* देश के सबसे अहम और पुराने विवाद का हुआ अंत
* अदालत ने विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का फैसला सुनाया
नई दिल्ली। (www.radarnews.in) सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ में शनिवार को अयोध्या विवाद पर सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया। अदालत ने अयोध्या की 2.77 एकड़ विवादित जमीन हिंदू पक्ष (रामलला विराजमान) को देने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए और इसकी योजना 3 माह में तैयार की जाए। अदालत ने मुस्लिम पक्ष (सुन्नी वक्फ बोर्ड) को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ उपयुक्त वैकल्पिक जमीन आवंटित करने का फैसला दिया। 40 दिनों तक चली लंबी सुनवाई के बाद शनिवार 9 नवंबर को दशकों पुराने एवं राजनैतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत का फैसला आया है। अयोध्या की विवादित जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 1045 पेज के अपने फैसले से देश के सबसे अहम और एक सदी से भी अधिक पुराने विवाद का अंत कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि रामलला विराजमान को दी गई विवादित जमीन का स्वामित्व केन्द्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की महत्वपूर्ण बातें –

* विवादित ढांचे पर शिया वक्फ बोर्ड का दावा ख़ारिज।
* जहां पर बाबरी मस्जिद के गुंबद थे वह जगह हिन्दू पक्ष को मिली।
* अदालत ने कहा कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ अलग उपयुक्त ज़मीन दी जाए।
* ज़मीन पर हिंदुओं का दावा उचित है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर अयोध्या पर एक कार्ययोजना तैयार करने का कहा है।
* पक्षकार गोपाल विशारद को मिला पूजा-पाठ का अधिकार।
* कोर्ट ने कहा है कि बनायी गई ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को शामिल करना है या नहीं ये फ़ैसला केंद्र सरकार करेगी।
* आस्था के आधार पर मालिकाना हक़ नहीं दिया जा सकता।
* निर्मोही अखाड़ा का दावा खारिज।
* बाबरी मस्जिद के नीचे एक संरचना पाई गई है जो मूलतः इस्लामी नहीं थी। विवादित भूमि पर अपने फ़ैसले में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान को नकारा नहीं जा सकता।
* अंदर के चबूतरे पर कब्ज़े को लेकर गंभीर विवाद रहा है। 1528 से 1556 के बीच मुसलमानों ने वहां नमाज़ पढ़े जाने का कोई सबूत पेश नहीं किया गया।
* बाहरी चबूतरे पर मुसलमानों का क़ब्ज़ा कभी नहीं रहा। 6 दिसंबर की घटना से यथास्थिति टूट गई।
सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड इस स्थान के इस्तेमाल का सबूत नहीं दे पाया।
* बाहरी चबूतरे पर हमेशा से हिन्दुओं का क़ब्ज़ा रहा। ऐतिहासिक यात्रा वृतांतों को भी ध्यान में रखा गया है।
* ऐतिहासिक यात्रा वृतांत बताते हैं कि सदियों से मान्यता रही है कि अयोध्या ही राम का जन्मस्थान है।
* हिन्दुओं की इस आस्था को लेकर कोई विवाद नहीं है। आस्था उसे मानने वाले व्यक्ति की निजी भावना है।
मस्जिद मीर बाक़ी ने बनाई थी, अदालत के लिए धर्मशास्त्र के क्षेत्र में दख़ल देना अनुचित होगा।
फैसले पर किसने क्या कहा –
रामभक्ति हो या रहीमभक्ति हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना अहम : मोदी
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ”सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है. यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में क़ानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है।”
”हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया. न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीक़े से समाधान कर दिया। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फ़ैसला सुना दिया है।”
”इस फ़ैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।”
अयोध्या में राम मंदिर बने: कांग्रेस
अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कांग्रेस ने कहा कि इस फ़ैसले का स्वागत करना चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भगवान श्री राम के मंदिर के निर्माण का पक्षधर है।
