खजुराहो लोस सीट : पूर्व दस्यु सरगना ददुआ के पुत्र वीर सिंह के सपा प्रत्याशी घोषित होने रोचक होगा मुकाबला, BJP ने उम्मीदवार के नाम का अब तक नहीं किया ऐलान, टीकमगढ़ में आरडी प्रजापति के आने से त्रिकोणीय संघर्ष के आसार

* नामांकन दाखिल करने की आज से शुरू हुई प्रक्रिया
शादिक खान, खजुराहो / टीकमगढ़ । रडार न्यूज समाजवादी पार्टी ने मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल अंतर्गत आने वाले खजुराहो और टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। दोनों जगह से दो पूर्व विधायकों को चुनावी महासमर में उतार कर सपा ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। खजुराहो सीट से दस्यु सरगना रहे ददुआ के पुत्र वीर सिंह पटेल को प्रत्याशी घोषित किया है। छतरपुर जिले के चंदला से भाजपा विधायक राजेश प्रजापति के पिता एवं पूर्व विधायक आरडी प्रजापति को समाजवादी पार्टी ने आरक्षित टीकमगढ़ लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है। भाजपा से टिकिट न मिलने पर नाराज चल रहे आरडी प्रजापति गत दिवस लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के समक्ष बिजावर विधायक राजेश शुक्ला की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। जिसके बाद उन्हें टीकमगढ़ सीट से प्रत्याशी घोषित किया गया। यहाँ उनकी टक्कर भाजपा के उम्मीदवार डॉ. वीरेंद्र कुमार और कांग्रेस की किरण अहिरवार से होगी। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच लोकसभा चुनाव पूर्व हुए गठबंधन के चलते मध्यप्रदेश की खजुराहो, टीकमगढ़ समेत तीन संसदीय सीटें समाजवादी पार्टी को मिलीं है। उत्तर प्रदेश से सटे खजुराहो और टीकमगढ़ क्षेत्र लिए मंगलवार को सपा के उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगने के बाद से सीमावर्ती में क्षेत्र सियासी हलचल तेज हो गई है।
प्रत्याशी को लेकर असमंजस में भाजपा

अंतर्राष्ट्रीय पहचान वाले खजुराहो संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चित्रकूट सदर के पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाकर बहुसंख्यक वर्ग को साधने के लिए बड़ा दांव चला है। इससे निश्चित ही कांग्रेस और भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ गईं है। खजुराहो सीट से कांग्रेस ने राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी कविता सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। पूर्व छतरपुर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली कविता सिंह का मायका पन्ना जिले में और ससुराल खजुराहो में स्थित है। पारिवारिक पृष्ठभूमि और क्षेत्रीयता के आधार पर कांग्रेस की कविता सिंह को मजबूत प्रत्याशी के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी का अभेद किला कहलाने वाली खजुराहो सीट पर पार्टी नेतृत्व अब तक योग्य उम्मीदवार तय नहीं कर पाया है।

इस सीट का चुनावी इतिहास, मतदाताओं का रुझान, और तीन माह पूर्व संपन्न हुए 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा के पक्ष में होने के बाद भी प्रत्याशी चयन को लेकर शीर्ष स्तर पर असमंजस की स्थिति बरकरार है। विधानसभा चुनाव के समय भी बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान अंतिम समय में किया था, लोकसभा चुनाव में भी यही स्थिति बनती दिख रही है। बताते चलें कि बुधवार 10 अप्रैल से खजुराहो संसदीय क्षेत्र के लिए नाम-निर्देशन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पन्ना में शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार नाम-निर्देशन पत्र भरने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल निर्धारित है।
बहुसंख्यक वर्ग पर फोकस

