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स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री शिवराज ने झंडावंदन कर सलामी ली, बोले- “राष्ट्र के लिए जिएंगे, राष्ट्र के लिए मरेंगे”

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वतंत्रता दिवस पर मोती लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में ध्वजारोहण किया।

* राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में आयोजित

भोपाल।(www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड परिसर के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में आयोजित राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने महिला विशेष सशस्त्र बल, जिला बल, शासकीय रेल पुलिस, विशेष शस्त्रबल हॉक फोर्स, एस.टी.एफ., नगर सेना, जेल विभाग और पुलिस बैंड की टुकड़ियों से सज्जित परेड का निरीक्षण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह, राज्य मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, पुलिस महानिदेशक विवेक जौहरी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वतंत्रता दिवस पर मोती लाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में परेड की सलामी ली।
मुख्यमंत्री श्री चौहान एवं सभी उपस्थितों द्वारा भारतमाता की जयघोष के साथ मुख्यमंत्री का संबोधन प्रारंभ हुआ। मुख्यमंत्री ने राष्ट्र को स्वतंत्रता दिलवाने वाले वीर बलिदानियों के चरणों में नमन करते हुए कहा कि देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वालों के सम्मान में भोपाल में निर्मित शौर्य स्मारक में आज भारतमाता की प्रतिमा स्थापित हुई है। यह सभी को राष्ट्र प्रेम, शौर्य और साहस की प्रेरणा देगी। प्रत्येक नागरिक को भोपाल के शौर्य स्मारक में स्थापित इस प्रतिमा के दर्शन करना चाहिए।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण किया तथा उनके कथन को उद्धृत किया कि ‘भारतभूमि सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है। यही जीता जागता राष्ट्रपुरुष है। हिमालय इसका मस्तिष्क है, कश्मीर किरीट है, गौरीशंकर इसकी शिखा है। पंजाब और बंगाल इसकी दो बाहु हैं। दिल्ली दिल है। विंध्याचल कटि है। नर्मदा करधनी है। पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट विशाल जंघाएं हैं। कन्याकुमारी इसके पंजे हैं। सागर इसके पग पखारता है। पावस के कुंतल मेघ, काले-काले मेघ केश राशि हैं। सूर्य और चंद्रमा इसकी आरती उतारते हैं। ये वीरों की भूमि है। ये तर्पण की भूमि है। ये अर्पण की भूमि है। इसका कंकर-कंकर शंकर है। इसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए। मरने के बाद जब अस्थियाँ विसर्जित होंगी तो जल से आवाज आएगी, भारत माता की जय।

हो रहा है शक्तिशाली भारत का निर्माण 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य स्तरीय समारोह में प्रदेश की जनता के नाम संदेश दिया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि देश के यशस्वी एवं दूरदर्शी प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में शक्तिशाली भारत का निर्माण हो रहा है। अब यह वर्ष 1962 का भारत नहीं है। यदि किसी शत्रु ने भारत की ओर आँख उठाकर देखा तो उसे सबक सिखाने में भारत पीछे नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने शहीद सैनिकों के परिवार को एक करोड़ रुपये की राशि, परिवार के एक सदस्य को शासकीय सेवा और भूखंड प्रदान करने का निर्णय लेकर बलिदानियों के प्रति सम्मान का भाव प्रदर्शित किया है। श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने चमत्कारी नेतृत्व से असंभव माने जाने वाले कार्यों को संभव कर दिखाया है। कोरोना की चुनौती का उनके सक्षम नेतृत्व में देश ने साहस के साथ सामना किया, देश में सुनियोजित व्यवस्थाएं की गईं और उस पर प्रभावी नियंत्रण किया है।

मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएँ-

  • नि:शुल्क खाद्यान्न प्रदाय का महाअभियान आरंभ होगा।
  • ‘मेधावी विद्यार्थी योजना’ तथा सभी विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क पढ़ाई की व्यवस्था।
  • मेधावी विद्यार्थियों को वितरित होंगे लैपटॉप।
  • प्रदेश में प्रारंभ होंगे सर्व-सुविधायुक्त और गुणवत्तापूर्ण ‘सीएम राइज स्कूल’
  • महिला स्व-सहायता समूहों को इस वर्ष 1300 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण 4 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जाएगा।
  • ‘एक जिला एक उत्पाद’ के सिद्धांत पर होगी जिलों की ब्रांडिंग।
  • बेटियों की पूजा से आरंभ होंगे शासकीय कार्यक्रम। बेटी बचाओ अभियान नए सिरे से प्रारंभ होगा।
  • आदिवासियों एवं गरीबों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने का अभियान। नियमों के विपरीत 15 अगस्त 2020 तक दिए गए ऋण शून्य होंगे। आवश्यक कानून लाया जाएगा।
  • पुलिस कर्मियों के लिए भोपाल में बनेगा 50 बिस्तरीय सर्व-सुविधायुक्त अस्पताल।
  • 2023 तक 1 करोड़ नल कनेक्शन का लक्ष्य। हर घर तक नल के माध्यम से जल।
  • सभी नागरिक सुविधाएँ ऑनलाइन उपलब्ध करायी जाएंगी।
  • नर्मदा एक्सप्रेस-वे से नर्मदांचल में उद्योगों, ईको टूरिज्म और धार्मिक गतिविधियों को प्रोत्साहन।
  • नये उद्योगों की स्थापना में सरलता के लिए ‘स्टार्ट योर बिजनेस इन थर्टी डेज’ योजना प्रारंभ होगी।
  • प्रदेश के नागरिकों का ‘सिंगल सिटीजन डाटाबेस’ तैयार होगा।
  • ग्रामीण जनता को उनके आवासीय भूखंड पर मालिकाना हक दिया जाएगा।
  • कर्मचारियों को देय सभी लाभ दिए जाएंगे।
  • कोरोना काल की तरह आगे भी गरीबों के लिए सस्ती बिजली।

दर्दनाक हादसा : गुस्सैल हाथी ने रेन्जर को दांतों से दबाकर मार डाला, पन्ना टाईगर रिजर्व में मचा हड़कम्प

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पन्ना टाइगर रिजर्व में हाथी पर बैठकर सर्चिंग करते हुए महावत। (फाइल फोटो)

