नचने गाँव में कब्र खोदकर नाबालिग बालिका गुड़िया (परिवर्तित नाम) का शव निकलवाते पुलिसकर्मी एवं मौके पर कार्रवाई को देखते ग्रामीणजन।
* संदिग्ध परिस्थियों में जलने से हुई थी मौत, पुलिस को नहीं दी गई जानकारी
* पिता ने परिजनों के साथ मिलकर गुपचुप तरीके से दफना दी थी लाश
* मृतिका के मामा की सूचना पर हरकत में आई पुलिस ने तत्परता से की कार्रवाई
* पिता पर पवित्र रिश्ते को कलंकित कर बेटी के साथ दरिंदगी और उसकी हत्या करने का आरोप
* पन्ना जिले के सलेहा थाना अंतर्गत समीपी ग्राम नचने का मामला
पन्ना/सलेहा (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में सलेहा थाना अंतर्गत ग्राम नचने में एक पिता पर अपनी बेटी की जघन्य हत्या कर उसकी लाश को गुपचुप तरीके से दफ़नाने का आरोप लगा है। सोमवार 16 सितम्बर को जबरदस्त तनाव और जिज्ञासा के बीच भारी पुलिस बल की मौजूदगी में एक कब्र को खोदकर उसके अंदर से 13 वर्षीय बालिका गुड़िया (परिवर्तित नाम) का जला हुआ शव निकाला गया। नाबालिग मृतिका नचने ग्राम की ही रहने वाली थी। तीन दिन पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से उसकी मौत हो गई थी। मृतिका के पिता एवं परिजनों ने सलेहा पुलिस थाना तथा उसके ननिहाल में सूचना दिए बगैर ही शव को बेहद गोपनीय तरीके से दफना दिया था। इस सनसनीखेज़ घटनाक्रम की सूचना मृतिका के मामा वंशीधर (परिवर्तित नाम) ने पुलिस को दी है। उसने सलेहा थाना पुलिस को कथित तौर पर इस सनसनीखेज हत्या की वजह बताते हुए अपने अपने जीजा एवं गुड़िया के पिता कल्लू (परिवर्तित नाम) पर जो आरोप लगाए हैं वह अत्यंत ही संगीन और हैरान करने वाले है।
नाबालिग बालिका के शव को निकालने कब्र को खोदते हुए लोग।
इसके मद्देनजर आज नायब तहसीलदार गुनौर रविशंकर शुक्ल की उपस्थिति में बालिका के शव को जाँच-पड़ताल के लिए कब्र से बाहर निकाला गया। पहले तो पुलिस की एफएसएल टीम ने बारीकी से जांच की और फिर पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नाबालिग के शव का सलेहा में ही डॉक्टरों के पैनल पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम होने के बाद बालिका के शव का पुनः अंतिम संस्कार किया गया। इस प्रकरण में पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। उधर, इस घटनक्रम को लेकर क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं व्याप्त है।
मोबाइल फोन पर गाँव वालों ने दी थी सूचना
घटनास्थल का निरीक्षण करता पुलिस डॉग।
पड़ोसी जिला सतना के ग्राम झिंगोदर निवासी वंशीधर (परिवर्तित नाम) ने रविवार की रात सलेहा पहुँचकर स्थानीय पुलिस को बताया कि उसे नचने गाँव के लोगों ने मोबाइल फोन पर सूचना दी है कि उसकी छोटी भांजी गुड़िया (परिवर्तित नाम) नाम की मौत हो चुकी है। जिसके शव को दफनाया जा चुका है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रविवार की रात्रि में ही पुलिस ने जब इसकी छानबीन की तो कल्लू (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उसकी बेटी गुड़िया भट्टा भूनते समय जल गई थी। इस कारण 13 सितम्बर को उसकी मौत हो गई। उसने शव को खेत के समीप ही गड्ढा खोदकर दफ़नाने की जानकारी दी। गुड़िया की बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने और उसके शव को गुपचुप तरीके से दफनाए जाने पर वंशीधर (परिवर्तित नाम) ने अपने जीजा पर बेटी की हत्या करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।
इस सम्बंध में उसने पुलिस को एक लिखित शिकायत भी दी है। अपुष्ट सूत्रों से पता चला है कि वंशीधर ने अपने जीजा कल्लू (परिवर्तित नाम) पर कथित तौर पर पिता-पुत्री के पवित्र रिश्ते को शर्मशार करते हुए मासूम गुड़िया को अपनी हवश का शिकार बनाने तथा कई दिनों तक उसके साथ दरिंदगी (यौन शोषण) करने का आरोप लगाया है। कथित तौर पर इसकी पुष्टि गुड़िया की बड़ी बहिन रीता (परिवर्तित नाम) ने भी की है।
वंशीधर ने यह आशंका जताई है कि हवश के भूखे कल्लू ने अपनी हैवानियत उजागर होने के डर से गुड़िया को जिन्दा जलाकर मार डाला और फिर उसे दफना दिया। झकझोर देने वाले इन आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस के द्वारा इस बेहद ही संगीन मामले के हर पहलू की बारीकी से जाँच की जा रही है। चर्चा यह भी है कि कथित तौर पर अपने पिता की हैवानियत से तंग आकर गुड़िया ने ही खुद को जिंदा जलाकर आत्महत्या कर ली थी। आरोपों व चर्चाओं के बीच वास्तविकता क्या है, इसका पता मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने व मामले की जाँच पूर्ण होने पर ही चल सकेगा।
पिता ने कर लिया थी दूसरी शादी
उल्लेखनीय है कि कल्लू (परिवर्तित नाम) की पहली पत्नी की मौत करीब 5-6 वर्ष पूर्व हो गई थी। कल्लू को पहली पत्नी से तीन संतान दो बेटियाँ और एक बेटा है। इसके बाद उसने दूसरा विवाह कर लिया। दूसरी पत्नी से भी कल्लू के 2-3 बच्चे है। वह अपनी पहली पत्नी के बच्चों को भी अपने साथ ग्राम नचने में खेत में बने घर में रखता है। बड़ी बेटी रीता (परिवर्तित नाम) की उम्र करीब 15 वर्ष की और छोटी बेटी गुड़िया 13 वर्ष की थी। वंशीधर (परिवर्तित नाम) का आरोप है कि उसकी बहिन की मौत के बाद कथित तौर जीजा कल्लू (परिवर्तित नाम) की नीयत अपनी ही बेटियों पर ख़राब होने लगी और इस कामांध ने पिता-पुत्री को पवित्र रिश्ते को कलंकित करते हुए बेटियों को अपनी हवश का शिकार बनाना शुरू कर दिया।
शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाते लोग।
कलयुगी पिता की दरिंदगी को दोनों नासमझ बेवश और असहाय बहिनें कई दिनों तक चुपचाप सहन करती रहीं। दरअसल, इस दौरान कल्लू को रोकने वाला कोई नहीं था इसलिए उसकी हैवानियत सारी हदें पार कर गई। बाद में जब कल्लू को लगा कि उसके कुकर्म उजागर हो सकते है, तो उसने छोटी बेटी गुड़िया को जिन्दा जलाकर मार डाला और फिर उसे गुपचुप तरीके से दफना दिया। वंशीधर के आरोपों के संबंध में मृतिका के पिता कल्लू (परिवर्तित नाम) से उसका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो सका। ऐसी खबर आ रही है कि पुलिस ने पूँछतांछ के लिए कल्लू को हिरासत में लिया है।