समाजवादी पार्टी ने खजुराहो सीट पर पिछड़े वर्ग से आने वाले वीर सिंह पटेल को अपना उम्मीदवार बनाकर बहुसंख्यक वर्ग को समर्थन हाँसिल करने का दाँव चला है। चुनाव में जातिगत फैक्टर के प्रभाव और खजुराहो सीट पर पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की तादाद 50 प्रतिशत से अधिक होने के मद्देनजर विश्लेषकों मानना है कि सपा प्रत्याशी वीर सिंह पटेल को कम करके नहीं आँका जा सकता। बसपा का समर्थन प्राप्त होने से इनकी स्थिति और भी मजबूत हो जाती है। बसपा का वोट बैंक माने जाने वाले दलित मतदाता यदि सपा के साथ जाते हैं तो कांग्रेस और भाजपा के लिए चुनावी मुकाबला बेहद संघर्षपूर्ण हो जाएगा। खजुराहो संसदीय क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के बाद दलित और अनुसूचित जनजाति वर्ग के मतदाता बड़ी तादाद में है। जन चर्चाओं पर भरोसा करें तो इस चुनाव में सपा के रणनीतिकारों की योजना बहुसंख्यक पिछड़े वर्ग, दलित, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट करना है। बहुसंख्यक वर्ग के ध्रुवीकरण की योजना के तहत ही समाजवादी पार्टी ने पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है। सपा को अपने उद्देश्य कितनी सफलता मिलती यह तो समय आने पर ही पता चलेगा। बहरहाल, सबकी नजरें अब भाजपा प्रत्याशी की घोषणा पर टिकीं है। बीजेपी जातिगत समीकरणों को साधने के लिए किसी सवर्ण या फिर पिछड़े वर्ग के नेता पर दाँव लगाती यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। क्योंकि, भाजपा प्रत्याशी के नाम का ऐलान होने के बाद ही खजुराहो लोकसभा सीट पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ़ होगी।
अंधेरगर्दी | एक रेंज में दो रेंजर पदस्थ, एक के पास प्रभार-दूसरा बिना प्रभार के कर रहा काम, अधीनस्थ कर्मचारी असमंजस में किसका मानें फरमान !
* तमाशबीन बने डीएफओ ने निर्मित की विचित्र स्थिति
* उत्तर वन मंडल पन्ना के विश्रामगंज रेंज का मामला
* विवादित और भ्रष्ट रेंजर को स्थानांतरण के बाद भी नहीं किया रिलीव
* बिना प्रभारी के ठप्प पड़ीं उड़नदस्ता की गतिविधियाँ, कैसे रुकेंगे वन अपराध
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के सामान्य और संरक्षित वन क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से अराजकता पूर्ण स्थिति निर्मित है। इसके लिए काफी हद तक स्थानीय अधिकारी सीधे तौर जिम्मेदार हैं। कारण, कर्तव्य के निर्वहन के प्रति उदासीन अफसर जबाबदेही के आभाव में स्वार्थपूर्ति की नीति पर चल रहे है। इस मामले में मैदानी अमला भी वरिष्ठ अधिकारियों का अनुसरण कर रहा है। परिणामस्वरूप अब यहाँ न तो जंगल सुरक्षित हैं और न ही जानवर। हालात इतने अधिक खराब हो चुके हैं कि जिले के वन विभाग में वन और वन्यजीवों के संरक्षण-संवर्धन के लिए आने वाले बजट को ठिकाने लगाने और माफियाओं तथा शिकारियों से वन संपदा का सौदा कर तिजोरी भरने का उपक्रम चल रहा है। बजट की इस बंदरबांट में शासन के नियम-निर्देश एवं शीर्ष अधिकारियों के आदेश मजाक बन चुके है। जिले के उत्तर वन मंडल अंतर्गत आने वाली विश्रामगंज रेंज में एक माह से दो-दो रेंजर पदस्थ होना इसका एक उदाहरण मात्र है।
एक रेंज कार्यालय में जहाँ दो-दो रेंजर डटे हैं वहीं वन अपराधों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाने वाला उड़नदस्ता की गतिविधियाँ बिना प्रभारी के ठप्प पड़ीं हैं। इससे पता चलता है कि यहाँ प्राथमिकता वन और वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं बल्कि कुर्सी है। चिंताजनक पहलू यह है कि उत्तर वन मंडल पन्ना के डीएफओ अपने शीर्ष अफसरों के आदेश पर अमल कर व्यवस्था बनाने के बजाय निहित स्वार्थपूर्ति के चक्कर में तमाशबीन बने हैं। इनकी उदासीनता के कारण अंधेरगर्दी को बढ़ाबा मिल रहा है। उधर, दो-दो रेंज अफसर पदस्थ होने से विश्रामगंज के वनकर्मी और चौकीदार परेशान हैं, दरअसल इन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वे किस रेंज अफसर का आदेश मानें। कुछ दिन पूर्व तक जिले के दक्षिण वन मंडल की शाहनगर रेंज में दो-दो रेंजर वाली स्थिति रही है।
इतनी मेहरबानी क्यों !
मुख्य वन संरक्षक वृत्त छतरपुर ने 10 मार्च 2019 को एक आदेश जारी करते हुए उत्तर वन मंडल पन्ना के उड़नदस्ता प्रभारी नंदा प्रसाद अहिरवार को पन्ना रेंज में बतौर प्रभारी वन परिक्षेत्राधिकारी, पन्ना के प्रभारी रेंजर कौशलेन्द्र पाण्डेय को विश्रामगंज रेंज और विश्रामगंज के प्रभारी रेंजर मनोज सिंह बघेल की नवीन पदस्थापना उड़नदस्ता प्रभारी के रूप में की थी। तत्काल प्रभाव से जारी इस आदेश पर अमल करते हुए उसी दिन नंदा प्रसाद अहिरवार ने पन्ना रेंज का पदभार गृहण कर लिया उधर कौशलेन्द्र पाण्डेय ने विश्रामगंज रेंज में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। लेकिन कुर्सी के मोह के चलते विश्रामगंज के प्रभारी रेंजर मनोज सिंह बघेल ने सीसीएफ के आदेश को नहीं माना। फलस्वरूप विश्रामगंज रेंज में दो-दो रेंजर पदस्थ होने से विचित्र स्थिति हो गई, जोकि महीने भर से बरकरार है।
गौरतलब है कि डीएफओ उत्तर वन मंडल ने बिना प्रभारी के उड़नदस्ता की गतिविधियाँ ठप्प होने की परवाह किये बगैर मनोज बघेल को पूरा मौका दिया कि वे हाईकोर्ट जबलपुर से स्थगन आदेश ले आएँ। हालाँकि, श्री बघेल को इसमें सफलता नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उनकी रिट पिटीशन को 20 मार्च 2019 को ख़ारिज कर दिया। इसके पश्चात प्रभार देने से बचने के लिए वह मेडिकल अवकाश पर चले गए। कुछ दिन पूर्व मनोज बघेल अवकाश से वापिस लौट चुके है लेकिन अब तक उन्होंने कौशलेंद्र पाण्डेय को प्रभार नहीं दिया है।
किंकर्तव्यविमूढ़ बने बैठे डीएफओ इस मामले में सीसीएफ के आदेश पर अमल कराने के प्रति जानबूझकर उदासीनता बरत रहे है। साहब से मिल रहे इस संरक्षण का लाभ उठाकर अपात्र व्यक्ति रेंजर का प्रभार सम्भाल रहा है। मालूम हो कि कौशलेंद्र पाण्डेय और नंदा प्रसाद अहिरवार सीनियर डिप्टी रेंजर हैं, जबकि मनोज बघेल इन दोनों से जूनियर है। नियमानुसार रेंजर का प्रभार सीनियर डिप्टी रेंजर को मिलना चाहिए। लेकिन पिछली सर्कार में राजनैतिक पहुँच और वरिष्ठ अफसरों को खुश करने की व्यवस्थाओं के बलबूते श्री बघेल अपात्र होने के बाद भी पिछले कई वर्षों से विश्रामगंज रेंज के प्रभारी बने बैठे है।
विवादित और भ्रष्ट अफसर की छवि
डिप्टी रेंजर मनोज बघेल लंबे समय से पन्ना जिले में पदस्थ हैं। इनकी छवि एक विवादित और भ्रष्ट अफसर की है। विश्रामगंज रेंजर का प्रभार मिलने के बाद इन पर रुपये लेकर वन क्षेत्र में हीरा-पत्थर खदानें संचालित कराने सरीके संगीन आरोप लग चुके है। कुछ माह पूर्व श्री बघेल की पत्नी के नाम पर दर्ज ट्रेक्टर को वन क्षेत्र में अवैध तरीके से जुताई करते हुए खुद इनके ही द्वारा पकड़ा गया था। इस प्रकरण की तहक़ीत करने पर पता चला कि प्रभारी रेंजर ने उक्त ट्रेक्टर को पहले बगैर वैधानिक प्रक्रिया के एक आदिवासी को बेंच दिया और फिर उससे अतिरिक्त राशि वसूलने के लालच में ट्रेक्टर को कथित तौर पर वन भूमि में जुताई करते हुए पकड़ना बताकर वन अपराध पंजीबद्ध किया था। इसके पूर्व जिले के बृजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शासकीय वाहन से हुए एक्सीडेंट के प्रकरण में इनके गलत बर्ताव के कारण मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी थी।

