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रक्षक बने भक्षक : रेंजर और वनकर्मियों ने जंगली सुअर के शिकारियों को रुपए लेकर छोड़ा, टाईगर स्ट्राईक फोर्स गुप्त सूचना पर जाँच करने पहुँची तो मचा हड़कंप

* पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल की रैपुरा रेंज का मामला

* प्रकरण के खुलासे के बाद डीएफओ ने भी अपने पर शुरू की जाँच

* प्रभारी मुख्य वन संरक्षक बोले दोषियों के खिलाफ करेंगे कठोर कार्रवाई

शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज   मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जंगली सुअर के शिकार से जुड़े एक मामले को रेंजर और वनकर्मियों द्वारा रूपए लेकर रफा-दफा करने तथा हिरासत में लिए गए शिकारी को छोड़ने का मामला प्रकाश में आया है। वन्यजीवों के रक्षक से भक्षक बने भ्रष्ट वन परिक्षेत्राधिकारी एवं कर्मचारियों के काले कारनामे का फंडाफोड़ तब हुआ जब गुप्त सूचना मिलने पर सतना से टाईगर स्ट्राईक फोर्स प्रकरण की जाँच के सिलसिले में पन्ना जिले के रैपुरा पहुँची। इस घटनाक्रम से पन्ना से जिले के वन विभाग में हड़कंप मचा है। दक्षिण वन मंडल की डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा इस अप्रत्याशित खुलासे को लेकर हतप्रभ हैं, उन्होंने अधीनस्थ अमले के कृत्य को अत्यंत ही शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उनके द्वारा उप वनमंडलाधिकारी पवई से पृथक से अपने स्तर जाँच कराई जा रही है। पता चला है कि डॉग स्क्वॉड के साथ रैपुरा पहुंची टाईगर स्ट्राईक फोर्स ने शिकार हुए जंगली सुअर की हड्डियाँ आदि साक्ष्य संकलित किए है। इसके अलावा एक कथित शिकारी को भी हिरासत में लिया है। पकड़े गए आरोपी ने शिकार की घटना को दबाने के एवज में वन अमले द्वारा रुपए लेने की बात अपने बयान में बताई है। जिसकी पुष्टि टाईगर स्ट्राईक फोर्स सतना की प्रभारी अधिकारी श्रद्धा बंदे ने मीडियाकर्मियों से अनौपचारिक में चर्चा की है। शिकार की गहन जाँच के चलते रैपुरा के रेंजर देवेश गौतम समेत अन्य कर्मचारियों पर शिकंजा कसने और फरार चल रहे तीन अन्य शिकारियों की धरपकड़ के लिए उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दिए जाने से समूचे क्षेत्र में हड़कंप मचा है।

क्या है मामला

श्रद्धा बंदे जाँच अधिकारी।
पन्ना जिले के दक्षिण वन मंडल की रैपुरा रेंज अंतर्गत जमुनिया बीट में होली के त्यौहार के पूर्व कुछ लोगों ने मिलकर एक जंगली सुअर का शिकार किया था। इसका पता चलने पर सम्बंधित बीट गार्ड, चौकीदार एवं अन्य वन कर्मचारियों ने आरोपियों के घर से सुअर का माँस आदि जब्त किया गया। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर वनकर्मी रैपुरा स्थित वन परिक्षेत्राधिकारी के कार्यालय ले गए थे। जहाँ हिरासत में रखने के दौरान कथित तौर आरोपी की रेंजर से साँठगाँठ हो गई। जनचर्चा अनुसार रेंजर ने करीब डेढ़ लाख रूपए लेकर कोई प्रकरण दर्ज किये बगैर ही आरोपी को छोड़ दिया। इस डील में शिकारी को पकड़ने वाले वनकर्मी भी शामिल रहे। वन और वन्यजीवों के रक्षकों द्वारा रुपयों के लिए बेजुबान वन्यप्राणियों के शिकारियों को संरक्षण देने की खबर के फैलने पर किसी ने इसकी सूचना स्पेशल टॉस्क फोर्स सतना को दे दी।
रैपुरा में खड़ा वन विभाग के डॉग स्क्वॉड का वाहन।
फलस्वरूप गत दिवस जब टाईगर स्ट्राईक फोर्स इस मामले की जांच के सिलसिले में दलबल के साथ रैपुरा पहुँची तो रिश्वतखोर अधिकारियों-कर्मचारियों में खलबली मच गई। अपने कारनामे को छिपाने के लिए इनकी ओर से हर संभव कोशिश की गई लेकिन जाँच टीम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए जंगली सुअर के शिकार से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए लिए। इसके अलावा शिकार में शामिल रहे एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूरे मामले में रेंजर एवं वनकर्मियों की भूमिका की जानकारी हांसिल की गई। सूत्रों से पता चला है कि इस आधार पर प्रभारी अधिकारी ने रेंजर समेत उनके मातहतों के बयान दर्ज किए है। फ़िलहाल शिकार के मामले में फरार चल रहे तीन अन्य आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। उधर, रिश्वत कांड में खुद को फंसता देख रैपुरा रेंजर देवेश गौतम के भूमिगत होने की अपुष्ट चर्चाएं हैं। इस प्रकरण में श्री गौतम से जब उनका पक्ष जानने के कोशिश की गई तो उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।

