क्राइम : दो गुटों में हुआ खूनी संघर्ष, बीच बाजार में जीप से कुचलकर एक की हत्या के बाद तनाव का माहौल

* पन्ना जिले के सिमरिया कस्बा में सनसनीखेज वारदात से दहशत में आए लोग
* एसपी ने स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल किया तैनात
पन्ना। (www.radarnews.in) जिले में सिमरिया क़स्बा में शुक्रवार की देर शाम दो गुटों के बीच हुए विवाद ने देखते ही देखते खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। जिसमें बीच-बाजार एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति के ऊपर कथिततौर दूसरे पक्ष के लोगों ने पहले धारदार हथियारों से प्राणघातक हमला किया और फिर जीप से कुचलकर बड़ी ही बेरहमी के साथ उसकी हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज वारदात से जहाँ सिमरिया के साप्ताहिक बाजार में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी फ़ैल गई वहीं हत्या की जघन्य वारदात के बाद से सिमरिया सहित आसपास के इलाके में जबरदस्त तनाव का माहौल निर्मित है। दिवाली के ठीक पहले धनतेरस के त्यौहार के दिन हुए इस खूनी संघर्ष को पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने अत्यंत ही गंभीरता से लिया है। सामाजिक सद्भाव और कानून व्यवस्था की दृष्टि इस संवेदनशील वारदात का पता चलते ही पुलिस कप्तान तुरंत सिमरिया पहुँच गए। उनके द्वारा क्षेत्र में शांति एवं क़ानून व्यवस्था बनाए रखने तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से सख्ती के साथ निपटने के लिए एहतियात के तौर पर सिमरिया में भारी संख्या में आसपास के थानों के पुलिस बल को तैनात किया गया है।
इस घटनाक्रम के संबंध में व्याप्त जन चर्चाओं व सोशल मीडिया आईं अपुष्ट सूचनाओं के अनुसार दो गुटों के युवकों के बीच हुए विवाद में बड़ों के हस्तक्षेप करने से इस मामले ने कथित तौर खूनी संघर्ष का रूप लिया है। शुक्रवार 25 अक्टूबर की शाम तकरीबन 7:30 बजे सिमरिया के पुराना बस स्टैण्ड में रामलीला मंच के सामने फैजल खान व राम सिंह बुन्देला निवासी महारजगंज-सिमरिया के पक्ष के लोग युवकों के बीच हुए विवाद को लेकर आपस में भिड़ गए। साप्ताहिक बाजार के दिन और धनतेरस के त्यौहार पर हुए इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के चलते बाजार में भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई। इस बीच राम सिंह बुन्देला 46 वर्ष निवासी महारजगंज-सिमरिया के ऊपर दूसरे पक्ष के लोगों ने पहले रॉड एवं धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया और फिर कथित तौर फैजल खान ने उसे जान से ख़त्म करने के इरादे से जीप से कुचल दिया। बुरी तरह लहूलुहान राम सिंह की अचेत हालत को देख उसे मृत समझकर फैजल खान एवं उनके साथी मौके से भाग निकले। आनन-फानन में राम सिंह को अत्यंत ही नाजुक स्थिति में सिमरिया के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाय गया जहां तत्परता से प्राथमिक उपचार देकर बिना किसी देरी के जिला चिकित्सालय पन्ना के लिए रेफरल किया गया। राम सिंह को लेकर परिजन जब जिला चिकित्सालय पन्ना पहुंचे तो यहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर आलोक गुप्ता ने सघन परीक्षण करने के पश्चात उसे मृत घोषित कर दिया।

इस खूनी संघर्ष में फैजल के बड़े भाई गुलफाम खान के भी गंभीर रूप से घायल होने की चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों ने बड़ी ही सूझबूझ से काम लेते हुए घायल गुलफाम खान को उपचार के लिए पुलिस अभिरक्षा में गुप्त रूप से किसी दूसरे जिले में भेजा दिया है। ताकि प्रतिशोध में फिर कोई वारदात न हो। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि सिमरिया थाना पुलिस ने हत्या की वारदात में प्रयुक्त जीप को जब्त करने के साथ कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। उधर, इस हत्याकाण्ड को लेकर आक्रोशित लोग आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर देर रात्रि तक सिमरिया थाना के सामने नारेबाजी करते रहे। हत्या की जघन्य वारदात के संबंध जानकारी प्राप्त करने के लिए पवई एसडीओपी व पन्ना पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी से मोबाइल पर सम्पर्क करने का काफी प्रयास किया गया लेकिन कई बार रिंग बजने के बाद भी उनके फोन रिसीव नहीं हुए। इसलिए हत्याकाण्ड की वास्तविक वजह, इसमें लिप्त आरोपियों, हिरासत में लिए गए लोगों, मृतक एवं घायल के संबंध जो चर्चाएं है उनकी अधिकारिक तौर पुष्टि नहीं हो सकी। उल्लेखनीय है कि दो गुटों के बीच हुए इस ख़ूनी संघर्ष को कतिपय समाज विरोधी तत्वों द्वारा साम्प्रदायिक रूप देते हुए सोशल मीडिया पर एक समुदाय विशेष के खिलाफ सामूहिक रुप से बेहद आपत्तिजनक टिपण्णी कर शांति और सद्भाव को बिगाड़ने के कुत्सित प्रयास किए जा रहे है। जिसे लेकर पन्ना पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी और ख़ुफ़िया तंत्र पूरी तरह बेखबर है।
आंगनवाड़ी केन्द्रों के पोषण आहार में शामिल हो “अण्डा”, परिवार की सहमति लेकर बच्चों को परोसा जाए

