* शासकीय माॅडल उमावि पन्ना का वार्षिक पुरूस्कार वितरण समारोह सम्पन्न
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) शासकीय माॅडल उमावि पन्ना के सांस्कृ्ितक कक्ष में कलेक्टर कर्मवीर के मुख्य आतिथ्य में वार्षिक पुरूस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कलेक्टर ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेषता होती है। उस विशेषता को समझबूझ कर बढाना चाहिए। शिक्षकों को भी बच्चे की उस विशेषता को बढ़ाने में सहयोग करना चाहिए। जिससे उसका भविष्य सवंर सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को अधिकारों के साथ-साथ अपने नैतिक दायित्वों को भी समझना चाहिए। बच्चों को हमेशा बड़े लक्ष्य चुनना चाहिए जिससे छोटे लक्ष्य उन्हें अनायास ही प्राप्त हो जाएंगे। बच्चे किताबी ज्ञान के साथ-साथ सामान्य जागरूकता को बढाएं। यही सब उनके जीवन में लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होता है। बच्चे अपने आसपास के वातावरण को समझें।
उन्होंने कहा कि बच्चे अपनी अच्छाईयों को बढ़ाने के साथ साथ कमियों को घटाने का निरंतर प्रयास करें। हमेशा पठन-पाठन या खेल सभी एकाग्रचित होकर करें तो सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं से व्यक्तिगत संवाद करके उनकी जिज्ञासा का समाधान भी किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने संस्था के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को शील्ड, मैडल एवं प्रमाण पत्र देकर पुरूस्कृत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्जवलन से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला शिक्षा अधिकारी के.एस. कुशवाहा ने बच्चों को आश्वस्त किया कि उन्हें किसी प्रकार की शैक्षिक समस्या नही होगी। विशिष्ट अतिथि के रूप में डी.पी.सी. विष्णु त्रिपाठी एवं योजना अधिकारी के.के. सोनी भी मौजूद रहे। विद्यालय का प्रतिवेदन संस्था प्राचार्य श्रीमती साधना अवस्थी् ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन संस्था के हिन्दी शिक्षक डॉ. अशोक त्रिपाठी ने किया।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रूखसार मिर्जा ने कहा कि ट्रिपल तलाक कानून के समय एक पार्टी विशेष के नेतागण मुस्लिम बहिनों के दुख-दर्द और उनकी गरिमा व आत्म सम्मान की रक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करते थे, खुद को मुस्लिम बहिनों उनका सच्चा हिमायती बताते थे लेकिन आज अपनी उन्हीं बहिनों को बिरयानी और रूपये के लिए अनशन पर जाने वाली बताकर पवित्र रिश्तों को गालियां दे रहे हैं। इनका दोहरा चरित्र पूरा देश और दुनिया के सामने उजागर हो गया है। धरना-क्रमिक अनशन को सरदार मान सिंह, युवा नेता आनंद पटेल, देव विश्कर्मा, सूफिया खातून, शहनाज परवीन, मुमताज मिर्जा, जयराम यादव, इरफान उल्ला आदि ने संबोधित किया। इस अवसर पर दिव्यांग मुन्ना खान एवं 10 वर्षीय बालक इदरीश राईन ने अपने उद्बोधन से लोगों की जमकर तालियां बटोरीं।
जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा ने संविधान बचाओ आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह पहली सरकार है, जो कि अपनी सफलताओं को छिपाने और राजनैतिक सत्ता को बनाए रखने के लिए हमारे देश के साम्प्रदायिक सौहार्द-सदभाव को लगातार नुकसान पहुंचा रही है। देश का बहुसंख्यक वर्ग इनके नापाक़ इरादों को भलीभाँति जान चुका है। इसलिए दिल्ली के शाहीन बाग से लेकर पन्ना के हिरणबाग तक हर वर्ग-समुदाय के लोग अपनी माताओं-बहनों के साथ खड़े हैं। क्योंकि यह रिश्ता अटूट है, इसे तोड़ने की साजिश करने वाले कभी सफल नहीं हो सकते। वरिष्ठ नेता रामकिशोर मिश्रा ने कहा कि इतिहास गवाह है कि पन्ना की महिलाएं जब-जब घरों से बाहर आईं है, तो तारीख बदली है। लगभग 75 साल पहले तत्कालीन युवा नेता खुदाबक्श साहब के नेतृत्व में महिलाओं मोर्चा खोलकर पन्ना को जिला बनवाया था। आज एक बार फिर बुंदेलखण्ड की वीरांगनाएं घरों से बाहर आईं हैं। मुझे पूरा विश्वास इस इस बार भी अविस्मरणीय और गौरवशाली इतिहास बनेगा।
