पोस्टमार्टम कराने के लिए शवों को अजयगढ़ के शव विच्छेदन गृह के अंदर ले जाते हुए परिजन।
* एक माह से लापता दोनों नाबालिगों की तलाश में जुटे थे परिजन
* पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना अंतर्गत लखनपुर सेहा के कुण्ड में मिले शव
पन्ना। (www.radarnews.in) जिस नाबालिग प्रेमी युगल की तलाश में परिजन व पुलिस एक माह से जुटी हुई थी, वह दोनों जंगल में स्थित कुण्ड में मृत पड़े मिले। इस खबर के आते ही जिले के अजयगढ़ एवं कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत सनसनी फ़ैल गई। दोनों शवों से तेज़ दुर्घन्ध उठ रही थी। प्रथम दृष्टया प्रेमी युगल के द्वारा जलप्रपात से नीचे छलांग लगाकर आत्महत्या करने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। घटना पर मर्ग कायम कर पुलिस व एफएसएल टीम ने जांच शुरू कर दी है। दोनों की पहचान पन्ना कोतवाली थाना क्षेत्र के निवासी के रूप में की गई।
प्राप्त जानकारी अनुसार शुक्रवार 26 नवम्बर को जंगल गए एक चरवाहे ने लखनपुर सेहा कुण्ड के पानी में दो अज्ञात शव उतराते हुए देखने की जानकारी अजयगढ़ थाना पुलिस को दी गई। अजयगढ़ पुलिस के द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से युवक और लड़की के शव को पानी से बाहर निकाला गया। शव मिलने की खबर फैलते ही प्रेमी युगल के परिजन और पन्ना कोतवाली थाना पुलिस भी मौके पर गई। परिजनों के द्वारा मृतकों की शिनाख्त की गई। मृत नाबलिग स्वजातीय थे और एक ही गांव के रहने वाले थे। अपुष्ट चर्चा है कि, दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की उनके जानकारी परिजनों को थी लेकिन उम्र कम होने के कारण परिजन फिलहाल विवाह के लिए राजी नहीं थे। करीब एक माह पूर्व नाबालिग प्रेमी युगल अचानक अपने घर से गायब हो गया। युवती के परिजनों के द्वारा उसके लापता होने की सूचना पुलिस को दी गई। जिस पर कोतवाली थाना पन्ना में दिनांक 26 अक्टूबर 2021 को आईपीसी की धारा 363 के तहत अपहरण का प्रकरण कायम किया गया था।
अजयगढ़ में शव विच्छेदन गृह के बाहर ऑटो रिक्शा में रखे प्रेमी युगल के शव।
पीड़ित परिजनों ने अपने स्तर पर लगातार दोनों की तलाश जारी रखी। इस बीच शुक्रवार 26 नवम्बर को जंगल गए एक चरवाहे के द्वारा लखनपुर सेहा कुण्ड के पानी में दो अज्ञात शव देखे गए। उसके द्वारा शवों की जानकारी अजयगढ़ थाना पुलिस को दी गई। जंगल में दो शव मिलने का पता चलते ही अनहोनी की आशंका से घिरे लापता 17 वर्षीय युवक व 15 वर्षीय लड़की के परिजन आनन-फानन मौके पर पहुँच गए। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि नाबालिग प्रेमी युगल ने लखनपुर जलप्रपात से नीचे कूदकर आत्महत्या की है। उल्लेखनीय है कि जलप्रपात का ऊपरी भाग पन्ना कोतवाली थाना एवं नीचे सेहा का इलाका अजयगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है। आज काफी ग़मगीन ग़मगीन माहौल में दोनों शवों का अजयगढ़ में पोस्टमार्टम कराया गया। जिसके बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इस मामले में अजयगढ़ थाना पुलिस के द्वारा मर्ग कायम कर अग्रिम कार्यवाही हेतु केश डायरी पन्ना कोतवाली थाना भेजने की बात कही जा रही है।
संविधान दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक पन्ना धर्मराज मीना ने अपने कार्यालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों के समक्ष संविधान की उद्देशिका एवं प्रावधानों को पढ़कर सुनाया।
* एसपी ऑफिस सहित जिले के सभी थानों-चौकियों में मनाया गया संविधान दिवस
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए हर साल 26 नवम्बर का दिन ख़ास होता है। दरअसल यही वह दिन है जब देश की संविधान सभा ने मौजूदा संविधान को विधिवत रूप से 26 नवम्बर 1949 को मौजूदा संविधान को अपनाया था। हालांकि इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू किया गया था। संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों में सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए 2015 से प्रत्येक वर्ष यह दिवस मनाया जाता है। मध्य प्रदेश शासन ने समस्त कार्यालयों में संविधान दिवस मनाए जाने के निर्देश दिए थे।
पुलिस अधीक्षक पन्ना धर्मराज मीना संविधान की उद्देशिका पढ़ते हुए।
शासन की मंशानुरूप आज दिनांक 26 नवम्बर को संविधान दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक पन्ना धर्मराज मीना के निर्देशानुसार जिले के समस्त पुलिस थानों-चौकियों एवं कार्यालयों में संविधान के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में संविधान की जानकारी साझा की गई। वहीं संविधान दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पन्ना में पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा द्वारा समस्त कार्यालीन अधिकारी-कर्मचारियों को भारतीय संविधान उद्देशिका एवं प्रावधानों को पढ़कर सुनाया गया तथा संविधान के महत्व की विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पुलिस अधीक्षक द्वारा संविधान की मंशा अनुरूप कार्य करने हेतु समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रेरित किया गया।
* जन जागरण अभियान के तहत पन्ना पहुंचे राज्यसभा सांसद ने किया अवैध रेत खदानों का निरीक्षण
* मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों, महंगाई-बेरोज़गारी आदि मुद्दों पर किया जन संवाद
* रेत माफिया के अत्याचार और शोषण का शिकार बने किसानों-ग्रामीणों ने सुनाई आपबीती
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि, भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष वीडी शर्मा और खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने रेत माफिया को संरक्षण देकर अपने निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन कराया है। रेत की लूट में इनकी हिस्सेदारी है और दोनों ने रेत से काली कमाई की है। उन्होंने यह बात पन्ना जिले में पत्रकारों से चर्चा में कही। जन जागरण अभियान के तहत पन्ना पहुंचे राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार 23 नवंबर को जिले की अजयगढ़ तहसील के दूरस्थ सीमावर्ती ग्रामों का दौरा किया। इस दौरान श्री सिंह ने अवैध रेत खदानों का निरीक्षण किया और स्थानीय ग्रामीणों से केन्द्र की मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों, महंगाई, बेरोजगारी आदि ज्वलंत मुद्दों पर संवाद भी किया।
