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बड़ी खबर : “अभी लागू नहीं होगा हिट-एंड-रन का नया कानून”

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हिट एंड रन के नए कानून के विरोध स्वरूप पन्ना के नजदीक एनएच 39 ट्रक खड़े करके चक्काजाम कर प्रदर्शन करते ड्राइवर्स। (फाइल फोटो)

*    ट्रक और बस ड्राइवरों की हड़ताल के आगे केन्द्र सरकार ने घुटने टेके

नई दिल्ली। देशभर में ट्रकों के पहिए थमने से मची हाहाकार ने केंद्र की मोदी सरकार को नए साल 2024 में हिलाकर रख दिया है। बस और ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के व्यापक असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि, हिट-एंड-रन के खिलाफ लाए गए विवादस्पद कानून को लागू करने से पहले उनसे चर्चा की जाएगी। सरकार के साथ लंबी वार्ता के बाद ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने कहा कि, हमने ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। सरकार बताना चाहती है कि नया नियम अभी लागू नहीं किया गया है। भारतीय न्याय संहिता 106/2 को लागू करने से पहले हम ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। उसके बाद ही हम कोई निर्णय लेंगे।
ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष बाल मलकित ने स्पष्ट किया है, नए क़ानून लागू नहीं किए गए हैं। इसे ऑल इण्डिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस से सलाह-मशविरा के बाद ही लागू किया जाएगा। केन्द्र सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर ऑल इण्डिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस तथा सभी वाहन चालकों से अपने-अपने काम पर लौटने की अपील की है। ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने भी ड्राइवरों से हड़ताल ख़त्म करने का आव्हान किया है।
पन्ना के बस स्टैण्ड में प्राइवेट मोटर कर्मचारी कल्याण युवक मण्डल पन्ना के बैनर तले आंदोलित बस-ट्रक-टैक्सी चालक-परिचालक और क्लीनर। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि, हिट एंड रन के नए क़ानून में भारतीय न्याय संहिता के तहत सड़क हादसे के बाद ड्राइवर अगर मौके से भाग जाता है तो उसे 10 साल की कैद और 7 लाख रुपए जुर्माना के कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसे कला क़ानून करार देते हुए कई राज्यों में ट्रक-बस और टैंकर चालक सोमवार को हड़ताल पर चले गए थे। हड़ताल के दूसरे दिन में प्रवेश करने के बीच देश भर में सैंकड़ों पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल का स्टॉक समाप्त हो गया था। साथ ही हड़ताल के कारण सामान सप्लाई की चेन टूटने लगी थी।
हड़ताल के कारण हाहाकार मचते देख मोदी सरकार बैकफुट पर आ गई। सरकार ने ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर हड़ताल को समाप्त कराने का रास्ता निकालते हुए देर रात ऐलान किया गया कि नए कानून के प्रावधान अभी लागू नहीं हुए हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) को लागू करने से पहले ऑल इण्डिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस से विचार-विमर्श करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
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वाहनों की रफ़्तार पर आक्रोश का ब्रेक ! MP में हिट एंड रन के नए कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे ड्राइवर

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वाहनों की रफ़्तार पर आक्रोश का ब्रेक ! MP में हिट एंड रन के नए कानून के विरोध में सड़कों पर उतरे ड्राइवर

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हिट एंड रन के नए कानून के विरोध स्वरूप पन्ना के नजदीक एनएच 39 ट्रक खड़े करके चक्काजाम कर प्रदर्शन करते ड्राइवर्स। (फाइल फोटो)

*    आक्रोशित ड्राइवरों ने मोदी सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, चक्काजाम कर भरी हुंकार

*     काला-कानून वापस होने तक अनिश्चित कालीन हड़ताल को जारी रखने का किया ऐलान

*     अब हादसा होने की स्थिति में ड्राइवर को 10 साल की सजा और 7 लाख के जुर्माने का प्रावधान

शादिक खान, पन्ना/भोपाल। (www.radarnews.in) केन्द्र सरकार के द्वारा लाए गए हिट एंड रन के नए लॉ (कानून) के खिलाफ देश भर में गुस्सा देखा जा रहा है। नए कानून में सज़ा की अवधि में वृद्धि के विरोध स्वरूप के देश के कई राज्यों में बस-ट्रक-टैक्सी ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट आपरेटर्स द्वारा चक्काजाम किया जा रहा है। हिट एंड रन के नए कानून को वापस लेने की मांग को लेकर अनेक राज्यों में बस-ट्रक ड्राइवर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस बेमियादी हड़ताल का सोमवार को मध्य प्रदेश में भी व्यापक असर देखा गया। नव वर्ष 2024 के पहले दिन प्रदेश भर के बस स्टैण्ड में ड्राइवरों ने अपनी बसें खड़ी कर दी तो वहीं हाईवे पर ट्रकों के पहिए थमे नजर आए। बसें नहीं चलने से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं हाईवे पर चक्काजाम के चलते कई घंटों तक वाहनों का आवगमन पूर्णतः बंद रहा। उधर, पेट्रोल पंपों पर डीजल-पेट्रोल भरवाने वाहनों की कतारें नजर आ रही हैं।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में भी हिट एंड रन के नए कानून का सोमवार को भारी विरोध हुआ। इस कानून से प्रभावित वाहन चालकों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम कर अपना विरोध दर्ज़ कराया। पन्ना जिला मुख्यालय के बस स्टैण्ड में बसों को खड़ा करके ड्राइवरों सहित बस परिचालक और क्लीनर ने संयुक्त रूप ने हिट एंड रन के नए कानून का विरोध करते इसे काला कानून करार दिया। वाहन चालकों का कहना है नए कानून के प्रावधान अत्यंत ही शख्त और पूर्णतः अव्यवहारिक हैं। इसके लागू होने पर जेल में जिंदगी काटने से बेहतर है कि हम स्टीयरिंग (वाहन चलाना) छोड़कर मजदूरी करने लगें। पन्ना में प्राइवेट मोटर कर्मचारी कल्याण युवक मण्डल के तत्वाधान में हुए इस विरोध-प्रदर्शन के चलते कई घंटों तक बसों के पहिए थामे रहने से स्थानीय बस स्टैण्ड में मौजूद यात्री अपने गंतव्य स्थल पर पहुँचने के लिए काफी परेशान नजर आए। वहीं पन्ना के बाहरी इलाके में नेशनल हाईवे 39 पर अजयगढ़ बाईपास मार्ग तिराहा के समीप सड़क पर ट्रक खड़े करके ड्राइवरों ने चक्काजाम कर दिया। इस कारण करीब आधा घण्टे नेशनल हाईवे पर वाहनों के पहिये थमे रहे।

