हत्या की सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर पहुँचे पुलिस अधिकारी शव का मुआयना करते हुए।
* पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना क्षेत्र की घटना
* थाना पुलिस की हिरासत में आरोपी ने कबूल की वारदात
पन्ना(अजयगढ़)। रडार न्यूज मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना को लेकर व्याप्त चर्चाओं के अनुसार रतन साहू की हत्या उसके ही सगे रिश्तेदार ने की है। कथित तौर पर आरोपी करण साहू को ऐसा संदेह था कि उसकी पत्नी और साढ़ू के बीच नाजायज सम्बंध हैं। जिले के अजयगढ़ कस्बा में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात हुई हत्या की इस वारदात का आज 7 मई की सुबह पता चलने पर सनसनी फैल गई। स्थानीय थाना पुलिस ने संदेह के आधार पर मृतक रतन साहू पुत्र कलकाई साहू 40 वर्ष की साली के पति करण साहू को हिरासत में लेकर जब पूँछताँछ की गई तो उसने कथित तौर पर अपना जुर्म कबूल कर लिया। हालाँकि समाचार लिखे जाने तक रतन की हत्या के मामले में उसके सगे रिश्तेदार को हिरासत में लिए जाने और घटना की वजह की आधिकारिक तौर पुलिस द्वारा पुष्टि नहीं की गई थी।
पार्टी करने गया था फिर वापिस घर नहीं लौटा
घटनास्थल पर जाते अजयगढ़ एसडीओपी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रतन साहू अजयगढ़ में रहता था। उसका एक मकान कस्बा से दूर सोसायटी के पीछे स्थित है। जिसमें उसकी साली अपने परिवार के साथ रहती है। रतन का अपनी साली के घर अक्सर आना-जाना रहता था। सोमवार की रात करीब 8 बजे वह अपने घर से मोटरसाइकिल लेकर यह कहकर निकला था कि खाना नहीं खाऊँगा, आज हमारी पार्टी है। रतन रात्रि में वापिस घर नहीं लौटा। मंगलवार 7 मई की सुबह परिजनों को सूचना मिली कि रतन मृत अवस्था में रामस्वरूप कोंदर के खेत में पड़ा है। परिजन आनन-फानन जब वहाँ पहुँचे खून से लथपथ हालत में रतन साहू की लाश पड़ी थी। उसके सिर में गोली मारने जैसा गहरा घाव पाया गया। इस वारदात की प्रारम्भिक विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर अजयगढ़ थाना पुलिस ने मृतक रतन की साली के पति करण साहू को हिरासत में लिया है। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि करण ने अपना जुर्म सहजता से स्वीकार करते हुए पुलिस को बताया कि रतन आए दिन उसके घर पर शराब पीकर आता था और गालीं-गलौंज करता था। इससे परेशान होकर उसने हत्या करने की बात कही है। ऐसी चर्चा है कि मृतक रतन ने ही करीब 2 वर्ष पूर्व अपनी साली का विवाह पड़ोसी जिला छतरपुर के चंदला निवासी करण साहू के साथ कराया था। कुछ माह पूर्व रतन ने अपनी साली और उसके पति को चंदला से अजयगढ़ बुलाकर अपने दूसरे मकान रहने की जगह दी थी। बताते चलें की इस घटना के सम्बंध में प्राप्त जानकारी की पुष्टि करने हेतु पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी एवं अजयगढ़ एसडीओपी इसरार मंसूरी से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनके मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुए।
अपराधियों के हौसले बुलंद
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में तीन दिन के अंदर हत्या की दूसरी वारदात के सामने आने से चुनावी समय में पुलिस की सजगता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। अजयगढ़ की वारदात के पूर्व पन्ना जिला मुख्यालय में लोकसभा चुनाव के मतदान के एक दिन पूर्व शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात पहाड़कोठी में इरफान पिता स्वर्गीय मुन्ना खान निवासी आगरा मोहल्ला पन्ना की पत्थर पटककर नृशंस हत्या किए जाने की सनसनीखेज घटना प्रकाश में आई थी। वहीं कुछ दिन पूर्व जिले के मड़ला थाना अंतर्गत अज्ञात हमलावर एक युवक के ऊपर फायरिंग कर भाग निकले थे। इन घटनाओं को लेकर पुलिस की लचर कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये की तीखी आलोचना हो रही है। आमजन का मानना है कि पुलिस के हाई अलर्ट पर रहने के दौरान जब अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं तो फिर सामान्य दिनों में क्या होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। दरअसल, पुलिस का फोकस अपने मूल कार्य पर न होने के कारण इस तरह के हालात बन रहे हैं।
ग्राम पैकनपुर में मतदान करने के लिए लम्बी कतार में खड़े मतदाता।
* प्रचण्ड धूप और गर्मी के बाद भी पोलिंग बूथों के बाहर लगीं लम्बी कतारें
* बुनियादी सुविधाओं के आभाव में कई गाँवों से आईं मतदान के बहिष्कार की ख़बरें
शादिक खान, पन्ना/ खजुराहो। रडार न्यूज लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण एवं मध्य प्रदेश में दूसरे चरण में राज्य की 7 लोकसभा सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। जिनमें खजुराहो संसदीय क्षेत्र क्रमाँक-08 भी शामिल है। लोकतंत्र के महापर्व अर्थात आम चुनाव को लेकर समूचे संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं में अपार उत्साह देखा जा रहा है। फलस्वरूप सोमवार 6 मई को सुबह 7 बजे मतदान प्रारम्भ होने के साथ ही बड़ी तादाद में मतदाता पोलिंग बूथों पर पहुँचने लगे थे। सुबह 9-10 बजे के बीच खजुराहो संसदीय क्षेत्र के अधिकांश मतदान केन्द्रों के बाहर मतदाताओं की लम्बी कतारें देखने को मिलीं।
ग्राम तिलगवां में परिवार के साथ मतदान करने पहुँचा दूल्हा।
दोपहर में 12 बजे के बाद धूप और गर्मी के तेवर सख्त होने के बाद भी मतदाताओं की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अपनी भागीदारी निभाने मतदाताओं ने प्रचण्ड गर्मी के बाद भी बड़ी तादाद में अपने मताधिकार का उपयोग किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार खजुराहो लोकसभा सीट पर दोपहर 3 बजे तक 49.88 प्रतिशत वोटिंग हो चुकी थी। इस सीट के अंतर्गत आने वाले ज्यादातर मतदान केन्द्रों के बाहर मतदाताओं की कतारें अभी भी लगीं हैं। कई जानकार का मानना है कि शाम 4 बजे के बाद मतदाताओं की संख्या और अधिक इजाफा होगा।
विधानसभावार मतदान प्रतिशत।
खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पन्ना जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर मतदान करने के लिए बड़ी तादाद में मतददाताओं के पोलिंग बूथों पर पहुँचने का सिलसिला जारी है। यहाँ महिलाओं के साथ-साथ बड़ी तादाद में वृद्धजनों ने वोट डालकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। पन्ना जिले में 24 स्थानों पर वोटिंग मशीनों में खराबी आने पर उन्हें बदला गया है। वहीं जिले के गोल्ही, उड़की, अतरहाई, नयागाँव, मरहा आदि ग्रामों में बुनियादी सुविधाओं के आभाव में ग्रामीणों द्वारा मतदान का सामूहिक बहिष्कार किया गया। जब इसकी जानकारी प्रशासन को लगी तो प्रशासनिक अधिकारीयों ने मौके पर पहुंचकर समस्याओं के निदान का आश्वासन देकर मतदान के बहिष्कार को समाप्त कराया। पन्ना जिले की पन्ना विधानसभा सीट अंतर्गत आने वाले पैकनपुर पोलिंग बूथ पर मतदान करने आये ग्रामीणों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा अभद्रता करने की बात सामने आई है। जिससे नाराज होकर कई मतदाता बगैर मतदान किए ही वापस लौट गए।
* क्षेत्र के सभी मतदाता करें मताधिकार का प्रयोग- कलेक्टर श्री खत्री
