झूठा है प्रशासन का दावा
पत्रकारों की टीम की पड़ताल में उजागर हुई फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2019 की सच्चाई जिला निर्वाचन कार्यालय पन्ना के दावों से मेल नहीं खाती है। जनसम्पर्क कार्यालय पन्ना के माध्यम से दिनाँक 11 जनवरी 2019 को जारी समाचार क्रमाँक 124-124 में यह बताया गया है कि “भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार पन्ना जिले में 26 दिसंबर 2018 को फोटो निर्वाचक नामावली प्रारूप का प्रकाशन किया गया है। जिसके बाद से जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्रों के कुल 895 मतदान केन्द्रों पर बीएलओ द्वारा नियमित रूप से दावा-आपत्ति प्राप्त किए जा रहे हैं। कार्य की मॉनीटरिंग के लिए विधानसभावार एवं तहसीलवार बीएलओ की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। यह प्रक्रिया 25 जनवरी 2019 तक जारी रहेगी। जिले में अब तक कुल 1955 दावे-आपत्तियां प्राप्त हो चुके हैं।”
जबकि वास्तविकता यह कि जिला मुख्यालय पन्ना के कई मतदान केन्द्रों में सप्ताह भर से अधिक समय से बीएलओ ने दर्शन ही नहीं दिए हैं। इनकी उपस्थिति की मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी भी अपने ऑफिस में बैठकर झूठी रिपोर्टिंग कर रहे हैं, तभी तो यह स्थित निर्मित है। 11 जनवरी तक की स्थित में जिले में कुल 1955 दावे-आपत्तियां प्राप्त होना भी इस बात का संकेत है कि फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्य के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है। 1955 दावे-आपत्तियां प्राप्त होने का मतलब जिले के 895 मतदान केन्द्रों पर औसतन 3 से भी कम दावा-आपत्तियाँ दर्ज होना हैं। वहीं 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके नव मतदाताओं के नाम जोड़ने की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। कागजों से इतर इसके लिए धरातल पर किसी तरह का कोई विशेष अभियान नहीं चलाया जा रहा है। बहरहाल यह कहना अतिश्योक्ति पूर्ण न होगा कि फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम में अधिकांश बीएलओ के रूचि न लेने और पोलिंग बूथ पर न बैठने के कारण लोकसभा चुनाव में भी बड़ी तादाद में लोग अपने मताधिकार उपयोग करने से वंचित रह सकते हैं।
इनका कहना है-
“सभी बीएलओ को अपने मतदान केन्द्रों पर उपस्थित रहते हुए निर्वाचक नामावली के संक्षिप्त पुनरीक्षण के अंतर्गत दावा-आपत्ति प्राप्त करनी है, बीएलओ का केन्द्रों से अनुपस्थित रहना गंभीर मामला है तहसीलदार से इसकी जाँच कराकर उनके खिलाफ एक्शन लिया जायेगा।”
– जे.पी. धुर्वे, अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी पन्ना।
दर्दनाक हादसा | बस में सवार बुजुर्ग महिला की धड़ से अलग हुई गर्दन, सड़क पर कटी हुई गर्दन गिरते ही मचा कोहराम
* उल्टी करने के लिए महिला ने खिड़की से बाहर निकाला था सिर
* विधुत पोल से वृद्धा का सिर टकराने से हुआ हृदय विदारक हादसा
* अपने दामाद के साथ सतना से छतरपुर जा रही थी वृद्धा
पन्ना। रडार न्यूज सतना से छतरपुर की ओर जा रही बस में सवार एक बुजुर्ग महिला की गर्दन एक ही झटके में उसके धड़ से अलग हो गई। पन्ना में साइंस कॉलेज के सामने हुए इस हृदय विदारक हादसे से कुछ देर के लिए कोहराम मच गया। सड़क में कटी हुई गर्दन के गिरते ही आसपास मौजूद लोग दंग रह गए। कुछ ही देर में वहाँ भारी भीड़ जमा हो गई। मृतिका की पहचान आशारानी खरे पत्नी शिवनारायण खरे 60 वर्ष निवासी ग्राम गुघवारा थाना बक्स्वाहा जिला छतरपुर के रूप में हुई है। वह अपने दामाद प्रदीप खरे निवासी सीधी के साथ छतरपुर जाने के के लिए सतना से अम्बे ट्रेवल्स की रीवा-हरपालपुर बस क्रमाँक-MP-19-P-1856 में सवार हुई थी। शुक्रवार 18 जनवरी को दोपहर करीब 2:35 बजे बस जब पन्ना पहुँची तो उल्टी की शिकायत होने पर आशारानी खरे ने चलती हुई बस की खिड़की से अपनी गर्दन बाहर निकाल ली। इसी दौरान साइंस कॉलेज के सामने एक ट्रक को ओवेरटेक करने के दौरान सड़क किनारे लगे विधुत पोल से वृद्धा आशारानी खरे का सिर टकराने की जोरदार आवाज के साथ उनकी गर्दन कटकर नीचे गिर गई। इस हादसे के बाद बस के अंदर बैठे और बाहर आसपास मौजूद रहे लोग कुछ पल के लिए अवाक रह गए।
