वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट कुड़रा में पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई श्रमिकों के बजाए ट्रैक्टरों से कराई गई। पौधारोपण कार्यों में हुए फर्जीवाड़े का सबूत हैं गोलाकार गड्ढे।
* मशीनों से काम कराकर श्रमिकों के नाम फर्जी भुगतान
* पुराने वृक्षों के बीच पौधारोपण, स्थल चयन पर उठे सवाल
* उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत कैम्पा और आरडीएफ वृक्षारोपण में भ्रष्टाचार
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में उत्तर वन मण्डल अंतर्गत विभागीय कार्यों के बजट बंदरबांट का अभियान काफी लंबे समय से लगातार चल रहा है। सरकारी धन की लूट-खसोट का सीधा असर विभाग द्वारा कराए जाने वाले निर्माण सहित पौधरोपण कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। पौधारोपण कार्य अब पर्यावरण संरक्षण के बजाए ‘पैसों की खेती’ का जरिया बनते नजर आ रहे हैं। अटल भूजल योजना अंतर्गत तालाबों के निर्माण में सामने आए भ्रष्टाचार का मुद्दा अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब कैम्पा और आरडीएफ मद से कराए गए पौधारोपण (वृक्षारोपण) तैयारी कार्यों में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की परतें खुलने लगी हैं। तालाब और परकोलेशन पिट निर्माण की तर्ज पर पौधारोपण कार्यों में भी कुल स्वीकृत राशि का धरातल पर 50 फीसदी से भी कम खर्च करने के चक्कर में मजदूरों का काम ठेके पर मशीनों से कराया गया।
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट सिमरा में कैम्पा मद पौधारोपण कराने के लिए स्थल सफाई कराए बगैर ठेके पर ट्रैक्टरों से गोल गड्ढों की खुदाई करा दी।
उत्तर वन मण्डल पन्ना अंतर्गत आने वाली समस्त रेन्जों में आगामी मानसून सीजन में करीब आधा सैंकड़ा स्थानों पर लाखों पौधे रोपित करने के लिए ट्रेक्टरों से गोलाकार गड्ढों की खुदाई करा दी गई। जबकि गड्ढों की खुदाई वर्गाकार आकृति में की होनी थी। अपवाद स्वरूप कुछेक बीटों को छोड़ दें शेष सभी जगह नजर आ रहे पौधारोपण के गोल गड्ढे खुद ही भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। कार्य प्रभारी बीटगार्ड से लेकर डीएफओ की मिलीभगत के चलते गड्ढों की खुदाई खुलेआम ट्रैक्टरों से कराने के बाबजूद मजदूरों के नाम बनाए गए करोड़ों रुपए के फर्जी प्रमाणकों का भुगतान हो गया। मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर अंदरखाने मचे हड़कंप के चलते अब कुछ स्थानों पर गोल गड्ढों का गोलमाल छिपाने मजदूर लगाकार गड्ढों को निर्धारित आकृति (आकार) देने का कार्य ठेके पर कराया जा रहा है। पौधारोपण तैयारी कार्यों व्यापक पैमाने पर की गई धांधली सिर्फ गड्ढों तक सीमित नहीं, यह स्थल चयन से शुरू होकर चेन लिंक फेंसिंग मटेरियल की गुणवत्ता तक जाती है।
स्थल चयन की स्वीकृति पर सवाल
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत बीट नरदहा में पहले से लगे पेड़ों के बीच नए पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई कराई गई।
उत्तर वन मण्डल पन्ना के वन परिक्षेत्र धरमपुर में सर्किल नरदहा अंतर्गत ग्राम नरदहा से सटे वन क्षेत्र में पौधारोपण के लिए जिस स्थल का चयन किया गया है वहां पहले से 15 से 20 वर्ष पुराने पेड़ अच्छी-खासी तादाद में खड़े हैं। पहले से खड़े वृक्षों के आसपास या बीच में खाली जगह पर नए पौधे रोपित करने गड्ढों की खुदाई के पूर्व खरपतवार हटाने स्थल सफाई तक नहीं कराई गई। इतना ही ज्यादा से ज्यादा गड्ढे खोदने के चक्कर में उनके बीच निर्धारित दूरी का मापदंड यहां मजाक बन चुका है। गड्ढों की लंबाई, चौड़ाई और गहराई भी एक समान नहीं है।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में पुराने सघन जंगल के बीच में रिक्त भूमि को नए पौधारोपण के लिए चुना गया।
नरदहा बीट में ही छनिहपुरवा गांव के सिंचाई जलाशय के बगल में भी जहां 20 से 50 वर्ष पुराने वृक्षों का घना जंगल खड़ा है वहां बीच-बीच में रिक्त स्थान पर गड्ढों की खुदाई करवाकर आगामी बारिश के सीजन पौधे रोपित कराने की तैयारी चल रही है। वन विभाग के जानकार उक्त दोनों स्थानों पर पौधारोपण कार्यों को स्वीकृति मिलने पर ही सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि, स्थानीय अधिकारियों के द्वारा ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण कार्य स्वीकृत करवाकर नोट छापने के लिए भोपाल में बैठे वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को गुमराह किया। दोनों ही जगह पौधों की सुरक्षा पुख्ता करने खड़े किए गए सीमेंट पोल और सुरक्षा जाली की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।
ट्रैक्टरों से कराई गड्ढों की खुदाई
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट बरकोला में 20 हेक्टेयर, बीट सिमरा 50 हेक्टेयर और वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट कुड़रा में 40 हेक्टेयर वन भूमि पर कैम्पा मद से वृक्षरोपण कराने के लिए पिछले माह ट्रैक्टर लगवाकर ठेके पर हजारों गड्ढे खुदवाए गए। सूत्रों ने बताया कि ट्रैक्टर से प्रत्येक गड्ढे की खुदाई का ठेका साइज के हिसाब से 3 से 4 रुपए में दिया गया। जबकि मजदूरों (श्रमिकों) के नाम पर बनाए गए फर्जी प्रमाणकों में प्रत्येक गड्ढे की खुदाई की मजदूरी न्यूनतम 12-13 रुपए से लेकर अधिकतम 25 रुपए तक दर्ज की गई। ठेके पर मशीनों से काम करवाने के बाद कार्य प्रभारी बीटगार्ड, संबंधित सर्किल प्रभारी और रेंजरों सुनियोजित तरीके से अपने विश्वासपात्र तथा करीबी लोगों के नाम बिल-बाउचर (प्रमाणक) में मजदूरी करने वाले श्रमिकों के रूप दर्ज कर दिए। ताकि उनके खातों में होने वाले मजदूरी भुगतान की राशि आसानी से उन तक पहुंच सके।
वन परिक्षेत्र धरमपुर के नरदहा सर्किल अंतर्गत छनिहापुरवा में सिंचाई जलाशय के समीप कराए जा रहे पौधारोपण की फेंसिंग सामग्री मानक स्तर की नहीं।