* खाद्य असुरक्षा और कुपोषण से मुक्ति जनयात्रा से निकली मांगों का सौंपा ज्ञापन
* ज्ञापन में 5 हजार से भी अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर मांगों का किया समर्थन
पन्ना। (www.radarnews.in) “संडे हो या मंडे रोज खाओ अण्डे” की चर्चित टैग लाइन वाला विज्ञापन टीव्ही चैनलों पर पिछले कई वर्षों से नजर नहीं आया लेकिन एक दौर था जब टीव्ही घर-घर अपनी पैठ बना रहा था और उसी समय इस विज्ञापन के जरिए आम लोगों को खानपान में अण्डे के उपयोग की आवश्यकता तथा इसके महत्व को बड़े ही प्रभावी तरीके से समझाया गया। इसका सकारात्मक असर अण्डे की मांग में इजाफे के रूप में सामने आया। पौष्टिक गुणों से भरपूर अण्डे को मध्यप्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों के पोषण आहार में शामिल करने की बात लंबे समय से चल रही है लेकिन बहुसंख्यक आबादी की खानपान से जुड़ीं धार्मिक मान्यताओं एवं सियासी विरोध की वजह से इस पर निर्णय नहीं हो पा रहा है। जानकारों का मानना है कि अण्डा कुपोषण के कलंक को मिटाने में काफी मददगार साबित हो सकता है। अपने नौनिहालों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित कई अभिभावक भी इससे सहमत है। शायद इसीलिए कुपोषण एवं शिशु मृत्यु दर की अधिकता वाले पन्ना जिले के 5 हजार से अधिक लोगों ने खाद्य असुरक्षा और कुपोषण से मुक्ति के लिए प्रतिमाह सरकारी राशन दुकान से रियायती दर पर मिलने वाले अनाज की पात्रता को प्रति व्यक्ति 10 किलो करने व आंगनवाड़ी केन्द्रों के पोषण आहार में अण्डे को अनिवार्य रूप से शामिल करने की पुरजोर मांग की है। इनका कहना है कि जिन परिवारों अथवा अभिभावकों को अण्डे पर कोई एतराज नहीं है उनकी बकायदा सहमति लेकर बच्चों पोषण आहार में अण्डा परोसा जाए। ताकि अण्डे खाकर उनके नौनिहाल सुपोषित हो सकें।
गरीब श्रमिकों की दिवाली हो सकती है फीकी, SDO की मनमानी और लचर व्यवस्था के कारण अटका लाखों रूपए का मजदूरी भुगतान
* डीएफओ के आदेशों की खुलकर अवहेलना कर रहे एसडीओ
* पन्ना जिले के चर्चित दक्षिण वन मण्डल में व्याप्त है अराजकता
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के जंगल विभाग में जंगल राज व्याप्त है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। निहित स्वार्थों की पूर्ती में लगे विभागीय अफसर खुलकर मनमानी और भ्रष्टाचार कर रहे है। पन्ना के सामान्य और संरक्षित वन मण्डलों के अन्तर्गत वन अपराधों का ग्राफ चिंताजनक तेजी से बढ़ रहा। पिछले कुछ सालों में यहां वन्यजीवों के शिकार, अवैध उत्खनन, अवैध कटाई तथा वन क्षेत्र में अतिक्रमण के कई हैरान करने वाले मामले सामने आए है। वन विभाग में भ्रष्टाचार और अराजकता हावी होने से आंतरिक हालात लगातार खराब हो रहे है। जिसका सीधा दुष्परिणाम बहुमूल्य वन सम्पदा के विनाश के रूप में सामने आ रहा है। प्रदेश में करीब 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन होने से उम्मीद जगी थी कि पन्ना के वन विभाग में फैली अंधेरगर्दी पर लगाम लगेगी लेकिन सरकार के बदलने के करीब साल भर बाद भी यहां के सूरत-ए-हाल नहीं बदले। जिले के दक्षिण वन मण्डल अन्तर्गत आने वाले 3 वन परिक्षेत्रों के सैकड़ों गरीब श्रमिकों की लाखों रूपए मजदूरी का भुगतान लंबित होने का मामला इसका उदाहरण मात्र है। उप मण्डलाधिकारी पवई की कथित मनमानी के चलते वन विभाग के श्रमिकों का लगभग 23 लाख रूपए का मजदूरी भुगतान अटका हुआ है।
इस मामले पर डीएफओ और एसडीओ पवई के बीच अब तक जो भी पत्राचार हुआ है उसे दृष्टिगत रखते हुये फिलहाल मजदूरी का भुगतान हो पाना संभव प्रतीत नहीं होता। ऐसी स्थिति में निर्दोष मेहनतकश गरीब श्रमिक परिवारों की दीपावली फीकी पड़ सकती है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग के उप सचिव अजय चौबे के हस्ताक्षर से दिनांक 22 अक्टूबर 2019 को वेतन आहरण के संबंध जारी पत्र में समस्त विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि माह अक्टूबर 2019 के वेतन, पेंशन एवं मजदूरी का भुगतान दिनांक 24-25 अक्टूबर को किया जाए। इसके पीछे शासन की मंशा स्पष्ट है कि हर कोई दीपावली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मना सके। इसमें रुपयों की तंगी किसी के भी आड़े न आए। लेकिन दक्षिण वन मण्डल पन्ना के असंवेदनशील अधिकारियों को ना तो श्रमिकों की दीपावली की चिंता है और ना ही वे शासन के निर्देशों पर अमल को लेकर संजीदा है।
काउंटर साईन ना करने से अटना भुगतान
दक्षिण वन मण्डल पन्ना के डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा ने दिनांक 17 अक्टूबर 2019 को उप वनमण्डलाधिकारी पवई आर के अवधिया को एक पत्र जारी कर उनकी स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताते हुये वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस पत्र में उल्लेख है कि वन परिक्षेत्र रैपुरा, पवई, मोहन्द्रा अन्तर्गत कराये गये कार्यो के प्रमाणकों (बिलों) को सत्यापन कर नहीं भेजा गया। काउन्टर साईन प्रणाली के अन्तर्गत प्रमाणकों के सत्यापन के संबंध में आपको बार-बार इस कार्यालय के द्वारा निर्देशित किये जाने के बावजूद भी आपके द्वारा वरिष्ठों के निर्देशों की अवहेलना करते हुये वानकी कार्यों में कराये जाने वाले कार्यों के भुगतान में विलंब की स्थिति निर्मित की जा रही है। डीएफओ ने इस कृत्य को गंभीर लापरवाही और वरिष्ठों के आदेश की अवहेलना करार देते हुए उप वन मण्डलाधिकारी पवई को प्रमाणक मूलतः वापस भेजकर काउन्टर साईन प्रणाली के तहत निर्धारित प्रमाण-पत्र (सत्यापन) की सील अंकित कर एवं हस्ताक्षर कर पुनः प्रमाणक भेजने के लिये निर्देशित किया। ताकि श्रमिकों का भुगतान किया जा सके। साथ ही प्रमाणक योजनावार तैयार कर श्रमिकों की एकजाई सूची भेजने के निर्देश दिये गए। लेकिन अब तक इन निर्देशों पर अमल नहीं हो पाया है। डीएफओ के इस पत्र से जाहिर है कि एसडीओ उनके आदेशों-निर्देशों को तनिक भी तवज्जो नहीं देते। इन हालात में प्रतिदिन के विभागीय कार्य किस तरह संपादित होते होंगे कहना मुश्किल पर समझना आसान है।
श्रमिकों में आक्रोश