हादसे के बाद फरार हुआ बस चालक
हादसे की सूचना मिलने पर तुरंत मौके पर पहुँची कोतवाली पुलिस द्वारा मृतिका के धड़ और सिर को उठाकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। पुलिस ने बस को जब्त कर लिया है उसके फरार चालक की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। इस हादसे के लिए अधिकांश लोग वृद्धा की लापरवाही से अधिक बस चालक को जिम्मेदार बता रहे हैं, ऐसे लोगों का कहना है कि बस चालक द्वारा ट्रक को काफी नजदीक से ओवरटेक किया गया जिससे यह हादसा हुआ। सड़क हादसे में सास के दुखांत की सूचना प्रदीप खरे ने परिजनों और पुलिस को दी है। कोतवाली थाना पुलिस द्वारा मर्ग कायम कर फरार अज्ञात बस चालक के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की कार्रवाई की जा रही है।
मंत्रि-परिषद के निर्णय | आपराधिक प्रकरणों को वापस लेने लिए अब जिलादण्डाधिकारी को देना होगा आवेदन
* व्यापक लोकहित में आपराधिक प्रकरणों को वापस लेने नयी प्रक्रिया अनुमोदित
भोपाल। रडार न्यूज मुख्यमंत्री कमल नाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में व्यापक लोकहित में आपराधिक प्रकरणों के वापस लेने (प्रत्याहरण) के लिए नयी प्रक्रिया अनुमोदित की गई है। अनुमोदित प्रक्रिया अनुसार प्रत्याहरण के लिए अब किसी भी आवेदक को राजधानी आने की आवश्यकता नहीं होगी। वह अपना आवेदन सीधे संबंधित जिले के जिलादण्डाधिकारी को प्रस्तुत कर सकेगा। प्रकरण के प्रत्याहरण के लिए जिला एवं राज्य स्तरीय समिति के गठन के साथ ही प्रकरण प्रत्याहरण की त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए संचालक लोक अभियोजन को संयोजक एवं नोडल एजेंसी घोषित किया गया है।
जिला स्तरीय समिति में जिलादण्डाधिकारी को अध्यक्ष, जिला पुलिस अधीक्षक को सदस्य और जिला लोक अभियोजन अधिकारी को सदस्य सचिव बनाया गया है। राज्य स्तरीय समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव गृह विभाग, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य, पुलिस महानिदेशक और महाधिवक्ता अथवा उनके द्वारा नामांकित प्रतिनिधि सदस्य होंगे। संचालक लोक अभियोजन को समिति का संयोजक बनाया गया है। राज्य स्तरीय समिति प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समय-समय पर अनुशंसा कर सकेगी। मंत्रि-परिषद की बैठक में जय किसान फसल ऋण माफी योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई।
रिश्वत लेने वाले जिला शिक्षा अधिकारी व लिपिक को 4-4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा
* शिक्षक से पदस्थापना के नाम पर मांगी थी दस हजार की रिश्वत
* बहुचर्चित रिश्वत मामले में विशेष न्यायाधीश पन्ना ने सुनाया फैसला