करीब डेढ़ वर्ष पूर्व सिरस्वाहा में श्री बघेल ने स्थल की समुचित जाँच किये बगैर पट्टे की निजी भूमि में पौधरोपण करा दिया था। इससे इलाके में न सिर्फ विवाद की स्थिति बनी बल्कि मामला राजस्व न्यायालय भी पहुँचा जहाँ से वन विभाग के खिलाफ निर्णय आया। इस बीच प्रभावित भूमि मालिकों ने पौधरोपण को अपने स्वामित्व की भूमि से उखाड़ फेंका जिससे वन विभाग को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। इसके अलावा पिछले वर्ष गर्मी के मौसम में जंगल में वन्य प्राणियों की पेयजल व्यवस्था हेतु झिरिया आदि संरचनायें बनवाने के लिए आए करीब 5 लाख रुपए का कागजों में खर्च दिखाकर बंदरबाँट किया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो इनके अब तक कार्यकाल में जितने भी निर्माण कार्य हुए है उनमे जमकर घालमेल हुआ है। बाबजूद इसके डीएफओ साहब इनकी कारगुजारियों की अनदेखी कर विभाग में अंधेरगर्दी और भ्रष्टाचार को प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से संरक्षण प्रदान कर रहे है। इस मामले में जब विश्रामगंज रेंज के प्रभारी रेंजर मनोज सिंह बघेल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
इनका कहना है –
“मैं किसी भी तरह के राजनैतिक दबाब या लालच में नहीं हूँ, मैं शीघ्र ही मनोज बघेल के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करूँगा, कोई भी शासन के निर्देशों से ऊपर नहीं है। गलत कार्य करने वालों को मैंने कभी संरक्षण नहीं दिया और न ही कभी दूँगा। विश्रामगंज रेंजर कौशलेंद्र पाण्डेय है, जहाँ तक दो-दो रेंजरों की समस्या का सवाल है तो इसके समाधान के लिए उचित कदम उठाऊंगा जिसकी जानकारी शीघ्र ही आपको मिल जाएगी।”
– नरेश सिंह यादव, डीएफओ उत्तर वन मंडल पन्ना।
“नवीन पदस्थापना आदेश में शायद कुछ खामी रही है, जिसके विरुद्ध मनोज बघेल ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन उन्हें वहाँ से स्थगन नहीं मिला है इसलिए पूर्व में जारी आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
– के. एस. भदौरिया, प्रभारी सीसीएफ वृत्त छतरपुर।
लोकसभा निर्वाचन-2019 : मध्य प्रदेश में 14 अभ्यर्थियों के 16 नाम निर्देशन-पत्र प्राप्त
* चौथे चरण में प्रदेश के 6 संसदीय क्षेत्रों में होना है मतदान
भोपाल। रडार न्यूज लोकसभा निर्वाचन-2019 के चौथे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी की गई। इस चरण में प्रदेश के कुल 29 में से 6 संसदीय क्षेत्र सीधी, शहडोल, जबलपुर, मण्डला, बालाघाट एवं छिन्दवाड़ा सम्मिलित हैं। आज 5 अप्रैल को छिन्दवाड़ा एवं जबलपुर जिले में एक-एक, सीधी एवं बालाघाट जिले में 3-3 , शहडोल जिले में 5 नाम निर्देशन-पत्र प्राप्त हुए। अधिसूचना जारी होने से आज तक संसदीय क्षेत्र बालाघाट में 4, छिन्दवाड़ा में 3, सीधी में 3, शहडोल में 3 एवं जबलपुर में 1 इस प्रकार कुल 14 अभ्यर्थियों के 16 नाम निर्देशन-पत्र प्राप्त हुए। मण्डला क्षेत्र में अभी तक कोई भी नाम निर्देशन-पत्र प्राप्त नहीं हुआ।
इसी प्रकार विधानसभा उप-निर्वाचन-2019 अंतर्गत 126 – छिन्दवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की अधिसूचना भी 2 अप्रैल को जारी की गई। जिसमें 5 अप्रैल को कोई भी नाम निर्देशन-पत्र प्राप्त नहीं हुए। इस प्रकार अधिसूचना जारी होने से आज तक कुल तीन अभ्यर्थियों के तीन नाम निर्देशन-पत्र प्राप्त हुए हैं।
लोकसभा निर्वाचन : 10 लाख से अधिक के 90 संदेहास्पद लेन-देन की जानकारी बैंकों ने आयकर विभाग को दी

