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चार दिन से लापता नवयुवक का जंगल में फाँसी के फंदे पर लटका मिला शव, अलग-अलग घटनाओं में तीन की मौत

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पन्ना जिला चिकित्सालय के बाहर मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम होने के इंतजार में बैठे शोक संतृप्त परिजन एवं पुलिसकर्मी।

* मर्ग कायम कर घटनाओं की जाँच में जुटी पुलिस

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के कोतवाली थाना पन्ना अंतर्गत ग्राम खजुरी कुड़ार से पिछले चार दिनों से लापता नवयुवक अंकित दुबे पुत्र शिवनारायण दुबे 22 वर्ष के मृत अवस्था में मिलने से परिवार में कोहराम मचा है। सघन खोजबीन के दौरान अंकित का शव रविवार शाम को जंगल में एक पेड़ के सहारे फाँसी के फंदे पर लटका हुआ मिला। शव में कीड़े पड़ने से भीषण दुर्गंध उठ रही थी। प्रारम्भिक पुलिस जाँच के आधार पर मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है। हालाँकि आत्महत्या की वजह पता नहीं चल सकी। सोमवार 8 जुलाई की सुबह शव का पन्ना में पोस्टमार्टम हुआ। पुलिस ने घटना पर मर्ग कायम कर प्रकरण की हर एंगल से जांच शुरू कर दी है। अंकित के परिजनों ने बताया कि बुधवार 3 जुलाई को वह किसी को बिना कुछ बताए घर से चला गया था। जवान बेटे की मौत से दुबे परिवार गहरे सदमे में है।

गाज गिरने से किसान का दुखांत

पन्ना जिले के अमानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम झरकुआ निवासी कृषक धनीराम रैकवार 60 वर्ष की आकाशीय बिजली गिरने के कारण मौत हो गई। घटना रविवार शाम करीब 7 बजे की है। शव का पोस्टमार्टम कराने सोमवार को पन्ना पहुँचे रामभुवन रैकवार ने जानकारी देते हुए बताया कि उसके पिता धनीराम रैकवार रविवार को शाम के समय साईकिल से तारा से वापिस गाँव लौट रहे थे, रास्ते में हल्की बारिश के बीच अचानक गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से पिता की मौके पर ही मौत हो गई।
वहीं अजयगढ़ क़स्बा में जहरीले पदार्थ का सेवन करने से श्यामलाल कुशवाहा पुत्र सुखदेव कुशवाहा 44 वर्ष की मौत होने का मामला प्रकश में आया है। गंभीर हालत में श्यामलाल कुशवाहा को रविवार शाम जिला चिकित्सालय पन्ना में उपचार हेतु लाया गया था। जहाँ कुछ ही समय बाद उसकी मौत हो गई। इस घटना को आत्महत्या बताया जा रहा है। लेकिन, फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि श्यामलाल कुशवाहा को किस कारण से आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है। घटना पर मर्ग कायम कर पुलिस मामले की जाँच में जुटी है।

नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने के लिए सभी समाज प्रयास करें

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मुख्यमंत्री ने छिंदवाड़ा में मेहरा डेहरिया समाज के विवाह सम्मलेन में समाज के प्रतिभावान युवाओं को सम्मानित कर प्रशस्ति-पत्र दिये।

* मुख्यमंत्री कमल नाथ छिंदवाड़ा में सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल हुए

भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने के लिए सभी समाजों को प्रयास करना होंगे। श्री नाथ ने कहा कि यह इसलिए जरूरी है कि पूरे विश्व में भारत की जो एक अलग पहचान है वह कायम रहे और हमारी ताकत बनी रहे। मुख्यमंत्री आज छिंदवाड़ा में मेहरा डेहरिया समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

अनेकता में एकता हमारी शक्ति

मुख्यमंत्री कमल नाथ ने कहा कि पूरे विश्व में भारत अपने सामाजिक, आध्यात्मिक मूल्यों और अपनी संस्कृति के कारण पहचाना जाता है। यही हमारी शक्ति भी है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में इतनी अनेकताएँ और विविधताएँ होने के बावजूद भी अगर हम एक झण्डे के नीचे पूरे एकता के साथ खड़े है तो इसकी पीछे हमारे मूल्य हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी समाज को आत्मिक-चिंतन की जरूरत है कि वे नई पीढ़ी में आ रहे भटकाव को रोकें। नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें, इसके लिए हमें विशेष प्रयास करना होंगे। भारत की अपनी विशेषताओं के कारण ही आज पूरा विश्व भारत की ओर देखता है। हमारी यह ताकत बनी रहे। यह देश की मजबूती के लिए जरूरी है।

185 जोड़े परिणय सूत्र में बँधे

मुख्यमंत्री में मेहरा डेहरिया समाज के प्रतिभावान युवाओं को सम्मानित कर प्रशस्ति-पत्र दिये।
मुख्यमंत्री कमल नाथ ने समाज के सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नव-दंपत्तियों को आशीर्वाद दिया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की । आयोजन में 185 जोड़े परिणय सूत्र में बँधे । मुख्यमंत्री श्री नाथ ने कार्यक्रम में समाज के प्रतिभावान युवाओं को सम्मानित किया। इसमें छिन्दवाडा जिले के तामिया विकासखंड की कुमारी भावना डेहरिया को माउंट एवरेस्ट फतह करने, श्री ओम जगदेव को स्केटिंग खेल में राष्ट्रीय समिति द्वारा चयन होने तथा सचिन डेहरिया का जूडो कराटे खेल में राष्ट्रीय टीम में चयन होने पर प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री श्री नाथ ने अन्य जन-प्रतिनिधियों के साथ ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की थीम पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सीताराम डेहरिया द्वारा निर्मित फिल्म “बेटियाँ” का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सांसद नकुल नाथ, पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना एवं बड़ी संख्या में डेहरिया समाज बन्धु उपस्थित थे।