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने जन जागरण अभियान के तहत अजयगढ़ क्षेत्र के ग्रामों का भ्रमण कर ग्रामीणों से मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों, महंगाई-बेरोज़गारी आदि मुद्दों पर जन संवाद किया।
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने अजयगढ़ क्षेत्र की अवैध रेत खदानों का दौरा करने व रेत माफिया के अत्याचार और शोषण का शिकार बने किसानों-ग्रामीणों की आपबीती सुनने के बाद हैरानी जताते हुए कहा कि, मैंने अपने जीवन इतना बड़ा अवैध खनन पहले कभी नहीं देखा। खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद वीडी शर्मा ने रेत माफिया को संरक्षण देकर अपने निर्वाचन क्षेत्र अंतर्गत गरीब किसानों के खेतों तथा राजस्व भूमि को अवैध खनन से खोखला कराकर काली कमाई की है। उन्होंने कहा कि अवैध रेत खनन करके शासन के राजस्व की चोरी करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही करने के बजाए निर्दोष गरीब किसानों के खिलाफ अवैध खनन के प्रकरण दर्ज कर जिला प्रशासन के द्वारा उन पर करोड़ों रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है, इसलिए मैं पन्ना आया हूँ और मोदी राज में बढ़ती महंगाई के खिलाफ जारी कांग्रेस पार्टी के संघर्ष में सक्रिय सहभागिता निभाने के लिए जन-जन का आव्हान करने आया हूँ।
बड़े-बड़े काण्ड हो रहे और मीडिया चुप है
पन्ना के सर्किट हाउस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह।
राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय ने पन्ना जिले में जारी खनिज संपदा की लूट और यहां व्याप्त अराजकता को लेकर स्थानीय मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, मुझे इस बात का आश्चर्य है कि यहां इतने बड़े-बड़े काण्ड हो रहे हैं और पन्ना का मीडिया चुप है, शांत है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने जीवन में पहले कभी इतना बड़ा अवैध उत्खनन नहीं देखा। इस जिले में प्रशासन माफियाओं के इशारे पर काम कर रहा है। निर्दोष गरीब किसानों, कमज़ोर तबके के लोगों, महिलाओं, आदिवासियों की सुनवाई नहीं की जा रही है।
पन्ना जिले में केन नदी के आसपास स्थित खेतों व राजस्व भूमि से निकलने वाली रेत को देखते हुए राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह।
आपने बताया कि रेत की लूट का मुद्दा ना उठाने के लिए मुझ पर दवाब डाला गया लेकिन मैं उन लोगों में नहीं जो दवाब में आ जाऊं। मैं बिकाऊ आइटम नहीं हूँ, मैं टिकाऊ आइटम हूँ। राज्यसभा सांसद ने प्रदेश सरकार और रेत माफिया को खुली चुनौती देते हुए कहा कि, मेरे खिलाफ जो भी कार्यवाही करनी हो कर लें, मैं डरने वाला नहीं हूँ। लेकिन जिस तरह का नंगा नाच हो रहा है उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि पन्ना जिले में हुए रेत खनन घोटाले में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित कराने के लिए इस मामले को हर स्तर पर प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कांग्रेस गरीब की और भाजपा बड़े व्यापारियों की पार्टी
महंगाई के खिलाफ जारी कांग्रेस पार्टी के जन जागरण अभियान से आमजन को जोड़ने के लिए पन्ना जिले के सुदूर ग्रामीण अंचल में पदयात्रा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एवं स्थानीय कांग्रेसजन।
राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अजयगढ़ क्षेत्र के ग्रामों में महंगाई के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के जन जागरण अभियान अंतर्गत ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की सीमा से सटे इलाके में पदयात्रा कर केन्द्र की मोदी सरकार व मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार की जनविरोधी नीतियों, वादाखिलाफ़ी, जुमलेबाज़ी एवं असफलताओं की आमजन को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता-पदाधिकारी और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। पूर्व मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों को बताया कि केन्द्र में जब कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार थी तब रसोई गैस सिलेंडर 450/- रुपये में मिलता था। जबकि अच्छे दिन का वादा करके सत्ता में आई मोदी सरकार में सिलेंडर के दाम बढ़कर 900 /- रुपए हो चुके है। पेट्रोल-डीजल भी सौ रुपये के पार हो चुका है। कांग्रेस की सरकार में पेट्रोल 70 और डीजल 55 रुपए प्रति लीटर मिलता था।
पन्ना जिले के चाँदीपाठी ग्राम में जन जागरण अभियान के अंतर्गत आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में कांग्रेसजन एवं क्षेत्रीय ग्रामीणों के बीच फर्श पर बैठे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह।
श्री सिंह ने कहा कि, मोदी राज में महंगाई बेकाबू हो चुकी है, प्रत्येक वस्तु के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। ऐसे में बेरोज़गारी-बेकारी की समस्या बढ़ने से आम आदमी का गुजारा काफी मुश्किल हो गया है। रसोई गैस और पेट्रोलियम पदार्थों पर मोदी सरकार ने कई गुना टैक्स बढ़ाकर आम आदमी से साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये वसूल किये। जिसमें आधी राशि बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए खर्च करते हुए उनके कार्पोरेट टैक्स माफ़ कर दिए गए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस में यही फर्क है, कांग्रेस पार्टी गरीब, किसानों, कमजोर वर्गों, मजदूरों की सच्ची हितैषी है जबकि भाजपा बड़े उद्योगपतियों-व्यापारियों और अपराधियों की पार्टी है। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि शिवराज ने मामा-भांजा के रिश्ते को बदनाम कर दिया। शिवराज तो शकुनी और कंस से भी बुरे हैं।