* स्टार प्रचारकों एवं उम्मीदवारों के वाहनों की होगी सघन जाँच
* सीईओ ने ली निर्वाचन व्यय निगरानी नोडल अधिकारियों की बैठक
भोपाल। रडार न्यूज लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2019 अंतर्गत निर्वाचन व्यय निगरानी नोडल अधिकारियों की बैठक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कान्ता राव की अध्यक्षता में हुई। श्री राव ने कहा कि लोकसभा निर्वाचन की आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक एजेंसियों ने बेहतर समन्वय से कार्य किया है। आबकारी विभाग अवैध शराब के परिवहन, वितरण एवं विक्रय के मामलों में सख्ती से चैकिंग कर कार्यवाही करें। स्टार प्रचारकों एवं उम्मीदवारों के वाहनों की सघन जाँच की जाये किन्तु आम नागरिकों एवं किसानों को जाँच के नाम पर परेशान नहीं किया जाये।
400 से अधिक वीडियो निगरानी टीमें तैनात
पुलिस विभाग के नोडल अधिकारी पुलिस महानिरीक्षकअनंत कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस की सभी टीमें कार्यरत हैं। 788 उड़नदस्ता, 798 स्थैतिक निगरानी दल व 400 से अधिक वीडियो निगरानी टीमें कार्य कर रही हैं। छिन्दवाड़ा जिले में लोकसभा के साथ विधानसभा उप-चुनाव होने के चलते निर्धारित से अधिक पुलिस टीमें लगायी गयी हैं। नोडल अधिकारी रेलवे ने बताया कि 293 टीमें गठित की गयी हैं। नोडल अधिकारी-नारकोटिक्स ने बताया कि लोकसभा निर्वाचन 2019 में 340 प्रकरण पंजीबद्ध किये जा चुके हैं।
नोडल अधिकारी एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि प्रतिदिन चैकिंग की जा रही है। नोडल अधिकारी बैंक ने बताया कि 10 लाख रूपये से अधिक के प्रकरणों की जानकारी आयकर विभाग को दी जा रही है। अभी तक कुल 90 संदेहास्पद लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को दी गयी है। बैठक में संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश कौल, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजेश श्रीवास्तव तथा गृह, दूरसंचार, परिवहन, दूरदर्शन, आकाशवाणी, केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के नोडल अधिकारी भी शामिल हुए।
गेहूँ परिवहन के साथ ही किसान को उपलब्ध कराया जाएगा पेमेंट नोट

