बड़ी क्षति | रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर जिस तेंदुए को कड़ी मशक्कत से पकड़ा 24 घण्टे बाद उसकी हुई संदिग्ध मौत
* वन विभाग की लापरवाही या फिर दवा के रिएक्शन ने ली जान
* मंगलवार को जरुआपुर ग्राम में एक घर से पकड़ा गया था तेंदुआ
* किसान पर हमला करने के बाद एक घर में घुस गया था तेंदुआ
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज उत्तर वन मंडल पन्ना के वन परिक्षेत्र पन्ना अंतर्गत आने वाली केरवन बीट के ग्राम जरुआपुर से मंगलवार को वन विभाग और पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम ने 10 घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद जिस तेंदुए को पकड़ा था 24 घण्टे बाद उसकी मौत हो गई। इसकी जानकारी स्वयं उत्तर वन मंडल के डीएफओ नरेश सिंह यादव ने दी है। बुधवार 27 मार्च की शाम करीब 6:30 बजे तेंदुए की मौत वन विभाग की अभिरक्षा में होने की संक्षिप्त सूचना उनके द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई। चंद लाइनों के इस विवरण में उन्होंने यह नहीं बताया है कि तेंदुए की मौत अचानक कैसे और किन परिस्थितियों में हुई है। जबकि जरुआपुर ग्राम से पकड़े जाने के बाद तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ्य और सामान्य नजर आ रहर था। ऐसे में महज 24 घण्टे बाद उसकी मौत की दुखद खबर आने के बाद हर कोई हैरान है। इस असमान्य घटना को लेकर कई तरह की आशंकायें जताई जा रही हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि घर में घुसे तेंदुए को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सुरक्षित पकड़ने के बाद उसकी प्राथमिक स्तर समुचित देखभाल नहीं की गई। इस लापरवाही के ही कारण तेंदुए की मौत हुई है। यह संदेह भी जताया जा रहा है कि दवा के रिएक्शन के कारण तेंदुआ अचानक काल-कवलित हुआ है। हालाँकि, इसके उलट उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ का दावा है कि उक्त तेंदुए की पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता द्वारा बेहतर देखभाल की गई। और तेंदुए को बचाने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। बहरहाल वजह चाहे जो भी लेकिन एक बात स्पष्ट है कि पूर्ण व्यस्क तेंदुए की मौत वन विभाग के लिए बड़ी क्षति है। श्री यादव ने जानकारी देते हुए बतया कि मृत तेंदुए की उम्र लगभग 8-9 वर्ष थी। उसका पोस्टमार्टम गुरुवार 28 मार्च की सुबह 9:30 बजे डॉ. संजीव गुप्ता और उनकी टीम के द्वारा किया जाएगा। जिसकी आवश्यक व्यवस्थायें उनके द्वारा की जा रही है।
ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा था तेंदुआ

पन्ना के समीपी ग्राम जरुआपुर में मंगलवार 26 मार्च की सुबह करीब 4 बजे जंगल की और से आये एक तेंदुए ने स्थानीय किसान पंचम सिंह यादव के ऊपर हमला कर उसे घायल कर दिया था। इसके बाद उसने बकरी के सात नग मेमनों को अपना शिकार बनाया और फिर शोरगुल होने पर समीप स्थित घर में घुसकर छिप गया। गाँव में खूँखार तेंदुए हमले और उसके घर में घुसे होने की खबर फैलते ही जरुआपुर में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। सुबह करीब 9 वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को शुरू किया गया। 10 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब 4 बजे तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित पकड़ कर बड़े से पिंजरे में कैद किया गया। बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर स्मृति वन ले जाया गया था।

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले पिछले कुछ समय से वन्य जीवों के शिकार और इंसानों पर उनके हमले की घटनाओं में चिंताजनक तेजी से इजाफा हुआ है। उधर, जिले के संरक्षित और सामान्य वन क्षेत्र में तैनात अधिकारी-कर्मचारी जंगल के अंदर तथा बाहर वन्यजीवों को सुरक्षा प्रदान करने के मोर्चे पर लगातार असफल साबित हो रहे हैं। करीब दो वर्ष पूर्व पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल अंतर्गत शाहनगर-रैपुरा वन परिक्षेत्र के कई गाँवों में स्थानीय लोगों पर हमला करने वाले एक तेंदुआ को समय रहते रेस्क्यू न किये जाने के कारण भागते हुए कुएँ में गिरने से उसकी मौत हो गई थी। जिले के हालात इतने अधिक ख़राब हो चुके हैं कि पन्ना की बहुमूल्य वन संपदा और वन्यजीव खनन माफियाओं, शिकारी गिरोहों तथा वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले अपराधियों के निशाने पर है। इसके बाद भी वन अमले की उदासीनता और अकर्मण्यता जारी है।
खजुराहो लोकसभा क्षेत्र : टिकिट को लेकर दिग्गजों के बीच घमासान, ऊहापोह की स्थिति में फंसी भाजपा, कांग्रेस ने क्षेत्रीय प्रत्याशी घोषित कर बढ़ाई मुश्किल
* बदली परिस्थितियों में भाजपा के सामने अपने गढ़ को बचाने की चुनौती
* भाजपा प्रत्याशी के नाम के ऐलान पर टिकीं जनमानस की नजरें
