मनमानी : चहेतों को उपकृत करने के खेल में एससी-एसटी के साथ भेदभाव, वरिष्ठता को भी किया दरकिनार, वन विभाग के बड़े अफसरों का कारनामा

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फाइल फोटो।

* पन्ना में जूनियरों डिप्टी रेंजरों को नियम विरुद्ध दिया गया रेंज का प्रभार

* उपेक्षित महसूस कर रहे सीनियर डिप्टी रेंजर, वन कर्मचारी संघ ने जताई आपत्ति

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के संरक्षित और सामान्य वन मंडलों में पिछले कई महीनों से सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। यहाँ वन्यजीवों के शिकार की घटनाएँ चिंताजनक तेजी से बढ़ीं हैं, बड़े पैमाने पर वनों की अंधाधुंध कटाई जारी है, पत्थर व हीरा खनन के लिए माफिया जंगल को उजाड़ने और पहाड़ों को खोखला करने में जुटे हैं। वन संपदा के विनाश से जुड़ीं इन गंभीर चुनौतियों का सामना करने के मोर्चे पर जिम्मेदार विभागीय अधिकारी अक्षम और असफल साबित हो रहे हैं। उधर, इनके द्वारा मनमाने तरीके से लिए जा रहे भेदभावपूर्ण गलत निर्णयों के कारण विभागीय अमले में असंतोष पनप रहा है। डिप्टी रेंजरों को रेंज का प्रभार देने का मामला इसका इसका एक उदाहरण मात्र है।
पन्ना के उत्तर वन मंडल एवं पन्ना टाईगर रिजर्व अंतर्गत चहेतों को उपकृत करने के लिए सीनियर डिप्टी रेंजरों को दरकिनार कर जूनियर को रेंज का प्रभार दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निहित स्वार्थपूर्ति के लिए की गई इस मनमानी के चलते सीनियर डिप्टी रेंजर अपमानित महसूस कर रहे हैं। उत्तर वन मण्डल की  विश्रामगंज रेंज के प्रभारी वन परिक्षेत्राधिकारी मनोज बघेल का मूल पद डिप्टी रेंजर है। वरिष्ठता के मामले में इनका नंबर अपने ही विभाग के डिप्टी रेंजर नंदा प्रसाद अहिरवार, घनश्याम सिंह चौहान, लीलाधर शाह के बाद आता है। लेकिन, पन्ना और छतरपुर में बैठे विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी के चलते पहलवान बने  जूनियर डिप्टी रेंजर अपने सीनियरों पर भारी पड़ रहे हैं। रेंज का प्रभार देने के मामले में वरिष्ठता को नजरअंदाज करने का यह अनुचित और आपत्तिजनक निर्णय शिवराज सरकार के समय लिया गया था। सूत्रों के अनुसार भाजपा नेताओं से नजदीकी के चलते इन्हें नियम विरुद्ध लाभ देकर उपकृत किया गया।

देवेंद्रनगर से रेंजर को हटाया

नरेश सिंह यादव, डीएफओ उत्तर वन मंडल पन्ना।
उल्लेखनीय है कि सभी राजनैतिक दल और सरकारें आरक्षित वर्गों के हितों के संरक्षण की बात तो करती हैं लेकिन इस पर ईमानदारी से अमल नहीं करतीं। सामान्य वर्ग से आने वाले जूनियर डिप्टी रेंजर मनोज बघेल को रेंज का प्रभार देने का खामियाजा आरक्षित वर्ग से ताल्लुक रखने सीनियर डिप्टी रेंजर नंदा प्रसाद अहिरवार, लीलाधर शाह को उठाना पड़ रहा है। उधर, कुछ समय पहले देवेन्द्रनगर रेन्ज के परिक्षेत्राधिकारी (रेंजर) सुरेन्द्र शेण्डे को हटाकर वहाँ भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी अखिल बंशल को पदस्थ किया गया। जबकि उत्तर वन मंडल में ही तैनात की गईं मध्यप्रदेश वन सेवा की प्रशिक्षु अधिकारी सुश्री हरमन गोपा को अब तक किसी रेंज का प्रभार नहीं मिला है।
इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि आईएफएस अधिकारी अखिल बंशल को रेंज में पदस्थ करने के लिए पन्ना तथा विश्रामगंज रेंज का प्रभार सम्भाल रहे डिप्टी रेंजरों को न हटाकर देवेन्द्रनगर से आरक्षित वर्ग के रेंजर को पृथक किया गया। जबकि उत्तर वन मण्डल रेंजरों की कमी से जूझ रहा है। क्या यह निर्णय उचित है, इस पर बहस हो सकती है। जूनियर डिप्टी रेंजर रेंजों के प्रभार सम्भालें और रेंजर व सीनियर डिप्टी रेंजर लूप लाइन में पड़े रहें यह कहाँ का न्याय है। इतना ही नहीं प्रशिक्षण पर आईं सुश्री गोपा को अब तक कोई रेन्ज सिर्फ इसलिए नहीं मिल पा रही है क्योंकि ऐसा करने पर चहेते डिप्टी रेंजरों में से किसी एक से रेंज का प्रभार छिन जाएगा। इससे वरिष्ठ अधिकारियों के हित भी प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से प्रभावित होंगे।

