पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)
* अज्ञात बोलेरो वाहन चालक ने शिकार की नियत से बाघिन को मारी ठोकर या फिर सड़क दुर्घटना
* सूचना मिलने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे रेंजर, शावकों के भविष्य पर भी मंडराया संकट
* एक माह में दो बाघों की मौत और कोर एरिया में वृद्ध का शव मिलने के बाद अब घायल बाघिन का मामला चर्चा में
* कभी दुनिया के लिए मिसाल बना पन्ना, अब लापरवाही और मॉनिटरिंग फेल होने के लिए बदनाम
* बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता पर खतरे के संकेत, मैदानी निगरानी पर उठ रहे तीखे सवाल
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) कभी बाघ पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के लिए दुनिया भर में चर्चा में रहा पन्ना टाइगर रिजर्व इन दिनों लगातार सामने आ रही घटनाओं के कारण गंभीर सवालों के घेरे में है। एक माह के भीतर दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, कोर एरिया में कई दिन पुराना अज्ञात वृद्ध का शव मिलने और अब अज्ञात बोलेरो वाहन चालक द्वारा कथित रूप से शिकार की नियत से मारी गई जानलेवा ठोकर में गंभीर रूप से घायल हुई बाघिन की घटना को दबाने के आरोपों ने पीटीआर की सुरक्षा एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
ताजा मामला पन्ना कोर क्षेत्र के राजाबरिया-अमझिरिया मार्ग का बताया जा रहा है। आरोप हैं कि 28 अप्रैल की रात एक तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने सड़क किनारे एक बाघिन (Tigress) को कथित रूप से शिकार की मंशा से सीधी ठोकर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाघिन सड़क किनारे पत्थरों के बीच जा गिरी और काफी देर तक घायल अवस्था में पड़ी रही। घटना की सूचना वन अमले द्वारा तुरंत वन परिक्षेत्राधिकारी पन्ना कोर अजीत जाट दी गई। लेकिन उन्होंने तत्परता से घेराबंदी कर वाहन को पकड़ने तथा घायल बाघिन को तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की प्रभावी कार्रवाई करना तो दूर मौके पर पहुंचना तक उचित नहीं समझा। रेंजर के निर्देश पर स्टॉफ ने मौके पर पहुंचकर घायल बाघिन को देखा। लेकिन जाट साहब अपने दायित्वों को तिलांजलि देते हुए सुबह मौके पर आने की बात कहकर सोने के लिए चले गए।
पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघिन के साथ विचरण करते शावक। (फाइल फोटो)
सूत्रों के मुताबिक अगले दिन घटनास्थल से वाहन के टूटे हिस्से, पत्थर की खखरी पर जख्मी बाघिन के बाल और आसपास अन्य साक्ष्य मिले थे, जिन्हें रेंजर के इशारे पर मौके से हटा दिया गया। प्रकरण को दबाने के लिए घटना की सूचना पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी गई। न ही बाघिन को ढूंढने और उसका उपचार कराने के प्रयास किया गया। घटना की किसी को भनक न लगे इसलिए वन अपराध दर्ज करने और वाहन को पकड़ने की कार्रवाई भी जानबूझकर नहीं की गई। जबकि घटना स्थल से कुछ किलोमीटर की दूरी पर अमझिरिया टोल नाका स्थित है, जहां पर यदि वाहनों के निकलने का उस समय का रिकार्ड यदि चेक किया जाता तो अवश्य ही अज्ञात बोलेरो वाहन का रजिस्ट्रेशन एवं वाहन मालिक/चालक का पता लगाया जा सकता था। और वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9 के तहत शिकार के प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए थी। लेकिन रेंजर ने पूरी घटना को अपने स्तर पर दबा दिया। बताया जा रहा है कि बाघिन बाद में लंगड़ाते हुए देखी गई। चिंता की बात यह भी है कि उक्त बाघिन के चार छोटे शावक बताए जा रहे हैं, जो पूरी तरह मां पर निर्भर हैं। यदि बाघिन को कुछ भी होता है तो उस पर आश्रित चार बाघ शावकों का जीवन भी संकट में पड़ जाएगा। विदित हो कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दो वनरक्षकों समेत 4-5 सुरक्षा श्रमिकों को थी जिससे रेंजर साहब का कारनामा उजागर हो गया।
लगातार घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
इस घटनाक्रम ने इसलिए भी गंभीरता बढ़ा दी है क्योंकि हाल के दिनों में पीटीआर में कई चिंताजनक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 5 मई को अमानगंज बफर क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिला था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पहले तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर पहनाकर कोर क्षेत्र में छोड़ा गया था। उससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब दो सप्ताह पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला उजागर हुआ।
पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
इन्हीं घटनाओं के बीच रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन पन्ना कोर रेंज के राजाबरिया जंगल में एक वृद्ध का शव पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। शव कई दिन पुराना बताया गया और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। सवाल यह उठा कि कथित तौर पर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक पहुंच गया और उसका शव चार दिन तक जंगल में लटका रहा, लेकिन निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी तक नहीं हुई।
शून्य से शिखर तक पहुंचा पन्ना