* सपा-बसपा गठबंधन के चलते बन सकती है त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति
शादिक खान, खजुराहो/पन्ना। रडार न्यूज भारतीय जनता पार्टी अपने मजबूत गढ़ खजुराहो संसदीय क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर असमंजस की स्थिति में है। शीर्ष स्तर पर कई दौर की बैठकों में विचार-विमर्श के बाद भी किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि खजुराहो से टिकिट को लेकर भाजपा के कई दिग्गज नेता कतार में हैं। अंतिम दौर में उम्मीदवार के रूप में अपने नाम का ऐलान कराने के लिए दावेदारों ने पूरी ताकत झोंक दी है। इस बीच कांग्रेस ने इस सीट को जीतने की रणनीति के तहत क्षेत्रीय प्रत्याशी का दाँव चलते हुए पूर्व छतरपुर राजघराने की महारानी कविता सिंह को प्रत्याशी घोषित कर बीजेपी के लिए उम्मीदवार के चयन को लेकर उसकी उलझन को बढ़ा दिया है।
केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल नेताओं के समक्ष दुविधा यह है कि वे मौजूदा हालात में क्षेत्रीय प्रत्याशी के मुकाबले में क्षेत्रीय व्यक्ति को उतारें, जातिगत समीकरणों को साधें या फिर टिकिट वितरण में बड़े नेताओं की सिफारिशों को तवज्जो दें। फैसला लेते समय उसे यह भी सुनिश्चित करना है कि खजुराहो के गढ़ में पार्टी के कब्जे को बरकरार रखने में सक्षम तथा जीत की प्रबल सम्भवना वाले दावेदार को ही चुनावी समर में उतारा जाए। इसलिए बीजेपी की प्रदेश इकाई द्वारा भेजे गए दावेदारों के पैनल में शामिल प्रत्त्येक नाम पर गहन विचार-मंथन कर संभावित चुनौतियों और कसौटी पर उन्हें परखा जा रहा है।
उधर, पैनल और सर्वे के अलावा भी कई नामों पर विचार होने की चर्चाएं है। जिन दावेदारों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे उनमें पूर्व विधायक विजय बहादुर सिंह बुंदेला, ध्रुव प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री ललिता यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष पन्ना रविराज सिंह यादव, बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, घासीराम पटेल, किसान नेता उमेश सोनी, विधायक संजय पाठक, जिला सहकारी बैंक पन्ना के पूर्व अध्यक्ष एवं फायर ब्रांड नेता संजय नगायच, समाजसेविका नंदिता पाठक, पूर्व विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पन्ना माधवेंद्र सिंह, एडवोकेट विनोद तिवारी, रामऔतार पाठक बब्लू, जयप्रकाश चतुर्वेदी शामिल हैं। इसके अलावा खजुराहो के पूर्व सांसद स्वर्गीय जीतेन्द्र सिंह बुंदेला की पत्नी, अभिनेता राजा बुंदेला, पूर्व रीवा रियासत के महाराज पुष्पराज सिंह के नाम भी विचार की प्रक्रिया में आए हैं। कुल मिलाकर इतने नामों के बीच सबसे मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार का चयन करना भारतीय जनता पार्टी के लिए आसान नहीं है।
कटनी कार्ड बन सकता है काट !
विदित हो कि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल के खजुराहो संसदीय क्षेत्र का नया स्वरुप वर्ष 2004 में चुनाव के पूर्व हुए परिसीमन से अस्तित्व में आया है। वर्तमान में इसके अंतर्गत तीन जिले छतरपुर, पन्ना और कटनी के क्रमशः आठ विधानसभा क्षेत्र- चंदला, राजनगर, पन्ना, गुनौर, पवई, बहोरीबंद, मुड़वारा, विजराघगढ़ आते है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस ने जिस तरह कविता सिंह के नाम पर मुहर लगाकर क्षेत्रीय प्रत्याशी की मांग को पूरा करते जनभावनाओं को अपने पक्ष में करने का दाँव चला है, उसके मद्देनजर इसकी काट के तौर पन्ना या कटनी जिले के किसी सुयोग्य नेता को उम्मीदवार घोषित करने को लेकर बीजेपी को गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए। प्रत्याशी चयन में खजुराहो संसदीय क्षेत्र के जातिगत समीकरणों साधने की रणनीति भी भाजपा का मजबूत पक्ष साबित हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह छतरपुर जिले की राजनगर सीट से आती हैं जहाँ से उनके पति विक्रम सिंह नातीराजा विधायक हैं। जबकि कविता सिंह का मायका पन्ना जिले के गुनौर विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। इस तरह पन्ना व छतरपुर दोनों ही जिलों से उनके सीधे जुड़ाव और पूर्व राजपरिवार का सदस्य होने का आकर्षण तथा प्रभाव का सामना बीजेपी कैसे करती है, आगामी समय में यह देखना दिलचस्प होगा। महिला होने के नाते कांग्रेस प्रत्याशी को महिलाओं और युवाओं का अच्छा खासा समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। भाजपा के अंदर कुछ लोग मानते कि इन परिस्थतियों में विजराघवगढ़ विधायक संजय पाठक को उम्मीदवार बनाना उचित निर्णय साबित हो सकता है। इससे कटनी जिले में भाजपा के पक्ष में जहाँ माहौल बनेगा वहीं संजय का युवाओं से जुड़ाव, उनकी हाईप्रोफाइल लाइफ स्टाइल, चुनाव लड़ने का तरीका भी कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। लोकप्रियता के मामले में भी वे कविता सिंह पर भारी पड़ेंगे। पर सवाल यह है कि प्रदेश में कांग्रेस की अल्पमत की सरकार होने के कारण सत्ता परिवर्तन की आस लगाए बैठी बीजेपी लोकसभा चुनाव में क्या अपने विधायक को उतारने का जोखिम मोल लेगी ? इसका जबाब समय आने पर ही पता चलेगा।