फील्ड में हुए कार्यों की सच्चाई जांनने के बाद भी डीएफओ साहब ने समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम माह पौधारोपण तैयारी कार्य के करोड़ों रुपए के प्रमाणकों का भुगतान कर दिया। जबकि इन बीटों में भी चेन लिंक फेंसिंग में लगाए गए सीमेंट पोल और लोहे की जाली आदि सामग्री की गुणवत्ता मानक स्तर की नहीं है। पौधारोपण स्थल पर तालाब और परकुलेशन पिट का निर्माण कार्य भी पूर्णतः मशीनों से ही कराया गया। बता दें कि इसके पूर्व रडार न्यूज़ ने वन परिक्षेत्र अजयगढ़ की बीट धवारी, टौरिया और देवरभापतपुर में स्वीकृत पौधारोपण हेतु ट्रैक्टरों से ठेके पर हजारों की तादाद में गोल गड्ढों की खुदाई के मामले को उजागर किया था।
जानकारी मांगने पर अफसरों से साधी चुप्पी
उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, जब इस मामले से संबंधित अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया तो अजयगढ़-धरमपुर रेंजर से लेकर एसडीओ, डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह और मुख्य वन संरक्षक वृत छतरपुर नरेश यादव तक ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। पौधरोपण तैयारी कार्यों में हुई अनियमितताओं को लेकर खबर प्रकाशित करने के लिए आवशयक बुनियादी जानकारी मसलन प्रोजेक्ट रिपोर्ट अनुसार उक्त कार्यों की लागत, रोपित किए जाने वाले पौधों की संख्या, क्षेत्रफल और अब तक व्यय हुई राशि आदि का डिटेल जानने जब उक्त अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी थी जैसे कि उन्हें ‘सांप सूंघ गया हो’। करीब 2 सप्ताह से जानकारी देने में आनाकानी और टालमटोल करते हुए रेंज अफसर अब अपने अधीनस्थों से कई तरह के संदेश पहुंचा रहे हैं। फोन कॉल, व्हाट्सएप्प पर और समक्ष में उपस्थित होकर जानकारी मांगे जाने के बाबजूद जानकारी नहीं दी गई। अधिकारियों की यह चुप्पी न सिर्फ पूरे मामले को संदिग्ध बनाती है बल्कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों पर भी प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।
कार्यालय कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग पन्ना। (फाइल फोटो)
* कार्यपालन यंत्री पर नियमों की अनदेखी कर व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने का आरोप
* 52 माह तक बिना बिल के डीजल का हुआ भुगतान, ईएनसी के निर्देशों की खुली अवहेलना
* एक ही कार्यालय में वाहनों के लिए डीजल भुगतान में अपनाई जा रही अलग-अलग प्रक्रिया
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों एवं आर्थिक अनियमितता के लिए बदनाम कार्यालय जल संसाधन संभाग पन्ना में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा पर व्यक्ति विशेष को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए गंभीर वित्तीय अनियमितता करने के आरोप लगे हैं। विभागीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने स्वयं के उपयोग के लिए लगाए गए वाहन के भुगतान में शासन के स्पष्ट नियमों और प्रमुख अभियंता के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी कर 29.55 लाख रुपए से अधिक राशि का भुगतान किया गया। जबकि कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों के डीजल भुगतान में अलग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। दस्तावेजों की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कार्यपालन यंत्री द्वारा वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल देयकों (बिल) को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता। बिल प्रस्तुत कराए बिना ही वाहन का कुल भुगतान (मासिक किराया+डीजल) निर्धारित लिमिट के आधार पर लगातार वाहन मालिक के खाते में किया जाता रहा है। यह गड़बड़झाला पिछले 52 माह से चल रहा था।
ईएनसी ने दिशा-निर्देशों की अवहेलना
शासकीय कार्य हेतु टैक्सी/वाहन किराए पर लिए जाने के संबंध में कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल (म.प्र.) द्वारा पत्र क्र. 333/4/759/भू. अ./2011 भोपाल, दिनांक 09 सितंबर 2011 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस पत्र में बताया गया है शासकीय वाहन उपलब्ध न होने पर किराए पर वाहन अधीक्षण यंत्री की अनुमति से लगाए जा सकते हैं। जिसमें कार्यपालन यंत्री तथा अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) के लिए वाहन पर डीजल एवं किराया का कुल मासिक व्यय की अधिकतम लिमिट क्रमशः 630D/550D निर्धारित की गई है। 24 शर्तों वाले पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ‘D’ का अर्थ अधीक्षण यंत्री के मुख्यालय पर उपलब्ध न्यूनतम डीजल दर प्रति लीटर टैक्स सहित है। पत्र के बिंदु क्रमांक 2 में स्पष्ट उल्लेख है, प्रमुख अभियंता एवं शासन के आदेशों में कहीं विरोधाभास होने पर शासन के आदेश का पालन किया जाएगा। इसी तरह बिंदु क्रमांक 6 में कहा गया है ‘वाहन का मालिक विभाग के किसी भी प्रथम अथवा द्वितीय श्रेणी अधिकारी का निकट या दूर का रिश्तेदार नहीं होना चाहिए। यदि रिश्तेदार होना पाया जाता है, तो भुगतान किए गए किराए की दुगुनी राशि सिंचाई राजस्व में उस अधिकारी के वेतन से जमा कराई जाएगी साथ ही दंडित भी किया जाएगा।’
52 माह तक लगातार बिना बिल के 29 लाख का भुगतान
कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा ने जल संसाधन संभाग पन्ना में माह अगस्त 2021 को अपनी पदस्थापना के बाद से ही हद दर्जे की मनमानी करते हुए तेल का खेल शुरू कर दिया था। मुख्य अभियंता कार्यालय सागर के एक विश्वसनीय सूत्र से प्राप्त दस्तावेजों को देखने से पता चलता है शर्मा द्वारा अपने स्वयं के लिए लगाए गए वाहन के प्रत्येक मासिक भुगतान में डीजल के बिलों को कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराया जाता। डीजल के बिल प्रस्तुत कराए बगैर ही माह सितंबर 2021 से वाहन का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) 630D की लिमिट के आधार पर वाहन मालिक के खाते में माह दिसंबर 2025 तक लगातार किया जाता रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा अपने लिए लगाए गए वाहन के मासिक भुगतान में प्रमुख अभियंता के निर्देशों की खुली अवहेलना की गई। डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बगैर ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) के खाते में किया गया। जबकि नियमानुसार वाहन के डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के बाद संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक को इसका भुगतान किया जाना चाहिए था। कार्यपालन यंत्री की इस मेहरबानी के मद्देनजर वाहन मालिक उनका नजदीकी या दूर का रिश्तेदार होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि, शर्मा साहब की ससुराल ग्वालियर क्षेत्र में है, पन्ना में उनकी पदस्थी के बाद से ही जिले के जल संसाधन विभाग में ग्वालियर-चंबल अंचल के ठेकेदारों का दखल लगातार बढ़ता जा रहा है।
भुगतान की अलग-अलग प्रक्रिया पर सवाल
जल संसाधन संभाग पन्ना में किराए पर लगाए गए वाहनों के भुगतान में नियम विरुद्ध अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कार्यपालन यंत्री द्वारा स्वयं को नियम-निर्देशों से ऊपर रखते हुए अपने लिए लगाए गए वाहन के डीजल बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए बिना ही 52 माह का कुल भुगतान (वाहन किराया+डीजल) रुपए 29,55,996/- किसी व्यक्ति विशेष के खाते में लगातार किया जाता रहा है। वहीं कार्यालयीन अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीओ) के लिए लगाए गए वाहनों का किराया रुपए 26,950/- प्रतिमाह तथा मासिक डीजल का भुगतान क्रमशः वाहन मालिक और डीजल के बिल कार्यालय में उपलब्ध कराए जाने के उपरांत संबंधित पेट्रोल पम्प मालिक के खाते में किया जा रहा है। अर्थात एक ही कार्यालय में वाहनों के डीजल की भुगतान की अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने से नियम-निर्देशों का मजाक उड़ रहा है। कार्यपालन यंत्री द्वारा वाहन मालिक को मासिक किराया के साथ वाहन के डीजल का नियम विरुद्ध भुगतान करके व्यक्ति विशेष (वाहन मालिक) को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। उनका यह कृत्य अनियमित भुगतान के साथ शासकीय निधि के दुरूपयोग की श्रेणी में आता है।
भ्रष्टाचार को नजरअंदाज कर रहे शीर्ष अधिकारी
गंभीर वित्तीय अनियमितता के इस मामले की सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि, कार्यपालन यंत्री की कारगुजारी का कच्चा चिट्ठा सप्रमाण जनवरी 2026 में प्रमुख अभियंता भोपाल तथा मुख्य अभियंता सागर को भेजा गया था, लेकिन शीर्ष अधिकारियों ने लाखों रुपए के नियम विरुद्ध भुगतान पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया। शीर्ष अफसरों द्वारा जानबूझकर की जा रही इस अनदेखी से न सिर्फ उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि इससे जल संसाधन विभाग में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि, डीजल के अनियमित भुगतान से जुड़े आरोपों पर जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सतीष शर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने पर उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। श्री शर्मा ने 4 दिन पूर्व टेक्स्ट मैसेज भेजकर रडार न्यूज़ को बताया था कि शासकीय कार्य और न्यायालीन प्रकरण के सिलसिले में राजधानी भोपाल आया हूं। आपसे फ्री होकर बात करूंगा, लेकिन इसके बाद समाचार लिखे जाने तक न तो उनका फोन आया और ना ही कोई मैसेज आया है।
कलेक्टर ऊषा परमार ने स्कूली बच्चों से संवाद कर पढ़ाई के संबंध में जानकारी ली।
* नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत कर उज्ज्वल भविष्य की दी शुभकामनाएं
* शिक्षकों को सरल एवं रोचक तरीके से शिक्षा देने के निर्देश
पन्ना।(www.radarnews.in) शासन के निर्देशानुसार आयोजित चार दिवसीय प्रवेशोत्सव एवं स्कूल चलें हम अभियान के अंतर्गत शनिवार 4 अप्रैल को जिले के शासकीय विद्यालयों में “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर ऊषा परमार ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमराव सिंह मरावी के साथ विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।साथ ही उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया। जिला कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने प्रेरक की भूमिका में विद्यार्थियों को पढ़ाई का महत्व बताया और प्रेरणास्पद बातों का जिक्र भी किया।
मनकी एवं बिलखुरा की शाला का किया निरीक्षण
कलेक्टर ऊषा परमार एवं जिला पंचायत सीईओ ने स्कूली बच्चों संग बैठकर माध्यन्ह भोजन का स्वाद चखा।
अधिकारीद्वय द्वारा शासकीय माध्यमिक शाला मनकी एवं प्राथमिक शाला बिलखुरा पहुंचकर विद्यालय के शिक्षकों को छात्र-छात्राओं की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने एवं नियमित रूप से समय पर स्कूल खोलने व संचालन के निर्देश दिए गए। कलेक्टर एवं जिपं सीईओ ने बच्चों के साथ सामूहिक मध्यान्ह भोजन भी किया और बच्चों को बिस्किट वितरित किए। स्कूली विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ पढ़ाई से संबंधित जानकारी साझा की तथा गिनती, पहाड़ा, कहानी और कविताएं भी सुनाईं। इस दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। बच्चों से शिक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त कर एवं शासन द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्रदान कर सभी विद्यार्थियों से इसका लाभ उठाने के लिए कहा गया।
अभिभावकों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की अपील
कलेक्टर ऊषा परमार ने स्कूली बच्चों को बिस्किट के पैकेट वितरित किए।
