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पवई जेल ब्रेक कांडः जांच करने भोपाल से आये एडीजी  

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बोले, जेल प्रबंधन की लापरवाही से फरार हुए कैदी

प्रथम दृष्टया दोषियों के खिलाफ मंगलवार को होगी कार्रवाई

फरार कैदियों का 36 घण्टे बाद भी नहीं लगा सुराग

पन्ना- रडार न्यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की पवई उप जेल से रविवार 17 जून की सुबह हत्या के आरोपी दो खूूंखार कैदियों के फरार होने की सनसनीखेज घटना के 36 घंटे बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं लग पाया है। इस घटना से उप जेल पवई की की लचर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलने के साथ ड्यूटी पर तैनात रहे प्रहरियों की संदिग्ध भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे है। इस बीच सोमवार 18 जून को भोपाल से आये अतिरिक्त महानिर्देशक गाजीराम मीणा ने पवई उप जेल का निरीक्षण कर घटना की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान पन्ना पुलिस रियाज इकबाल भी उनके साथ रहे। करीब पौन घंटे तक जेल के अन्दर रहे श्री मीणा ने सहायक जेलर पवई कुलदीप सिंह तथा घटना के समय ड्यूटी पर तैनात रहे प्रहरियों से वन- टू-वन चर्चा कर विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की । साथ ही उस स्थान को भी देखा जहां से दोनों हवालाती जेल की दो-दो दीवारों को फांद कर आसानी से फरार हो गये। श्री मीणा जेल की उन बैरकों में भी गये जिनमें दोनों कैदी बंद थे। इसके अलावा अन्य कैदियों से भी घटना के संबंध में पूंछतांछ की गई। मालूम हो कि रविवार की 17 जून की सुबह करीब 8ः30 बजे जब कैदी नारायण पटेल पुत्र कल्लू पटेल निवासी ग्राम खम्हरिया व शिव सिंह राठौर पुत्र राजेन्द्र सिंह राठौर निवासी ग्राम धरमपुरा थाना शाहनगर जेल से फरार हुए उस समय सहायक जेलर कुलदीप सिंह बाजार गये थे। नाश्ता के समय जब कैदियों की गिनती की गई तो जेल में बंद 48 में से  2 कैदी गायब थे। इसका पता चलते ही उप जेल पवई की चार दीवारी के अन्दर हड़कम्प मच गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना की भनक दूसरे कैदियों को ना लगना संदेह पैदा करता है   ।
नई कहानी आई सामने – 
एडीजी जेल गाजीराम मीणा द्वारा पवई उप जेल का निरीक्षण करने के पश्चात् बाहर खड़े मीडियाकर्मियों से  चर्चा करते हुए कैदियों फरार होने की घटना के संबंध में नया खुलासा किया गया। उन्होंने बताया कि जेल के अंदर दीवार के समीप लगे एक पेड़ की शाखा कुछ दिन पूर्व गिर गई थी। जिसकी लकड़ी को जेल प्रबंधन द्वारा मौके से नहीं हटाया गया और चादरों की गिनती भी नहीं की गई। इस घोर लापरवाही का फायदा उठाते हुए कैदियों ने चार चादर छुपा दिये। मौका पाकर लकड़ी में चादर बांधकर दोनों कैदी जेल की एक 10 फिट ऊंची और दूसरी 20 फिट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गये।
लापरवाहों पर होगी सख्त कार्यवाही-
एडीजी श्री मीणा ने बड़ी ही स्पष्ट शब्दों में यह स्वीकार किया कि जेल प्रबंधन यदि लापरवाही नहीं करता और आवश्यक सावधानी बरती जाती तो जेल ब्रेक की शर्मनाक घटना घटित नहीं होती। उल्लेखनीय है कि रविवार को कैदियों के जेल से फरार होने के बाद मीडियाकर्मियों को सहायक जेलर कुलदीप सिंह ने जो जानकारी दी थी उसमें उन्होंने सिर्फ चादर की रस्सी के सहारे भागना बताया था। पेड़ की टूटी हुई शाखा का इसमें उपयोग किये जाने का उन्होंने कोई उल्लेख नहीं किया था। एडीजी श्री मीणा ने स्थानीय पत्रकार राकेश पाठक को बताया कि जेल से हत्या के दो हवालातियों का एक साथ फरार होना बेहद गंभीर मामला है। इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगी है। इस मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। उनका निलंबन करने से लेकर विभागीय जांच कराई जायेगी और दोष सिद्धि के आधार पर आगे की कार्यवाही की जायेगी। श्री मीणा ने कहा कि मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया जायेगा।
योगा करने के बाद हुए थे फरार –
 हवालाती नारायण पटेल पुत्र कल्लू पटेल निवासी खम्हरिया व शिव सिंह राठौर पुत्र राजेन्द्र सिंह राठौर निवासी धरमपुरा थाना शाहनगर जिला पन्ना की उप जेल पवई की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए रविवार की सुबह वहां से आसानी से भाग निकले। जेलर कुलदीप सिंह के अनुसार सुबह कैदियों को योगा के लिए बैरकों से बाहर निकाला गया था। नाश्ता के समय करीब 8 से 8ः30 बजे के बीच जब कैदियों की गिनती की गई तो 48 में से सिर्फ 46 कैदी ही मौजूद रहे। कैदियों के गायब होने की जब छानबीन की गई तो जेल की दीवार के पास से वे चादरें बरामद हुई जिनके सहारे वे दो-दो दीवारें फांदकर फरार हुए। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरार हवालाती नारायण पटेल 29 मार्च 2018 और शिव राठौर 18 मई 2018 को ही उप जेल पवई में दाखिल हुआ था।
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चादर की रस्सी बनाकर जेल से भागे हत्या के दो आरोपी

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पुलिस ने शुरू की इलाके की सर्चिंग

उप जेल पवई की सुरक्षा व्यवस्था मेें लगी सेंध

एक पर पत्‍नी दूसरे पर प्रेमिका के कत्‍ल का है आरोप

पन्ना/पवई। रडार न्‍यूज  मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की उप जेल पवई में बंद हत्या के दो आरोपी जेल की दीवार फांदकर फरार हो गये। सुबह-सुबह हुई इस घटना की भनक जब उप जेल प्रबंधन को लगी तो हड़कम्प मच गया। पुलिस ने जेल से फरार हुए हवालातियाेें की सरगर्मी से तालाश शुरू कर दी है। इलाके की नाकाबंदी कर सघन सर्चिंग की जा रही है। पवई जेल ब्रेक काण्ड से वहां की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

