* क्षत्रिय महासभा व कांग्रेस के छात्र संगठन ने SP को सौंपा ज्ञापन
* जघन्य हत्याकाण्ड को राजनैतिक और जातिगत रूप देने का लगाया आरोप
* दबाब में अथवा फंसाने के उद्देश्य से प्रकरण में दर्ज न किए जाएं बेगुनाहों के नाम
* एनएसयूआई ने भाजपा पर लगाया हत्याकाण्ड का राजनीतिकरण करने का आरोप
पन्ना। (www.radarnews.in) भाजपा नेता नीलेश दिवेदी की दिनदहाड़े की गई जघन्य हत्या को लेकर व्यापक जनाक्रोश के बीच इस संवेदनशील आपराधिक प्रकरण पर कथित तौर राजनीति शुरू हो गई। इस मामले को भाजपा बनाम कांग्रेस और ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय का रूप दिया जा रहा है। जबकि गत दिनों नीलेश का शव रखकर पन्ना के डायमण्ड चौराहे में क्षेत्र के लोगों द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मण समाज पन्ना के अध्यक्ष रामगोपाल तिवारी समेत समाज के कई बड़े नेता पहले ही यह साफ़ कर चुके हैं कि लाश पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बकायदा चेतावनी देते हुए कहा था कि इस मामले को यदि जातिगत अथवा राजनैतिक रूप देने की कोशिश की गई तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उधर, पन्ना का क्षत्रिय समाज भी इसके विरोध में है। विचारणीय पहलू यह कि जब दोनों ही पक्ष नीलेश हत्याकाण्ड पर एक जैसी सोच रखते हैं तो इस जघन्य मामले में राजीनीति कौन कर रहा है ! इसे समझने की जरुरत है ? उल्लेखनीय है कि सोमवार 29 जुलाई को क्षत्रिय महासभा शाखा पन्ना और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने पन्ना पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपकर नीलेश हत्याकाण्ड को राजनैतिक एवं जातिगत रुप दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
भंग होगी शांति दूषित होगा माहौल
एनएसयूआई ने तो भारतीय जनता पार्टी के लोगों पर हत्या के मामले के राजनीतिकरण का प्रयास करने का खुला आरोप लगाया है। एनएसयूआई का कहना है कि, जाति की राजनीति करने वाले लोग पन्ना जिले की शांति भंग करने का प्रयास कर माहौल को दूषित कर रहे हैं। इन आरोपों ने नीलेश दिवेदी हत्याकाण्ड को लेकर सियासी और सामाजिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। दरअसल भाजपा नेता की हत्या का मुख्य आरोपी लाल साहब बुंदेला पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष का भतीजा है। इस प्रकरण में पुलिस ने लाल साहब बुंदेला सहित चार लोगों को आरोपी बनाया है। पीड़ित पक्ष ने जब से दो और लोगों को आरोपी बनाने की मांग उठाई है तभी से विवाद बढ़ने लगा है।

राजनैतिक हत्या से जुड़े इस मामले नीलेश के परिजन पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं है। उनके मुताबिक हत्याकाण्ड को 6 लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था। पुलिस ने अन्य दो लोगों का नाम हत्या के प्रकरण जोड़ने का आश्वासन पीड़ित पक्ष को दिया है। इसी के बाद से आशंकाओं और आरोपों का सिलसिला शुरू हो गया है। क्षत्रिय महासभा शाखा पन्ना और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी को बकायदा ज्ञापन सौंपकर यह आरोप लगाया है कि हत्याकाण्ड को जातिगत अथवा राजनैतिक रूप देने की कोशिश की जा रही है। पुलिस पर दबाब बनाकर प्रकरण में उनके नाम जुड़वाए जा रहे हैं जिनका इससे कोई लेना देना नहीं है।
निष्पक्ष जाँच कर की जाए कार्यवाही

क्षत्रिय महासभा ने अपने ज्ञापन में यह लेख किया है कि नीलेश की हत्या से हम सभी व्यथित और दुखी हैं। इस प्रकरण की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। किसी के दबाब, बहकावे अथवा व्यक्तिगत फंसाने के उद्देश्य से प्रकरण में कोई नाम न जोड़ा जाए। जो वाकई हत्याकाण्ड में शामिल है, उनकी पहचान करके उन्हें गिरफ्तार किया जाए। वास्तविक आरोपियों की पहचान एवं सच्चाई का पता लगाने के लिए ककरहटी में लगे सीसीटीव्ही कैमरों के फुटेज खंगाले जाए। मोहनपुरा और ककरहटी के निष्पक्ष लोगों से भी घटना के सम्बंध पूँछा जा सकता है कि कौन-कौन लोग घटना के समय कहाँ पर थे। नीलेश की जिस दिन हत्या हुई थी उस दिन ककरहटी का साप्ताहिक बाजार था। चूँकि घटना 11 से 12 बजे दिन की है इसलिए ककरहटी-मोहनपुरा मार्ग से उस दिन बाजार आने-जाने लोगों से पूँछताँछ कर उनके बयान दर्ज किए जा सकते है। ज्ञापन सौंपने वालों में कैप्टन जयपाल सिंह, भानु सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, भरत सिंह, सुरेन्द्र सिंह, पवन जैन, दीपचंद्र अग्रवाल, सुरेश तिवारी, नृपेन्द्र सिंह मृगेन्द्र सिंह आदि लोग शामिल रहे।
आंदोलन करने की दी चेतावनी

कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह गहरवार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि भाजपा के लोग नीलेश दिवेदी हत्याकाण्ड का राजनीतिकरण करने का प्रयास कर रहे है। जिन लोगों का इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है उनके नाम अनावश्यक रूप से जोड़ने हेतु दबाब बनाया जा रहा है। जातिगत राजनीति करने वाले ये लोग पन्ना जिले की शांति भंग करने का प्रयास कर माहौल को दूषित कर रहे हैं। एनएसयूआई का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हत्याकाण्ड में जो लोग लिप्त हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही किए जाने पर कोई आपत्ती नहीं है। लेकिन, दबाबवश अनावश्यक रूप से जिनका प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है उनके नाम न घसीटे जाए। अगर ऐसा किया गया तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन करेगी। हालांकि ऐसी भी चर्चाएं है कि नीलेश हत्याकाण्ड को लेकर जिले के कांग्रेस नेता दो धड़ों में बंटे है। आमजन की ही तरह अधिकाँश कांग्रेसियों की सहानुभूति और संवेदनाएं दिवेदी परिवार के साथ है। सभी चाहते हैं कि इस मामले में निष्पक्ष कार्यवाही हो और पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय मिले।
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भारतीय जनता युवा मोर्चा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे नीलेश दिवेदी की जघन्य हत्या को लेकर पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं में भी काफी आक्रोश है। इस हत्याकाण्ड से स्तबध भाजपा नेता, समाजजान एवं क्षेत्र के लोग अपनी शोक संवेदना व्यक्त करने लगातार मोहनपुरा पहुँच रहे है। रविवार को खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा भी मोहनपुरा पहुँचे और नीलेश के परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। उन्होंने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि नीलेश के रूप में भाजपा ने एक कर्मठ कार्यकर्ता को खो दिया और इस गाँव तथा क्षेत्र के लोगों ने अन्याय के खिलाफ लड़ने वाले एक जुझारू-संघर्षशील व्यक्तित्व को खोया है, यह क्षति अपूर्णीय है। दिवेदी परिवार पर जो वज्रपात टूटा है, उसका मुझे एहसास है।


परिजनों का आरोप है कि यहाँ तकरीबन 3 घण्टे तक कार्यवाही के नाम पर चौकी प्रभारी मान सिंह उन्हें रोके रहे। इस दौरान नीलेश के पैर से लगातार खून बहता रहा। लोगों का ऐसा मानना है कि पैर में गोली लगने की स्थिति में नीलेश की जान बचाई जा सकती थी लेकिन समय पर समुचित प्राथमिक उपचार हेतु 20 किलोमीटर दूर पन्ना जिला चिकित्सालय लाने के बजाए बाद में उसे 70 किलोमीटर दूर स्थित सतना ले जाया गया। अत्याधिक खून बहने और इलाज में देरी के कारण नीलेश की हालत तब तक काफी नाजुक हो चुकी थी। सतना में प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडीकल कॉलेज रीवा के लिए रिफर किया गया, जहाँ शुक्रवार की ही शाम उसकी मौत हो गई। विचारणीय पहलू है कि ककरहटी में तीन घण्टे तक नीलेश के घायल अवस्था में रहने के बाबजूद उसके मृत्यु पूर्व कथन दर्ज नहीं हो सके। परिजनों का आरोप है कि नीलेश की हत्या सुनियोजित तरीके से की गई है। उसके इलाज में देरी से लेकर मृत्यु पूर्व कथन दर्ज कराने में चौकी प्रभारी ककरहटी ने जानबूझकर देरी की है।
भाजपा नेता नीलेश दिवेदी के परिजनों ने पन्ना में पुलिस और मीडियाकर्मियों को बताया कि सामना पंचायत में दबंग बुन्देला परिवार ने अपना राजनैतिक वर्चस्व को बनाए रखने के लिए उनके भाई की हत्या की है। नीलेश की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी लाल साहब बुन्देला के परिजन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। इनका आरोप है कि पंचायत में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए इस बुन्देला परिवार के इशारे पर समाना में पूर्व में भी हत्याएँ हुई है। मृतक के भाई ने बताया कि पंचायत में कई दशकों से काबिज बुन्देला परिवार को पिछले चुनाव में नीलेश समर्थित प्रत्याशी से कड़ी चुनौती मिली थी। फलस्वरूप चुनावी बुराई और मकान निर्माण के विवाद के चलते उनके भाई की हत्या की गई है। भाजपा नेता नीलेश दिवेदी की हत्या की वारदात को लेकर ककरहटी क्षेत्र सहित समूचे जिले में गहरा शोक और रोष व्याप्त है। शनिवार को पन्ना में शव रखकर धरना देने के दौरान पीड़ित परिजनों क्षेत्र के लोगों की एडीशनल एसपी बी.के. सिंह और अजयगढ़ एसडीओपी इसरार मंसूरी से हुई तीखी नोंकझोंक के दौरान हत्याकाण्ड को लेकर जन आक्रोश साफतौर देखा गया।






















