* बिना अनुमति पहाड़ी काटी, बांस-भिर्रा उखाड़े; बाद में पत्र लिखने की बात
* सौंदर्यीकरण के नाम पर निर्माण, नियमों की अनदेखी पर उठे गंभीर सवाल
* वन संरक्षण अधिनियम 1980 की खुली अवहेलना, जिम्मेदार ही कटघरे में
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी ही अब कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही नियमों को दरकिनार करें तो संरक्षण की पूरी व्यवस्था कितनी कमजोर पड़ जाती है। पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) के उप संचालक द्वारा अपने शासकीय बंगले से कार्यालय और मुख्य मार्ग तक आम लोगों की नजरों से बचकर आवागमन करने के लिए वन क्षेत्र में बिना अनुमति जेसीबी मशीन चलवाकर एक कच्चे “गुप्त मार्ग” का निर्माण कराया गया।

इस दौरान वर्षों पुराने बांस-भिर्रा समेत कई वनस्पतियों को जड़ सहित उखाड़ दिया गया और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र की संरचना में व्यापक बदलाव कर दिया गया। मौके पर स्वयं उप संचालक अपने तीन रेंजरों के साथ मौजूद थे और जेसीबी चालक से अपनी देखरेख में कार्य करा रहे थे। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक का कार्यालय परिसर उत्तर सामान्य वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आता है। नियमानुसार कार्य कराने से पूर्व संबंधित वन मण्डल से अनुमति/अनापत्ति लेना अनिवार्य है। लेकिन पद की हनक में साहब ने उन नियम-कानूनों को ही जेसीबी तले रौंदते हुए निर्माण करा डाला कि जिनका पालन स्वयं करना तथा दूसरों से करवाना उनका पदीय दायित्व है। अपनी इस आपराधिक लापरवाही को उप संचालक पीटीआर वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने स्वयं स्वीकार किया है।
छुट्टी के दिन निर्माण, मौके पर मौजूद रहे अधिकारी

घटनाक्रम शनिवार 18 अप्रैल का बताया जा रहा है। अवकाश के दिन दोपहर करीब 3 बजे जगात चौकी इलाके में स्थित क्षेत्र संचालक कार्यालय परिसर के पीछे पहाड़ी की ओर जेसीबी मशीन से तेजी से खुदाई कर रास्ता बनाया जा रहा था। यह पूरा क्षेत्र उत्तर वन मण्डल पन्ना की पन्ना रेंज के वन कक्ष क्रमांक पी-410 के अंतर्गत आता है। इसी दौरान मीडिया कर्मियों के अचानक मौके पर पहुंचने से हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में जेसीबी मशीन को मौके से हटा दिया गया। इस मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह पूरा कार्य संबंधित वन मण्डल उत्तर पन्ना से आवश्यक अनुमति या अनापत्ति लिए बगैर मनमाने तरीके से कराया गया।

उप संचालक ने स्वयं स्वीकार किया कि कार्य कराने से पहले उनके द्वारा आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अब वे पत्र लिखकर उत्तर वन मण्डल पन्ना से आवश्यक अनुमति शीघ्रता से प्राप्त करने की बात कर रहे हैं। इस स्वीकारोक्ति के बाद साहब को जब मामला बिगड़ने का एहसास हुआ तो अपनी अक्षम्य लापरवाही पर पर्दा डालते हुए उन्होंने कराए गए कार्य को “कार्यालय परिसर की सामान्य साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण” योजना का हिस्सा बता दिया। लेकिन जिस पैमाने पर खुदाई और वनस्पतियों को उखाड़ा गया, वह इस दावे पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। बता दें कि कार्यस्थल पर उप संचालक अपने सहयोगी परिक्षेत्र अधिकारी हिनौता राजेन्द्र अरजरिया, परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट एवं राहुल सिकरवार परिक्षेत्र अधिकारी पन्ना बफर के साथ मौजूद रहे।
सिर्फ साफ-सफाई या संरचना में बदलाव?

पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपने कक्ष में मीडिया से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में बताया, ऑफिस कैम्पस के सौंदर्यीकरण का कार्य मैं और समस्त विभागीय कर्मचारी मिलकर अपनी स्वेच्छा तथा स्वयं के खर्च से करा रहे हैं। इसके तहत पुराने बांस-भिर्रा, शो बबूल एवं झाड़ियों की साफ़-सफाई करवाकर छायादार-फलदार पौधे लगाए जाएंगे। रास्ते का निर्माण निरीक्षण पथ के तौर पर आवागमन के लिए किया जाएगा। लेकिन स्थल की वास्तविक स्थिति यह संकेत देती है कि यह सामान्य सफाई कार्य नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक संरचना में हस्तक्षेप का मामला है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की गतिविधियां भू-क्षरण को जन्म दे सकती है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या सफाई के नाम पर जेसीबी से खुदाई और बड़े पैमाने पर वनस्पतियों को उखाड़ना नियमों के अनुरूप माना जा सकता है, और क्या बिना अनुमति वन क्षेत्र में इस तरह का बदलाव वैध है? श्री पटेल ने स्पष्ट तौर पर स्वीकार किया कि उत्तर वन मण्डल से आवश्यक अनुमति/अनापत्ति लिए बगैर उक्त कार्य कराया जा रहा था, लेकिन अब पत्र लिखकर अनुमति प्राप्त करने की कही जा रही है।
‘गुप्त मार्ग’ की मंशा और विभागीय व्यवस्था पर सवाल

सूत्रों के मुताबिक यह मार्ग केवल निरीक्षण या सफाई के लिए नहीं, बल्कि उप संचालक के आवास से सीधे कार्यालय और आगे मुख्य सड़क तक पहुंच बनाने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा था। इसके लिए बाउंड्री वॉल तक तोड़ दी गई। जबकि पहले से एक सुगम पक्का मार्ग मौजूद है, ऐसे में इस नए रास्ते की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं। वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत किसी भी वन भूमि के उपयोग में बदलाव, खुदाई या निर्माण के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है। यहां न केवल इस प्रावधान की अनदेखी की गई, बल्कि युवा आईएफएस अफसर द्वारा स्वयं अपनी मौजूदगी में यह कार्य कराया गया, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है। उप संचालक वीरेन्द्र पटेल (IFS) ने अपनी इस कारगुजारी को उजागर होने से रोकने के लिए खबर को प्रकाशित न करने का कई बार आग्रह किया। साथ ही मीडिया के बाहर निकलते ही कार्य बंद करवाकर तुरंत जेसीबी मशीन को मौके से हटवा दिया गया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है।