जनविरोधी सरकार को वोट की ताकत से उखाड़ फेंके
जन संवाद के दौरान दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार के बहुचर्चित दो हालिया फैसलों, उपचुनावों में भाजपा को मिली करारी हार के बाद पेट्रोल-डीजल के दामों में मामूली कटौती करने व उत्तर प्रदेश-पंजाब आदि राज्यों में आसन्न चुनाव को देखते हुए किसानों की नाराजगी के मद्देनजर हार की आशंका के चलते किसान विरोधी काले कानूनों को वापस लेने का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके माध्यम से उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि भाजपा की जनविरोधी सरकारें सिर्फ वोट की चोट की भाषा समझती है। आपने लोगों से आव्हान किया, लोकतंत्र में मिले वोट के हथियार का उपयोग करके आगामी चुनावों भाजपा की सरकारों को सत्ता से उखाड़ फेंके।
राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार 23 नवंबर को जन जागरण अभियान अंतर्गत पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र के ग्रामों का दौरा कर वहाँ खेतों और राजस्व भूमि पर बड़े पैमाने पर संचालित अवैध रेत खदानों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से चर्चा की – pic.twitter.com/7br2hIivL2
* रेत ठेका की आड़ में पन्ना जिले में हुई रेत की बेतहाशा लूट
* राज्यसभा सांसद दिग्विजय करेंगे अवैध रेत खनन क्षेत्र का दौरा
* जन जागरण अभियान के तहत महंगाई-बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर करेंगे जन संवाद
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) धीरे-धीरे परवान चढ़ती सर्दी के मौसम में मध्यप्रदेश की सियासत रेत खनन घोटाले के मुद्दे पर गरमा सकती है। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पन्ना जिले के दौरा कार्यक्रम से इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। जन जागरण अभियान के अंतर्गत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अपने प्रदेशव्यापी दौरे के तहत मंगलवार 23 नवम्बर को पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्रामों का भ्रमण कर अवैध रेत खनन का सघन निरीक्षण करेंगे। साथ ही वे केन्द्र की मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर क्षेत्रीय ग्रामीणों से संवाद करेंगे। दिग्विजय के इस दौरे को लेकर सूबे की शिवराज सरकार और भाजपा संगठन में अंदरखाने जबर्दस्त खलबली मची है। क्योंकि, अजयगढ़ क्षेत्र में हुए रेत खनन घोटाले का मुद्दा उठने पर उसका जवाब दे पाना प्रदेश सरकार के लिए आसान नहीं होगा। कथित तौर पर शासन-प्रशासन के संरक्षण में पन्ना की रेत को खुलेआम लूटने वाले माफियाओं में भी ख़ासा हड़कंप मचा है।
कांग्रेस पार्टी के द्वारा महंगाई-बेरोजगारी आदि ज्वलंत मुद्दों पर जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है।
विदित हो कि, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पिछले माह भोपाल में लोकाययुक्त जस्टिस के कार्यालय पहुंचकर उनसे पन्ना जिले में हुए रेत खनन घोटाले की लिखित शिकायत की थी। इसलिए जब से यह खबर आई कि श्री सिंह अवैध रेत खनन क्षेत्रों के निरीक्षण पर आ रहे हैं तभी से रेत माफिया और उसके संरक्षणदाताओं की बैचेनी-घबराहट अचानक काफी बढ़ गई है। जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अजयगढ़ क्षेत्र में निजी भूमि (खेतों) एवं राजस्व भूमि पर धड़ल्ले से संचालित रहीं विशालकाय अवैध रेत खदानों का रेत माफिया रसमीत सिंह मल्होत्रा ने काफी हद तक पुराव करवा दिया है। नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाकर निकाली गई करोड़ों रुपए की रेत खनन के साक्ष्य मिटाने/छिपाने का कार्य कुछ दिन पूर्व तक युद्ध स्तर पर कराया गया। इतना ही नहीं अवैध खदानों का पुराव कराने के बाद उनमें चना, सरसों, सन आदि फसलों की बोबनी करा दी गई। करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी रेत की लूट के साक्ष्य छिपाने की यह कवायद नाकाफी साबित हो रही है।
पन्ना में हुए रेत खनन घोटाले पर कार्यवाही संबंध में राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह द्वारा लोकाययुक्त जस्टिस को दिए गए शिकायती आवेदन पत्र का प्रथम पृष्ठ।
दरअसल, अजयगढ़ तहसील क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक ग्रामों में पिछले डेढ़ साल में इतने बड़े पैमाने पर रेत का खनन हुआ है जिसे छिपाना संभव नहीं है। ऐसे में रेत खनन घोटाले के खिलाफ दिग्विजय सिंह की लगातार बढ़ती सक्रियता शिवराज सरकार और भाजपा संगठन के लिए परेशानी के साथ-साथ शर्मिंदगी का सबब बन सकती है। क्योंकि रेत खनन घोटाला शिवराज सरकार के खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह के गृह जिले एवं निर्वाचन क्षेत्र पन्ना विधानसभा अंतर्गत हुआ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष एवं खजुराहो सांसद वीडी शर्मा के संसदीय क्षेत्र अंतर्गत पन्ना जिला शामिल है। राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह पन्ना में हुए रेत खनन घोटाले को लेकर शुरू से ही खनिज मंत्री और क्षेत्रीय सांसद की भूमिका पर सवाल उठाते हुए रेत माफिया को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाते रहे हैं। अवैध रेत खनन क्षेत्रों का निरीक्षण करने तथा रेत माफिया से पीड़ित किसानों की आपबीती सुनने के बाद दिग्विजय सिंह का रेत खनन घोटाले के मुद्दे पर पहले से कहीं अधिक हमलावर होना तय माना जा रहा है।
भदैंया ग्राम में अपने कच्चे घर के सामने परिवार के साथ खड़े कृषक शिवपूजन का निकास/निस्तार फोटो के अनुसार बाईं तरफ से रहा है जहां अब चबूतरा बन चुका है जबकि घर के सामने की रिक्त भूमि (जहां वह खड़े हैं) दूसरे के स्वामित्व की है।