* टाइगर ट्रेकिंग के दौरान अचानक हाथी रामबहादुर ने किया हमला

* पन्ना टाइगर रिजर्व की हिनौता रेन्ज अंतर्गत गंगऊ क्षेत्र की घटना

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाईगर रिजर्व में टाइगर ट्रेकिंग के दौरान एक गुस्साए हाथी ने हिनौता रेन्जर बी.आर. भगत को दांतों से दबाकर मार डाला। हाथी के अचानक हमला करने से महावत समेत आसपास मौजूद वनकर्मी अत्यंत ही दहशत में आ गए। दिल दहला देने वाली इस घटना की भनक लगते ही पार्क के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँच गए। रेन्जर बी.आर. भगत को अचेत अवस्था में मझगंवा क़स्बा में स्थित एनएमडीसी के स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने परीक्षण करने के उपरान्त उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रेन्जर बी. आर. भगत का जीवित अवस्था का चित्र।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उपसंचालक जरांडे ईश्वर रामहरि ने इस दुखद हादसे की पुष्टि की है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि बाघिन पी-433 का कॉलर कुछ ज्यादा ही टाइट होने से उसे समस्या आ रही थी, इसके सुधार हेतु वन आवश्यक कार्रवाई करने के लिए परिक्षेत्राधिकारी हिनौता बी.आर. भगत को निर्देशित किया गया था। आज हाथियों की मदद से बाघिन पी-433 की ट्रेकिंग के दौरान नर हाथी रामबहादुर अचानक गुस्से में आ गया। इस हाथी ने रेन्जर श्री भगत को धक्का मारा जिससे वह नीचे जमीन पर गिर गए और फिर उनके सीने में अपने विशाल दाँतों से हमला कर दबा दिया। हाथी का महावत जब तक समझ पाता और उसे रोकने का प्रयास करता तब तक रेन्जर श्री भगत मरणासन्न स्थिति में पहुँच चुके थे।
पन्ना जिले के मझगंवा क़स्बा स्थित एनएमडीसी परियोजना का चिकित्सालय।
पार्क के गंगऊ क्षेत्र में शुक्रवार 14 अगस्त को दोपहर लगभग 1 बजे घटित इस अप्रत्याशित घटना के समय मौके पर मौजूद रहे वनकर्मी काफी घबरा गए। घायल रेन्जर को तुरंत वहां से हटाकर सुरक्षित स्थान पर लाया गया और पन्ना टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों को इस हादसे की सूचना दी गई। रेन्जर बी.आर. भगत को अचेत हालत में आनन-फानन नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र मझगवां ले जाया गया। जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने सघन परीक्षण करने के पश्चात उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दर्दनाक हादसे की खबर आने के बाद से पन्ना टाइगर रिजर्व एवं उत्तर-दक्षिण सामान्य वन मण्डल पन्ना में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं इस दुखद घटना के सम्बंध जिसे भी पता चला वह हतप्रभ रह गया।
फाइल फोटो।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उपसंचालक जरांडे ईश्वर रामहरि ने हिनौता रेन्जर बी.आर. भगत की हृदय विदारक हादसे में असामयिक मौत पर गहरा दुःख प्रकट करते हुए कहा कि हमने अपने कर्त्वनिष्ठ, योग्य और संवेदनशील रेन्ज ऑफिसर को खो दिया है। कर्तव्य के निर्वहन के दौरान श्री भगत की मृत्यु हुई है, वे विभाग के शहीद हैं। उधर, रेन्जर एसोसिएशन के सम्भागीय अध्यक्ष आर. एस. पटेल, रेन्जर एसोसिएशन पन्ना के जिलाध्यक्ष नवी अहमद एवं वन कर्मचारी संघ पन्ना के जिलाध्यक्ष महीप कुमार रावत ने रेन्जर श्री भगत के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए मृत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।
रेन्जर बी.आर. भगत के सीने में हाथी के हमले से बना दांत के घाव का निशान।
समाचार लिखे जाने तक पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के.एस. भदौरिया, उपसंचालक जरांडे ईश्वर रामहरि समेत पार्क के रेन्जर और वन कर्मचारी मझगवां में ही मौजूद थे। मौके पर पर स्थानीय चौकी पुलिस के द्वारा पंचनामा तैयार कर मर्ग कायम करने की कार्रवाई की जा रही थी।

रक्षाबंधन पर मामा के घर आई नाबालिग को भगा ले गया प्रेमी, शादी का झांसा देकर किया शारीरिक शोषण

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सांकेतिक फोटो।

* पन्ना जिले के धरमपुर थाना के ग्राम नरदहा से किया युवती को अगवा

* घटना के तीसरे दिन उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में दस्तयाब हुई पीड़िता

* कालिंजर निवासी आरोपी युवक पीड़िता का है पड़ोसी और पूर्व से है विवाहित

पन्ना। (www.radarnews.in) जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नरदहा में रक्षाबंधन के पर्व पर अपने मामा के घर आई एक 16 वर्षीय युवती को कथित तौर पर उसका शादीशुदा प्रेमी भगा ले गया। नाबालिग को शादी का झांसा देकर युवक ने उसका शारीरिक शोषण किया। युवती को उत्तर प्रदेश के कर्वी से बाइक में बैठाकर बांदा ले जाने के दौरान रास्ते में आरोपी सड़क दुर्घटना में घायल हो गया जिससे लापता युवती आसानी दस्तयाब हो गई। आरोपी युवक और दुष्कर्म पीड़िता दोनों ही उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के कालिंजर क़स्बा में एक ही मोहल्ले में रहते हैं। नाबालिग को अगवा कर उसके साथ बलात्कार किये जाने के मामले में जिले के धरमपुर थाना में आरोपी युवक दिनेश सोनकर के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पन्ना जिले की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के कालिंजर क़स्बा में रहने वाली सोनम 16 वर्ष (काल्पनिक नाम) रक्षाबंधन पर्व के उपलक्ष्य पर नरदहा में अपने मामा के घर पर आई थी। दिनांक 8 अगस्त की शाम सोनम को उसका कथित प्रेमी दिनेश सोनकर नरदहा से बहला-फुसलाकर भगा ले गया। उत्तर प्रदेश के कर्वी क़स्बा में सोनम को ले जाकर दिनेश ने शादी का झांसा देते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया। गत दिवस सोनम को बाइक में बैठाकर कर्वी से बांदा ले जाते समय रास्ते में भरतकूप के समीप दिनेश सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। उसने अपने मामा को कॉल करके मौके पर बुलाया और फिर उनके साथ कथित तौर पर सोनम को बांदा कोतवाली थाना भेज दिया।
सांकेतिक फोटो।
इधर, रहस्मय तरीके से बेटी के लापता होने चिंतित और परेशान परिजनों के द्वारा नरदहा चौकी पुलिस को घटना की सूचना दी गई। बेटी की खोजबीन में जुटे परिजनों को बांदा पुलिस ने सोमवार 10 अगस्त को कॉल करके सोनम के दस्तयाब होने सम्बंध में जानकारी देते हुए सुपुर्दगी के लिए बुलाया। परिजन बिना किसी देरी के बांदा पहुंचकर सोनम को वापस नरदहा ले आए। इस दौरान युवती ने परिजनों को अपनी आप बीती सुनाई। फलस्वरूप परिजन मंगलवार 11 अगस्त को उसे बृजपुर थाना ले गए, जहां इस प्रकरण की विवेचना कर रहीं महिला उप निरीक्षक को सोनम ने अपने साथ हुए दुष्कर्म की जानकारी देते हुए कथन दर्ज कराये हैं। शाम के समय उसे मेडीकल परीक्षण के लिए पन्ना जिला चिकित्सालय लाया गया। इस मामले में धरमपुर थाना में आरोपी दिनेश सोनकर विरुद्ध धारा 363, 366, 376 आईपीसी एवं पोस्को एक्ट की धारा 3/4 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। वहीं फरार आरोपी दिनेश सोनकर को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश में जुटी है।

पिता को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे युवक को मिला शहरवासियों का साथ

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ज्ञापन सौंपने के बाद संयुक्त कलेक्ट्रेट के बाहर खड़े शोक संतृप्त परिजन एवं शहरवासी।

* राज्य मानव अधिकार आयोग और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

* मुन्ना की मौत के लिए हठधर्मी चिकित्सकों एवं राजस्व अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया 