पड़ताल : बेटे की चाहत में चौथी बार माँ बनी महिला को मिली मौत, जुड़वा बेटियों को जन्म देते ही थम गईं साँसें, अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई सावित्री

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पोस्टमार्टम के बाद सावित्री के शव को अंतिम संस्कार के लिए पवई ले जाते परिजन।

* पन्ना जिले में 24 घण्टे में दूसरी प्रसूता ने दम तोड़ा

* मातृ-शिशु मृत्यु दर की अधिकता का कैसे मिटेगा कलंक

* पति का आरोप पवई में डिलेवरी के बाद मौत होने पर किया रिफर

* नॉर्मल डिलीवरी के बाद अत्याधिक ब्लड बहने के कारण हुई मौत

* पहले से हैं दो बेटियाँ, कुछ वर्ष पूर्व जन्म के बाद बेटे का हो गया था दुखान्त

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in)  सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के लिए बदनाम मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जुड़वा बेटियों को जन्म देने वाली प्रसूता सावित्री सोनी की मौत अपने पीछे कई ज्वलंत सवाल छोड़ गई। जिले में 24 घण्टे के अंदर मातृ मृत्यु की यह दूसरी दुखद घटना है। इसके पूर्व गुरुवार की रात पन्ना जिला चिकित्सालय में प्रसव हेतु भर्ती बृजपुर निवासी रेनू लखेरा और उसके गर्भ में पल रहे शिशु का दुखांत हो गया था। प्रसूता सावित्री का असमायिक निधन कथिततौर पर इलाज में लापरवाही बरतने के साथ-साथ हमारे समाज में आज भी मौजूद लैंगिक असमानता की संकीर्ण सोच और सुरक्षित मातृत्व के उद्देश्य से चलाए जा रहे महत्वकाँक्षी सरकारी कार्यक्रमों का धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वयन न होने का दुष्परिणाम है। इस मामले की गहन पड़ताल करने से पता चलता है न्यू इंडिया में लड़कियों की अपेक्षा लड़कों की अधिक चाह आज भी बरकरार है। एक बेटे की खातिर लोग कोई भी जोखिम उठा रहे हैं, इसके लिए फिर चाहे खुद को ही दाँव पर क्यों न लगाना पड़े। अत्यंत ही चिंताजनक यह स्थिति बताती है कि तमाम जागरूकता कार्यक्रमों और जननी सुरक्षा से जुड़ीं योजनाओं पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

नर्सों ने डिलीवरी कराई, डॉक्टर ने देखा तक नहीं

जिला चिकित्त्सालय पन्ना के बाहर खड़े शोकसंतृप्त परिजन।
पवई निवासी सावित्री पति केदारनाथ सोनी 41 वर्ष बुधवार 3 जुलाई को प्रसव हेतु अपना परीक्षण करवाने के लिये पवई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र आई थी। डाॅक्टर ओम हरी शर्मा ने बताया कि सावित्री का परीक्षण बीएमओ डाॅक्टर एम.एल. चौधरी के द्वारा करने के पश्चात उसके शरीर में ब्लड की कमी होने एवं गर्भ में दो बच्चे होने के मद्देनजर उसे पन्ना जिला चिकित्सालय में प्रसव कराने का परामर्श दिया गया। शुक्रवार 5 जुलाई को देर रात 3 बजे सावित्री सोनी को असहनीय प्रसव पीड़ा होने की स्थिति में परिजन उसे लेकर पुनः सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पवई पहुँचे। पति केदारनाथ सोनी ने बताया कि प्रसव की स्थिति को देखते हुये नर्सों के द्वारा उसकी पत्नी की नॉर्मल डिलीवरी कराई गई। दो बच्चियों को जन्म देने के एक घण्टे बाद सावित्री बाई को ब्लीडिंग होने उसकी हालत अचानक तेजी से बिगड़ने लगी। पति ने आरोप लगाया कि इस बीच डॉक्टर ओम हरी शर्मा स्वास्थ्य केन्द्र में आए लेकिन उन्होंने सावित्री को देखा तक नहीं, उल्टा मुझे उलाहना देते हुए बोले कि जो कुछ हो रहा है उसमें तुम्हारी गलती है। तभी अत्याधिक ब्लीडिंग होने के कारण सावित्री पवई में ही दम तोड़ दिया।

खुद को बचाने मृत अवस्था में किया रेफर

पत्नी की मौत के बाद जिला चिकित्त्सालय पन्ना के बाहर विलाप करता केदारनाथ सोनी।
केदारनाथ का आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरतने से मौत होने के मामले में लीपापोती कर खुद को बचाने के लिए ड्यूटी डॉक्टर व नर्सों ने उसकी पत्नी को मृत अवस्था में ही ऑक्सीजन मास्क पहनाकर जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रिफर कर तुरंत 108 एम्बुलेंस रवाना कर दिया। पूर्णतः अचेत अवस्था में पन्ना लाई गई सावित्री सोनी का जिला चिकित्सालय में ड्यूटी डॉक्टर ने गहन परीक्षण करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इससे प्रसूता की मौत पवई सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में होने सम्बंधी उसके पति के आरोप को बल मिलता है। उधर, डॉक्टर ओम हरी शर्मा ने इन आरोपों को नकारते हुए बताया कि इलाज किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई। उनका दावा है कि सुबह सावित्री को जब रेफर किया गया तब ब्लीडिंग की वजह से उसकी हालत काफी नाजुक थी लेकिन वह जीवित थी।