* अजयगढ़ तहसील के मण्डल धरमपुर के दूरस्थ ग्राम भदैंया का मामला
* शिकायत करने के बावजूद पुलिस के द्वारा दबंग के खिलाफ नहीं की गई कार्यवाही
पन्ना। (www.radarnews.in) धन-बल और ऊंची पहुंच के गुमान में रहने वाले लोग खुद को अक्सर नियम-कानून से ऊपर समझने लगते हैं। ऐसे लोग निहित स्वार्थ पूर्ती के लिए खुलकर मनमानी कर न सिर्फ व्यवस्था को चुनौती देते हैं बल्कि दूसरों के लिए परेशानी का सबब भी बन जाते हैं। जिले के सीमावर्ती दूरस्थ ग्राम भदैंया में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां एक दबंग ने एसडीएम कोर्ट के स्टे आर्डर (स्थगन आदेश) का उल्लंघन करते हुए अवैध निर्माण कार्य कराकर अपने पड़ोसी का रास्ता ही बंद कर दिया। प्रभावित गरीब किसान शिवपूजन पाण्डेय के द्वारा नरदहा पुलिस चौकी में आवेदन पत्र देकर कोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में कार्यवाही की मांग की गई। लेकिन, पुलिस ने हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझा। जिससे निराश होकर किसान शिवपूजन ने न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी अजयगढ़ से कार्यवाही की गुहार लगाई है।
उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे ग्राम भदैंया की आराजी नम्बर-159 आबादी भूमि के जुज रकबा 25х100 वर्गफुट भूखण्ड को शिवपूजन पाण्डेय के द्वारा रामस्वरूप पाण्डेय से खरीदा गया था। इस पर बने कच्चे मकान में कृषक शिवपूजन अपने परिवार सहित निवास करता है। बगल में रहने वाले दबंग सीताशण दुबे ने लगभग तीन वर्ष पूर्व अपने मकान के पिछले हिस्से का निर्माण कार्य कराते हुए जबरन पड़ोसी शिवपूजन पाण्डेय की तरफ दरवाजा-खिड़की खोल दी। इतना ही नहीं सुनियोजित तरीके से पड़ोसी के निकास/निस्तार की भूमि पर अवैध कब्ज़ा करने की मंशा से सीताशण ने अपने नवनिर्मित दरवाजे के सामने ईंटें लगाकर चबूतरे का निर्माण कार्य शुरू कर दिया और फिर उसे ही निस्तार के लिए मना करने लगा। निस्तार बाधित होने से परेशान गरीब किसान के द्वारा न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी अजयगढ़ की शरण लेते अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रकरण प्रस्तुत किया गया।
एसडीएम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उपरांत दिनांक 5 जुलाई 2018 को शिवपूजन पाण्डेय के पक्ष में स्थगन आदेश (स्टे आर्डर) जारी किया था। जिसमें अनावेदक सीताशण दुबे को न्यायालय के द्वारा स्पष्ट तौर पर आदेशित किया गया था कि वह उसके कब्जे में किसी भी प्रकार का व्यवधान पैदा न करे। कोरोना काल में यह प्रकरण स्थगित रहा। इधर, न्यायालय के द्वारा तहसीलदार के माध्यम से स्थल का निरीक्षण प्रतिवेदन माँगा गया था जोकि 3 नवम्बर 2021 तक की स्थिति में नायब तहसीलदार मण्डल धरमपुर ने न तो स्थल का निरीक्षण किया और ना ही प्रतिवेदन न्यायालय को भेजा गया। इस मौके का फायदा उठाकर सीताशण ने पड़ोसी शिवपूजन के कब्जे में दिन-प्रतिदिन व्यवधान उत्पन्न करते हुए जबरदस्ती पुनः चबूतरे का निर्माण शुरू कर दिया।
न्यायालय के स्टे आर्डर की अवहेलना कर चबूतरे का निर्माण कार्य करने की शिकायत पीड़ित किसान के द्वारा नरदहा पुलिस चौकी में की गई। लेकिन इस मामले में चौकी पुलिस ने उदासीनता बरतते हुए कोई कार्यवाही नहीं की। पुलिस के रवैये से हताश-निराश कृषक शिवपूजन पाण्डेय ने पुनः न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी अजयगढ़ की शरण ली है। उन्होंने न्यायालय से स्टे आर्डर की अवहेलना के मामले में सीताशण दुबे पुत्र मातादीन दुबे के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही करने हेतु पुलिस थाना धरमपुर चौकी नरदहा को आदेशित करने की गुहार लगाई है। उल्लेखनीय अवैध कब्ज़ा कर बनाए गए चबूतरे के कारण गरीब किसान के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गई है। उसका निकास और निस्तार बाधित हो गया है। मौके पर स्थिति यह है कि, वृद्ध शिवपूजन को स्वयं के घर आने-जाने में कठिनाई हो रही है और अपने पालतू मवेशियों को उसे दूसरों के स्वामित्व की आराजी में बांधना पड़ रहा है।
इनका कहना है-
“प्रकरण फिलहाल मेरे संज्ञान में नहीं है, अगर आवेदक ने स्टे आर्डर के उल्लंघन संबंधी आवेदन पत्र दिया है तो उसकी जांच कराकर निश्चित ही अनावेदक के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।”
पन्ना जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान लिया गया रामलाल वर्मन का फोटो।
* गंभीर हालत में पन्ना जिला चिकित्सालय से मेडिकल कॉलिज रीवा रेफ़र
* कौन है जो चौकीदार को मारना चाहता है और क्यों लेना चाहता है उसकी जान?
पन्ना। (www.radarnews.in) पन्ना टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक के बंगले में तैनात चौकीदार को ड्यूटी के दौरान अज्ञात लोग कथित तौर पर जबरन जहरीला पदार्थ खिलाकर भाग निकले। चौकीदार की हालत बिगड़ने पर घटना की जानकारी उसके परिजनों को मिली। चौकीदार के पुत्र के द्वारा अपने दोस्तों की मदद से अचेत हालत में पिता को इलाज के लिए पन्ना जिला चिकित्सालय लाकर भर्ती कराया गया। हैरान करने वाली यह घटना गुरुवार 11 नवम्बर की शाम लगभग 5:30 बजे की है।
प्राथमिक इलाज के बाद चौकीदार रामलाल वर्मन को होश आ गया और उसके द्वारा अपने मृत्यु पूर्व कथन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को दर्ज कराए गए। इसके अलावा हॉस्पिटल चौकी पुलिस को भी अपने साथ घटित घटना की जानकारी दी गई। देर रात रामलाल की हालत बिगड़ने पर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने उसे मेडिकल कॉलिज रीवा के लिए रेफ़र कर दिया। हालाँकि, परिजन उसे कटनी ले गए। जहां एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती रामलाल वर्मन वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। आगामी कुछ घण्टे उसके जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद से गरीब चौकीदार के परिजन काफी चिंतित, परेशान और भयभीत हैं।
