तेंदुए ने फिर किया हमला, चार ग्रामीण घायल

0
1447

मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर गंभीर नहीं वन विभाग

तेंदुए के हमलों से रैपुरा-मोहन्द्रा क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल

वन कर्मचारियों-अधिकारियों की हड़ताल से बेपटरी हुई व्यवस्था

पन्ना। रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष का आगाज हो चुका है। पिछले 24 घंटे में यहां तेंदुए के हमले की दो अलग-अलग घटनाओं में 20 लोग घायल हुए है। जबकि जिला मुख्यालय पन्ना के समीप पन्ना टाईगर रिजर्व के बफर जोन के जंगल में बाघ ने एक श्रमिक को अपना शिकार बना लिया। वन्य प्राणियों के हमले की घटनाएं ऐसे समय सामने आ रही है जब प्रदेशव्यापी हड़ताल के तहत् पन्ना जिले के समस्त वनकर्मी और रेंजर्स अपनी मांगों के निराकरण को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। वन कर्मचारी एवं अधिकारी संघ की संयुक्त हड़ताल के पहले ही दिन गुरूवार 24 मई को तेंदुए और बाघ के हमलों की चिंताजनक खबरें आने से समूचे पन्ना जिले में लोगों का जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। यदि शीघ्र ही मानव-वन्यप्राणी संघर्ष को रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाये गये तो यह संकट बेदह गंभीर रूप ले सकता है। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के दक्षिण वन मण्डल के रैपुरा वन परिक्षेत्रांतर्गत एक तेंदुए ने गुरूवार तड़के 3ः30 बजे आधा दर्जन गांवों में घरों के बाहर सो रहे लोगों पर हमला किया था। जिसमें 16 ग्रामीण घायल हुए थे। चार घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु पड़ोसी जिला कटनी के लिए रेफरल किया गया। महज 18 घंटे के अंदर रैपुरा वन परिक्षेत्र के ही ग्राम मक्केपाला में पुनः गुरूवार रात्रि करीब 8 बजे तेंदुए ने हमला कर चार लोगों को घायल कर दिया। घायलों में वृद्ध और बच्चे शामिल है।

इन्हें किया घायल-

तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल वृद्धा रूपरानी पत्नी बरई आदिवासी को प्राथमिक उपचार के बाद दमोह के लिए रेफरल किया गया है। अन्य तीन घायलों डरे आदिवासी पिता लच्छू आदिवासी, अखिलेश पिता प्रमोद आदिवासी, दान सिंह पिता मिलन आदिवासी को मामूली जख्म होने पर स्वास्थ्य केन्द्र रैपुरा में प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। 24 घंटे के अंदर तेंदुए के लगातार दो बार हमले और इसी बीच पन्ना के समीप बाघ द्वारा एक तेंदुपत्ता श्रमिक बेटूलाल आदिवासी को शिकार बनाने की चिंताजनक घटनायें सामने आने से वन परिक्षेत्र रैपुरा और मोहन्द्रा के ग्रामीणों में दहशत में है। वन क्षेत्र से सटे इस दूरस्थ इलाके में तेंदुए के आंतक का यह खौफ ही है कि लोग तेंदूपत्ता तोड़ने या लकड़ी लेने के लिए जंगल जाना तो दूर अपने घरों से भी बाहर निकलने में भी डर रहे है।

तेंदुए को पकड़ने जारी है प्रयास-

पवई के उप मण्डलाधिकारी आरएन द्विवेदी ने बताया कि हमलावर तेंदुए की खोजबीन लगातार जारी है लेकिन उसकी कोई लोकेशन नहीं मिल रही है। मैदानी वन अमले और अधिकारियों के हड़ताल पर होने से काफी दिक्कत आ रही है। उप वन मण्डलाधिकारी श्री द्विवेदी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा आ चुका है उसमें कुत्ते या बकरे को रखकर तेंदुए को शिकार के लालच से पकड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा यदि दिन के समय तेंदुए का लोकेशन मिलता है तो उसे ट्रंकुलाइज (बेहोश) करके पकड़ने की पूरी तैयारी है। उन्होंने बताया कि हमारा पूरा जोर फिलहाल लोगों को सुरक्षित करने पर है इसके लिए मोहन्द्रा-रैपुरा के सीमावर्ती ग्रामों में मुनादी कराकर लोगों को हिदायत दी जा रही है कि अकेले घर से बाहर न निकलें। रात्रि में बाहर न सोयें और तेंदुए के खतरे को देखते हुए सतर्क रहें।

पहले भी किया था हमला-

दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत तेंदुओं के बढ़ते आंतक के बीच इनके हमले में बेकसूर ग्रामीणों के घायल होने की यह पहली घटना नहीं है। कुछ माह पूर्व रैपुरा व शाहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत एक तेंदुए ने कई गांवों में उत्पात मचाया था। वन विभाग के अमले द्वारा तेंदुए को समय रहते न पकड़ पाने के कारण कुएं में गिरने से उसकी असमय मौत हो गई थी। वहीं कुछ समय पूर्व दक्षिण वन मण्डल के ही वन परिक्षेत्र पवई के अंतर्गत क्लच वायर का फंदा लगाकर तेंदुए के शिकार करने की हैरान करने वाली घटना सामने आई थी। जंगली जानवर जंगल से बाहर निकलने के लिए क्यों विवश है? इसकी वजह क्या वन क्षेत्र के अंदर भीषण जल संकट होना है या फिर अन्य कोई कारण है। वजह चाहे जो भी हो पर इस विकट समस्या का समय रहते समाधान किया जाना आवश्यक है ताकि गंभीर रूप लेते मानव वन्यप्राणी संघर्ष को रोका जा सके।