पन्ना। रडार न्यूज लोकसभा चुनाव के पाँचवें चरण में एवं प्रदेश में दूसरे चरण में सोमवार 6 मई को जिन सात संसदीय क्षेत्रों में मतदान होना है उनमें खजुराहो संसदीय क्षेत्र भी शामिल है। खजुराहो संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीन जिलों छतरपुर, पन्ना और कटनी के 08 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 18 लाख 42 हजार 95 मतदाता नया सांसद चुनने के लिए आज अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन मतदाताओं में सर्विस वोटर शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। खजुराहो संसदीय क्षेत्र से इस बार 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। आज शाम को वोटिंग समाप्त होने पर मतदाताओं का फैसला और प्रत्याशियों की किस्मत ईव्हीएम में कैद हो जाएगी। पन्ना के कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनोज खत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पन्ना जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों के 7 लाख 9 हजार 931 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसी प्रकार कटनी जिले की तीन विधानसभा क्षेत्रों के 6 लाख 93 हजार 767 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। छतरपुर जिले की दो विधानसभा क्षेत्रों के 4 लाख 38 हजार 397 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
सांकेतिक फोटो
श्री खत्री ने क्षेत्र के सभी मतदाताओं से अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग अपने मताधिकार का सोमवार 6 मई को होने वाले मतदान में उपयोग अवश्य करें। मतदाताओं की सुविधा के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा आवश्यक कदम उठाए गए हैं। जिसके तहत प्रत्येक मतदान केन्द्र पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गयी हैं। वहीं दिव्यांग, वृद्धजन एवं गर्भवती माताओं के लिए बिना लाईन में लगे मतदान करने की सुविधा प्रदान की गई है। पन्ना कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी मनोज खत्री द्वारा मतदाताओं से अपील करते हुए कहा है कि सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष, बगैर भय के करें। मतदान करना उनका अधिकार और जिम्मेदारी है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए अपने मताधिकार का उपयोग प्रत्येक मतदाता को करना चाहिए।
* 15 जिलों में 15 हजार 240 केन्द्रों पर 1,19,56,447 मतदाता डालेंगे वोट
* प्रत्येक मतदाता स्वतंत्र और निर्भीक होकर करे मतदान- सीईओ श्री राव
भोपाल। रडार न्यूज मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कान्ता राव ने प्रदेश में दूसरे चरण में शामिल संसदीय क्षेत्रों के मतदाताओं से अपील की है कि मतदान अवश्य करें। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में राज्य के प्रत्येक मतदाता का मत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक मतदाता स्वतंत्र और निर्भीक होकर मतदान करे। श्री राव ने बताया कि दूसरे चरण में 6 मई को टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा, होशंगाबाद एवं बैतूल संसदीय क्षेत्र में मतदान होगा। इन क्षेत्रों में शामिल 15 जिलों में 15 हजार 240 मतदान केन्द्रों पर कुल 1,19,56,447 मतदाता हैं।
पहचान संबंधी दस्तावेज लाना अनिवार्य
सांकेतिक फोटो।
श्री कांताराव ने बताया है कि निर्वाचन प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष होने के साथ-साथ सुगम और समावेशी भी है। प्रदेश में इस बार मतदान में मुख्य रूप से दिव्यांग, बुजुर्ग, गर्भवती एवं धात्री महिला मतदाताओं को विशेष सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं। इनके लिये मतदान केन्द्रों पर रैम्प, छाया, पीने के पानी, शौचालय, छोटे बच्चों के झूलाघर, सहयोग के लिये स्वयंसेवी आदि सभी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था गई हैं। इस चरण में मतदान का समय प्रात: 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगा। मतदाताओं को मतदान के लिये अपना पहचान संबंधी दस्तावेज जैसे वोटर आई.डी.कार्ड, आधार कार्ड, पेन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक इत्यादि 12 दस्तावेजों में से एक दस्तावेज ले जाना अनिवार्य होगा।
67 हजार मतदान कर्मी तैनात
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सीईओ श्री राव ने जानकारी दी कि दूसरे चरण के मतदान के लिये 67 हजार मतदान कर्मी नियुक्त किये गये हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिये केन्द्रीय सुरक्षा बल की 85 एवं राज्य सशस्त्र बल की 45 कम्पनियॉं तैनात की गई हैं।इसके साथ ही जिला बल, होमगार्ड एवं विशेष पुलिस अधिकारी मिलाकर कुल 50 हजार 400 पुलिस कर्मी मतदान के दिन कार्यरत रहेंगे। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में 3,208 क्रिटिकल मतदान केन्द्र चिन्हांकित किए गए हैं। निर्वाचन के दौरान 3,060 से अधिक मतदान केन्द्रों पर वेबकॉस्टिंग/सीसीटीवी से निगरानी की जायेगी। ईव्हीएम परिवहन की निगरानी के लिये प्रत्येक सेक्टर अधिकारी एवं मतदान दलों के वाहन पर जीपीएस ट्रेकिंग सिस्टम डिवाईस लगाई गई है।
लोकतंत्र को मजबूत बनाने निभायें भागीदारी
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कान्ता राव।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी व्ही.एल. कान्ता राव ने ने कहा कि मतदाताओं को अपने वोटर होने संबंधी जानकारी के सत्यापन एवं अपने मतदान केन्द्र की जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर 1950 एवं वोटर हेल्प लाईन मोबाईल एप की सुविधा दी गई है। उन्होंने मतदाताओं से अनुरोध किया है कि लोकसभा निर्वाचन-2019 में अपने मतदान केन्द्र पर पहुँचकर शत-प्रतिशत मतदान कर लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभायें।
* अग्नि सुरक्षा के लिए जंगल में ड्यूटी पर रहना हो गया अनिवार्य
* मतदान के लिए मैदानी कर्मचारियों को नहीं मिल रहा अवकाश
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज पन्ना टाईगर रिजर्व अंतर्गत गर्मी के सीजन में जंगल में आग लगने की घटनायें बढ़ने के मद्देनजर इनसे वन और वनजीवों के बचाव हेतु पार्क प्रबंधन ने 5 दिन पूर्व एक आदेश जारी कर फायर सीजन पर रेड अलर्ट घोषित करते हुए मैदानी अमले की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस आदेश के कारण पार्क के मैदानी अमले को मतदान हेतु अपने घर जाने के लिए छट्टी न मिलने ख़बरें मिल रहीं हैं। इस कारण बड़ी तादाद में पार्क के कर्मचारियों को अपने मताधिकार से वंचित होना पड़ सकता है।उल्लेखनीय है कि तापमान में वृद्धि के साथ ही जंगल में आग लगने की घटनायें बढ़ गईं हैं।
सांकेतिक फोटो
आगजनी की घटनाओं से जंगल और वन्यजीवों को होने वाली व्यापक क्षति को देखते हुए पन्ना टाईगर रिजर्व प्रबंधन ने आग से वन और वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु मौके पर कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए फायर सीजन रेड अलर्ट घोषित किया है। पन्ना टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक द्वारा 30 अप्रैल को जारी रेड अलर्ट आदेश के बाद सभी अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जिन कर्मचारियों की छुट्टी पूर्व से स्वीकृत थी उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि अग्नि सीजन में कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी भी श्रमिक का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। किसी भी विशेष परिस्थिति में अधिकारी-कर्मचारी-श्रमिक का अवकाश लिखित में उप संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व द्वारा स्वीकृत किया जाएगा।