उल्लेखनीय है कि, पन्ना टाइगर रिजर्व में अकुशल श्रमिक के पद पर पदस्थ रामलाल वर्मन पिता तारापत वर्मन पन्ना टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक एस.के. गुरुदेव के बंगले में बतौर चौकीदार पदस्थ है। सहायक संचालक का सरकारी बंगला काष्ठागार डिपो के आवासीय परिसर में स्थित है, जहां आमने-सामने उत्तर वन मण्डल व दक्षिण वन मण्डल के डीएफओ के बंगले और वन विभाग का रेस्ट हाउस स्थित है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के बंगलों और रेस्ट हाऊस में चौबीसों घण्टे कर्मचारी तैनात रहते हैं। लिहाजा अति सुरक्षित माने-जाने वाले इस परिसर में अघोषित तौर बाहरी लोगों का आना-जाना नहीं रहता है।
गुरुवार की शाम चौकीदार रामलाल वर्मन को अचेत अवस्था में उसके पुत्र रोहित उर्फ़ प्रशांत वर्मन के साथ बाइक से लाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराने वाले शिवम यादव ने रडार न्यूज़ को मोबाइल पर चर्चा बताया कि, दोस्त रोहित के साथ उसके पिता को बेहोशी जैसी हालत में साहब के बंगले से लेकर हम लोग हॉस्पिटल गए थे। शिवम के अनुसार कुछ देर बाद अंकल जी (रामलाल) को होश आ गया था। चौकीदार के पुत्र रोहित उर्फ़ प्रशांत वर्मन ने बताया कि रात में उसके पिता ने तहसीलदार व पुलिस को अपने कथन दर्ज कराते हुए घटना की जानकारी दी थी। रोहित के अनुसार एडी साहब के बंगले पर ड्यूटी के दौरान उसके पिता को कुछ अज्ञात लोगों ने जबरदस्ती जहरीला पदार्थ खिलाकर जान से मारने की कोशिश की है।
जबकि सहायक संचालक पन्ना एस.के. गुरुदेव का कहना है कि, यह घटना उनके बंगले के बाहर थोड़ी दूरी की है। उन्होंने बताया, गुरुवार को दोपहर में ऑफिस से घर आकर मैंने लंच किया और उसी समय रामलाल ने भी बंगले पर लंच किया। कुछ देर बाद मैं पुनः ऑफिस चला गया। शाम करीब 6 बजे जब वापस लौटा तो बंगला खुला हुआ पड़ा था, रामलाल वहां नहीं था। जानकारी लेने पर पता चला कि उसकी अचानक तबियत ख़राब गई। परिजनों ने फोन पर बताया कि रामलाल को किसी ने कुछ खिला दिया है।
बकौल गुरुदेव, आज सुबह अखबार में प्रकाशित खबर के माध्यम से मुझे इस घटना के बारे में सही तरीके से पता लगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि, मेरे आसपास के किसी कर्मचारी से पूर्व में रामलाल का मेरी जानकारी में कोई वाद-विवाद नहीं हुआ है। स्वयं के बंगले में ड्यूटी पर तैनात अधीनस्थ कर्मचारी के साथ दिनदहाड़े इतनी बड़ी वारदात होने को लेकर श्री गुरुदेव से बातचीत करने पर पहले तो उन्होंने कुछ इस तरह जवाब दिया कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मगर, बाद में अखबार के जरिए घटना की जानकारी मिलने की बात कहना कुछ अज़ीब लगता है।
(फाइल फोटो)
उधर, जनचर्चा है कि चौकीदार रामलाल वर्मन को किसी महत्वपूर्ण राज की जानकारी है। शायद उस राज के खुलने से जिन लोगों को भी डर या खतरा है, कथित तौर पर उन्हीं लोगों ने दिनदहाड़े बड़े ही दुस्साहसिक तरीके से अति सुरक्षित माने-जाने वाले वन विभाग के आवासीय परिसर के समीप ड्यूटी पर तैनात चौकीदार को जान से मारने की नियत से उसे जहर दिया है। अब देखना यह है कि, अक्सर ही महज कुछ घण्टों में अपराधों का खुलासा करने और आरोपियों को पकड़ने का दावा करने वाली पन्ना पुलिस रामलाल को जबरन जहर खिलाने की जिला मुख्यालय में हुई सनसनीखेज और बेहद हैरान करने वाली घटना का खुलासा कब तक कर पाती है।
इनका कहना है –
रामलाल की तबियत खराब होने की जानकारी मिली थी, उसे शायद किसी ने कुछ खिला दिया है। यह बात सही है कि, रामलाल हमारा कर्मचारी है, ड्यूटी के दौरान उसके साथ कुछ हुआ है लेकिन यह आपराधिक घटना है जिसे पुलिस देखेगी इससे हमारा कोई संबंध नहीं है।”
– उत्तम कुमार शर्मा, क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व।
“मुझे ज्यादा कोई जानकारी नहीं है, सिर्फ इतना पता चला था कि जब रामलाल बाथरूम करने के लिए बाहर गया था तभी उसके साथ कुछ घटना हुई है। परिजनों ने रात में ही पुलिस को सूचना दे दी थी। हम उनके संपर्क में हैं और अपने कर्मचारी के बेहतर इलाज के लिए हर संभव सहयोग कर रहे हैं। वन विभाग के आवासीय परिसर की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए शीघ्र ही सीसीटीव्ही कैमरे लगवाए जायेंगे। फिलहाल जो घटना हुई उस पर पुलिस को कार्रवाई करना है। हम पुलिस अधिकारियों के संपर्क बनाए हुए हैं।”
– वेजयनाथम टी.आर., उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व।
“पीड़ित व्यक्ति चूंकि सीधे अस्पताल में भर्ती हो गया, इसलिए प्रारंभिक कार्यवाही हॉस्पिटल चौकी पुलिस ने की होगी। अभी मेरे पास मेमो नहीं आया है, मेमो आने में एक-दो दिन का समय लगता है। इसलिए फिलहाल मुझे घटना की जानकारी नहीं है, सम्भतः कल आपको आवश्यक जानकारी दे सकता हूँ।”
– अरुण कुमार सोनी, नगर निरीक्षक, कोतवाली थाना, पन्ना।
* परिक्षेत्र अमानगंज बफर की बीट रमपुरा में मृत अवस्था में मिली बाघिन
* बाघिन पी- 213 (63) के कंधे व गर्दन पर चोट के कई निशान पाए गए
* पन्ना टाइगर को रिजर्व को महीने भर में उठानी पड़ी दूसरी बड़ी क्षति
* कुछ दिन पूर्व पन्ना के युवा बाघ हीरा का सतना के जंगल में हुआ था शिकार
