आर्थिक अनियमितताओं में दोष सिद्ध अधिकारियों-कर्मचारियों की पेंशन से वसूली जाएगी शासकीय राशि
* मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने मंत्रि-परिषद की स्थायी समिति की बैठक में दिये निर्देश
भोपाल। (www.radarnews.in) सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की मध्यप्रदेश सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के अधीन मामलों के निराकरण के लिए गठित स्थाई समिति की बैठक संपन्न हुई। डॉ. गोविंद सिंह ने निर्देश दिये कि भ्रष्टाचार, गबन और अन्य आर्थिक अनियमितताओं में दोष सिद्ध हो चुके सेवानिवृत्त शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों की पेंशन से नियमानुसार शासन की राशि की वसूली की जाए। उन्होंने कहा कि दोषमुक्त हुए अधिकारी-कर्मचारी की पेंशन नहीं रोकी जाए और ना ही उसमें कोई कटौती की जाए।
बैठक में जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा ने दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों की पेंशन नियमानुसार रोके जाने अथवा आंशिक कटौती करने के निर्देश दिए। वित्त मंत्री तरुण भनोट तथा कृषि मंत्री श्री सचिन यादव ने भी विभागीय प्रमुख सचिवों को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
समिति संयोजक अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन के.के. सिंह ने प्रकरणों की जानकारी दी। प्रमुख सचिव गृह एस.एन. मिश्रा द्वारा प्रस्तुत 8 प्रकरणों की समीक्षा के बाद 6 प्रकरणों में संबंधितों की आंशिक पेंशन रोके जाने तथा 2 प्रकरणों में पेंशन नहीं रोके जाने का निर्णय लिया गया। प्रमुख सचिव अजीत केसरी द्वारा प्रस्तुत सहकारिता विभाग के सेवानिवृत्ति के बाद के तीन प्रकरणों में विभागीय जाँच की अनुमति दी गई। जल-संसाधन विभाग के तीन प्रकरणों में दोषी सेवानिवृत्त शासकीय सेवकों की पेंशन से संपूर्ण शासकीय राशि वसूल किए जाने का निर्णय लिया गया। साथ ही एक प्रकरण में विभागीय जाँच की अनुमति दी गई तथा एक प्रकरण में दोषी पाए गए 20 विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों की संपूर्ण पेंशन स्थाई रूप से रोके जाने का निर्णय लिया गया। संबंधित ठेकेदारों को भी 3 वर्ष के लिए ब्लैक लिस्ट करने के निर्देश दिये गये।
दुखद हादसा। करंट लगने से देवरानी-जेठानी की मौत, धुले हुए कपड़ों को सुखाने तार पर फैलाते समय हुआ हादसा
* पन्ना कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम बिल्हा की घटना
* पुलिस के असहयोग के कारण शवों का आज नहीं हो सका पोस्टमार्टम
पन्ना। (www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना के समीपी ग्राम बिल्हा में शुक्रवार 4 अक्टूबर को करंट लगने से देवरानी-जेठानी की दर्दनाक मौत हो गई। कपड़े धोने के बाद उन्हें सुखाने के लिए तार पर फैलाते समय दोनों महिलाओं के करंट की चपेट में आने की जानकारी मिली है। अपनी पत्नी और बहू को खोने वाले राजकुमार पटेल 45 को इस हादसे का पता तब चला जब शाम के समय वह पन्ना से वापिस पाने घर पहुँचा। मकान के अंदर पत्नी राजेन्द्रकली 40 वर्ष और बहू बिन्नू बाई पति भानु प्रताप पटेल 38 वर्ष को अचेत अवस्था में जमीन पर अस्त-व्यस्त पड़ी थी। दोनों की हालत देखकर राजकुमार के पैरों तले से जमीन खिसक गई। एक पल के लिए उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। दोनों को काफी हिलाने-डुलाने के बाद भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो राजकुमार पटेल फूट-फूटकर रोने लगा। आस-पड़ोस के लोग रोने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचें तो वहाँ का नजारा देख उन्हें यह समझने देर नहीं लगी कि दोनों महिलाओं को करंट लगा है।
आनन-फानन राजेन्द्रकली 40 वर्ष और बहू बिन्नू बाई को अचेत अवस्था में ही इलाज के लिए पन्ना जिला चिकित्सालय लाया गया। जहाँ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने दोनों महिलाओं का सघन परीक्षण करने के उपरान्त उन्हें मृत घोषित कर दिया। सगी देवरानी-जेठानी की मौत के बाद से पटेल परिवार में कोहराम मचा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनी माँओं को खोने वाले बच्चे भी बिलख रहे है। उधर इस दुखद हादसे की खबर फैलने के बाद से ग्राम बिल्हा समेत क्षेत्र मातम का माहौल निर्मित है। राजकुमार पटेल ने बताया कि घटना के समय घर में सिर्फ दोनों महिलाएँ ही मौजूद थीं इसलिए पक्के तौर नहीं बता सकता कि हुआ क्या है। लेकिन घटनास्थल और दोनों शवों की स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कपड़े फैलाने वाले तार में घरेलू विधुत लाइन से करंट प्रवाहित हो गया और महिला जब कपड़े धोने के बाद उन्हें सुखाने के लिए तार पर फैलाने गईं तो करंट की चपेट में आ गई। शायद उसे बचाने पहुंचीं दूसरी महिला भी करंट के सम्पर्क में आकर असमय काल-कवलित हो गई।
यहाँ कोई सुनने वाला नहीं है..!

