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जनपद पंचायत अध्यक्ष अजयगढ़ को पद से हटाने के फैसले पर क्यों उठ रहे सवाल ?

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फाइल फोटो।

*   कोर्ट ने जिस मामले में साल भर पहले बरी किया, कलेक्टर उसी के आधार पर कर दी कार्रवाई

*   बहुचर्चित रेत खनन घोटाले की पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह से शिकायत करने की मिली सजा !

*   कांग्रेस नेता का आरोप बदले की भावना के चलते साजिश के तहत पद से हटाया गया 

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले की जनपद पंचायत अजयगढ़ के तत्कालीन अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय के विरुद्ध पन्ना कलेक्टर ने मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत कार्यवाही करते हुए अध्यक्ष पद से पृथक कर दिया है। साथ ही छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाते हुए अयोग्य घोषित कर दिया है। न्यायालय कलेक्टर एवं विहित प्राधिकारी अधिकारी जिला पन्ना संजय कुमार मिश्र के इस फैसले पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल, अजयगढ़ जनपद के पूर्व सीईओ आनंद शुक्ला को कथित तौर अपमानित करने और धमकाने की छह वर्ष पुरानी जिस घटना को आधार बनाकर कलेक्टर ने जनपद अध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय को पद से पृथक करने का फैसला सुनाया है, कोर्ट इस मामले में सभी आरोपों से उन्हें साल भर पहले ही दोषमुक्त (बरी) कर चुका है। कलेक्टर न्यायालय का यह फैसला जिले के राजनैतिक हल्कों और आम लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना है। रेत के कारोबार से जुड़े विवादों को लेकर अक्सर ही चर्चाओं में रहने वाले कांग्रेस नेता के खिलाफ की गई कार्यवाही की टाइमिंग भी काफी महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि, भरत मिलन पाण्डेय ने कुछ समय पूर्व राज्य सभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भोपाल में मुलाकत कर उन्हें पन्ना की अजयगढ़ तहसील अंतर्गत राजनैतिक-प्रशासनिक संरक्षण में चल रहे रेत खनन घोटाले की जानकारी देते हुए इससे जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य सौंपे थे। जिसके आधार पर दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर रेत खनन घोटाले की जांच कराने तथा इसमें लिप्त दोषी अधिकारियों व रेत माफिया के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई थी। इसके अलावा लोकायुक्त जस्टिस से भी रेत खनन घोटाले की लिखित शिकायत की गई है। राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने भरत मिलन पाण्डेय से प्राप्त साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए उनके आवेदन पत्र को बकायदा अपनी शिकायतों के साथ संलग्न किया है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता भरत मिलन पाण्डेय।
रेत खनन घोटाले की शिकायत को लेकर सुर्खियों में आए भरत मिलन पाण्डेय को अजयगढ़ जनपद पंचायत अध्यक्ष पद से हटाने का निर्णय न्यायालय कलेक्टर पन्ना के द्वारा 22 अक्टूबर 2021 को पारित किया गया। लेकिन इसकी जानकारी गत दिवस ही बाहर आई है। कांग्रेस नेता पाण्डेय को पद से पृथक करने की कार्यवाही की खबर आने के बाद से ही जिले का सियासी पारा चढ़ गया है। इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया जा रहा है। भरत मिलन ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए बताया जिस प्रकरण में न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया, उस मामले को आधार बनाकर पद से पृथक करने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की कार्यवाही करना क्या उचित है।
करोड़ों रुपए के रेत खनन घोटाले को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के द्वारा पन्ना के जनप्रतिनिधियों क्षेत्रीय सांसद विष्णु दत्त शर्मा, पन्ना विधायक एवं प्रदेश के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और प्रशासनिक अधिकारियों को घेरते हुए उनकी भूमिका पर सवाल उठाने तथा रेत माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगाने से मचे हड़कंप के बीच तत्कालीन अजयगढ़ जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय को के पद से पृथक करने का फैसला आया है। पन्ना में पिछले कुछ समय से विपक्ष के खिलाफ जिस तरह बदलापुर की सियासत चल रही उसे देखते हुए भरत मिलन पाण्डेय के खिलाफ कोई न कोई कार्रवाई होना राजनैतिक हल्कों में लगभग तय माना जा रहा था।
सांकेतिक चित्र।
बता दें कि, अजयगढ़ जनपद अध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय पर दिनांक 13 अक्टूबर 2015 को अजयगढ़ जनपद के तत्कालीन सीईओ आनंद शुक्ला के साथ अभद्रता करने, जान से मारने की धमकी देने एवं शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप लगे थे। घटना की रिपोर्ट जनपद सीईओ ने अजयगढ़ थाना में दर्ज कराई थी। इस प्रकरण में न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अजयगढ़ ने दिनांक 11 दिसंबर 2020 को निर्णय पारित करते हुए भरत मिलन को दोषमुक्त कर दिया था। लेकिन पन्ना कलेक्टर के न्यायालय में इसी घटना को लेकर भरत मिलन पाण्डेय के खिलाफ धारा 40 की कार्यवाही हेतु विचाराधीन रहे प्रकरण में दिनांक 22 अक्टूबर 2021 को फैसला सुनाते हुए कलेक्टर ने उन्हें तत्कालीन अध्यक्ष जनपद पंचायत अजयगढ़ के पद से करने के साथ ही छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है।
कांग्रेस नेता भरत मिलन ने अपने खिलाफ आये न्यायालय कलेक्टर के फैसले को उच्च कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। उनका आरोप है कि राजनैतिक प्रतिशोध की भावना के चलते उन्हें साजिश के तहत निशाना बनाया गया है। शिवराज सरकार में कुर्सी के खातिर कठपुतली बने भ्रष्ट अफसर विपक्ष को हर तरीके से दबाने में लगे हैं। लेकिन मैं इन हथकण्डों से डरने वाला नहीं हूँ, रेत खनन घोटाले समेत अन्य मामलों को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में पूरी ताकत के साथ उठाते हुए पन्ना में चल रहे माफिया राज को बेनक़ाब किया जाएगा।

शादी का झांसा देकर घर से भगा ले गया था प्रेमी, यौन शोषण का शिकार हुई नाबालिग

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अपहृत नाबालिग युवती को मुक्त कराकर वापस घर लाने और बलात्कार एवं अपहरण के आरोपी को गिरफ्तार करने वाली गुनौर थाना की पुलिस टीम।