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से आज एक दुखद खबर आई है। पार्क के वन परिक्षेत्र अमानगंज बफर की बीट रमपुरा बफर में तीन वर्षीय युवा बाघिन पी- 213 (63) की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई। बाघिन के शरीर पर कंधे व गर्दन के पास चोट के कई निशान और गहरे घाव पाए गए हैं। पोस्टमार्टम से पता चला है कि युवा बाघिन गर्भवती थी। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के लिए युवा गर्भवती बाघिन की मौत को बड़ी क्षति के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि, वह पहली बार गर्भवती हुई थी। महीने भर में बाघ की मौत की यह दूसरी घटना है। इसके पूर्व पन्ना के चर्चित बाघ हीरा का पड़ोसी जिला सतना के जंगल में करंट लगाकर शिकार किए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ था।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व में जन्मी व पली-बढ़ी बाधिन पी- 213 (63) बुधवार 10 नवम्बर को लगभग 1 बजे गश्ती के दौरान परिक्षेत्र अमानगंज बफर की बीट रमपुरा बफर के कक्ष क्रमांक- 1357 में मृत अवस्था में पाई गई। सूचना प्राप्त होते ही क्षेत्र संचालक, उप संचालक, पन्ना टाइगर रिजर्व एवं वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। मौके पर किसी भी अवैध गतिविधि के कोई साक्ष्य नहीं पाये गये। अधिकारियों की उपस्थिति में मृत बाधिन का पोस्टमार्टम उपरान्त जंगल में दाह संस्कार किया गया।
क्षेत्र संचालक श्री शर्मा का कहना है कि, प्रथम दृष्ट्या बाघिन की मृत्यु प्राकृतिक प्रतीत होती है। हालाँकि उन्होंने मोबाइल चर्चा में रडार न्यूज़ को एक सवाल के जवाब में बताया कि मृत बाघिन के कंधे व गर्दन के आसपास चोट के कई निशान और घाव पाए गए हैं। जिनमें कंधे का घाव काफी गहरा था। सैटेलाइट कॉलर वाली इस युवा बाघिन के शरीर पर चोट के निशान- घाव कब और कैसे उभरे? इस सवाल का क्षेत्र संचालक ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने एवं विभिन्न प्रयोशालाओं से बिसरा आदि की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही बाघिन की मौत को लेकर वस्तु स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। उल्लेखनीय है कि पार्क के रमपुरा इलाके में महज दो साल में बाघ की मौत की यह दूसरी घटना है। इसके पूर्व क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया के कार्यकाल में रमपुरा वन रक्षक आवास के समीप एक नर बाघ की मौत के कई दिनों बाद उसका कंकाल बरामद हुआ था।
* निर्माण कार्यों के बिल भुगतान और निरीक्षण के नाम पर करते हैं वसूली
* कमीशन के लिए वेण्डर भाई के नाम केबिल लगाने का बनाते हैं दवाब
* पवई के सरपंचों ने कलेक्टर के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिले में प्रशासन में व्याप्त बेइंतहा भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी सरकारी योजनाओं को दीमक की तरह खोखला करने में लगी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दम भरने वाली शिवराज सरकार के राज में पन्ना जिले में हर स्तर पर और हर तरफ जारी खुली लूट की स्याह हकीकत मुख्यमंत्री के दावों को कोरी जुमलेबाज़ी साबित कर रही है। जिले में फिक्स रेट मोड में चल रहे प्रशासन में हर काम का दाम तय है। और निश्चित दाम दिए बिना यहां आम आदमी का कोई काम होता ही नहीं है। चालू वर्ष में जिले अब तक लोकायुक्त पुलिस के द्वारा रिश्वतख़ोर अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ की गई एक से बढ़कर एक ट्रैप कार्यवाही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
एसडीओ मनरेगा के खिलाफ कलेक्टर नाम पर ज्ञापन सौंपने लिए पवई तहसील कार्यालय जाते हुए सरपंच/प्रधान।
लोकायुक्त पुलिस की लगातार कार्यवाही के बाद भी पन्ना में जमे भ्रष्ट अफसर बैखौफ होकर न सिर्फ रिश्वत की मांग कर रहे हैं बल्कि बड़े मजे से ले भी रहे हैं। रिश्वत लेने के लिए उनके द्वारा तरह-तरह के हथकण्डे अपनाकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जिले की पवई जनपद में सामने आया है। पवई के आधा दर्जन सरपंचों ने जनपद पंचायत में पदस्थ मनरेगा के SDO (सहायक यंत्री) महेश प्रसाद गर्ग पर निर्माण कार्यों में कमीशन/रिश्वत लेने के लिए परेशान करने तथा पद का दुरूपयोग करते हुए अवैध वसूली के लिए अनुचित दवाब बनाने के आरोप लगाए है।
कथित तौर पर एसडीओ/सहायक यंत्री से परेशान सरपंचों के द्वारा सोमवार 1 नवम्बर को नोरबाजी करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचकर अनुविभागीय दण्डाधिकारी पवई रचना शर्मा को पन्ना कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सरपंचों ने विस्तार पूर्वक अपनी व्यथा का उल्लेख करते हुए बताया है कि, रिश्वत के लिए उन्हें किस तरह परेशान किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरपंच संघ इकाई जनपद पंचायत पवई के तत्वाधान में सौंपे गए ज्ञापन के 5 बिंदुओं में उल्लेख किया गया है कि, उपयंत्री द्वारा तैयार किए जाने वाले स्टीमेट की फाइल तकनीकी स्वीकृति के लिए एक-एक माह तक एसडीओ साहब के पास पेंडिंग रहती है। सरपंचों को झूठे आश्वासन देकर लगातार भटकाया जाता है। जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सहायक यंत्री मनरेगा के खिलाफ पवई एसडीएम रचना शर्मा को ज्ञापन सौंपते हुए जनपद क्षेत्र के सरपंच गण।
उपयंत्रियों के द्वारा निर्माण कार्यों का मूल्यांकन करने के बाद सबंधित बिल-बाउचर का सत्यापन दो-दो माह तक नहीं किया जाता। सहायक यंत्री के द्वारा सत्यापन करने के एवज में राशि (घूस) की मांग की जाती है। इस कारण बिल भुगतान में होने वाले विलंब के चलते मटेरियल सप्लायरों का भुगतान समय पर न होने से सरपंचों/प्रधानों की साख पर विपरीत असर पड़ता है। नतीजतन दोबारा निर्माण सामग्री या अन्य मटेरियल लेने में सरपंचों को काफी दिक्क्त होती है। मनरेगा एसडीओ (सहायक यंत्री) पर आरोप है कि, वे पंचायतों के निरीक्षण की आड़ में कमीशन और रिश्वत की अवैध वसूली करते हैं। यदि कोई साहब को रुपयों की चढ़ोत्री नहीं चढ़ाता है तो उसके खिलाफ मनमानी कार्यवाही करने की धमकी दी जाती है। पंचायतों के विकास कार्यों की राशि से बड़ी ही चालकी से कमीशन बटोरकर अपनी तिजोरी भरने के लिए एसडीओ साहब पर वेण्डर भाई के नाम के बिल पंचायतों में लगाने के लिए कथित तौर पर दवाब बनाया जाता है।
एसडीओ की कारगुजारियों से आजिज आ चुके सरपंच बताते हैं कि साहब कार्यालयीन समय पर कभी अपने कार्यालय में नहीं मिलते, फोन पर संपर्क करने पर अक्सर उनका मोबाइल फोन रिसीव ही नहीं होता है, अगर कभी रिसीव हुआ तो गोलमोल जवाब देकर फोन काट देते हैं। पवई के सरपंचों ने मनरेगा एसडीओ की अराजकता पूर्ण मनमानी कार्यप्रणाली से त्रस्त होकर उनके साथ कार्य करने में असमर्थता जताई है।