पन्ना टाइगर रिजर्व का इतिहास देश की सबसे बड़ी वन्यजीव संरक्षण उपलब्धियों में गिना जाता है। वर्ष 2009 में यहां बाघ पूरी तरह समाप्त हो गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने बाघ पुनर्स्थापना योजना लागू की। दूसरे अभयारण्यों से लाए गए बाघ-बाघिनों की कड़ी सुरक्षा, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और मैदानी अमले की मेहनत से पन्ना ने अभूतपूर्व वापसी की। कुछ वर्षों में यहां बाघों की संख्या शून्य से बढ़कर सौ के पार पहुंच गई और पन्ना दुनिया में सफल बाघ पुनर्स्थापना मॉडल के रूप में स्थापित हुआ। लेकिन अब हालिया घटनाओं, मौजूदा पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली को देखते हुए वन एवं वन्यजीवों पर मंडराता संकट लगातार बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।
अब फिर उठने लगे पुराने सवाल
फाइल फोटो।
हालिया घटनाओं ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि कहीं वही पुरानी लापरवाहियां दोबारा तो नहीं लौट रहीं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि सड़क हादसे में घायल बाघिन की सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई होती, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। अब जबकि मामला चर्चा में आया है, तब अंदरखाने हाथियों की मदद से बाघिन की तलाश और वाहन की पहचान के प्रयास शुरू किए गए हैं। हालांकि सवाल अब भी कायम हैं- यदि सूचना समय पर मिल गई थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या इतनी बड़ी घटना को छिपाने के आरोपों से घिरे रेंजर के विरुद्ध नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी या फिर बाघ की मौत होने के मामले की तरह आरोप पत्र जारी कर जांच की आड़ में प्रकरण को रफा-दफा कर दिया जाएगा? लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और वास्तविक मॉनिटरिंग व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव संरक्षण की जिस ऐतिहासिक सफलता पर कभी पूरा देश गर्व करता था लेकिन उसके भविष्य को लेकर अब नई चिंताएं सामने आने लगी हैं।
इनका कहना है-
“घटना की सूचना न देना अक्षम्य अपराध है, पन्ना कोर के रेंजर को आरोप पत्र जारी करके उनके विरुद्ध तत्परता से सख्त एक्शन लिया जाएगा। आपको जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। घायल बाघिन को ढूंढने एवं आरोपी वाहन और चालक को पकड़ने के संबंध अभी कुछ जानकारी नहीं दे पाऊंगा।”
बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज अंतर्गत फांसी के फंदे पर लटके मिले अज्ञात वृद्ध के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद कोतवाली थाना पुलिस द्वारा मामले पर मर्ग कायम किया गया।
* महीने भर के अंदर दो बाघों की संदिग्ध मौत के बीच सामने आई हैरान करने वाली घटना
* कॉलरधारी बाघ की मौत के अगले दिन कोर क्षेत्र में मिली लाश, प्रबंधन के दावे कटघरे में
*चार दिन तक जंगल में लटका रहा शव, किसी को भनक नहीं, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था क्या पूरी तरह चौपट हो चुकी है? रेडियो कॉलरधारी बाघ की संदिग्ध मौत के अगले ही दिन पार्क क्षेत्र में एक अप्रत्याशित घटना के सामने आने से यह सवाल उठ रहा है। बुधवार सुबह पन्ना कोर रेंज अंतर्गत राजाबरिया के जंगल में एक अज्ञात वृद्ध का शव पेड़ से फांसी के फंदे पर लटका मिला। हैरानी की बात यह है कि कथित कड़ी सुरक्षा वाले कोर एरिया में यह शव 3-4 दिन तक लटका रहा, लेकिन वन अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। हैरान करने वाली यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब महीने भर के अंदर पन्ना टाइगर रिजर्व में दो बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पीटीआर प्रबंधन के सुरक्षा और सतत मॉनिटरिंग के दावों की गंभीर पोल खोल दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार 6 मई की सुबह बीट गार्ड इंद्रजीत लोधी को राजाबरिया जंगल में एक पेड़ पर करीब 65 वर्षीय अज्ञात व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन में जबरदस्त हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची कोतवाली थाना पन्ना पुलिस टीम ने पंचनामा कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इस दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व का मैदानी अमला मौजूद रहा।
जिला मुख्यालय पन्ना के जगात चौकी क्षेत्र में स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व की पन्ना कोर रेंज का ऑफिस। (फाइल फोटो)
पुलिस के अनुसार शव की स्थिति बेहद खराब थी और उसमें कीड़े पड़ चुके थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वृद्ध की मौत 3 से 4 दिन पहले हो चुकी थी। आसपास के गांवों के ग्रामीणों और पंचायत सचिव जरधोवा को पहचान के लिए बुलाया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच जारी है।
लगातार घटनाओं से गहराए सवाल
तारा ग्राम से रेस्क्यू किया गया युवा बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व की अमानगंज बफर रेंज अंतर्गत रमपुरा इलाके में मृत मिला।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही 5 मई को अमानगंज बफर रेंज के रमपुरा क्षेत्र में एक दो वर्षीय नर बाघ संदिग्ध हालात में मृत पाया गया था। यह वही बाघ था जिसे कुछ दिन पूर्व तारा गांव से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर के साथ कोर एरिया में छोड़ा गया था। इसके करीब पखवाड़े भर पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक अन्य नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल सड़क किनारे जंगल में मिला था, जिसकी जानकारी भी वन अमले को समय पर नहीं लग सकी थी।
सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न
फाइल फोटो।
