Home Blog Page 142

कोरोना संक्रमित प्रवासी श्रमिक को पन्ना जिला चिकित्सालय में शिफ्ट किया, सीएमएचओ बोले- इस केस की चैन टूट चुकी है घबराने की जरुरत नहीं, युवक के प्राइमरी कॉन्टेक्ट में आए सभी लोगों की जाँच रिपोर्ट निगेटिव आई

0
फाइल फोटो।

* बनौली ग्राम के कोविड सेंटर से कड़ी सुरक्षा में सोमवार को अलसुबह पन्ना लाया गया

* मरीज को स्वास्थ्य सम्बंधी कोई समस्या नहीं जल्द पूर्ण स्वस्थ होने की है उम्मीद

* श्रमिक ने कहा मैं एकदम नार्मल हूँ, हॉस्पिटल में घर से भी अच्छी हैं सुविधाएं

* अपने बारे में गलत जानकारी फैलने से आहत और परेशान प्रवासी युवा श्रमिक

* संक्रमित का इलाज कर रही मेडिकल टीम को परिवार से अलग कर होटल में ठहराया

शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में दो दिन पूर्व कोरोना संक्रमित पहला मरीज मिलने के बाद उसे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए दूरस्थ ग्राम बनौली के कोविड सेंटर से पन्ना जिला चिकित्सालय स्थित स्पेशल कोविड यूनिट में शिफ़्ट किया गया है। सोमवार तड़के करीब 4 बजे उसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में पुख्ता इंतजाम के साथ पन्ना जिला चिकित्सालय लाया गया। मुंबई से चार दिन पूर्व लौटा प्रवासी युवा श्रमिक जांच में कोरोना संक्रमित तो निकला है लेकिन उसमें अभी तक कोरोना बीमारी का कोई प्रत्यक्ष लक्षण नज़र नहीं आ रहा है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एल. के. तिवारी ने स्वयं इस बात की पुष्टि है। उनका दावा है कि कोरोना संक्रमित श्रमिक को अभी तक स्वास्थ्य सम्बंधी कोई समस्या नहीं है, वह पूरी तरह सामान्य है। जिला चिकित्सालय में उसका इलाज जारी है। स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षित टीम उसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रही है। सीएमएचओ ने कोरोना संक्रमित युवक के जल्द स्वास्थ्य स्वस्थ्य होने की उम्मीद जताई है।
सांकेतिक फोटो।
इस केस से जुड़ी एक राहत देने वाली खबर भी आई है। दरअसल संक्रमित युवक के प्रायमरी व सेकेण्डरी कॉन्टेक्ट में आए सभी लोगों को चिन्हित करके प्राइमरी कॉन्टेक्ट के लोगों के 10 सैम्पल कोरोना जांच हेतु भेजे गए थे जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। सीएमएचओ डॉक्टर तिवारी ने समझया कि इसका यह अर्थ है कि कोरोना वायरस के इस केस में चैन यहीं पर टूट गई है। सोमवार 4 मई तक की स्थिति में जिले एक व्यक्ति के अलावा कोई और कोरोना पॉजिटिव नहीं है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि कोरोना मरीज को कोविड सेन्टर बनौली से पन्ना जिला चिकित्सालय के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट करने की वजह कोई इमरजेंसी नहीं है, चिकित्सा सेवाओं की सुविधा एवं प्रबंधन की दृष्टि से यह फैसला लिया गया है। उधर, कोरोना संक्रमित प्रवासी श्रमिक ने भी स्वयं को एकदम नार्मल होना बताया है। मरीज की मानें तो वह पिछले चार दिनों से स्वास्थ्य विभाग की सघन निगरानी में है उसे स्वास्थ्य सम्बंधी किसी तरह की कोई समस्या अब तक नहीं है। अपनी कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने से वह खुद भी काफी अचरज में है। मरीज के मुताबिक वह और उसके दो भाई एवं अन्य साथी मुंबई के सांताक्रूज के जिस इलाके में रहते थे वहां कोरोना संक्रमण नहीं था। ऐसे में वह इस संक्रमण की चपेट में कैसे आया इस बारे में उसे कुछ भी पता नहीं है।
कोरोना संक्रमित और संदिग्ध मरीजों का उपचार करने वाली चिकित्सा टीम के सदस्य।
पन्ना जिले में दो दिन पूर्व कोरोना पॉजिटिव पहला केस सामने आने की नकारात्मक और चिंताजनक खबर के बीच अच्छी बात यह है कि संक्रमित मरीज चिकित्सक व पैरामेडिकल स्टॉफ़ का सम्मान करते हुए उपचार में उन्हें पूर्ण सहयोग कर रहा है। इस युवक ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की तारीफ़ करते हुए बताया कि उसके सैम्पल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद से स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा हर घड़ी उसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। पहले बनौली और अब पन्ना में उसे घर से भी बेहतर सुविधाएं मिल रहीं हैं। इलाज कर रहे चिकित्सक और देखभाल करने वाले पैरामेडिकल स्टॉफ़ की भी उसने तारीफ की है।
फाइल फोटो।
प्राप्त जानकारी अनुसार 30 अप्रैल को अपने भाई समेत 10 सदस्यों के ग्रुप में मुंबई से पन्ना लौटा 31 वर्षीय प्रवासी श्रमिक जिले की अजयगढ़ तहसील क्षेत्र का मूल निवासी है। पन्ना जिले के सीमावर्ती इलाके सिमरिया के चेकपोस्ट में इस ग्रुप के पहुँचने पर सभी सदस्यों की स्क्रीनिंग करने के बाद उन्हें नजदीकी बनौली ग्राम के क्वारंटाइन सेंटर में आइसोलेट किया गया था। इनके सैम्पल लेकर कोरोना की जांच हेतु भेजे गए। शनिवार 2 मई की शाम को ग्रुप के 10 सदस्यों में से 9 नेगेटिव और एक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पॉजिटिव मरीज शुरु से ही बीमारी के प्रत्यक्ष लक्षण से मुक्त है। कोरोना संक्रमित मरीज का करीब 36 घण्टे तक प्ररम्भिक उपचार बनौली ग्राम के कोविड सेंटर में किया गया। सोमवार तड़के करीब 4 उसे बनौली से सुरक्षात्मक तरीके से पन्ना लाकर जिला चिकित्सालय के सर्व सुविधायुक्त आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया है।
संक्रमित मरीज के साथ रहे उसके छोटे भाई को भी अलग से पन्ना लाकर एहतियात के तौर पर सुरक्षित दूरी रखते हुए दूसरे कमरे में रखा गया। कोरोना संक्रमित मरीज ने “रडार न्यूज़” से चर्चा में बताया कि मेरी जाँच रिपोर्ट भले ही पॉजिटिव आई है लेकिन मुझे इसका जरा भी टेंशन नहीं है, उसने बड़ी ही साफगोई के साथ कहा कि मैं पहले की तरह एकदम नार्मल हूँ क्योंकि मुझे सिरदर्द तक नहीं है। इसलिए किसी तरह के टेंशन होने या घबराहट का सवाल ही नहीं उठता है। युवा मरीज से मोबाइल पर हुई बातचीत में उसकी सकारात्मक सोच, समझदारी, मजबूत आत्मबल और जिजीविषा का एहसास होता है।
डॉ. एल. के. तिवारी, सीएमएचओ पन्ना।
उधर, सीएमएचओ ने डॉ. एल. के. तिवारी ने कोरोना हेल्थ ब्रीफिंग जारी कर बताया है कि कोरोना पॉजिटिव युवक का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसमें अभी भी कोई लक्षण नहीं है और युवक को किसी प्रकार की समस्या नहीं है। उसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। आपने आशा व्यक्त की है कि भविष्य में वह जल्द स्वस्थ हो जाएगा। संक्रमित युवक के प्रायमरी व सेकेण्डरी कॉन्टेक्ट में आए सभी लोगों को चिन्हित किया गया। इसके उपरांत प्रायमरी कॉन्टेक्ट से जुड़े 10 सैम्पल लेकर जाँच हेतु भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर स्वास्थ्य महकमे ने राहत की साँस ली है। इसका मतलब यह कि कोरोना वायरस के इस केस में चैन यहीं पर टूट गई है। सोमवार 4 मई तक की स्थिति में जिले एक व्यक्ति के अलावा कोई और कोरोना पॉजिटिव नहीं है।