बेटे के लिए हाई रिस्क डिलीवरी का जोखिम

सावित्री की मौत की रिश्तेदारों को सूचना देते परिजन।
जुड़वा कन्या शिशुओं को जन्म देने के कुछ ही समय बाद असमय काल-कवलित हुई सावित्री सोनी की यह चौथी डिलेवरी थी। पहले से उसकी दो बेटियाँ है, जिसमें बड़ी बेटी की उम्र 18 वर्ष, दूसरी बेटी की उम्र 9 वर्ष है। इसके पश्चात वर्ष 2011-12 में उसे एक पुत्र हुआ था, जिसकी मृत्यु हो गई थी। ऐसी आमचर्चा है कि सोनी परिवार को वारिस के रूप में एक बेटे चाहत थी। पितृ सत्तात्मक समाज के ढ़ाँचे, परिजनों की भावनाओं के मद्देनजर और बेटे की मौत के गम को भुलाने के लिए सावित्री खुद भी एक पुत्र चाहती थी। सम्भतः इसीलिए उसने इस उम्र में चौथी बार माँ बनने का जोखिम उठाते हुए खुद को दाँव पर लगाया था। प्रसव में कोई समस्या न हो इसलिए कटनी में भी उसका इलाज कराया गया। इस बीच स्थानीय स्तर पर उसकी प्रसव पूर्व हुई जाँच में उसके शरीर में खून की कमी पाई गई। लेकिन इसकी पूर्ति के लिए सम्बंधित आशा कार्यकर्ता, एएनएम ने क्या किया यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
बहरहाल इस स्थिति के मद्देनजर ही बीएमओ डाॅक्टर एम.एल. चौधरी ने 3 जुलाई को सावित्री का परीक्षण कर हाई रिस्क डिलीवरी की जानकारी देते हुए पन्ना में प्रसव कराने का परामर्श दिया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शुक्रवार 5 जुलाई को सावित्री को देर रात असहनीय प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने उसे नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पवई ले जाना ही उचित समझा। नॉर्मल डिलीवरी में जुड़वा कन्या शिशुओं का जन्म होने से जहाँ कथिततौर पर सोनी परिवार की पुत्र प्राप्ति की तीव्र आकांक्षा अधूरी रह गई वहीं प्रसव के महज घण्टे भर बाद ही पवई में सावित्री ने दम तोड़ दिया। जुड़वा बेटियों के दुनिया में आते ही उनके सिर से माँ का साया उठने से सोनी परिवार में गहरे सदमे में है।

कागजों पर चल रहे महत्वकांक्षी कार्यक्रम

उल्लेखनीय है लैंगिक असमानता को दूर करने, बेटियों के पक्ष में सकारात्मक माहौल का निर्माण करने, उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से शासन दवारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, लाड़ली लक्ष्मी योजना, सुकन्या समृद्धि योजना आदि कार्यक्रम जोर-शोर से चलाए जा रहे हैं। अति पिछड़े पन्ना जिले में इन कार्यक्रमों का जमीनी स्तर पर ईमानदारी से क्रियान्वयन न होने का ही यह नतीजा है कि पुत्र की चाहत में आज भी कई दम्पत्ति अपना परिवार बढ़ाते जा रहे हैं या फिर इसके लिए खुद को जोखिम में डाल रहे हैं। सावित्री सोनी की मौत का मामला इसका एक उदाहरण मात्र है।
फाइल फोटो।
इसके अलावा मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, महिलाओं के सुरक्षित प्रसव एवं खून की कमी की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य विभाग तथा महिला बाल विकास विभाग संचालित योजनाएँ एवं जागरूकता कार्यक्रम जैसे कि- गर्भधारण से लेकर प्रसव पूर्व तक जाँच, खून की मात्रा बढ़ाने आवश्यक दवाओं का वितरण, गर्भावस्था में समुचित पोषण उपलब्ध कराने पोषण आहार वितरण, मातृ वंदना योजना, लालिमा अभियान आदि कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित है। परिवार नियोजन कार्यक्रम की हालत भी काफी ख़राब है। शासन की प्राथमिकता वाले इन कार्यक्रमों के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने के कारण पर जिले में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए के खर्च के बाबजूद सार्थक नतीजे नहीं आ रहे हैं। यही वजह है कि सावित्री सरीकी एनीमिक महिलाएँ न सिर्फ लगातार सामने आ रहीं हैं बल्कि जागरूकता के आभाव और सिस्टम की नाकामी के कारण वे अपनी जान भी गवाँ रही है।

इनका कहना है –

“प्रसूता सावित्री सोनी की मौत अत्याधिक ब्लीडिंग के कारण होने की जानकारी मिली है, शव का पोस्टमार्टम कराया गया है जिसमें मौत का कारण पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा। यह उसकी चौथी डिलेवरी थी, उसे पवई में समुचित इलाज न मिलने और उसके एनीमिक होने की जाँच कराई जाएगी, जाँच के जो भी नतीजे आएँगे उसी के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।”

– डॉ. एल. के. तिवारी प्रभारी सीएमएचओ जिला पन्ना।

प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती महिला की मौत पर हंगामा, 10 घण्टे तक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को नॉर्मल बताती रहीं डॉक्टर, डिलेवरी के लिए ऑपरेशन थियेटर में ले जाने पर अचानक हुई मौत