फाइल फोटो।
फायर सीजन में रेड अलर्ट घोषित होने के कारण कई मैदानी कर्मचारियों को मतदान करने के लिए अपने घर जाने के लिए रविवार दोपहर तक अवकाश न मिलने की जानकारी सूत्रों के माध्यम से मिली है। इस स्थिति के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात मैदानी अधिकारियों-कर्मचारियों-श्रमिकों को लोकसभा चुनाव के लिए 6 मई को होने वाले मतदान में अपने मताधिकार के उपयोग से वंचित होना पड़ सकता है। पता चला है कि कई मैदानी कर्मचारियों को मतदान हेतु अवकाश माँगने पर भी रेन्जरों द्वारा नहीं दिया गया। अवकाश न मिलने के कारण मैदानी कर्मचारी अपने मताधिकार का उपयोग कैसे कर पाएंगे यह बड़ा सवाल बना है।
क्षेत्र संचालक द्वारा जारी आदेश।
इसे विडम्बना ही कहा जाएगा कि एक ओर प्रशासन पिछले एक माह से मताधिकार के उपयोग को लेकर नागरिकों को प्रेरित और जागरूक करने के लिए जन जागरूकता अभियान चला रहा है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक- एक वोट महत्वपूर्ण बताते हुए लोगों से मतदान अवश्य करने की अपील की जा रही है। इस बार लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए गए। इन सबके बीच पन्ना टाइगर रिजर्व के मैदानी कर्मचारी यदि मतदान करने से वंचित होते हैं तो निश्चित ही इसे पार्क प्रबंधन की अदूरदर्शिता, अव्यवहारिकता और लापरवाही माना जाएगा। उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व की सीमाएँ पन्ना, छतरपुर और दमोह जिले तक फैलीं हैं। ये जिले जिन संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, उनमें सोमवार 6 मई को मतदान मतदान होना है। मतदान शुरू होने के लिए अब जबकि महज कुछ घंटे ही शेष बचे हैं ऐसे में यह देखना महत्पूर्ण होगा कि अवकाश न मिलने के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व के मैदानी कर्मचारी अपने मताधिकार का उपयोग कर पाते हैं या नहीं।
इनका कहना है-
“यह बात सही है कि फायर सीजन पर रेड अलर्ट घोषित होने के कारण अवकाश स्वीकृति पर रोक लगी है, लेकिन मैदानी अधिकारी-कर्मचारी और श्रमिकों को अपने मताधिकार के लिए अवकाश लेने की आवश्यकता नहीं है, सभी कर्मचारी बगैर अवकाश लिए अपने मताधिकार का उपयोग करने जा सकते हैं, इसके लिए कोई रोक नहीं है। आपने जानकारी दी है तो मैं तत्काल वायरलैस के माध्यम से सबको सूचित करता हूँ ताकि इसे लेकर किसी तरह के कोई भ्रम की स्थिति न रहे।”
– के.एस. भदौरिया क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व।
पन्ना में भाजपा प्रत्याशी के नामांकन भरने के पूर्व सम्पन्न हुई आमसभा में मंचासीन रहे अतिथिगण का फाइल फोटो।
* क्या खराब प्रदर्शन को देखते हुए सांसद को चुनाव से दूर रखा गया ?
* इसके पीछे भाजपा की क्या है रणनीति, चर्चा में रही सांसद की अनुपस्थिति
शादिक खान,पन्ना/खजुराहो। रडार न्यूज लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में सोमवार 6 को मध्यप्रदेश की जिन सात सीटों पर मतदान होना है उनमें खजुराहो संसदीय क्षेत्र क्रमांक-8 शामिल है। शनिवार शाम को यहाँ चुनावी शोर पूरी तरह थम चुका है और मतदान शुरू होने के महज कुछ घंटे पूर्व सभी प्रत्याशी जनसम्पर्क करने में जुटे हैं। खजुराहो संसदीय सीट पर पिछले कई चुनावों से लगातार भारतीय जनता पार्टी जीत दर्ज रही है, इसलिए इस सीट को भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। भाजपा ने इस बार यहां से मुरैना जिले के निवासी विष्णु दत्त शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है। बाहरी होने के कारण भाजपा प्रत्याशी के चुनावी मुकाबला आसान नहीं है। क्योंकि, कांग्रेस ने जनभावनाओं को देखते हुए यहाँ से स्थानीय प्रत्याशी के रूप में कविता सिंह को टिकिट दिया है। राजपरिवार से आने वालीं कविता सिंह खजुराहो की बहु और पन्ना की बेटी हैं। यहाँ से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी वीर सिंह पटेल भी बाहरी हैं, वे उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के निवासी हैं। इसलिए खजुराहो सीट पर चुनाव में स्थानीय(क्षेत्रीय) बनाम बाहरी का मुद्दा अब तक हावी रहा है।
खजुराहो सांसद नागेन्द्र सिंह।
लोकसभा चुनाव-2019 को देश की आजादी के बाद का सबसे अहम चुनाव बताया जा रहा है। देश की दशा और दिशा तय करने वाले इस चुनाव में एक-एक सीट का महत्व है। फलस्वरूप खजुराहो सीट की बेहद प्रतिष्ठापूर्ण चुनावी लड़ाई को जीतने के लिए भाजपा के कई बड़े नेताओं ने यहाँ कई आमसभाएँ कर न सिर्फ अपने प्रत्याशी बीडी शर्मा के लिए वोट मांगे बल्कि डैमेज कंट्रोल की कमान सम्भाल कर बागियों को बैकफुट पर लाने से लेकर बाहरी प्रत्याशी के मुद्दे पर अपनों को विरोध को शांत कराने तक में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन खजुराहो सीट के पूरे चुनावी परिदृश्य से भाजपा के क्षेत्रीय सांसद नागेन्द्र सिंह गायब रहे। उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। दरअसल लोग यह जानना चाहते हैं कि, आखिर ऐसी क्या वजह रही जिस कारण वे अपनी पार्टी के प्रत्याशी का उस क्षेत्र में प्रचार करने नहीं आए जहाँ का उन्होंने सांसद के रूप में करीब 5 साल तक प्रतिनिधित्व किया है। कुछ लोगों का मानना है कि यह चुनाव सांसद नागेन्द्र सिंह की अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव प्रचार से अनुपस्थिति को लेकर लम्बे समय तक याद किया जाएगा।
बड़े नेताओं की सभाओं से भी रहे नदारत
नयागांव में हुई उमा भारती की आमसभा का फाइल फोटो।
उल्लेखनीय है कि भाजपा प्रत्याशी बीडी शर्मा के नामाँकन दाखिल करने पूर्व पन्ना में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय उपाध्यक्षद्वय प्रभात झा, विनय सहस्त्रबुद्धे, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, सांसद प्रह्लाद पटेल ने आमसभा को सम्बोधित किया था। लेकिन खजुराहो क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा के सांसद नागेन्द्र न तो इस आमसभा में शामिल हुए और न ही वे बीडी शर्मा के नामाँकन जुलुस में नजर आए। इसके बाद खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत राजनगर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की आमसभा से भी वे नदारत रहे। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की पन्ना जिले के नयागांव, रैपुरा में हुईं आमसभाओं से भी सांसद नागेन्द्र सिंह दूर रहे। छतरपुर जिले के लवकुशनगर में शिवराज सिंह चौहान की आमसभा में भी क्षेत्रीय सांसद नहीं दिखे।
इसी तरह पवई में केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं स्वतंत्र देव सिंह की आमसभा तथा कटनी जिले में हुईं आमसभाओं-नुक्कड़ सभाओं से सांसद नागेन्द्र सिंह शामिल नहीं हुए। खजुराहो सीट से भाजपा प्रत्याशी विष्णु दत्त शर्मा के चुनाव प्रचार से क्षेत्र के सांसद का नदारत रहना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है। सर्वविदित है कि करीब चार माह पूर्व संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में नागेन्द्र सिंह सतना जिले की अपनी पम्परागत नागौद सीट से निर्वाचित होकर विधायक बन चुके हैं। लेकिन, क्या वे सिर्फ इसी कारण से उस क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के चुनाव प्रचार दूर रहे, जहाँ का पाँच साल तक उन्होंने सांसद के रूप में प्रतिनिधित्व किया है। या फिर इसके पीछे कोई और वजह है ?
