* पन्ना कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम बिल्हा की घटना
* पुलिस के असहयोग के कारण शवों का आज नहीं हो सका पोस्टमार्टम
पन्ना। (www.radarnews.in) जिला मुख्यालय पन्ना के समीपी ग्राम बिल्हा में शुक्रवार 4 अक्टूबर को करंट लगने से देवरानी-जेठानी की दर्दनाक मौत हो गई। कपड़े धोने के बाद उन्हें सुखाने के लिए तार पर फैलाते समय दोनों महिलाओं के करंट की चपेट में आने की जानकारी मिली है। अपनी पत्नी और बहू को खोने वाले राजकुमार पटेल 45 को इस हादसे का पता तब चला जब शाम के समय वह पन्ना से वापिस पाने घर पहुँचा। मकान के अंदर पत्नी राजेन्द्रकली 40 वर्ष और बहू बिन्नू बाई पति भानु प्रताप पटेल 38 वर्ष को अचेत अवस्था में जमीन पर अस्त-व्यस्त पड़ी थी। दोनों की हालत देखकर राजकुमार के पैरों तले से जमीन खिसक गई। एक पल के लिए उसे कुछ समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। दोनों को काफी हिलाने-डुलाने के बाद भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो राजकुमार पटेल फूट-फूटकर रोने लगा। आस-पड़ोस के लोग रोने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचें तो वहाँ का नजारा देख उन्हें यह समझने देर नहीं लगी कि दोनों महिलाओं को करंट लगा है।
आनन-फानन राजेन्द्रकली 40 वर्ष और बहू बिन्नू बाई को अचेत अवस्था में ही इलाज के लिए पन्ना जिला चिकित्सालय लाया गया। जहाँ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने दोनों महिलाओं का सघन परीक्षण करने के उपरान्त उन्हें मृत घोषित कर दिया। सगी देवरानी-जेठानी की मौत के बाद से पटेल परिवार में कोहराम मचा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनी माँओं को खोने वाले बच्चे भी बिलख रहे है। उधर इस दुखद हादसे की खबर फैलने के बाद से ग्राम बिल्हा समेत क्षेत्र मातम का माहौल निर्मित है। राजकुमार पटेल ने बताया कि घटना के समय घर में सिर्फ दोनों महिलाएँ ही मौजूद थीं इसलिए पक्के तौर नहीं बता सकता कि हुआ क्या है। लेकिन घटनास्थल और दोनों शवों की स्थिति को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कपड़े फैलाने वाले तार में घरेलू विधुत लाइन से करंट प्रवाहित हो गया और महिला जब कपड़े धोने के बाद उन्हें सुखाने के लिए तार पर फैलाने गईं तो करंट की चपेट में आ गई। शायद उसे बचाने पहुंचीं दूसरी महिला भी करंट के सम्पर्क में आकर असमय काल-कवलित हो गई।
यहाँ कोई सुनने वाला नहीं है..!

पत्नी और बहु की दर्दनाक मौत से दुखी राजकुमार पटेल 45 ने पत्रकारों को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कथित तौर पर कोतवाली थाना पन्ना पुलिस की लापरवाही के चलते दोनों शवों का आज पोस्टमार्टम नहीं हो सका। यहाँ कोई उसकी सुनने वाला नहीं है, कोतवाली थाना जाकर पुलिसकर्मियों से गुहार लगाई कि पंचनामा सहित मर्ग कायम करने की कार्रवाई तत्परता से कर लें ताकि देर शाम तक दोनों शवों का पोस्टमार्टम संभव हो सके। ड्यूटी डॉक्टर भी पोस्टमार्टम करने के लिए तैयार थे लेकिन पुलिसकर्मियों का कोई अता-पता नहीं था। परिणामस्वरूप आज शवों का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। इसलिए शोक संतृप्त परिजनों को अंतिम संस्कार करने के लिए शव नहीं मिल सके। फिलहाल दोनों शवों को जिला चिकित्सालय पन्ना के शव विच्छेदन गृह में रखवाया गया है। राजकुमार ने बताया कि इस हादसे के बाद से उनके बच्चे और परिजन घर में बिलख रहे हैं, रिश्तेदारों का घर पर आना शुरू हो गया है लेकिन शव पन्ना रखे होने के कारण वह अपने घर भी नहीं जा सकते। अब शनिवार 05 अक्टूबर की सुबह पोस्टमार्टम होने के बाद शवों को परिजनों को सौंपा जाएगा।