पन्ना में आयोजित धरना में सदभाव और आपसी भाईचारे की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां शाहीन बाग दिल्ली में बैठी महिलाओं को समर्थन देने और देश विरोधी कानून के खिलाफ जुटे लोगों में सभी धर्मों के लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। धरने में मुस्लिम महिलाओं के साथ हिन्दू महिलाएं भी साथ आई और सदभाव की मिशाल पेश की। जहां एक ओर षडयंत्रकारी ताकतें देश के सौहार्द को नष्ट करने का काम कर रहीं है, देश के लोगों को जाति वर्गों और धर्मों के आधार पर बांट रहीं हैं, वहीं पन्ना में आयोजित धरना इस खाई को पाटने का काम करते हुए आपसी सद्भाव का पोषण करता दिखा।







साप्ताहिक रविवारीय बाजार की बैठक व्यवस्था में यह बदलाव करने के पूर्व दुकानदारों से चर्चा कर उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया। साथ ही इस बदलाव पर अमल कराने का दायित्व नगर पालिका परिषद् पन्ना एवं पुलिस के जिन कर्मचारियों को सौंपा गया उनके द्वारा कथित तौर दुकानदारों के साथ काफी अभद्रता पूर्ण व्यवहार किया गया। आज सुबह से ही नगरपालिका के कर्मचारी दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर लाउड स्पीकर से जिस तरह रौब भरे अंदाज में अनाउन्समेंट कर रहे थे उसने दुकानदारों के गुस्से को भड़काने में आग में घी का काम किया। परिणामस्वरूप छोटे-गरीब दुकानदार इसे अफसरों की हनक को पूरा करने वाले तुगलकी फरमान के रूप में लेकर विरोध में उतर आए।
एक दुकानदार ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर इस सवाल का जबाब देते हुए जो कुछ कहा, वह गौर करने लायक है। युवा सब्जी व्यापारी ने इशारों-इशारों में जिले के शीर्ष प्रशासनिक अफसरों के अव्यवहारिक निर्णयों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि पहाड़ पर रहने वाले अधिकारियों को जमीन के वाशिंदों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है। वे तो सिर्फ अपनी सुविधा देखते हैं। पिछले कुछ माह से हम दुकानदारों को लगातार परेशान किया जा रहा है, सड़क किनारे चूने की लाइन डालकर दुकानें लगाने से रोका जा रहा है। कई बार तो हमारी लगी हुई दुकान को ही हटवा दिया जाता है। पहले कभी हमें इतना परेशान नहीं किया गया। युवा सब्जी व्यापारी का कहना है कि, पन्ना का साप्तहिक बाजार इस स्थान पर कई दशकों से लग रहा है। यह शहर के बीचों-बीच स्थित होने से बाजार आने-जाने लोगों के लिए यह सुविधाजनक है। बस स्टैण्ड भी नजदीक है जिससे दुकानदारों और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले लोगों को भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। यह बात अलग है कि रविवार के दिन कोतवाली चौराहा से पहाड़कोठी एवं मनहर महिला समिति विद्यालय की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के दोनों किनारों पर दुकानें लगने से चार पहिया वाहन से आने-जाने वालों को थोड़ी असुविधा होती है।
थोक फल-सब्जी विक्रेता शक़ील खान का कहना साप्ताहिक रविवारीय बाजार को अनावश्यक स्थानांतरित करने की जिद छोड़कर प्रशासन को व्यवस्था बनाने के लिए जनहित में खुले दिमाग से अन्य उपायों पर भी गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरुरत है। आपने सुझाव देते हुए बताया कि पार्क के सामने वाले नाले के शेष भाग में स्लैब डालने के साथ-साथ रविवार को बाजार प्रांगण में दोपहिया-चार पहिया वाहनों के आवागमन पर पूर्णतः रोक होनी चाहिए। सिर्फ सर्किट हॉउस एवं पहाड़कोठी आने-जाने वालों को इसमें छूट दी जाए। ग्राहक अपने वाहन लेकर बाजार के अंदर प्रवेश न करें इसके लिए कोतवाली थाना परिसर एवं मनहर महिला समिति विद्यालय में वाहनों की पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बाजार के दोनों तरफ पार्किंग की व्यवस्था होने से वाहनों की धमाचौकड़ी समाप्त हो जाएगी। जिससे पहाड़कोठी के लिए आवागमन में कोई असुविधा नहीं होगी। उल्लेखनीय है कि जब इस संबंध में जिला प्रशासन का पक्ष जानने के लिए पन्ना की प्रभारी तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी से मोबाइल फोन सम्पर्क करने का प्रयास किया गया तो कई बार घण्टी बजने के बाद भी उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं नगर पालिका परिषद् पन्ना के सीएमओ ओ.पी. दुबे का मोबाइल फोन बंद होने के कारण उनसे बात नहीं हो सकी।