पत्नी और बहु की दर्दनाक मौत से दुखी राजकुमार पटेल 45 ने पत्रकारों को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कथित तौर पर कोतवाली थाना पन्ना पुलिस की लापरवाही के चलते दोनों शवों का आज पोस्टमार्टम नहीं हो सका। यहाँ कोई उसकी सुनने वाला नहीं है, कोतवाली थाना जाकर पुलिसकर्मियों से गुहार लगाई कि पंचनामा सहित मर्ग कायम करने की कार्रवाई तत्परता से कर लें ताकि देर शाम तक दोनों शवों का पोस्टमार्टम संभव हो सके। ड्यूटी डॉक्टर भी पोस्टमार्टम करने के लिए तैयार थे लेकिन पुलिसकर्मियों का कोई अता-पता नहीं था। परिणामस्वरूप आज शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। इसलिए शोक संतृप्त परिजनों को अंतिम संस्कार करने के लिए शव नहीं मिल सके। फिलहाल दोनों शवों को जिला चिकित्सालय पन्ना के शव विच्छेदन गृह में रखवाया गया है। राजकुमार ने बताया कि इस हादसे के बाद से उनके बच्चे और परिजन घर में बिलख रहे हैं, रिश्तेदारों का घर पर आना शुरू हो गया है लेकिन शव पन्ना रखे होने के कारण वह अपने घर भी नहीं जा सकते। अब शनिवार 05 अक्टूबर की सुबह पोस्टमार्टम होने के बाद शवों को परिजनों को सौंपा जाएगा।
MP में जिलावार समूहों में होगी रेत खदानों की ऑनलाइन नीलामी, 463 करोड़ की सरकारी बोली से शुरू होगी 43 जिलों की निविदा
* स्थानीय निवासियों को स्वयं के उपयोग के लिये रॉयल्टी से 100 प्रतिशत छूट
* ठेकेदार को स्वयं प्राप्त करनी होगीं वैधानिक स्वीकृतियाँ और अनुमतियाँ
भोपाल।(www.radarnews.in) राज्य शासन ने वर्ष 2019 में नये रेत नियम लागू किये हैं। इनके आधार पर प्रदेश में समूह बनाकर रेत खदानों की निविदाओं को आमंत्रित कर तीन वर्ष तक संचालन के लिये प्रस्ताव बनाये गये हैं। इन प्रस्ताव के अनुसार मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम ऑनलाईन निविदा की प्रक्रिया चालू करने जा रहा है। खनिज साधन मंत्री प्रदीप जायसवाल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि नियमों के विषय में मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश की आम जनता और इच्छुक व्यवसायियों से सुझाव बुलाये जाने पर भारी संख्या में प्रदेश हित में सकरात्मक सुझाव प्राप्त हुए। कुल 408 सुझाव विभिन्न माध्यम से प्राप्त हुए। प्रत्येक सुझाव पर विचार-विमर्श करने के बाद सम्पूर्ण प्रक्रिया और खदानों के संचालन के नियमों को स्वीकृति दी गई है।
होशंगाबाद का आरक्षित मूल्य 96 करोड़

मंत्री प्रदीप जायसवाल ने बताया कि प्रदेश के 43 जिलों में रेत खदानें पायी जाती हैं। इनमें शत-प्रतिशत सर्वेक्षण कर मात्रा का आंकलन विभाग द्वारा किया गया है। जिलावार समूह बनाये गये हैं। सबसे बड़ा समूह होशंगाबाद जिले का है, जिसका आरक्षित मूल्य 96 करोड़ रूपये होगा। कुल पाँच जिले 25 करोड़ रूपये या उससे अधिक के आरक्षित मूल्य के हैं तथा 23 जिले दस करोड़ रूपये या उससे कम आरक्षित मूल्य के रखे गये हैं।
जमा करनी होगी 25 प्रतिशत सुरक्षा निधि

निविदाओं की कार्यवाही और रेत खदानों का संचालन मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम द्वारा भारत सरकार के एनआईसी के निविदा पोर्टल के माध्यम से किया जायेगा। निविदा में भाग लेने के लिये आरक्षित मूल्य का 25 प्रतिशत सुरक्षा निधि के रूप में जमा कराना आवश्यक है। सफल वैधानिक स्वीकृतियाँ और अनुमतियाँ प्राप्त करना ठेकेदार का उत्तरदायित्व है। नये नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतें, जिनमें ये खदानें स्थित हैं, को पहले से बढ़कर स्थानीय विकास की राशि प्राप्त होगी। जिले को भी डीएमएफ अंतर्गत स्थानीय विकास की राशि प्राप्त होगी। कुम्हार और परम्परागत स्थानीय शिल्पकारों को पूर्व की भाँति छूट रहेगी। स्थानीय निवासियों को रोजगार देना अनिवार्य है। नर्मदा नदी पर स्थित खदानों में मशीनों से खनन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा।
पुराने ठेकेदार कर सकेंगे खनन