क्या अच्छा नहीं रहा प्रदर्शन ?
पवई में सम्पन्न हुई केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की आमसभा का फाइल फोटो।
पूर्व नागौद राजपरिवार से आने वाले नागेन्द्र सिंह का खजुराहो क्षेत्र के सांसद के रूप में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है ऐसा अधिकांश लोग मानते हैं। हैरानी की बात है कि लगभग पाँच साल के अपने कार्यकाल में उन्होंने संसद में एक भी सवाल नहीं पूँछा। सिर्फ 7 बार ही बहस में हिस्सा लिया है। संसद में उनकी उपस्थिति तो 81 प्रतिशत रही लेकिन वे अधिकाँश समय खामोश ही रहे हैं। अर्थात संसद में वे अति पिछड़े खजुराहो संसदीय क्षेत्र की आवाज को बुलंद नहीं कर सके। इतना ही क्षेत्र में उनकी उपस्थिति भी कम ही रही है। फलस्वरूप सांसद से जुड़े कार्यों के लिए क्षेत्र के लोगों को नागौद जाना पड़ता था। विपक्ष के लोग आरोप लगाते हैं कि खजुराहो क्षेत्र के विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर भी सांसद नागेन्द्र सिंह कुछ ख़ास नहीं कर सके। जनाकांक्षाओं की कसौटी पर खरा न उतरने के कारण कथित तौर पर सांसद के रुप में उनकी भूमिका को लेकर क्षेत्र के लोगों में निराशा और नाराजगी व्याप्त है।
क्या इसी कारण भाजपा के रणनीतिकारों ने खजुराहो सीट से अपने प्रत्याशी बीडी शर्मा के चुनाव प्रचार से सांसद नागेन्द्र सिंह को दूर रखा ? भाजपा के अंदरखाने की चर्चाओं पर भरोसा करें तो नागेन्द्र सिंह के आने से भाजपा प्रत्याशी नफा कम और नुकसान अधिक होने की आशंका थी। क्योंकि, सांसद खराब प्रदर्शन के अलावा खजुराहो क्षेत्र के लिए वे भी लिए बाहरी रहे हैं। सम्भवतः भाजपा के रणनीतिकारों यह सोच रही है कि सांसद नागेन्द्र सिंह को खजुराहो क्षेत्र में पार्टी के प्रत्याशी चुनाव से दूर रखने से उनके सम्बंध कोई बात न नहीं होगी और इस तरह एंटी इंकम्बेंसी का प्रभाव भी मौजूद चुनाव पर नहीं पड़ेगा। हमने सांसद नागेन्द्र सिंह से ही खजुराहो संसदीय क्षेत्र के चुनाव-प्रचार से उनकी अनुपस्थिति को लेकर वजह जानने की कोशिश की लेकिन उनसे कोई सम्पर्क नहीं हो सका।
क्या दुष्प्रचार कर रहे विपक्षी दलों के प्रत्याशी ?
सांकेतिक फोटो।
पन्ना के भाजपा जिलाध्यक्ष सतानंद गौतम ने सांसद नागेन्द्र सिंह के प्रदर्शन को उनकी चुनाव प्रचार में अनुपस्थिति से जोड़ने को अनुचित बताते हुए कहा कि नागेन्द्र सिंह नागौद से विधायक होने के नाते सतना लोकसभा सीट पर पार्टी प्रत्याशी को विजयी बनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं के निर्देशानुसार वहाँ काम कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष श्री गौतम की मानें तो सांसद नागेन्द्र सिंह ने पन्ना जिले के गुनौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भाजपा प्रत्याशी बीडी शर्मा के पक्ष में चुनाव प्रचार किया था, यह अलग बात है कि वे मीडिया की नजर में नहीं आए। आमधारणा के उलट श्री गौतम का दावा है कि नागेन्द्र सिंह एक बेहद सफल सांसद रहे हैं, उनके प्रयासों से ही पन्ना जिले में रेल लाइन का काम शुरू हुआ है। इसके अलावा संसदीय क्षेत्र में कई नेशनल हाइवे निर्माणाधीन हैं। उनके अनुसार नागेन्द्र सिंह संसद की एक बेहद महत्वपूर्ण समिति के सदस्य भी रहे हैं।
रैपुरा में हुई उमा भारती की आमसभा का फाइल फोटो।
इन दावों पर अगर भरोसा किया भी जाए तो यह बात समझ नहीं आती कि चुनाव प्रचार के दौरान खजुराहो क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी और उनकी पार्टी के नेताओं ने यहाँ सांसद नागेन्द्र सिंह के कामों का उल्लेख कर वोट क्यों नहीं माँगे ? विपक्षी दलों के प्रत्याशी भाजपा के सांसद की निष्क्रियता और असफलता को क्या बेबजह मुद्दा बनाकर मतदाताओं से उन्हें एक अवसर देने की अपील करते रहे। क्या विपक्षी दलों के प्रत्याशी मतदाताओं को गुमराह कर वोट माँग रहे हैं ? किसके दावे में कितनी सच्चाई है यह मतदाता बेहतर जानते हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि खजुराहो सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे 17 उम्मीदवारों में से मतदाता इस बार किसे अपना सांसद चुनने के लिए 6 मई को वोट देते हैं। हालाँकि, सोमवार को होने वाली वोटिंग के नतीजे जानने के लिए 23 मई तक इंतजार करना पड़ेगा।
* चुनावी मैदान में 17 उम्मीदवार फिर भी क्यों है बेहतर विकल्प का आभाव ?