पन्ना। (www.radarnews.in) शहर के रानीगंज मोहल्ला में गाड़ीखाना के समीप रहने वाले सुरेन्द्र उर्फ मुन्ना रैकवार की असमय मौत के लिए पीड़ित पुत्र और परिजनों ने कतिपय चिकित्सकों और प्रभारी तहसीलदार पन्ना को जिम्मेदार ठहराया है। पिता को इंसाफ दिलाने के लिए कुछ दिनों से अकेले संघर्ष कर रहे वीरेन्द्र रैकवार को शहरवासियों का साथ मिला है। सोमवार को वीरेन्द्र ने शहर के कुछ लोगों के साथ नवीन संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन पहुंचकर अध्यक्ष राज्य मानवाधिकार आयोग और मुख्यमंत्री के अपर कलेक्टर जेपी धुर्वे को ज्ञापन सौंपा है। सभी लोगों ने मुन्ना रैकवार की मौत की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पीड़ित वीरेन्द्र रैकवार एवं उसके साथ खड़े पन्ना के नागरिक।
पीड़ित पुत्र वीरेंद्र रैकवार ने आरोप लगाया है की तहसीलदार पन्ना उनके घर दिनांक 19 जुलाई 2020 को पहुंची और कहा गया कि आप लोगों का कोरोना टेस्ट होना है। वीरेंद्र रैकवार ने उन्हें बताया कि उनके पिता बीपी और शुगर मरीज हैं, वे क्वॉरेंटाइन सेंटर में नहीं रह सकते हैं। इसलिए तहसीलदार से आग्रह किया गया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम को घर से ही सैम्पल लेने के लिए निर्देशित कर दें और हम लोग होम क्वॉरेंटाइन कर लेंगे। मगर तहसीलदार पन्ना ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कथित तौर पर दबाव डालते हुए कोरोना जांच सैम्पल देने के लिए पुरना पन्ना स्थित क्वारेंटाइन सेंटर आने के लिए दबाव डाला गया। वीरेन्द्र के अनुसार तहसीलदार ने उससे कहा कि सैम्पल देने के बाद वह अपने माता-पिता को तुरंत वापस घर ले जा सकता है। जिसके बाद पीड़ित पुत्र वीरेंद्र रैकवार अपने पिता सुरेन्द्र उर्फ मुन्ना रैकवार एवं अपनी माँ को पुराना पन्ना स्थित क्वारेंटाइन सेंटर ले गया। जहां सैम्पल देने के बाद वीरन्द्र ने अपने माता-पिता को लेकर घर जाने के लिए कहा तो वहां मौजूद चिकित्सकों एवं राजस्व अधिकारी ने कथित तौर पर मना करते हुए पुलिस बल का दबाव देकर वहीं पर रखने के लिए मजबूर कर दिया गया।
पत्रकारों को अपनी आपबीती सुनाते हुए पीड़ित वीरेन्द्र रैकवार।
पिता-पुत्र ने चिकित्सकों एवं राजस्व अधिकारी को समझाने की काफी कोशिश की लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनीं। अंततः बीपी एवं शुगर के मरीज मुन्ना रैकवार की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई और दिनांक 20 जुलाई को सुबह उल्टियां करने लगे तथा बेहोशी की हालत में पहुंच गये। इस पर परिजनों के द्वारा हंगामा करने के बाद मुन्ना को वहां से निकाला गया। जिसके बाद पीड़ित परिजन लेकर मदर टेरेसा हॉस्पिटल पन्ना पहुंचे जहां पर मुन्ना रैकवार की हालत काफी नाजुक होने के चलते उन्हें जबलपुर रेफर किया गया। जहां पर मुन्ना रैकवार ने दम तोड़ दिया था। इस सम्बंध में रविवार 10 अगस्त को पीड़ित परिजनों ने एवं शहरवासियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गये ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कर तथा दोषी अधिकारी एवं कर्मचारियों पर प्रकरण दर्ज करते हुए सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये। ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।

आक्रोशित भीड़ ने चौकी के अंदर घुसकर किराना व्यापारी और उसके भाई को बेरहमी से पीटा, पुलिस जवानों के साथ बदसलूकी, चौकी में जमकर की तोड़फोड़

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हरदुआ पुलिस चौकी के अंदर और बाहर किराना व्यापारी कमलेश लोधी और उसके भाई गोविन्द प्रसाद लोधी के साथ मारपीट करती हिंसक भीड़।

पन्ना जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम हरदुआ की घटना का वीडियो हुआ वायरल

* किराना व्यापारी की कार की ठोकर से युवक की मौत होने पर बेकाबू भीड़ ने की हिंसा

* स्थिति को संभालने के लिए आसपास के थानों से बुलाना पड़ा अतिरिक्त पुलिस बल

* पुलिसकर्मियों ने हिंसक भीड़ से मुकाबला कर अपना फर्ज निभाते हुई किराना व्यापारी और उसके भाई की बचाई जान

पन्ना। (www.radarnews.in) सड़क हादसे में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत होने से आक्रोशित भीड़ बेकाबू हो गई। भीड़ ने पुलिस चौकी के अंदर घुसकर कार के मालिक और उसके भाई की लात-घूंसों और डण्डे से बेदम पिटाई की। इस बवाल के दौरान चौकी के अंदर भी जमकर तोड़फोड़ की गई। हिंसक भीड़ की बेरहमी से कार के मालिक और उसके शिक्षक भाई को बचाने की कोशिश में पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्रता हुई। पन्ना जिले के सिमरिया थाना के ग्राम हरदुआ में भीड़ के द्वारा की गई हिंसा के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध बलवा करने और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला पंजीबद्ध किया है। वहीं स्थिति को सम्भालने के लिए हरदुआ गांव सहित क्षेत्र में भारी संख्या पुलिस बल को तैनात किया गया है।
आक्रोशित भीड़ की क्रूरता से किराना व्यापारी और उसके भाई को बचाते हुए पुलिसकर्मी।
रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात हरदुआ चौकी के ग्राम चंद्रावल और मझगवां के बीच स्थित गिरहा नाला में कुछ युवक मछलियां पकड़ रहे थे। इस दौरान ग्राम रैय्यासांटा निवासी एवं क्षेत्र के प्रतिष्ठित किराना व्यापारी कमलेश लोधी की ओमनी कार से उनका ड्रायवर किसी बीमार व्यक्ति का इलाज कराने उसे लेकर दमोह के लिए रवाना हुआ। रास्ते में गिरहा नाला के समीप काफी अंधेरा होने से सड़क किनारे बैठे सुखपाल अहिरवार 28 वर्ष निवासी गुरखई को कार की ठोकर लग गई। कार चालक की लापरवाही के चलते हुई इस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल सुखपाल अहिरवार को उसके साथी रात में ही इलाज के लिए पड़ोसी जिला दमोह ले गए। जहां उपचार के दौरान सोमवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
सुखपाल के दुखद निधन की खबर आने पर शोक संतृप्त परिजन हरदुआ चौकी पहुंचे और उनके द्वारा इस घटना पर एक्सीडेंटल मौत का मामला दर्ज न कर हत्या का प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की गई। चौकी प्रभारी हरदुआ फर्जन्द अली ने घटना को गंभीरता से लेकर तत्परता से आवश्यक कार्रवाई करने का भरोसा दिलाते हुए मृतक के परिजनों को समझाकर वापस घर भेज दिया।

