* कोरोना सहित अन्य संक्रामक बीमारियों को रोकने उठाया कदम
* तम्बाकू से बने पदार्थो का सार्वजनिक स्थलों पर उपयोग पर प्रतिबंध
शादिक खान, पन्ना (www.radarnews.in) तम्बाकू का सेवन जनस्वास्थ्य के लिए बड़े खतरों में से एक है। थूकना एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा है और संचारी रोगों के फैलने का एक प्रमुख कारण है। तम्बाकू सेवन करने वालों की प्रवृत्ति जहां-तहां थूकने की होती है। थूकने के कारण कई गंभीर बीमारियों यथा कोरोना कोविड-19, इन्सेफलाईटिस, यक्ष्मा, स्वाईन फ्लू इत्यादि बीमारी के संक्रमण फैलने की संभावना प्रबल रहती है। तम्बाकू सेवन करने वाले लोग गंदगी फैलाकर वातावरण को दूषित करते हैं जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने के लिए उपयुक्त परिस्थिति तैयार होती है।
पन्ना कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कर्मवीर शर्मा ने बताया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना वायरस को विश्वव्यापी महामारी घोषित किया जा चुका है तथा भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इस विश्वव्यापी महामारी के रोकथाम एवं बचाव हेतु कई तरह के दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। भारतीय दण्ड संहिता की धारा 268 या 269 के अनुसार कोई भी व्यक्ति यदि ऐसा विधि विरूद्ध अथा उपेक्षापूर्ण कार्य करेगा जिससे जीवन के लिए संकटपूर्ण रोग का संक्रमण फैलना संभाव्य हो उस व्यक्ति को 6 माह अवधि तक का कारावास अथवा 200 रूपये तके के जुर्माना से दण्डित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा है कि सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पादन अधिनियम (कोटपा) 2003 की धारा 4 के अनुसार सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। प्रतिबंधित स्थलों पर धूम्रपान निषेध का उल्लंघन करने पर दण्ड स्वरूप 200 रूपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। तम्बाकू सेवन के उपरांत उसे यत्र-तत्र थूकने को निषिद्ध करने के साथ वातावरण के स्वच्छ रखने में सहयोग मिलेगा। साथ ही यह कदम राज्य सरकार के कोरोना जैसी महामारी से बचाने तथा स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत अभियान में अहम योगदान होने के साथ ही जन स्वास्थ्य की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करेगा।

पन्ना कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कर्मवीर शर्मा ने बताया है कि जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए कोविड-19 से रोकथाम व बचाव हेतु एपिडेमिक एक्ट 1897 एवं मध्यप्रदेश एपिडेमिक डीसीजेज कोविड 19 विनियम 2020 तथा मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ एक्ट 1949 की धारा 71 (1) के सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत आगामी आदेश तक जिले के सभी सरकारी/गैर सरकारी कार्यालय एवं परिसर, सभी स्वास्थ्य संस्थान तथा परिसर, सभी शैक्षणिक संस्थान एवं परिसर, सभी थाना एवं सार्वजनिक स्थान जैसे मनोरंजन केन्द्र, पुस्तकालय, स्टेडियम, होटल, शापिंग माॅल, काॅपी हाउस, निजी कार्यालय, न्यायालय परिसर, सिनेमा हाॅल, रेस्टोरेंट, सभागृह, प्रतीक्षालय, बस स्टाॅप, लोक परिवहन, टी स्टाॅल, मिष्ठान भण्डार, ढाबा में किसी भी प्रकार का तम्बाकू पदार्थ तथा सिगरेट, बीडी, खैनी, गुटखा, पान मसाला, व जर्दा इत्यादि का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित किया है। यदि कोई भी पदाधिकारी, कर्मचारी या आगन्तुक इस नियम का उल्लंघन करते है तो उल्लंघन कर्ताओं पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
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मदर टेरेसा हॉस्पिटल के संचालक द्वारा कथित तौर पर स्टॉफ नर्स के ऊपर दबाब बनाकर नौकरी के बदले उसका यौन उत्पीड़न करने एवं आबरू लेने की कोशिश किए जाने का मामला सामने आने से पन्ना में मिशनरी संस्था के विद्यालय और हॉस्टल में पूर्व में हुई घिनौनी घटनाओं की यादें लोगों के जेहन में में ताजा हो गईं हैं। उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष लिस्यू आनंद विद्यालय पन्ना से सम्बद्ध जेसुपाल आश्रम (हॉस्टल) में रहने वाले एक बच्चे के साथ मेल वार्डन के द्वारा हैवानियत की गई थी। सभ्य समाज व शिक्षा जगत को शर्मसार करने एवं हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के अभिभावकों के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाने वाली इस घटना के बाद अधिकारियों ने हॉस्टल का निरीक्षण किया था। जिसमें अव्यवस्थाओं-असुरक्षा के बीच बच्चों के हॉस्टल में रहने की बात सामने आई थी। करीब डेढ़ दशक पूर्व लिस्यू आनंद विद्यालय पन्ना का एक कर्मचारी विद्यालय के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया था। उक्त कर्मचारी की मौत को लेकर शहर में लोगों के बीच शुरू से ही कई तरह की चर्चाएं रहीं हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर आज तक इस बहुचर्चित मामले का सच पुलिस के द्वारा उजागर नहीं किया गया।
“युवती ने लिखित शिकायती आवदेन पत्र प्रस्तुत किया था जिसके आधार पर मदर टेरेसा हॉस्पिटल पन्ना के संचालक फादर टोजी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर मामले की जाँच महिला पुलिस अधिकारी के द्वारा की जा रही है। फादर टोजी को शीघ्र ही गिरफ्तार किया जाएगा।”