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शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए ले लाते पुलिसकर्मी एवं मृतिका के परिजन।

* परिजनों ने लगाया में इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप

* तनाव बढ़ने पर कोतवाली थाना पुलिस को बुलाया

* पन्ना में मातृ और शिशु मृत्यु का नहीं थम रहा सिलसिला

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी मातृ और शिशु मृत्यु दर की अधिकता का कलंक पन्ना जिले के माथे से नहीं मिट पा रहा है। इस घोर नाकामी की कई वजह हैं, जिसमें प्रसव के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। अति पिछड़े इस जिले में मरीजों के इलाज में कथित तौर लापरवाही को लेकर सरकारी स्वास्थ सेवायें वैसे भी काफी बदनाम हैं। गुरुवार 4 जुलाई की देर रात पन्ना के जिला चिकित्सालय में प्रसव हेतु भर्ती एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की अचानक मौत होने का अत्यंत ही दुखद मामला सामने आने के बाद एक बार फिर इलाज में लापरवाही के आरोप पीड़ित परिजनों की ओर से लगाए जा रहे हैं।
दरअसल, 10 घण्टे तक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को डॉक्टर मीना नामदेव और नर्सेस पूरी तरह नॉर्मल बतातीं रहीं लेकिन जब उसे सीजेरियन ऑपरेशन के लिए ओ.टी. में ले जाया गया तो कथिततौर महिला की तबियत अचानक इतनी तेजी से बिगड़ी की ऑपरेशन थियेटर की टेबल पर ऑपरेशन से पहले ही उसकी मौत हो गई। चिकित्सक महिला की कोख में पल रहे शिशु को भी नहीं बचा सके। पहली बार माँ बनने जा रही रेनू लखेरा 28 वर्ष और उसके गर्भस्थ शिशु की अचानक रहस्मय परिस्थितियों में मौत होने से आक्रोशित परिजनों ने बहु के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने मौके पर पुलिस को बुला लिया। सुबह भारी आक्रोश और मातमी चींख-पुकार के बीच मृतिका रेनू लखेरा के शव को पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया, तब कहीं जाकर स्थिति सामान्य हो सकी। इस घटना पर कोतवाली थाना पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर मामले को जाँच में लिया है।

समय रहते रेफरल क्यों नहीं किया

सरोज कुशवाहा, आशा कार्यकर्ता बृजपुर।
रेनू पत्नी रुपेश लखेरा 28 वर्ष निवासी बृजपुर को बुधवार 3 जुलाई को दोपहर में 3 बजे पन्ना लाकर जिला चिकित्सालय में संस्थागत प्रसव हेतु भर्ती कराया गया था। आशा कार्यकर्ता सरोज कुशवाहा ने बताया कि पन्ना आने से पूर्व रेनू को उनके परिजन बृजपुर स्थित प्रसव केन्द्र पर ले गए थे। जहाँ ड्यूटी में तैनात एएनएम पार्वती मण्डल ने रेनू की जाँच उपरांत बच्चेदानी से हल्का पानी आने पर उसे जिला चिकित्सालय के लिए रेफरल किया गया। पन्ना में डॉक्टर मीना नामदेव और लेबर रूम की नर्सेस ने रेनू की जाँच कर जच्चा-बच्चा दोनों को पूरी तरह नॉर्मल बताते हुए परिजनों को प्रसव के लिए पीड़ा बढ़ने तक इन्तजार करने की बात कही।
ससुर राकेश कुमार लखेरा।
आशा कार्यकर्ता सरोज कुशवाहा और रेनू के ससुर राकेश कुमार लखेरा, जेठ रत्नेश लखेरा ने पत्रकारों को बताया कि गुरुवार रात्रि 12:30 बजे रेनू का लेबर रूम में आखिरी बार परीक्षण किया गया। इसके पश्चात डॉक्टर मीना नामदेव और लेबर रूम की नर्सेस ने जानकारी दी कि रेनू का प्रसव कराने के लिए ऑपरेशन करना पड़ेगा। इससे चिंतित आशा कार्यककर्ता और परिजनों के पूँछने पर उनसे कहा गया कि सबकुछ ठीक है, घबराने की कोई बात नहीं है। ऑपरेशन के लिए रेनू को अतिरिक्त ब्लड की जरुरत नहीं है, उसका ब्लड प्रेशर, गर्भस्थ शिशु की पल्स भी पूरी तरह नार्मल है। लेबर रूम से चलकर अपने वार्ड तक आई रेनू लखेरा को पूर्णतः सामान्य स्थिति में व्हील चेयर पर बैठाकर ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया।

खुशी की उम्मीद में मिला गम

रेनू की मौत पर विलाप करते परिजन।
लखेरा परिवार के सदस्य देर रात ऑपरेशन थियेटर के बाहर बैठे घर में नए सदस्य के आगमन की खुशखबरी सुनने व उसका स्वागत करने के लिए बेचैन थे। जच्चा-बच्चा के पूर्णतः स्वस्थ्य होने की प्रार्थना कर रहे थे। गुरुग्राम (हरियाणा) की प्रायवेट कम्पनी में नौकरी कर रहा रुपेश भी दूर बैठा अपने पहले बच्चे और पत्नी का हालचाल जानने लगातार फोन से परिजनों के सम्पर्क में था। इस बीच ऑपरेशन में होती देरी के चलते अंदर की कोई खबर न मिलने, पैरामेडिकल स्टॉफ की असमान्य भाव-भंगिमा तथा हलचल को देखते हुए रेनू की ससुराल पक्ष के लोग अनहोनी की आशंका के चलते घबराने लगे। रात्रि में 2 बजे अचानक रेनू की तबियत बिगड़ने की जानकारी देते हुए परिजनों से ब्लड मँगाया गया। बढ़ती धड़कनों के बीच सब कुछ सही होने की उम्मीद में आँसुओं को थामे बैठे परिजनों को रात में तकरीबन 3 बजे जब यह बताया गया कि रेनू और उसकी कोख में मौजूद शिशु की ऑपरेशन होने से पहले ही मौत हो चुकी है तो सभी छाती पीट-पीटकर रोने-बिलखने लगे।