कार मालिक को देखकर हिंसक हुई भीड़

सोमवार को दोपहर में लगभग 2:30 दमोह से सुखपाल का शव आने के इंतजार में हरदुआ चौकी के समीप स्थित चौराहे पर बड़ी तादाद में मृतक के परिजन और रिश्तेदार एकत्र थे। कुछ देर बाद मातमी माहौल के बीच जैसे ही दलित युवक का शव हरदुआ पहुंचा तभी संयोगवश कार का मालिक एवं किराना व्यापारी कमलेश लोधी अपने शिक्षक भाई गोविन्द प्रसाद लोधी के साथ वाहन के दस्तावेज लेकर चौकी पुलिस को देने पहुँच गया। कमलेश को सामने से आता हुआ देख शोक संतृप्त परिजन गुस्से से भड़क ऊठे। आक्रोशित भीड़ ने कमलेश लोधी और उसके भाई गोविन्द प्रसाद लोधी की बेदम पिटाई शुरू कर दी ।

चौकी के अंदर और बाहर की बेदम पिटाई

हमलावर भीड़ ने दोनों को इतना मारा की मारते-मारते अधमरा कर दिया। जान बचाने के लिए दोनों भाई पुलिस चौकी के अंदर घुस गए। लेकिन भीड़ भी बलपूर्वक अंदर घुस गई और पुनः दोनों को बेरहमी से पीटते हुए बाहर निकाल लाई। किराना व्यापारी और उसके भाई को पीट-पीटकर मारने पर उतारू आक्रोशित भीड़ से दोनों को बचाने के लिए चौकी प्रभारी फर्जन्द अली, प्रधान आरक्षक प्रेमलाल शर्मा और दो पुलिस आरक्षक काफी देर तक जूझते रहे। इस बीच वरिष्ठ अधिकारियों को बवाल की सूचना देकर उनसे तुरंत मदद मांगी गई। अतिरिक्त बल आने तक चार निहत्थे पुलिसकर्मी खुद भी भीड़ की हिंसा का शिकार बने लेकिन अपनी जान की परवाह किये बगैर उन्होंने बड़े ही साहसिक तरीके से भीड़ का मुकाबला कर किराना व्यापारी कमलेश लोधी और उसके शिक्षक भाई गोविन्द प्रसाद लोधी को किसी तरह बचाते हुए भीड़ के हाथों बड़ा अपराध होने से रोक लिया।

दोनों पक्षों के विरुद्ध दर्ज हुआ मामला

जिले के आधा दर्जन थानों से बड़ी तादाद में अतिरिक्त पुलिस बल और पुलिस अधिकारियों के हरदुआ पहुँचने पर हिंसा शांत हो गई। हालांकि इसके बाद सड़क हादसे में मृत युवक का शव पुलिस चौकी परिसर के अंदर रखकर भीड़ के द्वारा हत्या का मामला पंजीबद्ध करने की मांग की गई। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए उप पुलिस अधीक्षक अभिषेक गौतम ने पीड़ित परिजनों को समझाइश दी गई, जिसके बाद वे शव लेकर अपने गांव के लिए रवाना हो गए। इस मामले में सिमरिया थाना पुलिस ने कार के चालक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और व्हीकल एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है। वहीं पुलिस चौकी हरदुआ का घेराव, तोड़फोड़ और शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए हंगामा करने पर बलवा सहित विभिन्न धाराओं के तहत भीड़ के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। उप पुलिस अधीक्षक अभिषेक गौतम ने बताया कि शाम 5 बजे के बाद से हरदुआ सहित क्षेत्र में स्थिति सामान्य है और पूरी तरह शांति कायम है। आपने कहा कि हिंसा करने वालों में कुछ को नामजद किया गया है, वहीं घटना के वायरल वीडियो के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

नदी में बहे टाइगर पी-123 का गायब मिला सिर, सिर्फ धड़ हुआ बरामद, जानिए पीटीआर प्रबंधन ने इस पर क्या कहा ?

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बाघ पी-123 का फाइल फोटो।

* घटनास्थल से 8 किलोमीटर दूर हिनौता परिक्षेत्र अंतर्गत रविवार को मिला था शव

* बाघिन टी-6 और बाघ टी- 431 के बीच संसर्ग के दौरान मौके पर आ गया था बाघ पी-123

* बाघिन को लेकर दोनों के बीच जमकर हुए संघर्ष में घायल बाघ पी-123 नदी में बह गया था

* आज मृत बाघ का पोस्टमार्टम होने के बाद किया गया अंतिम संस्कार

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले नौ माह में यहां कथित तौर पर आपसी संघर्ष के चलते 5 बाघ असमय काल कवलित हो चुके हैं। इसमें भी 3 बाघों की मृत्यु महज डेढ़ माह के अंदर हुई है। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार बढ़ती तादाद के चलते उनके बीच आपसी संघर्ष बढ़ने का मामला बेहद चिंताजनक और जटिल हो गया है। बाघों के बीच छिड़ी वर्चस्व की इस खूनी जंग में इस बार व्यस्क नर बाघ पी-123 को अपनी जान गंवानी पड़ी है। बाघ टी- 431 के साथ हुई भिड़ंत में बाघ पी-123 घायल होकर केन नदी में बह गया था। सघन सर्चिंग के दौरान तीसरे दिन रविवार 9 अगस्त को घटनास्थल से 8 किलोमीटर दूर हिनौता वन परिक्षेत्र अंतर्गत बाघ का क्षत-विक्षत शव अत्यंत ही वीभत्स स्थिति में पानी में तैरता हुआ मिला।
फाइल फोटो।
व्यस्क बाघ पी-123 का सिर गायब था उसका सिर्फ धड़ बरामद हुआ है। इस पर पार्क प्रबंधन ने आशंका जताई है कि, पानी के अंदर शायद मगरमच्छों ने बाघ के सिर को अपना निवाला बना लिया। मृत बाघ का आज पोस्टमार्टम होने के पश्चात् शव का अंतिम संस्कार कर किया गया। इस दौरान पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया, उप संचालक जरांडे ईश्वर रामहरि, सहायक संचालक पन्ना, हिनौता एवं गहरीघाट परिक्षेत्र के रेंजर और एनटीसीए के प्रतिनिधि इंद्रभान सिंह बुंदेला उपस्थित थे।
सांकेतिक फोटो।
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार 7 अगस्त की सुबह पन्ना टाइगर रिजर्व के गहरीघाट परिक्षेत्र अंतर्गत बीट झालर में सकरा नामक स्थान के समीप बाघिन टी-6 और बाघ टी- 431 के बीच संसर्ग चल रहा था, तभी वहां पर नर बाघ पी-123 पहुँच गया। दूसरे नर बाघ की मौजूदगी से मिलन में पड़े खलल के कारण बाघ टी- 431 काफी तनाव और गुस्से से भर गया था। फलस्वरूप बाघ टी- 431 और बाघ पी-123 के बीच केन नदी किनारे भीषण संघर्ष हुआ। वनरक्षक दिलीप सिंह को इस घटनाक्रम का प्रत्यक्षदर्शी बताया जा रहा है। वनरक्षक ने हाथी पर सवार होकर मौके पर पहुँचने की तैयारी करते हुए पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी।
सांकेतिक फोटो।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक जरांडे ईश्वर रामहरि एवं वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. संजीव गुप्ता तुरंत मौके पर पहुंचे। सर्चिंग के दौरान वहां बाघिन टी-6 और बाघ टी- 431 तो मिले लेकिन तीसरे बाघ पी-123 का कुछ पता नहीं चला। तीसरे बाघ की तलाश करने आसपास के जंगल की सघन सर्चिंग कराइ गई, नाव से नदी में गश्ती की गई और नदी में घटनास्थल के समीप जाल डाला गया लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। सघन सर्चिंग अभियान के दौरान तीसरे दिन रविवार को बाघ पी-123 का शव घटनास्थल से करीब 8 किलोमीटर दूर हिनौता परिक्षेत्र के पठाई कैम्प के समीप नदी के पानी में तैरता हुआ काफी वीभत्स स्थिति में मिला।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि बाघ पी-123 आपसी संघर्ष में बुरी तरह घायल होने के कारण नदी में गिरकर बह गया था। मृत बाघ का शव तीन दिन तक पानी में रहने से काफी फूल चुका था और बाघ का सिर गायब था। क्षेत्र संचालक श्री भदौरिया ने आशंका जताई है कि संभवतः पानी के अंदर मगरमच्छों ने बाघ का सिर खा लिया होगा। उनका दावा है कि आज पोस्टमार्टम के दौरान बाघों के बीच आपसी संघर्ष के निशान मृत बाघ के शरीर पर पाए गए हैं। पोस्टमार्टम एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर उन्होंने बाघ पी-123 की मौत आपसी संघर्ष में होने की बात कही है। गौरतलब है कि पार्क प्रबंधन को बाघ का शव जिस हालत में मिला उसके फोटो या वीडियो जारी नहीं किये गए। पार्क प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के साथ बाघ पी-123 का जीवित अवस्था का फोटो मात्र जारी किया गया है। इस संबंध में जब क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने शव के फोटो या वीडियो जारी करने के लिए मना किया है।
पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन के द्वारा जारी घटना का विस्तृत प्रेस नोट।

