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प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय में भर्ती महिला की मौत पर हंगामा, 10 घण्टे तक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को नॉर्मल बताती रहीं डॉक्टर, डिलेवरी के लिए ऑपरेशन थियेटर में ले जाने पर अचानक हुई मौत

* परिजनों ने लगाया में इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप

* तनाव बढ़ने पर कोतवाली थाना पुलिस को बुलाया

* पन्ना में मातृ और शिशु मृत्यु का नहीं थम रहा सिलसिला

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी मातृ और शिशु मृत्यु दर की अधिकता का कलंक पन्ना जिले के माथे से नहीं मिट पा रहा है। इस घोर नाकामी की कई वजह हैं, जिसमें प्रसव के दौरान बरती जाने वाली लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। अति पिछड़े इस जिले में मरीजों के इलाज में कथित तौर लापरवाही को लेकर सरकारी स्वास्थ सेवायें वैसे भी काफी बदनाम हैं। गुरुवार 4 जुलाई की देर रात पन्ना के जिला चिकित्सालय में प्रसव हेतु भर्ती एक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की अचानक मौत होने का अत्यंत ही दुखद मामला सामने आने के बाद एक बार फिर इलाज में लापरवाही के आरोप पीड़ित परिजनों की ओर से लगाए जा रहे हैं।
दरअसल, 10 घण्टे तक महिला और उसके गर्भस्थ शिशु को डॉक्टर मीना नामदेव और नर्सेस पूरी तरह नॉर्मल बतातीं रहीं लेकिन जब उसे सीजेरियन ऑपरेशन के लिए ओ.टी. में ले जाया गया तो कथिततौर महिला की तबियत अचानक इतनी तेजी से बिगड़ी की ऑपरेशन थियेटर की टेबल पर ऑपरेशन से पहले ही उसकी मौत हो गई। चिकित्सक महिला की कोख में पल रहे शिशु को भी नहीं बचा सके। पहली बार माँ बनने जा रही रेनू लखेरा 28 वर्ष और उसके गर्भस्थ शिशु की अचानक रहस्मय परिस्थितियों में मौत होने से आक्रोशित परिजनों ने बहु के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने मौके पर पुलिस को बुला लिया। सुबह भारी आक्रोश और मातमी चींख-पुकार के बीच मृतिका रेनू लखेरा के शव को पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया, तब कहीं जाकर स्थिति सामान्य हो सकी। इस घटना पर कोतवाली थाना पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर मामले को जाँच में लिया है।

समय रहते रेफरल क्यों नहीं किया

सरोज कुशवाहा, आशा कार्यकर्ता बृजपुर।
रेनू पत्नी रुपेश लखेरा 28 वर्ष निवासी बृजपुर को बुधवार 3 जुलाई को दोपहर में 3 बजे पन्ना लाकर जिला चिकित्सालय में संस्थागत प्रसव हेतु भर्ती कराया गया था। आशा कार्यकर्ता सरोज कुशवाहा ने बताया कि पन्ना आने से पूर्व रेनू को उनके परिजन बृजपुर स्थित प्रसव केन्द्र पर ले गए थे। जहाँ ड्यूटी में तैनात एएनएम पार्वती मण्डल ने रेनू की जाँच उपरांत बच्चेदानी से हल्का पानी आने पर उसे जिला चिकित्सालय के लिए रेफरल किया गया। पन्ना में डॉक्टर मीना नामदेव और लेबर रूम की नर्सेस ने रेनू की जाँच कर जच्चा-बच्चा दोनों को पूरी तरह नॉर्मल बताते हुए परिजनों को प्रसव के लिए पीड़ा बढ़ने तक इन्तजार करने की बात कही।
ससुर राकेश कुमार लखेरा।
आशा कार्यकर्ता सरोज कुशवाहा और रेनू के ससुर राकेश कुमार लखेरा, जेठ रत्नेश लखेरा ने पत्रकारों को बताया कि गुरुवार रात्रि 12:30 बजे रेनू का लेबर रूम में आखिरी बार परीक्षण किया गया। इसके पश्चात डॉक्टर मीना नामदेव और लेबर रूम की नर्सेस ने जानकारी दी कि रेनू का प्रसव कराने के लिए ऑपरेशन करना पड़ेगा। इससे चिंतित आशा कार्यककर्ता और परिजनों के पूँछने पर उनसे कहा गया कि सबकुछ ठीक है, घबराने की कोई बात नहीं है। ऑपरेशन के लिए रेनू को अतिरिक्त ब्लड की जरुरत नहीं है, उसका ब्लड प्रेशर, गर्भस्थ शिशु की पल्स भी पूरी तरह नार्मल है। लेबर रूम से चलकर अपने वार्ड तक आई रेनू लखेरा को पूर्णतः सामान्य स्थिति में व्हील चेयर पर बैठाकर ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया।