*   अपहृत लड़की को बिहार के पूर्वी चंपारण से वापस लाई पुलिस टीम

*   अपहरण और दुष्कर्म करने वाले आरोपी को गिरफ्तार भेजा गया जेल

पन्ना/गुनौर। (www.radarnews.in) जिले के गुनौर थाना क्षेत्र से पिछले माह 17 वर्षीय नाबालिग युवती को उसका प्रेमी शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर घर से भगाकर बिहार के पूर्वी चंपारण जिला ले गया था। जहां युवती की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए प्रेमी के द्वारा उसका दैहिक शोषण किया गया। उप निरीक्षक ए.पी. सिंह बघेल, थाना प्रभारी गुनौर के नेतृत्व वाली पुलिस टीम अपह्रत युवती का सुराग लगाकर आखिरकार उसे वापस लाने और आरोपी को गिरफ्तार करने में सफल रही। गुनौर थाना में युवती के पिता की रिपोर्ट पर आरोपी के खिलाफ पूर्व से दर्ज अपहरण के मामले में बलात्कार की धाराओं का इजाफा करते हुए आज उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया है।
पुलिस थाना गुनौर में फरियादी ने 26 सितम्बर 2021 को उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि, उसकी नाबालिग लड़की दिनांक 24 सितम्बर 21 को सुबह 8:00 बजे अपने घर से दादा-दादी के घर जाने की बात कह कर गई थी, जो वापस लौटकर घर नहीं आई, कोई अज्ञात व्यक्ति उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपी के विरुद्ध अपहरण का अपराध क्रमांक 334 /2021 पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पन्ना धर्मराज मीना द्वारा उप निरीक्षक ए.पी. सिंह बघेल थाना प्रभारी गुनौर के नेतृत्व में एक टीम गठित कर लड़की को शीघ्र बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए। जिसके परिपालन में पीयूष मिश्रा एसडीओपी गुनौर के कुशल मार्गदर्शन में टीम द्वारा साइबर सेल पन्ना के सहयोग से नाबालिग़ लड़की को पूर्वी चंपारण बिहार प्रांत से बरामद कर अभियुक्त को गिरफ्तार कर शुक्रवार 29 अक्टूबर को गुनौर लाया गया।
गुनौर थाना प्रभारी अवधेश सिंह बघेल ने बताया कि सैंकड़ों किलोमीटर दूर से अपहृत युवती और उसके आरोपी को वापस लाना आसान नहीं था। तमाम जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से होकर गुजरने के बाद बमुश्किल यह सब संभव हो सका। आपने बताया कि युवती को शादी करने को झांसा देकर बहला-फुसलाकर आरोपी उसे सतना से ट्रेन में बैठा कर बिहार ले गया था। जहां पर उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया गया। इसलिए प्रकरण में आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म करने की धारा का इजाफा किया गया है। पुलिस ने नाबालिग लड़की को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया है। वहीं आरोपी को आज न्यायालय पन्ना में पेश किया गया जहां से न्यायायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।

MP | मासूम बच्ची से दुष्कर्म की अफवाह के बाद फैली हिंसा, सांप्रदायिक तनाव

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*  पन्ना जिले के अमानगंज में पुलिस की अकर्मण्यता के चलते असामाजिक तत्वों ने मचाया बवाल

*   दोनों पक्षों के बीच जमकर हुआ पथराव, आगजनी की घटना भी सामने आई

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिला अंतर्गत अमानगंज क़स्बा में रविवार को एक मासूम बच्ची से दुष्कर्म की अफवाह के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थानीय थाना के सामने आक्रोशित भीड़ और असामाजिक तत्वों ने एकत्र होकर तिराहा पर चक्का जाम कर आवागमन पूर्णतः अवरुद्ध कर दिया। समय पर स्थिति को संभालने में पुलिस के निकम्मेपन के चलते उग्र भीड़ ने कथित आरोपी बच्चे के घर के सामने पहुंचकर आपत्तिजनक नोरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान देखते ही देखते दोनों तरफ से जमकर पथराव होने लगा। उपद्रवियों की भीड़ के द्वारा बवाल मचाते हुए तोड़फोड़ करने और आगजनी की घटना भी सामने आई है। पथराव में कुछ लोगों के घायल होने की खबर मिली है। देर रात किसी तरह बमुश्किल हालात पर काबू पाया जा सका।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अमानगंज क़स्बा में रहने वाली चार वर्षीय मासूम बच्ची को कथित तौर पर उसके पड़ोस में ही रहने वाले समाज विशेष के 11 वर्षीय बालक के द्वारा क़स्बा के बाहरी इलाके मिढ़ासन नदी के चकदही घाट पर ले जाकर दुष्कर्म करने की अफवाह फ़ैल गई। जिससे उपजे तनाव के बीच अमानगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मासूम का मेडीकल परीक्षण कराया गया। बच्ची के चिकित्सीय परीक्षण और प्रत्यक्षदर्शी युवक के बयान से यह साफ़ हो गया कि बच्ची के साथ रेप होने की बात पूरी तरह असत्य और निराधार है। पुलिस की तस्दीक में पता चला कि बच्ची को किसी ने अगवा नहीं किया था बल्कि वह खेलते-खेलते हुए नदी तक पहुँच गई थी। वहीं मामले से संबंधित दोनों परिवारों के बीच पूर्व से विवाद होने की चर्चायें भी सामने आई।
फाइल फोटो।
इस बीच रविवार 24 अक्टूबर की देर शाम थाना के सामने एकत्र भीड़ ने कथित तौर पर बालक को गिरफ्तार करने और उसके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग को लेकर हंगामा करते हुए चक्का जाम शुरू कर दिया। कुछ देर बाद आक्रोशित भीड़ और असमाजिक तत्व पैदल मार्च करते हुए बालक के घर के सामने पहुंचकर उग्र नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया।
इस बवाल के दौरान उपद्रवियों के द्वारा तोड़फोड़ और आगजनी करने की घटना भी सामने आई है। सांप्रदायिक तनाव और हिंसा को बेकाबू होते देख कथित तौर पर पुलिस को हल्का बल भी प्रयोग करना पड़ा। तब कहीं जाकर किसी तरह हालात काबू में किये गये लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। इस घटनाक्रम के बाद से ही अमानगंज क़स्बा पुलिस छावनी में तब्दील है। एहतियात के तौर पर धार्मिक स्थलों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।
हिंसा की घटना के चलते अगले दिन सोमवार 25 अक्टूबर को अमानगंज क़स्बा की अधिकाँश दुकानें बंद रहीं। फिलहाल वहां शांति है और स्थिति सामान्य है लेकिन तनाव अभी भी बरक़रार है। पन्ना जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना ने बताया कि अमानगंज के बाद बच्ची का पन्ना जिला चिकित्सालय में भी मेडीकल परीक्षण कराया गया उसमें भी रेप होना नहीं पाया गया। आपने बताया अफवाह फैलाकर जन भावनाएं भड़काने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। पुलिस अधीक्षक ने अमानगंज में पूर्णतः शांति और स्थिति सामान्य होने का दावा किया है। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले के गुनौर अनुविभाग अंतर्गत महज छह माह के अंदर सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की यह दूसरी बड़ी वारदात है। इसके पूर्व गुनौर में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाते हुए तोड़फोड़ की गई थी।

पन्ना : लापता वृद्ध का 48 घण्टे बाद जंगल में मिला शव, पशु तस्करों पर जघन्य हत्या का आरोप

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पन्ना में बकरी पालक वृद्ध बाटू प्रजापति के शव के पोस्टमार्टम के दौरान मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी और मृतक के परिजन।

*   पशुपालक की हत्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने आज पुनः किया चक्का जाम