दिन-दहाड़े हत्या के दो-दो आरोपी जेल की सुरक्षा मेें सेंध लगाते हुए आसानी से फरार हो गये और ड्यूटी पर तैनात प्रहरियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय संवाददाता सतीष पटेल व अजित बढ़ौलिया को पवई के सहायक जेलर कुलदीप सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि हवालाती नारायण पटेल पुत्र कल्लू पटेल 22 वर्ष निवासी खम्हरिया व शिव सिंह राठौर पुत्र राजेन्द्र सिंह राठौर 25 वर्ष निवासी धरमपुरा थाना शाहनगर चादर की रस्सी के सहारे 15 सेे 18 फिट ऊंची दीवार फांदकर भाग गये। सुबह 9:45 बजे नाश्ता के समय जब बंदियों की गिनती की गई तो 48 में 46 बंदी ही मौजूद रहे। सहायक जेल अधीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि फरार हुए दोनों हवालाती हत्या के आरोप में जेल में बंद थे, उनके विरूद्ध न्यायालय में विचाराधीन है। रिकार्ड के अनुसार फरार हवालाती नारायण पटेल 29 मार्च 2018 और शिव राठौर 18 मई 2018 को ही उप जेल पवई में दाखिल हुआ था। महज दो-तीन माह पहले आये हवालातियों की जेल की सुरक्षा-व्यवस्था को धता बताते हुए असानी से फरार होने से ड्यूटी पर तैनात रहे प्रहरियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। उधर इस घटना की खबर मिलते ही जिला जेल पन्ना के उप अधीक्षक सत्यभान मिश्रा पवई के लिए रवाना हो गये। सोशल मीडिया मेें आ रही खबरों के अनुसार विचाराधीन कैदी शिव सिंह राठौर पर अपनी प्रेमिका और नारायण सिंह पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है।

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बुलेट और पत्थरों के बीच कश्मीर में रिपोर्टिंग कितनी मुश्किल

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”पहाड़ों के जिस्मों पे बर्फों की चादर
चिनारों के पत्तों पे शबनम के बिस्तर
हसीं वादियों में महकती है केसर
कहीं झिलमिलाते हैं झीलों के जेवर
है कश्मीर धरती पे जन्नत का मंजर”
आलोक श्रीवास्तव की लिखी ये पंक्तियां धरती का जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की ख़ूबसूरती बयां करती हैं। एक ऐसी जगह जहां प्रकृति ने दिल खोल कर अपना प्यार बरसाया है। बर्फ से ढकी पहाड़ियों के साथ बहती डल झील किसी का भी मन मोह लेती है।
लेकिन इंसानी नफरत ने प्रकृति के प्यार को स्याह करने का काम किया है। इस जन्नत का एक दूसरा रूप भी है जो डर और दहशत से भरा हुआ है। भारत प्रशासित कश्मीर नफरत की आग में झुलस रहा है।
दंगे, विरोध प्रदर्शन, सड़कों पर पथराव, कर्फ्यू और सैन्य कार्रवाइयां यहां आम-सी बात हैं। कश्मीर के इन हालात को देश और दुनिया के बाकी हिस्सों से रूबरू करवाने वाली जमात यानी यहां काम करने वाले पत्रकार भी अक्सर इनका शिकार होते रहते हैं।
हाल में श्राइजिंग कश्मीरश् अख़बार के संपादक शुजात बुखारी की हत्या ने वादी में काम करने वाले पत्रकारों के भीतर दबे डर को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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भारत प्रशासित कश्मीर के ही रहने वाले शुजात बुखारी पिछले 30 सालों से पत्रकार के तौर पर काम कर रहे थे। वे कश्मीर में शांति स्थापित करने की कोशिशों में भी लगे रहते थे।
उनके साथ काम करने वाले तमाम पत्रकार उन्हें कश्मीर की एक आजाद आवाज कहते हैं। शुजात जितनी गहराई से अलगाववादियों की बात जनता के सामने रखते थे उतनी ही तल्लीनता से वे सरकार का पक्ष भी बताते थे।
कश्मीर में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार सोहैल शाह ने अपने करियर की शुरुआत राइजिंग कश्मीर से ही की थी।
रिपोर्टिंग के दौरान आने वाली मुश्किलों के बारे में सोहैल बताते हैं कि यहां सबसे बड़ी समस्या है कि आप पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रह पाते। अगर आप निष्पक्ष रहते हैं तो दोनों ही तरफ से मार खाते हैं।
सोहैल कहते हैं, ”कश्मीर एक संघर्षरत इलाका है, आमतौर पर ऐसी जगह जहां दंगे हो रहे हों वहां पत्रकारों के लिए सुरक्षा के इंतजाम होते हैं। लेकिन कश्मीर में ऐसा बिल्कुल नहीं होता। यहां तक कि कई ऐसे मौके होते हैं जब किसी दंगे या संघर्ष को कवर करते हुए रिपोर्टर को ही पीट दिया जाता है।”

साल 2010 में कश्मीर में पत्रकारों पर हमले हुए थे, उस समय हमलों के विरोध में प्रदर्शन करते स्थानीय पत्रकार

मीडिया की तरफ कश्मीरी लोगों का रुख
कश्मीर में रहने वाले लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्हें मुख्यधारा की मीडिया में जगह नहीं दी जाती। कई बार ऐसी ख़बरें भी सुनने को मिलती हैं कि कश्मीर से समाचारों को श्फिल्टरश् करने के बाद देश के बाकी हिस्से तक पहुंचाया जाता है।
ऐसे हालात में कश्मीरी लोगों का मीडिया की तरफ कैसा रुख रहता है, यह जानना बेहद अहम हो जाता है। इस बारे में सोहैल बताते हैं कि कश्मीर के लोग आमतौर पर पत्रकारों को भरोसे की नजरों से नहीं देखते।
वे कहते हैं, ”जिस तरह से राष्ट्रीय चैनलों में कश्मीर की रिपोर्टिंग होती है, उनमें बहुत-सी चीजें अपने अनुसार ढाल दी जाती हैं। इससे कश्मीर की अवाम काफी नाराज रहती है और उनकी यह नाराजगी हम जैसे स्थानीय रिपोर्टरों को झेलनी पड़ती है। आम लोग राष्ट्रीय चैनल और स्थानीय चैनलों का फर्क नहीं समझते और इसी वजह से हमें भी शक की नजरों से देखते हैं।”