नए कानून में बढ़ाई सजा की अवधि

बता दें कि, भारतीय न्याय संहिता 2023 में हुए संशोधन के बाद अब हिट एंड रन के मामलों में दोषी ड्राइवर पर 7 लाख रुपए तक का जुर्माना और 10 साल तक कैद का प्रावधान है। नए कानून के तहत सड़क हादसे के बाद भागने और घातक दुर्घटना की सूचना न देने पर ड्राइवरों को 10 साल तक की जेल हो सकती है। इससे पहले, सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर आईपीसी की धारा 304ए (लापरवाही से मौत) के तहत आरोपी ड्राइवर को केवल दो साल तक की जेल हो सकती थी। नए कानून में सजा की अवधि बढ़ाने को लेकर देश भर में ड्राइवरों के द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

दुर्घटनास्थल पर ड्राइवर रुकेगा तो मारा जाएगा

पन्ना के बस स्टैण्ड में प्राइवेट मोटर कर्मचारी कल्याण युवक मण्डल पन्ना के बैनर तले आंदोलित बस-ट्रक-टैक्सी चालक-परिचालक और क्लीनर।
प्राइवेट मोटर कर्मचारी कल्याण युवक मण्डल पन्ना के उपाध्यक्ष अब्दुल अय्यूब, कोषाध्यक्ष अजय परमार व चालक प्रमोद रैकवार ने “रडार न्यूज़” से चर्चा में केंद्र सरकार के नए कानून को अदूरदर्शी निर्णय करार देते हुए बताया कि इसके लागू होने पर हिट एंड रन के मामलों में हर तरफ से ड्राइवर ही मारा जाएगा। इनका कहना है कि ड्राइवर कभी कोई हादसा जानबूझकर नहीं करते। एक्सीडेंट के मामलों में हमेशा गलती बड़ी गाड़ी वाले की मानी जाती है, सड़क दुर्घटना के बाद ट्रक और बस ड्राइवर को लोग कई बार इतना पीट देते हैं कि उनकी मौत हो जाती है। अब ऐसे में ड्राइवर तो मौके से भागकर अपनी जान बचाएगा ही। जबकि नए कानून के प्रावधान अनुसार हादसे के बाद ड्राइवर अगर मौके से भागता है तो उसे 7 लाख रुपए तक का जुर्माना और 10 साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है। जरा सोचिए हादसे के बाद ड्राइवर यदि मानवता के नाते घायल की मदद के लिए मौके पर रुकता है तो पब्लिक आक्रोश से क्या वह बच पाएगा? पब्ल्कि के द्वारा की जाने वाली बेदम मारपीट में ड्राइवर की अगर मौत हो जाती है तो उसके परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कौन लेगा? ऐसे अनेक ज्वलंत सवाल है जिनके जवाब नए कानून में नहीं है। इसलिए देश भर के ड्राइवर आंदोलित हैं। प्राइवेट मोटर कर्मचारी कल्याण युवक मण्डल पन्ना के बैनर तले आंदोलित बस-ट्रक-टैक्सी ड्राइवरों, परिचालकों तथा क्लीनर/हेल्पर की ओर प्रदेश के राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। दस बिंदुओं के इस ज्ञापन के माध्यम से भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 106 (2) में किए गए सज़ा के प्रावधान को वापस लेने की मांग की गई।

4 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल

अजयगढ़ में हिट एंड रन के नए काले कानून को वापस लेने की मांग को लेकर प्रभारी तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए ट्रक और बस ड्राइवर्स।
पन्ना जिले के अजयगढ़, देवेन्द्रनगर और पवई में भी ड्राइवर्स स्टीयरिंग छोड़कर सड़कों पर उतर आए। नए साल के पहले दिन सोमवार को हिट एंड रन लॉ के विरोध में पवई बस स्टैण्ड में बसों को खड़ा करके ड्राइवरों ने सुबह-सुबह नारेबाज़ी शुरू कर दी। इसके बाद वाहन चालक संघ के आव्हान पर ड्राइवर नगर के तहसील तिराहा पहुंचकर धरने पर बैठ गए। जिससे बस स्टैण्ड में मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हैरान-परेशान यात्रीगण अपनी मंजिल पर पहुँचने के लिए भटकते नजर आए। इसी तरह अजयगढ़ क़स्बा में एकजुट बस और ट्रक ड्राइवर ने धरना-प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया। ड्राइवर्स की ओर से इस संबंध में राष्ट्रपति के नाम प्रभारी तहसीलदार अजयगढ़ एक ज्ञापन सौंपा गया। ड्राइवरों ने ज्ञापन के माध्यम हिट एंड रन के नए कानून के खिलाफ 4 जनवरी से बेमियादी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। चालक कमलेश पटेल ने कहा कि उन्हें बमुश्किल 8 से 10 हजार रुपए प्रति माह तनख्वाह मिलती है, जबकि नए कानून में पर 7 लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। और सजा की अवधि बढ़ाकर 10 तक कर दी गई है। एक ड्राइवर जुर्माना की इतनी बड़ी राशि कहां से लाएगा? इस कारण हमारे लिए यह काला कानून है, मोदी सरकार इसे तुरंत वापस ले। चालकों ने कहा कि अब हमारे पास सिर्फ एक ही विकल्प है, नौकरी छोड़कर घर में बैठ जाएं क्योंकि इस उम्र में दूसरा काम भी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में परिवार के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।

एनएच 39 ट्रक खड़े कर लगाया चक्काजाम

देवेन्द्रनगर के समीप बड़ागांव तिराहा पर ट्रक ड्राइवरों ने एनएच 39 पर चक्काजाम करके हिट एंड रन के नए कानून का विरोध किया।
देवेन्द्रनगर क़स्बा के नजदीक बड़गांव वेयर हाउस के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 39 पर ट्रक चालकों दोपहर के समय अचानक ट्रक खड़े करके चक्क्जाम लगा दिया। देखते ही देखते पन्ना-सतना मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई। एनएच पर वाहनों वाहनों के पहिए थमने से चंद मिनिट के अंदर जबरदस्त हड़कंप मच गया। ड्राइवरों के इस विरोध प्रदर्शन को ट्रक आनर्स का भी पूर्ण समर्थन मिला। चक्काजाम कर सांकेतिक बवाल करने वाले ट्रक ड्राइवर-हेल्पर ने दो टूक शब्दों में कहा, हिट एंड रन लॉ पर उनकी जायज आपत्तियों के मद्देनजर इस विवादित कानून को यदि तुरंत वापस नहीं लिया गया तो देश भर के बस-ट्रक-टैक्सी ड्राइवर सामूहिक रूप से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगें। जिससे यात्रियों और जरुरी सामान का परिवहन बाधित होने के कारण हाहाकार की स्थिति निर्मित हो जाएगी। इस तरह के हालात पैदा न हों केन्द्र सरकार को इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए काले कानून को तत्काल वापस लेने की घोषणा करनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि चक्काजाम में एम्बुलेंस के अंदर मरीज के फंसे होने की जानकारी मिलने पर देवेन्द्रनगर थाना पुलिस स्टॉफ तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस कर्मियों द्वारा हड़ताली ट्रक चालकों को समझाईश दी गई। तब कहीं जाकर हड़ताली ड्राइवरों ने चक्काजाम समाप्त किया और लगभग एक घण्टे बाद नेशनल हाईवे 39 पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकी।
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अच्छी ख़बर | प्रतिष्ठित निजी कंपनियों में नौकरी के लिए 67 युवाओं का चयन