प्रमुख सचिव, नीरज मण्डलोई ने बताया कि निविदा प्रकाशन के एक माह के अंदर निविदा प्रक्रिया पूर्ण की जायेगी। इसके बाद सफल ठेकेदार को विभिन्न वैधानिक अनुमतियाँ लेने में एक से दो माह का समय लग सकता है। इस अवधि में प्रदेश में रेत की सप्लाई निरंतर बनी रहे, इसलिये नियमों में व्यापक प्रावधान किए गए हैं। जिन ठेकेदारों के पास पुरानी नीलामी प्रक्रिया के अंतर्गत मार्च,2020 अथवा उसके बाद के अनुबंध है, वे भी अपनी निर्धारित अनुबंध अवधि तक खनन प्रक्रिया जारी रख सकते हैं। प्रदेश के समस्त भण्डारण लाईसेन्स स्थगित कर दिये गये हैं, जिनके द्वारा अपने-अपने भण्डार की जानकारी जिला कलेक्टर को दी जाने के बाद और उसका सत्यापन होने के बाद जिला कलेक्टर भण्डारण को खाली करने की अनुमति एवं समय-सीमा दे सकते हैं। जिन निजी भूमि की खदानों को विनिश्चित दिनांक तक पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त हो गई थी, वे भी सफल ठेकेदार के अनुबंध करने की दिनांक तक निजी भूमि की खदानों का संचालन कर सकते हैं।
प्रदेश के बाढ़ और अति-वर्षा प्रभावितों के लिये केन्द्र सरकार से माँगे 7154 करोड़, 60 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित, बाढ़ और आकाशीय बिजली से 674 लोगों की मौत
* प्रमुख सचिव राजस्व मनीष रस्तोगी ने केन्द्र को पत्र भेजकर किया आग्रह
भोपाल।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में अति-वर्षा और बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिये केन्द्र सरकार से 7154.28 करोड़ रुपये की सहायता राशि शीघ्र जारी करने का अनुरोध किया है। इस राशि में एनडीआरएफ मद से 6621.28 करोड़ रुपये केन्द्रीय सहायता राशि और एसडीआरएफ से इस वर्ष की दूसरी किश्त की राशि 533 करोड़ रुपये शामिल है।
प्रदेश के प्रमुख सचिव, राजस्व मनीष रस्तोगी ने हाल में केन्द्र को भेजे प्रस्ताव मे कहा है कि प्रदेश के लिए राज्य आपदा प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2019-20 के लिए 1066 करोड़ रूपये स्वीकृत हैं। इसमें से सितम्बर मध्य तक 362 करोड़ रूपये की राशि अन्य प्राकृतिक आपदाओं, ओला-पाला तथा राहत वितरण में खर्च की गई। वित्तीय वर्ष 2019 में केन्द्रांश के अंतर्गत 247 करोड़ की पहली किश्त जारी की गई, जिसमें पिछले वर्ष 2018-19 में दी गई 152 करोड़ रूपये की अतिरिक्त केन्द्रांश राशि का समायोजन है। अत: वर्ष 2019 में प्रदेश में अब तक एस.डी.आर.एफ में 285.50 करोड़ की राशि ही उपलब्ध है।
55 हजार मकान हुए क्षतिग्रस्त

प्रदेश के राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश के 52 में से 39 जिलों में अतिवृष्टि और बाढ़ से बहुत अधिक क्षति हुई है। राज्य में जून से सितंबर माह के बीच हुई वर्षा से लगभग 60 लाख 47 हजार हेक्टेयर क्षेत्र की 16 हजार 270 करोड़ रूपये की फसल प्रभावित हुई है। इसमें लगभग 53 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रतिशत तक फसल क्षतिग्रस्त हुई है। प्रदेश में अति-वृष्टि से क्षतिग्रस्त मकानों में 55 हजार 372 पक्का-कच्चे मकान, 4 हजार 98 पक्के मकान तथा 55 हजार 267 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे मकान शामिल हैं। इसी क्रम में 3 हजार 649 झोपड़ियाँ और 3 हजार 274 पशु शेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
प्रदेश में बाढ़ और आकाशीय बिजली से 674 लोगों की मृत्यु हुई, 18 लोग शारीरिक अपंगता के शिकार हुए तथा तीन लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। लगभग 1515 दुधारू पशु, 373 भारवाही पशु तथा 3 हजार 270 मुर्गियों की क्षति हुई है।
सार्वजनिक संपत्तियों को हुआ नुकसान

राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश में अति-वृष्टि से सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की राशि 2285 करोड़ रूपये आँकी गई है। फसलों की कुल क्षति का अनुमान लगभग 16 हजार 270 करोड़ रूपये है तथा फसलों के नुकसान के लिए मांगी गई सहायता राशि तीन हजार 742 करोड़ रूपये है। इसी प्रकार मकान की क्षति, लोगों और पशुओं की मृत्यु एवं अपंगता के लिए 579.96 करोड़ रूपये, रेस्क्यू आपरेशन के लिए 10.02 करोड़ रूपये, राहत शिविरों पर एक करोड़ 75 लाख रूपये, खाद्यान्न और मिट्टी तेल के नुकसान पर एक करोड़ 67 लाख रूपये की सहायता राशि अनुमानित है।
नातिन की शादी के लिए रुपए जुटाने बुजुर्ग किसान कर रहा था गांजा की खेती, पुलिस ने छापामार कार्रवाई कर जब्त किए गांजा के 653 पेड़

* घर के पीछे चारदीवारी के अंदर हो रही थी नशे की खेती
* पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम इमलाहट का मामला
* पुलिस द्वारा जब्त किया 9 लाख रूपए मूल्य का हरा गांजा
पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के धरमपुर थाना की पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर इमलाहट ग्राम में कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में हरा गांजा जब्त किया है। ग्राम इमलाहट निवासी वृद्ध रामकिशोर लोध पिता वृंदावन लोध 60 वर्ष अपने घर के पीछे चारदीवारी के अंदर कई माह से गांजा की खेती कर रहा था। इसकी भनक आस-पड़ोस के लोगों और स्थानीय ग्रामीणों को बुधवार की सुबह उस समय लगी जब धरमपुर थाना प्रभारी एम.डी. शाहिद के नेतृत्व में पुलिस टीम के द्वारा छापामार कार्रवाई की गई। पुलिस ने मौके से गांजा के 653 पेड़ जब्त किए है। जिनका वजन 2 क्विंटल 18 किलोग्राम और अनुमानित बाजार मूल्य 8 लाख 72 हजार रुपए बताया जा रहा है।