कम्प्यूटर बाबा ने जोर देते हुए कहा कि शासन की रेत नीति के अनुसार रेत का खनन होना चाहिए यदि रेत माफिया अवैध रूप से प्रतिबंधित मशीनों को नदी में उतारकर रेत निकालते है तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। मीडिया के माध्यम से कम्प्यूटर बाबा ने माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि आप संभल जाएँ यह शिवराज सरकार नहीं कमलनाथ की सरकार है, इसमें कोई भी हो चाहे वह रेत माफिया, भू-माफिया हो या फिर अपराधी हो उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा। पिछले दिनों पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए की गई कार्रवाई को उन्होंने प्रभावी कार्यवाही बताते हुए इसके लिए कलेक्टर, एसपी और खनिज अधिकारी को बधाई दी और आगे भी इसी तरह कार्रवाई करने की बात कही है।
इसके पूर्व पन्ना के सर्किट हाउस में कम्प्यूटर बाबा ने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी के साथ वन एवं खनिज विभाग के अधिकारियों से जिले में नदियों के संरक्षण तथा अवैध रेत उत्खनन पर पूर्णतः पाबंदी लगाने के संबंध में चर्चा की। उल्लेखनीय है कि लंबे समय से बेतहाशा रेत खनन के दुष्परिणाम केन नदी में साफ़ दिखने लगे हैं। सदानीरा केन तेजी से बरसाती नदी में तब्दील हो रही है। दैत्याकार मशीनों के जबड़ों से नदी का सीना और कोख छलनी कर रेत निकाले जाने से केन की जल धारण क्षमता पर विपरीत असर पड़ा है। मोहाना से लेकर रामनई तक करीब 40 किलोमीटर में नदी का कछार पूरी तरह उजड़ चुका है। वहीं इस क्षेत्र में जलीय जीव भी गिनती के ही रह गए हैं।
जिले के तहसील मुख्यालय गुनौर में 29 जनवरी को सीएए व एनपीआर के विरोध स्वरूप एक नुक्कड़ सभा आयोजित हुई। जिसमें नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के तहत धर्म के आधार पर नागरिकता देने के प्रावधानों को देश के संविधान की मूल भावना के विपरीत बताते हुए इसे मोदी सरकार का विभाजनकारी कानून करार दिया गया। वक्ताओं ने अपने भाषण में कहा कि यह काला कानून है जोकि देश की धर्मनिरपेक्ष छवि पर चोट करता है। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और देश को इस कानून से बचाना बेहद जरुरी है, क्योंकि यह “आइडिया ऑफ़ इण्डिया” के खिलाफ है।
दलित नेता देवीदीन आशू ने कहा कि लगातार दो बार प्रचण्ड बहुमत प्राप्त कर सत्ता में आई केन्द्र की मोदी सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में अब तक पूर्णतः विफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार अपनी इस नाकामी को छिपाने और असल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर धार्मिक-साम्प्रदायिक एजेण्डे को चला रही है। इसके पीछे मकसद राजनैतिक एवं चुनावी लाभ के लिए ध्रुवीकरण करना है। युवाओं को रोजगार, महंगाई को काबू करना, अर्थव्यवस्था में सुधार, कामगारों-किसानों की बेहतरी, विदेशों में जमा काले धन को वापिस लाने से मोदी सरकार को अब कोई सरोकार नहीं है।
नुक्कड़ सभा में एडवोकेट आनंद पटेल ने भी मोदी सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। इनका आरोप है कि केन्द्र सरकार की गलत नीतियों एवं फैसलों के कारण वैश्विक स्तर पर भारत की साख लगातार तेजी से गिर रही है। विभिन्न सर्वेक्षणों में भारत की रेटिंग गिरने से देश की साख पर बट्टा लग रहा है। लेकिन, अहंकार और आत्ममुग्धता में डूबी केन्द्र सरकार इस सच्चाई से आँख फेर रही है। श्री पटेल ने कहा कि इस कारण स्थिति में सुधार तो होने से रहा, उल्टा हालात कहीं अधिक चिंताजनक हो सकते है।
नवगठित आंबेडकराईट पार्टी ऑफ़ इण्डिया (एपीआई) मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष देशपाल पटेल ने अपने उद्बोधन में बताया कि डीएनए टेस्ट के आधार पर एनआरसी को लागू करने की माँग व्यवहारिक है इससे वास्तविक बाहरी व्यक्तियों की पहचान संभव हो सकेगी और वैज्ञानिक तौर यह प्रमाणित भी हो जाएगा कि भारत के मूल निवासी कौन हैं। श्री पटेल का दावा है कि अनेकों अध्ययनों एवं डीएनए टेस्ट से यह साबित हो चुका है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इस देश के मूल निवासी हैं। जबकि आर्य बाहर से भारत में आए थे।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आज देश में जितने भी अल्पसंख्यक हैं उनके पूर्वज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से ही आते थे। कालान्तर में उन्होंने जाति एवं वर्ण व्यवस्था से बाहर आकर दूसरे धर्मों को स्वीकार कर लिया था। देशपाल पटेल ने कहा कि एनआरसी को लागू करने के पीछे सरकार का असल मकसद यदि वाकई बाहरी व्यक्तियों को देश से बाहर निकालना है तो फिर डीएनए टेस्ट इसमें काफी मददगार साबित हो सकता है। इसलिए एनआरसी को डीएनए टेस्ट के आधार पर लागू किया जाना चाहिए।