ताजा घटना ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा कर दिया है कि आखिर कड़ी सुरक्षा वाले कोर क्षेत्र में कोई व्यक्ति कई किलोमीटर अंदर तक कैसे पहुंच गया और कई दिन तक वहां मौजूद रहा, फिर भी निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत दे रही हैं कि पन्ना टाइगर रिजर्व में न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा खतरे में है, बल्कि अब इंसानी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। कागजों में मजबूत दिखने वाली सुरक्षा व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है, यह हालिया घटनाओं ने उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि इन गंभीर घटनाओं के बाद जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होती है या फिर मामले जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं।
इनका कहना है-
“पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में अज्ञात वृद्ध व्यक्ति का शव फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिलने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर घटना स्थल का मुआयना किया। इस मामले में कोतवाली थाना पुलिस द्वारा कार्यवाही की जा रही है। घटना की हम विभागीय जांच भी कराएंगे।”
बीरेन्द्र कुमार पटेल, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)
* स्वस्थ घोषित कर कोर एरिया में छोड़ा गया था बाघ, अचानक मौत से पीटीआर प्रबंधन में हड़कंप
* एक माह में दूसरी घटना, सुरक्षा और मॉनिटरिंग के दावों पर सवाल
* पहले कंकाल, अब रेडियो कॉलरधारी बाघ की मौत- पीटीआर की निगरानी व्यवस्था कटघरे में
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा करने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रहीं है। पखवाड़े भर पूर्व एक वयस्क नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि आज एक और बाघ की मौत होने की खबर आने के बाद से जबरदस्त हड़कंप मचा है। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा से रेस्क्यू किए गए दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से पन्ना टाइगर रिजर्व एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस बाघ को सप्ताह भर पूर्व आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर गहन चिकित्सीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए कोर एरिया में छोड़ा गया था, उसकी अचानक मौत ने वन्यजीव सुरक्षा और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र में एक नाले के पास उक्त बाघ का शव मिला। यह वही बाघ है जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा के आबादी क्षेत्र से ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू किया गया था। बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी सतत निगरानी का दावा किया जा रहा था, इसके बावजूद उसकी मौत कैसे हुई- यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है।
रेस्क्यू के बाद स्वस्थ बताया गया था
कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई थी। (फाइल फोटो)
तारा ग्राम में बाघ के प्रवेश और मवेशियों के शिकार से ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था। हालात इतने बिगड़े कि वन अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाने का प्रयास तक किया गया। इसके बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बाघ को बेहोश कर पकड़ा गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों द्वारा जांच में उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और उसी दिन देर शाम उसे पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण हेतु छोड़ दिया गया था।
रेस्क्यू के बाद कॉलरिंग कर उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने का दावा किया गया था। ऐसे में एक सप्ताह के भीतर ही उसकी संदिग्ध मौत होना कई सवाल खड़े कर रहा है- क्या मॉनिटरिंग में चूक हुई, या बाघ की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया? फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकेगा।
एक माह में दूसरी घटना
पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
गौरतलब है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में एक माह के भीतर बाघ की मौत की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मुख्य मार्ग से महज कुछ दूरी पर मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब 15 दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को इसकी जानकारी तक नहीं लग सकी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला सामने आया, जिसकी जांच एसटीएफ जबलपुर द्वारा की जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और सतत निगरानी के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ताजा मामले में जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और जिम्मेदारी तय होती है या नहीं।
“तारा ग्राम से रेस्क्यू किए गए बाघ की आज सुबह मृत्यु होने की जानकारी मिली है, रेस्क्यू करने के बाद बाघ को रेडियो कॉलर पहनाया गया था और इसकी मदद से उसकी सतत मॉनिटरिंग की जा रही थी। बाघ की मृत्यु वन परिक्षेत्र अमानगंज बफर अंतर्गत हुई है। उसका शव पूर्णतः सुरक्षित है, आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नहीं पाई गई। विस्तृत जानकारी मैं मौके पर पहुंचकर घटनास्थल और शव का मुआयना करने के बाद दे पाऊंगा।”
बृजेन्द्र श्रीवास्तव, क्षेत्र संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
फोटो-01 कैप्शन- कार्यालय वन संरक्षक वन वृत्त छतरपुर का भवन। (फाइल फोटो)
* 16 साल पुराने आदेश पर अमल नहीं, दोषी बताए गए कर्मचारियों को मिली मनचाही पोस्टिंग
* न्यायालय की टिप्पणी के बाद भी कार्रवाई शून्य, मुख्य लिपिक की भूमिका पर उठे सवाल