अमित शाह ने फ़ैसले का किया स्वागत
केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कहा, ”मुझे पूर्ण विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा।यह निर्णय भारत की एकता, अखंडता और महान संस्कृति को और बल प्रदान करेगा।”
”दशकों से चले आ रहे श्री राम जन्मभूमि के इस क़ानूनी विवाद को आज इस निर्णय से अंतिम रूप मिला है। मैं भारत की न्याय प्रणाली व सभी न्यायमूर्तियों का अभिनन्दन करता हूँ।”
फ़ैसले पर सलाह मश्विरा करेंगे- सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड
सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील ने ज़फ़रयाब ज़िलानी ने फ़ैसले पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर कहा, ”हम फ़ैसले पर अभी मश्विरा करेंगे और बाद में तय करेंगे कि इसकी समीक्षा के लिए याचिका दायर करेंगे या नहीं। इस फ़ैसले का आदर करना चाहिए। हमें इसके ख़िलाफ़ कोई प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।”
फ़ैसले को हार-जीत की तरह न देखें: भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मोहन भागवत ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए सभी से संयम बनाए रखने की अपील की है और ‘झगड़ा-विवाद’ समाप्त करने की बात कही है। उन्होंने यह भी अपील की है कि इसे हार-जीत की तरह नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम योगदान करने वाले सभी सहयोगियों और बलिदानियों को याद करते हैं। भाईचारा बनाए रखने के लिए सरकारी और समाज स्तर पर हुए प्रयासों का भी हम स्वागत और अभिनंदन करते हैं।संयमपूर्वक न्याय का इंतज़ार करने वाली भारतीय जनता भी बधाई की पात्र है। इसे जय-पराजय के रूप में नहीं देखना चाहिए। सभी से अनुरोध है कि संयमित और सात्विक तरीके से अपने आनंद को व्यक्त करें। अतीत की सभी बातों को भुलाकर हम सभी श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करेंगे।“
मस्जिद नहीं गिरी होती तो क्या फ़ैसला आता: ओवैसी
एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने राजीव धवन और मुस्लिम पक्ष की बात सुप्रीम कोर्ट में रखने वाले दूसरे लोगों को शुक्रिया कहते हुए अपनी बात शुरू की और फ़ैसले पर असंतोष जताते हुए तथ्यों के ऊपर आस्था की जीत बताया है।
उन्होंने कहा, “ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरह मेरा भी यह मानना है कि हम इससे संतुष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम ज़रूर है पर अचूक नहीं है। ये जस्टिस जेएस वर्मा ने कहा था। जिन्होंने 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराया, आज उन्हीं को सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि ट्रस्ट बनाकर मंदिर का काम शुरू कीजिए। मेरा कहना ये है कि अगर मस्जिद नहीं गिराई गई होती तो कोर्ट क्या फ़ैसला देता?”
ओवैसी ने शीर्ष अदालत की ओर से मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ ज़मीन दिए जाने के फ़ैसले पर भी असहमति जताई है।
ओवैसी की कही और अहम बातें –

* हम अपने क़ानूनी अधिकार के लिए लड़ रहे थे। मुसलमान ग़रीब है और भेदभाव भी उसके साथ हुआ है। लेकिन इन तमाम मजबूरियों के बावजूद मुसलमान इतना गया गुज़रा नहीं है कि वो अपने अल्लाह के घर के लिए पांच एकड़ ज़मीन न ख़रीद सके. हमें किसी को ख़ैरात या भीख की ज़रूरत नहीं है।
* देखना होगा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पांच एकड़ ज़मीन को क़बूल करेंगे या नहीं, मेरी निजी राय ये है कि हमें इस प्रस्ताव को ख़ारिज़ करना चाहिए।
* मुल्क अब हिंदू राष्ट्र के रास्ते पर जा रहा है। संघ परिवार और बीजेपी अयोध्या में इसे इस्तेमाल करेगी।
* वहां शरीयत के ऐतबार से मस्जिद थी, है और रहेगी। हम अपनी नस्लों को ये बताते जाएंगे कि यहां 500 साल तक मस्जिद थी। लेकिन 1992 में संघ परिवार ने और कांग्रेस की साज़िश की वजह से उस मस्जिद को शहीद किया गया।
साभार : बीबीसी हिन्दी।