धरमपुर थाना प्रभारी एम.डी. शाहिद ने बताया कि वृद्ध रामकिशोर लोध अपने घर के पीछे करीब आधा बीघा भूमि पर गांजा की खेती कर रहा था। मुखबिर से जब इस सम्बंध में सूचना मिली तो वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी गई। गोपनीय तरीके से सूचना की तस्दीक करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में बुधवार 02 अक्टूबर को ग्राम इमलाहट निवासी रामकिशोर लोध के घर पर छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया गया। जिस स्थान पर गांजे की फसल उगाई गई जा रही थी वहाँ चारों ओर से पत्थर की ऊँची बाउण्ड्री बॉल निर्मित होने की वजह से शायद किसी को अंदर चल रही नशे की खेती की भनक नहीं लग सकी। इसलिए आज जब रामकिशोर लोध के घर से इतनी बड़ी मात्रा में हरा गांजा पकड़ा गया तो उसके पड़ोसी भी हैरान रह गए।जब्तशुदा गांजे के पेड़ों की लम्बाई साढ़े चार फिट से लेकर साढ़े सात फिट तक है।

गिरफ्तार वृद्ध रामकिशोर लोध ने पुलिस की पूँछतांछ में बगैर किसी लाग लपेट के अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसे अपनी नातिन की शादी करने के लिए रुपयों की आवश्यकता है, रुपयों के इंतजाम के लिए उसने गांजा की खेती की है। इसकी बिक्री से जो राशि मिलती उससे नातिन का विवाह करने की उसकी योजना थी। धरमपुर थाना पुलिस ने आरोपी वृद्ध के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले को जांच में लिया है। धरमपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की प्रभावी रोकथाम के उद्देश्य से इसे पुलिस की महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। गांजे की खेती को पकड़ने में एएसआई बी. एल. पाण्डेय पुलिस चौकी प्रभारी खोरा, एएसआई जयराम तिवारी, आरक्षक प्रदीप हरदेनिया, गजेन्द्र सिंह, अनिल पटेल, वन्दना दोहरे आदि पुलिसकर्मियों की रही सराहनीय भूमिका रही।
मच्छरों को पनपने से रोकेगी लार्वाभक्षी मछली, जिले के 82 जल स्रोतों में 1 लाख गैम्बूसिया मछली डाली

* मलेरिया विभाग ने की मच्छरों के नियंत्रण की जैविक पहल
* जिले में मच्छर जनित बीमारियों का साल दर साल बढ़ रहा है ग्राफ
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में जल स्रोतों में जलभराव के चलते उनमें मच्छरों के लार्वा तेजी से पनपने लगते हैं जिससे मच्छर जनित बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके मद्देनजर पन्ना जिले के मलेरिया विभाग ने मच्छरों की प्रभावी रोकथाम के उद्देश्य जलस्रोतों में लार्वाभक्षी मछली का संचयन शुरू कर दिया है। जिले के पाँच विकासखण्डों के 82 जल स्रोतों में अब तक 1 लाख गैम्बूसिया मछली डाली जा चुकी है। जिला मलेरिया अधिकारी हरिमोहन रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना जिले में 1 लाख लार्वाभक्षी मछली गैम्बूसिया की सप्लाई कटनी के सुर्खी मछली पालन केन्द्र से दिनांक 24 एवं 27 सितम्बर को की गई। दिनांक 24 सितम्बर को 60,000 गैम्बूसिया मछली को शाहनगर के 20 पवई के 14 एवं गुनौर ब्लॉक के 17 तालाबों में डाला गया। दिनांक 27 सितम्बर को प्राप्त 40,000 गैम्बूसिया मछली को पन्ना के 16 एवं अजयगढ़ ब्लॉक के 15 तालाबों में छोड़ा गया है।
22 दिनों में बढ़ा लेती है अपनी तादाद