मेडिकल स्टॉफ को होटल में ठहराया

सांकेतिक फोटो।
पन्ना जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर आमधारणा नकारात्मक रही है लेकिन कोरोना संकट के समय हमारे फ्रंट लाइन योद्धाओं ने लॉकडाउन के दौरान पिछले डेढ़ माह में रात-दिन कड़ी मेहनत करते हुए स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार जिले में कोरोना वायरस की प्रभावी रोकथाम एवं बचाव हेतु हर स्तर पर जो व्यापक तैयारियां की हैं वे वाकई क़ाबिले तारीफ हैं। कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमित पहला मरीज जिले में मिलने के बाद इसके प्रसार की रोकथाम को लेकर कोरोना योद्धा संवेदनशीलता के साथ राज्य और केन्द्र सरकार के बताये हुए सुरक्षात्मक उपायों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने में पूरी कर्तव्यनिष्ठा के साथ जुटे हैं।
जानकारी मिली है कि कोरोना संक्रमित प्रवासी श्रमिक का इलाज करने वाले चिकित्सक और उसकी देखभाल करने से लेकर उक्त वार्ड में साफ़-सफाई करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा की दृष्टि से रविवार की रात्रि में ही परिवार से दूर करते हुए पन्ना के बाहरी इलाके में स्थित एक सर्व सुविधायुक्त होटल में ठहराया गया है। ताकि कोई भी व्यक्ति इनके सीधे सम्पर्क में न आने पाए। आइसोलेशन वार्ड में सेवाएं देने वाले मेडिकल स्टॉफ की जीवन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्हें समस्त पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई किट) पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराये गए हैं। इसके अलावा हॉस्पिटल में जगह-जगह संक्रमित क्षेत्र लिखकर आइसोलेशन वार्ड वाले हिस्से में बाहरी लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। वहीं सोमवार की रात्रि से ही पन्ना हॉस्पिटल की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

देर रात्रि तक चलीं तैयारियां

पन्ना जिला चिकित्सालय में स्थित कोरोना संक्रमित एवं संदिग्ध मरीज वार्ड।
पन्ना के जिला चिकित्सालय में कोरोना संक्रमित मरीज के उपचार हेतु हेतु बनाये गए आइसोलेशन वार्ड में समस्त आवश्यक व्यवस्थाएं और सुविधाएं काफी पहले ही सुनिश्चित कर ली गईं थीं। लेकिन रविवार की शाम जब कोरोना संक्रमित मरीज को बनौली ग्राम से पन्ना लाने का निर्णय लिया गया तो पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने स्वयं जिला चिकित्सालय पहुंचकर बारीकी से हर व्यवस्था को जांचा-परखा। जहां कहीं भी थोड़ी बहुत सुधार की गुंजाइश दिखी उसमें आवश्यक सुधार और तब्दीली कराई गई। रविवार शाम से लेकर देर रात्रि तक कलेक्टर श्री शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एल. के. तिवारी, सिविल सर्जन डॉ. आर. एस. त्रिपाठी ने इलाज और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की कसौटी पर व्यवस्थाओं को बारीकी से जांचा-परखा गया। पूर्ण संतुष्ट होने पर सोमवार 4 मई की देर रात्रि करीब डेढ़-दो बजे बनौली से अलग-अलग एम्बुलेंस में मरीज और उसके छोटे भाई को सुबह 4 बजे के आसपास पन्ना लाकर जिला चिकित्सालय में शिफ्ट किया गया।
यहाँ यह विशेष उल्लेखनीय है कि शनिवार 2 मई की शाम को मुंबई से लौटे प्रवासी श्रमिक के कोरोना पॉजिटिव होने का पता चलने पर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एल. के. तिवारी, सिविल सर्जन डॉ. आर. एस. त्रिपाठी समेत अन्य अधिकारीगण आनन-फानन बनौली पहुँच गए थे और तड़के 3 बजे तक वहां रूककर उपचार आदि की व्यवस्था पूरी कराई गई थी।

गलत जानकारी फ़ैलने से है दुखी

सांकेतिक फोटो।
पन्ना जिला चिकित्सालय के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीज ने आज दोपहर में “रडार न्यूज़” से मोबाइल के माध्यम से बात की। इस दौरान उसने अपने बारे में पिछले दिनों फैलीं गलत और भ्रामक जानकारी वालीं ख़बरों पर दुःख और आपत्ती जताते हुए बताया कि 30 अप्रैल को मुंबई से पन्ना आने पर उसने और ग्रुप के सभी सदस्यों ने सिमरिया बार्डर पर तथा बाद में बनौली के क्वारंटाइन सेंटर में अपने सम्बंध में पूर्ण जानकारी दी थी। जिसमें उसने बताया था कि वह दिहाड़ी मजदूर है और मुंबई अपने छोटे भाई और और अन्य युवाओं के साथ सांताक्रूज इलाके में मछली बाजार के नजदीक रहकर पेंटिंग का काम करता था। इन लोगों ने मिलकर 30 हजार रुपये मासिक रुपये पर कमरा किराया पर ले रखा है। जिसका किरायानामा अनुबंध भी उसके पास मौजूद है। मगर पन्ना में कई दिनों से यह प्रचारित किया गया है कि संक्रमित प्रवासी युवक मुंबई की झुग्गी बस्ती धारावी में रहता था।
देश में कोरोना संक्रमण से मुंबई महानगर सर्वाधिक प्रभावित है और वहां की झुग्गी बस्ती धारावी में भी कोरोना संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं। जबकि इस युवक का दावा है कि मुंबई में वह सांताक्रूज के जिस इलाके में रहता था वहां एक भी केस नहीं निकला। सोशल मीडिया में कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि पुलिस के द्वारा उन्हें पकड़ा गया जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है, हम कहीं भागे थोड़ी हैं बल्कि हम तो स्वयं अपने गृह जिले में लौटे हैं।
सांकेतिक फोटो।
प्रवासी श्रमिक ने बताया कि पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील क्षेत्र में स्थित अपने गांव में परिजनों से मोबाइल पर उसे बात करने पर पता चला है कि कतिपय पुलिसकर्मी उसके सम्बंध में गांव में झूठी अफवाह फैला रहे थे कि मेरी हालत गंभीर होने के कारण मुझे पन्ना से जबलपुर रेफर किया गया है। इससे मेरे परिजन थोड़े परेशान हो गए। इस युवक ने बताया कि पन्ना में निवासरत उसके मामा ने फोन पर बात की और वह कहने लगे कि मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ। उसने अपने मामा को समझाया कि मैं पन्ना में ही हूँ और पूरी तरह से ठीक भी हूँ, आप लोग हॉस्पिटल न आएं क्योंकि प्रशासन के लोग किसी को भी अभी मुझसे मिलने की इजाजत नहीं देंगे। यहाँ से जब छुट्टी मिलेगी तो मैं स्वयं आप लोगों से मिलने आऊंगा।