छतरपुर से आई एफएसएल टीम
कब्र और शव का अवलोकन करते पुलिस वैज्ञानिक अधिकारी रीतेश शुक्ल एवं एफएसएल टीम पन्ना के सदस्य नत्थू यादव।
सलेहा थाना प्रभारी निरंकार सिंह द्वारा इस घटना की जानकारी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकरियों को दी गई। उनके निर्देशन एवं मार्गदर्शन में प्रकरण की गहन जांच शुरू करते हुए पन्ना के साथ-साथ पड़ोसी जिला छतरपुर से भी एफएसएल टीम को मौके पर आवश्यक वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन हेतु बुलाया गया। छतरपुर से आए पुलिस वैज्ञानिक अधिकारी रीतेश शुक्ला ने बालिका गुड़िया (परिवर्तित नाम) के शव एवं घटनास्थल का निरीक्षण किया। दोनों की वीडियो और फोटोग्राफी कराई गई। फिंगर प्रिंट लिए गए। पुलिस डॉग को भी घटनास्थल पर लाकर छानबीन कराई गई। जांच के दौरान पन्ना की एफएसएल टीम के सदस्य नत्थू यादव, एन्थोनी पसाना, थाना सलेहा में पदस्थ एएसआई शिवमणि शुक्ला, पर्वत सिंह, कमलेश द्विवेदी, शिवम शर्मा, सुशील कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
इनका कहना है –
“नाबालिग बालिका के मामा ने उसकी मौत होने और शव को गुपचुप तरीके से दफनाए जाने की सूचना दी थी, जिस पर सोमवार को कब्र से शव को बाहर निकाला गया। सूचनाकर्ता ने अपने जीजा के खिलाफ कई बेहद गंभीर आरोप लगाए है जिनकी जाँच की जा रही है। मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने एवं प्रारंभिक जाँच पूर्ण होने पर काफी हद तक इस मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।”
अत्यधिक वर्षा को देखते हुए सभी जिलों में आपदा से निपटने की पूरी तैयारी, बाढ़ प्रभावित 45 हजार नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया
* मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा कलेक्टरों को स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश
भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर वर्षा प्रभावित जिलों में जान-माल की रक्षा और बचाव के काम युद्ध-स्तर पर तेज कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने चौबीसों घंटे मुस्तैद रहते हुए आपदा से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री श्री नाथ ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव राजस्व एवं संबंधित जिले के कलेक्टर से सतत् संपर्क रखकर बाढ़ की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री कमलनाथ।
मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर वर्षा से प्रभावित 36 जिलों में बचाव और राहत के काम तत्काल शुरु किए गए हैं। राज्य आपदा मोचक बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (एनडीआरएफ) के साथ स्थानीय जिला प्रशासन को सक्रिय किया गया है। प्रभावित क्षेत्र में 255 जिला आपदा रिस्पांस सेंटर और 51 आपात ऑपरेशन सेंटर खोले गए हैं, जो 24 घंटे निरंतर काम कर रहे हैं। एसडीआरएफ के 100 और होमगार्ड के 600 प्रशिक्षित जवान बचाव कार्य में लगाये गए हैं। एनडीआरएफ के 210 तथा 15 हजार होमगार्ड और पुलिस के जवान राहत और बचाव कार्यों में तैनात किए गए हैं।
45 हजार को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया
सांकेतिक फोटो।
राज्य-स्तर पर स्थापित आपदा नियंत्रण कक्ष 24 घंटे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के निगरानी कर रहा है और उन्हें आवश्यक मदद उपलब्ध करवा रहा है। सेना को भी सतर्क किया गया है और जहाँ भी आवश्यकता होगी, तत्काल यह सहायता प्रभावितों की मदद के लिए उपलब्ध करवाई जाएगी। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 45 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए विशेष दल बनाये गए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में उनके अस्थायी कैंप लगाए गए हैं। राज्य में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 150 राहत शिविरों में लोगों को पहुँचाया गया है। बाढ़ प्रभावित जिलों को 100 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है ताकि प्रभावितों के रहने, खाने तथा अन्य नुकसान की भरपाई की जा सके। आपदा और बचाव कार्य पर 325 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। राज्य सरकार ने भारी बारिश के कारण हुए नुकसान के लिए भारत सरकार से तत्काल प्रारम्भिक आंकलन के लिए अध्ययन दल भेजने को कहा है। राज्य सरकार के आग्रह पर केन्द्र से इंटर मिनिस्ट्रीयल सेंटर टीम शीघ्र भेजने का आश्वासन मिला है।
राहत और बचाव के कार्य युद्ध-स्तर पर शुरु
अतिवृष्टि से प्रभावित मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, भिंड, श्योपुर, नीमच, दमोह, रायसेन, और अशोकनगर जिले में प्रभावितों के लिए राहत और बचाव के कार्य युद्ध-स्तर पर शुरु किए गए है।
मंदसौर- मंदसौर में बाढ़ के कारण 12 हजार 800 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से 10 हजार लोगों को राहत कैम्प में ठहराया गया है। पूरे जिले में 53 राहत कैम्प स्थापित किए गए हैं। शिविरों में कपड़ों,सोने और भोजन की पूरी व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवी संस्थाएँ और नागरिक जिला प्रशासन के साथ सहयोग कर रहे हैं। आवागमन ठप्प हो जाने से मार्ग में फंसे 470 लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया है, जहाँ उन्हें सोने और भोजन आदि की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। प्रभावित क्षेत्रों के रहवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। गाँधीसागर बाँध के आसपास के गाँवों को खाली करवा लिया गया है। मदद के लिए मोबाइल नं. 7587969401 पर कोई भी व्यक्ति फोन करके सहायता प्राप्त कर सकता है। होमगार्ड के सैनिक नाव और बोट से निरंतर निगरानी रख रहे हैं।