दोषियों के खिलाफ हो कार्यवाही

जेठ रत्नेश लखेरा।
मृतिका के ससुर राकेश कुमार लखेरा, जेठ रत्नेश लखेरा का आरोप है कि उनकी बहु की मौत कथिततौर पर डॉक्टर मीना नामदेव व नर्सेस की घोर लापरवाही के चलते हुई है। इनका कहना है कि जब सबकुछ ठीक था तो फिर अचानक रेनू की तबियत क्यों बिगड़ी, शरीर में ब्लड पर्याप्त होने की जानकारी देने के बाद ब्लड क्यों मँगाया गया, मौत की असल वजह क्या है, रेनू को समय रहते मेडीकल कॉलिज रेफरल क्यों नहीं किया गया और शिशु को बचाने क्या प्रयास किए गए आदि सवालों के जबाब उन्हें नहीं दिए गए। गमजदा परिजनों ने यह माँग रखी कि उनकी बहु का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराकर सच्चाई को सामने लाया जाए। इलाज में कथिततौर पर लापरवाही बरतने वाली महिला चिकित्सक समेत संबंधितों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जाए। ताकि इस तरह के संवेदनशील मामलों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। उधर, जब इस सम्बंध डॉक्टर मीना नामदेव से उनका पक्ष जानने के लिए सम्पर्क किया गया तो घण्टी बजने के बाद भी उनका मोबाइल रिसीव न होने के कारण बात नहीं हो सकी।

कार्यक्रमों को लगा रहे पलीता

मेडीकल स्टोर से खरीदी गईं दवाओं की पर्ची।
उल्लेखनीय है कि मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करते हुए सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर कैशलेश डिलेवरी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रसव हेतु स्वास्थ्य केन्द्रों में आने वाली महिलाओं को दवाईयाँ,जाँच, भोजन सहित समस्त सेवाएँ पूर्णतः निः शुल्क प्रदान की जाती है। इसके अलावा जननी सुरक्षा के तहत प्रसूता और प्रेरक को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। पन्ना जिले में कैशलेश डिलेवरी कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत यह है कि जिला चिकित्सालय में पहुँचने वाली गर्भवती महिलाओं के परिजनों से बाहर से दवाइयाँ मंगाई जा रहीं है। रेनू लखेरा के परिजनों से भी तकरीबन 500 रुपए की दवाएँ तथा प्रसव से सम्बंधित आवश्यक सामग्री मेडीकल स्टोर से मंगाई गई।
सवाल यह है कि जिन दवाओं को बाहर से मंगाना पड़ा क्या वे जिला चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं थीं अथवा उक्त दवाएँ जिला चिकित्सालय के स्टोर की शोभा बढ़ा रहीं थी, यह जांच का विषय है। गौर करने वाली बात यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग के महत्वकांक्षी कार्यक्रम “कायाकल्प एवं लक्ष्य” के क्रियान्वयन के बाबजूद पन्ना जिला चिकित्सालय में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने को लेकर चिकित्सालय प्रबंधन गम्भीर नहीं है। इन कार्यक्रमों की राशि खर्च करने में अव्वल रहने वालों को इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि जिस मंशा से कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं वह पूरी हो भी रही है या नहीं।

“डेथ ऑडिट” क्या निष्पक्ष हो पाएगी

सिविल सर्जन से मिलने के लिए जाते पीड़ित परिजन।
प्रसव कराने के लिए जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती हुई रेनू लखेरा की मौत महिला चिकित्सक एवं नर्सेस की लापरवाही से हुई या फिर कोई और कारण है। इसकी जाँच क्या पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ सम्भव हो पाएगी ! यह सवाल दरअसल इसलिए उठ रहा है कि क्योंकि यह आम धारणा बन चुकी है कि यदि इलाज में लापरवाही के आरोप सही निकले तो भी जांचकर्ता चिकित्सक जांच में लीपापोती कर अपने साथी चिकित्सक व सहयोगी स्टॉफ को बचा लेते हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि सभी डॉक्टर यह भलीभाँति जानते है कि आज अगर उन्होंने अपने साथियों को नहीं बचाया तो कल जब उनसे कोई गड़बड़ी होगी तो फिर उन्हें कौन बचाएगा ? आंतररिक तौर पर बेहद मजबूत इस अघोषित भावना के चलते आमतौर पर इलाज में लापरवाही के आरोप डॉक्टरों के खिलाफ सिद्ध नहीं हो पाते। बहरहाल नवविवाहिता रेनू लखेरा के मामले क्या होता है अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा। प्रसव के समय पूर्णतः सामान्य बताई जा रही रेनू और उसके गर्भस्थ शिशु की असमान्य मौत को लेकर उनके परिजनों के मन में कई सवाल हैं। क्या “डेथ ऑडिट” से उन्हें इन सवालों के जबाब मिल पाएँगे, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