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स्वामी विवेकानंद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पन्ना में आयोजित रोजगार मेला में छात्र-छात्राओं को रोजगार संबंधी जानकारी देते हुए निजी कंपनियों के प्रतिनिधि।

*      स्वामी विवेकानंद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पन्ना में रोजगार मेला संपन्न

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) जिले की अग्रणी स्वंयसेवी संस्था श्रीराम शिक्षा प्रसार एवं ग्रामीण विकास समाज उत्थान समिति द्वारा संचालित स्वामी विवेकानंद निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान इंद्रपुरी कॉलोनी पन्ना में मंगलवार 26 दिसंबर को रोजगार मेला का आयोजन किया गया। जिसमें देश की प्रतिष्ठित 6 निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा 67 छात्र-छात्राओं का चयन किया गया। प्राप्त जानकारी अनुसार रोज़गार मेला में टाटा मोटर्स, वोन इंडिया लिमिटेड, एडेको, वेलस्पन, श्रीराम फाइनेंस एवं राणे- एन एस के कंपनी के एचआर विभाग के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कुशल मानव संसाधन की अपनी आवश्यकता की पूर्ती करने के लिए निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने 220 छात्र-छात्राओं के इंटरव्यू लिए। जिसमें से 67 छात्र-छात्राओं का चयन रोजगार के लिए किया गया। कैंपस सिलेक्शन के संचालन एवं छात्र-छात्राओं के मार्गदर्शन में आईटीआई प्राचार्य धीरज सेन ने अहम भूमिका निभाई। स्वामी विवेकानंद औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) पन्ना के शैक्षणिक स्टॉफ ने रोजगार के लिए चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
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मोहन के महारथी | MP में 28 विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथ: विजयवर्गीय, प्रहलाद, राकेश समेत 18 कैबिनेट मंत्री

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राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने राजभवन में कैबिनेट मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

*    6 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 4 राज्यमंत्रियों ने ली शपथ

*    शिवराज सरकार के सिर्फ 6 मंत्रियों को मिली जगह, 10 की हुई छुट्टी

*    राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नवनियुक्त मंत्रियों को दिलाई शपथ

भोपाल। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश में आज मोहन सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हो गया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 28 विधायकों को मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इनमें 18 विधायकों को कैबिनेट मंत्री, 6 विधायकों को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 4 विधायकों राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। नवनियुक्त 28 मंत्रियों में सर्वाधिक 11 ओबीसी वर्ग से, 7 सामान्य वर्ग, 6 एससी वर्ग और 4 एसटी वर्ग से आते हैं। मुख्यमंत्री को मिलाकर ओबीसी की संख्या 12 हो गई है। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनज़र मंत्रिमंडल में युवा, महिला, जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की हर संभव कोशिश की गई है। मंत्रिमंडल शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन राजभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद थे।

इन 18 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में ली शपथ

कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले 18 विधायकों में कुंवर विजय शाह, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद सिंह पटेल, राकेश सिंह, करण सिंह वर्मा, उदय प्रताप सिंह, श्रीमती सम्पतिया उइके, तुलसीराम सिलावट, एदल सिंह कंषाना, सुश्री निर्मला भूरिया, गोविन्द सिंह राजपूत, विश्वास सारंग, नारायण सिंह कुशवाह, नागर सिंह चौहान, प्रद्युम्न सिंह तोमर, राकेश शुक्ला, चैतन्य काश्यप “भैया जी” और इन्दर सिंह परमार शामिल है।

10 विधायकों ने राज्यमंत्री के रूप में ली शपथ

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में शामिल नवनियुक्त मंत्रीगण।
डॉ. मोहन यादव सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में आज राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में श्रीमती कृष्णा गौर, धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लखन पटैल और नारायण सिंह पंवार ने शपथ ली। राज्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वालों में नरेन्द्र शिवाजी पटेल, श्रीमती प्रतिमा बागरी, अहिरवार दिलीप और श्रीमती राधा सिंह शामिल है। उल्लेखनीय है कि, आज शपथ लेने वाली 28 सदस्यीय टीम मोहन में पिछली शिवराज सरकार के सिर्फ 6 मंत्रियों को ही जगह मिल सकी। जबकि 10 मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले चार विधायकों को मंत्री बनाया गया है।

इनकी रही उपस्थिति

राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा वी.डी. शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। शपथ विधि का संचालन मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा ने किया।
9वीं बार विधायक बने भार्गव समेत कई बड़े चेहरे बाहर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में कई बड़े चेहरों को शामिल न किए जाने से सियासी हलकों में खलबली मच गई। हालांकि शुरू से ही यह माना जा रहा था कि पूर्व में कई बार मंत्री रह चुके विधायकों को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया जाएगा। लोग यह मानकर चल रहे थे कि इस बार अधिकांश नए चेहरों को मंत्री पद से नवाजा जाएगा। आज हुआ भी यही। लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि 9वीं बार विधायक निर्वाचित हुए गोपाल भार्गव को भी बाहर कर दिया जाएगा। वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए भार्गव को गृह मंत्री बनाए जाने के कयास सियासी गलियारों में लगाए जा रहे थे। लेकिन हुआ इसका उल्टा। शिवराज सरकार के दस मंत्रियों को इस बार नई सरकार में जगह नहीं मिल सकी। इनमें गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, मीना सिंह, डॉ. प्रभुराम चौधरी, ऊषा ठाकुर, ओमप्रकाश सकलेचा, हरदीप सिंह डंग, बृजेन्द्र सिंह यादव, बृजेन्द्र प्रताप सिंह और बिसाहूलाल सिंह मंत्री नहीं बन पाए।
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कोर्ट का फैसला : मारपीट के मामले में अभियुक्त को कठोर कारावास व जुर्माना

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फाइल फोटो।

*      न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना प्रीतम शाह ने पारित किया निर्णय