जिला स्तर पर विकेन्द्रीकृत होगी एसएमएस व्यवस्था
मुख्य सचिव श्री मोहन्ती ने वी.सी. से की गेहूँ उपार्जन की समीक्षा
भोपाल। रडार न्यूज मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहन्ती ने आज मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से रबी विपणन वर्ष 2019-20 में समर्थन मूल्य पर गेंहूँ उपार्जन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। श्री मोहन्ती ने संभागायुक्तों एवं जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि सभी खरीदी केन्द्रों की संख्या और उनके स्थान की उपयुक्तता की समीक्षा करें। समीक्षा में परिवहन सुगमता को ध्यान में रखा जाये। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से परिवहन के लिए ट्रक में गेहूँ के लदान के साथ ही पेमेंट नोट किसान को उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्य सचिव ने गेहूँ उपार्जन में दो टैग के स्थान पर एक टैग लगाने के निर्देश दिये।
मंडियों में करें आवश्यक व्यवस्थाएँ
मुख्य सचिव श्री मोहन्ती ने कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में एसएमएस व्यवस्था को जल्द ही जिला स्तर पर विकेन्द्रीकृत किया जाएगा। उन्होंने कलेक्टरों को भण्डारण व्यवस्था के लिए जिला स्तर पर आवश्यक समन्वय बनाये रखते हुए निरंतर सक्रिय रहने को कहा। श्री मोहन्ती ने कहा कि मंडियों में गेहूँ उपार्जन के दौरान पेयजल, कूलर, पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टम और किफायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करें। मुख्य सचिव ने जिला कलेक्टरों से खरीदी केन्द्रों, संभावित आवक तथा भण्डारण व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थागत विषयों की जानकारी ली।
वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री अशोक बर्णवाल, प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्रीमती नीलम शमी राव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
रक्षक बने भक्षक : रेंजर और वनकर्मियों ने जंगली सुअर के शिकारियों को रुपए लेकर छोड़ा, टाईगर स्ट्राईक फोर्स गुप्त सूचना पर जाँच करने पहुँची तो मचा हड़कंप
* पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल की रैपुरा रेंज का मामला
* प्रकरण के खुलासे के बाद डीएफओ ने भी अपने पर शुरू की जाँच
* प्रभारी मुख्य वन संरक्षक बोले दोषियों के खिलाफ करेंगे कठोर कार्रवाई
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जंगली सुअर के शिकार से जुड़े एक मामले को रेंजर और वनकर्मियों द्वारा रूपए लेकर रफा-दफा करने तथा हिरासत में लिए गए शिकारी को छोड़ने का मामला प्रकाश में आया है। वन्यजीवों के रक्षक से भक्षक बने भ्रष्ट वन परिक्षेत्राधिकारी एवं कर्मचारियों के काले कारनामे का फंडाफोड़ तब हुआ जब गुप्त सूचना मिलने पर सतना से टाईगर स्ट्राईक फोर्स प्रकरण की जाँच के सिलसिले में पन्ना जिले के रैपुरा पहुँची। इस घटनाक्रम से पन्ना से जिले के वन विभाग में हड़कंप मचा है। दक्षिण वन मंडल की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा इस अप्रत्याशित खुलासे को लेकर हतप्रभ हैं, उन्होंने अधीनस्थ अमले के कृत्य को अत्यंत ही शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके द्वारा उप वनमंडलाधिकारी पवई से पृथक से अपने स्तर जाँच कराई जा रही है। पता चला है कि डॉग स्क्वॉड के साथ रैपुरा पहुंची टाईगर स्ट्राईक फोर्स ने शिकार हुए जंगली सुअर की हड्डियाँ आदि साक्ष्य संकलित किए है। इसके अलावा एक कथित शिकारी को भी हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपी ने शिकार की घटना को दबाने के एवज में वन अमले द्वारा रुपए लेने की बात अपने बयान में बताई है। जिसकी पुष्टि टाईगर स्ट्राईक फोर्स सतना की प्रभारी अधिकारी श्रद्धा बंदे ने मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक में चर्चा की है। शिकार की गहन जाँच के चलते रैपुरा के रेंजर देवेश गौतम समेत अन्य कर्मचारियों पर शिकंजा कसने और फरार चल रहे तीन अन्य शिकारियों की धरपकड़ के लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दिए जाने से समूचे क्षेत्र में हड़कंप मचा है।
क्या है मामला

पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत जमुनिया बीट में होली के त्यौहार के पूर्व कुछ लोगों ने मिलकर एक जंगली सुअर का शिकार किया था। इसका पता चलने पर सम्बंधित बीट गार्ड, चौकीदार एवं अन्य वन कर्मचारियों ने आरोपियों के घर से सुअर का माँस आदि जब्त किया गया। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर वनकर्मी रैपुरा स्थित वन परिक्षेत्राधिकारी के कार्यालय ले गए थे। जहाँ हिरासत में रखने के दौरान कथित तौर आरोपी की रेंजर से साँठगाँठ हो गई। जनचर्चा अनुसार रेंजर ने करीब डेढ़ लाख रूपए लेकर कोई प्रकरण दर्ज किये बगैर ही आरोपी को छोड़ दिया। इस डील में शिकारी को पकड़ने वाले वनकर्मी भी शामिल रहे। वन और वन्यजीवों के रक्षकों द्वारा रुपयों के लिए बेजुबान वन्यप्राणियों के शिकारियों को संरक्षण देने की खबर के फैलने पर किसी ने इसकी सूचना स्पेशल टॉस्क फोर्स सतना को दे दी।

फलस्वरूप गत दिवस जब टाईगर स्ट्राईक फोर्स इस मामले की जांच के सिलसिले में दलबल के साथ रैपुरा पहुँची तो रिश्वतखोर अधिकारियों-कर्मचारियों में खलबली मच गई। अपने कारनामे को छिपाने के लिए इनकी ओर से हर संभव कोशिश की गई लेकिन जाँच टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए जंगली सुअर के शिकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए लिए। इसके अलावा शिकार में शामिल रहे एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूरे मामले में रेंजर एवं वनकर्मियों की भूमिका की जानकारी हांसिल की गई। सूत्रों से पता चला है कि इस आधार पर प्रभारी अधिकारी ने रेंजर समेत उनके मातहतों के बयान दर्ज किए है। फ़िलहाल शिकार के मामले में फरार चल रहे तीन अन्य आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। उधर, रिश्वत कांड में खुद को फंसता देख रैपुरा रेंजर देवेश गौतम के भूमिगत होने की अपुष्ट चर्चाएं हैं। इस प्रकरण में श्री गौतम से जब उनका पक्ष जानने के कोशिश की गई तो उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।
वन संपदा और वन्यप्राणियों के आए बुरे दिन