इनका कहना है –

“रेनू लखेरा का ऑपरेशन नहीं हो पाया बेहोशी का इंजेक्शन देने से पहले ही उसकी ऑपरेशन थियेटर की टेबल पर ही मौत हो गई, ऐसा मुझे बताया गया है। उस समय वहाँ पर डॉक्टर मीना नामदेव व डॉक्टर स्मृति गुप्ता मौजूद थीं। प्रसव के कुछ समय पूर्व तक सामान्य रही रेनू की मौत अचानक कैसे हुई यह पोस्टमार्टम होने और प्रसव पूर्व उसकी जाँच से लेकर अब तक चले इलाज की पड़ताल करने से पता चल पाएगा। इस तरह के मामलों को लेकर हम संवेदनशील है इसलिए हर पहलू से निष्पक्ष जाँच की जाएगी। जाँच के नतीजे के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।”

– डॉ. आर. एस. त्रिपाठी, प्रभारी सिविल सर्जन, डीएच पन्ना।

जियोस की बैठक में होशंगाबाद जिले में 261 लाख के निर्माण कार्य अनुमोदित

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जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने अपने प्रभार के होशंगाबाद जिले में योजना समिति की बैठक ली।

* प्रभारी मंत्री पी.सी. शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक

होशंगाबाद। (www.radarnews.in) जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा की अध्यक्षता में होशंगाबाद जिला योजना समिति की बैठक में 20 कार्यों के लिये 261 लाख के प्रस्ताव अनुमोदित किये गये। श्री शर्मा ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि ठेकेदारों को गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिये पहले समझाइश दी जाये। स्थिति में सुधार न होने पर ब्लैक-लिस्ट करने की कार्यवाही करें।
मंत्री पी.सी. शर्मा ने अपने प्रभार के जिले होशंगाबाद में दिव्यांगजनों को मोटोराइज्ड ट्रायसिकल वितरित की।
प्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने निर्माण स्थलों से लोगों को विस्थापित करने के पहले उनके लिये सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने पूर्व में स्वीकृत सड़कों के निर्माण कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने के लिये कहा। श्री शर्मा ने सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिये। बिजली विभाग को भी निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिये कहा। बैठक में विधायक सर्वश्री सीतासरन शर्मा, विजयपाल सिंह, ठाकुरदास नागवंशी और प्रेमशंकर वर्मा सहित सदस्य उपस्थित थे।
होशंगाबाद में दिव्यांगों को दी मोटराइज्ड ट्राईसिकिल जनसम्पर्क मंत्री ने 23 दिव्यांगों को मोटराइज्ड ट्राईसिकिल भी वितरित की। पूर्व विधायक श्रीमती सविता दीवान, विजय दुबे और कपिल फौजदार मौजूद थे।

प्रदेश में 753 करोड़ लागत की बीओटी सड़क के काम पूरे

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सांकेतिक फोटो।
भोपाल। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम ने पिछले 6 माह में बीओटी योजना में 753 करोड़ लागत के 3 सड़कों के काम पूरे किये हैं। इन कामों को पूरा किये जाने में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा गया है। मनगंवा-चाकघाट राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-27 लम्बाई 52.07 किलोमीटर 4 लेन मार्ग निर्माण पर 410 करोड़ खर्च किये गये। राऊ-मऊ-मण्डलेश्वर राज्य राजमार्ग क्रमांक-1 74.40 किलोमीटर लम्बाई 2 लेन मार्ग निर्माण पर 176 करोड़ रूपये खर्च किये गये। घोगा-बिलुआ मुख्य जिला मार्ग 19 किलोमीटर लम्बाई 2/4 लेन मार्ग के निर्माण पर 167 करोड़ खर्च कर किये गये।

बदलाव की दस्तक : माँ की तेरहवीं पर मृत्यु भोज का किया बहिष्कार, लोधी समाज के अध्यक्ष का साहसिक निर्णय

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ग्राम सरवंशी में लोधी चंद्रशेखर सिंह के घर पर एकत्र समाजजन एवं क्षेत्र के लोग।

* कुरीति को मिटाने के निर्णय की समाजजनों ने की सराहना

* शोकसभा कर मृत आत्मा की शांति के लिये की गई प्रार्थना

पण्डित मनीष सारस्वत/राजेन्द्र कुमार लोध, पन्ना। (www.radarnews.in) मृत्यु भोज लम्बे समय से बहस का मुद्दा रहा है। कई विद्वानों का मानना है कि यह एक सामाजिक बुराई है, इसे बंद किया जाना चाहिए। जबकि कुछ लोग इस वैदिक व्यवस्था के पक्षधर है। सबके अपने-अपने तर्क है। बावजूद इसके आधुनिक प्रगतिशील समाज में यह सोच लगातार मजबूत हो रही है कि अपनों का खोने का दुःख और ऊपर से तेरहवीं संस्कार पर भारी भरकम खर्च कहाँ तक उचित है। इस कुरीति के कारण कई दुःखी परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते है। जीवन भर कर्ज के कुचक्र से मुक्त नहीं हो पाते है। पन्ना जिले में लोधी समाज की बैठकों में लम्बे समय से मृत्यु भोज को बंद करने की बात होती रही है लेकिन इसकी शुरूआत समाज की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष लोधी चन्द्रशेखर सिंह आज अपने घर से की है। उन्होंने अपनी माता जी स्वर्गीय सुमित्रा सिंह लोधी के निधन उपरांत तेरहवीं के दिन मृत्यु भोज आयोजित न करके सदियों से चली आ रही इस समाजिक कुरीति को मिटाने का साहसिक कदम उठाया है। अच्छी बात यह है कि समाजजनों ने उनके इस निर्णय की सराहना की है। समाज के प्रबुद्धजनों ने इस निर्णय को मानवीय, व्यवहारिक और दूरदर्शितापूर्ण बताया है।

