चंदे का धंधा ! धार्मिक अनुष्ठान के लिए चंदा वसूली मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पन्ना के परिसर में स्थित शिव मंदिर में आशा एवं आशा सहयोगिनी संघ तथा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला शाखा पन्ना द्वारा संयुक्त रूप हवन-पूजन कराया गया। (फाइल फोटो)

*    आशा कार्यकर्ता संघ और संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने चंदा कर जुटाई थी बड़ी राशि

*    आशा सुपरवाइजर ने कलेक्टर को आवेदन देकर खुद लगे आरोपों को निराधार बताया

*     बोलीं- किसी भी कार्यकर्ता से नकद या मोबाइल बैंकिंग से नहीं ली चंदा राशि

पन्ना। (www.radarnews.in) आशा एवं आशा सहयोगिनी संघ तथा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला शाखा पन्ना द्वारा संयुक्त रूप धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन हेतु की गई चंदा वसूली मामले ने तूल पकड़ लिया है। चंदा राशि के बंदरबांट की शिकायत के बाद अब इस मसले पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कथित तौर चंदे के धंधे में चांदी काटने के आरोपों का सामना कर रहे दोनों ही कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के अपने-अपने तथ्य, तर्क और दावे हैं, जिनके आधार पर वह खुद को पाक-साफ़ बताते हुए दूसरे पर उंगली उठा रहे है। अब इसी क्रम में आशा संघ की पदाधिकारी एवं आशा सुपरवाइजर रुक्मणी प्रजापति का बयान आया है। उन्होंने, अपने ऊपर लगे आरोपों को पूर्णतः असत्य और निराधार बताया है। साथ ही अपने खिलाफ हुई शिकायत को भी फर्जी करार दिया है। आशा सुपरवाइजर का कहना है, मेरी छवि को धूमिल करने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र किया जा रहा है। उन्होंने इस सम्बंध में पन्ना कलेक्टर सुरेश कुमार को आवेदन पत्र देकर मामले की जांच करवाने की पुरजोर मांग की है।
उल्लेखनीय है कि, लोकसभा चुनाव के पूर्व राज्य सरकार के द्वारा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि की गई थी। बहुप्रतीक्षित मांग के पूर्ण होने पर पन्ना जिले के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ और आशा-ऊषा कार्यकर्ता संघ द्वारा संयुक्त रूप से जिला मुख्यालय में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय परिसर में स्थित शिव मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान (हवन-पूजन), भक्तिगीत-संगीत और भंडारे का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के लिए दोनों ही कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के द्वारा जिले भर में अपने साथी कर्मचारियों और संघ के सदस्यों से बड़े पैमाने पर चंदा वसूली की गई थी। विगत दिनों कुछ महिलाओं सावित्री लोध, शीला सिंह, रचना पटेल ने पन्ना कलेक्टर को आवेदन पत्र देकर चंदा वसूली करने वालों पर गंभीर आरोप लगाए थे। कलेक्टर को दी गई शिकायत में बताया है कि अजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत उप स्वास्थ्य केन्द्र के कीरतपुर मे पदस्थ आशा सुपरवाईजर रुक्मणी प्रजापति व अन्य के द्वारा जिले की आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं और आशा सुपरवाइजर पर कथित तौर पर दबाव बनाकर कार्यक्रम के धार्मिक आयोजन हेतु चंदा वसूली की गई। चंदा राशि से महज कुछ हजार रुपये धार्मिक आयोजन पर खर्च करके शेष बड़ी रकम का बंदरबांट कर लिया गया।
आशा सुपरवाइजर रुकमणी प्रजापति।
आशा सुपरवाइजर रुक्मणी ने खुद पर लगे आरोपों के संबंध 19 जून को कलेक्टर के नाम पर आवेदन पत्र देकर अपनी ओर वस्तुस्थिति स्पष्ट की है। साथ ही मीडिया को आवेदन पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने धार्मिक आयोजन के नाम से जबरन चंदा वसूली के आरोपों को सरासर झूठा और निराधार बताया है। उनका कहना है, मैनें धार्मिक अनुष्ठान में स्वेच्छापूर्वक तन-मन और धन से सहभागिता निभाई थी। लेकिन किसी से भी अपने बैंक खाते या मोबाइल बैंकिंग के माध्यम से चंदा वसूली का एक पैसा भी नहीं नहीं लिया। जिसकी तस्दीक मेरे बैंक खाते और खाते के बैंक स्टेटमेंट की जांच से की जा सकती है। सुनियोजित साजिश के तहत व्यक्तिगत तौर पर मेरी छवि धूमिल करने एवं नौकरी से निकलवाने की मंशा से महिलाओं से फर्जी शिकायत कराई गई है। रुक्मणि का दावा है, शिकायती आवेदन पत्र में सावित्री’ लोध आशा कार्यकर्ता के हस्ताक्षर फर्जी है जिसकी पुष्टि स्वयं सावित्री लोध के द्वारा की गई है। आवेदन में अन्य जिन नामों का उल्लेख है जिले में उस नाम की कोई आशा कार्यकर्ता ही नहीं है।
आशा एवं आशा सहयोगिनी संघ तथा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला शाखा पन्ना द्वारा चंदा एकत्र कर संयुक्त रूप शिव मंदिर का जीर्णोद्धार एवं हवन-पूजन कराया गया। (फाइल फोटो)
रडार न्यूज़ से चर्चा में आशा सुपरवाइजर रुक्मणी प्रजापति ने धार्मिक अनुष्ठान के लिए सीमित स्तर पर चंदा होने की बात स्वीकार की है। लेकिन वह जोर देते हुए कहती हैं कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। बताते चलें कि, चंदा वसूली को लेकर कलेक्टर से की गई शिकायत के साथ प्रमाण के तौर पर मोबाइल से राशि ट्रांसफर संबंधी दस्तावेज संलग्न किये गए थे। इस मामले की शिकवा-शिकायत के बाद भी अब तक आशा-ऊषा एवं आशा सहयोगिनी संघ तथा संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला शाखा पन्ना के जिम्मेदार पदाधिकारियों की ओर से आगे आकर कुल चंदा वसूली (आय) और व्यय की गई राशि का विवरण सार्वजानिक नहीं किया गया। उधर, स्वास्थ्य कर्मचारियों के कारनामे पर विभाग के मुखिया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. व्हीएस उपाध्याय लगातार तमाशबीन बने हुए हैं। पूरे प्रकरण में सीएमएचओ की उदासीनता न सिर्फ हैरान करने वाली है बल्कि इससे विभाग की बदनामी होने के साथ प्रत्यक्ष-परोक्ष तौर पर अराजकता को बढ़ावा मिल रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि टीम गठित कर चंदा उगाही मामले की गहन जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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चंदे का धंधा | धार्मिक अनुष्ठान के लिए आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं से चंदा वसूली, मामूली राशि खर्च कर मोटी रकम दबाई !