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बंदूक और राजनीति का दबाव-
पत्रकारिता के दौरान रिपोर्टर को कई तरह के दबाव का सामना करना पड़ता है, इसमें राजनीतिक और सामाजिक दबाव दोनों शामिल होते हैं।
कश्मीर में रिपोर्टिंग की बात करें तो वहां रिपोर्टर को राजनीतिक दबाव के साथ-साथ बंदूक का दबाव भी झेलना पड़ता है। कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन इस बारे में कहती हैं कि इतने दबाव के बीच अपनी ख़बरों में संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल होता है।
वे बताती हैं, कश्मीर में दोनों तरफ से बंदूकों का दबाव होता है, उसके बाद राजनीतिक दबाव हमेशा रहता ही है, इन सब के बाद जनता के गुस्से का दबाव रिपोर्टिंग को प्रभावित करता है। ऐसे में अपनी रिपोर्ट में संतुलन बनाए रखना बहुत मुश्किल हो जाता है। शुजात बुखारी इन्हीं दबावों के बीच अपनी रिपोर्टिंग में संतुलन बनाने की कोशिशें कर रहे थे और काफी हद तक उसमें कामयाब भी रहे थे।

राइज़िंग कश्मीर के संपादक शुजात बुखारी

बाहरी रिपोर्टर के लिए कश्मीर की रिपोर्टिंग
जब कश्मीर में रहने वाले स्थानीय रिपोर्टर को ही अपने इलाके में इतनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तो ऐसे में देश के दूसरे हिस्सों से कश्मीर पहुंचकर रिपोर्टिंग करना कितना चुनौतीपूर्ण होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। साल 2016 में जब हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हुई तो पूरे कश्मीर में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। कई जगह पत्थरबाजी की घटनाएं बढ़ गई थीं और इस दौरान कर्फ्यू भी लगाया गया था। ऐसे ही माहौल में दिल्ली से कश्मीर पहुंची स्वतंत्र पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत अपने अनुभव के बारे में बताती हैं कि पहली बार किसी एनकाउंटर को क़वर करना उनके लिए बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण था।
वे कहती हैं, मैं पुलवामा के पास त्राल इलाके में थी, वहां एक एनकाउंटर चल रहा था और मैं कुछ स्थानीय लोगों से बातें कर रही थी। इस बीच मैंने अपना फोन देखा तो उसमें सिग्नल गायब थे। इंटरनेट तो दूर आप किसी को कॉल भी नहीं कर सकते थे। बाहर से आने वालों को यह सब बहुत अजीब लगता है, हालांकि धीरे-धीरे हमें इसकी आदत होने लगती है।

यहां आम लोग ही मांगते हैं रिपोर्टर से आईडी-

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एक सवाल यह भी उठता है कि आखिर देश के बाकी हिस्सों से कश्मीर में रिपोर्टिंग किस तरह अलग हो जाती है। इसका जवाब प्रदीपिका कुछ यूं देती हैं, कश्मीर एक ऐसी जगह है जहां लगभग हर कोई एक-दूसरे को पहचान रहा होता है, बहुत जल्दी ही रिपोर्टर तमाम तरह के समूह और एजेंसियों के रडार में आने लगते हैं। उनकी रिपोर्टों पर चर्चाएं होने लगती हैं, यह जांचा जाने लगता है कि किस रिपोर्टर का झुकाव किस तरफ है।
प्रदीपिका कहती हैं, मुझे बाकी पत्रकारों से मालूम चलता था कि कश्मीर के लोग मेरे बारे में जानकारी जुटा रहे हैं, फोन कॉल टेप होने जैसी बातें मालूम चलती थीं तो डर लगने लगता था। दिल्ली में रिपोर्टिंग करते हुए यह सब नहीं होता। ऊपर से एक लड़की होना और हिंदू होने पर स्थानीय लोग ही आईडी मांगने लगते थे।
बुरहान वानी एनकाउंटर के वक्त भारत प्रशासित कश्मीर में रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे बीबीसी संवाददाता जुबैर अहमद ने भी अपने अनुभव उस समय साझा किए थे, जिसमें उन्होंने भारत प्रशासित कश्मीर में रिपोर्टिंग को सबसे कठिन काम बताया था। जनता की आंख-नाक-कान कहे जाने वाले रिपोर्टर एक बार फिर कश्मीर में डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। साथ ही वादी में निष्पक्ष आवाज के मूक हो जाने का डर फिर से सताने लगा है।

                                                                                       (साभार: बीबीसी हिन्दी)

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अमेरीका में तेलुगू अभिनेत्रियों के ”सैक्स रैकेट” का खुलासा

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टूरिस्ट वीजा पर भारत से तेलुगू लड़कियों को बुलाकर कराई जाती थी वैश्यावृत्ति

पति-पत्नि मिलकर चलाते थे रैकेट, घर पर पड़े छापों में मिले अहम सबूत

अमेरीका में पुलिस को एक सेक्स रैकेट के बारे में पता चला है जिसमें तेलुगू सिनेमा से जुड़ी लड़कियां और हीरोइनें शामिल हैं। शिकागो इस रैकेट का केंद्र है। पुलिस ने एक तेलुगू जोड़े को गिरफ्तार किया है जिन पर ये रैकेट चलाने का आरोप है। फेडरल पुलिस के मुताबिक अमरीका में होने वाले तेलुगू और अन्य सांस्कृतिक आयोजनों में हिस्सा लेने के नाम पर तेलुगू सिनेमा के कलाकारों को बुलाया जाता है और उनसे वेश्यावृत्ति कराई जाती है।
होमलैंड सिक्योरिटी के स्पेशल एजेंट ब्रायन जिन ने बताया, 34 साल के किशन मोडुगमुडी इस रैकेट के मास्टरमाइंड हैं और उनकी पत्नी चंद्रकला मोडुगमुडी उसकी बिजनेस पार्टनर। उन्होंने इलिनॉय कोर्ट में एक याचिका भी डाली है।
किशन को लोग राज चेन्नुपति के नाम से भी जानते हैं। उसकी पत्नी चंद्रकला को विभा और विभा जया के नाम से भी जाना जाता है। कोर्ट में दाखिल 42 पेज की याचिका में सेक्स रैकेट में शामिल महिलाओं की पहचान नहीं बताई गई है। याचिका में उन्हें ए, बी, सी, डी जैसे कोड नाम दिए गए हैं।
जांच अधिकारियों ने सेक्स रैकेट की पीड़ित लड़कियों के अलावा कुछ ग्राहकों से भी पूछताछ की है। अधिकारियों ने कोर्ट को बताया है कि आरोपियों के घर से कुछ डायरियां और धंधे के हिसाब-किताब भी मिले हैं। डायरियों और खाते में हीरोइनों के साथ-साथ उनके ग्राहकों के भी नाम दर्ज हैं।