पन्ना जिले के संरक्षित और सामान्य वन क्षेत्र में पिछले 2 वर्ष से सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। जिले के उत्तर-दक्षिण वन मंडल एवं पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत इस अवधि में करीब एक दर्जन तेन्दुओं की मौत हो चुकी है। जिनमें आधे से अधिक तेंदुओं का शिकार हुआ था। इसके अलावा एक युवा बाघिन, और भालू के शिकार की घटनायें भी सामने आई हैं। इतना ही नहीं कुशल तैराक कहलाने वाले एक हाथी की भी केन नदी में डूबने से असमान्य मौत, बड़े पैमाने पर इमारती और जलाऊ लकड़ी की अंधाधुंध अवैध कटाई, वन क्षेत्र में हीरा, पत्थर पाटिया और रेत की खुलेआम जारी लूट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यहाँ की वन संपदा और बेजुबान वन्यजीवों पर हर समय गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कड़ी सुरक्षा वाले पन्ना टाइगर रिजर्व तक में वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। पिछले वर्ष दक्षिण वन मंडल की पवई रेंज अंतर्गत भालू के शिकार के मामले में खुलासा हुआ था कि जिले में शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय है। बाबजूद इसके वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर मैदानी अमला जानबूझकर घोर लापरवाही बरत रहा है।

कुछ समय पूर्व शाहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत जंगल में विधुत तार बिछाकर शिकार करने के दौरान एक शिकारी की करंट लगने से मौत होने की घटना का पता तत्कालीन रेंजर और वनकर्मियों को कई दिन बाद चला था। इसी तरह उत्तर वन मंडल पन्ना के धरमपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत बड़े पैमाने पर वृक्षों की अवैध कटाई होने की जानकारी हाल ही में एक समाचार पत्र में खबर छपने के बाद मिली। इन चंद उदाहरण से वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर मैदानी अमले की सजगता तथा निगरानी व्यवस्था का पता चलता है। इस स्थिति का लाभ उठाकर जिले में लंबे समय से सक्रिय खनन माफिया, सागौन तस्कर, शिकारी और अतिक्रमणकारी हर दिन चौतरफा जंगल को उजाड़ रहे हैं। बेहद ख़राब हो चुके के हालात के मद्देनजर पन्ना में आबाद हुए बाघों के संसार के पुनः उजड़ने का खतरा बना है। क्योंकि, अब तक खनन माफिया, सागौन तस्करों, अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देते रहे कतिपय वन अधिकारी-कर्मचारी अब वन्यजीवों के शिकारियों को भी रूपए लेकर छोड़ने लगे हैं। इनकी रुपयों की भूख इतनी अधिक बढ़ चुकी है जंगल के कतिपय रक्षक ही अब इसके भक्षक बन चुके हैं इसलिए जंगल के अंदर अब कुछ भी सुरक्षित नहीं है।
इनका कहना है –
“टाईगर स्ट्राईक फोर्स के जाँच के सिलसिले में आने पर डीएफओ दक्षिण ने मुझे इस मामले की जानकारी दी थी, शिकारियों को रुपए लेकर छोड़ना बेहद गंभीर मामला है। इस खुलासे से हम सभी हैरान है। मैंने डीएफओ को अपने स्तर पर भी रैपुरा की घटना की जाँच करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में किसी भी दोषी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
– के. एस. भदौरिया, प्रभारी सीसीएफ वृत्त छतरपुर।
“शिकारियों को रुपए लेकर छोड़ने के घटनाक्रम का पता चलने से स्तब्ध हूँ, इस प्रकरण से मैदानी अमले के प्रति भरोसा टूटा है। पूरे मामले की सूक्ष्मता से जाँच कराई जा रही है, इसमें जिसकी भी संलिप्तता उजागर होगी उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी ताकि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृति न हो।”
– मीना कुमारी मिश्रा, डीएफओ दक्षिण वन मंडल पन्ना।
लोकसभा निर्वाचन -2019 : आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें : कांताराव