पन्ना। (www.radarnews.in) न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना प्रीतम शाह ने जमीनी विवाद को लेकर राजू शेख के साथ गाली-गलौंज और मारपीट करने के मामले में अभियुक्त बृजेश गुप्ता पिता किशोरीलाल गुप्ता 45 वर्ष निवासी बेनीसागर मोहल्ला पन्ना को दोषसिद्ध पाते हुए धारा 325 भादसं. में 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय द्वारा अभियुक्त को 1000 रूपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया गया।
सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी ऋषिकांत द्विवेदी ने अभियोजन के मामले की जानकारी देते हुए बताया कि, फरियादी राजू शेख दिनांक 16 मार्च 2017 को खाना लेकर अस्पताल जा रहा था, रास्ते में जमीनी विवाद को लेकर बृजेश गुप्ता पिता किशोरीलाल गुप्ता निवासी 45 वर्ष बेनीसागर मोहल्ला पन्ना ने उसे मां-बहन की गंदी-गंदी गालियां देने लगा। राजू ने गालियां देने से मना किया तो बौखलाए अभियुक्त बृजेश ने उसके साथ लात-घूंसो से मारपीट कर दी थी। पीड़ित के चींखने-चिल्लाने पर रहीश दौड़कर आया और बीच-बचाव किया। मारपीट की घटना की रिपोर्ट पर कोतवाली थाना पन्ना में अभियुक्त के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। घायल का मेडिकल परीक्षण कराया गया। जिसमें एक्सरे रिपोर्ट प्राप्त होने पर डॉक्टर ने फैक्चर होना मेडिकल रिपोर्ट में लेख किया था। प्रकरण की संपूर्ण विवेचना उपरांत पुलिस के द्वारा अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
प्रतीकात्मक चित्र।
प्रकरण का विचारण न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी पन्ना प्रीतम शाह के न्यायालय में हुआ। जहां शासन की ओर से पैरवी करते हुए सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रोहित गुप्ता द्वारा अभियोजन के साक्ष्य को क्रमबद्ध तरीके से लेखबद्ध कराया गया। न्यायालय के समक्ष आरोपी बृजेश गुप्ता को संदेह से परे प्रमाणित किया तथा आरोपी का कृत्य गंभीरतम श्रेणी का होने के कारण कठोर सजा दिये जाने का अनुरोध किया। अभिलेख पर आए साक्ष्य और अभियोजन के तर्कों एवं न्यायिक दृष्टांतो से संतुष्ट होते हुए न्यायालय ने आरोपी बृजेश गुप्ता 45 वर्ष निवासी पन्ना को धारा 325 भादसं. में 1 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
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डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष का कार्यभार किया ग्रहण

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मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करते हुए डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया।

*     पिछड़ा वर्ग के कल्याण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के लिए करेंगे जिलों का दौरा

भोपाल।(www.radarnews.in) डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने बुधवार 13 दिसम्बर को भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग पहुँच कर अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण किया। इस मौके पर पिछड़ा वर्ग से जुड़े जन-प्रतिनिधि भी मौजूद थे। डॉ. कुसमरिया को राज्य शासन ने मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया था। कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कुसमरिया ने आयोग की गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोग मुख्य रूप से प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के लिये हितप्रहरी के रूप में कार्य करता है। इसके साथ ही आयोग राज्य की सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग जातियों की सूचियों में जातियों को जोड़ने एवं विलोपित करने की अनुशंसा राज्य शासन को भेजता है। प्रदेश में कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा पिछड़ा वर्ग से संबंधित है।

जिला स्तर पर करेंगे समीक्षा

कार्यभार ग्रहण करने के बाद डॉ. कुसमरिया ने कहा कि वे शीघ्र ही जिलों का दौरा कर पिछड़ा वर्ग के कल्याण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा करेंगे। इसके साथ ही वे पिछड़ा वर्ग से जुड़े स्थानीय जन-प्रतिनिधियों से चर्चा कर उनकी दिक्कतों को समझेंगे और सुझाव प्राप्त करेंगे।
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जिला मुख्यालयों के महाविद्यालयों को “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस “के रूप में उन्नयन किया जाएगा

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में पहली कैबिनेट मीटिंग हुई।

*     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय

*     धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों को अवैधानिक रूप से बजाने पर प्रतिबंध

भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट मीटिंग बुधवार शाम संपन्न हुई। जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट द्वारा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर संचालित अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों को “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस” के रूप में उन्नयन किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया। तेंदूपत्ता संग्रहण दर 3 हजार रूपए प्रति बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति बोरा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। साथ ही धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदण्ड से अधिक बजाने पर प्रतिबंध लगाने और नगरीय क्षेत्रों में बिना लायसेंस के खुले में  पर प्रतिबंध का निर्णय लिया गया। आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आदतन अपराधियों को पूर्व अपराधों में प्राप्त जमानत न्यायालय से निरस्त करवाये जाने के संबंध में निर्णय लिया गया।

एक्सिलेंस कॉलेजों में सुविधाओं पर खर्च होंगे 460 करोड़

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक 13 दिसम्बर की शाम को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर संचालित अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों को “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस” के रूप में उन्नयन किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया। वर्तमान में प्रदेश में कुल 570 शासकीय महाविद्यालय संचालित है। प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर संचालित अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों में सभी संकायों में सुविधाओं में वृद्धि करते हुए अग्रणी/चिन्हित महाविद्यालयों को “पीएम कॉलेज ऑफ एक्सिलेंस “के रूप में उन्नयन किया जाएगा। इस पर अनावर्ती व्यय 312 करोड़ 56 लाख रूपए एवं आवर्ती व्यय 147 करोड़ 84 लाख रूपए इस प्रकार कुल राशि 460 करोड़ 40 लाख रूपए का व्यय अनुमानित है। उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत संचालित शासकीय/निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों की डिग्री/अंकसूची को डिजीलॉकर में अपलोड किये जाने का निर्णय मंत्रिपरिषद द्वारा लिया गया। उच्च शिक्षा विभाग अंतर्गत 16 शासकीय एवं 53 निजी विश्वविद्यालय संचालित है। अभी तक कुल 09 शासकीय विश्वविद्यालयों एवं 5 निजी विश्वविद्यालयों के वर्ष 2019-20 से 2021-22 तक के छात्रों की अधिकांश डिग्री/अंकसूची डिजीलॉकर में दर्ज की जा चुकी है।

साइबर तहसील परियोजना पूरे प्रदेश में लागू होगी

मंत्रि-परिषद द्वारा 1 जनवरी, 2024 से साइबर तहसील की व्यवस्था मध्यप्रदेश के सभी 55 ज़िलों में लागू करने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश में बिना आवेदन, नामांतरण और अभिलेख दुरुस्तीकरण की फेसलेश व्यवस्था जून, 2022 से लागू की गई है। इसे साइबर तहसील नाम दिया गया है। इसमें रजिस्ट्री उपरांत, क्रेता के पक्ष में अविवादित नामांतरण, एक फ़ेसलेस, पेपरलेस तरीके से ऑनलाइन प्रक्रिया के द्वारा 14 दिन में बिना आवेदन के और बिना तहसील के चक्कर लगाए स्वतः ऑटोमेटिक तरीके से हो जाता है और खसरे तथा नक़्शे में भी क्रेता का नाम चढ़ जाता है। वर्तमान में यह व्यवस्था प्रदेश के 12 जिलों की 442 तहसीलों में लागू है। इसके माध्यम से अब तक 16 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।