खुशी की उम्मीद में मिला गम

रेनू की मौत पर विलाप करते परिजन।
लखेरा परिवार के सदस्य देर रात ऑपरेशन थियेटर के बाहर बैठे घर में नए सदस्य के आगमन की खुशखबरी सुनने व उसका स्वागत करने के लिए बेचैन थे। जच्चा-बच्चा के पूर्णतः स्वस्थ्य होने की प्रार्थना कर रहे थे। गुरुग्राम (हरियाणा) की प्रायवेट कम्पनी में नौकरी कर रहा रुपेश भी दूर बैठा अपने पहले बच्चे और पत्नी का हालचाल जानने लगातार फोन से परिजनों के सम्पर्क में था। इस बीच ऑपरेशन में होती देरी के चलते अंदर की कोई खबर न मिलने, पैरामेडिकल स्टॉफ की असमान्य भाव-भंगिमा तथा हलचल को देखते हुए रेनू की ससुराल पक्ष के लोग अनहोनी की आशंका के चलते घबराने लगे। रात्रि में 2 बजे अचानक रेनू की तबियत बिगड़ने की जानकारी देते हुए परिजनों से ब्लड मँगाया गया। बढ़ती धड़कनों के बीच सब कुछ सही होने की उम्मीद में आँसुओं को थामे बैठे परिजनों को रात में तकरीबन 3 बजे जब यह बताया गया कि रेनू और उसकी कोख में मौजूद शिशु की ऑपरेशन होने से पहले ही मौत हो चुकी है तो सभी छाती पीट-पीटकर रोने-बिलखने लगे।

दोषियों के खिलाफ हो कार्यवाही

जेठ रत्नेश लखेरा।
मृतिका के ससुर राकेश कुमार लखेरा, जेठ रत्नेश लखेरा का आरोप है कि उनकी बहु की मौत कथिततौर पर डॉक्टर मीना नामदेव व नर्सेस की घोर लापरवाही के चलते हुई है। इनका कहना है कि जब सबकुछ ठीक था तो फिर अचानक रेनू की तबियत क्यों बिगड़ी, शरीर में ब्लड पर्याप्त होने की जानकारी देने के बाद ब्लड क्यों मँगाया गया, मौत की असल वजह क्या है, रेनू को समय रहते मेडीकल कॉलिज रेफरल क्यों नहीं किया गया और शिशु को बचाने क्या प्रयास किए गए आदि सवालों के जबाब उन्हें नहीं दिए गए। गमजदा परिजनों ने यह माँग रखी कि उनकी बहु का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से कराकर सच्चाई को सामने लाया जाए। इलाज में कथिततौर पर लापरवाही बरतने वाली महिला चिकित्सक समेत संबंधितों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जाए। ताकि इस तरह के संवेदनशील मामलों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। उधर, जब इस सम्बंध डॉक्टर मीना नामदेव से उनका पक्ष जानने के लिए सम्पर्क किया गया तो घण्टी बजने के बाद भी उनका मोबाइल रिसीव न होने के कारण बात नहीं हो सकी।