ओबीसी या ब्राह्मण चेहरा बनेगा चुनौती
क्षत्रिय समाज से आने वाली कविता सिंह के कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद खजुराहो लोकसभा सीट पर भाजपा के रणनीतिकारों द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग और ब्राह्मण दावेदारों के नामों पर नए सिरे से मंथन किया जा रहा है। दरअसल, इस सीट के जातिगत समीकरणों पर गौर करें तो ओबीसी मतदाताओं की तादाद सर्वाधिक है। करीब 50 फीसदी से अधिक होने के कारण ओबीसी वोटर यहाँ निर्णायक स्थिति में हैं। अनुसूचित जाति को छोड़ दें तो इसके बाद ब्राह्मण मतदाता भी अच्छी संख्या में हैं। अब देखना यह है कि बीजेपी अपने गढ़ को बचाने के लिए पूर्व राजपरिवार से आने वाली क्षत्रिय प्रत्याशी कविता सिंह के सामने क्या इसी समाज के किसी दावेदार को मुकाबले में उतारती है या फिर जातिगत तथा क्षेत्रीयता के फैक्टर को ध्यान में रखते हुए किसी स्वच्छ छवि के लोकप्रिय ओबीसी या ब्राह्मण चेहरे को कड़ी चुनौती के रूप में पेश करती है।

जानकारों का मानना है कि प्रत्याशी चयन में बीजेपी ने यदि जरा भी चूक की तो इस अवसर का लाभ उठाकर समाजवादी पार्टी चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय संघर्ष में तब्दील कर सकती है। बताते चलें कि बसपा और सपा के बीच मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर हुए गठबंधन के तहत खजुराहो संसदीय सीट समाजवादी पार्टी के खाते में आई है। अर्थात यहां समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी उतारेगी जिसे बहुजन समाज पार्टी का समर्थन प्राप्त होगा। खजुराहो सीट का चुनावी इतिहास, हालिया विधानसभा चुनाव के परिणाम और भाजपा समर्थित मतदाताओं की तादाद को दृष्टिगत रखते हुए यहाँ बेशक भाजपा की स्थिति मजबूत जान पड़ती है। लेकिन, सिर्फ इसी आधार पर कोई खुशफहमी पालना बड़ी भूल होगी। दरअसल, इस चुनावी मुकाबले की तस्वीर तो भाजपा सहित अन्य पार्टियों के उम्मीदवार घोषित होने के बाद ही साफ़ होगी।
75 का फार्मूला फंसाएगा पेंच !

खजुराहो सीट से पूर्व मंत्री एवं भाजपा की कद्दावर नेत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले ने टिकिट की मांग की है। विधानसभा चुनाव में गलत तरीके से टिकिट काटे जाने से नाराज चल रहीं सुश्री मेहदेले लोकसभा चुनाव में सशक्त उम्मीदवार साबित हो सकती हैं। लेकिन, भाजपा का 75 पार का फार्मूला उनके आड़े आने की आशंका जताई जा रही है। योग्यता, जातिगत समीकरण और जनाधार के लिहाज मेहदेले का मुकाबला करना किसी भी स्थिति में विपक्षी दलों के लिए आसान नहीं होगा। पूर्व मंत्री कुसुम मेहदेले न सिर्फ खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से भलीभांति परिचित है बल्कि अधिकांश मतदाता भी उन्हें बेहतर तरीके से जानते है। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव-2019 में भाजपा ने अपने कई बुजुर्ग नेताओं के टिकिट काटे हैं। जिनमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र आदि नेता शामिल है। हालाँकि इन सभी नेताओं की आयु 75 वर्ष से कहीं अधिक है। उधर, तीन माह पूर्व संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 75 वर्ष के फार्मूले को शिथिल कर कई उम्रदराज नेताओं को टिकिट दिए थे। बहरहाल, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पूर्व मंत्री एवं पिछड़े वर्ग की कद्दावर नेत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले को बीजेपी लोकसभा का टिकिट देती है या फिर उम्र का पेंच फंसाकर उन्हें किनारे किया जाता है।
पन्ना में 10 घंटे तक रही खूँखार तेंदुए की दहशत, युवक को घायल करने और बकरियों को शिकार बनाने के बाद एक घर में घुसा तेंदुआ
* पीटीआर की रेस्क्यू टीम से जरुआपुर के ग्रामीणों का हुआ विवाद
* बड़ी मशक्कत के बाद पकड़ा गया तेंदुआ, लोगों ने ली राहत की साँस
* पन्ना जिले चिंताजनक तेजी से बढ़ रहे हैं वन्यजीवों के हमले
* बाघ के हमले में पिछले वर्ष एक तेंदूपत्ता श्रमिक की हो चुकी है मौत
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज जिला मुख्यालय पन्ना के समीपी ग्राम जरुआपुर में मंगलवार की सुबह अचानक उस वक्त दहशत और अफरा-तफरी फैल गई जब जंगल से आए एक तेंदुए ने गांव के युवक पर हमला कर उसे घायल कर दिया। इसके बाद तेंदुए ने कुछ बकरियों को अपना शिकार बनाया और फिर भारी शोरगुल के बीच वह एक घर में घुस गया। इसकी सूचना मिलने पर पन्ना टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुँची। तेंदुए को पकड़ने में हो रही देरी को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों और रेस्क्यू टीम के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। हालाँकि कुछ लोगों के हस्तक्षेप के बाद विवाद शांत हो गया। भारी तनाव और दहशत के बीच शाम करीब 4 बजे कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को रेस्क्यू कर जब पिंजरे में कैद कर लिया गया। तब कहीं जाकर जरुआपुर के ग्रामीणों ने राहत की साँस ली।