वन विभाग के श्रमिकों का मजदूरी भुगतान अटकने से वे ना सिर्फ परेशान है बल्कि विभागीय अधिकारियों के रवैये को लेकर उनमें खासा आक्रोश व्याप्त है। दीपावली जैसे बड़े त्यौहार से पहले मजदूरी भुगतान न होने के कारण श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों में निराशा साफ देखी जा रही है। एक ओर जहां अधिकांश लोगों ने दीपावली को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिये कई तरह की व्यवस्थायें कर रखी है वहीं वन विभाग के श्रमिकों की जेब खाली होने से वे मायूस है। दिहाड़ी मजदूरी पर परिवार का जीवकोपार्जन करने वाले श्रमिकों के लिये उनकी मजदूरी अटकना किसी त्रासदी से कम नहीं है। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात का एहसास तक नहीं है कि उनकी मनमानी और लापरवाही के कारण श्रमिकों तथा उनके परिजनों को हर दिन किन मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। आमतौर पर शासन से लेकर कारोबारियों तक की यह कोशिश रहती है कि दीपावली के पूर्व सभी कर्मचारियों और श्रमिकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए ताकि वे भी त्यौहार अच्छी तरह से मना सकें। लेकिन दक्षिण वन मण्डल के असंवेदनशील अधिकारियों को श्रमिकों की दिवाली की चिंता नहीं है, बिना रूपयों के उनके घर कैसे रोशन होंगे और बच्चों को मिठाई व नये कपड़े कैसे मिल पाएंगे ? इस संबंध में जब पवई के उप वनमण्डलाधिकारी आर. के. अवधिया से बात की गई तो उन्होंने श्रमिकों के भुगतान लंबित होने के लिए रेंजरों को उत्तरदायी ठहराते हुए उन्हीं से जानकारी लेने की बात कहकर फोन काट दिया। एसडीओ के इस जबाब और रवैये से दीपावली के पूर्व श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान हो पाना संभव प्रतीत नहीं होता। क्योंकि वे अपनी गलती का सुधार कर समाधान निकालने के बजाए गेंद रेंजरों के पाले में डाल रहे हैं।
कहाँ कितना भुगतान लंबित