*   हत्या की वारदात में शामिल आरोपियों की झोपड़ियां वन और राजस्व विभाग ने गिराईं

पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय से सटे शहीदन के जंगल से लापता वृद्ध बकरी पालक बाटू प्रजापति 60 वर्ष निवासी ग्राम पुरुषोत्तमपुर 48 घण्टे बाद आज सुबह जंगल में ही मृत अवस्था में मिला। इसी के गांव में रहने वाले कतिपय शातिर पशु तस्करों पर वृद्ध की बड़ी बेरहमी के साथ धारदार हथियार से हमला कर हत्या करने का आरोप है। जंगल में बकरी चराने गए वृद्ध के साथ अनहोनी होने की आशंका शुरू से ही जताई जा रही थी। पुलिस ने हत्या की इस जघन्य वारदात में शामिल कुछ आरोपियों को तत्परता से हिरासत में ले लिया है।
लापता बकरी पालक वृद्ध बाटू प्रजापति सोमवार को पन्ना के समीप शहीदन के जंगल में मृत अवस्था में मिला।
पशु तस्करों के इस क्रूरतापूर्ण कृत्य से उपजे जबर्दस्त आक्रोश और तनाव के चलते ग्रामीणों ने आज पुनः पुरुषोत्तमपुर पेट्रोल पम्प के सामने पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। दोपहर करीब दो बजे से शुरू हुआ चक्का जाम देर शाम तक चला। इस बीच प्रदर्शनकारियों की मांग पर वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने और आक्रोशित ग्रामीणों ने हत्या की वारदात में शामिल आरोपियों के झोपड़ी-कच्चे मकानों को ध्वस्त कर दिया। हत्या की वारदात को लेकर ग्राम पुरुषोत्तमपुर समेत आसपास के इलाके में गम और गुस्से का माहौल निर्मित है। जिसे देखते हुए ग्राम पुरुषोत्तमपुर में पुलिस बल को तैनात किया गया है। पीड़ित परिवार से जुड़े लोगों ने बताया, वृद्ध के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार मंगलवार की सुबह किया जाएगा।
वृद्ध बकरी पालक का 48 घंटे बाद शव मिलने पर विलाप करते हुए घर की महिलायें।
जिला मुख्यालय पन्ना से सटे ग्राम पुरुषोत्तम निवासी बाटू प्रजापति 60 वर्ष शनिवार 23 अक्टूबर की सुबह लगभग 9 बजे रोज की तरह अपनी 27 नग बकरियां लेकर उन्हें चराने के लिए घर के पीछे स्थित शहीदन के जंगल के लिए निकला था। राघवेन्द्र उर्फ़ बब्लू प्रजापति ने बताया कि आमतौर पर उसके पिता दोपहर 12 बजे के आसपास वापस घर लौट आते थे। लेकिन कल बाटू जब दोपहर 1 बजे के बाद भी वापस नहीं लौटे तो उनके बेटों के द्वारा वृद्ध पिता की तलाश शुरू की गई। दिनभर खोजबीन करने के बाद भी वृद्ध और बकरियों का जब कोई सुराग नहीं लगा तो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित और परेशान परिजनों ने शाम लगभग 7 बजे कोतवाली थाना पन्ना पुलिस को सूचना दी। परिजनों के द्वारा बाटू की गुमशुदगी को लेकर क्षेत्र में सक्रिय पशु चोरों/तस्करों पर संदेह जताया गया। मामले को गंभीरता से लेकर रात्रि में ही पुलिस एवं पीड़ित परिजनों के द्वारा संयुक्त रूप से तलाश की गई। लेकिन कुछ भी पता नहीं चल सका।
वृद्ध को लेकर कई तरह की आशंकाओं से घिरे चिंतित परिजनों व ग्रामीणों ने रविवार 24 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे अचानक पुरुषोत्तमपुर पेट्रोल पम्प के सामने पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर चक्का जाम कर दिया था। पुलिस के खिलाफ उग्र नारेबाजी कर रहे ग्रामीणों के द्वारा लापता वृद्ध के संबंध में गांव के ही कुछ ख़ानाबदोश परिवारों पर संदेह जताते हुए उन्हें हिरासत में लकेर सख्ती से पूंछतांछ करने की मांग की गई। पुलिस अधिकारियों एवं पन्ना तहसीलदार सुधीर कुशवाहा की समझाइश के बाद दोपहर 1 बजे चक्काजाम समाप्त हुआ। तब कहीं जाकर जंगल में सघन सर्चिंग शुरू हो सका।
इस बीच पुलिस ने कतिपय संदेहियों को हिरासत में लेकर उनसे सख्ती के साथ पूंछतांछ जारी रखी। रविवार को पुलिस की कई टीमें, वृद्ध के परिजन, ग्रामीण और स्वयं पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना जंगल के चप्पे-चप्पे की ख़ाक छानते रहे लेकिन देर शाम तक लापता वृद्ध का कोई सुराग नहीं लग सका। हालांकि सघन तलाशी अभियान के दौरान लापता पशुपालक की 19 बकरियां 24 घंटे बाद स्वतः ही वापस लौट आईं। और शेष 8 बकरियों में एक बकरी जंगल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हिरासत में लिए गए संदेहियों के द्वारा पूंछतांछ के दौरान किए गए अहम खुलासे के आधार पर सोमवार 25 अक्टूबर की सुबह पुलिस टीमों ने पुनः जंगल में सर्चिंग अभियान चलाया। इस दौरान सुबह करीब 10 बजे जंगल में झाड़ियों के समीप लापता वृद्ध मृत अवस्था में मिला। वृद्ध के सिर पर धारदार हथियार के कई निशान पाए गए। बकरी पालक बाटू प्रजापति की धारदार हथियार से जघन्य हत्या करने वाले आरोपी ग्राम पुरुषोत्तमपुर के ही पूर्व संदेही परिवारों के सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया है। जिसकी पुष्टि स्वयं पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना ने की है।
हत्या की वारदात में शामिल गांव के ही पशु तस्करों के घरों को गिराने की मांग को लेकर पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर लगाए गए चक्का जाम का दृश्य।
वृद्ध की निर्ममता पूर्वक हत्या किये जाने की खबर आने के बाद ग्राम पुरुषोत्तमपुर के तनाव फ़ैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों-महिलाओं ने दोपहर करीब 2 बजे आज पुनः पेट्रोल पम्प के सामने पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग पर हत्या की वारदात में शामिल आरोपियों की तकरीबन आधा दर्जन झोपड़ियों-कच्चे मकानों को वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम और आक्रोशित ग्रामीणों के द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। बेहद तनाव और उबाल के बीच शाम लगभग 6 बजे चक्का जाम समाप्त होने पर पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर आवागमन बहाल हो सका।

इनका कहना है –

“ग्राम पुरुषोत्तमपुर में अतिक्रमण कर बनाए गए कुछ झोपड़ियों-कच्चे मकानों को वन एवं राजस्व विभाग की संयुक्त कार्यवाही में जेसीबी मशीन से तोड़ा गया है। मकानों की कुल संख्या मालूम नहीं है, लेकिन अतिक्रमण जिस भूमि में था वह वन विभाग की जमीन है। इसलिए उनसे जानकारी मिल सकती है।”

जे.पी. धुर्वे, अपर कलेक्टर, जिला पन्ना।

“ग्राम पुरुषोत्तमपुर में अतिक्रमण कर बनाए गए कुछ लोगों की झोपड़ियों-कच्चे मकानों को गिराया गया है। अतिक्रमण वन भूमि में नहीं बल्कि राजस्व भूमि में था। हमारा स्टॉफ तो मौके पर संयुक्त सीमांकन की कार्यवाही के लिए गया था।”