आज के इस घटनाक्रम में पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक और नवागत उप संचालक का बेहद ही गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया। तेंदुए के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान और फिर उसे काबू किये जाने के बाद पीटीआर के अफसर मीडियाकर्मियों से बात करने से बचते रहे। कथित जिम्मेदार अधिकारियों ने पहले तो मोबाइल फोन रिसीव ही नहीं किए और बाद में उनके मोबाइल बंद हो गए।
क्या पानी की तलाश में आया तेंदुआ

जानकारी के अनुसार मंगलवार 26 मार्च की सुबह 4 बजे जब जरुआपुर के अधिकांश ग्रामीण जब गहरी नींद में सो रहे थे तभी एक खूंखार तेंदुए ने पंचम यादव पर हमला कर उसे घायल कर दिया। तेंदुए द्वारा कुछ बकरियों को भी अपना निवाला बनाया गया। इसके बाद वह गाँव के ही एक घर में घुस गया। यह खबर फैलते ही ग्रामीण दहशत में आ गए। आनन-फानन इसकी सूचना पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन को दी गई। काफी देर बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। इस बीच ग्रामीण भरी तनाव और दहशत में रहे। जिसके चलते रेस्क्यू टीम और ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई। बड़ी मुश्किल से इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए रेस्क्यू टीम द्वारा तेंदुए को ट्रेंकुलाईज (बेहोश) करने के बाद उसे बड़ी सतर्कता के साथ सुरक्षित पिंजड़े में कैद कर ले जाया गया।

विदित होकि जरुआपुर ग्राम पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के काफी नजदीक स्थित है और चारों तरफ से जंगल से घिरा है। वन क्षेत्र से सटे ग्रामों में यूँ तो अक्सर ही वन्यप्राणी विचरण करते देखे जा सकते है, लेकिन तेंदुए के घर में घुसने को लेकर जरुआपुर के ग्रामीण जो आशंका जाता रहे हैं उस पर भी गौर किया जाना चाहिए। इनके अनुसार जंगल में जल स्रोत सूखने के कारण गर्मी का मौसम शुरू होते ही वन्य जीव पानी की तलाश में आबादी क्षेत्र में आ रहे हैं। पार्क प्रबंधन द्वारा वन्यजीवों के लिए पानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इन हालात में आने वाले दिनों वन क्षेत्र से लगे हुए ग्रामों में वन्यप्राणी और मानव संघर्ष की स्थिति और भी जटिल हो सकती है। मालूम हो कि पन्ना जिले के सामान्य एवं संरक्षित वन क्षेत्रों से सटे हुए ग्रामों में पिछले कुछ समय से वन्य जीवों के हमले बढ़े हैं। महज सालभर में दर्जनों लोग इन हमलों में घायल हुए हैं। वहीं पन्ना के ही समीप पिछले वर्ष बाघ के हमले में एक तेंदूपत्ता श्रमिक को अपनी जान तक गँवानी पड़ी है।
लोकसभा चुनाव – 2019 : BJP ने एमपी में अपने 5 सांसदों के इस वजह से काटे टिकिट, प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह समेत 10 सांसदों को पुनः दिया मौका
* मुरैना सांसद अनूप मिश्रा की जगह नरेन्द्र सिंह तोमर प्रत्याशी घोषित
* प्रदेश की 29 में से 15 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के नाम का ऐलान
नई दिल्ली। रडार न्यूज भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए शनिवार 23 मार्च की शाम अपनी छठवीं सूची जारी करते हुए 6 राज्यों में 47 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। इस तरह बीजेपी अब तक सर्वाधिक 297 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित कर चुकी है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी छठवीं सूची में मध्य प्रदेश की जिन 15 सीटों के उम्मीदवारों के नाम हैं, उनमें वर्तमान में भाजपा के ही सांसद हैं।

प्रदेश में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद लोकसभा चुनाव में अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने के लिए बीजेपी ने 5 मौजूदा सांसदों के टिकिट काटे है। जबकि 10 सीटों पर वर्तमान सांसदों को पुनः प्रत्याशी घोषित किया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के भाँजे एवं मुरैना सांसद अनूप मिश्रा का टिकिट काटकर केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को मुरैना से प्रत्याशी बनाया गया है। श्री तोमर अभी ग्वालियर सीट से सांसद हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं आदिवासी नेत्री हिमाद्री सिंह को शहडोल सीट से टिकिट मिला है। वहीं, मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह को जबलपुर से पुनः चुनावी समर उतारा है।
इस कारण काटे गए टिकिट

भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के अपने जिन 5 सांसदों के इस बार टिकट काटे हैं उनमें- भिंड सीट से डॉ. भागीरथ प्रसाद, शहडोल से ज्ञान सिंह, मुरैना से अनूप मिश्रा, बैतूल से ज्योति धुर्वे, उज्जैन से चिंतामणि मालवीय शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार मुरैना सांसद अनूप मिश्रा का क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी में विरोध होने की वजह से टिकिट नहीं मिला। भिंड सांसद डॉ. भागीरथ प्रसाद, उज्जैन सांसद चिंतामणि मालवीय और शहडोल सांसद ज्ञान सिंह को खराब प्रदर्शन, स्थानीय स्तर विरोध तथा पार्टी के आंतरिक सर्वे में हार की आशंका के मद्देनजर यहाँ नए चेहरों पर दाँव लगाया है। जबकि, बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला उछलने से उनका टिकिट कटा है। मालूम हो कि मध्यप्रदेश में लोकसभा की कुल 29 सीटें हैं, जिसमें वर्तमान में 3 पर कांग्रेस और 26 पर बीजेपी का कब्ज़ा है। बीजेपी ने मध्य प्रदेश में जिस तरह लोकसभा चुनाव के लिए अपने 15 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करते हुए 5 मौजूदा सांसदों के टिकिट काटे हैं, इसके मद्देनजर शेष उम्मीदवारों के नाम का ऐलान होने पर अन्य कई सांसदों का पत्ता कट सकता है।
एमपी के घोषित भाजपा प्रत्याशी लोकसभा सीटवार –
वीरेंद्र कुमार खटीक – टीकमगढ़
गणेश सिंह – सतना
नरेंद्र सिंह तोमर – मुरैना
प्रह्लाद पटेल – दमोह
संध्या राय – भिंड
हिमाद्री सिंह – शहडोल
जनार्दन मिश्रा – रीवा
राकेश सिंह – जबलपुर
रीति पाठक – सीधी
फग्गन सिंह कुलस्ते – मंडला
सुधीर गुप्ता – मंदसौर
अनिल फिरोजिया – उज्जैन
दुर्गादास उइके – बैतूल
नंद कुमार सिंह चौहान – खंडवा
उदय प्रताप सिंह – होशंगाबाद
लोकसभा चुनाव-2019 : एमपी में कांग्रेस ने घोषित किए 9 उम्मीदवार, खजुराहो सीट से कविता सिंह को टिकिट
* भोपाल संसदीय क्षेत्र से दिग्विजय सिंह के नाम का ऐलान
* कांग्रेस की आठवीं सूची में 38 नाम, अब तक 219 प्रत्याशी घोषित
* क्षेत्रीय प्रत्याशी की माँग के चलते कांग्रेस ने कविता पर लगाया दाँव
नई दिल्ली। रडार न्यूज कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए शनिवार देर रात अपनी आठवीं सूची जारी कर दी है। इस सूची में 6 राज्यों के 38 उम्मीदवारों के नाम हैं। जिसमें मध्य प्रदेश की 9 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों के नाम शामिल है। कांग्रेस पार्टी अब तक 219 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित का चुकी है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की घोषणा के अनुसार भोपाल लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है।

बुंदेलखंड अंचल की खजुराहो लोकसभा सीट से राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को टिकट दिया गया है। कविता सिंह छतरपुर के पूर्व राजघराने की महारानी है एवं वर्तमान में खजुराहो नगर परिषद की अध्यक्ष हैं। खजुराहो सीट से क्षेत्रीय व्यक्ति को टिकिट देने की जोर पकड़ती माँग के बीच कांग्रेस ने कविता सिंह को प्रत्याशी घोषित कर जनभावनाओं को अपने पक्ष में करने का दाँव चला है। कविता सिंह जहाँ छतरपुर के पूर्व राजपरिवार की बहू हैं वहीं पन्ना जिले की बेटी हैं। बीजेपी ने फिलहाल खजुराहो सीट को होल्ड पर रखा है। भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली खजुराहो संसदीय सीट पर पार्टी सम्भवतः किसी ओबीसी चेहरे को उतार कर जातिगत समीकरणों को साध सकती है। दरअसल, इस सीट ओबीसी वर्ग के मतदाता निर्णायक स्थिति में है। कांग्रेस ने मंदसौर सीट से मीनाक्षी नटराजन और रतलाम सीट से आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया प्रत्याशी बनाया है।
मध्यप्रदेश के कांग्रेस प्रत्याशी लोकसभा सीटवार-
कविता सिंह- खजुराहो
प्रमिला सिंह- शहडोल
मधु भगत- बालाघाट
शैलेंद्र दीवान- होशंगाबाद
दिग्विजय सिंह- भोपाल
मीनाक्षी नटराजन- मंदसौर
कांतिलाल भूरिया- रतलाम
किरण अहिरवार- टीकमगढ़
रामू टेकम – बैतूल
बदहाली | PHC मोहन्द्रा में डॉक्टर है पर टाँके लगाने का सामान नहीं, चोटिल महिला को बिना इलाज के रेफरल किया
* होली पर हुए विवाद में लाठी-डण्डों के प्रहार से फट गया था महिला का सिर
* छुटपुट विवादों के बीच मोहन्द्रा क्षेत्र में मनाया गया होली का पर्व
आकाश बेहरे, मोहन्द्रा (पन्ना) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के ग्रामीण अंचल में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल स्थिति में है। शिवराज सिंह चौहान की सरकार में ग्राम स्तर पर लोगों को प्राथमिक उपचार देने के लिए गाँव-गाँव आरोग्य केन्द्रों की स्थापना के नाम पर प्रदेश में करोड़ों रूपए खर्च किये गए। लेकिन, अधिकांश आरोग्य केन्द्र पिछली सरकार के समय से ही कागजों पर संचालित होने से ग्रामीणों को उपचार नसीब नहीं हुआ। उप स्वास्थय केन्द्रों की बात करें तो इनमें हमेशा ताला ही लटका रहता है। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की ख़राब हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बमुश्किल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोहन्द्रा को डॉक्टर मिला लेकिन यहाँ इलाज की बुनियादी सुविधायें तक नहीं है। परिणामस्वरूप यहाँ उपचार की उम्मीद में आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