* राज्यपाल, लोकायुक्त और मुख्य सचिव से शिकायत, छतरपुर से भोपाल तक हलचल
शादिक खान, पन्ना /छतरपुर।(www.radarnews.in) वन विभाग छतरपुर एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। विभाग पर न्यायालय के आदेशों की अनदेखी कर दोषी बताए गए कर्मचारियों को दंडित करने के बजाय पदोन्नति देने, संरक्षण प्रदान करने और वर्षों तक प्रकरण ठंडे बस्ते में डालकर रखने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर राज्यपाल, लोकायुक्त और प्रमुख सचिव वन विभाग से लिखित शिकायत की गई है, जिससे विभागीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मामला वन परिक्षेत्र बिजावर, वन मंडल छतरपुर के वन अपराध प्रकरण क्रमांक 168/7 दिनांक 04/07/2007 से जुड़ा है। आरोप है कि 3-4 जुलाई 2007 की दरम्यानी रात 118 सागौन वृक्षों की कटाई के मामले में तीन ग्रामीणों को नामजद कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, छतरपुर में दर्ज आपराधिक प्रकरण क्रमांक 1484/07, संस्थित दिनांक 03/08/2007 की सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट छतरपुर ने दिनांक 25/03/2010 को निर्णय पारित करते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि इतने बड़े पैमाने पर सागौन कटाई स्थानीय वन कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं प्रतीत होती। साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने हेतु आदेश की प्रति प्रधान मुख्य वन संरक्षक भोपाल को भेजने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद न तो दोषी कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई की गई और न ही निर्णय के विरुद्ध विभाग ने अपील दायर की। उल्टा जिन कर्मचारियों पर सवाल उठे, उन्हें समय-समय पर पदोन्नति देकर कार्यवाहक डिप्टी रेंजर और कार्यवाहक रेंजर जैसे पदों पर बैठाया गया। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। मामले में वन वृत्त छतरपुर के मुख्य लिपिक राघवेंद्र प्रसाद द्विवेदी की भूमिका भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सेवा अभिलेख और पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी होने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर संबंधित कर्मचारियों को लाभ पहुंचाया गया। शिकायतकर्ताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच कर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। आरोप यह भी है कि जिन कर्मचारियों पर न्यायालय ने कार्रवाई योग्य टिप्पणी की, उन्हें मनचाही पोस्टिंग देकर उपकृत किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अदालत के आदेशों पर भी अमल नहीं होगा, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे।
शिकायतकर्ता शिशुपाल अहिरवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने तथा दिनांक 25/03/2010 के न्यायालयीन आदेश का पालन सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल विभागीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायिक गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला है। अब नजर इस बात पर है कि शासन स्तर पर इस शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है और वर्षों पुराने इस विवाद में जवाबदेही तय होती है या नहीं।
* थाना ले जाने की धमकी देकर जंगल में नाबालिग के साथ की गई दरिंदगी
* हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों से दहल उठा शांति का टापू
* पन्ना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था के दावों पर उठे गंभीर सवाल, जनमानस में आक्रोश
* बढ़ते अपराधों को रोकने में नाकाम पुलिस ने दहला देने वाली घटना को दबाने साधी चुप्पी
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराध तथा यौन हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। सुरक्षा के दावे, तमाम अभियान और सख्ती के आश्वासन बार-बार सवालों के घेरे में आते रहे हैं। आए दिन सामने आने वाली जघन्य घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बेटियों की सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी बीच पन्ना जिले से सामने आई एक सनसनीखेज वारदात ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं, जहां एक नाबालिग किशोरी को कथित रूप से जंगल में ले जाकर तीन अज्ञात आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। सप्ताह भर के अंदर धार्मिक स्थल में चोरी, हत्या, लूट और गैंगरेप की सनसनीखेज जघन्य वारदातों के सामने आने से शांति का टापू कहा जाने वाला पन्ना जिला पूरी तरह से दहल उठा है। सभ्य समाज को झकझोर देने वाली इन संगीन वारदातों को लेकर आमजन में भय और पुलिस के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
पहले पीटा फिर की दरिंदगी
देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र में दर्ज प्रकरण के अनुसार बुधवार 29 अप्रैल 2026 को नाबालिग किशोरी अपने एक परिचित युवक से मिलने क्षेत्र में पहुंची थी। युवक अपने एक अन्य साथी के साथ मोटरसाइकिल से वहां आया था। बताया गया है कि तीनों कुछ देर के लिए क्षेत्र के एक सुनसान स्थान पर रुके थे, तभी दो मोटरसाइकिलों से तीन अज्ञात व्यक्ति वहां पहुंचे और विवाद करने लगे। आरोप है कि अज्ञात लोगों ने किशोरी के परिचित युवक पर दबाव बनाया कि युवती को उनके साथ जाने दिया जाए। युवक ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और छोड़ देने की गुहार लगाई। इस दौरान उसने अपने पास रखी नकदी, मोबाइल फोन तथा चांदी की चेन भी उन्हें दे दी, लेकिन आरोपी नहीं माने। इसके बाद आरोपियों ने किशोरी, उसके परिचित युवक और उसके साथी को यह कहकर जबरन अपने कब्जे में लिया कि उन्हें थाने ले जाया जा रहा है।