गौरव शर्मा, डीएफओ, उत्तर वन मंडल, पन्ना।

“वृद्ध बकरी पालक की हत्या की वारदात में शामिल कतिपय आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं, जिनकी अति शीघ्र गिरफ्तारी घोषित कर बकायदा अंधे क़त्ल की वारदात का खुलासा किया जाएगा। ग्राम पुरुषोत्तमपुर में माहौल पूरी तरह सामान्य और शांत है।”

धर्मराज मीना, पुलिस अधीक्षक, जिला पन्ना।

पशुपालक समेत बकरियां 36 घण्टे से लापता, आक्रोशित ग्रामीणों ने पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर किया चक्का जाम

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लापता बकरी पालक की तलाश को लेकर पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर किये गए चक्का जाम प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भागीदारी की।

*   पशु तस्करों की घटना में संलिप्तता को लेकर संदेह से घिरे ग्रामीणों में जबर्दस्त आक्रोश

*   लापता वृद्ध की तलाश में एसपी समेत पुलिस टीमें और परिजन छान रहे जंगल की ख़ाक

*   कतिपय संदेहियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, लापता 19 बकरियां स्वतः वापस लौटीं लेकिन वृद्ध बेसुराग

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय के आसपास पशु चोरी की लगातार बढ़ती घटनाओं से परेशान पशु पालकों में व्याप्त रोष आज फूट पड़ा। पुरुषोत्तमपुर ग्राम से वृद्ध बकरी पालक समेत 27 बकरियों के रहस्मय तरीके से लापता होने की घटना को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों-महिलाओं ने सड़क पर उतरकर पुलिस के खिलाफ जबर्दस्त तरीके से हल्ला बोलते हुए पन्ना के नजदीक पुरुषोत्तमपुर पेट्रोल पम्प के सामने पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। लापता पशु पालक बाटू प्रजापति 60 वर्ष की सुरक्षा को लेकर अनहोनी की आशंका से घिरे पीड़ित परिवारजनों ने पुलिस के रवैये को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
सुबह लगभग 10 बजे से शुरू हुआ चक्काजाम दोपहर करीब 1 बजे तक चला। इस दौरान वाहनों का आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध रहा। सड़क के दोनों तरफ बड़ी संख्या में वाहन और उनमें सवार लोग फंसे रहे। पुलिस अधिकारियों एवं पन्ना तहसीलदार के द्वारा वृद्ध की खोजबीन के लिए सघन सर्चिंग अभियान चालाने का आश्वासन देने के बाद दोपहर करीब 1 बजे बमुश्किल प्रदर्शनकारी ग्रामीणों-महिलाओं ने चक्का जाम समाप्त किया। तब कहीं जाकर वाहनों का आवगमन बहाल हो सका।
लापता बकरी पालक वृद्ध बाटू प्रजापति।
जिला मुख्यालय पन्ना से सटे ग्राम पुरुषोत्तम निवासी बाटू प्रजापति 60 वर्ष शनिवार 23 अक्टूबर की सुबह लगभग 9 बजे रोज की तरह अपनी 27 नग बकरियां लेकर उन्हें चराने के लिए घर के पीछे स्थित शहीदन के जंगल के लिए निकला था। राघवेन्द्र उर्फ़ बब्लू प्रजापति ने बताया कि आमतौर पर उसके पिता दोपहर 12 बजे के आसपास वापस घर लौट आते थे। लेकिन कल बाटू जब दोपहर 1 बजे के बाद भी वापस नहीं लौटे तो उनके बेटों के द्वारा वृद्ध पिता की तलाश शुरू की गई।
दिनभर खोजबीन करने के बाद भी वृद्ध और बकरियों का जब कोई सुराग नहीं लगा तो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित और परेशान परिजनों ने शाम लगभग 7 बजे कोतवाली थाना पन्ना पुलिस को सूचना दी। परिजनों के द्वारा बाटू की गुमशुदगी को लेकर क्षेत्र में सक्रिय पशु चोरों/तस्करों पर संदेह जताया गया। मामले को गंभीरता से लेकर रात्रि में ही पुलिस एवं पीड़ित परिजनों के द्वारा संयुक्त रूप से तलाश की गई। हालांकि कई घण्टे तक जंगल की ख़ाक छानने के बाद भी कुछ पता नहीं चल सका।
वृद्ध की तलाश में जंगल की ख़ाक चांटे हुए पुलिस जवान।
इधर गुजरते समय के साथ वृद्ध को लेकर कई तरह की अनहोनी की आशंकाओं से घिरे चिंतित-परेशान परिजनों व महिलाओं ने रविवार 24 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे अचानक पुरुषोत्तमपुर पेट्रोल पम्प के सामने पन्ना-पहाड़ीखेरा मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। पुलिस के खिलाफ उग्र नारेबाजी कर रहे ग्रामीणों-महिलाओं के द्वारा लापता वृद्ध के संबंध में गांव के ही कुछ ख़ानाबदोश परिवारों पर संदेह जताते हुए उन्हें हिरासत में लकेर सख्ती से पूंछतांछ करने की मांग की गई।
चक्का जाम के चलते निर्मित बेहद तनाव पूर्ण स्थिति के मद्देनजर पुलिस के द्वारा प्रदर्शनकारी ग्रामीणों-महिलाओं की मांग के अनुसार पड़ताल करने के लिए चक्का जाम को समाप्त करने की समझाइश दी गई। ताकि चक्का जाम के चलते कानून व्यवस्था के मद्देनजर तैनात किये गए पुलिस कर्मी भी सर्चिंग अभियान में सहयोग कर सकें। पुलिस अधिकारियों एवं पन्ना तहसीलदार सुधीर कुशवाहा की समझाइश के बाद बमुश्किल दोपहर 1 बजे चक्काजाम समाप्त हुआ।
पन्ना से सटे शहीदन के जंगल में वृद्ध की तलाश में जुटे पुलिस अधिकारियों के वाहन।
अपुष्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस के द्वारा संदेही परिवार के कतिपय युवकों को पुलिस के द्वारा हिरासत में लेने के बाद दोपहर में लापता 19 नग बकरियां 24 घण्टे बाद स्वतः ही वापस लौट आईं। वहीं जंगल में पुलिस टीमों की सर्चिंग के दौरान शेष 8 बकरियों में एक बकरी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई। कथित तौर पर मृत बकरी पत्थरों के नीचे दबी थी और उसका मुंह बंधा हुआ था। लापता वृद्ध की तालाश में आज दोपहर के समय शहीदन के जंगल में पुलिस टीमों और पीड़ित परिजनों के साथ स्वयं पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना जंगलों की ख़ाक छानते रहे। हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस के सघन तलाशी अभियान को सफलता नहीं मिल सकी थी। इस संबंध में आधिकारिक तौर पर जानकारी प्राप्त करने के लिए पन्ना पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।
बकरी पालक के रहस्मय परिस्थितियों में लापता होने से की सूचना मिलने पर उनके घर के बाहर चिंतित मुद्रा में बैठे रिश्तेदार।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में पुलिस से संबंधित प्रकरणों में कार्यवाही को लेकर पीड़ित पक्ष खासकर आमजन को लगातार सड़कों पर उतरकर चक्का जाम या फिर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। तीन दिन पूर्व भारतीय जनता युवा मोर्चा धरमपुर मण्डल के मंत्री दुर्गेश सोनकर की आत्महत्या को लेकर पुलिस के रवैये से क्षुब्ध ग्रामीणों ने नरदहा में कालिंजर-चित्रकूट (बघेलाबारी) मार्ग पर चक्का जाम किया था। दुर्गेश को न्याय दिलाने के लिए अगले दिन अजयगढ़ के माधौगंज तिराहा पर पुनः चक्का जाम कर प्रदर्शन किया गया था। इस मामले में पुलिस ने दोनों ही स्थानों पर चक्का जाम को लेकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अलग-अलग थानों में दो प्रकरण पंजीबद्ध किये हैं।