सेक्स रैकेट का पता कैसे चला?-

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स्पेशल एजेंट ब्रायन के हलफनामे के मुताबिक 20 नवंबर 2017 को दिल्ली से एक लड़की शिकागो के ओश्हेयर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची थी। हलफनामे में उस लड़की को श्एश् कहा गया है। उसके पास बी1ध्बी2 टूरिस्ट वीजा था जो दिल्ली में अमरीकी दूतावास से जारी हुआ था। एयरपोर्ट पर उस लड़की ने इमिग्रेशन के जो कागजात सौंपे, उसके मुताबिक उसे 18 नवंबर 2017 को दक्षिण कैलिफोर्निया तेलुगू एसोसिएशन की ओर से सम्मानित किया जाना था। दूसरे कागजातों में कहा गया था कि उसे कैलिफोर्निया तेलुगू एसोसिएशन की स्टार नाइट में शामिल होना था और वह अमरीका में 10 दिन रहने वाली थी। इमिग्रेशन अधिकारियों को शक हुआ क्योंकि लड़की को 18 नवंबर को कैलिफोर्निया में होने वाले इवेंट में शामिल होना था, जबकि वह दो दिन बाद शिकागो एयरपोर्ट पर उतरी थी। जब उससे इस बारे में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह नॉर्थ अमरीका तेलुगू सोसाइटी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई है। उसने एक चिट्ठी भी दिखाई जिसमें कहा गया था कि वह 25 नवंबर 2017 को इलिनॉय के स्कैमबर्ग में होने वाले एक कांफ्रेंस में मेहमान है।

तेलुगू एसोसिएशनों को हीरोइन की जानकारी नहीं-

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अधिकारियों ने जब दक्षिण कैलिफोर्निया के तेलुगू एसोसिएशन के अध्यक्ष से बात की तो उन्होंने बताया कि 18 नवंबर को कैलिफोर्निया में उनका एक कार्यक्रम था, मगर वे उस हीरोइन को नहीं जानते। ना ही वह उनकी मेहमान है। उत्तर अमरीका तेलुगू एसोसिएशन के अफसरों ने बताया कि न तो वे उस हीरोइन को जानते हैं, न ही 25 नवंबर को उनका कोई कार्यक्रम था। इतनी जानकारियां मिलने के बाद अधिकारियों ने उस लड़की से अमरीका आने की असल वजह पूछी। उसने बताया कि तेलुगू एसोसिएशनों के ये निमंत्रण पत्र उसे राजू नाम के एक व्यक्ति ने दिए थे, जिससे वह भारत में मिली थी। राजू ने ही उसके एयर टिकट और होटल का किराया भरा था। वह एयरपोर्ट पर भी उसे रिसीव करने आने वाले थे। उस लड़की ने अधिकारियों को राजू की ई-मेल आईडी और फोन नंबर भी दिए। जांच में अधिकारियों को एक इंटरनेट पोस्ट का पता चला जिसमें कहा गया था कि किशन मोडुगमुडी उर्फ राज चेन्नुपति कुछ फिल्मी कलाकारों को वेश्यावृत्ति में शामिल करना चाह रहा है, वह फर्जी वीजे पर लड़कियों को अमरीका बुलाता है और उन्हें सेक्स रैकेट में शामिल करता है। शिकागो में विभा जयम उसका सहयोग करती है। दिल्ली से आई लड़की से मिली ई-मेल आईडी और फोन नंबर से पता चला कि वे किशन मोडुगमुडी के हैं। उसके पास एक अन्य ईमेल आईडी भी है। ई-मेल आईडी से ही शिकागो में उसके घर का पता लगाया गया।

नेवार्क एयरपोर्ट पर दूसरी हीरोइन-

इमिग्रेशन अधिकारियों ने नेवार्क एयरपोर्ट पर एक दूसरी महिला से पूछताछ की जो 26 नवंबर 2017 को मुंबई से आई थी। वीजा कागजातों से पता चला कि वह कई अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हुई थी और तीन महीने तक अमरीका में रहने वाली थी। वीजा कागजातों में कहा गया था कि वह एक अदाकारा है और एक इवेंट में सम्मानित अतिथि के तौर पर आई है। इस महिला ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें वीजा दिलाने में श्राजू गारूश् नाम के एक व्यक्ति ने मदद की थी। यह महिला टेक्सस के इरविंग में नए साल के जश्न के मौके पर हॉलीवुड डांस में परफॉर्म करना चाहती थी।

वेश्यावृत्ति की ओर धकेला-

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हीरोइन ने बताया कि वह राजू गारू की ओर से आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पेन्सिलवेनिया भी आ चुकी हैं। उस दौरे में उनसे जबरन वेश्यावृत्ति कराई गई थी। उन्होंने बताया कि वह वेश्यावृत्ति में शामिल नहीं है। उन्होंने ग्राहकों के साथ कुछ वक्त बिताया था और उनसे वहां से निकलने का रास्ता पूछा था। उन ग्राहकों ने ही उन्हें यह सलाह दी थी कि वह विभा को बताए कि उसका काम हो गया है जिससे कि वह वापसी के टिकट का इंतजाम कर दे। पिछले दौरे पर विभा के साथ वह चार अलग-अलग शहरों में गई थीं, जहां ग्राहकों को उनके कमरे में भेजा जाता था। शिकागो में उन्हें एक घर में रखा गया था। कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार इस महिला को वीजा नहीं दिया गया और नेवार्क से वापस भेज दिया गया।

पीड़ित लड़कियों को फोन पर धमकी-
जांच के दौरान इस महिला से नई दिल्ली में भी पूछताछ की गई। तस्वीर देखकर उन्होंने किशन मोडुगमुडी उर्फ राजू की पहचान कर ली। वीजा नहीं मिलने पर राजू ने उन्हें फोन पर धमकी दी कि वह उसके बिजनेस के बारे में किसी को कुछ ना बताए वरना उसकी हत्या कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शिकागो में उन्हें जिस घर में रखा गया था, वहां से उन्हें अकेले बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। उन पर नजर रखने के लिए हर वक्त किसी ना किसी को उनके साथ भेजा जाता था।