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जिला मलेरिया अधिकारी हरिमोहन रावत ने बताया कि मलेरिया कार्यालय पन्ना के द्वारा गैम्बूसिया मछली जिले के जिन स्थानों के जल स्रोतों डाली गई है उनमें मुख्य रूप से – पटनाकला, जिजगांव, गढ़ोंखर, पगरा, महेवा, गुनौर, परसवारा, बिसानी, देवरा, कचोरी, उमरिया डूडी़, सुगरहा, लमतरा, इमलिया, गिरवारा, पुरैना, रैगढ़, पटिया, सिलगी, इटवां, डडवारियां, ककरहा, जिगधा, बड़ागांव, रैहूंटा, महेड़ा, हथकुरी, पवई नगर, कमता, किशनगढ़, करही, अजयगढ़, बहिरवारा एवं पिष्टा ग्राम शामिल है। जिला मलेरिया अधिकारी श्री रावत ने समस्त संबंधित ग्रामवासियों से अपील की है कि अभी लगभग 1 माह तक छोटी गैम्बूसिया मछली का पूरी तरह संरक्षण करें ताकि ये मछलियां प्रजनन कर अपनी संख्या बढ़ा सकें और जिले में मच्छरों को नियंत्रित करने की यह जैविक पहल सफल हो सके।
जल स्रोतों में सभी तरह के मच्छरों के लार्वा खाकर उन्हें पैदा होने से पहले ही ख़त्म करने वाली गैम्बूसिया मछली वाकई कमाल की है। पन्ना जिले में मच्छर जनित बीमारियों के साल दर साल बढ़ते ग्राफ को देखते हुए मलेरिया विभाग द्वारा मच्छरों की रोकथाम के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। चिन्हिंत स्थानों पर मच्छर नाशक दवा के छिड़काव के अलावा वर्षाकाल की समाप्ति पर जल स्रोतों में गैम्बूसिया मछली का संचयन कराना आदि शामिल है। लोगों को मच्छरों के डंक से बचाने के लिए कुछ माह पूर्व मलेरिया विभाग के द्वारा मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों के माध्यम से गाँव-गाँव बड़ी तादाद में मेडिकेटेड मच्छरदानी का निःशुल्क वितरण भी कराया गया है। इसके अलावा लोगों को मच्छर जनित बीमारियों की जानकारी देकर उनसे बचाव हेतु जागरूक किया जा रहा है।

दो दिन पूर्व कलेक्टर पन्ना के नाम पर अधिवक्ता संघ अजयगढ़ की ओर से एसडीम एस. के. गुप्ता को एक ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें उल्लेख किया गया है कि अधिवक्ताओं ने स्थानीय राजस्व न्यायालयों- एसडीएम अजयगढ़, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के कोर्ट के कार्य से स्वयं को अनिश्चितकाल तक के लिए विरत रखने का निर्णय लिया है। पूर्व में दिए गए ज्ञापन का जब तक निराकरण नहीं हो जाता तब तक हमारा बहिष्कार जारी रहेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में अधिवक्ता संघ अजयगढ़ के अध्यक्ष रामपाल यादव, उपाध्यक्ष अरुण कुमार शुक्ला, सचिव संजय शर्मा, प्रेम कुमार पांडेय, बाबूराम तिवारी, चतुरेश सेन, राजेश पुष्पक, सतीश खरे, अरविंद कश्यप सहित अन्य अधिवक्ता शामिल थे।






पन्ना जिले में अल्प वर्षा होने के बाबजूद पाँच साल की परफॉर्मेंस गारण्टी वाली नवनिर्मित सड़क काफी खस्ताहाल हो चुकी है। जिससे क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सड़क बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कथित गुणवत्तापूर्ण सड़क न सिर्फ जगह-जगह धंस गई है बल्कि डामर-गिट्टी की परत उखड़ने से यह गड्ढों से पट चुकी है। परिणामस्वरूप इस मार्ग से होकर आवागमन करना पहले की ही
तरह कष्टप्रद हो गया है। उखड़ी पड़ी सड़क को लेकर क्षेत्र के लोगों में गहरा रोष व्याप्त है। लोग सवाल पूँछ रहे है कि, दो माह में ही जब सड़क की इतनी दुर्गति हो चुकी है तो पांच साल के गारण्टी पीरियड में क्या पूरे समय पेंच रिपेयरिंग ही चलती रहेगी ! फिलहाल इसका जबाब लोक निर्माण विभाग के सम्बंधित तकनीकी अधिकरियों व ठेकेदार के पास नहीं है।