रतलाम- रतलाम जिले में अतिवृष्टि के हालातों से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एनडीआरएफ की मदद से लोगों को बचाने का काम मुस्तैदी से किया गया। बाजना विकासखंड के ग्राम भड़ानखुर्द के ग्रामीणों को सुरक्षित कैम्पों में पहुँचाया गया है। इसी तरह, ग्राम रोला के 250 ग्रामीणों को पड़ोस के ग्राम रिंगनोद में शिफ्ट किया गया है। ग्राम रणायरागुर्जर के 300 नागरिकों को विभिन्न शासकीय भवनों में सुरक्षित पहुँचाया गया है, जहाँ उनके भोजन, रहने आदि की व्यवस्था की गई थी। रणायरागुर्जर में बाढ़ में फंसे मांगीलाल तथा सावत्रीबाई को एनडीआरएफ की टीम ने बचाकर राहत शिविर पहुँचाया है। पिपलौदा में भी 4 व्यक्तियों को स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की मदद से बचाया गया है।
आगर-मालवा- भारी वर्षा के कारण आगर-मालवा की कंठाल नदी में जलस्तर बढ़ने से नगरीय क्षेत्र सोयत में लोगों के घरों में पानी भर गया है। जिला प्रशासन ने तत्काल पुलिस-होमगार्ड और एनडीआरएफ की टीम के साथ बचाव कार्य शुरु किया और 750 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया। उनके खाने-पीने, सोने आदि की व्यवस्था राहत शिविरों में की गई। जो नागरिक अपने घरों में बाढ़ के कारण फंसे हुए हैं, उन लोगों को खाने-पीने तथा अन्य जरूरी सामान बोट द्वारा पहुँचाया गया। बाढ़ के कारण दुकानों और घरों को जो नुकसान पहुँचा है, उसके लिए चार सदस्यीय टीम गठित की गई है, जिन्होंने सर्वे का काम शुरू कर दिया है। जल जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष स्वास्थ्य दल गठित किए गए हैं, जो शिविर लगाकर लोगों को उपचार उपलब्ध करवा रहे हैं।
शाजापुर- शाजापुर जिले में बाढ़ प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के लिए शासकीय भवनों में राहत-शिविर खोले गये हैं। प्रभावित क्षेत्रों पर निगरानी रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए गए हैं।
सांकेतिक फोटो।
मुरैना संभाग – पार्वती और चंबल नदी में बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन द्वारा युद्ध-स्तर पर बचाव कार्य शुरु कर दिया गया है। श्योपुर जिले में बाढ़ में फंसे 12 गाँव के लोगों को राहत शिविरों में पहुँचाया गया है। एक व्यक्ति जो बाढ़ में फंस गया था, उसे भी सुरक्षित निकाला गया है। जिले के नदियों के समीप बसे 15 गाँव, जो नदियों के किनारे बसे हैं, उनसे सतत् संपर्क रखा जा रहा है। साथ ही सेना भी बुला ली गई है। भिंड जिले में बाढ़ से निपटने के लिए आर्मी लॉ वन कॉलम दल को अटेर में तैनात किया गया है। जो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा रहे हैं। भिंड जिले के ग्राम कोसड़ में स्थापित राहत शिविरों में लोगों को पहुँचाया गया है। मुरैना-भिंड और श्योपुर जिले में राहत और बचाव कार्य के लिए 50 एसएएफ, 10 एसडीआरएफ और होमगार्ड के जवान तैनात किए गए हैं। पशुओं के इलाज के लिए भी चिकित्सकों को सेवा में लगाया गया है।
दमोह- दमोह जिले में आज सुबह से बचाव के लिए तैनात टीम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम कर रही है। राहत शिविरों में पूरे इंतजाम किए गए हैं।
रायसेन- रायसेन जिले में बाढ़ के कारण हुए नुकसान पर सर्वे शुरु कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने जिले के प्रभावित गांव कायमपुर और निनोद गाँव में पहुँचकर बाढ़ प्रभावितों से मुलाकात कर उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार हर संभव मदद करेगी।
अशोकनगर- अशोक नगर जिले में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में फसलों, मकानों तथा अन्य नुकसानों के प्रारंभिक आंकलन का कार्य शुरु कर दिया है। आंकलन के बाद सभी प्रभावितों को आरबीसी 6-4 के तहत सहायता उपलब्ध करवायी जाएगी।
किसान बृजेश उपाध्याय को मिला जैम क्वालिटी का 29.46 कैरेट का बेशकीमती हीरा।
* पन्ना के हीरा कार्यालय में इस महीने जमा हुए कई हीरे
* लगातार हीरे मिलने से इसकी तलाश करने वालों का बढ़ा उत्साह
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती में एक और गरीब किसान की किस्मत चमक उठी है। एक अदद हीरे की तमनन्ना में करीब 25 साल से खदान लगाते हुए हताश-निराश हो चुके किसान बृजेश उपाध्याय को 29.46 कैरेट का बेशकीमती हीरा मिला है। एक ही झटके करोड़पति बने किसान को उसकी मेहनत का प्रतिफल छप्पर फाड़कर मिला है। जिससे बृजेश और उनके परिजनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है। उन्होंने शुक्रवार 13 सितम्बर को अपना हीरा पन्ना के जिला हीरा कार्यालय में जमा कराया है। इस हीरे की कीमत करोड़ों रुपए बताई जा रही है।
हीरा कार्यालय के बाहर अपने मित्रों के साथ खड़े किसान बृजेश उपाध्याय।
दुनियाभर में उज्जवल किस्म के हीरों के खनन के लिए विख्यात पन्ना में पिछले कुछ समय से लगातार की उथली खदानों से हीरों के मिलने की ख़बरें आ रहीं है। जिससे हीरे की तलाश करने वालों का उत्साह काफी बढ़ है। अच्छी बात यह है कि हीरे मिलने से जहां लोग लखपति-करोड़पति बन रहे हैं वहीं पन्ना में स्थित हीरा कार्यालय में इन्हें जमा कराया जा रहा है। इस महीने में अब तक चार नायाब हीरे जमा होने से हीरा कार्यालय में भी ख़ुशी का माहौल है।
हीरा कार्यालय पन्ना में हीरे को जमा करने के पूर्व उसकी बारीकी से जांच करते हीरा पारखी अनुपम सिंह।
हीरा पारखी अनुपम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना निवासी बृजेश उपाध्याय को ग्राम कृष्ण कल्याणपुर (पटी) की उथली खदान में 29.46 कैरेट का जैम क्वालिटी का हीरा मिला है। उन्होंने बेशकीमती हीरे की अनुमानित कीमत तो नहीं बताई लेकिन इतना जरूर कहा कि इसकी नीलामी में बड़ी राशि प्राप्त होने की पूरी उम्मीद है। उधर, हीरा व्यवसाय से जुड़े जानकार इस हीरे का मूल्य करोड़ों रुपए होने की बात कह रहे है।
लगा कि दिन में सपना देख रहा हूँ
किसान बृजेश ने बताया कि वह 25 सालों से खदान लगाते हुए लगभग हताश-निराश हो चुका था, कई बार नाउम्मीदी इतनी हावी हो जाती थी कि लगता था कि मेरी किस्मत में सिर्फ कंकड़-पत्थरही लिखे है। इस मनोदशा में जब खदान पर बहुमूल्य हीरा मिला तो एक पल के लिए अपनी आँखों पर ही यकीन नहीं हुआ। लगा कि जैसे कोई सपना देख रहा हूँ। लेकिन कुछ देर बाद एहसास हुआ कि मेरा वर्षों का श्रम और सपना साकार हो चुका है।