और भी कई पीड़ित-

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पीड़ित लड़की ने दो और चिट्ठियां दिखाईं जो उनके वीजा आवेदन में लगाए गए थे। ये तेलंगाना पीपुल्स एसोसिएशन ऑफ डलास और तेलुगू एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमरीका के थे। दोनों ही संस्थाओं ने उन चिट्ठियों को फर्जी बताया। जांच से पता चला कि 2016 से 2017 के दौरान कई लड़कियां किशन की मदद से अमरीका आईं। याचिका में उन्हें पीड़ित बी, सी, डी, ई कहा गया है। एक महिला (पीड़ित बी) 24 दिसंबर 2017 को शिकागो पहुंची थीं और 8 जनवरी 2018 को वापस लौटीं।
वीजा खत्म, फिर भी अमरीका में रहे किशन और विभा-
किशन तेलुगू फिल्मों के प्रोड्यूसर नहीं हैं। उन्होंने कुछ फिल्मों को को-प्रोड्यूस किया है। 2014 में उन्होंने दो बार वीजा के लिए आवेदन किया। लेकिन उन्होंने फर्जी कागजात पेश किए थे, इसलिए उन्हें वीजा नहीं मिला। बाद में 2015 में वीजा मिलने पर वह 6 अप्रैल को शिकागो आए। उनका वीजा 5 अक्टूबर 2015 तक वैध था। लेकिन वह वापस नहीं लौटे। इसी तरह चंद्रकला मोडुगमुडी 11 अगस्त को शिकागो पहुंची थीं। उसका वीजा 10 फरवरी 2016 तक वैध था, जिसे उन्होंने 8 अगस्त 2016 तक बढ़वा लिया। अगस्त में जब वह दूसरी बार वीजा अवधि बढ़वाने के लिए पहुंचीं, तब अधिकारियों ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। 23 जनवरी को किशन और चंद्रकला को ओहायो के टिफिन से गिरफ्तार कर लिया गया। उनको यूएस बॉर्डर पेट्रोल के अधिकारियों ने पकड़ा। 23 फरवरी को उनको जमानत पर रिहा किया गया, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए।
ग्राहकों से फोन पर सौदेबाजी-
16 फरवरी 2018 को अधिकारियों ने किशन और चंद्रकला के घरों पर छापे मारे तो वहां से 70 कंडोम, फर्जी आवासीय कार्ड, अमरीकी तेलुगू एसोसिएशनों के लेटर हेड वाली फर्जी चिट्ठियां, विजिटिंग कार्ड, डायरी और हिसाब-किताब मिले। डायरियों और 4 मोबाइल फोन से सेक्स रैकेट की बात सामने आई।
वे ग्राहकों से एक बार के हजार डॉलर, दो बार के दो हजार डॉलर और 100 डॉलर की टिप पर बात करते थे। वे ग्राहकों को बताते थे कि तेलुगू सिनेमा की हीरोइन या एंकर बहुत कम दिनों के लिए अमरीका में रहेगी। हर सौदे, लेन-देन और आने-जाने का ब्योरा डायरियों में लिखा जाता था।
जांच अधिकारियों ने कोर्ट में ग्राहकों से बातचीत के कुछ ब्योरे भी जमा कराए हैं। इन ब्योरों की मदद से एक ग्राहक से और जानकारियां जुटाई गईं। इन ब्योरों से यह साफ होता है किशन और चंद्रकला भारत से जवान लड़कियों को अमरीका लाकर वेश्यावृत्ति करा रहे थे। अभियुक्तों को 29 अप्रैल को इलिनॉय कोर्ट में पेश किया गया। जांच अभी जारी है।
 (साभार: बीबीसी हिन्दी)

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योग से मन को शाँति और मस्तिष्क को ताकत मिलती है – राज्यपाल श्रीमती पटेल

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राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को राजभवन में आयोजित होने वाले योग कार्यक्रम के पूर्वाभ्यास में शामिल हुई।

राजभवन परिसर में योगाभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुईं राज्यपाल 

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि योग शरीर को रोगमुक्त रखने के लिए सबसे सस्ता और सरल उपाय है। योग से मन को शांति तथा मस्तिष्क को ताकत मिलती है। मन में अच्छे विचार उत्पन्न होते हैं। काम करने में मन लगता है। श्रीमती पटेल ने बतायाकि हमारे ऋषि-मुनियों ने भी योग के द्वारा अपने मन, मस्तिष्क को स्वस्थ रखकर दीर्घायु तक तपस्या और आराधना की। राज्यपाल आज अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून, 2018 को राजभवन में होने वाले योग कार्यक्रम के पूर्व अभ्यास कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। राजभवन में आज हुए योगाभ्यास में राज्यपाल के साथ राजभवन के अधिकारी, कर्मचारी और गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को राजभवन में आयोजित होने वाले योग कार्यक्रम के पूर्वाभ्यास में शामिल हुई।

योग गुरू राजेश जैन त्रिलोक ने योगाभ्यास करवाया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग दिवस संदेश का प्रसारण भी किया गया। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को जन-आंदोलन बनाकर इससे लोगों को जोड़ने और मानवता के बंधन को मजबूत करने का आव्हान किया है। संपूर्ण वैश्विक समुदाय 21 जून को योग के पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस का जश्न मनाने के समर्थन में एक साथ है। दुनिया भर में कई लोग और संगठन योग के पहले अंतर्राष्ट्रीय दिवस को यादगार बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। राज्यपाल ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री के योग दिवस संकल्प को पूरा करने के लिए 21 जून को अधिक से अधिक संख्या में योग कार्यक्रम में शामिल हों। इस अवसर राज्यपाल के सचिव भरत महेश्वरी तथा बड़ी संख्या में योग प्रेमी उपस्थित थे। कार्यक्रम में लगभग 500 पुरूष और महिलाओं ने योगाभ्यास किया।

 

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राज्यपाल ने राजभवन परिसर में किया आवासीय प्रोजेक्ट का भूमि-पूजन

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पाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राजभवन परिसर में आवासीय भवनो के निर्माण कार्य का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने जीत लिया है जनता का विश्वास – मुख्यमंत्री श्री चौहान