भविष्य से भेंट कार्यक्रम में बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने पर जोर दिया गया तथा अभिभावकों से भी अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने एवं पढ़ाई में सहयोग करने की अपील की गई। स्कूल के शिक्षकों द्वारा भी शाला में नामांकन सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में अवगत कराया गया। शिक्षकों को निर्देशित किया गया कि सरल एवं रोचक तरीके से बच्चों को शिक्षा प्रदान करें, जिससे उनकी पढ़ाई में रूचि बढ़े। निरीक्षण के दौरान शाला में नामांकित विद्यार्थियों के जन्म एवं जाति प्रमाण पत्र सहित आधार व अपार आईडी विषयक एवं गत कक्षा के परीक्षा परिणाम व परिवार के सदस्यों संबंधी सामान्य जानकारी भी ली गई। जिला कलेक्टर ने ग्राम के आंगनबाड़ी केन्द्र एवं अन्य शासकीय संस्थाओं का निरीक्षण भी किया।
सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता एवं समरसता रथ यात्रा। (फाइल फोटो)
* लौह पुरुष की आदमकद प्रतिमा, सोने के स्तूप के साथ ऐतिहासिक धरोहरों के होंगे दर्शन
* नगर में भव्य स्वागत की तैयारी, मोहन राज विलास में आयोजित होगा मंचीय कार्यक्रम
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता एवं समरसता रथयात्रा सोमवार 30 मार्च 2026 को दोपहर 12 बजे पन्ना नगर में पहुंचेगी। गुजरात से प्रारंभ हुई यह यात्रा मध्य प्रदेश में कई जिलों से होते हुए पन्ना आ रही है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता, भाईचारा और अखंडता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है। रथ में भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की आदमकद प्रतिमा स्थापित है, जो आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसके साथ ही रथ में सरदार पटेल से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहरें जैसे उनके कारावास काल की टिफिन पेटी, राजाओं द्वारा दिए गए रियासतों के विलीनीकरण पत्र, चरण पादुका तथा तीन किलोग्राम सोने का स्तूप भी आम लोगों के दर्शनार्थ रखे गए हैं।
नगर के मुख्य मार्गों से निकलेगी रथयात्रा
कुर्मी क्षत्रिय समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राम भगत पटेल एवं पन्ना जिलाध्यक्ष रंजोर सिंह पटेल ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना में सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता-समरसता रथयात्रा के स्वागत की भव्य तैयारियां की गई हैं। नगर के प्रमुख चौराहों पर पुष्प वर्षा, फूल-मालाओं और आतिशबाजी से जोरदार स्वागत किया जाएगा। जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए हैं तथा फ्लैक्स और बैनर भी लगाए गए हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे रथ यात्रा के पन्ना नगर में प्रवेश करने पर सतना नाका तिराहा पर सत्यम पैलेस के सामने पुष्पवर्षा, आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों से भव्य स्वागत किया जाएगा। तदुपरांत रथ यात्रा डायमंड चौक, बीटीआई तिराहा, कोतवाली चौराहा, छत्रसाल पार्क, बलदेव मंदिर चौक, बड़ा बाजार, अजयगढ़ चौराहा, गांधी चौक और बाबा बादशाह साईं चौराहा से होते हुए होटल मोहन राज विलास पहुंचेगी, जहां विशाल मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में सर्व समाज के अध्यक्षों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। मंचीय कार्यक्रम में खेल, कला, साहित्य, विज्ञान और शौर्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
सर्व समाज से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील
कुर्मी क्षत्रिय समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राम भगत पटेल।
उल्लेखनीय है कि सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता एवं समरसता रथ यात्रा के महारथी गुजरात के सर्वश्री मनु भाई पटेल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुर्मी पाटीदार महासभा, अनिता बेन पटेल महिला उपाध्यक्ष, जीबी पटेल महामंत्री गुजरात, राम भाई पटेल सचिव गुजरात, ए.के.पटेल एवं आशीष पटेल के संयुक्त संयोजकत्व में संचालन किया जा रहा है। कुर्मी क्षत्रिय समाज के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राम भगत पटेल, पन्ना जिलाध्यक्ष रंजोर सिंह पटेल सहित सभी आयोजकों ने पन्ना जिलेवासियों, युवाओं, मातृशक्ति एवं विद्यार्थियों से रथ यात्रा और मंचीय कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर सरदार पटेल के जीवन, विचारों और योगदान को जानने-समझने की अपील की है। आम जनमानस रथयात्रा में शामिल होकर नगर भ्रमण के दौरान भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन से जुड़ी हुई स्मृतियों का अवलोकन कर श्रद्धा सुमन अर्पित कर सकते हैं। आयोजकों ने आमजन से आव्हान किया है कि वे इस ऐतिहासिक रथ यात्रा में शामिल होकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और समरसता को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
पन्ना शहरी परियोजना के आंगनवाड़ी केन्द्र 36 व 57 का विद्यारंभ प्रमाण-पत्र वितरण और प्रवेशोत्सव का कार्यक्रम संयुक्त रूप से आयोजित हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद एवं भाजपा नेत्री श्रीमती संगीता राय ने बच्चों को प्रमाण पत्र वितरित किए।
* पन्ना शहरी परियोजना के आंगनवाड़ी केन्द्र 36 व 57 का संयुक्त कार्यक्रम आयोजित
पन्ना।(www.radarnews.in) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार मंगलवार को पहली बार पन्ना जिले के आंगनवाड़ी केन्द्रों में पंजीकृत 5 से 6 वर्ष के सभी बच्चों को प्राथमिक शाला में सहज रूप से स्थानांतरण करने व आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से विद्यारंभ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलेक्टर ऊषा परमार के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी अवधेश कुमार सिंह के मार्गदर्शन में मंगलवार 24 मार्च को पन्ना शहरी परियोजना परियोजना अंतर्गत बल्देव वार्ड क्रमांक-15 के आंगनवाड़ी केन्द्र क्रमांक- 36 व 57 का विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण एवं प्रवेश उत्सव समारोह का संयुक्त रूप से आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद एवं भाजपा जिला मंत्री श्रीमती संगीता राय ने इस