परिवार की बेहतरी प्राथमिकता
किसान बृजेश उपाध्याय को हीरा जमा करने की पावती देते हुए पन्ना कलेक्टर कर्मवीरर शर्मा।
ईश्वर के प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होंने कहा कि इस हीरे की नीलामी से जो राशि मिलेगी उसके खर्च को लेकर फिलहाल कोई प्लानिंग नहीं है लेकिन इसका सदुपयोग घर-परिवार की खुशहाली और बेहतरी के लिए करूँगा। अपने दोस्तों संग हीरा जमा करने आए बृजेश ने एक सवाल के जबाब में बताया कि जैम क्वालिटी का बेशकीमती हीरा मिलने से उसे कितनी ख़ुशी मिली है, इसे शब्दों में बयां कर पाना उसके लिए मुश्किल है।
डीएफओ उत्तर वन मण्डल पन्ना के कार्यालय में बैठकर कार्रवाई करती एसटीएफ जबलपुर की टीम। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही।
* अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी डिमाण्ड, लाखों रुपए है कीमत
* गड़ा धन खोजने और तंत्र क्रिया में भी पैंगोलिन का करते हैं उपयोग
* पन्ना जिले में लम्बे समय से चल रहा है वन्यजीवों की तस्करी का कारोबार
* पैंगोलिन के शिकार व तस्करी के मामले हो सकती हैं कुछ और गिरफ्तारियाँ
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जबलपुर एसटीएफ की टीम ने मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्लभ वन्य जीव पैंगोलिन की खाल (शल्क) के साथ झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। मामला संकटग्रस्त स्तनधारी वन्य जीव पैंगोलिन की तस्करी से जुड़ा होना बताया जा रहा है। शुक्रवार 13 सितम्बर की देर शाम एसटीएफ जबलपुर की टीम ने जब अचानक पन्ना के डायमण्ड चौराहा (जगात चौकी) के समीप दबिश देकर कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टर तपश राय को उठाया तो वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। एसटीएफ की टीम बगैर कुछ बताए डॉक्टर तपश राय को गाड़ी से अपने साथ डीएफओ उत्तर वन मण्डल के कार्यालय ले गई। फिल्मी सीन सरीकी इस कार्रवाई को देख लोग समझे कि तपश राय का अपहरण हो गया है। जिससे अपहरण की अफवाह फैलने से हड़कम्प मच गया। हालांकि, कुछ ही देर में जब स्थिति स्पष्ट हुई और सच्चाई का पता चला तो लोग झोलाछाप डॉक्टर के कारनामे जानकर हैरान रह गए।
पैंगोलिन का फाइल फोटो।
उल्लेखनीय है कि डॉक्टर तपश राय पन्ना के जनपद तिराहा के समीप अपनी डिस्पेंसरी संचालित करता है। एसटीएफ की टीम ने फौलादी कलम समाचार पत्र के संपादक भानु प्रसाद गुप्ता को जानकारी देते हुए बताया कि मुखबिर के माध्यम से उन्हें पन्ना निवासी डॉक्टर तपश राय के पास पैंगोलिन की खाल (शल्क) होने की सूचना मिली थी। इस महत्वपूर्ण सूचना की तस्दीक होने पर कार्रवाई करते हुए डॉक्टर तपश राय को हिरासत में लिया गया है। इनके कब्जे से पैंगोलिन जैसी शल्क बरामद हुई है। जप्तशुदा शल्क पैंगोलिन की है अथवा अन्य किसी जीव की है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच उपरांत की जाएगी।
बड़ा खुलासा होने की उम्मीद
फाइल फोटो।
एसटीएफ जबलपुर की टीम में शामिल अधिकारियों ने अपने नाम और पद की जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा कि इस मामले की सम्पूर्ण जानकारी शनिवार की सुबह उत्तर वन मण्डल पन्ना के अधिकारियों के द्वारा मीडियाकर्मियों को दी जाएगी। फिलहाल हम कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है,क्योंकि डॉक्टर तपश राय से अभी विस्तृत पूँछतांछ चल रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो यह मामला सीधे तौर पर पैंगोलिन के शिकार और तस्करी का है। इसमें अन्य कई लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। प्रकरण में भाजपा की एक महिला नेत्री के पति की संलिप्तता होने की भी चर्चाएं है। अपुष्ट खबर यह भी है कि पैंगोलिन के अंग अवयव का सौदा कर मोटी रकम हांसिल करने के लिए तस्करों ने मुंबई और मध्यप्रदेश के सागर में कुछ लोगों से सम्पर्क साधा था। इस संबंध में डॉक्टर तपश से शुक्रवार-शनिवार की देर रात तक पूँछतांछ चलती रही।
एसटीएफ की जांच में पैंगोलिन के शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के गैरकानूनी धंधे के अहम् सुराग मिलने के बाद इसमें लिप्त अपराधियों के जल्दी ही बेनकाब होने की उम्मीद की जा रही है। विदित हो कि करीब एक डेढ़ वर्ष पूर्व पन्ना के दक्षिण वन मण्डल की पवई रेन्ज अंतर्गत एक भालू का शिकार हुआ था। शिकारियों ने भालू के लिंग आदि अंगों को काटकर उसे बेंचने के लिए छिपाकर रख दिया था। कुछ दिनों बाद वनकर्मियों ने इसे एक शिकारी के घर के ही समीप से इसे बरामद किया था।
संकटग्रस्त प्रजातियों में है शामिल
मुखबिर की सूचना पन्ना में कार्रवाई करने वाली जबलपुर एसटीएफ की टीम के सदसयगण (सभी फोटो-मनीष सारस्वत)
वन्यजीव पैंगोलीन के कई नाम है, इसे वज्रशल्क, सल्लू साँप, सालरगोड़ा, चींटीखोर और छोटा डायनासोर भी कहा जाता है। इसके शरीर पर केरोटिन की बनी शल्क नुमा संरचना होती है जिससे यह दूसरे प्राणियों से अपनी रक्षा करता है। एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यह जीव संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है। इनके आवास वाले जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है और अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं के कारण इनका अक्सर शिकार किया जाता है। परिणामस्वरूप पैंगोलिन की सभी प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। चींटी और दीमक खाने वाला यह शानदार दुर्लभ जीव पन्ना के जंगलों में पाया जाता है। यह कमाल का वन्यजीव कई मायने में अद्भुत है। जैव विकास के दौरान इसने अपने आपको ऐसा ढला जो बाकई बेमिशाल है।
नरेश सिंह यादव, डीएफओ उत्तर वन मंडल पन्ना।