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण वन मण्डल पन्ना के वन परिक्षेत्र रैपुरा अंतर्गत कार्य आयोजना के क्रियान्वयन की राशि 171976, 276300, 531320 रुपए इसी योजना की वन परिक्षेत्र मोहन्द्रा की राशि 166344 एवं पवई में 1171502 रुपए का श्रमिकों का भुगतान होना शेष है। विचारणीय बात यह है कि सिर्फ तीन रेंजों में करीब 23 लाख रुपए का मजदूरी भुगतान कई माह से अटका हुआ है। यदि दक्षिण वन मण्डल की शेष रेंजों में भी नजर दौड़ाई जाए तो लंबित मजदूरी राशि का आंकड़ा दोगुना हो सकता है। बाबजूद इसके श्रमिकों को उनके खून-पसीने की कमाई का भुगतान दीपावली के पूर्व सुनिश्चित कर शासन के निर्देशों पर अमल करने के बजाए डीएफओ मैडम इस बात को लेकर कहीं अधिक चिंतित हैं कि यह मामला मीडिया तक कैसे पहुँचा। दरअसल, विभागीय पत्राचार के लीक होने से अंदरूनी हालात की खबर मिलने के साथ-साथ लोगों को यह भी पता चलता है कि डीएफओ का अपने अधीनस्थों पर कितना नियंत्रण है ?
इनका कहना है –
“यह विभाग के अंदर की बात है-यह सब बाहर कैसे आ रही है, आप जिस भुगतान की बात कर रहे है वह प्रक्रिया में है। प्रमाणकों में सुधार कर उन्हें भेजने में कितना समय लगेगा ! उप वनमण्डलाधिकारी पवई को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित प्रक्रिया अनुसार प्रमाणक प्रस्तुत करें ताकि श्रमिकों का भुगतान किया जा सके। मैं इस संबंध में उनसे बात करती हूॅ।”
– मीना कुमारी मिश्रा, दक्षिण वन मण्डल पन्ना।
सड़कों के गड्ढे भरवाने में लापरवाही पर सात कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी
भोपाल। (www.radarnews.in) लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता आर.के. मेहरा ने कार्य में लापरवाही और सड़क पैचवर्क कार्य के प्रति उदासीनता बरतने पर 7 कार्यपालन यंत्रियों को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया है। प्रमुख अभियंता ने बताया कि 14 अक्टूबर को वीडियो कान्फ्रेंसिंग में समीक्षा के दौरान पाया कि श्योपुर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, दतिया और रीवा में दिये गये निर्देशों का पालन नहीं किया गया है और निर्देशों के प्रति उदासीनता बरती गई है।
लोक निर्माण विभाग संभाग सीधी के प्रभारी कार्यपालन यंत्री एन.के. परते, सिंगरौली के प्रभारी कार्यपालन यंत्री वी.एस. मरावी, श्योपुर के प्रभारी कार्यपालन यंत्री संकल्प गोलिया, शहडोल के प्रभारी कार्यपालन यंत्री देवेन्द्र खरे, दतिया के प्रमोद श्रीवास्तव के विरुद्ध पैचवर्क के कार्य में लापरवाही और टेण्डरिंग प्रक्रिया में देरी करने के कारण दो वेतन वृद्धि रोकने की प्रत्याशा में कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया है। लोक निर्माण विभाग श्योपुर के प्रभारी कार्यपालन यंत्री पी.के. जैन को दिये गये मद से डामर क्रय नहीं करने और रीवा के प्रभारी नरेन्द्र शर्मा ने पेचवर्क के कार्यों में रुचि न लेकर अनावश्यक कार्यों की निविदाएँ बुलाने पर कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया है।
कार्रवाई : कंटेनर में मुँह और पैर बाँधकर अवैध तरीके से ले जा रहे थे 63 नग गाय-बैल, पुलिस ने वाहन जब्त कर बचाई बेजुबान पशुओं की जान
* आरोपी वाहन चालक को गिरफ्तार कर दर्ज किया प्रकरण
* पन्ना जिले के गुनौर-सलेहा क्षेत्र से खरीदे गए थे गौवंशीय पशु
पन्ना। (www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना के सतना-कटनी तिराहा पर शनिवार देर रात एक कंटेनर को पकड़ा गया, उसमें 63 नग गौवंशीय पशु ठूंस-ठूंसकर भरे थे। इन बेजुबान पशुओं को पूर्णतः अवैध और क्रूरतापूर्ण तरीके से मुँह-पैर बांधकर रखा गया था। स्लॉटर हॉउस ले जाए जा रहे गौवंशीय पशुओं की जान बचाते हुए कोतवाली थाना पन्ना पुलिस ने उन्हें तस्करों की कैद से आजाद कराकर स्थानीय गौशाला प्रबंधन की सुपुर्द किया है। इस मामले में पुलिस कंटेनर को जब्त करते हुए आरोपी चालक को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है।

प्राप्त जानकारी अनुसार, कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद कुजूर को मुखबिर द्वारा सूचना दी गई एक कंटेनर सतना की ओर से पन्ना की तरफ आ रहा है। जिसमें मवेशी होने की संभावना है। इस महत्वपूर्ण सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अवगत कराया गया और फिर उनके निर्देशन में शनिवार 19 अक्टूबर की देर रात शहर के सतना-कटनी तिराहा पर सत्यम होटल के सामने घेराबंदी कर कंटेनर को पकड़ा गया।
कंटेनर के चालक ने पूंछतांछ में पुलिस को अपना का नाम-पता इकबाल खान पिता मुमताज खान निवासी-89 ज्योति नगर मस्जिद के पास वार्ड नंबर 26 शाजापुर बताया गया। साथ ही कंटेनर में कंटेनर में गौवंश लोड होने की जानकारी दी गई। लेकिन उसके पास इनके परिवहन एवं स्वामित्व संबंधी वैध दस्तावेज मौके पर नहीं मिले। पुलिसकर्मियों ने कंटेनर को खोलकर देखा तो उसके अंदर गौवंशीय पशुाओं को अत्यंत ही क्रूरतापूर्ण तरीके ठूंस-ठूंसकर रखा गया था। उनके मुँह-पैर रस्सी से बंधे हुए थे। पुलिस द्वारा इस कंटेनर को जब्त कर पन्ना-अजयगढ़ बाइपास मार्ग किनारे स्थित नगर पालिका की गौशाला ले जाया गया। जहाँ तस्करों की कैद से 63 नग पशुओं को आजाद कराकर गौशाला प्रबंधन के सुपुर्द किया है।
इन धाराओं के तहत दर्ज हुआ मामला