भय और दबाव बनाकर तीनों को वाहनों सहित जंगल के भीतर सुनसान इलाके में ले जाया गया। वहां किशोरी के परिचित युवक और उसके साथी को अलग बैठाकर मारपीट की गई। युवक को पत्थर मारने का भी आरोप है। उधर एक आरोपी किशोरी को खींचकर घनी झाड़ियों की ओर ले गया। वह रोती-गिड़गिड़ाती रही कि मुझे छोड़ दो, मुझे घर जाने दो लेकिन कामांध दरिंदे को उस पर जरा भी रहम नहीं आया। आरोपी ने उसके कपड़े उतार दिए और फिर जबरन अपनी हवश का शिकार बनाया। इस तरह तीनों हैवानों ने बारी-बारी से नाबालिग के साथ दरिंदगी की। विरोध करने पर थप्पड़ मारने, चोट पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने की बात भी शिकायत में कही गई है। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
आरोपियों की सरगर्मी से तलाश जारी
नाबालिग युवती ने अपने दोस्त के साथ देवन्द्रनगर थाना पहुंचकर पुलिस को आपबीती सुनाई। घटना पर पुलिस ने पुलिस ने धारा 115(2), 137(2), 70(2), 351(3) बीएनएस एवं 5(g) 6 पास्को एक्ट के तहत प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया है। गैंगरेप पीड़िता को मेडिकल जांच एवं उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया, जहां तबीयत बिगड़ने पर वह बा-बार बेहोश हो रही थी। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उपचार के लिए भर्ती कराया गया। पीड़िता के शरीर पर आए जख्म-खरोंच के निशान उसके साथ हुई दरिंदगी की गवाही दे रहे हैं। पीड़िता की हालत वर्तमान में सुधार होने की जानकारी मिली है। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि पुलिस टीमें सामूहिक बलात्कार की वारदात में शामिल तीनों अज्ञात आरोपियों की तलाश में सरगर्मी से जुटी हैं। बता दें कि, घटना की आधिकारिक तौर पर पुष्टि के लिए पुलिस अधीक्षक पन्ना निवेदिता नायडू एवं देवेंद्रनगर थाना प्रभारी संतोष सिंह यादव से संपर्क किया गया लेकिन उनका कोई जबाव नहीं आया।
दिनदहाड़े वारदात ने उड़ाई सुरक्षा दावों की धज्जियां
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अपराधी खुलेआम युवती और दो युवकों को रोककर पहले लूटपाट करें, फिर थाना ले जाने का भय दिखाकर जंगल में ले जाएं और वहां जघन्य वारदात को अंजाम दें, तो क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था आखिर किस हाल में है? यह घटना पुलिस गश्त और अपराध नियंत्रण के दावों पर सीधा प्रहार है। जिले में हत्या, लूट, चोरी और महिला अपराधों की घटनाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि अपराधियों में कानून का भय पूरी तरह कमजोर पड़ रहा है। यदि सख्त निगरानी और प्रभावी कार्रवाई होती, तो दिनदहाड़े ऐसी दुस्साहसिक घटना संभव नहीं थी। विदित हो कि सप्ताह भर के अंदर जिले में सामने आई सनसनीखेज जघन्य घटनाओं ने जनमानस को हिलाकर रख दिया है। शांति का टापू कहलाने वाले पन्ना में अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस से लोग जहां अत्यंत ही भयभीत हैं वहीं उनमें पुलिस के प्रति गुस्सा साफ़ देखा जा सकता है।
छोटी उपलब्धियों पर प्रचार, बड़ी घटना पर चुप्पी क्यों?
सामूहिक बलात्कार की शर्मसार करने वाली घटना के बाद पुलिस के सूचना तंत्र पर भी सवाल उठे हैं। पत्रकारों द्वारा घटना की आधिकारिक जानकारी के लिए लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों से संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने या फिर फोन रिसीव न करने की बातें सामने आईं। निचले स्तर के पुलिस अधिकारी जानकारी देने के लिए अधिकृत न होने का बहाना बनाकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। गौरतलब है कि जब छोटी-छोटी कार्रवाई पर प्रेस विज्ञप्ति जारी करने और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रचार में तत्परता दिखाई जाती है, तब ऐसी गंभीर घटनाओं पन्ना पुलिस पर चुप्पी क्यों साध लेती है? बढ़ते अपराधों की प्रभावी रोकथाम में बुरी तरह नाकाम पुलिस अब क्या घटनाओं को मीडिया में आने से रोकने-दबाने पर अपनी ऊर्जा लगाएगी? मीडिया को जानकारी देना क्या गंभीर घटनाओं पर जवाबदेही से बचने की कोशिश है? यह सवाल जनता और मीडिया दोनों पूछ रहे हैं।
जिला एवं सत्र न्यायालय पन्ना, मध्य प्रदेश। (फाइल फोटो)
* प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना का ऐतिहासिक फैसला
* भूमि विवाद और पारिवारिक रंजिश में हुई वारदात, कोर्ट ने माना जघन्य अपराध
पन्ना।(www.radarnews.in) अपने दो सगे छोटे भाइयों की गोली मारकर हत्या तथा मां को घायल करने के बहुचर्चित मामले में पन्ना न्यायालय ने पिता-पुत्र को फांसी की सजा सुनाई है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पन्ना श्री सुरेन्द्र मेश्राम की अदालत ने दोनों आरोपियों चरन सिंह राजपूत एवं उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को हत्या, हत्या के प्रयास एवं आयुध अधिनियम की धाराओं में दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया। साथ ही दोनों अभियुक्तों को अर्थदण्ड से भी दंडित किया है।