भाजयुमो नेता सुसाइड केस : प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अब अजयगढ़ थाना में भी FIR दर्ज

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फाइल फोटो।

*   अजयगढ़ के माधौगंज तिराहा पर वाहन में शव रखकर किया था चक्काजाम

*   टीआई अजयगढ़ का दावा, पुलिस की रिपोर्ट पर 20-25 अज्ञात लोगों को बनाया आरोपी

*   नरदहा में चक्का जाम करने के मामले में धरमपुर थाना में भी दर्ज है प्रकरण

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल धरमपुर के मंत्री दुर्गेश सोनकर की आत्महत्या को लेकर कथित तौर पर पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। दुर्गेश की भाभी के साथ दबंगों के द्वारा बदसलूकी करने जैसे गंभीर मामले में पुलिस के द्वारा रिपोर्ट दर्ज न करने के कारण दुखी और परेशान होकर उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में आरोपियों को बचाने के मकसद से जानबूझकर उदासीनता बरतने के आरोपों से घिरी पन्ना जिले की पुलिस अब दुर्गेश को न्याय दिलाने के लिए चक्का जाम कर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ तत्परता से सख्त कार्रवाई करने को लेकर चर्चा में आ गई है।
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जिले के धरमपुर थाना के बाद अजयगढ़ थाना में भी चक्का जाम कर आम रास्ता अवरुद्ध करने का मामला पंजीबद्ध हुआ है। अजयगढ़ थाना के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुजूर ने रडार न्यूज़ को मोबाइल पर जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस की रिपोर्ट पर धारा 147, 341,149 ताहि. के तहत दर्ज प्रकरण में 20-25 अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। इसके पूर्व नरदहा चौकी प्रभारी मिट्ठूलाल कोल की रिपोर्ट पर धरमपुर थाना में भी इन्हीं धाराओं के तहत 40-50 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध नरदहा में कालिंजर-चित्रकूट (बघेलाबारी) मार्ग पर चक्का जाम करने का मामला दर्ज हुआ था।
पन्ना जिले के नरदहा ग्राम में भाजयुमो नेता के आत्महत्या करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। (फ़ाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, बुधवार 20 अक्टूबर की अल सुबह भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल धरमपुर के मंत्री दुर्गेश सोनकर का शव उनके अपने घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला था। युवा दलित नेता के आत्मघाती कदम उठाने को लेकर मृतक के भाई दिनेश सोनकर एवं युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष शिवकांत विश्वकर्मा ने पत्रकारों से चर्चा में दुर्गेश की मौत के लिए पुलिस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। इस घटना को लेकर पुलिस के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश के चलते नरदहा में ग्रामीणों ने पुलिस चौकी में हंगामा करने के बाद कालिंजर-चित्रकूट (बघेलाबारी) मार्ग पर चक्का जाम कर वाहनों का आवागमन पूर्णतः अवरुद्ध कर दिया था।
नरदहा में सुबह करीब 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक चले लंबे चक्का जाम को खुलवाने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की दोनों मांगों, दबंगों के खिलाफ बदसलूकी का प्रकरण दर्ज करने एवं जानबूझकर रिपोर्ट न लिखने वाले नरदहा व धरमपुर थाना प्रभारी को हटाने की कार्यवाही का आश्वासन दिया था। लेकिन दोनों ही मांगों के संबंध में अब तक क्या कार्यवाही की गई है, पुलिस के अधिकारी इस सबंध में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। जिससे दिए गए आश्वासन पर पुलिस के अधिकारियों की कथनी और करनी को लेकर संशय पैदा होने के साथ उनकी मंशा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

न्याय के लिए शव को पन्ना लाने की थी तैयारी

पुलिस चौकी नरदहा का घेराव कर हंगामा करते हुए ग्रामीणजन। (फ़ाइल फोटो)
भाजयुमो नेता दुर्गेश की मौत को लेकर पुलिस के रवैये से नाराज लोगों ने अजयगढ़ में शव के पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार 21 अक्टूबर की सुबह स्थानीय माधौगंज तिराहा पर वाहन में शव रखकर पुनः चक्का जाम किया था। अजयगढ़ थाना में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरण जिसकी रिपोर्ट कथित तौर पर पुलिस के द्वारा लिखवाना बताया गया, जिसमें उल्लेख है कि सुबह 9:50 बजे एक वाहन में शव रखकर माधौगंज तिराहा पर आम रोड पर 20-25 लोगों ने चक्का जाम कर आवागमन अवरुद्ध कर दिया था। बीच सड़क पर मृतक के शव को रखकर प्रदर्शनकारी कह रहे थे कि, शव लेकर पन्ना कलेक्टर के पास जाएंगे, हमें न्याय नहीं मिला। चक्का जाम के दौरान उक्त लोग पुलिस के खिलाफ उग्र नारेबाजी भी कर रहे थे।
(फाइल फोटो)
प्रशासनिक अधिकारियों के समझाइश देने के काफी समय बाद सुबह करीब 10:30 प्रदर्शनकारियों के द्वारा चक्का जाम समाप्त किया गया। इस मामले में प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज रिपोर्ट में फरियादी पुलिस/मध्य प्रदेश शासन या फिर अन्य कोई व्यक्ति है इसे लेकर कई तरह की चर्चायें हैं। हालांकि अजयगढ़ थाना प्रभारी अरविंद कुजूर की मानें तो रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज कराई है। बहरहाल दुर्गेश के सुसाइड केस में शुरू से आमजन की आलोचना, आक्रोश और असंतोष का सामना कर रही पन्ना पुलिस के द्वार प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर आश्वासन के बाद भी कार्यवाही न करने से लोग खासे हैरान हैं। चिंताजनक बात यह है कि, आमजन में पुलिस के प्रति भरोसे का आभाव पहले से ही है, ऐसे में अगर आश्वासन देने के बाद भी कार्यवाही नहीं होगी तो इसका विपरीत असर पुलिस की साख पर पड़ना तय माना जा रहा है।

हम पत्रकारों के नेतृत्वकर्ता कौन है ?

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सांकेतिक तस्वीर।

ये चापलूसी कर रहे हैं, दलाली कर रहे हैं या पत्रकारिता कर रहे हैं?