इनका कहना है –

“कोरोना संक्रमित युवक को बनौली कोविड सेंटर से सोमवार सुबह पन्ना जिला चिकित्सालय में शिफ्ट किया गया है। उसकी सेहत पूरी तरह सामान्य है। युवक में अब तक कोरोना का कोई भी लक्षण नहीं पाया गया है। उसका इलाज जारी है और संक्रमित व्यक्ति की सेहत पर स्वास्थ्य विभाग के प्रशिक्षित कर्मचारी 24⤯7 घण्टे नजर रख रहे हैं। हम लोगों को संक्रमित युवक के जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होने की उम्मीद है। अच्छी बात यह कि इस केस में संक्रमण की चेन टूट गई है। संक्रमित युवक के प्राइमरी कॉन्टेक्ट में आए सभी चिन्हित लोगों के सैम्पल की जाँच रिपोर्ट निगेटिव आई है। बनौली ग्राम में जब यह युवक आइसोलेट था तब उसकी कोरोना जांच पॉजिटिव आई थी इसलिए बनौली क्षेत्र को कंटेन्मेंट जोन घोषित किया गया है।”

– डॉ. एल. के. तिवारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पन्ना।

पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ शावक की संदेहास्पद मौत, वनकर्मियों को गश्त के दौरान पत्थरों पर पड़ा मिला कंकाल

0
मृत बाघ शावक का कंकाल रुपी क्षत-विक्षत शव।

* कुछ माह पूर्व पार्क की रमपुरा बीट में भी मिला था एक बाघ का कंकाल

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बुरी खबर आई है। पार्क की गहरीघाट रेन्ज की कोनी बीट अंतर्गत वन कक्ष क्रमांक- 510 में एक बाघ शावक संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत मिला है। करीब डेढ़ वर्ष की आयु के इस शावक का शव क्षत-विक्षत अवस्था में जल स्रोत के पत्थरों के बीच कंकाल के रूप में मिला। शव की हालत को देखते हुए इसकी मौत 5-6 दिन पूर्व होने का अनुमान लगाया जा रहा है। मृत शावक की पहचान बाघिन पी-213 (32) के पहले लिटर के शावक के रूप में की गई है। शावक की मौत का पता पार्क के मैदानी अमले को नियमित जंगल की गश्ती की दौरान चला। पन्ना टाइगर रिजर्व के शीर्ष अधिकारियों को जैसे ही यह हैरान करने वाली खबर मिली तत्काल डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाकर इलाके की सर्चिंग कराई गई।
फाइल फोटो।
पार्क प्रबंधन का दावा है कि घटनास्थल पर शिकार या अन्य किसी भी अवैध गतिविधि के कोई चिन्ह (साक्ष्य) नहीं पाए गए। ऐसे में शावक बाघ की मौत का रहस्य बरक़रार है। पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी चिकित्सक डॉक्टर संजीव गुप्ता द्वारा मौके से मृत बाघ शावक के सैम्पल एकत्र किये गए। बाघ के कंकाल का पोस्टमार्टम करने के उपरांत उसके अवशेष का जंगल में ही दाह संस्कार किया गया। पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया ने बताया कि फ़िलहाल बाघ की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। बाघ की मौत का पता लगाने के लिए उसके सैम्पल विषाणु विज्ञान और विष विज्ञान प्रयोगशाला में जांच हेतु भेजे जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के पश्चात ही बाघ शावक की मौत की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
पन्ना टाइगर रिजर्व की रमपुरा बीट अंतर्गत कुछ माह पूर्व मिला बाघ का कंकाल। (फाइल फोटो)
उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व अंतर्गत कुछ माह पूर्व पार्क के कोर क्षेत्र में ही रमपुरा बीट में इसी तरह एक बाघ का कंकाल मिला था। रमपुरा के वनरक्षक नाका के समीप बाघ की संदेहास्पद मौत होने के कई दिनों बाद मैदानी अमले को इसकी भनक लगी थी। तब तक मृत बाघ का शव कंकाल में तब्दील हो चुका था। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संदेहास्पद मौत के मामले लगातार सामने आने से पार्क क्षेत्र में इनकी सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्क की बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और चौबीसों घण्टे निगरानी वाले कोर क्षेत्र में बाघों की इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होना और कई दिन बाद इसका पता चलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाघों की मॉनिटरिंग में तैनात मैदानी अमला और तमाम अत्याधुनिक तकनीकी व्यवस्थाएं ठीक तरह से अपना काम नहीं कर रही हैं। इस स्थिति यदि में जल्द सुधार नहीं किया गया तो पन्ना में आबाद बाघों के संसार पर खतरा बढ़ सकता है। वैसे भी जिले के जंगलों में शिकारी और वन्यजीवों के अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह खासे सक्रिय हैं।

एमपी के पन्ना जिले में कोरोना संक्रमण का पहला केस सामने आया, मुंबई से लौटा श्रमिक जांच में पॉजिटिव निकला

0
शनिवार को रात्रि में बनौली ग्राम में मौजूद पन्ना कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, सीएमएचओ एवं अन्य अधिकारी।

* मुंबई से 10 सदस्यों के ग्रुप में आया जिसमें 9 की रिपोर्ट आई निगेटिव

* जिले की सिमरिया बार्डर पर रोककर के बनौली में किया था आइसोलेट

* फर्स्ट कॉन्टेक्ट पर्सन में चिन्हित 8 व्यक्तियों की जांच हेतु सैम्पल लिए

* प्रशासन का दावा पूरी तरह सुरक्षित है पन्ना जिला घबराने की जरुरत नहीं

* कोरोना संक्रमित श्रमिक का बनौली के कोविड सेंटर में प्रारंभिक उपचार जारी

शादिक खान पन्ना।(www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में कोरोना वायरस संक्रमण (कोविड-19) का पहला केस सामने आया है। देश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित महानगर मुंबई से तीन दिन पूर्व पन्ना लौटा एक प्रवासी श्रमिक कोरोना जांच में पॉजिटिव पाया गया। जिले की सीमावर्ती सिमरिया तहसील के बनौली ग्राम के छात्रावास में इस श्रमिक को आइसोलेशन पर रखा गया था। छात्रावास में उसके ग्रुप के 9 अन्य सदस्य और दूसरे राज्यों से आये अन्य श्रमिकों को भी आइसोलेशन में रखे जाने की चर्चा है। पन्ना के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एल. के. तिवारी ने कोरोना पॉजिटिव केस मिलने की पुष्टि की है। प्रशासन को शनिवार 2 मई की शाम को ही इसका पता चल गया था लेकिन पत्रकारों को आधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी देर रात्रि 11 बजे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से जिला जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी सुधीर शर्मा के द्वारा दी गई। अब तक ग्रीन जोन में रहे पन्ना जिले में कोरोना पॉजिटिव पहले केस की पुष्टि के उपरांत पन्ना ऑरेन्ज जोन में आ गया है। प्रवासी श्रमिकों के घर वापसी के चलते आगे क्या स्थिति बनेगी इसे लेकर जिले के लोग खासे चिंतित हैं।
जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि, कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील का रहने वाला है। गुरुवार 30 अप्रैल को यह श्रमिक अपने 10 सदस्यों के ग्रुप में मुंबई से सिमरिया तहसील की बार्डर पर पहुंचा था। इन सभी प्रवासी श्रमिकों को सिमरिया में ही रोककर नजदीकी ग्राम बनौली के हॉस्टल में आइसोलेट किया गया। कोरोना जांच के लिए इनके सैम्पल लेकर सागर मेडिकल कॉलिज भेजे गए। जांच में 9 श्रमिकों की रिपोर्ट निगेटिव आई जबकि एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया। हालांकि कोरोना पॉजिटिव श्रमिक अभी भी बीमारी के प्रत्यक्ष लक्षण से मुक्त है। अर्थात उसे बुखार, खांसी या साँस लेने में तकलीफ आदि नहीं है। कोरोना संक्रमित पाए गए श्रमिक का प्रारंभिक उपचार बनौली कोविड सेंटर मे शुरू किया जा चुका है। पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी एवं प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एल. के. तिवारी दलबल के साथ देर रात्रि तक बनौली ग्राम में मौजूद रहे।