अवसर पर दोनों केन्द्रों के लगभग दर्जन भर से अधिक शाला प्रवेशी बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्रों का वितरण किया। साथ ही उन्हें उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। ये सभी बच्चे आंगनवाड़ी केन्द्रों से प्राथमिक शालाओं में प्रवेश कर रहे हैं। आंगनवाड़ी में संयुक्त रूप से आयोजित विद्यारंभ एवं प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग शहरी परियोजना पन्ना की परियोजना अधिकारी श्रीमती किरण खरे, सेक्टर पर्यवेक्षक अंजली गुप्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शहनाज बेगम, सितारा बेगम आंगनबाड़ी सहायिका सुधा शिवहरे, जूही खातून सहित स्कूल शिक्षक एवं बच्चों के अभिभावकगण भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान आंगनवाडी केंद्र में बाल चौपाल का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शहनाज बेगम और सितारा बेगम ने बताया कि जिन बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरित किए उन्हें स्कूल शिक्षा में प्रवेश के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही अभिभावकों को शिक्षा का महत्व बताकर अपने नौनिहालों के भविष्य को संवारने में किसी तरह की लापरवाही न कर अनिवार्य रूप से विद्यालय में प्रवेश दिलाने के संबंध में जागरूक किया। बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाने में अभिभावकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन भी दिया गया।
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट देवरा भापतपुर में अटल भूजल योजना से नवनिर्मित तालाब पूरी तरह सूख गया। (11 फरवरी 2026 का फोटो।
* उत्तर वन मण्डल पन्ना के अजयगढ़ एवं धरमपुर परिक्षेत्र का मामला
* घटिया निर्माण छुपाने मरम्मत की लीपापोती, फंसने के डर में भुगतान से पहले अफसरों की चाल
* मशीनों से कराया निर्माण, मजदूरों के नाम पर फर्जी भुगतान की तैयारी
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी अटल भूजल योजना मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। उत्तर वन मण्डल अंतर्गत अजयगढ़ और धरमपुर वन परिक्षेत्र में लाखों रुपए की लागत से बनाए गए लगभग दो दर्जन नवीन तालाब आज अपनी बदहाली से खुद ही “घटिया निर्माण” की कहानी बयां कर रहे हैं। हालात यह हैं कि जिन तालाबों का उद्देश्य जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधारना था, वे गर्मी शुरू होते ही सूखे मैदान में तब्दील हो चुके हैं। वर्तमान में करीब 70 फीसदी तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। गर्मी के मौसम में जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब इनमें एक बूंद पानी तक नहीं होना करोड़ों की योजना की उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और वन्यप्राणियों की प्यास बुझाने के लिए बनाए गए ये तालाब अब सिर्फ कागजी उपलब्धि बनकर रह गए हैं।
मशीनों से काम कराया, मजदूरों के नाम प्रमाणक बनाए
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट धवारी में अटल भूजल योजना से नवनिर्मित तालाब लगभग सूख गया सिर्फ छोटे से गड्ढे में थोड़ा सा पानी बचा। (11 फरवरी 2026 का फोटो)
सूत्रों के मुताबिक, अटल भूजल तालाब निर्माण का लगभग शत-प्रतिशत कार्य ठेके पर मशीनों से कराया गया, लेकिन कागजों में मजदूरों के नाम पर फर्जी बिल-बाउचर तैयार किए गए। स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा निर्माण पर खर्च ही नहीं किया गया, जिससे तालाबों की गुणवत्ता बेहद खराब रही। वनरक्षक से लेकर तत्कालीन डीएफओ तक की मिलीभगत के आरोप चर्चा में हैं। इनकी गुणवत्ता का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 तालाब कुछ माह पूर्व पहली ही बारिश में फूट गए। उस समय तत्कालीन डीएफओ गर्वित गंगवार ने इन्हें “निर्माणाधीन” बताकर मामला दबाने की कोशिश की, जबकि हकीकत में काम पूरा हो चुका था और भुगतान के लिए प्रमाणक भेजे जा चुके थे। हर तालाब पर 14 लाख से 25 लाख रुपए तक खर्च दिखाया गया, लेकिन धरातल पर इनका निर्माण ठेके पर महज 5 से 8 लाख में कराया गया। अधिकांश जलाशय जनवरी महीने में ही सूख गए। गुणवत्ताहीन निर्माण, तकनीकी खामियां, गलत स्थल चयन और भारी लीकेज-सीपेज के कारण पानी ठहर ही नहीं पाया।
भुगतान से पहले मरम्मत की लीपापोती
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट देवरा भापतपुर में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए मिट्टी की अवैध खुदाई से बने गड्ढे पर अटल भूजल योजना के तालाब का निर्माण कराया गया। (11 फरवरी 2026 का फोटो।)
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि तालाब इतने घटिया बने हैं कि उनका भुगतान करने से पहले ही विभाग को फंसने का डर सताने लगा है। इसी डर के चलते महीने भर से नव निर्मित तालाबों की मरम्मत के नाम पर लीपापोती कराई जा रही है, ताकि ऊपर से देखने पर काम ठीक-ठाक नजर आए और भुगतान में कोई बाधा न हो। उत्तर वन मण्डल कार्यालय में पिछले चार माह से करोड़ों रुपए के प्रमाणक लंबित हैं। अब चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने से पहले यानी अगले चार दिनों में इनका भुगतान करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
जांच टीम बनी, लेकिन मंशा पर सवाल
वन परिक्षेत्र अजयगढ़ अंतर्गत बीट देवरा भापतपुर में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए मिट्टी की अवैध खुदाई से बने गड्ढे पर निर्मित अटल भूजल तालाब की हाल ही में मरम्मत कराई गई। (10 मार्च 2026 का फोटो।)
अत्यंत ही घटिया निर्माण का मुद्दा गर्माने पर डीएफओ धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने संयुक्त जांच टीम गठित की है, जिसमें उप वनमण्डलाधिकारी विश्रामगंज अंशुल तिवारी (IFS) के साथ ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम निरीक्षण भी कर चुकी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी या सिर्फ लाखों के भुगतान को “सुरक्षित” बनाने का जरिया है? सूत्र बताते हैं कि कुछ लोगों द्वारा आरटीआई के जरिए जानकारी निकाली गई और स्थानीय स्तर पर अटल भूजल तालाबों की शिकायतें भी हुईं। यही कारण है कि अधिकारियों ने बैचेनी और डर के चलते सीधे भुगतान करने के बजाय पहले कागजी सुरक्षा कवच तैयार किया, ताकि भविष्य में कार्रवाई से बचा जा सके।