पन्ना। रडार न्यूज भ्रष्टाचार के एक बहुचर्चित मामले में आज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के विशेष न्यायालय ने अहम् सुनाया है। रिश्वत लेते हुए पकड़े गए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पन्ना महेंद्र दिवेदी व लिपिक खुमान प्रजापति को न्यायालय ने 4-4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया है। इसके अलावा 10-10 हजार रूपये के जुर्माने से भी दण्डित किया गया। पन्ना के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रहते हुए आरोपी ने शिक्षक रवि शंकर डनायक से पदस्थापना करने के नाम पर दस हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस संगठन सागर ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पन्ना व लिपिक को रिश्वत लेने के मामले मे गिरफ्तार किया था। रिश्वत में ली गई राशि को लिपिक खुमान प्रजापति अपनी पैंट की जेब से निकालकर कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर रख दिया था। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में रिश्वत की राशि समेत साक्ष्य के रूप में लिपिक की पैंट को भी जब्त किया था। दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला किया गया। रिश्वत लेने के इस बहुचर्चित मामले में 3 साल बाद आया विशेष न्यायालय पन्ना फैसला आज जिले प्रशासनिक हलकों समेत शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना रहा।
ये है मामला
प्रकरण के संबंध में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने जानकारी देते हुये बताया कि 31 दिसम्बर 14 को शिक्षक रवि शंकर डनायक पिता के.आर. डनायक निवासी धाम मोहल्ला पन्नाने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त सागर को एक शिकायती पत्र दिया था। जिसमें बताया था कि वह करीब 4 माह से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अध्यापक के पद पर संबद्ध है किन्तु उसकी पदस्थापना किसी विद्यालय में नहीं की गई है। वह अपनी पदस्थापना के लिये तीन पत्र जिला शिक्षा अधिकारी को दे चुका है। इसके बावजूद भी उसकी पदस्थापना किसी भी विद्यालय में नहीं की जा रही है। इस संबंध में जब वह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के स्थापना लिपिक खुमान प्रजापति से मिला तो उसने बताया कि विद्यालय में पदस्थापना के लिये उसे 10,000 रूपये की रिश्वत जिला शिक्षा अधिकारी को देनी पड़ेगी, तभी पदस्थापना होगी। शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस टीम दिनाँक 2 जनवरी 2015 को दोपहर के समय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पन्ना पहुँची जहाँ पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शिक्षक रवि शंकर डनायक ने जैसे ही रिश्वत की राशि लिपिक को देने का इशारा किया तुरंत लोकायुक्त पुलिस ने दबिश देकर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र दिवेदी और लिपिक खुमान प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।
इन धाराओं में हुई सजा










राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना अनुसार 10, 20, 30, वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके वनरक्षकों को नियुक्ति दिनाँक से समयमान वेतन का लाभ दिया जाये। कर्मचारियों द्वारा 24 अप्रैल 2018 वृत्त स्तरीय शिविर में दिए गए आवेदन पत्रों का आज दिनाँक तक निराकरण नहीं किया गया। कर्मचारी हित में इन आवेदन पत्रों का शीघ्र निराकरण किया जाए। वृत्त स्तर पर वन कर्मचारियों की अपीलों का समय पर निराकरण नहीं किया जाता है। अपीलों में समयावधि का ध्यान रखते हुए निराकरण सुनिश्चित किया जाए। वनरक्षक और वनपाल की वरिष्ठता सूची कई वर्षों से लंबित है, वर्षवार वरिष्ठता सूची का प्रकाशन कराकर इसे कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जाए। वृत्त स्तरीय परामर्शदात्री समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जायें ताकि कर्मचारियों से संबंधित समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए उनका निराकरण कराया जा सके। मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर को सौंपे गए ज्ञापन में अन्य माँगे भी शामिल हैं।