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पन्ना जिला चिकित्सालय में इलाज के दौरान कृष्ण कुमार के मृत्यु पूर्व कथन दर्ज किए गए थे। जिनके आधार पर अमानगंज थाना पुलिस ने शुक्रवार 8 नवम्बर को कुल 8 व्यक्तियों के खिलाफ नामजद अपराध क्रमांक 389/19 धारा 306, 34 आईपीसी के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया है। प्रकरण में पन्ना के बेनीसागर मोहल्ला में रहने वाली एक महिला, ग्राम कमताना निवासी उसकी छोटी बहिन-भाई, माता-पिता और विजय ओमरे निवासी बेनीसागर मोहल्ला पन्ना तथा शानू मिर्जा निवासी टिकुरिया मोहल्ला पन्ना को आरोपी बनाया गया है। विदित हो कि भाजपा नेता कृष्ण कुमार पाण्डेय के विरुद्ध पन्ना निवासी महिला ने दिनाँक 01 जून 2019 को थाना अमानगंज में धारा 354,506 आईपीसी के तहत छेड़छाड़ का आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया था। गुरुवार 7 नवम्बर को उस महिला की छोटी बहिन अमानगंज थाना में कृष्ण कुमार के खिलाफ छेड़छाड़ की लिखित रिपोर्ट देने आई थी। जिसका पता चलने पर कृष्ण कुमार पाण्डेय भी थाना पहुँच गया। अपने खिलाफ लिखाई जा रही रिपोर्ट को कृष्ण कुमार पाण्डेय ने झूठा बताते हुए थाना प्रभारी सुनीता जाटव को यह समझाने काफी कोशिश की गई कि उसे फंसाया जा रहा है। लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं हुआ। कथित तौर पर थाना प्रभारी ने कहा कि अब तो प्रकरण दर्ज हो गया है अब तुम्हें जेल जाना पड़ेगा। इससे आहत कृष्ण कुमार पाण्डेय उर्फ कित्ते पाण्डेय ने शाम करीब 4 बजे थाना में ही जहर खा लिया था।
भाजपा नेता कृष्ण कुमार पाण्डेय का पन्ना में इलाज के दौरान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह कोतवाली थाना टीआई अरविंद कुजूर और पत्रकारों को बता रहे हैं कि, पन्ना के बेनीसागर मोहल्ला निवासी एक महिला और उसके परिजन जब मेरी हत्या नहीं करवा पाए तो मुझे प्रताड़ित करने लगे। यह सब पिछले एक साल से चल रहा था। वीडियो में कृष्ण कुमार ने बताया कि मैंने इस संबंध में कई बार थाना में शिकायत की और पुलिस अधीक्षक को भी आवेदन दिया। उनका आरोप है कि उक्त महिला ने विजय ओमरे निवासी बेनीसागर मोहल्ला पन्ना और शानू मिर्जा निवासी टिकुरिया मोहल्ला पन्ना से पहले मेरी हत्या कराने का लगातार प्रयास किया। जब मैं बच गया तो मेरी झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। इससे मैं बहुत ज्यादा प्रताड़ित हो गया। आज फिर मेरी झूठी रिपोर्ट हो रही थी। मैं थाना गया और मैडम (थाना प्रभारी) को रो-रोकर बताया। बाद में वहीं जहर खा लिया। मैंने मैडम से कहा परेशान मत करो मुझे, वह बोलीं तुझे जेल भेजना है। वीडियो में जो बातें भाजपा नेता बताईं है उन्हें अपनी मृत्यु पूर्व दर्ज कराए गए कथनों में भी दोहराया है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में फिलहाल यह साफ़ नहीं हो सका है कि, उक्त महिला भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार पाण्डेय के खिलाफ छेड़खानी जैसे गंभीर मामले की कथित तौर पर झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाकर उन्हें इस हद तक प्रताड़ित क्यों कर रही थी। इस घिनौने कृत्य में महिला के परिजन उसका साथ क्यों दे रहे थे। कृष्ण कुमार से इनकी आखिर ऐसी क्या बुराई थी जिस वजह से उसे पूरा परिवार मिलकर इस प्रताड़ित कर रहा था। सवाल यह भी है कि विजय ओमरे और शानू मिर्जा भाजपा नेता कृष्ण कुमार पाण्डेय उर्फ़ कित्ते पाण्डेय की हत्या करना क्यों चाह रहे थे। क्या इन दोनों ने उक्त महिला से हत्या की लिए सुपारी ले रखी थी या फिर इसके पीछे कोई और वजह है। इस मामले में अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। प्रकरण की जांच पूर्ण होने और फरार आरोपियों के पकड़े जाने पर पुलिस को इन सब सवालों के जबाब मिलने की उम्मीद है।