सड़क निर्माण से जुड़े जानकारों की मानें तो कटन से गिरवारा, फतेहपुर-सिमरी मार्ग जिस तरह उखड़ा है उसके मुख्य रूप से दो बड़े कारण है। पहला सड़क निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्धारित तकनीकी मापदण्डों के अनुसार न होना है। सड़क निर्माण में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। दूसरा कारण सड़क का सही तरीके से प्रत्येक चरण में कॉम्पेक्शन न करना है। शायद इसी वजह से पहली अल्प बारिश में ही सड़क की पाँच साल की गारण्टी धुलने से इसके धुर्रे उड़ गए है। चर्चा यह भी कि सड़क निर्माण में जिस डामर का प्रावधान था उसकी जगह पर सस्ते डामर का उपयोग किया गया। गौरतलब है कि बारिश के चालू सीजन में इस मार्ग के दो बार गड्ढे भरवाए गए लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य में हुआ भ्रष्टाचार छिपाए नहीं छिप रहा है। सड़क की बदहाली स्वतः ही इसे बयां कर रही है। इस सड़क के प्रभारी उपयंत्री ने दो बार गड्ढे भरवाने की जानकारी देते हुए यह स्वीकार किया है कि पहली बारिश में ही सड़क काफी क्षतिग्रस्त हुई है।
मजेदार बात यह है कि निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठकों में कलेक्टर, कमिश्नर और वरिष्ठ विभागीय अधिकारी गुणवत्तापूर्ण कार्य करवाने के निर्देश देते रहते हैं लेकिन फील्ड पर इनका पालन नहीं होता है। कटन-गिरवारा-सिमरी मार्ग की तस्वीरें हमारे सिस्टम की इस कथनी और करनी के अंतर को दर्शाती है। निर्माण कार्यों में निविदा की स्वीकृति से शुरू होने वाले कमीशन के चरणबद्ध खेल का यह स्याह सच है। इस तरह के मामलों में कई बार जाँच भी निर्माण कार्य की तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। शायद यही वजह है कि गुणवत्तापूर्ण एवं तकनीकी मापदण्डों के अनुसार कार्य करवाने के भाषणों के बीच निर्माण कार्यों में अनियमितताएं बदस्तूर जारी हैं और गड़बड़ी करने वालों के हौसले बुलंद है। दरअसल, रिचार्ज बाउचर सिस्टम के तहत कुर्सी पाने वालों की तरफ से ऐसे लोगों को अघोषित तौर पर से यह आश्वासन प्राप्त है कि उन पर कार्रवाई की आँच नहीं आएगी।
कटन चौराहा से गिरवारा, फतेहपुर-सिमरी तक नवनिर्मित मार्ग की दुर्दशा को लोक निर्माण विभाग के सबसे बड़े तकनीकी अधिकारी आर. के. मेहरा इंजीनियर इन चीफ के संज्ञान में लाया गया है। 10 करोड़ की लागत से बनी 5 साल की गारण्टी सड़क की बदहाली को ईएनसी श्री मेहरा ने गंभीरता से लेते हुए चीफ इंजीनियर सागर जोन आर. एल. वर्मा को जाँच के निर्देश दिए है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घटिया सड़क की जाँच कब तक पूरी होती है। सड़क के निर्माण में गड़बड़ी करने अथवा सही तरीके से इसकी निगरानी न करने वालों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होती है या फिर जाँच के नाम पर मामले को ठण्डे बस्ते में डालकर बाद में इसे रफा-दफा कर दिया जाएगा।


वंशीधर ने यह आशंका जताई है कि हवश के भूखे कल्लू ने अपनी हैवानियत उजागर होने के डर से गुड़िया को जिन्दा जलाकर मार डाला और फिर उसे दफना दिया। झकझोर देने वाले इन आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस के द्वारा इस बेहद ही संगीन मामले के हर पहलू की बारीकी से जाँच की जा रही है। चर्चा यह भी है कि कथित तौर पर अपने पिता की हैवानियत से तंग आकर गुड़िया ने ही खुद को जिंदा जलाकर आत्महत्या कर ली थी। आरोपों व चर्चाओं के बीच वास्तविकता क्या है, इसका पता मृतिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने व मामले की जाँच पूर्ण होने पर ही चल सकेगा।
उल्लेखनीय है कि कल्लू (परिवर्तित नाम) की पहली पत्नी की मौत करीब 5-6 वर्ष पूर्व हो गई थी। कल्लू को पहली पत्नी से तीन संतान दो बेटियाँ और एक बेटा है। इसके बाद उसने दूसरा विवाह कर लिया। दूसरी पत्नी से भी कल्लू के 2-3 बच्चे है। वह अपनी पहली पत्नी के बच्चों को भी अपने साथ ग्राम नचने में खेत में बने घर में रखता है। बड़ी बेटी रीता (परिवर्तित नाम) की उम्र करीब 15 वर्ष की और छोटी बेटी गुड़िया 13 वर्ष की थी। वंशीधर (परिवर्तित नाम) का आरोप है कि उसकी बहिन की मौत के बाद कथित तौर जीजा कल्लू (परिवर्तित नाम) की नीयत अपनी ही बेटियों पर ख़राब होने लगी और इस कामांध ने पिता-पुत्री को पवित्र रिश्ते को कलंकित करते हुए बेटियों को अपनी हवश का शिकार बनाना शुरू कर दिया।