इस मामले में पुलिस ने आरोपी कंटेनर चालक इकबाल खान के विरुद्ध 1-6/9 मध्य प्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम 2004, 2-10 मध्य प्रदेश कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 3-11 पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 4-81 मोटर व्हीकल अधिनियम 1988 5-130(3) मोटर अधिनियम 1988 के तहत अपराध कायम कर उसे गिरफ्तार है। वहीं इस प्रकरण में एक अन्य आरोपी इरफान खान निवासी सारंगपुर जिला राजगढ़ फरार है। कोतवाली थाना पन्ना के निरीक्षक अरविंद कुजूर ने जानकारी देते हुए बताया कि कंटेनर चालक ने ही इन मवेशियों को पन्ना जिले के गुनौर-सलेहा क्षेत्र से खरीदा था। ये लोग इन पशुओं को महाराष्ट्र के अमरावती ले जाकर स्थानीय स्लॉटर हॉउस में बेंच देते है। पन्ना जिले की पुलिस द्वारा गौवंशीय पशुओं की तस्करी एवं इनके अवैध परिवहन की रोकथाम के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में निरीक्षक अरविंद कुजूर, सहायक उपनिरीक्षक एसडी सिंह, एचआर उपाध्याय, प्रधान आरक्षक रामकृष्ण पांडे, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा, प्रकाश मंडल, आरक्षक वृषकेतु रावत, सर्वेंद्र कुमार, अरुण कुमार एवं चालक आरक्षक रवि खरे की सराहनीय भूमिका रही। पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी द्वारा इन अधिकारियों-कर्मचारियों को पुरुस्कृत करने की घोषणा की गई है।
बड़ी खबर : हीरों के विशाल भण्डार वाली बंदर खदान की नीलामी में शामिल निवेशक पहुँचे पन्ना, बोली लगाने के पूर्व खदान से निकले हीरों का पुनः कर रहे अवलोकन एवं अध्ययन
* पन्ना के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में लगी हीरों की एग्जिबिशन
* 10 से 13 अक्टूबर तक हर दिन एक कम्पनी के प्रतिनिधि करेंगे हीरों की जाँच-परख
* पहले दिन एनएमडीसी लिमिटेड के प्रतिनिधियों को कराया गया हीरों का अवलोकन
* बहुराष्ट्रीय कम्पनी रियो टिंटो ने बंदर खदान में मिले हीरे पन्ना में कराए थे जमा
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की बक्स्वाहा तहसील में स्थित बेशकीमती रत्न हीरों के विशाल भण्डार वाली बंदर हीरा खदान की नीलामी प्रक्रिया पिछले कई माह से जारी है। करीब 34.20 मिलियन कैरेट हीरों के इस भण्डार अपना बनाने की तमन्ना रखने वाली दिग्गज कंपनियां इसके लिए बोली लगाने से पूर्व इस खदान से निकले हीरों की क्वॉलिटी का बारीकी से अवलोकन एवं अध्ययन पर विशेष जोर दे रहीं है। इसमें शामिल कंपनियों की माँग पर उनके प्रतिनिधियों को पूर्ण संतुष्टि एवं पारदर्शिता के साथ बंदर खदान के हीरों को देखने-परखने का अवसर मुहैया कराने के उद्देश्य पन्ना के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में कड़ी सुरक्षा के बीच पुनः हीरों की अवलोकन एवं अध्ययन कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

गुरुवार 10 अक्टूबर से शुरू होकर 13 तक चलने वाली हीरों की प्रदर्शनी सह कार्यशाला का आयोजन मध्य प्रदेश शासन के खनिज साधन विभाग के निर्देशानुसार जिला प्रशासन पन्ना के द्वारा किया जा रहा है। पूर्व में करीब 10 वर्ष तक बंदर खदान में हीरों के अन्वेषण (खोज) के दौरान बहुराष्ट्रीय कंपनी रियो टिंटो को 2700 कैरेट वजन के कच्चे हीरे मिले थे, जिन्हें इस कार्यशाला में रखा गया है। चार दिनों तक चलने वाली प्रदर्शनी सह कार्यशाला में हर दिन एक कंपनी के लिए आरक्षित किया गया है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार को एनएमडीसी लिमिटेड के प्रतिनिधियों द्वारा पन्ना के नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन में हीरों का अवलोकन एवं अध्ययन किया गया।
2761 कैरेट वजन के हीरे रखे गए
जिला हीरा एवं खनिज अधिकारी पन्ना आर. के. पाण्डेय ने बताया कि कार्यक्रम के अनुसार आगामी दिवसों में क्रमशः अडानी इन्टर प्राइवेट लि. अहमदाबाद, एस.एल. माइनिंग एण्ड आदित्य बिड़ला ग्रुप तथा वेदांता लिमिटेड के प्रतिनिधि हीरों का अवलोकन एवं अध्ययन करेंगे। अध्ययन कर कार्य प्रतिदिन प्रातः 11 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। जिला हीरा अधिकारी श्री पाण्डेय ने बताया कि कार्यशाला का संचालन सचिव खनिज विभाग मध्यप्रदेश शासन नरेन्द्र सिंह परमार के द्वारा किया जा रहा है। आपने बताया कि इस कार्यशाला में छतरपुर जिले में स्थित हीरा खनिज खण्ड बकस्वाहा से रियो टिंटो कंपनी को अन्वेषण के दौरान प्राप्त लगभग 2761 कैरेट वजन के 63 नग विभिन्न तरह के हीरों को निवेशकों के अध्ययन-अवलोकन हेतु रखा गया है।
विशेषज्ञों के द्वारा दी जा रही जानकारी

उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व 20 अगस्त 2019 को पन्ना के महेन्द्र भवन में बंदर खदान के हीरों की एग्जिबिशन लगाकर निवेशकों को हीरों का अवलोकन एवं अध्ययन कराया गया था। जिसमें कुल छः कंपनियों- अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड, अरविंदो रियलटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायवेट लिमिटेड, एस्सेल माइनिंग, फ्यूरा, वेदांता ग्रुप, एनएमडीसी लिमिटेड के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। लेकिन दूसरी बार इन हीरों को देखने-परखने के सिर्फ चार कंपनियों के प्रतिनिधियों ने रूचि दिखाई है।

दरअसल, पहली बार निवेशकों को हीरों का अध्ययन-अवलोकन करने के लिए एक घण्टे से भी कम का समय मिला था। निवेशक इससे संतुष्ट नहीं हुए। इसलिए 60 हजार करोड़ रुपए मूल्य के हीरा भण्डार वाली बंदर खदान के लिए बोली लगाने से पूर्व निवेशकों को पूर्ण रूपेण संतुष्ट करने के लिए मध्य प्रदेश शासन द्वारा पन्ना में लगभग डेढ़ माह के अंतराल में दूसरी बार हीरों की अवलोकन एवं अध्ययन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें प्रत्येक कंपनी के प्रतिनिधियों को एक दिन का समय देते हुए खनिज विभाग के जानकारों के द्वारा उन्हें खदान के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करते हुए उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया जा रहा है।

दशहरा पर उपद्रव : BJP के युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष व कांग्रेस नेता के भतीजे ने साथियों समेत घरों में घुसकर जमकर की तोड़फोड़, दुर्गा प्रतिमाओं के जुलूस दौरान झाग वाला स्प्रे डालने पर हुआ विवाद
* पन्ना जिले के अजयगढ़ कस्बा में बबाल के चलते तनावपूर्ण स्थिति निर्मित
* अजयगढ़ थाना पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ दर्ज किया आपराधिक प्रकरण
पन्ना/अजयगढ़ (www.radarnews.in) जिले के अजयगढ़ क़स्बा में दशहरा के त्यौहार पर निकाले गए दुर्गा प्रतिमाओं के जुलूस के दौरान झाग वाला स्प्रे डालने की मामूली सी बात पर दो पक्षों के युवाओं के बीच हुए विवाद ने देखते ही देखते बबाल का रूप ले लिया। जिसके चलते मारपीट की गई और घरों में जबरन घुसकर तोड़फोड़ करते हुए जमकर उत्पात मचाया। पुलिस की कथित मुस्तैदी के बीच हुए इस उपद्रव की वजह से अजयगढ़ में तनावपूर्ण स्थिति निर्मित है। स्थानीय पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों की रिपोर्ट पर एक-दूसरे के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। एक मामले में पुलिस ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के पन्ना जिलाध्यक्ष अमित गुप्ता, उसके छोटे भाई रोहित गुप्ता, अजयगढ़ जनपद अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय के भतीजे उज्जवल पाण्डेय, शोलू पाण्डेय समेत अन्य को आरोपी बनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मंगलवार देर रात्रि में कुछ नामजद आरोपियों को तत्परता से गिरफ्तार कर लिया है जबकि राजनैतिक पृष्ठभूमि वाले आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। विवाद में शामिल जिन युवाओं के घरों में तोड़फोड़ हुई उनके यहाँ सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। साथ ही अजयगढ़ में भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
भाजयुमो नेता के भाई से हुआ विवाद

जनचर्चा के अनुसार अजयगढ़ कस्बा में मंगलवार 8 अक्टूबर की रात्रि में करीब 10 बजे जब दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का जुलूस पुराना बस स्टैण्ड से गुजर रहा था। जिसमें शामिल युवा नाचते-गाते हुए चल रहे थे। इस दौरान अज्जू रैकवार ने झाग वाला फोम स्प्रे उड़ाया जो रोहित गुप्ता पुत्र सुरेश गुप्ता के चेहरे और आँखों में लग गया। इसी बात को लेकर इनके बीच कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर अज्जू रैकवार, ओमप्रकाश रैकवार, छोटू विश्वकर्मा, शुभम विश्वकर्मा एवं उनके साथियों ने एक राय होकर रोहित गुप्ता, उज्ज्वल पाण्डेय, शोलू पाण्डेय, ऋषि राठौर के साथ मारपीट कर दी। जुलूस में शामिल लोगों के हस्तक्षेप के बाद बमुश्किल विवाद शांत हुआ और इस बीच हमलावर युवक मौके से भाग निकले।