सम्पर्क में आये 8 लोगों के सैम्पल लिए

सांकेतिक फोटो।
कोरोना पॉजिटिव पहला केस सामने आने के बाद भी प्रशासन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि पन्ना जिले के नागरिक पूरी तरह सुरक्षित हैं, किसी को भी घबराने की जरुरत नहीं है। क्योंकि मुंबई से लौटे प्रवासी श्रमिकों के इस ग्रुप को सिमरिया चेकपोस्ट में रोके जाने के बाद सीधे बनौली के हॉस्टल में ले जाया गया था। जिससे इनका सम्पर्क किसी रहवासी क्षेत्र में नहीं हुआ। इस आधार पर प्रशासन पन्ना जिले के सभी नागरिकों के सुरक्षित होने का दावा कर रहा है। जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी पन्ना शर्मा के द्वारा जारी पोस्ट में बताया गया है कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति की फर्स्ट कॉन्टैक्ट पर्सन की हिस्ट्री निकाल ली गई है। जिसमें 8 लोग चिन्हित हुए हैं, इन सभी लोगों के सैम्पल जांच हेतु लिए गए। आठों व्यक्तियों को डॉक्टर की निगरानी में कोविड सेन्टर में रखा गया है। इसके अलावा इनके सेकेण्ड कांटेक्ट पर्सन को भी चिन्हित करके स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस की निगरानी में आइसोलेशन में रखा गया है।

संक्रमित के उपचार की कितनी व्यवस्था

सांकेतिक फोटो।
कोरोना संक्रमित प्रवासी श्रमिक को अलग रखकर उसका प्राथमिक उपचार बनौली ग्राम के कोविड सेंटर में किया जा रहा है। यह जानकारी प्रशासन की ओर दी गई है। विचारणीय प्रश्न यह है कि बनौली जैसे छोटे से गांव में जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक नहीं है वहां इतने खतरनाक संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति को क्या बेहतर उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पाएंगी जिससे कि वह संक्रमण मुक्त हो सके ? प्रशासन के दावे के अनुसार कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति में फिलहाल बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं। लेकिन उस व्यक्ति को स्वयं के संक्रमित होने का पता चलने और प्रोटोकॉल अनुसार उसे पूरी तरह दूसरों से अलग-थलग करके संक्रमण मुक्त होने तक इलाज जारी रखने तक क्या उसकी मनोदशा और हालत आने वाले दिनों में स्थिर रह पाएगी। इस सम्बंध में दावे के साथ कोई भी भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है।
सर्विदित है कि पन्ना जिला चिकित्सालय पन्ना में कोरोना संक्रमितों को भर्ती कर उपचार करने के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जिसमें आपातकालीन सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने की बात पिछले कई दिनों से प्रचारित की जा रही थी। कोरोना संक्रमित श्रमिक की तबियत अगर नासाज़ तो क्या उसे बनौली ग्राम में आइसोलेशन वार्ड जैसी सुविधाएं मिल पाएगीं। ऐसी स्थिति न बनें इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को संक्रमित श्रमिक को रेफर किये जाने पर करने पर गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए।
सांकेतिक फोटो।
“रडार न्यूज़” ने जब इस सम्बंध एक वरिष्ठ चिकित्सक से बात की तो उन्होंने अपना नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर जो कुछ कहा वह गौर करने लायक है – “जब यह स्पष्ट हो गया है कि वह व्यक्ति कोरोना संक्रमित है तो मेरी समझ से उसे ऐसे स्थान पर रखा जाना चाहिए कि कब क्या स्थिति बदलती है तो उसे मैनेज करने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों। आगे जाकर उसका बीपी कितना डाउन होता है उसके लंग्स (फेंफड़ों) की क्या स्थिति बनती है। मेरे हिसाब से यह नहीं होना चाहिए कि जब एमरजेंसी बने तभी जाकर उसे शिफ्ट किया जाए। जब हमें मालूम है कि व्यक्ति पॉजिटिव है और आगे जाकर कई तरह की समस्याएं उसे हो सकती हैं तो मेरा मानना है कि उसे ऐसे सेंटर पर रखा जाना चाहिए कि जहां पर सभी सुविधाएं हो ताकि कॉम्प्लिकेशन को मैनेज किया जा सके। प्रॉब्लम आने पर ऐन वक्त पर शिफ्ट करने से कई बार लाइफ सेविंग टाइम बेकार चला जाता है और मरीज के शॉक में आने की आशंका भी बनी रहती है।”

विरोधाभास बना बहस का मुद्दा

सांकेतिक फोटो।
पन्ना जिले में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे और प्रशासनिक हलकों में हड़कम्प की स्थिति देखी गई। शाम के समय आनन-फानन में अधिकारी बनौली के लिए रवाना हुए जहां संक्रमित व्यक्ति आइसोलेट है। जिम्मेदार अधिकारी इस सम्बंध पत्रकारों को जानकारी देने से बचते रहे। इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये कतिपय लोगों के द्वारा कोरोना संक्रमित प्रवासी श्रमिक का नाम-पहचान सार्वजानिक कर दी गई। इसके कुछ ही देर बाद पन्ना कलेक्टर के स्टेनो कुलदीप दिवेदी सक्रिय हुए और उन्होंने व्हाट्सएप के कई ग्रुपों में पोस्ट डालकर लोगों को नसीहत दे डाली कि नियमानुसार कोरोना संक्रमित की पहचान गोपनीय रखने के आदेश का उल्लंघन कर नाम-पहचान को उजागर किया गया है। हालाँकि तब तक इस तरह की पोस्ट सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर फ़ैल चुकी थी।
लेकिन देर रात्रि जिला जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी सुधीर शर्मा के द्वारा जब कोरोना केस के सम्बंध में जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तो उसमें संक्रमित व्यक्ति का नाम, उसके पिता का नाम एवं पता का भी उल्लेख किया गया। प्रशासन का यह विरोधाभासी कारनामा सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बना रहा। इस बीच विचित्र और हास्यास्पद स्थिति उस समय निर्मित हो गई जब महज कुछ ही घण्टे बाद कलेक्टर के स्टेनो कुलदीप दिवेदी के द्वारा जनसम्पर्क कार्यालय प्रभारी पन्ना सुधीर शर्मा की उस पोस्ट को व्हाट्सएप के कई ग्रुपों में फॉरवर्ड किया गया जिसमें कोरोना संक्रमित व्यक्ति के नाम-पहचान का उल्लेख था। दूसरों को नसीहत देने के बाद स्वयं उसका पालन न करने से लोगों में इस बात को लेकर भ्रम और संशय बरकरार है कि क्या वाकई कोरोना संक्रमित की पहचान उजागर करना शासन-प्रशासन के निर्देशों का उल्लंघन है। जिम्मेदार अधिकारियों को आगे आकर इस पर स्थिति स्पष्ट किये जाने की जरुरत है।