ऐसा ही एक मामला होली के दिन दिन सामने आया। मोहन्द्रा की संजय नगर काॅलोनी में दो आदिवासी परिवारों के बीच हुए विवाद में लाठी-डण्डों के प्रहार से एक महिला का सिर फट गया। घायल महिला को इलाज लिए परिजन लेकर जब स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्र पहुँचे तो डॉक्टर ने टाँके लगाने की सामग्री न होने की बात कहते हुए उसे बिना समुचित इलाज के ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पवई के लिए रेफरल कर दिया। इस मामले ने जब तूल पकड़ा तो डॉक्टर सचिन अहिरवार ने अपना बचाव करते हुए स्वास्थ्य केन्द्र में ड्रेसर न होने के कारण टाँके न लगने की बात कही।
माँ-बेटे हुए थे घायल

प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर में कमलेश आदिवासी के बड़े बेटे का किसी बात को लेकर पड़ोसी श्यामलाल आदिवासी के लड़के से विवाद हो गया। उस समय लोगों ने बीच-बचाव कर विवाद को शांत करा दिया। शाम करीब पांच बजे पुनः श्यामलाल ने अपने छोटे भाई राजू और पुत्र को साथ लेकर लाठी-डण्डों से कमलेश आदिवासी के घर में घुसकर उसकी पत्नि केशबाई आदिवासी, पुत्र अजय आदिवासी के साथ मारपीट कर घायल कर दिया। हमले में केशबाई के सिर व अजय के हाथ में गंभीर चोंटे आई है। जिन्हें घायल अवस्था में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोहन्द्रा लाया गया। सरकारी अस्पताल के डाॅक्टर ने टाँका लगाने का जरुरी सामान न होने की बात कहकर उन्हें आवश्यक प्राथमिक उपचार दिए बगैर ही रेफरल कर दिया। इस स्थिति में बाद में उन्हें पन्ना ले जाकर मेडिकल कराया गया।
व्यवस्थाएं चौपट, ठिकाने लगा रहे बजट

पन्ना जिले के पवई विकासखंड अंतर्गत आने वाले मोहन्द्रा क्षेत्र की करीब 50 हजार की आबादी के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मात्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोहन्द्रा में है। क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो यहाँ की व्यवस्थाओं से संतुष्ट हो। जरा सोचिय जब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में टाँके लगाने सरीके मामूली सामग्री भी उपलब्ध नहीं है तो मरीजों को इलाज कैसे मिलता होगा ! निश्चित ही यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। यह कोई पहली बार नहीं है, जब किसी घायल व्यक्ति को बगैर प्राथमिक उपचार के अस्पताल से लौटाया गया है। पूर्व में भी कई बार गंभीर रुप से घायल व्यक्तियों ने प्राथमिक उपचार के आभाव में दम तोड़ा है।
मालूम हो कि समूचे पन्ना जिले में पिछले कई सालों से ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र पूर्ण रूपेण कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं। जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्तिथि अत्यंत ही दयनीय है। प्रति वर्ष इनके लिए आने वाले बजट का जिले में बंदरबाँट हो रहा है। इन स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए आने वाली सामग्री भी स्टॉफ के द्वारा अपने घरों में उपयोग की जा रही है। जो सामग्री-उपकरण आदि स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध हैं उसकी हालत अच्छी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो यदि ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की सामग्री का भौतिक सत्यापन ईमानदारी से कराया जाए तो आधी से अधिक सामग्री गायब मिलेगी। बहरहाल नई सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार की ओर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। ताकि लोगों को इलाज के लिए महँगे अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाने को विवश न होना पड़े।
इनका कहना है –
“सामग्री के आभाव में नहीं बल्कि स्वास्थ्य केन्द्र में ड्रेसर न होने के कारण मरीजों को टाँके नहीं लग पाते। इस वजह से घायल महिला को पवई के लिए रेफरल किया गया था।”
– डाॅ. सचिन अहिरवार, प्रभारी पीएचसी मोहन्द्रा।
“ब्लॉक एवं जिला स्तरीय अधिकारी नियमित रूप से स्वास्थ्य केन्द्रों का दौरा करते है, पीएचसी मोहन्द्रा का निरीक्षण आखिरी बार मैनें कब किया था मुझे याद नहीं है। चोटिल महिला को पीएचसी मोहन्द्रा से टाँके लगाए बगैर रेफरल करना अनुचित-आपत्तिजनक है, ऐसा क्यों हुआ इसकी जाँच कराई जाएगी। ग्राम आरोग्य केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को मिलने वाले वार्षिक बजट का उपयोग सम्बंधित प्रभारी के द्वारा किया जाता है, इसके दुरूपयोग की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।”