* चुनाव प्रचार से पूरी तरह गायब रहे क्षेत्र के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे
* जातिगत गोलबंदी के चलते भाजपा और कांग्रेस में बढ़ा भीतरघात का खतरा
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज अंतर्राष्ट्रीय पहचान रखने वाले खजुराहो-पन्ना-कटनी संसदीय क्षेत्र क्रमाँक-8 में मतदान की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। यहाँ सोमवार 6 मई को वोटिंग होनी है। मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल की इस लोकसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। पिछले तीन दशक से इस सीट पर लगातार भाजपा के सांसद निर्वाचित हो रहे हैं। वर्तमान में यहाँ से सांसद रहे नागेन्द्र सिंह चार माह पूर्व हुए विधानसभा चुनाव में सतना जिले की नागौद सीट से चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं। बीजेपी ने इस बार खजुराहो सीट से विष्णु दत्त शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है। उनका मुकाबला कांग्रेस की उम्मीदवार छतरपुर के पूर्व राजघराने की महारानी कविता सिंह और समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक वीर सिंह पटेल से है। भाजपा प्रत्याशी विष्णु दत्त शर्मा जहाँ चम्बल क्षेत्र के मुरैना जिले के निवासी हैं वहीं सपा प्रत्याशी वीर सिंह पटेल तराई अंचल के दस्यु सरगना रहे ददुआ के पुत्र हैं और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले से आते हैं। कांग्रेस की उम्मीदवार कविता से इन दोनों ही बाहरी प्रत्याशियों को क्षेत्रीयता के मुद्दे कड़ी चुनौती मिल रही है। दरअसल कविता सिंह पन्ना जिले की बेटी खजुराहो की बहु हैं। इनके पति विक्रम सिंह नातीराजा खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाली राजनगर सीट से विधायक हैं।
हाथ जोड़कर वोट मांगतीं कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह।
भाजपा प्रत्याशी विष्णु दत्त शर्मा को बाहरी होने के कारण चुनाव के शरुआती दौर में अपनी ही पार्टी के नेताओं का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। क्षेत्र में कई जगह उनके पुतले जलाकर बीडी शर्मा वापस जाओ के नारे भी लगाए गए। भाजपा के शीर्ष नेताओं की पहल से पार्टी के अंदर उनके खिलाफ उठने वाले विरोध के स्वर तो शांत हो गए पर स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा चुनाव में बना है। इस चुनौती का मुकाबला करने खास रणनीति के तहत भाजपा का चुनावी कैम्पेन राष्ट्रवाद, जाँबाज सैनिकों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक, पूर्व में हुई सर्जिकल स्ट्राइक, मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने तथा देश को कुशल नेतृत्व प्रदान करने के लिए नरेन्द्र मोदी को पुनःप्रधानमंत्री बनाने पर अब तक केन्द्रित रहा है। भाजपा प्रत्याशी बीडी शर्मा खुद को निमित्त मात्र बताते हुए मोदी के नाम पर वोट माँग रहे हैं।
पन्ना में जनसम्पर्क करते भाजपा प्रत्याशी बीडी शर्मा।
जबकि कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह खुद को क्षेत्र की बेटी और बहु बताकर भावनात्मक सम्बंधों की दुहाई देते हुए मतदाताओं से पिछले अनुभवों को ध्यान में रखकर उन्हें को एक अवसर देने की अपील कर रहीं हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मतदाताओं को पूर्व में चुनें गए भाजपा के सांसदों की विफलताओं, वादाखिलाफी, उनके बाहरी होने के कारण क्षेत्र से अधिकाँश समय गायब रहने और संसद में खामोश रहने के बारे में भी बता रहीं हैं। वे केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए चुनाव में राष्ट्रवाद के मुद्दे को उछालने, चुनाव आयोग की रोक के बाबजूद चुनाव प्रचार में सैनिकों का जिक्र कर उनके शौर्य का श्रेय लेने आदि मुद्दों पर भाजपा को घेर रहीं हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों को लगता है कि खजुराहो सीट पर स्थानीय बनाम बाहरी की चुनावी जंग में मतदाताओं का समर्थन उन्हें मिलेगा। इसके अलावा प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा की गई किसानों की ऋण माफ़ी, विवाह योजना की सहायता राशि में वृद्धि सहित अन्य फैसलों और महत्वकांक्षी न्याय योजना से मतदाता उनके साथ आएँगे।
सपा प्रत्याशी वीर सिंह पटेल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा की सुप्रीमो मायावती के नाम पर वोट माँग रहे हैं। चित्रकूट और पन्ना जिले की सीमा जुड़ी होने के कारण वे खुद को बाहरी नहीं मानते। सपा प्रत्याशी का चुनाव प्रचार अभियान कांग्रेस और भाजपा के मुकाबले बेहद कमजोर रहा है। हालाँकि वे खजुराहो संसदीय क्षेत्र की उपेक्षा और पिछड़ेपन के लिए भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ हमलावर रहते हुए इन दोनों ही पार्टियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि इन दोनों ही दलों से निराश हो चुके खजुराहो क्षेत्र के लोग तीसरे विकल्प के तौर पर सपा का साथ देंगे ? बहरहाल इस बार के लोकसभा चुनाव में खजुराहो सीट पर प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार में विकास से जुड़े मुद्दों, अति पिछड़े इस इलाके की ज्वलंत समस्याओं के समाधान पर कोई खास बात नहीं हुई। भाजपा-कांग्रेस के बड़े नेताओं की आमसभाओं में तक में इनका जिक्र तक नहीं हुआ।
सांकेतिक फोटो।
बुन्देलखण्ड के इस चर्चित संसदीय क्षेत्र से सांसद कौन होगा इसका निर्धारण पिछड़ा वर्ग के मतदाता करते आये हैं, जिनकी संख्या का अनुपात कुल मतदाताओं का लगभग आधा है। खजुराहो संसदीय क्षेत्र से इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने नए चेहरों के रूप में सवर्णों पर दाँव लगाया है। जबकि समाजवादी पार्टी प्रत्याशी वीर सिंह पटेल बहुसंख्यक पिछड़ा वर्ग से आते हैं, उन्हें बहुजन समाज पार्टी का समर्थन भी प्राप्त है। इस चुनाव में तीनों ही प्रत्याशियों के पक्ष में जातिगत गोलबंदी साफ़ नजर आ रही है। यह अलग बात है कि वे इससे इंकार करते हुए सबका समर्थन मिलने की बात कह रहे हैं। चुनाव पूर्व जातिगत भावनाओं के उभार का असर यह है कि भाजपा के कई नेता इस चुनाव में कांग्रेस को जिताने और कांग्रेस के कई नेता भाजपा प्रत्याशी को जिताने के लिए अंदरूनी तौर पर काम कर रहे हैं। पन्ना जिले में कुछ नेता ऐसे भी हैं जिन्होंने चार माह पूर्व संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए वोट मांगे थे, लेकिन आज वे कांग्रेस के लिए वोट माँग रहे हैं। वहीं जो लोग कांग्रेस के हाथ को मजबूत बनाने की बात कर रहे थे आज वे भाजपा को जिताने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
पन्ना में जनसम्पर्क पर निकलीं कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह।
इस विचित्र स्थिति को देखते हुए बहुसंख्यक मतदाता खामोश हैं। चुनाव मैदान में 17 उम्मीदवार होने के बाबजूद कई मतदाताओं को बेहतर विकल्प का आभाव महसूस हो रहा है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर अपने अंदर चल रहे द्वंद की स्थिति को साझा करते हुए बताया कि एक तरफ राजपरिवार से ताल्लुक रखने वालीं महारानी हैं तो दूसरी तरफ दो अन्य प्रमुख राजनैतिक दलों के प्रत्याशी बाहरी हैं। इन तीनों में से यदि कोई चुनाव जीतता है तो क्या क्षेत्र के आम लोगों के लिए उसकी उपलब्धता सहज और सुलभ होगी, यह बड़ा और अहम सवाल है ? पीछे मुड़कर देखें तो बाहरी सांसदों को लेकर अनुभव बेशक अच्छा नहीं रहा। लेकिन, एक अच्छा प्रत्याशी होने के लिए स्थानीय (क्षेत्रीय) होना ही क्या एक मात्र योग्यता है ? उन्होंने बड़ी ही साफगोई के साथ कहा कि फिलहाल वे यह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि किसे अपना वोट दें। 6 मई को मतदान केन्द्र के अंदर जो दिल कहेगा उसी की बटन दबाऊँगा।
सांकेतिक मानचित्र।
उल्लेखनीय है कि अभी तक की स्थितियों के मुताबिक खजुराहो सीट पर फ़िलहाल लड़ाई त्रिकोणीय नजर आ रही है। हालाँकि इस सीट के चुनावी इतिहास को देखते हुए विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होगा। इनका तर्क है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की पहचान इस इलाके में कुछ समूहों तक ही सीमित है। ऐसे में गैर सवर्ण कितने एकजुट होते हैं उस पर ही त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति निर्भर करेगी। यदि भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला हुआ तो यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रवाद और मोदी के नाम पर भाजपा ध्रुवीकरण करने में सफल होती है या फिर क्षेत्रवाद का मुद्दा भारी पड़ता है।
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पन्ना जिले के अमानगंज क़स्बा में आयोजित हुई आमसभा में मंचासीन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी।
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल की लोकसभा सीटों दमोह, टीकमगढ़ और खजुराहो में 6 मई को मतदान होना है। इसलिए इन संसदीय क्षेत्रों में चुनाव प्रचार 4 मई को थम जाएगा। मतदान की उल्टी गिनती शुरू होने के मद्देनज़र बुन्देलखण्ड में भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने यहाँ फोकस करते हुए चुनावी सभाएँ शुरू कर दीं हैं। पिछले दिनों खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राजनगर में आमसभा की थी। मंगलवार 30 अप्रैल को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बुन्देलखण्ड के दमोह, टीकमगढ़ और खजुराहो में चुनावी सभाओं को सम्बोधित किया। प्रचंड धूप और गर्मी के बाबजूद राहुल गाँधी की तीनों ही सभाओं में अच्छी-खासी भीड़ जुटी। यह गाँधी परिवार और राहुल का जादू ही था कि आसमान से बरसती आग (झुलसा देने वाली गर्मी) के बीच बड़ी तादाद में लोग निजी साधनों या फिर बस में किराया देकर उन्हें सुनने और देखने पहुँचे। खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पन्ना जिले के अमानगंज कस्बा में आयोजित राहुल की आमसभा में जितने लोग पण्डाल के अंदर मौजूद थे उससे कई गुना अधिक भीड़ बाहर ग्राउण्ड में प्रचंड धूप में खुले आसमान के नीचे खड़ी थी। उमड़े जन सैलाब और लोगों के अपार उत्साह के लिहाज से कांग्रेस की चुनावी आमसभा सफल रही। हालाँकि, मंच की बैठक व्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेसियों में जबरदस्त आंतरिक नाराजगी और असंतोष देखा गया। पड़ोसी जिला कटनी, छतरपुर से आए कई स्थानीय वरिष्ठ नेताओं को यथोचित सम्मान नहीं मिला। साथ ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे क्षेत्रीय दिग्गज नेताओं की भी उपेक्षा की गई। इससे कांग्रेसियों का नाराज होना स्वाभाविक है।
सोशल मीडिया पर दिखने लगी नाराजगी
आमसभा में उपस्थित क्षेत्र के लोग।
राहुल गाँधी की आमसभा में कथित अव्यवस्थाओं को लेकर पार्टी के अंदरखाने व्याप्त असंतोष सोशल मीडिया पर दिखने लगा है। मतदान के ठीक पहले कांग्रेस की प्याली में उठे इस तूफान को भाजपा समेत अन्य पार्टियां अपने लिए अच्छा संकेत मान रहीं है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की आमसभा में मंच के ठीक सामने नीचे कुर्सियों में बैठे कांग्रेस के कई नेता आपस में यह चर्चा करते रहे कि अमानगंज में आमसभा का आयोजन होने के मद्देनजर यहाँ के प्रथम नागरिक अर्थात नगर परिषद अध्यक्ष हक्कुन दहायत को मंच पर स्थान मिलना चाहिए था। इसके अलावा खजुराहो संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों से चार माह पूर्व विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे नेताओं को सम्मान देते हुए उन्हें भी मंचासीन किया जाता तो लोगों में अच्छा संदेश जाता।
दरअसल, वे किन्हीं कारणों से चुनाव भले ही जीत नहीं सके लेकिन प्रत्येक प्रत्याशी को हजारों की तादाद में वोट तो मिले हैं, इसे नाकारा नहीं जा सकता। इसके अलावा उनका अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव भी है। कतिपय कांग्रेसियों का मानना है कि गुनौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आमसभा आयोजित होने से क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक शिवदयाल बागरी का स्वागत भाषण कराया जाता या फिर उन्हें आभार प्रदर्शन में बोलने के लिए आमंत्रित करके दलित वर्ग को साधा जा सकता था। विदित हो कि मध्यप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन होने से खजुराहो संसदीय सीटसमाजवादी पार्टी को मिली है। दलितों के बीच अच्छी-खासी पैठ रखने वाली बहुजन समाज पार्टी का प्रत्याशी इस बार चुनाव मैदान में न होने से कांग्रेस के पास दलितों को अपने पाले में लाने का सुनहरा अवसर है। लेकिन, दलित नेताओं की जाने-अनजाने में हुई कथित उपेक्षा सरीकी गलतियाँ इस नाजुक समय में कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकती हैं।
परिक्रमा करने वाले पदाधिकारी हुए उपकृत
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की आमसभा में पहुँचे कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मंच पर जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना के दो पदाधिकारियों की मौजूदगी को लेकर गहरी नाराजगी व्याप्त है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर सीनियर नेताओं ने बताया कि जिला कांग्रेस कमेटी पन्ना के पदाधिकारियों की संख्या एक सैंकड़ा से अधिक है। इनकी आपत्ती यह है कि सिर्फ दो पदाधिकारियों का चयन मंच पर राहुल गाँधी जी के साथ बैठने और उनका स्वागत करने के लिए किस आधार पर दिया गया। इससे पार्टी में व्याप्त गुटबाजी परिलक्षित होती है, क्योंकि अन्य पदाधिकारियों के साथ भेदभाव किया गया।
एक सवाल के जबाब में सीनियर नेताओं ने बताया कि हम सब यह भली-भाँति जानते हैं कि मंच की अपनी गरिमा है, वहाँ सैंकड़ा भर पदाधिकरियों को नहीं बैठाया जा सकता, खासकर एसपीजी सुरक्षा प्राप्त राहुल गाँधी की आमसभा में तो यह मुनकिन ही नहीं है। लेकिन अच्छा होता कि अनावश्यक की बातों से बचने के लिए आयोजकगण जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों के साथ एक सामान व्यवहार करते तो शायद किसी को शिकायत नहीं होती। एक सीनियर नेता कहना है कि दरअसल राजनीति का मौजूदा दौर परिक्रमा का है जिसके आगे सभी योग्यताएँ और नियम शिथिल पड़ जाते हैं। मजेदार बात यह है कि आमसभा में मंच पर विराजमान मान रहे जिला कांग्रेस के दोनों पदाधिकारियों और कथित तौर उन्हें यह अवसर प्रदान करने वालों के खिलाफ कांग्रेसी ही सोशल मीडिया पर जमकर कटाक्ष कर रहे हैं।
क्यों नदारत रहे दिग्गज नेता !