एक जानकारी के मुताबिक विश्व में पैंगोलिन की तस्करी वनजीवों में सबसे ज्यादा होती है। इसलिए पैंगोलिन को संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल किया गया है। कतिपय अंधविश्वासी-ढोंगी इसका उपयोग तांत्रिक क्रियाओं में करने के लिए इनका शिकार करवाते है। कुछ लोगों का मानना है कि गड़ा हुआ धन खोजने में पैंगोलिन मददगार साबित होते है। इसका मांस स्वादिष्ट होने से चीन तथा वियतनाम जैसे कई देशो के होटलों में परोसा जाता है। इसके अलावा चीन व थाईलैंड आदि देशों में इसके शल्कों का उपयोग यौनवर्धक और नपुंसकता दूर करने की दवाओं को बनाने में किया जाता है। इसके चमड़े से सजावट के सामान भी बनाए जाते है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पैंगोलिन के शरीर के अंगों की काफी मांग होने से बड़ी मात्रा में इनका शिकार करवाया जा रहा है। इंटरनेशल मार्केट में एक पैंगोलिन की कीमत 50 लाख रुपए तक होती है।
इनका कहना है –
“एसटीएफ की टीम ने कार्रवाई कर एक व्यक्ति से पैंगोलिन की खाल जप्त की है, इस संबंध में आप उत्तर वन मण्डल के डीएफओ से सम्पर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते है। कार्रवाई उनके ही क्षेत्र में हुई है। पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम इस कार्रवाई में शामिल नहीं है।”
– के.एस.भदौरिया, क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व।
* 6 आदिवासी विकासखण्ड में राज्य प्रारंभिक ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम शुरू होंगे
* आदिम जाति कल्याण की शालाओं में अतिथि शिक्षकों के मानदेय में दो गुनी वृद्धि
भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में महिला-बाल विकास विभाग के अंतर्गत निर्भया फंड से केन्द्र प्रवर्तित सेफ सिटी कार्यक्रम को वर्ष 2019-20 से वर्ष 2021-22 की अवधि में मध्यप्रदेश के छ: शहर में संचालित करने की मंजूरी दी। इसमें भोपाल, इन्दौर, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, छतरपुर और जबलपुर शामिल है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं एवं महिलाओं को शहर में सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। जिससे वे किसी भी प्रकार की हिंसा के भय से मुक्त होकर जीवन जी सकें। कार्यक्रम में 5 करोड़ रूपये के व्यय की मंजूरी दी गई।
मंत्रि-परिषद ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अतंर्गत राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में गठित स्व-सहायता समूहों को उच्च-स्तरीय लघु उद्यमिता विकास के लिए प्रदेश में पायलट रूप में राज्य के 6 आदिवासी विकासखण्ड में राज्य प्रारंभिक ग्रामीण उद्यमिता कार्यक्रम शुरू करने की मंजूरी दी। छ: विकासखण्ड में जिला-अलीराजपुर के उदयगढ़ तथा जोबट, जिला धार के डही तथा कुक्षी और जिला-झाबुआ के झाबुआ तथा राणापुर शामिल हैं। कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों को 25 हजार प्रति समूह के मान से उद्यमिता विकास के लिए राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
मंत्रि-परिषद ने आदिम-जाति कल्याण विभाग की शालाओं में नियोजित अतिथि शिक्षकों के मानदेय में लगभग दो गुनी वृद्धि करने का निर्णय लिया। अतिथि शिक्षक वर्ग-एक का मासिक मानदेय 4500 से बढ़ाकर अधिकतम मासिक मानदेय 9 हजार, वर्ग-दो का 3500 से 7 हजार और वर्ग-तीन का 2500 से बढ़ाकर 5 हजार अधिकतम मासिक मानदेय किया। अतिथि शिक्षक वर्ग-एक के 2802, वर्ग-दो के 6993 और वर्ग-तीन के 11 हजार 738 कुल 21 हजार 533 शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा। यह मानदेय दरें 1 जुलाई 2019 से देय होंगी।
मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ की घोषणा के पालन में जिला छिंदवाडा में कृषि महाविद्यालय स्थापना के लिए 146 करोड़ 96 लाख 67 हजार की मंजूरी दी। महाविद्यालय में 2020-21 के सत्र में 60 विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए पदों के सृजन तथा प्रस्तावित अधोसंरचना के लिये कलेक्टर छिंदवाड़ा द्वारा 50 हेक्टेयर भूमि चयनित की गई है।
मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में एक नवम्बर 2015 से संचालित डायल 100 सेवा को निरंतर रखने और केन्द्रीयकृत पुलिस कॉल सेन्टर तथा नियंत्रण कक्ष तंत्र के विस्तारण एवं उन्नयन की परियोजना को स्वीकृति दी। मंत्रि-परिषद ने मेडिको लीगल संस्थान के चार पद को एक मार्च 2018 से 28 फरवरी 2023 तक की अवधि की निरंतरता के लिए मंजूरी दी। मंत्रि-परिषद ने कर्मचारी राज्य बीमा सेवाओं के अंतर्गत मध्यप्रदेश कर्मचारी राज्य बीमा सोसायटी के गठन करने का निर्णय लिया। बेहतर सुविधाओं को उपलब्ध करवाने के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया।
मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिला निवाड़ी में पशुपालन विभाग का जिला कार्यालय खोले जाने के लिए 3 नये पद के सृजन तथा 20 पद पूर्ववर्ती जिला टीकमगढ से रिडिप्लाय कर नये जिले को आवंटित करने की अनुमति दी। मंत्रि-परिषद ने भारतीय पुलिस सेवा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के वेतनमान मेट्रिक्स 15 (1,82,200-2,24,100) में 15 पदों को अस्थाई रूप से निर्मित करने का निर्णय लिया। इसका समायोजन आगामी समय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के सेवानिवृत्ति से प्राप्त होने वाले पदों/ संवर्ग पुनरीक्षण के फलस्वरूप प्राप्त होने वाले पदों/ दो वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, से किया जाएगा।
मंत्रि-परिषद ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीनस्थ शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों तथा दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों और दंत चिकित्सा शिक्षकों तथा अन्य शैक्षणिक अधिकारियों के लिए पुनरीक्षित वेतनमान (सातवां) लागू करने का निर्णय लिया। इसमें संचालक चिकित्सा शिक्षा, अधिष्ठाता/संचालक प्रोजेक्ट, संयुक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा और संयुक्त संचालक-सह-अधीक्षक/प्राचार्य दंत चिकित्सा महाविद्यालय और प्राध्यापक चिकित्सा महाविद्यालय-प्राध्यापक दंत चिकित्सा महाविद्यालय को न्यूनतम वेतन 1 लाख 44 हजार 200 उच्च शिक्षा द्वारा जारी यूजीसी वेतनमान के पे-मैट्रिक्स अनुसार एकेडमिक लेवल 14 के समकक्ष वेतनमान दिया जाएगा।
