गरीब श्रमिकों की दिवाली हो सकती है फीकी, SDO की मनमानी और लचर व्यवस्था के कारण अटका लाखों रूपए का मजदूरी भुगतान

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फाइल फोटो।

* डीएफओ के आदेशों की खुलकर अवहेलना कर रहे एसडीओ

* पन्ना जिले के चर्चित दक्षिण वन मण्डल में व्याप्त है अराजकता

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के जंगल विभाग में जंगल राज व्याप्त है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। निहित स्वार्थों की पूर्ती में लगे विभागीय अफसर खुलकर मनमानी और भ्रष्टाचार कर रहे है। पन्ना के सामान्य और संरक्षित वन मण्डलों के अन्तर्गत वन अपराधों का ग्राफ चिंताजनक तेजी से बढ़ रहा। पिछले कुछ सालों में यहां वन्यजीवों के शिकार, अवैध उत्खनन, अवैध कटाई तथा वन क्षेत्र में अतिक्रमण के कई हैरान करने वाले मामले सामने आए है। वन विभाग में भ्रष्टाचार और अराजकता हावी होने से आंतरिक हालात लगातार खराब हो रहे है। जिसका सीधा दुष्परिणाम बहुमूल्य वन सम्पदा के विनाश के रूप में सामने आ रहा है। प्रदेश में करीब 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन होने से उम्मीद जगी थी कि पन्ना के वन विभाग में फैली अंधेरगर्दी पर लगाम लगेगी लेकिन सरकार के बदलने के करीब साल भर बाद भी यहां के सूरत-ए-हाल नहीं बदले। जिले के दक्षिण वन मण्डल अन्तर्गत आने वाले 3 वन परिक्षेत्रों के सैकड़ों गरीब श्रमिकों की लाखों रूपए मजदूरी का भुगतान लंबित होने का मामला इसका उदाहरण मात्र है। उप मण्डलाधिकारी पवई की कथित मनमानी के चलते वन विभाग के श्रमिकों का लगभग 23 लाख रूपए का मजदूरी भुगतान अटका हुआ है।
इस मामले पर डीएफओ और एसडीओ पवई के बीच अब तक जो भी पत्राचार हुआ है उसे दृष्टिगत रखते हुये फिलहाल मजदूरी का भुगतान हो पाना संभव प्रतीत नहीं होता। ऐसी स्थिति में निर्दोष मेहनतकश गरीब श्रमिक परिवारों की दीपावली फीकी पड़ सकती है। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग के उप सचिव अजय चौबे के हस्ताक्षर से दिनांक 22 अक्टूबर 2019 को वेतन आहरण के संबंध जारी पत्र में समस्त विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया गया है कि माह अक्टूबर 2019 के वेतन, पेंशन एवं मजदूरी का भुगतान दिनांक 24-25 अक्टूबर को किया जाए। इसके पीछे शासन की मंशा स्पष्ट है कि हर कोई दीपावली का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मना सके। इसमें रुपयों की तंगी किसी के भी आड़े न आए। लेकिन दक्षिण वन मण्डल पन्ना के असंवेदनशील अधिकारियों को ना तो श्रमिकों की दीपावली की चिंता है और ना ही वे शासन के निर्देशों पर अमल को लेकर संजीदा है।

काउंटर साईन ना करने से अटना भुगतान

दक्षिण वन मण्डल पन्ना के डीएफओ मीना कुमारी मिश्रा ने दिनांक 17 अक्टूबर 2019 को उप वनमण्डलाधिकारी पवई आर के अवधिया को एक पत्र जारी कर उनकी स्वेच्छाचारिता पूर्ण कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताते हुये वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस पत्र में उल्लेख है कि वन परिक्षेत्र रैपुरा, पवई, मोहन्द्रा अन्तर्गत कराये गये कार्यो के प्रमाणकों (बिलों) को सत्यापन कर नहीं भेजा गया। काउन्टर साईन प्रणाली के अन्तर्गत प्रमाणकों के सत्यापन के संबंध में आपको बार-बार इस कार्यालय के द्वारा निर्देशित किये जाने के बावजूद भी आपके द्वारा वरिष्ठों के निर्देशों की अवहेलना करते हुये वानकी कार्यों में कराये जाने वाले कार्यों के भुगतान में विलंब की स्थिति निर्मित की जा रही है। डीएफओ ने इस कृत्य को गंभीर लापरवाही और वरिष्ठों के आदेश की अवहेलना करार देते हुए उप वन मण्डलाधिकारी पवई को प्रमाणक मूलतः वापस भेजकर काउन्टर साईन प्रणाली के तहत निर्धारित प्रमाण-पत्र (सत्यापन) की सील अंकित कर एवं हस्ताक्षर कर पुनः प्रमाणक भेजने के लिये निर्देशित किया। ताकि श्रमिकों का भुगतान किया जा सके। साथ ही प्रमाणक योजनावार तैयार कर श्रमिकों की एकजाई सूची भेजने के निर्देश दिये गए। लेकिन अब तक इन निर्देशों पर अमल नहीं हो पाया है। डीएफओ के इस पत्र से जाहिर है कि एसडीओ उनके आदेशों-निर्देशों को तनिक भी तवज्जो नहीं देते। इन हालात में प्रतिदिन के विभागीय कार्य किस तरह संपादित होते होंगे कहना मुश्किल पर समझना आसान है।