ध्वनि विस्तारक यंत्रों को अवैधानिक रूप से बजाने पर प्रतिबंध

मंत्रि-परिषद द्वारा धार्मिक स्थल एवं अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों को अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदण्ड से अधिक बजाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया। प्रदेश में धार्मिक स्थलों एवं अन्य स्थानों पर अवैधानिक रूप से और निर्धारित मापदंड का उल्लंघन करते हुए बजाए जाने वाले लाउडस्पीकरों अथवा डीजे आदि की जाँच के लिए उड़न दस्तों का गठन, निरीक्षण एवं नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभियोजन की कार्रवाई का निर्णय लिया गया।

अपराधियों पर अंकुश का निर्णय

मंत्रि-परिषद द्वारा गंभीर अपराधों एवं आदतन अपराधियों की पूर्व अपराधों में प्राप्त जमानत सीआरपीसी की धारा 437,438, 439 के प्रावधान अनुसार माननीय न्यायालय से निरस्त करवाये जाने के संबंध में निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में बिना लायसेंस के खुले में अवैध रूप से मांस-मछली आदि का क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध का निर्णय लिया गया। इस संबंध में सघन अभियान चलाया जायेगा। यह अभियान जिलो में अतिक्रमण निरोधी दस्ते, स्वास्थ्य अमले, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के समन्वय से चलाया जाएगा। इस अभियान की मॉनीटरिंग मुख्य सचिव के स्तर से की जाएगी।

तेंदूपत्ता संग्राहकों को 162 करोड़ रूपये का अतिरिक्त पारिश्रमिक

मंत्रि-परिषद द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण दर 3 हजार रूपए प्रति बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति बोरा करने का निर्णय लिया गया। इससे 35 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को 162 करोड़ रूपए का अतिरिक्त पारिश्रमिक प्राप्त होगा। उल्लेखनीय है कि तेंदूपत्ता संग्रहण दर वर्ष 2017 में 1250 रूपए प्रति बोरा थी। वर्ष 2023 में इसे बढ़ाकर 3 हजार रूपए प्रति बोरा कर दिया था।
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मध्यप्रदेश में अब “मोहन राज” | डॉ. मोहन यादव ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल।

*    राजेन्द्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा ने ली डिप्टी सीएम पद की शपथ

*    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री शाह, जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज़ हुए शामिल

शादिक खान, भोपाल। (www.radarnews.in) डॉ. मोहन यादव ने आज मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। उनके साथ जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राजधानी भोपाल के मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद क्रमशः जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। भव्य शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति आकर्षण का केन्द्र रही। समारोह में प्रधानमंत्री के आगमन पर तथा प्रस्थान के पूर्व उनके द्वारा सभी का अभिवादन करने पर ने उपस्थित लोगों मोदी-मोदी के नारे लगाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की।
शपथ ग्रहण समारोह में देशभर से अनेक दिग्गज पहुंचें। जिनमें मुख्य रूप केन्द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केन्द्रीय नागरिक विमानन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री महाराष्ट्र एकनाथ शिंदे, मुख्यमंत्री गुजरात भूपेन्द्र पटेल, मुख्यमंत्री मणिपुर एन. बीरेन सिंह, मुख्यमंत्री उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री मेघालय कोंराड संगमा, उप मुख्यमंत्री महाराष्ट्र देवेन्द्र फड़नवीस, उप मुख्यमंत्री महाराष्ट्र अजीत पवार एवं नागालैण्ड के उप मुख्यमंत्री वाय. पैटन शामिल हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, मप्र भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने के बाद भेंट की।
पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रगान की धुन के साथ आरंभ हुए शपथ ग्रहण समारोह का संचालन मुख्य सचिव श्रीमती वीरा राणा ने किया। शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पूरे प्रदेश से आए बड़ी संख्या में आमजन ने उत्साह से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभिवादन किया। कार्यक्रम का समापन पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रगान की धुन के साथ हुआ। शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने नवनिर्वाचित विधायक, भारतीय जनता पार्टी के राज्य, संभाग, जिला और विकासखंड स्तरों के सभी पदाधिकारी और लाखों की संख्या में कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और आम नागरिक उपस्थित थे। समारोह में देश के प्रमुख साधु संत भी सम्मिलित हुए।

शपथ ग्रहण के पूर्व मंदिर में माथा टेका

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में शपथ ग्रहण के बाद उज्जैन पहुँचकर बाबा महाकालेश्वर के दर्शन कर पूजन अर्चन किया।
आज शपथ ग्रहण करने के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजधानी भोपाल के खटलापुर स्थित मंदिर पहुंचे थे। जहां उन्होंने माथा ठेका और पूजा-अर्चना की। इसके पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पुत्र अभिषेक यादव ने कहा, बहुत अच्छा लग रहा रहा है। मुझे गर्व महसूस हो रहा है। मैं अपनी ख़ुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता हूँ। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में शपथ ग्रहण के बाद अपने गृह नगर उज्जैन पहुँचकर बाबा महाकालेश्वर के दर्शन कर पूजन अर्चन किया।

पीएम मोदी के नक्शेक़दम पर चलेंगे हम : यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव।
शपथ ग्रहण समारोह से पूर्व मध्यप्रदेश के मनोनीत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को कहा कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह से कुशलतापूर्वक देश का नेतृत्व रहे हैं, राज्य भी उनके नक्शेक़दम पर चलेगा। मैं राजा विक्रमादित्य की भूमि से आता हूँ और मैं राज्य की प्रगति, मध्यप्रदेश के करोड़ों नागरिकों की आकाँक्षाओं पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।

राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगें मोहन : शिवराज

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शपथ ग्रहण समारोह से पूर्व डॉ. मोहन यादव को सीएम बनने की बधाई दी। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि नए मुख्यमंत्री (एमपी के मनोनीत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव) राज्य की समृद्धि, विकास और जन कल्याण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
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MP के नए CM : स्वच्छ छवि के ओबीसी नेता, तीन बार के विधायक……जानें कौन हैं मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने साथी डॉ. मोहन यादव को भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री मनोनीत किये जाने पर पुष्पहार पहनाकर बधाई दी।

*     विधायक दल की बैठक में सीएम शिवराज ने रखा यादव के नाम का प्रस्ताव

  प्रदेश में दो डिप्टी सीएम भी होंगें- राजेन्द्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा के नाम की चर्चा