प्रशासन की चुप्पी ने बढ़ाई चिंता

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देवेन्द्रनगर के निरीक्षण के दौरान पैरामेडिकल स्टॉफ एवं ड्यूटी डॉक्टर से चर्चा करते पन्ना कलेक्टर। (फाइल फोटो)
शनिवार 2 मई की शाम को पन्ना जिले में कोरोना पॉजिटिव पहला केस मिलने की सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। इस दौरान मीडियाकर्मी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों से इस सम्बंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए लगातार उनके मोबाइल फोन पर सम्पर्क करते रहे लेकिन किसी ने कुछ भी बताना तो दूर बात करना तक उचित नहीं समझा। जिससे सोशल मीडिया पर लोग कई तरह की चर्चाएं करते रहे और अफवाहें भी तेजी से फैलती रहीं हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में और सोशल मीडिया पर कोरोना केस के सम्बंध आईं ख़बरों तथा पोस्ट के बाद से लोग पन्ना जिले में कोरोना की दस्तक को लेकर काफी डरे हुए व तनावग्रस्त नजर आये।
लॉकडाउन के चलते महानगरों में फंसे प्रवासी श्रमिक पिछले दिनों कुछ इस तरह पन्ना लौटे। (फाइल फोटो)
लोगों की चिंता लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों फंसे श्रमिकों के वापस पन्ना लौटने को लेकर है। पन्ना जिले के करीब 7 हजार प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों में फंसे हैं जिनके घर लौटने का सिलसिला लगातार जारी है। खचाखच भरे वाहनों में प्रतिदिन प्रवासी श्रमिक जिस तरह कोरोना के रेड जोन-ऑरेन्ज जोन वाले इलाकों से असुरक्षित तरीके से लौट रहे हैं उससे जिले में कोरोना संक्रमण के प्रसार का खतरा बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिला 1 मई तक कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित होने के चलते ग्रीन जोन में रहा है। लेकिन पहला केस सामने आने के बाद अब पन्ना का ऑरेन्ज जोन आ गया है। जिले में श्रमिकों की वापसी के बीच आने वाले दिनों में आगे क्या स्थिति बनती यह देखना महत्वपूर्ण होगा। लेकिन इतना तय है कि लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए अब पहले से कहीं अधिक सतर्कता बरतने की जरुरत है।

इनका कहना है –

“बनौली ग्राम में तो क्वारंटीन सेंटर बनाया गया था वहां प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक नहीं है। इस स्थिति में क्या संक्रमित को वहां बेहतर उपचार मिल पाएगा इस पर जानकारों को विचार करने की आवश्यकता है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति को जहां पर हर समय अच्छा इलाज मिल सके और इस संक्रमण का प्रसार भी न हो ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि संभव हो तो उस व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से रेफर कर ऐसे स्थान पर रखा जाए जहां पर उसे हर समय सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं व सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।”

– डी.के. दुबे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं समाजसेवी पन्ना।

“कोरोना संक्रमित व्यक्ति की सेहत पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी 24⤯7 घण्टे नजर रख रहे हैं। जरुरत पड़ने पर उसे तत्काल शिफ्ट किया जाएगा, मौके पर एम्बुलेंस खड़ी है।”

– कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर जिला पन्ना।

लॉकडाउन- 3 : देशभर में लॉकडाउन दो सप्ताह बढ़ाने की घोषणा, गृह मंत्रालय ने कहा 4 मई से 17 मई तक लागू होगा

0
प्रतीकात्मक चित्र।
नई दिल्ली। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने देशभर में लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान किया है। तीसरे चरण का लॉकडाउन 4 मई से 17 मई तक लागू होगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि ग्रीन और ऑरेंज जोन वाले इलाकों में कई तरह की छूट दी जाएगी। लेकिन इस अवधि सार्वजानिक परिवहन जैसे- रेल, बस, हवाई जहाज और सड़क मार्ग से आवागमन पर रोक पूर्व की तरह जारी रहेगी। गृह मंत्रालय ने कहा है विशेष मामलों सड़क, रेल सेवा और वायु मार्ग की अनुमति होगी।
लॉकडाउन के चलते राज्यों और जिलों की सीमाओं की निगरानी में तैनात पुलिस जवान।
गृह मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि अलग-अलग ज़ोन के आधार पर कुछ स्थानों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस संबंध में 16 बिंदुओं का एक विस्तृत नोटिफ़िकेशन जारी किया गया है। गृह मंत्रालय ने नागरिकों से शाम 7 बजे से लेकर सुबह 7 बजे तक बिना आवश्यक काम के घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। साथ ही 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग व्यक्तियों और 10 साल से छोटे बच्चों को भी बिना आवश्यक कार्य के घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी गई है। उल्लेखनीय है कि तीसरे चरण के लॉकडाउन की घोषणा होने से उन लोगों को तगड़ा झटका लगा है जोकि 3 मई के बाद तालाबंदी समाप्त होने की उम्मीद लगाए बैठे थे। लॉकडाउन बढ़ने से छोटे दुकानदारों, श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।

दूसरे राज्यों में फंसे जिले के 7 हजार श्रमिकों में अब तक 5824 के बैंक खातों में भेजी गई राशि, घर वापसी को लेकर लम्बे होते इंतजार से परेशान हैं श्रमिक