जबकि भाजपा युवा मोर्चा के पन्ना जिलाध्यक्ष अमित गुप्ता ने जो रिपोर्ट लिखाई उसमें बताया गया है कि पुराना बस स्टैण्ड के समीप दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस के दौरान अज्जू रैकवार, ओमप्रकाश रैकवार, छोटू विश्वकर्मा, शुभम विश्वकर्मा एवं इनके साथी एक राय होकर आए और रास्ता रोककर हमारी प्रतिमा के आगे खड़े होकर फोम स्प्रे उड़ाने लगे। मना करने पर बुरी-बुरी गालियाँ देने लगे। इस बीच मौके पर आए हमारे साथियों उज्ज्वल पाण्डेय, शोलू पाण्डेय, ऋषि राठौर के साथ अज्जू और उसके दोस्तों के द्वारा लात-घूंसों व डण्डों से मारपीट की गई। जिसमें उज्ज्वल पाण्डेय व ऋषि राठौर के शरीर पर चोटें आईं है और खून भी निकलने लगा। मौके पर कुछ लोगों ने हस्तक्षेप कर बीच-बचाव किया तभी हमलावर फरार हो गए। अजयगढ़ थाना पुलिस ने अमित की रिपोर्ट पर अज्जू रैकवार, ओमप्रकाश रैकवार, छोटू विश्वकर्मा, शुभम विश्वकर्मा व अन्य के खिलाफ अपराध क्रमाँक 324/19 धरा 147, 341, 294, 323, 506 ताहि के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
युवा नेताओं ने जमकर काटा बबाल

इस विवाद में दूसरी रिपोर्ट अज्जू रैकवार की बहिन कुमारी सविता रैकवार ने दर्ज कराई है। जिसके अनुसार मंगलवार रात्रि में करीब 10 बजे वह घर पर अकेली थी। सविता की विधवा माँ प्रेम रैकवार भाईयों अज्जू व ओमप्रकाश को ढूंढने के लिए मोहल्ले में गई थी। इस बीच भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अमित गुप्ता उनके भाई रोहित गुप्ता, ऋषि राठौर, उज्जवल पाण्डेय, शोलू पाण्डेय व उनके 100 अन्य साथी हमारे घर के सामने आए और बुरी-बुरी गालियाँ देते हुए मुझसे बोले कि तेरा भाई अज्जू कहाँ है। डरी-सहमी सविता ने बताया कि वह घर पर नहीं है और तुरंत अपने घर के दरवाजे बंद कर लिए। उक्त सभी लोग दरवाजा तोड़कर अंदर घुस आए और बोले कि देखो अज्जू अंदर होगा।
लाठी-डण्डों से लैस आक्रोशित भीड़ के इस कदम से अत्यंत ही भयभीत सविता घर की छत में चली गई। सभी लोग बोल रहे थे कि तुम्हारा भाई अज्जू जहाँ भी मिलेगा उसे जान से मार देंगे। बाद में उक्त सभी लोग कछियाना मोहल्ले में ही बसंतलाल विश्वकर्मा के घर गए और उनका दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने का प्रयास किया। दरवाजा न टूटने पर घर के बाहर गाली-गलौंज करते रहे इसकी जानकारी बसंतलाल की पत्नी शिवकुमारी विश्वकर्मा के द्वारा सविता को दी गई। अजयगढ़ थाना पुलिस ने सविता की रिपोर्ट पर अमित गुप्ता, रोहित गुप्ता, ऋषि राठौर, उज्जवल पाण्डेय, शोलू पाण्डेय व अन्य के खिलाफ अपराध क्रमाँक 323/19 धरा 147, 294, 452, 427, 506 ताहि के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया है।

उल्लेखनीय है कि इस विवाद से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिसे युवा नेताओं और उनके साथियों के द्वारा अज्जू रैकवार के घर पर कथित तौर पर की गई तोड़फोड़ और फैलाई गई दहशत के सबूत के तौर पेश किया जा रहा है। एक वीडियो में सविता घर का बिखरा हुआ सामान दिखाते हुए बताती है कि रात में आई उपद्रवियों की भीड़ ने उसके घर पर जमकर तोड़फोड़ की है। उसके अनुसार हमलावर डण्डे के साथ कट्टा भी लिए हुए थे। दूसरे वीडियो में शिवकुमारी विश्वकर्मा बता रहीं है कि मैंने भीड़ को समझाया कि मेरे बच्चे ने मारा है तो आप लोग मुझे मार लो। इस पर कुछ युवाओं ने कहा कि आप हमारी माँ जैसी है, हम आपको नहीं उसी को मारेंगे।