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता के अनुसार घटना 27 मई 2023 की रात देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गोल्ही मुड़िया में हुई थी। परिवार में जन्मदिन कार्यक्रम के बाद घर के बाहर बैठे नरेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह, महेश सिंह एवं उनकी मां फूलाबाई पर आरोपी चरन सिंह राजपूत और उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत ने कथित रूप से पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से नरेन्द्र सिंह और महेन्द्र सिंह की मौके पर मौत हो गई, जबकि बीच-बचाव करने आई फूलाबाई घायल हो गई थीं। मामले की रिपोर्ट पर देवेन्द्रनगर थाना में हत्या, हत्या के प्रयास तथा आयुध अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। विवेचना उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध किया। न्यायालय ने मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए दोनों दोषियों चरन सिंह राजपूत एवं उसके पुत्र शुभम सिंह राजपूत को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत मृत्युदंड तथा 50-50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा धारा 307/34 में 10-10 वर्ष का कठोर कारावास व 25-25 हजार रुपये जुर्माना, धारा 27 आयुध अधिनियम में 3-3 वर्ष का कठोर कारावास व 2000/- रूपए जुर्माना, धारा 25 आयुध अधिनियम में 1-1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा तथा 1000/- रूपए का जुर्माना से दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की पैरवी वरिष्ठ सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्रीराम यादव ने की।
तारा ग्राम के आबादी क्षेत्र में घुसे 2 वर्षीय बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के बाद वनकर्मी पिंजड़े में रखकर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए, जहां उसे कोर क्षेत्र में छोड़ा गयाथा। (फाइल फोटो)
* आबादी क्षेत्र में दो मवेशियों का शिकार करने के बाद तारा गांव में डटा रहा बाघ
* रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर पकड़े गए बाघ को पीटीआर के कोर क्षेत्र में छोड़ा
* पखवाड़े भर से तारा के आसपास बाघ की मौजूदगी को लेकर आक्रोशित थे ग्रामीण
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या सौ के पार पहुंचने के बाद पार्क का मौजूदा क्षेत्रफल अब उनके लिए कम पड़ने लगा है। अपनी नई टेरिटरी स्थापित करने और भोजन की तलाश में बाघ लगातार जंगल की सीमा लांघकर आसपास के गांवों तक पहुंच रहे हैं। इसके चलते मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति दिन-ब-दिन जटिल होती जा रही है, जबकि वन सीमा से लगे गांवों में भय, असुरक्षा और आक्रोश तेजी से बढ़ रहा है। इसी बढ़ते तनाव की झलक विगत दिवस ग्राम तारा में देखने को मिली। अमानगंज बफर रेंज के ग्राम तारा में रविवार को आबादी क्षेत्र में बाघ घुसने और दो पालतू मवेशियों का शिकार किए जाने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। भय और गुस्से से भरे ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन अधिकारियों को घेर लिया तथा उन्हें बंधक बनाने का प्रयास किया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर 24 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है।
बताया गया है कि तारा ग्राम और आसपास के इलाके में एक नर बाघ पिछले करीब पखवाड़े भर से विचरण कर रहा था। इससे क्षेत्र में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ था। ग्रामीणों का आरोप है कि पन्ना टाइगर रिजर्व से बाहर निकलकर आबादी क्षेत्र में पहुंच रहे बाघों को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में रविवार 26 अप्रैल की सुबह जब ग्रामीणों को पता चला कि गांव में एक नर बाघ घुस आया है और उसने दो मवेशियों को मार डाला है, तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और हाथियों की मदद से बाघ को वापस जंगल क्षेत्र की ओर खदेड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन करीब दो वर्षीय बाघ आबादी क्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। इस बीच ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ लोगों ने वनपाल सीलन कुमार प्रजापति को घेर लिया और कहा कि जब तक बाघ गांव से नहीं हटेगा, अधिकारी भी नहीं जा सकेंगे। बाद में मौके पर पहुंचे अमानगंज बफर रेंजर मयंक शर्मा को भी भीड़ ने घेर लिया तथा रस्सी से बांधकर रोकने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद लोगों की समझाइश पर स्थिति कुछ देर बाद रेंजर को छोड़ दिया।
बड़े स्तर पर चलाया रेस्क्यू अभियान
कई घंटों तक चले बाघ के रेस्क्यू ऑपरेशन में तीन रेंजों के वनकर्मियों, छह हाथियों, पांच रेंज ऑफिसर और दो वन्यप्राणी चिकित्सकों की मदद ली गई।
घटना की सूचना पर पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव, उप संचालक बीरेन्द्र कुमार पटेल कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के तीव्र आक्रोश और बिगड़ते हालात को देखते हुए नर बाघ को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) कर पकड़ने की अनुमति ली गई। इसके बाद अतिरिक्त वन अमला बुलाया गया और छह हाथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम ने बाघ को ट्रेंकुलाइज कर रेडियो कॉलर पहनाया और पिंजरे में बंद कर पन्ना टाइगर रिजर्व ले जाया गया। देर शाम उसे कोर क्षेत्र में स्वछंद विचरण के लिए छोड़ दिया गया।
पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण
घटना के अगले दिन अमानगंज रेंजर मयंक शर्मा की शिकायत पर थाना अमानगंज में शासकीय कार्य में बाधा, धमकी तथा शासकीय कर्मचारियों को बंधक बनाने के प्रयास सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। थाना प्रभारी अमानगंज रवि जादौन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों कुन्जीलाल कुशवाहा (55) और रामरूप कुशवाहा (40), निवासी ग्राम तारा, को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
पुराने हादसों से भी बढ़ा रोष