0
मुम्बई में फंसे पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील क्षेत्र के कुछ श्रमिकों द्वारा भेजी गई अपनी फोटो।
शादिक खान ,पन्ना।(www.radarnews.in) कोरोना वायरस संक्रमण कोविड-19 महामारी की प्रभावी रोकथाम के लिए एक माह से अधिक समय से देशव्यापी लॉकडाउन के चलते पन्ना जिले के करीब 7 हजार श्रमिक अभी भी 13 देश के राज्यों में फंसे हैं। दिहाड़ी पर जीवनयापन करने वाले मजदूर लॉकडाउन के अवधि बार-बार बढ़ने से काफी मजबूर हो चुके हैं। कामधंधा ठप्प होने के कारण आर्थिक तंगी से लेकर खाने-पीने की आवश्यक वस्तुओं की कमी से परदेश में जूझ रहे श्रमिक अपनों के बीच वापस लौटने के लिए काफी परेशान हैं। इधर श्रमिकों के परिजन भी उनको लेकर काफी चिंतित हैं। बाहर फंसे श्रमिकों की मुश्किलों को कुछ हद कम करने के लिए अन्तर्राज्यीय प्रवासी मजदूर सहायता योजना के अन्तर्गत श्रमिकों के खातों में आर्थिक सहायता राशि भेजने का सिलसिला लगातार जारी है।
घर वापसी के लिए बैचेन इन श्रमिकों की बेबसी-लाचारी को बयां करते इनके उदास और मुरझाए हुए चेहरे।
पन्ना जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार अब तक जिले के अन्तर प्रवासी 5824 श्रमिकों को राशि भेजी जा चुकी है। प्रशासन का दावा है कि अन्तर प्रवासी श्रमिकों के अन्य राज्यों में फंसे होने की जानकारी एकत्र कर इन श्रमिकों को भोजन एवं आवास की व्यवस्था पूर्व से ही संबंधित राज्य एवं जिले के अधिकारियों से बात कर की गयी थी। हालांकि मुम्बई और अन्य स्थानों पर फंसे कुछ श्रमिकों द्वारा पर्याप्त भोजन सामाग्री न मिलने की जानकारी दी गई। इन्हीं श्रमिकों को अब आर्थिक मदद पहुंचाने का काम तेजी से किया जा रहा है।
मुम्बई में फंसे अजयगढ़ तहसील के श्रमिकों के इस ग्रुप में हैं करीब 70 सदस्य।
इस तरह के श्रमिक दूरभाष क्रमांक 104 एवं 181 सीएम हेल्पलाईन पर अपनी जानकारी दर्ज कराते हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर स्थापित जिला कन्ट्रोल रूम के दूरभाष क्रमांक- 07732-253262 वाट्सअप नम्बर-  9425962024 एवं मोबाइल नम्बर- 9425383782 के माध्यम से रात-दिन दर्ज की जाती है। इस कन्ट्रोल रूम को 24 घण्टे सातों दिन बिना रूके चालू रखने के लिए 120 लोगों को तीन शिफ्ट में लगाया गया है। यह लोग जानकारी प्राप्त कर पंजीबद्ध करने का कार्य करते हैं। इसके उपरांत इनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने की कार्यवाही की जा रही है।

कन्ट्रोल रूम में इनकी की लगाई ड्यूटी

पन्ना जिले के रामनई ग्राम के जो श्रमिक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फंसे हैं उन्हें वापस लाने के लिए मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया आवेदन पत्र।
लाॅकडाउन के चलते अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों को लाने की व्यवस्था के संबंध में आमजन के सहयोग हेतु जिला स्तर पर अपर कलेक्टर कार्यालय (नवीन कलेक्ट्रेट) में कन्ट्रोल रूम स्थापित किया गया है। अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे ने कन्ट्रोल रूम का प्रभारी सुशील कुमार तोमर अधीक्षक भू-अभिलेख जिला पन्ना को बनाया गया है। मध्यप्रदेश के अन्य प्रदेशों में फंसे मजदूरों के संबंध में जिला स्तरीय कन्ट्रोल रूम का दूरभाष क्रमांक 07732-253650 है तथा अधीक्षक भू अभिलेख प्रभारी अधिकारी कन्ट्रोल रूम का मोबाइल नम्बर-  7587968331 है।
मुम्बई में फंसे अजयगढ़ तहसील के श्रमिकों में कई श्रमिक अधिकाँश नवयुवक और नाबालिग हैं।
उन्होंने जिला स्तर पर कन्ट्रोल रूम के सुचारू संचालन हेतु कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई हैं जिसमें पीसीओ जनपद पंचायत पन्ना गौरीशंकर गुप्ता- 8770404996 एवं हरेश पाठक- 9981362609 की ड्यूटी प्रातः 8 बजे से दोपहर 2 बे तक लगाई गयी है। इसी प्रकार पीसीओ जनपद पन्ना नीरज श्रीवास्तव- 9713506061 एवं संजय सिंह चौहान- 9425168009 की ड्यूटी दोपहर 2 बजे से रात्रि 10 बजे तक लगाई गयी है। पीसीओ जनपद पन्ना मो. रफीक खान- 9755617600 एवं श्री संतकुमार कुशवाहा- 9424709913 की ड्यूटी रात्रि 10 बजे से प्रातः 8 बजे तक लगाई गयी है।

यूपी के कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के सीधे सम्पर्क में आए पन्ना जिले के 6 श्रमिकों समेत 171 सैम्पल की जांच रिपोर्ट आई निगेटिव

0
सांकेतिक फोटो।

* सीएमएचओ का दावा फिलहाल कोरोना संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित है जिला

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के लोगों के लिए यह खबर काफी राहत और सुकून भरी है कि कोरोना वायरस संक्रमण से पन्ना जिला फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित है। जिले से कोरोना संदिग्ध 197 व्यक्तियों के सैम्पल अब तक जांच हेतु भेजे गए हैं जिनमें 171 सैम्पल की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इसमें अजयगढ़ तहसील के हरदी ग्राम के उन सभी 6 लोगों की जाँच रिपोर्ट शामिल हैं जोकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले की नरैनी निवासी कोरोना पॉजिटिव मरीज के सम्पर्क में आये थे। पन्ना जिले के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एल के तिवारी के हवाले से आईं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स यह बताया गया है कि ग्राम हरदी निवासी 6 लोगों के साथ जिले के कुल 19 सैम्पल की जांच रिपोर्ट मेडिकल कॉलिज सागर से निगेटिव प्राप्त हुई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हरदी के अलावा पवई तहसील क्षेत्र के सुनवानी ग्राम में मुम्बई से लौटे श्रमिकों के सैम्पल की रिपोर्ट भी इसी में शामिल है।
एक संदिग्ध व्यक्ति की कोरोना संक्रमण जांच हेतु सैम्पल लेते हुए स्वास्थ्यकर्मी।
उल्लेखनीय है कि पन्ना से सटे उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की नरैनी तहसील निवासी सैफुद्दीन नाम के व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव निकलने पर उसकी ट्रेवल हिस्ट्री और सीधे सम्पर्क में आये लोगों की जानकारी बाँदा जिला प्रशासन के द्वारा खंगाली गई। जिसमें मुम्बई में पेंटिंग का कार्य करने वाले युवक के पन्ना जिले के अपने कुछ परिचित श्रमिकों के साथ वापस लौटने और पन्ना एवं अजयगढ़ होते हुए गृह नगर जाने की जानकारी सामने आई। बाँदा जिले के प्रशासन के माध्यम से पन्ना जिले के अधिकारियों को जैसे ही इसकी भनक लगी तत्काल हरदी के क्वारेंटाइन सेंटर में रखे गए 6 श्रमिकों को अजयगढ़ शिफ्ट कर जांच हेतु उनके नमूने लिए गए।
सांकेतिक फोटो।
इस दौरान कतिपय लोगों के द्वारा दो दिनों से सोशल मीडिया के जरिये इस तरह माहौल बनाया गया कि कोरोना पॉजिटिव निकले युवक के सीधे सम्पर्क में आये हरदी के 6 लोग कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। उसकी ट्रेवल हिस्ट्री पन्ना से जुड़ने को आधार बनाकर जिले में कोरोना संक्रमण की इंट्री होने अथवा तेजी से फैलने वाले इस खरनाक संक्रमण का जिले में प्रसार होने की आशंका जताते हुए हौवा खड़ा किया गया। जिले के नागरिक इससे काफी भयभीत और तनाव ग्रस्त हो गए। गुरुवार की सुबह तक सोशल मीडिया पर इस अति संवेदनशील मसले पर बड़े ही गैर जिम्मेदाराना तरीके से लोग पोस्ट करते रहे। ऐसा करने वालों ने लॉकडाउन के चलते पहले से ही परेशान जिले के नागरिकों की तक़लीफ़ को जाने-अनजाने और अधिक बढाने का ही काम किया।
इस मांमले में जिले के स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका काफी निराशाजनक रही। पिछले दो दिनों में भी किसी ने भी सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों, अनाप-शनाप बातों, कोरी अटकलों को रोकने के लिए अपनी तरफ से कोई पहल नहीं की गई। उधर प्रामाणिक सूचना के आभाव में कई तरह की आशंकाओं से घिरे जनमानस को वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए जिन मीडियाकर्मियों ने इस दौरान सीएमएचओ से बात करने की कोशिश की साहब ने उनका फोन रिसीव करना तक उचित नहीं समझा।
पन्ना जिले के धरमपुर ग्राम के क्वारंटाइन सेंटर परिसर में अपने कमरों के बाहर बैठे प्रवासी श्रमिक। (फाइल फोटो)
गुरुवार 30 अप्रैल को दोपहर में जैसे ही यह पता चला कि हरदी के श्रमिकों समेत जिन 19 सैम्पल की रिपोर्ट प्राप्त हुई है वह सभी निगेटिव हैं तो लोगों ने राहत की सांस ली। उल्लेखनीय है कि देश के कई हिस्सों में अभी भी जिस तरह से कोरोना वायरस संक्रमण के केस लगातार बढ़ रहे हैं उसके मद्देनजर एक बात स्पष्ट है कि इस जानलेवा संक्रमण का शिकार कोई भी हो सकता है। ऐसे व्यक्ति के सीधे सम्पर्क में आने वाले लोगों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। वर्तमान में पूरी दुनिया कोरोना संकट रूपी भयानक महामारी से जूझ रही है, ऐसे मुश्किल और बेहद चुनौतीपूर्ण समय में प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा एडवायजरी जारी कर लोगों से कोरोना या अन्य किसी सम्बंध अफवाह न फैलाने की लगातर अपील की जा रही है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण की रोकथाम हेतु लोगों से सहयोग की मांग कर इस संकट से निपटने के लिए धैर्य, संयम और अनुशासन बनाये रखते हुए जिम्मेदार नागरिक की तरह शासन-प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया जा रहा है।

