STF की बड़ी कार्रवाई : दुर्लभ वन्य जीव पैंगोलिन की खाल के साथ झोलाछाप डॉक्टर गिरफ्तार, सेक्स पॉवर बढ़ाने की दवाएं बनाने के लिए होती है इस शानदार जीव की तस्करी

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डीएफओ उत्तर वन मण्डल पन्ना के कार्यालय में बैठकर कार्रवाई करती एसटीएफ जबलपुर की टीम। यह कार्रवाई देर रात तक चलती रही।

* अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी डिमाण्ड, लाखों रुपए है कीमत

* गड़ा धन खोजने और तंत्र क्रिया में भी पैंगोलिन का करते हैं उपयोग

* पन्ना जिले में लम्बे समय से चल रहा है वन्यजीवों की तस्करी का कारोबार

* पैंगोलिन के शिकार व तस्करी के मामले हो सकती हैं कुछ और गिरफ्तारियाँ 

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में जबलपुर एसटीएफ की टीम ने मुखबिर की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्लभ वन्य जीव पैंगोलिन की खाल (शल्क) के साथ झोलाछाप डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। मामला संकटग्रस्त स्तनधारी वन्य जीव पैंगोलिन की तस्करी से जुड़ा होना बताया जा रहा है। शुक्रवार 13 सितम्बर की देर शाम एसटीएफ जबलपुर की टीम ने जब अचानक पन्ना के डायमण्ड चौराहा (जगात चौकी) के समीप दबिश देकर कथित तौर पर झोलाछाप डॉक्टर तपश राय को उठाया तो वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। एसटीएफ की टीम बगैर कुछ बताए डॉक्टर तपश राय को गाड़ी से अपने साथ डीएफओ उत्तर वन मण्डल के कार्यालय ले गई। फिल्मी सीन सरीकी इस कार्रवाई को देख लोग समझे कि तपश राय का अपहरण हो गया है। जिससे अपहरण की अफवाह फैलने से हड़कम्प मच गया। हालांकि, कुछ ही देर में जब स्थिति स्पष्ट हुई और सच्चाई का पता चला तो लोग झोलाछाप डॉक्टर के कारनामे जानकर हैरान रह गए।
पैंगोलिन का फाइल फोटो।
उल्लेखनीय है कि डॉक्टर तपश राय पन्ना के जनपद तिराहा के समीप अपनी डिस्पेंसरी संचालित करता है। एसटीएफ की टीम ने फौलादी कलम समाचार पत्र के संपादक भानु प्रसाद गुप्ता को जानकारी देते हुए बताया कि मुखबिर के माध्यम से उन्हें पन्ना निवासी डॉक्टर तपश राय के पास पैंगोलिन की खाल (शल्क) होने की सूचना मिली थी। इस महत्वपूर्ण सूचना की तस्दीक होने पर कार्रवाई करते हुए डॉक्टर तपश राय को हिरासत में लिया गया है। इनके कब्जे से पैंगोलिन जैसी शल्क बरामद हुई है। जप्तशुदा शल्क पैंगोलिन की है अथवा अन्य किसी जीव की है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच उपरांत की जाएगी।