घण्टानाद आंदोलन के तहत पन्ना में कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव कर भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
* घण्टा बजाकर भाजपाईयों ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ हल्ला बोला
* प्रांतव्यापी प्रदर्शन के तहत पन्ना में धरना देकर कलेक्ट्रेट कार्यालय का किया घेराव
* प्रेससवार्ता कर कांग्रेसियों ने गिनाई कमलनाथ सरकार के आठ माह की उपलब्धियां
* भाजपा और शिवराज पर लगाया 15 साल तक मध्य प्रदेश को लूटने का आरोप
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के सभी जिलों में बुधवार को दिनभर सियासी गहमा-गहमी रही है। एक ओर जहां विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर वादों की कसौटी पर खरा न उतरने का आरोप लगाते हुए इस सरकार को क़ानून-व्यवस्था सहित अन्य मोर्चों पर पूरी तरह असफल बताया वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के नेताओं प्रेसवार्ता कर इन आरोपों पर न सिर्फ अपनी सफाई दी बल्कि कमलनाथ सरकार के आठ माह के कार्यकाल में जनहित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों और उपलब्धियों की जानकारी दी। कांग्रेसियों ने जबाबी हमला बोलते हुए भाजपा और शिवराज पर पिछले 15 साल तक मध्य प्रदेश को लूटने का आरोप लगाया है। कांग्रेसजनों ने आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर बताया कि मध्यप्रदेश पिछले 15 साल तक बीमारू राज्य बना रहा। इस दौरान महिलाओं-बालिकाओं के खिलाफ अपराधों, किसानों की आत्महत्या, कुपोषण और बेरोजगारी के मामले में एमपी अव्वल रहा।
भाजपा के प्रांतव्यापी घण्टानाद आंदोलन के तहत बुधवार 11 सितम्बर को जिला मुख्यालय पन्ना की इन्द्रपुरी कालोनी स्थिति चन्द्रशेखर पार्क के बाहर पार्टी नेताओं ने कमलनाथ सरकार की वादखिलाफ़ी और विफलताओं को लेकर धरना दिया और फिर कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की गई। इस आंदोलन का आगाज़ शंख, घण्टा और बर्तन बजाकर किया गया।
प्रदेश को किया बर्बाद
पन्ना में भाजपा के घण्टानाद आंदोलन में शामिल जिले के पार्टी नेता एवं कार्यकर्तागण।
धरना-प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश मंत्री व पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में पिछले 9 माह से कांग्रेस की सरकार चल रही है। निश्चित ही कांग्रेस के पास सरकार चलाने के लिए अपना स्वयं का बहुमत नहीं है, इस लिए वह अन्य दलों व निर्दलिय विधायकों की मान-मनुहार पर टिकी हुई है। भारतीय जनता पार्टी ने निरंतर एक सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाई लेकिन सरकार ने इस सदभावना को विपक्ष की और मध्यप्रदेश की जनता की कमजोरी समझने की भूल की है। यही कारण है कि सरकार निरंतर निरंकुशता की ओर बढ़ते हुए प्रदेश को बदनाम और बर्बाद करने के रास्ते पर निकल पड़ी है मध्यप्रदेश की ऐसी बुरी स्थिति कर दी है जिसकी कल्पना भी नहीं की थी ।
किसान सम्मान निधि से रखा वंचित
बीजेपी के प्रदेश मंत्री एवं पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह।
पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि एक ओर जनहित के सारे काम ठप्प पड़े है और दूसरी ओर उन सभी जन कल्याण कारी योजनाओं को बंद कर दिया गया है जो योजनायें भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने शुरू की थी । उन्होंने कहा की मध्यप्रदेश का किसान दोहरे और तेहरे धोखे का शिकार हुआ है, पहला कर्ज माफी के झूठ ने उसे डिफाल्टर बना दिया और वह आगामी फसल के लिए खाद बीज तक नहीं खरीद पा रहा है इतना ही नहीं केन्द्र सरकार ने जब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का पैसा मध्यप्रदेश के किसानों को भी देने की घोषणा की तो कांग्रेस की सरकार ने अपनी राजनैतिक कुंठाओं के चलते केन्द्र सरकार को किसानों की सूची तक नहीं भेजी । उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बिजली गुल होने लगी है। यह सरकार जनता से किए गए वादों को नहीं निभा पाई है इसलिए लोग कमलनाथ सरकार के लिए अब यह कहने लगे हैं -“तुम तो धोखेबाज हो वाद करके भूल जाते हो।”
एमपी में तेजी से बढ़ रहे हैं अपराध
प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनहित से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष का शंखनाद करते भाजपा नेतागण।
भाजपा जिलाध्यक्ष पन्ना सतानांद गौतम ने कहा की युवा किसी भी समाज और देश का भविष्य होता है और उसी युवा को प्रारंभिक काल में कांग्रेस सरकार से धोखाधड़ी का शिकार होना पड़े तो सोचिये व्यवस्था से उसका विश्वास किस कदर उठ जायेगा । कांग्रेस की सरकार ने मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार और बेरोजगारी भत्ता देने के वादे के साथ जो छलावा किया है वह एक गंभीरतम अपराध है । सभा को सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष संजय नगायच ने संबोधित करते हुए कहा की मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था के हालात बद से बत्तर हो गये है। जिस प्रदेश को भाजपा की सरकार ने दस्यु-नक्सली समस्या और सिमी के आतंकवादियों से पूरी तरह मुक्त करा दिया था उस प्रदेश में आज अपराध बढ़ रहा है। स्कूल से बच्चों को उठा लिया जाता है फिरौती वसूली जाती है फिर भी उनकी नृशंस हत्या कर दी जाती है।
तबादलों को सरकार ने बनाया उद्योग
कमलनाथ सरकार की नीतियों के खिलाफ थाली बजाकर अपना विरोध दर्ज कराती भाजपा की महिला नेत्रियां।
सभा को वरिष्ठ नेता सुधीर अग्रवाल ने संबोधित करते हुए कहा की पुलिस और प्रशासन तबादलों से तंग आ कर विवशता की स्थिति में खड़ा हो गया है। कोई भी अधिकारी यदि कानून व्यवस्था बनाने की दिशा में अपने कर्तव्य का पालन करता है तो उसे तुरंत स्थानांतरण का आदेश थमा दिया जाता है। इस सरकार ने स्थानांतरण को एक वसूली उद्योग बना दिया है। पूर्व विधायक राजेश वर्मा ने संबोधित करते हुए कहा की यह सरकार अंर्तविरोधों पर टिकी है और सबको साधने की जुगत में लूट की छूट दे रखी है। प्रदेश में कानून व्यवस्था चौपट है, रोजगार के अवसर नहीं है और विकास रूक गया है।