निर्माण कार्य समय-सीमा में गुणवत्तापूर्वक पूर्ण करवाने के निर्देश 

भोपाल। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन परिसर में आवासीय प्रोजेक्ट का भूमि-पूजन एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि कहा कि निर्माण कार्य समय सीमा में पूरा किया जाये तथा गुणवत्ता का विशेष ध्यान दिया जाये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित थे। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने मुख्यमंत्री श्री चौहान की आम जनता के प्रति संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि शासकीय कार्य में गति लाने, आम लोगों को शासकीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ पहुँचाने तथा जनसमस्याओं के जल्द निपटारे में शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि राजभवन के कर्मचारियों और अधिकारियों को अच्छा पारिवारिक वातावरण देने की मंशा से नये आवासीय भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने राजभवन परिसर में आवासीय भवनो के निर्माण कार्य के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्यपाल श्रीमती पटेल ने प्रदेश की जनता का विश्वास जीत लिया है। श्रीमती पटेल ने प्रदेशवासियों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। इससे लोगों में नई आशायें जागी हैं । उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों के कल्याण के लिए हर समय तत्पर रहती है। आज विश्व में भारत के योग की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को विश्व में सर्वोच्च स्थान दिलवाया है। राज्यपाल ने राजभवन की दीवारों पर योग और सूर्य-नमस्कार को चित्रित करवाकर योग को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया गया है।

उल्लेखनीय है कि राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विगत फरवरी माह में राजभवन कर्मचारियों की आवासीय कालोनी का निरीक्षण किया था और आवासों की जर्जर स्थिति देखकर लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की तुरंत बैठक बुलाकर नये आवास बनवाने के निर्देश दिये थे। राज्यपाल के निर्देशानुसार पीआईयू द्वारा राजभवन परिसर में आवासीय ईकाईयों के लिए 1321.49 लाख लागत का आवासीय प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया गया। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने विशेष रूचि लेकर इस प्रोजेक्ट को स्वीकृत करवाया है। कार्यक्रम में राजभवन के सचिव भरत महेश्वरी ने अतिथियों का स्वागत किया और परियोजना संचालक विजय सिंह वर्मा ने प्रोजेक्ट की जानकारी दी। इस मौके पर सांसद आलोक संजर ओर महापौर आलोक शर्मा भी मौजूद थे।

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हर बच्चे को अनिवार्य स्कूली शिक्षा देना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी – मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर पठन-पाठन में नवाचार सामग्री का अवलोकन किया।

“स्कूल चलें हम अभियान 2018” का शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा “पढ़ाई को बनायें आनंददायी, न डरें न झिझकें” 
“गिफ्ट ए बुक अभियान” का किया शुभारंभ:प्रतिभाओं को किया सम्मानित 

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ‘स्कूल चलें हम अभियान 2018’ का शुभारंभ किया। उन्होंने समाज के सक्षम नागरिकों से अपील की कि वे सचेत रहें और देखें कि पास-पड़ोस, शहर-गाँव का हर बच्चा स्कूल जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को अनिवार्य स्कूली शिक्षा देना समाज और सरकार की साझा जिम्मेदारी है। श्री चौहान ने स्थानीय समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पठन-पाठन में नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई आनंददायक होना चाहिए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर बच्चों को संबोधित किया।

पढ़ाई बोझ नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में प्रतिभा, ऊर्जा और क्षमता होती है। बच्चों में झिझक और हिचक टूटना चाहिए। झिझक से प्रतिभा दब जाती है। उन्होंने बच्चों से कहा कि कभी भी झिझकें नहीं और न ही डरें। उन्होंने बच्चों से जीवन में महान काम करने का मंत्र साझा करते हुए बताया कि जो भी अच्छा पढ़ो, उसे जीवन में उतारो। उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर और महात्मा गांधी का उदाहरण दिया। श्री चौहान ने कहा कि बच्चों में भारत का निर्माण करने की क्षमता है । उनकी क्षमता को निखारने और आगे लाने की जिम्मेदारी शिक्षक और समाज दोनों की है । उन्होंने बच्चों को आश्वस्त किया कि शिक्षा के लिए पैसे कभी भी बाधा नहीं बनेंगे । उन्होंने बताया कि 12वीं कक्षा में अच्छे नम्बर लाने के बाद उच्च स्तर की शिक्षा में खर्च होने वाले पैसे सरकार भरेगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बच्चों द्वारा निकाली गई पत्रिका ‘गुल्लक’ और प्रकाशित किये गये समाचार पत्र ‘नन्ही कलम से’ का विमोचन किया। उन्होंने ‘मिल बाँचे मध्यप्रदेश’ के पोर्टल का शुभारंभ भी किया। पोर्टल का शुभारंभ सात अगस्त को होगा।

‘गिफ्ट ए बुक अभियान’ का शुभारंभ-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर प्रोफेशनल मॅर्निंग कम्यूनिटी पोर्टल का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ‘गिफ्ट ए बुक अभियान’ का शुभारंभ किया। उन्होंने अभियान की शुरुआत करते हुए अपने निजी संग्रह से शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को कुछ किताबें भेंट की। यह शिक्षा विभाग की नई पहल है। इसका उद्देश्य समाज के सहयोग से शालाओं में लाइब्रेरी को समृद्ध बनाना है। समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को बच्चों के उपयोग की किताबें दान करने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी पोर्टल और इसके अंतर्गत ई-लर्निंग मॉड्यूल का भी शुभारंभ किया। इन्हें शिक्षक और विद्यार्थी दोनों उपयोग कर सकते हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि स्कूली शिक्षा में नवाचारों के माध्यम से परिवर्तन लाते हुए शिक्षा में गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। शासकीय शालाओं की गुणवत्ता निरंतर बढ़ रही है। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान के मार्गदर्शन में स्कूली शिक्षा में परिवर्तन आया है।

नन्ही प्रतिभाओं ने किया प्रभावित, मिला उपहार-

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज “स्कूल चलें हम” अभियान-2018 के शुभारंभ अवसर पर बच्चों को खेल का महत्व बताया और बच्चों के साथ खेले भी।

मुख्यमंत्री को विद्यार्थियों की प्रतिभा ने इतना प्रभावित किया कि वे भी उन्हें सम्मानित करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने तत्काल मंच से ही उपहारों की घोषणा की। कहानी उत्सव में प्रथम आने वाले खंडवा के पाँचवी कक्षा के विद्यार्थी रामकृष्ण कान्हारे ने जब महादेव गोविंद रानाडे के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायी कहानी सुनाई तो मुख्यमंत्री और अन्य अतिथि मंत्र-मुग्ध हो गये। कहानी सुनाने की शैली इतनी सम्मोहक थी कि मुख्यमंत्री ने कहानी समाप्त होते ही उसे गले लगा लिया और पुरस्कार स्वरूप 25 हजार रूपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने शाला छोड़ने वाले बच्चों को फिर से दाखिला लेने पर उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