प्रबंधन के दावों पर भरोसा करना होगा मुश्किल

बाघों की संदेहास्पद मौतों को लेकर तीखी आलोचना और गम्भीर सवालों का सामना कर रहे पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का नितांत आभाव महसूस किया जा रहा है। प्रबंधन के द्वारा पिछले कुछ समय से बाघ-तेंदुओं की संदेहास्पद मौत की घटनाओं या फिर दूसरे अपराधों को छिपाने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। बाघ पी-123 के मृत अवस्था के फोटो-वीडियो और इसके पूर्व 26 जुलाई को बीट बांधीकला में मृत मिले तेंदुए की प्रेस विज्ञप्ति तक जारी करने से घटनाओं की गंभीरता को छिपाने की आमधारणा पार्क प्रबंधन के प्रति बन रही है। पन्ना में बाघों की लगातर मौत होने की हैरान करने वाली घटनाओं के सामने आने से बाघों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर घिरे पार्क प्रबंधन का आगे भी अगर यही रवैया रहता है तो आपसी संघर्ष में बाघों के मरने के उसके दावों पर भरोसा करना शायद मुश्किल होगा। वैसे भी पूर्व में 9 माह के अंदर मृत चार बाघों के शव कई दिनों के बाद बेहद सड़ी-गली और कंकाल की हालत में मिलने से उनकी मौत के वास्तविक कारणों का पता चलने को लेकर पहले से ही संशय बना हुआ है।

केन नदी बहे घायल टाइगर का मिला शव, पन्ना टाइगर रिजर्व में डेढ़ माह के अंदर 3 टाइगर की मौत

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सांकेतिक फोटो।

* आपसी संघर्ष में घायल होकर नदी में गिरा था टाइगर पी-123

* बाघिन के चक्कर में टाइगर पी-123 और टी- 431 के बीच हुई थी भिड़ंत

* तीन दिन से बाघ की तलाश करने सघन सर्चिंग अभियान में जुटा था पार्क का अमला

* बाघों की वंशवृद्धि के चलते क्षेत्र, शिकार और बाघिनों को लेकर तेज हुई वर्चस्व की जंग

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) बाघों की संदेहास्पद परिस्थितियों में लगातार हो रहीं मौतों को लेकर सुर्ख़ियों में बने मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व से एक और दुखद खबर आई है। पार्क क्षेत्र से गुजरने वाली केन नदी में रविवार 9 अगस्त की शाम नर बाघ पी-123 का शव पानी की सतह पर मिला। टाइगर टी- 431 के साथ हुए संघर्ष में व्यस्क टाइगर पी-123 घायल होकर केन नदी में गिर गया था। पिछले तीन दिनों से सरगर्मी से पार्क के अंदर नदी में टाइगर की तलाश की जा रही थी। आज नाव से सर्चिंग के दौरान रेस्क्यू टीम को घायल बाघ का शव पानी में तैरता हुआ मिला। मृत बाघ के शव को नदी से बाहर निकलवाकर सुरक्षित रखवाया गया है। सोमवार की सुबह शव का पोस्टमार्टम होने के बाद दाह संस्कार किया जाएगा। पिछले डेढ़ माह के अंदर पन्ना में बाघ की मौत की यह तीसरी घटना है। जबकि महज़ नौ माह के अंदर पन्ना में बाघों की मौत की यह पांचवीं घटना है। नदी में पानी अधिक होने और घायल होने के कारण बाघ के पानी में डूबने से तमाम प्रयासों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। इसके पूर्व 27 जुलाई को गहरीघाट वन परिक्षेत्र की मझौली बीट के वन कक्ष क्रमांक- पी-511 में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत हालत में सड़ा-गला शव मिला था।
सांकेतिक फोटो।
सोमवार की देर रात 12:40 बजे घटनास्थल से वापस मुख्यालय लौट रहे पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक जरांडे ईश्वर रामहरि के रास्ते में होने की वजह से मोबाइल फोन नेटवर्क प्रॉब्लम के चलते उनसे बमुश्किल बात हो सकी। इस दौरान उन्होंने टाइगर पी-123 का शव मिलने की पुष्टि की है। आपने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व की गहरीघाट रेन्ज अंतर्गत सुरक्षा श्रमिक के कैम्प के नजदीक दो दिन पूर्व बाघिन टी-6 की मौजूदगी रही है। वहीं विचरण कर रहे टाइगर पी-123 और टाइगर टी- 431 बाघिन को रिझाने के चक्कर में आपस में भिड़ गए। आसपास मौजूद मैदानी कर्मचारियों के द्वारा बाघों के बीच हुए भीषण संघर्ष को प्रत्यक्ष तौर पर देखा गया। इस लड़ाई में व्यस्क नर बाघ पी-123 जख्मी होकर भागने के दौरान केन नदी में गिर गया।
फाइल फोटो।
फील्ड स्टॉफ से मिली इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए बिना किसी देरी के घायल बाघ की तलाश करने नदी और आसपास के इलाके में सर्चिंग अभियान शुरू कराया गया। दूसरे वन्यजीवों की तरह बाघ तैरना जानते हैं लेकिन नदी में पानी अधिक होने और गंभीर रूप से घायल होने के कारण टाइगर पी-123 पानी में डूब गया। सघन सर्चिंग के दौरान रेस्क्यू टीम को रविवार की शाम तीसरे दिन गंगऊ बाँध के ऊपरी हिस्से में उक्त बाघ का शव पानी में उतराता हुआ मिला। उप संचालक जरांडे ईश्वर रामहरि रविवार सुबह से ही सर्चिंग अभियान की निगरानी के सिलसिले में जंगल के लिए रवाना हो गए थे। इसलिए शाम के समय जब बाघ का शव मिलने भनक लगी तो देर रात्रि तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी। कुछ पत्रकारों ने पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया से भी सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन कई बार रिंग बजने के बाद भी उनका मोबाईल फोन रिसीव नहीं हुआ।
फाइल फोटो।
बाघों की मौत की लगातार सामने आ रही मौत की घटनाओं को लेकर चौतरफा सवाल उठने से पार्क प्रबंधन काफी चिंता, तनाव और दवाब से गुजर रहा है। लेकिन वर्तमान में जो परिस्थितयों बनीं हैं उनके आगे प्रबंधन भी बेवश और लाचार नजर आ रहा है। दरअसल, पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की तेजी से जारी वंशवृद्धि के कारण बाघों के बीच वर्चस्व की जंग छिड़ी है। कोर क्षेत्र के जंगल में कब्ज़ा करने, शिकार और बाघिनों को लेकर टाइगर आपस में लड़ रहे हैं। उपसंचालक श्री रामहरि का कहना है कि कई बार यह जंग काफी भीषण हो जाती है, जिसमें कमजोर पड़ने वाले बाघ को अपनी जान गंवानी पड़ती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाघ स्वाभावगत प्रतिद्वंदियों को जरा भी बर्दाश्त नहीं करते। उन्होंने बताया कि सिर्फ पिछले एक साल में ही पन्ना टाइगर रिजर्व में 20 से अधिक बाघ शावकों ने जन्म लिया है। जिस तेजी से बाघों की तादाद बढ़ रही उसके मद्देनजर इनके बीच संघर्ष और अधिक तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व में व्यस्क-अर्धवयस्क बाघों की संख्या 60 से अधिक है। दिनांक 27 जुलाई को गहरीघाट परिक्षेत्र में ही नर बाघ का शव मिलने पर पन्ना टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के. एस. भदौरिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि फेस-4 की मॉनिटरिंग के दौरान पार्क के कोर क्षेत्र में 39 व्यस्क-अर्धवयस्क बाघ पाए गए हैं। जिसका घनत्व 6. 05 से 6.09 प्रति 100 वर्ग किलोमीटर है। जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से टाइगर रिजर्व की धारण क्षमता 30 बाघ की है। अर्थात कोर क्षेत्र में क्षमता से अधिक बाघों का रहवास होने से उनके बीच इलाके पर वर्चस्व लेकर आपसी संघर्ष बढ़ना स्वाभाविक है।