दरअसल, पिछले दिनों अजयगढ़ के पत्रकार अमित जड़िया व थाना प्रभारी के बीच हुए विवाद के चलते स्थानीय पत्रकार इस बैठक से दूर रहे। मीडियाकर्मियों के द्वारा फिलहाल थाना अजयगढ़ की समस्त बैठकों व ख़बरों का भी अघोषित तौर पर बहिष्कार किया जा रहा है। बताते चलें कि विगत दिनों अजयगढ़ के थाना प्रभारी ने स्थानीय पत्रकार अमित जड़िया के साथ कथित तौर अभद्र व्यव्हार करते हुए झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। अमित का आरोप है कि उसके साथ यह सब इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ समय से लगातार क्षेत्र में चल रही रेत की लूट में पुलिस की संलिप्तता होने तथा अवैध धंधों को संरक्षण दिए जाने की तथ्यपरक ख़बरें प्रकाशित कर रहा था। इससे नाराज होकर थाना प्रभारी के द्वारा उसे चुप कराने के लिए धमकाया गया। इस घटनाक्रम के संबंध स्थानीय पत्रकारों के द्वारा पन्ना कलेक्टर व एसपी को आवेदन दिया गया। लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही न होने से अजयगढ़ के अधिकांश पत्रकार नाराज है।
पत्रकारों का कहना है कि मीडिया की आवाज को दबाने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता निराश करने वाली है। इस स्थिति में मीडियाकर्मी स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक तरीके से अपना काम कैसे कर पाएंगे। अजयगढ़ के पत्रकारों का कहना है कि यदि शीघ्र ही उनके आवेदन पत्र पर कार्रवाई नहीं की गई तो उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कठोर निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि अजयगढ़ के थाना के निरीक्षक डीके सिंह की गिनती कर्मठ पुलिस अधिकारियों में होती है। अपने अब तक के सेवाकाल में वे जहां भी रहे हैं आमतौर पर मीडिया के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। लेकिन अजयगढ़ में विवादित स्थिति क्यों बनीं इस पर दोनों पक्षों को गंभीरता से गौर करने की जरूरत है। यह बात सौ फीसदी सच है कि अजयगढ़ क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार पुलिस एवं राजस्व अधिकारियों के अघोषित संरक्षण में होता है। पर सभी पुलिसकर्मी रेत माफियाओं से सांठगांठ रखते हों ऐसा भी नहीं है। बहरहाल आगामी चुनौतियों के मद्देनजर वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि इस प्रकरण को लेकर अजयगढ़ में मीडिया और पुलिस के बीच बने गतिरोध को दूर करने के लिए तत्परता से आवश्यक कदम उठाए जाएं।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा सोमवार 4 नवम्बर को संपूर्ण मध्यप्रदेश में विशाल किसान आक्रोश आंदोलन का आवाहन किया गया था। इसी क्रम में पन्ना की इन्द्रपुरी कॉलोनी स्थित चन्द्रशेखर पार्क के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार की वादखिलाफ़ी और जन विरोधी नीतियों के खिलाफ धरना दिया। धरना-प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश में पिछले दस माह से कांग्रेस की सरकार है। निश्चित ही कांग्रेस के पास सरकार चलाने के लिए अपना स्वयं का बहुमत नहीं है इसलिए वह अन्य दलों और निर्दलीय विधायकों की मान-मनुहार पर टिकी हुई है। भारतीय जनता पार्टी ने निरंतर एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाई है। कांग्रेस ने किसानों से वादा किया था कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही किसानों का कर्ज माफ कर दिया जायेगा। लेकिन आज तक कर्जमाफी नहीं हुई। किसान दोहरे और तिहरे धोखे का शिकार हुआ है। पहला कर्जमाफी के झूठ ने उसे डिफाल्टर बना दिया और वह आगामी फसल के लिए खाद-बीज खरीद नहीं पा रहा है । वहीं दूसरी ओर बैंक वाले वसूली के नोटिस भेज कर किसान के पीछे पड़ गए हैं।
भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव के पहले कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में म.प्र. के सभी किसानों का दो लाख रूपये तक का कर्ज माफ करने का वचन दिया था लेकिन अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के वचन पर भी कांग्रेस सरकार खरी नहीं उतरी और उसने 10 माह तक किसी भी किसान का कर्ज माफ नहीं किया है। पिछले दिनों मध्यप्रदेश के किसानों पर भारी वर्षा के कारण भीषण बाढ़ का कहर टूटा इस बाढ़ में मध्यप्रदेश के 32 जिलों के किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया किसानों की सोयाबीन मूंग-उड़द-कपास और मक्का जैसी खरीफ की फसल जो खेतों में पड़ी थी वह पूरी तरह नष्ट हो गई और घर में रखा गेंहू-सरसों-चना भी बाढ़ की भेंट चढ़ गया । कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में गरीबों किसानों के बिल हाफ करने का वादा किया था लेकिन सरकार बनने पर इस वादे को हवा में उड़ा दिया बल्कि गरीब और किसानों को बड़े-बड़े बिल थमा दिए।