वन संपदा और वन्यप्राणियों के आए बुरे दिन

फाइल फोटो।
पन्ना जिले के संरक्षित और सामान्य वन क्षेत्र में पिछले 2 वर्ष से सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। जिले के उत्तर-दक्षिण वन मंडल एवं पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत इस अवधि में करीब एक दर्जन तेन्दुओं की मौत हो चुकी है। जिनमें आधे से अधिक तेंदुओं का शिकार हुआ था। इसके अलावा एक युवा बाघिन, और भालू के शिकार की घटनायें भी सामने आई हैं। इतना ही नहीं कुशल तैराक कहलाने वाले एक हाथी की भी केन नदी में डूबने से असमान्य मौत, बड़े पैमाने पर इमारती और जलाऊ लकड़ी की अंधाधुंध अवैध कटाई, वन क्षेत्र में हीरा, पत्थर पाटिया और रेत की खुलेआम जारी लूट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यहाँ की वन संपदा और बेजुबान वन्यजीवों पर हर समय गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कड़ी सुरक्षा वाले पन्ना टाइगर रिजर्व तक में वन्यजीव सुरक्षित नहीं हैं। पिछले वर्ष दक्षिण वन मंडल की पवई रेंज अंतर्गत भालू के शिकार के मामले में खुलासा हुआ था कि जिले में शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय है। बाबजूद इसके वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर मैदानी अमला जानबूझकर घोर लापरवाही बरत रहा है।
सांकेतिक फोटो।
कुछ समय पूर्व शाहनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत जंगल में विधुत तार बिछाकर शिकार करने के दौरान एक शिकारी की करंट लगने से मौत होने की घटना का पता तत्कालीन रेंजर और वनकर्मियों को कई दिन बाद चला था। इसी तरह उत्तर वन मंडल पन्ना के धरमपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत बड़े पैमाने पर वृक्षों की अवैध कटाई होने की जानकारी हाल ही में एक समाचार पत्र में खबर छपने के बाद मिली। इन चंद उदाहरण से वन और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर मैदानी अमले की सजगता तथा निगरानी व्यवस्था का पता चलता है। इस स्थिति का लाभ उठाकर जिले में लंबे समय से सक्रिय खनन माफिया, सागौन तस्कर, शिकारी और अतिक्रमणकारी हर दिन चौतरफा जंगल को उजाड़ रहे हैं। बेहद ख़राब हो चुके के हालात के मद्देनजर पन्ना में आबाद हुए बाघों के संसार के पुनः उजड़ने का खतरा बना है। क्योंकि, अब तक खनन माफिया, सागौन तस्करों, अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देते रहे कतिपय वन अधिकारी-कर्मचारी अब वन्यजीवों के शिकारियों को भी रूपए लेकर छोड़ने लगे हैं। इनकी रुपयों की भूख इतनी अधिक बढ़ चुकी है जंगल के कतिपय रक्षक ही अब इसके भक्षक बन चुके हैं इसलिए जंगल के अंदर अब कुछ भी सुरक्षित नहीं है।

इनका कहना है –

“टाईगर स्ट्राईक फोर्स के जाँच के सिलसिले में आने पर डीएफओ दक्षिण ने मुझे इस मामले की जानकारी दी थी, शिकारियों को रुपए लेकर छोड़ना बेहद गंभीर मामला है। इस खुलासे से हम सभी हैरान है। मैंने डीएफओ को अपने स्तर पर भी रैपुरा की घटना की जाँच करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में किसी भी दोषी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

के. एस. भदौरिया, प्रभारी सीसीएफ वृत्त छतरपुर।

“शिकारियों को रुपए लेकर छोड़ने के घटनाक्रम का पता चलने से स्तब्ध हूँ, इस प्रकरण से मैदानी अमले के प्रति भरोसा टूटा है। पूरे मामले की सूक्ष्मता से जाँच कराई जा रही है, इसमें जिसकी भी संलिप्तता उजागर होगी उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी ताकि इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना की पुनरावृति न हो।”

मीना कुमारी मिश्रा, डीएफओ दक्षिण वन मंडल पन्ना।

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