जिला मलेरिया अधिकारी पन्ना हरिमोहन रावत ने गैम्बूसिया मछली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मछली मच्छर के लार्वा खाकर मलेरिया नियंत्रण में विशेष सहयोग प्रदान करती है। गैम्बूसिया मछली मात्र 22 दिन में प्रजनन कर अपनी संख्या को बढ़ा लेती है। आपने बताया कि चूकिं मच्छर के लार्वा भी पानी की सतह पर सांस लेने के लिए आते यह और गैम्बूसिया मछली जल सतह के नजदीक तैरती है शरीर से हल्की और लगभग 3 इंच लंबाई की यह छोटी सी मछली बड़े पैमाने पर लार्वा भक्षण कर जल स्त्रोतों में मच्छर को पनपने से रोकती है।
जिला मलेरिया अधिकारी हरिमोहन रावत ने बताया कि मलेरिया कार्यालय पन्ना के द्वारा गैम्बूसिया मछली जिले के जिन स्थानों के जल स्रोतों डाली गई है उनमें मुख्य रूप से – पटनाकला, जिजगांव, गढ़ोंखर, पगरा, महेवा, गुनौर, परसवारा, बिसानी, देवरा, कचोरी, उमरिया डूडी़, सुगरहा, लमतरा, इमलिया, गिरवारा, पुरैना, रैगढ़, पटिया, सिलगी, इटवां, डडवारियां, ककरहा, जिगधा, बड़ागांव, रैहूंटा, महेड़ा, हथकुरी, पवई नगर, कमता, किशनगढ़, करही, अजयगढ़, बहिरवारा एवं पिष्टा ग्राम शामिल है। जिला मलेरिया अधिकारी श्री रावत ने समस्त संबंधित ग्रामवासियों से अपील की है कि अभी लगभग 1 माह तक छोटी गैम्बूसिया मछली का पूरी तरह संरक्षण करें ताकि ये मछलियां प्रजनन कर अपनी संख्या बढ़ा सकें और जिले में मच्छरों को नियंत्रित करने की यह जैविक पहल सफल हो सके।
गरीबों को निःशुल्क बाँटी मच्छरदानी
जल स्रोतों में सभी तरह के मच्छरों के लार्वा खाकर उन्हें पैदा होने से पहले ही ख़त्म करने वाली गैम्बूसिया मछली वाकई कमाल की है। पन्ना जिले में मच्छर जनित बीमारियों के साल दर साल बढ़ते ग्राफ को देखते हुए मलेरिया विभाग द्वारा मच्छरों की रोकथाम के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। चिन्हिंत स्थानों पर मच्छर नाशक दवा के छिड़काव के अलावा वर्षाकाल की समाप्ति पर जल स्रोतों में गैम्बूसिया मछली का संचयन कराना आदि शामिल है। लोगों को मच्छरों के डंक से बचाने के लिए कुछ माह पूर्व मलेरिया विभाग के द्वारा मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों के माध्यम से गाँव-गाँव बड़ी तादाद में मेडिकेटेड मच्छरदानी का निःशुल्क वितरण भी कराया गया है। इसके अलावा लोगों को मच्छर जनित बीमारियों की जानकारी देकर उनसे बचाव हेतु जागरूक किया जा रहा है।
वकीलों ने किया राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार, दलालों से नोटशीट व कार्यवाही विवरण लिखवाने का विरोध, SDM को जमकर सुनाई खरी-खोटी
* दलालों को जूते मारने और भ्रष्ट तहसीलदार मुर्दाबाद के लगाए नारे
* अधिवक्ता संघ अजयगढ़ ने पन्ना कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में विकासखण्ड मुख्यालय अजयगढ़ में स्थित राजस्व न्यायालय निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी तरीके से काम नहीं कर रहे है। इनमें विचाराधीन प्रकरणों की गोपनीयता को भी जानबूझकर भंग किया जा रहा है। अराजकता का आलम यह है कि अजयगढ़ के तीनों राजस्व न्यायालयों में सक्रिय दलाल बाकायदा लिपिकों के बगल में बैठकर नोटशीट लिखने, कार्यवाही विवरण दर्ज करने सहित सभी तरह के न्यायालीन-कार्यालयीन कार्य कर रहे है। अनाधिकृत व्यक्तियों की इस हद तक दखलंदाज़ी के परिणामस्वरूप क्षेत्र के आम लोगों को सस्ता-सुलभ न्याय मिलना मुश्किल हो रहा है। यह गंभीर आरोप अजयगढ़ के अधिवक्ता संघ ने लगाए है। स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार के कार्यालय-न्यायालय में दलालों के दखल पर अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से कड़ी आपत्ती दर्ज कराते हुए गुरुवार 26 सितम्बर से इन तीनों ही न्यायालयों का अनिश्चितकाल तक के लिए बहिष्कार कर दिया है। इस सम्बंध पन्ना कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए अधिवक्ता संघ ने ऐलान किया है कि व्यवस्था में सुधार होने तक अजयगढ़ के तीनों राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार जारी रहेगा।
समय रहते नहीं की कार्यवाही