कार्यक्रमों को लगा रहे पलीता

मेडीकल स्टोर से खरीदी गईं दवाओं की पर्ची।
उल्लेखनीय है कि मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करते हुए सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर कैशलेश डिलेवरी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत प्रसव हेतु स्वास्थ्य केन्द्रों में आने वाली महिलाओं को दवाईयाँ,जाँच, भोजन सहित समस्त सेवाएँ पूर्णतः निः शुल्क प्रदान की जाती है। इसके अलावा जननी सुरक्षा के तहत प्रसूता और प्रेरक को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। पन्ना जिले में कैशलेश डिलेवरी कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत यह है कि जिला चिकित्सालय में पहुँचने वाली गर्भवती महिलाओं के परिजनों से बाहर से दवाइयाँ मंगाई जा रहीं है। रेनू लखेरा के परिजनों से भी तकरीबन 500 रुपए की दवाएँ तथा प्रसव से सम्बंधित आवश्यक सामग्री मेडीकल स्टोर से मंगाई गई।
सवाल यह है कि जिन दवाओं को बाहर से मंगाना पड़ा क्या वे जिला चिकित्सालय में उपलब्ध नहीं थीं अथवा उक्त दवाएँ जिला चिकित्सालय के स्टोर की शोभा बढ़ा रहीं थी, यह जांच का विषय है। गौर करने वाली बात यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग के महत्वकांक्षी कार्यक्रम “कायाकल्प एवं लक्ष्य” के क्रियान्वयन के बाबजूद पन्ना जिला चिकित्सालय में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवायें मुहैया कराने को लेकर चिकित्सालय प्रबंधन गम्भीर नहीं है। इन कार्यक्रमों की राशि खर्च करने में अव्वल रहने वालों को इस बात से कोई सरोकार नहीं है कि जिस मंशा से कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं वह पूरी हो भी रही है या नहीं।

“डेथ ऑडिट” क्या निष्पक्ष हो पाएगी

सिविल सर्जन से मिलने के लिए जाते पीड़ित परिजन।
प्रसव कराने के लिए जिला चिकित्सालय पन्ना में भर्ती हुई रेनू लखेरा की मौत महिला चिकित्सक एवं नर्सेस की लापरवाही से हुई या फिर कोई और कारण है। इसकी जाँच क्या पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ सम्भव हो पाएगी ! यह सवाल दरअसल इसलिए उठ रहा है कि क्योंकि यह आम धारणा बन चुकी है कि यदि इलाज में लापरवाही के आरोप सही निकले तो भी जांचकर्ता चिकित्सक जांच में लीपापोती कर अपने साथी चिकित्सक व सहयोगी स्टॉफ को बचा लेते हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि सभी डॉक्टर यह भलीभाँति जानते है कि आज अगर उन्होंने अपने साथियों को नहीं बचाया तो कल जब उनसे कोई गड़बड़ी होगी तो फिर उन्हें कौन बचाएगा ? आंतररिक तौर पर बेहद मजबूत इस अघोषित भावना के चलते आमतौर पर इलाज में लापरवाही के आरोप डॉक्टरों के खिलाफ सिद्ध नहीं हो पाते। बहरहाल नवविवाहिता रेनू लखेरा के मामले क्या होता है अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा। प्रसव के समय पूर्णतः सामान्य बताई जा रही रेनू और उसके गर्भस्थ शिशु की असमान्य मौत को लेकर उनके परिजनों के मन में कई सवाल हैं। क्या “डेथ ऑडिट” से उन्हें इन सवालों के जबाब मिल पाएँगे, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

इनका कहना है –

“रेनू लखेरा का ऑपरेशन नहीं हो पाया बेहोशी का इंजेक्शन देने से पहले ही उसकी ऑपरेशन थियेटर की टेबल पर ही मौत हो गई, ऐसा मुझे बताया गया है। उस समय वहाँ पर डॉक्टर मीना नामदेव व डॉक्टर स्मृति गुप्ता मौजूद थीं। प्रसव के कुछ समय पूर्व तक सामान्य रही रेनू की मौत अचानक कैसे हुई यह पोस्टमार्टम होने और प्रसव पूर्व उसकी जाँच से लेकर अब तक चले इलाज की पड़ताल करने से पता चल पाएगा। इस तरह के मामलों को लेकर हम संवेदनशील है इसलिए हर पहलू से निष्पक्ष जाँच की जाएगी। जाँच के नतीजे के आधार पर आगे की कार्यवाही होगी।”

– डॉ. आर. एस. त्रिपाठी, प्रभारी सिविल सर्जन, डीएच पन्ना।

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