महेश प्रसाद गर्ग, सहायक यंत्री मनरेगा जपं पवई।
सरपंचों ने ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट चेतावनी दी है, यदि महेश प्रसाद गर्ग एसडीओ मनरेगा के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई और उनका स्थानांतरण नहीं किया गया तो समस्त सरपंच/प्रधान सामूहिक इस्तीफ़ा देकर कार्य बंद करने के लिए बाध्य होंगे। गौरतलब है कि पन्ना जिले में रिश्वत का खेल जिस तरीके से खुलेआम चल रहा है उसके मद्देनज़र वरिष्ठ अधिकारियों एवं सत्ता में बैठे सफेदपोश नेताओं-जनप्रतिनिधियों का घोषित-अघोषित तौर पर पूर्ण संरक्षण घूसखोर भ्रष्ट लोक सेवकों को प्राप्त होने की आशंकाओं को लगातार बल मिल रहा है।
इनका कहना है –
“शासन ने सहायक यंत्री को सौ फीसदी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए उसे पूरा करने के लिए प्रत्येक कार्य का मौके पर जाकर निरीक्षण करता हूँ। पवई में अब ऑफिस में बैठ कर निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं की जाती है, जिससे कुछ लोग असहज हैं। पवई जनपद में 80 से अधिक पंचायतें हैं लेकिन मेरी शिकायत सिर्फ 2-3 सरपंचों ने की है उन्हें भी राजनैतिक लोगों ने बरगलाया है। आप अन्य सरपंचों से मेरे संबंध में पता कर सकते हैं। मैंने तकनीकी स्वीकृति जारी करने के पूर्व मौके पर प्रस्तावित कार्यों की जांच-पड़ताल करके अनेकों गड़बड़ी पकड़ी हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराकर वास्तविक लागत की तकनीकी स्वीकृति जारी की है। मुझ पर वसूली करने या कमीशन लेने के जो आरोप लगाए गए है वे पूर्णतः असत्य और निराधार हैं।
– महेश प्रसाद गर्ग, सहायक यंत्री मनरेगा, जपं पवई जिला पन्ना।
“सरपंचों के ज्ञापन को आवश्यक कार्यवाही के लिए कलेक्टर सर को भेज दिया है, मेरे द्वारा जनपद पंचायत की समीक्षा बैठकें लेने के दौरान कभी सरपंचों ने इस तरह की समस्या नहीं बताई। विकासखण्ड की प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते मेरी जिम्मेदारी अवश्य बनती है कि मैं समस्याओं का अपने स्तर पर समाधान करूँ, कलेक्टर सर इस मामले में जो भी जांच टीम गठित करेंगे उसकी जांच के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। मेरे पार दो-दो विकासखण्डों की जिम्मेदारी है इसलिए कहां क्या चल रहा कई बार तुरंत पता नहीं लगता है।”
जंगल में विचरण करता हुआ युवा बाघ हीरा। (फाइल फोटो)
* बाघों की निगरानी और सुरक्षा को लेकर घोर लापरवाही हुई उजागर
* सोता रहा वन विभाग, पखवाड़े भर बाद शिकार की घटना का चला पता
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के सतना जिले में सिंहपुर रेन्ज की अमदरी बीट अंतर्गत एक युवा नर बाघ का करंट लगाकर शिकार करने की घटना प्रकाश में आई है। बाघ की मौत होने के बाद उसकी खाल को उतारकर शव को तालाब में फेंक दिया गया। शिकार की इस सनसनीखेज घटना का खुलासा मृत बाघ का रेडियो कॉलर और कंकाल मिलने से हुआ है। बड़ी ही बेरहमी से शिकार किये गए बाघ की पहचान पन्ना के “हीरा” के रूप में की गई है। पन्ना के जंगलों में पले-बढ़े दो बाघ शावक भाई हीरा-पन्ना की पर्यटकों के बीच मशहूर जोड़ी अब टूट गई है। पन्ना के अकोला बफर के जंगलों से निकलकर नए ठिकाने की तलाश में सतना के वन क्षेत्र में विचरण करने वाला बाघ हीरा (पी-243-31) पन्ना से हमेशा के बिछड़ चुका है। जिस जगह बाघ हीरा का शिकार हुआ है, वह सतना वन मंडल की बरौंधा रेन्ज से 7 किलोमीटर की दूरी पर है। सोमवार 1 नवम्बर को वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से हीरा का कंकाल बरामद किया। सूचना मिलते ही वन विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए और घटनास्थल की गहन पड़ताल की। वन मण्डलाधिकारी विपिन कुमार पटेल ने इस मामले में 3 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूंछतांछ करने की पुष्टि की है।
दशहरा के समय हुआ था शिकार
प्रारंभिक जांच-पड़ताल में पता चला है कि, शिकारियों के द्वारा पन्ना के बाघ हीरा (पी-243-31) का शिकार दशहरा पर्व के आसपास कथित तौर पर करंट लगाकर किया गया था। इस बाघ को रेडियो कॉलर आईडी पहनाई गई थी। जिससे बाघ के मूवमेंट की निगरानी सैटेलाइट से भी की जा सकती थी। गौरतलब है कि, रेडियो कॉलर वाले बाघ का पखवाड़े भर पूर्व शिकार होने की घटना की वन विभाग को न तो भनक लगी और ना ही उसने बाघ की खोज खबर लेना उचित समझा। कई दिन बाद मृत बाघ का रेडियो कॉलर और कंकाल मिलने के बाद शिकार की हैरान करने वाली घटना का खुलासा हो सका। इस घटनाक्रम ने बाघों की निगरानी और सुरक्षा व्यस्था को लेकर वन विभाग की घोर लापरवाही को उजागर कर दिया है।
सतना जिले के वन क्षेत्र में बाघ हीरा के विचरण करने पर उसकी प्रत्यक्ष निगरानी और सुरक्षा की जितनी जवाबदेही स्थानीय वनकर्मचारियों-अधिकारियों की थी उतनी ही जिम्मेदारी पन्ना टाइगर रिजर्व के अफसरों की बनती है। क्योंकि। बाघ के रेडियो कॉलर के सिग्नल सैटेलाइट के माध्यम से पन्ना के अधिकारियों को प्राप्त होते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना जाहिर है, यदि रेडियो कॉलर वाले और बाघ जैसे संकटग्रस्त वन्य जीव की वन विभाग निगरानी नहीं कर सकता तो बगैर रेडियो कॉलर वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर विभागीय अमला कितना संजीदा होगा ! इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। बता दें कि, सतना जिले के वन क्षेत्र में पन्ना के बाघ के शिकार की यह पहली घटना नहीं है। पूर्व में भी इसी इलाके में युवा बाघ का शिकार किया गया था। बावजूद इसके इलाके में हीरा की मौजूदगी की जानकारी होने के बाद भी उसकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
करीब 3 माह पूर्व पन्ना से कर गया था पलायन
एक साथ नजर आ रहे युवा बाघ भाइयों पन्ना-हीरा की मशहूर जोड़ी। (फाइल फोटो)