गौरतलब हो कि अधिवक्ता संघ अजयगढ़ ने एसडीम एस.के. गुप्ता को 19 सितम्बर को एक ज्ञापन सौंपा था। जिसमें यह माँग की गई थी कि स्थानीय राजस्व न्यायालयों में रीडरों के बगल से प्रायवेट व्यक्ति बैठकर न्यायालीन कार्यवाही में सीधे तौर पर दखल दे रहे है। इन कथित दलालों के द्वारा बाकायदा न्यायालय की आर्डरशीट, नोटशीट लेखन सहित अन्य कार्य किए जा रहे है। अनाधिकृत व्यक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए अधिवक्ता संघ ने राजस्व न्यायालयों से उन्हें तत्काल हटाए जाने की मांग की गई। वकीलों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था बनाने इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश गर्ग के विरुद्ध पटवारी नलिनी रैकवार द्वारा की गई झूठी शिकायत को वापिस लेने की मांग शामिल थी।
एसडीएम अजयगढ़ द्वारा समय रहते ज्ञापन के बिंदुओं पर कार्यवाही नहीं की गई। जबकि अधिवक्ता संघ अजयगढ़ ने मांगें पूरी न होने की सूरत में स्थानीय राजस्व न्यायालयों के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। जिम्मेदारों की ओर इस गतिरोध को रोकने के लिए समय रहते कोई ठोस पहल नहीं की गई। इस उदासीनता बरतने का नतीजा अधिवक्ताओं द्वारा अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों का बहिष्कार करने के रूप में सामने आया है। जिसका खामियाजा अब निर्दोष पक्षकारों को भुगतना पड़ेगा।
जमकर की गई नारेबाजी
दो दिन पूर्व कलेक्टर पन्ना के नाम पर अधिवक्ता संघ अजयगढ़ की ओर से एसडीम एस. के. गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें उल्लेख किया गया है कि अधिवक्ताओं ने स्थानीय राजस्व न्यायालयों- एसडीएम अजयगढ़, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के कोर्ट के कार्य से स्वयं को अनिश्चितकाल तक के लिए विरत रखने का निर्णय लिया है। पूर्व में दिए गए ज्ञापन का जब तक निराकरण नहीं हो जाता तब तक हमारा बहिष्कार जारी रहेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में अधिवक्ता संघ अजयगढ़ के अध्यक्ष रामपाल यादव, उपाध्यक्ष अरुण कुमार शुक्ला, सचिव संजय शर्मा, प्रेम कुमार पांडेय, बाबूराम तिवारी, चतुरेश सेन, राजेश पुष्पक, सतीश खरे, अरविंद कश्यप सहित अन्य अधिवक्ता शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि एसडीम को ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ताओं ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। साथ ही भ्रष्ट प्रशासन मुर्दाबाद, भ्रष्ट तहसीलदार मुर्दाबाद और राजस्व के दलालों को जूते मारने सरीकी तीखी नारेबाजी की गई। इससे अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों में दलालों के दखल को लेकर अधिवक्ताओं में व्याप्त आक्रोश व असंतोष का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। स्थिति इस हद ख़राब हो चुकी है कि राजस्व न्यायालयों की कार्यवाही में दलालों के हस्तक्षेप को रोकने के लिए अधिवक्ताओं को न्यायालयों का बहिष्कार करने के लिए विवश होना पड़ा है।
लेकिन, इतना सबकुछ होने के बाद भी अजयगढ़ के राजस्व कार्यालयों को दलालों के चंगुल से आजाद कराने के लिए जिम्मेदारों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। विचारणीय प्रश्न यह है कि अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों को अनाधिकृत व्यक्ति कथित दलाल यदि चलाएंगे तो जनसामान्य को वहाँ न्याय कैसे मिलेगा। इन दलालों को किसी तरह की वेतन अथवा मानदेय भुगतान का सरकारी प्रावधान तो है नहीं है और बिना किसी आर्थिक लाभ के कोई नियमित रूप से कार्य करेगा नहीं ! इससे साफ़ जाहिर है कि अंदरख़ाने कहीं कुछ बहुत गड़बड़ है।
इनका कहना –
“अधिवक्ताओं ने अजयगढ़ के राजस्व न्यायालयों में बाहरी व्यक्तियों के बैठने पर रोक लगाने, महिला पटवारी द्वारा की गई शिकायत एवं अपनी बैठक व्यवस्था के संबंध में ज्ञापन सौंपा है। आपस मे विचार-विमर्श कर इन समस्याओं का निराकरण कर लिया जाएगा। राजस्व न्यायालयों में मेरे द्वारा देखा गया कोई बाहरी व्यक्ति मुझे बैठा नहीं मिला।”
– एस. के. गुप्ता, एडीएम अजयगढ़।
“अभी मुझे अधिवक्ताओं का ज्ञापन नहीं मिला है, अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। लोगों को सस्ता व सुलभ न्याय दिलाने के लिए शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है।”
– कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर पन्ना।
पन्ना जिले के एक ही परिवार के पाँच मजदूरों की बेरहमी से हत्या, हरियाणा के झज्जर शहर में हुई दिल दहला देने वाली वारदात
* मजदूरी करने झज्जर गए गरीब श्रमिकों को मिली मौत
* मृतकों के गाँव में पसरा मातम, जिले में शोक की लहर
* वारदात के बाद से पीड़ित परिजनों का है रो-रोकर बुरा हाल
* पुलिस को हत्या की वारदात में किसी जानकार का हाथ होने का संदेह
* काम के आभाव में जिले से प्रतिवर्ष पलायन करते है हजारों श्रमिक परिवार
पन्ना। (www.radarnews.in) हरियाणा के झज्जर शहर में पन्ना जिले के एक ही परिवार के पाँच सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। वारदात के समय सभी लोग झज्जर के सेक्टर 6 में स्थित निर्माणाधीन मकान की पहली मंजिल के अलग-अलग कमरों में गहरी नींद में सो रहे थे। पाँचों लोगों के सिर में प्रहार कर उनकी हत्या की गई है। मृतकों में शामिल 3 मजदूर जिले के पवई थाना क्षेत्र अन्तर्ग ग्राम सिमरी के और दो मजदूर अमानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम धग्धा के निवासी थे। मृतकों की पहचान हाकम 40 वर्ष, उसकी पत्नी मैदाबाई 35 वर्ष, हाकम का जीजा हाका 45 वर्ष, उसका पुत्र बहादुर 25 वर्ष और उसकी बेटी 18 वर्ष के रूप में हुई है। इस जघन्य वारदात की खबर आने के बाद से ही मृतकों के गाँव में मातम का माहौल है। अपनों के गम में पीड़ित परिजनों का है रो-रोकर बुरा हाल है। मृतकों के घरों में कोहराम मचा है। उनके परिजनों की आँखों से आँसू हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। उधर, इस दुखद खबर के फैलने के बाद से जिले भर में शोक की लहर व्याप्त है।
वारदात में जानकार का हाथ होने का संदेह
उद्योग विहीन पन्ना जिले में काम के आभाव में और मनरेगा का सही तरीके से क्रियान्वयन न होने के कारण जीविकोपार्जन के लिए एक दलित परिवार के पाँच सदस्य कुछ समय पूर्व मजदूरी करने लिए हरियाणा के झज्जर शहर गए थे। वहाँ के सेक्टर-6 में इमलोटा निवासी विनोद कुमार का मकान है जिसके निर्माण का ठेका रामदर्शन ठेकेदार ने लिया था। रामदर्शन के यहाँ मजदूरी करने वाले पन्ना जिले के श्रमिक हाकम 40 वर्ष, उसकी पत्नी मैदाबाई 35 वर्ष, हाकम का जीजा हाका 45 वर्ष, उसका पुत्र बहादुर 25 वर्ष और उसकी 18 वर्षीय बेटी इस मकान के निर्माण में पिछले डेढ़ माह से काम कर रहे थे। सोमवार-मंगलवार की देर रात इसी निर्माणाधीन मकान की पहली मंजिल में बने कमरों में गहरी नींद सो रहे इन मजदूरों के ऊपर किसी ने धारदार एवं वजनदार हथियार से प्रहार कर उनकी निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी। ऐसा माना जा रहा है कि दिल दहला देने वाली इस वारदात को किसी जानकार ने ही अंजाम दिया है। हत्या के पूर्व श्रमिकों को नशीला पदार्थ खिलाने की आशंका भी जताई जा रही है।
इस तरह हुआ खुलासा