जरधोवा गांव के समीप घटनास्थल पर पड़े आदिवासी बालक के धड़ एवं सिर को देखते हुए पन्ना टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण। (फाइल फोटो)
विदित हो कि इससे पहले भी पन्ना टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में वन्यजीव हमलों की घटनाएं हो चुकी हैं। कुछ माह पूर्व जरधोवा गांव में तेंदुए ने एक बालक को शिकार बनाया था, जबकि हिनौता क्षेत्र में एक वृद्ध महिला पर बाघों ने हमला कर जान ले ली थी। इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में लंबे समय से असुरक्षा और नाराजगी बनी हुई है। आमचर्चा है, युवा बाघ के पखवाड़े भर तारा समेत आसपास के आबादी क्षेत्र में विचरण करने, पालतू मवेशियों को शिकार बनाने एवं लगातार बढ़ते भय-असुरक्षा के मद्देनजर पीटीआर प्रबंधन (Panna Tiger Reserve Management) द्वारा कथित तौर ठोस प्रबंध न करने से ग्रामीण भड़क उठे। और कानून को अपने हाथ में लेते हुए वन अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कर उन्हें बंधक बनाने की कोशिश की गई।
* पत्रकार पर जानलेवा हमला और फर्जी प्रकरण दर्ज करने से भड़का आक्रोश, खाकी की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
शादिक खान, पन्ना/छतरपुर।(www.radarnews.in) छतरपुर जिले के बिजावर निवासी पत्रकार राकेश राय पर हुए जानलेवा हमले के बाद उन्हीं पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने और पूरे घटनाक्रम में पुलिस की संदिग्ध भूमिका के विरोध में सोमवार को छतरपुर की सड़कों पर पत्रकारों का अभूतपूर्व आक्रोश फूट पड़ा। जिले भर से जुटे पत्रकारों, संपादकों, वरिष्ठ मीडियाकर्मियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने इसे केवल एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की सुनियोजित कोशिश बताया। सर्किट हाउस से शुरू हुआ यह उग्र विरोध मार्च जल्द ही जनआक्रोश में बदल गया। हाथों में तख्तियां, मुंह पर विरोध के बुलंद नारे और कंधों पर पुलिस-माफिया गठजोड़ की प्रतीकात्मक अर्थी लेकर पत्रकारों ने शहर में मार्च निकाला। “एसपी हटाओ, छतरपुर बचाओ”, “पुलिस अधीक्षक मुर्दाबाद”, “पत्रकारों पर हमला बंद करो” जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
प्रदर्शनकारी पत्रकारों का आरोप था कि जिले में सच लिखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। दबंगों, माफिया तत्वों और रसूखदारों के खिलाफ खबरें प्रकाशित करने वाले पत्रकारों पर हमले कराए जा रहे हैं, फिर उन्हीं पीड़ित पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बताते हुए पत्रकारों ने कहा कि यदि कलम को डराकर चुप कराया गया, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा।
एसपी कार्यालय का घेराव, सड़क पर चक्काजाम
पत्रकारों का हुजूम पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और परिसर के बाहर जोरदार नारेबाजी की। आरोप है कि काफी देर तक इंतजार के बाद भी पुलिस अधीक्षक बाहर नहीं आए, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। इसी बीच यह सूचना मिली कि मामले से जुड़ा शराब ठेकेदार एसपी कार्यालय के भीतर मौजूद है। इस खबर ने विरोध को और भड़का दिया।इसके बाद पत्रकारों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। शहर की प्रमुख सड़क पर यातायात थम गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में खाकी और माफिया के बीच खतरनाक सांठगांठ ने कानून व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। अवैध कारोबार, दबंगई और पत्रकारों पर हमलों के मामलों में कार्रवाई के बजाय संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए गए। पत्रकारों ने कहा कि यदि सत्ता और सिस्टम का इस्तेमाल सच दबाने में होगा, तो जनता का भरोसा टूटेगा।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
पत्रकारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि- पत्रकार राकेश राय पर दर्ज फर्जी प्रकरण तत्काल वापस लिया जाए। पत्रकार पर हमला करने वालों पर हत्या के प्रयास, लूट और साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज हो। संबंधित थाना प्रभारी सुरेन्द्र मरकाम एवं जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई हो। शराब माफिया और पुलिस संरक्षण के आरोपों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू किया जाए। पत्रकारों ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन जिला स्तर से निकलकर प्रदेशव्यापी रूप लेगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की रक्षा का संघर्ष है।
चेन स्नेचिंग की वारदात को अंजाम देने के बाद बाइक से फरार होते बदमाशों के फुटेज निजी सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए।
* जेल तिराहा के समीप शाम के समय वारदात को दिया अंजाम
* बंद पड़े सरकारी सीसीटीव्ही कैमरे बने शोपीस
* पन्ना में बढ़ते अपराधों के बीच सुरक्षा व्यवस्था बेनकाब
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) शहर में अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है और पुलिस व्यवस्था सवालों के घेरे में है। एक बार फिर महिला सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हुए कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत पुरुषोत्तमपुर जगन्नाथ कॉलोनी में एक महिला से चाकू की नोक पर सोने की चेन लूट लिए जाने की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। लूटी गई चेन की कीमत 3 लाख रुपए बताई जा रही है। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे बंद पड़े शासकीय सीसीटीवी कैमरों की लापरवाही भी उजागर कर दी है।