शादिक खान, भोपाल। (www.radarnews.in) विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद करीब सप्ताह भर तक चली उठापटक के बाद आज शाम मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान हो गया है। प्रदेश के उज्जैन दक्षिण विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक-217 से विधायक डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगें। ख़बरों के अनुसार भोपाल स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सोमवार को पार्टी के विधायक दल की बैठक केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में संपन्न हुई। जिसमें निवर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जिसका सभी विधायकों ने एक स्वर में पूर्ण समर्थन किया। शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने मुख्यमंत्री चुनकर एक बार सबको चौंका दिया है। क्योंकि सीएम की रेस में उनका नाम दूर-दूर तक चर्चा में नहीं था। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में ओबीसी समुदाय से शिवराज सिंह चौहान और प्रहलाद पटेल का नाम आगे चल रहा था। लेकिन, पार्टी ने ओबीसी समीकरण को साधने के लिए स्वच्छ छवि के नए नेता को चुनना बेहतर समझा। ओबीसी वर्ग से आने वाले मोहन यादव स्वच्छ छवि के उच्च शिक्षित नेता हैं। उन्हें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का करीबी माना जाता है। यादव की छवि जुझारू और संघर्षशील नेता की रही है।

एक भी क्रिमिनल केस नहीं

भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री मनोनीत किये गए डॉ. मोहन यादव।
बता दें कि, डॉ. मोहन यादव पहली बार 2013 में विधायक निर्वाचित हुए थे। इसके बाद 2018 में उन्होंने दूसरी बार उज्जैन की दक्षिण सीट से चुनाव जीता। वर्ष 2020 में शिवराज के नेतृत्व में एमपी में पुनः भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य करते हुए प्रदेश की सियासत में उनका कद बढ़ा। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में उज्जैन दक्षिण सीट से बीजपी के उम्मीदवार रहे मोहन यादव ने कांग्रेस के चेतन प्रेम नारायण को 12941 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया था। मोहन यादव ने 2023 निर्वाचन आयोग को दिए गए शपथ पत्र में बताया है कि उनके पास 42 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति है। इसमें लगभग 10 करोड़ की चल और 32 करोड़ से अधिक की अचल संपत्ति शामिल है। उनके ऊपर एक भी आपराधिक प्रकरण (क्रिमिनल केस) दर्ज नहीं है।

छात्र नेता के रूप में राजनीतिक सफर की शुरुआत

मध्य प्रदेश के मनोनीत मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के राजभवन में राज्यपाल मंगूभाई भाई पटेल से मुलाकात की।
डॉ. मोहन यादव की वर्तमान आयु 58 वर्ष है। उनका जन्म 25 मार्च 1965 को उज्जैन में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम श्रीमती सीमा यादव है। डॉ. यादव के परिवार में 2 पुत्र और एक पुत्री है। आपकी शैक्षणिक योग्यता बी.एस.सी., एल-एल.बी., एम.ए.(राज.विज्ञान), एम.बी.ए.,पी.एच.डी. है। मोहन यादव ने छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वह सन् 1982 में माधव विज्ञान महाविद्यालय में छात्रसंघ के सह-सचिव रहे। इसके बाद वर्ष 1984 में अध्यक्ष बने। सन् 1984 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) उज्‍जैन के नगर मंत्री एवं 1986 में विभाग प्रमुख के पद पर पहुंचे। बाद में उन्हें सन् 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मध्‍यप्रदेश के प्रदेश सहमंत्री एवं राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया। 1989-90 में परिषद की प्रदेश इकाई में प्रदेश मंत्री बने और फिर आगे बढ़ते हुए सन् 1991-92 में परिषद के राष्‍ट्रीय मंत्री के पद तक पहुंच गए। वह सन् 1993-95 में राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ उज्‍जैन नगर के सह खण्‍ड कार्यवाह बने। 1997 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्‍य बने। बाद में सन् 1998 में पश्चिम रेलवे बोर्ड की सलाहकार समिति के सदस्‍य बनाए गए। 1999 में भाजयुमो के उज्‍जैन संभाग प्रभारी रहे।

कई पुरुष्कारों से भी नवाज़े गए

इसके बाद 2000-2003 में विक्रम विश्‍वविद्यालय उज्‍जैन की कार्यपरिषद के सदस्‍य के रूप में कार्य किया। 2000-2003 में भाजपा का नगर जिला महामंत्री बनाया गया। 2004 में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्‍य बनाए गए। बाद में 2004-2010 में उज्‍जैन विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष (राज्‍य मंत्री दर्जा) के पद तक पहुंचे। 2008 से भारत स्‍काउट एण्‍ड गाइड के जिलाध्‍यक्ष बने। 2011-2013 में मध्‍यप्रदेश राज्‍य पर्यटन विकास निगम भोपाल के अध्‍यक्ष (केबिनेट मंत्री दर्जा) बने। इसके अलावा उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया है। मोहन यादव को उज्जैन के समग्र विकास हेतु अप्रवासी भारतीय संगठन शिकागो (अमेरिका) की ओर से महात्मा गांधी पुरस्‍कार और इस्‍कॉन इंटरनेशनल फाउंडेशन के द्वारा सम्‍मानित किया गया। मध्‍यप्रदेश में पर्यटन के निरंतर विकास हेतु हे 2011-2012 एवं 2012-2013 में राष्‍ट्रपति द्वारा पुरस्‍कृत किया गया।

सामाजिक समीकरण साधने दो डिप्टी सीएम

भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री मनोनीत किए गए जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्ल।
शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रहे मोहन यादव राज्य में अब शिवराज सिंह चौहान की जगह लेंगे। चार बार के मुख्यमंत्री रहे शिवराज ओबीसी समुदाय से आते हैं। इसलिए यह तय माना जा रहा था बीजेपी अगर उन्हें हटाती है तो सूबे में किसी ओबीसी नेता को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। बताते चलें कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है। उसमें भी यादव जाति की अच्छी-खासी तादाद है। मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा बहुसंख्यक ओबीसी मतदाताओं को साधने के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश तथा बिहार के यादव वोटरों को संदेश देना चाहती है कि पार्टी उनकी हितैषी है। भाजपा के साथ अगर यादव आते हैं तो पार्टी उन्हें आगे बढ़ने का मौका देगी।
भाजपा नेतृत्व नई सरकार के जरिए सूबे के सामाजिक समीकरणों साधने के साथ सभी ही क्षेत्रों में अपनी पैठ कहीं अधिक मजबूत बनाने के लिए इस बार दो डिप्टी सीएम (उप मुख्यमंत्री) बनाने का फैसला किया है। ख़बरों के अनुसार विंध्य क्षेत्र का गढ़ कहलाने वाले रीवा जिले से आने वाले बड़े ब्राह्मण नेता राजेन्द्र शुक्ल और दलित नेता जगदीश देवड़ा का नाम डिप्टी सीएम के लिए तय किया गया है। राजेन्द्र शुक्ल शिवराज सरकार में जनसम्पर्क विभाग के मंत्री रहे हैं। जगदीश देवड़ा पूर्व में गृह, वित्त और श्रम विभाग के मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। 1990 में पहली बार विधायक निर्वाचित होने बाद से अपने लगभग 33 वर्ष के लंबे राजनीतिक कार्यकाल में जगदीश देवड़ा आठवीं बार विधायक बने हैं।