पन्ना शहर से लगभग 5 किलोमीटर पन्ना-अमानगंज मार्ग से लेकर झलाई ग्राम तक मुख्यमंत्री सड़क योजना अंतर्गत जीएसबी सड़क का निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग (आरईएस) पन्ना द्वारा ठेके पर कराया जा रहा है। इस पहुंच मार्ग का ठेका भोपाल की निर्माण कम्पनी डीएलएच इन्फ्रा प्रोजेक्ट का है। पिछले एक माह से चल रहे सड़क निर्माण हेतु ठेका कम्पनी द्वारा झलाई ग्राम के बाहरी इलाके में वन सीमा के नजदीक रिक्त पड़ी शासकीय भूमि पर दैत्याकार मशीनों से खुदाई कर मुरूम निकाली जा रही है। तकरीबन 7 किलोमीटर लम्बाई और 6 मीटर चौड़ाई वाली इस सड़क में अब तक एक फिट ऊंची मुरूम की परत बिछाई जा चुकी है। इससे अवैध उत्खनन कर निकाली गई मुरूम की मात्रा का अंदाजा लगाया जा सकता है। बिना किसी वैधानिक अनुमति के मुरूम का उत्खनन कार्य मौके पर अभी भी जारी है। निर्माण कम्पनी के डायरेक्टर मनदीप सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि मुरूम के खनन की अनुमति तहसील कार्यालय पन्ना से प्रदान की गई है। जबकि खनिज सम्पदा के उत्खनन की अनुमति नियमानुसार खनिज विभाग द्वारा दी जाती है। ठेका कम्पनी डायरेक्टर के दावे पर संदेह के चलते पड़ताल करने पर जिला खनिज अधिकारी कार्यालय से पता चला कि उनके विभाग के द्वारा ग्राम झलाई में किसी तरह के खनन की किसी को भी अस्थाई अनुमति या लीज प्रदान नहीं की गई है।
पन्ना तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी से बात करने पर उन्होंने पहले तो बताया कि उनके कार्यालय से किसी को भी झलाई ग्राम में मुरूम के खनन की अनुमति नहीं दी गई है। हालांकि बाद में उन्होंने संबंधित लिपिक से चर्चा करने के पश्चात मोबाइल पर पुख्ता तौर पर जानकारी देने की बात कही है। तहसीलदार से जब इसकी अधिकारिक पुष्टि हेतु उनके मोबाइल फोन पर अलग-अलग समय पर कॉल कर उनसे सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो कई बार घंटी बजने के बाद भी उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ। उधर, संबंधित हलका पटवारी राजेश सोनी से जब बात की गई तो उन्हें सिर्फ इतना ही पता था कि झलाई पहुंच मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन, उसमें जो मुरूम डाली जा रही है वह कहां से लाई जा रही है इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। पटवारी से जब यह पूंछा गया कि झलाई में क्या मुरूम खदान की लीज स्वीकृत है या फिर किसी व्यक्ति अथवा विभाग को मुरूम खनन की अस्थाई अनुमति दी गई है तो वे सीधे तौर पर सच्चाई स्वीकार करने के बजाए जानकारी न होने की बात कहकर जबाब देने से बचते रहे। हद तो तब हो गई जब बुधवार 17 जुलाई को झलाई कोठी पहुंचकर स्थल का निरीक्षण करने के बाद भी पटवारी राजेश सोनी मुरूम के खनन की अनुमति तहसील कार्यालय से जारी होने अथवा न होने के के सम्बंध कोई जबाब नहीं दे सके।