कांग्रेस नेता मनोज गुप्ता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह किसान आक्रोश आंदोलन के नाम पर किसानों और आमजनता को गुमराह कर रही है। भाजपा के नेता प्रदेश को केंद्र से राहत राशि जानबूझकर नहीं दिलवा रहे है, ताकि आपदा प्रभावित किसानों को राहत नहीं मिले और इस स्थिति में वे आक्रोशित हों। जिसका राजनैतिक लाभ उठाया जा सके। कांग्रेस नेता श्री गुप्ता ने कहा कि भाजपाई घड़ियाली आंसू बहाना बंद करें और केन्द्र की मोदी सरकार से मध्यप्रदेश को राहत राशि सहित विभिन्न मदों में लंबित राशि दिलवाने में मदद करें ताकि किसानों को तत्परता से राहत पहुंचाई जा सके। आपने बताया कि अतिवृष्टि से प्रदेश में फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक नुकसानी के बाबजूद केंद्र की मोदी सरकार द्वारा अब तक किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं दी गई। भाजपा के नेताओं को यदि वाकई किसानों की चिंता है तो उन्हें मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव करने के मामले में केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना चाहिए।
कांग्रेस नेता आनंद शुक्ला ने बताया कि प्रदेश के 21 लाख किसानों की अब तक कर्जमाफी हो चुकी है, बाबजूद इसके भाजपा के नेता कर्जमाफी के नाम पर सरासर झूठ बोल रहे हैं। जिन किसान परिवारों को कर्जमाफी का लाभ मिला है उन्हें पता चल गया है कि भाजपाई किस हद तक झूठ बोलते हैं। आपने कहा कि किसानों पर गोलियां चलवाने वाली पार्टी के नेताओं द्वारा किसानों के मुद्दों पर प्रदर्शन के नाम पर सिर्फ राजनैतिक नौटंकी की गई। मध्यप्रदेश में कमलनाथ जी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार के खिलाफ इनके पास कोई ठोस मुद्दा ही नहीं है। क्योंकि हमारी सरकार के द्वारा आम नागरिकों से किए गए वचनों को पूरी ईमानदारी के साथ पूरा किया जा रहा है। बिजली बिल हाफ करने के लिए प्रदेश सरकार वचनवद्ध है। श्री शुक्ला ने कहा कि खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा को चाहिए कि वे केन्द्र की सरकार से यह सवाल पूंछें कि मध्यप्रदेश में इतनी बड़ी आपदा आने के बाद भी प्रदेश को किसी तरह की कोई आर्थिक मदद अब तक क्यों नहीं दी गई।
मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने कहा कि खेल स्वस्थ जीवन के लिये निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं। हार-जीत से ज्यादा महत्व प्रतियोगिता में सहभागिता का होता है। उन्होंने कहा कि खेल जीवन के सर्वांगीण विकास और चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं। डॉ. चौधरी ने कहा कि अभिभावको को चाहिए कि बच्चों को खेल के लिये प्रोत्साहित करें। खेल के माध्यम से बच्चे देश, प्रदेश एवं परिवार का नाम रोशन कर सकते हैं। आजकल बच्चे खेलों को कैरियर के रूप में अपना रहे हैं। डॉ. चौधरी ने बताया कि स्कूलों में भी र्स्पोट्स एवं योग शिक्षकों की भर्ती की जा रही है ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ खेल एवं योग की शिक्षा भी दी जा सके।
आयुक्त लोक-शिक्षण श्रीमती जयश्री कियावत ने कहा कि पूरे देश से स्कूली बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग लेने आए हैं। ये सभी बच्चे अपने प्रदेश के हीरे हैं। उन्होंने खिलाड़ी बच्चों से कहा कि प्रतियोगिता में खेल भावना के साथ एकाग्रचित होकर खेलें, अवश्य सफल होंगे। असफलता मिलने पर भी निराश न होते हुए आगे बढते जाना है, यही खेल भावना है। मंत्री द्वय ने एसजीएफआई का ध्वज फहराकर प्रतियोगिता का शुभांरभ किया। प्रतिभागी खिलाड़ियों को नियमाधीन खेल भावना से खेलने की शपथ दिलाई।