सरकार बनाने का दावा किया पेश

मध्य प्रदेश के मनोनीत मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के राजभवन में राज्यपाल मंगूभाई भाई पटेल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया।
भाजपा विधायक दल की बैठक में मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री मनोनीत किये जाने डॉ. मोहन यादव ने राजभवन पहुँचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उनके द्वारा विधायकों के समर्थन वाला हस्ताक्षरित पत्र राज्यपाल को सौंपा गया। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री एवं पर्यवेक्षक मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरेन्द्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेतागण उपस्थित रहे।
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बड़ी खबर : टीएमसी नेत्री महुआ मोइत्रा “कैश-फॉर-क्वेरी” मामले में लोकसभा से निष्कासित

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तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा।

*     लोकसभा में एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट पेश होने पर लिया गया फैसला

*     महुआ बोलीं- ‘मोदी सरकार ऐसा कर के मेरा मुंह नहीं बंद करा सकती’

*     इस कंगारू कोर्ट में जो कुछ हुआ, वो बताता है कि अदानी को बचाने के लिए क्या कुछ कर सकती है मोदी सरकार

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा को शुक्रवार को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया। उनके विरुद्ध लोकसभा में पेश एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट यह निर्णय लिया गया। लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान आज जमकर हंगामा हुआ। एथिक्स कमेटी (संसदीय आचार समिति) की रिपोर्ट पेश होने के बाद सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। पहले 12 बजे तक के लिए और फिर दो बजे तक के लिए। विपक्षी दलों के सांसदों ने एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट से जुड़ीं चिताओं को दूर करने की मांग की थी। उनका कहना था कि रिपोर्ट में अनेक खामियां हैं। संसद की कार्यवाही को लेकर भी सवाल उठाए गए। कहा गया कि 104 पृष्ठ की रिपोर्ट को आज 12 बजे पेश किया गया, दो बजे से इस पर चर्चा शुरू हुई एक घण्टे में ही निष्कासन हो गया। इतने कम समय में सांसद रिपोर्ट को कैसे पढ़ पाएंगे और क्या चर्चा हो पाएगी? यह भी सवाल उठ रहा है कि महुआ को खुद पर लगे आरोपों पर सफाई का मौक़ा भी क्यों नहीं दिया गया। संसद में रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, ‘जैसा कि अधीर रंजन ने कहा अगर हमने इस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए 3-4 दिन का समय दिया होता और फिर सदन के सामने अपनी राय रखी होती तो आसमान नहीं टूट जाता क्योंकि सदन एक बेहद संवेदनशील मामले पर फैसला लेने जा रहा है।’
इस कार्रवाई के बाद संसद के बाहर निकल कर महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से बात की और इस पूरे मामले पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि ‘मोदी सरकार ऐसा कर के मेरा मुंह नहीं बंद करा सकती।’ महुआ ने कहा कि एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पास न तो किसी भी नकदी और न ही किसी गिफ्ट का कोई सबूत है। उन्होंने कहा कि जब नाश मनुज पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है।
उल्लेखनीय है कि, कैश-फॉर-क्वेरी (पैसे लेकर सवाल पूंछने) के आरोपों के आरोपों की जांच करने वाली एथिक्स कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने का सुझाव दिया था। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि कमेटी की सिफ़ारिश से सदन सहमत है। इस रिपोर्ट पर बहस कराए जाने और महुआ मोइत्रा को लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग को लोकसभा स्पीकर ने ये कहते हुए अस्वीकार दिया कि उन्हें पैनल की बैठक के दौरान अपना पक्ष रखने का मौका मिल चुका है। इसके पूर्व दोपहर बाद एथिक्स कमेटी के चेयरमैन विनोद कुमार सोनकर ने जैसे ही रिपोर्ट पेश की कांग्रेस और टीएमसी के लोकसभा सदस्य अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंच गए और नारे लगाते हुए रिपोर्ट की प्रति दिए जाने की मांग करने लगे।
तृणमूल कांग्रेस के सदस्य कल्याण बनर्जी ने रिपोर्ट की सिफ़ारिश पर वोटिंग से पहले बहस कराए जाने की मांग उठाई। कमेटी ने मोइत्रा को सदन से निष्कासित करने की सिफ़ारिश की थी। हंगामे के बीच अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे बीजेपी सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने सदन की कार्रवाई को दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इस बीच लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिख कर अपील की थी कि सदन में रिपोर्ट पर बहस के लिए सदस्यों को तीन चार दिन का समय दिया जाना चाहिए ताकि वे इसका अध्ययन कर सकें। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘जैसा कि अधीर रंजन ने कहा अगर हमें इस रिपोर्ट का संज्ञान लेने के लिए 3-4 दिन का समय दिया होता और फिर सदन के सामने अपनी राय रखी होती तो आसमान नहीं टूट जाता क्योंकि सदन एक बेहद संवेदनशील मामले पर फैसला लेने जा रहा है।’

निष्कासन की सिफारिश राजनीतिक प्रतिशोध

तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने सांसद महुआ मोइत्रा को निष्कासित करने की एथिक्स कमेटी की सिफारिश को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए दावा किया कि इसका उद्देश्य उन्हें अडानी समूह के खिलाफ मुद्दे उठाने से रोकना है। पीटीआई के अनुसार बंदोपाध्याय ने अध्यक्ष से कहा कि महुआ को सदन में अपना भाषण देने के लिए समय दिया जाना चाहिए, जिस पर स्पीकर ओम बिरला ने जवाब दिया था कि मामले पर चर्चा के लिए आधे घंटे का समय दिया जाएगा। बंदोपाध्याय ने पूछा कि जिस सांसद ने आरोप लगाया था कि मोइत्रा को प्रश्न पूछने के लिए नकद भुगतान किया गया था, उन्हें आचार समिति की बैठक में क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा, पहली बैठक (एथिक्स कमेटी की) थोड़े समय में खत्म हो गई और कोई नतीजा नहीं निकल सका। दूसरी बैठक क्यों नहीं की गई? इतनी जल्दबाज़ी आखिर क्यों है? वहीं सीपीआई सांसद बिनॉय विश्वम ने शुक्रवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट की आलोचना की और इसे राजनीति से प्रेरित और सरकार के मुखर आलोचक के खिलाफ स्पष्ट प्रतिशोध करार दिया। उन्होंने कहा, यह राजनीति से प्रेरित है और सरकार के आलोचक के खिलाफ पूर्ण प्रतिशोध जैसा लगता है। आचार समिति को इस तरह से कार्य नहीं करना चाहिए।