श्रमिकों में आक्रोश

सांकेतिक फोटो।
वन विभाग के श्रमिकों का मजदूरी भुगतान अटकने से वे ना सिर्फ परेशान है बल्कि विभागीय अधिकारियों के रवैये को लेकर उनमें खासा आक्रोश व्याप्त है। दीपावली जैसे बड़े त्यौहार से पहले मजदूरी भुगतान न होने के कारण श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों में निराशा साफ देखी जा रही है। एक ओर जहां अधिकांश लोगों ने दीपावली को हर्षोल्लास के साथ मनाने के लिये कई तरह की व्यवस्थायें कर रखी है वहीं वन विभाग के श्रमिकों की जेब खाली होने से वे मायूस है। दिहाड़ी मजदूरी पर परिवार का जीवकोपार्जन करने वाले श्रमिकों के लिये उनकी मजदूरी अटकना किसी त्रासदी से कम नहीं है। वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात का एहसास तक नहीं है कि उनकी मनमानी और लापरवाही के कारण श्रमिकों तथा उनके परिजनों को हर दिन किन मुश्किलों से जूझना पड़ रहा है। आमतौर पर शासन से लेकर कारोबारियों तक की यह कोशिश रहती है कि दीपावली के पूर्व सभी कर्मचारियों और श्रमिकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए ताकि वे भी त्यौहार अच्छी तरह से मना सकें। लेकिन दक्षिण वन मण्डल के असंवेदनशील अधिकारियों को श्रमिकों की दिवाली की चिंता नहीं है, बिना रूपयों के उनके घर कैसे रोशन होंगे और बच्चों को मिठाई व नये कपड़े कैसे मिल पाएंगे ? इस संबंध में जब पवई के उप वनमण्डलाधिकारी आर. के. अवधिया से बात की गई तो उन्होंने श्रमिकों के भुगतान लंबित होने के लिए रेंजरों को उत्तरदायी ठहराते हुए उन्हीं से जानकारी लेने की बात कहकर फोन काट दिया। एसडीओ के इस जबाब और रवैये से दीपावली के पूर्व श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान हो पाना संभव प्रतीत नहीं होता। क्योंकि वे अपनी गलती का सुधार कर समाधान निकालने के बजाए गेंद रेंजरों के पाले में डाल रहे हैं।

कहाँ कितना भुगतान लंबित

डीएफओ के द्वारा एसडीओ पवई को जारी पत्र।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दक्षिण वन मण्डल पन्ना के वन परिक्षेत्र रैपुरा अंतर्गत कार्य आयोजना के क्रियान्वयन की राशि 171976, 276300, 531320 रुपए इसी योजना की वन परिक्षेत्र मोहन्द्रा की राशि 166344 एवं पवई में 1171502 रुपए का श्रमिकों का भुगतान होना शेष है। विचारणीय बात यह है कि सिर्फ तीन रेंजों में करीब 23 लाख रुपए का मजदूरी भुगतान कई माह से अटका हुआ है। यदि दक्षिण वन मण्डल की शेष रेंजों में भी नजर दौड़ाई जाए तो लंबित मजदूरी राशि का आंकड़ा दोगुना हो सकता है। बाबजूद इसके श्रमिकों को उनके खून-पसीने की कमाई का भुगतान दीपावली के पूर्व सुनिश्चित कर शासन के निर्देशों पर अमल करने के बजाए डीएफओ मैडम इस बात को लेकर कहीं अधिक चिंतित हैं कि यह मामला मीडिया तक कैसे पहुँचा। दरअसल, विभागीय पत्राचार के लीक होने से अंदरूनी हालात की खबर मिलने के साथ-साथ लोगों को यह भी पता चलता है कि डीएफओ का अपने अधीनस्थों पर कितना नियंत्रण है ?

इनका कहना है –

“यह विभाग के अंदर की बात है-यह सब बाहर कैसे आ रही है, आप जिस भुगतान की बात कर रहे है वह प्रक्रिया में है। प्रमाणकों में सुधार कर उन्हें भेजने में कितना समय लगेगा ! उप वनमण्डलाधिकारी पवई को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित प्रक्रिया अनुसार प्रमाणक प्रस्तुत करें ताकि श्रमिकों का भुगतान किया जा सके। मैं इस संबंध में उनसे बात करती हूॅ।”

– मीना कुमारी मिश्रा, दक्षिण वन मण्डल पन्ना।