तेंदुए और बाघ के बाद भालू ने किया हमला

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घायल सुनीता के जख्म को टांके लगाकर सिलता स्वास्थ्यकर्मी

पन्ना में वन्य-प्राणियों के बढ़ते हमलों से बिगड़ने लगे हालात

जंगल में जल संकट गहराने से आबादी क्षेत्रों में आ रहे वन्यजीव

पन्ना। रडार न्यूज  भीषण सूखे की त्रासदी झेल रहे बुन्देलखण्ड अंचल के पन्ना जिले में तेजी से गहराते जल संकट के कारण मानव और वन्यजीव संघर्ष की समस्या गंभीर होती जा रही है। वनकर्मियों और परिक्षेत्राधिकारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर होने से इस चुनौती से निपटने में वन विभाग के अफसर अब तक असफल ही साबित हुए है। इस बीच जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से जनमानस में भय और आक्रोश पनप रहा है। गुरूवार को तेंदुए के हमले में 20 लोगों के घायल होने व पन्ना के समीप मनकी-जरधोबा के जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गये श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को बाघ द्वारा अपना शिकार बनाने की घटना का लोग अभी भूले भी नहीं थे कि शनिवार की सुबह भालू के हमले में एक महिला पशुपालक सुनीता आदिवासी के घायल होने की खबर आने के बाद से वन क्षेत्रों से सटे ग्रामों के रहवासी दहशत में आ गये है। समस्या की जटिलता का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि महज 53 घंटे के अंदर वन्यजीवों के तीन बड़े हमलों में एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी है जबकि 21 लोग घायल हुए है। जिनमें गंभीर रूप से घायल दो व्यक्ति अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे है।

झाड़ियों में छिपा था भालू-

जंगली जानवर के हमले की ताजा घटना शनिवार सुबह 8 बजे पन्ना विकासखण्ड की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर के ग्राम अमहाई के समीप उस वक्त हुई जब सुनीता आदिवासी बेबा श्यामलाल आदिवासी 40 वर्ष गांव के ही समीप बकरियां चरा रही थी। वहां झाड़ियों में छिपा भालू अचानक तेजी से उसकी ओर झपटा। झाड़ियों में हरकत होने पर भालू को आते देख बेबा सुनीता ने जान बचाने के लिए बदहवास हालत में दौड़ लगा दी। लेकिन चंद कदम बाद ही वह जमीन पर गिर पड़ी। उसे असहाय पाकर भालू ने हमला कर दिया। घायल सुनीता के चींखने-चिल्लाने और बकरियों की भगदड़ से भालू भागकर जंगल की तरफ चला गया। इस हमले में लहुलुहान सुनीता की दाहिनी आंख के नीचे और कूल्हे में भालू के नोंचने-काटने से गहरे जख्म उभर आये है। उपचार हेतु पन्ना जिला चिकित्सालय में भर्ती आदिवासी महिला की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। लेकिन भालू के रूप में मौत का सामना करने वाली सुनीता काफी डरी-सहमी हुई है। पति की असमय मौत के बाद वह बकरी पालन और मजदूरी करके अपने चार बच्चों का किसी तरह भरण-पोषण करती है।

पानी पीने आया था भालू-

गौरतलब है कि गरीब आदिवासी बेबा सुनीता के ऊपर भालू ने जिस स्थान पर हमला किया वहां से तलैया चंद कदम की दूरी पर है। इस घटना की खबर आने के बाद से अम्हाई गांव सहित क्षेत्र लोग यह अंदेशा जता रहे है कि जंगल में जल स्त्रोत सूखने के कारण उक्त भालू पानी पीने के लिए संभवतः तलैया आया था। तभी सुनीता के उसके रास्ते में आ जाने से यह घटना घटित हुई है। दरअसल, वन्यजीवों के बढ़ते हमले का हालिया कारण चाहे जो भी हो पर इसके मूल में सिमटते जंगल, बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप, वन्यजीवों के लिए कम होता भोजन और प्राकृतिक वास का आभाव तथा भीषण सूखा के चलते जंगल के सूख चुके जल स्त्रोत है। इन समग्र परिस्थितियों के मद्देनजर इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष होना स्वभाविक है। वन विभाग ने यदि शीघ्र ही इसकी रोकथाम के लिए ईमानदार प्रयास नहीं किये तो गंभीर होते हालात का दुष्परिणाम वन्यजीवों को भी भुगतना पड़ सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि मानव और वन्यजीव संघर्ष के कारणों की पड़ताल कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाये।

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