प्रारंभ में दृष्टि-बाधित बालिका फाल्गुनी और माडल स्कूल, भोपाल के विद्यार्थियों द्वारा ‘वंदे-मातरम’ की प्रस्तुति से भाव-विभोर होकर मुख्यमंत्री ने फाल्गुनी को ब्रेल लिपि का लैपटाप देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि फाल्गुनी मन की आँखों से दुनिया देखती- समझती है। उन्होंने ‘वंदे-मातरम्’ की प्रस्तुति में साथी बालिकाओं को 25 हजार की सम्मान निधि देने की भी घोषणा की । श्री चौहान ने पहली बार स्कूल में कदम रख रहे बच्चों को स्कूल बेग, पानी की बॉटल और स्टेशनरी का सेट भेंट कर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने खेल-खेल में पढ़ाई करने के तरीकों पर आधारित प्रदर्शनी भी देखी। इस अवसर पर प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी, प्रमुख सचिव आदिमजाति कल्याण एस. एन. मिश्रा, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत और विद्यार्थी उपस्थित थे। संचालक राज्य शिक्षा केंद्र लोकेश जाटव ने आभार माना।

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 पशुओं के लिये भूसा और पानी की व्यवस्था अब आया ख़्याल 

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 पन्ना शहर के निकट बायपास मार्ग में भूखे मवेशी कचरे में भोजन कीतलाश करते हुये।

सागर कमिश्नर ने कलेक्टरों को 6 जून को जारी किया  आदेश

अप्रैल व मई में भूख और प्यास से बेहाल पशुओं की नहीं ली गई सुध

कार्यवाही के संबंध 14 जून तक प्रतिवेदन  उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये हैं 

पन्ना। भीषण गर्मी व भूख और प्यास से बेहाल सैकड़ों पशु जिले में असमय काल कवलित हो गये। अल्प वर्षा के कारण इस साल पन्ना सहित संभाग के अन्य सभी जिलों में ज्यादातर जल श्रोतों के सूख जाने से अप्रैल व मई के महीने में पशुओं के लिये पानी उपलब्ध कराना पशु पालकों के सामने एक बड़ी समस्या रही है। जिसके चलते पशु पालकों ने अपने मवेशियों को बांधकर रखने के बजाय खुला छोड़ दिया था। ऐसी स्थिति में भूखे और प्यासे पशु पानी की तलाश में यहां-वहां भटकते फिर रहे थे। जिले के जल संकटग्रस्त इलाकों में बीते दो माह के दौरान प्यास से बेहाल पशुओं की बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं लेकिन उस समय इन बेजुवानों की किसी ने भी सुध नहीं ली। अब जब मानसून ने दस्तक दे दी है उस समय संभाग आयुक्त महोदय को इन बेजुवानों की सुध आई है और उन्होंने मवेशियों के लिये भूसा-चारा और पानी की व्यवस्था करने हेतु पाँचों जिलों के उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाओं को निर्देश जा किये हैं। उल्लेखनीय है कि कमिश्नर कार्यालय सागर से 6 जून 18 को जारी हुये आदेश में यह लेख किया गया है कि उन्हें इस तरह की सूचना प्राप्त हो रही है कि संभाग के जिलों में कम वर्षा होने के कारण कतिपय स्थानों पर पशुओं के लिये भूसा- चारा एवं पानी की कमी हो रही है। पानी की कमी व अनुपलब्धता को दृष्टिगत रखते हुये कमिश्नर सागर मनोहर दुबे जी ने सभी उप संचालकों को दिशा-निर्देश जारी किये हैं। आदेश में उन्होंने कहा है कि यह सुनिश्चित करें कि सभी जिलों में पशुओं के लिये पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहे। पूर्व में पशुओं के लिये बनाये गये हौदों की साफ-सफाई कर उनमें पानी भरा जाना सुनिश्चित करें। ग्राम पंचायतों को निर्देश प्रदान करें कि यदि उनके पंचायत क्षेत्र में पशुओं के लिये भूसाए चारा और पानी की कमी है तो वे इसके लिये सम्यक व्यवस्था करें। कमिश्नर ने की गई कार्यवाही के संबंध में एक प्रतिवेदन 14 जून 18 तक उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये हैं।

कमिश्नर सागर द्वारा 6 जून को जारी किया गया आदेश।

संभागायुक्त द्वारा जारी इस आदेश से भूखे प्यासे बेजुवान पशुओं को कितनी राहत मिलेगी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आदेश तब जारी किया गया जब मानसून ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। भीषण गर्मी में जब हर तरफ पानी के लिये हाहाकार मचा था उस समय प्यासे पशुओं के प्रति ऐसी संवेदना नहीं जगी। यदि समय पर मार्च व अप्रैल के महीने में चारा पानी की व्यवस्था करा दी जाती तो सैकड़ों बेजुवान पशु असमय काल कवलित होने से बच जाते। लेकिन अब 6 जून को आदेश जारी किये गये हैंए जिसका क्रियान्वयन होते-होते मानसूनी बारिश शुरू हो जायेगी। जाहिर है कि सब कुछ कागजों में होगा और कार्यवाही प्रतिवेदन भी भेज दिया जायेगा। इस तरह से पशुओं के लिये भूसा-चारा व पानी की व्यवस्था किये जाने के नाम पर लाखों रुपए खर्च हो जायेंगे जिसकी कोई खोज खबर नहीं ली जा सकेगी। क्योंकि तब तक न तो पानी की कमी होगी और चारा भी सहज उपलब्ध होगा। इस लिहाज से कमिश्नर सागर द्वारा पशुओं के लिये भूसा-चारा व पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु 6 जून को जारी आदेश के औचित्य पर विचार किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है।

इनका कहना है –

        आदेश जारी करके मैंने कुछ गलत नहीं किया, जब मेरे संज्ञान में बात आई तो मैंने पशुओं के लिए तत्परता          से आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए है।

                                                                                मनोहर दुबे, कमिश्नर सागर संभाग

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स्विमसूट मेें फोटो शेयर करने पर गई टीचर की नौकरी

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टीचर विक्टोरिया की तस्वीर वायरल होने रूस में छिड़ी बहस

समर्थन मेें आये कई लोग, स्कूल के फैसले का किया विरोध

इंस्टाग्राम पर फोटो शेयर करते समय विक्टोरिया पोपोवा को ये अंदाजा भी नहीं था कि एक फोटो की वजह से उनकी नौकरी छिन जाएगी। 26 साल की विक्टोरिया रूस के ओम्स्क में एक स्कूल में पढ़ाती थीं। कुछ दिनों पहले उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी एक फोटो शेयर की थी जिसमें वो स्विम सूट पहने हुई थीं। इस फोटो की वजह से उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है।

साइबेरियन टाइम्स ने स्कूल के हवाले से लिखा है कि ऐसा करके विक्टोरिया ने स्कूल और टीचिंग के पेशे को अपमानित किया है। लेकिन अब बहुत से सोशल मीडिया यूजर्स उनके समर्थन में आ खड़े हुए हैं।
ये पागलपन कब बंद होगा?
ज्यादातर लोग स्कूल के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। विक्टोरिया को लोगों का काफी समर्थन मिल रहा है। एक शख़्स ने इंटरनेट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है ये पूरी तरह से दिखावा है। ऐसा करना मूर्खता है और बेहद अपमानजनक भी है। एक महिला ने लिखा है हम टीचर हैं लेकिन हम इंसान भी हैं। हमें भी हक है कि हम स्कूल के बाहर या फिर सोशल मीडिया पर अगर अलग दिखना चाहें तो दिखें।

एक अन्य व्यक्ति ने इस फैसले को पूरी तरह बेवकूफी बताया है। वहीं एक शख़्स लिखते हैं कि इतनी बेतुकी बात पर खुद का बचाव तक करने की जरूरत नहीं है।

एक इंस्टाग्राम यूजर ने लोगों से विक्टोरिया का समर्थन करने की बात कही है।
ऐसा नहीं है कि सारे लोग सिर्फ विक्टोरिया का समर्थन ही कर रहे हैं। बहुत से लोगों का मानना है कि यह गलत है। लोगों का कहना है कि पर्सनल स्पेस की बात कहकर आप कुछ भी तो नहीं कह सकते हैं।

वहीं खुद को टीचर बताने वाली एक महिला का कहना है कि यह कोई नियम नहीं है। टीचर भी इंसान है लेकिन ये इंसान पढ़ाने का काम करते हैं। वो कहती हैं, बेशक सबका अपना एक निजी जीवन होता है। लेकिन क्या आप पसंद करेंगे कि कोई टीचर स्कूल के पीछे शराब पिए…क्योंकि वो भी तो इंसान हैं।

टीचर या फिर मॉडल?
स्विमसूट में टीचर की तस्वीर वायरल होने के बाद ओम्स्क प्रांत की सरकार ने घोषणा की है कि विक्टोरिया काम पर वापस लौट सकती हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि विक्टोरिया के भविष्य का फैसला हो गया है, अब ये उन्हें तय करना है कि क्या वो इसी स्कूल में पढ़ाना चाहती हैं या फिर किसी दूसरे स्कूल में। रूस की एक मॉडलिंग एजेंसी प्लस साइज ओम्स्क ने विक्टोरिया से संपर्क किया है और उन्हें एक ऑफर भी दिया है।                                                                                           

                                        (साभार : बीबीसी हिन्‍दी)

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मोदी बोले- किसी को दिखे या न दिखे, देश बदल रहा है

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फाईल फोटो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देश में विकास हो रहा है, भले ही लोग इसे नहीं देख पा रहे हैं। उन्होंने कहा, डिजिटल इंडिया के तहत तीन लाख कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसई) पर काम हो रहे है। किसी को दिखे या न दिखे, देश बदल रहा है। नमो एप के जरिए डिजिटल इंडिया का लाभ उठाने वालों से बात करते हुए उन्होंने लोगों के अनुभव सुने और इस योजना की खूबियां गिनाईं।

उन्होंने कहा कि इस योजना से न सिर्फ लाखों लोगों को रोजगार मिला है बल्कि गांव में रहने वाले लोगों की जिंदगी भी बदली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया से सबसे ज्यादा फायदा गांवों की महिलाओं को हुआ है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के तहत शुरू किए गए वाई फाई चैपाल योजना से गांवों की बेटियां नौकरी पा रही हैं।

फाईल फोटो

प्रधानमंत्री से बात करते हुए लाभान्वित सचियत्री ने बताया कि उनका चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में हुआ, जिसकी तैयारी उन्होंने सीएससी सेंटर की मदद से की थी। कई सीएससी सेंटर के संचालकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि वो इस योजना से हजारों ग्रामीणों को डिजिटल साक्षर कर चुके हैं।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया ने भारतीयों की पैसे की लेन-देन की आदत बदल दी है। अब गांव-गांव में डिजिटल पेमेंट के जरिए भुगतान किया जा रहा है।

कॉल सेंटर में मिला काम-

फाईल फोटो

विभिन्न सेंटरों से कई लोगों ने ये बताया कि इस योजना से उन्हें पेंशन पाने में आसानी होती है। पहले उन्हें बैंक के लिए कई किलोमीटर दूर जाना होता था। राजस्थान के अलवर जिला की पूनम सपेरा ने बताया कि वो बीए में पढ़ रही हैं और डिजिटल इंडिया से उन्हें लाभ मिल रहा है। पूनम घुमंतू जाति से हैं।

नरेंद्र मोदी ने नागालैंड के कोहिमा में चल रहे बीपीओ के कर्मियों से भी बात की। कर्मियों ने बताया कि उन्हें अब अपने शहर के कॉल सेंटर में काम मिल रहा है और वो ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमरीका की कंपनियों के लिए काम करते हैं। पटना की खुशबू ने बताया कि इस योजना के तहत शुरू किए गए कॉल सेंटर में उन्हें नौकरी मिली है, जहां वो क्षेत्रीय भाषा में ग्राहकों से बात करती हैं।

एससी-एसटी समुदाय को फायदा-

डिजिटल इंडिया के तहत देशभर के एक लाख 83 हजार ग्राम पंचायतों में तीन लाख कॉमन सर्विस सेंटर खोले गए हैं। इन सेंटरों को खोलने का सरकार का मकसद था कि गांव में लोग सरकारी और गैर-सरकारी योजनाओं का लाभ ऑनलाइन प्राप्त कर सके।

नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि इन सेंटरों से 10 लाख लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने यह भी दावा किया कि डिजिटल साक्षर योजना के तहत करीब 1.25 करोड़ लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन 1.25 करोड़ लोगों में 70 फीसदी लाभान्वित एससी-एसटी समुदाय से है।

                                                                                                (साभार: बीबीसी हिन्दी)

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