सीईओ ने की सागर, रीवा, नर्मदापुरम संभाग में तैयारियों की समीक्षा
भोपाल। रडार न्यूज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कांताराव ने आज सागर में रीवा, सागर और नर्मदापुरम संभाग में लोकसभा चुनाव-2019 की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव संपन्न कराने के लिए आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। इस मौके पर भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव संतोष कुमार, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अरूण कुमार तोमर, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अभिजीत अग्रवाल, आईजी कानून-व्यवस्था योगेश चौधरी, आईजी निर्वाचन व्यय अनन्त कुमार सिंह, आईजी नारकोटिक्स जी.जी. पांडेय, सयुंक्त निदेशक आयकर प्रशांत कुमार मिश्रा, आबकारी आयुक्त रजनीश श्रीवास्तव, तीनों सम्भाग के संभागायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक तथा सभी 11 जिलों के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक मौजूद थे।
सीमावर्ती मार्गों पर रखें कड़ी निगरानी
श्री कान्ताराव ने कलेक्टरों से ईव्हीएम एवं व्हीव्हीपेट मशीन की उपलब्धता और आवश्यकता, चुनाव के लिये उपलब्ध मानव संसाधन एवं उनका प्रशिक्षण, वाहनों की जरूरत, वल्नरेबल एवं क्रिटिकल बूथ पर सुरक्षा इंतजामों की जिलेवार जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आचार संहिता एवं निर्वाचन नियमों के उल्लंघन सम्बन्धी शिकायतें प्राप्त करने के लिये जिलों में स्थापित कंट्रोल रूम और जिला सम्पर्क केंद्र के टोल फ्री नम्बर 1950 के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। साथ ही सीमावर्ती जिलों में प्रवेश मार्गों पर कड़ी निगरानी के लिये पड़ोसी राज्य के अधिकारियों के साथ लगातार सम्पर्क बनाये रखने को कहा। आम जनता में जागरूकता के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने लोकसभा चुनाव में चुनाव खर्च की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों तथा वल्नरेबल पॉकेट्स में निगरानी तंत्र को मजबूत करने को कहा। उन्होंने कहा कि गैर कानूनी तरीके से चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों से सख्ती से निपटें।
शिकायतों पर करें तत्काल कार्यवाही
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कांताराव ने आदर्श आचार संहिता, सम्पत्ति विरूपण, आबकारी अधिनियम तथा निर्वाचन नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए और अभी तक की गई कार्यवाही की समीक्षा की। उन्होंने चुनाव में धनबल और बाहुबल को रोकने के लिए जिलों में गठित एफएसटी और एसएसटी दलों को ज्यादा सक्रिय करने की जरूरत बताई। श्री राव ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए जिलों में किये जा रहे सुरक्षा इंतजामों की जानकारी भी ली।
दिव्यांग मतदाताओं को मिलें आवश्यक सुविधाएँ
श्री कांताराव ने प्रतिबंधित धाराओं के तहत आपराधिक तत्वों के विरुद्ध बाउंड ओवर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। मतदान केंद्रों पर सभी जरूरी सुविधाएँ सुनिश्चित करने पर बल देते हुए उन्होंने विधानसभा चुनाव-2018 के मुकाबले लोकसभा चुनाव-2019 में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिये स्वीप गतिविधियों को विस्तारित करने पर बल दिया। साथ ही, महिला मतदाताओं को मतदान करने के लिये जागरूक करने के निर्देश दिये। उन्होंने दिव्यांग मतदाताओं को मतदान केन्द्रों पर सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये कहा। श्री कांता राव ने समीक्षा के पहले मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत महिला बाईसिकल रैली को रवाना किया।
खजुराहो लोकसभा क्षेत्र : कांग्रेस प्रत्याशी ने शुरू किया चुनाव प्रचार, बीजेपी के खेमे में खींचतान जारी, उम्मीदवार के ऐलान में देरी से कार्यकर्ता निराश

* भाजपा के मजबूत किले को भेदने की बनने लगी रणनीति
* ब्लॉक स्तर पर कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठकों का दौर जारी
शादिक खान, खजुराहो / पन्ना। रडार न्यूज मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ बने खजुराहो संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस इस बार जीत का परचम लहराने की तैयारी में जुट गई है वहीं दूसरी ओर बीजेपी के प्रत्याशी की घोषणा में देरी के कारण दावेदारों के बीच जारी खींचतान से पार्टी में कलह और गुटबाजी बढ़ रही है। टिकिट की दौड़ में शामिल भाजपा नेता खुद को आगे बनाए रखने के लिए प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से दूसरों पर कीचड़ उछालने में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर यह काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। अपने नेता खिलाफ दुष्प्रचार (डर्टी पॉलिटिक्स) होने से नाराज समर्थकों में सिर फुटौवल जारी है।
स्थिति यह है कि खजुराहो सीट पर कांग्रेस पार्टी ने जहाँ कई दिन पूर्व राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा की पत्नी एवं खजुराहो नगर परिषद की अध्यक्ष कविता सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है, वहीं भाजपा अब तक अपने किले को अपराजेय बनाए रखने योग्य उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं कर पाई है। चुनावी कार्यक्रम की उल्टी गिनती शुरू होने के मद्देनजर उम्मीदवार घोषित होने में लगातार विलम्ब होने से भाजपा कार्यकर्ता निराश है। कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह ने इस स्थिति को भांपते हुए समय का पूरा सदुपयोग कर खजुराहो सीट पर इस बार इतिहास रचने की रणनीति बनाने में जुटी हैं। पूर्व छतरपुर राजघराने की बहू और पन्ना जिले के गुनौर विधानसभा क्षेत्र की बेटी कविता सिंह आत्म विश्वास से लबरेज है, उन्हें भरोसा है कि क्षेत्र से सीधा जुड़ाव होने का लाभ चुनाव में उन्हें चुनाव में अवश्य ही मिलेगा।
भाजपा सांसदों की नाकामी को बनाया मुद्दा

कांग्रेस प्रत्याशी का स्वागत करते भरत मिलन पाण्डेय।
पिछले दिनों गुनौर विधानसभा क्षेत्र के भ्रमण के दौरान पार्टी नेताओं और क्षेत्रीय लोगों को सम्बोधित करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी ने भावनात्मक अंदाज में बेटी के रिश्ते को उभारते हुए जोर देकर कहा कि- “बेटी कभी धोखा नहीं देती है, मैं भी जिले के लोगों को कभी धोखा नहीं दूँगी। आपकी हर उम्मीद पर खरी उतरूँगी।” कविता सिंह की यह बात लोगों के दिलों को छू गई। दरअसल, भाजपा के पूर्व एवं निवर्तमान सांसद द्वारा चुनाव के समय किये गए वादों को पूरा न करने से खुद को छला हुआ महसूस कर रहे जनमानस में व्याप्त निराशा और गुस्से को देखते हुए उन्होंने यह बात कही थी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पक्ष में जनमत निर्माण के लिए प्रत्याशी के साथ-साथ उनके विधायक पति विक्रम सिंह पसीना बहा रहे है।