परिजनों की सहमति से लिया फैसला

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय लोधी युवा महासभा जिला ईकाई पन्ना के जिलाध्यक्ष लोधी चन्द्रशेखर सिंह जी की माता स्व. सुमित्रा सिंह लोधी 74 वर्ष का गुरूवार 20 जून 2019 को दुखद निधन हो गया था। वे कुछ समय से बीमार चल रहीं थीं। उनके गृह ग्राम खोरा सरवंशी में उनका अंतिम संस्कार विधि-विधान के साथ परिवाजनों के द्वारा किया गया। लेकिन उनकी त्रियोदशी (तेरहवीं) पर मंगलवार 02 जुलाई 2019 को परिवार ने मृत्यु भोज का आयोजन नहीं किया। यह निर्णय परिवार के सभी सदस्यों की पूर्ण सहमति से लिया गया। इसके पीछे मंशा तेरहवीं के मृत्यु भोज की सदियों पुरानी कुप्रथा को सामाप्त करने का संदेश देना है। कई विद्वानों का मानना है कि कोई भी उपदेश और संदेश तभी सार्थक और प्रभावी साबित होता है जब व्यक्ति स्वंय उसे अपने व्यवहार में उतारते है। मृत्यु भोज को बंद करने की समाजिक स्तर पर चल रही चर्चाओं के बीच लोधी समाज की युवा इकाई के अध्यक्ष चन्द्रशेखर लोधी ने इसकी शुरूआत अपने घर से करके समाज के समक्ष अनुकरणीय उदहारण प्रस्तुत किया है।

समाज सुधार की दिशा में क्रांतिकारी कदम

स्व. सुमित्रा सिंह लोधी के छायाचित्र पर पुष्पांजली अर्पित करते पवई विधायक प्रह्लाद लोधी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार 02 जुलाई चंद्रशेखर की माता जी की तेरहवीं थी। जिसमें बड़ी संख्या में दूर-दूर से समाज के लोग, परिचित और क्षेत्रवासी शामिल हुये। लेकिन आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद चन्द्रशेखर ने तेरहवीं पर मृत्युभोज आयोजित नहीं किया। बेशक उनका यह निर्णय कतिपय लोगों को रास नहीं आया पर उन लोगों की तादाद कहीं अधिक है जो कि इस निर्णय को समाज सुधार की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताते हुये उसके पक्ष में दृढ़ता के साथ खड़े हैं। उनकी इस भावना और निर्णय का पवई विधायक प्रहलाद लोधी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीपाल लोधी एवं एन.पी. सिंह व्याख्याता स्वामी ब्रम्हानंद बौद्धिक संघ अध्यक्ष बुन्देलखण्ड ने खुले मन से स्वागत किया है।

.. ताकि कमजोर परिवारों को न हो अड़चन

स्व. सुमित्रा सिंह लोधी की आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं पर आयोजित शोकसभा में उपस्थित लोग।
लोधी चन्द्रशेखर सिंह और उनके भाईयों सुभाष सिंह, शुभकांत सिंह लोधी, राजा सिंह लोधी ने बताया कि माता जी के तेरहवीं पर मृत्युभोज आयोजित करने में उन्हे किसी तरह की कोई समस्या नहीं थी। लेकिन इस अति पिछड़े और अशिक्षित इलाके के अधिकांश लोग गरीब है, जिनकी आजीविका कृषि पर निर्भर है। हमने मृत्यु भोज का बहिष्कार इस उद्देश्य से किया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लोग समाजिक परम्पराओं और झूठी मान्यताओं के दबाव में आए बगैर इस कुरीति को नकारने का साहस कर सकें। उन्हें यह बताने में आसानी हो कि जब समाज के अध्यक्ष ने ही मृत्यु भोज नहीं कराया तो फिर इस कुप्रथा को हम क्यों ढोएं। अनूठी बात यह है कि लोधी चन्द्रशेखर सिंह के परिवार के द्वारा मृत्युभोज के स्थान पर शोकसभा आयोजित की गई जिसमें सभी लोगों ने उनकी स्वर्गीय माता जी की आत्मा की शांति और शोकसंतृप्त परिजनों को इस वज्रपात को सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिये ईश्वर से प्रार्थना की है। शोकसभा में मलखान सिंह लोधी, केशरी लोधी, रामनारायण लोधी, शिव मोहन सिंह, धुव्र सिंह लोधी, विक्रम मेहदेले, दिनेश लोधी, विजय सिंह, श्रीराम लोधी, राजेंद्र लोधी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र एवं समाज के लोग शामिल रहे।

पन्ना टाईगर रिजर्व में वन्यजीवों के सामूहिक शिकार की योजना का खुलासा, जाल बिछाकर वन्यजीवों का शिकार करने आए शिकारियों को पहुँचाया जेल

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वनकर्मियों की अभिरक्षा में पकड़े गए शातिर शिकारी और उनसे जब्त सामग्री।