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पंडित प्रदीप मोदी (साहित्यकार/स्वतंत्र पत्रकार) सम्पर्क- 9009597101

इन दिनों आम जनता के बीच हिन्दी पत्रकारिता बड़ी ही हास्यास्पद स्थिति में आ खड़ी हुई हैं। कमोबेश यह स्थिति सभी जगह बनी हुई है। एक अखबार पर, एक पत्रकार पर भ्रष्ट व्यवस्था हमलावर होती है तो पत्रकारों के नेतृत्वकर्ता और समूचा पत्रकार जगत तमाशबीन बनकर ताली बजाने के अलावा कुछ नहीं करता, पता नहीं ऐसी स्थिति पर पत्रकारों के नेतृत्वकर्ताओं को शर्म क्यों नहीं आती ? सवाल तो उठेगा कि आखिर हम पत्रकारों के नेतृत्वकर्ता कौन है ? ये व्यवस्था के पांव में लोट लगाकर दलाली रहे हैं, चापलूसी कर रहे हैं, या पत्रकारिता कर रहे हैं ?
आए दिन सच्चे पत्रकारों को दबाने और कुचलने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन पत्रकार समाज संगठित होकर प्रतिकार तक नहीं कर पा रहा है, क्यों ? यह क्यों..? चुगली कर रहा है कि पत्रकार समाज,शासन-प्रशासन के पट्टाधारी दलालों को अपना पदाधिकारी चुनकर नेतृत्व सौंप देता है और ये पट्टाधारी दलाल व्यवस्था के साधन बनकर अपने ही समाज के सदस्यों को लुटने-पिटने को अकेला छोड़ देते हैं।
कहा गया है अकेली कुल्हाड़ी कभी वृक्ष नहीं काट सकती, जब तक कि उसमें वृक्ष की लकड़ी का हत्था ना लग जाए तो क्या प्रेस जगत के नेतृत्वकर्ता लकड़ी का हत्था बनकर पत्रकारिता के वृक्ष को काटने का अक्षम्य अपराध कर रहे हैं ? वैसे तो चारों ओर भ्रष्ट व्यवस्था द्वारा निर्भीक निष्पक्ष पत्रकारों को कुचलने का दमन चक्र चल रहा है, लेकिन इंदौर में दो अखबारों पर हुए हमलों ने पत्रकार जगत के नेतृत्वकर्ताओं की पोल खोल कर रख दी।
संझा लोकस्वामी और खुलासा फर्स्ट, ये दो अखबार शासन-प्रशासन के गलियारों में चलने वाली गतिविधियों को जनता के बीच लाने के लिए पहचाने जाते हैं। संझा लोकस्वामी को दो साल पहले तबाह कर दिया गया और अब खुलासा फर्स्ट को तबाह करने के लिए भ्रष्ट अधिकारियों ने कमर कसी है।लोकस्वामी को बर्बाद किया, तब भी प्रेस जगत के नेतृत्वकर्ता मुंह में दही जमाकर बैठे रहे और अब भ्रष्ट अधिकारी खुलासा फर्स्ट को बर्बाद करने की मंशा जाहिर कर रहे है, तब भी प्रेस जगत के नेतृत्वकर्ता तमाशा देख रहे हैं, ताली बजा रहे हैं। प्रेस जगत के नेतृत्वकर्ता, पत्रकारों के, प्रेस प्रतिष्ठानों के संरक्षण एवं समर्थन में खड़े नहीं हो पा रहे हैं तो कहना होगा ये पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं, दलाली कर हैं तथा पागल हाथी बनकर घर की ही फौज मारने का काम कर रहे हैं।
पत्रकार जगत को संगठित होकर अपने नेतृत्वकर्ताओं से सवाल जरूर करना चाहिए कि वे पत्रकारिता कर रहे हैं या भ्रष्ट अधिकारियों की दलाली कर रहे हैं ? पत्रकारों के नेतृत्वकर्ता अपने ही पत्रकार साथियों के पक्ष में आकर खड़े नहीं हो पा रहे हैं तो ये समाज के पक्ष में, समाज में रहने वाली जनता के पक्ष में कैसे खड़े रहते होंगे ? खुलासा फर्स्ट पर हुए हमले के बाद भी प्रेस जगत के नेतृत्वकर्ताओं का मौनी बाबा बने रहना, बता गया पत्रकारों के नेतृत्वकर्ता पत्रकारिता नहीं कर रहे हैं, अपितु भ्रष्ट अधिकारियों की दलाली कर रहे हैं।

 

पंडित प्रदीप मोदी।

*डिस्क्लेमर – इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Radar news उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार Radar news के नहीं हैं तथा Radar news उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

भाजयुमो नेता की आत्महत्या का मामला : चक्का जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण

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पन्ना जिले के नरदहा ग्राम में भाजयुमो नेता के आत्महत्या करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। (फ़ाइल फोटो)

*   नरदहा चौकी प्रभारी की रिपोर्ट पर आधा सैंकड़ा अज्ञात व्यक्तियों को बनाया आरोपी

*   धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी को हटाने की मांग को लेकर किया था चक्काजाम

  भाजयुमो नेता की भाभी के साथ दबंगों के अभद्रता करने पर पुलिस ने नहीं लिखी थी रिपोर्ट

*   पुलिस के रवैये से परेशान होकर युवा दलित नेता ने फांसी लगाकर कर ली थी आत्महत्या

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बीते दिवस भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल धरमपुर के मंत्री दुर्गेश सोनकर ने कथित तौर पर पुलिस के मनमानी पूर्ण रवैये परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। युवा नेता के द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबर आने के बाद बुधवार 20 अक्टूबर को जिले के सीमावर्ती ग्राम नरदहा में पुलिस के खिलाफ जबर्दस्त जनाक्रोश देखने को मिला। आक्रोशित ग्रामीणों ने पहले पुलिस चौकी नरदहा का घेराव किया और फिर चौकी के ही सामने कालिंजर-चित्रकूट (बघेलाबारी) मार्ग पर चक्का जाम कर दिया था। मुख्य मार्ग पर ट्रैक्टर व अन्य वाहन लगाकर चक्का जाम करके वाहनों का आवागमन अवरुद्ध करने एवं यात्रियों को असुविधा पहुँचाने के मामले में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया है।
नरदहा चौकी प्रभारी एएसआई मिट्ठूलाल कोल की लिखित रिपोर्ट पर धरमपुर थाना में 40-50 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 246/21 धारा 341,147,149 आईपीसी के तहत प्रकरण पंजीबद्ध गया किया है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की वीडियो रिकार्डिंग कराई है जिसके आधार पर आरोपियों की पहचान करने की बात कही जा रही है। एएसआई मिट्ठूलाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चक्का जाम लगाकर वाहनों का आवागमन अवरुद्ध करके भीड़ में मौजूद लोग काफी उत्तेजित थे और जमकर नारेबाजी कर रहे थे। इस कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। चक्काजाम में फंसे वाहनों में कुछ असहाय एवं बीमार व्यक्ति तड़प रहे थे जिन्हें तत्काल इलाज नहीं मिल सका। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा भीड़ को समझाने के बाद चक्का जाम खोला गया।
पुलिस चौकी नरदहा का घेराव कर हंगामा करते हुए ग्रामीणजन। (फ़ाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि कथित तौर पर पुलिस के रवैये से व्यथित और परेशान युवा नेता दुर्गेश सोनकर के द्वारा आत्महत्या करने के मामले में धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी को हटाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारियों ने कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर लगभग 8 घंटे तक चक्का जाम किया था।