सीएफ को सौंपा ज्ञापन

कुछ इसी तरह की स्थिति पन्ना टाईगर रिजर्व में भी देखी जा रही है। यहाँ सीनियर डिप्टी रेंजर कृपाल सिंह के पास किसी रेंज का प्रभार नहीं है जबकि उनसे जूनियर लालबाबू तिवारी, अमर सिंह, और रामप्रसाद प्रजापति प्रभारी रेंजर बने बैठे हैं। डिप्टी रेन्जर कृपाल सिंह अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं। इस तरह आरक्षित वर्गों से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ डिप्टी रेंजरों को रेंज कार्यालय का प्रभार न देकर उनके साथ खुलेआम भेदभाव किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के इस कारनामे से आरक्षित वर्गों के वनकर्मी उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि इन्हें आखिर किस अपराध की सजा दी जा रही है। वन विभाग के अंदर भी इसे लेकर गहरा असंतोष व्याप्त है। कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ के द्वारा इस मनमानी के खिलाफ मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर को ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। वन कर्मचारी संघ ने यह चेतावनी भी दी है कि इस मनमानी को यदि तुरंत नहीं रोका गया तो उसे आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा।

दागियों पर मेहरबान

फाइल फोटो।
मनमाने तरीके से जूनियर डिप्टी रेंजरों को रेंज का प्रभार देने के मामले में उनकी छवि और कारनामों की घोर अनदेखी की गई। मालूम हो कि उत्तर वन मण्डल की विश्रामगंज रेंज के प्रभारी रेंजर मनोज सिंह बघेल की पत्नी के नाम पर दर्ज ट्रेक्टर को वन भूमि में अवैध रूप से जुताई करते हुए श्री बघेल ने ही जब्त किया था। इनके ऊपर निजी भूमि में पौधरोपण कराने, विभागीय कार्यों में अनियमितता करने, वन अपराधों की रोकथाम में असफल रहने के आरोप हैं। पन्ना टाईगर रिजर्व की पन्ना रेंज के प्रभारी रेंजर लालबाबू तिवारी पर भी भ्रष्टाचार के कई संगीन आरोप हैं। संरक्षित वन क्षेत्र से रेत, पिपरमेंट का अवैध परिवहन कराने और 50 श्रमिकों को बँधुआ मजदूर बनाकर उनसे पौधरोपण कार्य कराने के मामले में इनके विरुद्ध विभागीय जाँच चल रही है। बाबजूद इसके सीनियर डिप्टी रेंजरों को नजरअंदाज कर दागी जूनियरों पर वन विभाग के अधिकारी मेहरबान हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से मिल रहे खुले संरक्षण के चलते वन विभाग में जमे दागी डिप्टी रेंजरों के हौसले बुलंद हैं। इस संबंध में जब मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर राघवेन्द्र श्रीवास्तव से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाइल बंद होने कारण संपर्क नहीं हो सका। वहीं उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ नरेश सिंह यादव के शासकीय कार्य के सिलसिले में प्रदेश से बाहर असम में होने के कारण उनसे भी बात नहीं हो सकी।