शिवकुमारी विश्वकर्मा वीडियो में बता रहीं है कि विवाद के बाद से उनके दोनों बेटे छोटू विश्वकर्मा, शुभम विश्वकर्मा अजयगढ़ थाना पुलिस की हिरासत में है। त्योहारों के समय क़ानून व्यवस्था के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जाने वाले पन्ना जिले के अजयगढ़ क़स्बा में दहशहरे पर हुए इस विवाद में भाजपा और कांग्रेस के नेताओं तथा उनके परिजनों का नाम आने से यह मामला चर्चाओं में बना है। वहीं इस घटनाक्रम को लेकर लोग स्थानीय पुलिस की भूमिका और उसकी कथित मुस्तैदी पर सवाल उठाते हुए तीखी आलोचना कर रहे हैं।
इनका कहना है –
“अज्जू रैकवार आपराधिक चरित्र का व्यक्ति है यह बात सभी को पता है। उसने और उसके दोस्तों ने हम लोगों के साथ मारपीट की है, इस मामले में पीड़ित हम है। अज्जू के घर में तोड़फोड़ करने के आरोप झूठे हैं हम लोग तो उसके घर गए ही नहीं है। हमें फंसाने के लिए झूठी रिपोर्ट दर्ज कराइ गई है।”
– अमित गुप्ता, भाजयुमो जिलाध्यक्ष पन्ना।
“स्प्रे डालने को लेकर हुए विवाद पर पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है। सभी फरार आरोपियों को शीघ्र ही गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस की सजगता का ही परिणाम है कि यह विवाद बड़ा रूप नहीं ले सका।”
– डी. के. सिंह निरीक्षक थाना अजयगढ़।
पुलिस को मिली बड़ी सफलता : बहुचर्चित कालिंजर नरसंहार का आरोपी “कुख्यात इनामी डकैत पप्पू यादव” गिरफ्तार
* धरमपुर थाना पुलिस ने उत्तर प्रदेश की सीमा के समीप घेराबंदी कर पकड़ा
* पप्पू के खिलाफ पन्ना जिले में दर्ज हैं अपहरण, हत्या व आर्म्स एक्ट के मामले
मुस्तकीम खान, पन्ना/अजयगढ़ ।(www.radarnews.in) अन्तर्राज्जीय डकैत बबली कोल व उसके साथी लवलेश कोल के खात्मे के बाद मध्यप्रदेश पुलिस ने दस्यु उंन्मूलन अभियान को तेज कर दिया है। इसी क्रम में पन्ना जिले की पुलिस ने मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती तराई अंचल में करीब डेढ़ दशक से भी अधिक समय तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात ईनामी डकैत पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है। लम्बे समय से फरार चल रहे दस हजार रुपए के ईनामी डकैत पप्पू उर्फ जयकरण यादव के खिलाफ पन्ना जिले में अपहरण, हत्या व आर्म्स एक्ट सरीके कई संगीन मामले दर्ज है। जिनमें पुलिस को इसकी तलाश रही है। दस्यु पप्पू उर्फ जयकरण यादव बहुचर्चित कालिंजर नरसंहार में भी आरोपी है।
वर्ष 2003 में मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश को दहला देने कालिंजर नरसंहार के समय पप्पू उर्फ जयकरण यादव अपने हमनाम दुर्दांत दस्यु सरगना पप्पू यादव उर्फ कमल यादव गैंग का सक्रिय सदस्य रहा है। दस्यु सरगना पप्पू यादव उर्फ कमल यादव की मौत होने के बाद दस्यु पप्पू उर्फ जयकरण यादव पुलिस से बचने के लिए तराई अंचल से भागकर महानगरों में अपनी पहचान बदलकर रहता रहा। नवरात्र के त्यौहार के समय अपने गाँव आए मोस्ट वांटेड दस्यु पप्पू उर्फ जयकरण यादव के पकड़े जाने की खबर आने से तराई अंचल के लोगों ने राहत की सांस ली है।
मुखबिर की सूचना पर मिली सफलता

इनामी डकैत पप्पू उर्फ जयकरण यादव पिता संता यादव 38 साल निवासी गड्डिहा थाना कालिंजर जिला बांदा उत्तर प्रदेश को मुखबिर की सटीक सूचना पर सोमवार 7 अक्टूबर की रात्रि में पन्ना जिले के धरमपुर थाना अंतर्गत छनिहा गाँव के तिराहे पर अन्तर्राज्जीय सीमा के नजदीक घेराबंदी कर धरमपुर थाना पुलिस के द्वारा पकड़ा गया। धरमपुर थाना प्रभारी एम.डी. शाहिद ने जानकारी देते हुये बताया कि उन्हें मुखबिर से सूचना मिली थी कि पप्पू उर्फ जयकरण यादव अपने घर गड्डिहा से छनिहा ग्राम के तिराहे पर है जो बाहर भागने की फिराक में है।
मोस्ट वांटेड डकैत की लोकेशन के संबध में मिली अहम सूचना को गंभीरता से लेते हुए इससे आनन-फानन वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और फिर उनके निर्देशन में थाना प्रभारी धरमपुर एम.डी. शाहिद ने छनिहा तिराहा के आसपास तगड़ी घेराबंदी कर कालिंजर-नरदहा मार्ग से इनामी डकैत पप्पू उर्फ जयकरण यादव को धर दबोंचा। आरोपी के कब्जे से पुलिस ने 315 बोर का एक कट्टा एवं 6500 रुपये नगद जप्त किए है। इनामी बदमाश की गिरफ्तारी में एएसआई बी.एल. पाण्डेय, आर. प्रदीप हरदेनिया, आशीष अवस्थी, आइमत सेन आदि की सराहनीय भूमिका रही । लम्बे समय से फरार इनामी दस्यू पप्पू उर्फ जयकरण यादव को पकड़ने वाली टीम को पुलिस अधीक्षक पन्ना मयंक अवस्थी ने बधाई देते हुए पुरुष्कृत करने की घोषणा की है।
इतना कुख्यात क्यों है पप्पू यादव
जयकरण उर्फ पप्पू यादव कितना कुख्यात डकैत है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह बहुचर्चित कालिंजर नरसंहार में शामिल रहा है। खूँखार दस्यु सरगना पप्पू उर्फ़ कमल यादव ने वर्ष 2003 में अपने गिरोह के सदस्यों के साथ कालिंजर में एक ही परिवार के आठ लोगों की सनसनीखेज हत्या कर दी थी। इस जघन्यतम हत्याकांड को कालिंजर नरसंहार के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा दस्यु जयकरण उर्फ पप्पू यादव पर किशोरा लोध निवासी जोधापुरवा की हत्या का भी आरोप है।