इन्होंने भी किया संबोधित
धरना-प्रदर्शन को जिला पंचायत अध्यक्ष पन्ना रविराज सिंह यादव, आशुतोष महदेले, पूर्व जिला अध्यक्ष बाबूलाल यादव,वरिष्ठ नेता जयप्रकाश चतुर्वेदी, उपाध्यक्ष मानवेन्द्र सिंह, पूर्व महामंत्री सुशील त्रिपाठी, उपाध्यक्ष संजीत सरकार, श्रीकांत त्रिपाठी, बृजेन्द्र गर्ग, तरूण पाठक आशा गुप्ता ने भी संबोधित किया । इस अवसर पर भाजपा के जिला पदाधिकारी, मण्डलों के अध्यक्ष, मोर्चों के अध्यक्ष मुख्य रूप से उपस्थित थे।
रिश्वत लेने के आरोप में नरदहा चौकी में प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी की गिरफ्तारी की कार्रवाई करती लोकायुक्त पुलिस सागर की टीम।
* पन्ना जिले की दूरस्थ पुलिस चौकी नरदहा में पकड़ा गया घूसखोर
* शिकायत पर कार्रवाई करने की धमकी देकर मांग रहा था 50 हजार रुपए
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पुलिस विभाग के एक भ्रष्ट प्रधान आरक्षक को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में लोकायुक्त पुलिस संगठन सागर की टीम ने गिरफ्तार किया है। प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी ने शिकायतकर्ता धर्मेँद्र उर्फ़ बाबू लोध के भाई के खिलाफ एक मामले में कार्रवाई न करने के एवज में 50 हजार रूपए की रिश्वत मांगी थी। इसकी शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस सागर ने प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। ट्रैप कार्यवाही को मंगलवार 10 सितम्बर को योजनाबद्ध तरीके से पन्ना जिले के थाना धरमपुर अंतर्गत आने वाली पुलिस चौकी नरदहा में अंजाम दिया गया। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से लगे इस सीमावर्ती दूरस्थ इलाके में लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई होने की खबर आते ही विकासखण्ड अजयगढ़ और जिला मुख्यालय पन्ना में हड़कम्प मच गया। दरअसल, 3 माह के अंतराल जिले में लोकायुक्त पुलिस संगठन की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
शिकायतकर्ता धर्मेँद्र उर्फ़ बाबू लोध 30 वर्ष निवासी नरदहा ने बताया कि नरदहा चौकी प्रभारी तपन व्यापारी और प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी को कथित तौर पर उसके भाई के खिलाफ 2-3 माह पूर्व एक शिकायत मिली थी। जिसमें कार्यवाही को लेकर भाई को गिरफ्तार करने और वाहन जब्त करने की धमकी देते हुए 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई। अनुचित मांग से परेशान होकर धर्मेँद्र उर्फ़ बाबू लोध ने इसकी लिखित शिकायत लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक सागर से की। शिकायत की तस्दीक करने के लिए रुपयों की मांग की बातचीत का ऑडियो रिकार्ड कराया गया। जिसके बाद मंगलवार को दोपहर के समय लोकायुक्त पुलिस के डीएसपी राजेश खेड़े के नेतृत्व वाली टीम ने सुनियोजित तरीके कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी को नरदहा चौकी में रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़ लिया।
अपनी शिकायत के संबंध में पत्रकारों को जानकारी देता धर्मेँद्र उर्फ़ बाबू लोध।
पूर्व चर्चानुसार धर्मेँद्र उर्फ़ बाबू लोध ने आज जैसे ही प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी को बतौर रिश्वत 30 हजार रुपए दिए तभी लोकायुक्त पुलिस टीम ने दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लोकायुक्त पुलिस ने इस मामले में प्रधान आरक्षक के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सालों में पन्ना जिले के पुलिस महकमे में लोकायुक्त की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इसके लगभग तीन पूर्व लोकायुक्त पुलिस ने पन्ना कोतवाली थाना अंतर्गत ट्रैप कार्रवाई करते हुए ककरहटी चौकी के तत्कालीन प्रभारी उप निरीक्षक उदयभान शर्मा को रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।
इनका कहना है –
“एक शिकायत को रफादफा करने के एवज में 30 हजार रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में सिर्फ प्रधान आरक्षक गोमती तिवारी को गिरफ्तार किया गया है। रिश्वत की राशि को लेकर हुई बातचीत में नरदहा चौकी प्रभारी तपन व्यापारी का भी नाम आया है, इस प्रकरण की बारीकी से जांच की जाएगी यदि जांच में चौकी प्रभारी की संलिप्तता के साक्ष्य मिलते है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।”
पन्ना जिले की विश्रामगंज घाटी में हुए भीषण सड़क हादसे का शिकार बाइक चालक का शव और समीप ही अचेत अवस्था में पड़ी उसकी घायल पत्नी।
* पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना अंतर्गत विश्रामगंज घाटी में हुआ हादसा
* इलाज कराकर पन्ना से वापस अपने गांव हरसैनी लौट रहे थे पाल दम्पत्ति
पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में एक बेलगाम कंटेनर बाइक सवार युवा दम्पत्ति को ठोकर मारकर मौके से भाग निकला। इस हृदय विदारक हादसे में पति की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि अत्यंत ही गम्भीर रूप से घायल पत्नी जिंदगी और मौत से जूझ रही है। यह भीषण हादसा सोमवार 9 सितम्बर की शाम पन्ना से करीब 20 किलोमीटर दूर अजयगढ़ मार्ग पर विश्रामगंज घाटी में हुआ। हादसे की जो तस्वीरें आईं है वह अत्यंत ही भयावह और विचलित करने वालीं है। सड़क पर खून से लथपथ पड़े दम्पत्ति के संबंध राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। तब जाकर घायल महिला दीपा पाल 25 वर्ष को अचेत अवस्था में इलाज के लिए पन्ना जिला चिकित्सालय लाया गया।
सड़क हादसे में असमय काल-कवलित हुए बाइक चालक की पहचान महेन्द्र पाल 30 वर्ष निवासी ग्राम हरसैनी थाना अजयगढ़ के रूप में हुई है। जानकारी अनुसार पाल दम्पत्ति पन्ना से इलाज कराकर शाम करीब 5 बजे वापस अपने गांव लौट रहा थे, तभी रास्ते में बेहद खतरनाक विश्रामगंज घाटी के मोड़ पर यह दुखद हादसा हुआ। बाइक सवार दम्पत्ति को सीधी ठोकर मारने के बाद अज्ञात तेज रफ़्तार कंटेनर मौके से भाग निकला। समाचार लिखे जाने तक उसे पकड़ा नहीं जा सका था। कंटेनर की ठोकर लगने से बाइक चालक महेन्द्र पाल 30 वर्ष वर्ष का चेहरा और सिर बुरी तरह फट चुका था। परिणामस्वरूप महेन्द्र ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि उसकी घायल पत्नी दीपा पाल 25 वर्ष अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रही है। सोशल मीडिया पर आईं इस हादसे की तस्वीरों में जब लोगों ने राजेश के शव की भयावह स्थिति को देख तो कलेजा काँप उठा। इस दर्दनाक हादसे की खबर फैलने के बाद से समूचे अजयगढ़ क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।