क्या है पूरा मामला

ग्राम नरदहा में दबंगों के द्वारा भारतीय जनता युवा मोर्चा धरमपुर मण्डल के दलित नेता दुर्गेश सोनकर की भाभी के साथ विगत दिनों कथित तौर पर अभद्रता की गई थी। युवा नेता अपनी भाभी को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने नरदहा चौकी व धरमपुर थाना गया लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। उलटा पुलिस ने महिला के ही खिलाफ मारपीट का मामला पंजीबद्ध कर लिया। कथित तौर पुलिस के इस रवैये से व्यथित और परेशान युवा नेता दुर्गेश सोनकर ने 19-20 अक्टूबर की रात अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के भाई दिनेश सोनकर ने इस घटना के पीछे के कारणों की जानकारी पत्रकारों को दी थी।

आश्वासन देने के बाद नहीं की कार्रवाई

चक्का जाम करने वाले प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध होने की जानकारी देते हुए अजयगढ़ एसडीओपी बी.एस. परिहार।
बताते चलें कि दुर्गेश की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों के द्वारा धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी को हटाने तथा दबंग आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग को लेकर कई घण्टे तक चक्का जाम करने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोनों ही मांगों पर कार्यवाही करने का आश्वासन देकर चक्का जाम समाप्त कराया था। लेकिन अब तक धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी को नहीं हटाया गया। जिससे पुलिस अधिकारियों की कथनी और करनी में अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जबकि धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी के ऊपर महिला की रिपोर्ट न लिखने और उसके साथ बदसलूकी करने वाले आरोपियों को कथित तौर पर बचाने जैसे गंभीर आरोप है। वहीं दुर्गेश के परिजन उसकी मौत के लिए साफ़ तौर पर पुलिस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पीड़ित परिजनों का आरोप है कि पुलिस के द्वारा भाभी की रिपोर्ट न लिखने से व्यथित होकर ही दुर्गेश ने आत्मघाती कदम उठाया है।
अजयगढ़ एसडीओपी बीएस परिहार से आज जब इस संबंध में सवाल पूंछा गया तो उन्होंने बताया कि रिपोर्ट न लिखने के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है, अगर कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच कराई जायेगी।

बुंदेलखण्ड के दो दिग्गजों के बीच हुई गुप्त मंत्रणा क्या गुल खिलाएगी ?

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पन्ना में पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले के आवास पर उनसे मुलाकत करते हुए पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया।

पन्ना में मुख्यमंत्री के आगमन के पूर्व कुसमरिया और महदेले के बीच हुई लंबी चर्चा

उपचुनाव प्रचार अभियान और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से नदारद हैं दोनों पूर्व मंत्री

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) किसी ने कहा है, एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। तस्वीरों की अपनी जुबान होती है। तस्वीरों को देख तो हर कोई लेता है मगर उसे वही पढ़ सकता है जिसे भावनाएं पढ़ना आता हो और उनमें छिपे मौन संदेश को जो सुन सकता हो। ऐसी ही एक तस्वीर बुधवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पन्ना आगमन से महज एक-दो घण्टे पहले सामने आई। जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है। बुन्देलखण्ड अंचल के भाजपा के दो दिग्गज पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया (बाबा जी) और पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले (जिज्जी) की गुप्त मंत्रणा की तस्वीर बाहर आने से सियासी हलचल बढ़ गई है।
पिछड़े वर्ग से आने वाले मध्य प्रदेश के दोनों क़द्दावर नेताओं के बीच बंद कमरे में क्या बात हुई इसे लेकर अटकलों-कयासों का दौर शुरू हो गया है। हर कोई अपने-अपने तरीके से जिज्जी और बाबा जी की मुलाकत के मायने निकाल रहा है। गौर करने वाली बात यह कि पन्ना में मौजूद रहने के बाद भी दोनों ही पूर्व मंत्रीद्वय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में कहीं नजर नहीं आए। जिसे लेकर भाजपा के अंदरखाने कई तरह की चर्चाएं हैं। पन्ना में पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले के सफरबाग स्थित निज निवास पर करीब डेढ़-दो घण्टे तक चली गुप्त मंत्रणा में डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया के अलावा एक-दो अन्य विश्वस्त लोगों के शामिल होने की अपुष्ट खबर मिली है।
प्रदेश में विधानसभा की सीटों व लोकसभा सीट पर चल रही उपचुनाव की प्रक्रिया के बीच भाजपा के इन दोनों दिग्गजों के बीच क्या चर्चाएं हुई इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मालूम होकि पन्ना से सटे सतना जिले की रैगांव विभानसभा सीट एवं बुंदेलखण्ड अंचल में आने टीकमगढ़ जिले की पृथ्वीपुर सीट पर हो रहे उपचुनाव दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके हैं। आमचर्चा है कि उपचुनाव के नतीजे प्रदेश की शिवराज सरकार को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ माह पूर्व में बुंदेलखण्ड अंचल की एक अन्य सीट दमोह में हुए विधानसभा के उपचुनाव में करारी हार का सामना कर चुकी शिवराज सरकार और भाजपा संगठन के लिए इस बार अघोषित तौर पर करो या मरो जैसी स्थिति है।
बाबजूद इसके कई दशकों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय जनता पार्टी के सीनियर एवं लोकप्रिय नेता डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और पूर्व मंत्री सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले अब तक न सिर्फ उपचुनाव प्रचार अभियान से नदारद हैं बल्कि दोनों ही दिग्गज पन्ना में रहते हुए भी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रहे। सर्व विदित है कि दोनों ही पूर्व मंत्री वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में अपना टिकिट काटे जाने की वजह प्रदेश नेतृत्व से काफी नाराज रहे हैं। सामाजिक कार्यक्रमों सक्रिय रहने के बावजूद पार्टी की गठितविधियों से इनकी दूरी को नाराजगी बरक़रार रहने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि दोनों ही दिग्गजों सार्वजानिक तौर पर इसका इजहार नहीं किया है। अब देखना यह है कि जिज्जी और बाबा जी की यह जुगलबंदी आने वाले दिनों क्या गुल खिलाती है।

MP : भाजयुमो के दलित नेता के आत्महत्या करने पर पुलिस के खिलाफ क्यों उपजा जनाक्रोश !