बाघों के सड़े-गले कंकाल मिलने उठते रहे सवाल

पन्ना टाइगर रिजर्व की गहरी घाट रेन्ज अंतर्गत कुछ दिन पूर्व संदिग्ध परिस्थितियों में मृत बाघ का शव मौत के कई दिन बाद इस स्थिति में मिला।
सर्वविदित है कि बाघों की मौत की लगातार सामने आ रहीं चिंताजनक घटनाओं के बीच पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन की पिछले कुछ समय से तीखी आलोचना हो रही है और कई गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। बाघ पी-213 की मौत को अलग रखकर देखें तो इसके पूर्व में 27 जुलाई को गहरीघाट वन परिक्षेत्र की मझौली बीट के वन कक्ष क्रमांक- पी-511 में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत हालत में सड़ा-गला शव मिला था। बाघ का शव कंकाल की स्थिति में मिलने से उसकी मृत्यु कई दिन पूर्व होने का अनुमान लगाया गया। इस घटना के करीब एक माह पूर्व 28 जून को रेडियो कॉलर वाली बाघिन पी-213 की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने का मामला प्रकाश में आया था। रेडियो कॉलर वाली ब्रीडिंग टाइगर का भी सड़-गल चुका अवशेष मिलने से बाघों की सुरक्षा और मॉनिटरिंग सिस्टम के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठे।
पन्ना टाइगर रिजर्व की सबसे ज्यादा चहेती रेडियो कॉलर वाली बाघिन पी- 213 का शव इस स्थिति में बरामद हुआ
बाघों की मौत आपसी संघर्ष में होने की पार्क प्रबंधन की आशंका को अगर सही मान भी लिया जाए तब भी यह सवाल उठता है कि बाघों की मॉनीटरिंग व निगरानी में तैनात मैदानी अमले को बाघ की मौत की खबर समय पर क्यों नहीं लगती ? उन्हें कई दिन बाद सड़े-गले कंकाल मिलते हैं, जिससे बाघों की मौत की वास्तविक वजह और कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। इसी तरह आपसी संघर्ष की पिछली चार घटनाओं में घायल होने वाले दूसरे बाघ का भी कोई पता नहीं चला। जिससे पूर्व में हुई बाघों की मौत को लेकर लोगों के मन में संदेह और बाघों की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल अब भी बरक़रार हैं। कुछ लोग तो अब खुलकर यह आशंका जताने लगे हैं कि पन्ना टाइगर रिजर्व में अगर बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का सिलसिला नहीं थमा तो पुनः पन्ना एक बार फिर बाघ विहीन हो सकता है।

हीरा खदान से आदिवासी युवक का दिनदहाड़े अपहरण, पांच अज्ञात बदमाशों ने सनसनीखेज़ वारदात को दिया अंजाम

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हीरा खदान में खनन कार्य करते श्रमिक। (फाइल फोटो)

* अपहृत युवक के द्वारा कुछ समय पूर्व बड़ा हीरा ब्लैक मार्केट में बेंचने की है चर्चा

* पन्ना जिले में इन दिनों हीरे का अवैध खनन और तस्करी खुलेआम जारी

शादिक खान, पन्ना। (www.radarnews.in) मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में आज एक आदिवासी युवक का पांच अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने दिनदहाड़े अपहरण कर लिया। इस सनसनीखेज वारदात को फिरौती वसूली के लिए अंजाम दिए जाने की चर्चाएं हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने सभी थानों को अलर्ट कर दिया। आनन-फानन में तगड़ी घेराबंदी और क्षेत्र की सर्चिंग कर कुछ घण्टे बाद ही अपहृत युवक को मुक्त कराने के साथ ही पुलिस ने अपहरणकर्ताओं को भी दबोंच लिया है, लेकिन इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने पन्ना जिले में कानून व्यवस्था की बेहद चिंताजनक स्थिति के साथ-साथ यहां पर खुलेआम जारी सफ़ेद हीरे के काले कारोबार की समस्या को भी चर्चा के केन्द्र में ला दिया है।
(फाइल फोटो)
अपहरण की यह हैरान करने वाली घटना पन्ना जिले के बृजपुर थाना अंतर्गत खिरवा गांव की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आदिवासी युवक कल्लू पुत्र रम्पत गौंड़ 30 वर्ष रविवार 9 अगस्त की सुबह गांव में ही स्थित अपनी हीरा खदान में खनन करवा रहा था तभी वहां पहुंचे पांच हथियारबंद अज्ञात बदमाश कल्लू गौंड़ को जबरदस्ती अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। इस सनसनीखेज घटना से अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। खदान में काम करने वाले श्रमिकों ने तुरंत इसकी सूचना कल्लू गौंड़ के बड़े भाई को दी। जबकि थाना प्रभारी बृजपुर सिद्धार्थ शर्मा के मुताबिक कल्लू गौंड़ का अपहरण सुबह उस समय हुआ जब वह अपनी पत्नी के साथ मजदूरी करने के लिए जा रहा था। गांव के बाहर पहाड़ी के समीप अज्ञात बदमाश उसे जबरदस्ती अपने साथ ले गए। उप निरीक्षक सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि अपह्रत की अपत्नी के द्वारा अपने जेठ को घटना क जानकारी दी गई। और फिर कल्लू गौंड़ के बड़े भाई ने डायल-100 पर कॉल करके पुलिस को सूचना दी।
थाना प्रभारी बृजपुर सिद्धार्थ शर्मा से जब यह पूंछा गया कि कल्लू का अपहरण क्या उसे हीरा मिलने की वजह से फिरौती वसूली के लिया किया गया है ? इस सवाल का जवाब देने से बचते हुए उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि यह विवेचना का विषय है, अपहृत के मिलने पर वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने बताया कि अपहृत को शीघ्र मुक्त कराने और बदमाशों को गिरफ्तार करने के लिए हमारी कोशिश जारी है। बहरहाल, अपहरण जैसे बेहद संवेदनशील और बड़े मामले में पुलिस की कहानी और क्षेत्र से आ रहीं ख़बरों में काफी विरोधाभास है। शायद इसकी वजह पन्ना में तेजी से फलफूल रहा हीरों की तस्करी का संगठित कारोबार है, जिससे अपहरण की वारदात का सीधा सम्बंध चर्चा का विषय बना हुआ है।

हीरा बेंचकर खरीदा था ट्रेक्टर और जीप

सांकेतिक फोटो।
अपहरण की वारदात को लेकर बृजपुर क्षेत्र में आमचर्चा है कि ग्राम खिरवा निवासी कल्लू गौंड़ पुत्र रम्पत गौंड़ 30 वर्ष पिछले काफी समय से हीरा खदान की खुदाई कर रहा है। कुछ समय पूर्व कथित तौर पर कल्लू को खदान में बड़े साइज का उज्जवल किस्म का एक बेशकीमती हीरा मिला था। जिसे उसके द्वारा क्षेत्र में सक्रिय हीरों की गैरकानूनी रूप से खरीददारी करने वाले हीरा कारोबारियों को बेंचने की चर्चा है। हीरा की बिक्री से मिली मोटी रकम से कल्लू ने ट्रेक्टर और बोलेरो जीप खरीद ली। बेहद गरीब पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले कल्लू के पास अचानक आई दौलत के चर्चे खिरवा गांव सहित पूरे क्षेत्र में है। दबी जुबान कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि कल्लू को एक बड़े हीरे के अलावा कुछ छोटे साइज के हीरे भी खदान में मिले हैं।
(फाइल फोटो)
बताते चलें कि कुछ दिन पूर्व पन्ना कोतवाली थाना के ग्राम सरकोहा निवासी हीरा खदान श्रमिक राजेश यादव पुत्र रामेश्वर यादव के साथ लड़कू यादव निवासी ग्राम पुरुषोत्तमपुर और नरेन्द्र यादव निवासी जनकपुर द्वारा सिर्फ इसलिए मारपीट की गई क्योंकि इन्हें पता चला था कि राजेश को हीरा मिला है। कथित तौर पर राजेश को मिला हीरा उससे छुड़ाने के लिए उक्त दोनों आरोपियों ने 30 जुलाई की दरम्यानी रात उसके ऊपर हमला किया था। राजेश के ऊपर अब तक दो बार हमला हो चुका है। इन चिंताजनक घटनाओं से पन्ना जिले में चल रहे सफ़ेद हीरे के काले कारोबार में अपराधियों की भूमिका और कानून व्यवस्था की बेहद लचर स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

ब्लैक मार्केट में बिकते हैं 90 फीसदी हीरे

सांकेतिक फोटो।
उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों से निकलने वाले हीरों को नियमानुसार पन्ना में स्थित हीरा कार्यालय में जमा करना पड़ता है। जिसकी नीलामी होने पर टैक्स की कुछ राशि काटकर शेष सम्पूर्ण राशि हीरा जमा करने वाले व्यक्ति को दी जाती है। लेकिन पन्ना में पिछले कई दशकों से सफ़ेद हीरों की तस्करी का काला कारोबार संगठित रूप से जारी है। इसमें हीरा कार्यालय के फील्ड स्टॉफ और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। मध्यप्रदेश शासन के खनिज साधन विभाग के सचिव नरेन्द्र सिंह परमार भी यह कह चुके हैं कि, पन्ना की उथली हीरा खदानों से निकलने वाले 90 फीसदी से अधिक हीरे ब्लैक मार्केट में बिकते हैं।
हीरा खदान में खनन कार्य करते श्रमिक। (फाइल फोटो)
महत्वपूर्ण बात यह है कि गैरकानूनी तरीके से हीरे खरीदी के इस खेल में पन्ना जिले के कतिपय हीरा व्यापारी, विभिन्न दलों के राजनेता, दबंग और आपराधिक तत्व शामिल हैं। अधिकाँश लोग तुरंत नगद राशि प्राप्त करने चक्कर में इन्हें हीरे बेंच देते हैं। वहीं अगर किसी कमजोर तबके के व्यक्ति को हीरा मिलने की भनक हीरा कारोबारियों को लगती है तो वे आपराधिक तत्वों या फिर अघोषित तौर पर पुलिस की मदद से येनकेन प्रकारेण उसे खरीदने या फिर हथियाने में कामयाब हो जाते हैं। पन्ना और बृजपुर क्षेत्र के कई रसूखदारों के नाम जनचर्चाओं में सुने जा सकते हैं जोकि इन तमाम हथकण्डों को अपनाकर अवैध तरीके से हीरे खरीदने का काम लम्बे समय से कर रहे हैं। दरअसल, ब्लैक मार्केट में बिकने वाले अधिकाँश हीरे वास्तविक कीमत से काफी कम में बिकते हैं, इसलिए एक डील में लाखों रुपये कमाने का यह काला कारोबार साल दर साल तेजी से फलफूल रहा है।

“होम आइसोलेशन” वाले मरीजों के मॉनीटरिंग की अच्छी व्यवस्था करें

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना नियंत्रण एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

* सब डिविजन स्तर पर भी क्राइसिस मैनेजमेंट समूह बनाए जाएं

* मुख्यमंत्री ने वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति और व्यवस्थाओं की समीक्षा की

भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बिना लक्षण वाले ऐसे मरीज जिनके घर में इसके लिए व्यवस्था है तथा जो घर पर ही रहना चाहते हैं, उनके ‘होम आइसोलेशन’ के दौरान उनके उपचार एवं देखभाल की मॉनीटरिंग की अच्छी व्यवस्था बनाएं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग गाइड लाइन तैयार कर प्रत्येक जिले को भिजवाए।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा है कि चूंकि अब कस्बों एवं गांवों में भी कोरोना संक्रमण हो रहा है अत: जिलों की ही तरह सब डिविजन स्तर पर भी क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप बनाए जाएं, जो वहां की परिस्थितियों के अनुरूप कोरोना नियंत्रण का कार्य करें। मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने बताया कि इस संबंध में जिलों को ‍विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति और व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कान्फ्रेंस में चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, डीजीपी विवेक जौहरी तथा अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

टेस्ट बढ़ाए जाएं

कटनी जिले की समीक्षा के दौरान पाया गया कि गत 7 दिनों में वहां पॉजिटिविटी दर 7.36 प्रतिशत आई है। जिले में वर्तमान में 221 पॉजीटिव व 77 एक्टिव मरीज हैं, 139 स्वस्थ होकर घर गए है तथा 5 मृत्यु हैं। जिले में टेस्टिंग कम है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि जिलें में टेस्टिंग बढ़ाई जाए तथा पूरी सर्तकता के साथ काम किया जाए।

अन्य राज्यों से आने वालों की स्क्रीनिंग अनिवार्य

सिंगरौली जिले की समीक्षा में पाया गया कि वहां गत 7 दिन में कोरोना के 91 नए प्रकरण आए हैं। जिला जेल में 27 प्रकरण आए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना स्वास्थ्य जाँच के कोई भी व्यक्ति जिले में न आए। जेल में भी क्वारेंटाइन हैल्थ स्क्रीनिंग आदि की समुचित व्यवस्था हो।

क्वारेंटाइन की गाइडलाइन फिर से जारी करें

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिए हे कि ‘क्वारेंटाइन’ एवं ‘आइसोलेशन’ किए जाने के संबंध में जिलों को गाइडलाइन दोबारा जारी करें। एसीएस हैल्थ ने बताया कि जो मरीज कोविड पॉजीटिव हैं, उनका परिस्थिति अनुसार ‘होम आइसोलेशन’ किया जा सकता है तथा जो संदिग्ध हैं, उनका ‘होम आइसोलेशन’ अथवा ‘संस्थागत क्वारेंटाइन’ किया जा सकता है।

इन 5 जिलों में सर्वाधिक नए मरीज

जिलेवार समीक्षा में पाया गया कि इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और मुरैना में सर्वाधिक क्रमश: 184,138,61,35 तथा 32 कोरोना प्रकरण पाए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इन सभी जिलों में विशेष ध्यान रखे जाने के निर्देश दिए।

प्रदेश में 1185 मरीज ‘होम आइसोलेशन’ में

अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य ने बताया कि प्रदेश में बिना लक्षण वाले 1185 कोरोना मरीजों को ‘होम आइसोलेशन’ में रखा गया है, इनमें से मुख्य रूप से इंदौर में 492, जबलपुर में 326, ग्वालियर में 113, भोपाल में 47 तथा शिवपुरी में 42 मरीजों को ‘होम आइसोलेशन’ में रखा गया है।

सतना एवं झाबुआ भी विशेष ध्यान दें

सतना एवं झाबुआ जिले की समीक्षा में वहां पॉजिटिविटी रेट अधिक पाए जाने पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए। झाबुआ जिले को टेस्टिंग बढ़ाए जाने के निर्देश दिए गए। वहां प्रति व्यक्ति 10 लाख टेस्टिंग 2 से 2.5 हजार है, जो कि काफी कम है।

गणेश उत्सव, जन्माष्टमी, मोहर्रम आदि त्यौहार सार्वजनिक रूप से नहीं मनाए जा सकेंगे

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोरोना नियंत्रण एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

* सीएम ने वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा की

* इस बार स्वतंत्रता दिवस सीमित रूप से मनाया जाएगा

* मध्यप्रदेश में कोरोना के 8715 एक्टिव केसेज

भोपाल। (www.radarnews.in) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में कोविड संक्रमण को देखते हुए आगामी गणेश उत्सव, मोहर्रम, जन्माष्टमी आदि त्यौहार सार्वजनिक रूप से नहीं मनाए जा सकेंगे। गणेश प्रतिमाएं सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं का जा सकेंगी तथा जन्माष्टमी एवं मोहर्रम पर जुलूस व ताजिए नहीं निकाले जा सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेशवासियों से कहा है कि वे घर पर ही इन त्यौहारों को मनाएं। पूजा स्थलों पर एक बार में 5 से अधिक व्यक्ति इकट्ठे नहीं हो। इस बार स्वतंत्रता दिवस भी सीमित रूप से मनाया जाएगा। कहीं भी भीड़ इकट्ठा होने की इजाजत नहीं होगी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बिना लक्षण वाले कोरोना मरीज, जो स्वेच्छा से घर पर ही रहना चाहते हैं तथा जिनके घर में पर्याप्त व्यवस्था है, के ‘होम आइसोलेशन’ को बढ़ावा दिया जाए। ‘होम आइसोलेशन’ के दौरान नियमित रूप से इलाज एवं मॉनीटरिंग की अच्छी व्यवस्था की जाए। भोपाल में अभी 42 व्यक्तियों को ‘होम आइसोलेशन’ में रखा गया है।
वीडियो कान्फ्रेंस में गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र, चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री विश्वास सारंग, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेन्द्र सिंह, मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान तथा अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।

रिकवरी रेट बढ़ी, मृत्यु दर कम हुई

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में रिकवरी रेट निरंतर बढ़ रही है तथा मृत्यु दर कम हो रही है, जो अच्छे संकेत हैं। प्रदेश की रिकवरी रेट 74.1 प्रतिशत हो गई है तथा मृत्यु दर 2.52 प्रतिशत रह गई है।

बिना हैल्थ स्क्रीनिंग के आना-जाना न हो

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंगरौली जिले की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि अन्य राज्यों की सीमा पार आने-जाने वाले व्यक्तियों की अनिवार्य रूप से हैल्थ स्क्रीनिंग की जाए। इसके बिना किसी को आने-जाने न दें। सिंगरौली में नए 20 प्रकरण आए हैं।

इंदौर में 145, भोपाल में 131 नए प्रकरण

जिला वार समीक्षा में पाया गया कि कोरोना के सर्वाधिक नए प्रकरण इंदौर में 145 मिले हैं। भोपाल में 131, जबलपुर में 63, खरगोन में 44, ग्वालियर में 26 तथा मुरैना में 24 नए मरीज पाए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इन जिलों में विशेष सावधानी रखे जाने के निर्देश दिए।

सभी अनिवार्य रूप से लगाएं मास्क

जबलपुर जिले की समीक्षा में बताया गया कि गत सप्ताह की पॉजिटिविटी रेट 9.35 प्रतिशत है। इस पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि लोगों में जागरूकता फैलाई जाए कि सभी अनिवार्य रूप से मास्क एवं सोशल डिस्टेंसिंग का प्रयोग करें। कलेक्टर ने बताया कि अभी 60 से 70 प्रतिशत व्यक्ति ही मास्क लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शत-प्रतिशत व्यक्ति मास्क लगाएं, जो नहीं लगाए उसके विरूद्ध जुर्माने की कार्रवाई करें।

प्रदेश में कोरोना के 8715 एक्टिव केसेज

एसीएस हैल्थ मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि प्रदेश में कोरोना के 734 नए मरीज आए हैं, 719 स्वस्थ होकर घर गए हैं तथा 16 मृत्यु हैं। इस प्रकार कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 8715 है। तुलनात्मक रूप से मध्यप्रदेश देश में एक्टिव प्रकरणों के हिसाब से 16वें स्थान पर है।