जानकारी के अनुसार स्वाती तिवारी रोजाना की तरह शाम को टहलने के बाद रघुलीला गार्डन के पास स्थित पेट्रोल पंप से अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान पीछे से बाइक पर सवार दो अज्ञात बदमाश पहुंचे और महिला के गले पर चाकू अड़ाकर उसकी सोने की चेन छीन ली। वारदात को अंजाम देकर आरोपी अजयगढ़ चौराहे की ओर फरार हो गए। घटना के बाद पीड़िता ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी, जिस पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। कोतवाली थाना की सब-इंस्पेक्टर मनोरमा मौर्य ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास लगे निजी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन आरोपियों के चेहरे स्पष्ट नहीं दिख पाए।
चेन स्नेचिंग वारदात की पीड़िता स्वाती तिवारी ने सोमवार को अपने भाई के साथ पुलिस अधीक्षक से भेंट कर अज्ञात बदमाशों की शिनाख्त कर कार्रवाई की मांग की।
इस बीच सबसे बड़ा सवाल शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो गया है। पीड़िता के भाई अजय तिवारी ने आरोप लगाया कि नगर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की ओर से लगाए गए शासकीय सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं। यदि ये कैमरे चालू हालत में होते तो आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान हो सकती थी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए कैमरे अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। जिन कैमरों का उद्देश्य अपराध रोकना, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और घटनाओं की त्वरित जांच में मदद करना था, वे बंद पड़े होने से अपराधियों को खुला संरक्षण मिल रहा है।
शहर में लगातार चेन स्नेचिंग, लूट और महिलाओं से जुड़ी वारदातें बढ़ रही हैं, लेकिन सुरक्षा के दावे जमीन पर खोखले साबित हो रहे हैं। प्रमुख चौराहों पर कैमरे बंद होना जन सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है। यदि पुलिस निगरानी तंत्र सक्रिय रहता तो अपराधियों में इतना दुस्साहस नहीं होता कि वे महिला के गले पर चाकू रखकर बीच शहर में वारदात कर फरार हो जाएं। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है, लेकिन जनता पूछ रही है कि जब सुरक्षा के सबसे बड़े साधन ही बंद पड़े हों, तब अपराधियों पर लगाम कैसे लगेगी? यह घटना केवल लूट नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र अंतर्गत मुख्य मार्ग से महज 150 फिट दूर जंगल में नर बाघ का शव क्षत-विक्षत कंकाल की हालत में मिला था। (फाइल फोटो)
* एसटीएफ और पीटीआर द्वारा की जा रही बाघ की मौत के कारणों की गहन जांच
* 15 दिन तक सड़ता रहा बाघ का शव, निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिलने के मामले ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना को प्रथम दृष्टया मैदानी अमले की लापरवाही मानते हुए प्रबंधन ने सख्त कार्रवाई की है। बीटगार्ड कटरिया रामसफल बैगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि कार्यवाहक वनपाल एवं सर्किल प्रभारी बकचुर कमल किशोर मोची और परिक्षेत्राधिकारी गंगऊ अभ्यारण सागर शुक्ला को आरोप पत्र जारी कर जवाब तलब किया है। मामले में पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) प्रबंधन ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं जबलपुर से विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की टीम भी इस घटना के आपराधिक पहलुओं की गहन पड़ताल में जुटी हुई है।
मंगलवार 21 अप्रैल 2026 को मझगवां-हिनौता मुख्य मार्ग से महज 150 फुट दूरी पर, गंगऊ अभ्यारण अंतर्गत बीट कटरिया के वन कक्ष क्रमांक-278 में नर बाघ (Male Tiger) का क्षत-विक्षत शव मिला था। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बाघ की मौत 10 से 15 दिन पहले हो चुकी थी, जिससे शव पूरी तरह कंकाल में तब्दील हो गया था। इस घटना के सामने आने के बाद पीटीआर प्रबंधन को न सिर्फ कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उसकी सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चिंताजनक एवं विचारणीय पहलू यह है कि हिनौता स्थित पार्क के प्रवेश द्वार तक जाने वाले मार्ग किनारे जंगल में बाघ का शव कई दिनों तक सड़ता रहा, लेकिन वन विभाग के मैदानी अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी। जबकि इसी मार्ग से पार्क के अधिकारी-कर्मचारी दिन में कई बार आवागमन करते हैं। इस लापरवाही ने निगरानी व्यवस्था की पोल खोल दी है।
पार्क में लागू एम-स्ट्राइप्स (M-STrIPES) ऐप आधारित गश्त और मॉनिटरिंग सिस्टम के बावजूद ऐसी घटना सामने आना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सूत्र बताते हैं, पीटीआर (Panna Tiger Reserve) के मौजूदा वरिष्ठ अधिकारियों का फोकस वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा न होकर अपने आर्थिक हित साधने पर है। नतीजतन प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी निगरानी व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हो पा रही है। नर बाघ की संदिग्ध मौत समेत पूर्व में घटित अन्य घटनाएं इस बात प्रमाण है।
रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज?
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार बाघ की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक भोपाल समीता राजौरा ने एसटीएफ (STF) को जांच के निर्देश दिए थे। टीम ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं। अब पूरे मामले में सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश थी।
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