मंगलवार को पन्ना से नीरज ने अपने भाई हाकम को फोन किया। कई बार कॉल करने के बाद भी परिवार के किसी भी सदस्य ने मोबाइल फोन रिसीव नहीं किया। इससे चिंतित और परेशान नीरज ने झज्जर में ही रह रहे केशव को फोन कर अपने भाई के पास भेजा। केशव जब गुड़गांव रोड स्थित सेक्टर-6 के निर्माणाधीन मकान में पहुँचा तो वहाँ संन्नाटा पसरा था। पहली मंजिल में बने कमरों में जाकर देखा तो केशव के होश उड़ गए। कमरों अंदर उसके परचितों के शव लहूलुहान स्थिति में पड़े थे। मंगलवार 17 सितम्बर की देर शाम करीब 8 बजे स्थनीय पुलिस को इस सनसनीखेज सामूहिक हत्याकांड की सूचना दी गई। मंगलवार को विश्वकर्मा जयंती होने के चलते काम की छुट्टी थी इसलिए दिन के समय किसी को इस घटना की भनक नहीं लग सकी। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने अज्ञात कातिलों खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल इस हत्याकाण्ड की वजह पता नहीं चल सकी और अज्ञात कातिलों का भी कोई सुराग नहीं मिला है।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में पलायन की समस्या काफी गम्भीर हो चुकी है। जिले के उद्योग विहीन होने और मनरेगा में समय पर मजदूरी भुगतान न होने के कारण प्रतिवर्ष हजारों गरीब श्रमिक-खेतिहर मजदूर परिवार दो जून की रोटी के इंतजाम के लिए महानगरों में मजदूरी करने जाते हैं। पलायन सुरक्षित न होने के कारण श्रमिकों को पहले भी कई बार अपनी जान गंवानी पड़ी है या फिर वे धोखाधड़ी और शोषण का शिकार हुए है।
मध्यप्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ का कहर जारी, प्रभावितों को राहत पहुँचाने केन्द्र सरकार से तत्काल 30 हजार करोड़ रिलीज करने की माँग
* कई जिलों में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य जारी
* बाढ़ प्रभावितों को तत्परता से पहुँचाई जा रही राहत: मंत्री पी. सी. शर्मा
भोपाल। (www.radarnews.in) प्रदेश के जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति के संदर्भ में कहा है कि राज्य सरकार राहत एवं बचाव कार्यों पर अब तक 325 करोड़ रूपये व्यय कर चुकी है। राहत और बचाव कार्य के साथ ही प्रभावितों को राहत कार्य निरंतर जारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रशासनिक अमले और आपदा प्रबंधन एजेन्सियों ने अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिये पूरी मुस्तैदी से काम किया है और कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँधी सागर बाँध से भी न्यूनतम समय में संबंधित शासकीय अमले और एजेन्सियों ने बाँध से पानी निकालने का काम किया।
बाढ़ की स्थिति पर राजनीति नहीं
जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश प्रदेश में अतिवर्षा और बाढ़ की स्थिति पर किसी तरह की राजनीति नहीं कर रहा है। प्रदेश सरकार का पूरा ध्यान प्रदेश के बाढ़ प्रभावितों की सुरक्षा और उन्हें राहत देने पर केन्द्रित है। श्री शर्मा ने सरदार सरोवर को 15 अक्टूबर के निर्धारित समय के काफी पहले ही सरदार सरोवर को उच्चतम जल संग्रहण क्षमता तक भरने के गुजरात सरकार के कृत्य को मध्यप्रदेश की जनता के साथ ज्यादती बताया।
केन्द्र तत्काल रिलीज करे 30 हजार करोड़

जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार केन्द्र सरकार से अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति से हुए नुकसान और प्रभावितों को राहत पहुँचाने के लिये अधिकतम सहायता का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रदेश से निर्वाचित केन्द्रीय मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिख रहे हैं, जबकि उन्हें प्रधानमंत्री को अधिकतम सहायता देने के लिये पत्र लिखना चाहिए। श्री शर्मा ने माँग की है कि प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ से हुई जन, पशु, फसल और भौतिक अधोसंरचनाओं को भारी पैमाने पर हुई क्षति पर 11 हजार 881 करोड़ की सहायता तत्काल मुहैया कराना चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा रोके गये 10 हजार करोड़ और गुजरात से बकाया 10 हजार करोड़ रूपये भी केन्द्र सरकार जारी करे।
मुख्यमंत्री द्वारा राउंड द क्लॉक मॉनीटरिंग
जनसम्पर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा प्रदेश के उच्च स्तरीय प्रशासनिक अमले के साथ निरंतर अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति की राउंड द क्लॉक मॉनीटरिंग की गई और की जा रही है। मुख्यमंत्री के कुशल और कल्पनाशील मार्गदर्शन में अति वर्षा और बाढ़ प्रभावित लगभग 50 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।
केन्द्रीय जल आयोग दल ने की प्रशंसा
जनसम्पर्क मंत्री श्री शर्मा ने बताया है कि गाँधी सागर बाँध का जायजा लेने आये केन्द्रीय जल आयोग के दल ने भी मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग की तारीफ, खासतौर से गाँधी सागर बाँध से समय पर जल निकासी, की तारीफ की है। केन्द्रीय दल ने सही समय पर सुविचारित कदम उठाये जाने के लिये जल संसाधन विभाग के अमले और संबंधित एजेन्सियों की प्रशंसा की है।
अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति : एक नजर में