बड़ा खुलासा होने की उम्मीद

फाइल फोटो।
एसटीएफ जबलपुर की टीम में शामिल अधिकारियों ने अपने नाम और पद की जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा कि इस मामले की सम्पूर्ण जानकारी शनिवार की सुबह उत्तर वन मण्डल पन्ना के अधिकारियों के द्वारा मीडियाकर्मियों को दी जाएगी। फिलहाल हम कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है,क्योंकि डॉक्टर तपश राय से अभी विस्तृत पूँछतांछ चल रही है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो यह मामला सीधे तौर पर पैंगोलिन के शिकार और तस्करी का है। इसमें अन्य कई लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। प्रकरण में भाजपा की एक महिला नेत्री के पति की संलिप्तता होने की भी चर्चाएं है। अपुष्ट खबर यह भी है कि पैंगोलिन के अंग अवयव का सौदा कर मोटी रकम हांसिल करने के लिए तस्करों ने मुंबई और मध्यप्रदेश के सागर में कुछ लोगों से सम्पर्क साधा था। इस संबंध में डॉक्टर तपश से शुक्रवार-शनिवार की देर रात तक पूँछतांछ चलती रही।
एसटीएफ की जांच में पैंगोलिन के शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी के गैरकानूनी धंधे के अहम् सुराग मिलने के बाद इसमें लिप्त अपराधियों के जल्दी ही बेनकाब होने की उम्मीद की जा रही है। विदित हो कि करीब एक डेढ़ वर्ष पूर्व पन्ना के दक्षिण वन मण्डल की पवई रेन्ज अंतर्गत एक भालू का शिकार हुआ था। शिकारियों ने भालू के लिंग आदि अंगों को काटकर उसे बेंचने के लिए छिपाकर रख दिया था। कुछ दिनों बाद वनकर्मियों ने इसे एक शिकारी के घर के ही समीप से इसे बरामद किया था।

संकटग्रस्त प्रजातियों में है शामिल

मुखबिर की सूचना पन्ना में कार्रवाई करने वाली जबलपुर एसटीएफ की टीम के सदसयगण (सभी फोटो-मनीष सारस्वत)
वन्यजीव पैंगोलीन के कई नाम है, इसे वज्रशल्क, सल्लू साँप, सालरगोड़ा, चींटीखोर और छोटा डायनासोर भी कहा जाता है। इसके शरीर पर केरोटिन की बनी शल्क नुमा संरचना होती है जिससे यह दूसरे प्राणियों से अपनी रक्षा करता है। एशिया और अफ्रीका महाद्वीप में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला यह जीव संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल है। इनके आवास वाले जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है और अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं के कारण इनका अक्सर शिकार किया जाता है। परिणामस्वरूप पैंगोलिन की सभी प्रजातियों पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है। चींटी और दीमक खाने वाला यह शानदार दुर्लभ जीव पन्ना के जंगलों में पाया जाता है। यह कमाल का वन्यजीव कई मायने में अद्भुत है। जैव विकास के दौरान इसने अपने आपको ऐसा ढला जो बाकई बेमिशाल है।
नरेश सिंह यादव, डीएफओ उत्तर वन मंडल पन्ना।
एक जानकारी के मुताबिक विश्व में पैंगोलिन की तस्करी वनजीवों में सबसे ज्यादा होती है। इसलिए पैंगोलिन को संकटग्रस्त प्रजाति में शामिल किया गया है। कतिपय अंधविश्वासी-ढोंगी इसका उपयोग तांत्रिक क्रियाओं में करने के लिए इनका शिकार करवाते है। कुछ लोगों का मानना है कि गड़ा हुआ धन खोजने में पैंगोलिन मददगार साबित होते है। इसका मांस स्वादिष्ट होने से चीन तथा वियतनाम जैसे कई देशो के होटलों में परोसा जाता है। इसके अलावा चीन व थाईलैंड आदि देशों में इसके शल्कों का उपयोग यौनवर्धक और नपुंसकता दूर करने की दवाओं को बनाने में किया जाता है। इसके चमड़े से सजावट के सामान भी बनाए जाते है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पैंगोलिन के शरीर के अंगों की काफी मांग होने से बड़ी मात्रा में इनका शिकार करवाया जा रहा है। इंटरनेशल मार्केट में एक पैंगोलिन की कीमत 50 लाख रुपए तक होती है।

इनका कहना है –

“एसटीएफ की टीम ने कार्रवाई कर एक व्यक्ति से पैंगोलिन की खाल जप्त की है, इस संबंध में आप उत्तर वन मण्डल के डीएफओ से सम्पर्क कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते है। कार्रवाई उनके ही क्षेत्र में हुई है। पन्ना टाइगर रिजर्व की टीम इस कार्रवाई में शामिल नहीं है।”

– के.एस.भदौरिया, क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व।