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की अमानगंज में हुई आमसभा में पूर्व मंत्री एवं पवई विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रहे मुकेश नायक और खजुराहो सीट से लगातार दो बार चुनाव लड़ने वाले पूर्व मंत्री राजा पटैरिया की अनुपस्थिति लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी है। सर्वविदित है कि खजुराहो सीट से कांग्रेस प्रत्याशी कविता सिंह का मुकाबला भाजपा के विष्णु दत्त शर्मा से है। चुनाव में जातीय संतुलन फैक्टर के महत्व को देखते हुए कुछ लोगों को मानना है कि दोनों पूर्व मंत्री अगर आमसभा में शामिल होते तो लोगों के बीच अच्छा सन्देश जाता। कांग्रेस के दोनों दिग्गज नेता इतने महत्वपूर्ण आयोजन से नदारत क्यों रहे, फिलहाल यह पता नहीं चल सका। हालाँकि इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ व्याप्त है। उधर, कांग्रेस के ही कुछ लोग दबी जुबान आमसभा का पंडाल छोटा होने के कारण व्यवस्थाओं की आलोचना कर रहे हैं। इनका कहना है कि हजारों लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी और धूप में खड़े होकर राहुल गाँधी का भाषण सुनने को मजबूर होना पड़ा। इस पर आयोजकों की ओर से सफाई देते हुए यह समझाया जा रहा है कि प्रत्याशी का चुनाव खर्च निर्धारित सीमा के अंदर रहे इसलिए कई बार न चाहते हुए भी सीमित व्यवस्थायें करना मजबूरी हो जाती है।
पन्ना जिले के अमानगंज क़स्बा में आयोजित हुई आमसभा में मंचासीन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी।
* कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बुन्देलखण्ड अंचल में की तीन चुनावी सभाएँ
* पन्ना जिले के अमानगंज में बोले मैं आपसे लम्बा रिश्ता बनाने आया हूँ
* राहुल का ऐलान, कर्ज अदा न कर पाने वाले किसानों को अब नहीं होगी जेल
* महत्वकांक्षी न्याय योजना से देश की अर्थव्यवस्था में गति आने का किया दावा
* बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के कार्यों में हुए भ्रष्टाचार की जाँच कराने की बात कही
शादिक खान, पन्ना। रडार न्यूज मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को टीकमगढ़, दमोह और खजुराहो संसदीय क्षेत्र में तीन बड़ी चुनावी सभाओं को सम्बोधित किया। इस दौरान वे प्रधानामंत्री नरेन्द्र मोदी पर काफी हमलावर रहे। खजुराहो संसदीय क्षेत्रान्तर्गत आने वाले पन्ना जिले के अमानगंज कस्बा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर झूठे वादे करने का आरोप लगाते हुये कहा कि चुनाव के समय उन्होंने देश के लोगों को 15-15 लाख रूपये देने का वादा किया था। धोखा देने के लिये बैंको में खाते भी खुलवाये गये लेकिन किसी के खाते मे एक पैसा भी नहीं आया। मोदी ने 15 पूंजीपतियों को 5 लाख 55 हजार करोड रूपये दे दिया। लेकिन मैं देश के गरीबों को रूपये देना चाहता हूँ।
आर्थिक विशेषज्ञों के साथ विचार-विर्मश के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि, देश के ऐसे प्रत्येक गरीब परिवार जिनकी आय 12 हजार रूपये से कम है, उनके बैंक खातों में 72 हजार रूपये प्रतिवर्ष और 5 साल मे लगभग 3.60 लाख रूपये की राशि डाली जा सकती है। इस योजना को हमने न्याय योजना का नाम दिया है। इसके तहत देश के 5 करोड़ परिवारों और 25 करोड़ लोगों के खातों में राशि डालकर उन्हें सीधा लाभ पहुँचाया जायेगा। राहुल गाँधी ने न्याय योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना से देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती मे अहम योगदान देगी। क्योंकि जब गरीब के पास पैसा आयेगा तो उसकी क्रय शक्ति बढ़ेगी। हमारे छोटे और मझोले दुकानदारों का धंधा चलेगा। माल की खपत बढ़ने पर नई फैक्ट्रियां खुलेंगी और युवाओ को राजेगार मिलेगा। श्री गांधी ने आमसभा मे उपस्थित पुरूषों से मुखातिब होते हुये कहा कि आप बुरा न मानें मैं न्याय योजना की राशि महिलाओं के खाते में डालूँगा। आमसभा में बडी संख्या में मौजूद महिलाएँ इससे गदगद हो उठीं और तालियों की गड़गड़ाहट से इस घोषणा का स्वागत किया।
नोटबंदी-जीएसटी ने किया बर्बाद
आमसभा को सम्बोधित करते राहुल गाँधी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जोर देते हुये कहा कि हमने न्याय योजना की परिकल्पना करते हुए समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान रखा है। इसके लागू होने से नोटबंदी और जीएसटी से टूट चुके छोटे और मझोले व्यापारियों का व्यवसाय चल पड़ेगा। न्याय योजना देश की अर्थव्यवस्था रूपी गाड़ी के इंजन को दौड़ने के लिये डीजल देने का काम करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने नोटबंदी के मनमाने फैसले को लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गम्भीर आरोप लगाए हैं। इस पर सवाल उठाते हुये उन्होंने कहा कि मोदी जी यह मत समझिये की देश के लोग कुछ नहीं समझते। आपने देश से कहा था कि हमने कालेधन के खिलाफ नोटबंदी का फैसला लिया है। लेकिन सच्चाई यह है कि नोटबंदी कालेधन को सफेद करने के लिये की गई थी। नोटबंदी के समय बैंकों की लाईन में हिन्दुस्तान के चोर कहीं खड़े नजर नहीं आये। बैंको की लाईन में अगर कोई खड़ा था तो वह देश के युवा, किसान, गरीब, महिलाएँ और मध्यम वर्ग के लोग थे। आमसभा में राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के नेताओं के खिलाफ आक्रामक अंदाज में जमकर शाब्दिक हमला बोला। इस दौरान उन्होंने देश के बैंकों से हजारों करोड़ का कर्जा लेने वाले उद्योगपतियों को विदेश भागने में भाजपा के बड़े नेताओं द्वारा मदद करने के एवज में आर्थिक पहुँचाने के आरोप लगाए हैं।
किसानों को नहीं होगी जेल