22 सैम्पल की रिपोर्ट आना शेष

डॉ. एल. के. तिवारी, सीएमएचओ पन्ना।
प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. एल.के. तिवारी ने बताया कि अन्य राज्यों एवं जिलों से 30 अप्रैल को पन्ना आए 168 व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस प्रकार बाहर से आए कुल 14847 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। जिले के 168 व्यक्तियों का स्क्रीनिंग की गयी। जिले में अब तक 14847 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इनमें आज दिनांक को 168 लोगों को होम क्वारंटाइन किया गया है। अब तक जिले में कुल 8411 व्यक्तियों को होम क्वारंटाइन में रखा गया है। जिसमें 5021 व्यक्तियोें का होम कोरेन्टाईन पूर्ण किया गया। अब तक जिले में 197 व्यक्तियों की जांच हेतु नमूने लिए गए हैं। जिसमें से 171 नमूने निगेटिव पाए गए हैं तथा 22 सेम्पल की रिपोर्ट अप्राप्त है।

विभिन्न प्रदेशों में फँसे लोगों को वापस लाने में समन्वय के लिये अधिकारियों को सौंपे दायित्व

0
सांकेतिक फोटो।

* प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य लोगों सुरक्षित घर वापसी की जागी उम्मीद

भोपाल। (www.radarnews.in) देश भर में लॉकडाउन के कारण मध्यप्रदेश के अनेक नागरिक, श्रमिक, विद्यार्थी, दर्शनार्थी एवं अन्य प्रोफेशनल्स आदि अन्य राज्यों में रुके हुए हैं। इसी प्रकार अन्य प्रदेशों के नागरिक मध्यप्रदेश में रुके हुए हैं। वे सब अपने-अपने प्रदेश एवं घर जाने को इच्छुक हैं।
गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इस तरह के व्यक्तियों के आवागमन की अनुमति कुछ शर्तों के साथ प्रदान की गई है। इस कार्य के लिये राज्यों से समन्वय कर विभिन्न प्रदेशों में फँसे लोगों का आवागमन सुगम एवं सुचारू रूप से सम्पादित करने का दायित्व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को सौंपा गया है।

अधिकारी का नाम

आवंटित राज्य

मलय श्रीवास्तव
प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग
गुजरात एवं राजस्थान
मनु श्रीवास्तव
प्रमुख सचिव, एमएसएमई विभाग
उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड एवं पंजाब
नीरज मंडलोई
प्रमुख सचिव, खनिज साधन विभाग
दिल्ली एवं हरियाणा
दीपाली रस्तोगी
प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विभाग
महाराष्ट्र, झारखण्ड
आईरिन सिंथिया जे.पी.
संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र
तमिलनाड़, केरल एवं पुडुचेरी (पाण्डिचेरी)
वी. किरण गोपाल
प्रबंध संचालक, म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी
आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, ओडिसा एवं उत्तर-पूर्वी राज्य
इलैया राजा टी
प्रबंध संचालक, लघु उद्योग निगम, भोपाल
कर्नाटक एवं गोवा
अपर मुख्य सचिव और प्रभारी स्टेट कंट्रोल रूम आई.सी.पी. केशरी ने जानकारी दी है कि ये अधिकारी उन्हें आवंटित प्रदेश के समन्वय अधिकारियों, राज्य-स्तरीय कंट्रोल रूम भोपाल एवं मध्यप्रदेश के जिला प्रशासन के साथ आवश्यक समन्वय कर फंसे हुए लोगों का सुरक्षित एवं प्रोटोकाल का पालन करते हुए दोनों ओर का आवागमन सुनिश्चित करेंगे। सभी नोडल अधिकारी प्रतिदिन किये गये कार्य के संबंध में प्रतिवेदन राज्य-स्तरीय कंट्रोल रूम में प्रमुख सचिव संजय दुबे को उपलब्ध कराएंगे।
शासन के आदेश की कॉपी।
काफी देर से ही सही पर प्रदेश सरकार की इस महत्वपूर्ण पहल से दूसरे राज्यों में फंसे श्रमिकों एवं अन्य लोगों सुरक्षित घर वापसी की उम्मीद जागी। बहरहाल अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाहर फंसे लोगों की वापसी कोटा से लाए गए छात्रों की तर्ज पर होगी या फिर इनकी बड़ी तादाद को देखते हुए कोई और तरीका अपनाया जायेगा।

पन्ना टाइगर रिजर्व से आई बड़ी खुशखबरी, हथिनी मोहनकली ने 90 किलो वजनी मादा बच्चे को दिया जन्म 

0
अपने नवजात बच्चे के साथ युवा हथिनी मोहनकली।

* पीटीआर में बाघों के साथ-साथ लगातार बढ़ रहा है हाथियों का कुनबा 

* विश्व की सबसे बुजुर्ग हथिनी “वत्सला” का यहां पर है बसेरा 

* इंसानों की तरह जच्चा-बच्चा का पूरा ख्याल रख रहे हैं दूसरे हाथी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ-साथ धरती के विशालकाय जीव हाथियों का कुनबा भी लगातार बढ़ रहा है। सोमवार 27 अप्रैल की देर रात पन्ना पार्क से एक बड़ी खुशखबरी आई है। पार्क के हिनौता गेट स्थित हाथी कैम्प में युवा हथिनी मोहनकली ने 90 किलो वजनी एक मादा शिशु को जन्म दिया है। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों पूर्णतः स्वस्थ्य हैं। कोरोना संकट के बीच लॉकडाउन के दौरान पार्क में हाथी के बच्चे के जन्म लेने पर पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने ख़ुशी जाहिर की है। इस प्यारी सी नन्ही परी के आने के बाद पीटीआर में अब हाथियों के कुनबे की सदस्य संख्या बढ़कर 15 हो गई है।
हथिनी मोहनकली का नवजात मादा शिशु।
पन्ना टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि हथिनी मोहनकली ने लगातार दूसरी बार मादा शिशु को जन्म दिया है, पार्क में हाथियों की वंश वृद्धि के लिहाज से बेशक हमारे लिए यह बड़ी खुशखबरी। नए मेहमान के आने से हिनौता कैम्प रहने वाले सभी हाथी काफी खुश नजर आ रहे हैं। दूसरे हाथियों के द्वारा इस समय इंसानों की तरह मोहनकली और उसके नवजात शिशु का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। 19 वर्षीय युवा हथिनी मोहनकली दूसरी बार माँ बनीं है। इसके पूर्व मोहनकली ने वान्या नामक मादा शिशु को जन्म दिया था। हथिनी वान्या अब 9 वर्ष की हो चुकी है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि मोहनकली के प्रसव के बाद से उसके नवजात शिशु और हथिनी के स्वास्थ्य पर उनके द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है।
फाइल फोटो।
उल्लेखनीय है कि पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों तादाद पिछले कुछ वर्षों से लगातार तेजी से तेजी से बढ़ रही है, जिसमें यहां के हाथियों का भी अहम योगदान है। वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि पार्क के प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग बाघों की मॉनिटरिंग, उपचार, ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने, आबादी क्षेत्र में बाघ या तेंदुए के घुसने पर उसे सुरक्षित तरीके से वापस वन क्षेत्र में लाने, मानसून गश्ती आदि कार्यों में होता है। फिलहाल यहां पर 5-6 पूर्ण प्रशिक्षित हाथी इन कार्यों को प्रतिदिन बखूबी अंजाम देते हुए विशाल वन क्षेत्र में बाघ और दूसरे वन्यजीवों की मॉनिटरिंग में पार्क प्रबंधन की मदद कर रहे हैं। बताते चलें कि पन्ना टाइगर रिजर्व दुनिया की सबसे उम्रदराज़ हथिनी वत्सला का घर है। पार्क के हिनौता गेट के समीप बने हाथी कैम्प में रहने वाली इस हथिनी की आयु 100 वर्ष से भी अधिक बताई जाती है। जबकि हाथियों की औसत आयु 65-70 वर्ष होती है।

इनका कहना है –

“पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता कैम्प में युवा हथिनी मोहनकली ने 27 अप्रैल की देर रात एक मादा शिशु को जन्म दिया है। माँ-बच्चा पूर्णतः स्वस्थ हैं। पार्क में अब हाथियों की कुल संख्या बढ़कर 15 हो गई है। मादा बच्चे के जन्म की खबर हमारे लिए ख़ुशी की बात है। पन्ना पार्क के कुशल प्रबंधन, बेहतर मॉनिटरिंग और फील्ड स्टॉफ की कड़ी मेहनत का ही यह प्रतिफल है कि यहाँ बाघों के साथ-साथ दूसरे वन्यजीवों और हाथियों को अनुकूल वातावरण मिलने से उनकी तादाद लगातार बढ़ रही है।” 

– के. एस. भदौरिया फील्ड डॉयरेक्टर पीटीआर पन्ना। 

अपील : “कोरोना वायरस संक्रमण रोकने आमजन प्रशासन का सहयोग करें”- कलेक्टर

0
पन्ना कलेक्टर कर्मवीर शर्मा।

* जरुरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें, शारीरिक दूरी बनाए रखें

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने पन्ना जिले के नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, मीडियाकर्मियों एवं अधिकारियों, कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा है कि सभी के द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण रोकथाम में आवश्यक सहयोग प्रदान किया गया है। आगे भी इसी तरह सहयोग प्रदान करते रहेंगे। जिला प्रशासन द्वारा आमजनता की कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए समय समय पर शासन के निर्देशानुसार सशर्त छूट दी जा रही है। आप सबको लाॅकडाउन के दौरान जो भी छूट दी गयी है उसका लाभ निर्धारित शर्तों के अन्दर ही उठाएं। कलेक्टर श्री शर्मा ने कहा कि कहीं भी भीड़-भाड़ एकत्र न करें। आपस में शारीरिक दूरी बनाकर रखें। घर से आवश्यक कार्य के लिए निकलते वक्त अपने साथ बच्चों को न लाएं। बच्चों और बुजुर्गों को घर पर ही रहने की सलाह दें। अनावश्यक घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर न आएं। दुकानों के लिए निर्धारित समय के अन्दर ही आवश्यक सामग्री का क्रय शारीरिक दूरी बनाकर करें।
उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए यह भी कहा है कि सड़े-गले फल सब्जी, बासी भोजन न खाएं। भोजन को ढंककर रखें। अनावश्यक सड़कों पर घूमने, भीड़ एकत्र करने पर पुलिस प्रशासन द्वारा कठोर कार्यवाही की जाएगी। हर समय चेहरे पर मास्क अथवा कपड़ा ढंककर रखें। हांथों को बार बार साबुन से धोएं । घर में साफ-सफाई रखने के साथ घरों के आसपास साफ-सुथरा रखें।

उप संचालक ने गौशालाओं का निरीक्षण कर पशुओं के भोजन-पानी की व्यवस्था देखी, अजयगढ़ में बंद पड़े दुग्ध संकलन को शुरू कराने दिए निर्देश

0
गौशालाओं का निरीक्षण करते हुए उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं पन्ना डॉ. त्रिपाठी।
शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं पन्ना डाॅ. सी.के. त्रिपाठी ने जिले के विभिन्न गौशालाओं एवं दुग्ध शीत केन्द्र अजयगढ़ का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने पवई, भैंसवाही, झिन्ना, अजयगढ़ एवं देवगांव की गौशालाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गौशाला व्यवस्थापकों को गौशाला में रह रहे पशुओं को भूसा खिलाने एवं समुचित पानी पीने की व्यवस्था के साथ-साथ गौशालाओं में भूसे के पर्याप्त भण्डारण करने के निर्देश दिए। डाॅ. सी.के. त्रिपाठी ने यह भी निर्देश दिए कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। इस संबंध में उन्होंने गौशाला व्यवस्थापकों को आवश्यक गतिविधियों की जानकारी दी।
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं पन्ना डॉ. त्रिपाठी ने अजयगढ़ में स्थापित दुग्ध शीत केन्द्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि केन्द्र में दुग्ध संकलन नहीं किया जा रहा है। इस पर उन्होंने प्रबंधक को तत्काल दुग्ध संकलन करने के निर्देश दिए। शीत केन्द्र प्रबंधक द्वारा दुग्ध संग्रहण करने का आश्वासन दिया। उप संचालक डाॅ. सी.के.त्रिपाठी ने शीत केन्द्र क्षेत्रान्तर्गत आने वाले सभी पशुपालक एवं दुग्ध समितियों से अपेक्षा की कि वे दुग्ध शीत केन्द्र अजयगढ़ में दूध विक्रय करें।