* वनकर्मियों की सजगता और तत्परता से पकड़े गए 3 शिकारी

* किशनगढ़-मड़ियादौ रेन्ज के जंगल में आए थे शिकार करने

* आरोपियों के कब्जे से रेशम के तीन जाल, मोटर साईकिल बरामद

पन्ना/किशनगढ़। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश का पन्ना टाईगर रिजर्व शिकारियों और तस्करों के निशाने पर है। पिछले महीने ही यहाँ की पन्ना बफर रेन्ज अंतर्गत सागौन के 600 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई होने का हैरान करने वाला मामला सामने आया था। पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गम्भीर प्रश्न चिन्ह खड़े करने वाले इस प्रकरण में अभी कार्यवाही चल ही रही थी कि इस बीच पन्ना टाईगर रिजर्व के किशनगढ़ तथा मड़ियादौ बफर रेन्ज के जंगल में सामूहिक रूप से वन्यजीवों के शिकार की योजना को वनकर्मियों ने समय रहते नाकाम कर दिया है।
वन्य प्राणियों के अवैध शिकार के मकसद से जंगल में जाल बिछाने आए तीन शातिर शिकारियों को मैदानी वन अमले ने रंगे हाथ गिरफ्तार करने में भी सफलता प्राप्त की है। पकड़े गए शिकारियों के कब्जे से रेशम के तीन बड़े जाल और एक मोटरसाईकिल बरामद की गई है। इस मामले के सामने आने से एक बार फिर यह साफ़ हो चुका है कि पन्ना टाईगर रिजर्व के बाघ, अन्य वन्यजीव और बहुमूल्य वन सम्पदा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

पीछा करके पकड़ा

सांकेतिक फोटो।
रविवार 30 जून को किशनगढ़ तथा मड़ियादौ बफर रेन्ज का मैदानी अमला संयुक्त रूप से जंगल गश्ती कर रहा था। इस दौरान बीट पटना के वन कक्ष क्रमाँक पी-469 में तीन व्यक्ति जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए जाल लेकर वहाँ लगाने के लिए खड़े थे। वनकर्मियों को देखते ही तीनों शिकारी मोटरसाईकिल क्रमाँक-एमपी-16-एमके-6438 से भागने लगे। वनकर्मियों द्वारा तत्परता से पीछा करते हुए तीनों आरोपियों को पकड़ा गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेन्द्र सिंह नर्गेश ने बताया कि पकड़े गए शिकारियों की पहचान करण सिंह पिता रूप सिंह घोष 50 वर्ष निवासी बंधिया थाना बमीठा, बाबू कुशवाहा पिता हर प्रसाद कुशवाहा 45 वर्ष एवं राम सिंह पिता प्राण सिंह खंगार 60 वर्ष दोनों निवासी ग्राम हटवाहा थाना खजुराहो जिला छतरपुर के रूप में हुई है।

पूर्व में भी कर चुके हैं शिकार

फाइल फोटो।
पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से वन्यजीवों के शिकार में उपयोग किए जाने वाले रेशम के तीन बड़े जाल जब्त किए गए। इन शिकारियों ने अपने बयानों में पूर्व में बमीठा एवं आसपास के जंगल में वन्यजीवों का शिकार करने व शिकार के प्रयास की बात बताई है। तीनों अपराधियों के खिलाफ वन अपराध कायम करते हुए सोमवार 01 जुलाई को न्यायालय में पेश किया गया जहाँ से इन्हें न्यायायिक अभिरक्षा जेल भेजा दिया गया है। शातिर शिकारियों की धरपकड़ में ऋषि पटैरिया बीटगार्ड पीपरचौक, चौबेलाल जाटव बीटगार्ड जैतपुर-पटना एवं सुरक्षा श्रमिकों की अहम भूमिका रही।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. साधौ ने डाक्टर्स-डे पर चिकित्सकों को किया सम्मानित

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चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने डॉक्टर्स डे पर आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सकों को सम्मानित किया।
भोपाल। (www.radarnews.in) चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने आज डाक्टर्स-डे पर जहाँनुमा होटल में चिकित्सकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का आयोजन चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा किया गया। मंत्री डॉ. साधौ ने कहा कि ईश्वर जन्म देता है और डॉक्टर जीवन देते हैं। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा देने वाले चिकित्सकों की सराहना की।
डॉ. साधौ ने कहा कि समाज के विकास में चिकित्सकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने चिकित्सकों को डाक्टर्स-डे की बधाई दी और उत्कृष्ट सेवा देने को कहा। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी और चिकित्सक मौजूद थे।

वन-महोत्सव में सक्रिय भागीदारी निभायें पंचायतें और शिक्षण संस्थाएँ

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वन मंत्री उमंग सिंघार।

* मंत्री श्री उमंग सिंघार द्वारा प्रदेशवासियों का आव्हान

भोपाल। (www.radarnews.in) वन मंत्री उमंग सिंघार ने पंचायतों और शिक्षण संस्थाओं से आग्रह किया है कि प्रदेश को हरा-भरा बनाये रखने के लिये वन महोत्सव में सक्रिय भागीदारी निभायें। उन्होंने कहा कि पौधा-रोपण के लिये नजदीकी वनरोपणी से पौधे प्राप्त कर सकते हैं। श्री सिंघार ने बताया कि प्रदेश में 15 हजार से भी अधिक वन समितियाँ वनों के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
मंत्री श्री सिंघार ने वन-महोत्सव के सफल आयोजन के लिये शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए बतायाकि वनों और प्रकृति के प्रति जन-जागृति के उद्देश्य से यह महोत्सव प्रति वर्ष मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की परम्परा के अनुसार हमें पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा करने में पूरा सहयोग देना होगा। तभी हम भावी पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण की सौगत दे सकेंगे। वन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वनों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में प्रभावी पहल कर रही है, जिसका लाभ प्रदेशवासियों को मिलने लगा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में ऑनलाइन आवेदन पर वन रोपणियों से पौधे प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है।