उल्लेखनीय है कि सीढ़ीनुमा संचरना के घुमावदार मोड़ वाली विश्रामगंज घाटी मरम्मत के आभाव में काफी जर्जर हो चुकी है। इस प्राचीन घाटी मार्ग से प्रतिदिन रेत के ओवरलोड वाहनों की निकासी के चलते घाटी के मोड़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए है जिससे यहां आए सड़क हादसे हो रहे हैं।
घटनास्थल पर शव का मुआयना करते पुलिस अधिकारी एवं मौके पर मौजूद मृतक मातादीन के दोस्त और परिचित।
* पन्ना-अजयगढ़ बायपास मार्ग किनारे मिला शव
* शव के पास सल्फास की डिब्बी मिलने से आत्महत्या की आशंका
* परिस्थितियों के आधार पर परिजनों ने हत्या का जताया संदेह
* मर्ग कायम कर मामले की जांच में जुटी कोतवाली थाना पुलिस
पन्ना। (www.radarnews.in) पन्ना-अजयगढ़ बायपास मार्ग किनारे रविवार की सुबह कॉलेज स्टूडेंट मातादीन अहिरवार पुत्र परशुराम अहिरवार 25 वर्ष का शव अर्धनग्न अवस्था में मिलने से सनसनी फैल गई। मातादीन पन्ना के किशोरगंज मोहल्ला में लवकुश वाटिका के समीप किराए के मकान में अपने वृद्ध बीमार पिता के साथ रहता था। इस नवयुवक का शव जिन परिस्थितियों में मिला उसे लेकर कई तरह की चर्चााएं है। कुछ लोग घटना को आत्महत्या मान रहे हैं वहीं अंडर गारमेंट में जवान बेटे का शव मिलने के मद्देनजर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है।
कोतवाली थाना पुलिस ने घटना पर मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और मामले की जांच पूर्ण होने के बाद मातादीन की मौत की सच्चाई का पता चलने की बात पुलिस के द्वारा कही जा रही है।
नगरपालिका के वाहन से शव को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए ले जाते लोग।
पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना अंतर्गत गुमानगंज का मूल निवासी मातादीन अहिरवार पुत्र परशुराम अहिरवार 25 वर्ष पिछले कई वर्षों से पन्ना में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसे करीब से जानने वाले स्थानीय छात्र नेता जीतेन्द्र जाटव ने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व मातादीन अहिरवार का विवाह हुआ था। शादी के कुछ ही दिन बाद उसकी पत्नी अपने प्रेमी संग भाग गई थी। पत्नी की बेबफ़ाई से आहत बेरोजगार मातादीन अपने बीमार और वृद्ध पिता की देखभाल को लेकर भी काफी परेशान रहता था। उसे मिर्गी के दौरे भी आते थे।
रविवार 8 सितम्बर की सुबह मातादीन की मौत की खबर आने के बाद से उसके परिचित और मित्रगण अत्यंत ही दुखी हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए जब जिला चिकित्सालय के शव विच्छेदन गृह लाया गया तो कुछ ही देर में वहां उसके दोस्त भी एकत्र हो गए। सभी आपस में यही चर्चा कर रहे थे कि मातादीन अहिरवार कुछ दिनों से उदास और शांत-शांत लग रहा था। लेकिन वह आत्मघाती कदम उठालेगा यह किसी ने सोचा नहीं था।
पन्ना-अजयगढ़ बायपास मार्ग किनारे इस अवस्था में मिला मातादीन अहिरवार का शव।
पन्ना-अजयगढ़ बायपास मार्ग किनारे मातादीन की लाश अर्धनग्न अवस्था में अंडर गारमेंट में मिलने उसके दोस्त और परिजन हैरान है। शव के पास सल्फास की खाली डिब्बी मिलने से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि उसने कथित तौर आत्महत्या की है। लेकिन शव के पास ही उसके पैंट-शर्ट आदि मिलने से यह सवाल भी उठ रहा है कि, मातादीन को यदि जहर खाकर आत्महत्या ही करनी थी तो उसने अपने कपड़े क्यों उतारे। इस वजह से उसकी मौत को लेकर हत्या की आशंका भी जताई जा रही है। बहरहाल कोतवाली थाना पन्ना पुलिस ने घटना को लेकर मर्ग कायम किया है। पुलिस के द्वारा इस घटना के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर सच्चाई को सामने लाने की बात कही जा रही है।
पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने 29वीं भारतीय वेटनरी कॉन्फ्रेस को सम्बोधित किया।
* निराश्रित गौ-वंश को संरक्षण देने राज्य सरकार प्रतिबद्ध – मंत्री लाखन सिंह यादव
* भोपाल में 29वीं भारतीय वेटनरी कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को किया संबोधित
भोपाल। (www.radarnews.in) केन्द्रीय पशुपालन राज्य मंत्री संजीव कुमार बाल्यिमान ने बताया है कि पशुपालन और डेयरी उद्योग को लाभकारी बनाने के लिये उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में उद्यमियों को आकर्षित करने के लिये पीपीपी मोड पर प्रोजेक्ट क्रियान्वित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। श्री बालियान आज यहाँ 29वीं भारतीय वेटनरी कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि पशुधन का संरक्षण मानव जीवन और पर्यावरण संतुलन के लिये बहुत जरूरी है। वेटनरी डॉक्टर्स और विशेषज्ञों को यह बात समझते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिये। पशुधन संरक्षण में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास भी करना चाहिये।
प्रदेश के पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने शत-प्रतिशत निराश्रित गौ-वंश को संरक्षित करने का निर्णय लिया है। इसके लिये हाईटेक गौ-शालाएँ बनाई जा रही हैं। ग्रामीणों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी उद्योग अपनाने के लिये भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस में देश के 20 राज्यों के वेटनरी डॉक्टर्स और विशेषज्ञों ने भाग लिया। लुधियाना विश्वविद्यालय के उप कुलपति डॉ. गुरुदयाल सिंह, वेटनरी एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पशुपालन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।