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पन्ना जिले के नरदहा ग्राम में भाजयुमो नेता के आत्महत्या करने से आक्रोशित ग्रामीणों ने कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। (फ़ाइल फोटो)

*  दबंगों के द्वारा भाभी के साथ अभद्रता करने पर पुलिस ने नहीं लिखी थी रिपोर्ट

*  पुलिस के रवैये और दबंगों की प्रताड़ना से परेशान होकर युवा नेता ने लगाई फांसी

*  पन्ना जिले के नरदहा ग्राम में कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर कई घंटे तक रहा चक्का जाम

*  धरमपुर थाना व पुलिस चौकी नरदहा प्रभारी को हटाने की ग्रामीणों ने उठाई मांग

*  पन्ना जिले में पुलिस की कार्यप्रणली को लेकर जनमानस में व्याप्त है असंतोष

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) शिवराज सरकार के सुराज और जनकल्याण के नारे के उलट पन्ना जिले में प्रशासनिक अराजकता और पुलिस की मनमानी अपने चरम पर है। जिससे परेशान आम आदमी को इंसाफ पाने के लिए आए दिन सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है। धरमपुर थाना क्षेत्र के नरदहा ग्राम का घटनाक्रम इसका एक उदाहरण मात्र है। जहां दबंगों के द्वारा भारतीय जनता युवा मोर्चा धरमपुर मण्डल के दलित नेता की भाभी के साथ कथित तौर पर अभद्रता की गई। युवा नेता अपनी भाभी को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराने नरदहा चौकी व धरमपुर थाना गया लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। उलटा पुलिस ने महिला के ही खिलाफ मारपीट का मामला पंजीबद्ध कर लिया। कथित तौर पर पुलिस के इस रवैये से व्यथित और दबंगों की प्रताड़ना से परेशान युवा नेता दुर्गेश सोनकर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
बुधवार की सुबह जब लोगों को इस घटना के बारे में पता चला तो जिले के सीमावर्ती इलाके में बेहद तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने नरदहा चौकी के सामने जमकर हंगामा करते हुए कालिंजर-चित्रकूट मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। सुबह 8 बजे से जारी चक्का जाम शाम लगभग 5 बजे तक चला। इस दौरान सड़क के दोनों तरफ सैंकड़ों वाहन फंसे रहे। विरोध-प्रदर्शन को अपना समर्थन देने क्षेत्र के भाजपा व कांग्रेस के नेतागण भी मौके पर पहुंचे।
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों व पीड़ित परिजनों ने पूरे मामले को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी को तत्काल हटाने एवं अभद्रता करने वाले दबंगों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों के अड़ने से कई घण्टे तक गतिरोध बना रहा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के द्वारा दोनों ही मांगों पर कार्यवाही करने का आश्वासन देने के बाद कई घण्टों से चल रहा चक्का जाम शाम करीब 5 बजे बमुश्किल समाप्त हुआ। तब कहीं जाकर उक्त मार्ग पर वाहनों का आवागमन बहाल हो सका।
पुलिस चौकी नरदहा का घेराव कर हंगामा करते हुए ग्रामीणजन।
पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील के सीमावर्ती दूरस्थ ग्राम नरदहा में 19-20 अक्टूबर की दरम्यानी रात भाजयुमो धरमपुर मंडल के मंत्री दुर्गेश सोनकर ने अपने ही घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बुधवार की अलसुबह जब दुर्गेश के परिजनों ने उसे फांसी के फंदे पर लटका हुआ देखा तो कोहराम मच गया। कुछ ही देर में नरदहा समेत सीमावर्ती इलाके में जबर्दस्त आक्रोश का माहौल निर्मित हो गया। स्तब्ध करने वाली इस घटना का पता चलने पर क्षेत्र के भाजपा नेता मौके पर पहुँच गए। सुबह 8 बजे तक बड़ी तादाद में एकत्र आक्रोशित ग्रामीणों व शोक संतृप्त परिजनों ने दुर्गेश की मौत के लिए पुलिस और दबंगों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए नरदहा चौकी का घेराव कर हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस चौकी के सामने लगातार बढ़ती भीड़ ने मौके पर कालिंजर-चित्रकूट मुख्य मार्ग पर वाहन खड़े करके और सड़क पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। जिससे बेहद तनाव पूर्ण स्थिति निर्मित हो गई। हालात को संभालने के लिए पन्ना और अजयगढ़ से पहुंचे पुलिस अधिकारीयों ने प्रदर्शनकारियों काफी समझाया लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग रहे। परिणामस्वरूप गतिरोध के चलते चक्का जाम कई घण्टे तक चलता रहा।
नरदहा पहुंचकर शोक संतृप्त परिवार की महिलाओं के समक्ष संवेदना व्यक्त कर उनकी मांगों को अपना समर्थन देते हुए वरिष्ठ नेता भरत मिलन पाण्डेय।
दोपहर के समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं अजयगढ़ जनपद पंचायत के अध्यक्ष भरत मिलन पाण्डेय समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं ने नरदहा पहुंचकर पीड़ित परिवार के साथ एकजुटता दिखाते हुए उनकी मांगों का समर्थन किया। लगातार बढ़ते रोष के के कारण स्थिति बिगड़ने की आशंका और पन्ना जिला मुख्यालय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आगमन के मद्देनजर बवाल को शांत कराने की गंभीर पहल पुलिस के द्वारा की गई। शाम करीब 5 बजे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने प्रदर्शनकारियों से बात करके उनकी दोनों मांगों, धरमपुर थाना व नरदहा चौकी प्रभारी को हटाने और अभद्रता करने वाले दबंगों के खिलाफ कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया। तब कहीं जाकर कई घण्टे से जारी चक्का जाम बमुश्किल समाप्त हो सका।
मृतक के भाई दिनेश सुनकर ने बताया कि उनके घर की महिला के साथ गांव के ही कुछ दबंगों ने दो दिन पूर्व बदसलूकी की थी। भाभी के साथ घटित घटना से आहत दुर्गेश सोनकर उन्हें लेकर रिपोर्ट लिखाने पुलिस चौकी नरदहा व धरमपुर थाना गया लेकिन पुलिस ने उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी। उलटा दुर्गेश की भाभी के ही खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। परिवार वालों का आरोप है कि पुलिस के द्वारा दबंग आरोपियों का बचाव करने और दो दिन तक रिपोर्ट न लिखने से परेशान होकर युवा नेता दुर्गेश सोनकर ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।

देर शाम बाइक की रोशनी में कराया पोस्टमार्टम

अजयगढ़ में देर शाम बाइक की रोशनी में पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम करवाते हुए पुलिसकर्मी।
दुर्गेश सोनकर की आत्महत्या के मामले में पुलिस पर जानबूझकर घोर उदासीनता बरतने के साथ-साथ हद दर्जे की संवेदनहीनता को लेकर भी लोगों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है। दरअसल, बुधवार को पन्ना में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आगमन पर उन्हें ऑल इज़ वैल वाली तस्वीर दिखाकर अपनी कारगुजारियों पर पर्दा डालने के इरादे से पुलिस ने सूर्यास्त के बाद देर शाम युवा नेता के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया। जिसके वीडियो सामने आने से लोग हैरान रह गए। अजयगढ़ के शव विच्छेदन गृह में युवा नेता की पार्थिव देह का पोस्टमार्टम बाइक की रोशनी में कराया गया। पुलिस के इस कृत्य को मृत शरीर के अपमान के तौर पर देखा जा रहा है। जिसकी चौतरफा तीखी आलोचना हो रही है। उल्लेखनीय है कि नरदहा के घटनाक्रम के संबंध में पन्ना के पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना से पुलिस का पक्ष जानने के लिए सम्पर्क किया गया लेकिन उनका मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ।