* सागर कमिश्नर ने शासन की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की पन्ना में की समीक्षा
* श्रमिकों का विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में पंजीयन कराने के दिए निर्देश
* जननी सुरक्षा सहित महिला कल्याण से जुड़ी योजनाओं के भुगतान शीघ्र करने को कहा
शादिक खान, पन्ना।(www.radarnews.in) श्रमिकों के कल्याण के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार की बहुत सारी योजनाएं हैं, इन योजनाओं में श्रमिकों का अनिवार्य रूप से पंजीयन कराया जाए। इसी प्रकार बहुत से ऐसे श्रमिक हर जगह होते हैं जिनके पास छोटी खेती की जमीन रहती है। कुछ श्रमिक ऐसे होते हैं जिनके पास कोई न कोई परम्परागत हुनर होता है। ऐसे श्रमिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ दिया जाए जिससे वे यहां रहकर ही अपने काम धन्धे करें और पलायन की परम्परा को पूरी तरह छोड़ दें। यह विचार सागर संभाग आयुक्त अजय सिंह गंगवार आज पन्ना में व्यक्त किए। एक दिवसीय प्रवास पर पन्ना पहुंचे श्री गंगवार ने यहां शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों पर चर्चा की। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों, कोरोना वायरस रोकथाम किए जा रहे प्रयास, उपार्जन एवं मनरेगा योजना के तहत जिले में की गयी कार्यवाही के संबंध में जानकारी प्राप्त कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में कलेक्टर कर्मवीर शर्मा द्वारा बताया गया कि 36 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिकों का आना हुआ है। इनमें 25 हजार अकुशल तथा लगभग 7 हजार कुशल श्रमिक हैं। जिले में 11744 अकुशल श्रमिकों मनरेगा के तहत कार्य दिलाया गया है। इसके अलावा जिले में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्य में श्रमिकों को लगाया गया है। जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के भवनों में कुशल श्रमिकों को लगाया गया है। बैठक में कलेक्टर द्वारा बताया गया कि इस वर्ष उपार्जन केन्द्रों की संख्या पिछले वर्ष 49 उपार्जन केन्द्रों के स्थान पर जिले में 71 उपार्जन केन्द्र स्थापित कराए गए थे। जिससे कोरोना संक्रमण को रोकने में मदद एवं किसानों का गेहूं शीघ्र उपार्जित हो सके।
आयुक्त सागर अजय सिंह गंगवार द्वारा निर्देश दिए गए कि वन विभाग, उद्यानिकी आदि के कार्यो से भी इन श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। जिससे अधिक से अधिक श्रमिकों को रोजगार का अवसर प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि श्रमिक कल्याण संबंधी योजना में यदि श्रमिक का पंजीयन हो जाएगा तो वह जहां भी कार्य करेगा वहां उसे उस योजना से लाभ मिल सकेगा। यदि श्रमिकों को अपने जिले में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करा दिए जाते हैं तो श्रमिकों का पलायन पूरी तरह रूक जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा बताया गया कि जिले में अब तक 4 कोरोना पाॅजिटिव मरीज मिले हैं यह सभी मरीज प्रवासी है। जो किसी न किसी रेड जोन से पन्ना आए थे। इनमें से एक मरीज पूर्व में स्वस्थ होकर घर चला गया है। पूर्व के भर्ती दो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं। 25 मई को भर्ती किए गए मरीज का उपचार किया जा रहा है।
आयुक्त श्री गंगवार ने जिला प्रशासन द्वारा किए गए कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि जिले में श्रमिकों के कल्याण एवं कोरोना वायरस संक्रमण रोकथाम एवं उपचार के लिए अच्छे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की महिला कल्याण संबंधी योजनाओं का तुरंत भुगतान किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का जब ग्राम स्तर पर आशा एवं एएनएम द्वारा पंजीयन किया जाता है उसी समय उसका पूर्ण विवरण दर्ज कर लिया जाना चाहिए जिससे भुगतान में विलम्ब न हो। सम्पन्न हुई इस बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालागुरू के, अपर कलेक्टर जे.पी. धुर्वे, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत समस्त एसडीएम एवं संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
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ईद के पूर्व पन्ना जिले में लॉकडाउन तो समाप्त हो गया मगर कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम हेतु प्रार्थना केन्द्रों में लोगों के एकत्र होने पर रोक के चलते ईद के दिन ईदगाह और मस्जिदों में संन्नाटा पसरा रहा। पन्ना सहित आंचलिक क्षेत्रों में मुस्लिम भाईयों ने ईद की दो रकात विशेष नमाज़ अपने घर पर ही पढ़ी। इसलिए इस बार ईद की वैसी रोनक नज़र नहीं आई जिसके लिए पूरी दुनिया में यह त्यौहार जाना जाता है। इसके पूर्व कोरोना संकट के चलते पिछले दो माह तक लॉकडाउन रहने से परेशान रहे सभी वर्गों के दिहाड़ी मजदूरों, गरीब, यतीमों और अन्य जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हुए मुस्लिम समाज के लोगों के द्वारा फितरा-जकात की नकद राशि अथवा खाद्यान्न समाग्री देकर बिना किसी दिखावे के मदद की गई। जिले में ईद का त्यौहार पन्ना के साथ-साथ अजयगढ़, बरौली, अमरछी, तुलापुर, हरदी, निजामपुर, पहाड़ीखेरा, देवेन्द्रनगर, ककरहटी, गुनौर, सलेहा, भाटिया, महेवा, अमानगंज, पवई, सिमरिया, रैपुरा, शाहनगर, मुड़वारी, बोरी आदि जगह सादगी के साथ मनाया गया।
सोमवार 25 मई को ईद-उल-फ़ित्र के मुबारक मौके पर घरों में विशेष नमाज सुबह 9 बजे से 11 बजे के मध्य पढ़ने के बाद मुस्लिम भाईयों के द्वारा कोरोना वायरस संक्रमण से इंसानियत को महफूज करने और इससे दुनिया को निजात दिलाने की दुआ प्रमुखता से मांगी गई। मालुम हो कि रमजान माह के तीस दिनों तक मुस्लिम धर्मावलम्बी भूखे-प्यासे रहकर रोजे रखते, नमाज़ और तराबीह पढ़ते हैं। ऐसी मान्यता है कि महीने भर तक कठिन इबादत करने के बाद आने वाला ईद का त्यौहार अल्लाह की तरफ से अपने बंदों को दिया गया अनमोल तोहफा रुपी एक बेहद ख़ास अवसर होता है। इस दिन नामज के बाद सच्चे मन अगर कोई दुआ मांगता है तो माह-ए-रमजान मुबारक के सदके में उसकी जायज मुराद पूरी होती है।









विभाग के अंदरखाने चर्चा है कि रेंजर की मंशा को भांपते हुए इस घटनाक्रम की जानकारी पन्ना टाइगर रिजर्व उप संचालक को दी गई, तब कहीं जाकर उनके हस्तक्षेप के बाद बमुश्किल यह वन अपराध दर्ज हो सका। उधर इससे नाराज रेंजर साहब कथित तौर पर फील्ड स्टॉफ को देख लेने की धमकी देते रहे। आश्चर्यजनक रूप से इसके बाद भी उनके द्वारा प्रकरण की कार्रवाई में हर सम्भव रोढ़े अटकाए गए। जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि, रेंजर श्री तिवारी स्वयं घटनास्थल पर नहीं पहुंचे और गुरुवार की सुबह 6 बजे मृत जंगली सुअर को पोस्टमार्टम के लिए शाम करीब 6 बजे पन्ना ले जाया गया। आग उगलती इस प्रचण्ड गर्मी में मृत जंगली सूअर का पोस्टमार्टम करीब 12 घण्टे बाद देर शाम होने की चर्चायें हैं। अगले दिन आरोपी वाहन चालक को न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।
उल्लेखनीय है कि अपने कारनामों से अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाले डिप्टी रेंजर लालबाबू तिवारी पन्ना टाइगर रिजर्व के बड़े साहब के चहेते हैं। इसलिए सीधी भर्ती के रेंजर और इनसे काफी सीनियर डिप्टी रेन्जर लूप लाइन में पड़े हैं। जबकि लालबाबू के पास पन्ना कोर और अमानगंज समेत दो वन परिक्षेत्र का प्रभार है। करीब छः माह पूर्व वन परिक्षेत्र पन्ना कोर की बीट रमपुरा में वनरक्षक नाका के नजदीक एक बाघ की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई थी। लेकिन समय रहते पार्क प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं मिली। मृत बाघ का शव सड़ने के बाद जब कंकाल में तब्दील हो गया तब कई दिनों बाद इस घटना का खुलासा हुआ था। बाघ की मौत के इस गंभीर मामले में मैदानी अमले पर तो कार्रवाई की गई लेकिन प्रभारी रेंजर लालबाबू तिवारी का बाल भी बांका नहीं हुआ। बड़े अफसरों की कथित मेहरबानी से इस मामले में लालबाबू को ग्रीन सिग्नल मिलने से वे बेदाग़ बच निकले।

जिले के गुनौर तहसील मुख्यालय से बमुश्किल 6 किलोमीटर की दूरी पर सुंगरहा ग्राम के नजदीक विशाल क्षेत्र में स्थित 75 हजार मैट्रिक टन भण्डारण क्षमता वाले ओपन कैप अर्थात विशाल खुले चबूतरों में माह दिसम्बर-2019 से 35,350 मैट्रिक टन धान भण्डारित है। इसके आलावा 26 हजार मैट्रिक टन गेहूं भी भण्डारित है। वेयर हाउस कार्पोरेशन के इस ओपन कैप में खाद्यान्न भण्डारण के नियमों एवं सुरक्षा इंतजामों की धज्जियां उड़ाते हुये गेहूं और धान की लाखों बोरियों को पॉलीथीन से से अच्छी तरह ढंककर तक नहीं रखा गया है।
सबसे ज्यादा लापरवाही धान के भण्डारण में देखने को मिल रही है। धान के बारदानों के अधिकांश स्टेक (छलनी) खुले आसमान के नीचे पूर्णतः असुरक्षित रखीं है जिनमें पाॅलिथीन तक नहीं है। समर्थन मूल्य पर खरीदी गई धान को समय पर मिलिंग के लिये न भेजने और सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी कर लापरवाही पूर्वक ओपन कैप में भण्डारित करने का भयंकर दुष्परिणाम खाद्यान्न बर्बादी के रूप में दिखने लगा है।
उल्लेखनीय है कि ओपन कैप में खाद्यान्न को सिर्फ तीन माह के लिए भण्डारित करने का प्रावधान है जबकि सुंगरहा में माह दिसम्बर-2019 से धान रखी है। खुले आसमान के नीचे असुरक्षित तरीके से रखी धान को लगभग पांच माह तक मिलिंग के लिए भेजने की सुध न लेने से मध्य प्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है। गौरतलब है कि मई महीने में अब तक जिले में 4 बार तेज बेमौसम बारिश हुई है, जिससे पूर्णतः खुले में रखी धान पानी में तरबतर होकर तेजी से सड़ रही है।
इसके सड़के की प्रक्रिया इतनी तेज है कि ओपन कैप में स्टेक के पास पहुँचने पर भीषण दुर्गंन्ध आती है। ओपन कैप में लगी धान की बोरियों की छलनी (स्टेक) दूर से देखने मात्र से पता चलता है कि बड़ी मात्रा में धान अंकुरित होकर सूख भी गई और बारदाने तक सड़ चुके है। सूत्रों की मानें तो अब तक बड़ी मात्रा में धान बर्बाद हो चुकी है। यदि कुछ दिन और सड़ चुकी धान की बोरियों को सही बोरियों से अलग नहीं किया गया तो शेष धान को बचा पाना शायद संभव नहीं होगा।
ओपन कैप में करीब एक पखवाड़े से अधिक समय से जारी धान की तबाही और बर्बादी की भनक लगने पर जब “रडार न्यूज” की टीम मौके पर पहुंची तो धान के बारदानों के अधिकांश स्टेक से पाॅलिथीन गायब थी। वर्तमान में चल रहे गेहूं उपार्जन कार्य के सिलसिले में कैप प्रभारी पन्ना गए हुए थे। मौके पर उपस्थित अधीनस्थ कर्मचारियों ने बताया कि धान की बोरियों के स्टेक (छलनी) की पॉलीथीन आंधी-तूफान में फट और उड़ चुकी है। आये दिन मौसम का मिजाज बदलने और देश के कई हिस्स्सों में चक्रवाती तूफ़ान की तबाही के बाबजूद किसी ने दोबारा से इन्हें ढंकना भी उचित नहीं समझा।
बहरहाल देर से जागे ओपन कैप प्रभारी तथा मध्य प्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों द्वारा अपनी इस अक्षम्य लापरवाही को छिपाने के लिये सड़ी हुई धान को मिलिंग के लिये ट्रकों में भर-भर कर रवाना किया जा रहा था। धान की बोरियों के परिवहन का सिलसिला करीब एक पखवाड़े से लगातार जारी है। लेकिन मिलिंग के लिए धान परिवहन की कछुआ चाल की अपेक्षा इसके सड़ने की प्रक्रिया कहीं अधिक तेजी से जारी होना चिंताजनक है।
वेयर हाउस कार्पोरेशन के आंकड़ों के अनुसार दिनांक 4 मई की स्थिति में सुंगरहा ओपन कैप में धान की 40 किलो की भर्ती के 9 लाख 50 हजार बारदाना रखे थे पिछले आज तक की स्थिति में 1 लाख 16 हजार बारदाना का परिवहन मिलिंग के लिए हो चुका है। यानी ओपन कैप में अभी भी सवा आठ लाख से अधिक धाना की बोरियां रखीं है।
गुनौर क्षेत्र में कांग्रेस के युवा नेता एवं पूर्व सरपंच केशरी अहिरवार ने ओपन कैप सुंगरहा में सड़ रही धान के मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा कि कितनी विडम्बनापूर्ण बात है कि एक ओर काम-धंधे ठप्प होने से दैनिक मजदूरी पर जीवन यापन करने वाले गरीब परिवार खाद्यान्न संकट से जूझ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ करोड़ों रूपये मूल्य की धान को सड़ाया जा रहा है। जिले में ऐसे हजारों गरीब मजदूर परिवार है जिनके पास गरीबी रेखा और अतिगरीबी रेखा के कार्ड नहीं है, इस वजह से सुपात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। ऐसे परिवारों को लाॅकडाउन के शुरूआती दिनों में थोड़ा बहुत खाद्यान्न निःशुल्क दिया गया था बेहतर होगा कि ओपन कैप में बर्बाद हो रही धान की मिलिंग कराकर उसके चावल को गरीबों में पुनः निःशुल्क वितरित कराया जाए।
“ओपन कैप सुंगरहा में 35350 मैट्रिक टन धान भण्डारित है। वर्ष 2019 में धान का समर्थन मूल्य 1840 रूपये रहा है इस तरह ओपन कैप में रखी धान का कुल मूल्य 65 करोड़ रूपये है। धान की सुरक्षा की सम्पूर्ण जबावदेही वेयर हाउस कार्पोरेशन की है। बारिश में जो धान खराब हुई है उन बोरियों की छंटनी कराकर उसे मिलिंग के लिये भेजा जा रहा है। भण्डारण एजेन्सी क्षति के लिये जिम्मेदार है, नियमानुसार धान में कुल भण्डारित मात्रा का 2 प्रतिशत क्षति सूखत के रूप में मान्य है इससे अधिक अगर क्षति होती है तो उसकी पूर्ती संबंधित एजेन्सी को करनी होगी।”