वन परिक्षेत्र धरमपुर की बीट मैहावा में अटल भूजल योजना के तहत निर्मित तालाब के सूखने के कारण बेजुबान वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटकने को हैं मजबूर। (21 फरवरी 2026 का फोटो)
जैसी कि संभावना है, भुगतान के बाद उच्च स्तरीय शिकायत हो सकती है। उस स्थित में अपनी गर्दन सुरक्षित रखने के लिए ही वन विभाग के अफसरों ने संयुक्त जांच टीम गठित करने की तरकीब निकाली है। ताकि सवाल उठने पर इसे ढाल के रूप में उपयोग कर बताया जा सके कि, तकनीकी विशेषज्ञों वाली टीम की रिपोर्ट के आधार पर तालाब निर्माण कार्यों के प्रमाणकों का भुगतान किया गया।
योजना का उद्देश्य ध्वस्त, जवाबदेही तय होना बाकी
उत्तर वन मण्डल कार्यालय पन्ना। (फाइल फोटो)
अटल भूजल योजना (अटल जल) का मकसद जहां भूजल स्तर में सुधार लाना, जल संरक्षण और जल सुरक्षा सुनिश्चित कर राहत देना था, वहीं पन्ना में यह योजना भ्रष्टाचार की मिसाल बनती दिख रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद जमीन पर परिणाम शून्य हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के नाम पर चल रही कवायद सच उजागर करती है या फिर संयुक्त जांच लंबित प्रमाणकों का भुगतान सुनिश्चित करने का माध्यम बनकर रह जाएगी। और यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इनका कहना है-
अटल भूजल तालाबों की जांच के लिए गठित दल में एसडीओ (फॉरेस्ट) विश्रामगंज के अलावा दो विभागों के तकनीकी अधिकारी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। जांच के दौरान तालाबों की मरम्मत कराए जाने का मुझे पता नहीं है। दरअसल, इनका बजट आ चुका है, इस बीच शिकवा-शिकायतों के चलते भुगतान से पूर्व जांच कराना उचित समझा। तालाबों के भुगतान की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
धीरेन्द्र प्रताप सिंह, डीएफओ, उत्तर सामान्य वन मण्डल, पन्ना।
तालाब में बने गड्ढे में डूबने से मृत बच्चियों के शव के पास बैठी नानी को रोते देख लोगों की आंखें नम हो गईं।
* नहाते समय हुआ हादसा, पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच
*मिट्टी खनन के बाद खुले छोड़े गए विशालकाय गड्ढे बने जानलेवा
* ‘विकास’ के नाम पर 3 तहसीलों में वृहद स्तर पर चल रहा मिट्टी का अवैध खनन
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सुनहरा गांव में आज एक हृदय विदारक हादसा सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। ननिहाल आई दो मासूम सगी बहनों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। यह तालाब रेलवे ट्रैक निर्माण कार्य के लिए मिट्टी निकालने के दौरान ठेकेदार द्वारा खोदा गया था, जो अब मौत का गड्ढा बन चुका है। मृत बच्चियों की पहचान 8 वर्षीय रागिनी और 6 वर्षीय आशिकी के रूप में हुई है, जो अमानगंज क्षेत्र के रामपुर गांव से अपनी नानी के घर आई थीं। दुखद हादसे पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
दर्दनाक हादसे में दोनों नातिनों की मौत होने की जानकारी नाना काली आदिवासी ने पत्रकारों को दी।
प्राप्त जानकारी अनुसार बुधवार 25 मार्च दोपहर के समय सुनहरा में रागिनी और आशिकी आदिवासी गांव के तालाब में के लिए नहाने गई थीं। वहां अन्य बच्चियों के साथ नहाते समय खेल-खेल में अचानक छोटी बहन आशिकी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में डूबने लगी। उसको बचाने के लिए बड़ी बहन रागिनी ने भी बिना कुछ सोचे-समझे पानी में छलांग लगा दी, लेकिन दोनों ही गहराई में समा गईं। काली आदिवासी ने बताया काफी देर तक दोनों नातिनें जब वापस घर नहीं लौटीं तो उसने अपने पुत्र यानी बच्चियों के मामा को तालाब भेजा। करीब घंटे भर तक चली खोजबीन के बाद दोनों बच्चियां तालाब के गड्ढे में अचेत स्थिति में मिलीं। आसपास मौजूद लोगों की मदद से दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले पिता कृष्णे आदिवासी सहित पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि यह हृदयविदारक घटना न केवल एक परिवार की खुशियां छीन ले गई, बल्कि क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की गंभीर लापरवाही को भी उजागर कर गई है। ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना अंतर्गत आने वाले सतना-खजुराहो रेल खंड का निर्माण प्रगति पर है। इस खण्ड पर वर्तमान में पन्ना जिले में रेलवे ट्रैक का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिसके लिए ठेकेदारों द्वारा बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जा रही है।
अवैध मिट्टी खनन पर जिम्मेदार खामोश
पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत डुंगरहो ग्राम के समीप रेलवे ट्रैक निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार ने अपने कैम्प के पीछे सड़क किनारे ही अवैध खनन कर डाला।
पन्ना जिले की देवेन्द्रनगर, पन्ना और अजयगढ़ तहसील क्षेत्र में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए ठेकेदारों द्वारा जगह-जगह अवैध रूप से मिट्टी खनन किया जा रहा है। कई स्थानों पर तालाब गहरीकरण की आड़ में ज्यादा से ज्यादा मिट्टी हांसिल करने के लिए जमीन को खतरनाक गहराई तक खोद दिया गया है, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। खुलेआम संगठित तरीके से चल रहे इस अवैध खनन से शासन को न सिर्फ करोड़ों रुपए की क्षति पहुंच रही है बल्कि मिट्टी की लूट से बने गहरे और विशालकाय गड्ढे आम लोगों, खासकर छोटे बच्चों और बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल रेलवे ठेकेदारों और राजस्व व खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रहा है। परिणामस्वरूप तीनों तहसील क्षेत्रों में वैधानिक स्वीकृति के बगैर अब तक लाखों घनमीटर मिट्टी निकाली जा चुकी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन खतरनाक गड्ढों के लिए जिम्मेदार कौन है? क्यों अब तक किसी भी स्तर पर सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए? और क्या हर बार किसी मासूम की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा? इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि विकास कार्यों की आड़ में हो रही लापरवाही आखिर कब तक आम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती रहेगी।