संसद के बाहर मोदी सरकार पर साधा निशाना

महुआ ने शुक्रवार को संसद के बाहर संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि, किसी भी कैश, किसी भी तोहफ़े का कोई सबूत कहीं नहीं मिला है। मेरे निष्कासन की सिफ़ारिश सिर्फ़ इस बात पर आधारित है कि मैंने अपना लोकसभा पोर्टल लॉग-इन साझा किया था। उन्होंने कहा कि, लॉग-इन शेयर करने को लेकर कोई नियम नहीं हैं। एथिक्स कमेटी की सुनवाई में ये साफ़ हुआ कि हम सभी सांसद कनवेयर बेल्ट हैं, ताकि हम जनता, नागरिकों के सवालों को संसद में उठा सकें। महुआ ने मोदी और अदानी पर हमला बोलते हुए कहा, अगर मोदी सरकार ये सोच रही है कि मेरा मुंह बंद करके वो अदानी के मुद्दे से ध्यान हटा सकते हैं तो मुझे आपको ये बताना है कि इस कंगारू कोर्ट ने पूरे भारत को दिखा दिया है कि इस प्रक्रिया में जिस तरह से जल्दबाज़ी की गई, दुरुपयोग किया गया, वो ये दिखाता है कि मिस्टर अदानी आप लोगों के लिए कितने ज़रूरी हैं। आप एक महिला सांसद को तंग करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं ताकि मुझे चुप कराया जा सके। कल सीबीआई को मेरे घर पर भेजा जाएगा। वो लोग मुझे अगले छह महीने तक मुझे प्रताड़ित करेंगे, लेकिन मुझे सवाल करना है कि मिस्टर अदानी के 13 हज़ार करोड़ रुपए के कोयला घोटाला का क्या होगा, जिस पर सीबीआई या ईडी गौर नहीं कर रहे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, आप कहते हैं कि मैंने लॉग-इन पोर्टल से राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया है? मिस्टर अदानी हमारे सभी बंदरगाह ख़रीद रहे हैं, हवाई अड्डे ख़रीद रहे हैं और उनके शेयरधारक विदेशी निवेशक हैं और गृह मंत्रालय उन्हें हमारा इंफ्रास्ट्रक्चर ख़रीदने की इजाज़त दे रहा है?

अल्पसंख्यकों और महिलाओं से नफरत करते हैं आप

तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा।
अपने निष्कासन पर महुआ ने संसद के बाहर गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए भाजपा और केन्द्र सरकार को दानिश अली-बिधूड़ी मामले में घेरते हुए जमकर सुनाया। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूंछा, भाजपा के 303 सांसद लोकसभा में हैं, लेकिन उनमें एक भी मुसलमान नहीं हैं। रमेश बिधूड़ी इसी संसद में खड़े होते हैं और 26 मुसलमान सांसदों में से एक दानिश अली से अपशब्द कहते हैं लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाती? आप अल्पसंख्यकों से नफ़रत करते हैं, आप महिलाओं से नफ़रत करते हैं। आप नारी शक्ति से घृणा करते हैं। आप पावर और अथॉरिटी को संभालना नहीं जानते। मोइत्रा ने लंबी लड़ाई का ऐलान करते हुए कहा, मैं 49 साल की हूं और मैं अगले 30 साल सदन के भीतर, सदन के बाहर आप लोगों से लड़ती रहूंगी, मैं गटर में लड़ूंगी, मैं सड़कों पर लड़ूंगी। महुआ मोइत्रा ने बांग्ला में कहा, लोग आपका अंत देखेंगे। आपके पास पंजाब नहीं है, सिंध हमारे पास नहीं है, द्रविड़ आपका नहीं है, उत्कल आपका नहीं है, बंगाल आपका नहीं है। आप कहां से हम पर राज करेंगे, आपको ये शक्तिशाली बहुमत कहां से मिलेगा? एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का अधिकार नहीं है। आपने अर्धन्यायिक अथॉरिटी की अधिकार लिए और मुझ पर कार्रवाई कर दी। आपने प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। ये आपके अंत की शुरुआत है। हम लौटेंगे और आपका अंत देखेंगे।

क्या है पूरा मामला ?

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और तृणमूल कांग्रेस नेत्री महुआ मोइत्रा के बीच की तकरार जगजाहिर है।
तृणमूल कांग्रेस की मुखर नेत्री महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने प्रसिद्ध कारोबारी गौतम अदानी और उनकी कंपनियों के समूह को निशाना बनाने के लिए लगातार संसद में सवाल पूछे और वह भी रिश्वत लेकर। यह आरोप भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने लगाया है, जिनकी महुआ से छत्तीस का आंकड़ा है। बीजेपी सासंद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि महुआ ने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से रिश्वत लेकर अदानी समूह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए अनेक सवाल पूछे। महुआ हमेशा ही इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और कहती रही हैं कि वे हर जांच का सामना करने को वो तैयार हैं। एक हलफ़नामे को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें दर्शन हीरानंदानी ने दावा किया है कि मोइत्रा ने अदानी समूह को निशाना बनाया।
हालांकि, मोइत्रा ने इस हलफ़नामे पर सवाल उठाए थे। सांसद निशिकांत ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजी शिकायत में जय अनंत देहाद्राई नाम के वकील ने इन आरोपों को साबित करने के लिए सबूत दिए थे। बता दें कि देहाद्राई वही व्यक्ति हैं जिन्हें महुआ मोइत्रा कुछ समय पूर्व अपना ‘जिल्टेड एक्स’ यानी निराश पूर्व प्रेमी बताया था। दुबे ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर आरोप लगाया गया कि संसद में महुआ मोइत्रा ने जो 61 सवाल पूछे उनमें से 50 सवाल अदानी समूह से संबंधित थे। उन्होंने आरोप लगाया, “रियल एस्टेट समूह हीरानंदानी ग्रुप के प्रमुख अरबपति कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के कारोबारी हितों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए महुआ मोइत्रा ने आपराधिक साज़िश रची।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया था कि वे लोकसभा के लिए मोइत्रा के लॉग-इन क्रेडेंशियल के आईपी पते की जांच करें ताकि यह जांचा जा सके कि क्या उन तक किसी और की पहुंच थी। इसके बाद दर्शन हीरानंदानी ने एक हलफनामा देकर दावा किया था कि महुआ मोइत्रा ने उन्हें संसदीय लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिया था ताकि वह उनकी ओर से सवाल पोस्ट कर सकें। हीरानंदानी ने लोकसभा की आचार समिति को वह हलफनामा दिया था। महुआ ने कैश-फॉर-क्वेरी (सवाल पूंछने के लिए रिश्वत लेने) के आरोपों का खंडन किया है, लेकिन उन्होंने व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी को अपना संसदीय लॉगइन आईडी पासवर्ड देने की बात स्वीकार की है। एथिक्स कमेटी ने दस्तावेजों एवं सबूतों के साथ तीन मंत्रालयों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तलब किया था।
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