“खजुराहो सीट पर उम्मीदवार के नाम के ऐलान में थोड़ी देर अवश्य हो रही है, पर भरोसा रखिये निर्णय दुरुस्त ही होगा। हमारे यहाँ व्यक्ति नहीं बल्कि पार्टी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पार्टी जिसे भी अपना प्रत्याशी घोषित करती है सब मिलकर उसे विजयी बनाने में जुट जाते है। प्रत्याशी चाहे जो भी हो खजुराहो सीट पर इस बार भी बीजेपी ही जीतेगी क्योंकि क्षेत्र का जनमानस हमारे साथ है। हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजे इसका प्रमाण है। लोग केन्द्र में मोदी जी के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार चाहते जो देश को सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ विकास के पथ पर आगे ले जाने में सक्षम है। खजुराहो क्षेत्र को रेल लाइन की सौगात, चौड़ीं सड़कें मोदी जी के ही कार्यकाल में मिली है।
” अति पिछड़े इस क्षेत्र के लोगों ने विकास की उम्मीद में लगातार कई बार भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को प्रचंड बहुमत से विजयी बनाकर दिल्ली भेजा है, लेकिन वे संसद में क्षेत्र की जनता की आवाज को बुलंद नहीं कर सके। चुनाव के समय जो वादे किये उन्हें भी पूरा नहीं किया। जनसमस्याओं के निराकरण और विकास से जुड़े मुद्दों पर भाजपा सांसदों ने घोर उदासीनता बरती है। इनके नाकारेपन का खामियाजा आज समूचे खजुराहो संसदीय क्षेत्र के लोग भुगत रहे हैं। भाजपा के झूठे वादों के कारण ही लोगों ने प्रदेश की शिवराज सरकार को उखाड़ फेंका है, अब बारी केन्द्र की मोदी सरकार की है। रहा सवाल खजुराहो सीट का तो कांग्रेस पार्टी ने यहाँ से योग्य एवं क्षेत्रीय प्रत्याशी के रूप में कविता सिंह को उतारा है, इस बार खजुराहो सीट पर कांग्रेस पार्टी जीत की इबारत लिखेगी।”
कलेक्टर मनोज खत्री ने सीमा से लगे विभिन्न मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हरदी में स्थापित मतदान केन्द्र क्रमाँक 121 एवं 122 का निरीक्षण कर बीएलओ से चर्चा करते हुए पूर्व के मतदान प्रतिशत की जानकारी एवं मतदान केन्द्र के मतदाताओं के संबंध में चर्चा की। इसी प्रकार माध्यमिक शाला एवं प्राथमिक शाला नरदहा, देबलपुर आदि के मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि भारत निर्वाचन आयोग की मंशानुसार मतदान केन्द्र पर मतदाताओं के लिए सुविधाएं होनी चाहिए। मतदान केन्द्र पर मतदाताओं के लिए छायावान, पेयजल की व्यवस्था के साथ-साथ महिला एवं पुरूष के लिए पृथक-पृथक शौचालय स्थापित होना चाहिए। उन्होंने मतदान का प्रतिशत बढाने के लिए चुनावी पाठशाला का संचालन कर मतदाता जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने रामनगर, हरनामपुर, रामनई, बरौली, तरौनी, मोकछ, छनेहा, अजयगढ़ की सीमा पर स्थित अन्तर्राज्यीय वन नाका पन्ना आदि का निरीक्षण किया। मौके पर स्थापित सीसीटीव्ही कैमरों के संचालन की व्यवस्था, कैमरों का बैकअप रखने की व्यवस्था, नाकों से गुजरने वाले वाहनों की पंजी का संधारण आदि अवलोकन किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सीसी टीवी कैमरे निरंतर चालू रखे जाएं। विद्युत अपरोध की स्थिति से निपटने के लिए सीसीटीव्ही कैमरों को बैट्ररी से जोड़कर चालू रखा जाए। प्रत्येक नाके पर सुरक्षा प्वाइंट बनाकर जवान को तैनात रखा जाए। नेटवर्क के संबंध में चर्चा करते हुए पुलिस अधीक्षक श्री अवस्थी ने कहा कि जहां नेटवर्क की परेशानी है वहां मोबाईल फोन के माध्यम से बैकअप लेकर सुरक्षित रखा जाए। राज्य की सीमा से आने वाली शराब अथवा अन्य सामग्री जो मतदान को प्रभावित करती हो उस पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
कलेक्टर मनोज खत्री ने निर्वाचन के लिए गठित दलों को निर्देश दिए कि हमें निष्पक्ष एवं स्वतंत्र निर्वाचन को सम्पन्न कराने के लिए हरसंभव प्रयास करने हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। हमारे द्वारा जो भी निर्वाचन संबंधी कार्य किए जा रहे हैं उसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वाहनों का निरीक्षण पूरी मुस्तैदी के साथ करें। ऐसे व्यक्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जाए जो मतदान को प्रभावित कर सकते हैं। क्षेत्र में ऐसे वातावरण का निर्माण किया जाए जिसमें आम मतदाता बगैर किसी भय के स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का उपयोग कर सके। इस निरीक्षण के दौरान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अजयगढ़ सुश्री आयुषी जैन, जनपद पंचायत अजयगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस.के. मिश्रा के साथ राजस्व एवं पुलिस के क्षेत्रीय अधिकारी, कर्मचारी साथ रहे।