– डॉ. एल. के. तिवारी, प्रभारी सीएमएचओ पन्ना।
हादसा | बाइकों की भिड़ंत में एक नवयुवक की दर्दनाक मौत, तीन गम्भीर घायल
* अजयगढ़-बाँदा मार्ग पर किशनपुर ग्राम के समीप हुआ हादसा
* घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य अजयगढ़ में भर्ती कराया
अजयगढ़ (पन्ना)। रडार न्यूज होली की शाम मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कटनी-कानपुर स्टेट हाईवे क्रमाँक-47 पर अजयगढ़-बाँदा के बीच किशनपुर ग्राम के समीप दो बाइकों की सीधी भिड़ंत में एक नवयुवक की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में तीन लोगों को गम्भीर चोटें आईं हैं। घायलों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य अजयगढ़ में भर्ती कराया गया है। चिकित्सक ने तीनों की हालत खतरे से बाहर बताई है। सड़क हादसे में मृत युवक के शव का शुक्रवार 22 मार्च को अजयगढ़ में पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने शव को परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस द्वारा इस मामले में दोनों क्षतिग्रस्त बाइकों को जब्त कर आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की कार्रवाई की जा रही है।
घर जाते समय हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार गाँव-गाँव घूमकर बर्तन बेंचने का काम करने वाले साजिद कुरैशी पिता कय्यूम 20 वर्ष, यामीन कुरैशी पिता याकूब 42 वर्ष व शेखू पिता फारुख कुरैशी 23 वर्ष सभी निवासी जिला हापुड़ उत्तरप्रदेश गुरुवार 21 मार्च की शाम करीब 7 एक बाइक से बाँदा की ओर जा रहे थे, अजयगढ़ से करीब 3-4 किलोमीटर दूर किशनपुर-देवगाँव के बीच पहुँचने पर विपरीत दिशा से आए विजय कुशवाहा पिता श्रीराम कुशवाहा 28 वर्ष निवासी गरड़पुर थाना अजयगढ़ की तेज रफ़्तार बाइक उनकी बाइक से टकरा गई। दोनों बाइकों की भिड़ंत इतनी जबर्दस्त थी कि अत्यंत ही गम्भीर रूप से घायल साजिद कुरैशी 20 वर्ष की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में मृतक के दोनों साथियों के अलावा विजय कुशवाहा को भी चोटें आईं है। जनचर्चा अनुसार हादसे के समय बाइक चालक विजय कुशवाहा कथित तौर पर शराब के नशे में था। हालाँकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
एक्सीडेंट में युवक की मौत होने की सूचना मिलने पर अजयगढ़ थाना पुलिस, नायब तहसीलदार शारदा सोनी कुछ ही देर में मौके पर पहुँचे। मृतक और घायलों को आनन-फानन 108 एम्बुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ लाया गया। ड्यूटी में तैनात डॉक्टर ने अचेत अवस्था में लाए गए साजिद का गहन परीक्षण करने के बाद उसे आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया। इस हादसे की खबर फैलने पर गुरुवार रात स्वास्थ्य केन्द्र अजयगढ़ में जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोगों की भीड़ काफी देर तक जमा रही।
दुखद घटना | पत्नी फाँसी के फंदे पर लटकी, पति ने 200 फिट गहरे कुंड में छलाँग लगाकर की आत्महत्या

* आपसी विवाद के बाद आदिवासी दंपत्ति ने उठाया आत्मघाती कदम
* पन्ना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र के बरहोकुदकपुर ग्राम की घटना
रुपेश जैन, बृजपुर (पन्ना)। रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक महिला ने पति से मामूली कहासुनी के बाद आत्मघाती कदम उठाते हुए बुधवार की शाम फाँसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इसके बाद तनाव और अपराध बोध के चलते पति ने कुंड (वॉटरफॉल) में छलाँग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह दुखद घटना जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम बरहोकुदकपुर की है। महज कुछ घंटे के अंतराल में आदिवासी दंपत्ति द्वारा आत्महत्या करने की दुखद खबर आने के बाद से इलाके में शोक की लहर व्याप्त है। बृजपुर थाना पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के पश्चात शवों को पोस्टमार्टम के लिए पन्ना भेजा है। पुलिस ने फ़िलहाल दोनों ही घटनाओं पर मर्ग कायम किया है। जिस कुण्ड में युवक ने आत्महत्या की है वह पड़ोसी जिला सतना के बरौंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है। इसलिए बृजपुर थाना पुलिस द्वारा इस मामले अग्रिम कार्रवाई के लिए केश डायरी बरौंधा थाना पुलिस को भेजी जाएगी।