मध्यप्रदेश में एक जून 2019 से 17 सितंबर 2019 की अवधि में प्रदेश में 1192.2 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी है। यह एल.पी.ए ( दीर्घकालीन वार्षिक वर्षा) के इस अवधि के औसत से 33 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश के 13 जिलों में (सभी पश्चिमी और मध्य क्षेत्र) एल.पी.ए. से 60 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। कुल 3 जिलों मंदसौर, आगर, नीमच में उनके एल.पी.ए. से दोगुनी वर्षा दर्ज की गई है।
प्रदेश के राजगढ़, रायसेन, विदिशा, खण्डवा, रतलाम, हरदा, मंडला, बालाघाट, सिवनी, सागर, मंदसौर, उज्जैन, आगर, नीमच, भोपाल, शाजापुर, नरसिंहपुर, देवास, मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, निवाड़ी, सीहोर और अशोकनगर में अतिवर्षा से गंभीर स्थिति पैदा हुई है। इन जिलों में अति वर्षा से विभिन्न बांधों/जलाशयों से पानी की निकासी अथवा नदियों के बैकवाटर से ज्यादा पानी के प्रवाह से स्थिति गंभीर हुई है। अकेले मंदसौर जिले में गांधी सागर बांध में 16 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह हुआ, जबकि बांध का अधिकतम जल निकासी स्तर (आउट फ्लो) 6.6 लाख क्यूसेक पानी है। इस स्थिति के उत्पन्न होने से बांध के सभी 19 गेट खोले गये हैं। इसके अलावा इंदौर संभाग के बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिले सरदार सरोवर परियोजना के अप्रत्याशित बढ़े हुए जल-स्तर से प्रभावित हुए हैं।
प्रदेश के 28 बड़े बांधों में से 17 बांध के गेट वर्तमान में खुले हुए हैं। प्रदेश के अधिकांश जलाशय अपनी जल संग्रहण क्षमता से सौ फीसदी जल के साथ पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल) पर है। प्रदेश की अधिकांश नदियाँ पिछले दिनों से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है और अभी भी खतरे के निशान से ऊपर ही बह रही है। प्रदेश में आने वाले समय में अब अधिक वर्षा की स्थिति नहीं बन रही है।
प्रदेश के कुल 52 जिलों में से 36 अति वर्षा से प्रभावित हुए हैं। तहसील स्तर पर देखा जाये तो प्रदेश की 385 ग्रामीण तहसीलों में से 186 ग्रामीण तहसील अति वर्षा से प्रभावित हुई है। इसी तरह प्रदेश के 52 हजार गाँवों में से लगभग 8000 गाँव अति वर्षा से प्रभावित हुए हैं।
राहत और बचाव कार्य

अति वर्षा और बाढ़ से हुई जनहानि और पशुहानि के प्रकरणों में एस.डी.आर.एफ. के मानदण्डों से अनुरूप राहत राशि का वितरण तत्काल किया जा रहा है। अति वर्षा और बाढ़ प्रभावित इलाकों से 50 हजार से ज्यादा लोगों को एन.डी.आर.एफ., एस.डी.ई.आर.एफ, होमगार्ड और सेना की मदद से सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। होमगार्ड द्वारा प्रदेश में 168 रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित कर 305 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। एस.डी.ई.आर.एफ ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर 5053 लोगों को रेस्क्यू किया है। एन.डी.आर.एफ ने 18 रेस्क्यू ऑपरेशन संचालित कर 235 लोगों को रेस्क्यू किया है।
अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति वाले तीन जिलों भिण्ड, श्योपुर और मुरैना में राहत और बचाव कार्यों में 151 सेना के जवान तैनात किये गये हैं।
केन्द्रीय दल 19 से दो दिन के प्रदेश के दौरे पर
प्रदेश में अति वृष्टि एवं बाढ़ से हुई क्षति का अवलोकन करने के लिये केन्द्रीय अंतर मंत्रालयीन दल दो दिवसीय दौरे पर कल 19 सितम्बर को भोपाल आएगा। दल का प्रदेश प्रवास 19 एवं 20 सितम्बर तक रहेगा। दल दो हिस्सों में प्रदेश के अतिवृष्टि और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा।
प्रथम दल दौरे के प्रथम दिन 19 सितंबर को विदिशा एवं रायसेन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगा। दूसरे दिन यह दल राजगढ़ जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण के बाद भोपाल लौटेगा।
इसी प्रकार दूसरा अध्ययन दल 19 सितम्बर को स्टेट हैंगर से हेलीकॉप्टर द्वारा सीधे मंदसौर के लिये रवाना होगा। मंदसौर में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण के बाद दूसरे दिन यह दल आगर-मालवा जिले में स्थिति का आकलन करेगा। यह दल आगर-मालवा से दोपहर बाद भोपाल के लिये रवाना होगा।
दोनों दल 20 सितंबर को अपरान्ह 4 बजे मंत्रालय में प्रमुख सचिव राजस्व के साथ बैठक में शामिल होंगे।
प्रदेश में वर्तमान में 109 राहत शिविर संचालित किये जा रहे हैं। इन शिविरों में एक दिन से लेकर 7 दिन की अवधि के लिये 28 हजार 445 लोगों को रखा गया। वर्तमान में इनमें से 66 राहत शिविर सिर्फ 5 जिलों, नीमच, मंदसौर, भिण्ड, राजगढ़ और मुरैना जिलों में संचालित है। आज दिनांक की स्थिति में राहत शिविरों में 18 हजार 470 लोग रह रहे हैं। प्रदेश में अति वर्षा और बाढ़ से प्रभावित 242 गाँवों को पूर्णत: या आंशिक तौर पर खाली कराया गया है। कुल 530 जनहानि हुई है। इनमें से 225 जनहानि बाढ़ और बिजली गिरने से होना दर्ज हुआ है। इसी तरह 901 बड़े और 531 छोटे पशुओं को मिलाकर अब तक कुल 1432 पशुहानि दर्ज की गई है।
फसलों और भौतिक अधोसंरचना को हानि