इनका कहना है-
“तालाब में खोदे गए गड्ढे में डूबने से दो बच्चियों की मौत के मामले में मर्ग कायम कर प्रकरण को विवेचना में लिया है। घटनास्थल से रेलवे ट्रैक निर्माण हेतु मिट्टी की खुदाई और फिर गड्ढे को असुरक्षित छोड़ने के पहलू की भी पड़ताल की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी।“
* पुलिस का दावा: महंगे शौक और पैसों के लालच में किया अवैध शराब परिवहन
पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पुलिस ने अवैध शराब परिवहन के एक चर्चित मामले में फरार चल रहे आरोपी एवं पूर्व कांग्रेस नेता अजयपाल लोधी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार शराब तस्करी के मामले में अजयपाल मुख्य आरोपी है। सिमरिया थाना में उसके और अन्य के विरुद्ध आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजा गया।
पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 8 मार्च 2026 को मोहन्द्रा क्षेत्र के ग्राम रीछी के पास एक बलेनो कार एमपी 35-ZA-5906 से 8 पेटी अवैध शराब बरामद की गई थी। इस दौरान वाहन को भी जब्त किया गया था और मामले में आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। घटना के बाद से कार का मालिक मुख्य आरोपी अजयपाल लोधी पुत्र हरवंश लोधी 36 वर्ष निवासी ग्राम बड़खेरा थाना सिमरिया फरार चल रहा था।
पुलिस ने बताया कि लगातार तलाश और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी अजयपाल को सागर जिले के मोतीनगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है, पूछताछ के दौरान आरोपी ने ऐशो-आराम भरी जिंदगी जीने की चाहत और पैसों के लालच में शराब तस्करी में शामिल होने की बात स्वीकार की है। आरोपी की गिरफ्तारी में मोहन्द्रा चौकी प्रभारी उप निरीक्षक दीपक भदौरिया के नेतृत्व वाली पुलिस टीम का सराहनीय योगदान रहा। उल्लेखनीय है कि अजयपाल लोधी के विरुद्ध आबकारी एक्ट का मामला पंजीबद्ध होने की खबर आने के बाद ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सिमरिया मुकेश चौरसिया ने उसे पार्टी से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया था।
* सीआरएस की मौजूदगी में 15 किमी ट्रैक पर सफल ट्रायल रन
* फुलवारी स्टेशन पर पहली बार ट्रेन पहुंचने पर जिले में उत्साह की लहर
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के लिए बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक क्षण मंगलवार को साकार हो गया, जब सतना-पन्ना सेक्शन में नागौद से फुलवारी (देवेंद्रनगर) के बीच तैयार रेल ट्रैक पर पहली बार ट्रेन का सफल ट्रायल रन किया गया। जैसे ही ट्रेन फुलवारी रेलवे स्टेशन पहुंची, पूरा क्षेत्र उत्साह और गर्व से भर उठा। ग्रामीणों, युवाओं और बच्चों ने इस पल का स्वागत तालियों-खुशियों के साथ किया। फुलवारी स्टेशन पर ट्रेन पहुंचने का यह दृश्य पन्ना जिले के इतिहास में एक सुनहरा और यादगार पल बन गया। यह केवल ट्रेन का आगमन नहीं, बल्कि पन्ना के विकास की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।
15 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर हुआ ट्रायल रन
जानकारी के अनुसार, नागौद से फुलवारी के बीच करीब 15 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर यह ट्रायल रन किया गया। इस दौरान कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) गुरु प्रकाश ने पमरे मंडल जबलपुर के अधिकारियों के साथ ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण किया। विशेष ट्रेन के माध्यम से अधिकारियों ने ट्रैक की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और तकनीकी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया। ट्रायल रन के मौके पर पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण एएमएस हाशमी, डीआरएम केके तलरेजा, चीफ इंजीनियर जेएस मीणा, प्रोजेक्ट इंजीनियर सुनील प्रजापति सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
ट्रैक व सुरक्षा का निरीक्षण
मंगलवार 24 मार्च 2026 की सुबह सतना से विशेष ट्रेन के जरिए अधिकारियों का दल नागौद पहुंचा, जहां से सुबह करीब 9 बजे ट्रायल रन की शुरुआत की गई। निरीक्षण के दौरान रेल पटरियों, पुल-पुलियों, सिग्नलिंग सिस्टम और स्टेशन व्यवस्थाओं को परखा गया। नागौद स्टेशन पर अधिकारियों ने संकेत दिए कि निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस रेल खंड पर जल्द ही नियमित ट्रेन संचालन शुरू किया जा सकता है। सीआरएस गुरु प्रकाश की देखरेख में हुए ट्रायल रन के तहत नागौद से फुलवारी तक 15 किलोमीटर के नवनिर्मित ट्रैक पर 120 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार डीजल इंजन से संचालित ट्रेन दौड़ाई गई। ट्रायल रन तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह सफल रहा। फुलवारी रेलवे स्टेशन पर जैसे ही ट्रेन पहुंची, वहां मौजूद लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने पहुंचे। कई लोगों ने इसे “पीढ़ियों के इंतजार का अंत” बताया। इस ऐतिहासिक पल को कई लोगों ने अपने कैमरों में कैद किया।
अगले वर्ष पन्ना तक ट्रैक तैयार होने की संभावना