दोपहर में हुआ था विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना जिले के बरहोकुदकपुर गाँव में रहने वाले पेशे से मजदूर अर्जुन गौंड़ पुत्र हुकुम सिंह गौंड़ (26) का बुधवार 20 मार्च को दोपहर के समय पत्नी सुशीला गौंड़ (23) के साथ विवाद हुआ था। मामूली कहासुनी के बाद अर्जुन गौंड़ गाँव में घूमने निकल गया। इस बीच अपने कमरे में अकेली सुशीला ने फाँसी के फंदे पर लटक कर आत्महत्या कर ली। शाम करीब 4 बजे अर्जुन गौंड़ जब वापिस घर लौटा तो कमरे में पत्नी सुशीला को फाँसी के फंदे पर लटका हुआ देख वह दंग रह गया। पत्नी की मौत से व्यथित और अपराध बोध के चलते अर्जुन गौंड़ शाम करीब 7 बजे अपने घर से रहस्मय तरीके से अचानक गायब हो गया था। इसका पता चलने पर गाँव में हड़कंप मच गया। अनहोनी की आशंका के चलते आनन-फानन में परिजनों व ग्रामीणों ने अर्जुन गौंड़ की तलाश शुरू की। इस दौरान समीप स्थित बेधक कुंड के ऊपर उसके जूते और मोबाइल फोन रखा मिला। करीब 200 फिट गहरे सूखे कुंड में नीचे उतरकर कर जब देखा गया तो वही हुआ जिसका डर था ! कुंड में बड़े-बड़े पत्थरों के बीच अर्जुन गौंड़ का शव औंधे मुँह पड़ा था। कुण्ड में छलांग कर पत्थरों पर गिरने से अर्जुन के सिर और चेहरे में आईं गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत होना बताया जा रहा है।
अनाथ हुई डेढ़ साल की मासूम

युवा आदिवासी दंपत्ति के द्वारा आत्महत्या करने से उनकी डेढ़ वर्ष की मासूम बेटी अनाथ हो गई है। उधर, अर्जुन के परिजन और गांव के लोग इस दुखद घटना के बाद से गहरे शोक में डूबे हैं। होलिका दहन की शाम इस अप्रत्याशित घटना का पता चलने के बाद से ग्राम बरहोकुदकपुर समेत आसपास के गांवों में घुरेड़ी (होली) पर्व की रंगत बेहद फीकी रही। मालूम हो कि अर्जुन गौंड़ और सुशीला का विवाह करीब 5 वर्ष पूर्व हुआ था। बुधवार को पति से विवाद के बाद सुशीला ने जब अपने कमरे में फाँसी लगाई उस समय घर पर परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे लेकिन किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। बृजपुर थाना प्रभारी कमलेश साहू ने रडार न्यूज को जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार शाम इस घटना की सूचना मिलने पर हमराही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर दोनों घटना स्थलों को सुरक्षित कराया था।
सुशीला चूँकि नवविवाहिता थी इसलिए गुरुवार को पन्ना से नायब तहसीलदार सुश्री दिव्या जैन के मौके पर पहुँचने पर पंचनामा आदि कार्रवाई की गई। पति-पत्नी के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ था, प्रारंभिक पुलिस विवेचना में यह स्पष्ट नहीं हो सका। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए आज पन्ना भेजा गया। बृजपुर थाना प्रभारी श्री साहू ने बताया कि अर्जुन गौंड़ का शव जिस स्थान से बरामद हुआ है वह सतना जिले के बरौंधा थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है। इसलिए बृजपुर थाना पुलिस द्वारा इस मामले में शून्य पर मर्ग कायम कर अग्रिम कार्रवाई के लिए केश डायरी बरौंधा थाना पुलिस को भेजी जाएगी।
अनियंत्रित होकर खाई में गिरा ओवरलोड मैजिक वाहन, 6 लोग हुए घायल, गंभीर घायलों को किया रेफरल
* अमानगंज में कृषि उपज मण्डी के समीप हुई सड़क दुर्घटना
* सब्जी के साथ सवारियों का किया जा रहा था परिवहन
* साप्ताहिक बाजार में आने वाले वाहनों से पुलिस करती है वसूली
अमानगंज (पन्ना) | रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक तेज रफ्तार मैजिक वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में जा गिरा। मंगलवार 19 मार्च की रात करीब 8:30 बजे अमानगंज-छतरपुर मार्ग पर अमानगंज की कृषि उपज मण्डी के समीप हुई इस सड़क दुर्घटना में आधा दर्जन लोग घायल हुए है। दुर्घटना उस समय हुई जब अमानगंज के साप्ताहिक बाजार में दुकानें लगाने वाले सब्जी विक्रेता अपना बचा हुआ माल लेकर मैजिक वाहन से वापिस घर लौट रहे थे। घायलों को लहूलुहान हालत में इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अमानगंज ले जाया गया। जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद चार गंभीर घायलों को जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रेफरल किया गया है। घायलों में एक महिला की हालत नाजुक बताई जा रही है।
चालक की लापरवाही से हुई दुर्घटना

दुर्घटना का शिकार हुए मैजिक सवार सभी लोग अमानगंज के समीपी ग्राम गड़ोखर एवं कचौरा निवासी थे। घायलों ने बताया कि वे अमानगंज के साप्ताहिक बाजार में सब्जी बेंचने के लिए आए हुए थे। मंगलवार को दिनभर सब्जी बेंचने के बाद शाम को बची हुई सब्जी लेकर मैजिक वाहन से वापिस अपने गाँव के लिए रवाना हए। अमानगंज से निकलते ही चालक द्वारा अत्यंत ही तेज गति से एवं लापरवाहीपूर्वक मैजिक चलाने के कारण वह अनियंत्रित होकर कृषि उपज मण्डी के समीप सड़क किनारे खाई में जा गिरा। इस दुर्घटना के चलते मौके पर चींख-पुकार मच गई। वाहन में फँसे खून से लथपथ घायल यात्रियों को आसपास मौजूद लोगों ने बाहर निकला और तुरंत कॉल कर अमानगंज थाना पुलिस व एम्बुलेंस को मदद के लिए बुलाया। घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए आनन-फानन स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया। इस दुर्घटना में चार महिलाओं और दो पुरुषों को चोटें आईं है।
ये हुए घायल