पर्यटकों के बीच खासे चर्चित रहे पन्ना टाइगर रिजर्व के दो बाघ भाइयों हीरा और पन्ना बाघिन पी-234 के शावक बताए जाते हैं। बाघिन बाघिन पी-234 ने नवम्बर 2019 में तीन शावकों को जन्म दिया था। जिनमें दो नर और एक मादा शावक थी। दुर्भाग्य से मादा शावक पी-234-33 की 14 नवंबर को सड़क हादसे में मौत हो गई थी। अकोला बफर के ही समीप इस मादा शावक को पन्ना-अमानगंज मार्ग पर अज्ञात वाहन ने कुचल दिया था। अकोला बफर में पले-बढ़े दोनों नर शावक दिसम्बर 2020 तक अपनी मां के साथ रहे लेकिन जनवरी 2021 दोनों भाइयों को माँ से अलग देखा गया। जुलाई महीने में नर बाघ पी-234-31 (हीरा) अकोला बफर की सीमा से निकलकर पन्ना के उत्तर वन मण्डल क्षेत्र से होते हुए पड़ोसी जिला सतना के वन क्षेत्र में अकेला ही पहुँच गया था। जहां सक्रिय शातिर शिकारियों ने स्थानीय वन अमले की उदासीनता के चलते मौका पाकर 2 वर्ष के इस युवा बाघ को अपना शिकार बना लिया।
* आदिवासियों के मददगार के मकान पर अवैध कब्ज़ा करने का मामला
* भाजपा नेता अंकुर त्रिवेदी एवं अन्य पर है अवैध कब्ज़ा करवाने का आरोप
* पूर्व CM ने SDM के पत्र का हवाला देकर पन्ना पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय से सटे नयापुरा-मुड़िया पहाड़ में स्थित आदिवासियों की बेशकीमती भूमियों को हड़पने और वहां कई पीढ़ियों से काबिज गरीबों को आतंक के बल पर जबरन बेदखल करने गंभीर आरोपों से घिरे भाजपा जिला उपाध्यक्ष अंकुर त्रिवेदी और उनके परिजनों पर अब गरीब आदिवासियों के मददगार बृजेश गौतम के मकान पर कथित तौर पर अवैध कब्ज़ा करवाने का आरोप लगा है। मुड़िया पहाड़ के आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर आक्रामकता के साथ उनके हक़ की लड़ाई लड़ने वाले राज्य सभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बृजेश गौतम के मामले को लेकर पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर भू-माफिया अंकुर त्रिवेदी व अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करने के लिए पुलिस अधीक्षक पन्ना को निर्देश देने की मांग की है। साथ ही बृजेश के मकान से तत्काल अवैध कब्ज़ा हटवाने की मांग की गई है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने डीजीपी को 29 अक्टूबर को लिखे गए अपने पत्र के साथ पन्ना के मुड़िया पहाड़ निवासी बृजेश गौतम के आवेदन को संलग्न किया है। जिसमें बताया गया है कि, अंकुर त्रिवेदी, अवधेश त्रिवेदी, विकास शुक्ला व अन्य लोगों ने बृजेश के मकान का ताला तोड़कर मकान पर कब्ज़ा कर लिया है। पुलिस से शिकायत करने पर अंकुर ने बृजेश को और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी है। इसकी लिखित सूचना पीड़ित के द्वारा 31 अगस्त 2021 को पुलिस अधीक्षक पन्ना को दी गई थी।
राज्य सभा सदस्य श्री सिंह ने डीजीपी को लिखे पत्र में पन्ना के पूर्व एसडीएम शेर सिंह मीना के द्वारा दिनांक 27 अक्टूबर 2020 को कोतवाली थाना प्रभारी पन्ना को भेजे गए बहुचर्चित शासकीय पत्र का विस्तार पूर्वक हवाला दिया है। जिसमें तत्कालीन पन्ना एसडीएम शेर सिंह मीना ने अंकुर त्रिवेदी व अवधेश त्रिवेदी के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों की लंबी फेहरिस्त और नयापुरा-मुड़िया पहाड़ के रहवासियों की शिकायतों के मद्देनजर पन्ना कोतवाली थाना प्रभारी को अवधेश त्रिवेदी के विरुद्ध एन.एस.ए. और अंकुर त्रिवेदी के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। आईएएस अधिकारी श्री मीना ने अपने पत्र कहा था कि इन लोगों का इतना आतंक है कि इनके विरुद्ध कोई शिकायत नहीं कर पा रहा है।
पन्ना के मुड़िया पहाड़ में स्थित बृजेश गौतम का वह मकान जिसमें अंकुर त्रिवेदी वगैरह के द्वारा अवैध कब्ज़ा करने की शिकायत की गई है।
दिग्विजय सिंह का आरोप है कि, अनेक अपराधों और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त त्रिवेदी परिवार को सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी का संरक्षण प्राप्त है। इस परिवार के विरुद्ध एसडीएम के द्वारा लिखे गए पत्र पर यदि पन्ना पुलिस ने कार्यवाही की होती तो आज बृजेश गौतम के मकान पर बलपूर्वक कब्ज़ा करने, मारपीट करने, आतंक फैलाने और घर से कीमती सामान उठा कर ले जाने की हिम्मत नहीं होती। पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक से बृजेश गौतम के मकान से अवैध कब्ज़ा हटवाने और अंकुर त्रिवेदी, अवधेश त्रिवेदी सहित मकान पर कब्ज़ा करने वाले अन्य लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही करने के लिए पुलिस अधीक्षक पन्ना को निर्देश देने की मांग की है।
इनका कहना है –
“मेरे और मेरे पिता के विरुद्ध आज तक जिला बदर की कार्यवाही नहीं हुई, पूर्व मुख्यमंत्री को झूठ बोलना शोभा नहीं देता है। दिग्विजय सिंह जी एक तरफ कहते हैं कि मुड़िया पहाड़ की जमीन आदिवासियों की है वहां से अंकुर त्रिवेदी को बेदखल किया जाए दूसरी तरफ वे बृजेश गौतम का उस जमीन पर कब्ज़ा करवा रहे हैं। बृजेश गौतम और उसके परिजन अपने मकान में रह रहे हैं, मौके पर जाकर कोई भी इसकी तस्दीक कर सकता। हमारे ऊपर लगाए जा रहे आरोप पूर्णतः असत्य और निराधार हैं।”
– अंकुर त्रिवेदी, जिला उपाध्यक्ष भाजपा,पन्ना।
“मेरा और मेरे भाई अमित गौतम का मुड़िया पहाड़ में मकान कई वर्षों से बना है, पन्ना के पूर्व एसडीएम के द्वारा कराए गए सर्वे की सूची के क्रमांक 20 और 22 हमारे नाम दर्ज हैं, स्थानीय लोगों से भी हमारे कब्जे के संबंध पता कर सकते हैं। पूर्व एसडीएम के द्वारा सुनाए गए फैसले में भी वहाँ पूर्व से बने मकानों को छोड़कर शेष भूमि का वास्तविक भू-स्वामी आदिवासियों को घोषित किया गया है। सत्ता के दवाब में काम कर रहे अधिकारी अवैध कब्जे धारियों को ना हटाकर उल्टा हमें ही मकान के स्वामित्व के नाम पर परेशान कर रहे हैं। इसका फायदा उठाकर अवैध कब्जे धारियों ने मेरे मकान का शौंचालय तोड़ दिया है। “