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चिकित्सकों की कमी से उपचार के आभाव में बेमौत मर रहे मरीज

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डॉक्‍टरों के रिक्‍त पदों को भरने कांग्रेस ने दिया धरना

कमीशन के चक्‍कर में गुणवत्‍ताविहीन दवाओं की खरीदी केे लगाये आरोप 

पन्ना। रडार न्‍यूज पन्ना जिला चिकित्सालय में चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी तथा दवाओं की खरीदी में अनियमिततायें एवं भ्रष्टाचार को लेकर बुधवार को जिला मुख्यालय पन्ना स्थित जिला चिकित्सालय के सामने किसान कांग्रेस के अध्यक्ष शशिकांत दीक्षित के नेतृत्व में किसान कांग्रेस द्वारा धरना देकर उग्र प्रदर्शन करते हुये राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौपा गया आयोजित धरना कार्यक्रम प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। दोपहर 12 बजे से शुरू हुए धरना प्रदर्शन में कांग्रेस के नेताओं भास्कर देव बुंदेला, रविन्द्र शुक्ला, रामकिशोर मिश्रा, पुष्पेन्द्र सिंह, ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह, शिवजीत सिंह भईया राजा, शारदा पाठक, मीना यादव, केशव प्रताप सिंह, लक्ष्मी दहायत, मनोज गुप्ता, मुरारी थापक, आशीष बागरी, अजयवीर सिंह, रामकरण पाण्डेय, जीतेन्द्र जाटव, धीरेन्द्र पाठक, मनीष मिश्रा, रामवीर तिवारी आदि ने संबंधित करते हुये कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मामले में पन्ना जिले की हालत सबसे खराब है जिला अस्पताल में लोग मरीजों को उपचार के लिये लेकर आते है ताकि वह ठीक हो जाये गंभीर रूप से बीमार मरीजों की अस्पताल में मिलने वाले इलाज से उनकी जान बच जाये किंतु पन्ना जिला चिकित्सालय की जो स्थिति है उसे हर कोई जानता है अस्पताल में आने के बाद मरीजों को देखने के लिये डॉक्टर नहीं मिलते। विशेषज्ञ एवं अनुभवी चिकित्सकों के नही होने से अस्पताल में मरीजों को उपचार के अभाव में दम तोडऩा पड़ता है। हालत है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल में देखने के लिये जो डॉक्टर उपलब्ध है वे उन्हे अस्पताल से रिफर कर देते है और नतीजा यह हो रहा है कि बाहर के अस्पताल तक पहुंचने के दौरान ही अब तक जिले में कई लोगों की मौत हो चुकी है।

चौपाट है व्‍यवस्‍थायें-

किसान कांग्रेस के अध्यक्ष शशिकांत दीक्षित ने कहा कि पन्ना जिला चिकित्सालय की हालत से मरीज एवं उनके परिजन भयभीत है, वजह यह है कि अस्पताल में आधे से अधिक चिकित्सक नही है हृदय रोगी तथा अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों को अस्पताल में पहुंचने के बाद दयनीय दौर से गुजरना पड़ रहा है। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायलों का इलाज अस्पताल में सर्जिकल तथा अस्थि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते नहीं किया जाता है। जिला अस्पताल में ओपीडी तथा आईपीडी की व्यवस्थाये पूरी तरह से लड़खड़ाई रहती है। नर्सिंग स्टाफ की भी स्थिति यह है कि आधे से ज्यादा पद खाली है। श्री दीक्षित ने कहा कि पन्ना के साथ सरकार तथा जिले से जिन भाजपा के जनप्रतिनिधियों को इस जिले के लोगों ने चुन कर ताकत दी है वे पूरी तरह से अकर्मण्य साबित हुये है। इस जिले की जनता ने न जाने कितने अपने लोगों को उपचार के अभाव में खो दिया है। इसके लिये भाजपा के जनप्रतिनिधि और भाजपा की सरकार दोषी है। श्री दीक्षित ने आरोप लगाया कि पूरे प्रदेश में घटिया दवाओं की खरीदी हो रही है और बड़े पैमाने पर भ्रष्टार हो है जिससे कि अस्पताल की दवाओं से लोगों का भरोसा पूरी तरह से उठ चुका है। श्री दीक्षित ने जिला अस्पताल में दवा सहित अन्य खरीदी के कार्यो में बड़े पैाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये तथा इसकी उच्च स्तरीय जांच की गयी है। प्रदर्शन के दौरान जिले में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की बदहाली को भी उठाया गया तथा कहा गया कि जिले में कई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे है जहां डॉक्टर और स्टाफ नही होने से ताला लगा रहता है।

राज्‍यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन –

धरना प्रदर्शन के उपरांत स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर जम कर नारेबाजी करते हुये ज्ञापन लेने के लिये उपस्थित तहसीलदार श्रीमती बबीता राठौर को राज्यपाल के नाम संबंधित ज्ञापन सौपा गया तथा समस्याओं के निराकरण नही होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गयी। आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिवदयाल बागरी, सरदार सिंह यादव, अभिषेक शर्मा, मनोज सेन, दीपू दीक्षित, आशीष मिश्रा, सौरभ रैकवार, अंका रिछारिया, दीपक तिवारी, हीरालाल विश्वकर्मा, जनमेजय अरजरिया, दयाशंकर दीक्षित, रिंकू सिद्दीकी, पप्पू दीक्षित, सुनील अवस्‍थी,  धर्मेन्‍द्र प्रताप सिंह, विमलेश सेन, महेन्द्र पाण्डेय, मुस्ताक हुसैन, चंदन रावत, चंद्र प्रकाश पाल, राज प्रताप शर्मा, शहीद चच्चा, डमरू लाल सेन, केशरी अहिरवार, गोकुल विश्वकर्मा, अंकित शर्मा, नृपेन्द्र सिंह, मृगेन्द्र सिंह, रामप्रसाद यादव, विनय कांत पाण्डेय, जीतू तिवारी, रसीद सौदागार, पूनम मिश्रा, लोकेन्द्र यादव, सचिन चैरहा, हिमांशु परौहा, पार्षद जयशंकर व्यास, रनमत सिंह यादव, नीलेश शुक्ला, अंकित दीक्षित, वीरेन्द्र सिंह, पुष्पराज सिंह, पुन्ना सहित कांग्रेस एवं किसान काग्रेस के कार्यकर्ता, पदाधिकारी गण एवं किसान उपस्थित रहे।

 

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में मध्यप्रदेश को मिलेगा अवार्ड

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सांकेतिक फोटो

स्वास्थ्य मंत्री श्री रुस्तम सिंह को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री नड्डा ने लिखा पत्र 

मातृ मृत्यु दर घटने पर अवार्ड सेरेमनी का दिया आमंत्रण 

भोपाल। मध्यप्रदेश को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत मातृ मृत्यु दर कम करने पर पुरस्कृत किया जायेगा। इसके लिये केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रुस्तम सिंह को पत्र लिखकर 29 जून को होने वाली अवार्ड सेरेमनी के लिये आमंत्रित किया है। केन्द्रीय मंत्री श्री नड्डा ने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंह को इसके लिये बधाई भी दी है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान देश में 3 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं को प्रसव के पहले देखभाल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये शुरू किया गया है।

राज्य शासन द्वारा प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को कम करने के प्रयास अब सार्थक परिणाम देने लगे हैं। भारत के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा वर्ष 2014 से 2016 तक के विशेष बुलेटिन में मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु में 48 अंकों की अभूतपूर्व गिरावट दर्ज हुई है। प्रदेश में वर्ष 2011-13 में मातृ मृत्यु दर 221 थी, जो अब घटकर मात्र 173 रह गई है। प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

संस्थागत प्रसव, ए.एन.एम., आँगनबाड़ी कार्यकर्ता, दस्तक अभियान आदि निरंतर जारी विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के परिणाम अब आने लगे हैं। आने वाले वर्षों में यह गिरावट और अधिक स्पष्ट होगी। स्वास्थ्य संस्था स्तर से लेकर समुदाय स्तर तक प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। लोगों को जागरूक किया गया है कि गर्भ का पता चलते ही शीघ्र स्वास्थ्य केन्द्र में गर्भधात्री महिला का पंजीयन करवायें। इससे प्रसव के पहले आवश्यक जाँचें, टीकाकरण, खून की कमी आदि का उपचार होने के साथ ही अन्य जटिलताओं पर काबू पाने में आसानी हुई है।

मध्यप्रदेश में उच्च जोखिम प्रसव की संभावनाओं वाली महिलाओं का नियमित फॉलोअप करके उनका सुरक्षित प्रसव कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में खून की कमी वाली गर्भवती महिलाओं को आयरन टेबलेट्स और अत्यधिक खून की कमी होने पर आयरन के इंजेक्शन दिये जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को खून भी चढ़ाया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित पर्यवेक्षण किया जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थाओं में नर्सिंग सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से नर्सिंग मेंटर्स की तैनाती की गई है।

रेत खदानों पर पड़े छापे। 5 एलएनटी, 1 जेसीबी और 12 ट्रक जब्त

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देर रात पुलिस टीमों ने दबिश देकर की कार्यवाही

प्रतिबंध के बावजूद मशीनों से निकाली जा रही थी रेत

केन नदी के जिगनी घाट में नहीं थम रहा रेत का अवैध उत्खनन

अजयगढ़/पन्ना। रडार न्यूज केन नदी कोख को छलनी कर रेत का अनियंत्रित तरीके से बेइंतहां दोहन कर रहे माफियाओं पर नकेल कसने के लिए गुरूवार देर रात पुलिस की चार टीमों ने अजयगढ़ की रेत खदानों पर दबिश देते हुए 5 एलएनटी मशीनें, 1 जेसीबी और 12 ट्रक जब्त किये है। इन खदानों में लम्‍बेे समय से प्रतिबंध के बावजूद मशीनों से रेत का खनन कराया जा रहा था। पन्ना पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल के निर्देशन में की गई छापामार कार्रवाई को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम देने के लिए पन्ना से खासतौर पर पुलिस टीमों को भेजा गया। कथिततौर पर अजयगढ़  केे पुलिस व राजस्व अधिकारियों को इस कार्यवाई से दूर रखते हुए उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। फलस्वरूप गुरूवार देर रात से लेकर सुबह तक सुनहरा, बीरा, जिगनी आदि खदानों पर पुलिस के छापे पड़े तो समूचे अजयगढ़ क्षेत्र मेें हड़कम्प मच गया।  छापामार कार्रवाई से खदान क्षेत्रों में अफरा-तफरी फैल गई। प्रतिबंध के बावजूद मशीनों से रेत उत्खनन कराये जाने से पुलिस ने सुनहरा और डिजयाना कम्पनी की बीरा रेत खदान से दो-दो एलएनटी मशीनें और केन नदी के जिगनी घाट में पूर्णतः अवैध रूप से संचालित खदान से एक एलएनटी एवं एक जेसीबी मशीन जब्त की है। इसके अलावा रेत से भरे 12 ट्रक भी पुलिस ने पकड़े है। जप्तशुदा मशीनरी और वाहनों की कीमत करीब 5 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

प्रशासन के संरक्षण में चल रहा था अवैध उत्खनन-

उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत केन नदी पर स्वीकृत अधिकांश रेत खदानों मेें कई माह पहले ही रेत समाप्त हो चुकी थी। किन्तु स्थानीय पुलिस, खनिज और राजस्व विभाग की सांठगांठ से ठेकेदारों द्वारा खदान क्षेत्र के बाहर कई किलोमीटर में दैत्याकार मशीनों के जरिये पानी से रेत निकाली जा रही थी। पिछले तीन-चार माह से रेत के डम्पों की आड़ में केन नदी की रेत पर खुलेआम डकैती डाले जाने की खबर को रडार न्यूज ने दो दिन पूर्व प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाये थे। खबर मेें उन खदानाेें के नामों का भी उल्लेख किया गया था जिनकी रेत समाप्त हो चुकी है। पुलिस की छापामार कार्यवाही से यह साबित हो गया है कि मानसून के सक्रिय होने के बावजूद रेत खदान ठेकेदार केन की बहुमूल्य खनिज सम्पदा को लूटकर अपनी तिजोरी भरने के लिए रातदिन मशीनों से रेत खनन करा रहे थे। केन नदी के जिगनी घाट में एक भी खदान स्वीकृत न होने के बावजूद वहां से भी एक जेसीबी और एक एलएनटी मशीन रेत निकालते हुए पकड़ी गई इससे स्पष्ट है कि पूर्व में कई बार कार्यवाई होने के बावजूद जिगनी घाट में संचालित अवैध रेत खदानों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। जबकि पुलिस चाैकी चंदौरा से जिगनी घाट की दूरी पांच किलोमीटर से भी कम है।

छापाेें की खबर मिलने पर पहुंचे स्थानीय अधिकारी-

पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल द्वारा पन्ना से भेजी गई पुलिस टीमों द्वारा रेत खदानों पर बेहद गोपनीय तरीके से कार्रवाई को अंजाम देते ही इसकी खबर जंगल की आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। अल सुबह जब इस कार्यवाई की जानकारी अजयगढ़ के पुलिस और राजस्व अधिकारियों को लगी तो वे दंग रह गये। कथिततौर पर रेत खदान ठेकेदारों से सांठगांठ के चलते छापामार कार्यवाही से दूर रखे गये स्थानीय अधिकारी खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए कार्यवाई का जायजा लेते और पन्ना से आई टीमों का सहयोग करते नजर आये। छापामार कार्यवाई मुख्य रूप से पन्ना कोतवाली टीआई अरविंद कुजूर, सलेहा थाना प्रभारी शैलेन्द्र यादव एवं देवेन्द्रनगर थाना प्रभारी मनीष मिश्रा व उनकी टीम शामिल रही। समाचार लिखेे जानेे तक अजयगढ़ में रूक-रूक कर रहे रही बारिश के बीच पुलिस अधिकारी-कर्मचारी जब्तशुदा वाहनों को सुरक्षित स्थानों पर खड़ा कराने के लिए मशक्कत करते रहे।

इनका कहना है-

      ‘‘पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चार पुलिस टीमों ने छापामार कार्यवाई करते हुए रेत खदानों से 5 एलएनटी, 1 जेसीबी और 12 ट्रक जब्त किये है। इस मामले में अग्रिम कार्यवाई हेतु प्रतिवेदन जिला खनिज अधिकारी को प्रस्तुत किया जायेगा।‘‘
                                                                     -बीके सिंह परिहार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पन्ना

 

 

सीएम के पुत्र और युवा मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष ने बिना हैलमेट बाईक रैली निकाली

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भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय के पीछे बैठे सीएम के पुत्र कार्तिकेय सिंह।

यातायात नियमों के उल्लंघन पर मूकदर्शक बनी रही पन्ना पुलिस

अभिलाष बोले, पगड़ी पहन ली तो हैलमेट की जरूरत क्या है

पन्ना। रडार न्यूज़   भारतीय जनता युवामोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय के नेतृत्व मे निकाली जा रही युवा संकल्प यात्रा यातायात नियमों के खुले उल्लंघन के चलते विवादों मे घिर गई है। प्रदेशव्यापी अपनी यात्रा के तहत बुधवार को पन्ना पहुंचे भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान के स्वागत मे स्थानीय भाजयुमो के कार्यकर्ताओं द्वारा नगर में बगैर हैलमेट के बाईक रैली निकाली गई। विवादों से घिरी इस रैली मे युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अभिलाष पाण्डेय बिना हैलमेट लगाये बाईक चला रहे थे, उनके पीछे बैठे सीएम के पुत्र कार्तिकेय सिंह ने भी बिना हैलमेट के बाईक की सवारी की । आश्चर्य तो तब हुआ जब सरेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे इन युवा नेताओं पर स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई।

युवा नेताओं को यातायात नियमो के उल्लंघन की छूट दिये जाने से पन्ना जिले मे पिछले एक साल से सुरक्षित यातायात को लेकर पुलिस द्वारा चलाये जा रहे वाहन चैकिंग अभियान के नेतृत्वकर्ताओं पर दायित्व के निर्वाहन में दोहरे मापदण्ड अपनाने के आरोप लग रहे है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस की टीम पूरे समय रैली के साथ रही लेकिन किसी ने भी बिना हैलमेट के बाईक चलाने वाले नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करने का नैतिक साहस नही दिखाया। पन्ना में सतत हैलमेट अभियान चलाकर पिछले साल एक करोड़ से अधिक के चालान काटकर अपनी पीठ थपथपाने वाले पुलिस के अफसर भी युवा मोर्चा की बाइक रैली को लेकर ख़ामोश हैं। पुलिस की चुप्पी पर लोग सोशल मीडिया में सवाल उठाते हुए पूंछ रहे हैं यातायात नियम क्या सिर्फ़ आमआदमी पर ही लागू होते हैं।

उधर भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष से पत्रकारों ने जब इस सबंध मे बात की तो उन्होने बेतुका जवाब देते हुये कहा कि- आपने गौर से नहीं देखा मैंने पगड़ी पहनी थी, हमने तय किया है कि इन रैलियों मे साफे, पगड़ी, गमछे आदि सब चीजों का उपयोग करेंगे। क्योंकि 10 की स्पीड से मोटर साईकिल चल रही है इसलिये हम सुरक्षित है, साफे के साथ भगवा संदेश देते हुये निकल रहे है। बाईक मे पीछे बैठे कार्तिकेय सिंह के भी हैलमेट न पहनने के सवाल पर भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्री पाण्डेय ने जवाब दिया कि पीछे जो बैठता है वह हैलमेट नहीं लगाता। इससे पता चलता कि भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष भले ही बाइक-कार चलाते हैं पर उन्हें यातायात नियमों की जानकारी नहीं है या फिर वे सत्ता के मद मे नियम-कानूनों की अपनी सुविधानुसार नई परिभाषा गढ़ रहे है।

पवई से मुकेश नायक होगें प्रत्याशी, पन्ना से ओबीसी या क्षत्रिय को टिकिट देगी कांग्रेस

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पन्ना। रडार न्यूज मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में अपने विधानसभा उम्मीदवार समय से पूर्व घोषित करने की रणनीति के तहत् कई सीटों पर अपने मौजूदा विधायकों और जीत की प्रबल संभावना वाले कुछ पार्टी नेताओं को चुनावी तैयारियां शुरू करने के संकेत दे दिये है। इसके पीछे मंशा यह है कि नवम्बर में होने वाले चुनाव से पहले प्रत्याशियों को जनसम्पर्क करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। साथ ही वे अपना चुनावी प्रबंधन भी बेहतर तरीके से कर सकें। दरअसल मध्यप्रदेश में पिछले साढ़े 14 साल से सत्ता का वनवास काट रही कांग्रेस इस बार के चुनाव में वापिसी की उम्मीद लगाये हुए है। मिशन 2018 की सफलता को हरहाल में सुनिश्चित करने के लिए ही समय पूर्व संभावित प्रत्याशियों को प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से चुनावी तैयारी में जुटने के संकेत दिये जा रहे है। ताकि सघन जनसम्पर्क के मामले में वे सत्ताधारी दल भाजपा के उम्मीदवारों से पीछे न रहें। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से बाहर आ रहीं खबरों पर भरोसा करें तो पन्ना की पवई सीट से मौजूदा विधायक मुकेश नायक ही पुनः प्रत्याशी हो सकते है। पिछले दिनों एकता यात्रा के तहत् पन्ना के प्रवास पर आये पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और न्याय यात्रा के तहत् पन्ना पहुंचे नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने भी स्थानीय स्तर पर इस बात के संकेत दिये थे। खबर यह भी है कि पन्ना विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी इस बार स्वच्छ छवि के किसी क्षत्रिय या फिर ओबीसी नेता को अपना उम्मीदवार बना सकती है। मालूम हो कि वर्ष 2013 के चुनाव में पन्ना सीट से मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग की ही उच्च शिक्षित महिला नेत्री एडवोकेट मीना सिंह यादव को प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन उन्हें भारी मतों के अंतर से करारी हार का सामना करना पड़ा था। पिछले चुनाव में पन्ना सीट से बसपा के उम्मीदवार महेन्द्र पाल वर्मा अप्रत्याशित रूप से दूसरे नम्बर पर रहे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के तीसरे स्थान पर खिसकने से जमानत जब्त हो गई थी। वर्मा और मीना को मिले वोटों का अंतर महज दो हजार के आसपास ही रहा है। जबकि भाजपा की विजयी उम्मीदवार रहीं सुश्री कुसुम मेहदेले की जीत का अंतर इन दोनों प्रत्याशियों को मिले वोटों से कहीं ज्यादा था। उधर पवई सीट की मौजूदा सियासी हलचल को देखते हुए वहां एक बार फिर कांग्रेस केे मुकेश नायक और भाजपा से पूर्व मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के बीच चुनावी मुकाबला होना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि इन दोनों ही दिग्गज नेताओं को अपनी-अपनी पार्टी के बागियों-भितरघातियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। दोनों ही दलों के बागी तेवर वाले नेताओं ने इस बार भी चुनाव के पहले संयुक्त रूप से पवई में क्षेत्रीय प्रत्याशी की अपनी पुरानी मांग तेज कर दी है। पन्ना-पवई सीट से चुनावी मुकाबले को लेकर लगाये जा रहे इन कायासों के बीच वास्तविक स्थिति तो आने वाले महीनों में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों के नामों का अधिकारिकतौर पर ऐलान के बाद ही साफ हो पायेगी।

नौरादेही को आबाद करेेंगे कान्हा की रानी और बांधवगढ़ का वनराज

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नौरादेही के बाड़े में एक साथ विश्राम करते बाघ-बाघिन

 देश के सबसे बड़े अभ्यारण्य में जल्‍द आयेगें नन्‍हें मेहमान

पन्ना टाईगर रिजर्व की तर्ज पर शुरू हुआ बाघ पुर्नस्थापना कार्यक्रम

नौरादेही में कान्हा की रानी को मिला बांधवगढ़ के राजा का साथ

भोपाल। मध्यप्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघ पुर्नस्थापना कार्यक्रम के अनूठे प्रयोग से वहां बाघों का उजड़ा हुआ संसार सफलतापूर्वक पुनः आबाद हो चुका है। दुनियाभर के लिए मिसाल बन चुकी पन्ना की सफलता से उत्साहित मध्यप्रदेश के वन विभाग द्वारा इस प्रयोग को अब नौरादेही अभयारण्य में दोहराया जा रहा है। कुछ माह पूर्व नौरादेही अभयारण्य में बाघ पुर्नस्थापना शुरू की गई थी। यहाँ के बाड़े में बाघिन को कान्हा टाइगर रिजर्व और बाघ को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाकर छोड़ा गया था। मध्यप्रदेश के लिए यह ऐतिहासिक क्षण है, जब नौरादेही अभयारण में बाघ-बाघिन एक दूसरे के करीब आ गये हैं। इससे प्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि होगी। अब वन विभाग द्वारा जारी किये गये वीडियो से उम्मीद की जा रही है कि निश्चित ही नौरादेही अभ्यारण में अगले कुछ महीनों में नन्हें मेहमान आयेगें और मध्यप्रदेश में बाघों का कुनबा बढ़ेगा।

अभयारण्याेें में बसाये जा रहे बाघ-

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में निरंतर किये जा रहे प्रयासों से बाघों की संख्या बढ़ रही है। किशोर होते बाघों को वर्चस्व की लड़ाई और मानव द्वदं से बचाने के लिये वन विभाग ने अभिनव योजना अपनायी है। वन विभाग अनुकूल वातावरण का निर्माण कर बाघों को ऐसे अभयारण्यों में शिफ्ट कर रहा है, जहाँ वर्तमान में बाघ नहीं हैं। पन्ना में बाघ पुर्नस्थापना से विश्व में मिसाल कायम करने के बाद वन विभाग ने सीधी के संजय टाइगर रिजर्व में भी 6 बाघों का सफल स्थानांतरण किया है। वर्ष 2009 में बाघ शून्य हो चुके पन्ना में आज लगभग 30-35 बाघ हैं। अब नौरादेही अभयारण्य में बाघ पुर्नस्थापना का कार्य प्रगति पर है। मध्यप्रदेश केवल प्रदेश में ही नहीं देश में भी बाघों का कुनबा बढ़ रहा है।

सदियों तक रहा बाघों का प्राकृतिक रहवास-

जबलपुर से 140 किलोमीटर दूर दमोह, सागर और नरसिंहपुर जिले में 1197 वर्ग किलोमीटर में फैले नौरादेही अभ्यारण्य में बहुत पहले कभी बाघ रहे होंगे। यह जंगल देश की दो बड़ी नदियों गंगा और नर्मदा का कछार होने के कारण यहाँ पानी की कमी नहीं है। वन विभाग ने पन्ना की तर्ज पर देश के सबसे बड़े इस अभ्यारण्य में बाघ आबाद करना शुरू किया है। पिछले 18 अप्रैल को यहाँ कान्हा से ढाई वर्षीय एक बाघिन और 29 अप्रैल को बाँधवगढ़ से लगभग पाँच वर्षीय बाघ का स्थानांतरण किया गया है।

मंगल भवन निर्माण को पंचायत ने बनाया मजाक

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मंगल भवन निर्माण में बरती जा रही घोर लापरवाही को बयां करती तस्वीर।

छत डालने सरिया बिछा, भुगतान नहीं हुआ तो सरिया के नीचे से सेंटरिंग खोल ले गया ठेकेदार

मोहन्द्रा। रडार न्यूज ग्राम पंचायत मोहन्द्रा में सांसद निधि के चैदह लाख रुपये से मंगल भवन का निर्माण कार्य हो रहा है। मंगल भवन में दीवारें खड़ीं हो गई है। छत का लेंटर डालना, दीवालों की छपाई व फर्श का निर्माण कार्य शेष रह गया था। लेंटर डालने के लिये स्थानीय पंचायत ने करीब तीन माह पहले सरिया भी बिछवा दिया था। पर किन्हीं कारणों से छत का लेंटर अब तक नहीं डाला गया। छत की सेंटरिंग लगाने बाले ठेकेदार ने तीन माह से फंसी अपनी सेंटरिंग का किराया जब पंचायत के सरपंच पति व सचिव से मांगा तो उन्होनें छत न डालने व हवाला देकर बात से किनारा कर लिया। सेंटरिंग का किराया मांग मांग कर परेषान हो चुके ठेकेदार ने अपना मजदूर लगाकर चार दिन पहले अपनी सेंटरिग खोल कर घर ले गया। अब बगैर सेेंटरिग के सहारे छत डालने के लिये बिछा सरिया हवा में लटका झुकाव ले रहा है। सवाल उठता है बगैर सेंटरिंग के बिछे सरिया के ऊपर जब भी छत डाला जायेगा तो क्या छत उतना मजबूत रहेगा। क्या सरपंच सचिव नुकसान उठाकर नये सिरे से दोबारा सरिया बिछवायेगें। यदि भारी बारिष हुई तो नींव में अंदर व बाहर से पानी जायेगा ऐसें में दीवारें धंस भी सकती है क्षतिग्रस्त भी हो सकती है फिर इसकी जिम्मेदारी किसके मत्थे मढ़ी जायेगी।

कांग्रेस की पूर्व प्रत्याशी के घर फायर कर बरसाये पत्थर

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मीना यादव के घर अज्ञात आरोपियों ने दिया वारदात को अंजाम

परिवार सहित जान से मारने की दी धमकी

प्रारंभिक जांच में हमले की वजह का नहीं लग सका पता

पन्ना। रडार न्यूज महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पन्ना विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की पूर्व प्रत्याशी रहीं मीना सिंह यादव के पन्ना में बीटीआई तिराहा पर स्थित घर में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात अज्ञात लोगों ने जबरन घुसने का प्रयास किया और असफल होने पर हवाई फायर करते हुए घर पर पत्थर बरसाये गये। इस घटना के बाद से यादव परिवार दहशत में है। पीड़ित नेत्री ने घटना की शिकायत कोतवाली थाना पुलिस से की है। प्रारंभिक पुलिस जांच में इस सनसनीखेज घटना की वजह साफ नहीं हो सकी। अज्ञात आरोपी राजनैतिक या सामाजिक विवाद के चलते महिला नेत्री मीना यादव व उनके बच्चों पर हमला करने आये थे या फिर उनका इरादा लूटपाट करने का था। घटना को लेकर लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे है।

कांग्रेस नेत्री मीना यादव।

मीडियाकर्मियों को वारदात के संबंध मेें कांग्रेस नेत्री मीना यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पति रणधीर सिंह यादव का देहांत हो चुका है और वे अपने एक बेटे व बेटी के साथ रहती हैं। बीती रात घर में पानी नहीं होने के कारण पास ही रहने वाले अपने भाई विक्रम के घर उन्होंने बेटे सृजन यादव को पानी लेने भेजा था। उसी समय तीन अज्ञात युवक मेन गेट से घर में दाखिल हुए और कमरे के अंदर घुसने का प्रयास करने लगे। मीना यादव ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो तीनों युवक उनके साथ अभद्रता करने लगे। गाली-गलौंच करते हुए जान से मारने की धमकी तक दी। इसी बीच मीना यादव के भाई विक्रम यादव और बेटा सृजन पानी लेकर वापस घर पहुंचे, जिन्हें देखकर तीनों युवक भागने लगे। इसी बीच बाहर खड़े उनके अन्य साथियों ने हवाई फायर किया। साथ ही घर में ईंट-पत्थर से हमला करते हुए भाग खड़े हुए। इस घटना से पूरा परिवार सहम गया। घटना की त्वरित सूचना मीना यादव ने 100 डायल व कोतवाली पुलिस को दी। कांग्रेस नेत्री का आरोप है कि पुलिस घटना के आधा घंटा बाद मौके पर पहुुंची। पुलिस ने उन्हें फिलहाल घर में ही रहने का सलाह दी और सुबह मामले की शिकायत कोतवाली थाना में करने को कहा। मंगलवार सुबह मीना यादव ने लिखित शिकायत करते हुए पुलिस से इस मामले पर गंभीरता से कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस घटना से पूरा परिवार डरा हुआ है और उनकी व उनके परिवार की जान को खतरा है। मीना यादव ने पुलिस को बताया कि सभी युवक 20 से 25 साल के थे। जिन्हें वे खुद व उनका भाई और बेटा देखने पर पहचान सकते हैं। इस घटना को लेकर राजनैतिक हल्कों में भी आज दिन भर चर्चाएं रहीं। मीना यादव ने कहा कि पन्ना सहित प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध चिंताजनक तेजी से बढ़ रहे है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि महिलायें जब घर के अंदर ही सुरक्षित नहीं है, तो फिर कहां सुरक्षित होंगी। उन्होंने पुलिस से अज्ञात हमलावराेें का सुराग लगाकर उन्हें तत्परता से गिरफतार करने की मांग की है।

पुलिस आरक्षक ने पत्नी से कहा कि 10 लाख लाओ तब घर पर रखूंगा

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पुलिस अधीक्षक कार्यालय पन्ना में अपने पिता के साथ खड़ी पीड़ित नवविवाहिता।

नवविवाहिता ने दहेज के लिए ससुराल पक्ष पर प्रताड़ित करने का लगाया आरोप

दहेज लोभियाेें के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने एसपी से की शिकायत

पन्ना। रडार न्यूज छतरपुर जिला के बिजावर थाना में पदस्थ पुलिस आरक्षक मयंक शुक्ला पर उसकी नवविवाहिता पत्नी ने दहेज के लिए शारीरिक और मानसिकतौर पर प्रताड़ित करते हुए घर से भगाने का आरोप लगाया है। मंगलवार को अपने पिता के साथ पन्ना पहुंची पीड़िता वर्षा शुक्ला ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन पत्र देते हुए बताया कि विवाह के बाद से ही पति मयंक शुक्ला व सास-ससुर द्वारा दहेज के रूप में 10 लाख रूपये लाने की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि 10 लाख रूपये लाने पर ही तुम्हें घर में रखेेेेगें। पिछले दो साल से अपने मायके ग्राम चौकी थाना सलेहा में रह रही वर्षा और उसके परिजनों ने मयंक और उनके माता-पिता को सामाजिक स्तर पर काफी समझाया लेकिन दहेज लोभी अपनी मांग पर अड़े है। वर्षा के पिता ने बताया कि 24 अप्रैल 2016 को उन्होंने अपनी बेटी का विवाह गुनौर स्थित मैरिज गार्डन से मयंक शुक्ला के साथ किया था। बेटी के विवाह में अपनी हैसियत के अनुसार 5 लाख रूपये नकद, बुलट मोटरसाईकिल और पूरा दान-दहेज दिया था। पहली विदा में वर्षा जब ससुराल पहुंची तो उसे कम दहेज लाने का ताना देते हुए प्रताड़ित किया गया। सास-ससुर का कहना है कि उनका बेटा पुलिस की नौकरी में है, अगर कहीं और विवाह करते तो मुंह मांगा दहेज मिलता। वर्षा का आरोप है कि पति और ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा 10 लाख रूपये लाने की मांग करते हुए उसे घर से भगा दिया था। लाख कोशिशें करने के बाद भी पति और ससुराल पक्ष के लोग उसे रखने के लिए तैयार नहीं है।

जबरन समाप्त करा दी शिकायत-

ससुराल पक्ष की दहेज की मांग पूरी करने में असमर्थ होने के कारण माह मई 2016 से अपने पिता के घर पर रहने को मजबूर वर्षा ने सीएम हेल्पलाईन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपने आवेदन पत्र में उल्लेख किया है कि पवई थाना टीआई द्वारा शिकायत वापस लेने का दबाव डाला गया और जबरन उसका मोबाईल छीन कर शिकायत को बगैर निराकरण के ही बंद करा दिया। इससे बौखलाये आरक्षक पति द्वारा उसे और परिजनों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पीड़िता ने पुलिस कप्तान से न्याय की गुहार लगाते हुए उसका जीवन बर्बाद करने वाले दहेज लोभियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की है।

बचा लो सदानीरा केन, कहीं बरसाती नदी ना बन जाये!

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रोक के बावजूद केन नदी में मशीनों से जारी है रेत का अवैध उत्खनन।

रेत के लिए मशीनों से 40 किलोमीटर तक खोद डाली नदी

रेत खदान ठेकेदार और एमपी-यूपी के माफिया दिनदहाड़े डाल रहे डकैती

पन्ना। रडार न्यूज  नदियों के संरक्षण को लेकर प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दूसरे वादों की तरह ही खोखली और झूठी साबित हो रही है। विभिन्न कार्यक्रमों में जल संरक्षण-संवर्धन पर भाषण देकर तालियां बटोरने वाले सत्तासीन ही दुर्भाग्य से नदियों के विनाश पर मूकदर्शक बने बैठे है। जिम्मेदारों के चरित्र का यह दोहरापन पर्यावरण विनाश के साथ-साथ नदियों की बर्बादी का कारण बन रहा है।

नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान सपत्नीक पवित्र नर्मदा नदी की पूजा-अर्चना करते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान का फाईल फोटो।

इसे बिडम्बना ही कहा जायेगा कि पिछले साल प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा परिक्रमा कर नदियों के सरंक्षण का संकल्प दोहराया था, लेकिन उन्हीं नाक के नीचे माफिया रेत के लिए दैत्याकार मशीनों से नदियों का सीना और कोख छलनी कर दिनदहाड़े बहुमूल्य खनिज सम्पदा पर डकैती डाल रहे है। शायद इसीलिए खनिज सम्पदा के अंधाधुंध दोहन के मामले में देश के टाॅप-3 राज्यों में मध्यप्रदेश का नाम शामिल है। यह कोई उपलब्धि नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के माथे पर लगा एक कलंक है। देश का हृदय प्रदेश कहलाने वाला मध्यप्रदेश कोरे नारों से और विज्ञापनों में सपने दिखाकर विकास के मामले में नम्बर-1 राज्य तथा स्वर्णिम प्रदेश तो अब तक नहीं बना पर शिवराज सरकार में प्राकृतिक संसाधनों की लूट का अड्डा जरूर बन गया है। पिछले सात-आठ सालों से समूचे प्रदेश में शासन-प्रशासन के संरक्षण में रेत की लूट मची है। एमपी की प्रमुख नदियों चंबल, सोन, नर्मदा, केन, तवा, ब्यारमा, बेतवा, ताप्ती, कालीसिंध व इनकी सहायक नदियों को रेत के लिए रातदिन मशीनों से खोखला किया जा रहा है। अगर यकीन नहीं होता तो बुन्देलखण्ड का बेल्लारी बन चुके पन्ना आकर देख लें।

रात-दिन चल रहीं मशीनें-

केन नदी किनारे बरकोला में स्थित रेत का डम्प ।

पन्ना और छतरपुर जिले की प्राकृतिक सीमा रेखा बनी केन नदी को इन दोनों ही जिलों में सक्रिय रेत माफिया भयंकर नुकसान पहुंचा रहे है, जिसकी भरपाई हो पाना शायद संभव नहीं है। केन नदी का एक किनारा पन्ना में तो दूसरा छतरपुर जिले के आधिपत्य में आता है। इन दोनों ही जिलों में केन नदी पर तकरीबन दो दर्जन रेत खदानें स्वीकृत है। इनके अलावा दोनों जिलों में आधा सैकड़ा से अधिक अवैध खदानें हर समय खुलेआम चलती हैं। केन पट्टी क्षेत्र की चर्चाओं पर भरोसा करें तो स्वीकृत रेत खदानों व अवैध खदानों में प्रदेश सरकार के मंत्रियों के परिजन, क्षेत्रीय विधायक, सभी दलों के नेता, स्थानीय दबंग और आपराधिक तत्व सीधे तौर पर लिप्त है। दोनों ही जिलों में रेत की वैध-अवैध खदानें, राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग के अधिकारियों की काली कमाई का बड़ा स्त्रोत बन चुकी है। केन नदी को किस बेदर्दी से लूटा जा रहा है, मोहना से लेकर रामनई तक करीब 40 किलोमीटर के दायरे में यहां हर तरफ तबाही-बर्बादी के अनगिनत निशान मौजूद है जिन्हें देखकर आंखे फटी रह जाती है। रेत निकालने के लिए वैध खदान ठेकेदारों द्वारा लगभग 40 किलोमीटर की लम्बाई में केन नदी को पोकलैण्ड मशीनों से रातदिन खोदा जा रहा है। प्रतिबंध के बावजूद दोनों ही जिलों के रेत ठेकेदार खदान की निर्धारित सीमा के बाहर खुलेआम कई किलोमीटर मशीनें चलवाकर पानी के अंदर से रेत निकाल रहे है। मानसून सीजन के पहले केन की ज्यादा से ज्यादा रेत लूटने की यहाँ हर तरफ होड़ मची है। पूर्णतः अवैध खदानें संचालित करने वाले माफिया भी रेत की डकैती में पीछे नहीं है।

खदानों में कई माह पूर्व समाप्त हो चुकी है रेत-

मझगायें खदान के समीप अवैध रेट से लोड होता हाइवा ।

मजेदार बात यह है कि पन्ना जिले की मझगांय, बरकोला, उदयपुर, बीरा क्रमांक-01, बीरा क्रमांक-02, सुनहरा, चंदौरा खदानों की रेत करीब तीन से चार माह पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसकी जानकारी सभी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को है। बावजूद इसके रेत के डम्प की आड़ में इन खदानों के ठेकेदार नदी के अंदर कई किलोमीटर में मशीनों से रेत निकाल रहे है। दैत्याकार पोकलैण्ड और जेसीबी मशीनों के नुकीले जबड़े जब नदी की तलछट को नोंचते हुए रेत निकालते है तो जलीय जीव और वनस्पति भी नष्ट हो जाती है। नदी के अंदर की जैवविविधता और पर्यावर्णीय विनाश में अपनी संलिप्तता को छिपाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी बड़ी ही चालाकी के साथ बीच-बीच में कार्यवाही के नाम पर दिखावा करते रहते है। परिणामस्‍वरूप्‍ा केन नदी के जिगनी घाट में चल रही राजनैतिक खदानों पर रोक लगाने में प्रशासन नाकाम रहा है। चंदौरा रेत खदान के नाम पर जिगनी घाट की रेत सरेआम निकाली जा रही है। आश्चर्य की बात है कि खदान ठेकेदारों के डम्प से रेत की लगातार लोडिंग के बावजूद भण्डारित रेत की मात्रा घटने की बजाय उल्टा हर दिन कई गुना बढ़ जाती है। यह चमत्कार ऐसे समय पर घटित हो रहा है जबकि स्वीकृत खदानों में रेत ही नहीं बची है। दरअसल ठेकेदार एक तरफ डम्प से रेत की बिक्री का धंधा चल रहे है तो वहीं दूसरी ओर नदी में जहां कहीं भी रेत मौजूद है मशीनों के जरिये उसे निकालकर ट्रेक्टर-ट्राली से डम्प तक परिवहन कराया जा रहा है। शाम ढलने पर कहीं-कहीं सीधे नदी से भी रेत की लोडिंग वाहनों में की जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक छतरपुर और पन्‍ना जिले की वैध-अवैध खदानों से प्रतिदिन 500-700 ट्रक रेत निकाली जा रही है।

प्रशासन ने दी खुली छूट-

पन्ना में मची अराजकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कमीशन के चक्कर में जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों ने रेत खदान ठेकेदारों और माफियाओं को मनमानी करने की खुली छूट दे रखी है। बरकोला खदान में नदी के अंदर रेत छानने के लिए क्रेशर की तरह विशाल मशीन दो साल से लगी है लेकिन खनिज और राजस्व अधिकारियों की इस पर आज तक नजर नहीं पड़ी। उधर चांदीपाठी से लेकर चंदौरा नहर तिराहे तक रेत के वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए करीब 3 किलोमीटर में नदी में मिलने वाले विशेष किस्म के चिकने पत्थर (बटइयां) ठेकेदारों ने बिछा रखी है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ठेकेदारों को रेत निकालने की लीज मिली है या फिर हर तरह से नदी का दोहन करने का पट्टा मिल गया है। इतनी बड़ी तादाद में बटैइया निकालकर नहर मार्ग पर बिछाने के बावजूद ठेकेदार के खिलाफ कार्यवाही करना तो दूर जिम्मेदारों ने पूंछतांछ करना भी उचित नहीं समझा। केन नदी में मिलने वाले विशेष किस्म के चिकने पत्थर बटइयां की बाहर अच्छी खासी मांग को देखते हुए बरकोला खदान ठेकेदार भी इसकी बिक्री का धंधा लम्बे समय से कर रहे है। अराजकता के इस माहोल के मद्देनज़र यदि शीघ्र ही केन नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए ईमानदार पहल नहीं की गई तो मिढ़ासन की तरह यह भी बरसाती नदी बन सकती है। भावी पीढ़ी को यदि हम बेहतर कल देना चाहते है तो हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत रूपी नदियों और पर्यावरण को बचाने के लिए तुरंत ही कुछ करना होगा।