आमसभा में उपस्थित क्षेत्र के लोग।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि देश के और बुन्देलखण्ड के किसा महज कुछ हजार रूपये कर्ज लेते हैं। उस कर्ज की राशि को चुका न पाने पर उन्हें जेल मे डाल दिया जाता है। लेकिन देश के बैंकों का हजारों करोड़ रूपये लेकर भागने वाले वाले विजय माल्य, नीरव मोदी, ललित मोदी, मेहुल चौकसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। इसलिये हमने यह तय किया है कि 2019 में कांग्रेस की सरकार केन्द्र मे बनने पर कर्ज अदा न कर पाने वाले किसानों को जेल में नहीं डाला जाएगा। राहुल के इतना कहते आमसभा स्थल तालियों से गूँज उठा। इस दौरान लोग स्वप्रेरणा से चौकीदार चोर है का नारा लगाने लगे। आपने लोगों से पूँछा कि, कभी किसी किसान या मजदूर के घर के बाहर चौकीदार को खडा देखा है ? जबाव आया नहीं। आपने अंबानी के घर के बाहर चौकीदार देखे हैं……. हाँ। अंबानी के घर के बाहर खड़े रहने वाले चौकीदारों में से एक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हैं। जो कि दिनभर देश के 15 सबसे भ्रष्टअमीर लोगों की चौकीदार करते है। जिसके एवज में वे मोदी की मार्केटिंग करते है और फिर मोदी उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचाते है। राहुल ने कहा- वो 15 चोरों का है, मैं आपका हूँ। उन्होंने ने कहा कि आप आज कहीं बोलो चौकीदार तो जबाब मिलेगा चोर है।
एक साल में 22 लाख सरकारी नौकरियाँ देंगे
कांग्रेस के स्टार प्रचारक एंव राष्टी्रय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने अमानगंज की आमसभा में भावनात्मक अंदाज में कहा कि मैं आप लोगों से लम्बा रिश्ता बनाने बनाना चाहता हूँ। इसलिये मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा। मैं जनता हूँ कि झूठ की बुनियाद पर मजबूत रिश्ते नहीं बनते। इतना कहते ही आमसभा स्थल राहुल गाँधी जिंदाबाद, कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद और चौकीदार चोर है के नारों से गूँजने लगा। लोगों को खुद से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि मोदी जी अपने मन की बात बताते हैं लेकिन मैं आपके मन की बात जानने आया हूँ। क्योंकि, मालिक आप हैं। युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर मोदी को घेरते हुए बताया कि चुनाव के समय युवाओं को हर साल दो करोड़ नौकरियाँ देने का वादा किया गया था। लेकिन 5 सालों में हमारे युवाओं को नौकरियाँ नहीं मिलीं। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर हम खाली पड़े 22 लाख सरकारी पदों पर भर्ती करेंगे। इसके अलावा 10 लाख युवाओं को पंचायतों में रोजगार देंगे।
राहुल गाँधी ने अपने अंदाज में कहा कि इस चुनाव में मुकाबला सच्चाई और झूठ के बीच नफरत और प्यार के बीच है। वो झूठ और नफरत फैलाते है, आपको तय करना है कि नरेन्द्र मोदी के मन की बात वाली सरकार बनानी है या फिर हिन्दुस्तान के मन की बात सुनने वाली सरकार बनानी है। इस अवसर पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए व्यापमं घोटाले की जाँच का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ से बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के कार्यों में हुये व्यापक भ्रष्टाचार की भी चुनाव बाद जाँच करवाने की बात कही। राहुल गाँधी ने इस अवसर पर मध्यप्रदेश के सभी कांग्रेस प्रत्याशियों को विजयी बनाने की अपील की। साथ ही प्रचंड धूप और गर्मी में उन्हें सुनने के लिए दूर-दूर से आए लोगों के प्रति आभार प्रकट किया।
जनता चिल्ला रही… मोदी जी आख़िरी दिन आ गए !
आमसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि 120 दिन पहले हमें ऐसा मध्य प्रदेश सौंपा गया जो किसानों की आत्महत्या, बलात्कार, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मामले में नम्बर एक पर था। बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हमने सत्ता संभाली है। महज 75 दिन के अंदर आए बदलाव की तस्वीर आपके सामने है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मैं आपको निराश नहीं करूँगा। हमनें अब तक 50 लाख किसानों में से 21 लाख किसानों का कर्जा माफ़ कर दिया। शेष किसानों का भी 2 लाख तक का कर्जा जल्दी माफ़ किया जायेगा। डिफाल्टर किसानों सहित चालू खाता धारकों का भी कर्ज माफ होगा। हमें 75 दिन काम करने का मौका मिला इसके बाद आचार संहिता लग गई। सरकार ने अपनी नीति और नियत स्पष्ट कर दी है, हमने वृद्धा पेंशन बढ़ाई हमने कन्या विवाह राशि को बढ़ाकर 51 हज़ार रूपए किया, हमने बिजली के बिल घटाये और पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की वर्षों पुरानी माँग को पूरा किया है। आज भारत का नौजवान अपने हाथों में रोजगार चाहता है। पन्ना, दमोह और कटनी में हम रोजगार लाएंगे, किसान कर्ज में न डूबे, युवाओं को काम मिले हम इस नीति पर काम कर रहे हैं। मोदी जी अच्छे दिन की बात करते थे अब जनता कह रही है मोदी सरकार के आखिरी दिन आ गए हैं।
बीजेपी के राज में देश सुरक्षित नहीं
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मोदी जी गंगा साफ करने की बात करते हैं, शिवराज कहते थे नर्मदा साफ करेंगे और 600 करोड़ का वृक्षारोपण कर दिया। एक करोड़ रूपए का भी वृक्षारोपण नहीं हुआ। 6 सौ करोड़ का घोटाला कर जेब में पैसे डाल लिये। मोदी जी ने गंगा सफाई के नाम पर देश के बैंक साफ कर दिए। अब मोदी जी दो करोड़ रोज़गार की बात नहीं करते, 15 लाख देने की बात नहीं करते। कहते हैं मेरे हाथों में देश सुरक्षित है। क्या 5 साल पहले देश सुरक्षित था ? मोदी जी याद रखिएगा जब आपने पैंट और पैजामा पहनना नहीं सीखा था तब पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गाँधी ने देश में फौज बनाई थी। देश की एयरफ़ोर्स बनाई थी, नेवी बनाई थी। देश में सैनिक स्कूल खोले थे, मिलिट्री अकादमी खोली थी,डिफेंस अकादमी खोली थी। उन्होंने आतंकी हमलों पर भाजपा और मोदी को घेरते हुए पूँछा- “जब संसद में हमला हुआ किसकी सरकार थी, कारगिल हुआ तब किसकी सरकार थी, अभी हाल में पुलवामा हुआ तब किसकी सरकार थी, यह सब भयानक आतंकी हमले भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हुए।” आप जनता को गुमराह कर रहे हैं कलाकारी कर रहे हैं जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अमानगंज की आमसभा उपस्थित जनसमुदाय से कहा कि आगामी 6 तारीख को आप अपने भविष्य का बटन दबाएंगे। अभी 75 दिन का हमारा काम देखा है 175 और 275 दिनों के हमारे काम को देखकर मोदी जी शिवराज जी मुंह दिखाने के लायक नहीं रहेंगे।