उल्लेखनीय है कि ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन परियोजना अंतर्गत सतना-पन्ना रेल खण्ड के बीच नागौद-फुलवारी आता है। सतना-पन्ना रेल खण्ड की कुल लंबाई लगभग 75 किलोमीटर है। अब तक 45 किलोमीटर ट्रैक पूरी तरह से तैयार हो चुका है। फुलवारी से देवेन्द्रनगर तक 7 किलोमीटर ट्रैक अंतिम चरण में है और इसे अप्रैल माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद पन्ना तक शेष 23 किलोमीटर के रेलवे ट्रैक को मार्च 2027 तक पूरा करने का टारगेट है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद पन्ना जिले को सीधा रेल संपर्क मिलेगा, जिससे आवागमन, व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेल सुविधा शुरू होने से न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। खजुराहो जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल के नजदीक होने के कारण हीरों की नगरी पन्ना में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। नागौद से फुलवारी तक ट्रेन का यह सफल ट्रायल रन पन्ना जिले के विकास की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। यह केवल रेल का संचालन नहीं, बल्कि पन्ना के उज्जवल भविष्य, नई संभावनाओं और विकास की पटरी पर दौड़ते सपनों की शुरुआत है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी एवं सह प्रभारी रणविजय सिंह लोचव ने रविवार 22 मार्च 2026 को पन्ना में पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
* पन्ना दौरे पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी ने संगठन को मजबूत करने पर दिया जोर
* आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित, पार्टी कार्यालय में ध्वजारोहण
* जिला समन्वय समिति की बैठक में कार्यकर्ताओं से किया सीधा संवाद
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी एवं राजस्थान के विधायक हरीश चौधरी ने रविवार को अपने पन्ना प्रवास के दौरान संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की केंद्रीय भूमिका को लेकर स्पष्ट और प्रभावी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकजुट होकर निष्ठा और अनुशासन के साथ कार्य करें, तो दुनिया की कोई ताकत पार्टी को पराजित नहीं कर सकती। श्री चौधरी ने आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय बदल रहा है और कांग्रेस संगठन भी अपनी कार्यशैली में परिवर्तन कर रहा है। प्रत्याशी चयन में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे जमीनी हकीकत के आधार पर मजबूत नेतृत्व सामने आ सके। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जहां छोटे से छोटे कार्यकर्ता से लेकर बड़े पदाधिकारी तक सभी को समान सम्मान मिलता है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी रणविजय सिंह लोचव विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभी वर्गों को साथ लेकर चलने पर जोर
सर्किट हाउस पन्ना में आयोजित में हरीश चौधरी ने पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने सभी सदस्यों के सुझाव गंभीरता से सुने और संगठन को अधिक सशक्त, सक्रिय और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया। बैठक में उन्होंने यह भी संकेत दिए कि पार्टी में पुरानी परंपराओं को समाप्त कर नई कार्यप्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें कार्यकर्ताओं की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मूल उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है और इसके लिए गांव-गांव तक संगठन को मजबूत करना आवश्यक है। हर कार्यकर्ता की सक्रिय भागीदारी से ही एक मजबूत संगठन का निर्माण संभव है। बैठक को जिला कांग्रेस अध्यक्ष पन्ना अनीस खान ने भी संबोधित किया। उन्होंने नेतृत्व के निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए एकजुटता और निष्ठा के साथ जिले में कांग्रेस पार्टी को गांव -गांव तक अधिक सक्रिय एवं सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जिला प्रभारी राजभान सिंह ने अपने उद्बोधन में आपसी समन्वय, एकजुटता के साथ विपक्ष की प्रभावी भूमिका अदा करने की बात कही।
गर्मजोशी के साथ किया स्वागत
पन्ना आगमन पर मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी व सह प्रभारी सह प्रभारी रणविजय सिंह लोचव का जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनीस खान के नेतृत्व में आंबेडकर चौक पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आतिशबाजी, ढोल-नगाड़ों की गूंज, गगनभेदी नारों और पार्टी कार्यकर्ताओं के अपार उत्साह ने ऐसा माहौल बनाया कि कुछ देर के लिए पूरा वातावरण ही कांग्रेसमय हो गया। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात जिला कांग्रेस कार्यालय में ध्वजारोहण कर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश प्रभारी का यह दौरा न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और विश्वास भी भर गया। उनके स्पष्ट संदेश ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में कांग्रेस संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका और अधिक निर्णायक होने जा रही है।
इनकी रही उपस्थिति
प्रदेश कांग्रेस प्रभारी की अध्यक्षता में आयोजित जिला समन्वय समिति की बैठक में मुख्य रूप से पूर्व विधायकद्वय श्रीकांत दुबे, महेन्द्र बागरी, पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष सर्वश्री भास्कर देव बुंदेला, शिवजीत सिंह भैया राजा, श्रीमती दिव्या रानी सिंह, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी श्रीमती कविता राजे पूर्व विधानसभा प्रत्याशी श्रीमती मीना यादव, भरत मिलन पाण्डेय, जीवनलाल सिद्धार्थ, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष पुष्पेन्द्र सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेन्द्र दीक्षित, रामलाल आदिवासी सहित जिले के समस्त ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष, समस्त नगर कांग्रेस अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में मोर्चा संगठनों के पदाधिकारी एवं कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।